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UP: गौ-हत्या मामले में दो गिरफ्तार, इमरान का लाइसेंस होगा रद्द

उत्तर प्रदेश पुलिस ने बुधवार (फरवरी 05, 2020) को कार में गौमांस (बीफ़) ले जाते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। यह घटना यूपी के मुजफ्फरनगर में स्थित शामली जिले के कंधला शहर की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, थाना प्रभारी सुशील कुमार दुबे ने बताया कि पुलिस ने गंगेरू रोड पर जब एक ऐसी कार को रोका, जिसमें गौमांस को मीट की दुकान ले जाया जा रहा था। जिसके बाद कार सवार दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के दौरान आरोपितों ने दुकान के मालिक इमरान के लावारिस पशुओं की हत्या में शामिल होने का खुलासा किया। इसके बाद पुलिस ने कानून का उल्लंघन करने के मामले में इमरान का लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश में गोमांस की तस्करी की ऐसी ही घटनाएँ सामने आती रही हैं। यहाँ तक कि अपराधी तस्करी करने के लिए नए-नए तरीके भी इस्तेमाल करते नजर आते हैं। विगत वर्ष अक्टूबर माह में यूपी के सीतापुर में पुलिस ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी का स्टीकर लगाकर गौमांस की तस्करी करने वाले 5 शातिरों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 24 क्विंटल प्रतिबंधित मांस के अलावा 4 गाड़ियाँ और एक बाइक बरामद की गई थी। पकड़े गए आरोपित इस गौमांस की सप्लाई लखनऊ करते थे।

10 बच्चों पर एक नर्स: कोटा के उस अस्पताल की हकीकत, जहाँ मर गए 100 से ज्यादा नवजात

संसद के उच्च सदन राज्यसभा में स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार (फरवरी 04, 2020) को बताया कि कोटा के जिस अस्पताल में पिछले साल 100 से अधिक नवजातों की जान गई, उस अस्पताल का दौरा करने पर केंद्रीय दल ने पाया कि वहाँ रोगियों के लिए न ही पर्याप्त संख्या में बिस्तर थे और न ही अस्पताल में कई आवश्यक उपकरण काम कर रहे थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्य सभा को दी।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष दिसंबर में कोटा के जेके लोन अस्पताल में सौ बच्चों की मौत से खासा बवाल मचा था और इसके चलते राजस्थान सरकार की काफी फजीहत हुई थी। विपक्ष ही नहीं बल्कि खुद राज्य सरकार के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की बात कही थी।

राज्य सभा में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने बताया कि केंद्रीय दल द्वारा पेश रिपोर्ट के अनुसार, कोटा के जेके लोन अस्पताल में 70 नवजातों की मौत नवजात आईसीयू (Neonatal Intensive Care Unit) में और 30 की मौत बाल चिकित्सा आईसीयू (Paediatric Intensive Care Unit) में हुई। रिपोर्ट के अनुसार, जान गँवाने वाले ज्यादातर नवजातों का वजन जन्म के समय कम था। इनमें से 63% मौत अस्पताल में भर्ती किए जाने के 24 घंटे से भी कम समय में हुई।

तय मानकों के अनुसार नहीं थी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएँ

अश्विनी चौबे ने कहा कि केंद्रीय दल की रिपोर्ट के अनुसार, मौत के ज्यादातर मामले बूंदी के जिला अस्पताल तथा बरन के जिला अस्पताल से रेफर किए गए थे। राज्य सभा में उन्होंने बताया कि केंद्रीय दल की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल में नवजात आईसीयू तथा बाल चिकित्सा आईसीयू में बिस्तर तथा नर्स का अनुपात 2:1 के मानक अनुपात की तुलना में क्रमश: 10:1 और 6:1 का पाया गया था। साथ ही उन्होंने बताया कि केंद्रीय दल की रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि अस्पताल में कई उपकरण काम नहीं कर रहे थे तथा उपकरणों के रख-रखाव संबंधी कोई नीति भी नहीं थी।

स्वास्थ्य राज्य मंत्री ने बताया कि इस मामले में केंद्रीय दल ने उप जिला स्तर पर प्राथमिक और द्वितीयक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को मजबूत बनाने के अलावा, बुनियादी अवसंरचना को मजबूत करने, पर्याप्त कार्यबल ओर मानक क्लीनिकल प्रोटोकॉल का उपयोग करने की सिफारिश की है।

कपिल गुर्जर को पार्टी में लाने वाले आप नेताओं पर हो देशद्रोह का मुकदमा, हम नहीं देंगे साथ: दिल्ली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष

दिल्ली शाहीन बाग धरने के करीब हवाई फायरिंग करने वाले कपिल गुर्जर को लेकर दिल्ली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ही छात्रों पर हमला करवा रही है। अब यह साफ़ हो गया है कि शाहीन बाग में फायरिंग किसने करवाई थी और कपिल गुर्जर को कौन लेकर आया था? अब जरूरत पड़ने पर कॉन्ग्रेस सरकार बनाने के लिए आम आदमी को अपना समर्थन नहीं देगी।

सुभाष चोपड़ा ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि, केजरीवाल जो पहले एक कमरे में रहने की बात करते थे, आज वह 4 एकड़ में बने आलीशान मकान में रह रहे हैं। इतना ही नहीं वह पिछले करीब डेढ़ महीने से घर में बैठकर तमाशा देख रहे हैं। दिल्ली में छात्रों पर हमला हो रहे हैं, अगर बच्चे ही दिल्ली में सुरक्षित नहीं हैं, तो कौन सुरक्षित है? लेकिन अब साफ़ हो गया है कि इन हमलों के पीछे किसका हाथ है और दिल्ली में कपिल गुर्जर को कौन लेकर आया था।

ऐसे में कपिल गुर्जर को पार्टी में शामिल करने वाले आप नेता संजय सिंह और आतिशी के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करना चाहिए, क्योंकि दोनों ने एक समुदाय के ख़िलाफ़ साजिश रची है।

कॉन्ग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने दिल्ली चुनाव परिणामों से पहले यह भी साफ़ कर दिया कि अग़र दिल्ली में आप सरकार की सीटें पूर्ण बहुमत से कम रह जाती हैं तो कॉन्ग्रेस पार्टी आप का समर्थन नहीं करेगी।

आपको बता दें कि बीते दिनों दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के ख़िलाफ़ धरने के करीब पहुँचकर कपिल गुर्जर ने अचानक से तीन राउंड हवाई फायरिंग कर दी थी। हालाँकि, तत्काल मौके पर तैनान पुलिस ने युवक को हिरासत में ले लिया था। हिरासत में लेने के बाद कपिल ने कहा था कि यह हिंदुस्तान है, यहाँ केवल हिंदुओं की ही चलेगी। वहीं क्राइम ब्रांच ने जाँच में पाया कि नोएडा निवासी कपिल गुर्जर आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है, जिसने अपने पिता के साथ 2019 में ही आप की सदस्यता ले ली थी। वहीं इस खुलासे के बाद बीजेपी और कॉन्ग्रेस ने आम आदमी पार्टी पर जमकर निशाना साधा है।

श्रीनगर में चेक पोस्ट पर आतंकी हमला: 2 आतंकी मारे गए, एक गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर में बुधवार (फरवरी 05, 2020) को आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई मुठभेड़ में भारतीय सुरक्षाबलों ने दो आतंकवादियों को मार गिराया है। बुधवार सुबह श्रीनगर में आतंकियों ने श्रीनगर के पारिम पोरा चेक पोस्ट पर हमला कर दिया। हालाँकि इस दौरान सीआरपीएफ के एक जवान वीरगति को प्राप्त हुए।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने बताया है कि आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर गोलियाँ चलाईं थी। जवाबी कार्रवाई के बाद मुठभेड़ शुरू हुई। सुरक्षाबलों ने इस हमले का मुँह तोड़ जवाब देते हुए दो आतंकवादी मार गिराए। साथ ही, सुरक्षाबलों ने एक घायल आतंकवादी को गिरफ्तार भी कर लिया है। गिरफ्तार किए गए इस आतंकवादी से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं।


बेटी के प्रेमी को अब्बा आशिक ने अशरफ संग मिलकर मार डाला, नाटक रचा ट्रेन से एक्सिडेंट का

मध्य प्रदेश के सागर जिले में अपने ही गाँव की एक लड़की से प्रेम करना युवक को महँगा पड़ गया। जहाँ, दोनों के रिश्ते के बारे में मालूम पड़ते ही लड़की के अब्बा आशिक और उसके ममेरे भाई अशरफ ने मिलकर उसे पहले मौत के घाट उतारा और बाद में उसकी मौत को दुर्घटना में बदलने के लिए उसका शव और उसकी मोटरसाइकल को रेलवे पटरी पर जाकर फेंक दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस को खुरई ग्रामीण थाना क्षेत्र के बरोदिया निवासी दानिश कुरैशी नामक मुस्लिम युवक का शव 31 जनवरी 2020 को रेलवे पटरी से मिला था। जहाँ उसकी माशूका के पिता और भाई ने पूरी घटना को दूसरा एंगल देने का पूरा प्रयास किया। मगर घटनास्थल के पास मिले बाइक के पुर्जों ने पूरा मामले को तह तक खोल दिया।

दरअसल, दानिश के शव के पोस्टमॉर्टम में उसके गले पर रस्सी के निशान मिले। जिससे साफ हो गया कि ये मामला दुर्घटना का नहीं है। इसके बाद पुलिस ने अपनी पड़ताल शुरू की। पड़ताल में पुलिस को रेलवे ट्रैक से बाइक के पुर्जे मिले। इन्हें पुलिस ने जमा किया और इंजन नंबर से उस बाइक के मालिक का पता लगाया।

पुलिस के मुताबिक लड़की के पिता ने पहले दानिश को समझाने की बहुत कोशिश की। लेकिन जब वह नहीं माना तो उससे बात करने के बहाने बुलाकर उसकी हत्या कर दी। इस मामले के संबंध में साहर के एसपी अमित सांघी ने मुख्य आरोपित आशिक को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अशरफ नाम का दूसरा आरोपित फरार है, इसलिए उसकी तलाश जारी है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई बार इस तरह के मामले आए हैं। जहाँ पिता ने अपनी इज्जत की खातिर या तो अपनी बेटी को मार दिया या फिर उसके प्रेमी को। अभी पिछले साल अक्टूबर का ही मामला है जब राजस्थान के सीकर जिले में कथित तौर पर अहम की खातिर एक पिता ने कुछ लोगों के साथ मिलकर अपनी बेटी और उसके प्रेमी की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी और बाद में उनका शव पहाड़ी इलाके में फेंक दिया था। इसके अलावा यूपी के बरेली से भी ऐसा मामला आया जब बेटी के प्रेम संबंध से नाराज होकर उसके पिता ने अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर उसके प्रेमी को मौत के घाट उतारा था और बाद में शव को जंगल में फेंक दिया था।

मेरा ‘हिंदुत्व’ भाजपा के ‘हिंदुत्व’ से अलग, मुझे ये सब नहीं सिखाया गया: उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र की सत्ता पर आसित होने के लिए अपनी कट्टर हिंदुत्व की छवि से समझौता कर कॉन्ग्रेस, एनसीपी के साथ गठबंधन करने वाले शिवसेना प्रमुख और वर्तमान में राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधने के लिए अपने हिंदुत्व को भाजपा के हिंदुत्व से अलग बताया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि धर्म का इस्तेमाल करके सत्ता कब्जाना उनके हिंदुत्व का हिस्सा नहीं है।

सीएम उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी की तुलना भाजपा से करते हुए कहा, “हमारे सोचने का तरीका एक सा नहीं है। मैं एक अशांत हिंदू राष्ट्र नहीं चाहता। धर्म को इस्तेमाल करके सत्ता हासिल करना मेरे हिंदुत्व का हिस्सा नहीं है। मैं ऐसे हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना नहीं करता।”

इसके बाद वे मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहते हैं कि ऐसा हिन्दू राष्ट्र वे स्वीकार नहीं करेंगे। क्योंकि उनके लिए हिन्दू राष्ट्र की व्याख्या अलग है। उनका कहना है, “यह हिन्दुत्व मेरे पिता द्वारा सिखाया गया नहीं है। हिन्दुत्व के संदर्भ में गलतफहमी फैलाकर अथवा दुरुपयोग करके सत्ता हासिल करना मेरा हिन्दुत्व नहीं है।”

भाजपा के साथ एक लंबे वक्त तक गठबंधन में रहने वाले शिवसेना दल के प्रमुख ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे हर समय कहते हैं कि हिंदू राष्ट्र होना चाहिए, लेकिन आज लोग एक दूसरे को मार रहे हैं और देश में अशांति का माहौल है। ये उनका हिंदुत्व नहीं है। यह वह नहीं है, जो सिखाया गया है। उनके मुताबिक जिन लोगों ने सत्ता हथियाने के लिए हिंदुत्व की गलत व्याख्या की, वे हिंदुत्व के हिमायती नहीं हैं।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले एनआरसी का पुरजोर विरोध कर उद्धव ठाकरे ने इस मामले पर अपना पक्ष साफ किया था। मगर, अब एक बार फिर उन्होंने ‘सामना’ को दिए साक्षात्कार में इस मुद्दे पर अपना बयान दिया है। उनका कहना है कि कि वो प्रदेश में किसी कीमत पर एनआरसी लागू नहीं होने देंगे। क्योंकि इसमें मुस्लिमों के साथ हिंदू भी पीसे जाएँगे।

इसके बाद उन्होंने इस साक्षात्कार में सीएए को लेकर अपना पक्ष साफ किया है। यहाँ सीएए का बचाव करते हुए कहा कि सीएए लोगों से उनके नागरिक अधिकारों को नहीं छीनता हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून में नागरिका छीनने की बात नहीं है, बल्कि दूसरे मुल्कों से सताए गए अल्पसंख्यकों नागरिकता देने का प्रावधान है।

ठाकरे सरकार लाएगी मुस्लिमों के लिए आरक्षण, MVA के न्यूनतम कार्यक्रम का हिस्सा: कॉन्ग्रेस नेता असलम शेख

JNU हमला 26/11 की तरह, गुंडों को आतंकवादी बोला जाए: ठाकरे पिता-पुत्र ने चली कॉन्ग्रेस की चाल

‘आज़ादी के लिए शहीद हुआ मेरा बेटा, 2 और बच्चों को भी बलिदान करने के लिए हूँ तैयार’

दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे धरना-प्रदर्शन में जाने से एक बच्चे की मौत हो चुकी है। लेकिन मृत बच्चे की माँ ने कहा कि वो अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रही है और उनका बच्चा भी अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ना चाहता था लेकिन वह इससे पहले ही देश के लिए कुर्बान हो गया। इतना ही नहीं, मृत बच्चे की माँ ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो वो अपने दोनों बच्चों और खुद को इस लड़ाई में देश के लिए कुर्बान कर देंगी।

30 जनवरी, 2020 को नाजिया के बच्चे की ठंड लगने से मौत हो जाती है, लेकिन इस पर पत्रकार बरखा दत्त अपने मोजो पर एक वीडियो शेयर करते हुए, उसमें कहती हैं कि 29 जनवरी तक नाजिया अपने बच्चे को विरोध प्रदर्शन में ले गई। वहीं मृत बच्चे की माँ नाजिया अपने बयान में कहती है कि वह 18 दिसंबर से ही शाहीन बाग और जामिया में अपने बच्चे के साथ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रही हैं। “मैं हर रोज़ बच्चे को अपने साथ विरोध प्रदर्शन में लेकर आई, एक भी दिन मैंने बच्चे को घर पर नहीं छोड़ा और इसी बीच बच्चे को ठंड लग गई और इसके चलते उसकी मौत हो गई।”

मोजो पर शेयर किए वीडियो में बरखा कहती है कि नाजिया यह कहते हुए अपने बच्चे को शाहीन बाग में लाने का बचाव करती है, कि यहाँ जो भी हो रहा है वह हम सभी के भविष्य के लिए है। वह कहती है, “हमें अपने अधिकारों के लिए भी लड़ना पड़ रहा है, हमें आज़ादी भी चाहिए, इसलिए हम बच्चे को धरने में लेकर आते थे।” नाजिया ने आगे कहा कि उनका बच्चा देश के लिए लड़ते हुए मर गया, लेकिन हम अब भी NRC के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

आगे जब मोजो पत्रकार ने नाजिया से पूछा कि क्या वह अपने अन्य दो बच्चों को धरने में लाने से डरती है तो, तो नाजिया ने कहा “नहीं, हम डरते नहीं हैं। हम उन्हें लाएँगे और जरूरत पड़ी तो उनका बलिदान भी करेंगे। हम इस लड़ाई में देश के लिए मरने को तैयार हैं, लेकिन मोदी और अमित शाह से अनुरोध है कि वह इस काले कानून को वापस ले लें।”

गौरतलब है कि चार महीने के मोहम्मद जहान के बच्चे की 30 जनवरी को ठंड लगने से मौत हो गई थी। दरअसल कड़ाके की ठंड में CAA और NRC के विरोध में शाहीन बाग में चल रहे धरने में उनके माता-पिता हर रोज अपने बच्चे को साथ ले जाते थे। नाजिया NRC को वापस लाने की माँग कर रही है, लेकिन इसे अभी तक लागू भी नहीं किया गया है। बता दें कि मोहम्मद आरिफ और नाज़िया अपने बच्चों के साथ बटला हाउस क्षेत्र में प्लास्टिक की चादरों और कपड़े से बनी एक झोपड़ी में रहते हैं, जिनके पास एक पाँच साल की बेटी और एक साल का बेटा है।

वहीं इससे पहले टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में बाल अधिकारों के लिए लड़ने वाली दो कथित कार्यकर्ताओं के कुतर्कों का हवाला देकर यह लिखा था कि भगवान कृष्ण जब साँप से लड़ रहे थे और जब भगवान राम-लक्ष्मण राक्षसों से लड़ रहे थे, तब वे सब टीनेजर थे। टेलीग्राफ ने इनाक्षी गांगुली और शंथा सिन्हा के हवाले से एनसीपीसीआर के निर्देशों पर सवाल उठाए हैं। दरअसल राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार ने एंटी सीएए प्रोटेस्ट में बच्चों के इस्तेमाल को लेकर आगाह किया था।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र: राम मंदिर ट्रस्ट का ऐलान, PM मोदी की घोषणा और लोकसभा में गूँजे ‘जय श्री राम’ के नारे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में मतदान से ठीक 3 दिन पहले यानी आज संसद (लोकसभा बजट सत्र 2020) में बोलते हुए अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर ट्रस्ट बनाने का ऐलान कर दिया। उनके इस ऐलान के साथ ही पूरी संसद ‘जय श्री राम’ के नारों से गूँज गई। प्रधानमंत्री ने कहा कि रामजन्मभूमि से जुड़ा मुद्दा उनके दिल के बहुत करीब है।

पीएम मोदी ने कहा कि ट्रस्ट का नाम श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र होगा। उन्होंने आह्वान किया कि पूरा देश भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए एक स्वर में समर्थन दे। यह ट्रस्ट मंदिर निर्माण पर सभी फैसले लेगा। उन्होंने बताया कि 67.03 एकड़ भूमि इस ट्रस्ट को दे दी जाएगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में राम मंदिर का निर्माण होगा।

प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा, “मुझे आज इस सदन को, देश को बताते हुए यह खुशी हो रही है कि आज कैबिनेट की बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए कई अहम फैसले लिए गए हैं। राम मंदिर निर्माण के लिए हमने एक वृहद योजना तैयार की है।”

उन्होंने कहा, “सरकार ने श्री रामजन्म भूमि तीर्थ ट्रस्ट गठन का प्रस्ताव किया है। यह ट्रस्ट अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण बनाने के लिए उत्तरदायी होगा। हमने 5 एकड़ जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने के लिए अनुरोध किया था, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने मान लिया है।”

बता दें कि पिछले साल तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय पीठ ने 9 नवंबर को सदियों पुराने मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। जिसमें उन्होंने अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया था। इसके अलावा कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में ही मस्जिद के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दी जाने की बात कही थी। अदालत ने कहा था कि विवादित 2.77 एकड़ जमीन अब केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगी, जो इसे सरकार द्वारा बनाए जाने वाले ट्रस्ट को सौंपेंगे। पीठ ने केंद्र सरकार से कहा था कि मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट बनाया जाना चाहिए।

मिनी स्कर्ट पहनो, शराब पिओ और अप्राकृतिक संबंध बनाओ! बीवी के इनकार पर इमरान ने दिया तीन तलाक

देश में एक ओर जहाँ तीन तलाक पर कानून बनने के बाद भी कट्टरपंथी उस पर बहस रोकने को तैयार नहीं हैं, वहीं, दूसरी ओर इससे जुड़े मामले भी कम होने का नाम नहीं ले रहे। वैसे तो विभिन्न कारणों से मुस्लिम महिलाओं के तीन तलाक पीड़िताओं में तब्दील होने के बहुत से उदाहरण हैं मगर बिहार के पटना का मामला थोड़ा अलग है। यहाँ पर नूरी फातमा नाम की महिला को उसके शौहर ने सिर्फ़ इसलिए तलाक दे दिया क्योंकि उसने मॉर्डन बनने और शराब पीने से मना कर दिया था। तलाक के बाद महिला अब इंसाफ माँगने के लिए जारी अपनी जंग के तहत बिहार राज्‍य महिला आयोग पहुँची।

गौरतलब है कि ये मामला पिछले साल अक्टूबर का है। जब फातमा ने अपने और इमरान के रिश्ते के बारे में बताते हुए शिकायत की थी। उसने बताया था कि उसका निकाह इमरान मुस्तफा से 2015 में हुआ था। इसके बाद दोनों दिल्ली शिफ्ट हो गए थे। लेकिन यहाँ आने के कुछ दिन बाद मुस्तफा, नूरी को मॉडर्न लड़कियों की तरह रहने के लिए कहने लगा, वो चाहता था कि नूरी छोटे कपड़े पहने, नाइट पार्टी में जाएँ, और शराब पिए। लेकिन जब उसने ऐसा करने से मना किया तो वो उसे हर रोज मारने लगा। इस दौरान उसका गर्भपात भी हुआ। मगर इमरान को कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने पिछले साल एक सितंबर को नूरी के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाने की कोशिश भी की थी, जिसका महिला ने विरोध किया था।

महिला ने अपनी शिकायत में इमरान पर आरोप लगाया, “कई सालों तक मुझ पर अत्याचार करने के बाद, कुछ दिन पहले उसने मुझे उसका घर छोड़ने को कहा। लेकिन जब मैंने मना किया, तो उसने मुझे तीन तलाक दे दिया।”

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, तीन तलाक के बाद से नूरी इंसाफ के लिए थाना से महिला आयोग तक दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। उसने अपने शौहर इमरान के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग में एफआइआर (FIR) दर्ज करवा दी है। साथ ही उसने बिहार राज्‍य महिला आयोग में भी शिकायत की थी। मगर, इमरान सुनवाई की तिथि पर बिहार महिला आयोग नहीं पहुँचा। अब महिला आयोग ने सुनवाई की अगली तिथि मार्च में रखी है। आयोग की अध्यक्ष दिलमणी मिश्र इस मामले को गंभीर बताते हुए कहती हैं कि इसमें नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

9 साल पहले कॉन्ग्रेस सरकार में हुई बच्चे की मौत, मीडिया गिरोह ने उदाहरण देकर फैलाया प्रोपेगेंडा

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन पर बैठे लोगों की मंशा जगजाहिर होने के बाद मीडिया गिरोह अब इनके बचाव में खुल कर उतर गया है। सोशल मीडिया पर मोदी सरकार के प्रति प्रोपगेंडा साधने के लिए झूठी अफवाहें खुलेआम फैलाई जा रही हैं और बड़े-बड़े मीडिया संस्थान अपने अजेंडे के लिए इसका उपयोग भी कर रहे हैं। क्योंकि, यहाँ उनका मकसद कुछ भी करके मोदी सरकार को और उनके समर्थकों को सवालों के घेरे में घेरना है। इसी तरह की कोशिश वामपंथी मीडिया की स्तंभकार डॉ नजमा ने की है।

दरअसल, अभी दो दिन पहले शाहीन बाग प्रदर्शन के कारण एक नवजात की मौत की खबर आई। जिसे देखकर काफी लोग आहत हुए। मगर बच्ची की माँ ने इस पर सामान्य प्रतिक्रिया दी। जिसे सुनने के बाद काफी लोगों ने उसकी आलोचना की और एक सामान्य व्यक्ति की तरह ऑपइंडिया अंग्रेजी की संपादक नुपुर शर्मा ने भी उस पर ट्वीट किया। उन्होंने पूछा कि आखिर वो कैसी माँ है, जो अपने बच्चे की जान जाने के बाद भी सामान्य है। उन्होंने कहा कि वो इस घटना को सुनने के बाद अवाक हो चुकी हैं।

अब इस ट्वीट पर डॉ नजमा नामक ‘बुद्धिजीवी’ ने रिप्लाई किया। उन्होंने ऑपइंडिया संपादक के प्रति कुँठा निकालने के लिए लिखा,” नुपुर तुम तो तब भी चुप थी जब 2 महीने का नजरूल इस्लाम पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधा न पाने के कारण असम के डिटेंशन सेंटर में मर गया था। तुम्हें बच्चे के मरने की फिक्र नहीं है, तुम्हें सिर्फ़ उस कारण से मतलब है, जिसके कारण बच्चे की मौत हुई।”

अब हालाँकि, इससे पहले ऑपइंडिया संपादक डॉ नज़मा के आरोपों पर कोई रिप्लाई करतीं, एक यूजर ने आकर डॉ नजमा के प्रोपेगेंडे को वहीं ध्वस्त कर दिया। स्पैमिंदर भारती नामक यूजर ने डॉ नजमा के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा, “जिस वाकये के बारे में आप बात कर रही हो, वो साल 2011 का है। 9 साल पहले का। जब केंद्र और असम दोनों में कॉन्ग्रेस सरकार थी। मगर उस समय तुमने बोलना जरूरी नहीं समझा और इतने वक्त तक चुप रहीं। अब तुम अपना पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा साधने के लिए बच्चे की मौत से जुड़े मामले को 9 साल बाद इस्तेमाल कर रही हो, इससे तुम्हारे बारे बहुत कुछ पता चलता है।”

यहाँ बता दें कि डॉ नजमा के ट्विटर अकॉउंट के अनुसार वो द स्क्रॉल, हिंदू, टीएनएम जैसे बड़े वामपंथी मीडिया संस्थानों की स्तंभकार हैं। जहाँ बतौर ‘बुद्धिजीवी’ अक्सर उनके विचार प्रकाशित होते हैं। मगर, ये शर्म की बात है कि ऑपइंडिया संपादक को घेरने के लिए और प्रदर्शन के बचाव में वो शाहीन बाग के बच्चे की मौत को जस्टिफाई करने पर उतरती हैं और एक 9 साल पुराना केस का उल्लेख करके ये साबित करने की कोशिश करती हैं कि शाहीन बाग में बच्चे की मौत एक कारण से हुई।

दरअसल, इस मामले के संबंध में डॉ नजमा ने एक ट्वीट किया था। जिससे उनकी ‘सेकुलर’ छवि का भी पता चला और ये भी मालूम चला कि वामपंथी मीडिया के लिए लिखते-लिखते वे कितनी कुतर्की बन चुकी हैं। जो इस पूरी घटना में महिला को उसकी जाति पर और बच्चे की मौत को एक परंपरा के रूप में आँकती हैं।

वो एक यूजर के ट्वीट का जवाब देते हुए बच्चे की मौत पर लिखती हैं, “उसका सरनेम चौधरी है। जो कि अधिकतर जाट होते हैं। हैरानी नहीं है कि अगर वो अपने बच्चों की मौत पर इतने आराम से बोल रही है। क्योंकि कन्या भ्रूण हत्या इनकी परंपरा है।” हालाँकि यह जानना भी जरूरी है कि अपना बेवकूफी भरा ये ट्वीट डॉ नजमा डिलीट कर चुकी हैं। लेकिन यूजर ने उनके इस ट्वीट का स्क्रीनशॉट लेकर उनके नाम के आगे लगे ‘डॉ’ उपाधि पर सवाल उठाए हैं।