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ISRO ने लॉन्च किया SpaDex मिशन, स्पेस डॉकिंग के लिए छोड़े दो सैटेलाइट: अंतरिक्ष में ही जोड़े जाएँगे, ऐसा करने वाला चौथा देश होगा भारत

ISRO ने सोमवार (30 दिसम्बर, 2024) को SpaDex मिशन लॉन्च किया। इसके लिए PSLV C-60 रॉकेट छोड़ा गया, जिसने कई सैटेलाईट अंतरिक्ष पहुँचाए। अब इनमें से SpaDex मिशन के दो सैटेलाईट जोड़ने का काम अंतरिक्ष में ही किया जाएगा। यह मिशन हमारे एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष भेजने के साथ ही आगे कई अभियानों के लिए अहम कड़ी साबित होगा। जो मिशन अब चालू हुआ है, उसे स्पेस डॉकिंग कहा जाता है। यह काम अगले कुछ दिन तक चलेगा। यदि भारत इसमें सफल होता है, तो वह इस क्षमता वाला दुनिया का चौथा देश होगा।

ISRO ने क्या किया, क्या होती है स्पेस डॉकिंग?

ISRO ने सोमवार को रात 10 बजे श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV C-60 रॉकेट लॉन्च किया। इस रॉकेट पर कुल 24 सैटेलाईट लदे हुए थे। इनमें से सबसे प्रमुख दो सैटेलाईट थे। ISRO ने इन सैटेलाईट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की निचली कक्षा में स्थापित किया।

इनका नाम SDX-01 और SDX-02 था। इन दोनों का वजन 220 किलो है। यह दोनों सैटेलाईट अंतरिक्ष में पृथ्वी से 470 किलोमीटर की ऊँचाई और 55 अंश के कोण पर छोड़े गए हैं। अब इन दोनों की डॉकिंग की जाएगी।

डॉकिंग को सरल भाषा में समझा जाए, तो यह दो सैटेलाईट (मॉड्यूल) को अंतरिक्ष में जोड़ने की प्रक्रिया को कहते हैं। यह कुछ-कुछ जमीन पर कोई पुल बनाने जैसा है। जिस तरह पुल के अलग-अलग हिस्से आपस में जोड़े जाते हैं, उसी तरह डॉकिंग में भी दो या उससे अधिक सैटेलाईट आपस में जोड़े जाते हैं। यह पूरी सरंचना किसी विशेष काम के लिए उपयोग होती है।

डॉकिंग का उपयोग वर्तमान में दो सैटेलाईट के बीच किन्हीं वस्तुओं के आदान प्रदान समेत बाक़ी काम के लिए होता है। अंतरिक्ष में स्थापित अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन भी इसी सिद्धांत पर काम करता है। इसका निर्माण भी डॉकिंग के जरिए हुआ था। इसमें सामान की आपूर्ति भी डॉकिंग के जरिए ही होती है।

दरअसल, कई ऐसे सैटेलाईट या फिर मॉड्यूल होते हैं, जिन्हें एक बार में रॉकेट नहीं ले जा सकते। ऐसे में उन्हें अलग-अलग हिस्से में भेज कर अंतरिक्ष में जोड़ा जाता है। इसी तकनीक को हासिल करने का प्रयास अब ISRO इस SpaDeX मिशन के जरिए कर रहा है।

कैसे होगी डॉकिंग?

ISRO द्वारा लॉन्च किए गए मिशन में से SDX-01 चेसर सैटेलाईट है जबकि SDX-02 टार्गेट सैटेलाईट है। इसका मतलब है कि SDX-01 कक्षा में स्थापित किए जाने के बाद SDX-02 की तरफ बढ़ेगा और अंत में दोनों जुड़ जाएँगे। PSLV C-60 रॉकेट ने इन्हें आपस में लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर छोड़ा है। अब इन्हें जोड़ने की प्रक्रिया चालू की जाएगी।

ISRO के मुखिया S सोमनाथ ने बताया है कि दोनों सैटेलाईट को जोड़ने की प्रक्रिया यानि डॉकिंग संभवतः 7 जनवरी, 2025 को चालू होगी। इसके लिए सबसे पहले दोनों को 20 किलोमीटर की दूरी पर रोका जाएगा। इसके बाद टार्गेट सैटेलाईट SDX-01 को स्टार्ट किया जाएगा।

इससे यह SDX-02 सैटेलाईट अंतरिक्ष में अपनी जगह से हटेगा नहीं। इसके बाद चेसर सैटेलाईट SDX-01 को SDX-02 की तरफ बढ़ाया जाएगा। इसके लिए SDX-01 धीमे-धीमे पहले 5 किलोमीटर, फिर 3 किलोमीटर, फिर 1.5 किलोमीटर अंत में लगभग 100 मीटर पास आ जाएगा।

इसके बाद यह दोनों सैटेलाईट पास में जुड़ जाएँगे। इससे डॉकिंग पूरी हो जाएगी। इसके बाद इनके बीच बिजली सप्लाई भी कर के देखी जाएगी। यह सारे प्रयोग पूरे होने के बाद दोनों सैटेलाईट को अनडॉक यानी एक-दूसरे से अलग भी किया जाएगा। यह दोनों इसके बाद लगभग 2 साल तक अलग-अलग प्रयोग में काम आएँगे।

SDX-01 सैटेलाईट पर छोटे कैमरे भी लगे हुए हैं। यह कैमरे इसके बाद तस्वीरें और वीडियो लेंगे। इसके अलावा भी इस पर कई सेंसर लगे हैं। यह सेंसर अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों का पता लगाएँगे। इनमें से एक सेंसर रेडियेशन का स्तर भी मापेगा। इन सैटेलाईट को भारत में स्थित सैटेलाईट नियंत्रण सेंटर से नियंत्रित किया जाएगा।

कितनी बड़ी छलाँग?

अब तक विश्व के तीन देश ही यह डॉकिंग की तकनीक हासिल कर सके हैं। यह देश अमेरिका, रूस और चीन हैं। 7 जनवरी, 2025 को भारत भी इस लीग में शामिल हो जाएगा। इस तकनीकी तरक्की का फायदा ISRO को आगे के मिशन में मिलेगा। भारत ने अंतरिक्ष में अपना भी स्पेस स्टेशन बनाने का ऐलान किया है।

डॉकिंग में सफलता इसके रास्ते खोलेगी। भारत को 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाना है, इसके लिए 2028 से काम चालू होगा। एक-एक कर इसके हिस्से अंतरिक्ष पहुँचाए जाते रहेंगे। इसके पूरे होने पर इसमें भारतीय एस्ट्रोनॉट जा सकेंगे। इसके अलावा यह प्रक्रिया चंद्रमा पर भारतीय भेजने, वहाँ से सैंपल वापस लाने समेत बाकी मिशन के लिए मील का पत्थर होगी।

कौन हैं केरल की नर्स निमिषा प्रिया, यमन के राष्ट्रपति ने क्यों नहीं माफ की फाँसी; ब्लड मनी पर क्यों नहीं बनी बात: जानिए सब कुछ, भारत सरकार ने कहा- हर संभव मदद करेंगे

यमन में रह रही केरल की नर्स निमिषा प्रिया को मौत की सजा देने का फैसला राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने मंजूर कर लिया है। निमिषा को 2017 में यमनी नागरिक तलाल अब्दो मेहदी की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। यमन की अदालत ने उन्हें 2020 में मौत की सजा सुनाई थी, और उनकी अपील को नवंबर 2023 में खारिज कर दिया गया। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उनकी सजा पर अमल अगले एक महीने के भीतर हो सकता है।

यह खबर निमिषा के परिवार के लिए किसी झटके से कम नहीं है। उनकी माँ प्रेमा कुमारी ने कहा है कि अगर किसी की जान लेनी है तो उनकी ले ली जाए। उन्होंने अपनी बेटी को बचाने के लिए पिछले कई सालों से हरसंभव कोशिश की। प्रेमा कुमारी ने यमन जाकर मृतक के परिवार से बात करने और ‘ब्लड मनी’ (मुआवजा) के जरिए समझौता करने की कोशिश की, लेकिन बातचीत विफल रही।

जानकारी के मुताबिक, निमिषा प्रिया पर आरोप लगे थे कि उन्होंने साल 2017 में एक यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी को ड्रग्स का ओवरडोज दे दिया था, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। वहीं, निमिषा ने अपने बचाव में कहा था कि मृतक ने उनका पासपोर्ट छीन लिया था, जिसे वो वापस पाना चाहती थी। निमिषा ने दावा किया था कि उन्होंने महदी को बेहोशी की दवा दी थी। उसकी हत्या करने का इरादा नहीं था।

भारत सरकार ने इस मामले में बयान दिया है कि वे सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि सरकार निमिषा प्रिया और उनके परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है।

बता दें कि निमिषा शादीशुदा हैं। केरल के पलक्कड़ की रहने वाली निमिषा अपने पति और बेटी के साथ पिछले लगभग एक दशक से यमन में काम कर रही थीं। इस बीच यमन में गृहयुद्ध शुरु हो गया तो उनका परिवार भारत आ गया था। हालाँकि, यमनी नागरिक द्वारा पासपोर्ट ले लेने के कारण निमिषा वापस नहीं लौट पाईं। हालाँकि निमिषा का परिवार अभी भी उम्मीद लगाए बैठा है कि कुछ चमत्कार होगा और उनकी बेटी की जान बचाई जा सकेगी।

पुजारी को मारकर आग में फेंका, दीवार से चुनवा दिया गर्भगृह… 44 साल बाद मुरादाबाद में प्रकट हुआ गौरी शंकर मंदिर, प्रतिमाएँ खंडित: दंगों के बाद हिंदू आराध्यों को किया दफन

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक मुस्लिम बहुल इलाके में हिन्दू मंदिर मिला है। यह मंदिर पिछले लगभग 4 दशक से बंद पड़ा था। इस मंदिर में शिवलिंग कई खंडित मूर्तियाँ भी मिली हैं। इसमें कोई जा ना पाए, इसके लिए दीवाल भी बना दी गई थी। प्रशासन ने अब दीवाल तोड़कर मंदिर का जीर्णोद्धार चालू कर दिया है। मंदिर 1980 में हुए भीषण दंगों के बाद बंद कर दिया गया था। तब यहाँ के पुजारी की हत्या कर उन्हें आग में झोंक दिया गया था।

परदादा ने बनवाया, पोते ने हटवाया कब्जा

मुरादाबाद में यह मंदिर झब्बू का नाला इलाके में मिला है। यहाँ अधिकांश आबादी मुस्लिमों की है। इस मंदिर को लेकर पुजारी के परपोते सेवाराम ने डीएम से शिकायत की थी। उन्होंने शिकायत में बताया था कि मंदिर को उनके परदादा भीमसेन ने बनवाया था और इसके बाद उनका ही परिवार इसमें पूजा करता था। उन्होंने कहा था कि 1980 के दंगे में इस मंदिर को बंद करके प्रवेश द्वार पर दीवाल बनवा दी गई थी और अब यहाँ लोग नहीं जाते। उन्होंने मंदिर को खोलने की माँग करते हुए स्थानीय लोगों के साथ प्रदर्शन भी किया था।

खंडित मूर्तियाँ, बनवा दी पार्किंग

इसके बाद सोमवार (30 दिसम्बर, 2024) को यहाँ मुरादाबाद नगर निगम और प्रशासन की टीम दल-बल के साथ पहुँची। उसने मंदिर की दीवाल तोड़ी। इसके बाद यहाँ इकट्ठा हुई मिट्टी को हटाया गया। मंदिर का स्वरूप इसके बाद दिखा। यहाँ दीवाल पर बनाई हुई बजरंग बली की प्रतिमा मिली। यहाँ से शिवलिंग भी है जिसके पास लेकिन नंदी की मूर्ति थी। माँ दुर्गा और काली की प्रतिमाएँ खंडित थी। जो मूर्तियाँ दीवाल में बनवाई गई थीं उनको भी तोड़ दिया गया था। मंदिर में तीन फीट का पक्का फर्श बनवा दिया गया था। यहाँ की जमीन पर अब पार्किंग चलती थी।

प्रशासन ने मंदिर की खुदाई करवाई है और फर्श तुड़वाया है। अंदर से काफी बड़ा मंदिर सामने आया है। प्रशासन अब मंदिर का जीर्णोद्धार करवा रहा है। यहाँ जल्द ही काम पूरा कर पूजा चालू करवा दी जाएगी। स्थानीय हिन्दुओं को अपना मंदिर वापस पाकर प्रसन्नता है लेकिन इससे कड़वी यादें भी ताजा हो गई हैं। मंदिर के निर्माण को लेकर शिकायत देने वाले सेवाराम इसके वापस मिलने और बुरी हालत देख कर रो पड़े। उन्होंने बताया कि उनके परदादा भीमसेन ने इस मंदिर के निर्माण के जमीन दी थी।

किन्नर ने उठा रखा था पूजा का बीड़ा

तब इस झब्बू का नाला इलाके में हिन्दू आबादी बसा करती थी। सेवाराम ने बताया कि उनके दादा गंगासरन यहाँ पूजा करते थे। 1980 में जब मुरादाबाद में ईद के बाद भीषण दंगा भड़का तो यह इलाका हिन्दुओं से खाली हो गया। सेवाराम ने आरोप लगाया कि दंगाइयों ने उनके दादा गंगासरन को मार दिया और उनकी लाश आग में झोंक दी। इससे उनका शव तक नहीं मिला। इसी के साथ मंदिर बंद हो गया और यहाँ दीवाल बना दी गई। इलाके से धीमे-धीमे सारे हिन्दू चले गए। तब से यह मंदिर बंद था।

यहाँ कुछ समय पहले एक हिन्दू किन्नर आकर बसी थीं। उनका नाम मोहिनी किन्नर है। मोहिनी किन्नर ने बताया कि उनसे मंदिर की यह हालत देखी नहीं गई और उन्होंने बाहर के हिस्से में रंगाई पुताई करवाई। इसके लिए भी पुलिस की मदद लेनी पड़ी थी। मोहिनी किन्नर ने बताया कि वह यहाँ रोज दिया बाती करती थीं और साथ ही दिवाली पर मंदिर की दीवाल कि सजावट करवाती थीं। अब वह और सेवाराम का परिवार अपने मंदिर को वापस पाकर काफी प्रसन्न हैं।

1980 के दंगे में मरे थे 83 लोग

यह मंदिर जिस 1980 के दंगे के बाद बंद किया गया था। उसमें 83 लोग मारे गए थे। 13 अगस्त 1980 को यह दंगा हुआ था। इसको लेकर 2023 में जाँच रिपोर्ट योगी सरकार ने सार्वजनिक की थी। इससे पहले तक दंगे की रिपोर्ट को इसलिए दबा कर रखा गया था क्योंकि इससे असल जिम्मेदार लोगों की पहचान हो जाती। मुरादाबाद में कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग दो बड़े खिलाड़ी थे। मुस्लिम लीग की जमात का नेतृत्व शमीम अहमद और हामिद हुसैन उर्फ अज्जी और उनके समर्थक कर रहे थे, जो उत्तर प्रदेश में मुस्लिम लीग को फिर से खड़ा करना चाहते थे।

वहीं, कॉन्ग्रेसी हाफिज मोहम्मद सिद्दीकी की अगुवाई में काम कर रहे थे। इस रिपोर्ट में हिंदू पक्ष के 6 लोगों के लिखित बयान दर्ज हैं, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि ये हिंसा अचानक नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित थी।मुरादाबाद में भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष हरिओम शर्मा का भी बयान इस रिपोर्ट में दर्ज है, जिन्होंने कहा था कि ये हिंसा बहुत बड़ी साजिश का महज एक हिस्सा भर ही थी। इस हिंसा के लिए मुस्लिम पक्ष को बाहरी देशों, इस्लामी संगठनों जैसे मुस्लिम लीग, जमीयत उलेमा-ए-हिंसा और तबलीगी-ए-इस्लाम ने फंडिंग की थी।

इसके दंगे से तीन महीने पहले से ही कई हिंसक घटनाएँ हो रही थीं। गहराए तनाव का फायदा मुस्लिम लीग और कॉन्ग्रेस के नेताओं ने 13 अगस्त 1980 को ईद के दिन उठाया। उन्होंने अपने समर्थकों के माध्यम से सुअरों वाली घटना को अंजाम दिया और पूरे मुरादाबाद को दंगों की चपेट में धकेल दिया। भाजपा नेता हरिओम शर्मा ने उस दिन को याद करते हुए बयान में बताया है कि ईद के मौके पर ईदगाह के पास लगाए गए शिविरों में मुस्लिमों की भीड़ ने आग लगा दी।

इसमें उन 2 शिविरों को छोड़ दिया गया, जिन्हें मुस्लिम लीग चला रही थी। उस दौरान मुस्लिम लीग के नेता अपने शिविरों (कैंप) के पास ही थे, जबकि उन्हें नमाज में शामिल होना था। इस बात से साफ है कि वो दंगों के प्रति पहले से जानते थे और सारी साजिश उनकी रची हुई थी। हालाँकि, इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि ईदगाह में सुअर गए थे। इतना नहीं, इसके अलावा एक और अफवाह फैलाई गई कि पुलिस ने सैकड़ों मुस्लिमों को ईदगाह के अंदर मार दिया है।

‘देश शोक में, राहुल गाँधी जश्न मनाने वियतनाम गए’: BJP ने घेरा तो कॉन्ग्रेस ने दी निजता की दुहाई, मेमोरियल पर राजनीति करने वाली पार्टी ने अस्थि विसर्जन से बनाई दूरी

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन और उनके अस्थि विसर्जन के दौरान कॉन्ग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी जारी है। रविवार (29 दिसंबर 2024) को यमुना नदी में डॉ. सिंह की अस्थियाँ विसर्जित की गईं, लेकिन इस मौके पर कॉन्ग्रेस का कोई बड़ा नेता या गाँधी परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। इस पर भाजपा ने कॉन्ग्रेस को घेरते हुए सवाल उठाए हैं।

भाजपा ने इस पूरे मामले को लेकर कॉन्ग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कॉन्ग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि गाँधी परिवार और कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति सवाल खड़े करती है। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट कर राहुल गाँधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “जब देश डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर शोक मना रहा था, तब राहुल गाँधी वियतनाम में नए साल का जश्न मना रहे थे। गाँधी परिवार ने सिख समुदाय के प्रति हमेशा अपमानजनक व्यवहार किया है।”

कॉन्ग्रेस ने दी ये सफाई

भाजपा की आलोचना के बाद कॉन्ग्रेस ने सफाई दी। कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी ने परिवार की निजता का सम्मान करते हुए अस्थि विसर्जन से दूरी बनाए रखी। उन्होंने बताया कि सोनिया गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा ने अंतिम संस्कार के बाद परिवार से उनके आवास पर मुलाकात की थी।

खेड़ा ने कहा, “दाह संस्कार के समय परिवार को गोपनीयता का मौका नहीं मिल पाया था। कुछ सदस्य चिता स्थल तक नहीं पहुँच सके थे। ऐसे में परिवार को अस्थि विसर्जन के दौरान गोपनीयता देना उचित समझा गया। यह रस्म उनके लिए भावनात्मक रूप से कठिन और दर्दनाक थी।”

सिख रीति-रिवाज के साथ अस्थि विसर्जन

रविवार सुबह डॉ. मनमोहन सिंह के परिवार के सदस्य निगमबोध घाट पहुँचे, जहाँ अस्थियाँ चुनी गईं। इसके बाद मजनू का टीला गुरुद्वारा के पास यमुना नदी में सिख परंपरा के अनुसार अस्थियाँ विसर्जित की गईं। इस दौरान उनकी पत्नी गुरशरण कौर, तीन बेटियाँ उपिंदर सिंह, दमन सिंह और अमृत सिंह और अन्य करीबी रिश्तेदार मौजूद थे।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 की रात नई दिल्ली के एम्स में 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। 1990 के दशक में भारत के आर्थिक सुधारों के नायक रहे डॉ. सिंह का निगमबोध घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके निधन के बाद देश में 7 दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की गई है।

कस्टमर को ‘कंडोम- ORS पैकेट’, कहा- न्यू ईयर पार्टी में इनके साथ आइएगा: विवादों में घिरा पुणे का पब, कहा- AIDS से कर रहे जागरूक

न्यू ईयर की पार्टी में कंडोम और ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) के साथ ग्राहकों को आने का निमंत्रण पुणे का एक पब दे रहा है। उसने अपने रेगुलर कस्टमर को इसके पैकेट भी भेजे हैं। विवाद खड़ा होने पर पब ने अपने कदम का बचाव किया है। वहीं युवा कॉन्ग्रेस ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है।

पब पर पुणे की सांस्कृति और शैक्षणिक विरासत के साथ खिलवाड़ के आरोप लग रहे हैं। हाई स्पिरिट्स कैफे नाम रेस्तरां सह पब पुणे के मुंधवा इलाके में स्थित है। पब ने कहा है कि इन सामानों को बाँटने का मकसद युवाओं में जागरूकता पैदा करना है। सुरक्षा और जिम्मेदारी से नए साल का जश्न मनाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पब ग्राहकों को नए साल के जश्न के निमंत्रण के तौर पर कंडोम और ORS का पैकेट बाँट रहा है। पब की तरफ से आए बयान में इस कदम को ‘सेफ्टी एंड सेलिब्रेशन’ का नाम दिया गया है। यह भी कहा कि वे इस अभियान के तहत लोगों को AIDS जैसी बीमारियों के खिलाफ जागरूक कर रहे हैं।

पब की तरफ से जारी बयान में बताया गया है कि उन्होंने जिस बैग में ये दोनों चीजें उपहार स्वरूप रखीं थीं, उसमें ध्वनि उपकरण और शराब पी कर गाड़ी न चलाने जैसे दिशा-निर्देश से जुड़ी बुकलेट भी है। महाराष्ट्र युवा कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रभारी अक्षय जैन ने हाई स्प्रिट्स कैफे पर कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने पुणे पुलिस कमिश्नर के पास इसकी शिकायत दर्ज करवाई है।

पुलिस को दी गई शिकायत में अक्षय जैन ने बताया कि हाई स्प्रिट्स कैफे की हरकत महाराष्ट्र की संस्कृति के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे कामों को बढ़ावा देने से युवाओं में गलत संदेश जाता है जो एक अच्छे समाज के लिए सही नहीं है। फिलहाल पुणे पुलिस इस शिकायत पर जाँच कर रही है।

आटा-तेल बेचने के धंधे से हटेगा अडानी ग्रुप, Fortune वाली कम्पनी Adani Wilmar Limited में बेचेगा हिस्सेदारी:₹17000 करोड़ में डील, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट जैसे बिजनेस में लगाएगा पैसा

अडानी समूह जल्द ही रोजमर्रा के सामान (FMCG) बेचने के धंधे से बाहर आ जाएगा। इसके लिए वह Wilmar कम्पनी के साथ चली आ रही अपनी साझेदारी कंपनी अडानी Wilmar लिमिटेड (AWL) से हिस्सेदारी खत्म करेगा। अपने इस धंधे को Wilmar के हाथों बेचने से उसे 2 बिलियन डॉलर (₹17,000 करोड़) मिलेंगे।

इस पैसे का इस्तेमाल अडानी समूह अब बाकी एनर्जी और ट्रांसपोर्ट जैसे धंधों को बढ़ाने के लिए करेगा। अडानी समूह यह कार्रवाई लगभग 6 माह के भीतर पूरी करेगा। अडानी समूह लम्बे समय से खाने-पीने की वस्तुओं की व्यापार में है। अडानी समूह की Wilmar के साथ 1999 से ही साझेदारी है। Wilmar सिंगापुर की एक कम्पनी है।

दोनों कम्पनियाँ मिल कर भारत में खाने के तेल, आटा-चावल, रवा, मैदा समेत सोयाबीन जैसे कई सामान बेचती है। अडानी Wilmar देश में खाने के तेल में मामले में नम्बर 1 कंपनी है। अडानी समूह की AWL में अभी 44% हिस्सेदारी है। अडानी समूह को इस बिक्री से जो पैसा मिलेगा, उसका इस्तेमाल दूसरे क्षेत्र में होगा।

वर्तमान में AWL लगभग ₹43000 करोड़ की कम्पनी है। इसका शेयर वर्तमान में ₹300 के ऊपर है। Wilmar और अडानी समूह यह डील मार्च, 2025 तक पूरी कर लेंगे। इस डील में 31% हिस्सा सीधे तौर पर Wilmar को बेच दिया जाएगा जबकि बाकी 13% हिस्सा शेयरधारकों को शेयर बाजार में बेचा जाएगा।

अडानी समूह डील से मिले पैसे को एयरपोर्ट, सोलर एनर्जी और बाकी प्रोजेक्ट में निवेश करेगा। वर्तमान में अडानी समूह देश में सबसे बड़ा एयरपोर्ट ऑपरेटर और सबसे बड़ी स्वच्छ ऊर्जा की कम्पनी है। अडानी समूह पर हाल ही में अमेरिका में न्याय विभाग ने रिश्वतखोरी और गड़बड़ी समेत कई आरोप जड़े थे।

इसके चलते उसे कई प्रोजेक्ट का नुकसान भी उठाना पड़ा था। उसे अमेरिकी बाजार से निवेश जुटाने में इसके बाद दिक्कत आई थी। हालाँकि, इस डील से उसे निवेश की समस्या भी नहीं रहेगी और उसकी साख में इजाफा होगा। अडानी समूह ने अक्टूबर, 2024 में ही 500 मिलियन डॉलर (लगभग ₹4250 करोड़) जुटाए थे।

मार्च, 2025 में अडानी विलमर डील पूरी होने के बाद अडानी समूह के पास ₹20000 करोड़ से अधिक धनराशि होगी। इसका इस्तेमाल अपने बाकी धंधों में निवेश और कर्ज चुकता करने में कर पाएँगे। अडानी समूह के निकलने के बाद अडानी Wilmar लिमिटेड को नया नाम दिया जाएगा।

कड़ाके की ठंड में पटना की सड़कों पर लाठी क्यों खा रहे छात्र, क्यों झेल रहे पानी की बौछारें: जानिए क्या है BPSC से जुड़ा विवाद, क्यों ‘PK वापस जाओ’ के लगे नारे

बिहार में कड़ाके की ठंड के बावजूद राजधानी पटना में बीपीएससी अभ्यर्थी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह विवाद बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ा है, जो 13 दिसंबर 2024 को आयोजित की गई थी। छात्रों का कहना है कि इस परीक्षा में गंभीर अनियमितताएँ हुईं और वे इसे रद्द कर दोबारा आयोजित करने की माँग कर रहे हैं।

अब तक तीन बार हो चुका है लाठीचार्ज

पटना के जेपी गोलंबर और गाँधी मैदान से लेकर गर्दनीबाग धरनास्थल तक छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन की शुरुआत से लेकर अब तक परीक्षार्थियों पर तीन बार लाठीचार्ज हो चुका है। दरअसल, पटना के बापू सभागार में आयोजित इस परीक्षा में प्रश्न पत्र के वितरण में देरी और पेपर लीक के आरोप लगे।

परीक्षार्थियों का दावा है कि प्रश्न पत्र स्तरहीन थे और कुछ सवाल निजी कोचिंग संस्थानों के मॉडल प्रश्न पत्रों से मेल खाते थे। इसके चलते 18 दिसंबर से सभी 912 केंद्रों की दोबारा प्रारंभिक परीक्षा की माँग को लेकर बीपीएससी परीक्षार्थी पटना के गर्दनीबाग धरनास्थल पर आंदोलन कर रहे हैं। अपनी इसी माँग को लेकर पटना के गाँधी मैदान में लगी गाँधी जी मूर्ति के नीचे रविवार (30 दिसंबर 2024) को ये छात्र संसद लगाना चाहते थ, लेकिन यहाँ हालात तब बिगड़ गए जब परीक्षार्थियों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की और पुलिस ने बल प्रयोग किया।

छात्रों की प्रमुख माँगें–

  • बीपीएससी की परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित की जाए।
  • नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए। इसका गणितीय मॉडल सार्वजनिक करने की माँग भी की गई है।
  • पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
  • छात्रों पर लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया बनी विवाद की मुख्य वजह: नॉर्मलाइजेशन एक सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जिसका उपयोग अलग-अलग शिफ्टों में आयोजित परीक्षाओं के कठिनाई स्तर को संतुलित करने के लिए किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि बीपीएससी ने इसे सही तरीके से लागू नहीं किया। इससे आसान शिफ्ट में शामिल छात्रों को अनुचित लाभ हुआ और कठिन शिफ्ट वाले छात्रों को नुकसान उठाना पड़ा।

नॉर्मलाइजेशन के नुकसान: 1-) कठिनाई का सही आकलन नहीं हो पाना विवाद का कारण बनता है। 2-) व्यक्तिगत मेहनत और परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। 3-) कठिन शिफ्ट के छात्रों का स्कोर कम हो सकता है, जिससे उनका चयन प्रभावित होता है।

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस ने की कार्रवाई

रविवार (29 दिसंबर 2024) शाम को गाँधी मैदान से सीएम आवास तक मार्च निकालने की कोशिश कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इस दौरान कई छात्र घायल हुए। पुलिस ने 21 नामजद और 600-700 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति के जुलूस निकाला और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया।

छात्रों को कई संगठनों और राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल रहा है। इस प्रदर्शन में आइसा (AISA), एबीवीपी (ABVP) जैसे संगठन भी सक्रिय हैं, तो राजद और जन सुराज ने आंदोलन का समर्थन किया है। इस बीच, फेसबुक, एक्स और अन्य प्लेटफार्म पर #BPSCExamScam और #BPSCNormalization जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली दौरे पर होने के कारण मुख्य सचिव ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। हालाँकि, इस बातचीत से कोई निष्कर्ष नहीं निकला। छात्रों ने कहा है कि अगर उनकी माँगें नहीं मानी गईं, तो वे आंदोलन जारी रखेंगे।

प्रशांत किशोर पर प्रदर्शन के दौरान गायब होने का आरोप

अपनी राजनीतिक पार्टी जन सुराज अभियान चला रहे प्रशांत किशोर पर छात्रों को भड़काने का आरोप लगा है। दरअसल, बीपीएससी 70वीं परीक्षा को लेकर चल रहे आंदोलन में जन स्वराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर भी शामिल हुए, लेकिन उनके प्रदर्शन स्थल से लौट जाने के बाद छात्रों का गुस्सा और भी बढ़ गया। छात्र बीपीएससी परीक्षा को दोबारा कराने की माँग कर रहे थे। प्रशांत किशोर ने शुरू में मार्च का नेतृत्व किया, लेकिन बाद में वह प्रदर्शन स्थल से चले गए, जिससे कई छात्र नाराज हो गए और उनके खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उन्होंने ‘प्रशांत किशोर वापस जाओ’ के नारे भी लगाए। वहीं, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सीएम आवास तक पहुँचने से रोकने के लिए लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया, जिससे कई छात्र घायल हो गए।

जन सुराज के प्रशांत किशोर सहित कई अन्य पर केस दर्ज

जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती सहित 21 लोगों के खिलाफ पटना के गाँधी मैदान थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन पर छात्रों को उकसाने और हंगामा कराने का आरोप है। प्राथमिकी में 21 नामजद और 600 से 700 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। कहा गया कि जन सुराज के नेता जब भीड़ बेक़ाबू हो गई तो जेपी गोलंबर के पास भीड़ को छोड़ कर निकल गए। उन लोगों के द्वारा मुख्य सचिव को ज्ञापन देने के लिए पाँच लोगों का डेलीगेशन भेजने की बात की गई, लेकिन आपसी सहमति नहीं बनने के कारण लोगों का नाम भी नहीं दिया गया। प्रदर्शन पर अड़े छात्रों को रोकने के लिए पहले उन पर वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा और हल्का बल प्रयोग कर इन्हें हटाया गया तथा स्थिति को सामान्य किया गया।

आमने-सामने आए तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर

बीपीएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन अब सियासी रंग भी ले चुका है। जन सुराज के प्रशांत किशोर और राजद नेता तेजस्वी यादव के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वे थक चुके हैं और रिटायर्ड अधिकारियों के सहारे राज्य चला रहे हैं। उन्होंने लाठीचार्ज की निंदा करते हुए कहा कि छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है और परीक्षा को दोबारा आयोजित किया जाना चाहिए।

वहीं, प्रशांत किशोर ने भी 2 जनवरी से धरने पर बैठने की घोषणा की है। प्रशांत किशोर ने तेजस्वी यादव पर पलटवार करते हुए कहा कि राजद आंदोलन को कुचलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि वे 2 जनवरी से धरने पर बैठेंगे और पटना पुलिस के खिलाफ मानवाधिकार आयोग जाएंगे।

ये है बीपीएसपी परीक्षा को लेकर बवाल का पूरा मामला

बता दें कि बीपीएससी की 70वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा का विज्ञापन सितंबर 2024 में जारी किया गया था और इसमें 4,83,000 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, जिनमें से 3,25,000 ने परीक्षा दी है। यह परीक्षा 2,031 पदों के लिए आयोजित की गई थी, जिसमें 200 एसडीएम, 136 डीएसपी और अन्य राजपत्रित अधिकारी पद शामिल थे, जिससे यह पिछले कुछ वर्षों में सबसे बड़ी भर्ती प्रक्रिया बनी। प्रारंभिक परीक्षा 13 दिसंबर 2024 को दोपहर 12 बजे से 2 बजे के बीच आयोजित की गई, जिसमें अभ्यर्थियों को सामान्य ज्ञान के 150 प्रश्नों के उत्तर देने थे।

बापू सभागार में आयोजित परीक्षा के दौरान ही विवाद हुआ। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि पेपर की सील पहले से खुली हुई थी, पेपर बाँटने में आधे घंटे की देरी की गई और पेपर लीक किया गया। छात्रों की माँग पर उस परीक्षा को रद्द कर 4 जनवरी 2025 को दोबारा परीक्षा आयोजित कराए जाने का ऐलान हुआ, लेकिन अब छात्र चाहते हैं कि सभी 900 से ज्यादा सेंटरों पर दोबारा परीक्षा का आयोजन हो।

छात्रों की माँग है कि सिर्फ एक सेंटर पर दोबारा परीक्षा कराने से इसकी निष्पक्षता प्रभावित होगी इसलिए पूरी परीक्षा फिर से कराई जाए। हालाँकि बीपीएससी ने ऐसा कराने से इनकार कर दिया है, इसकी वजह से पटना के गर्दनी बाग इलाके में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा है।

मूँछ पर ताव, धमकी- निकलब त दू मूड़ी काटब… पर बाहुबली MLA से डरे नहीं किशोर कुणाल, मंत्री के विमान से खिंचवा लिया: पलामू की वो कहानी जो ‘दमन तक्षकों का’ में है दर्ज

महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव और दलितों के उत्थान के लिए काम करने वाले पूर्व IPS किशोर कुणाल सोमवार (30 दिसम्बर, 2024) को पंचतत्व में विलीन हो गए। रविवार को उनका कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया था। महावीर मंदिर और राम मंदिर के जरिए हिन्दू धर्म की सेवा करने और दलितों को मुख्यधारा में लाने के लिए किशोर कुणाल ने IPS सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। उनकी पहचान इसके बाद आचार्य किशोर कुणाल के तौर पर हुई। लेकिन, उनका पुलिस अधिकारी के तौर पर भी करियर कम वीरता से नहीं भरा है।

किशोर कुणाल की पटना के बॉबी कांड को लेकर काफी चर्चा हुई थी। उन्होंने इसके अलावा संयुक्त बिहार में और भी जिलों में अपराध नियंत्रण पर काफी अच्छा काम किया था। ऐसी ही एक घटना उनके पलामू जिले का एसपी रहते हुए हुई थी। इसका जिक्र किशोर कुणाल की आत्मकथा ‘दमन तक्षकों का’ में किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे किशोर कुणाल ने अपनी तैनाती के कुछ ही दिनों के भीतर एक छंटे अपराधी और विधायक विनोद सिंह को मंत्री के सामने पकड़ा था।

इस किताब में किशोर कुणाल बताते हैं कि वह पलामू में तैनाती के बाद एक दिन जिले के ही लातेहार थाना पहुँचे थे। यहाँ थाना खाली थी और मात्र एक सिपाही बैठा था। यहाँ उन्होंने थाने की डायरी, जिसमें मुकदमे दर्ज किए जाते थे, उसका निरीक्षण किया और यह खाली मिली। ऐसा डायरी को बाद में भरने के लिए किया जाता था। कई मुकदमे दर्ज ही नहीं किए जाते थे। थाने के भीतर किशोर कुणाल को थानेदार नहीं मिला तो उन्होंने उसको बुलाया।

किशोर कुणाल लिखते हैं, “इसी बीच एक रोबदार आवाज दूर से सुनाई पड़ी- “अरे दरोगवा कहाँ बाड़े?” दारोगा को दरोगवा कहकर तिरस्कार करनेवाला भी कोई शख्स हो सकता है, यह कल्पना भी नहीं की थी। वह मोटा, भारी-भरकम डील-डौल वाला आदमी आते ही बोल उठा- “अरे दरोगवा कहाँ गईल बा। बीच सड़क पर कवनो ट्रक लगा देले बा, हमार गाड़ी निकल ना सकल। पैदल अवतानी। एहले ई जाहिल दरोगवा के खोजत बानी।”

किताब में आगे उन्होंने बताया, “उस विशिष्ट व्यक्ति ने सामने आकर कुर्सी पर बैठने और अपना परिचय देने की बात कही- “रउरा हमार परिचय पूछत बानी। हमरा कौन ना जानेला। हम नेता विनोद सिंह जेकरा नाम से पलामू के पत्ता-पत्ता डरे ला। इहाँ जिला में कोई अइसन अपराधी नहीं बा जे हमरा खबर कइले बगैर कोई अपराध करत बा? अइसन कोई दारोगा इ जिले में ना बा जे हमरा मर्जी के बगैर के कोई पकड़ सकेला और ना अइसन कोई नेता बा जे हमरा नाम के बिना राजनीति करत बा? हम तो आपका परिचय देली। अब रउरा आपन परिचय दीं।”

कुणाल किशोर लिखते हैं कि इस अपराधी का उनको पहले से पता था और कुछ ही दिन पहले उसकी हिस्ट्रीशीट उन्होंने पढ़ी थी। कुणाल किशोर ने तुरंत उसे गिरफ्तार करने का फैसला किया। वह लिखते हैं, “कुणाल- “आपने अपना सटीक परिचय दिया है। परसों ही मैं आपकी अपराध-गाथा पुलिस अभिलेखों में पढ़ रहा था। आपके एक-एक कारनामे से मैं परिचित हूँ। मैं हूँ एस.पी. कुणाल। रोहतास से बदल कर यहाँ आया हूँ। आपकी गाड़ी तो अब निकल जायेगी, किन्तु आप यहाँ से नहीं निकल पायेंगे।”

यह सुन कर विनोद सिंह ने अपना ताव दिखाने की कोशिश एसपी कुणाल से की। किताब के अनुसार, “विनोद सिंह मूँछ पर ताव फेरते हुए बोला, ऐसा कोई माई का लाल नहीं जन्मा जो विनोद सिंह को बन्दी बना सके और ऐसी कोई हथकड़ी नहीं बनी जो इसके हाथ में डाली जा सके।” इसके बाद एसपी कुणाल ने उसकी गिरफ्तारी के आदेश थानेदार को दे दिए। हालाँकि, किसी तरह से विनोद सिंह यहाँ से निकल गया और बाहर अगले दिन कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री रमेश झा के साथ बैठक में शामिल हो गया। मंत्री यहाँ बीस सूत्रीय कार्यक्रम में शामिल होने आए थे।

एसपी किशोर कुणाल को यह जब पता चला तो वह वहाँ भी विनोद सिंह को पकड़ने पहुँच गए। विनोद सिंह अब तक जान चुका था कि कुणाल किशोर के एसपी रहते हुए उसका पलामू में सलाखों से बच पाना मुश्किल है। ऐसे में वह उनसे बचने के लिए मंत्री रमेश झा के साथ पलामू से भागने लगा। वह विनोद सिंह के विमान में जाकर पहले ही बैठ गया ताकि उसको एसपी कुणाल पकड़ ना सकें। उसका यह पैंतरा भी उसे बचा नहीं पाया। एसपी कुणाल ने तय कर लिया था कि वह अब जेल जाएगा। वह अपने साथ एक दारोगा विनोद राम को भी लिया था।

एसपी कुणाल ने दारोगा के साथ उसका पीछा किया। किताब में किशोर कुणाल लिखते हैं कि इसके बाद उन्होंने मंत्री को रोककर विनोद सिंह को पकड़ने के लिए दारोगा को भेज दिया। इस पर विंड सिंह आनाकानी करने लगा और धमकियाँ देने लगा। ऐसे में दारोगा ने उसका कॉलर पकड़ कर खींच लिया। जब विनोद सिंह को लगा कि अब वह मार भी खा जाएगा तो बाहर आ गया और गिरफ्तार कर लिया गया। उसने एसपी कुणाल को धमकी भी दी। उसने कहा, “”निकलब त दू मूड़ी काटब” यानी निकलूँगा, तो दो सिर काटूँगा।

विनोद सिंह की यह धमकी एसपी कुणाल और दारोगा को थी। हालाँकि, इससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ा और विनोद सिंह जेल भेज दिया गया। एसपी कुणाल के इसके अलावा भी पुलिस सेवा के कई बहादुरी के किस्से हैं। यह उनकी किताबों और बाकी जहाँ भी वह तैनात रहे, उनके चर्चे रहे हैं।

आयुष-आहान को साजिद-जावेद ने चाकुओं से गोदा, अब केस लटकाने की हो रही साजिश: बदायूँ के पीड़ित पिता का छलका दर्द, बोले- हाई कोर्ट जाऊँगा

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले में 19 मार्च, 2024 को आयुष और अहान नाम के 2 नाबालिग भाइयों की चाकू से गोद कर निर्मम हत्या कर दी गई थी। इसी हमले में तीसरा भाई 10 वर्षीय युवराज घायल हो गया था। हत्या का आरोपित मृतकों के घर के पड़ोस में सैलून चलाने वाले साजिद और जावेद नाम के 2 भाइयों पर लगा था। मुख्य आरोपित साजिद को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया, जबकि उसका भाई जावेद गिरफ्तार है। ऑपइंडिया ने मृतक बच्चों के पिता विनोद कुमार सिंह से बात कर परिवार के संघर्ष को समझा।

झाड़-फूँक बना हत्या का कारण

विनोद सिंह ने पुलिस की जाँच और कार्रवाई पर संतोष जताया। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, साजिद ने बच्चों की बलि देने का प्लान झाड़-फूँक और अंधविश्वास के कारण बनाया था। साजिद और जावेद दोनों को आरोपित किया गया है। विनोद ने बताया कि साजिद बच्चों की बलि से संतान सुख पाने के लिए उकसाया गया था। हालाँकि, पुलिस ने मौलवी का नाम सुगबुगाहट में आने के बावजूद उसे गिरफ्तार नहीं किया।

विनोद ने यह स्वीकार किया कि कई बार उन्होंने साजिद और उसके भाई को संकट काल में आर्थिक मदद की थी। घटना वाले दिन भी साजिद 5,000 रुपए माँगने उनके घर आया था। तब विनोद ने अपनी पत्नी से साजिद को पैसे देने की हाँ भर दी थी। विनोद का कहना है कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिसकी वो मदद कर रहे हैं, वही उनके परिवार को बर्बाद कर देगा।

जैकेट में छिपा कर लाया था चाकू

घटना के दिन कोई याद करते हुए विनोद सिंह बताते हैं कि साजिद जैकेट पहन कर आया था। उसका व्यवहार सामान्य दिख रहा था जिस से किसी कोई उस पर शक नहीं हुआ। साजिद का भाई जावेद भी साथ ही आया था। उसके पास भी एक चाकू मौजूद था। आयुष उसी समय स्कूल से लौटा था। वह विनोद की पत्नी द्वारा खोली गई कॉस्मैटिक की दुकान पर बैठा था। वह आयुष को ले कर घूमने-टहलने के बहाने छत पर ले गया। जावेद भी उन्ही के साथ छत पर गया।

साजिद और जावेद ने आयुष को छत पर ले जाकर चाकुओं से वार किए। इसी दौरान युवराज को गुटखा खरीदने के बहाने बाहर भेजा गया। बाद में आहान भी छत पर गया और महज 10 मिनट में दोनों भाइयों की हत्या कर दी गई।

जब साजिद और जावेद, दोनों भाइयों की हत्या के बाद नीचे उतर रहे थे, तब मझला बेटा युवराज उर्फ पीयूष गुटखा लेकर पहुँचा। साजिद ने उस पर भी चाकू से हमला किया, लेकिन युवराज किसी तरह चीखते हुए वहाँ से भाग निकला। उसकी चीख-पुकार सुनकर परिजनों को घटना का पता चला। तब तक साजिद और जावेद बाइक पर बैठकर फरार हो चुके थे। हत्या के वक्त बच्चों की माँ नीचे साजिद को उधारी देने के लिए पैसे गिन रही थीं।

मेरी पत्नी पर लगाए गए आधारहीन लाँछन

विनोद सिंह का कहना है कि बेटों की हत्या के बाद कई लोगों ने जुबानी तौर पर उनकी पत्नी पर लाँछन लगाने का प्रयास किया। दबी जुबान में साजिद और उनकी पत्नी के बीच रिश्ते की अफवाहें उड़ाई गईं। विनोद ने इन दावों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए कहा, “अगर मेरी पत्नी दोषी होती, तो साजिद मेरे बच्चों की बजाय मेरी हत्या करता।” उन्होंने ऑपइंडिया के माध्यम से लोगों से अपील की कि ऐसी झूठी बातों पर विश्वास न करें।

अदालत में चल रहीं हैं गवाहियाँ

विनोद ने बताया कि केस की सुनवाई जारी है। अभियोजन पक्ष ने अब तक चार गवाह पेश किए हैं, जिनमें विनोद सिंह, उनकी पत्नी, उनकी माँ और घायल बेटा युवराज शामिल हैं। तीन गवाहियाँ हो चुकी हैं, और अगली तारीख पर युवराज बयान दर्ज कराएगा। पुलिसकर्मी और सरकारी स्टाफ समेत अन्य गवाहों की गवाही अभी बाकी है।

मृतकों के परिजन के अलावा अन्य गवाहों में पुलिसकर्मी और अन्य सरकारी स्टाफ आदि हैं। विनोद ने हमें आगे बताया कि अभियोजन पक्ष की गवाहियाँ खत्म हो जाने के बाद आरोपित (साजिद और जावेद) पक्ष के गवाहों को पेश किया जा सकता है।

केस को लंबा खींचने की साजिश

आरोपित पक्ष की ओर से एक हिंदू वकील पैरवी कर रहा है। विनोद को दुख है कि बच्चों की हत्या के बाद वकीलों ने ऐसे जल्लाद का केस न लड़ने का संकल्प लिया था, लेकिन अब वही केस को लंबा खींचने में मदद कर रहे हैं।

विनोद ने यह भी बताया कि जावेद का यही वकील केस को लम्बा खींचने के लिए तमाम कानूनी-दांवपेंच का इस्तेमाल करता है। वह कभी लम्बी तारीख माँगने की एप्लिकेशन डाल देते हैं तो कभी अपनी तरफ से कोई कागज पेश करने के लिए कई दिनों की माँग आदि का प्रार्थना पत्र। अब विनोद सिंह पूरे केस को जल्द निरस्तरित करने की माँग को ले कर इलाहबाद हाईकोर्ट जाने का मन बना रहे हैं। यहाँ वो एक तय समय सीमा के अंदर निचली अदालत को फैसला सुनाने का आदेश देनी की माँग करेंगे।

विनोद ने हमें आगे बताया कि जो हिन्दू वकील जावेद का केस लड़ रहे हैं वो काफी सीनियर हैं। उनके अंडर में कई मुस्लिम वकील भी बतौर जूनियर काम करते हैं। ये जूनियर वकील कहीं न कहीं साजिद की ससुराल से जुड़े हुए हैं। विनोद द्वारा आशंका जताई गई है कि केस की सुनवाई में में हो रही देरी कहीं उन्हीं जूनियर वकीलों द्वारा रची गई है। हत्या के समय पुलिस द्वारा प्रभावी कार्रवाई की बात करते हुए विनोद ने तत्कालीन थानेदार गौरव विश्नोई की खुल कर तारीफ की। उन्होंने कहा कि ट्रांसफर होने के बावजूद वो अब तक उनके परिवार से एक पारिवारिक सदस्य की तरह जुड़े हुए हैं।

कातिल और उसके परिवार को कोई पछतावा नहीं

विनोद ने बताया कि जावेद कोर्ट में पेशी पर आता है, लेकिन उसके हाव-भाव में कभी भी पछतावे का एहसास नहीं दिखा। उसकी माँ अक्सर अदालत में दिखती हैं, लेकिन उन्होंने कभी संवेदना जताने की कोशिश नहीं की। विनोद का मानना है कि कातिल का पूरा परिवार उनके बच्चों के साथ हुई हरकत पर अंश मात्र भी दुःखी या शर्मिंदा नहीं है।

अब मिलना तो दूर, कोई फोन भी नहीं करता

भावुक होते हुए विनोद सिंह ने बताया कि घटना के बाद समाज का समर्थन मिला था, लेकिन अब वही लोग उनसे दूरी बना चुके हैं। उन्होंने कहा, “6 महीने से न किसी ने फोन किया, न मिलने आया। यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समाज की त्रासदी है।”

जब आयुष और आहान की हत्या हुई थी, तो सरकारी मदद के नाम पर प्रधानमंत्री योजना के तहत 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली। इसके बाद प्रशासन और नेताओं द्वारा किए गए तमाम वादे अधूरे रह गए। विनोद सिंह ने दुख जताते हुए कहा, “हमने उम्मीद की थी कि हमारे दर्द को समझते हुए कुछ ठोस कदम उठाए जाएँगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।”

काटने जैसा दौड़ता है अपना ही घर

विनोद सिंह ने बताया कि उनका परिवार सामान्य होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बच्चों की यादें घर के हर कोने में मौजूद हैं। उनका एकमात्र जीवित बेटा युवराज अभी कक्षा 5 में पढ़ता है, स्कूल जाने लगा है। घर में बच्चों की स्मृतियाँ देखकर पूरा परिवार मानसिक रूप से बुरी तरह प्रभावित है। पूरे परिवार को उनका घर काटने जैसा दौड़ता है।

विनोद ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा, “हमने इस घर में रहना 3 साल पहले शुरू किया था। पहले हम बदायूँ के दूसरे हिस्से में रहते थे, लेकिन वह मकान बिक चुका है। अगर वह घर बचा होता, तो हम वहाँ शिफ्ट हो जाते।” घटना के बाद से बच्चों की दादी और माँ की सेहत भी खराब रहने लगी है।

बंद हो गया पार्लर, सैलून पर भी ताला

घटना से पहले विनोद की पत्नी घर में पार्लर चलाकर परिवार की मदद करती थीं। बच्चों की हत्या के बाद पार्लर बंद हो चुका है। अब परिवार की जिम्मेदारी अकेले विनोद के कंधों पर है, जो पानी की टंकी बनाने का काम करते हैं। वहीं, साजिद और जावेद का सैलून घटना के बाद स्थायी रूप से बंद कर दिया गया। मोहल्ले में अब किसी मुस्लिम की दुकान नहीं है। साजिद और जावेद की दुकान की जगह अब एक हिंदू मालिक ने नया सैलून खोला है।

बता दें कि दोनों बच्चों की हत्या के अगले दिन, पुलिस ने मुख्य आरोपित साजिद को एक मुठभेड़ में मार गिराया। गिरफ्तारी के दौरान साजिद ने पुलिस पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की। इसके बाद 21 मार्च 2021 को पुलिस ने फरार सह-आरोपित जावेद को बरेली से गिरफ्तार कर लिया। इस मामले का ट्रायल बदायूँ की जिला अदालत में चल रहा है। विनोद सिंह ने कहा, “हमें न्याय का इंतजार है, लेकिन सिस्टम के ढीले रवैये ने हमारी तकलीफें बढ़ा दी हैं।”

फोन पर 4 औरतों से लड़ाता था इश्क, मौलाना ने फोन पर ही चारों से निकाह करवा दिया: रखैलों को मोसाद ने किया ट्रैक, फिर हिजबुल्लाह का फुआद शुक्र हुआ ढेर

अक्टूबर 2023 में हमास ने इजरायल पर हमला किया था, तो किसी ने नहीं सोचा कि अगले सवा साल के भीतर पूरे मिडिल-ईस्ट में इतना बड़ा बदलाव आ जाएगा। इजरायल ने न सिर्फ हमास को तकरीबन खोखला कर दिया, बल्कि लेबनान में मौजूद अपने सबसे बड़े दुश्मन हिजबुल्लाह को बुरी तरह से खत्म कर दिया। इस बीच, सीरिया में सत्ता परिवर्तन हो गया, तो ईरान में घुसकर उसने बड़े दुश्मनों को समाप्त कर दिया और ईरान में भी मिसाइल से हमला किया। इस पूरे ऑपरेशन को इजरायल ने जिस तरीके से संभाला, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया, क्योंकि इस पूरे ऑपरेशन में न सिर्फ इजरायली सेना, बल्कि मोसाद ने भी अहम भूमिकाएँ निभाई। अब जब इजरायल इस पूरी लड़ाई में विजेता बनकर उभरा है, तब ये बात सामने आ रही है कि इजरायल इन युद्धों की तैयारी कई सालों से कर रहा था। इस बात को इसी से समझ सकते हैं कि इजरायल ने हिजबुल्लाह के नेताओं की छोटी-छोटी कमजोरियों को भी अपनी ताकत बनाया।

ऐसे ही एक मामले में इजरायल ने एक बेहद जटिल और लंबे समय तक चलने वाले ऑपरेशन के बाद हिजबुल्लाह के को-फाउंडर और सीनियर मेंबर फुआद शुक्र को ट्रैक किया। यह ऑपरेशन लगभग दो दशकों तक चला, जिसमें मोसाद ने हर छोटे से छोटे सुराग का पीछा किया और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए शुक्र तक पहुँचा।

फुआद शुक्र हिजबुल्लाह के सैन्य विंग का एक महत्वपूर्ण सदस्य था। वह दक्षिण लेबनान में संगठन के कई ऑपरेशनों का संचालन करता था और इजरायल के खिलाफ कई आतंकी हमलों में शामिल रहा था। शुक्र को ट्रैक करने के लिए मोसाद ने उसकी निजी जिंदगी पर भी ध्यान केंद्रित किया।

मोसाद ने शुक्र की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए उसकी चार रखैलों और उनसे निकाहों का इस्तेमाल किया। शुक्र अपनी चारों रखैलों से संबंधों को लेकर असहज महसूस कर रहा था और उसने हिजबुल्लाह के उच्च मजहबी नेता हाशिम सफीउद्दीन से संपर्क किया। न्यूयॉर्क टाइम्स रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2024 में हवाई हमले में मारे गए सफीउद्दीन ने शुक्र को सलाह दी थी कि वह अपनी चारों रखैलों से फोन पर ही निकाह कर ले, ताकि अवैध संबंधों और रखैलों को लेकर वो किसी विवाद में वो न फँसे। इसके बाद चार अलग-अलग फोन कॉल पर फुआद शुक्र के निकाह समारोह आयोजित किए गए। यह जानकारी मोसाद लगातार ट्रैक कर रहा था।

हालाँकि, शुक्र ने अपनी लोकेशन को छुपाने के लिए अत्यधिक सावधानी बरती थी। वह केवल पेजर और वॉकी-टॉकी का उपयोग करता था और हिजबुल्लाह के लीडर हसन नसरल्लाह के सीधे संपर्क में था। उसकी इतनी सावधानियों के बावजूद मोसाद ने उसकी कमजोरियों को भुना लिया। मोसाद ने शुक्र की चार बीवियों और उनके फोन कॉल्स के माध्यम से उसके लोकेशन की जानकारी धीरे-धीरे हासिल की गई।

इसके बाद इजरायल ने शुक्र को हवाई हमले में मार गिराया। फुआद शुक्र को मारने के बाद इजरायल और हिजबुल्लाह में तनाव तेजी से बढ़ा, ऐसा ही इजरायल भी चाहता था। इसके बाद इजरायल ने हिजबुल्लाह के संपूर्ण सफाए के लिए अपना सबसे बड़ा ऑपरेशन लॉन्च किया, जिसमें हिजबुल्लाह के पेजरों में धमाके किए गए और फिर विस्फोटकों से लैस वॉकी-टॉकी में धमाके कर हिजबुल्लाह के पैर उखाड़ दिए। क्योंकि शुक्र को मारने के साथ ही इजरायली सेना ने जमीनी ऑपरेशन लॉन्च किया और करीब 2000 हवाई हमलों में हिजबुल्लाह की पूरी लीडरशिप ही खत्म कर दी। चूँकि हिजबुल्लाह के ऑपरेटिव्स को लेकर इजरायल 2 दशक से जासूसी कर रहा था। शुरुआत में उसने हाई प्रोफाइल 200 हिजबुल्लाह नेताओं को निशाना बनाने की तैयारी की थी, लेकिन पेजर और वॉकी-टॉकी हमले के साथ ही उसने हजारों हिजबुल्लाह लड़ाकों को एक साथ निशाना बना डाला।

इजरायल के लिए शुक्र को पकड़ना महत्वपूर्ण था क्योंकि वह कई आतंकवादी हमलों का मास्टरमाइंड था। इसमें वह हमला भी शामिल है जिसमें अमेरिकी मरीन बैरकों को 1983 में निशाना बनाया गया था, जिसमें 241 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। इसी वजह से अमेरिका भी लंबे समय से शुक्र पर नजर रखे हुए था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियाँ भी इस ऑपरेशन में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहीं।

इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने हिजबुल्लाह के सीनियर मेंबर फुआद शुक्र को मार गिराने के साथ न केवल एक बड़ी कामयाबी हासिल की, बल्कि हिजबुल्लाह के मुखिया हसन नसरल्लाह के उस अनुमान को भी गलत साबित कर दिया कि इजरायल अपनी पूरी ताकत से हिजबुल्लाह पर हमला नहीं करेगा। नसरल्लाह को भरोसा था कि हमास के साथ चल रही लड़ाई में उलझा इजरायल, लेबनान में किसी बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने में सक्षम नहीं होगा। लेकिन इजरायल ने हसन नसरुल्लाह समेत हिजबुल्लाह की पूरी ताकत को ही खत्म कर दिया। इस पूरे ऑपरेशन से साफ होता है कि मोसाद की गुप्त रणनीतियों और इजरायली सेना की सुनियोजित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि इजरायल एक साथ कई मोर्चों पर लड़ाई करने में सक्षम साबित हुआ और उसने अपने दुश्मनों को चुन-चुन का निशाना बनाया।