तानाजी फिल्म में उदय भान सिंह का नेगेटिव किरदार निभाकर दर्शकों की वाहवाही लूटने वाले सैफ अली खान ने रविवार (जनवरी 19, 2019) को दिए एक इंटरव्यू में कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने अधिकांश दर्शकों की प्रतिक्रिया से उलट जाकर इस साक्षात्कार में अपनी ही फिल्म को लेकर कहा कि जो फिल्म में दर्शाया गया, वो इतिहास नहीं है। उन्होंने कहा, “इतिहास क्या है, मैं इसे जानता हूँ लेकिन अगर कोई कहे कि फिल्म में जो दिखाया गया है वह इतिहास है तो मैं इसे नहीं मानता।”
बता दें कि अपने इस इंटरव्यू में सैफ ने यह भी कहा कि अंग्रेजों के आने से पहले इंडिया का कोई कॉन्सेप्ट नहीं था। जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हो रही है। लोग फिल्म की रिलीज से पहले हुए उनके साक्षात्कार की वीडियो शेयर कर रहे हैं और दोनों बयानों में फर्क़ दिखाकर उनकी मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।
Unlike Dumbo Deepika, #SaifAliKhan waited for #Tanhaji to become a hit before revealing his ugly face
Another radical izlamist exposes his bigotry Taimur Ali Khan ke abba se yehi umeed thi ?pic.twitter.com/eweImKene1
उल्लेखनीय है कि इस साक्षात्कार में सैफ ने देश के मौजूदा हालातों पर भी अपने विचार स्पष्ट किए और कहा कि फिलहाल देश में जो माहौल है, उसे देखकर उन्हें दुख होता है। उन्होंने कहा, “देश के लोग जो रवैया अपना रहे हैं वह गलत है। ये रवैया हमें भाईचारे के रास्ते से दूर कर रहा है।”
Bollywood ‘history buff’ #SaifAliKhan claims “there was no concept of ‘India’ until the British came.”
Yeah right. French East India Company was about China & Vasco D’Gama went to Fiji.
अनुपमा चोपड़ा को दिए इंटरव्यू में सैफ ने सीएए/एनआरसी पर हो रहे विरोध पर कहा कि जिस तरह से देश आगे बढ़ रहा है उससे ये तो साफ है कि देश में सेक्युलरिज्म का नामो निशान मिट जाएगा। उनके अनुसार, “देश के मौजूदा हालात देखकर लगता है कि हम सेक्युलरिज्म से दूर जा रहे हैं और मुझे कोई भी इसके लिए लड़ता दिखाई नहीं दे रहा है।”
Saif Ali Khan says- “There was no concept of India till the British came”
Is that why his family, which ruled Bhopal, begged Jinnah to include their entire kingdom in Pakistan in 1947 ?
Is that why his great grandfather, the Nawab of Bhopal, called Hindus “untrustworthy”? https://t.co/3dxcVQI8oe
उन्होंने कहा कि बतौर एक्टर उनके लिए कोई भी स्टैंड लेना सही नहीं है क्योंकि इससे उनकी फिल्में बैन हो सकती है और बिजनेस पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसलिए फिल्म इंडस्ट्री के लोग अपने बिजनेस और अपने परिवार को खतरे में नहीं डालना चाहते और कोई भी पॉलिटिकल कॉमेंट करने से बचते हैं।
गौरतलब है कि अभी तक जहाँ सोशल मीडिया पर इस फिल्म को बिना किसी छेड़छाड़ के पेश किए जाने के लिए सराहा जा रहा था, वहीं अनुपमा चोपड़ा से हुई बातचीत में सैफ के बयान ने उन्हें आलोचनाओं का केंद्र बना दिया है।
फिल्म इंडस्ट्री तान्हाजी जैसी फिल्में क्यों बना रही है, इसके बारे में बात करते हुए सैफ ने इस इंटरव्यू में कहा, “यही चलता है और इसलिए यह आइडिया चल पड़ा है। मैं वास्तव में ऐसी फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा होना पसंद करूँगा जो एक स्टैंड ले, जो लोगों को बताए कि इतिहास क्या है, ना कि निश्चित प्रकार की सोच के साथ इससे छेड़छाड़ करे। लेकिन लोग कहते हैं कि यह चलता है। यह एक आइडिया है जो चल निकला है, लेकिन यह वास्तव में खतरनाक है।”
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी चीख चीख कर कहती हैं कि उनके जीते जी कोई इसे बंगाल में लागू नहीं कर सकता है। उनके इस बयान के विरोध में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष खुली चुनौती देते हैं। वो कहते हैं दुनिया जानती है कि वो किस तरह से राज्य में सत्ता में आईं। लेकिन अब उनके दिन पूरे हो चुके हैं। उनके तुष्टीकरण की राजनीति का समय अब समाप्त हो चुका है।
रविवार (जनवरी 19, 2019) को नॉर्थ 24 परगना की एक सभा में दिलीप घोष ने कहा, “50 लाख से ज्यादा मुस्लिम घुसपैठियों की पहचान की जाएगी, और अगर जरूरत हुई तो उन्हें देश से बाहर कर दिया जाएगा। सबसे पहले उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा, उसके बाद दीदी (ममता बनर्जी) किसी का तुष्टीकरण नहीं कर पाएँगी।” आगे अपनी बातों के समर्थन में वो फिर कहते हैं, “अगर ऐसा हुआ तो दीदी (ममता बनर्जी) के वोटों की संख्या में कमी आ जाएगी और आने वाले चुनाव में जहाँ हम 200 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे वहीं उन्हें 50 सीटें भी नहीं मिलेंगी।”
Dilip Ghosh, West Bengal BJP Chief: Once this is done Didi’s (CM Mamata Banerjee) votes will be reduced and in the coming elections, we will get 200 seats, she will not even get 50 seats. https://t.co/2ZCH4zp5Mn
दिलीप घोष यहीं नहीं रूके, उन्होंने रविवार को एक बार फिर से सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वालों को गोली मारने की बात दोहराते हुए कहा, “ममता बनर्जी की सरकार में भले ही कोई व्यक्ति 500 करोड़ रुपए की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाकर आसानी से निकल जाता है, लेकिन जब हम सत्ता में आएँगे तो ऐसे हर व्यक्ति की पहचान की जाएगी और उसे गोली मार दी जाएगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”
#WATCH West Bengal BJP Chief Dilip Ghosh in North 24 Parganas: Under Mamata Banerjee’s government, even if one damages public property worth Rs 500 crores, that person escapes it. When we come to power then every such person will be identified and shot at. Nobody will be spared. pic.twitter.com/ihU9LqtQcZ
गौरतलब है कि बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने रविवार (जनवरी 12, 2019) को नदिया जिले में एक जनसभा को ममता बनर्जी पर हमला करते हुए कहा था, “दीदी (ममता बनर्जी) की पुलिस ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि वह उनके वोटर्स हैं। यूपी, असम और कर्नाटक की हमारी सरकारों ने ऐसे लोगों को कुत्तों की तरह गोलियाँ मारी है।” वहीं घुसपैठियों को लेकर उन्होंने कहा था, “तुम यहाँ आते हो, हमारा खाना खाते हो, यहाँ रहते हो और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाते हो। क्या यह तुम्हारी जमींदारी है? हम तुम्हें लाठियों से मारेंगे, गोली मारेंगे और तुम्हें जेल में डाल देंगे।”
उल्लेखनीय है कि CAA के विरोध के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान के लिए सीधे तौर पर सीएम ममता बनर्जी को जिम्मेदार माना जाता है। बीजेपी नेता का कहना है कि ममता बनर्जी को यूपी, हिमाचल, उत्तराखंड में नुकसान नजर आता है। लेकिन वो भूल जाती हैं कि बीजेपी शासित सरकारों ने साफ कर दिया कि दंगाइयों के साथ किसी तरह हमदर्दी नहीं रखी जाएगी।
राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार (जनवरी 19, 2020) को कहा कि जैसा कि लोग आरोप लगाते हैं, आरएसएस संविधान से इतर शक्ति का केंद्र नहीं बनना चाहता। उन्होंने कहा कि आरएसएस का कोई एजेंडा नहीं है। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में रविवार को ‘भारत का भविष्य’ विषयक संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने जो संविधान लिखा था, हमें उसी पर चलना है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, “भारत में शक्ति का केंद्र सिर्फ संविधान है और कोई दूसरा शक्ति केंद्र हो, ऐसी हमारी कोई इच्छा नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो हम विरोध करेंगे। संविधान में देश के भविष्य की तस्वीर एकदम साफ है। वही प्रारंभ बताता है और गंतव्य भी।”
मोहन भागवत ने मुस्लिमों को न्योता देते हुए कहा कि RSS के बारे में जानने के लिए उन्हें हमारी शाखाओं और कार्यक्रमों में आना चाहिए और उसके बाद ही उनका आरएसएस के बारे में राय बनाना बेहतर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध और निंदा सुनने को भी हम तैयार हैं।
‘संघ को लेकर फैलायी जा रहीं भ्राँतियाँ’
मोहन भागवत ने कहा कि जब आरएसएस के कार्यकर्ता कहते हैं कि यह देश हिंदुओं का है और 130 करोड़ लोग हिंदू हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी का धर्म, भाषा या जाति बदलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी विविधता के बावजूद एकसाथ रहना होगा, इसे ही हम हिन्दुत्व कहते हैं।
‘जब-जब हिंदुत्व कमजोर हुआ, तब-तब भारत की भौगोलिक स्थिति बदली है’
मोहन भागवत ने कहा, “हमारे पूर्वज एक हैं, विविधताओं के बावजूद सब यहीं रहते हैं, यही हिंदुत्व है। जहां हिंदू नहीं रहे या हिंदू भावना खत्म हो गई, देश का वह हिस्सा आज अलग है। जब-जब हिंदुत्व कमजोर हुआ, तब-तब भारत की भौगोलिक स्थिति बदली है।”
भागवत ने कहा कि संविधान कहता है कि हमें भावनात्मक एकीकरण लाने की कोशिश करनी चाहिए। भावना यह है कि यह देश हमारा है। देश के लोगों को इसे आगे ले जाने के बारे में सोचना है।
‘हमें किसी की पूजा पद्धति को लेकर आपत्ति नहीं है’
मोहन भागवत ने ‘भविष्य का भारत’ विषय पर कहा कि संघ को किसी भी धर्म की पूजा पद्धति से कोई आपत्ति नहीं है ना ही संघ जाति या संप्रदाय को लेकर भेदभाव रखता है। उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द संस्कृति का प्रतीक है। इस आधार पर भारत में रहने वाले सभी 130 करोड़ लोग हिंदू हैं।
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने एक किताब लिखी है- शिक्षा। इस किताब में सिसोदिया लिखते हैं कि अलग-अलग राज्यों में शिक्षा पर बहुत से काम हुए हैं। लेकिन इनमें एक बड़ी कमी यह रह जाती है कि इन प्रयासों से अच्छी शिक्षा देने का काम 5-10 प्रतिशत बच्चों तक ही हो पाया। बाकी के 90-95 प्रतिशत बच्चों को अगर शिक्षा देने का काम हुआ भी तो वह बेहद कामचलाउ तरीके से और खानापूर्ति के लिए ही।
सुनने में ऐसी बातें बहुत अच्छी लगती हैं। इस तरह की बातें सिसोदिया ही नहीं, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके अन्य साथी भी करते नज़र आते हैं। लेकिन खुद को गरीबों का हितैषी बता किए जाने वाले लंबे-चौड़े दावों की असलियत कुछ और ही है।
क्या सच में दिल्ली में 5 साल चली आम आदमी पार्टी की सरकार सभी बच्चों की एक समान चिंता करती रही? क्या सरकार की प्राथमिकता में 95 प्रतिशत स्कूल थे?
चुनावी बिगुल बजने से पहले दिल्ली सरकार ने करोड़ों खर्च कर दिल्ली के कोने-कोने में 3 स्कूलों के विज्ञापन टँगवाए। ये स्कूल हैं- वेस्ट विनोद नगर, खिचड़ीपुर और राउज एवेन्यू। वेस्ट विनोद नगर और खिचड़ीपुर, दोनों सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र पटपड़गंज का हिस्सा है। वहीं, राउज एवेन्यू दिल्ली के बीचो-बीच। सिसोदिया ने अपने क्षेत्र के मयूर विहार के साथ-साथ वेस्ट विनोद नगर में भी अत्याधुनिक स्विमिंग पूल बनवाए और प्रचार तंत्र के जरिए ऐसी हवा बनाई कि मानों दिल्ली के सभी स्कूलों में स्विमिंग पूल हैं। जिम की तस्वीर राउज एवेन्यू से ही आती है। यही नहीं सोशल मीडिया पर सबसे अधिक फोटो राउज एवेन्यू के ही दिखाई देते हैं जो कि सेंट्रल दिल्ली में है और सभी बड़े मीडिया घरानों के ऑफिस के नजदीक भी।
केजरीवाल की स्कूली उपलब्धि सिर्फ 3 स्कूलों तक!
प्रचार तंत्र की रणनीति ही जबरदस्त थी। अपना चेहरा चमकाने के लिए सिसोदिया आधिकारिक विज्ञापन के 3 में से दो स्कूल अपने विधानसभा क्षेत्र का शामिल करवाते हैं। ओवरऑल गिने-चुने स्कूलों की फोटो दिखाकर यह नैरेटिव बनाने की कोशिश करते रहे हैं कि दिल्ली के स्कूल 5 साल में ही बदतर से विश्वस्तरीय हो गए हैं। इस कोशिश में लाखों बच्चों को बेरहमी से स्कूलों से निकाले जाने, बेहद ख़राब परीक्षा परिणाम, लगातार घटते बच्चे, दो तिहाई स्कूलों में साइंस की पढ़ाई न होना, लगभग आधे शिक्षकों के खाली पद और अतिथि शिक्षकों की गुणवत्ता का सवाल कहीं पीछे छूट जाता है। जबकि यही सवाल बच्चों के लिए मायने रखते हैं।
1000 में से केवल 54 की चिंता
आम आदमी पार्टी जब सत्ता में आई तो लगभग एक हजार स्कूल दिल्ली सरकार के अधीन थी। आप की सरकार ने सभी स्कूलों के एक समान विकास की चिंता करने की बजाय 6 महीने बाद मॉडल स्कूल के नाम पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे गिने-चुने 54 स्कूलों को छाँट लिया। इन स्कूलों पर 250 करोड़ रुपए खर्च किए। शेष को उनके हाल पर छोड़ दिया।
जिन स्कूलों को बेहतर करने का जिम्मा लिया भी गया, उनकी हालत बाहर से चमकाने की कोशिश तो हुई, लेकिन असलियत जल्द सामने आ गई कि अधिकतर जगहों पर किया गया काम दोयम दर्जे का था। इंडियन एक्सप्रेस में 27 अगस्त 2018 को छपी रिपोर्ट की मानें तो 3 वर्ष बाद भी कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ नहीं थी। कई स्कूलों में करवाए गए काम की गुणवत्ता इतनी ख़राब निकली कि दरारें आने लगीं। 13 जिलों के डिस्ट्रिक्ट डिप्टी डायरेक्टर एजुकेशन ने ये शिकायत की थी कि दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DTTDC) में काफी खामियाँ है और कई जगह बड़े दरार काम खत्म होने के तुरंत बाद ही दिखने शुरू हो गए।
आज तक कोई यह नही बता पाया कि इन स्कूलों की हालत कैसी है। आज इन्हीं में से 8 स्कूलों की तस्वीर सोशल मीडिया पर शिक्षा क्रांति के दावे के साथ शेयर की जाती है। इनके अलावे बाकी स्कूल अपने हाल पर ही हैं। नए कमरे और छोटे-मोटे बदलाव को छोड़कर कहीं विशेष ध्यान नहीं दिया गया। फरवरी 2019 में आई दिल्ली के इकॉनोमिक सर्वे के रिपोर्ट की मानें तो 54 में से केवल 24 में ही काम अब तक पूरा हो सका है।
जो 5 नए स्कूल, स्कूल ऑफ एक्सीलेंस खुले, उनमें विद्यार्थी-शक्षक का अनुपात दिल्ली सरकार की वेबसाइट के मुताबिक इस प्रकार है:
स्कूल का नाम ————— विद्यार्थियों की संख्या —————–शिक्षकों की संख्या
खिचड़ीपुर मनीष सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र पटपड़गंज में आता है। इस स्कूल में 15 बच्चों पर एक शिक्षक है। कालकाजी, जहाँ से सिसोदिया के शिक्षा सलाहकार आतिशी उम्मीदवार हैं, वहाँ 9 बच्चों पर एक शिक्षक हैं। दिलचस्प बात ये है कि ये 5 स्कूल किसी भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा में नहीं बनाए गए हैं। खिचड़ीपुर सिसोदिया का इलाका है, कालकाजी आतिशी, मदनपुर खादर अमानतुल्लाह खान और द्वारका आदर्श शास्त्री का विधानसभा क्षेत्र है।
लेकिन जैसे ही दिल्ली के बाकी के सामान्य स्कूलों की हालत देखेंगे तो पता चलेगा कि गरीबों की बस्ती में चलने वाले स्कूल में बच्चों की भीड़ तो है, लेकिन शिक्षकों की भारी कमी है। जो शिक्षक हैं भी, उनमें बड़ी संख्या अतिथि शिक्षकों की है। SC वर्ग के लिए आरक्षित कोंडली की बात हो या फिर बुराड़ी, संगम विहार, त्रिलोकपुरी, जहाँगीरपुरी, सुल्तानपुरी, खजूरी ख़ास जैसे इलाकों के स्कूल में शिक्षक-विद्यार्थी का अनुपात वैसा नहीं है, जैसा केजरीवाल के चहेते स्कूलों में।
एक नज़र कुछ प्रमुख स्कूलों पर:
स्कूल का नाम ————————– विद्यार्थियों की संख्या ————— शिक्षकों की संख्या
राजकीय कन्या विद्यालय बुरारी ——————– 2325 ———————————— 36 सर्वोदय कन्या विद्यालय निठारी ——————– 4412 ———————————— 57 सर्वोदय कन्या विद्यालय सुल्तानपुरी —————– 4240 ———————————— 67 सर्वोदय बाल विद्यालय खजूरी खास —————– 4549 ———————————— 74 सर्वोदय कन्या विद्यालय(जीनत महल), जाफराबाद —- 4641 ———————————— 64
60-65 बच्चों पर एक शिक्षक, ये हाल दिल्ली की घनी आबादी में बसे तमाम स्कूलों की है।
अपने चहेते स्कूलों में अच्छे अच्छे शिक्षकों को बहाल कर, उनमें सारी सुविधाएँ दिखाकर केजरीवाल और सिसोदिया पूरी दिल्ली के स्कूलों को वर्ल्ड क्लास बताते हैं लेकिन सच्चाई बिल्कुल उलट है। जो सरकार 1030 स्कूलों में भी भेदभाव करती हो, कुछ ख़ास बच्चों पर पूरा ध्यान, बाकियों को अपने हाल पर छोड़ देती हो, आप उसके कामकाज के तरीके समझ सकते हैं।
बजट में चहेते स्कूलों पर पूरा ध्यान
दिल्ली सरकार के बजट का अध्ययन करेंगे तो चहेते और बाकी स्कूलों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार आपको स्पष्ट दिखेगा।
जब बात लाइब्रेरी बनाने की आई तो बाकी के स्कूलों को 5000 से लेकर 15000 तक की राशि दी, लेकिन अपने चहेते नए स्कूलों को एक-एक लाख रुपये दिए गए. इन पैसे का क्या हुआ, कुछ अता-पता नही.
बच्चों के बैठने के लिए डेस्क-बेंच की बात आई तो फिर चहेते स्कूल ही हावी रहे। नए बने अपने सभी 5 चहेते स्कूलों में पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) को और कथित 54 मॉडल स्कूलों में दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन (DTTDC) के जरिये प्राथमिकता में आधुनिक बेंच-डेस्क लगवाए गए। इन्हीं की तस्वीरें दिखाई जाती है।
चीफ मिनिस्टर सुपर टैलेंटेड चिल्ड्रेन स्कालरशिप योजना के तहत भी केवल राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय और अपने चहेते 54 स्कूलों के चिन्हित बच्चों को ही लाभ पहुँचाने का काम हुआ, जिसके तहत IIT जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली के नामी गिरामी कोचिंग संस्थानों की मदद ली गई। दिल्ली के 5 प्रतिशत स्कूलों के लिए विशेष व्यवस्था करने के नाम पर बाकि के गरीब बच्चों को उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया गया। गौरतलब है कि इन स्कूलों में विशेष कोचिंग के जरिए IIT की प्रवेश परीक्षा में पास हुए बच्चों की सफलता को आप सरकार अपनी सफलता बताती है। यही नहीं, यह झूठ फैलाने की भी कोशिश करती है कि यह पहली बार हुआ जब दिल्ली के सरकारी स्कूल के बच्चें IIT में गए। दिल्ली में पहले भी हजारों विद्यार्थी सरकारी स्कूल से ही पढ़कर IIT में गए हैं, जिनमें इन पंक्तियों के लेखक का भाई भी शामिल है, जो 2005 में IIT में पढ़ने गया और अभी कनाडा में एक बड़ी कंपनी में नौकरी करता है।
बात जब डिजिटल लर्निंग योजना के तहत बच्चों को टैबलेट देने की आई तो इसके लिए भी अपने चहेते 5 स्कूल ऑफ एक्सिलेंस को ही चुना गया। राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय को छोड़ दे तो किसी और स्कूल के कुछ गिने-चुने बच्चें ही इससे लाभान्वित होंगे। इस योजना के तहत 11वीं और 12वीं के सभी बच्चों को टैबलेट दिए गए है।
ऐसे कई अन्य बातें हैं, जो यह बात साफ़-साफ़ जाहिर करते हैं कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने केवल चुनिंदा स्कूलों पर ध्यान दिया। 25 फीसदी बजट से लंबी लंबी बातें करने वाले लोग आज हजार स्कूल भी चलाने में असमर्थ हैं।
आज दिल्ली के 1030 स्कूलों में 1472401 बच्चें पढ़ते हैं लेकिन इनमें से इस सरकार का ध्यान 5 स्कूलों के लगभग 4000 बच्चों पर ही है। ये भी दिल्ली के ही बच्चें है लेकिन बाकी के बच्चें भी उसी तरह की सुविधाओं और सहयोग की अपेक्षा रखते हैं जैसे बाकी। लेकिन ये अपेक्षा NGO चलाने वाले नए बने राजनेताओं से नहीं की जा सकती, जिन्होंने आजीवन 2-4 उदाहरणों के जरिए ही लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसे कमाए हैं।
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ दक्षिणी दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन जारी है। रविवार (जनवरी 19, 2020) को इस प्रदर्शन में कुछ कश्मीरी पंडित भी शाहीन बाग पहुँचे और कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने के नारे लगाने लगे।
कश्मीरी पंडित इस दौरान ‘कश्मीरी पंडितों को न्याय दो’ के नारे लगाने शुरू कर दिए थे। कश्मीरी पंडितों की इस नारेबाजी से नाराज होकर CAA-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ झड़प कर दी जो कि कुछ ही देर में हाथा-पाई में बदल गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों से कश्मीरी पंडित अपने लिए समर्थन माँग रहे हैं। कश्मीरी पंडितों ने दावा किया कि आज इस जगह पर ‘जश्न-ए-शाहीन’ कार्यक्रम मनाने की तैयारी चल रही है। दरअसल, आज ही के दिन 30 साल पहले कश्मीर से पंडितों को घाटी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया था।
दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों और कश्मीरी पंडितों के बीच हाथापाईhttps://t.co/1J4vqDcpYj
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हिंसक प्रदर्शनों के बाद से ही देश के अलग-अलग हिस्सों में इस कानून के समर्थन में भी शांतिपूर्ण रैलियॉं हो रही है। इसी कड़ी में रविवार को मध्यप्रदेश के राजगढ़ में रैली निकाली गई। इस दौरान रायगढ़ की डिप्टी कलेक्टर प्रिया वर्मा पहुँची और प्रदर्शनकारियों को पीटना शुरू कर दिया। प्रिया वर्मा ने प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटने के लिए कहा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर एक-दो थप्पड़ भी रसीद दिए, जिसके बाद वहाँ के हालात बदल गए। इसी दौरान किसी ने उनकी चोटी पकड़कर खींच दी।
Watch: Visuals of a pro-CAA rally in Madhya Pradesh’s Rajgarh.
वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रिया वर्मा प्रदर्शनकारियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर रही हैं। उन्होंने तिरंगा लिए एक प्रदर्शनकारी को पकड़कर खींचने की कोशिश की तो वह जमीन पर बैठ गया। इसके बाद उन्होंने एक और प्रदर्शनकारी का कॉलर पकड़ा और उसपर थप्पड़ बरसाने लगीं। अपने साथी को इस कदर पिटता देख बाकी प्रदर्शनकारियों ने प्रिया वर्मा को घेर लिया और उसे छुड़ाने लगे। इसी का फायदा उठा किसी ने पीछे से उनकी चोटी खींच ली। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेरे में ले लिया। इस घटना के बाद प्रिया वर्मा महिला पुलिसकर्मी को डॉंटती हुई भी नजर आईं।
#WATCH Madhya Pradesh: A protestor pulls hair of Rajgarh Deputy Collector Priya Verma, after she hits BJP workers and drags them. The clash broke out during a demonstration in support of #CAA. pic.twitter.com/7ckpZaFBkJ
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया, “आज का दिन लोकतंत्र के सबसे काले दिनों में गिना जाएगा। आज राजगढ़ में डिप्टी कलेक्टर साहिबा ने जिस बेशर्मी से CAA के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को लताड़ा, घसीटा और चाँटे मारे, उसकी निंदा मैं शब्दों में नहीं कर सकता। क्या उन्हें प्रदर्शनकारियों को पीटने का आदेश मिला था?”
उन्होंने एक दूसरे ट्वीट में लिखा है कि, “प्रदेश में शासन-प्रशासन द्वारा कांग्रेस सरकार की चाटुकारिता के नए आयाम गढ़े जा रहे हैं! सरकार के तुग़लकी फरमानों पर अमल में कौन रेस में पहले आता है, इसकी होड़ लगी है! कुछ अधिकारी भूल गए हैं कि वे किसी पार्टी के हुक्म बजाने के लिए नहीं बल्कि जनता की सेवा हेतु पद पर हैं।”
आज का दिन लोकतंत्र के सबसे काले दिनों में गिना जायेगा। आज राजगढ़ में डे. कलेक्टर साहिबा ने जिस बेशर्मी से #CAA के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को लताड़ा, घसीटा और चाँटे मारे, उसकी निंदा मैं शब्दों में नहीं कर सकता। क्या उन्हें प्रदर्शनकारियों को पीटने का आदेश मिला था? pic.twitter.com/gi5fLCZsV8
उत्तराखंड में सभी रेलवे स्टेशनों के नाम अब उर्दू की जगह संस्कृत में लिखे जाएँगे। फ़िलहाल, प्लेटफॉर्म पर रेलवे स्टेशन का नाम हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में लिखा होता है। अब उर्दू की जगह नाम संस्कृत में लिखा जाएगा। ख़बर के अनुसार, यह निर्णय रेलवे नियमावली के प्रावधानों के अनुसार लिया गया है। इसमें साफ़ तौर पर कहा गया है कि रेलवे स्टेशनों के नाम हिन्दी, इंग्लिश और राज्य की दूसरी भाषा यानी संस्कृत में लिखे जाने चाहिए।
2010 में, उत्तराखंड सरकार, संस्कृत को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा देने वाला देश का पहला राज्य बन गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा था कि उनका उद्देश्य राज्य में संस्कृत भाषा को बढ़ावा देना है। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी दीपक कुमार ने बताया, “रेलवे नियमावली के अनुसार, साइनबोर्डस पर रेलवे स्टेशनों के नाम हिन्दी और इंग्लिश के अलावा, राज्य की दूसरी भाषा में लिखे जाने हैं।”उन्होंने बताया,
“इससे पहले, साइनबोर्डस पर उर्दू का इस्तेमाल होता था क्योंकि उत्तराखंड यूपी का हिस्सा था, जहाँ उर्दू दूसरी भाषा है। लेकिन, जब किसी ने हमारा ध्यान इस तरफ दिलाया, तो अब हम इसमें बदलाव कर रहे हैं।”
वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक (डीसीएम) रेखा शर्मा के अनुसार, “हाल ही में यह बताया गया था कि संस्कृत उत्तराखंड की दूसरी भाषा है। इसलिए, रेलवे स्टेशनों के नाम संस्कृत में भी होने चाहिए। हालाँकि, यह एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।”
उत्तराखंड के सभी ज़िला मजिस्ट्रेट, जहाँ रेलवे स्टेशन मौजूद हैं, उन्हें अपने रेलवे स्टेशनों को हिन्दी, इंग्लिश और संस्कृत में सही वर्तनी प्रदान करने के लिए कहा गया है। एक स्थानीय संस्कृत शिक्षक का कहना है कि रेलवे स्टेशनों के हिन्दी और संस्कृत में नाम लगभग एक जैसे ही रहेंगे, क्योंकि दोनों भाषाओं में देवनागरी लिपि का इस्तेमाल होता है। उन्होंने बताया, “देहरादून को संस्कृत में देहरादूनम्, हरिद्वार को हरिद्वारम् और रूड़की को रूड़कीः लिखा जाएगा।”
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की सांसद बेटी सुप्रिया सुले की नजर में तीन तलाक महिलाओं के अच्छा है। मुंबई में शुक्रवार को नागरिकता संशोधन कानून CAA के विरोध में आयोजित एक रैली के दौरान कुरान का हवाला देते हुए उन्होंने इसे अच्छा बताया है।
शारद पवार की बेटी ने यह बयान YMCA मैदान में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए दिया। इस सभा में ज्यादातर महिलाएँ बुर्क़ा पहने हुए आई थीं जो कि एक बार फिर CAA के विरोध के पीछे छुपे हुए इस्लामिक एजेंडा को दर्शाता है।
सुप्रिया सुले ने कहा कि आम लोगों से मिलने जब वो एक बार बाजार में घूम रही थीं तो उन्होंने लोकसभा में अपने भाषण से पहले कुछ महिलाओं से हिजाब की एक दूकान में ट्रिपल तलाक़ पर उनकी राय जानने की कोशिश की। NCP नेता ने कहा कि वो एक ऐसी महिला से मिलीं जो पूरी तरह से बुर्क़ा पहने हुए थीं, वो एक डॉक्टर थी और उसकी बेटी भी डॉक्टर थी।
सुले ने कहा कि जब उसने बुर्का पहने हुए डॉक्टर महिला से पुछा कि ट्रिपल तलाक़ रहना चाहिए या नहीं तो डॉक्टर ने कहा कि रहना चाहिए। फिर सुले ने उस महिला से पूछा कि जब उनके पति को गुस्सा आता है तो वे क्या करती हैं? इस सवाल पर डॉक्टर नाराज हो गई और पीछे बैठ गई।
इसके बाद सुप्रिया सुले ने महिला से ट्रिपल तलाक की अहमियत के बारे में पुछा। तो महिला ने बताया कि उसका नाम किरण कुलकर्णी है और उसने एक मुस्लिम से शादी की है। शादी के बाद उसने क़ुरान पढ़ी। महिला ने सुप्रिया सुले से कहा- “मैं पूरी क़ुरान जानती हूँ। इससे मुझे पता चला है कि ट्रिपल तलाक़ जैसी व्यवस्थाएँ होनी चाहिए। और मैं मानती हूँ कि किसी को भी इसके लिए जेल नहीं भेजा जाना चाहिए।”
घटना के बारे में बताते हुए सुप्रिया सुले ने कहा- “मेरे पति जैसे भी हों, वो मेरे पति और मेरे बच्चों के पिता हैं और उन्हें कोई जेल नहीं भेज सकता। अगर घर में कोई मतभेद हो जाता है तो हम इसे खुद निपटाएँगे।” उसने कहा कि रिश्तेदार उसके पति को मामला सुलझाने की सलाह देंगे क्योंकि घर के मुद्दे बाहर नहीं जाने चाहिए। उसने कहा कि एक महिला अपने पति को कभी भी जेल नहीं भेजेगी।
CAA विरोध में बैठी इस सभा में ज्यादातर महिलाएँ बुर्के में थी
सुप्रिया सुले ने कहा कि अगर कोई महिला अपने पति (तीन तलाक देने के बाद) को इस कारण से जेल भेजती है, तो समाज उसकी बुराई करेगा, लोग उनके बच्चों से कहेंगे कि उनकी माँ बुरी महिला है जिसने अपने पति को जेल भेजा। सुप्रिया सुले के अनुसार, उस महिला ने सुले से कहा कि हर कम्युनिटी को अपने नियम बनाने का अधिकार है और सरकार को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। महिलाएँ खुद यह तय करेंगी कि उनके लिए क्या अच्छा और क्या बुरा है। जैसे कि CAA और NRC हम लोगों के लिए बुरा है।
ट्रिपल तलाक़ के खिलाफ बोलते हुए यह पहली बार नहीं है जब सुप्रिया सुले ने किरण कुलकर्णी, जिसका कि अब हिना नाम है, का जिक्र किया हो। दिसंबर 2018 में लोकसभा में अपने भाषण के दौरान भी सुप्रिया सुले ने जिक्र किया था कि किस तरह से एक हिन्दू महिला ने मुस्लिम से शादी करने के बाद क़ुरान के अनुसार तीन तलाक़ को जरूरी बताया था।
यह भी दिलचस्प बात है कि सुप्रिया सुले ने एक ऐसी महिला का उदाहरण दिया जो पढ़ी-लिखी है और वह भी शरिया कानून को मानते हुए ट्रिपल तलाक की व्यवस्था का समर्थन करती है। अक्सर देखा जाता है कि एक आर्थिक रूप से समर्थ परिवार में ट्रिपल तलाक जैसे मामले कम ही देखे जाते हैं। ट्रिपल तलाक से वास्तविक पीड़ित महिलाएँ ज्यादातार अनपढ़ या फिर आर्थिक रूप से बदहाल परिवारों से होती हैं। ट्रिपल तलाक जैसे प्रचलनों से उन्हीं का सबसे ज्यादा शोषण भी होता है।
बीते छह सालों में 2838 पाकिस्तानी शरणर्थियों को भारतीय नागरिकता मिली है। इस दौरान 948 अफगानी और 172 बंगलादेशी शरणार्थियों को भी नागरिकता दी गई। इनमें मुस्लिम भी शामिल हैं। ये आँकड़े केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को चेन्नई में रखे। वे चेन्नई नागरिक मंच के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
इस दौरान उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के नाम पर विपक्ष लोगों को डराने की कोशिश कर रहा है, जबकि यह नागरिकता देने का कानून है न कि छीनने का। उन्होंने कहा कि इस कानून से देश में रहने वाला कोई मुस्लिम प्रभावित नहीं होगा। न ही इस पर राज्य सरकारों द्वारा विधानसभा में पारित किए गए प्रस्ताव का प्रभाव पड़ने वाला है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में केरल और पंजाब विधानसभा में सीएए के खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया था।
उन्होंने कहा कि हम इस कानून के माध्यम से शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दे रहे हैं। यह कानून किसी की नागरिकता लेता नहीं, बल्कि नागरिकता देता है। यह कानून शिविरों में रह रहे शरणार्थियों के बेहतर जीवन देने का एक प्रयास है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1964 से लेकर 2008 तक श्रीलंका से आए 4,00,000 से अधिक तमिलों को भी भारतीय नागरिकता दी गई है।
FM: In last 6 yrs,2838 Pak refugees,914 Afganistani, 172 Bangladeshi refugees were given Indian citizenship,which include Muslims too.From 1964-’08 over 4,00,000 Sri Lankan Tamils were given citizenship.566 Muslims from Pak, Bangladesh,Afghanistan were given citizenship till ’14. pic.twitter.com/KrgyUPN6d2
वित्त मंत्री ने बताया कि 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के 566 मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता दी गई। उन्होंने पाकिस्तानी गायक अदनान सामी और बांग्लादेश से आईं लेखिका तस्लीमा नसरीन का उदाहरण लोगों के सामने पेश करते हुए कहा कि 2016 से 2018 के बीच 391 अफगान मुस्लिम और 1595 पाकिस्तानी प्रवासियों को भारतीय नागरिकता दी गई है।
सीतारमण ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से आए शरणार्थियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ये सभी शरणार्थी पिछले करीब 50-60 सालों से शिविरों में रह रहे हैं। यदि आप इन शिविरों में जाएँगे तो आपकी रूह काँप उठेगी। उन्होंने कहा, “जो लोग सीएए का विरोध कर रहे हैं, वे शरणार्थी शिविरों की बात क्यों नहीं कर रहे हैं। जो मानवाधिकार की बातें नहीं करते हैं वे ही सीएए के विरोध की बातें कर रहे हैं। श्रीलंका और बंगलादेश के शरणार्थी शिविरों को देखना अति कष्टदायी है। यह आँखों में आँसू ला देगा।”
पाकिस्तान इन दिनों लगातार बढ़ती महॅंगाई से जूझ रहा है। पड़ोसी मुल्क में रोटी का संकट गहरा गया है। गेंहूँ की किल्लत से आटे के दाम आसमान छू रहे हैं। इससे आर्थिक मोर्चों पर पहले से ही जूझ रही इमरान खान सरकार की टेंशन और बढ़ गई है।
गेहूॅं की भयंकर किल्लत से सरकार को कोई उपाय नहीं सुझ रहा। आटे की कीमतों पर काबू पाने की बजाए सरकार और अन्य पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा में ढाबे और रेस्तरां के मालिकों ने सोमवार से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। साथ ही कहा है कि सरकार पुराने रेट पर आटा मुहैया कराए या फिर उन्हें नान और रोटी की कीमतों को बढ़ाने की इज़ाजत दे। इतना ही नहीं होटल मालिकों ने इमरान सरकार को आटे की कीमतें कम करने के लिए 5 दिनों का अल्टीमेटम भी दिया है।
डॉन के अनुसार आटे का संकट सभी चारों प्रांतों और राजधानी इस्लामाबाद में एक जैसी है। इस संकट पर शनिवार को सियासत तब तेज हो गई जब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की अगुवाई वाली संघीय और पंजाब तथा खैबर पख्तूनवा की प्रांतीय सरकारों ने इसका दोष पाकिस्तान पीपल्स पार्टी(पीपीपी) की अगुवाई वाली सिंध सरकार के मत्थे मढ़ दिया।
एक रिपोर्ट के मुताबिक पहले 40 से 45 रुपए किलो में बिकने वाला आटा इन दिनों 60 से 70 रुपए किलो बिक रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (एनएफएस) सचिव हाशिम पोपलजाई का कहना है कि आटे की कम आपूर्ति के लिए हाल में हुई ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल मुख्य कारण है, जिसकी वजह से मिलों को समय से गेहूॅं की आपूर्ति नहीं हो सकी। उन्होंने आटे की किल्लत को ‘अस्थायी’ बताते हुए कहा यह संकट कुछ दिन में दूर हो जाएगा और सिंध में 20 मार्च तथा पंजाब में 15 अप्रैल तक गेहूॅं की नई फसल की आमद बढ़ जाने से स्थिति में और सुधार होगा।
पोपलजाई के अनुसार ने सिंध सरकार से एक करोड़ 40 लाख टन गेहूॅं खरीदने के लिए कहा गया था। लेकिन प्रांतीय सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि देश में गेहूॅं की कुल मासिक खपत 22 लाख टन है। सरकार के पास भंडार में पहले ही 42 लाख टन का गेहूॅं का स्टॉक है।
Aata crisis and massive price hike is yet another reminder of sheer callousness that is hallmark of the PTI government. People’s lives are being made miserable by the day with government’s apathetic attitude!
नेशनल एसेम्बली में विपक्ष के नेता और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज के अध्यक्ष शाहबाज शरीफ ने देश में लागातार बढ़ती महॅंगाई को लेकर इमरान सरकार को घेरा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “सरकार के उदासीन रवैए ने आम लोगों की जीवन मुश्किल कर दिया है।” वहीं, पीपीपी अध्यक्ष बिलवाल भुट्टो जरदारी ने कहा कि इमरान खान सरकार के कार्यकाल में पाकिस्तान गेहूॅं निर्यातक की बजाय इसका आयातक बन गया। उन्होंने आरोप लगाया कि संघीय सरकार ने 40 हजार टन गेहूॅं अफगानिस्तान भेज दिया।