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छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग का कमाल: 100 सवाल, 41 गलतियाँ, हाई कोर्ट ने रद्द की परीक्षा

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सिविल जज भर्ती परीक्षा छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रद्द कर दी है। इस परीक्षा में कई प्रश्नों पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी। प्रश्न पत्र में गलतियों की भरमरार थी। इसे देखते हुए हाई कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के निर्देश पर अब इन पदों के लिए दोबारा परीक्षा ली जाएगी। साथ ही अदालत ने परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थियों से दोबारा होने वाली परीक्षा में शामिल होने के लिए कोई शुल्क नहीं लेने का निर्देश भी आयोग को दिया।

बता दें कि राज्य के विभिन्न न्यायालयों में रिक्त सिविल जजों के पदों पर भर्ती के लिए मई 2019 को राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से परीक्षा आयोजित की गई थी। लोक सेवा आयोग ने जुलाई में इस परीक्षा का रिजल्ट भी जारी कर दिया था। मामले में जस्टिस गौतम भादुड़ी की बेंच ने सुनवाई करते हुए परीक्षा और परिणाम को रद्द करने का फैसला सुनाया।

कोर्ट ने ये फैसला परीक्षा के लिए प्रकाशित उत्तर कुंजी में शामिल 100 प्रश्नों में 41 गलतियाँ पाए जाने के बाद दिया। जस्टिस गौतम भादुड़ी की सिंगल जज बेंच ने परीक्षा परिणाम के खिलाफ 10 याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर ‌रिट पेटिशन्स की सुनवाई में कहा कि जिस प्रकार पूरी परीक्षा ली गई है, उसे जारी नहीं रखा जा सकता। 

उन्होंने कहा कि कोर्ट का मानना है कि 100 में 41 सवाल और जवाब गलत पाए गए हैं, इसका प्रतिशत निश्चित रूप से चयन प्रक्रिया के मॉड्यूल को कमजोर करेगा और न्यायालय इस पर मौन धारण नहीं कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह से पूरी परीक्षा आयोजित की गई थी उसे बरकरार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार परीक्षा में पूछे गए 100 प्रश्नों में से 30 से अधिक प्रश्न स्पष्ट रूप से गलत पाए गए। इसके अलावा कुछ प्रश्नों में वाक्यांश और वर्तनी की गलतियाँ थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रश्नपत्र के अंग्रेजी और हिंदी संस्करण में प्रश्नों और उत्तर के अनुवाद में भी अंतर था।

सुनवाई के दौरान पीएससी के तरफ से इस बात पर आपत्ति की गई कि मॉडल उत्तर कुंजी एक्सपर्ट द्वारा जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक्सपर्ट द्वारा जारी उत्तर पर न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकती।‌ न्यायालय ने पीएससी के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि यह परीक्षा विधि से संबंधित है, इसलिए इस पर हस्तक्षेप करना जरूरी है।

2 साल के लिए बंद करो JNU, बदतमीज छात्रों को जेल में डालो: सुब्रह्मण्यम स्वामी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हॉस्टल की बढ़ी हुई फीस को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय ने तीन सदस्यीय एक समिति गठित की है, जो जेएनयू की सामान्य कार्यप्रणाली बहाल करने के तरीकों पर सुझाव देगी। इधर विरोध-प्रदर्शन के कारण मेट्रो स्टेशनों को भी बंद कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस के आदेश के बाद उद्योग भवन, लोक कल्याण मार्ग, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और पटेल चौक मेट्रो स्टेशन पर सेवाओं को ठप्प कर दिया गया है।

जेएनयू में प्रबंधन और छात्रों के बीच पिछले कई दिन से जारी विवाद के समाधान के लिए सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर वीएस चौहान की अगुवाई में तीन सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है। यह समिति सभी पक्षों से बातचीत कर जेएनयू के विवाद का समाधान सुझाएगी। राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने उपद्रवी छात्रों की आलोचना करते हुए कहा कि ये सभी बदतमीज हैं और इन्हें जेल भेजने की जरूरत है। स्वामी ने कहा कि जेएनयू को 2 साल के लिए बंद कर के छात्रों को किसी अन्य यूनिवर्सिटी में भेज देना चाहिए।

सरकार की तरफ से जारी आदेश में कहा गया कि जेएनयू में कामकाज को सामान्य कैसे किया जाए। यह समिति इस संबंध में विचार-विमर्श कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। समिति के अन्य सदस्यों में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एसआईसीटीई) के अध्यक्ष प्रोफेसर अनिल सहस्रबुधे और यूजीसी के सचिव प्रोफेसर रजनीश जैन हैं।

समिति शांतिपूर्ण समाधान के लिए छात्रों और जेएनयू प्रशासन के बीच तुरंत बातचीत शुरू करेगी। मानव संसाधान विकास मंत्रालय में शिक्षा सचिव आर सुब्रमण्यम ने बताया कि उच्चाधिकार समिति जेएनयू छात्रों और प्रशासन के साथ विचार विमर्श कर सभी मसलों का शांतिपूर्वक समाधान ढूँढेगी।

इसके बावजूद छात्रों का संसद मार्च जारी है। संसद भवन की तरफ जाने की लगातार कोशिश करने के बावजूद पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद जेएनयू छात्रों ने अपना रास्ता बदल लिया है। अब वे वसंत विहार की ओर से मुड़कर संसद की तरफ जाने की कोशिश कर रहे हैं और वसंत विहार थाने तक पहुँच चुके हैं। एक तरफ छात्रों का कहना है कि वो किसी भी हालत में संसद पहुँच कर रहेंगे, वहीं पुलिस ने सभी रास्तों पर छात्रों को रोकने के पुख्ता इंतजाम किया हुआ है।

लगातार संसद जाने को लेकर पुलिस के साथ धक्का-मुक्की कर रहे जेएनयू छात्रों ने छात्रसंघ अध्यक्ष समेत कई छात्रों को हिरासत में लिए जाने के बाद एक नई माँग उठाई है। छात्रों का कहना है, “हमें पुलिस ‘मास अरेस्ट’ कर ले, लेकिन आज हम संसद तक जाकर रहेंगे।” बता दें कि अब तक तीन से ज्यादा बसों में भरकर मार्च कर रहे छात्रों को हिरासत में ले लिया गया है।

Pak में तख्तापलट के कयास, आर्मी चीफ से मिल अचानक छुट्टी पर गए इमरान खान

पाकिस्तान में मौजूदा समय में सियासत का पारा चरम पर है और इमरान सरकार के लिए खतरा बढ़ता ही जा रहा है। पहले विपक्षी दलों के प्रहार ने इमरान सरकार को हिला कर रख दिया तो वहीं अब सहयोगी दलों ने भी आँख दिखानी शुरू कर दी है। लिहाजा पाकिस्तान के राजनैतिक गलियारों में इमरान सरकार पर छाए अनिश्चितता के बादल चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।

इस बीच खबर आ रही है कि सेना प्रमुख जावेद बाजवा के से मुलाकात के बाद इमरान खान दो दिन की छुट्टी पर चले गए हैं। इसके बाद इस चर्चा ने और जोर पकड़ लिया है कि इमरान खान की कुर्सी खतरे में है। पाकिस्तान के राजनीतिक विशलेषकों का कहना है कि इमरान खान ने एक साल के कार्यकाल में एक दिन के लिए भी छुट्टी नहीं ली, लेकिन अचानक सेना प्रमुख से मुलाकात के बाद अपने सभी सरकारी कामकाज को रोककर दो दिन की छुट्टी पर चले जाना इस ओर संकेत कर रहे हैं कि सब कुछ ठीक नहीं है।

जानकारी के मुताबिक इमरान ने सत्ता संभालने के बाद बीते एक साल से ज्यादा समय में एक भी छुट्टी नहीं ली है। उन्हें जानने वाले बताते हैं कि वो जितनी देर जागते रहते हैं, आधिकारिक कामकाज में ही लगे रहते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि उनकी किसी छुट्टी की कोई पूर्व योजना भी नहीं थी।

पाकिस्तानी पीएम का इस तरह से अचानक छुट्टी पर चले जाना सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की, तो वहीं उनके कुछ राजनैतिक विरोधियों ने लिखा, “मिस्टर प्राइममिनिस्टर, इन्हीं दो दिनों में यह प्लान बना लीजिएगा कि अब आपको जो लंबी छुट्टी मिलने वाली है, वह आप कहाँ बिताएँगे।”

गौरतलब है कि इमरान सरकार के खिलाफ विपक्ष ने देशभर में हल्लाबोल रखा है। JUI-F ने इमरान खान के इस्तीफे को लेकर लगातार आंदोलन छेड़ रखा है। इसके साथ ही सैन्य प्रमुख और इमरान की मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि दोनों के बीच लंबे अर्से तक कोई मुलाकात नहीं हुई थी। सरकार में भागीदार मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता ख्वाजा इजाहरुल हसन ने कहा है कि यदि अर्थव्यवस्था की स्थिति नहीं सुधरी तो शायद ही इमरान सरकार अगले बजट तक चल पाएगी।

पीएम मोदी ने थपथपाई NCP और BJD की पीठ, कहा- इनसे सीखें सभी पार्टियाँ

राज्यसभा के 250वें सत्र को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों को बधाई दी। संसद सत्र के पहले दिन अपने सम्बोधन की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 250वें सत्र तक की यात्रा में सभी सांसद बधाई के अधिकारी हैं। उन्होंने अब तक के सभी सांसदों का स्मरण किया और उनके योगदान की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि भले ही समय व परिस्थितियाँ बदलती चली गईं लेकिन राज्यसभा ने बदलाव को आत्मसात करते हुए लगातार काम किया। उन्होंने कहा कि लोकसभा ज़मीन तक जुड़ा है और राज्यसभा दूरदर्शी है।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शरद पवार की पार्टी एनसीपी और नवीन पटनायक के बीजद की प्रशंसा की। पीएम मोदी ने दोनों पार्टियों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि इन दोनों दलों ने कभी वेल में जाकर हंगामा नहीं किया और इनकी राजनीति ख़त्म भी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सभी दलों को एनसीपी और बीजेडी से सीख लेनी चाहिए।प्रधानमंत्री ने कहा कि हंगामा न करने के बावजूद दोनों ही पार्टियाँ अपने-अपने मुद्दों को सही तरीके से सदन में रखती हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ही दल संसद के नियमों का पूरी तरह पालन करते हैं।

प्रधानमंत्री ने राज्यसभा की ख़ासियत बताते हुए कहा कि यहाँ खेल, कला और विज्ञान से जुडी ऐसी-ऐसी हस्तियाँ पहुँची हैं, जिनका चुनाव लड़ कर सीधे जनता द्वारा चुन कर आना शायद संभव नहीं हो पाता। बकौल पीएम मोदी, राज्यसभा के दो पहलू हैं- पहला स्थायित्व और दूसरी विविधता। स्थायी इसीलिए क्योंकि ये लोकसभा की तरह भंग नहीं होती। विविध इसीलिए क्योंकि यहाँ राज्यों के प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दी गई है। राज्यों के कल्याण की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य और केंद्र मिल कर देश को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों को प्रतिद्वंद्विता नहीं करनी चाहिए, साथ मिल कर विकास कार्यों को जनता तक पहुँचाना चाहिए।

राज्यसभा की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 5 साल का समय देखें तो यही सदन है जिसने तीन तलाक का बिल पास करके महिला सशक्तिकरण का बहुत बड़ा काम किया। उन्होंने आगे कहा कि इसी सदन ने सामान्य वर्ग के ग़रीबों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया। पीएम मोदी ने कहा कि इन सबके बावजूद कहीं भी विरोधाभाव की स्थिति पैदा नहीं हुई और परस्पर सहयोग का भाव बना रहा।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि इसी सदन ने जीएसटी के रूप में वन नेशन-वन टैक्स की ओर सहमति बनाकर देश को दिशा देने का काम किया है। उन्होंने बताया कि देश की एकता और अखंडता के लिए अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने की शुरुआत पहले इसी सदन में हुई। बता दें कि इन प्रस्तावों को राज्यसभा के बाद लोकसभा में पास किया गया था।

आगरा का नाम होगा अग्रवन! योगी सरकार कर रही है विचार, साक्ष्य जुटाने को खँगाला जा रहा इतिहास

उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद को प्रयागराज और मुगलसराय स्टेशन को दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन का नाम देने के बाद अब योगी सरकार आगरा का नाम बदलने पर भी विचार कर रही है। कहा जा रहा है कि आगरा का नाम जल्द ही अग्रवन हो सकता है। इसके लिए सरकार ने आम्बेडकर विश्वविद्यालय के इतिहासकारों और विशेषज्ञों की राय जानने के लिए उनसे संपर्क किया है।

जानकारी के मुताबिक आगरा स्थित आम्बेडकर विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर सरकार ने आगरा नाम के ऐतिहासिक पहलू पर पता लगाने के लिए कहा है। अब विश्वविद्यालय का इतिहास विभाग इस प्रस्ताव पर आगे काम कर रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जा रहा है कि सरकार आगरा का नाम अग्रवन कर सकती है, क्योंकि पहले ये जगह इसी नाम से जानी जाती थी। इतिहासकारों और विशेषज्ञों को उन हालातों और समय के बारे में पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है जब अग्रवन का नाम बदलकर आगरा कर दिया गया।

खुद बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ अरविंद कुमार दीक्षित ने इस पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें शासन की ओर से आगरा के नाम को अग्रवन करने के संबंध में पत्र मिला है। पत्र में उससे जुड़े ऐतिहासिक साक्ष्य के बारे में पूछा गया है। अब उनके विश्वविद्यालय की ओर से इस मामले में इतिहास से जुड़े साक्ष्य और शोध के लिए प्रो. सुगम आनंद को नामित किया गया है। अब वह इस संबंध में साक्ष्य एकत्रित करने के बाद रिपोर्ट देंगे।

हिंदुस्तान में प्रकाशित खबर के अनुसार विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग प्रमुख प्रो. सुगम आनंद ने बताया है कि, शासन द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर काम शुरू हो चुका है। प्रमाण खोजे जा रहे हैं कि इसके संबंध में कोई तथ्य या साक्ष्य उपलब्ध हो जाए। इसके साथ ही शोध किया जा रहा है ताकि इस संबंध में इतिहास को समझा जा सके। उनके मुताबिक इतिहास में जहाँ पर कहीं भी अग्रवन का जिक्र है तो उसे भी सत्यापित किया जा रहा है। क्योंकि आगरा के नामों को लेकर विभिन्न मत हैैं। लेकिन वे लिखित प्रमाण या फिर अभिलेख पर शोध कर रहे हैं।

अग्रवन का कहाँ-कहाँ जिक्र

बता दें इस नाम पर विचार करने हेतु विश्वविद्यालय में बैठक भी आयोजित हुई है। जहाँ विद्वानों ने कहा कि आगरा गजेटियर में अग्रवन का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा दयालबाद एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में कल्चरल स्टडी ऑफ आगरा रीजन शोध में आगरा के अग्रवन नाम का जिक्र है। वहीं, आगरा पर हुए एक दूसरे शोघ में टॉमली ज्योग्राफी और आगरा गजेटियर का जिक्र करते हुए आगरा का नाम अग्रवन के रूप में लिखा गया है। जिसमें आगरा को ब्रज के वनों में शामिल अग्रवन का क्षेत्र कहा गया है। महाराजा अग्रसेन की जीवनी पर शोध करने वाले ओमप्रकाश मित्तल के अनुसार भी महाभारत काल में आगरा का नाम अग्रवन था। राजा बल्लभ ने अपने परिवार में अग्रसेन के जन्म की खुशी में इसी अग्रवन के एक हिस्से में अग्रपुर की स्थापना की थी।

वित्तीय अनियमितताओं में फँसा NDTV कंगाल होने के कगार पर, संपत्ति से 89 करोड़ ज्यादा कर्ज़

स्टॉक एक्सचेंज में एनडीटीवी की त्रैमासिक फाइलिंग की ऑडिटर्स रिव्यू में कुछ अहम खुलासे हुए हैं। पता चला है कि मीडिया संस्थान घाटे में जा रहा है। एनडीटीवी का क़र्ज़ काफ़ी बढ़ गया है और मीडिया संस्थान की मौजूदा संपत्ति से 88.92 करोड़ रुपए ज्यादा हो गया है। एनडीटीवी का वित्तीय परफॉरमेंस लगातार गिर रहा है और ये निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ईडी और इनकम टैक्स की कार्रवाइयों के कारण कम्पनी की साख पहले से ही गिरी हुई है।

एनडीटीवी के ऑडिट रिपोर्ट में जताई गई चिंता

आप ऊपर संलग्न किए गए ऑडिट रिपोर्ट में प्वाइंट नंबर सात में देख सकते हैं कि ऑडिटरों ने एनडीटीवी के लाभ और हानि वाले हिस्से की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया है। सितम्बर 2019 तक ख़त्म हो रहे त्रैमासिक समयावधि में एनडीटीवी को 10.17 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। सबसे बड़ी चिंता की बात तो ये है कि जितनी एनडीटीवी की संपत्ति है, उससे लगभग 89 करोड़ ज्यादा तो क़र्ज़ (देनदारी) हो गया है।

कभी-कभी किसी कम्पनी के फाइनेंसियल रिपोर्ट में कुछ ग़लत जानकारियाँ चली जाती हैं, इसे मटेरियल स्टेटमेंट कहते हैं। एनडीटीवी ने ऑडिट रिपोर्ट से पहले ये समीक्षा की है ताकि ‘मटेरियल स्टेटमेंट’ वाली गड़बड़ियों से बचा जा सके। वो इस बात को सुनिश्चित करना चाहते थे कि वित्तीय रिपोर्ट में सभी जानकारियाँ सही हैं। ऑडिटरों ने आशंका व्यक्त की है कि एनडीटीवी की पैरेंट कम्पनी शायद इसे चलाने में सक्षम नहीं हो पा रही है। हालाँकि, ऑडिटरों ने माना कि अनिश्चितता से निकलने के लिए पैरेंट कम्पनी ने कुछ रणनीतिक और ऑपरेशनल तरीके अपनाए हैं।

‘गोइंग कंसर्न’ का अर्थ होता है कि कम्पनी अभी पूरी तरह कंगाल नहीं हुई है और इसे चलाने के लिए संसाधन और वित्त मौजूद हैं। इस रिपोर्ट में ‘गोइंग कंसर्न’ की बात की गई है। जब कोई कम्पनी इस केटेगरी में नहीं रहती है, तब उसे कंगाल घोषित कर दिया जाता है। वित्तीय अनियमितताओं के कारण जाँच का सामना कर रही एनडीटीवी के लिए ऑडिटर्स रिव्यू चिंता का विषय है। जानकारियाँ उपलब्ध न कराने, एफडीआई के नियमों में उल्लंघन करने और इनकम टैक्स मामलों में एनडीटीवी के ख़िलाफ़ कई मामले चल रहे हैं। आईसीआईसीआई बैंक से 375 करोड़ रुपए लोन लेने के मामले में भी कम्पनी के ख़िलाफ़ सीबीआई जाँच चल रही है।

जून 2017 में प्रणय रॉय, उनकी पत्नी राधिका रॉय और उनके स्वामित्व वाली आरआरपीआर होल्डिंग कम्पनी के ख़िलाफ़ एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है। एनडीटीवी और आईसीआईसीआई के शेयरधारक क्यूएसएल ने दोनों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई है। अगस्त 2019 में ‘Securities Appellate Tribunal (SAT)’ ने सेबी द्वारा एनडीटीवी पर लगाए गए 2.1 करोड़ रुपए के जुर्माने को सही ठहराया था।

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ओवैसी ही बाबर है, अयोध्या पर देश में तनाव पैदा करना चाहता है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड: यासिर जिलानी

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने अयोध्या मसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के रवैए की आलोचना की है। मंच के प्रवक्ता यासिर जिलानी ने कहा है कि बोर्ड देश में तनाव पैदा करना चाहता है। उल्लेखनीय है कि एआईएमपीएलबी ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की बात कही थी। साथ ही मस्जिद के लिए पॉंच एकड़ जमीन लेने से भी इनकार कर दिया था।

इसकी आलोचना करते हुए राष्ट्रीय मुस्लिम मंच (RMM) के प्रवक्ता जिलानी ने कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भ्रम की स्थिति में है, उसका रवैया स्पष्ट नहीं है। जिलानी का कहना है कि वे अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद टाइटल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर समीक्षा याचिका दायर करके देश में तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।

जिलानी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लोग देश में उन्माद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। वे उन मुस्लिम भाइयों को उकसाने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपनी शांति और भाईचारे का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों ने AIMPLB को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया है कि जब वे खुद यह कह रहे हैं कि उनकी याचिका को खारिज कर दिया जाएगा तो फिर वो इसे दाखिल क्यों कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि मैं सुरक्षा एजेंसियों से अपील करता हूॅं कि वह बोर्ड की गतिविधियों पर नजर रखें। पुनर्विचार याचिका के माध्यम से वे ड्रामा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।

बता दें कि जमीयत उलेमा ए हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा था कि उन्हें ख़ूब मालूम है कि उनकी समीक्षा याचिका शत-प्रतिशत खारिज ही की जानी है, फिर भी वो सुप्रीम कोर्ट जाएँगे और इसे दाखिल करेंगे। मदनी ने कहा कि ये उनका अधिकार है, उनकी लड़ाई है।

RMM प्रवक्ता जिलानी ने AIMIM प्रमुख और असदुद्दीन ओवैसी के बयान की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि ओवैसी को बताना चाहिए कि वे किसके लिए मस्जिद चाहते हैं। मजहब का कौन सा समुदाय उनके साथ खड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने एक ट्वीट करते हुए लिखा था, “मुझे मेरी मस्जिद वापस चाहिए- ओवैसी। ओहो अब पता चला ये ओवैसी ही बाबर है….वाह रे खुदा…..आप सभी की असलियत सामने ला ही देते हैं।”

दिल्ली पहुँच पवार का यू टर्न: हमारे खिलाफ लड़ी शिवसेना, उसके साथ सरकार कैसे बना लें

महाराष्ट्र में एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ सरकार बनाने की शिवसेना की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है। सोनिया गॉंधी के साथ बैठक से पहले शरद पवार ने कहा है कि शिवसेना को भाजपा के साथ अपना रास्ता
तय करना है।

उन्होंने कहा, “बीजेपी-शिवसेना ने हमारे खिलाफ चुनाव लड़ा था। फिर कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना का गठबंधन कैसे हो सकता है। हमने कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, इसलिए आज बैठक करने जा रहे हैं। शिवसेना और भाजपा अलग हैं। हम और कॉन्ग्रेस अलग हैं। उनको उनका रास्ता तय करना है और हम अपनी राजनीति कर रहे हैं।”

जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि शिवसेना तो कह रही है कि पवार साहब के साथ मिलकर सरकार बना रहे हैं, तो शरद पवार ने सिर्फ ‘अच्छा’ कह आगे बढ़ गए। पवार के इस बयान ने महाराष्ट्र में सरकार गठन पर सस्पेंस और बढ़ा दिया है। इससे पहले खबर आ रही थी कि शिवसेना को समर्थन देने पर कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी असमंजस में हैं।

कॉन्ग्रेस और एनसीपी के नेताओं की ओर से बताया गया था कि सोमवार को शाम 4 बजे पवार और सोनिया गॉंधी की बैठक में सरकार बनाने को लेकर आखिरी फैसला होगा। कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा था कि इस बैठक के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि कॉन्ग्रेस शिवसेना के साथ सरकार गठन के लिए आगे बढ़ेगी या नहीं। इससे पहले रविवार को एनसीपी की एक बैठक हुई थी। इस बैठक के बाद पार्टी प्रवक्ता नवाब मलिक ने बताया कि एनसीपी चाहती है कि राज्य में जल्द से जल्द राष्ट्रपति शासन खत्म हो। लेकिन, सरकार गठन को लेकर आखिरी फैसला सोनिया गॉंधी और शरद पवार के बीच होने वाली बैठक के बाद ही होगा।

राज्य की राजनीतिक तस्वीर बदलने के कयास भाजपा की सहयोगी पार्टी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया (RPI) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के एक बयान से भी लगने शुरू हो गए थे। अठावले ने रविवार को कहा था, “मैंने अमित भाई (भाजपा अध्यक्ष अमित शाह) से कहा कि अगर वह मध्यस्थता करते हैं तो एक रास्ता निकाला जा सकता है, जिस पर उन्होंने (अमित शाह) जवाब दिया कि चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा। भाजपा और शिवसेना मिलकर सरकार बनाएँगे।” इससे पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी संकेतों में इशारा किया था कि भाजपा अब भी राज्य में सरकार बना सकती है। महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने भी कहा था कि पार्टी के पास 119 विधायकों का समर्थन है।

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सावरकर के बाद उद्धव ठाकरे ने रामलला से भी तोड़ा नाता, अब नहीं जाएँगे अयोध्या

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री की कुर्सी भले अब तक शिवसेना को नहीं मिल पाई है। लेकिन, इसके लिए हिन्दुत्व से उसकी दूरी बढ़ती जा रही है। पहले खबर आई थी कि कॉन्ग्रेस और शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए शिवसेना वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मॉंग से पीछे हट गई है। अब खबर यह है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अयोध्या नहीं जाएँगे। वे 24 नवंबर को अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन करने वाले थे।

मीडिया रिपोर्टों में दौरा रद्द करने की अलग-अलग वजहें बताई गई है। एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सुरक्षा कारणों से उद्धव ने दौरा रद्द किया है। रिपब्लिक टीवी के अनुसार महाराष्ट्र की राजनीतिक हालत को देखते हुए शिवसेना सुप्रीमो ने अयोध्या नहीं जाने का फैसला किया है। साथ ही किसानों की स्थिति को भी इसका कारण बताया गया है। दैनिक जागरण के अनुसार सरकार गठन को लेकर स्थिति साफ नहीं होने के कारण ऐसा किया गया है। साथ ही कहा गया है कि राम जन्मभूमि परिसर सुरक्षा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील होने के कारण, सुरक्षा एजेंसियों ने वहॉं किसी भी राजनीतिक दल के नेता को जाने से मना किया है।

बता दें कि 9 नवंबर को राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उद्धव ठाकरे ने उसका जोरदार स्वागत किया था। उसी समय उन्होंने 24 नवंबर को अयोध्या जाने का ऐलान किया था। पिछले साल उन्होंने राम मंदिर के लिए ‘चलो अयोध्या’ आंदोलन की शुरुआत की थी। नारा दिया था- ‘पहले मंदिर फिर सरकार’।

भाजपा से गठबंधन तोड़ने के बाद शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ समीकरण बनाकर सरकार गठन करने के लिए प्रयासरत है। लेकिन सोनिया गाँधी की ओर से स्थिति साफ़ होने के कारण असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आज कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बीच होने वाली बैठक से तस्वीर साफ़ होने की उम्मीद है। वहीं, शिवसेना नेता संजय राउत शनिवार को दावा कर चुके हैं कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ही होंगे।

ध्यान देने वाली बात है कि शिवसेना इस समय राज्य में सरकार बनाने के लिए इतनी लालायित है कि उसने अपनी मूल विचारधारा से समझौता करने की बात पर भी हाँ भर दी है। खबरों के अनुसार, तीनों पार्टियों के बीच संयुक्त बैठक के बाद तैयार हुए न्यूनतम साझा कार्यक्रम में शिवसेना अपना कट्टर हिंदुत्व का चेहरा छोड़कर न केवल मुस्लिमों को 5 प्रतिशत आरक्षण देने वाली शर्त पर तैयार हुई है, बल्कि कहा जा रहा है कि वे इस गठबंधन के बाद वीर सावरकर का नाम लेने से भी बचेगी।

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शादी समारोह में कॉन्ग्रेस MLA तनवीर सैत पर फरहान ने किया चाकू से हमला

कर्नाटक के मैसूरु में रविवार (नवंबर 17, 2019) कॉन्ग्रेस विधायक तनवरी सैत पर एक युवक ने चाकू से हमला कर दिया। 20 साल के हमलावर फरहान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हमला किन वजहों से किया गया यह स्पष्ट नहीं है।

हमले में कॉन्ग्रेस विधायक बुरी तरह से घायल हो गए। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। चोट गहरी होने के कारण उनकी हालत गंभीर है। घटना रविवार रात 11:45 बजे की बताई जा रही है।

एएनआई ने इस घटना की जानकारी देते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। इसमें देखा जा सकता है कि कुछ लोग आरोपित युवक को पकड़कर ले जा रहे हैं और घटनास्थल पर काफी हो हल्ला हो रहा है।

पुलिस कमिश्नर केटी बालाकृष्ण बताया कि हमले में विधायक के गर्दन और कंधे पर गंभीर चोटें आई हैं। जिसके कारण उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस के अनुसार, हमलावर की पहचान फरहान के रूप में हुई है। जिसकी उम्र करीब 20 साल की है और उदयगिरि का रहने वाला है।

बता दें, हमले की वजह फिलहाल पता नहीं चल पाई है, लेकिन पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। जानकारी के अनुसार मैसूर पुलिस के कमिश्ननर ने नरसिम्हाराजा से विधायक तनवीर सैत से मुलाकात की है और जरूरी पूछताछ करके मामले को दर्ज कर लिया है। इसके बाद उनसे मिलने वाले लोगों का सिलसिला अभी जारी है।