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शादी के 1 हफ्ते पहले मारी गोली, बिलखते भाई ने बताया- 500 मुस्लिम दंगाइयों ने बोला था धावा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों की रूह कॅंपा देने वाली घटनाएँ लगातार सामने आ रही है। पीड़ित हिन्दू विभिन्न माध्यमों से अपना दर्द बयाँ कर रहे हैं। ट्विटर वायरल हुए एक विडियो में विकास अपनी आपबीती सुना रहा है।

विकास ने बताया कि वो घोंडा विधानसभा क्षेत्र का निवासी है। 2 मार्च को उसके भाई की शादी होनी थी। ऐसे में, जाहिर है कि उनके घर में उत्सव का माहौल होगा और शादी की तैयारियाँ चल रही होंगी। विकास भी शादी का कार्ड बाँटने में लगे हुए थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि उनके बड़े भाई को गोली मार दी गई है। वो भागे-भागे अपने घर पहुँचे। विकास ने बताया कि उन पर और उनके पड़ोसियों पर भी मुस्लिमों ने हमला किया।

‘Know The Nation’ के अनुसार विकास जैसे ही अपने घर पहुँचे, 400-500 की संख्या में मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ वहाँ पर पहुँची और हमला कर दिया। विकास और उनके पड़ोसियों ने मुस्लिम भीड़ को समझाया कि वो लोग एक ही इलाक़े के रहने वाले हैं और आगे भी उन्हें साथ रहना है, इसलिए उन्हें ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए। बावजूद दंगाई फायरिंग करते रहे। उन्होंने जमकर पथराव किया। विकास ने बताया कि उन्हें, उनके भाई और उनके पड़ोसियों को इसलिए निशाना बनाया गया, क्योंकि वो हिन्दू हैं।

दरअसल, दंगाई भीड़ उसी इलाक़े में स्थित शिव मंदिर पर हमला करने आई थी। जब वो मंदिर तक नहीं पहुँच सके तो उन्होंने कुछ हिन्दुओं को देखा और उन पर ही धावा बोल दिया। उन्होंने भारी संख्या में पत्थर जुटा रखा थे, जिस कारण हिन्दुओं को भाग कर अपने घर में छिपना पड़ा। सबसे बड़ी बात कि दंगाई भीड़ पूरी तैयारी के साथ आई थी और उन्होंने हेलमेट पहन रखे थे। कइयों ने अपना चेहरा छिपा रखा था। विकास ने बताया कि जब मुस्लिम भीड़ वापस चली गई, तब घायल हिन्दुओं को अस्पताल ले जाया जा सका।

दिल्ली दंगा ग्राउंड रिपोर्ट: छतों से एसिड बरसा रही थीं मुस्लिम औरतें, गुलेल से दाग रहे थे पेट्रोल बम

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के करावल नगर का शिव विहार उन इलाक़ों में से एक है जहाँ हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान सबसे ज़्यादा तबाही बरपाई गई। हिन्दुओं के घरों को निशाना बनाया गया। एक हिन्दू का स्कूल जला दिया गया और उनकी दुकानों को तो ख़ाक ही कर दिया गया। एक कुम्हार की महीनों की मेहनत को तबाह कर दिया गया। वो बेचारा रोते-बिलखते हुए अपना कसूर पूछ रहा था। वहीं एक छोले-भठूरे वाले की दुकान में उसकी चूल्हे और बेंच सहित अन्य चीजों को जला दिया गया। ऐसे कई ग़रीबों की दुकानों को ज्यादा नुकसान पहुँचा है। ऑपइंडिया की टीम ने मौके पर पहुँच कर सारी स्थिति समझी।

सबसे पहले हम शिव विहार स्थित ‘भगवान शिव चौक’ पहुँचे। यहाँ ईंट-पत्थर इस तरह बिखरे हुए थे, जैसे वो दंगों का केंद्रबिंदु रहा हो। वहाँ अब सुरक्षा-व्यवस्था के अब तगड़े बंदोबस्त हैं। इसके बाद हम आगे शिव विहार चौक पहुँचे, जहाँ मुस्लिम की राजधानी स्कूल से चारों तरफ हमले किए गए। हिन्दू की डीआरपी स्कूल को ख़ाक में मिला दिया गया। राजधानी स्कूल में क़रीब 300 दंगाई गुंडे जमा थे। चौक पर एक व्यक्ति ने बताया कि कि रोड के उस तरफ़ मुस्लिमों के घर हैं, जो महफूज हैं। यह व्यक्ति अपनी जली हुई दुकान देखना आया था।

शिव विहार में हिन्दुओं की दुकानों की स्थिति: दंगाई भीड़ के कहर का सबूत

उसने जो कहा वह सही था। चौक के पास की सड़क के एक तरफ मुस्लिमों के घर सलामत थे, दूसरी तरह हिन्दुओं की दुकानें ख़ाक में मिली हुई थीं। हमने वहाँ सुरक्षा बलों को चाय-नाश्ता करा रहे एक व्यक्ति से इसका काऱण पूछा। उन्होंने बताया कि हमले इन्हीं मुस्लिमों के घर से हुए थे। मुस्लिम महिलाएँ भी अपनी छतों पर खड़े होकर पुलिस बलों पर एसिड से हमले कर रही थीं।

एक बुजुर्ग ने बताया कि मुस्लिम भीड़ के इस दंगे के जवाब में कई हिन्दुओं ने भी आत्मरक्षा में उन्हें खदेड़ने का प्रयास किया, लेकिन वो राजधानी स्कूल की छत पर काफ़ी ऊँचाई पर थे, जहाँ से हिन्दू ही अधिकतर निशाना बने। दिनेश मुंशी को सिर में गोली लगी, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इसके बावजूद हिन्दुओं ने कई मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षित उनके घरों तक पहुँचाया, जो दोनों पक्षों के संघर्ष में फँस गई थी। इधर हिन्दू सबकी मदद करते रहे, उधर मुस्लिम भीड़ गुलेल से पत्थर फेंकती रही और पेट्रोल बम बरसाती रही।

इलाक़े में अब भी डर का माहौल है क्योंकि कोई भी कैमरे के सामने आकर गुनहगारों के बारे में बोलने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि उन्हें इसी मोहल्ले में रहना है, इसलिए वे आज तो कैमरे के सामने आकर सच बोल देंगे। लेकिन कल को कोई अनहोनी हुई तो इस बार की तरह ही फिर कोई बचाने नहीं आएगा। उस समय पुलिस क्या कर रही थी? इस सवाल के जवाब में लोगों ने बताया कि उस वक़्त पुलिस भी वहाँ मौजूद थी लेकिन वो बार-बार यही कह रही थी कि उन्हें गोली चलाने का आदेश नहीं है।

ऑपइंडिया की टीम ने कई विडियो और फोटो जुटाए हैं, जो इस रिपोर्ट में संलग्न हैं। तबाही के इस मंजर में हिन्दुओं का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। इससे उबरने में उन्हें काफ़ी समय लग जाएगा। लोग अभी भी घरों में दुबके हुए हैं।

बहू-बेटियों की इज्जत बचाने के लिए हिन्दू खा रहे थे गोली और पत्थर: शिव विहार ग्राउंड रिपोर्ट

जो हिंदू लड़की करती थी दुआ सलाम, उसी की शादी को जला कर राख कर डाला: चाँद बाग ग्राउंड रिपोर्ट

‘हमारी बेटियों को नंगा करके भेजा दंगाइयों ने, कपड़े उतारकर अश्लील हरकतें की’ – करावल नगर ग्राउंड रिपोर्ट

वे 20-25,000 के बीच थे, हम केवल 200: जख्मी ACP ने सुनाई उस दिन की आपबीती जब बलिदान हुए थे रतनलाल

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के चाँदबाग इलाके में दंगाई भीड़ की चपेट में आये एसीपी अनुज कुमार अब सामने आए हैं। हिंसा में जख्मी हुए एसीपी (गोकुलपुरी) अनुज ने बताया कि उस दिन डीसीपी अमित शर्मा भी उन्हीं के सामने जख्मी हुए थे। हिंसा में बलिदान हुए हेड कांस्टेबल रतनलाल भी उन्हीं के साथ थे।

अनुज कुमार ने बताया, “24 फरवरी को मैं शाहदरा के डीसीपी अमित शर्मा को जख्मी होने के बाद अस्पताल ले जा रहा था। इस दौरान भी प्रदर्शनकारी पथराव कर रहे थे और मुझे भी सिर पर चोट लगी। हमें नहीं पता था कि रतनलाल को गोली लग गई थी। हम रतनलाल को जीटीबी अस्पताल ले गए, जहाँ उसे बचाया नहीं किया जा सका और फिर बाद में हम डीसीपी को मैक्स अस्पताल में ले गए।”

दो दिन पहले अस्पताल से छुट्टी पाने वाले एसीपी ने कहा, “हमें निर्देश दिया गया था कि गाजियाबाद की सीमा के साथ सिग्नेचर ब्रिज को जोड़ने वाली सड़क को बंद न किया जाए। लेकिन धीरे-धीरे और लगातार भीड़ बढ़ने लगी और इसमें महिला और पुरुष दोनों ही शामिल थे। वे लगभग 20,000 से 25,000 के बीच थे, जबकि हम केवल 200 थे।” उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि उन्होंने सड़क को बंद करने की योजना बनाई थी जैसा कि उन्होंने पहले किया था।

अनुज कुमार ने बताया कि प्रदर्शन कर रहे लोग सर्विस लेन से सड़क पर आ गए थे। फिर एक अफवाह फैली कि पुलिस की गोलियों से बच्चे मर गए हैं। इसने हिंसा को और भी ज्यादा भड़का दिया। इस अफवाह से भीड़ और जमा हो गई। 15 और 20 मीटर का फासला था। फिर पत्थरबाजी शुरू हो गई। 

एसीपी ने बताया कि जब चाँदबाग बाजार इलाके में सीएए विरोधी भीड़ सड़क को घेर रही थी, तभी भीड़ हावी हो गई और पथराव शुरू हो गया था। इसी दौरान डीसीपी शाहदरा अमित शर्मा घायल हो गए। एसीपी ने बताया, “डीसीपी अमित शर्मा के मुँह से खून निकल रहा था। आँखें ऊपर की ओर हो चुकी थी। भीड़ 5-10 मीटर पर थी। हम पर पथराव हो रहा था। फिर मैंने जब डीसीपी को देखा तो आशाहीन हो गया। जैसे-तैसे मैंने खुद को सॅंभाला और डीसीपी को डिवाइडर पर लगी ग्रिल के उस पार किया।”

अनुज कुमार ने बताया कि भीड़ और पुलिस फोर्स के बीच में बेहद कम दूरी थी, इसलिए टियर गैस का भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। फिर अचानक भीड़ हिंसक हो गई। फायरिंग करने पर भीड़ में महिलाओं और बच्चों को गोली लगने की आशंका थी। उपद्रवियों की पहचान मुश्किल थी। अनुज ने बताया कि उपद्रवियों ने इसी बात का फायदा उठाया था। पहले पत्थर और रॉड से हमला किया और फिर फायरिंग भी शुरू कर दी।

बता दें कि कि रविवार (फरवरी 23, 2020) से दिल्ली की सड़कों पर शुरू हुए हिंदू विरोधी दंगों में लगभग 42 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 200 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में सुरक्षा बलों के करीब 70 लोग शामिल हैं। मृतकों में दिल्ली पुलिस का हेड कांस्टेबल रतन लाल और आईबी के अंकित शर्मा भी शामिल हैं।

कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ गिरफ्तार: भड़का रही थी दंगे, माँग रही थी आज़ादी

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में एक के बाद एक कर के कई नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। आम आदमी पार्टी के विधायक अमनतुल्लाह ख़ान पर घृणास्पद भाषण देने का आरोप लगा है। आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन की इमारत तो दंगाइयों का अड्डा ही बनी हुई थी। मुस्तफाबाद के विधायक हाजी यूनुस पर भी उनके ही क्षेत्र के लोगों ने दंगों में संलिप्त होने के आरोप लगाए हैं। अब कॉन्ग्रेस पार्टी की पूर्व निगम पार्षद इशरत जहाँ का नाम दंगे भड़काने में सामने आया है।

इशरत जहाँ लगातार भड़काऊ भाषण देकर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के मुस्लिमों को भड़का रही थीं। दंगे भड़काने के आरोप में उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 14 दिन के लिए उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के खजुरी ख़ास क्षेत्र में इशरत पिछले 2 महीने से लगातार सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही थी। उसके साथ कई समर्थक भी थे, जो लगातार लोगों को भड़काने के काम में लगे हुए थे। पुलिस ने दिल्ली में हुए दंगों में 200 से भी अधिक लोगों को प्रिवेंटिव कस्टडी में लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है।

इशरत जहाँ ने अदालत में जमानत याचिका दाखिल की थी, जिसे ख़ारिज कर दिया गया है। दिल्ली की एक अदालत में जज नवीन गुप्ता ने इशरत जहाँ उर्फ़ पिंकी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इशरत को बुधवार (फरवरी 26, 2020) को पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। पहले उसे हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद उसकी गिरफ्तारी हुई।

‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ सहित खालिद, समीर प्रधान खुरेजी, सलीम, शरीफ, विक्रम ठाकुर, आज़ाद उर्फ भूरा, इशाक, हाजी इकबाल, हाशिम, समीर, बिलाल, यामीन कूलर वाला, साबू अंसारी व अन्य लोगों को आरोपित बनाया गया है। इनमें से कुछ को पुलिस ने अपने शिकंजे में ले लिया है, वहीं कुछ की तलाश अब भी जारी है। इनके ख़िलाफ़ दंगा और हत्या का प्रयास सहित कई मामले दर्ज किए गए हैं।

बता दें कि इशरत जहाँ ख़ुद एक वकील भी हैं। उसने ख़ुद अपनी जमानत अर्जी तैयार की थी, लेकिन वो ख़ारिज हो गई। इशरत जहाँ ने भड़काऊ भाषण देते हुए कहा था- “हम मर भी जाएँ लेकिन यहाँ से नहीं हटेंगे। हम आज़ादी लेकर रहेंगे।” इशरत के समर्थक खालिद ने भीड़ से पुलिस पर जम कर पत्थरबाजी करने को कहा था। साबू अंसारी उस भीड़ का नेतृत्व कर रहा था, जिसने पुलिस को खदेड़ते हुए पत्थरबाजी की।

खुद को भारत में सुरक्षित महसूस करता हूँ, भारतीयों से CAA का कोई संबंध नहीं: अदनान सामी

हाल ही में पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए बॉलीवुड सिंगर अदनान सामी ने इंडिया आइडियाज कॉन्क्लेव 2020 में शिरकत की। यहाँ उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह भारत में खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। साथ ही कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का भारत के लोगों से कोई संबंध नहीं है।

अदनान से पूछा गया कि आमिर खान कहते हैं कि वो भारत में सुरक्षित महसूस नहीं करते, क्या आप सुरक्षित महसूस करते हैं और CAA को लेकर आपकी क्या राय है? इस पर अदनान सामी ने कहा, “मुस्लिम होने के नाते मैं भारत में सुरक्षित महसूस करता हूँ। यह भारत में असुरक्षित महसूस करने वाले हर व्यक्ति के प्रश्न का उत्तर है।”

बता दें कि साल 2015 में एक्टर आमिर खान ने एक बयान देते हुए कहा था कि उनकी पत्नी को भारत में रहना सेफ नहीं लगता है। आमिर के इस बयान से सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया था। इसके जवाब में अदनान ने कहा, “मैं यहाँ इस बात का जवाब देने नहीं आया हूँ कि आमिर खान ने क्या कहा। जहाँ तक मेरी बात है, मैं एक मुस्लिम हूँ। मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ। मैं मानवता का सम्मान करता हूँ चाहे यह किसी भी रूप में हो। मेरे पास बहुत से ऑप्शंस थे, लेकिन मुझे लगा कि मुझे भारत आना चाहिए और एक मुस्लिम के तौर पर मैं यह नहीं कह सकता हूँ कि मैं भारत में कितना सुरक्षित महसूस करता हूँ।”

इसके साथ ही अदनान ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून लोगों को भारत की नागरिकता दिलाने में मदद करेगा और इसका भारत में अभी रह रहे लोगों के साथ कोई संबंध नहीं है। अदनान से हाल में दिल्ली में हुई हिंसा बारे में इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि जल्द ही वापस शांति होगी। एक म्यूजिशन होने के नाते मैं हमेशा प्यार और शांति की बात करता हूँ। मैं सभी से निवेदन करता हूँ कि शांति बनाए रखें। मैं निवेदन करता हूँ कि लोगों की जिंदगी का सम्मान करें और ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिसका हल बातचीत से न निकले। मैं चाहता हूँ कि देश में शांति बनी रहे।”

इससे पहले अदनान ने CAA का किया समर्थन करते हुए कहा था, “मैं ये जरूर कह सकता हूँ कि मैंने अपनी आँखों से देखा है कि वहाँ पर अल्पसंख्यकों को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मैंने इस्लामाबाद में देखा है कि किस तरह से वहाँ सोसायटी दो गुटों में बँटी हैं। मैं एक सेक्टर में था जहाँ मैंने देखा की सोसाइटी के उस पार एक स्लम था। मैंने किसी से पूछा कि सोसायटी के उस पार कौन रहता है, तो मुझे बताया गया कि उधर क्रिश्चियन कम्युनिटी के लोग रहते हैं।”

अदनान ने आगे कहा था, “मेरे लिए ये सुनना काफी दुखद था। उन्हें उचित सम्मान और आजादी नहीं मिलती जिसे बाकी लोग इंज्वॉय करते हैं। मैं खुश हूँ कि सीएए के आने से अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे लोगों को मदद मिलेगी।”

JNU छात्र संघ ने दंगा ‘पीड़ितो’ को कैंपस में बुलाया, प्रशासन ने चेताया

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने विश्वविद्यालय के छात्र संघ (JNUSU) को परिसर में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के कथित पीड़ितों को आश्रय देने के खिलाफ चेतावनी दी है। इस संबंध में जारी नोटिस में जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने ऐसे किसी भी प्रयास में शामिल छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। नोटिस में कहा गया है कि JNUSU को जेएनयू परिसर को आश्रय गृह बनाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

साथ ही रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने यह भी कहा है कि जेएनयू प्रशासन को कैंपस निवासियों से कई फोन आए थे, जिसमें कहा गया था कि वो JNUSU द्वारा उठाए गए इस कदम के कारण काफी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं विश्वविद्यालय के वीसी जगदीश कुमार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि छात्रों को सलाह दी है कि कृप्या ऐसी खुली छूट न दें। ऐसा करने की बजाय वे परिसर से आवश्यक वस्तुएँ लेकर लोगों की सहायता कर सकते हैं।

वहीं धुर वामपंथी संगठनों के प्रभाव वाले छात्र संघ ने दावा किया है कि JNUSU कार्यालय उनके दायरे में आता है और कहा, “जेएनयू हमेशा लोगों की जरूरत के लिए खुला रहा है। हमने 1984 के दंगा पीड़ितों को आश्रय भी दिया था।”

JNUSU ने एक पोस्ट में दावा किया कि सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के अपने अभियान के तहत स्वयंसेवकों को बुलाया था। इस पोस्टर में कहा गया था कि शहर में कई बचाव दल काम कर रहे हैं। पोस्टर में कहा गया था, “हमारा कैंपस/JNUSU ऑफिस उन सभी लोगों के लिए खुला है, जिन्हें आश्रय की जरूरत है।” पोस्टर में चार JNUSU सेंट्रल पैनल मेंबर्स के नाम और नंबर भी थे। ये नाम हैं- आइशी घोष, साकेत मून, सतीश चंद्र और दानिश।

उल्लेखनीय है कि रविवार (फरवरी 23, 2020) से दिल्ली की सड़कों पर शुरू हुए हिंदू विरोधी दंगों में लगभग 42 लोगों की मौत हो गई, जबकि और 200 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में सुरक्षा बलों के करीब 70 लोग शामिल हैं। मृतकों में दिल्ली पुुलिस का हेड कांस्टेबल रतनलाल और आईबी के अधिकारी अंकित शर्मा भी शामिल हैं। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मनदीप सिंह रंधावा ने शुक्रवार को बताया कि दंगों के सिलसिले में 123 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है जिसमें 23 गोली चलाने के मामलों की है। उन्होंने बताया कि दंगाइयों की पहचान कर उन्हें शिकंजे में लेने का काम तेजी से जारी है। अब तक 630 लोग हिरासत में लिए गए हैं या गिरफ्तार किए गए हैं।

मजहबी भीड़ ने फूँक दी दुकान, ‘श्याम चाय वाले’ की मदद के लिए आएँ आगे, ये रहे बैंक डिटेल्स

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान मजहबी भीड़ ने करावल नगर इलाके में मौजूद ‘श्याम टी स्टॉल’ को निशाना बनाया। लूटपाट के बाद दुकान को आग के हवाले कर दिया। इस दुकान के मालिक श्याम साहनी सब कुछ देख रहे थे, लेकिन चाहकर भी कुछ कर न सके। इस घटना के बाद से श्याम का परिवार, जो हर रोज सुबह से शाम तक इलाके के न जाने कितने लोगों के दिन की शुरुआत एक कप मीठी चाय के साथ कराता था, आज उसी परिवार को एक कप चाय नसीब नहीं हो रही है। श्याम अपने बीबी-बच्चों की जान को बचाने के लिए एक घर से दूसरे घरों में छिपते हुए बिता रहे हैं।

श्याम साहनी दशकों पहले रोजी-रोटी की तलाश में बिहार से दिल्ली आए थे। करावल नगर में ‘श्याम टी स्टॉल’ के नाम से दुकान खोली। लेकिन, श्याम ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जिन लोगों को वह अपने हाथों से मिठास भरी चाय बनाकर पिलाते हैं एक दिन उन्हीं में से कुछ लोग दुकान को आग लगा देंगे।

सोमवार (24 फरवरी 2020) को हिंसा भड़कने के बाद श्याम अपनी दुकान बंद ही कर रहे थे कि दंगाइयों की भीड़ अचानक से पत्थरबाजी करती हुई आई। दंगाइयों ने पहले तो जमकर लूटपाट और तोड़फोड़ की। इसके बाद उन्हीं की आँखों के सामने दंगाई मजहबी भीड़ ने चाय की दुकान को आग के हवाले कर दिया। श्याम किसी तरह अपनी जान बचाकर भागे। इसके बाद डर से श्याम ने किराए का मकान खाली कर दिया। बीबी-बच्चों के साथ एक परिचित के घर में पनाह ले राखी है। जब ऑपइंडिया की टीम मौके पर पहुँची तो आस-पास के लोगों ने बताया था, “चार दिन तक श्याम ने कपड़े बदलना तो दूर कुछ खाया तक नहीं। उसकी आँखों के सामने उसका सब कुछ बर्बाद हो गया।”

ताहिर हुसैन की छत से चले पेट्रोल बम में बर्बाद हुई ‘श्याम टी स्टॉल’

दरअसल बिहार वैशाली के चंदपुरा पातेपुर गांव के रहने वाले श्याम साहनी, पुत्र रामचन्द्र साहनी करीब 33 साल पहले (1987) दिल्ली में नौकरी करने के लिए आए थे। इसके बाद वह बच्चों को भी दिल्ली ले गए। श्याम के चार छोटे-छोटे बच्चे नीरज कुमार, धीरज कुमार, सन्नी और रोशन हैं, जो कि दंगों के बाद से बेहद डरे हुए हैं। इस घटना के बाद श्याम के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। श्याम का परिवार इन दिनों दूसरे के घरों में माँगकर खाना खाने को मजबूर है। अब ऐसे में बड़ा सवाल ये खड़ा होता कि इस हालात में श्याम अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे कर पाएगा?

श्याम का परिवार रुंधे गले से बस एक ही बात कहता है कि “अब मेरा गुजारा कैसे होगा बाबू जी”। श्याम के मुताबिक उसकी दुकान में करीब पाँच लाख रुपए का नुकसान हुआ है। ऑपइंडिया ने श्याम को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। श्याम के बैंक अकाउंट की पुष्टि के बाद सारी डिटेल्स नीचे दे रहे हैं। इस मुश्किल वक़्त में दंगा पीड़ित श्याम साहनी के परिवार की मदद के लिए आगे आएँ।

Shyam Sahni
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Ac no- 44630100001671
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न अमन की खोखली बातों से बुझेगी ये आग, न जीते-जी भरेंगे घाव: बारूद के ढेर को चिंगारी से बचाने की मुश्किल

दंगे के तुरंत बाद अमन की बात वो करते हैं जिन्हें दंगों के अपराधों को छुपाना होता है। जिस तरह दंगे एक जघन्य अपराध हैं, ठीक उसी तरह दंगों की तैयारी करना भी। दंगों का जख्म अमन की खोखली बातों से नहीं भरता। दंगों का जख्म केवल इंसाफ से भरता है। जिसने अपना बच्चा खोया, जिसने अपना संबंधी खोया, जिसने अपने जीवन भर की कमाई खोई, जिसने अपने सारे व्यवसाय को सबेरे जला हुआ पाया, उनसे फकत अमन की बात करना बेमानी है।

ये अपराध इंसाफ मॉंगता है। उन कारणों और उन लोगों की पहचान मॉंगता है जिन्होंने इस दंगे के लिए इतनी तैयारी की थी। उन लोगों की पहचान माँगता है जिन्होंने हज़ारों की दंगाई भीड़ इकट्ठा करके दो रात तक अलग अलग मोहल्लों में छापामार दंगा करके इंसानियत को शर्मसार किया।

वजह कई हैं पर फिलहाल एक वजह साफ स्पष्ट दिख रही है। ट्रंप और विदेशी मीडिया के सामने पाक प्रायोजित हिंसा, जिसे भारत के ही कुछ लोगों ने उन लोगों से पैसा या कुछ और प्रलोभन दे कर फैलाया। हमें इस दंगे की तह में जाना ही चाहिए। इस कैंसर को खत्म करना ही चाहिए। और बंद होनी चाहिए अमन की खोखली बातें। दो महीने से ज्यादा हो गए तब तो नहीं हुआ था दिल्ली के उस हिस्से में रास्ता रोको, दिल्ली रोको आंदोलन। अचानक से सब होना ट्रंप के आते ही और वो भी इस तैयारी के साथ, बस एक ही बात बताता है कि दुश्मन किस तरह से हमारे देश के अंदर अपनी वैश्विक राजनीति हेतु सक्षम है। क्या इस खतरे के साथ हम हमेशा रहने को सक्षम हैं?
क्या अनपढ़, क्या पढ़ा-लिखा, क्या वामपंथी विचारधारा वाले अदूरदर्शी नाटककार सब सम्मिलित हैं, भारत की राजव्यवस्था को तोड़ने में और बहाना बना रहे हैं संविधान की रक्षा का।

ये जितने भी लोग संविधान की रक्षा के नाम पर आज रोड ब्लॉक करने की और आगजनी करके सरकार को सबक सिखाने की कोशिश कर रहे हैं, याद रखिएगा इनका तो घोषित छद्म उद्देश्य ही संविधान और लोकतंत्र की हत्या है। जिस भी दिन ये केंद्रीय सत्ता पर आरूढ़ हुए या क्षमतावान हुए तो इनका पहला प्रहार संविधान पर ही होगा।

दो गुट हैं, एक भारत की व्यवस्था को चीनी माओवादी बनाना चाहता है और दूसरा भारत को चूस-चूस के शरिया की ओर ले जाना चाहता है।

वैश्विक स्तर पर एक-दूसरे को फूटी आँख ना सुहाने वाले भारत के दो दुश्मन देखिए कैसे एक हुए हैं- भारत को बर्बाद करने के नाम पर। दोनो एक-दूसरे को ज्यादा चालाक समझ रहे हैं। दुनिया में कई वामपंथी विचार वाली निरंकुश सरकारें हैं। साथ ही साथ कई इस्लामी मुल्क भी। एक भी ऐसा उदाहरण नहीं मिलेगा जहाँ या तो वामपंथी मुल्क में इस्लामी राजनैतिक विचार की आज़ादी हो और ना ही एक भी ऐसा इस्लामी मुल्क जहाँ वामपंथियों को अपना दफ्तर खोलने की अनुमति हो। फिर भी भारत में इनका याराना देखिए।

मूर्खों को ये नहीं पता कि लोकतंत्र की दुहाई दे कर ये इसी लोकगणराज्य की हत्या कर अपने लोगों के लिए केवल एक देश चाहते हैं। इन्हें भारत की विविधता और बहुल सोच वाली संस्कृति से कोई सरोकार नहीं। क्या ऐसे लोग जो अपनी बात मनवाने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को छोड़ कर सड़क जाम कर, दंगे भड़का कर समाज में भय पैदा कर सरकार को दवाब में डाल रहे हैं, क्या वे लोग भारत के लोकतांत्रिक अधिकारों के लायक भी हैं। क्या ऐसे लोग भारत के नागरिक कहलाने के काबिल हैं। सोचना होगा हमें। क्या भारत में जन्मा हर व्यक्ति जिसकी सोच अब गैर भारतीय हो गई हो, भारत की विविधता और संवैधानिक प्रक्रियाओं से इतर हो गई हो, को भारत का नागरिक कहा जा सकता है। कुछ ऐसे लोग जो रोग (rouge) हो गए हैं से नागरिकता छीन ही नहीं लेनी चाहिए।

संवैधानिक व्यवस्था में सबको विरोध का अधिकार है। लेकिन सरकार के द्वारा प्रक्रिया अंतर्गत बनाए कानून के विरोध में महीने-दो महीने रोड जाम करने का अधिकार किसी को है क्या? क्या सड़क जाम कर और दंगा भड़का कर हम किसी कानून को वापस करवा सकते हैं? बिल्कुल नहीं। अगर आप सरकार के किसी कदम से असहमत हैं तो जनजागरण कीजिए, चुनाव लड़िए, अगले चुनाव में जीत कर आइए, कानून बदल दीजिए। कोर्ट में सरकार के खिलाफ मुकदमा लड़िए। विरोध का वो तरीका और वो स्थान चुनिए जहाँ से भारत के अन्य सामान्य नागरिकों को दिक्कत नहीं हो, वैसे लोग क्यों भुगतें जो आपकी तरह नासमझ नहीं हैं या जिन्हें आपके आंदोलन से कोई सरोकार नहीं है। समाज में तनाव का माहौल बनेगा तो कहीं न कहीं फूटेगा ही।

ये आग जो भड़की है ये अमन की खोखली बातों से मुझे तो बुझती नहीं दिखती। दंगों के समय हुआ अपराध त्वरित न्याय माँगता है। कुछ लोगों ने अपने दूरगामी राजनैतिक वैश्विक और क्षेत्रीय मंसूबों के खातिर अपने ही लोगों और मोहल्ले का नुकसान कराया ही, साथ ही साथ अपने पड़ोसियों को भी ऐसा घाव दे दिया है जो शायद ही उनके जीते जी भर पाए। वो सारे मोहल्ले अब काफी लंबे समय तक दंगे के भय और अविश्वास के साथ जिएंगे। ऐसा अविश्वास जो या तो इंसाफ से खत्म होगा या इंतकाम से। सरकार के लिए बड़ी मुश्किल घड़ी है। इस बारूद के ढ़ेर को चिंगारी से कैसे बचाया जाए।

जो लोग समाज में राजनीति के इस बारूद का इस्तेमाल करते हैं, जो दंगों में आपराधिक गुटों का सहयोग लेते हैं, जो इसकी तैयारी महीनों करते हैं। पूरे के पूरे समाज को एक कानून के नाम पर झूठ बोल-बोल कर गुमराह करते हैं। गिद्धों की तरह अपनी कलम से, अपनी कला से, लाशों के बिछाए जाने की पटकथा लिखते हैं, उनलोगों के साथ क्या करना चाहिए। हम सभी के मन में ये प्रश्न हैं। क्या हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया इस तरह के छद्म तरीके से लड़े जा रहे युद्ध के लिए तैयार है? क्या हमारी प्रकिया ऐसे अपराधियों को ढूंढ कर सजा देने के काबिल है?

याद रखियेगा पाकिस्तान का आईडिया सारे जहाँ से अच्छा लिखने वाले अल्लामा इकबाल ने ही दिया था। उन्होंने ही सबसे पहले कहा था भारत में एक पाक स्थान है जो कि एक धर्म विशेष के आधार पर चलता है। यानी कि भारत की बहुलता वादी सोच, बहुईश्वरवाद से भिन्न है और साथ नहीं रह सकता। नतीजा हम सब जानते हैं। ये वही सोच है जो फिर से सर उठा रही है। जाते-जाते एक बात और, अरब की क्रांति जो कि वहाँ के निरंकुश राजाओं के विरुद्ध हुई थी, अब वो विशुद्ध रूप से इस्लामी रूप ले चुकी है और ISIS को जन्म दे चुकी है। इस हेतु किसी भी आंदोलन के मूल स्वभाव और उद्देश्यों को समझे बिना उसे अपने जीवन का हिस्सा मत बनाइए। हर तरह का डिसेंट या बागी विचार जरूरी नहीं कि सही ही हो। कुछ बागी तेवर काफी खतरनाक होते हैं। जहरीले नाग की तरह, इनको मारने के बाद इनका फन भी कुचलना जरूरी होता है।

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पुलवामा के फिदायीन आदिल अहमद डार को शाकिर ने दी थी पनाह, NIA ने किया गिरफ्तार

पुलवामा आतंकी हमला मामले की जाँच कर रही राष्‍ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को बड़ी कामयाबी मिली है। NIA ने शुक्रवार (फरवरी 28, 2020) को इस मामले में शाकिर बशीर मागरे को गिरफ्तार किया। शाकिर जैश-ए-मोहम्‍मद का ओवर ग्राउंड वर्कर है। शाकिर ने ही आत्‍मघाती हमलावर आदिल अहमद डार को अपने यहाँ पनाह दी थी और हमले के लिए जरूरी मदद उपलब्ध कराए थे।

आरोपित शाकिर ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने साल 2018 के अंत से फरवरी 2019 तक अपने घर में आदिल अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक को शरण दी थी। इतना ही नहीं शाकिर ने इन दोनों आतंकियों को विस्‍फोटक IED जमा करने में मदद की थी। फिलहाल शाकिर को पूछताछ के लिए 15 दिन की NIA की कस्टडी में भेज दिया गया है।

पूछताछ में शाकिर ने बताया कि उसकी दुकान लेथपुरा पुल के पास स्थित है। 2018 में जैश के पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद उमर फारूक ने शाकिर की मुलाकात डार से कराई। इसके बाद शाकिर जैश के लिए फुलटाइम काम करने लगा। पुलवामा हमले की साजिश भी 2018 में रची गई। इसके बाद आदिल और फारूक, शाकिर के घर रहने लगे। शाकिर ने कार में रखे विस्फोटक को तैयार किया। लेथपोरा स्थित दुकान से वह सीआरपीएफ काफिले की मूवमेंट पर नजर रखता था। बीते साल जनवरी में उसने मूवमेंट की जानकारी आदिल व फारूक को दी थी।

उसने फारूक के कहने पर जनवरी 2019 में जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर सीआरपीएफ के काफिले के आने जाने की टोह लेनी शुरू कर दी थी और इसके बारे में आतंकवादियों को सूचित करता था। इसके अलावा जिस मारुति ईको कार का इस्तेमाल किया गया था उसमें आईडी फिट करने में भी उसकी भूमिका थी। शाकिर ने फरवरी के पहले सप्ताह में ईको कार में अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रो ग्लिसरीन और आरडीएक्स लगाया गया। कार को पूरी तरह से मोडिफाई किया गया ताकि किसी को शक न हो।

शाकिर ने यह भी बताया कि विस्फोटकों से भरी मारुति ईको कार जिसका इस्तेमाल सीआरपीएफ के काफिले पर हमला करने के लिए किया गया था, उसे वह ही चलाकर घटनास्थल से लगभग 500 मीटर पहले तक लेकर गया था। हमले की जगह से 500 मीटर दूर वह गाड़ी से उतर गया और इसके बाद आदिल अहमद डार उस गाड़ी को चलाकर गया और हमले को अंजाम दिया।

बता दें कि दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ में बुनिगाम गाँव में सुरक्षाबलों द्वारा चलाए गए तलाशी अभियान में एक आतंकी ठिकाने का पता चला है। पुलिस का कहना है कि बुनिगाम गाँव से विश्वसनीय सूत्रों से यह सूचना मिली कि इलाके में कुछ संदिग्ध लोग देखे गए हैं। सूचना पर तुरंत अमल करते हुए पुलिस, सीआरपीएफ और सेना के जवान गाँव में पहुँच गए। उन्होंने पूरे इलाके की घेराबंदी कर आतंकियों की तलाश में अभियान छेड़ दिया। अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने जब आतंकियों को ढूँढने के लिए घरों की तलाशी लेना शुरू किया तो इस दौरान नसीर अहमद मंटू नाम के शख्स के मकान से आतंकियों द्वारा छिपाए गए हथियार व गोला-बारूद बरामद हुआ।

उल्लेखनीय है कि पुलवामा में 14 फरवरी 2019 को आतंकवादियों ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था और इस हमले में 40 सीआरपीएफ जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। कई अन्य घायल हो गए थे। 

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कन्हैया कुमार और उसके साथियों पर चलेगा देशद्रोह का केस: टुकड़े-टुकड़े गैंग पर कसा शिकंजा

जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार की मुश्किलें बढ़ गई है। हाल में गृह राज्य बिहार में उन्हें लगातार भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। जन गण मन यात्रा के तहत राज्य के जिस शहर में भी कन्हैया कुमार गए वहीं उन्हें विरोध झेलना पड़ा। उन पर अंडे, मोबिल, पत्थर, चप्पल तक फेंके गए।

अब 2016 में जेएनयू परिसर में लगे देश विरोधी नारे के मामलों में भी उन पर और उनके साथियों पर शिंकजा कस गया है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कन्हैया और अन्य पर देशद्रोह का केस चलाने को मॅंजूरी दे दी है। केजरीवाल सरकार सालभर से ज्यादा समय से इससे संबंधित फाइल पर कुंडली मारे बैठी थी। शुक्रवार (फरवरी 28, 2020) को भारत विरोधी नारे लगाने और नफरत भड़काने के आरोप में देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मँजूरी दी गई।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सीपीआई नेता कन्हैया कुमार ने ट्वीट किया, “दिल्ली सरकार को सेडिशन केस की परमिशन देने के लिए धन्यवाद। दिल्ली पुलिस और सरकारी वकीलों से आग्रह है कि इस केस को अब गंभीरता से लिया जाए, फॉस्ट ट्रैक कोर्ट में स्पीडी ट्रायल हो और TV वाली ‘आपकी अदालत’ की जगह कानून की अदालत में न्याय सुनिश्चित किया जाए। सत्यमेव जयते।”

एक अन्य ट्वीट में कन्हैया कुमार ने लिखा, “सेडिशन केस में फास्ट ट्रैक कोर्ट और त्वरित कार्रवाई की जरूरत इसलिए है ताकि देश को पता चल सके कि कैसे सेडिशन कानून का दुरुपयोग इस पूरे मामले में राजनीतिक लाभ और लोगों को उनके बुनियादी मसलों से भटकाने के लिए किया गया है।”

कन्हैया कुमार समेत अन्य लोगों को देशद्रोह का मुकदमा चलाने की इजाजत मिलने के बाद राजनीति भी शुरू हो गई है। भाजपा ने इस मामले में आम आदमी पार्टी पर देर से और दबाव में फैसले का आरोप लगाया है। वहीं कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम को कन्हैया के खिलाफ देशद्रोह का केस चलाना रास नहीं आया है। उन्होंने इस पर नाराजगी जताते हुए ट्वीट किया, “देशद्रोह कानून के बारे में केंद्र सरकार की तरह ही दिल्ली सरकार की भी समझ कम है। मैं भारतीय दंड सहिंता की धारा 124ए और 120बी के तहत कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ राजद्रोह का केस चलाने की मँजूरी देने का कड़ा विरोध करता हूँ।”

भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “लोगो के दबाव के कारण आखिर दिल्ली सरकार को JNU मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति देनी पड़ी। 3 साल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यह अनुमति टालते रहे लेकिन आखिर उन्हें जनता के आगे झुकना पड़ा। भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह, भारत की बर्बादी तक…जंग चलेगी..जंग चलेगी, एक अफ़ज़ल मारोगे तो हर घर से अफ़ज़ल निकलेगा, अफजल हम शर्मिंदा है, तेरे कातिल जिंदा है यह नारे देशद्रोही है। अब न्याय होगा।”

वहीं दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा, “केजरीवाल सरकार ने मौजूदा राजनीतिक हालात को ध्यान में रखकर यह फैसला लिया है। हम इसकी माँग करते आ रहे थे कि केजरीवाल सरकार इसकी मँजूरी दे और कानून को अपना काम करने दे।”

सीपीआई नेता कन्हैया कुमार पर वर्ष 2016 में जेएनयू परिसर में लगे भारत विरोधी नारे और नफरत फैलाने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने साल भर पहले आरोप-पत्र दाखिल किया था। कन्हैया कुमार पर देशद्रोह समेत 8 धाराएँ लगाई गई हैं। कन्हैया कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की इजाजत देने संबंधी फाइल दिल्ली सरकार के गृह विभाग के पास पड़ी हुई थी।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार के अलावा जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, अनिर्बान और सात अन्‍य लोगों के खिलाफ पिछले साल 14 जनवरी को देशद्रोह, दंगा भड़काने और आपराधिक साजिश के तहत आरोप-पत्र दायर किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली सरकार से मुकदमा चलाने की इजाजत माँगी थी।

दिल्ली सरकार ने उस समय कहा था कि दिल्ली पुलिस ने नियमों का उल्लंघन किया है। उनसे बगैर अनुमति के आरोप-पत्र दाखिल किया गया है। बाद में दिल्ली सरकार ने कहा था कि इस मामले में कानूनी राय ली जा रही है। हाल ही में संपन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने इस मामले को उछाला था और आम आदमी पार्टी को घेरने की कोशिश की थी।

इस मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पटियाला हाउस के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सुमित आनंद की कोर्ट में 1200 पन्नों का आरोप-पत्र दायर किया था। हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली सरकार से स्टेटस रिपोर्ट माँगते हुए पुलिस को निर्देश दिया था कि वह दिल्ली सरकार को इस मामले में रिमाइंडर भेजे। अदालत ने इसकी अगली सुनवाई के लिए 3 अप्रैल की तारीख तय की थी।  

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