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JNU में महिला प्रोफेसर के कपड़े फाड़ने की कोशिश, विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस से भिड़े छात्र

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र महिला अधिकारों और महिलाओं की सुरक्षा के लिए झंडा उठाए चल रहे हैं। जेएनयू की छात्राएँ भी ख़ुद को समाज के लिए चिंतित दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़तीं। ऐसे में यूनिवर्सिटी कैम्पस से ही महिलाओं को अपमानित किए जाने की ख़बर आए तो आपका रिएक्शन क्या होगा? यह भी बताना आवश्यक है कि यह काम जेएनयू उन्हीं छात्राओं का है जो दुनिया के सामने खुद को महिलाओं के सम्मान का झंडाबरदार बताती हैं। जेएनयू में चल रहे विरोध-प्रदर्शन के बीच आए इस शर्मनाक वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर उक्त छात्रों की थू-थू हो रही है।

राष्ट्रीय अल्पसंख़्यक आयोग के सदस्य आतिफ रशीद ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया, जो जेएनयू में चल रहे हालिया विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा है। इस वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि छात्राएँ एक महिला प्रोफेसर के साथ बदसलूकी कर रही हैं। आतिफ रशीद ने इस ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा:

जेएनयू में एक महिला प्रोफेसर के साथ इतनी बदसलूकी? यह कोई छात्र आन्दोलन नहीं हो सकता। ताज्जुब नहीं होगा यदि यह कपड़े फाड़ने का प्रयास करने वाली वामपंथी विचारधारा की समर्थक छात्रा, कल महिला अधिकारों पर भाषणबाजी करते हुए दिखे। शर्मनाक!

जेएनयू के कई छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्र-विरोधी नीतियाँ बनाने का आरोप लगा कर विरोध-प्रदर्शन में लगे हुए हैं। सोमवार (नवंबर 11, 2019) को दीक्षांत समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया और समारोह को सम्बोधित किया। इसके बावजूद छात्र लगातार प्रदर्शन और नारेबाजी करते रहे। ये छात्र ड्राफ्ट हॉस्टल मैन्युअल के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसे इंटर-हॉल प्रशासन द्वारा लाया गया है। छात्रों के आरोप है कि इस मैन्युअल के लागू होने के बाद फी बढ़ जाएगी, ड्रेस कोड लागू हो जाएगा और छात्रों के लिए कर्फ्यू जैसा माहौल होगा।

आज छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का भी प्रयोग किया। पुलिस और छात्रों के बीच झड़प भी हुई। इससे पहले जेएनयू के एक डीन की नारेबाजी की वजह से तबीयत ख़राब हो गई थी। छात्रों ने उन्हें घेर कर प्रदर्शन किया था। जिस एम्बुलेंस से उन्हें लेकर हॉस्पिटल ले जाया जा रहा था, छात्रों ने उसे घेर कर प्रदर्शन किया था। पिछले साल भी जेएनयू के छात्रों ने दीक्षांत समारोह का बहिष्कार करने की घोषणा की थी।

यूपी में साधु वेशधारी युवक की हत्या, आँखें फोड़ खेत में फेंकी लाश

यूपी के बांदा जिले में हत्या का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ के एक दुर्गा मंदिर में में रह रहे साधु वेशधारी युवक का शव मन्दिर से चंद कदम दूर खेत में मिला। इस घटना से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने पुलिस को घटना की जानकारी दी।

घटना बबेरू कोतवाली क्षेत्र के बुढ़ौली गाँव की है। गाँव में मंदिर में रहने वाले साधु वेशधारी 40 वर्षीय युवक कृष्ण कुमार उर्फ लाला की हत्या करने के बाद शव को मंदिर से कुछ ही दूर के एक खेत में फेंक दिया गया। रविवार को सुबह कुछ लोग खेतों की तरफ गए तो मंदिर से करीब पाँच सौ मीटर दूर कृष्ण कुमार उर्फ लाला का रक्तरंजित शव धान के खेत में पड़ा देखा। इसकी सूचना पुलिस को दी गई।

सूचना मिलते ही संबंधित थाने की पुलिस मौके पर पहुँची और छानबीन में जुट गई। बेबरू के एसएचओ शशि कुमार पांडेय ने छानबीन के बाद बताया कि उसके हाथ-पैर एक साफी से पीछे की तरफ बँधे थे और दोनों आँखें फूटी हुई थीं। इसके अलावा गर्दन और जिस्म के अन्य हिस्सों में भी चोट के निशान थे।

बबेरू थाना के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) कुलदीप सिंह ने सोमवार (नवंबर 11, 2019) को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि कृष्ण कुमार की मौत गले में फंदा कसने से हुई है। कुलदीप सिंह ने बताया कि मृतक मुरवल गाँव का रहने वाला था और पिछले कुछ समय से बुढ़ौली गाँव के दुर्गा मंदिर में अन्य साधुओं के साथ रह रहा था।

ग्रामीणों का कहना है कि घटना वाली रात कृष्ण कुमार ने कुछ लोगों के साथ कृष्ण कुमार ने खाया-पीया भी था। पूछताछ के पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में ले लिया है। शशि कुमार ने कहा कि मृतक के दो भाई नोएडा में रहते हैं। उनके आने का इंतजार है। उन्हीं की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज होगी। सीओ ने यह भी बताया कि मृतक युवक आपराधिक प्रवृत्ति का था और बबेरू कोतवाली में उस पर पॉंच मुकदमे दर्ज हैं।

उद्धव और पावर की बैठक ख़त्म होते ही संजय राउत की तबीयत बिगड़ी, हॉस्पिटल में भर्ती

महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए चल रही सरगर्मियों के बीच शिवसेना नेता संजय राउत की तबीयत बिगड़ जाने के कारण उन्हें मुंबई के लीलावती असपताल में भर्ती किया गया है। संजय राउत राज्य में चुनाव नतीजों के आने के बाद से लगातार सुर्ख़ियों में हैं। उनके बयानों को ठाकरे परिवार का ही शब्द माना जाता है। सोमवार (नवंबर 11, 2019) को शाम 5 बजे शिवसेना की बैठक भी होने वाली है, ऐसे में पार्टी मुखपत्र सामना के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत की तबीयत अचानक से ख़राब हो जाना पार्टी के लिए चिंता का विषय हो सकता है। राउत को किन कारणों से हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

संजय राउत के भाई सुनील राउत ने कहा है कि ये बस रूटीन चेकअप है। हालाँकि, उन्होंने यह भी बताया कि वो आज लीलावती हॉस्पिटल में ही भर्ती रहेंगे। ख़बरों के अनुसार, राज्यसभा सांसद संजय राउत को मंगलवार को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज किया जाएगा। कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि उन्हें पैर में जोर का दर्द के कारण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है और वो अगले 3 दिनों तक भर्ती रहेंगे। कुछ ख़बरों में उनके सीने में दर्द की शिकायत की बात कही गई है।

मोदी सरकार में शिवसेना के इकलौते मंत्री अरविन्द सावंत ने सुबह इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी अब राजग का साथ छोड़ कर कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार बना सकती है। एनसीपी ने कहा है कि कॉन्ग्रेस से विचार करने के बाद ही आगे का फ़ैसला लिया जाएगा, जबकि कॉन्ग्रेस के विधायकों ने शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने की इच्छा पार्टी आलाकमान तक पहुँचा दी है। अरविन्द सावंत ने कहा है कि आदित्य ठाकरे एक बहुत अच्छे नेता हैं, क्योंकि वो यूट्यूब पर अच्छा बोलते हैं।

कॉन्ग्रेस के सभी विधायक जयपुर में एक रिसॉर्ट में रुके हुए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेतागण वहीं पर नव-निर्वाचित विधायकों के साथ लगातार मंत्रणा कर रहे हैं। अभी उद्धव ठाकरे कॉन्ग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद वो आगे की रणनीति तैयार करेंगे। राज्यपाल द्वारा शिवसेना को सरकार गठन के लिए दी गई समयसीमा आज शाम को ख़त्म हो जाएगी। इसीलिए, उद्धव ने आज ख़ुद शरद पवार से मुलाक़ात की।

कहा जा रहा है कि जब प्रणव मुखर्जी राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में मातोश्री गए थे, तब उनके साथ शरद पवार ही थे। इसीलिए, पुराने सम्बन्ध होने के कारण पवार और ठाकरे के बीच समझौते में दिक्कत आने की सम्भावना कम ही है।

ताज़ा घटनाक्रम को देख कर लगता है कि अब शिवसेना और एनसीपी, दोनों ही दलों की निगाहें कॉन्ग्रेस की तरफ ही हैं। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा है कि किसानों की दुर्दशा को देखते हुए जनता को वैकल्पिक व्यवस्था देने का काम किया जाएगा। उन्होंने भी कहा कि उन्हें कॉन्ग्रेस की प्रतिक्रिया का इन्तजार है। शिवसेना समर्थकों ने कई पोस्टर चिपका कर उद्धव को अगला सीएम बनाने की माँग की है। बता दें कि पहले ऐसे ही पोस्टर आदित्य को लेकर लगे हुए थे।

अयोध्या पर फैसला सुनाने के बाद जजों संग गुवाहाटी पहुँचे CJI गोगोई, कहा- आपकी शुभकामनाएँ चाहिए

9 नवंबर को अयोध्या मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाने के बाद मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायधीशों से साथ गुवाहाटी पहुँचे। यहाँ वह ‘कोर्ट्स ऑफ इंडिया’ के लोकार्पण के दौरान उपस्थित रहे। वहॉं लोगों को संबोधित करते हुए वे भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, “यह शायद मेरा आखिरी सार्वजनिक समारोह है। मैं किसी भी विवादास्पद मुद्दे पर नहीं जाना चाहता, यह अवसर भी नहीं है। मैं जीवन के दूसरे चरण में आपकी शुभकामनाएँ चाहता हूँ।”

हालाँकि इस दौरान भले ही सीजेआई अपने सुनाए फैसले पर कुछ भी कहने से बचे , लेकिन अन्य न्यायधीशों ने उनकी खुलकर तारीफ की। सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश जस्टिस ह्रषिकेश रॉय ने कहा, “सीजेआई रंजन गोगोई ने मिशन असंभव को संभव बना दिया हैं। उनके नेतृत्व में ये हुआ। जिसकी झलक अयोध्या विवाद पर फैसले में पूरी तरह दिखी। आज भारत माता CJI गोगोई को आशीर्वाद दे रही होंगी।”

इसके बाद जस्टिस रवीन्द्र भट ने मंच सँभालते हुए अयोध्या फैसले पर अपनी राय दी। उन्होंने कहा, “शनिवार को भारतीय अदालत ने एक इतिहास देखा, जब अदालत ने एक आवाज में फैसला सुनाया। जहाँ हमने किसी एक न्यायाधीश की आवाज नहीं सुनी, बल्कि सभी ने एक आवाज में फैसला दिया।”

समारोह में मौजूद असम मुख्यमंत्री सर्बानंनद सोनोवाल ने भी इस दौरान सीजेआई की प्रशंसा की और उन्हें असमवासियों के गर्व का कारण बताया। उन्होंने कहा कि यह एक महान दिन है। सीजेआई पर हर असमवासी को गर्व होता है। ऐतिहासिक निर्णय देने के कारण अब हर कोई जस्टिस गोगोई से खुश हैं और असम के लोग बहुत गर्व कर रहे हैं। गौरतलब है सीजेआई रंजन गोगोई आगामी 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इसके बाद वह अपने गुवाहाटी स्थित आवास में ही रहेंगे।

सभी जजों को लंच पर लेकर गए सीजेआई

अयोध्या मामले पर फैसला सुनाने के बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पीठ के अन्य न्यायधीशों को रात में डिनर के लिए लेकर गए। जिनमें न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एसए नजीर, न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़़ शामिल थे। खबरों के मुताबिक सीजेआई ने डिनर की घोषणा फैसला सुनाने के तुरंत बाद कर दी थी। जिसके बाद वह सभी जजों को ताज मानसिंह होटल ले गए।

पाँचों जजों की एहतियातन बढ़ाई गई सुरक्षा

ऐतिहासिक फैसला सुनाने के बाद संवैधानिक पीठ में मौजूद पाँचों जजों की सुरक्षा को बढ़ाने का भी ऐलान कर दिया गया है। हालाँकि जजों की सुरक्षा जिम्मा संभाल रहे अधिकारियों का कहना है कि गंभीर खतरे की कोई सूचना नहीं है, लेकिन एहतियातन ये कदम उठाया गया है। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि पाँचों न्यायधीशों के आवास पर सुरक्षा ड्रिल के तहत अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक अधिकारी ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा को सिर्फ इसलिए बढ़ाया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से निपटा जा सके। एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। जजों को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है।

अयोध्या पर फैसले के बाद उत्तराखंड के CM को धमकी भरा कॉल, कहा- उड़ा दूॅंगा ‘हर की पौड़ी घाट’

हरिद्वार में ‘हर की पौड़ी घाट’ को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले एक शख़्स को उत्तराखंड पुलिस ने सोमवार (11 नवंबर) को गिरफ़्तार कर लिया है। आरोपित को उसी जगह से गिरफ़्तार किया गया था, जहाँ से उसने धमकी दी थी। फ़िलहाल, उससे पूछताछ की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक़, 9 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट द्वारा रामजन्मभूमि का फैसला सुनाए जाने के कुछ ही घंटों बाद दोपहर लगभग 3:30 बजे, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को उनके मोबाइल फोन पर एक गुमनाम कॉल आया, जिसमें हर की पौड़ी घाट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी।

यह कॉल सीएम के प्रोटोकॉल अधिकारी आनंद सिंह रावत के पास आई थी। इस धमकी भरे कॉल के बाद, इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बस स्टॉप और रेलवे स्टेशनों के आसपास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

बता दें कि हरिद्वार में हरि कि पौड़ी नाम का एक घाट है, जिसमें रोजाना लाखों की संख्या में श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। इस धमकी भरी कॉल के बाद प्रशासन ने घाट में सुरक्षा-व्यवस्था बढ़ा दी है और आने-जाने वालों पर लगातार कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इस समय उत्तराखंड में राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कई जगहों पर कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं ऐसे में धमकी भरी कॉल से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

दलित हैं पटना हनुमान मंदिर के पुजारी, भूल गए अयोध्या राम मंदिर में जाति घुसेड़ने वाले RJD नेता

रविवार (नवंबर10, 2019) को कई लोगों ने सोशल मीडिया पर ‘राममंदिरकापुजारीकौन’ को ट्रेंड करवाने की कोशिश की। दरअसल इसके पीछे उनकी मंशा ये दिखाने की थी कि अयोध्या में राम मंदिर एक ‘ब्राह्मणवादी परियोजना’ है।

इसमें द प्रिंट के पत्रकार दिलीप मंडल भी शामिल थे। कुछ दिन पहले ब्लू टिक हासिल करने के लिए उन्होंने ट्विटर पर भी जातिवादी होने का आरोप लगाया था।

हिंदुओं के किसी भी चीज को ‘जाति’ के रूप में बाँटकर दिखाना इन वामपंथियों की आदत बन गई है। दरअसल वामपंथी, ‘ब्राह्मणवादी ताकतों के खिलाफ लड़ाई’ की आड़ में हिंदुत्व को छलनी करके जाति विभाजन को बढ़ावा देना अधिक पसंद करते हैं।

संजय यादव जैसे राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता भी इससे अछूते नहीं। इन्होंने भी इसमें योगदान दिया और लिखा, “अब देश के तमाम लोग यह जानने के लिए अति उत्सुक है कि #राममंदिरकापुजारीकौन होगा? क्या एक नया, प्रगतिशील और समावेशी भारत बनाने एवं मोदी सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ नारे को चरितार्थ करते हुए किसी ग़ैर ब्राह्मण वर्ण के व्यक्ति को पुजारी बनाया जाएगा? देखना दिलचस्प होगा?” बता दें कि संजय यादव बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और राजद विधायक तेजस्वी यादव के राजनीतिक सलाहकार हैं।

हालाँकि जाति के आधार लोगों को बाँटने वाले लोगों की पागल भीड़ के साथ अपनी एकजुटता दिखाने वाले संजय यादव यह बात आसानी से भूल गए कि बिहार की राजधानी पटना में लगभग एक दर्जन मंदिरों में दशकों से दलित ही पुजारी हैं। 300 साल पुराने हनुमान मंदिर के पुजारी सूर्यवंशी फलाहारी दास हैं, जो दलित हैं। 1993 में पटना के महावीर मंदिर में इनकी नियुक्ति प्रधान पुजारी के रूप में हुई थी। इसको लेकर समाज के किसी भी भाग में किसी तरह का कोई विरोध नहीं हुआ था। आज भी इस मंदिर में अगर कोई बड़ा आयोजन होता है तो इनकी उपस्थिति आवश्यक मानी जाती है। कोई मुख्यमंत्री, राज्यपाल या राष्ट्रीय स्तर का कोई बड़ा नेता आता है, तो पूजा वही कराते हैं।

पटना के इस हनुमान मंदिर का संचालन महावीर ट्रस्ट करता है। पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल इसके अध्यक्ष हैं। मंदिरों में दलित पुजारियों की नियुक्ति के सामाजिक परिवर्तन में उनका बड़ा योगदान है। अयोध्या मामले से भी वे जुड़े रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने रामजन्मभूमि स्थान का जो नक्शा फाड़ा था, उसे तैयार करने में किशोर कुणाल की अहम भूमिका रही है। अयोध्या पर शीर्ष अदालत के फैसले के बाद महावीर ट्रस्ट ने राम मंदिर के लिए पॉंच साल तक दो-दो करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी।

किशोर कुणाल को अयोध्या मुद्दे को हैंडल करने के लिए वीपी सिंह सरकार के तहत गृह मंत्रालय द्वारा 1990 में ओएसडी नियुक्त किया गया था। उन्हें रामजन्मभूमि विवाद में विश्व हिंदू परिषद और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के बीच मध्यस्थता की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बिहार महावीर मंदिर ट्रस्ट (BMMT) भी पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया में एक विराट रामायण मंदिर का निर्माण भी कर रहा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर होगा।

अयोध्या पर फैसले के बाद 8275 भड़काऊ पोस्ट, यूपी पुलिस ने 77 को किया गिरफ्तार

अयोध्या भूमि विवाद मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब तक विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के 34 मामले दर्ज किए हैं। इस संबंध में 77 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस की तरफ से जारी बयान में कहा गया कि दो दिन में 8275 सोशल मीडिया पोस्ट के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है। इनमें से 4563 पोस्ट पर रविवार (10 नवंबर) को ही कार्रवाई की गई। पुलिस विभाग की सोशल मीडिया निगरानी शाखा ने रविवार को 22 मुक़दमे दर्ज किए और 40 लोगों को हिरासत में लिया। एडीजी लखनऊ जोन पीवी रामाशास्त्री के मुताबिक, शनिवार देर रात तक ही 37 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा फैसले पर खुशी जताने के लिए आतिशबाजी करने को लेकर भी सात लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ख़बर के अनुसार, फ़ैसले के अगले दिन यानी रविवार (10 नवंबर) को 5 हज़ार से अधिक बारावफात जुलूस निकलनी थी। इस चुनौती से भी यूपी पुलिस ने बगैर किसी विवाद के पार पा लिया। बीते 48 घंटों ने यूपी पुलिस की साइबर पेट्रोलिंग के प्लान पर सफलता की मुहर लगा दी, जिसके चलते प्रदेश में शांति और सुरक्षा बनी रही।

बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ तड़के उठ जाते हैं, लेकिन शनिवार (9 नवंबर) को योगी आदित्यनाथ काफ़ी पहले उठे और अपना पूजा-पाठ संपन्न कर राज्य की क़ानून-व्यवस्था की समीक्षा में लग गए। शनिवार सुबह एक बार फिर से योगी आदित्यनाथ ने डीजीपी ओपी सिंह से फोन पर बात की और पूरे राज्य के हालात का जायजा लिया।

गौरतलब है कि करीब 500 साल पुराना अयोध्या विवाद शनिवार को आए सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की पॉंच जजों की पीठ ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में विवादित जमीन रामलला को सौंप दी है। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का निर्देश भी सरकार को दिया है।

कश्मीर पर पाक प्रायोजित कार्यक्रम में शामिल हुईं NDTV की निधि राजदान, आतंकी संगठन ने कहा- शाबाश

एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान ने पाकिस्तान समर्थित कार्यक्रम में सम्मिलित होकर भारत के ख़िलाफ़ ज़हर उगला है। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से ही पाकिस्तान अपने एजेंटों द्वारा भारत के ख़िलाफ़ माहौल बनाने में लगा हुआ है। विदेशों में कई जगहों पर भारत के ख़िलाफ़ कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहाँ पाकिस्तानियों व उनके एजेंटों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इसी तरह कई पाकिस्तानी एनडीटीवी की ख़बर शेयर करते हुए भारत के ख़िलाफ़ बातें करते हैं। इसी क्रम में लंदन में ‘The Cost to Britain of the Kashmir Crisis: Is There a Solution?’ नामक एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में एनडीटीवी की पत्रकार निधि राजदान भी शामिल हुईं। लंदन में इस कार्यक्रम के आयोजक का नाम है- अब्दुर्रहमान चिनॉय, जो एक ब्रिटिश पाकिस्तानी व्यापारी है। वह ‘क्वीन मेरी पाकिस्तान सोसायटी ‘ का अध्यक्ष भी है। जिओ टीवी से बात करते हुए उसने कहा कि इस कार्यक्रम का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान में ब्रिटेन की भूमिका को तलाशना है। उसने कहा था कि इस कार्यक्रम में इस पर चर्चा की जाएगी कि दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों का विवाद सुलझाने ब्रिटेन क्या किरदार अदा कर सकता है?

पाकिस्तान के भारत-विरोधी कार्यक्रम में शामिल हुईं एनडीटीवी की निधि राजदान

चिनॉय ने लेबर पार्टी के सांसदों की उस राय का समर्थन किया था, जिसमें उन्होंने भारत के आंतरिक मुद्दे में सीधा हस्तक्षेप करने की बात कही थी। कार्यक्रम में शामिल हुए एक अतिथि अशरफ चौहान ने ट्वीट कर के कार्यक्रम में शामिल होने पर ख़ुशी जताई। अब्दुर्रहमान ने भी उस ट्वीट का जवाब दिया और उनका आयोजन में आने के लिए शुक्रिया अदा किया।

यूके के पूर्व एनएसए लयल ग्रांट ने इस कार्यक्रम में कहा कि मोदी सरकार की कार्रवाई से कश्मीर में कट्टरवाद को बढ़ावा मिल रहा है और इससे ब्रिटेन की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि यूके में 10 लाख से भी अधिक कश्मीरी रहते हैं। ग्रांट ने जम्मू-कश्मीर में यूके द्वारा सीधा हस्तक्षेप की बात की। इस कार्यक्रम में यूएन में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि रहीं मलीहा लोधी भी शामिल हुईं। वहीं, आतंकी संगठन जेकेएलएफ ने इस कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि निधि राजदान के रूप में इस मंच पर एक ‘कश्मीरी आवाज़’ भी मौजूद था। जेकेएलएफ यासीन मलिक का संगठन है, जो अभी तिहाड़ जेल में बंद है। इस आतंकी संगठन को यूएपीए के तहत भारत ने प्रतिबंधित कर रखा है।

जेकेएलएफ ने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए इसके आयोजकों व अतिथियों की प्रशंसा की। निधि राजदान ने आरोप लगाया कि भारत ने अनुच्छेद 370 को लेकर कश्मीरी जनता की राय नहीं ली और पूरे राज्य में संचार- व्यवस्था ठप्प कर दी गई है। निधि राजदान ने कहा कि भारत दावा करता है कि यह सब जम्मू-कश्मीर के भले के लिए है। एनडीटीवी इससे पहले भी जम्मू-कश्मीर को लेकर प्रोपगेंडा फैलाता रहा है।

अब निधि राज़दान ने इस ख़बर को लेकर अपनी सफाई दी है। निधि ने कहा कि उन्होंने उस कार्यक्रम में पाकिस्तान की आलोचना की और कश्मीरी पंडितों का मुद्दा उठाया। निधि ने दावा किया कि उन्होंने उस कार्यक्रम में पाकिस्तान पर आतंक फैलाने का भी आरोप लगाया। निधि ने यह भी कहा कि ट्रॉल्स उन्हें परेशान कर रहे हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब कश्मीर को लेकर एनडीटीवी विवादों में आया है। पुलवामा हमले के बाद एनडीटीवी के मैनेजिंग एडिटर रवीश कुमार ने जर्मन मीडिया हाउस डॉयचे वेले को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि भारतीय मीडिया बेरोजगारी जैसे मसलों की बजाए पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को तूल दे रही है ताकि सत्ताधारी दल को चुनावी फायदा हो सके। पुलवामा हमले के बाद ही एनडीटीवी की डिप्टी एडिटर निधि सेठी ने फेसबुक पोस्ट से जैश को महिमामंडित किया था। हैशटैग #HowstheJaish के साथ वीरगति को प्राप्त हुए जवानों का मजाक उड़ाते हुए टिप्पणी की।

दीक्षांत समारोह में पहुँचे उपराष्ट्रपति: JNU के हजारों छात्र उतरे सड़क पर फीस समेत कई मुद्दों के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से एक बार फिर हजारों छात्रों के सड़कों पर उतर आने की बात सामने आई है। लेकिन इस बार मामला फीस वृद्धि, ड्रेस कोड और हॉस्टल से जुड़े नियम कानून को लेकर है। इसके अलावा कहा जा रहा है कि दीक्षांत समारोह के परिसर से बाहर आयोजित किए जाने पर भी छात्रों में खासी नाराजगी है। जिसके विरोध में छात्र यूनिवर्सिटी से लेकर वसंत कुंज स्थिति कार्यक्रम स्थल तक मार्च निकाल रहे हैं और दिल्ली पुलिस इनपर कड़ी नजर रख रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वसंत कुंज स्थित ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन के सभागार में आयोजित हो रहे जेएनयू के दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू मुख्य अतिथि के तौर पर पहुँचे हैं। जहाँ उनके साथ मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी उपस्थित हैं। इसलिए आंदोलन कर रहे छात्रों को पुलिस ने बेरिकेड्स लगाकर रोका है, जिस कारण नेल्सन मंडेला मार्ग पर भारी जाम लगने की खबर है। हालाँकि पुलिस इन छात्रों से शांति बनाए रखने का अनुरोध कर रही है, लेकिन उनपर कोई फर्क नहीं पड़ रहा। मजबूरन पुलिस को कुछ छात्रों को पकड़कर गाड़ी में बंद करना पड़ रहा है।

बता दें कि इस आंदोलन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, आईसा, एआईएसएफ और एसएफआई सभी छात्र संगठन हिस्सा ले रहे हैं। जिनका कहना है कि वह दीक्षांत समारोह के कार्यक्रम स्थल के पास ही प्रदर्शन करेंगे।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार एक आंदोलनकारी छात्र ने बताया कि वह बीते 15 दिन से फीस में हुई वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। क्योंकि यूनिवर्सिटी में कम से कम 40 फीसद छात्र ऐसे हैं जो गरीब परिवारों से आते हैं, वो फीस वृद्धि के कारण अपनी पढ़ाई कैसे जारी रख पाएँगे ।

उनका कहना है कि बिना सस्ती एजुकेशन के उन्हें दीक्षांत समारोह मंजूर नहीं है। हॉस्टल फीस बढोतरी का मामला यूनिवर्सिटी में काफी आगे जा चुका है और अब तक इसका कोई हल नहीं निकला है।

यहाँ फीस वृद्धि के अलावा छात्रों की माँग है कि हॉस्टल में किसी छात्र से सर्विस चार्ज नहीं लिया जाए, हॉस्टल में आने-जाने के लिए समय सीमा को खत्म किया जाए, हॉस्टल में ड्रेस कोड नहीं लागू किया जाए, साथ ही नए हॉस्टल मैन्यू पूरी तरह रद्द किया जाए।

कुतुबमीनार, ज्ञानवापी, मथुरा या ढाई दिन का झोपड़ा: मस्जिद जो हिंदुओं के जख्म पर नमक जैसे हैं

अयोध्या में भगवान राम के मंदिर का निर्माण प्रशस्त करने का फैसला जब 9 नवंबर को आ रहा था, तो शुरुआती 2 टिप्पणियाँ देखकर मैंने लिखा था, ‘सबको खुश करने वाला फैसला आने की उम्मीद है।’ जब 11 बजे फैसला आ गया तो कई मित्रों ने कहा, “मैंने अधीरता और आवेश में वैसा लिखा, कोर्ट ने तो फैसला ‘हिंदुओं के पक्ष’ में दिया है।” अब, जबकि 2 दिन बीत चुके, धूल बैठ चुकी, मैं फिर भी पूरी तरह अपनी बात पर क़ायम हूँ।रामजन्मभूमि पर अदालती फैसले पर जो मेरी समझ है, उसे निम्नलिखित कुछ बिंदुओं से समझते हैं:-

  1. पहली बात तो यह कि बधाई या प्रसन्नता की कोई बात नहीं है। लगभग 500 वर्षों के संघर्ष के बाद हिंदुओं को अपने आराध्य के पूजन का, उनके मंदिर का अधिकार मिला है। इसके साथ ही अदालत ने 5 एकड़ का मुआवजा भी थमा दिया है, जो हिंदुओं के ऊपर जुर्माने से कम नहीं है। भाई, मुकदमा तो इसका था न कि अयोध्या में मंदिर को तोड़कर (यह अलग बात है कि भारत की अधिकांश मस्जिदें मंदिर तोड़कर बनीं) मस्जिद बनाई गई, वह स्थल हिंदुओं के आराध्य की जगह है, उसे वापस हिंदुओं को देना है। इसमें 5 एकड़ मुआवजा क्यों देना? हिंदुओं को तो राम के अस्तित्व का प्रमाण देना पड़ा, अदालती लड़ाई में कूदना पड़ा, जो राम इस देश के कण-कण में हैं, उस राम को झुठलाने के जिहादी-वामपंथी षड्यंत्र का कालकूट पीना पड़ा। इसमें बधाई की कौन सी बात है।
  2. कई सेक्युलर-कुबुद्धिजीवी खुलकर न्यायालय के फैसले की आलोचना कर रहे हैं। इस देश को गटर बनाने वाली पार्टी कॉन्ग्रेस ने तो अपने मुखपत्र तक में सर्वोच्च न्यायालय की आलोचना की है। JNU में लबार लौंडे-लौंडियों ने इस फैसले के विरोध में सभा की। ओवैसी जैसा जिहादी सीना ठोक कर मुखालफत करता है। 5 एकड़ की ‘खैरात’ से इनकार करता है। क्या हम यह सोच भी सकते हैं कि इन पर कड़ी कार्रवाई होगी? शायद नहीं।
  3. कौमी-कॉन्ग्रेसी-कुबुद्धिजीवी अचानक से हमें याद दिलाते हैं कि “तथ्यों के मुकाबले आस्था को प्राथमिकता” डील पर यह निर्णय हुआ। इस बात का सिवाय बढ़िया पश्च-सेवा के अलावा क्या जवाब है? कुतुबमीनार हो या ज्ञानवापी, भोजशाला हो या मथुरा, ढाई दिन का झोपड़ा हो या कोई भी बुलंद मस्जिद, वह हिंदुओं के स्वाभिमान को ध्वस्त करने के लिए उनके परम पूज्य आराध्यों के मंदिरों को भूमिसात कर बनाई गई है। आज भी उनके साक्षात प्रमाण हिंदुओं को मुँह चिढ़ाते हैं, उसके ज़ख्मों पर नमक छिड़कते हैं। और ये मक्कार, झूठे, लबार तथ्यों की बात करेंगे, जिन्होंने रोमिला-हबीब जैसे उपन्यासकारों के जरिए भयानक झूठ बोले, षड्यंत्र किए और जन्मभूमि के मामले को उलझाने की कोशिश की? ये बात के नहीं, सोंटे के लायक हैं।
  4. और अंत में। अचानक से कुछ धिम्मियों की आत्मा जागी है, उनके अंग-विशेष से आँसू निकल रहे हैं। वे हमें सिखा रहे हैं कि “प्रतिक्रिया देना मजहब विशेष से सीखें। उन्होंने जो संयम दिखाया है, उसे देखकर हिंदुओं को शर्म आनी चाहिए।”

अब ऐसे लोगों की तुड़ाई के अलावा कोई चारा नहीं है। पहली बात, सरकार के इक़बाल और पूरी तैयारी की वजह से हमारे “शांतिदूत” भाई चुप हैं। हालाँकि, यह एक बृहत तैयारी के पहले की खामोशी भी हो सकती है। दूसरे, हिंदुओं को संयम या सहिष्णुता न सिखाओ बे! यदि हिन्दू असहिष्णु होता न तो दिल्ली, पटना, मध्य प्रदेश, गुजरात, यूपी… कोई भी जगह शांत न रहती, जहाँ सीधे नंगी आँखों को मंदिरों के ऊपर तामीर की गई मस्जिद दिखाई देती है। तीसरी और अंतिम बात, यह दूसरा मजहब यदि सचमुच सहिष्णु है तो तत्काल कम से कम काशी और मथुरा के मंदिरों को खुद खाली करे और हिंदुओं के साथ वहाँ भव्य मंदिर बनवाए। बाकी, 30 हज़ार मंदिरों की तो बात भी नहीं हुई है…. (अफसोस, ऐसा हो न पायेगा।)

यह लेख स्वामी व्यालोक पाठक ने लिखा है।


डिस्क्लेमर:- यह पोस्ट किसी भी तरह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के ऊपर टिप्पणी नहीं है।