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बाबरी विध्वंश के बाद मुस्लिम महिलाओं ने उकसाने के लिए भेजी थी दाऊद इब्राहिम को चूड़ियाँ

उत्तर प्रदेश में 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंश के बाद देश की मुस्लिम महिलाओं ने अडंरवर्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को चूड़ियाँ भेजीं थीं। यह खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया ने अपनी किताब ‘Let Me Say It Now’ (लेट मी से इट नाउ) में किया है। किताब में दावा किया गया है कि मुंबई की मुस्लिम महिलाओं ने दाऊद को चूड़ियाँ भेजीं थीं। ज्ञात हो कि हमारे देश में आज भी किसी पुरुष को चूड़ियाँ भेजना उसकी कायरता का प्रतीक मान कर उसे अपमानित करने के उद्देश्य से भेजा जाता है।

राकेश मारिया ने अपनी किताब में लिखा है कि आईएसआई (पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI) भारत को अस्थिर करने के लिए भारतीय अल्पसंख्यकों के बीच अपने पैर जमाने की निरंतर कोशिश कर रहा था, हालाँकि तब तक उन्हें कोई ख़ास सफलता नहीं मिल पा रही थी। लेकिन 1991 में बाबरी मस्जिद विध्वंस और देशव्यापी दंगों के कारण, आईएसआई का काम आसान हो गया था। ISI अब मुंबई के डॉन को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते थे।

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर राकेश मारिया ने अपनी किताब में कहा है कि दाऊद ने बाबरी विध्वंस और दिसंबर में भड़के दंगों का बदला लेने के लिए आईएसआई के साथ मिलकर काम किया।

किताब के अनुसार, “अंडरवर्ल्ड की उड़ती हुई खबरों में तब यह बात चल रही थी कि दिसंबर, 1992 के दंगों के पहले चरण के बाद, मुंबई के कुछ पीड़ित मुस्लिमों ने दाऊद इब्राहिम को मदद के लिए एक संदेश भेजा था; लेकिन वह कुछ नहीं कर सका। बताया जाता है कि उस समय दाऊद इब्राहिम को उकसाने और बाबरी विध्वंश के बदले में कार्रवाई के लिए कुछ मुस्लिम महिलाओं ने उसकी मर्दानगी पर सवाल उठाते हुए, एक पुरुष को अपमानित करने का अंतिम पारम्परिक भारतीय तरीका भी अपनाया। अब चूड़ियाँ वास्तव में भेजी गई थीं या नहीं, या वह आईएसआई ने वह खुद ही भेजी थीं, दाऊद ने बाबरी मस्जिद और दिसंबर के दंगों के पतन का बदला लेने के लिए आईएसआई के साथ अपने बहुत लोगों को भेज दिया।”

“.. इसका उद्देश्य और कुछ नहीं बल्कि भारत के मुस्लिमों को भारत सरकार के खिलाफ उकसा कर देशभर में हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवाना और हमले करवाना था। इस योजना का मुख्य हिस्सा 1993 में मराठा सम्राट छत्रपति शिवाजी की जयंती पर पूरे देशभर में हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़काना था। इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण मेट्रो शहर जैसे- बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, सूरत, अहमदाबाद आदि शहर थे। दिसंबर 1992 और जनवरी 1993 के बीच, टाइगर मेमन के माध्यम से, दाऊद और अनीस इब्राहिम ने दुबई में आठ अन्य षड्यंत्रकारियों को बुलाया।इनमें मोहम्मद डोसा और टाइगर मेमन के दो भाई, याकूब मेमन और अयूब मेमन भी शामिल थे। दंगों के बाद दोनों भाई बुरी तरह से परेशान थे, गुस्से से भरे और बदला लेने के लिए बेताब थे। षड्यंत्रकारियों ने विस्तृत योजनाओं को चाक-चौबंद करने के लिए बैठकें कीं और कुछ पाकिस्तानियों ने भी इन बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लिया।”

किताब में बताया गया है कि किस तरह से आईएसआई द्वारा मुंबई के डॉन से मिलकर देश में हथियारों, गोला-बारूद और धन के वितरण के लिए एक नेटवर्क तैयार किया गया। इसका सिर्फ एक मकसद था भारत की अखंडता और स्थिरता पर प्रहार। इसके लिए भारतीय मुस्लिमों की सांप्रदायिक भावनाओं का इस्तेमाल कर भारत को खत्म करने की योजना बनाई गई और समुदाय विशेष को आतंकवादी कृत्यों का सहारा लेने के लिए उकसाया गया।

राकेश मारिया ने ‘Let Me Say It Now’ नाम की लिखी अपनी एक किताब में एक नहीं बल्कि ऐसे कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जिनमें मुंबई हमलों के गुनेहगार अजमल कसाब को ‘हिन्दू आतंकी’ साबित करने की साजिशों को लेकर भी कई खुलासे किए गए हैं। मारिया की किताब ने उन कई रहस्यों से भी परदा उठाया है, जो अभी तक सिर्फ एक राज बने हुए थे। किताब में राकेश मारिया ने लिखा है कि सुबह साढ़े चार बजे वो कसाब से कहते हैं कि वो अपना माथा ज़मीन से लगाए… और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद जब कसाब खड़ा हुआ तो राकेश मारिया ने कहा, “भारत माता की जय बोल” कसाब ने फिर ऐसा ही किया। मारिया दोबारा भारत माता की जय बोलने के लिए कहते हैं और ऐसा ही करता है। तब के पुलिस कमिश्नर मारिया कसाब को शव-गृह भी ले गए थे, जहाँ उसे मुर्दों को देख कर उल्टी आ गई थी।

RSS के विद्या भारती के स्कूलों में 3 साल में बढ़े 30% मुस्लिम विद्यार्थी, ज्ञान के साथ राष्ट्र प्रेम की शिक्षा भी

विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को अक्सर समुदाय विशेष का विरोधी संगठन माना जाता है, लेकिन आरएसएस की प्रेरणा से शिक्षा के क्षेत्र में चलने वाले संगठन विद्या भारती से आए आँकड़ों ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। ऐसा इसलिए कि पूरे उत्तर प्रदेश में चलने वाले विद्या भारती के स्कूलों मे पिछले करीब 3 साल में 30 प्रतिशत मुस्लिम विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है।

प्रदेशभर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की प्रेरणा से शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे विद्या भारती के स्कूलों में मुस्लिम छात्रों की संख्या में पिछले तीन सालों में करीब 30% की बढ़ोतरी देखी गई है। आँकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016 में 49 जिलों वाले पूर्वी यूपी में विद्या भारती के स्कूलों में मुस्लिम छात्रों की संख्या 6,890 थी, जो कि वर्ष 2019 में बढ़कर 9,037 हो गई। उत्तर प्रदेश के इन स्कूलों में लगभग 12,000 से अधिक मुस्लिम और ईसाई छात्र पढ़ते हैं। इतना ही नहीं, ये छात्र पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी आगे रहने की कोशिश में लगे हुए हैं।

ऐसे ही एक स्कूल में पढ़ने वाले छात्र के पिता मोहम्मद चाँद कहते हैं, “हमने इस स्कूल में (सरस्वती शिशु मंदिर) में शिक्षा की गुणवत्ता देखी, फिर वहाँ अपने बच्चे को भेजने का फैसला किया। इससे पहले मिथक था कि ये स्कूल केवल हिंदुओं के लिए हैं और वे अल्पसंख्यकों का एडमिशन नहीं करते हैं। हमारे बच्चे को भी वहाँ पढ़कर काफी अच्छा लग रहा है।”

विद्या भारती के अतिरिक्त सचिव (पूर्वी उत्तर प्रदेश) चिंतामणि सिंह कहते हैं, विद्यालय में शिक्षा के साथ बच्चों को संस्कार मिलना कहीं न कहीं अभिवावकों को विद्यालय की ओर आकर्षित करता है। साथ ही हमारे विद्यालयों में अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाती हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में मुस्लिम छात्रों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में विद्या भारती के स्कूलों में करीब छह लाख छात्र पढ़ते हैं, जिनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं।

विद्या भारती के स्कूलों में पढ़ने वाले ये सभी मुस्लिम छात्र सुबह में होने वाली सरस्वती वंदना और उसके बाद संस्कृत भाषा में होने वाले श्लोकों और मंत्रों के साथ होने वाली प्रार्थना में हिस्सा लेकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं, यहाँ हर रोज संगठन की रीति-नीति से विद्यालय बंद से पूर्व वंदे मातरम भी कराया जाता है।

आपको बता दें कि शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती को भारत का सबसे बड़ा ग़ैर सरकारी संगठन माना जाता है। इसकी स्थापना वर्ष 1977 में हुई थी। इससे पहले वर्ष 1952 में गोरखपुर में पाँच रुपए किराए के मकान से संघ की प्रेरणा से कुछ स्वयंसेवकों ने शिशु मंदिर की शुरूआत की थी। आज पूरे देश में विद्या भारती के अंतर्गत कुल मिलाकर 30,000 शिक्षण संस्थाओं में 9,00,000 शिक्षकों के मार्गदर्शन में 45 लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा और संस्कार प्राप्त कर रहे हैं।

मोदी वाले लिट्टी चोखा स्टॉल पर उमड़ी भीड़, तो वहीं बंद हो गई राहुल बाबा वाली दुकान, लोगों ने लिए मजे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जादू कह लीजिए या उनके प्रति देशवासियों का प्रेम और स्नेह कि वे अगर मिट्टी भी छू लें तो सोना हो जाए। यह कुछ उनके किसी चुनावी रैली में दिए गए भाषण का अंग नहीं है, जब उन्होंने खुद को भाग्यशाली कहा था। न ही लिट्टी चोखा कोई ‘मिट्टी’ ही है जिसे छूकर सोना बनाया जा सकता है। उदाहरण थोड़ा कम उपयुक्त हो सकता है, पर आप ‘उपमा’ का क्या कीजिएगा, जब संदर्भ-प्रसंग का अंदाजा आप को हो ही चुका होगा तो केवल ‘भाव’ पकड़िए न!

खैर राजपथ के लॉन में आयोजित हुनर हाट में मोदी ने रुक कर जो पूर्वांचल विशेषकर बिहार के सबसे लोकप्रिय स्नैक/भोजन लिट्टी चोखा का स्वाद क्या लिया, लिट्टी-चोखा ट्रेंड करने लगा।

एक तरफ जहाँ लिट्टी चोखा के उस स्टॉल पर टूट रही भीड़ संभाले नहीं सम्भल रही, वहीं मोदी के लिट्टी-चोखा खाते हुए वायरल हो चुकीं तस्वीरें लिबरल्स को बुरे सपनों की तरह रात-रात भर परेशान कर रही हैं।

लिबरल्स की परेशानी तो समझी जा सकती है पर उस लिट्टी चोखा स्टॉल के रंजन राज की तो जैसे किस्मत ही खुल गई। पटना के रहने वाले रंजन राज बताते हैं कि उनके स्टॉल पर इतनी भीड़ हो रही है- लिट्टी चोखा खाने वालों की, कि उन्हें बुजुर्गों के लिए अलग से लाइन लगानी पड़ रही है!

रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक जो स्टॉल लगभग गुमनाम था, अब वहाँ लोगों की भीड़ उमड़ रही है, लिट्टी चोखा खाते हुए लोग सेल्फी ले रहे हैं। पीएम मोदी के यहाँ पर लिट्टी चोखा खाने के बाद एक तरफ परिजन से मिलने वाली बधाइयां और दूसरी तरफ लिट्टी-चोखा खाने के लिए आने वाले लोगों की संख्या को देखकर, पटना के रहने वाले स्टॉल संचालक रंजन राज गदगद हैं।

यह तो हुई नरेंद्र मोदी के किसी लिट्टी चोखा स्टॉल पर रुकने और लिट्टी चोखा खाने की कहानी, अब जरा मोदी को लेकर अनर्गल बयानबाजी करते हुए घूमने वाले राहुल गाँधी के ही ऐसे किसी किस्से पर बात हो जाए वर्ना छेनू कुमार गोदी मीडिया कहकर रोने लगेंगे।

तो हुआ कुछ यूँ था कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान रायचूर पहुँचे ‘शिव भक्त जनेऊधारु’ राहुल जी भी किसी चाय पकोड़ा वाली दुकान पर ठहरे थे, अपने “जनेऊधारी” ने वहाँ मिर्ची वाले पकौड़े भी खाए थे। जिसके बाद ‘मौलाना ढाबा’ नामक उस दुकान के मालिक ने उनकी तस्वीर भी मढ़वा कर दुकान पर टाँग दी थी। अब सुनते हैं वो दुकान बंद हो गई है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर खूब मजे लिए जा रहे हैं वहीं कुछ का कहना है कि दुकान के मालिक के यहाँ कोई शादी है और इस कारण दुकान बंद हुई है।

खैर कारण जो भी हो पर अगर यहाँ भी कुछ लोगों को लगे कि इसमें भी मोदी का हाथ है और उनको इस्तीफा देना चाहिए, तो वे बेशक अपने ‘पनौती’ बाबा के नाम का बिल मोदी के नाम फाड़ सकते हैं। आखिर इतनी तो आजादी हैए है अभी।

फिर सोने की चिड़िया बना सकता है सोनभद्र में मिला सोना, सरकार की तिजोरी में मौजूद सोने से 5 गुना ज्यादा

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जमीन से तीन हजार टन से ज्यादा स्वर्ण भंडार मिलने की बात सामने आई है। इस सोने की मात्रा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है क भारत इस भंडार के मिलने के बाद दुनिया के टॉप-3 देशों में शामिल हो सकता है। कुल 3,350 टन के इस स्वर्ण भंडार की कीमत तकरीबन 12 लाख करोड़ रूपए तक बताई जा रही है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा समय में भारत के पास लगभग 626 टन सोने का भंडार है, वहीं मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सोनभद्र जिले में मिला सोना इससे करीब 5 गुना ज्यादा है। राज्य के खानिज विभाग ने सोने की इस खान का पता लगाया है और जल्द ही इस सोने को निकालने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की टीम पिछले 15 साल से यहाँ काम कर रही थी, जिसने 2012 में ही यहाँ की जमीन के अंदर सोना होने की पुष्टि कर दी थी। अब प्रदेश सरकार ने इस पर तेजी दिखाते हुए सोने को बेचने के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया की टीम के अनुसार, सोनभद्र के हरदी क्षेत्र में 646.15 किलोग्राम सोने का भंडार मौजूद है वहीं सोन पहाड़ी में 2943.25 टन सोने के भंडार होने की पुष्टि की गई है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ई-टेंडरिंग के माध्यम से ब्लॉकों के नीलामी के लिए सात सदस्यीय टीम भी गठित कर दी है। यह टीम पूरे क्षेत्र की जियो टैगिंग करेगी और फरवरी 22, 2020 तक अपनी रिपोर्ट भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय लखनऊ को सौंपेगी।

ध्यातव्य है कि वर्तमान में विश्व का सबसे ज्यादा सोने का भंडार अमेरिका के पास है, जो लगभग 8,133 टन है। तो वहीं दूसरे स्थान पर जर्मनी का नाम आता है। जर्मनी के पास कुल 3366.8 टन का स्वर्ण भंडार है। गोल्ड रिजर्व में तीसरे स्थान पर इटली है जिसके पास 2451.8 टन सोना है। यानी प्राचीन काल की सोने की चिड़िया कहलाने वाला भारत, अब सोनभद्र के इस विशाल स्वर्ण भंडार के बाद, इटली को पीछे कर तीसरे स्थान पर आ सकता है।

अपडेट नोट : जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने शनिवार (फरवरी 22, 2020) को सोनभद्र की खदान में 3000 टन नहीं, बल्कि सिर्फ 160 किलो सोना होने का दावा किया है। इस पर ताजा रिपोर्ट आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं।

तेजप्रताप यादव ने दिया भड़काऊ बयान- नीतीश कुमार हैं कंस, 2020 में होगा वध! Video वायरल

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजप्रताप यादव का एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में तेजप्रताप एक बार फिर बांसुरी बजाते नजर आ रहे हैं। अपनी शिवभक्ति को लेकर अक्सर चर्चा बटोरने वाले लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र ने इस बार अपनी कला का प्रदर्शन बिहार के वैशाली में भी किया। मगर, इसी दौरान उन्होंने वहाँ मौजूद भीड़ को संबोधित करते हुए बिहार मुख्यमंत्री को लेकर विवादित बयान दे दिया। दरअसल, उन्होंने मंच से बिहार सीएम नीतीश कुमार की तुलना भगवान कृष्ण के मामा कंस से की और उनके वध के बारे में जनता से भी पूछा। जिसके बाद उनके इस बयान ने तूल पकड़ लिया।

उन्होंने कहा, “जिस तरह कंस का सफाया हुआ, वैसे ही 2020 के चुनाव में इनका भी सफाया होगा।” इसके बाद उन्होंने मंच से सवाल किया कि 2020 में किसका वध होगा? जिसके जवाब में वहाँ मौजूद लोगों ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार का नाम लिया और जनता से नीतीश कुमार का सुनते ही उन्होंने कहा कि हमें कहने की जरूरत नहीं है, यह आप भलीभाँति जानते हैं कि किस दौर से हमारा बिहार गुजर रहा है। 

गौरतलब है कि अपने अजीबो गरीब बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले तेजप्रताप यादव ने नीतीश कुमार से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी बयान दिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा लिट्टी चोखा खाए जाने को लेकर कहा था कि लिट्टी चोखा छोड़िए और बिहार आइए, हम आपको अपने हाथों से बनाया सत्तू खिलाएँगे। इसे हम और हमारे पिता लालू यादव काफी पसंद करते हैं।

तेज प्रताप यादव
तेज प्रताप यादव से जुड़ा नया कारनामा आया सामने

बता दें कि बिहार में इस साल के अंत में चुनाव होने जा रहे है। चुनावी साल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी लगातार जारी है। ऐसे में इस बीच तेज प्रताप मंच से शिवरात्रि के मौके पर बांसुरी बजाते भी दिखे और नीतीश कुमार पर तंज कसते भी। तो उम्मीद की जा सकती है कि धीरे-धीरे राज्य में सियासत का मामला कितना गरमा रहा है कि साधारण अवसरों पर भी नेता अपने प्रतिद्वंदियों के खिलाफ़ बयानबाजी करने से नहीं चूक रहे। याद दिला दें, इससे पहले तेज प्रताप यादव सुशील कुमार के ख़िलाफ़ बोलते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी भी दे चुके हैं।

अयोध्या: नाबालिग के साथ फिरोज, आदिल, सैफुद्दीन और सुलेमान ने की अश्लील हरकतें, हुए गिरफ्तार

अयोध्या में गुरुवार (फरवरी 21, 2020) को एक किशोरी के साथ छेड़खानी का मामला सामने आया। घटना का पता चलते ही इलाके में हल्ला मच गया। मामला दो समुदाय का होने के कारण तनाव बढ़ गया। पीड़ित के परिजनों की शिकायत पर आरोपितों को हिरासत में लिया गया। किशोरी के साथ छेड़खानी करने वाले युवकों की पहचान मो फिरोज, मो आदिल, मो सैफुद्दीन, मो सुलेमान के रूप में हुई। इनके ख़िलाफ़ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज हुआ।

दैनिक जागरण में प्रकाशित संबंधित खबर

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी घटना उस समय घटी, जब लड़की कोचिंग पढ़ने जा रही थी। इसी दौरान चारों लड़कों ने उसे बहलाया और कचहरी के पीछे स्थित पार्क में ले जाकर उसके साथ अश्लील हरकत करने लगे। घर लौटने पर किशोरी ने सभी बातें परिवारवालों को बताईं।

सूचना मिलने पर आस-पड़ोस के लोग भी वहाँ जमा होने लगे। आरोपित पक्ष दूसरे समुदाय से होने के कारण लोगों में गुस्सा अधिक भड़क गया। लेकिन, पुलिस ने समय से पहुँचकर स्थिति को संभाला। लोगों ने पुलिस से आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की माँग की।

किशोरी के परिवार की ओर से दी गई तहरीर पर पुलिस ने खोजनपुर निवासी मो फिरोज, टकसाल निवासी मो आदिल, बजाजा निवासी मो. सैफुद्दीन और पुरानी सब्जी मंडी निवासी मो सुलेमान को हिरासत में लिया। कोतवाल ने बताया चारों लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।

गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले अयोध्या जिले में छेड़खानी का एक और मामला सामने आया था। जब राहुल नाम के आरोपित युवक ने 14 वर्षीय किशोरी के साथ छेड़खानी की थी और फिर डरा धमकाकर उसे अपने साथ सुनसान जगह पर ले गया था, जहाँ आरोपित ने अपने अन्य दोस्तों के साथ किशोरी का बलात्कार किया और पूरी घटना का वीडियो वायरल कर दिया। बाद में किशोरी ने ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी थी।

चीनी राजदूत ने कहा- तुझे जड़ से मिटा दूँगा, जब नागरिक ने किया कोरोना पर सवाल

चीन और पाकिस्तान, दोनों ही देश अपने ‘नकारने’ की आदत को लेकर खूब जाने जाते हैं। एक ओर जहाँ पाकिस्तान अपने देश को आतंकवाद की फैक्ट्री नहीं मानता, उसी तरह दूसरी ओर चीन कोरोना वायरस जैसी भीषण त्रासदी के भी सामान्यीकरण में लगा हुआ है।

चीन में कोरोना वायरस के कहर के कारण वहाँ की अर्थव्यवस्था भी अच्छी स्थिति में नहीं है। मीडिया में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की जान लेने की किसी भी तरह की खबर को प्रकाशित करने पर भी प्रतिबंध लगा रखा है।

इसी बीच चीन के कोलकाता में महावाणिज्य दूत झा लियू मंगलवार (फरवरी 16, 2020) को ट्विटर पर साफ़ धमकी देते हुए भी देखे गए। झा लियू ने चीनी सरकार के ही मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ की लिंक शेयर करते हुए लिखा कि कोरोना वायरस सिर्फ एक गंभीर सर्दी-जुकाम है। उन्होंने लिखा कि वो इस वायरस से डरने वाले नहीं हैं और वो इस बिमारी से आखिरी जंग के लिए तैयार हैं।

झा लियू के इस ट्वीट पर चीन से ही जुड़े एक ट्विटर यूज़र ने चीन की सरकार पर कटाक्ष करते हुए लिखा- “हाँ हम जानते हैं कि यह बस एक गंभीर सर्दी-जुकाम मात्र है और हम इससे डरे हुए नहीं हैं। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि फिर भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने लगभग हर इंसान को घर में कैद कर रखा है और इससे भी वाहियात बात यह है कि इस ‘बुरे जुकाम’ ने 1666 लोगों की जान ले ली है और इनमें से 98.5% लोगों की जाने सिर्फ हुबई में गई हैं।”

चीनी युवक के इस जवाब से झा लियू बौखला गए और उन्होंने जवाब में लिखा- “तुम इस तरह से बात कर रहे हो जैसे कि तुम खुद उस वायरस का हिस्सा हो। तुम्हें भी वायरस की ही तरह मिटा दिया जाएगा।”

गौरतलब है कि चीन को कोरोना वायरस से होने वाली मौतों पर लगातार गुमराह करते हुए देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि चीन के सरकारी आँकड़ों के अनुसार इसके संक्रमण से अकेले चीन में अब तक 2100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं, जबकि इसके संक्रमण के कुल पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 74,576 हो गई है। लेकिन चीन की से ही एक कम्पनी से लीक हुए आँकड़ों से खुलासा हुआ है कि इस वायरस से अब तक 24,000 से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

कोरोना वायरस का चीन के स्वास्थ्य कर्मियों पर भी काफी गंभीर असर पड़ रहा है। अभी तक 1,700 से अधिक चीनी स्वास्थ्य अधिकारी इसकी चपेट में आ चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञों के रविवार को बीजिंग पहुँच कर वायरस से निपटने में चीनी अधिकारियों की मदद करने की संभावना है।

देवबंद आतंकवाद की गंगोत्री..पूर्वजों से हुई भूल का खमियाजा हम आज भुगत रहे : गिरिराज सिंह

अपने विवादित बयानों से अक्सर चर्चा में रहने वाले बीजेपी मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर दूसरे समुदाय को लेकर विवादित बयान दिया है। गिरिराज सिंह ने कहा है कि हमारे पूर्वजों से भूल हुई है, 1947 में ही देश के सभी मुस्लिमों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए था।

केन्द्रीय पशुधन मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “राष्ट्र के प्रति समर्पित होने का समय अब आ गया है। 1947 से पहले हमारे पूर्वज देश की आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे थे और मोहम्मद अली जिन्ना भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने की योजना बना रहा था। ये बहुत बड़ी हमारे पूर्वजों से भूल हुई, जिसका खामियाजा आज हम यहाँ भुगत रहे हैं। अग़र उस समय मुस्लिम भाईयों को वहाँ (पाकिस्तान) भेज दिया गया होता, तो आज यह नौबत नहीं आती।”

उन्होंने आगे चिंता जाहिर करते हुए यह भी कहा कि अग़र भारतवासियों को अपने ही देश में रहने को जगह नहीं मिली तो विश्व का ऐसा कोई देश नहीं जहाँ हिंदू जाकर शरण ले सके। इसलिए हमें इस पर विचार करना होगा।

इससे पहले पिछले दिनों सहारनपुर में सीएए पर आयोजित एक गोष्ठी में बोलने के बाद मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा था, “मैंने एक बार कहा था कि ये देवबंद आतंकवाद की गंगोत्री है, सारे बड़े-बड़े दुनियाँ में जो भी पैदा हुए आतंकवादी, चाहे हाफ़िज सईद मामला हो, ये सारे के सारे लोग यहीं से निकलते हैं। दुनिया में आतंकवाद की घटनाओं का जुड़ाव देवबंद से ही रहा है।”

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कार्यक्रम में शाहीन बाग पर निशाना साधते हुए कहा था, “वह नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ रहे हैं, बल्कि वह गजवा-ए-हिंद के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। गजवा-ए-हिंद को भारत में लाकर मुस्लिम राष्ट्र बनाना चाहते हैं। हम उनको इस मकसद में कामयाब नहीं होने देंगे।”

6 फरवरी को गिरिराज सिंह ने कहा था, “शाहीन बाग सुसाइड बॉम्बर (आत्मघाती हमलावर) का जत्था बनता जा रहा है। देश की राजधानी में देश के खिलाफ ही बड़ी साजिश चल रही है। शाहीन बाग में एक महिला का बच्चा ठंड में मर जाता है और वो महिला कहती है कि मेरा बच्चा शहीद हुआ है। ये सुसाइड बॉम्बर नहीं है तो और क्या है?”

163 साल पुराने इलाहाबाद जंक्शन का नाम अब प्रयागराज, योगी सरकार ने बदले 4 रेलवे स्टेशनों के नाम

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आने से पहले ही ये कयास लगते रहे कि प्रदेश में योगी सरकार आई तो नामों में परिवर्तन किया जा सकता है। कुछ ऐसा ही हुआ यूपी में योगी सरकार के आने के बाद। इलाहाबाद जिले का नाम बदलकर प्रयागराज करने के बाद यूपी सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने प्रयागराज के चार रेलवे स्टेशनों का नाम बदलने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद इलाहाबाद जंक्शन का नाम अब प्रयागराज जंक्शन होगा।

इलाहाबाद जिले का नाम बदलने के बाद से ही ये कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही अब जिले के रेलवे स्टेशनों के नाम में भी यूपी सरकार बदलाव कर सकती है। केंद्र सरकार से एनओसी मिलने के बाद इस संबंध में लोक निर्माण विभाग ने बीते दिन अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के तहत प्रयागराज जिले के अतर्गत आने वाले चार रेलवे स्टेशनों के नाम बदले गए हैं। इस बदलाव के बाद अब इलाहाबाद जंक्शन का नाम प्रयागराज जंक्शन, इलाहाबाद सिटी का नाम प्रयागराज रामबाग, इलाहाबाद छिवकी का नाम प्रयागराज छिवकी और प्रयागघाट का नाम बदलकर अब प्रयागराज संगम होगा।

दरअसल पिछले वर्ष प्रयागराज में लगे कुंभ मेले से पहले ही योगी सरकार ने इलाहाबाद जिले का नाम प्रयागराज कर दिया था। इसके साथ ही नगर निगम, विकास प्राधिकरण समेत अन्य विभागों में भी नामों को बदला गया था, लेकिन शहर के स्टेशनों का नाम उस समय नहीं बदला जा सका था। इसके लिए जिला प्रशासन ने शासन और रेल मंत्रालय को चिट्ठी भेजी थी। साथ ही एक पत्र गृह मंत्रालय को भी भेजा गया था। वहीं गृह मंत्रालय से स्टेशनों के नाम बदलने की स्वीकृति मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के लोक निर्माण विभाग ने अपनी अधिसूचना जारी कर दी।

बता दें कि जिस इलाहाबाद जंक्शन का नाम बदलकर प्रयागराज जंक्शन किया गया है वह 163 साल पुराना है। इलाहाबाद जंक्शन से ब्रिटिशकाल में 1857 में फरवरी माह में कानपुर की ओर 41.8 किमी ट्रेन ट्रायल के तौर पर चलाई गई थी। इसके बाद 1859 में इलाहाबाद से कानपुर के बीच ट्रेन संचालन शुरू हुआ था।

आपको बता दें कि 2017 में यूपी की सत्ता में आते ही योगी सरकार ने स्थानों के नाम बदलना शुरू कर दिया था, जिसके तहत सबसे पहले मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर जनसंघ के संस्थापक सदस्य दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखा गया था। इसके बाद इलाहाबाद का नाम बदल प्रयागराज और फैजाबाद जिले का नाम बदलकर अयोध्या रखा गया था।

शाहीन बाग की ‘शेरनी’ योगी प्रशासन का डंडा पड़ते ही बनी ‘बिल्ली’: गिड़गिड़ाकर माँगी माफी, Video वायरल

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से शाहीन बाग जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और हिंदुओं के ख़िलाफ़ जहर उगलने वाली महिला टीचर नाहिदा जैदी की दो विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। एक विडियो उस समय की है, जब शाहीन बाग प्रोटेस्ट में शामिल होकर उन्होंने मोदी-शाह समेत अपने हिंदू सहकर्मियों के लिए कुँठा निकाली थी और दूसरी तब की है जब प्रशासन ने उनके ख़िलाफ़ एक्शन लेते हुए सस्पेंड किया। सस्पेंशन के बाद वाले विडियो में तो उन्होंने माफी माँगते हुए अपनी बातें और अपने सारे सुर बदल लिए।

पहली विडियो में सुना जा सकता है कि कैसे महिला टीचर शाहीन बाग से हुंकार भरती हैं। वो विडियो में सवाल करती हैं कि जब यहाँ की जमीन उनकी है, हवा उनकी है, पानी उनका है, तो आखिर कैसे उन्हें यहाँ से हटाने की बात की जा सकती है। कैसे कहा जा सकता है कि मु###न यहाँ का नहीं है और कैसे एनआरसी लगाई जा सकती है। वे कहती हैं कि वे पढ़ी-लिखी हैं और सालों से बच्चों को राजनीतिक शास्त्र पढ़ा भी रही हैं। वो अच्छे से जानती हैं कि भारत को आजादी कैसे मिली? उनके अनुसार आरएसएस तो बिका हुआ था। आखिर आरएसएस ने किया ही क्या? आजादी के लिए तो उन्होंने पैसे दिए, जानें दीं, खून बहाया। लेकिन आज आजादी का फायदा मोदी-शाह उठा रहे हैं।

वे शाहीन बाग से कहती हैं कि अमित शाह अपनी बड़ी-बड़ी आँखे दिखाकर उन्हें डराना चाहते हैं और साथ ही हिंदू लोग भी उनके ख़िलाफ़ हो गए हैं। वीडियो में उन्हें स्पष्ट कहते सुना जा सकता है कि जहाँ वो पढ़ाती हैं, वहाँ वो अकेली मु###न हैं। लेकिन वहाँ पर हिंदू टीचर मुस्लिमों के बारे में बहुत गंदी बातें बोलते हैं, उन्हें आतंकी कहते हैं। इस पर उनका रोज झगड़ा होता है और जो वो शाहीन बाग पहुँची हैं, वो सिर्फ़ अपनी एकजुटता दिखाने आई हैं कि वो लोग हिंदू के ख़िलाफ़ नहीं बल्कि हिंदुत्व के ख़िलाफ़ हैं। बता दें कि अपनी इस बातचीत में नाहिदा जैदी ने अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को भी नाजायज बताया। साथ ही कश्मीर के मुद्दे को उठाते हुए कहती हैं कि उन लोगों ने बहुत जुल्म सह लिया। मगर अब नहीं। वहीं उनकी साथी ने कहा था वे लोग भिखारी नहीं हैं, जो पैसे लेकर यहाँ आएँगे।

हालाँकि, वीडियो में महिला टीचर के शब्दों में, हाव-भाव में सरकार और हिंदू धर्म के लिए उनकी घृणा साफ झलक रही है। मगर, मामला गर्माने के बाद, वीडियो वायरल होने के बाद, प्रशासन द्वारा सवाल-जवाब पूछे जाने के बाद नाहिदा ने फौरन इस मामले पर बीते दिनों माफी माँग लीं। और स्वीकारती हैं कि उनके मुँह से कुछ गलत अल्फाज निकल गए थे। उनके अनुसार, कुछ लोग उनके यहाँ से शाहीन बाग जा रहे थे। तो वो भी वहाँ चली गईं। वहाँ जब लोगों ने उनसे सवाल किया तो उन्होंने जवाब दिए। लेकिन लोगों ने अच्छी बातों को काट दिया और गलत बातों को वायरल कर दिया गया। उनका कहना है कि ये सब उनके ख़िलाफ़ साजिश है और वो अच्छे से जानती हैं कि ऐसा कौन कर रहा है। इसके बाद वो वीडियो में अपने कहे शब्दों के लिए माफी माँगती हैं और कहती हैं कि वो इस दुनिया में अकेली हैं, उनके माता-पिता कोई नहीं है। मगर फिर भी उन पर जुल्म ढहाया जा रहा है।

दो अलग-अलग जगहों और स्थितियों में इस तरह बयान बदलने को लेकर ही उनकी दोनों वीडियो को वायरल किया जा रहा है और पूछा जा रहा है कि 25 साल तक इन्होंने अपने छात्रों को कैसी शिक्षा दी होगी?

बता दें कि सहारनपुर में आशा मार्डन स्कूल की प्रिंसिपल ने भी इस मामले के संज्ञान में आने के बाद अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें वीडियो वायरल के बारे में तो नहीं मालूम लेकिन टीचर ने जो कमेंट किए हैं, वो सरासर गलत हैं। प्रिंसिपल के अनुसार उनके स्कूल में नाहिदा अकेली मुस्लिम टीचर नहीं हैं। उनके अलावा और भी शिक्षक हैं, लेकिन उनकी ओर से शिकायतें नहीं आईं हैं।

वहीं, एसपी सिटी विनीत भटनागर ने भी आश्वासन दिया कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन के लोग जबरदस्ती किसी स्कूल में जाकर दबाव बनाने का काम करते हैं, तो उन पर भी कार्रवाई होगी।