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बैट पर नहीं लगी बॉल, स्निको मीटर में हरकत नहीं… यशस्वी जायसवाल को दिया आउट: क्या बांग्लादेशी अंपायर ने ऑस्ट्रेलिया को जितवा दिया मेलबर्न टेस्ट?

ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम ने मेलबर्न में खेले गए चौथे टेस्ट मैच में भारत को 184 रनों से हराकर बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में 2-1 की बढ़त बना ली। हालाँकि, इस हार के केंद्र में एक बड़ा विवाद रहा-यशस्वी जायसवाल का विवादास्पद तरीके से आउट होना। पाँचवें दिन शानदार तरीके से भारतीय बल्लेबाजी को संभाल रहे जायसवाल को तीसरे अंपायर ने एक संदिग्ध कैच के बाद आउट करार दिया। इस फैसले को लेकर क्रिकेट विशेषज्ञों और फैन्स के बीच बहस लंबी चलने वाली है।

क्या हुआ था यशस्वी जायसवाल के आउट होने पर?

मेलबर्न टेस्ट के पाँचवें दिन 84 रन बनाकर क्रीज पर जमे हुए यशस्वी जायसवाल ने पैट कमिंस की एक गेंद पर हुक शॉट लगाने की कोशिश की। गेंद यशस्वी जायसवाल के बल्ले और ग्लव्स के पास से निकली, लेकिन कोई स्पष्ट सबूत नहीं था कि गेंद ने बल्ले या ग्लव्स को छुआ हो। ऑन-फील्ड अंपायर ने उन्हें नॉट-आउट करार दिया था, लेकिन कमिंस ने तुरंत डीआरएस का सहारा लिया और ऑन फील्ड अंपायर के फैसले को चुनौती दी।

तीसरे अंपायर बांग्लादेश के शरफुद्दौला सैकत ने वीडियो रीप्ले की कई बार जाँच की। स्निको मीटर ने कोई स्पष्ट आवाज रिकॉर्ड नहीं की थी, जिससे यह पता चलता कि गेंद बल्ले या ग्लव्स से टकराई थी। इसके बावजूद बांग्लादेशी अंपायर शरफुद्दौला सैकत ने पैट कमिंस और ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में फैसला सुना दिया।

जायसवाल इस फैसले से हैरान रह गए। उन्होंने ऑन-फील्ड अंपायरों से बातचीत की, लेकिन फैसले को पलट नहीं सके। निराश जायसवाल को मजबूरी में पवेलियन लौटना पड़ा। भारत उस समय 140 पर सात विकेट गँवा चुका था और जायसवाल के आउट होने से टीम की बची-खुची उम्मीदें भी टूट गईं।

क्यों हो रहा है विवाद?

इस मामले में तकनीकी विफलता और तीसरे अंपायर द्वारा बल्लेबाज को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) न देने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आमतौर पर ऐसे मामलों में जब कोई ठोस सबूत नहीं होता, तो बल्लेबाज के पक्ष में फैसला दिया जाता है। ऐसे में स्निको मीटर और हॉटस्पॉट जैसे उपकरणों की मदद के बावजूद अगर अंपायर पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकते, तो उन्हें नॉट-आउट का फैसला देना चाहिए था।

हालाँकि पूर्व इंटरनेशनल अंपायर साइमन टफेल ने तीसरे अंपायर के फैसले का समर्थन किया है। उन्होंने इसके पक्ष में तर्क भी रखा। ये अलग बात है कि अगर जायसवाल को इस मामले में संदेह का लाभ दिया जाता, तो मैच के नतीजे पर भी फर्क पड़ सकता था।

यशस्वी जायसवाल के आउट होते ही बुरी तरह सिमटी भारतीय टीम

जायसवाल ने पहली पारी में भी 82 रनों की शानदार पारी खेली थी और दूसरी पारी में उनके 84 रनों ने भारत को हार से बचाने की उम्मीदें जिंदा रखी थीं। उनकी और ऋषभ पंत की 88 रनों की साझेदारी भारत को जीत की तरफ ले जा रही थी। लेकिन पंत के जल्दी आउट होने के बाद, भारत के बल्लेबाजों ने निराश किया। भारत ने अपने आखिरी सात विकेट केवल 34 रन के भीतर खो दिए। ऑस्ट्रेलिया के गेंदबाजों पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, नाथन लायन और स्कॉट बोलैंड ने घातक प्रदर्शन किया और भारत की पारी को 155 रन पर समेट दिया।

मेलबर्न टेस्ट में भारत की हार ने श्रृंखला में वापसी के उनके प्रयासों को बड़ा झटका दिया है। अब भारत को सिडनी में अंतिम टेस्ट जीतने के अलावा ट्रॉफी बचाने का कोई विकल्प नहीं बचा।

मुस्लिम भीड़ ने लखनऊ में नगर निगम की टीम पर किया हमला, महिला स्टाफ के कपड़े फाड़े… मेयर ने ‘बांग्लादेशी बस्ती’ पर चलवाया बुलडोजर, बिजली भी कटवाई

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार (29 दिसंबर 2024) को नगर निगम की टीम पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। हमलावरों की तादाद लगभग 200 बताई गई है। यह हमला अवैध ठेलियों को जब्त करने के दौरान किया गया। हमलावरों में महिलाएँ भी शामिल हैं। हमले का शिकार महिला स्टाफ भी हुई हैं। लूटपाट भी की गई। मामले में शेरू और नदीम सहित कई अन्य अज्ञात लोग नामजद किए गए हैं। हमलावरों के बांग्लादेशी होने का दावा किया जा रहा है। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है।

घटना उत्तरी लखनऊ के इंदिरा नगर थाना क्षेत्र की है। इस संबंध में नगर निगम स्टाफ कुलदीप सिंह ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि लखनऊ की महापौर के आदेश पर वे अपनी टीम के साथ रविवार की सुबह 8 बजे अवैध तौर पर कूड़ा उठाने वाली ट्रॉलियों को जब्त कर रहे थे। इसी दौरान एक ठेले पर एक अज्ञात पुरुष 2 महिलाओं के साथ दिखा। महिलाओं ने कॉल कर नदीम और शेरू को बुला लिया।

कुलदीप सिंह बताते हैं कि नदीम और शेरू अपने साथ 150 से 200 लोगों की भीड़ ले कर पहुँचे। यह भीड़ नगर निगम की एक महिला स्टाफ के कपड़े फाड़ने लगी और उनके गले में मौजूद सोने की चेन छीन ली। महिला सहकर्मी को बचाने दौड़े अन्य सफाईकर्मियों को पीट कर उनके मोबाइल छीन लिए गए। घटनास्थल पर मौजूद फ़ूड इंस्पेक्टर विजेता द्विवेदी की गाड़ी में तोड़फोड़ की गई। उनके ड्राइवर को गाड़ी से बाहर खींच कर मार डालने की नीयत से पीटा गया।

कुलदीप सिंह सहित अन्य नगर निगम कर्मियों ने जैसे-तैसे अपनी जान बचाई। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर हालात को काबू किया। शिकायतकर्ता की तहरीर पर शेरू और नदीम को नामजद करते हुए 150 से 200 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191 (2), 191 (3), 121 (1), 132, 115 (2), 309 (6), 324 (4), 351 (2) 131, 74, 109 के साथ आपराधिक कानून अधिनियम 1932 की धारा 7 के तहत कार्रवाई की गई है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। लखनऊ पुलिस ने मामले में जाँच व अन्य कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपित फरार हैं जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की है। महापौर का दावा है कि हमलावर बांग्लादेशी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक DM और कमिश्नर को कॉल कर महापौर ने इलाके में PAC लगाने की माँग की है।

बताया जा रहा है कि बांग्लादेशियों ने इंदिरा नगर थाना क्षेत्र में अवैध बस्ती बना रखी है। इस बस्ती में पानी और बिजली की सप्लाई भी हो रही। हमले के बाद मेयर ने बिजली कनेक्शन कटवा दिए। बुलडोजर मँगवा कर 50 झुग्गियों को तोड़ दिया गया। इसमें मोनू हुसैन की भी झुग्गी शामिल है।

राजस्थान के रेगिस्तान में फूटी जलधारा, नदी की तरह प्रवाह-आसपास के खेत तालाब बने: प्रशासन ने 500 मीटर का इलाका कराया खाली, VHP बोली- ‘सरस्वती’ लौटी

राजस्थान के जैसलमेर के रेतीले इलाके में बोरिंग के दौरान एक जगह नीचे से पानी का स्रोत फूट पड़ा। यह बोरिंग भाजपा नेता के खेत में हो रही थी। जमीन के नीचे से आया पानी दबाव के साथ 10-15 फीट हवा में उछल कर निकल कर रहा है। इसके चलते आसपास का इलाका जलमग्न है। तीन दिन से लगातार पानी और गैस जमीन के नीचे से निकल रहे हैं। लोग इसे विलुप्त हो चुकी सरस्वती नदी का इलाका बता रहे हैं। यहाँ तेल और गैस के क्षेत्र में मेंकाम करने वाली सरकारी कंपनी ONGC के लोग भी पहुँचे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसलमेर के मोहनगढ़ में विक्रम सिंह ने खेतों की सिंचाई के लिए शनिवार (28 दिसम्बर, 2024) को एक बड़ी मशीन से बोरिंग चालू करवाई थी। शनिवार को यह बोरिंग लगभग 850 फीट की गहराई तक पहुँच चुकी थी। इसी दौरान एकाएक जमीन से पानी की धार फूट पड़ी। इसी के साथ तेजी से गैस का रिसाव भी चालू हो गया। पानी कि यह धार जमीन से10 फीट ऊँचाई को छूने लगी। इसके चलते यहाँ काम कर रहे लोग डर गए और यहाँ से भाग गए।

बोरिंग के लिए ट्रक पर स्थापित की गई मशीन भी पानी में समा गई। यह पानी का रिसाव शनिवार के बाद रविवार को भी चालू रहा। थोड़े-थोड़े समय के बाद यहाँ पानी का फव्वारा फूटता रहा। विक्रम सिंह के खुद के खेत समेत आसपास के खेत भी जलमग्न हो गए। पानी की धार ना रुकने पर लोगों ने प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद प्रशासन ने आसपास का 500 मीटर का इलाका खाली करवा लिया। मौके पर विशेषज्ञों की एक टीम बुलाई गई। ONGC की एक टीम ने भी रविवार को यहाँ का दौरा किया।

ONGC की टीम ने बताया है कि यहाँ से निकल रही गैस खतरनाक नहीं है और उसमें जहरीले केमिकल नहीं हैं। ONGC ने कहा है कि ऑयल इंडिया लिमिटेड की टीम अपनी मशीनों से इस रिसाव को बंद करेगी। अभी उस घटना स्थल पर कीचड़ हो गया है। भूवैज्ञानिकों ने इसे सामान्य घटना करार दिया है। उन्होंने बताया है कि जहाँ बोरिंग हुई, वहाँ नीचे कठोर चट्टानें हैं और उसके नीचे पानी है। चट्टानों में बने दबाव और गैस की वजह से पानी ऊपर अधिक प्रेशर से आ रहा है, कुछ समय में पानी का स्तर सही हो सकता है।

वहीं कुछ स्थानीय लोगों और VHP के प्रवक्ता विनोद बंसल ने इस पानी के स्रोत को सरस्वती नदी का विलुप्त स्रोत बताया है। वैज्ञानिकों से इस दावे को मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि बिना जाँच के ली इस विषय में कुछ नहीं कहा जा सकता।

जामिया-दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज्वाइंट कोर्स में मुस्लिम आरक्षण खत्म करने की तैयारी, CIC ने तैयार किया प्रस्ताव: DU के अधिकारी बोले- मजहब के आधार पर किसी भी कोर्स में न हो रिजर्वेशन

दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के क्लस्टर इनोवेशन सेंटर (CIC) ने एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत मास्टर ऑफ साइंस (MSc) इन मैथेमेटिक्स एजुकेशन प्रोग्राम में मुस्लिम छात्रों के लिए आरक्षण समाप्त करने की सिफारिश की जाएगी। यह प्रोग्राम DU और जामिया मिलिया इस्लामिया के संयुक्त प्रयास से 2013 में शुरू किया गया था और इसे मेटा यूनिवर्सिटी कॉन्सेप्ट के तहत संचालित किया जाता है। CIC की गवर्निंग बॉडी इस प्रस्ताव पर अपनी बैठक में विचार करेगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा समय में इस प्रोग्राम में कुल 30 सीटें हैं। इसमें 12 सीटें अनारक्षित श्रेणी के लिए, छह सीटें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी-नॉन क्रीमी लेयर), चार सीटें मुस्लिम जनरल, तीन सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), दो सीटें अनुसूचित जाति (SC) और एक-एक सीट अनुसूचित जनजाति (ST), मुस्लिम ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

डीयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “विश्वविद्यालय में किसी भी कोर्स के लिए धर्म आधारित आरक्षण नहीं होना चाहिए। यह नीति केवल वंचित तबकों के लिए जाति आधारित आरक्षण तक सीमित होनी चाहिए।” अधिकारी ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में इस प्रोग्राम का पूरा प्रवेश प्रक्रिया कम्प्यूटराइज्ड हो गया है और सभी छात्रों का दाखिला DU के माध्यम से ही होता है। ऐसे में डीयू की आरक्षण नीति लागू करना स्वाभाविक है।

साल 2013 में शुरू हुए इस प्रोग्राम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में विभिन्न विश्वविद्यालयों के संसाधनों और विशेषज्ञता का समावेश करना है। मेटा यूनिवर्सिटी मॉडल के तहत, यह प्रोग्राम डीयू और जामिया मिलिया इस्लामिया के साझा प्रयास का परिणाम है। जब छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं, तो उन्हें डिग्री पर दोनों विश्वविद्यालयों के लोगो के साथ प्रमाणपत्र मिलता है। इस प्रोग्राम की प्रशासनिक जिम्मेदारी CIC के पास है और इसीलिए CIC का मानना है कि इसमें डीयू की नीतियों का पालन होना चाहिए।

डीयू के अधिकारी ने यह भी बताया कि जब यह प्रोग्राम शुरू हुआ था, तब तय किया गया था कि 50% छात्रों का एडमिशन डीयू और 50% का जामिया से होगा। हालाँकि, वर्तमान आरक्षण नीति इस शुरुआती समझौते से मेल नहीं खाती। CIC के अनुसार, यह मुद्दा अब गंभीरता से लिया जा रहा है और इस पर विचार करने के बाद प्रस्ताव कुलपति के समक्ष रखा जाएगा।

बता दें कि डीयू और जामिया के बीच इस प्रोग्राम से भारत-अमेरिका की मेटा यूनिवर्सिटी कॉन्सेप्ट को प्रोत्साहित करना था, जिसका उद्देश्य छात्रों को बेहतर अवसर प्रदान करना था। हालाँकि जामिया मिलिया इस्लामिया ने इस मामले पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस प्रोग्राम की विशेषता यह है कि यह भारत का ऐसा पहला डिग्री प्रोग्राम है, जिसमें दोनों केंद्रीय विश्वविद्यालयों का लोगो होता है। CIC ने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है, जिसे हल करने के लिए दोनों विश्वविद्यालयों की सहमति की आवश्यकता होगी।

अरुणाचल प्रदेश में जबरन या लालच देकर धर्मांतरण करने वालों की अब खैर नहीं: लगभग 47 साल बाद राज्य सरकार लागू करेगी धार्मिक स्वतंत्रता कानून

अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने एक कार्यक्रम में बोलते हुए राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम को बहाल करने के संकेत दिए हैं। यह एक्ट साल 1978 में बना था, जो अब तक लागू नहीं किया गया था। यह कानून जबरन या लालच आदि देकर किए जाने वाले किसी भी तरह के धर्मान्तरण पर प्रभावी कार्रवाई के लिए बनाया गया था। उन्होंने कहा कि इस कानून को लागू करने से अरुणाचल प्रदेश की संस्कृति को सहेजने में मदद मिलेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पेमा खांडू शुक्रवार (27 दिसंबर 2024) को ईटानगर में स्वदेशी आस्था और सांस्कृतिक समाज (IFCSAP) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। अपने सम्बोधन में उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पीके थुंगन को धन्यवाद किया, जिन्होंने साल 1978 में विधानसभा में धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम को पारित करवाया था।

जब अरुणाचल प्रदेश में यह कानून बना था, तब वहाँ ईसाई मिशनरियाँ काफी सक्रिय थीं। वहाँ बड़े पैमाने पर लोगों को ईसाई बनाने का षड्यंत्र चलता था। हालाँकि, विधानसभा में पारित होने के बावजूद इसे 47 सालों से लागू नहीं किया गया। साल 2018 में तो प्रेमा खांडू ने कैथोलिक एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में यहाँ तक कह दिया था कि उनकी सरकार इस अधिनियम को निरस्त करने पर विचार कर रही है।

तब पेमा खांडू ने इस कानून को प्रदेश में भाईचारा कमजोर करने वाला और ईसाईयों को परेशान करने वाला करार दिया था। तब IFCSAP के पूर्व महासचिव ताम्बो तामिन ने इस कानून को लागू करने के लिए गुवाहाटी हाईकोर्ट की ईटानगर पीठ में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 में राज्य सरकार को 6 महीने के अंदर नियमों को अंतिम रूप देने का आदेश दिया था।

कुणाल किशोर- एक सख्त IPS अधिकारी और करुण समाजसेवी: कुख्यात बॉबी केस की जाँच से लेकर बाबरी विवाद तक में रही अहम भूमिका, मंदिर में बनाए दलित पुजारी और गरीबों के लिए खोले अस्पताल

पूर्व IPS और महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव आचार्य किशोर कुणाल का रविवार (29 दिसम्बर, 2024) को निधन हो गया। उनका निधन कार्डियक अरेस्ट के चलते हुआ। आचार्य किशोर कुणाल बिहार में हिन्दू एकता और धार्मिक स्थलों के पुनरोद्धार का प्रमुख चेहरा था और उनका राम मंदिर आंदोलन में भी बड़ा योगदान था। वह IPS के तौर पर भी बिहार में काफी प्रख्यात रहे थे। आचार्य किशोर कुणाल ने धर्म की सेवा के लिए IPS की सेवा से रिटायरमेंट भी ले लिया था। वह श्रीराम जन्मभूमि न्यास में भी सदस्य थे।

जब IPS बने तो बॉबी केस खोला

किशोर कुणाल 1972 बैच के IPS थे। वह गुजरात काडर में भर्ती हुए थे लेकिन वह कुछ वर्षों के लिए गुजरात प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए थे। यहाँ उनकी नियुक्ति 1983 में SSP पटना के तौर पर थी। इसी दौरान मई, 1983 बॉबी हत्याकांड हुआ। बॉबी का असल नाम श्वेता निशा त्रिवेदी था और उन्हें घर पर प्यार से बेबी बुलाया जाता था। यही नाम बिगड़ कर बॉबी हो गया था। आरोप था कि बेबी को रघुवर झा नाम के एक व्यक्ति ने जहर पिला कर मार दिया और बाद में आनन फानन में दफना दिया गया।

इस मामले में गड़बड़ी देखकर कुनाल किशोर ने इसकी जाँच की थी। उन्होंने इस मामले की जाँच के लिए बॉबी के दफ़न शरीर को भी निकलवा लिया था। इसी में जहर की पुष्टि हुई थी। उनकी जाँच में सामने आया था कि बॉबी के बड़े नेताओं से रिश्ते थे और वह ऐसे ही कुछ फोटोग्राफ के आधार पर उन्हें धमका रही थी। बॉबी को गोद लेने वाली नेता राजेश्वरी सरोज दास ने एक स्टिंग ऑपरेशन में कुणाल को बताया था कि रघुवर झा द्वारा पिलाई गई दवाई से ही बॉबी की मौत हुई। इस केस में बड़े नाम आने के चलते और दबाव के बाद CBI को सौंप दिया गया था।

CBI ने इस मामले को बाद में आत्महत्या करार दिया था। CBI ने इस आत्मत्या का कारण प्रेमी से मिले धोखे को बताया था। CBI ने रघुवर झा को निर्दोष भी घोषित कर दिया था। इसमें पुलिस पर आरोप लगाया गया था कि जबरदस्ती कुछ लड़कों पर दबाव डालकर रघुवर का नाम आगे लाया गया था।

सामजिक समरसता के बड़े नाम

किशोर कुणाल बिहार में IPS रहते ही समाजसेवी बन गए थे। उन्होंने पटना में रहने के दौरान पटना जंक्शन के बाहर स्थित महावीर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। इस मंदिर के निर्माण कार्य की देख-रेख के लिए उन्होंने पुलिस सेवा से छुट्टी भी ली। महावीर मंदिर का नाम पूरे देश में तब फैला जब यहाँ सामाजिक समरसता को आगे बढ़ाने वाला एक कदम उठाया गया। यहाँ के सचिव रहते हुए उन्होंने 1993 में यह मंदिर बिहार में सामाजिक समरसता का एक उदाहरण बना।

महावीर मंदिर ट्रस्ट का सचिव रहते हुए उन्होंने 1993 में एक दलित पुजारी की नियुक्ति की। इससे पहले किसी बड़े मंदिर में ऐसा कदम नहीं उठाया गया था। इसके चलते दलितों को सामजिक कतार में आगे आने का मौक़ा मिला। सिर्फ महावीर मंदिर ही नहीं बल्कि पूरे बिहार में उन्होंने यह प्रयोग दोहराया, जिसके चलते देश समाज में दूरियाँ कम हुईं। आचार्य किशोर कुणाल ने 2001 के बाद IPS सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। इसके बाद वह पूरी तरह से समाजसेवा और धार्मिक कार्यों में जुट गए थे।

आचार्य किशोर कुणाल को बिहार राज्य धार्मिक ट्रस्ट बोर्ड का भी सचिव बनाया गया था। इसका सचिव रहते हुए उन्होंने राज्य में कई ऐसे मंदिर बोर्ड वापस से खड़े किए जो एकदम सुप्तप्राय थे। इसके अलावा उन्होंने राज्य के हर बोर्ड में कम से कम एक दलित की नियुक्ति की। उन्होंने एक माँझी व्यक्ति को पुजारी नियुक्ति किया। इसके चलते राज्य में जातीय भेदभाव को खत्म करने में सहायता मिली। नालंदा जिले में उन्होंने राम जानकी मंदिर में पूरा मंदिर बोर्ड दलितों का बनाया। इसने काफी सुर्खियाँ बटोरी।

संगत-पंगत का विचार भी लाए

आचार्य किशोर कुणाल ने सामाजिक एकता का अभियान सिर्फ दलितों की मंदिरों में नियुक्ति या उन्हें मंदिर बोर्ड में जगह देने तक नहीं रखा। उन्होंने समाज के एकीकरण के लिए संगत और पंगत का भी अभियान चलाया। इसके तहत दलित, ब्राम्हण और बाकी सभी जातियाँ सप्ताह में एक दिन मंदिरों में एक पंक्ति में बैठ कर पूजा करते हैं। इसके अलावा छुआछूत मिटाने के लिए उन्होंने ब्राम्हणों और दलितों के साथ भोजन करने की परंपरा डाली। इन दोनों कार्यों को संगत-पंगत का नाम दिया गया।

आचर्य किशोर कुणाल स्वयं उदाहरण पेश करने वाले लोगों में से थे। वह सामाजिक न्याय के नाम पर समाज से ठगी करने वालों से इतर थे। उनके खुद के बेटे सायन कुणाल का विवाह दलित समाज से आने वाले नेता अशोक चौधरी की बेटी शाम्भवी चौधरी से हुआ है। शाम्भवी वर्तमान में समस्तीपुर से सांसद हैं।

राम मंदिर के मध्यस्थ के तौर भी किया काम

आचार्य किशोर कुणाल को वीपी सिंह की सरकार में केन्द्रीय गृह मंत्रालय में लाया गया था। यहाँ उन्हें बाबरी मस्जिद एक्शन कमिटी और विश्व हिन्दू परिषद के बीच बातचीत के दौरान विशेष अफसर के तौर पर नियुक्त किया गया था। किशोर कुणाल को दोनों पक्ष में समन्वय के लिए यहाँ लाया गया था। उन्होंने दोनों पक्ष की तरफ से दिए गए सबोत देखे थे और उनको आगे कार्रवाई के लिए भी भेजा था। उन्होंने इन सबूतों पर विश्लेषण भी किया था। इसको लेकर उन्होंने बाद में ‘अयोध्या रिविजिटेड’ नाम से एक किताब भी लिखी थी।

आचार्य किशोर कुणाल ने इन सबूतों और अध्ययन के आधार पर रामजन्मभूमि का एक नक्शा भी तैयार किया था। यह नक्शा बाद में रामजन्मभूमि की अदालती लड़ाई में भी पेश किया गया था। इस नक़्शे में स्पष्ट रूप से लिखा था कि मंदिर में कहाँ पर भगवान राम का जन्मस्थान था। इस नक़्शे को बाबरी मस्जिद की तरफ से वकील राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में फाड़ दिया था। इसके बाद किशोर कुणाल ने कहा था कि राजीव धवन इस नक़्शे की सत्यता जानते थे और उन्हें पता था कि अगर यह कोर्ट के पास पहुँचा तो मुस्लिम पक्ष हार जाएगा।

सिर्फ धर्म नहीं, समाजसेवा के लिए भी किया काम

आचार्य किशोर कुणाल ने धर्म के लिए सेवा को समाजसेवा में बदला। उन्होंने पटना में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए ज्ञान निकेतन नाम का स्कूल खोला। यह स्कूल जल्द ही सेंट जेवियर और बाकि स्थापित संस्थानों से भी अच्छा रिजल्ट देने लगा। इसके अलावा महावीर मंदिर से ही जोड़ कर उन्होंने कई अस्पताल बनाए। वर्तमान में महावीर ट्रस्ट 9 अस्पताल चलाता है। इनमें ह्रदय रोग और कैंसर तक का इलाज लगभग मुफ्त में होता है। महावीर ट्रस्ट 10वां अस्पताल भी बनाने जा रहा है।

हिंसा के बीच बांग्लादेश में हिंदू अधिकारियों पर गाज, यूनुस सरकार ने 100 अधिकारियों को हटाया: सरकारी नौकरी के 1500 आवेदन खारिज, पुलिस में ‘नो एंट्री’!

बांग्लादेश में पुलिस से हिन्दुओं को हटाया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी पक्का कर दिया गया है कि नई भर्तियों में भी हिन्दू शामिल ना हो पाएँ। यह सब काम बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार कर रही है। हिन्दुओं को हटा कर इस्लामी कट्टरपंथी पुलिस में लाए जाएँगे।

यह सभी दावे अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में किए गए हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इसके लिए बांग्लादेश के पुलिस मुखिया को भी निर्देश दिया गया है। जनसत्ता की एक रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश में हाल ही में 100 हिन्दू पुलिस अफसरों को उनके पदों से हटाया गया है।

यह अफसर IG, DIG, SP और SSP जैसे पदों पर तैनात थे। इनके पास जिले से लेकर बड़े मंडलों तक की जिम्मेदारी थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि इनकी जगह पर ऐसे अफसर लाए जा रहे हैं जो इस्लामी कट्टरपंथी हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह नए अफसर जमात-इस्लामी से जुड़े हुए हैं।

हिन्दू अफसरों को पदों से हटा दिया गया है। इसके अलावा पुलिस बल में आगे और हिन्दू भर्ती नहीं हो, इसके भी इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके लिए हाल ही में कथित तौर पर एक भर्ती रद्द की गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पिछले वर्ष 79000 पुलिसबल की भर्ती शेख हसीना सरकार के दौरान बांग्लादेश में चालू की गई थी, अब इसे रद्द कर दिया गया है।

इससे 1500 हिन्दू उम्मीदवारों के आवेदन भी रद्द किए गए हैं। इसकी जगह पर नई भर्ती होगी। दावा है कि इसमें हिन्दू उम्मीदवारों को नहीं लिया जाएगा। इसके लिए आदेश बांग्लादेश पुलिस के मुखिया IGP बहरुल इस्लाम को विशेष निर्देश दिए गए हैं। हिन्दुओ को पात्र होने के बाद भी ना सेलेक्ट किए जाने की बात कही गई है। साथ ही उनके नौकरशाही में प्रवेश पर भी रोक है।

बांग्लादेश यह कवायद पुलिस को कट्टरपंथी बनाने के लिए चल रही है। अब तक पुलिसबल में काफी संख्या हिन्दुओं की थी। बांग्लादेश में यूनुस सरकार के सत्ता में आने के बाद पुलिस विभाग में बड़े तबादले किए गए हैं। IGP बहरुल इस्लाम को भी यूनुस सरकार ही लेकर आई है।

यूनुस सरकार में शामिल लोग और जमात-ए-इस्लामी लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि पुलिसबल में शामिल लोग हसीना सरकार के दौरान उनका उत्पीड़न करते रहे हैं। बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के दौरान इस्लामी कट्टरपंथियों ने सबसे अधिक निशाना पुलिस वालों को ही बनाया था। यूनुस सरकार कई पुलिस वालों के खिलाफ जाँच भी कर रही है।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार जाने के बाद लगातार हिन्दुओं को प्रताड़ित किया जा रहा है। भारत सरकार ने हाल ही में संसद में बताया था कि बांग्लादेश से 2200 ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, जिनमें हिन्दुओं या फिर बाकी अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया गया।

बांग्लादेश में हिन्दू संत चिन्मय कृष्ण दास को भी गिरफ्तार किया गया है क्योंकि उन्होंने हिन्दुओं पर प्रताड़ना का मामला उठाया था। बांग्लादेश में कई हिन्दुओं को कॉलेजों और बाकि संतानों से इस्तीफ़ा देने पर तक मजबूर किया गया है। अब यही नीति पुलिस में अपनाई जा रही है।

‘विशालता में ही नहीं, कुंभ की विशेषता इसकी विविधता में’, पीएम मोदी ने मन की बात में एकता के संकल्प के लिए की अपील: बोले- महाकुंभ का संदेश, एक हो पूरा देश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार (29 दिसम्बर, 2024) को देशवासियों से मन की बात की। पीएम मोदी की ‘मन की बात’ का 2024 का यह अंतिम संस्करण था। पीएम मोदी ने देशवासियों से मन की बात में 13 जनवरी, 2025 से चालू हो रहे प्रयागराज के महाकुंभ, WAVES समिट, भारत की एनीमेशन इंडस्ट्री और पराग्वे में आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता के साथ बस्तर में आयोजित किए खेल समारोह को लेकर बातचीत की। पीएम मोदी ने इस दौरान कृषि से सम्बन्धित मुद्दों पर भी बात की।

AI वाला होगा इस बार का महाकुंभ

पीएम मोदी ने मन की बात पर सबसे पहले प्रयागराज महाकुंभ 2025 की बात की। पीएम मोदी ने कहा, “महाकुंभ की विशेषता केवल इसकी विशालता में ही नहीं है। कुंभ की विशेषता इसकी विविधता में भी है। इस आयोजन में करोड़ों लोग एक साथ एकत्रित होते हैं। लाखों संत, हजारों परम्पराएँ, सैकड़ों संप्रदाय, अनेकों अखाड़े, हर कोई इस आयोजन का हिस्सा बनता है। कहीं कोई भेदभाव नहीं दिखता है, कोई बड़ा नहीं होता है, कोई छोटा नहीं होता है। अनेकता में एकता का ऐसा दृश्य विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलेगा।”

उन्होंने आगामी महाकुंभ में AI के उपयोग को लेकर भी जानकारी दी। पीएम मोदी ने कहा, ” इस बार प्रयागराज में देश और दुनिया के श्रद्धालु डिजिटल महाकुंभ के भी साक्षी बनेंगे। डिजिटल नेविगेशन की मदद से आपको अलग-अलग घाट, मंदिर, साधुओं के अखाड़ों तक पहुँचने का रास्ता मिलेगा। यही नेविगेशन सिस्टम आपको पार्किंग तक पहुँचने में भी मदद करेगा। पहली बार कुंभ आयोजन में AI चैटबोट का प्रयोग होगा। AI चैटबोट के माध्यम से 11 भारतीय भाषाओं में कुंभ से जुड़ी हर तरह की जानकारी हासिल की जा सकेगी।”

पीएम मोदी ने अपील की कि इस बार जब भी लोग महाकुंभ में शामिल हों तो वह वहाँ से समाज में एकता बनाए रखने का संकल्प लेकर लौटें। पीएम मोदी ने महाकुंभ का सन्देश ही देश के एक होने को लेकर दिया। उन्हों इसकी तुलना गंगा की अविरल धारा से की है। आप पीएम मोदी की मन की बात को यहाँ सुन सकते हैं।

WAVES समिट में आएँगे दुनिया भर के कलाकार

पीएम मोदी ने भारतीय सिनेमा क्षेत्र की उपलब्धियों को गिनाते हुए आगमी WAVES समिट के विषय में बताया। यह WAVES समिट भारत में 2025 में आयोजित की जाएगी और इसमें दुनिया भर के मीडिया और ऑडियो जगह के लोग जुट रहे हैं। पीएम मोदी ने इसे भारतीय क्रिएटर्स के लिए बड़ा अवसर बताया है। पीएम मोदी ने बताया कि देश में क्रिएटर इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है और इससे नई ऊर्जा आ रही है। पीएम मोदी ने अपील की है कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़े लोग इस समिट का हिस्सा बनें। पीएम ने यहाँ मिस्र में बनाई गई भारतीय पेंटिंग्स पर भी बात की।

विदेश में भारतीय संस्कृति का बढ़ रहा प्रभाव

पीएम मोदी ने इस बीच बताया कि कैसे भारत से निकल आयुर्वेद लैटिन अमेरिका के देश पराग्वे में बढ़ रहा है। उन्होंने बताया, “दक्षिण अमेरिका का एक देश है पराग्वे। वहाँ रहने वाले भारतीयों की संख्या एक हजार से ज्यादा नहीं होगी। पराग्वे में एक अद्भुत प्रयास हो रहा है। वहाँ भारतीय दूतावास में एरीका ह्युबर मुफ्त आयुर्वेद कंसल्टेशन देती हैं। आयुर्वेद की सलाह लेने के लिए आज उनके पास स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में पहुँच रहे हैं।”

पीएम मोदी ने इसके अलावा तमिल के प्रसार को लेकर बात की। पीएम मोदी ने बताया, “ये हमारे लिए बहुत गर्व की बात है कि दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा तमिल है और हर हिन्दुस्तानी को इसका गर्व है। दुनियाभर के देशों में इसे सीखने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले महीने के आखिर में फ़िजी में भारत सरकार के सहयोग से तमिल शिक्षण प्रोग्राम शुरू हुआ। बीते 80 वर्षों में यह पहला अवसर है, जब फ़िजी में तमिल के शिक्षक इस भाषा को सिखा रहे हैं।”

बस्तर ओलम्पिक खेल और विकास का संगम

पीएम मोदी ने हाल ही में छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित किए गए खेल आयोजन ‘बस्तर ओलम्पिक’ की प्रशंसा भी की। उन्होंने बताया इस आयोजन में 7 लाख 65 हजार खिलाड़ी शामिल हुए। पीएम मोदी ने यहाँ कारी देवी की कहानी बताई। पीएम मोदी ने कहा, “एक छोटे से गांव से आने वाली कारी जी ने तीरंदाजी में रजत पदक जीता है। वे कहती हैं , बस्तर ओलम्पिक ने हमें सिर्फ खेल का मैदान ही नहीं, जीवन में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।” पीएम मोदी ने कहा कि बस्तर ओलम्पिक खेल और विकास का संगम है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में आगे बढ़ रहा भारत

भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर हाल के कुछ दिनों में हुई प्रगति का भी पीएम मोदी ने ब्यौरा दिया। पीएम मोदी ने बताया कि 2015 से 2023 के बीच मलेरिया से होने वाली मौतों में देश में 80% की कमी आई है। पीएम मोदी ने देश के अलग-अलग हिस्सों में मलेरिया में कमी लाने के लिए उपयोग किए गए तरीकों पर भी बात की। उन्होंने हरियाणा के कुरुक्षेत्र और असम के चाय बागानों का उदाहरण दिया। इसके अलावा उन्होंने आयुष्मान योजना से कैंसर के इलाज में हो रही बढ़ोतरी की जानकारी भी दी।

पीएम मोदी ने बताया, “दुनिया के मशहूर मेडिकल जर्नल लैंसेट की स्टडी वाकई बहुत उम्मीद बढ़ाने वाली है। इस जर्नल के मुताबिक अब भारत में समय पर कैंसर का इलाज शुरू होने की संभावना काफी बढ़ गई है। समय पर इलाज का मतलब है – कैंसर मरीज का ट्रीटमेंट 30 दिनों के भीतर ही शुरू हो जाना और इसमें बड़ी भूमिका निभाई है, आयुष्मान भारत योजना ने।”

10 किसानों से शुरू हुआ FPO, अब करोड़ों का कारोबार

पीएम मोदी ने एक ऐसे किसान उत्पादक संघ के विषय में भी बताया, जो 10 किसानों से शुरू होकर अब करोड़ों का कारोबार कर रहा है। पीएम मोदी ने बताया, “कालाहांडी का गोलामुंडा ब्लॉक एक वेजेताब्ल हब बन गया है। यह परिवर्तन कैसे आया? इसकी शुरुआत सिर्फ 10 किसानों के एक छोटे से समूह से हुई। इस समूह ने मिलकर एक FPO – ‘किसान उत्पाद संघ’ की स्थापना की, खेती में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया, और आज उनका ये FPO करोड़ों का कारोबार कर रहा है।”

 

मोहम्मद आसकार ने 3 साल की हिन्दू बच्ची से की दरिंदगी, खाली घर में लेकर किया रेप: सहारनपुर पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक 3 साल की नाबालिग हिन्दू बच्ची से रेप का मामला सामने आया है। दुष्कर्म का आरोप मोहम्मद आसकार पर लगा है। आरोपित की इस हरकत के दौरान पीड़िता का मल निकल आया। उसके प्राइवेट पार्ट से काफी खून निकला जिसका इलाज अस्पताल में करवाया जा रहा है। शुक्रवार (27 दिसंबर 2024) को पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया है।

यह घटना सहारनपुर जिले के थानाक्षेत्र कोतवाली देहात की है। गुरुवार (26 दिसंबर 2024) को यहाँ एक व्यक्ति ने पुलिस ने शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि मंगलवार (24 दिसंबर) को उसकी 3 साल की बेटी कुछ सामान खरीदने घर से लगभग 150 मीटर दूर अपने ताऊ की दुकान पर गई थी। कुछ खाने-पीने की चीजें लेकर शाम लगभग 3 बजे वो घर वापस लौट रही थी।

इसी दौरान रास्ते में तासीन का बेटा मोहम्मद आसकार मिला। वह बच्ची को बहला-फुसला कर पास में ही खाली पड़े एक घर में ले गया। वहाँ उसने बच्ची से रेप का प्रयास किया। बच्ची रोती और डर से काँपती हुई अपने घर पहुँची। यहाँ उसने अपने परिजनों को सारी बात बताई। लड़की के कपड़ों में मल लगा हुआ था। परिजनों ने उसे धोने के दौरान देखा कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट से खून भी निकल रहा था।

आखिरकार पीड़िता के परिजनों ने पुलिस में तहरीर दी। उन्होंने आसकार पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। केस दर्ज होते ही फरार आरोपित को पुलिस ने शुक्रवार को दबोच लिया। वह अपने ही गाँव के पास एक ठिकाने पर छिपा मिला। मोहम्मद आसकार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65 (2) के साथ पॉक्सो एक्ट में कार्रवाई की गई है।

ISI-दाऊद से जुड़े शारिक साठा ने रची थी संभल हिंसा की साजिश! भारत में ऑटोलिफ्टर गैंग का था सरगना, फर्जी पासपोर्ट पर भागा दुबई: पुलिस को शक- पाकिस्तानी बुलेट्स उसी ने भेजीं

संभल पुलिस को शक है कि दुबई में रहने वाले शारिक साठा ने ही यहाँ 24 नवंबर, 2024 को हुई हिंसा की साजिश रची है। वह मूल रूप से संभल का ही रहने वाला है और अब वह ISI के लिए काम करता है। उसके लिंक दाऊद इब्राहिम के गैंग से भी हैं। यह आशंका जताई गई है कि उसने ही पाकिस्तानी गोलियाँ संभल में भेजीं, जो बाद में पुलिस को मिलीं। संभल में रहने वाले शारिक के गुर्गों पर अब पुलिस तलाश करके कार्रवाई करने जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संभल के दीपा सराय का रहने वाला शारिक साठा वर्तमान में दुबई में रहता है। वह भारत से 2020 में दुबई भागा था। इसके लिए उसने फर्जी पासपोर्ट का उपयोग किया था। इससे पहले वह दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद था।

भारत में वह एक बड़े गाड़ी चोरी गिरोह का सरगना था। वह भारत में अलग-अलग जगह से गाड़ियाँ चुराता था और उन्हें नेपाल भेजता था। उसके गैंग में सैकड़ों लड़के शामिल थे। दिल्ली में गैंग से 300 गाड़ियाँ चोरी की बरामद हुई थीं।

शारिक साठा पर यूपी समेत बाकी प्रदेशों में कई मुकदमे दर्ज हैं। दुबई भागने के बाद वह उसका गैंग गाड़ी चोरी के बजाय जाली नोट का कारोबार करते हैं। शारिक साठा इस काम के लिए पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI और दाऊद इब्राहिम के गैंग से जुड़ा हुआ है।

उसके चेले भारत में उसका कारोबार संभालते हैं और जरूरत पड़ने पर दुबई उससे मिलने भी जाते हैं। 2021 में उसके दो गुर्गे ₹4 लाख के नकली नोट के साथ पकड़े गए थे। उन्होंने उसका नाम लिया था। यह दोनों भी संभल के रहने वाले थे।

संभल पुलिस को अब शक है कि 24 नवंबर, 2024 को हुई हिंसा में उसके गुर्गे शामिल थे और उसने ही दुबई से इन्हें हिंसा के लिए मदद भेजी थी। पुलिस को हिंसा के कुछ दिन बाद नाली में पाकिस्तान की सरकारी आयुध फैक्ट्री में बने कारतूस भी बरामद किए थे।

अब पुलिस को यह आशंका है कि कारतूस भी किसी गुर्गे के जरिए शारिक ने ही भिजवाए थे। पुलिस अब उसके पुराने मुकदमों और उसके गुर्गों की जानकारी इकट्ठा कर रही है और दबिश दे रही है। इससे पहले शनिवार (28 दिसम्बर, 2024) को पुलिस ने दो दंगाइयों को दिल्ली के बाटला हाउस से पकड़ा था।