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‘राम मंदिर निर्माण के लिए ले सकते हैं और भी जमीन, शरद पवार मस्जिद बनाने में करें मदद’

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने गुरुवार (20 फरवरी, 2020) को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। मुलाक़ात के बाद ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि अग़र मंदिर निर्माण के लिए और जमीन की आवश्यकता हुई तो और जमीन ली जा सकती है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि जब देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री श्रीराम मंदिर निर्माण में साथ हैं तो जरूर अयोध्या में जल्द लोगों के सामने एक भव्य श्रीराम मंदिर होगा।

गुरुवार शाम को राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास, महामंत्री चंपत राय और ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मुलाकात कर मंदिर निर्माण में अहम भूमिका के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया, जिस पर पीएम मोदी मे उन्हें अयोध्या आने का आश्वासन भी दिया। इस दौरान विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए महंत नृत्य गोपालदास ने कहा की राम मंदिर निर्माण में अगर और भी जमीन की जरूरत होगी तो जमीन ली जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार को लिखा जाएगा।

माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने के बाद मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेज हो सकती है। वहीं गुरुवार को महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि 3-4 मार्च को होने वाली ट्रस्ट की पहली बैठक में राम मंदिर के मॉडल पर बात होगी। उसके बाद अन्य कामों को बढ़ाया जाएगा। उन्होंने साफ-साफ कहा कि जो पत्थर राम मंदिर के लिए रखे गए हैं, उन्हीं पत्थरों का इस्तेमाल मंदिर निर्माण के लिए किया जाएगा। अगर जरूरत पड़ी तो और भी पत्थर मँगाए जा सकते हैं।

गोपालदास ने आगे कहा कि मंदिर का निर्माण सरकारी सहायता से नहीं बल्कि भक्तों द्वारा दिए गए चंदे के पैसों से ही होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि 6 महीने में राम मंदिर का निर्माण काम शुरू हो जाएगा, जिसे पूरा होने में 2 साल से ज्यादा का समय लग सकता है। लेकिन मंदिर का निर्माण भव्य ही होगा, जोकि हर हिंदू को गर्व का अनुभव कराएगा।

मंदिर निर्माण ट्रस्ट समिति पर आपत्ति जताने वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार पर टिप्पणी करते हुए गोपालदास ने कहाशरद पवार चाहें तो मुस्लिमों को मस्जिद बनाने में मदद कर सकते हैं। यहाँ हम केवल राम मंदिर के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट में महंत नृत्य गोपालदास को ट्रस्ट का अध्यक्ष, विहिप के उपाध्यक्ष चंपतराय को महामंत्री और गोविंद देव गिरि महाराज को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। साथ ही पूर्व आईएएस अफसर नृपेंद्र मिश्रा को राम मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

जिन्होंने राम मंदिर के लिए बहाया अपना खून, उनके लिए बनना चाहिए स्मारक: शिवसेना

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जिन्होंने राम मंदिर के लिए बहाया अपना खून, उनके लिए बनना चाहिए स्मारक: शिवसेना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने से ठीक पहले शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए राममंदिर बनवाने हेतु ‘शहीद’ हुए लोगों के लिए स्मारक बनवाने की अपील की। सामना में लिखा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अयोध्या में राम मंदिर के कार्य को गाति मिली है। अब 2024 तक इसका काम पूरा हो जाएगा तो इसका सीधा लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा। उनके मुताबिक राममंदिर के लिए शिवसैनिकों ने भी बलिदान दिया था लेकिन शिवसेना ने इसका कभी फायदा उठाने की कोशिश नहीं की।

मुखपत्र में प्रकाशित संपादकीय के जरिए शिवसेना ने शुक्रवार को उन सभी लोगों के लिए शहीद स्मारक बनवाने के लिए आवाज़ उठाई, जिन्होंने राम मंदिर बनवाने के लिए अपनी जाने गवाईं। उनके अनुसार उन ‘शहीदों’ के लिए श्रद्धांजलि के रूप में सरयू तट पर एक स्मारक बनवाया जाना चाहिए। और अमर जवान की तरह
इन शहीदों के नाम भी अमर जवान ज्योति के समान लिखा जाना चाहिए।

‘सामना’ में आगे कहा गया है कि यह सच है कि शिवसेना, बजरंग दल के अलावे अन्य कुछ हिंदूवादी संगठन भी इस आंदोलन में शामिल हुए थे। ऐसे में इसे कैसे भूला जा सकता है कि कारसेवकों की शहादत से सरयू लाल हो गई थी। उस समय देश भर के शिव सैनिकों का रक्त खौलता दिख रहा था। बीबीसी के मार्क टली ने अयोध्या आंदोलन का जो वीडियो बनाया था, उसमें बाबरी ढाँचा के आस-पास शिवसेना के कई परिचित चेहरे दिखते हैं। लेकिन, शिवसेना ने इसका राजनीतिक लाभ कभी नहीं उठाया।

शिवसेना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, राम मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया को गति मिली है। एक विश्वास बनाया गया है और 2024 तक मंदिर बनाया जाएगा। इससे भाजपा को निश्चित रूप से फायदा होगा। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए सामना में लिखा कि पाकिस्तान और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दे 2024 के आम चुनावों के लिए काम नहीं करेंगे, इसलिए, राम मंदिर उस समय एक महत्वपूर्ण बिंदु होगा।

‘सामना’ में शिव सेना की ओर से लिखा गया कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों पर नजर डाली जाए तो क्या दिखाई देता है? महंत नृत्य गोपालदास ट्रस्ट के अध्यक्ष चुने गए हैं। चंपत राय महासचिव और गोविंद देव गिरि को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। जबकि ‘निर्माण’ अर्थात मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष पूर्व कैबिनेट सचिव नृपेंद्र मिश्रा को बनाया गया है। मिश्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र हैं। राम मंदिर कार्य पर मोदी ने नजर रखी हुई है और इसके लिए कालावधि निश्चित कर ली गई है।

शिवसेना के अनुसार, पीएम मोदी के हाथ से राम मंदिर की भूमि पूजन होगा। ये तो ठीक है लेकिन सोनिया गाँधी, ममता बनर्जी, मुलायम सिंह यादव, नीतीश कुमार और शरद पवार जैसे देश के बड़े नेताओं को भूमि पूजन के कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाना गलत है। अगर ऐसा हुआ तो ये एक पार्टा का ही कार्यक्रम होकर रह जाएगा।

बता दें कि शिवसेना प्रमुख महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी संभालने के बाद आज पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इसकी जानकारी खुद शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने ट्वीट के जरिए दी है। शिवसेना ने इस मुलाकात को शिष्टाचार की भेंट करार दिया है।

नसबंदी के लिए 44 साल पहले पहुँच गए कमलनाथ: नौकरी जाने की धमकी का सुनाया फरमान

परिवार नियोजन अभियान में पुरुषों की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए कॉन्ग्रेस शासित राज्य मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए अजीब फरमान जारी हुआ है। इस फरमान के अनुसार हर स्वास्थ्य कर्मचारी को प्रति महीना 5 से 10 नसबंदी करने का लक्ष्य दिया गया है, जिसे पूरा न करने पर सरकार ने उन्हें नो-वर्क, नो-पे के आधार पर वेतन न देने की चेतावनी दी है। साथ ही कहा है कि जो भी हेल्थ वर्कर 2019-20 में नसबंदी के लिए एक भी आदमी को जुटाने में असफल पाया जाए, उससे उसका वेतन वापस ले लिया जाए, और उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्त दे दी जाए।

सरकार द्वारा आए इस फरमान को सुनने के बाद कर्मचारियों में रोष में है। उनका मत है कि वो जिले के हर घर-घर में जाकर जागरूकता अभियान चला सकते हैं, लेकिन किसी की जबरन नसबंदी नहीं कर सकते। जबकि एनएचएम की उप निदेशक डॉ प्रज्ञा तिवारी का कहना है कि परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरूषों की कोई भागीदारी नहीं है। उनके अनुसार, “हम यह नहीं कह रहे कि आप पुरूषों की नसबंदी के लिए जबरदस्ती करें। हम चाहते हैं कि वे लोगों को प्रेरित करें। ऐसे कई लोग हैं, जो अपने परिवार को सीमित करना चाहते हैं। लेकिन उनमें जागरूकता की कमी है। यदि आप पूरे एक वर्ष में एक व्यक्ति को प्रेरित नहीं कर सकते तो यह आपकी कार्य के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। ऐसे में करदाताओं के पैसे को वेतन पर खर्च करने का क्या फायदा?”

बता दें कि वर्तमान में मध्य प्रदेश की आबादी 7 करोड़ से अधिक है। प्रदेश में 25 जिले ऐसे हैं, जहाँ टोटल फर्टिलिटी रेट (टीएफआर) 3 से अधिक है, जबकि मप्र में 2.1 टीएफआर का लक्ष्य है। ऐसे में हर साल 6 से 7 लाख नसबंदी ऑपरेशन के टारेगट होते हैं, लेकिन पिछले साल ये संख्या सिर्फ 2514 रही। कोई भी जिला अपना टारगेट पूरा नही कर पाया। इसी आँकड़े के चलते राज्य सरकार ने कर्मचारियों को परिवार नियोजन के अभियान के तहत टारगेट पूरा करने के निर्देश दिए और इसे न पूरा किए जाने पर सेवानिवृत्त देने की चेतावनी दी।।

मध्य प्रदेश में इन आँकड़ों को देखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक छवि भारद्धाज ने भी नाराजगी जताई है। भारद्वाज ने सभी कलेक्टर और सीएमएचओ को पत्र लिखकर कहा है कि प्रदेश में मात्र 0.5 प्रतिशत पुरुष नसबंदी के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। अब ‌विभाग के पुरुषकर्मियों को जागरूकता अभियान के तहत परिवार नियोजन का टारगेट दिया जाए।

उनके इसी पत्र के बाद सीएमएचओ ने पत्र जारी कर कहा है कि यदि टारगेट के तहत काम नहीं किया तो अनिवार्य सेवानिवृत्ति के प्रस्ताव भेजेंगे। जिसे सुनकर कर्मचारियों में आक्रोश है और वो इसका विरोध कर रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, प्रदेश में पिछले 5 वर्षों से नसबंदी के लिए पुरुषों की संख्या घट रही है। 2019-20 के लिए, संख्या 3.39 लाख महिलाओं की तुलना में 20 फरवरी, 2020 तक 3,397 थी। जबकि 2015-16 में, राज्य में 9,957 पुरुष नसबंदी की गई। बाद के तीन वर्षों में, संख्या क्रमशः 7270, 3719 और 2925 थी।

इंदौर की सीएम डॉ प्रवीण जदिया का कहना है कि यह पहली बार है कि सरकार द्वारा ऐसा कोई परिपत्र जारी किया गया है। इंदौर का कुल लक्ष्य 22,500 था और लगभग 19,500 नसबंदी की गई हैं, लेकिन जिले में 2,250 पुरुषों की नसबंदी के लक्ष्य को पूरा करने की संभावना नहीं है।

गौरतलब है कि आज कॉन्गेस के शासनकाल और कमलनाथ के मुख्यमंत्री होते हुए मध्यप्रदेश में नसबंदी को लेकर लिया गया ये फैसला आपातकाल के उस काले दौर की यादें ताजा करता है, जब इसी पार्टी के नेता, गाँधी परिवार के बेटे और कमलनाथ के स्कूली दोस्त संजय गाधी ने जनसंख्या रोकने के नाम पर पूरे देश में हाहाकार मचवा दिया था।

संजय गाँधी द्वारा इसका जिम्मा संभाले जाने के बाद घरों में घुसकर, बसों से उतारकर और लोभ-लालच देकर करीब 60 लाख लोगों की नसबंदी की गई थी। इसमें 16 साल के किशोर से लेकर 70 साल के बुजुर्ग तक शामिल थे। कई कुँवारे लड़कों की भी इस दौरान नसबंदी कर दी गई थी। इस दौरान गलत ऑपरेशन और इलाज में लापरवाही की वजह से करीब दो हजार लोगों को अपनी जान तक गँवानी पड़ी थी। कहा जाता है संजय गाँधी का ये मिशन जर्मनी में हिटलर के नसंबदी अभियान से भी ज्यादा कड़ा था, जिसमें करीब 4 लाख लोगों की नसबंदी ही की गई थी।

अमूल्या ने ठुकराई थी पिता की सलाह, लेकिन…14 दिन की हिरासत में

बेंगलुरु में सीएए के ख़िलाफ़ ओवैसी की आयोजित रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वाली लड़की को पुलिस ने हिरासत में लेकर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट के आदेश के बाद आरोपित लड़की को 14 दिन की न्यायायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं आरोपित लड़की के पिता ने कहा है कि उसके गुनाह को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

गुरुवार को बेंगलुरू के फ्रीडम पार्क में CAA के खिलाफ हुई रैली में पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाने वाली लड़की अमूल्य लियोन के खिलाफ बेंगलुरु पुलिस ने देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। वहीं पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया है कि आरोपित महिला को पुलिस पूछताछ के बाद 14 दिन की न्यायायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

दरअसल गुरुवार को बेंगलुरु में सीएए के खिलाफ विशाल रैली का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी लोगों को संबोधित करने के लिए मंच पर मौजूद थे, लेकिन इसी बीच अचानक से मंच पर आई अमूल्य नाम की लड़की ने माइक हाथ में लेकर पहले हिंदुस्तान जिंदाबाद और फिर बाद में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा दिए। इसके बाद मंच पर अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया और मंच पर मौजूद लोगों ने लड़की के हाथ से माइक को छीन लिया। इसके बाद भी लड़की बिना माइक के पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाती रही।

वहीं तत्काल हरकत में आई बेंगलुरु पुलिस ने महिला को मंच से हिरासत में ले लिया और उसे अपने साथ नजदीकी थाने ले गई। पुलिस जानकारी के मुताबिक आरोपित लड़की अमूल्य लियोन के ख़िलाफ पुलिस ने धारा 124 ए (देशद्रोह) के तहत मामला दर्ज किया है।

अमूल्या की नारेबाजी पर उसके पिता ने नाराजगी जताई है। अमूल्या लियोन के पिता ने कहा, “मेरी बेटी ने एंटी सीएए रैली में जो किया, वह बिल्कुल गलत था। उसने जो कहा, वह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मैंने कई बार उससे कहा कि वो मुस्लिमों से न जुड़े। उसने मेरी बात नहीं सुनी। मैंने उसे कई बार भड़काऊ बयान नहीं देने के लिए भी कहा, लेकिन उसने एक नहीं सुनी।”

@ShobhaBJP नाम की यूजर ने आरोप लगाते हुए कहा, “यह तथाकथित स्टूडेंट एक्टिविस्ट है, जो अपने छिपे हुए एजेंडे को उजागर करने में लगे हुए हैं। रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाना, ये विरोध CAA के खिलाफ नहीं है, यह एक साजिश है। देश में अशांति पैदा करने के लिए पाक समर्थकों की।”

ओवैसी के मंच से लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, पार्टी नेता ने हिंदुओं के खिलाफ उगला था जहर

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जिस असम को हिंदुस्तान से काटना चाहता था शरजील, 4 दिन की रिमांड पर वहीं पहुँचा

देशद्रोह के आरोपित और जेएनयू के छात्र शरजील इमाम को गुरुवार (फरवरी 20, 2020) को गुवाहाटी की एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया। यहाँ कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए उसे 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। शरजील ने अलीगढ़ में सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान देशविरोधी बयान देते हुए असम को देश से काटने की बात कही थी। जिसके बाद उसको पिछले महीने बिहार में उसके गृहनगर जहानाबाद से गिरफ्तार किया गया था।

गिरफ्तारी के बाद उसके लैपटॉप में विवादित पोस्टर, फोटो और मोबाइल फोन से कई आपत्तिजनक मैसेज बरामद हुए थे। इसके अलावा कुछ अन्य लोगों के नामों का भी खुलासा हुआ था और साथ ही उसके बैंक खातों में विदेशी फंडिंग के संकेत भी मिले थे। बता दें कि एएमयू में 16 जनवरी को आयोजित सभा में शरजील ने कहा था कि अगर 5 लाख लोग संगठित हों तो हम असम से हिंदुस्तान को हमेशा के लिए अलग कर सकते हैं।

जामिया मामले में भी शरजील पर हिंसा भड़काने का आरोप है। जिसके मद्देनजर पिछले दिनों दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उसके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी। इसमें उसकी भूमिका को instigator (दंगा/हिंसा भड़काने वाला) के रूप में बताया गया था। गुवाहाटी लाए जाने से पहले शरजील को दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया था।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ शरजील इमाम के खिलाफ कानून कार्रवाई की प्रक्रिया चालू है। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों ने भी उसके ख़िलाफ़ गुवाहाटी रेलवे स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और अपना विरोध जताया।। बता दें कि इससे पहले इमाम को 18 फरवरी को कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

शाहीन बाग के मास्टरमाइंड शरजील इमाम का होगा वॉयस टेस्ट, देशविरोधी भाषणों से किया जाएगा मिलान
शरजील इमाम के बैंक खातों से मिले विदेशी फंडिंग के संकेत, क्राइम ब्रांच ने शुरू की जाँच
जिन्ना बनना चाहता था शरजील इमाम: मस्जिदों में बँटवाए थे भड़काऊ पर्चे, फोन व लैपटॉप जब्त

चाय से लिट्टी-चोखा तक: लिट्टी-फेस्ट तो बस बहाना है, मनुवाद से लेकर पूँजीवाद जो लाना है

लोभी मीडिया पत्रकारिता के एक मात्र ठेकेदार के शो ‘पाँय-टाँय’ की स्क्रिप्ट हमें मिल गई है। उनको प्रधानमंत्री का लिट्टी-चोखा खाना पसंद नहीं आया। लीजिए आप भी पढ़ लीजिए;

अचानक आपका मन किसी हाट में जाने का करे तो आप क्या करेंगे? हो सकता है आप उठें और हाट बाजार घूमने निकल जाएँ। आपको खाने का मन करे तो खा लें। जरूरी तो नहीं कि आप लिट्टी भी खाएँ तो उसमे दर्शन शास्त्र छुपा हो अथवा चोखे में राजनीति ही छुपी हो। लेकिन, जब प्रधानमंत्री लिट्टी-चोखा खाते हैं, तो उसका कोई न कोई अर्थ निकाला जाना स्वाभाविक है। मन में कई तरह के प्रश्न आते हैं और आने भी चाहिए। प्रधानमंत्री चाहते तो दाल-बाटी या गांकर-भर्ता या दाल-बाफले भी खा सकते थे। लेकिन प्रधानमंत्री अपने लाव-लश्कर के साथ केवल विहार के उद्देश्य से हाट में तो जाते नहीं, उनके मन में बिहार का उद्देश्य हो, ऐसा क्यों नहीं समझा जाना चाहिए?

प्रधानमंत्री लिट्टी-चोखा खा रहे हैं, क्या समाज मे चोखावाद बढ़ता जा रहा है? देश में पहले भी प्रधानमंत्री हुए हैं और मौका मिलने पर कुछ न कुछ खाते रहे हैं। वो खाते तो थे लेकिन लिट्टी-चोखा खाते हुए फोटो नहीं खिंचवाते थे। राजनीति में चोखा अपनी जगह बनाने में लग गया है। चाय से शुरू हुआ प्रधानमंत्री का सफर, पकौड़े पर पहुँचा और अब निशाने पर लिट्टी-चोखा है।

आप लोग ‘पाँय-टाँय’ शो देखते रहिए। हम बताते हैं चोखे में कौन सा धोखा है। सबसे पहले तो प्रधानमंत्री ने जिस दुकान से चोखा खाया उसे कौन चला रहा था? वह किस जात का था? किसी ने बताया नहीं, न ही गोदी मीडिया ने ये सवाल उस दुकान वाले से पूछा। कहीं वो संघ के ही लोग तो नही थे? कहीं भाजपा के किसी कार्यकर्ता ने ही दुकान तो नहीं खोल रखी है?

ऐसे प्रश्न पूछे जाने चाहिए जो नहीं पूछे गए। तस्वीर देखने से पता चलता है कि प्रधानमंत्री ने प्लेट बाएँ हाथ में पकड़ रखी है। प्लेट किसी टेबल पर भी रख सकते थे, लेकिन शायद मकसद कुछ और रहा होगा। हो सकता है सिर्फ लिट्टी के साथ फोटो खिंचवाना चाहते हों। लेकिन क्या यह नहीं पूछा जाना चाहिए कि फोटो खिंचवाने के लिए लिट्टी-चोखा खाने भर से उन तमाम ग़रीबों को कुछ राहत मिलेगी जो रोज ही लिट्टी-चोखा खाते हैं? वो लोग मजबूरी में खाते हैं और पूँजीवाद के एक छोर पर फाइव स्टार खाट पर बैठे हुए प्रधानमंत्री सेवन स्टार लिट्टी-चोखा खा रहे हैं।

हमारे कृषि और अन्य सभी विषयों के विशेषज्ञ विनोदवा का कहना है कि चोखा खाते हुए प्रधानमंत्री स्वाद तो लेते हैं लेकिन उन्हें यह ध्यान नहीं आता कि वह बैगन, जिसका चोखा बनाया गया है, किसी ग़रीब किसान ने उगाया होगा, उसके हुनर का क्या? क्या हुनर हाट में उसे एक-दो एकड़ जमीन नहीं दी जा सकती थी? क्या हो जाएगा अगर इंडिया गेट पर खाली पड़ी जमीन पर बैगन, टमाटर और आलू उगाने के लिए किसानों को अनुमति मिल जाए?

उनका कहना सही है, यह हुनर हाट जैसे आयोजन पूँजीवाद का दिखावा मात्र हैं। बहकावे में मत आइए। क्या किसी ने उस लिट्टी-चोखा का भाव पूछा? हमने अपनी फैक्ट चेक करने वाली वेबसाइट ‘फॉल्ट न्यूज़’ को पड़ताल पर लगाया। जल्द ही जाने-माने व्यर्थशास्त्री धूरा एक यूट्यूब वीडियो भी लेकर प्रस्तुत होंगे। लेकिन तब तक उनकी पड़ताल से जो निकलकर आया है, उसे मोटा-मोती आपको बता दें;

उड़ती-उड़ती खबर आई है कि लिट्टी में जो सत्तू भरा गया था, ख़ास तौर पर बनवाया गया था। लिट्टी को सोने की सिगड़ी में चाँदी के अंगारों पर सेका गया था। दोने में जिस चटनी में डुबोकर प्रधानमंत्री लिट्टी खा रहे हैं, उसमें जो धनिया डाली गई है, वो बहुत महँगी है, उसकी कीमत लगभग 0.00060 लाख रुपए किलो बताई जाती है और उसे खाने से चेहरे पर चमक आ जाती है। मन हराभरा रहता है। ‘फॉल्ट न्यूज़’ के हवाले से खबर तो ऐसी आ रही है कि उसमें गुजरात की आनंद डेरी की एक खास गाय के दूध का घी डाला गया था। उसकी कीमत भी लाखों मे है।

घी कम से कम 0.00600 से 0.00800 लाख रुपए प्रति किलो होने की बात सामने आ रही है। बताइए किस ग़रीब को ऐसा घी मिलता है? प्रधानमंत्री घी मे डूबी हुई लिट्टी खाकर कौन सा संदेश देना चाहते हैं? सब नेता घी खाएँगे और जनता हुनर हाट मे घुमते हुए दूर से ही सूँघती रहे? लिट्टी जब उस लाखों के घी में ‘डुबुक डुबुक डुबुक डूड़ो’ करते हुए डूब जाती होगी, तब उसे अर्थव्यवस्था का ध्यान कहाँ से आता होगा? उसे तो घी पीने को मिल गया।

आपको उस प्लेट को गौर से देखना चाहिए जिसमें प्रधानमंत्री ने बड़ी चतुराई से एक प्याज भी रखवाई है। शायद कहना चाहते हों- देखो अब प्याज तीस रुपये किलो मिल रहा है। जैसे दीवार बनाकर ट्रंप से झुग्गी छुपाने की जद्दोजहद चल रही है, वैसे ही लहसुन को चतुराई से छिपा लिया गया। लहसुन जो NRC के डर से दो सौ रुपए किलो बिक रहा था, अब भी दो सौ रुपए किलो ही बिक रहा है, इसलिए प्लेट में रखवाया ही नहीं। यही पूँजीवाद है। यही इस देश की विडंबना है।

एक पक्ष यह भी है कि बिहार में चुनाव आने वाला है और लिट्टी खाकर बिहार के प्रचार की शुरुआत हो चुकी है। इतनी जल्दी प्रचार शुरू करना कहाँ का न्याय है? जनता को अभी से चुनाव में झोंक देने की साजिश है यह। अब बिहार मे इतने लंबे समय तक कौन धरने पर बैठेगा? जब घर से निकले ही थे तो थोड़ा आगे शाहीन बाग मे भी जा सकते थे लेकिन वहाँ नहीं गए। वहाँ बैठे हुए लोग प्यार से बुला रहे हैं, लेकिन लिट्टी-चोखा खा रहे प्रधानमंत्री की तरफ से उत्तर नहीं आ रहा है।

शाहीन बाग़ के लोग तो अब मनुवादी होते हुए कह रहे हैं, “हम देवता हैं, आकर हमारी पूजा करो तो हम मान जाएँगे। लेकिन आकर पूजा तो करो।” और प्रधानमंत्री के समर्थक उन्हे बार बार कह रहे हैं, “बुलाती है, मगर जाने का नहीं।” इस पर प्रधानमंत्री एकदम ‘सख़्त’ हुए जा रहे हैं। वो पिघलने का नाम ही नहीं ले रहे।

अब तो शाहीन बाग़ का संचालन करने वाली कमेटी भी सामने आ गई है। तीस्ता जी से तो प्रधानमंत्री का पुराना रिश्ता है। अब वो शाहीन बाग़ को चला रही हैं तो क्या बुरा है? उन्होंने अच्छे-खासे NGO सालों तक चलाए हैं। क्या हुआ अगर थोड़े पैसे भी बना लिए। मान लिया जाए कि तीस्ता सीतलवाड़ प्रधानमंत्री से बेहिसाब चिढ़ती हैं और उन्हें गिराने के लिए कुछ भी कर सकती हैं। शाहीन बाग़ के करेले में तीस्ता सीतलवाड़ नाम की नीम चढ़ी हुई है, लेकिन प्रधानमंत्री वहाँ चले जाएँगे तो क्या हो जायेगा? वो लोग थोड़ा झुकाकर बेइज्जत ही तो करना चाहते हैं।

शाहीन बाग़ को कुल मिला कर प्रधानमंत्री ने अपनी लिट्टी-चोखा की प्लेट में रखी हुई हरी मिर्च की तरह ही नज़रअंदाज़ कर दिया। हरी मिर्च बड़ी उम्मीद से प्लेट मे पड़ी रही कि प्रधानमंत्री खाएँगे। लेकिन उन्होने खाई नहीं। हरी मिर्च को मुँह से लगा भर लेते तो तसल्ली हो जाती। हाथ में मिर्च लेकर फोटो ही खिंचवा देते।

यही इस मिर्च के जीवन की विडंबना है। आप लोग ऐसी जगहों पर जाने से बचिए, कहीं ऐसा न हो कि आप प्रधानमंत्री की किसी योजना का शिकार हो जाएँ और सड़क के किनारे बीस रुपए में मिलने वाली लिट्टी को साठ रुपए में खा आएँ और फिर आप गाली देते रहें। हाँ, बिरयानी मुफ्त है। इसलिए अभी बिरयानी खा आइए। सैर-सपाटा भी हो जाएगा।

बुद्धिजीवियों का कहना है देश में बुद्धि की भारी कमी हैं आजकल। जरूरी है कि लिट्-फेस्ट का आयोजन किया जाए, जहाँ हम भड़ास निकाल सकें, और अपनी पुस्तकें बेच सकें। लेकिन सरकार का ध्यान लिट्-फेस्ट की जगह लिट्टी-फीस्ट पर है। बुद्धिजीवी जाएँ तो कहाँ जाएँ? आप लोग सोचिए, लेकिन लिट्टी पर ज्यादा ध्यान मत दीजिए वरना वोट बीजेपी को चला जाएगा।

पवार से हुई अनबन तो उद्धव को याद आए ‘बड़े भाई’, दिल्ली आकर मोदी से करेंगे गुफ्तगू

बीजेपी के साथ दशकों पुराना गठबंधन तोड़ उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उन्होंने कहा था कि बड़े भाई से मिलने दिल्ली जाएँगे। लगता है मुलाकात की वह घड़ी आ गई है। शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने खुद ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

राउत ने बताया है कि उद्धव शुक्रवार को दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात की वजह नहीं बताई गई है। लेकिन, सीएम बनने के बाद दिल्ली की अपनी पहली यात्रा पर उद्धव ऐसे वक्त में आ रहे हैं जब एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के साथ अनबन की खबरें चर्चा में हैं। इससे महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मियॉं अचानक से तेज हो गई हैं।

शिवसेना ने महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी की सरकार बनाई थी। 28 नवंबर को इसके मुखिया के तौर पर उद्धव ने शपथ ली थी। उन्हें सीएम बनाने में पवार की अहम भूमिका मानी जाती है। लेकिन, भीमा-कोरेगॉंव के मसले पर दोनों के बीच तल्खी बढ़ गई है। उद्धव ठाकरे ने एल्गार परिषद की जाँच NIA को सौंपने को मँजूरी दी थी, जिस पर पवार खुलकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।

पवार के दबाव के बावजूद उद्धव ने इस मसले पर पीछे नहीं हटने के उनको स्पष्ट संकेत दिए हैं। इसके अलावा नागरिकता संशोधन कानून CAA को लेकर भी पवार और उद्धव के मतभेद सामने आ चुके हैं। उद्धव ने राज्य में सीएए लागू करने का इशारा करते हुए कहा था, “CAA और NRC दोनों अलग है। NPR भी अलग है। अगर CAA लागू होता है तो इसके लिए किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। NRC अभी नहीं है और इसे राज्य में लागू नहीं किया जाएगा।” इसे खारिज करते हुए शरद पवार ने कहा था, “ये महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे का अपना नजरिया है, लेकिन जहाँ तक एनसीपी की बात है, हमने इसके खिलाफ वोट किया है।”

उद्धव की दिल्ली यात्रा से पहले कैबिनेट मंत्री के दर्जे वाले दो शिवसेना नेताओं ने अपने पद से इस्तीफा भी दिया था। इस्तीफा देने वाले नेता हैं, सांसद अरविंद सावंत और विधायक रविंद्र वायकर शामिल हैं। इनके इस्तीफे पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है। सावंत को उद्धव ने राज्य की संसदीय समन्वय समिति का प्रमुख नियुक्त किया था। तीन सदस्यीय इस कमेटी का गठन खुद मुख्यमंत्री ने किया था। इसका प्रमुख होने के नाते सावंत को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था। वहीं, वायकर को मुख्यमंत्री कार्यालय में प्रमुख समन्वयक बनाया गया था जिसे कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा हासिल था।

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में भी उद्धव ने भविष्य में दोबारा बीजेपी से गठबंधन के संकेत दिए थे। शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि भविष्य में भाजपा के साथ साझेदारी हो सकती है। उन्होंने कहा था, “मैं ऐसा नहीं कह रहा हूँ कि हम भविष्य में उनके (भाजपा) साथ गठबंधन नहीं करेंगे।” उन्होंने विरोधी विचारधारा की पार्टी एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि पिता बाला साहेब से किए वादे को पूरा करने के लिए उन्होंने किसी भी हद तक जाने का फैसला किया था। उद्धव का कहना है उन्होंने पिता से किसी शिवसैनिक को राज्य का सीएम बनाने का वादा किया था। ठाकरे ने कहा, “जब मुझे महसूस हुआ कि भाजपा के साथ रहकर अपने पिता से किया गया वादा पूरा नहीं किया जा सकता, तो मेरे पास इसे स्वीकार करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।”

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ओवैसी के मंच से लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, पार्टी नेता ने हिंदुओं के खिलाफ उगला था जहर

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के मंच से पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जाने की घटना सामने आई है। बेंगलुरु में गुरुवार को ओवैसी ने CAA विरोधी रैली की। इसी दौरान एक लड़की मंच पर चढ़ गई और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने लगी। इससे पहले एक विडियो सामने आया था जिसमें AIMIM का पूर्व विधायक वारिस पठान हिंदुओं को धमका रहा था।

हालॉंकि पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगते ही रैली में हंगामा मच गया। ओवैसी के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं। नारे लगाने वाली लड़की को वहाँ मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने जबरन मंच से उतारा। इससे पहले ओवैसी और उनके साथी लड़की से नारेबाजी बंद करने के लिए कहते रहे। लेकिन लड़की नहीं रुकी और उसने मंच पर जमकर हंगामा किया।

ओवैसी ने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में नागरिकता कानून के विरोध में रैली आयोजित की थी। लड़की ओवैसी के मंच पर पहुँची और माइक पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने लगी। जब मंच पर मौजूद लोगों ने उससे माइक छीनने की कोशिश की तो लड़की ने ‘हिन्दुस्तान जिंदाबाद’ के भी नारे लगाए। आखिरकार किसी तरह से पुलिस उसे मंच से खींचकर नजदीकी पुलिस स्टेशन ले गई।

लड़की द्वारा ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने वाले इस विडियो के वायरल होने के बाद इस रैली का ही एक पूरा विडियो शेयर किया गया है।

ओवैसी की इस रैली में पाकिस्तान जिंदाबाद नारे लगने के बाद सोशल मीडिया पर यह विडियो तेजी से शेयर किया जा रहा है। आज तक के पत्रकार रोहित सरदाना ने फैक्ट चेक करने वालों पर व्यंग्य करते हुए लिखा है कि इससे पहले कि जनता इसे कुछ और ही समझ ले, इसका फैक्ट चेक कर लो।

रोहित सरदाना ने लिखा है- “अरे अरे अरे! ‘फ़ैक्ट चेक’ करो भाई! जल्दी करो, इसके पहले कि पब्लिक कुछ और मान ले…बोल दो, लड़की ‘चंदा मामा दूर के’ बोल रही थी!”

इस वीडियो के सामने आने से पहले ही AIMIM के पूर्व एमएलए वारिस पठान के भाषण का एक विडियो सामने आया था। यह विडियो गुलबर्ग रैली के दौरान दिए भाषण का था, जिसमें वारिस पठान सीएए के ख़िलाफ़ बोलते हुए वहाँ मौजूद भीड़ को मोदी-शाह के अलावा हिंदुओं के ख़िलाफ़ भड़काते दिख रहा है। विडियो में वारिस को कहते सुना जा सकता है कि उनकी संख्या अभी 15 करोड़ है, लेकिन ये 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी है। अगर ये 15 करोड़ साथ में आ गए, तो सोच लो उन 100 करोड़ का क्या होगा?

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सीएम योगी के खिलाफ आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट, चाँद कुरैशी गिरफ्तार

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित जेवर से यूपी पुलिस ने चाँद कुरैशी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। वह यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोपित है। उसने फेसबुक पर अभद्र टिप्पणी की थी।

योगी के खिलाफ इस पोस्ट के वायरल होने पर जिले के बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत पुलिस से की थी। मामला सीएम से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने शिकायत पर शीघ्रता से कार्रवाई करते हुए आरोपित चाँद कुरैशी को गिरफ्तार कर लिया। जेवर पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अशोक कुमार ने आरोपी के गिरफ्तार होने की पुष्टि की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार जेवर के भाजपा मंडल महामंत्री रोहित, मंडल उपाध्यक्ष प्रिंस भारद्वाज की ओर से की गई शिकायत में कहा गया है कि जेवर निवासी चाँद कुरैशी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट लिखी। साथ ही उस पर माहौल खराब करने की कोशिश का भी आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी चाँद कुरैशी ने प्रोफाइल पर दो फोटो अपडेट की जिसमें मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी की दूसरे फोटो से तुलना करते हुए अभद्र टिप्पणी की गई।

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आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर चली जेसीबी, दीवार ढाह प्रशासन ने मुक्त कराई सरकारी जमीन

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी नेताओं के दिन कुछ ख़ास अच्छे नहीं चल रहे हैं। एक ओर जहाँ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के मंच पर ‘जय श्री राम‘ के नारे लगा जनता सवाल दाग रही है तो वहीं उनकी पार्टी के बदजुबान सांसद आजम खान की यूनिवर्सिटी पर प्रशासन जेसीबी चला रहा है।

लंबे अरसे से विवाद और मुकदमों में चल रही उत्तर प्रदेश के भू-माफिया आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की दीवार पर बृहस्पतिवार (फरवरी 20, 2020) दोपहर आखिरकार प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया गया। आजम उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित इस यूनिवर्सिटी के कुलपति हैं। यह कार्रवाई प्रशासन की तरफ से चकरोड प्रकरण में की गई। प्रशासन द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी की दीवार को कई जगह से जेसीबी मशीन से तोड़कर उसके अंदर कब्जा किए गए सरकारी चकरोड से कब्जे को हटाया गया है। इस यूनिवर्सिटी में चकरोडों पर अवैध कब्जे का मामला चल रहा था। अधिकारियों ने इस घटना के संबंध में जौहर यूनिवर्सिटी प्रशासन को पहले ही नोटिस जारी कर दिया था। इस मामले में तीन थानों की फोर्स ने मिलकर 17 बीघा जमीन पर बनी तीन मीटर दीवार को तोड़कर रास्ता बनाया।   

दरअसल, चकरोड की जमीन को आजम खान ने नियम विरुद्ध तरीके से ग्राम पंचायत की जमीन के साथ बदल कर कब्जा कर लिया था। उस पर ऊँची-ऊँची दीवारें बना ली थी। जिलाधिकारी का कहना है कि दीवार गिराए जाने संबंधी कार्रवाई नियमानुसार लखनऊ राजस्व बोर्ड के आदेश पर की गई है। इन पर भू-माफिया आजम खान ने अवैध रूप से निर्माण कर लिया था, जिसे जेसीबी द्वारा ध्वस्त किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रामपुर के जिला अधिकारी ने बताया कि यूनिवर्सिटी की दीवार गिराकर कुछ कब्जा हटा दिया गया है और सरकारी चकरोड की जमीन से अभी दो बड़ी बिल्डिंगों को हटाना बाकी है। जिला अधिकारी ने यह भी बताया कि उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी प्रशासन को तीन दिन का समय दिया है कि वह खुद अवैध निर्माण को हटा ले, ऐसा न करने पर उनकी टीम नियमानुसार कार्रवाई करेगी।

गौरतलब है कि आजम खान की जौहर यूनिव​र्सिटी की यह दीवार आलियागंज गाँव की तरफ बनी थी। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व के दौरान ही सरकारी चकरोड की जमीन मोहम्हमद अली जौहर यूनिवर्सिटी को देकर इसके बदले ग्राम पंचायत को दूसरे स्थान पर जमीन उपलब्ध करा दी गई थी। बाद में उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने जमीन की इस अदला-बदली को गलत माना था और इसे खाली करने का आदेश दिया था।