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पाक एजेंट राशिद अहमद को UP ATS ने वाराणसी से किया गिरफ्तार, भारतीय सैन्य ठिकानों की भेजी कई तस्वीरें

उत्तर प्रदेश एटीएस ने रविवार (जनवरी 20, 2019) को सेना इंटेलिजेंस की मदद से वाराणसी में बड़ी कार्रवाई करते हुए ISI एजेंट को गिरफ्तार किया। एजेंट की पहचान 23 वर्षीय राशिद अहमद के रूप में हुई। जानकारी के मुताबिक राशिद सेना के साथ सीआरपीएफ के ठिकानों और कई अन्य जगहों की तस्वीरें पाकिस्तान भेज रहा था। वह पाकिस्तान में बैठे ISI हैंडलर के साथ सीधे संपर्क में था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 8वीं पास ISI एजेंट राशिद अहमद चंदौली के मुगलसराय का रहने वाला है। जो साल 2018 में कराची में रहने वाली अपनी मौसी के यहाँ गया था। इसके बाद ही वह ISI के संपर्क में आया। मार्च 2019 से उसने देश के महत्वपूर्ण स्थानों और सैन्य ठिकानों की तस्वीरें ISI को भेजना शुरू किया। जिसके बदले पाकिस्तान ने उसे गिफ्ट और पैसे दिए। कहा जा रहा है कि राशिद सेना के साथ सीआरपीएफ के ठिकानों की रेकी भी कर चुका है। साथ ही दो बार पाकिस्तान जाकर इस काम की ट्रेनिंग भी ले चुका है।

भारत के सिम से पाकिस्तान चला रहा एजेंडा?

एटीएस के अनुसार 2018 में जब राशिद पाकिस्तान में था, तब ISI ने उससे संपर्क किया। ISI ने राशिद से दो भारतीय सिम खरीद कर उसका ओटीपी माँगा। इसके बाद ओटीपी लेकर पाकिस्तान में बैठे आईएसआई एजेंटों ने उस नंबर पर व्हाट्सएप चालू किया और राशिद को सिम कार्ड तोड़ देने का हुक्म दिया।

बताया जा रहा है कि अब उसी भारतीय सिम कार्ड के व्हाट्सएप पर पाकिस्तानी सेना और ISI अपना एजेंडा चला रही है और तमाम भारतीय लोगों को जोड़कर भड़काऊ सामग्री भेजने का काम कर रही है। व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े लोग उसे भारतीय नंबर समझते हैं, लेकिन हकीकत में उसका ऑपरेटर पाकिस्तान में बैठा है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार एटीएस के सूत्र बताते है कि राशिद पाकिस्तानी सेना के इशारे पर जोधपुर में सेना के मूवमेंट की जानकारी देने में लगा था। वह इन दिनों वाराणसी कैंट तथा सीआरपीएफ अमेठी की जानकारी दे रहा था। वह लगातार व्हाट्सएप पर फोटो भेज रहा था। जिसके लिए उसे पैसे मिल रहे थे।

बता दें आरोपित के पास पेटीएम के माध्यम से 5 हजार रुपए तथा एक मोबाइल फोन बरामद हुआ है और पुलिस ने उसे आईपीसी की धारा 123 के अंतर्गत हिरासत में लिया है।

राशिद कैसे पहुँचा कराची?

खबरों के मुताबिक, माता-पिता के तलाक के बाद राशिद चंदौली में अपने नाना और मामा के साथ रहता था। 8 वीं तक यहाँ उसने दर्जी के रूप में और मेडिकल स्टोर में काम किया। लेकिन बाद में पोस्टर चिपकाने का काम शुरू कर दिया। साल 2017 में पहली बार कराची जाने के समय उसे अपनी कजन से प्यार हो गया। और साल 2018 में जब दूसरी बार वो कराची गया तो उसकी मुलाकात ISI एजेंटों से हुई। जिसके बाद भारत आकर राशिद ने उनके लिए काम कर शुरू किया।

किन जगहों की राशिद ने भेजी तस्वीर

जानकारी के अनुसार, राशिद ने जिन जगहों की तस्वीर ISI को भेजी, उसमें काशी विश्वनाथ मंदिर, एयरफोर्स सिलेक्शन बोर्ड, ज्ञानवापी मस्जिद, संकटमोचन मंदिर, आगरा किला, नैनी ब्रिज, प्रयागराज का अर्धकुम्भ मेला, चंदौली और अमेठी के सीआरपीएफ कैंप, गोरखपुर रेलवे स्टेशन, सोनभद्र का रेनुकूट थर्मल पॉवर प्लांट, इंडिया गेट, अजमेर शरीफ, नागपुर रेलवे स्टेशन जैसी जगहों के नाम शामिल हैं। इनके अलावा उसने अभी हाल ही में लखनऊ में हुए सीएए/एनआरसी के ख़िलाफ़ हुए आंदोलनों की तस्वीर और बीएचयू की तस्वीर भी पाकिस्तान भेजी थी। जिसके बदले उसे पाकिस्तान में बैठे ऑपरेटर आसिम और अहमद से मई 2019 में हरे-सफेद रंग की टीशर्ट गिफ्ट में मिली थी और साथ ही 5000 रुपए की राशि भी।

15 साल की हिन्दू लड़की ने अमरोत शरीफ में क़बूल किया इस्लाम, 4 बच्चों के बाप से हुआ निक़ाह

पाकिस्तान से आए दिन हिन्दू लड़कियों का अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और फिर निक़ाह पढ़वाए जाने की ख़बरें सामने आती रहती हैं। इससे इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का सिलसिला अभी तक नहीं थमा है। ताज़ा मामला सिंध प्रांत के जकोबाबाद का है, जहाँ 15 जनवरी को आरोक कुमारी (महक कुमारी) का अपहरण कर लिया गया।

इसके बाद एक वीडियो सामने आया, जिसमें पता चला कि नाबालिग लड़की ने इस्लाम क़बूल कर लिया है और अली रज़ा माची नाम के मुस्लिम लड़के से निक़ाह कर लिया। डर के माहौल में जी रहे अल्पसंख्यकों के हालात का पता इस बात से ही चल जाता है कि नाबालिग ने मजबूरी वश इस बात को स्वीकार लिया कि उसने इस्लाम धर्म क़बूल कर निक़ाह कर लिया है। उसने बताया कि उसने दरगाह अमरोत शरीफ में इस्लाम क़बूल किया और अब उसका नाम ‘अलीजा’ है।

बता दें कि 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा 15 जनवरी को अचानक लापता हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने उसके लापता होने की शिक़ायत दर्ज कराई, इसमें बताया गया था कि नाबालिग को जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया है। वहीं, हिन्दू समुदाय ने दावा किया है कि ननकी कुमारी उर्फ़ ​​महक कुमारी उर्फ़ ​​आरोक कुमारी उर्फ़ ​​अलीजा एक कम उम्र की लड़की है क्योंकि उसकी उम्र 15 वर्ष है और वह कक्षा 9वीं की छात्रा है।

हिंदू समुदाय के एक प्रतिनिधि ने कहा,

“ननकी कुमारी जिसे हम महक कुमारी कह रहे हैं, वो 15 साल की है। आज उसे लापता हुए चौथा दिन हो गया है, जकोबाबाद में उसकी गुमशुदगी को लेकर हिन्दू समुदाय चिंतित है। हर दूसरे दिन, हम सुनते हैं कि हमारी लड़कियों का अपहरण कर उन्हें इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया है। ऐसे काम करके मुस्लिम समुदाय हमें प्रताड़ित कर कर रहा है।”

इसके आगे उन्होंने बताया, “हम यहाँ एक अल्पसंख्यक समुदाय हैं और हमारे लिए अब यहाँ रहना लगभग असंभव हो गया है। मैंने एक सूची देखी है जिसके अनुसार, हमारे हिन्दू समुदाय की कम से कम 50 युवा लड़कियों का अपहरण कर उनका जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया गया है।”   

उन्होंने अपना दर्द बयाँ करते हुए कहा,

“अगर इस तरह के मामले होते रहेंगे, तो हमारे हिन्दू समुदाय को हमारे घरों, हमारे व्यवसायों और इस देश को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। मैंने मुख्य न्यायाधीश, सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री से संसद और विधानसभाओं में हिन्दू नाबालिग लड़कियों के जबरन धर्मांतरण के मामले को उठाने और हमें सुरक्षा देने का आग्रह किया है, जिससे हम यहाँ शांति के साथ अपना जीवन जी सकें।”

सोशल मीडिया पर इस मामले की घोर निंदा हो रही है। सवाल पूछे जा रहे हैं कि जो लोग नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, क्या इस तरह की घटना जानने के बाद भी वो अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखेंगे?

ख़बर के अनुसार, ऑल पाकिस्तान हिंदू पंचायत (APHP), नाम का एक संगठन है जो पाकिस्तान के अल्पसंख्यक हिन्दू समुदाय के मुद्दों का समाधान करता है। उसके मुताबिक़, वो इस मामले पर बारीकी से काम कर रहा है। APHP के एक सदस्य ने कहा, “किडनैपर अली रज़ा माची 28 साल का है। वो दो बार निक़ाह कर चुका है। कुछ समय पहले उसने अपनी पहली बीवी को छोड़ दिया। उसके (अली रज़ा माची) चार बच्चे हैं।”

APHP के महासचिव रवि दवानी ने अपने एक बयान में कहा, “APHP और जकोबाबाद पंचायत ने पारस्परिक रूप से फ़ैसला किया है कि इस मामले पर कोई भी FIR दर्ज न की जाए और इसे अलग तरीके से हल करने की कोशिश की जाए।”

इस बीच, जकोबाबाद पुलिस ने बताया कि उन्होंने अली रज़ा के चाचा, कुछ चचेरे भाई और परिवार के अन्य सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया है, लेकिन हिन्दू लड़की और अली रज़ा का कुछ पता नहीं चल सका है। पुलिस ने APHP जकोबाबाद प्रमुख लालचंद और अन्य पंचायत सदस्यों के साथ इस बात के लिए आपस में करार किया है कि वो इस घटना में शामिल लोगों को जल्द ही गिरफ़्तार करेंगे। 

पिछले साल पाकिस्तान की ननकाना साहिब में एक सिख लड़की का अपहरण कर उसका जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया था। लड़की के परिवार ने आरोप लगाया था कि इस्लाम में परिवर्तित होने के बाद उसे एक मुस्लिम से निक़ाह करने मजबूर किया गया था। इसी तरह के एक अन्य प्रकरण में, एक पाकिस्तानी ईसाई लड़की, जिसकी पहचान हुमा मसीह के रूप में हुई थी, उसका कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया और फिर उसे इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया था।

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ठुमका लगाते ‘केजरीवाल’ का वीडियो क्यों डिलीट किया AAP ने?

दिल्ली में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव के मतदान की तारीख नज़दीक आ रही है, राजनीतिक गलियारे में हलचल तेज़ होती जा रही है। ऐसे में आम आदमी पार्टी (AAP) की गुलाटियाँ तो ग़ज़ब ही ढाए हुए है। दरअसल, पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की एक ऐसा वीडियो शेयर किया जिसके बाद यूज़र्स ने उनसे सोशल मीडिया पर सवालों की झड़ी लगा दी। इस वीडियो में बॉलीवुड की फ़िल्म ‘चलते-चलते’ के एक गीत का इस्तेमाल किया गया था। इसमें डांस करते शाहरुख खान के शरीर पर मुख्यमंत्री का चेहरा लगा दिया गया।

AAP ने इस वीडियो को डिलीट कर दिया है

बता दें कि AAP पार्टी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन लिखा गया था कि केजरीवाल इस इंतज़ार में हैं कि बीजेपी दिल्ली में मुख्यमंत्री के पद पर किसका नाम आगे करेगी। इससे वो बीजेपी का यह कहते हुए मज़ाक उड़ाना चाहते थे कि बीजेपी के सीएम उम्मीदवार का अभी तक कोई अता-पता नहीं है।

AAP का यह दाँव बीजेपी का मज़ाक उड़ाना था, लेकिन इसका शिकार वो ख़ुद ही हो गए, तभी तो पार्टी ने अपने ट्विटर हैंडल से शाहरुख खान की बॉडी पर केजरीवााल के चेहरे वाला फ़ोटो झट से हटा लिया।

AAP पार्टी के इस पैंतरे को जल्द ही सोशल मीडिया पर यूज़र्स ने आड़े हाथों ले लिया। यूज़र्स ने AAP पार्टी से उन वादों के बारे में पूछ डाला, जो पाँच साल पहले सत्ता पर क़ाबिज़ होने से पहले किए गए थे, जिनका अब कुछ अता-पता नहीं है।

ट्विटर यूजर @pokershah ने AAP द्वारा ट्वीट किए गए वीडियो को ही ट्वीट किया और लोकपाल, फ्री वाईफाई, CCTV, क्लीन यमुना और दिल्ली में 10000 बसों से जुड़े सवाल पूछे। इसके तुरंत बाद, AAP ने अपने केजरीवाल-SRK का वीडियो हटा लिया।

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निर्विरोध चुने गए जेपी नड्डा, BJP के नए अध्यक्ष के रूप में PM मोदी करेंगे उनकी ताजपोशी

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा अब पार्टी के अध्यक्ष की बागडोर सँभालेंगे। पार्टी के नए अध्यक्ष चुने जाने के बाद जेपी नड्डा अब गृह मंत्री अमित शाह की जगह लेंगे। अपनी गजब की सांगठनिक क्षमता, टारगेट को पूरा करने का मिशनरी अंदाज और मिलनसार व्यक्तित्व की वजह से ही बीजेपी के सामूहिक नेतृत्व द्वारा कई कद्दावर नेताओं को दरकिनार कर उन्हें अमित शाह का उत्तराधिकारी चुना गया है। पीएम दोपहर बाद पार्टी मुख्यालय पहुँचेंगे और निर्वाचण प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पीएम मुख्यालय में ही कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। साथ ही नए अध्यक्ष के रूप में जेपी नड्डा के नाम की घोषणा करेंगे।

नड्डा ने आज सुबह 10:30 बजे अपना नामांकन दाखिल किया। पार्टी के इस शीर्ष पद के लिए नड्डा को आम सहमति से निर्विरोध चुन लिया गया। इस पद के लिए सिर्फ नड्डा ने ही नामांकन भरा था। अगर एक से अधिक नामांकन होते तो कल चुनाव प्रक्रिया होती, जिसके बाद नए पार्टी प्रमुख का चुनाव होता।

इस मौके पर जेपी नड्डी की पत्नी मल्लिका रेड्डी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “यह हम सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। परिवार, बिलासपुर और हमारे हिमाचल प्रदेश राज्य सहित हर कोई आज बहुत खुश है, क्योंकि इतने छोटे राज्य के एक व्यक्ति को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है।”

भाजपा के भीतर चुनावी प्रक्रिया के प्रभारी वरिष्ठ भाजपा नेता राधामोहन सिंह ने पार्टी द्वारा भाजपा के 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में से 21 में आंतरिक चुनाव संपन्न होने के बाद कार्यक्रम की घोषणा की थी। भाजपा के संविधान के अनुसार, कुल राज्य इकाइयों के कम से कम 50% संगठनात्मक चुनाव अभ्यास के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है।

बता दें कि नड्डा मोदी के पहले कार्यकाल में स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं और साथ ही उन्होंने भाजपा युवा मोर्चा के प्रमुख के रूप में भी काम किया है। पटना में एबीवीपी (ABVP) कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत करने के बाद, नड्डा ने भाजपा के संसदीय बोर्ड में भी कार्य किया है, जो भाजपा की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। उन्होंने पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ भी काफी काम किया है।

अभी फिलहाल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ही पार्टी अध्यक्ष हैं। अब जेपी नड्डा बीजेपी के 11वें पार्टी अध्यक्ष होंगे। जेपी नड्डा की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संगठन में पैठ बढ़ती रही। वह पुराने नेतृत्व के भी करीब रहे तो आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के भी भरोसेमंद माने गए। अब बीजेपी की कमान उन्हें सौंपे जाने के बाद वह बीजेपी की ताकतवर तिकड़ी का हिस्सा बन गए हैं।

गौरतलब है कि मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले जेपी नड्डा का जन्म बिहार की राजधानी पटना में 2 दिसंबर 1960 को हुआ था। नड्डा 16 साल की उम्र में जेपी आंदोलन से जुड़ गए थे। इसके बाद सीधे छात्र राजनीति से जुड़ गए। 1982 में उन्हें उनकी पैतृक जमीन हिमाचल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का प्रचारक बनाकर भेजा गया। वहाँ छात्रों के बीच नड्डा ने ऐसी लोकप्रियता हासिल कर ली थी कि उनके नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार ABVP ने जीत हासिल की थी।

पटना के छात्र नेता से लेकर BJP के कार्यकारी अध्यक्ष तक: रोचक है जेपी नड्डा का सफ़र

बांग्लादेश वापस भागने वालों की संख्या 50% बढ़ी: NRC का असर – घुसपैठिए न घर के रहे, न घाट के

देश में पिछले दिनों एनआरसी को लेकर काफी बवाल देखने को मिला। चारों ओर अफवाहें फैलाई गईं कि केंद्र सरकार द्वारा लाया जा रहा नया कानून देश में रह रहे समुदाय विशेष के लोगों का दमन करेगा। लेकिन इसी बीच भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से हैरान कर देने वाले आँकड़े सामने आए। आँकड़ों से स्पष्ट है कि साल 2018 में गैरकानूनी तरीके से बॉर्डर पार करके बांग्लादेश लौटने वालों की संख्या में 50% की वृद्धि हुई है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक, साल 2018 में गैरकानूनी तरीके से बांग्लादेश जाने वालों की संख्या में 50 फीसदी का इज़ाफा हुआ। दरअसल, साल 2018 में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने 2971 लोगों को गैरकानूनी तरीके से बॉर्डर पार करने के आरोप में गिरफ्तार किया था, जबकि साल 2017 में ये आँकड़ा सिर्फ 1800 था।

NCRB के मुताबिक, साल 2018 में बांग्लादेश जाने वालों में जिन 2971 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, उनमें 1532 पुरुष, 749 महिलाएँ और 690 बच्चे शामिल हैं। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी तरफ बांग्लादेश से भारत आने वालों की संख्या में थोड़ी गिरावट आई है। साल 2017 में ये आंकड़ा 1180 था, जबकि 2018 में ये संख्या 1118 पर पहुँच गई।

एनसीआरबी की रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, मिरोजम और असम में बीएसएफ जवानों द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों के उद्देश्यों का उल्लेख नहीं है। लेकिन कहा जा रहा है बॉर्डर पार करने वालों की संख्या में ये इजाफा असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (NRC) की दूसरी लिस्ट आने के बाद आया है।

यहाँ बता दें कि NRC की दूसरी ड्राफ्ट की कॉपी 30 जुलाई 2018 को आई थी। इसके तहत 40 लाख लोगों को बाहर रखा गया था, जबकि NRC की फाइनल लिस्ट में करीब 20 लाख लोगों को बाहर रखा गया। जिसके बाद कहा जा रहा है कि भारत से बाहर निकाले जाने के डर से ही लोग गैरकानूनी तरीके से ही लोग लौटने लगे।

गौरतलब है कि कुछ समय पहले इस मामले पर बांग्लादेश के बॉर्डर गार्ड डायरेक्टर जनरल एवं मेजर जनरल मोहम्मद शफीलुन इस्लाम ने भी अपना बयान दिया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि पिछले महीने ही 445 बांग्लादेशियों को भारत का बॉर्डर क्रॉस करते गिरफ्तार किया गया।

NRC की आहट से सहमे घुसपैठिए, रात के अँधेरे में भाग रहे बांग्लादेश

बांग्लादेशी घुसपैठियों ने BSF के 2 जवानों को बनाया निशाना, घायल कर लूट लिया बंदूक

100+ सैनिकों की मौत, दर्जनों घायल: मिसाइल से मस्जिद पर हमला, नमाज़ पढ़ रहे थे आर्मी वाले

यमन के मारिब में सैन्य शिविर में एक मस्जिद पर शनिवार (18 जनवरी) को मिसाइल और ड्रोन से किए गए हमले में 100 से अधिक सैनिकों की जान चली गई और दर्जनों घायल हो गए। यह मस्जिद मिलिट्री कैंप के अंदर ही था, इसलिए मरने वाले लगभग सभी सेना के लोग ही हैं। यमन ने राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी ने इस कायराना आतंकी हमले की निंदा की है। उन्होंने रविवार (19 जनवरी) को सेना को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया और मारिब शहर में हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए इस हमले का जवाब देने के लिए तैयार रहने को कहा।

अलजज़ीरा की ख़बर के अनुसार, घायलों को मारिब शहर के एक अस्पताल ले जाया गया। दो चिकित्सा सूत्रों ने रॉयटर्स न्यूज एजेंसी को बताया कि हमले के लिए शिविर में एक मस्जिद को टार्गेट किया गया था क्योंकि वहाँ बड़ी संख्या में लोग नमाज़ के लिए इकट्ठा थे।

सऊदी के स्वामित्व वाले अल हैदाथ टेलीविजन ने एक वीडियो प्रसारित किया जिसमें कहा गया कि हमले के भीषण परिणाम थे। शरीर के हिस्सों को फर्श पर कटा हुआ मलबे के बीच देखा जा सकता है। इसके अलावा, फ़र्श पर बिछे क़ालीन पर ख़ून जमा हुआ था और दीवारों पर शरीर के अंग चिपके हुए थे।

राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी ने यमन की राज्य समाचार एजेंसी, सबा को बताया,

“हूती विद्रोहियों का यह शर्मनाक क़दम इस बात की निस्संदेह पुष्टि करता है कि वह शांति के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि उसे मौत और विनाश के अलावा कुछ नहीं आता और वह इलाके में ईरान का घटिया हथियार है।”

हैतियों ने शनिवार (18 जनवरी) को किए इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली क्योंकि वो यह नहीं मानते कि वो ईरान की कठपुतली हैं। इसके उलट वो यह कहते है कि वो एक भ्रष्ट व्यवस्था से लड़ रहे हैं।

मारिब का तेल समृद्ध प्रांत, हूती नियंत्रित राजधानी सना से लगभग 115 किलोमीटर (70 मील) दूर है। यह शहर सऊदी के नेतृत्व वाले, अमेरिका समर्थित गठबंधन का गढ़ है। अल जज़ीरा के मोहम्मद अलताब ने सना से रिपोर्टिंग करते हुए बताया, “इस हमले में तीन मिसाइलें शामिल थी।” साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।

इसके अलावा, Al Ekhbariya टेलीविजन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि हमला बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से किया गया। संयुक्त राष्ट्र के दूत, मार्टिन ग्रिफिथ्स ने यमन में हुए इस हमले की कड़ी निंदा की और साथ ही देशभर में हवाई हमले और ज़मीनी हमले के प्रति भी निराशा व्यक्त की। 

न्यूज़ एजेंसी, ‘सबा’ के अनुसार एक सैन्य सूत्र ने बताया कि नाहम में संघर्ष रविवार को भी जारी था। इस संघर्ष में हूती के दर्जनों आतंकवादी मारे गए और घायल हुए।

9 भारतीय, 1 नाव, 10 दिन में 3000 किमी का समुद्री सफर : घर लौटे यमन में बंधक बने भारतीय मछुआरे

‘अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए आया और सैनिक के गर्दन में घोंप दी कैंची

गाय पर बम बाँधकर सुरक्षा बलों पर हमला कर रहे ISIS आतंकी, अपने तरह की यह पहली घटना

बाकी सब बाद में करूँगा, एक बार मार्क्स ले आऊँ… सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तनाव-रहित परीक्षा को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से ‘परीक्षा पे चर्चा’ की। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए कीं। परीक्षा पे चर्चा का यह तीसरा संस्करण तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश के छात्रों ने हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों ने परीक्षा को लेकर अपने सवाल सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा। पीएम मोदी भी स्कूली बच्चों का बोर्ड परीक्षा के लिए छात्रों को हौसला बढ़ाया और परीक्षा को लेकर जो भी डर छात्रों के मन में था, उसे दूर करने की कोशिश की।

पीएम ने इस कार्यक्रम को सबसे अधिक दिल छू लेने वाला बताया। उन्होंने कहा, “अगर कोई मुझे कहे कि इतने कार्यक्रमों के बीच वो कौन सा कार्यक्रम है जो आपके दिल के सबसे करीब है, तो मैं कहूँगा वो कार्यक्रम है परीक्षा पे चर्चा। युवा मन क्या सोचता है, क्या करना चाहता है, ये सब मैं भली-भाँति समझ पाता हूँ।”

उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “जैसे आपके माता-पिता के मन में 10वीं, 12वीं को लेकर टेंशन रहती है, तो मुझे लगा आपके माता-पिता का भी बोझ मुझे हल्का करना चाहिए। मैं भी आपके परिवार का सदस्य हूँ, तो मैंने समझा कि मैं भी सामूहिक रूप से ये जिम्मेदारी निभाऊँ।”

पीएम ने पिछले साल भी छात्रों संग यह चर्चा की थी। दिल्ली के तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में हो रही इस चर्चा में छात्रों और शिक्षकों से परीक्षा के तनाव को दूर करने पर संवाद किया। इस कार्यक्रम में कुल 2,000 स्टूडेंट्स और टीचर्स ने हिस्सा लिया, जिनमें से 1,050 छात्रों का चयन निबंध प्रतियोगिता के जरिए किया गया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कार्यक्रम के लिए कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए पाँच अलग-अलग विषयों पर एक ‘शॉर्ट निबंध’ प्रतियोगिता शुरू की थी। इसी के माध्यम से इन छात्रों का चयन किया गया।

पीएम मोदी जब स्टेडियम पहुँचे तो छात्रों ने कई तरह की पेंटिंग दिखाई। छात्रों ने पर्यावरण, शिक्षा और परीक्षा के तनाव के बारे में पेंटिंग दिखाई। छात्रों ने देश के महापुरुषों के स्टैच्यू भी दिखाए। इस बीच एक छात्र ने पीएम मोदी को समुद्र तट पर उनके द्वारा की गई सफाई की पेंटिंग भी दिखाई। उन्होंने छात्रों द्वारा बनाई गई पेंटिग्स की काफी सराहना की। पीएम मोदी के इस कार्यक्रम का मकसद है कि छात्र तनावमुक्त होकर परीक्षाएँ दें, जिससे दीर्घकाल में बेहतर परिणाम सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम के दौरान जब एक छात्रा ने उनसे परीक्षा के नाम पर मूड ऑफ होने की बात कही तो पीएम ने उसे समझाते हुए कहा, “क्या कभी हमने सोचा है कि मूड ऑफ क्यों होता है? अपने कारण से या बाहर के किसी कारण से। अधिकतर आपने देखा होगा कि जब मूड ऑफ होता है, तो उसका कारण ज्यादातर बाह्य होते हैं।”

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले साल करीब 1.4 लाख छात्रों की प्रविष्टियाँ देश भर से मिली थीं। इस बार यह संख्या बढ़कर लगभग 2.6 लाख हो गई है। पीएम मोदी ने 2018 में आयोजित ऐसे सत्र में छात्रों के 10 प्रश्नों के उत्तर दिए थे और पिछले साल 16 सवाल लिए थे। पहले इस साल यह सत्र 16 जनवरी को होना था लेकिन देशभर में विभिन्न पर्वों की वजह से इसे टाल दिया गया था।

CAA-NRC का विरोध करने वाले कलाकार ममता के कुत्ते: TMC-कॉन्ग्रेस से जुड़े रहे सांसद खान का विवादित बयान

पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भाजपा और टीएमसी के बीच राजनैतिक टकरार चालू है। इसी कड़ी में हाल ही में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने अपना गुस्सा निकालते हुए एक विवादित बयान दिया। उन्होंने सीएए का विरोध करने वाले प्रदेश के मशहूर कलाकारों को ‘ममता बनर्जी का कुत्ता’ करार दिया।

बिष्णुपुर लोकसभा सीट से सांसद सौमित्र खान ने कहा कि वे (विरोध करने वाले कलाकार) लोग प्रस्तावित एनआरसी और सीएए से जुड़े तथ्यों के बारे में जानते हैं, लेकिन फिर भी विरोध कर रहे हैं। खान ने आगे कहा कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे ममता बनर्जी के ‘कुत्ते’ हैं। उन्होंने एक्ट का विरोध कर रहे कलाकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि यही लोग कामदूनी और पार्क स्ट्रीट में हुए सामूहिक बलात्कार पर चुप रहे और बम विस्फोट की घटनाओं पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।

बता दें कि बीते दिनों सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ हो रहे आंदोलनों में पश्चिम बंगाल के अभिनेताओं, निर्देशकों और संगीतकारों ने हिस्सा लिया था। साथ ही ये लोग एक्ट के ख़िलाफ एक वीडियो में भी दिखे थे। जिसमें इन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार नागरिकता पर फिर से सबूत माँगती है तो वो कोई दस्तावेज नहीं दिखाएँगे। जिसके बाद विपक्ष के कई नेताओं की इस पर प्रतिक्रिया आई।

उल्लेखनीय है कि सौमित्र खान से पहले पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने प्रदेश के कई बुद्धिजीवियों को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने एक्ट का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा था कि इन दिनों पश्चिम बंगाल में कई बुद्धिजीवी हैं जो लोगों को दिन भर ज्ञान देते हैं और हंगामा करते हैं। माकपा ने इन लोगों को सड़कों पर लाकर बुद्धिजीवी बनाया और अब दीदीमोनी (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) ने उन्हें पैदा करने की फैक्टरी लगा ली है।

मध्य प्रदेश में CAA समर्थकों को DM ने जड़े थप्पड़, पीछे से किसी ने खींच दी चोटी: देखें Video

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OpIndia impact: धोखाधड़ी मामले में वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता किशोर उपाध्याय का भाई देहरादून से गिरफ्तार

उत्तराखंड कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर उपाध्याय के भाई सचिन उपाध्याय को रविवार (जनवरी 19, 2019) को धोखाधड़ी के एक मामले में देहरादून में गिरफ्तार कर लिया गया। सचिन उपाध्याय को उनके खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों की जाँच कर रहे एक विशेष जाँच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार उनके घर के बाहर से गिरफ्तार किया गया। कॉन्ग्रेस नेता के भाई के खिलाफ आरोप सामने आने के बाद पिछले साल जून में एसआईटी का गठन किया गया था।

SIT ने अपनी जाँच में पाया कि सचिन उपाध्याय ने अपने पूर्व कारोबारी साझेदार मुकेश जोशी के 50 प्रतिशत शेयर अवैध रूप से हस्तांतरित कर दिए थे। सचिन उपाध्याय ने संयुक्त स्वामित्व वाली कंपनी एसएम हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड में उनके हिस्से के 50 फीसदी शेयर उनके फर्जी दस्तखत करके अपनी पत्नी के नाम स्थानांतरित करा लिए थे।

धोखाधड़ी के इस मामले की सबसे पहली रिपोर्टिंग ऑपइंडिया ने अक्टूबर 2018 में की थी। जिसमें उपाध्याय द्वारा की गई धोखाधड़ी का विवरण प्रकाशित किया गया था। मुकेश जोशी ने कंपनी लॉ बोर्ड के समक्ष आरोप लगाया था कि उन्होंने कंपनी को जमीन खरीदने के लिए 1.7 करोड़ रुपए का ऋण दिया था, लेकिन सचिन उपाध्याय ने उनके हिस्से का शेयर नहीं दिया। वहीं जब सचिन उपाध्याय के इस धोखाधड़ी और वित्तीय घाटे को लेकर मुकेश को हार्ट अटैक आया और वो हॉस्पिटल में भर्ती थे, तो सचिन उपाध्याय ने ऋण को इक्विटी शेयर में बदल दिया और उसे अपनी पत्नी को आवंटित कर दिया, जिसे उसने खुद कंपनी का निदेशक बनाया था। उपाध्याय ने अपनी पत्नी को कंपनी का निदेशक बनाने के साथ ही मुकेश को कंपनी के निदेशक के पद से हटा दिया था।

सचिन उपाध्याय के खिलाफ साल 2017 में भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 420, धारा 467, धारा 468, धारा 471, धारा 504 और धारा 120b के तहत देहरादून के राजपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

…वो सैनिक जो अपनी ही शादी में नहीं पहुँच सका घर, आर्मी ने कहा – ‘देश सबसे पहले, जिंदगी इंतजार करेगी’

सेना के जवान अपनी जिंदगी में देश के लिए कैसी-कैसी कुर्बानियाँ देते हैं, इसकी मिसाल कश्मीर की बर्फबारी में फँसे उस जवान ने पेश की, जो अपनी ही शादी के दिन घर नहीं पहुँच सका। देश की रक्षा में जुटा जवान हिमाचल के मंडी का रहने वाला है और भारी बर्फबारी की वजह से कश्मीर से निकल नहीं सका। मंडी निवासी जवान सुनील के इस जज्बे को पूरा देश सलाम कर रहा है।

पाकिस्तान से लगे रजौरी बॉर्डर पर तैनात 26 साल के सुनील का विवाह 15 जनवरी 2020 को दलेड़ में तय हुआ था। 16 जनवरी को बारात दलेड़ आने वाली थी परंतु भारी बर्फबारी के कारण सुनील घर नहीं पहुँच पाया। श्रीनगर के पास पाकिस्तानी सीमा पर तैनात सैनिक सुनील की छुट्टी एक जनवरी से शुरू होने वाली थी और वह घर आने के लिए बांदीपुरा क्षेत्र के ट्रांजिट कैंप पर पहुँच चुके थे, लेकिन बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो गईं। दोनों परिवारों में विवाह की तैयारियाँ पूर्ण हो चुकी थीं परंतु जवान के तय समय पर ना पहुँचने के बाद दोनों पक्षों के परिजनों ने निर्णय लिया है कि शादी अब आगे शुभ मुहूर्त देखकर होगी।

रविवार (जनवरी 19, 2019) को सुनील के भाई विक्की ने बताया कि सुनील मंगलवार (जनवरी 21, 2019) को घर आ रहा है। यह खुशी की बात है। दोनों पक्ष दोबारा बैठकर शादी की नई तारीख तय करेंगे और उसके बाद धूमधाम से शादी होगी। भारतीय सेना के चिनार कॉर्प्स ने रविवार को सेना के बहादुरी को सलाम करते हुए ट्वीट करके कहा, “जिंदगी इंतजार करेगी यह वादा है। भारतीय सेना का एक जवान कश्मीर घाटी में भारी बर्फबारी की वजह से अपनी शादी में नहीं पहुँच सका। चिंता मत करिए जिंदगी इंतजार करेगी। देश हमेशा सबसे पहले है। दुल्हन के परिवार वाले नई तारीख के लिए राजी हैं। एक सैनिक की जिंदगी का बस एक और दिन।”

सुनील के तय समय पर घर न पहुँचने की जानकारी मिलने पर दुल्हन के चाचा संजय कुमार ने कहा था कि शादी की सभी तैयारियाँ दोनों परिवारों ने की थी। उन्होंने आगे कहा था, “हमारे सभी रिश्तेदार भी पहुँच गए थे। सभी सुनील का इंतजार कर रहे थे, सबको उसकी फिक्र थी। वह सीमा पर देश की सेवा में जुटा है, इस बात की वजह से हम उस पर गर्व करते हैं। अब तो एकमात्र विकल्प यही है कि शादी की तारीख को बढ़ा दिया जाए।”

उल्लेखनीय है कि कश्मीर में तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी और चुनौती सर्दियों में काफी बढ़ जाती है। भारी बर्फबारी के बावजूद सैनिक सीमा पर चौकन्ने रहते हैं। इसके साथ ही आम नागरिकों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। दिसंबर-जनवरी में भारी बर्फबारी की वजह से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त होता है।

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