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राजस्थान: खुद को आधा दफन कर किसानों ने शुरू किया जमीन समाधि सत्याग्रह, 35 पुरुष और 16 महिलाएँ शामिल

राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास नींदड गाँव में किसानों ने जमीन समाधि सत्याग्रह प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने ये सत्याग्राह जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा उनकी भूमि के अधिग्रहण के प्रावधान के खिलाफ छेड़ा है। इसके तहत किसानों ने खुद को आधा जमीन में गाढ़ रखा है और अधिग्रहण प्रावधान पर मुआवजे की माँग कर रहे हैं।

जानकारी के लिए बता दें, इससे पहले जनवरी में भी इसी तरह का आँदोलन हुआ था। लेकिन आँदोलन शुरू होने के मात्र 4 दिन बाद उसे मान-मनौव्वल के जरिए स्थगित करवा दिया गया था। मगर, सोमवार से शुरू हुए इस सत्याग्रह में 51 किसान शामिल हैं। जिनमें 16 महिलाएँ और 35 पुरूष हैं और ये लोग किसी सरकार के अलावा किसी भी अन्य की बात को सुनने से इंकार कर रहे हैं।

किसानों की माँग है कि उन्हें 2014 में पारित भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा दिया जाए, जबकि जयपुर विकास प्राधिकारण इसके लिए तैयार नहीं है, क्योंकि भूमि अधिग्रहण पहले ही हो चुका था।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, संघर्ष समिति का नेतृत्व कर रहे नगेन्द्र सिंह शेखावत का कहना है कि पिछले 50 दिन से हम सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने कोई फैसला नहीं किया। इसलिए हमें फिर से सत्याग्रह के लिए बाध्य होना पड़ा है। अब हम जयपुर विकास प्राधिकरण से कोई वार्ता नहीं करेंगे, क्योंकि मुख्यमंत्री स्वयं सार्वजनिक मंच से जयपुर विकास प्राधिकरण को भ्रष्ट विभाग बता चुके हैं। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि सरकार जल्द हमारी पीड़ा समझेगी और वार्ता करेगी, लेकिन हम अपना हक लिए बिना सत्याग्रह समाप्त नहीं करेंगे।

तस्वीर साभार: पीटीआई

यहाँ बता दें कि राजस्थान में किसान काफी समय से भूमि अधिग्रहण की खिलाफत कर रहे हैं। मगर, सरकार की ओर से अभी तक किसानों की माँगों पर सुनवाई नहीं हुई। इस कारण सरकार के प्रति उनके मन में भारी रोष है और वह मुआवजे से भी संतुष्ट नहीं हैं। इसी कारण वह खुद को जमीन में आधा गाढ़ कर समाधि सत्याग्रह कर रहे हैं।

2000 साल पुराने मंदिर के परिसर को उलूग खान ने किया था खंडित, खुदाई में मिले लैंप और मूर्तियाँ

दक्षिण-पूर्वी भारत के तमिलनाडु में कावेरी और कोल्लिडम नदी के संगम यानी श्रीरंगम आइलैंड पर 2000 साल पुराने रंगनाथ स्वामी मंदिर का परिसर स्थित है। जिसका प्रमुख भाग आज भी उपयोग में हैं। मगर इसके कई पुराने भाग मिट्टी के अंदर दफन हो चुके हैं। जिसका कारण सिर्फ़ वहाँ सदियों से आने वाली बाढ़ नहीं है। बल्कि एक मुस्लिम शासक का भाई भी है, जिसने इस परिसर को एक समय तबाह किया था।

14 वीं सदी में मुस्लिम शासक अलाउदद्दिन खिलजी के भाई अलमस बेग उर्फ उलूग खान ने इस मंदिर के परिसर पर अपना कहर बरपाया था। मगर, अफसोस इस तथ्य के बारे में किसी को भी बहुत कम पता चल पाया। इंटरनेट पर भी देखें तो इसके बारे में कम जानकारी मिलती है। लेकिन, अभी पिछले साल भूवैज्ञानिकों द्वारा यहाँ बाढ़ तलछट परतों के ज्ञान (Knowledge of flood sediment layers ) के साथ निर्देशित साइट पर हुई खुदाई के दौरान उलूग खान का नाम चर्चा में आया। इसके अलावा इस खुदाई से ये भी पता चला कि आखिर उस समय मंदिर के परिसर से क्या-क्या गायब हुआ था।

पेरियार विश्वविद्यालय के भूविज्ञानी रामकुमार सहित अन्य शोधकर्ताओं ने उलूग खान द्वारा नष्ट किए गए मंदिर के कुछ हिस्सों को उजागर किया और साथ ही कुछ लटकन लैंपों और देवता गोपालकृष्णन और उनकी पत्नी की मूर्तियों का पता लगाया।

भूभौतिकीय सर्वेक्षण तकनीकों का उपयोग करते हुए, वैज्ञानिकों ने यह भी पहचान की कि वे धार्मिक विद्वान और शिक्षक श्री मनावाला मामुनिगल की समाधि को क्या मानते हैं। जिन्होंने 14 शताब्दी में उलूग खान द्वारा खंडित मंदिर परिसर को पंद्रहवीं शताब्दी में फिर से बहाल किया।

रंगनाथ मंदिर की खासियत

गौरतलब है कि रंगनाथ स्वामी मंदिर सृष्टि के पालनहार नारायण भगवान के विष्णु के स्वरूप रंगनाथ भगवान का है। भगवान रंगनाथ को विष्णु का ही अवतार माना जाता है। यह मंदिर वैसे तो तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम में कावेरी नदी के तट पर स्थित है। लेकिन यहाँ की खासियत है कि यहाँ पर 1000 साल पुरानी ममी भी संरक्षित है। यहाँ के भव्यता और विष्णु भगवान के रंगनाथ रूप के दर्शन के लिए भारत से ही नहीं, बल्कि विश्वभर से लाखों की संख्या से सैलानी आते हैं और यहाँ की खूबसूरती देख मंत्रमुग्ध रह जाते हैं।

महिलाओं के लिए अपने सोशल मीडिया हैंडल्स छोड़ रहे हैं PM मोदी: खुल गया राज़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (फरवरी 2, 2020) की रात एक बड़ी घोषणा कर के सबको सकते में डाल दिया था। पीएम मोदी ने घोषणा की थी कि वो आगामी रविवार (मार्च 8, 2020) को सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को छोड़ देंगे। इनमें फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब और इंस्टाग्राम शामिल है। पीएम मोदी के इस ट्वीट से अटकलों का बाजार गर्म हो गया था और सभी इस सवाल के जवाब को तलाशने में लग गए थे कि आख़िर प्रधानमंत्री सोशल मीडिया को क्यों अलविदा कहना चाहते हैं? अब उन्होंने इस बात का जवाब दे दिया है। पीएम मोदी की उस घोषणा के पीछे का राज उन्होंने ख़ुद खोला है।

8 मार्च को ‘महिला दिवस’ भी है। इस अवसर पर पीएम मोदी ‘She Inspires Us’ हैशटैग अभियान शुरू कर रहे हैं, जिसका अर्थ है- वो हमें प्रेरणा देती हैं। जाहिर यही, यहाँ ‘वो’ का तात्पर्य महिलाओं से है। दरअसल, पीएम मोदी सोशल मीडिया छोड़ेंगे ज़रूर लेकिन सिर्फ़ एक दिन के लिए और उस दिन उनके हैंडल्स महिलाएँ चलाएँगी। यानी, महिलाओं के पास ये मौका है कि वो देश के प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल्स एक दिन के लिए ऑपरेट कर सकती हैं। रविवार को पीएम मोदी के सोशल मीडिया एकाउंट्स का स्वामित्व महिलाओं के पास होगा।

आइए, अब हम आपको समझाते हैं कि ये सब होगा कैसे? पीएम ने सवाल पूछा है कि क्या आप वो महिला हैं, जिनकी जिंदगी और संघर्ष से दुनिया को प्रेरणा मिल सकती है? या फिर क्या आप अपने आसपास की ऐसी महिलाओं को जानते हैं, जिनकी जिंदगी पूरे विश्व के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकती है? अगर इसका जवाब हाँ में है तो आपको ‘She Inspires Us’ के हैशटैग के साथ उन महिलाओं की कहानियों को साझा करना होगा। ये फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम- तीनों ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए लागू होगा।

इन सबके अलावा ये अभियान यूट्यूब पर भी चलेगा। आप इसी हैशटैग के साथ एक वीडियो शूट कर सकते हैं और उसे यूट्यब पर अपलोड कर सकते हैं। इसके बाद इन सभी कहानियों में से कुछ ऐसी होंगी, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया एकाउंट्स को टेकओवर करने के लिए चुना जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया से अपील की है कि वो सभी इस अभियान का हिस्सा बनें।

UP में छिपने के लिए भागा था शाहरुख, पकड़ा गया: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में 8 राउंड फायरिंग कर आया था चर्चा में

दिल्ली के जाफराबाद में हिंसा का चेहरा रहे मोहम्मद शाहरुख को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शाहरुख ने दंगे के दौरान दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल दीपक दहिया पर पिस्टल तानी थी और 8 राउंड फायरिंग की थी। दीपक पर पिस्टल तानने और फायरिंग करने का विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। विडियो वायरल होने के बाद वह अपने परिवार के साथ फरार हो गया था। शाहरुख को उत्तर प्रदेश की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है।

बता दें कि दिल्ली हिंसा के दौरान 24 फरवरी को जाफराबाद इलाके में एक शख्स ने 8 राउंड फायरिंग की थी। इस शख्स ने फायरिंग के दौरान एक पुलिस कर्मी पर पिस्टल भी तान दिया था। फायरिंग करते हुए यह शख्स फिर भीड़ में गायब हो गया था। इस शख्स की पहचान शाहरुख के रूप में हुई थी। पुलिस काफी दिनों से इसकी तलाश में थी। स्पेशल सेल को उसे पकड़ने के लिए जिम्मेदारी दी गई थी। मंगलवार (मार्च 3, 2020) को क्राइम ब्रांच को सफलता मिली।

शाहरूख की तलाश में पुलिस दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश में स्पेशल सेल छापेमारी कर रही थी। शाहरुख की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी। 6 दिनों से स्पेशल सेल उत्तर प्रदेश के बरेली के कुछ कस्बों के आसपास डेरा डाले हुई थी। पंजाब, मुजफ्फरनगर व कैराना में भी सेल की टीमें शाहरुख के संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी थी। शाहरुख के साथ ही उसका परिवार भी फरार था और उसके घर के बाहर ताला लटका हुआ है। शाहरुख के परिवार में एक बड़ा भाई और माँ-बाप हैं, लेकिन फिलहाल पूरा परिवार लापता है, जिनके बारे में कोई कुछ नहीं बता पा रहा। इसके अलावा छापेमारी के दौरान शाहरुख के घर से बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामान की बरामदगी हुई थी।

बताया जा रहा था कि शाहरुख और ताहिर हुसैन के भाई अभी हाल ही में सिरसा में एक साथ देखे गए थे। सिरसा के परौरा गाँव के लोगों ने दावा किया था कि ताहिर हुसैन का भाई और शूटर शाहरुख एक साथ कुछ मिनट के लिए एक शादी में दिखाए पड़े थे, हालाँकि दिल्ली पुलिस ने इस दावे का खंडन कर दिया था। दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में व्यस्त होने का फायदा उठा शाहरुख पुलिस को चकमा दे निकल भागा था, लेकिन अब वो पुलिस के हत्थे चढ़ गया है।

’20 विधायक हमारी पार्टी में लाओ और CM बन जाओ’: कॉन्ग्रेसी विधायक ने दिया BJP नेता को ऑफर

गुजरात में कॉन्ग्रेस के भीतर सत्ता के लालच की लार टपक रही है और वो दिखने भी लगी है। ताजा जानकारी के अनुसार कॉन्ग्रेस के विधायक वीरजी थुम्मार ने सोमवार (मार्च 2, 2020) को गुजरात विधानसभा में उस समय हलचल मचा दी, जब उन्होंने खुलेआम अपने इस ख्वाहिश को जाहिर किया और प्रदेश में अपनी सरकार बनाने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्य के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल को मुख्यमंत्री पद का ऑफर दे डाला।

कॉन्ग्रेस विधायक ने उपमुख्यमंत्री पटेल से कहा कि यदि वे 20 विधायकों के साथ उनकी पार्टी में शामिल हो जाएँ, तो कॉन्ग्रेस उन्हें डिप्टी सीएम से सीएम बना देगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कॉन्ग्रेस विधायक ने पटेल को सरेआम ये ऑफर देने के बाद इस पर अपनी सफाई भी दी।

उन्होंने कहा मैंने पटेल को अपनी व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर ऑफर दिया है। यहाँ बता दें कि पटेल ने पिछले हफ्ते एक बयान में कहा था कि वह अकेले लड़ रहे हैं। जिसको आधार बनाकर थुम्मार ने कहा, “मैंने सदन में नितिन भाई से कहा कि वह अकेले नहीं है। कॉन्ग्रेस उनके साथ है।”

गौरतलब है कि सदन में जिस समय थुम्मार ने नितिन पटेल को यह ऑफर दिया, उस समय उपमुख्यमंत्री खुद वहाँ मौजूद थे लेकिन उन्होंने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बाद में थुम्मार ने पत्रकारों के सामने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने यह ऑफर अपनी व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर दिया है।

कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा, “यदि पटेल हमारे साथ आते हैं तो मैं अपनी पार्टी को उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए मनाऊँगा।” साथ ही ये भी कहा कि अगर नितिन पार्टी में आते हैं तो उन्हें पार्टी की विचारधारा माननी होगी।

बता दें कि गुजरात भाजपा अध्यक्ष जीतू वघानी ने थुम्मार के बयान को एक शरारत बताया है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस ने पटेल के बयान की गलत व्याख्या की और अब वह राज्य के लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस इस तरह के बयान देकर शरारत कर रही है क्योंकि वे पिछले 27 सालों से सत्ता से बाहर हैं और वापसी करने के लिए बेताब हैं।

दिल्ली दंगों पर कपिल मिश्रा से अजीत भारती की बातचीत | Ajeet Bharti with Kapil Mishra on Delhi Riots

दिल्ली में हुए दंगों के लिए जिस तरह से तमाम वामपंथी मीडिया कपिल मिश्रा को जिम्मेदार बताने पर तुला है, वो बताता है कि फर्जी नैरेटिव गढ़ना इनकी प्रवृत्ति रही है और ये कट्टरपंथियों के कुकृत्यों पे पर्दा डालने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। दंगे से ठीक एक दिन पहले ताहिर हुसैन की छत पर एक ट्रक पत्थरों का जमा होना, फैसल फारुक के राजधानी स्कूल की छत पर भारी मात्रा में एसिड, पेट्रोल बम, बम बनाने का सामान जमा होना ये बताता है कि इसकी योजना काफी पहले से चल रही थी और इन लोगों ने हिन्दुओं की हत्या करने और उनके घरों-दुकानों को जलाने का मन पहले से बना लिया था।

दिल्ली दंगों पर बात करते हुए कपिल मिश्रा ने कहा कि ये दंगे कट्टरपंथियों के हिंसा करने के दशकों के ट्रैक रिकॉर्ड को बताते हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से सिर्फ सड़क को खुलवाने की बात की क्योंकि इससे वहाँ के स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही थी। उन्होंने सवाल किया कि आखिर इसमें ऐसी कौन सी बात थी, जिसकी वजह से शाहरुख बंदूक लेकर गलियों में घूमने लगा, आईबी के अंकित शर्मा को चार सौ बार चाकुओं से गोदा गया और कॉन्स्टेबल रतन लाल को इरादतन घेरकर मार डाला गया।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें।

तड़पते मरीज ने इलाज के लिए केजरीवाल से माँगी मदद तो CM साब ने कहा- ‘सरकारी अस्पताल में क्यों नहीं गए?’

दिल्ली में बीते दिनों हुए हिंदू विरोधी दंगे के बाद भले ही अब स्थिति शांत है, मगर अभी भी माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। दंगों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 46 पहुँच चुकी है। इनमें 38 मौतें गुरुतेग बहादुर अस्पताल और 3 लोक नायक अस्पताल में हुई हैं। इसके साथ ही हर दिन किसी न किसी नाले से शव बरामद किया जा रहा है। सोमवार (मार्च 2, 2020) को भी भागीरथी विहार के नाले से एक शव बरामद हुआ। बताया जा रहा है कि अलग-अलग इलाकों के नालों से अब तक 8 लाशें बरामद की जा चुकी है।

इस बीच दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का दंगे में घायल मरीजों के प्रति उदासीन रवैया सामने आया है। एडवोकेट पूनम कौशिक ने सोमवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जन स्वास्थ्य अभियान की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि दंगे में गोली का शिकार हुए एक घायल ने जब सीएम से मदद की गुहार लगाई तो वो उसे नसीहत देकर आगे निकल गए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूनम कौशिक ने बताया कि 25 फरवरी की रात वो मुख्यमंत्री आवास पर ही मौजूद थीं। उस समय उनके आवास पर कविता कृष्णन, वृंदा करात और फरहाद भी थीं। वो बताती हैं कि उस समय रात के तकरीबन 8 बज रहे होंगे, सभी लोग केजरीवाल के साथ थे, तभी अल हिंद अस्पताल से उनके पास एक घायल मरीज के इलाज में मदद के लिए फोन आया। मरीज को दंगे के दौरान गोली लगी थी। 

अस्पताल ने जब उस तड़पते मरीज की मदद के लिए मुख्यमंत्री से डॉक्टरों की टीम भेजने के लिए कहा तो उन्होंने मदद करने की बजाए नसीहत दे डाली कि सरकारी अस्पताल क्यों नहीं गए? उन्होंने साधारण लहजे में कहा, “उन्हें सरकारी अस्पताल जाना चाहिए।” पूनम ने बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री के इस रवैये से काफी हैरानी हुई, क्योंकि उन्हें राजधानी के सीएम से इस तरह के जवाब की उम्मीद नहीं थी।

पूनम को लगा था कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सचिव सहित तमाम विभागों को वहाँ भेज सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वो आगे कहती हैं कि जब उनसे दोबारा इसके लिए बोला गया तो उन्होंने कहा, “अच्छा ठीक है हम भी बहुत चिंतित हैं, चलो देखते हैं।” ये कहकर वो वापस चले गए। पूनम ने तो यहाँ तक कह दिया कि दिल्ली की हिंसा में केजरीवाल सरकार का रवैया “सरोकार हीन सरकार” जैसा देखने को मिला है।

पूनम ने बताया कि जब सीएम ने सुनवाई नहीं की तो वकीलों ने मिलकर हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एस मुरलीधर और तलवंत सिंह से मदद माँगी, जिसके बाद उन्होंने आधी रात में ही पुलिस को रास्ता साफ कर बड़े अस्पताल में इलाज कराने के आदेश दिए। पूनम का कहना था कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें अरविंद केजरीवाल सरकार का ये रुख देखना पड़ेगा, जो काफी निंदनीय है।

…अब निकला 8वाँ शव: दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों में नालों से लाशें मिलने का सिलसिला जारी

‘संघी केजरीवाल की खाकी चड्डी दिख गई’: अंकित शर्मा के परिवार को मुआवजा मिलने से लिबरल गिरोह खफा

‘बता…तुझ पर पेट्रोल डालें या गाड़ियों पर’ जब दंगाइयों ने रखी हिन्दू दुकानदार की जान बख्शने की शर्त: ग्राउंड रिपोर्ट

‘फैक्ट चेक’ करने वाले ने जब फैलाया फेक न्यूज, प्रोपेगेंडा परोसने के लिए Alt News को पड़ रही गाली

भाजपा को बदनाम करने के लिए ऑल्ट न्यूज का नया कारनामा उजागर हुआ है। इस कारनामे को जानने के बाद आपको भी एक बार फिर साफ होगा कि ऑल्ट न्यूज का काम फैक्ट चेक आदि करने का नहीं, बल्कि भाजपा के ख़िलाफ़ केवल प्रोपेगेंडा चलाने का है। दरअसल, सोशल मीडिया पर कुछ दिन पहले अनऑफिशियल: सुब्रमण्यम स्वामी नाम के फेसबुक पेज पर एक वीडियो डाली गई। वीडियो में दावा किया गया कि भाजपा कार्यकर्ता ईवीएम मशीनों की चोरी कर रहे हैं। अब आप सोचेंगे इससे ऑल्ट न्यूज का क्या कनेक्शन? तो बता दें कि अनऑफिशियल: सुब्रमण्यम स्वामी नाम के फेसबुक पेज को ऑल्ट न्यूज के को-फॉउंडर द्वारा संचालित किया जाता है। इसलिए इस फेक न्यूज को प्रचारित-प्रसारित करने का सीधा संबंध ऑल्ट न्यूज से ही है।

पेज पर शेयर किए गए फेसबुक पोस्ट पर वैसे तो अभी तक 510 लाइक और 243 शेयर आ चुके हैं। लेकिन वीडियो अब यहाँ मौजूद नहीं है। शायद हकीकत खुलने के बाद इसे हटाया गया। जानकारी के अनुसार, इस वीडियो को एनएस न्यूज ने 8 फरवरी को अपने यूट्यूब पर अपलोड किया था। साथ ही इस पर लिखा – “दिल्ली इलेक्शन के बाद भाजपा कार्यकर्ता ईवीएम चोरी करते पकड़े गए। देखिए, किस तरह इलेक्शन के बाद ईवीएम मशीन रिप्लेस की जा रही है। इनका स्थान बदला जा रहा है।”

जो विडियो हटा लिया गया है, उसमें एक शख्स ईवीएम के गायब होने का दावा कर रहा था। यह भी कहा जा रहा था कि दिल्ली के कबीरनगर की गली नंबर 4 पर SVN पब्लिक स्कूल के इम्प्लॉयज को भाजपा के साथ मिलकर ईवीएम चोरी करते पकड़ा गया। इसके अलावा वीडियो में ईवीएम हटाए जाने की बात को भी स्पष्ट तौर पर बोला गया था। लेकिन, अब हकीकत क्या है? आइए जानें… दरअसल, ईवीएम चोरी का दावा करने वाला यह वीडियो फर्जी है और इसे झूठे दावों के साथ जनता के समक्ष पेश किया गया। दिल्ली के बाबरपुर में किसी भाजपा कार्यकर्ता ने स्ट्रॉन्ग रूम से ईवीएम मशीन नहीं चुराई और न ही किसी ने उनकी मदद की।

अगर हम टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट ‘Delhi polls 2020: Replacement poll equipment led to confusion, says EC’ देंखें, तो स्पष्ट होगा कि उन दोनों मशीनों को केवल रिप्लेसमेंट के लिहाज से रखा गया था। उनका इस्तेमाल नहीं हुआ था। इसके अलावा इस मामले पर कन्फ्यूजन होने के कारण मुख्य चुनाव अधिकारी ने भी उस समय अपनी सफाई पेश की थी। उन्होंने उन दो ईवीएम पर सफाई पेश करते हुए कहा कि बस में रिजर्व ईवीएम थीं, जिनका वोटिंग में इस्तेमाल नहीं हुआ था। उन्होंने लोगों द्वारा बस को घेरने समेत उसके बाद क्या-क्या हुआ, उसका तफसील से ब्यौरा भी दिया था। आयोग ने साफ कहा था कि लोगों को गलतफहमी हुई थी, मगर अब सभी पक्ष संतुष्ट हैं।

फेक न्यूज फैलाते फिर पकड़ा गया ऑल्ट न्यूज

जानकारी के लिए बता दें कि चीफ इलेक्शन अधिकारी रणबीर सिंह का ये बयान लगभग हर मीडिया हाउस ने उस समय कवर किया था। मगर फिर भी ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक ने अपने पेज पर इस झूठ को फैलते रहने दिया। उन्होंने इस न्यूज का कोई फैक्ट चेक तक नहीं किया, न ही इस पर सवाल उठाए, बल्कि ऑल्ट न्यूज ने तो इसका इस्तेमाल भाजपा के ख़िलाफ़ प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किया और वीडियो शेयर करते हुए लिखा था – भाजपा अब हमें और हैरान नहीं कर सकती।

अमित शाह की रैली में क्यों गई? BJP महिला नेता के घर पर फायरिंग, पार्टी कार्यालय को जला डाला

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर से सत्तारुढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस की गुंडागर्दी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक राज्य के बीरभूम जिले के इल्लमबाजार क्षेत्र में टीएमसी के गुंडों ने भाजपा के कार्यालय में तोड़-फोड़ की और फिर उसे आग के हवाले कर दिया। बीजेपी के एक स्थानीय नेता का कहना है कि टीएमसी के गुंडों ने यह हमला रविवार (मार्च 1, 2020) को उस समय किया था, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्य में CAA के समर्थन में रैली करने पहुँचे थे।

बीजेपी नेता गोपाल सरकार ने टीएमसी पर आरोप लगाते हुए कहा कि उस समय उनकी पार्टी के नेता कार्यालय के आस-पास न होकर रैली में गए थे। इसी दौरान उन लोगों ने मौके का फायदा उठाकर पहले कार्यालय पर हमला किया और फिर उसमें आग लगा दी। भाजपा का आरोप है कि इस घटना को तृणमूल कॉन्ग्रेस के उपद्रवियों ने अंजाम दिया है, क्योंकि राज्य में भाजपा की संगठनात्मक शक्ति बढ़ रही है, और टीएमसी इससे भयभीत है।

इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में भाजपा की एक महिला नेता के घर पर फायरिंग होने की खबर है। बताया जा रहा है कि सोमवार (मार्च 2, 2020) को बीजेपी नेता अर्चना विश्वास के घर पर टीएमसी के गुंडों ने दो राउंड फायरिंग की। भाजपा का दावा है कि उनके घर के ऊपर टीएमसी के गुंडों ने इसलिए फायरिंग की, क्योंकि उन्होंने 1 मार्च को अमित शाह की रैली में हिस्सा लिया था।

इसके अलावा टीएमसी की गुंडागर्दी की एक और खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक सीएए के समर्थन में 1 मार्च को कोलकाता के शहीद मीनार मैदान में हुई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सभा से लौट रहे भाजपा कार्यकताओं पर हमले हुए। भाजपा का आरोप है कि महानगर के हेस्टिंग्स व हुगली जिले में शाह की सभा से लौट रहे भाजपा कार्यकर्ताओं पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया। उनका कहना है कि इन घटनाओं में दर्जन भर कार्यकर्ता जख्मी हुए हैं। इस घटना में भाजपा की ओर से थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में एक बीजेपी नेता नारायण विश्वास की निर्मम हत्या कर दी गई थी। भाजपा ने हत्या का आरोप टीएमसी पर लगाया था। गुंडों ने पहले मृतक को गोली मारी गई और जब वो जख्मी होकर नीचे गिर गए, तो हमलावरों ने धारदार हथियार से उनकी हत्या कर दी।

‘उनके’ डर से बच्चों के साथ घर में दुबके रहते हैं, रात भर नींद नहीं आती: महिलाओं ने सुनाया अपना दर्द – ग्राउंड रिपोर्ट

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में महिलाओं के साथ भी ज्यादतियाँ की गईं। करावल नगर में हिन्दू समाज की बेटियों के साथ अश्लीलता की गई। शिव विहार में महिलाएँ अपने घरों में दुबकी बैठी हुई थीं क्योंकि अगर दंगाई इस्लामी भीड़ वहाँ स्थित ‘प्राचीन हनुमान मंदिर’ के बगल वाले नाले को पार कर जाती तो उनके साथ बहुत बुरा हो सकता था। अपने घर की बहू-बेटियों को बचाने के लिए हिन्दू समाज के लोग ईंट-पत्थर खाते रहे, जबकि फैसल फ़ारूक़ के राजधानी स्कूल के ऊपर से पत्थरबाजी, बमबारी और गोलीबारी होती रही। मंदिर को बचाने के लिए युवाओं ने पूरा जोर लगाया।

इसी क्रम में सैकड़ों घायल हुए। ऑपइंडिया की टीम ग्राउंड पर पहुँची और हमने वहाँ कई महिलाओं से बातचीत कर उनके मन की बात जानी। कई पुरुषों ने कैमरे के सामने सच्चाई बताने से इनकार कर दिया (उनका डर जायज भी है) लेकिन महिलाओं ने हिम्मत दिखाते हुए हमसे बातचीत की और खुल कर अपने अनुभव तो साझा किए ही, दंगाई भीड़ की क्रूरता को भी सामने रखा। ग़रीब घर की एक महिला ने बताया कि हिन्दू लोगों की कहीं और कोई नहीं सुनता।

एक अन्य दलित महिला ने बताया कि समुदाय विशेष के लोग आकर कहते हैं कि उनके घरों को आग के हवाले कर देंगे लेकिन कोई उन पर कार्रवाई नहीं करता। महिलाओं ने बताया कि अगर उनके घर के पुरुष बाहर डटे नहीं रहते तो दंगाई भीड़ उनके घरों में घुस जाती। एक अन्य महिला ने बताया कि उस क्षेत्र के समुदाय विशेष को सब पता था कि क्या होने वाला है जबकि हिन्दू अनजान थे। महिला ने हमसे बातचीत करते हुए कई बड़े खुलासे किए। उन्होंने ऑपइंडिया की टीम से कहा:

“समुदाय विशेष के लोग अपने बच्चों को स्कूल से पहले ही लेकर चले गए थे। हमें काफ़ी देर से ये चीजें पता चलीं। आख़िर इन्हें कैसे पता चला कि कुछ होने वाला है? ऐसा इसीलिए, क्योंकि सब इनकी ही सोची-समझी साजिश थी। राजधानी स्कूल में दिखावटी तोड़फोड़ हुई है। असली नुकसान तो हिन्दुओं को हुआ है। हम सब बहुत डरी हुई हैं। हमें रात-रात भर नींद नहीं आती है। वो लोग छोटे-छोटे पर पथराव करते हैं। हम निहत्थे लोग हैं। हमारे घर में डंडे भी हों तो हम उसे कचरा समझ के फेंक देते हैं। उनके पास काफ़ी सारे हथियार होते हैं। हमारे पास अपने बच्चों को लेकर घरों में दुबके रहने के अलावा कोई चारा नहीं है।”

ऑपइंडिया की टीम से बातचीत करती शिव विहार, प्रेम नगर और प्रेम विहार की महिलाएँ

ये महिलाएँ शिव विहार, प्रेम नगर, प्रेम विहार और उसके आसपास के इलाक़ों की हैं। उन्होंने बताया कि हिन्दुओं के घर के लोग रोजमर्रा के काम और अपनी ड्यूटी के कारण दिन भर घर से बाहर रहते हैं और अगर ऐसे समय में दंगाई भीड़ हमला करती है तो वो भला उनका सामना कैसे करेंगी? महिलाओं ने कहा कि ये सब सोची-समझी साज़िश थी, ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान उपद्रव किया जा सके।

महिलाओं ने पुलिस की भी आलोचना की। उन्होंने बताया कि जब मजहबी भीड़ दंगे कर रही थी, तब पुलिस कह रही थी कि उनके पास हथियार इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है। लोग पुलिस ने नाराज़ दिखे। वहाँ कुछ युवा भी उपस्थित थे और उन सबने बताया कि समुदाय विशेष के लोगों ने अपने घरों में अब भी हथियार जमा कर के रखे हैं, जिसकी जाँच होनी चाहिए नहीं तो आगे और भी खतरा बढ़ सकता है।

इन महिलाओं की सरकार व प्रशासन से माँग है कि उनकी सुरक्षा के तगड़े बंदोबस्त किए जाएँ। उन्हें उम्मीद है कि जब मीडिया में ये ख़बर आएगी तो उनकी आवाज़ सुनी जाएगी और उन्हें दंगाइयों के भय से मुक्ति दिलाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा। हालाँकि, उस क्षेत्र में अभी भी तनाव व्याप्त है और अफवाहों का बाजार गर्म है। हिन्दू अपनी जली हुई दुकानों की मरम्मत में लगे हुए हैं।

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