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जाकिर नाइक को शरण दी, भारत के खिलाफ उगला जहर: मलेशियाई PM को देना पड़ा इस्तीफा

मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने आज अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 94 वर्षीय महातिर ने सोमवार (फरवरी 24, 2020) को अपना त्यागपत्र देश के राजा को सौंप दिया। देश के प्रधानमंत्री कार्यालय ने खुद इसकी सूचना दी। मलेशिया के पीएमओ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ओर से सरकार गिराने की कोशिशों के बीच प्रधानमंत्री ने अपना इस्तीफा किंग को सौंप दिया है।

विश्व के सबसे उम्रदराज नेता 94 वर्ष के महातिर ने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा सरकार गिराने की कोशिशों के बाद यह फैसला लिया है। इस चौंकाने वाली खबर आने से 24 घंटे पहले तक मलेशिया की राजनीति में काफी नाटक देखने को मिला था, जिसमें ‘पैक्ट ऑफ होप’ गठबंधन के प्रतिद्वंद्वी और विपक्षी नेता नई सरकार बनाने का प्रयास करते नजर आए थे। इसके अलावा ये भी खबर थी कि गठबंधन महातिर के संभावित उत्तराधिकारी अनवर को बाहर करने की योजना बना रहा था और उनकी पार्टी के ज्यादातर सांसद किसी भी वक्त उनके प्रधानमंत्री बनने की राह में परेशानी खड़ी करने की फिराक में थे।

बता दें, कुछ समय पहले तक अनवर और महातिर के बीच संबंध अच्छे नहीं थे, लेकिन 2018 के चुनावों से पहले उनमें मित्रता हो गई थी। महातिर ने उनके पूर्व दुश्मन को सत्ता सौंपने की बात कई बार दोहराई थी। मगर, सोमवार की सुबह कोशिशें बेकार होती दिखीं जब उनके कार्यालय ने घोषणा की कि महातिर ने मलेशिया के प्रधानमंत्री के तौर पर दोपहर एक बजे राजा को अपना इस्तीफा भेज दिया है। अब आगे क्या होगा इस बारे में फिलहाल कुछ भी स्पष्ट नहीं है।

उल्लेखनीय है कि हिंदुओं के ख़िलाफ़ जहर उगलने वाले भगोड़े जाकिर नाइक को शरण देने वाले मलेशिया के प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए महातिर पिछले कुछ समय से भारत के खिलाफ जमकर जहर उगल रहे थे। मुस्लिमों का नया मसीहा बनने की कोशिश में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में जम्मू-कश्मीर पर गलतबयानी करते हुए भारत पर कई आरोप मढ़े थे। रोहिंग्याओं पर कथित अत्याचार का रोना रोया था। लेकिन, चीनी बर्बरता झेलने को मजबूर उइगरों को उनके ही हाल पर छोड़ दिया था।

महातिर ने अपने भाषण में कहा था कि जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण कर क़ब्ज़ा किया गया। संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव और कानूनों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत को शांतिपूर्ण तरीके से समस्या का समाधान करने के लिए पाकिस्तान के साथ काम करना चाहिए। इतना ही नहीं, मलेशिया ने पिछले दिनों ही पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर अंग्रेजी में एक इस्लामी टीवी चैनल शुरू करने का भी फैसला किया था।

सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकारों ने शाहीन बाग़ पर सौंपी रिपोर्ट, सुनवाई 26 फरवरी तक टली

शाहीन बाग़ सड़क बंदी के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने 26 फरवरी तक टाल दी है। इस मामले में कोर्ट द्वारा नियुक्त वार्ताकारों ने अपनी रिपोर्ट आज सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंप दी।

रिपोर्ट्स के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकार, एडवोकेट साधना रामचंद्रन तथा संजय हेगड़े ने आज अपनी रिपोर्ट एसके कौल व केएम जोसेफ की बेंच को सौंपी। सुप्रीम कोर्ट नागरिकता कानून के नाम पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण लग रहे जाम वगैरह से जुड़ीं समस्यायों पर सुनवाई कर रहा है।

इसके पहले रविवार को पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त रहे वजाहत हबीबुल्लाह ने कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में कहा था कि शाहीन बाग़ प्रदर्शनकारियों को वहाँ से “जबरन” कहीं और शिफ्ट करने से प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। उसने अपने हलफनामे में यह भी जोड़ा था कि पुलिस ने जो बैरिकेडिंग लगा रखीं हैं ट्रैफिक जाम की समस्या उसके कारण है।

हबीबुल्ला के अनुसार कई सड़कें ऐसी हैं जिनका शाहीन बाग़ से कोई लेना देना नहीं है फिर भी उन्हें दिल्ली पुलिस ने बेमतलब ब्लॉक किया हुआ है जिसके कारण सारा ट्रैफिक अस्त व्यस्त है और दोष शाहीन बाग़ के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर डाला जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ़ किया है कि इस स्टेज पर वो वार्ताकारों द्वारा फाइल की गई रिपोर्ट को केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और याचिकाकर्ताओं के साथ साझा नहीं कर सकती।

इंडोनेशिया की इस्लामिक यूनिवर्सिटी में BJP पर होगी पढ़ाई

इंडोनेशिया की इस्लामिक यूनिवर्सिटी ने भारतीय जनता पार्टी इतिहास के बारे में जानकारी देने वाली एक किताब को पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि भारत के आम चुनाव में भाजपा की लगातार दो बार जीत ने सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले इस मुल्क के शिक्षाविदों में पार्टी को लेकर रुचि पैदा कर दी है। यही वजह है कि इस्लामिक यूनिवर्सिटी ने अपने छात्रों को बीजेपी के इतिहास के बारे में पढ़ाने का निर्णय लिया है।

जानकारी के मुताबिक शांतनु गुप्ता की लिखी किताब ‘भारतीय जनता पार्टी- अतीत, वर्तमान एवं भविष्य, विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल की कहानी’ अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग में दक्षिण एशियाई अध्ययन के स्नातक के छात्रों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेगी।

विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग के संकाय सदस्य हदजा मिन फदली ने कहा कि आम चुनाव में भाजपा की दो बार जीत के कारण शिक्षाविदों में पार्टी को लेकर रुचि बढ़ रही है। हदजा ने बताया कि भारत की हालिया यात्रा के दौरान उन्हें किताब के बारे में पता चला। वह ‘इंडिया फाउंडेशन’ द्वारा आयोजित कौटिल्य फेलोशिप कार्यक्रम के लिए भारत आए थे। उन्होंने कहा, “इंडोनेशिया के लोग भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं और इसलिए सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा को समझना महत्वपूर्ण है। हमें उम्मीद है कि भाजपा भी ऐसा ही चाहती है।”

वहीं, जब शांतनु गुप्ता से इंडोनेशिया के विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने के लिए उनकी किताब को चुने जाने पर को लेकर सवाल किया गया तो अपने काम को वैश्विक पहचान मिलना लेखक के तौर पर उनके लिए बेहद संतोषजनक है। बता दें कि शांतनु गुप्ता ने योगी आदित्यनाथ की जीवनी और भारत में फुटबॉल का विकास समेत पाँच पुस्तकें लिखी हैं।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले इंडोनेशिया में पहली हिंदू यूनिवर्सिटी खोली गई थी। इस यूनिवर्सिटी का नाम आई गुस्ती बागस सुग्रीव स्टेट हिंदू यूनिवर्सिटी (UHN) रखा गया है। सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश होने के बावजूद इंडोनेशिया की संस्कृति में रामायण रची-बसी है। यहॉं की रामलीला दुनियाभर में प्रसिद्ध है।

मौजपुर में CAA विरोध में गोलीबारी, एक हेड कॉस्टेबल की मौत; दस जगहों पर धारा 144 लागू

इधर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का भारत आगमन हुआ, तो दूसरी तरफ नागरिकता कानून के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। दिल्ली के जाफराबाद इलाके में नए नागरिकता कानून के खिलाफ धरने पर बैठे लोग रविवार के बाद सोमवार को फिर से हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने पहले पुलिस पर पथराव किया फिर जाफराबाद में दस गाड़ियों में भी आग लगा दी। इस हिंसा में एक पुलिस कॉन्सटेबल के मरने की भी खबरें आ रहीं हैं। जाफराबाद के अलावा चाँद बाग में भी इन प्रदर्शनकारियों द्वारा कुछ वाहनों में आग लगाने की खबर है।

इसके पहले आज सुबह दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्रर ने मौके पर जा प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की थी लेकिन जब वो नहीं माने तो पुलिस ने हिंसक हो रहे प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस के गोले छोड़े। जाफराबाद में सुबह से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। साथ ही मौजपुर में भी इस प्रदर्शन के कारण ज्यादातर बाजार बंद है, हालाँकि, कुछ दुकानें खुली नजर आ रहीं हैं।

जाफराबाद में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी पिस्टल लेकर पहुँच गया। जानकारी के मुताबिक, उसने 8 राउंड फायरिंग भी की।

नागरिकता कानून के समर्थन और विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों के बीच अब रुक रुक कर हो रही है पत्थरबाजी। प्रदर्शनकारियों के पथराव के चलते आसपास के मकानों के काँच भी टूटे।

प्रदर्शनकारियों से बात करते दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर:

पुलिस कांस्टेबल हुआ घायल

रविवार को हुई जाफराबाद हिंसा के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सोमवार को जानकारी दी थी कि जाफराबाद और मौजपुर, बाबरपुर मेट्रो स्टेशन के प्रवेश व निकास द्वारा बंद कर दिए गए हैं। इन स्टेशनों पर मेट्रो नहीं रुकेगी। रविवार को प्रदशर्नकारियों ने दिल्ली के यमुनापार इलाके में भी चार सड़के बंद कर दी थी जिसके बाद पूर्वी दिल्ली की सड़कें पूरी तरह से जाम हो गई थीं। इसके पहले शनिवार रात को महिलाओं ने जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास वाली मुख्य सड़क बंद कर दी थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार जाफराबाद के मौजपुर मेट्रो स्टेशन के पास रविवार को रुक-रुक कर करीब दो घंटे तक पथराव हुआ। इस बीच पुलिस ने हिंसक प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए आँसू गैस के गोले भी छोड़े, लेकिन वो बेअसर साबित होता रहा। दंगे को बेकाबू होते देख को भारी संख्या में अर्ध सैनिक बल व पुलिस बल बुलाया गया। तब कहीं हालात को काबू में किया जा सका।

सद्दाम ने रिया को प्रेम जाल में फाँसा, शादी के लिए कहा तो माँ के साथ जिंदा जलाया

पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले के हल्दिया में हुगली नदी के किनारे 18 फरवरी को दो शव जली अवस्था में मिले थे। इन शवों की पहचान 40 वर्षीय रमा डे और 22 वर्षीय रिया डे के रूप में हुई है। दोनों मॉं-बेटी उत्तर 24 परगना जिले के न्यू बैरकपुर की रहने वाली थी।

पुलिस ने रविवार (फरवरी 23, 2020) को इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम शेख सद्दाम हुसैन और मंजूर आलम है। सद्दाम ठेकेदार है, जबकि मंजूर उसका कर्मचारी। दोनों दुर्गाचक के रहने वाले हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सोशल मीडिया और कॉल रिकॉर्ड की जॉंच के बाद पुलिस मामले की गुत्थी सुलझाने में सफल रही। बताया जाता है कि सद्दाम के रिया के साथ प्रेम संबंध थे। जब उसने शादी का दबाव डाला तो उसने अपने साथी के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया।

पूर्वी मिदनापुर की एसपी इंदिरा मुखर्जी ने कहा, “जिकुरखली घाट के आसपास के इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों ने 18 फरवरी को हुगली के किनारे से धुआँ निकलता देखा। जब ग्रामीणों ने मौके पर जाकर देखा तो दो शव जले हुए मिले। उन्हें दफनाने के लिए कब्र खोद दी गई थी। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने दो लोगों को भागते हुए देखा। जब तक ग्रामीण घटनास्थल पर पहुँचे तब तक शव लगभग 80 फीसदी जल चुके थे।”

पुलिस ने घटनास्थल पर पहुँचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इंदिरा मुखर्जी ने कहा, “ऑटोप्सी में पता चला कि दोनों शव महिला के हैं और दोनों को जिंदा जला दिया गया।” सद्दाम और मंजूर आलम के सक्रिय तृणमूल कार्यकर्ता होने की बात भी कही जा रही है। हालॉंकि टीएमसी ने इससे इनकार किया है।

स्लोवाकिया में इस्लाम पूर्ण रूप से प्रतिबंधित, मस्जिदें असंवैधानिक; श्रीलंका ने लगाया बुर्का पर बैन

आज के समय में इस्लाम तेजी से दुनिया में अपने पैर पसार रहा है। यह धर्म ना सिर्फ इस्लामिक देशों में, बल्कि भारत जैसे हिंदू प्रधान देश में भी मुस्लिमों की जनसंख्या तेजी से बढ़ती हुई देखी जा रही है। ऐसे में, यूरोप में एक देश ऐसा भी है, जहाँ इस्लाम को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। यूरोप में स्थित स्लोवाकिया (Slovak Republic) नामक देश में मुस्लिमों को कोई अधिकार नहीं दिया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस देश की पार्लियामेंट ने ही इस्लाम पर बैन लगा दिया है। ख़ास बात यह है कि स्लोवाक नेशनल पार्टी (एसएनएस) के इस विधेयक को पक्ष और विपक्ष ने मिलकर दो-तिहाई बहुमत से पारित किया था। यानी अब वहाँ कोई भी नागरिक खुद को मुस्लिम रजिस्टर नहीं करा सकता और स्लोवाकिया में धर्म की लिस्ट में अब इस्लाम का नाम नहीं आएगा।

उनका मानना था कि बढ़ते हुए इस्लामिक कट्टरपंथ और चरमपंथ के पीछे इस्लाम की वह शिक्षा है, जो मस्जिदों और मदरसों के जरिए लोगों के बीच पहुँचकर समाज में नफरत पैदा कर रही है।

2016 में इस्लाम धर्म को स्वीकार न करने वाला स्लोवाकिया दुनिया का पहला देश बन चुका था। यह देश मानता है कि इस्लाम असंवैधानिक है। उस समय स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फीको ने बयान दिया था कि वो इस्लाम को धर्म नहीं मानते और इसीलिए स्लोवाकिया में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं। इसी के साथ उन्होंने अपने देश में किसी भी मुस्लिम को शरण देने से भी इंकार कर दिया था।

इस प्रकार स्लोवाकिया देश सिर्फ अपनी बॉर्डर में सिर्फ ईसाई माइग्रेंट्स को ही आने की इजाजत देता है। यानी, अगर देश की सीमा पार करने की कोशिश कोई मुस्लिम करता है, तो उसे भगा दिया जाता है। इससे साफ़ है कि ये देश मुस्लिमों को सीमा में नहीं आने देना चाहता।

2016 के बाद से ही, स्लोवाक-कानून ने इस्लाम को राजकीय मान्यता प्राप्त धर्म बनना असंभव कर दिया था। जिससे यह देश यूरोप के सभी देशों में इस्लाम के खिलाफ सबसे कठोर कानूनों वाला देश बन गया है। हाल ही के कुछ समय में यूरोप भर में हुए सिलसिलेवार इस्लामी आतंकी हमलों के बाद इस महाद्वीप में मुस्लिम विरोधी भावना घर कर गई है, जिसके चलते वहाँ पर नए अप्रवासी विरोधी दलों का भी जन्म हो रहा है।

ज्ञात हो कि भारत जैसे देश में आज भी नागरिकता संशोधन (CAA) जैसे कानून बहस का विषय बने हुए हैं, जिसमें कि विदेशों से आने वाले हिन्दू शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात कही गई है। बावजूद इसके इसे एक विशेष धर्म के खिलाफ बताने की पूरी योजनाएँ शाहीन बाग़ जैसे विरोध प्रदर्शनों के द्वारा बनाई जा रही हैं।

बता दें कि कुछ पिछले साल ही श्री लंका सरकार ने चेहरा ढँकने वाले बुर्क़ा का प्रयोग बैन कर दिया था। एक इमरजेंसी क़ानून के माध्यम से इस नियम को लागू करते हुए सरकार ने कहा कि किसी भी प्रकार से ऐसी चीजों का सार्वजनिक तौर पर उपयोग प्रतिबंधित रहेगा, जिससे व्यक्ति की पहचान छुपती हो। आपको बता दें कि श्री लंका के अलावा कैमरून, मोरक्को, चाड, ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, गाबोन, फ़्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क और उत्तर पश्चिम चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग में बुर्क़ा पहनने पर प्रतिबंध है।

इस्लामिक चरमपंथियों के बढ़ते भय और लगातार बढ़ते प्रवासी संकट के बीच इस देश के राजनेताओं और विधाई शक्तियों ने इस्लाम धर्म के प्रति रुख में बदलाव लाया है। वर्ष 2016 में स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको की सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा था कि स्लोवाकिया में इस्लाम के लिए कोई जगह नहीं है।

वर्तमान में, स्लोवाकिया एकमात्र ऐसा यूरोपियन यूनियन (EU) सदस्य राज्य है, जहाँ कोई भी वैध आधिकारिक मस्जिद नहीं है। बताया जाता है कि इस देश में मुस्लिम समुदाय किराए के घरों या फिर अस्थायी प्रार्थना घरों में ही मिलते हैं।

हम बड़े मकसद से पैदा हुए हैं, मिलकर करेंगे इस्लामी आतंकवाद का सफाया: मोटेरा में ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दो दिवसीय दौरे भारत दौरे पर सोमवार (फरवरी 24, 2020) सुबह गुजरात के अहमदाबाद पहुँचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहाँ एयरपोर्ट पर उनका गले लगाकर स्वागत किया। इस दौरान अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप भी उनके साथ थीं। ट्रंप दंपती ने साबरमती आश्रम जाकर महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि दी।

इसके बाद मोटेरा स्टेडियम में ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने स्वागत भाषण देकर अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम का आगाज करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि पाँच महीने पहले का इतिहास खुद को दोहरा रहा है। मैंने हाउडी मोदी से अमेरिकी यात्रा की शुरुआत की थी और आज मेरे दोस्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, नमस्ते ट्रंप के लिए अहमदाबाद आए हैं।

मोटेरा स्टेडियम में ‘नमस्ते ट्रंप’ का आगाज करते हुए जहाँ प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक मंच पर हैं। वहीं ट्रंप ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के आतंकवाद का जिक्र करते हुए कहा, “हम आतंक के खिलाफ कड़े एक्शन ले रहे हैं, पाकिस्तान पर भी अमेरिका ने दबाव बनाया है। पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ एक्शन लेना होगा, हर देश को अपने सुरक्षित करने का अधिकार है। अमेरिका और भारत आतंकवादियों को रोकने और उनकी विचारधारा से लड़ने के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध हैं।”

बता दें कि ट्रंप ने हाउडी मोदी कार्यक्रम के दौरान भी पाकिस्तान के इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। ट्रंप ने कहा, “भारत की पूरे विश्व में इस बात के लिए तारीफ की जाती है कि यहाँ लाखों हिन्दू, मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई और यहूदी साथ-साथ प्रार्थना करते हैं। भारत की एकता पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है।” प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। ज्यादातर घरों में लोग गैस पर खाना बना रहे हैं।

ट्रंप ने कहा, “जैसा कि महान धार्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था कि जिस पल मुझे हर इंसान के सामने खड़े होकर उसमें भगवान के दर्शन होते हैं उस पल मैं मुक्त हो जाता हूँ। भारत और अमेरिका में हम ये जानते हैं कि हम किसी बड़े मकसद से पैदा हुए हैं। हम इस असाधारण आतिथ्य को हमेशा याद रखेंगे। भारत हमारे दिलों में एक विशेष स्थान रखेगा। PM मोदी ने ‘चाय वाले’ के रूप में शुरुआत की, उन्होंने चाय बेचने वाले के रूप में काम किया। हर कोई उनसे प्यार करता है लेकिन मैं आपको यह बताता हूँ, वह बहुत सख्त हैं।”

इस दौरान ट्रंप ने कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि कल हमारे प्रतिनिधि भारतीय सैन्य बलों के लिए अत्याधुनिक सैन्य हेलीकाप्टरों और अन्य उपकरणों के लिए 3 बिलियन डॉलर से अधिक के सौदे पर हस्ताक्षर करेंगे।” ट्रंप ने गॉड ब्लेस इंडिया, गॉड ब्लेस अमेरिका और वी लव यू इंडिया बोलकर अपने भाषण को समाप्त किया।

पीएम मोदी ने कहा, “हम सिर्फ इंडो-पेसिफिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की शांति, प्रगति और सुरक्षा में एक प्रभावी योगदान दे सकते हैं। इसलिए मैं मानता हूँ कि राष्ट्रपति ट्रंप का इस दशक की शुरुआत में ही भारत आना एक बहुत बड़ा अवसर है।”

शिव पूजा में शामिल मेयर को मौलवी ने ‘कुफ्र’ घोषित किया, कहा- इन्हें काफिर बुलाएँ, दफनाना भी गुनाह

महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव भगवान की पूजा आराधना में शामिल होना कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम को महँगा पड़ गया। देखते ही देखते इस्लामिक कट्टरपंथी उन्हें निशाना बनाने लगे और कुछ ही देर में उन्हें ‘कुफ्र’ घोषित कर दिया गया।

एक वायरल वीडियो में देखिए-सैयद इब्राहिम सिद्दकी नामक कट्टर मौलवी को कहते सुना जा सकता है कि कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने इस्लाम छोड़ दिया है और शिवरात्रि के पूजा समारोह में शामिल होने के बाद वो मुस्लिम नहीं रह गए।

मौलवी को कहते सुना जा सकता है कि अगर हकीम की मृत्यु होती है, तो इस्लामिक रिवाजों से संस्कार करना गुनाह माना जाएगा, क्योंकि शिवपूजा करके उन्होंने कुफ्र किया है।

गौरतलब है कि शिवरात्रि के दौरान आई वीडियो में देखा गया था कि हकीम शिवलिंग पर दूध और फूल अर्पित कर रहे थे। जिसे देखने के बाद मौलवी ने आरोप लगाया कि हकीम ने इस्लाम छोड़ दिया है और हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करने के लिए, उनके रिवाजों में शामिल होने के लिए हर मुल्फी (इस्लामिक स्कॉलर) उन्हें काफिर बुलाएँ।

मौलवी के अनुसार, हकीम हज के बावजूद, मूर्तियों की पूजा करते रहे और साथ ही नमाज भी अता की, जिसका मतलब साफ है कि वो इस्लाम की इज्जत नहीं करते। इसलिए वे हर मुस्लिम भाई से अपील करते हैं कि हकीम का समाज से बहिष्कार किया जाए। वे दरख्वास्त करते हैं मुस्लिम साथियों से कि अपने मजहब के लिए काम करें और हकीम से दूर रहे।

हैरानी की बात है कि पूरी वीडियो में हिंदू धर्म के ख़िलाफ़ खुलकर जहर उगलने के बाद और हिंदू पूजा में शामिल होने के लिए कोलकाता मेयर के ख़िलाफ़ फतवा जारी करने के बाद मौलवी सिद्दकी को इस बात पर जोर देते सुना जा सकता हैं कि बंगाल धर्म और संस्कृतियों का मेलजोल था और यहाँ किसी को भी इशनिंदा करने से दूर रहना चाहिए।

बंगाल: जलपाईगुड़ी में BJP समर्थकों के घरों को तोड़फोड़ के बाद TMC के गुंडों ने फूँका

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों द्वारा फिर से बीजेपी समर्थकों को निशाना बनाने की खबर आई है। ताजा घटना जलपाईगुड़ी जिले की है। यहॉं टीएमसी के गुंडों ने सात भाजपा समर्थकों के घरों में तोड़फोड़ के बाद आग लगा दी। पुलिस ने सोमवार (फरवरी 24, 2020) को बताया कि सूचना मिलने के बाद आग पर काबू पाने के लिए तुरंत दमकल कर्मियों को मौके पर भेजा गया था।

पुलिस के मुताबिक रविवार (फरवरी 23, 2020) को मैनगुरी इलाके के हुसलूरदंगा गाँव में एक स्थानीय टीएमसी नेता का शव पहुँचने के बाद यह घटना हुई है। भाजपा ने इसके लिए टीएमसी को जिम्मेदार बताया है। हालाँकि राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने आरोपों को खारिज कर दिया है।

सत्ताधारी पार्टी का कहना है कि टीएमसी के मल्लिक हाट बूथ के अध्यक्ष भोमबोल घोष पर 14 फरवरी को हुसलूरदंगा बाजार में धारदार हथियार से हमला किया गया था। शनिवार (फरवरी 22, 2020) को सिलीगुड़ी के एक प्राइवेट अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया। स्थानीय टीएमसी नेता मनोज राय ने आरोप लगाया कि इस हमले में भाजपा कार्यकर्ताओं का हाथ था।

वहीं, भाजपा जिला अध्यक्ष बापी गोस्वामी ने कहा कि घोष का शव रविवार को हुसलूरदंगा लाया गया था। इसके बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं ने सात भाजपा समर्थकों के घरों में तोड़फोड़ की और फिर उसमें आग लगा दी। तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) धेनधूप शेरपा के नेतृत्व में एक बड़ी टुकड़ी को इलाके में तैनात किया गया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में बीजेपी नेता नारायण विश्वास की निर्मम हत्या कर दी गई थी। पहले उनके पैरों पर गोली चलाई और फिर जब वो जख्मी होकर नीचे गिर गए तो हमलावरों ने धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार किए। हमले में गंभीर रूप से घायल हुए बीजेपी नेता को अस्पताल ले जाया गया, जहॉं उन्होंने दम तोड़ दिया। भाजपा ने हत्या का आरोप टीएमसी पर लगाया था।

बम बनाते हुए फूटने से TMC नेता मुस्ताक शेख ने गँवाए दोनों हाथ, बीजेपी की CAA-समर्थन रैली में फोड़ना था लक्ष्य

बंगाल में TMC के गुंडों ने महिला शिक्षक के हाथ-पैर बाँधे, 30 फीट तक घसीटा: देखें Video

बंगाल: BJP सांसद अर्जुन सिंह की कार पर फेंका बम, विजयवर्गीय बोले- इन्हें खदेड़ने के लिए NRC जरूरी

ट्रंप ने लिखा- मेरे अच्छे दोस्त मोदी, कॉन्ग्रेसी मुखपत्र नेशनल हेराल्ड ने देश को ही बता दिया- Shit Hole

अमेरिकी राष्ट्रपति सोमवार को भारत पहुॅंचे। अहमदाबाद एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गले लगाकर उनका स्वागत किया। इसके साथ अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी पत्नी साबरमती आश्रम पहुॅंचे। दोनों ने पीएम मोदी के साथ राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधी को श्रद्धांजलि दी। साबरमती आश्रम के विजिटर बुक में ट्रंप ने लिखा, “मेरे महान दोस्त मोदी, इस शानदार सफर के लिए शुक्रिया।” ट्रंप 36 घंटे भारत में रहेंगे। इस दौरान वे आगरा और दिल्ली भी जाएँगे। उनके इस दौरे में कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौता होने की उम्मीद है।

भारतीय जमीन पर लैंड करने से पहले ट्रंप ने हिंदी में ट्वीट कर संदेश भेजा था। अपनी इस यात्रा को लेकर वे पिछले कई दिनों से उत्सुकता जगा रहे थे। बावजूद इसके कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड ने उनकी यात्रा से पहले एक बार फिर अपनी नीचता प्रदर्शित की। उसने आकार पटेल का एक घटिया लेख छापा है। इसकी हेडलाइन है -India is the only poor and ‘shit-hole country’ that Donald Trump has ever visited

हेडलाइन से समझा जा सकता है कि लेख लिखने वाला शख्स न केवल डोनाल्ड ट्रंप को नपसंद करता है, बल्कि भारत के लिए घटिया सोच रखता है और ऐसे शख्स के विचारों को अपने मुखपत्र में जगह देना कॉन्ग्रेस की नीयत पर सवाल उठाता है।

अपने लेख की शुरुआत से ही पटेल यह समझाने में लग जाता है कि आखिर क्यों ट्रंप भारत को ‘शिट होल’ समझेंगे। लेखक अपने 30 दशक पुराने अनुभव के आधार पर बताता है कि जब वो 16 साल का था और अमेरिका के गाँव में रहता था, तो वहाँ एक डेस्क था, जिस पर एक्सचेंज स्टूडेंट प्रोग्राम चलता था, जिसके मुताबिक अमेरिकन छात्रों को विदेश जाने का मौक़ा मिलता और अन्य देशों के बच्चों को वहाँ आने का, लेकिन किसी अमेरिकन छात्र ने उस प्रोग्राम में अपना नाम नहीं लिखवाया, क्योंकि वे कहीं जाना ही नहीं चाहते थे।

हैरत की बात है कि पिछले 30 सालों में विश्व में बहुत कुछ बदला, विकासशील देशों में कई बदलाव आए। लेकिन फिर भी आकार पटेल अपने इस 30 साल पुराने अनुभव को आज के परिप्रेक्ष्य में ये समझाने के लिए गढ़ते हैं कि अमेरिकन लोगों को घूमना-फिरना पसंद ही नहीं है… इसके बाद आकार अपने लेख में ये भी समझाते हैं कि आखिर वो ट्रंप को लेकर ऐसा क्यों सोचते हैं कि वो भारत को ‘शिट होल’ समझेंगे।

आकार अपने लेख में लिखते हैं,” डोनाल्ड ट्रंप जबसे राष्ट्रपति बने हैं उन्होंने 20 देशों का भ्रमण किया। इनमें ज्यादातर यूरोप के देश शामिल हैं। वे फ्रांस 4 बार गए। दरअसल, उन्हें विकासशील देश पसंद नहीं हैं और वह वहाँ के प्रवासियों को भी नहीं चाहते, उन्हें वह शिट होल समझते हैं और अपनी इस शिट होल वाली लिस्ट में वो भारत को भी लेते हैं।”

आकार की कुंठा देखिए, वह कहते हैं कि भारत पहला गरीब देश है जिसका भ्रमण ट्रंप करने वाले हैं और भारत पहुँचकर वह पहले गरीब देश को देखेंगे। उनके लिए ये देखना दिलचस्प होगा कि भारत दौरे के बाद ट्रंप के अनुभव कैसे होंगे, ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रंप कड़वी चीजें कहने से कभी नहीं हिचकते।

इसके बाद आकार पटेल अपने लेख में जमकर कॉन्ग्रेस की तारीफों के पुलिंदे बाँधते हैं। उनके शब्द चयन और वाक्य संरचना से लेकर व्यक्ति विशेष के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विशेषणों तक से अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश की छवि धूमिल करने के लिए कॉन्ग्रेस का मुखपत्र और उसमें लिखने वाले स्तंभकार किस प्रकार आतुर हैं।

आकार अपने लेख में ट्रंप से पहले भारत दौरे पर आए अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपतियों के बारे में बात करते हैं। उनकी यात्राओं के दौरान यादगार रहे बिंदुओं को उजागर करते हैं। लेकिन इसी बीच वो भाजपा नेता रामदास अठावले के संसद में दिखाए बर्ताव को इंगित करने से नहीं चूकते और न ही वाजपेयी सरकार को ‘हिंदुत्ववादी सरकार’ कहने से।

वे बताते हैं कि जब क्लिंटन भारत दौरे पर आए थे, उस समय में भारत में हिंदुत्व पार्टी का शासन था, लेकिन क्लिंटन के नेतृत्व में अमेरिका में लिबरल पार्टी का नेतृत्व था। मगर ये स्थिति बदल गई जब बुश भारत दौरे पर आए, क्योंकि उस समय भारत में लिबरल पार्टी थी और अमेरिका में कंजरवेटिव पार्टी। ध्यान देने वाली बात है कि जिस समय में बुश भारत आए थे, उस समय मनमोहन सरकार थी, जिसका मतलब साफ है कि आकार अपने पाठकों को साफ संदेश देना चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस देश की लिबरल पार्टी है, लेकिन भाजपा (वाजपेयी जी के नेतृत्व में हो या फिर मोदी के नेतृत्व में) हिंदुत्ववादी पार्टी है।

अपने लेख में वे बराक ओबामा के दौरे का भी जिक्र करते हैं और कहते हैं कि ओबामा 2 बार भारत दौरे पर आए। एक बार तब जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे और दूसरी बार तब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें चाय सर्व की। बता दें, यहाँ नरेंद्र मोदी द्वारा चाय सर्व की बात किसी घटना को याद दिलाने के इरादे से उल्लेखित नहीं की गई, बल्कि यहाँ नरेंद्र मोदी की छवि पर तंज कसने के लिए इसका प्रयोग हुआ।

इसके बाद अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति को मिडिल क्लास मैन बताया गया और ये भी कहा गया कि ओबामा ने वो जूते पहने थे, जिसका तला तक दोबारा लगा था। आकार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहते हैं कि उन्हें हैरानी होती है कि ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों को सूटबूट में देखकर क्या सोचा होगा।

गौरतलब है कि नेशनल हेरॉल्ड के जरिए आकार पटेल जिस झूठ का आगे प्रचार-प्रसार करने में जुटे हैं और जिन बराक ओबामा को मध्यमवर्गीय बताकर नरेंद्र मोदी के सूट-बूट पहनने पर तंज कस रहे हैं, उन ओबामा की कुल संपत्ति 40 मिलियन डॉलर है। इसमें से 20 मिलियन डॉलर तो उन्होंने केवल अपनी सैलरी, बुक रॉयलटी और संबोधनों से एकत्रित की है।

लेख में ओबामा को एक पैराग्राफ में बुद्धिजीवी बताया जा रहा है और बताया जा रहा है कि वे मनमोहन सिंह को अपना गुरु कह चुके हैं। लेकिन ट्रंप और मोदी की बात करते हुए आकार कहते हैं कि दोनों नेता कई मामलों में एक जैसे हैं, मसलन दोनों सोशल मीडिया में एक्टिव रहते हैं और दोनों अभिमानी हैं। दोनों का रवैया घुसपैठियों के लिए आक्रामक है और दोनों मुस्लिमों को पसंद नहीं करते। एक ओर ट्रंप मुस्लिमों को अमेरिका आने से रोकना चाहते हैं और मोदी मुस्लिमों को देश से बाहर भेजना चाहते हैं।

आगे ट्रंप के भारत दौरे पर सवाल खड़ा करते हुए आकार कहते हैं कि क्लिंटन और बुश से उलट ट्रंप के भारत दौरे का कोई उद्देश्य नहीं हैं। वे यहाँ गणतंत्र दिवस के आमंत्रण पर भी नहीं आए। वे सिर्फ़ यहाँ अहमदाबाद में मोदी के लिए बोलने आ रहे हैं और ताजमहल देखकर वापस अमेरिका की उड़ान भर लेंगे। इस दौरे में व्यापार से जुड़े कोई करार नहीं होंगे।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस मुखपत्र में जगह पाकर अमेरीकी राष्ट्रपति ट्रंप से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के प्रति नफरत व्यक्त करने वाले आकार पटेल के लेख का अंत इस बात पर होता है कि पता नहीं ट्रंप अगले साल होने वाले चुनावों में राष्ट्रपति बने या न बनें। उन्हें आशा है कि अगले चुनावों में यूएसए में ‘लोकतांत्रिक शक्तियाँ’ वापस आएँगी।

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