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8 साल पहले शरद पवार को मारा था थप्पड़ : हरविंदर सिंह को दिल्ली पुलिस ने दबोचा

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार को 2011 में थप्पड़ मारने वाले को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि आरोपित लम्बे समय से फरार चल रहा था जिसके बाद 2014 अदालत ने अधिकारिक रूप से उसे फरार घोषित कर दिया था। आठ साल पहले जब यह घटना हुई थी तब पवार केंद्र की यूपीए सरकार में कृषि एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री हुआ करते थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपित शख्स का नाम हरविंदर सिंह है। हरविंदर ने दिल्ली के संसद मार्ग स्थित एनडीएमसी सेंटर में एक कार्यक्रम से लौट रहे तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री को 2011 में थप्पड़ जड़ दिया था। बता दें कि आरोपित हरविंदर ने इस घटना से कुछ ही दिनों पहले पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुखराम पर भी हमला बोला था। मंत्री रहे सुखराम को अदालत ने भ्रष्टाचार का दोषी ठहराया था। उस समय अदालत ने हरविंदर को चेतावनी देते हुए छोड़ दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हमला करने वाला शख्स प्रणब मुखर्जी पर हमला करना चाहता था मगर उनकी उम्र को देखते हुए उसने यह विचार त्याग दिया। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक आरोपित ने 2011 में अपनी सफाई पेश करते हुए कहा था, “हर ज़रूरी सामान की क़ीमतें बढ़ती जा रही है। मैं एक आतंकवादी नहीं हूँ क्योंकि आतंकवादी ऐसा क़दम नहीं उठाता। मैं अलग-अलग घोटालों में शामिल भ्रष्ट मंत्रियों से त्रस्त हूँ।”

थप्पड़ पड़ने के बाद पवार ने इसके लिए किसी भी पार्टी को दोषी नहीं ठहराया था, पवार की बेटी और एनसीपी से सांसद सुप्रिया सुले ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से शांत रहने को कहा था। गौरतलब है कि जब सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर हरविंदर सिंह को बाहर निकाला तो उसने चिल्लाकर कहा था कि मैं यहाँ पूरी तैयारी के साथ मंत्री को थप्पड़ मारने ही आया था। जब दिल्ली पुलिस ने हरविंदर का इतिहास खंगाला तो पता चला कि वह न तो किसी राजनीतिक दल से जुड़ा था और न ही उसका मानसिक संतुलन बिगड़ा था।

उसने कहा था कि वह कॉन्ग्रेस नीत सरकार में घोटालों और भ्रष्टाचार से आहत था। मीडिया से बातचीत के दौरान हरविन्दर ने कहा था कि उसे किसी नतीजे की कोई परवाह नहीं है और न तो यह काम उसने सुर्ख़ियों में आने के लिए किया है।

उत्तराखंड के बेहद करीब बेस बना रहा है चीन, नेपाली सीमा पर डोकलाम 2.0 की तैयारी?

ज़्यादा दिन नहीं हुए जब चीन और भारत की सेनाओं की टुकड़ियाँ भारत, चीन और भूटान के बीच स्थित डोकलाम में आमने-सामने आ गईं थीं और दोनों के बीच हाथापाई भी हुई थी। तनाव बढ़ा तो चिंता यह भी होने लगी कि परमाणु हथियारों और आईसीबीएम मिसाइलों से लैस दोनों देशों में युद्ध की स्थिति न आ जाए।

आज चीन भारत को उसी के आँगन उत्तराखंड के मुहाने पर जिस तरह से घेरने की कोशिश कर रहा है, उससे वैसे ही हालात दोबारा पैदा होने का खतरा मँडराने लगा है। चीन उत्तराखंड की भारत-नेपाल सीमा स्थित लिपुलेख पास के बेहद करीब अपना बेस बनाने में जुटा है। यह भारत, चीन और नेपाल की तिहरी सीमाओं के बेहद करीब और उत्तराखंड राज्य की उत्तर-पूर्वी सीमा पर है।

टाइम्स नाउ के नेशनल अफेयर्स एडिटर सृंजॉय चौधरी की रिपोर्ट के अनुसार चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने लिपुलेख पास के बेहद करीब कई सारी सैन्य सुविधाओं और आधारभूत ढाँचे का निर्माण किया है। इसमें एक हेलीपैड, एक सोलर पैनल और एक लॉन्ग रेंज रेकनाइसेन्स एंड ऑब्ज़र्वेशन सिस्टम (लोर्रस) शामिल है। इसके अलावा उसके द्वारा दो सर्विलांस कैमरे लगाने की बात का भी उल्लेख रिपोर्ट में है।

रिपोर्ट में इसके अलावा चीन के गांसु प्रान्त में एक नया सैन्य बेस बनाए जाने की भी बात कही गई है। इस हवाई बेस में मेंटेनेंस हैंगर और 20 पार्किंग हैंगर हैं। इस बेस के करीब स्थानीय सैन्य हवाई ब्रिगेड के मध्यम लिफ्ट के हेलीकॉप्टरों को भी देखा गया है।

चीन की ये सभी हरकतें एक-दूसरे से जुड़ीं हुईं हैं। वह भारत को सभी ओर से घेर कर अलग-थलग कर देने की फ़िराक में है ताकि किसी सैन्य टकराव की स्थिति में भारत की सहायता को पड़ोसी देश भी न हों और हर ओर से घिरा होने के कारण किसी दूर के सहयोगी के लिए भी मदद पहुँचाना दूभर हो जाए। इसी नीति के तहत भारत-विरोध पर बने और पल रहे पाकिस्तान को शह देने के अलावा श्रीलंका, चीन, भूटान, बांग्लादेश समेत सभी देशों के भीतर वह विरोधी तत्वों को शह देता रहता है।

Pak ने फिर किया सीजफायर का उल्लंघन: जवाबी कार्रवाई में भारत ने मार गिराए 4 सैनिक, 3 चौकियाँ भी तबाह

जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में पाकिस्तान लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है। ताजा जानकारी के मुताबिक आज (नवंबर 13, 2019) सुबह 7 बजे से ही राजौरी के केरी क्षेत्र में गोलाबारी चालू है।

मंगलवार (नवंबर 12, 2019) को भी शाहपुर, कीरनी और बालाकोट में संघर्ष विराम का उल्लंघन हुआ और रिहायशी इलाकों समेत सैन्य चौकियों पर भी गोले दागे गए। भारतीय जवानों ने इसका मुॅंहतोड़ जवाब दिया।

भारतीय सैनिकों ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान की 3 चौकियाँ तबाह कर दी। इसके अलावा 3 से 4 पाकिस्तानी सैनिक मारे जाने की सूचना भी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान की ओर से क्षेत्र के गाँव कस्बा, मंधारा, कीरनी, इस्लामाबाद, गूंतरियाँ, काईयाँ, अपर शाहपुर, लोअर शाहपुर के साथ ही नियंत्रण रेखा से दूरदराज के गाँव गलीपिंडी और कंडियार तक गोले दागे गए थे। जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई और लोगों ने सुरक्षित जगहों पर पनाह ली।

इसके अलावा बता दें, इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने शुक्रवार को जिले के कृष्णा घाटी में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए भारतीय क्षेत्र में गोलीबारी की थी। जिसमें सेना का एक जवान भी वीरगति को प्राप्त हुआ था, लेकिन भारतीय सेना की कार्रवाई में 2 घुसपैठिए भी मार दिए गए थे।

आडवाणी मर जाते तो मैं खुशियाँ मनाता: Facebook अधिकारी का घृणास्पद ट्वीट

फेसबुक के अधिकारी अगर खुलेआम अपनी जहरीली मानसिकता प्रदर्शित करने लगें तो आप उन्हें क्या कहेंगे? भारत में फेसबुक के अधिकारी कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। वे न सिर्फ़ अपना राजनीतिक झुकाव प्रदर्शित कर रहे, बल्कि अपना हिंदुत्व-विरोधी चेहरा भी दिखा रहे हैं। कुछ ऐसा ही किया है राहुल फर्नांडिस ने। राहुल फेसबुक में न्यूज़ फीड और ‘स्टोरीज इंटीग्रिटी’ का काम देखते हैं। इसका मतलब हुआ कि फेसबुक पर कौन सी स्टोरी जानी चाहिए और कौन सी हटनी चाहिए, ये तय करने का अधिकार कम्पनी ने उन्हें दिया हुआ है। फेसबुक पर कौन सी ख़बर आपको दिखेगी और कौन सी नहीं, उसे छानने का काम उनके जिम्मे है।

पूर्व भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी शुक्रवार (नवंबर 8, 2019) को 92 वर्ष के हो गए। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनके आवास पर पहुँच कर उन्हें जन्मदिवस की शुभकामनाएँ दी। जहाँ पक्ष-विपक्ष के कई नेताओं ने पूर्व उप-प्रधानमंत्री की लम्बी उम्र की कामना की, फेसबुक के अधिकारी राहुल फर्नांडिस उनके मरने की कामना कर रहे थे। आप ख़ुद उनका ये ट्वीट देख लीजिए, जिसे उन्होंने डिलीट कर दिया है:

आडवाणी को लेकर फेसबुक के अधिकारी ने किया आपत्तिजनक ट्वीट

जैसा कि आप उपर्युक्त ट्वीट में देख सकते हैं, राहुल फर्नांडिस ने लिखा कि ट्विटर पर लालकृष्ण आडवाणी को ट्रेंड करते देख कर वो ख़ुशी मनाने वाले थे, लेकिन तभी उन्हें पता चला कि वो तो अपने जन्मदिन की वजह से ट्रेंड हो रहे हैं। इसके बाद राहुल को निराशा हाथ लगी। वो चाहते थे कि आडवाणी किसी बुरे कारण से ट्रेंड हो रहे हों या फिर उनके साथ कुछ बुरा हुआ हो, ताकि राहुल फर्नांडिस खुशियाँ मना सकें। भाजपा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी को लेकर घृणास्पद ट्वीट करने को लेकर राहुल लोगों के निशाने पर आए।

क्या यह व्यक्ति फेसबुक पर ऐसी ख़बरों को ही ज्यादा प्रचारित नहीं करता होगा, जिसमें भाजपा, हिंदुत्व और मोदी या आडवाणी जैसी शख्सियतों के प्रति घृणा प्रदर्शित की गई हो? प्रोपगेंडा फैलाया गया हो? क्या ये व्यक्ति ऐसी ख़बरों की रीच नहीं घटा देता होगा जिसमें मोदी अथवा भाजपा या फिर हिंदुत्व को लेकर सकारात्मक बातें की गई हों? ऐसा इसीलिए, ताकि ज्यादा लोगों तक इन चीजों लेकर नकारात्मकता पहुँचे, कुछ अच्छा नहीं। आप इस आदमी का ट्विटर प्रोफाइल यहाँ देख सकते हैं:

फेसबुक के अधिकारी राहुल फर्नांडिस का ट्विटर प्रोफाइल

राहुल फर्नांडिस के लिए यह नया नहीं है। वह इससे पहले भी कई घृणास्पद ट्वीट कर चुका है। उसने नरेंद्र मोदी और आडवाणी की रथयात्रा की एक फोटो शेयर करते हुए पूछा था कि जब आडवाणी पर केस चल रहे हैं तो फिर मोदी पर क्यों नहीं?

फेसबुक ने जब अपनी कम्पनी में ही राहुल फर्नांडिस जैसे घृणा फैलाने वाले लोग भर रखे हैं तो फिर उनसे न्यूट्रैलिटी की उम्मीद ही कैसे की जा सकती है? एक ऐसा अधिकारी, जो भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री के लिए अशुभ बातें करता हो।

सोमनाथ जैसा हो राम मंदिर ट्रस्ट, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ भी रहें: VHP

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अयोध्या में अब रामलला के मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। न्यायालय के आदेशानुसार केंद्र सरकार को 3 महीने में राममंदिर के लिए ट्रस्ट बनाना है। कहा जा रहा है कि मोदी सरकार जल्द से जल्द इस पर काम पूरा करके मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कर सकती है। इस बीच खबर आई है विश्व हिंदू परिषद चाहती है कि मंदिर निर्माण के लिए बनाए जाने वाले ट्रस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हों।

विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बुधवार को ट्रस्ट निर्माण पर अपनी बात रखते हुए कहा, “हमें लगता है कि गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी इस ट्रस्ट में शामिल करना चाहिए। राम मंदिर ट्रस्ट का गठन सोमनाथ ट्रस्ट की तर्ज पर होना चाहिए।” उन्होंने बताया कि आजादी के बाद केएम मुंशी भी केंद्रीय मंत्री रहते हुए सोमनाथ ट्रस्ट से जुड़े थे।

उन्होंने उम्मीद जताई कि ट्रस्ट राम मंदिर का निर्माण रामजन्मभूमि न्यास द्वारा तैयार डिजाइन के अनुसार ही करेगा और ट्रस्ट में न्यास का भी प्रतिनिधित्व रहेगा। उन्होंने जानकारी दी कि राम मंदिर के लिए करीब 65 प्रतिशत नक्काशी का कार्य पूरा हो चुका है और न्यास के डिजाइन के अनुसार मंदिर के भूतल के लिए आवश्यक खंड भी तैयार है। उनके अनुसार 4 महीने पहले तक इस पर तेजी से तक काम चल रहा था, लेकिन फिलहाल ये रुका हुआ है।

यहाँ बता दें न्यास अयोध्या के कारसेवकपुरम में 1990 से कलाकारों और शिल्पकारों के लिए कार्यशाला चला रहा है। इसमें कलाकारों ने कई पत्थरों और खंभों पर कलाकृतियां उकेरी हैं, इस उम्मीद के साथ, कि जब भी रामलला का मंदिर बनेगा तो इन्हें उसमें लगाया जाएगा। इस कार्यशाला के प्रभारी 79 वर्षीय अन्नू भाई सोमपुरा ने बताया कि रामजन्मभूमि न्यास की योजना के मुताबिक मंदिर 268 फुट लंबा, 140 फुट चौड़ा और शिखर तक 128 फुट ऊंचा होगा। जिसमें कुल 212 खंभे होंगे।

‘भीम-मीम’ ट्विटर पॉलिटिक्स: ‘दलित’ दिलीप मंडल के बाद मुस्लिम संपादक शाहिद सिद्दीकी ने मॉंगा Blue Tick

ब्लू टिक देकर ट्विटर जानी-पहचानी हस्तियों का अकाउंट वेरिफाई करता है ताकि कोई और उस पहचान के साथ अलग अकाउंट बना धोखाधड़ी न करे। लेकिन, अब इसको लेकर ‘भीम-मीम’ टाइप पॉलिटिक्स शुरू हो गई है। कुछ दिन पहले शेखर गुप्ता के ‘द प्रिंट’ से जुड़े दिलीप मंडल ने आरोप लगाया था कि दलितों को ट्विटर ‘ब्लू टिक’ नहीं दे रहा है। अब मुस्लिम पत्रकार शाहिद सिद्दीकी ने उसी जुबान में बात करते हुए आरोप लगाया है कि उन्हें मजहब के कारण ब्लू टिक नहीं दिया गया।

दिलीप सी मंडल ने आरोप लगाया था कि ट्विटर दलितों को ब्लू टिक नहीं देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल ब्राह्मणों व कथित उच्च जाति के लोगों के एकाउंट्स ही वेरिफाई किए जा रहे हैं। इसके बाद तमाम कथित दलित कार्यकर्ताओं ने ट्विटर के ख़िलाफ़ अभियान चलाया। ट्विटर के दफ्तर के बाहर नारेबाजी की गई। वामपंथियों ने भी इस कार्य में भाग लिया और कविता कृष्णन सरीखे लोगों ने 24 घंटे तक अपना ट्विटर अकाउंट बंद कर विरोध दर्ज कराया। ख़ैर, दिलीप सी मंडल को तो ब्लू टिक मिल गया लेकिन उनके तमाशे कम नहीं हुए। अब इसी नुस्खे के साथ शाहिद सिद्दीकी ब्लू टिक मॉंग रहे हैं।

पूर्व सांसद शाहिद सिद्दीकी साप्ताहिक पत्रिका ‘नई दुनिया’ उर्दू के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य संपादक हैं। वो दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर भी रह चुके हैं। उपन्यास ‘The Golden Pigeon’ के लेखक शाहिद ने भी ट्विटर पर ब्लू टिक के लिए रोना रोया। उन्होंने ख़ुद को वरिष्ठ पत्रकार घोषित करते हुए लिखा कि वो उर्दू के लोकप्रिय सम्पादकों में से एक हैं। उन्होंने ख़ुद को पुराना राजनीतिक विश्लेषक घोषित किया है। ख़ुद को लेखक, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता का तमगा देते हए शाहिद ने आरोप लगाया कि ट्विटर उन्हें ब्लू टिक देकर उनके अकाउंट को वेरिफाई नहीं कर रहा है।

हालाँकि, शाहिद ने ये भी लिखा कि वो न तो जाति व्यवस्था की परवाह करते हैं और न ही इसके बारे में सोचते हैं। इसके बाद शाहिद ने समर्थकों सहित ‘Verify Muslim Activists’ नामक ट्रेंड चलाया, जिसमें माँग की गई कि मुस्लिम कार्यकर्ताओं व हस्तियों को ट्विटर पर ब्लू टिक देकर उनके अकाउंट को वेरिफाई किया जाए। राष्ट्रीय जनता दल ने भी इस ट्रेंड को अपना समर्थन दिया है। जेल में बंद लालू यादव की पार्टी ने कहा कि वो जाति, मजहब और समुदाय के आधार पर हो रहे किसी भी प्रकार के भेदभाव का विरोध करती है। राजद ने कहा कि वो बराबरी और सम्प्रभुता में विश्वास रखती है। राजद ने मुस्लिमों और एससी, एसटी के लोगों को ब्लू टिक देने की माँग की है।

युवा राजद के प्रदेश अध्यक्ष करि सोहैब ने लिखा कि ट्विटर को एससी, एसटी व मुस्लिम लोगों को ब्लू टिक देना चाहिए। बरौली के राजद विधायक मोहम्मद नेमतुल्लाह ने भी लिखा कि बराबरी का हक़ मुस्लिमों को भी दिया जाना चाहिए। जहाँ दिलीप सी मंडल ने ट्विटर को ‘ब्राह्मणवादी’ करार दिया था, मुस्लिम नाम वाले कई ट्विटर हैंडल्स ने ट्विटर को मुस्लिम-विरोधी होने का तमगा दे दिया।

चूँकि एक परमानेंट दुश्मन पहले से स्थापित है तो उसके प्रतीक जनेऊ को, जो अनभिज्ञता में ब्राह्मणों के ही साथ जोड़ा जाता है, उसको तुरंत खींच लिया जाता है। सी मंडल ने कहा कि ब्लू टिक नीला जनेऊ बना दिया गया है। चूँकि सी मंडल सी मंडल हैं, तो उनकी मजबूरी है कि उन्हें हर चीज नीली ही चाहिए, वरना उसमें ब्राह्मणवाद ठूँस देना है। इनसे पूछा जाए कि ब्राह्मणवाद है क्या, तो दो लाइन से आगे नहीं बढ़ पाएँगे। ऐसी शब्दावली गढ़ कर जातिवाद फैलाने के कुत्सित प्रयास कुछ सौ सालों से चल रहे हैं, और चूँकि ये सत्ता पाने की सीढ़ी भी है, तो पिछले कुछ दशकों की राजनीति में ये ज्यादा प्रबल हो चुका है। ब्राह्मणों की दुर्गति क्या है वो बिहार के गाँवों में यजमानी करने वाले ब्राह्मणों को जा कर कोई देखे।

मुस्लिमों को आरक्षण, ‘कर्जमाफी’ का भी पुराना पासा: शिवसेना, NCP और कॉन्ग्रेस ‘सरकार’ का एजेंडा

महाराष्ट्र में भले राष्ट्रपति शासन लग गया हो, लेकिन सरकार गठन के प्रयास जारी हैं। इस दिशा में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के बीच सहमति बनती दिख रही है। ट्विटर पर सुधीर सूर्यवंशी नामक पत्रकार द्वारा शेयर की गई ख़बर के अनुसार, तीनों ही दल एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर सहमति बनाने जा रहे हैं। इसके बाद सरकार का गठन होगा। कहा जा रहा है कि एनसीपी, कॉन्ग्रेस और अब तक उसकी विरोधी विचारधारा की पार्टी रही शिवसेना के बीच अगले 5 सालों के लिए कॉमन मिनिमम प्रोग्राम बनाया गया है। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि अब उनकी पार्टी को बस कॉन्ग्रेस की सहमति का इन्तजार है।

कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में क्या तय किया गया है? सुधीर ने इस बाबत जानकारी देते हुए लिखा है कि किसानों की पूर्ण कर्जमाफी का मुद्दा इसमें शामिल किया गया है। बता दें कि कॉन्ग्रेस ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान का विधानसभा चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ा था, लेकिन बाद में कर्जमाफी न होने या इसके त्रुटिपूर्ण होने के कारण किसानों में भारी असंतोष है। अब फिर से महाराष्ट्र में यही पासा फेंका जा रहा है। इसके अलावा किसानों की फसल के लिए ‘मिनिमम सपोर्ट प्राइस’ बढ़ाने को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में रखा गया है। सुधीर सूर्यवंशी वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं। वे पूर्व में अंग्रेजी अखबार डीएनए से जुड़े हुए थे।

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि शिवसेना अपने हिंदुत्व के एजेंडे से भी पीछे हट रही है। उसे उत्तर भारतीयों के ख़िलाफ़ भी विरोध प्रदर्शन न करने और नरमी बरतने को कहा गया है। कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के मुताबिक शिवसेना वीर सावरकर को भारत रत्न देने की माँग से भी पीछे हट जाएगी। हालॉंकि अभी इसका औपचारिक ऐलान बाकी है।

कॉमन मिनिमम प्रोग्राम में मुस्लिमों को 5% आरक्षण देने की बात भी कही गई है। मुस्लिमों को सामान्य वर्ग के ग़रीबों को मिल रहे आरक्षण (EWS) और ओबीसी आरक्षण के तहत पहले से लाभ मिल रहा है। ऐसे में उन्हें अतिरिक्त आरक्षण देने की बात अजीब और तुष्टिकरण की नई मिसाल है। शिवसेना का इस पर सहमत होना और भी चौंकाने वाला है। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने मुस्लिमों को अतिरिक्त आरक्षण देने से इनकार कर दिया था। अब देखना यह है कि सरकार गठन की सार्वजनिक घोषणा कब होती है?

कॉमन मिनिमम एजेंडा पर काम करने के लिए तीनों दलों के नेताओं को प्रतिनिधि के रूप में शामिल किया जाएगा। शारद पवार ने अपनी पार्टी से अजीत पवार, जयंत पाटिल, छगन भुजबल, धनञ्जय मुंडे और नवाब मलिक को इसमें शामिल किया है। नवाब मलिक पहले भी कह चुके हैं शिवसेना ने मुस्लिमों के लिए आरक्षण की माँग कर के अपने स्टैंड में बदलाव किया है।

राम मंदिर पर फैसला आते ही भावुक हो गए थे CM योगी, TV देख-देखकर बजा रहे थे ताली

अयोध्या फैसले के इंतजार में दशकों से उम्मीद जगाए बैठे लोगों के लिए 9 नवंबर का दिन भाव-विभोर करने वाला था। संत-महंतों की तो जैसे खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अरसे से इस फैसले का इंतजार था। उनसे पहले गोरक्षपीठ के महंत रहे अवैद्यनाथ और दिग्विजयनाथ भी रामजन्मभूमि आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिस समय सर्वोच्च न्यायालय ने विवादित भूमि पर अपना निर्णय सुनाया उस समय योगी आदित्यनाथ की खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। वे टेलीविजन पर फैसला सुनते ही तालियाँ बजाने लगे और काफी भावुक हो उठे। इस दौरान उनके साथ विश्व हिंदू परिषद के दिग्गज नेता दिनेश चंद्र भी थे।

खबरों के अनुसार संघ प्रमुख मोहन भागवत एवं सुरेश भैयाजी जोशी, कृष्णा गोपाल और दत्तात्रेय होसबोले जैसे संघ के दिग्गज नेताओं ने भी योगी आदित्यनाथ को फोन कर फैसला आने पर शुभकामनाएँ दी। विश्व हिंदू परिषद के अंतराष्ट्रीय मुख्य सचिव दिनेश चंद्र ने कहा कि ये फैसला योगी आदित्यनाथ के दो गुरुओं (महंत अवैद्यनाथ और महंत दिग्विजय नाथ) की मेहनत का फलितार्थ है।

खबरों के मुताबिक इस फैसले को सुनने के बाद मुख्यमंत्री बेहद खुश थे और चहक रहे थे। जैसे-जैसे निर्णय टीवी पर दिखाया जा रहा था, उनकी खुशी सातवें आसमान पर थी। इस दौरान वे बेहद भावुक थे और खुशी जाहिर करने के लिए टीवी देख-देखकर लगातार ताली बजा रहे थे।

यहाँ बता दें कि योगी आदित्यनाथ इस मामले पर एक रात पहले से ही नजर जमाए हुए थे। शुक्रवार को फैसले का समय घोषित होने के बाद उन्होंने डिविजनल कमिश्नर और एडिशनल डीजीपी से अलग-अलग खुद बात की थी और सुरक्षा के लिहाज से हर तैयारी रखने को कहा था।

इसके अलावा योगी आदित्यनाथ की कोर टीम के सदस्यों ने भी मीडिया से बातचीत में इस बात को कहा कि सीएम योगी के मुख्यमंत्री पद पर होने से इस मामले में तेजी आई। मायावती और अखिलेश यादव की सरकार तो 2010 से 2017 में सिर्फ़ दस्तावेजों का अनुवाद ही करवाने में जुटी थी। बतौर योगी आदित्नाथ ने ही इस अनुवाद के कार्य को 10 महीने में पूरा करवाया।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री रहते योगी आदित्यनाथ 18 बार अयोध्या गए। बीते 27 साल में वह भाजपा के दूसरे ऐसे सीएम थे जिन्होंने रामलला को लेकर अपनी श्रद्धा दिखाने से नहीं हिचके। सीएम रहते अखिलेश यादव कभी अयोध्या नहीं गए। यहॉं तक मुलायम सिंह यादव, मायावती, राहुल गॉंधी और प्रियंका गॉंधी जैसे नेताओं ने भी अयोध्या से 1992 से ही दूरी बनाकर रखी थी।

असम ही नहीं केरल भी पहुँच जाते हैं बांग्लादेशी और करते हैं मर्डर, 2 हत्यारों को खोज रही पुलिस

केरल के अलापुजहा में एक बुजुर्ग दम्पति की निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। पुलिस इस मामले में दो आरोपितों को ढूँढ रही है, जो बांग्लादेश के नागरिक हैं। इन दोनों बंग्लादेशियों के लिए लुक आउट नोटिस जारी कर दिया गया है। 75 वर्षीय एपी चेरियन और उनकी 68 वर्षीय पत्नी लिलिकुट्टी चेरियन को उनके रिश्तेदारों ने मंगलवार (नवंबर 12, 2019) को मृत पाया। ये दोनों घर में अकेले रहते थे। घटना चेंगन्नूर क्षेत्र की है। आसपास के लोगों ने देखा कि उनके घर के बाहर शाम से ही एक दूध की बोतल रखी हुई थी, जिसे उन्होंने अंदर नहीं लिया था। इसके बाद लोगों को शक हुआ और उन्होंने दरवाजा खोला।

मृत बुजुर्ग दम्पति के दो बेटे हैं, जो अरब में नौकरी करते हैं। बुजुर्ग दम्पति ने दो लोगों को अपने घर में साफ़-सफाई के लिए रखा हुआ था। वो उनसे नारियल तोड़वाने का काम भी करवाते थे। दोनों ही मजदूर शुक्रवार और शनिवार को बुजुर्ग दम्पति के घर पर ही थे। उन दोनों को एक लोकल कांट्रेक्टर के जरिए हायर किया गया था। जब लोगों ने देखा कि रात को चेरियन के घर की लाइट्स भी ऑन नहीं हुई, तो उन्हें शक हुआ। लेकिन फिर उन्होंने सुबह तक इंतजार करने की सोची।

मंगलवार की सुबह जब कुछ लोग वहाँ पहुँचे तो उन्होंने पाया कि उनके घर के आगे के दरवाजे को लॉक किया गया था, लेकिन पीछे का दरवाजा खुला था। जब वे पिछले दरवाजे से घर में पहुँचे तो उन्होंने देखा कि लिलिकुट्टी किचन के फर्श पर मृत पड़ी हुई हैं। इसके बाद पड़ोसियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बताया कि उनके चेहरे को कुदाल से काट डाला गया था। कुदाल का एक भाग लाश के पास ही पड़ा मिला। चेरियन भी घर के अंदर मृत मिले।

एपी चेरियन को लोहे के रॉड से मार डाला गया था। घर का आलमीरा खुला हुआ था। पुलिस बुजुर्ग दम्पति के दोनों बेटों के आने का इन्तजार कर रही है। इसके बाद यह पता लगाया जाएगा कि घर से बहुमूल्य चीजों की चोरी की गई है या नहीं। पुलिस ने मामले की जाँच के लिए एक एसआईटी बनाई है। दोनों ही आरोपित बांग्लादेशी हैं, जो पश्चिम बंगाल होकर आए थे और यहाँ अवैध रूप से रह रहे थे। उन दोनों को हायर करने वाले स्थानीय कांट्रेक्टर के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से कहा है कि विदेशी नौकरों को घर में न रखें।

मुंबई की काजल ने धर्म बदल Pak के राशिद से किया निकाह… अब 4 बीवी और 10 बच्चों के बीच कर रही ‘संघर्ष’

19 साल पहले एक पाकिस्तानी आदमी से शादी करने के लिए अपना नाम, धर्म, राष्ट्रीयता (भारतीय से पाकिस्तानी) बदलने वाली एक पूर्व भारतीय नागरिक को इन दिनों दुबई के शारजाह में अपनी पहचान को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महिला के पाकिस्तानी पहचान पत्र को रिन्यू होने में काफी समय लग रहा है। जिस कारण उसे वहाँ कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

महिला का नाम काजल राशिद खान है। उसने पाकिस्तानी प्रशासन के पास 31 जुलाई को अपना पहचान पत्र रिन्यू होने के लिए दिया था, लेकिन नवंबर आधा बीतने के बाद भी उसका पहचान पत्र उसे नहीं मिला। अमूमन इस प्रक्रिया में मात्र दस दिन लगते हैं।

काजल का पति मोहम्मद राशिद खान ने इस परेशानी के बारे में बात करते हुए मीडिया को बताया कि वो पिछले तीन महीने से NADRA (National Database and Registration Authority) को ईमेल भेज रहा है। उसने इसके लिए जरूरी दस्तावेज भी जमा करवा दिए हैं, लेकिन फिर भी मामला आगे बढ़ता नजर नहीं आ रहा।

मीडिया खबरों के मुताबिक काजल राशिद खान का बैंक खाता भी कराची में फ्रीज किया जा चुका है। उसे अपने बैंक खाते को चालू करवाने के लिए नए स्मार्ट पहचान पत्र की जरूरत है, लेकिन पाकिस्तानी प्रशासन का 3 महीने बाद भी ये कहना है कि काजल के दस्तावेज सत्यापित किए जा रहे हैं।

काजल का पति राशिद बताता है, “मुझे समझ नहीं आ रहा कि मेरी बीवी के आवेदन को क्यों अटकाया हुआ है। ये तो केवल पहचान पत्र का नवीनीकरण है। उसके पास वैध पाकिस्तानी पासपोर्ट और पाकिस्तानी नागरिकता का सर्टिफिकेट भी है।”

इसके अलावा राशिद ने बताया कि काजल के पास दुबई में मौजूद पाकिस्तान के महावाणिज्य दूतावास से मिला पत्र भी है। जो पुष्टि करता है कि उसने अपना भारतीय पासपोर्ट जमा करवा दिया है और उसे 2001 में नया पाकिस्तानी पासपोर्ट जारी हो चुका है।।

यहाँ बता दें कि 60 वर्षीय पाकिस्तान निवासी राशिद खान पेशे से आर्किटेक्ट है। उसने 1989 में दुबई आकर वहाँ के सुपरमार्केट में अपनी एक दुकान खोली थी। इसके बाद उसने 1996 में मुंबई आकर कल्पना से उसका धर्म और नाम बदलवाकर निकाह किया था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार राशिद खान की कुल 4 बीवियाँ और 10 बच्चे हैं। इनमें से एक बीवी अपनी दो लड़कियों के साथ भारत में ही रहती है। जबकि पहली पत्नी पाकिस्तान में रहती है और उससे राशिद को दो लड़के-एक लड़की है। दूसरी पत्नी भी पाकिस्तान से ही है और उसके भी राशिद को दो लड़कियाँ और एक लड़का है। इसके अलावा काजल से भी उसे एक लड़का और एक लड़की है।