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‘इनसे सतर्क रहें, सत्ता से बाहर होने पर ये करते हैं किस्म-किस्म की नाटकबाजी’

संत रविदास की जयंती पर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने रविवार (फरवरी 9, 2020) को वाराणसी पहुँचकर उनके जन्मस्थान का दौरा किया। यहाँ उन्होंने गुरु संत रविदास जन्मस्थान मंदिर में पूजा-अर्चना की। वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने प्रियंका पर निशाना साधते हुए इसे नाटक करार दिया और अपने समर्थकों को सतर्क रहने के लिए कहा।

इससे पहले वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट में प्रियंका गाँधी का जोर-शोर से स्वागत हुआ। इसके बाद वह सीधे सीरगोवर्धन में संत रविदास की जयंती पर आयोजित समारोह में शामिल होने रवाना हो गईं। प्रियंका गाँधी ने सुबह ही सोशल मीडिया पर संत रविदास को नमन करने के साथ ही वाराणसी आगमन की जानकारी दी थी।

वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रियंका गाँधी पर संत रविदास के मंदिरों में जाकर निजी स्वार्थ के लिए नाटकबाजी करने का आरोप लगाया। मायावती ने रविवार को किए गए सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, “कॉन्ग्रेस, बीजेपी व अन्य पार्टियाँ यहाँ उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार होने पर संत गुरु रविदास जी को कभी मान-सम्मान नहीं देती है, लेकिन सत्ता से बाहर होने पर फिर ये अपने स्वार्थ में इनके मन्दिरों/स्थलों आदि में जाकर किस्म-किस्म की नाटकबाजी जरूर करती है। इनसे सतर्क रहें।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “जबकि यहाँ बसपा ही एक मात्र ऐसी पार्टी है, जिसने अपनी सरकार के समय में इनको विभिन्न स्तरों पर पूरा-पूरा मान-सम्मान दिया है। जिसे भी अब विरोधी पार्टियाँ एक-एक करके खत्म करने में लगी है। जो अति निन्दनीय है।”

इधर वाराणसी पहुँची प्रियंका ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास ने सामाजिक एकता, बंधुत्व, भाईचारे और श्रम की महत्ता का संदेश दिया था। आज हम सभी के लिए गुरु रविदास की वाणी और विचार अनुकरणीय हैं। ताकि हम एक बेहतर समतामूलक समाज बना सकें। वहीं कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने बताया कि प्रियंका की बहुत दिनों से इच्छा थी कि वे संत शिरोमणि गुरु रविदास के जन्मस्थली मंदिर की चौखट पर मत्था टेकें।

हालाँकि पार्टी की तरफ से प्रियंका के इस दौरे को गैर-राजनीतिक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीति के जानकार का मानना है कि वह जनाधार की मजबूत जड़ों को सींचने की कोशिश कर रही हैं। इस दौरान सीर में उन्होंने संत निरंजन दास का आशीर्वाद लेने के साथ ही लंगर और प्रसाद भी ग्रहण किया।

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थाने को फूँका, कम्प्यूटर फोड़ डाले, पुलिस को खदेड़ा: मो. मोहसिन की गिरफ़्तारी के बाद भीड़ का आतंक

बिहार के कटिहार में महज एक अफवाह के आधार पर पुलिस थाने को फूँक डाला गया, पुलिस के साथ झड़प की गई और लोगों को मारा-पीटा गया। आबादपुर थाने में उपद्रवियों ने ऐसा आतंक मचाया कि पुलिस जीप सहित कई अन्य वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। दरअसल, लोगों के बीच अफवाह फ़ैल गई थी कि वार्ड सदस्य मोहम्मद मोहसिन की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई है, जिसके बाद ये घटना हुई। घटना की जानकारी मिलते ही बारसोई के एसडीपीओ सहित कई थानाें की पुलिस घटनास्थल पर पहुँची। इसके बाद भीड़ वहाँ से भाग खड़ी हुई।

आबादपुर पुलिस ने उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की और लाठीचार्ज का सहारा लिया। हालाँकि, वरिष्ठ अधिकारियों के पहुँचने से पहले आक्रोशित दंगाइयों ने उलटा पुलिस को ही खदेड़ दिया था। मोहम्मद मोहसिन धुमतोला का निवासी था, जिसे पुलिस शनिवार (फरवरी 8, 2020) की शाम गिरफ़्तार कर के थाने ले गई थी। उसके ख़िलाफ़ वॉरंट जारी किया गया था। पूछताछ के दौरान जब पुलिस ने थोड़ी सी सख्ती दिखाई तो मोहसिन बेहोशी का नाटक करने लगा। इसके बाद उसके मौत की अफवाह फ़ैल गई।

गिरफ़्तार 45 वर्षीय मोहम्मद मोहसिन का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। उसके ख़िलाफ़ कई मामले दर्ज हैं। आर्म्स एक्ट के मामले में उसके विरुद्ध वॉरंट जारी किया गया था। उसने आरोप लगाया है कि पुलिस ने पूछताछ के दौरान उसकी पिटाई की। पुलिस ने बताया कि वो घायल कैसे हुआ, इसकी जाँच की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि अगर कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि उपद्रवियों को चिह्नित किया जाएगा और उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

दंगाई भीड़ ने पूरे थाने को आगे के हवाले कर डाला। थाने के रिकॉर्ड रूम और और मालखाना को भी फूँक दिया। भीड़ में कम से कम 1000 लोग शामिल थे। क़रीब 3 घंटे तक आक्रोशित उपद्रवियों ने तांडव मचाया। दरअसल, अफवाह तब फैली थी जब पुलिस मोहसिन को लेकर अस्पताल जा रही थी। आतंक का आलम ये था कि थाने के बगल में स्थित झोपड़ी को भी जला डाला गया। सरकारी कागज़ात फाड़ डाले गए और कम्प्यूटरों व फर्नीचरों को तोड़ डाला गया। मोहम्मद मोहसिन अभी पूरी तरह सुरक्षित है।

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नौकरी या प्रमोशन में आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं: SC ने पलटा 2012 में दिया हाई कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिए अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में सरकारी नौकरियों के प्रमोशन में आरक्षण और कोटा को मूलभूत अधिकार मानने से इनकार कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह राज्यों को कोटा देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि वो राज्यों को लोक सेवाओं में कुछ समुदायों के असमान प्रतिनिधित्व संबंधी डेटा की अनुपस्थिति में ऐसे किसी प्रावधान को अपनाने के लिए मजबूर भी नहीं कर सकता।

उत्तराखंड के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यूडी) में असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) के पदों पर प्रमोशन के लिए SC/ST समुदाय के लोगों द्वारा दायर अपील पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि कोई भी “मूलभूत अधिकार” ऐसे किसी दावे का समर्थन नहीं करता।

रिपोर्ट्स के अनुसार 7 फरवरी को जस्टिस एल नागेश्वर राव तथा हेमंत गुप्ता की पीठ ने अपील पर निर्णय देते हुए कहा, “निःसंदेह राज्य सरकार आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। कोई भी मूलभूत अधिकार ऐसा नहीं है, जो प्रमोशन में आरक्षण के किसी व्यक्तिगत दावे को मान्यता प्रदान करता हो। कोर्ट राज्य सरकारों को प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए आदेश जारी नहीं कर सकता।”

सुप्रीमकोर्ट ने अपने इस निर्णय के द्वारा 2012 में उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस निर्णय को पलट दिया है, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य को कुछ विशेष समुदायों के लिए कोटा मुहैया कराने का आदेश दिया था।

उस वक्त कपिल सिब्बल और दूसरे वकीलों ने हाईकोर्ट के सामने अपनी दलील में कहा था कि राज्य का कर्तव्य बनता है कि वह अनुच्छेद 16(4) और 16(4-अ) के अंतर्गत SC/ST समुदाय की सहायता करे।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिए अपने निर्णय में कहा कि हालाँकि ये अनुच्छेद राज्य को आरक्षण देने की शक्ति प्रदान करते हैं लेकिन यह सिर्फ तभी हो सकता है, जब राज्य की नजर में इन समुदायों का सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व युक्तिसंगत नहीं ठहरता हो।

कोर्ट ने आगे कहा, “यह स्थापित कानून है कि राज्य को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए आदेश नहीं दिया जा सकता। इसी प्रकार राज्य को SC/ST के लिए पदों में प्रमोशन के लिए भी बाध्य नहीं किया जा सकता।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि राज्य को इस संदर्भ में लिए गए अपने निर्णयों तक पहुँचने के लिए समुचित आँकड़ों की सहायता लेनी चाहिए, जिसे न्याय संगत ठहराया जा सके।

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श्रीलंका के PM ने काशी विश्वनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना, CAA को बताया भारत का आंतरिक मुद्दा

श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे रविवार (फरवरी 9, 2020) को वाराणसी पहुँचे। वहाँ उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। गर्भ गृह में बैठ कर अनुष्ठान में भाग लेने के साथ ही उन्होंने षोडशोपचार विधि-विधान से बाबा विश्वनाथ की आराधना की। इससे पहले लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्थानीय प्रशासन ने उनकी आगवानी की। प्रधानमंत्री राजपक्षे को मंदिर में प्रसाद भी भेंट किया गया। मंदिर के अर्चक डॉ. श्रीकांत और पाँच वैदिक ब्राह्मणों ने महिंदा राजपक्षे को विशेष दर्शन पूजन कराया। उन्होंने काल भैरव मंदिर में आरती भी की।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने अपने भारत दौरे पर दिल्ली पहुँचे थे, जहाँ हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाक़ात हुई थी। वो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मिले। नागरिकता संशोधन क़ानून पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा कि ये भारत का आंतरिक मुद्दा है और श्रीलंकाई लोग कभी भी अपने देश वापस आ सकते हैं। ‘इंडिया टुडे’ को दिए गए इंटरव्यू में राजपक्षे ने कहा कि श्रीलंकाई लोगों का घर श्रीलंका है, इसीलिए वो जब चाहें तब वापस आ सकते हैं। उनका स्वागत है।

महिंदा राजपक्षे ने कहा कि भारत में रह रहे श्रीलंकाई अगर वापस अपने देश आते हैं तो इससे वहाँ की सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दिनों में 4000 श्रीलंकाई वापस लौटे हैं। उन्होंने कहा कि ये उन पर निर्भर है कि वो कब वापस आना चाहते हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि राजपक्षे भाइयों के सत्ता में लौटने के बाद श्रीलंका के मुस्लिम डरे हुए हैं लेकिन महिंदा ने आश्वस्त किया कि उनकी सरकार सभी को लेकर आगे बढ़ रही है। भारत ने श्रीलंका में तमिलों के लिए 60,000 घर बनवाए हैं, जिसका महिंदा राजपक्षे ने स्वागत किया।

महिंदा राजपक्षे ने चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर भारत को आश्वस्त करते हुए कहा कि वो श्रीलंका पर एक अच्छे दोस्त और पड़ोसी की तरह भरोसा कर सकता है। पिछले साल हुए ईस्टर हमले को लेकर पीएम राजपक्षे ने कहा कि उस वारदात के बाद भारत ने भी श्रीलंका की मदद की। उन्होंने कहा कि भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने हमले को लेकर पहले ही आगाह कर दिया था लेकिन ‘इंटेलिजेंस फेलियर’ के कारण श्रीलंका की तत्कालीन सरकार इसे रोकने में असमर्थ साबित हुई।

भारत ने आरोपितों के नाम, पता, कांटेक्ट और हमले का समय और जगह को लेकर भी पक्की जानकारियाँ दी थीं। राजपक्षे ने कहा कि इन पर अमल नहीं किया गया। उन्होंने माना कि ये श्रीलंका की ग़लती थी। हालाँकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि द्वीपीय राष्ट्र आज इन मामलों में पहले से ज्यादा सक्रिय है।

5 दिनों की यात्रा पर भारत आए महिंदा राजपक्षे भगवान बुद्ध की अस्थियों का दर्शन करने सारनाथ भी जाएँगे। उनका काफिला जहाँ से भी गुजरेगा, वहाँ तमिल व सिंहला भाषा में बड़े-बड़े पोस्टर्स लगवाए गए हैं। इन पोस्टरों में भारत-श्रीलंका के प्रगाढ़ रिश्ते की बात की गई है और श्रीलंकाई पीएम का स्वागत भी किया गया है। राजपक्षे ने वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रह्मण्यन स्वामी के साथ भी मुलाक़ात की। दोनों पुराने मित्र हैं। उनकी बैठक एक घंटे से भी ज्यादा चली।

चुनाव से पहले अवैध शराब ले जाने पर AAP नेता के भाई पर FIR, बरामद पव्वों पर लगी थी ‘PK’ की मोहर

दिल्ली में विधानसभा चुनाव के निपटने के ठीक एक दिन बाद आम आदमी पार्टी नेता के भाई पर FIR हो गई है। बताया जा रहा है कि 6 फरवरी को एक रेड के दौरान दिल्ली क्राइम ब्रांच ने अवैध शराब की जो खेप बरामद की थी, उसमें आम आदमी पार्टी के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के भाई हरीश गहलोत का नाम सामने आया है। हरीश गहलोत ने यह शराब चुनाव के दौरान वोटरों को लुभाने के उद्देश्य से मँगाई थी।

ऐसे समय में, जब यह दावा किया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी ‘विकास’ के पर ही लोगों से वोट माँग रही थी, उनकी पार्टी के नेता और विधायक प्रत्याशी के भाई का शराब बाँटने जैसी घटना में नाम सामने आना दुर्भाग्यपूर्ण है।

पकड़ी गई इस शराब को आम आदमी पार्टी के विधायक और नजफगढ़ से AAP उम्मीदवार कैलाश गहलोत के भाई हरीश गहलोत के कहने पर बाँटा जाना था। क्राइम ब्राँच ने दर्ज की गई FIR में इस बात का जिक्र किया है। इस मामले अब तक वीरेन्द्र और रविन्द्र नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

चुनाव के दौरान वोटरों को लुभाने के लिए अवैध रूप से शराब बाँटने के आरोप में पुलिस ने बताया है कि AAP नेता के भाई हरीश गहलोत को नोटिस जारी किया जाएगा, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी भी संभव है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में केजरीवाल सरकार में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत से भी पूछताछ हो सकती है।

FIR में बताया गया है कि ये ये शराब 8 तारीख को होने वाले दिल्ली चुनाव से पहले बाँटी जानी थी। बोलेरो गाड़ी में 15 पेटियाँ अंग्रेजी शराब की भरी हुई थीं। इन पेटियों में 48 पव्वे (क्वार्टर) थे, जो ‘PK’ की मोहर के साथ सीलबंद पाए गए। इन 15 पेटियों के अलावा भी बड़ी मात्रा में शराब दाल मिल कंपाउंड में रखी गई थी, वह भी वोटरों के बीच बाँटी जाने वाली थी लेकिन पुलिस की रेड में AAP नेता के भाई हरीश गहलोत के शराब बाँटने के सपने चकनाचूर हो गए।

FIR की कॉपी आप यहाँ देख सकते हैं –

दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए मतदान हो चुका है। देशभर की नजरें अब चुनावी नतीजों पर टिकी हैं। आने वाली 11 फरवरी को इस चुनाव के परिणाम भी सामने आ जाएँगे।

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पाकिस्तान में हिंदुओं को 70 साल बाद सौंपा गया 200 साल पुराना मंदिर, उपायुक्त ने माँगी माफी

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के जिले झोब में 200 साल पुराने एक मंदिर को हिंदू समुदाय को सौंप दिया गया है। पाकिस्तानी मीडिया जिओ टीवी में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, 70 साल के बाद यह मंदिर हिंदू समुदाय को मिला है। बीते तीस साल से इसमें सरकारी स्कूल चल रहा था जिसे अब यहाँ से दूसरे जगह पर शिफ्ट कर दिया गया है।

चार कमरों वाले इस मंदिर की चाबी एक समारोह के दौरान हिंदू समुदाय के नेताओं को सौंपी गई। समारोह मंदिर के सामने हुआ जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इनमें अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य, सामाजिक व राजनैतिक संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए थे। समारोह के मुख्य अतिथि झोब की केंद्रीय मस्जिद के इमाम एवं जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के नेता मौलाना अल्लाह दाद काकर थे।

मौलाना काकर ने स्थानीय हिंदू पंचायत के अध्यक्ष सलीम जान को मंदिर की चाबी सौंपी। इस मौके पर इलाके के उपायुक्त ताहा सलीम ने कहा, “यह बलूचिस्तान, विशेषकर झोब के लिए खास और ऐतिहासिक दिन है। मौलाना काकर ने न केवल मंदिर को हिंदू समुदाय को वापस देने के सरकार के फैसले का समर्थन किया बल्कि इस आयोजन का मुख्य अतिथि बनना भी स्वीकार किया। यह सांप्रदायिक सौहार्द की एक शानदार मिसाल है।”

उपायुक्त ने हिंदू समुदाय से इस बात के लिए माफी भी माँगी कि बीते 70 साल में उन्हें यह मंदिर नहीं सौंपा गया। उन्होंने कहा कि मंदिर को इसके वास्तविक रूप में बहाल किया जाएगा। मरम्मत और साज-सज्जा के बाद हिंदू मंदिर में पूजा अर्चना कर सकेंगे। स्थानीय हिंदू पंचायत अध्यक्ष सलीम जान ने कहा कि मंदिर 200 साल पुराना है। पाकिस्तान बनने के बाद अधिकांश हिंदू भारत चले गए, लेकिन अभी भी शहर में हिंदुओं की अच्छी आबादी है। उन्होंने कहा कि अभी इलाके के हिंदू एक मिट्टी के घर में पूजा अर्चना करते हैं जो किसी भी समय गिर सकता है।

उन्होंने कहा, “हाल ही में बलूचिस्तान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जमाल खान मंडोखेल झोब आए थे। तब हिंदू समुदाय ने उनसे इस मंदिर को वापस दिलाने की अपील की थी। न्यायाधीश ने हमें आश्वस्त किया था कि मंदिर हिंदू समुदाय को वापस मिलेगा और आज हम जिला प्रशासन और हमारी माँग को पूरा करने के लिए उनके शुक्रगुजार हैं।”

हिंदू पंचायत अध्यक्ष सलीम जान ने आगे बताया कि स्थानीय सिख समुदाय भी लंबे समय से अपने गुरुद्वारे से वंचित है और उनके पास अपनी धार्मिक रस्मों को करने के लिए कोई जगह नहीं है। गुरुद्वारे में भी एक स्कूल चल रहा है।

चले जाओ, ये हिंदुस्तान है, पाकिस्तान या बांग्लादेश नहीं: अवैध घुसपैठियों को भगाने के लिए MNS का शक्ति प्रदर्शन

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने अवैध बांग्लादेशी और पाकिस्तानी आप्रवासियों को हटाने की माँग को लेकर आजाद मैदान में एक रैली निकाली। यह जुलूस महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे के नेतृत्व में निकाला गया। MNS ने एक बार फिर अपने हिंदुत्ववादी रुख को तेज करते हुए सीएए और एनआरसी की कड़ी में नई मुहीम जोड़ दी है। 

एक तरफ जहाँ देश में सीएए और एनआरसी का विरोध हो रहा है तो वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने रविवार (फरवरी 9, 2020) को अवैध पाकिस्तानियों और बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत से बाहर निकालने के लिए रैली निकाली है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह जुलूस देश में अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी-बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ है।

बता दें कि हाल ही में ही MNS ने घुसपैठियों के खिलाफ अभियान की शुरुआत की थी। इन लोगों को देश का घुसपैठिया करार देते हुए MNS ने उन्हें देश से बाहर किए जाने की माँग की थी। ठाकरे इस रैली के जरिए पार्टी का दायरा मराठा अस्मिता से आगे हिंदुत्व की तरफ ले जा रहे हैं। रैली से ठाकरे बांग्लादेशी घुसपैठियों का विरोध कर रहे हैं। इस रैली के लिए पूरे महाराष्ट्र से लोग आ रहे हैं। रैली में लोगों के लिए भगवा रंग की टी-शर्ट, टोपी, हाथ पर बाँधने वाली पट्टी वगैरह बनवाए गए हैं, जिस पर शिवाजी महाराज की राजमुद्रा का चिन्ह छपा है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने अवैध प्रवासियों को नसीहत देते हुए कहा है कि चले जाओ, ये हिंदुस्तान है, पाकिस्तान या बांग्लादेश नहीं। बता दें कि अपने पार्टी के झंडे का रंग भगवा करने के बाद राज ठाकरे की यह पहली रैली है। जिसका मुद्दा देश में रह रहे अवैध रूप से बांग्लादेशियों और पाकिस्तानियों का विरोध है।

इस महारैली को लेकर MNS कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिल रहा है। इस रैली के माध्यम से राज ठाकरे अपनी पार्टी में नई जान फूँकने की तैयारी कर रहे हैं। मुंबई और महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों से आने वाले कार्यकर्ताओं के लिए अलग रूट भी निर्धारित किया गया हैं साथ ही उनकी गाड़ियों के लिए अलग जगह पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। रैली के समापन के बाद राज ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। राजनीति के जानकारों का कहना है कि भगवा रंग में रंगने के बाद ये महामोर्चा राज ठाकरे की राजनीति के नए रास्ते की दशा और दिशा तय करने वाला है।

आतंकी अफजल गुरु की बरसी पर फिदायीन हमले की आशंका: अलर्ट जारी, घाटी में इंटरनेट बंद

वर्ष 2001 में संसद पर आतंकवादी हमले के आरोपित अफजल गुरु की बरसी पर जम्मू-कश्मीर में कुछ प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठनों ने बंद का ऐलान किया है, जिसके चलते घाटी में प्रशासन ने एक बार फिर से इंटरनेट व्यवस्था को बंद कर दिया है।

दरअसल यह फैसला संसद हमले के दोषी आतंकी अफजल गुरू की बरसी की वजह से सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है। अफजल गुरू की फाँसी की बरसी के चलते घाटी में जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) ने बंद का ऐलान किया है। यह बंद 9 फरवरी और 11 फरवरी को बुलाया गया है। 11 फरवरी को नेशनल लिबरेशन फ्रंट के संस्थापक मकबूल भट्ट की भी बरसी है, जिसके चलते 11 फरवरी को इस बंद का ऐलान किया गया है। मकबूल भट्ट को 1984 में फाँसी पर लटकाया गया था।

रविवार फरवरी 09, 2020 सुबह पुलिस ने कश्मीर में हिंसा भड़काने और कानून-व्यवस्था को बाधित करने की कोशिशों के आरोप में प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के खिलाफ मामला दर्ज किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा, ”पुलिस ने घाटी में हिंसा भड़काने और कानून-व्यवस्था को बाधित करने के जेकेएलएफ के प्रयासों को संज्ञान में लिया है।’’

पुलिस ने कहा कि प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन जेकेएलएफ से सम्बंधित संगठनों ने घाटी में आने वाले दिनों में हिंसा की घोषणा करते हुए पर्चे बाँटे हैं और वे एक गैरकानूनी संगठन के संदेशों और गतिविधियों का प्रचार कर रहे हैं।

ज्ञात हो कि अफजल गुरू को वर्ष 2001 में संसद पर हुए हमले का दोषी पाया गया था, जिसके बाद उसे फरवरी 09, 2013 को तिहाड़ जेल में फाँसी की सजा दी गई थी।

फिदायीन हमले की आशंका, अलर्ट जारी

जम्मू पठानकोट हाईवे पर सुरक्षा के यह बंदोबस्त खुफिया एजेंसियो के उस अलर्ट के बाद किए गए हैं, जिसमें कहा गया है, “पाकिस्तान समर्थित आतंकी 9 फरवरी के आस-पास जम्मू में फिदायीन हमला कर सकते हैं।”

केंद्र सरकार द्वारा घाटी में पिछले वर्ष आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए के कुछ प्रावधानों को निरस्त कर दिया गया था, जिसके बाद घाटी के तमाम नेताओं को नजरबंद कर दिया गया। यही नहीं, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के खिलाफ पीएसए के तहत केस दर्ज किया गया है।

निर्दोष अफजल गुरु को फाँसी किसने दी? राम मंदिर कौन बनवा रहा? – SC के खिलाफ JNU महिला नेता ने उगला जहर

बेचारा अफ़ज़ल गुरु निर्दोष निकला तो उसे वापस कौन लाएगा, ये न्याय का मज़ाक: आलिया की मम्मी

आतंकी अफजल के बेटे को भारतीय होने में शर्म, ‘आधार कार्ड सिर्फ फायदे के लिए करता हूँ यूज’

कॉन्ग्रेस के दिल्ली प्रभारी पीसी चाको ने कर दी 2013 वाली बात: राजनीतिक पंडित चकराए!

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान शनिवार को खत्म हो गया। अब जहाँ सभी की निगाहें 11 फरवरी को होने वाली मतगणना पर है, वहीं दिल्ली कॉन्ग्रेस आगामी सरकार में अपनी भूमिका को लेकर आशान्वित नजर आने की कोशिशों में है। रिपोर्ट्स के अनुसार कॉन्ग्रेस के प्रभारी पीसी चाको ने समाचार एजेंसी एएनआइ से बातचीत में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावना पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का AAP से गठबंधन चुनावी नतीजे पर निर्भर करता है।

एएनआइ से बात करते हुए चाको ने कहा, “चुनावों के नतीजे आ जाएँ, फिर हम इस पर चर्चा करेंगे। मुझे नहीं लगता कि एग्जिट पोल के सर्वे सही हैं। एग्जिट पोल के सर्वे की अपेक्षा कॉन्ग्रेस बेहतर करेगी।”

मजे की बात यह है कि चुनाव बाद हुए एग्जिट पोल में कॉन्ग्रेस सत्ता की दौड़ में काफी पिछड़ती नजर आ रही है। कई एग्जिट पोल में तो कॉन्ग्रेस को एक भी सीट मिलती नहीं दिखती। ऐसी स्थिति में पीसी चाको का बयान आशावादियों के लिए एक बेंचमार्क ही समझा जाना चाहिए।

हालाँकि जानकारों के मुताबिक कॉन्ग्रेस के वोटों में इस बार वृद्धि होने की संभावना है, जो दहाई की संख्या तक भी पहुँच सकती है। लेकिन उसको मिलनी वाली सीटों की संख्या मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 2-4 से ऊपर जाने की कोई उम्मीद, कम से कम एग्जिट पोल्स के अनुसार तो नहीं ही नजर आ रही।

ध्यातव्य है कि 2013 में विधानसभा परिणाम त्रिशंकु आने पर एक दूसरे के खिलाफ लड़ने वाली केजरीवाल की पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच पहले भी गठबंधन हो चुका है।

AAP की जीत, विकास के एजेंडे की जीत होगी: कॉन्ग्रेस ने केजरीवाल की तारीफों के बाँधे पुल

दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर कॉन्ग्रेस पहले ही हार मान गई है। कॉन्ग्रेस के बड़े नेता अब आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल की तारीफों के पुल बाँधने लगे हैं। कॉन्ग्रेस दिल्ली में हुए चुनावी मुकाबले में कहीं भी नहीं दिख रही है, इसीलिए पार्टी ने अब भाजपा विरोध के नाम पर उसी AAP का समर्थन शुरू कर दिया है, जिसके ख़िलाफ़ उसने चुनाव लड़ा था। ऐसा बयान कोई और नहीं बल्कि लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ही दे रहे हैं। अधीर रंजन के इस बयान से चर्चा शुरू हो गई है कि क्या जानबूझ कर कॉन्ग्रेस ने पूरी ताक़त लगा कर चुनाव नहीं लड़ा?

अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि इस चुनाव में जहाँ भाजपा ने सांप्रदायिक अजेंडे को आगे बढ़ाया, वहीं अरविन्द केजरीवाल विकास के मुद्दे को लेकर जनता के बीच गए। उन्होंने कहा कि अरविन्द केजरीवाल की जीत का अर्थ होगा विकास के मुद्दे की जीत होना। तो क्या कॉन्ग्रेस पार्टी ने मान लिया है कि दिल्ली में उसका अस्तित्व खत्म है और राहुल गाँधी व प्रियंका गाँधी भी पार्टी को बचाने में कामयाब नहीं हुए? जो पार्टी 2013 तक लगातार 15 वर्षों में सत्ता में रही थी, अब वो अस्तित्व बचाने के लिए भी जूझ रही है।

अधिकतर एग्जिट पोल्स में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत की भविष्यवाणी की जा रही है। हालाँकि, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर और मनोज तिवारी ने दावा किया है कि सभी एग्जिट पोल्स के आँकड़े इस बार फेल हो जाएँगे। मुस्लिमों ने आम आदमी पार्टी को एकमुश्त वोट दिया है, ऐसा सामने आ रहा है। कॉन्ग्रेस के कई मुस्लिम वोटरों ने भी अब केजरीवाल की पार्टी का रुख कर लिया है क्योंकि भाजपा को हराने के लिए कई इमामों ने भी चुनावी प्रचार किया था।

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