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अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया शुरू, सुप्रीम कोर्ट ने दिया है 3 महीने का वक्त

शताब्दियों से लंबित अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने शनिवार को विराम लगा दिया। अपने ऐतिहासिक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने में ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार के अधिकारियों ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा है कि ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए एक टीम कोर्ट के फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है।

एक अधिकारी ने बताया कि इस सम्बन्ध में विधि मंत्रालय और अटॉर्नी जनरल से राय ली जाएगी, जिसके बाद अयोध्या में मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अधिकारियों की एक टीम को फैसले का विस्तृत अध्ययन करने की ज़िम्मेदारी दी गई है जिससे ट्रस्ट के गठन में अदालत के किसी दिशा-निर्देश की अनदेखी न हो।

एक अन्य अधिकारी के मुताबिक इस मामले में नोडल इकाई के रूप में गृह-मंत्रालय अथवा संस्कृति मंत्रालय में से कोई एक रहेगा। बता दें कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जन्मभूमि को लेकर विवाद लम्बे समय से रहा है। दरअसल यह झगड़ा सन 1528 से चला आ रहा था, जब जन्मस्थान पर मुग़ल शासक बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी।

इस विवाद का अंत 09 नवम्बर को 2019 को हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने 135 साल तक तक चले इस मुक़दमे में अपना फैसला सुनाया। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बाबरी मस्जिद से पहले उस जगह पर मंदिर था।

कोर्ट ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि जन्मभूमि की 2.77 एकड़ ज़मीन पर मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया जाए। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ ज़मीन अलग से देने के निर्देश भी सरकार को दिया था।

रामलला की अयोध्या: राम मंदिर जैसा होगा रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, फाइव स्टार होटल और एयरपोर्ट भी बनेंगे

अयोध्या में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद विकास का द्वार खुल गया है। 1045 पन्नों वाले इस फैसले से न सिर्फ एक लम्बे संघर्ष पर विराम लगा बल्कि इसने अयोध्यावासियों को भी नई सौगात दी। अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने रविवार को एक मीडिया चैनल से बात करते हुए बताया कि तीर्थनगरी का विकास अब रफ़्तार पकड़ेगा। उपाध्याय ने बताया कि अयोध्या में सरयू नदी के किनारे भगवान राम की 151 मीटर ऊँची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार एक साथ मिलकर इसका खाका तैयार करेगी।

अपने साक्षात्कार में अयोध्या का भविष्य उज्जवल करने वाली योजनाओं और प्रस्तावों पर बात करते उन्होंने बताया कि अयोध्या में डेवलेपमेंट काउन्सिल का गठन किया जाएगा। इस काउन्सिल के गठन प्रमुख उद्देश्य अयोध्या में पर्यटन और विकास को बढ़ावा देना होगा। विश्व के कोने-कोने से अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को तकलीफ न उठानी पड़े इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बस-अड्डे से लेकर एक शानदार एयरपोर्ट बनाने की भी योजना है। वहीं अयोध्या के विकास में रेलवे स्टेशन को भी खासा महत्व दिए जाने का प्रस्ताव है।

करीब 100 करोड़ के निवेश से अयोध्या जंक्शन को पाँच सितारा होटल की तर्ज पर संवारने का भी प्रस्ताव है। इस पर दिसम्बर से काम शुरू हो जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यात्रा के सभी माध्यमों को विकसित करने की भी योजना है। अयोध्या से फैजाबाद के बीच एक बड़े फ्लाईओवर का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही अयोध्या से चित्रकूट के बीच फोर लेन की एक सड़क का भी प्रस्ताव है। ऋषिकेश के मुताबिक अयोध्या की सूरत बदलने के लिए ये काम प्रस्तावित हैं;

  • अयोध्या तीर्थ विकास परिषद का गठन किया जाएगा। परिषद शहर में पर्यटन के विकास के लिए काम करेगी। भगवान राम को समर्पित 10 द्वार का निर्माण होगा।
  • एक हवाई अड्डा भी अयोध्या में बनाया जाएगा। मई 2020 तक हवाई सेवा शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बस अड्डा बनाया जाएगा।
  • 100 करोड़ रुपए की लागत से वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन बनाया जाएगा जो देखने में राम मंदिर सरीखा होगा।
  • 10 पॉंच सितारा होटल बनाए जाएँगे। इनका निर्माण दिसंबर से शुरू होने की उम्मीद है। साथ ही पॉंच बड़े रिसॉर्ट बनाने का भी प्रस्ताव है।
  • सरयू नदी के किनारे भगवान राम की 151 मीटर ऊँची प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
  • 10 हजार लोगों के रहने की क्षमता वाला रैन बसेरा बनाया जाएगा। अयोध्या से फैजाबाद को जोड़ने के लिए 5 किमी लंबा फ्लाईओवर बनेगा। अयोध्या में मेडिकल कॉलेज खोलने का भी प्रस्ताव है।

ऋषिकेश ने बताया कि अयोध्या में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पाँच बड़े रिसोर्ट खोले जाएँगे जिससे श्रद्धालुओं के लिए हर प्रकार की सुविधाजनक होगी। साथ ही करीब 10,000 लोगों की आवश्यकता को देखते हुए रैन-बसेरे का भी निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा एक मेडिकल कॉलेज के साथ पब्लिक पार्क और सार्वजानिक स्थानों का सौन्दर्यीकरण किया जाएगा।

बता दें कि उपाध्याय के मुताबिक केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के नए अयोध्या प्लान की होने वाली बैठक में सर्वेक्षण के दौरान एएसआई को मिले अवशेषों और कलाकृतियों को सहेजकर रखने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जन्मभूमि और प्रस्तावित मंदिर निर्माण के स्थल को सहेजकर रखने पर भी विचार किया जा सकता है। इस पूरे कार्यक्रम में केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को इस सम्बन्ध में बोलते हुए कहा था, “आज का यह दिन भारत की न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद रखा जाएगा। सभी ने बड़े संयम के साथ लम्बे समय से लंबित इस फैसले का स्वागत किया।”

बीजेपी से रिश्ते तोड़ कॉन्ग्रेस की गली शिवसेना: सोशल मीडिया में मीम्स की बौछार

महाराष्ट्र में सरकार गठन की तस्वीर साफ हो गई है। बीजेपी से रिश्ते तोड़ शिवसेना सरकार बनाने जा रही है। कॉन्ग्रेस-एनसीपी का समर्थन उसके साथ है। इस सियासी ड्रामे के बाद सोशल मीडिया में मीम्स की बौछार हो गई है।

एक ट्विटर यूज़र्स ने क्रोधित महिला का चित्र लगाते हुए उसकी तुलना मध्य प्रदेश चुनाव के समय NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं) बटन के इस्तेमाल करने वाले मतदाताओं से की। इसका तस्वीर को शेयर करने का मक़सद शिवसेना द्वारा महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर सहयोग न करने पर निराशा व्यक्त करना है। 

यूज़र्स ने अपने गुस्से को प्रकट करने के लिए लोकप्रिय फ़िल्मी दृश्यों का भी इस्तेमाल किया है।

शिवसेना ने जनादेश को धोखा देकर भाजपा के बिना सरकार बनाने का फ़ैसला किया। 

शिवसेना को मिलने वाले कॉन्ग्रेस के समर्थन पर व्यंग्य करते हुए हिन्दी फ़िल्म करन-अर्जुन की एक तस्वीर ट्विटर पर शेयर की गई। इस तस्वीर में अभिनेत्री राखी को सोनिया गाँधी, शाहरुख खान को उद्धव ठाकरे और सलमान ख़ान को आदित्य ठाकरे के रूप में दर्शाया गया। 

इसके अलावा, बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी एक तस्वीर शेयर कि जिसमें उन्होंने “Miyaun” लिखा। इस तस्वीर में एक बिल्ली है, जिस पर शिवसेना लिखा हुआ है और NCP प्रमुख शरद पवार दरवाज़े पर खड़े हैं जो बिल्ली को निहारते दिख रहे है।

गौरतलब है कि 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, कॉन्ग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटें मिली है। भाजपा-शिवसेना और कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन, ढाई साल के लिए सीएम पद की मॉंग पर शिवसेना के अड़ने के बाद भाजपा ने सरकार बनाने से कदम पीछे खींच लिए थे। इसके बाद राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार गठन का न्योता दिया था।

सोमवार को दिनभर चले सियासी ड्रामे के बाद कॉन्ग्रेस ने भी शिवसेना को समर्थन का ऐलान कर दिया है। हालॉंकि वह सरकार में शामिल नहीं होगी। कॉन्ग्रेस ने शिवसेना को बाहर से समर्थन देने की घोषणा करते हुए समर्थन पत्र राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भेज दिया है

हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं ओवैसी, अयोध्या पर उनका बयान देशद्रोह जैसा: महंत नरेंद्र गिरी

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी के बयान को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने देशद्रोह बताया है। उन्होंने कहा है कि ओवैसी भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं। नरेंद्र गिरी का कहना है कि अगर उन्हें भारतीय न्यायपालिका और संविधान पर विश्वास नहीं है, तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। उन्होंने ओवैसी द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असंतोष व्यक्त करने को देशद्रोह बताते हुए उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (नवंबर 9, 2019) को अयोध्या भूमि विवाद का फैसला सुना दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने एकमत से अयोध्या को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हुए पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन रामलला विराजमान को सौंपकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया। वहीं, मुस्लिम पक्षकारों को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने का निर्णय सुनाया।

ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि वो इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम (सर्वोच्च) जरूर है, लेकिन वह अचूक नहीं है। उन्हें खैरात में पाँच एकड़ जमीन नहीं चाहिए। महंत नरेंद्र गिरि ने ओवैसी के इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि वो हमेशा से हिंदुओं और साधु संतों का अपमान करते आए हैं। गिरी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को खैरात बताने को लेकर वो उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करवाएँगे।

उन्होंने कहा,”पूरा भारत, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम, ने खुले दिल से निर्णय को स्वीकार किया। लेकिन ओवैसी एक अलग ही राग अलाप रहे हैं। वह फैसले को खैरात कह रहे हैं। इस तरह के बयानों से आप हिंदू और मुस्लिमों को एक-दूसरे से लड़वाते हैं। ये सारे जहर पाकिस्तान में उगलना, जो आतंकवादियों का केंद्र है। हम ओवैसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वह भारतीय संविधान के कारण ही सांसद हैं। हम कितना बर्दाश्त कर सकते हैं, इसकी भी एक सीमा है। हम उनके खिलाफ एफआईआर की माँग करेंगे। मैं खुद जल्द ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाऊँगा।”

महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार नहीं करना भारतीय संविधान के खिलाफ माना जाता है। आप भारत में रहते हैं, लेकिन इसकी न्यायिक प्रणाली में विश्वास नहीं करते हैं। यह देशद्रोह की श्रेणी में आता है। महंत ने कहा कि उनका अनुरोध है कि अगर उन्हें भारत नहीं पसंद है और वह यहाँ नहीं रहना चाहते हैं, तो पाकिस्तान जा सकते हैं और वहाँ रह सकते हैं। उन्हें कोई वहाँ जाने से कोई रोक नहीं रहा। महंत नरेंद्र गिरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ओवैसी इस तरह की भाषा का दोबारा इस्तेमाल करेंगे तो साधु-संत समाज और अखाड़ा परिषद इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।

विधायकों का समर्थन जुटाने के लिए शिवसेना ने माँगे 3 दिन, राज्यपाल ने NCP को बुलाया

मुंबई में शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिल कर सरकार गठन करने की इच्छा प्रकट की। हालाँकि, शिवसेना बहुमत के लिए ज़रूरी विधायकों का समर्थन पत्र राजभवन को नहीं सौंप सकी। उन्होंने राज्यपाल से कहा कि उन्हें सरकार बनाने के लिए विधायकों का समर्थन-पत्र सौंपने हेतु 3 दिनों का समय चाहिए। हालाँकि, राज्यपाल ने उन्हें तय समय-सीमा से ज्यादा समय देने से इनकार कर दिया

कॉन्ग्रेस नेता माणिकराव ठाकरे ने कहा है कि न तो एनसीपी और न ही उनकी पार्टी की तरफ़ से शिवसेना को समर्थन देने वाला कोई पत्र राज्यपाल को सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि शरद पवार और कॉन्ग्रेस नेताओं की बातचीत के बाद पार्टी अगले क़दम का खुलासा करेगी। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा कि एनसीपी से बातचीत करने के बाद ही अब कुछ निर्णय लिया जाएगा।

उधर, एनसीपी नेता अजीत पवार ने कहा है कि राज्यपाल ने उनकी पार्टी को मिलने के लिए राजभवन बुलाया है।जब उनसे पूछा गया कि क्या राज्यपाल ने उन्हें सरकार गठन करने का न्योता दिया है, अजीत पवार ने जवाब दिया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। पवार ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें क्यों बुलाया है, यह बताया नहीं गया है।

इससे पहले शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कॉन्ग्रेस सुप्रीमो सोनिया गाँधी से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान सरकार गठन पर बात हुई। जयपुर में कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने विधायकों के साथ बैठकें की थी। शिवसेना ने भी सोमवार (नवंबर 11, 2019) को कई राउंड की बैठकों के बीच सरकार गठन को लेकर भावी रणनीति पर विचार किया। ताज होटल में एनसीपी के संस्थापक अध्यक्ष शरद पवार और उद्धव की बैठक के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि एनसीपी और कॉन्ग्रेस शिवसेना को समर्थन दे सकती है।

आदित्य ठाकरे और एकनाथ शिंदे सहित अन्य शिवसेना नेता राजभवन पहुँचे थे। कहा जा रहा है कि जब सोनिया गाँधी दिल्ली में कॉन्ग्रेस के मराठी दिग्गजों के साथ बैठक कर रही थीं, तब जयपुर में एक रिसॉर्ट में ठहराए गए कई पार्टी विधायकों से उनकी बात भी कराई गई। सोनिया ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विधयकों की राय ली। कहा जा रहा है कि इन सब में गाँधी परिवार के वफादार अहमद पटेल की भी भूमिका है, क्योंकि उद्धव और सोनिया की बातचीत उन्होंने ही कराई। दोनों नेताओं की बातचीत क़रीब 5 मिनट तक चली।

उधर, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में कॉन्ग्रेस के महाराष्ट्र के नव-निर्वाचित विधायकों से मुलाक़ात की। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, कॉन्ग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटें मिली है। भाजपा-शिवसेना और कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन, ढाई साल के लिए सीएम पद की मॉंग पर शिवसेना के अड़ने के बाद भाजपा ने सरकार बनाने से कदम पीछे खींच लिए थे। इसके बाद राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार गठन का न्योता दिया था।

भारत भक्ति का सामूहिक भाव मोदी सरकार के संकल्प से सिद्धि पथ का संबल

अयोध्या के राम जन्मभूमि पर माननीय उच्चतम न्यायालय का निर्णय आ चुका है। चूँकि भारत की आत्मा इसकी संस्कृति है और राम इस संस्कृति के शाश्वत व मूल पहचान हैं, अत: राम जन्म स्थान पर भव्य मंदिर का मार्ग प्रशस्त होने पर जिस प्रकार जाति, संप्रदाय, वर्ग व क्षेत्र आदि की भावना से ऊपर उठकर पूरे देश ने सत्य, न्याय व धर्म की विजय व एकता का प्रदर्शन किया और प्रसन्नता प्रकट की है, वह महर्षि वाल्मीकि और भगवान राम के बीच संवाद ‘सब के प्रिय सबके हितकारी, दुख सुख सरिस प्रशंसा गारी। कहहिं सत्य प्रिय बचन बिचारी, जागत सोवर सरन तुम्हारी’ की श्रेष्ठ भावना का प्रकटीकरण है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदा ही पंडित दीन दयाल उपाध्याय के उस विचार पर चली है कि ‘भारत में नैतिकता के सिद्धांतों को धर्म अर्थात जीवन के नियम के रूप में माना जाता है। चूँकि धर्म सर्वोच्च है और हमारे राज्य के लिए आदर्श ‘धर्म का राज्य’ होना चाहिए।’ भाजपा अपनी स्थापना से ही नैतिकता के इन्हीं सिद्धांतों और भारतीयता के संकल्पों के आधार पर राजनीति की पक्षधर ही नहीं रही है, बल्कि भारतीय राजनीति को कोरे वादों, खोखले नारों और लोकलुभावन जुमलेबाजी से मुक्त कराकर देश को आगे ले जाने के संकल्प से लोककल्याण की सिद्धि के पथ पर अग्रसर कराने के लक्ष्य पर अहर्निश चल रही है।

इन्हीं संकल्पों के साथ भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जनता के समक्ष अपना पक्ष रखा और जनता जर्नादन से सेवा का अवसर माँगा। जनता ने भाजपा के चरित्र व विश्वसनीयता एवं पीएम नरेन्द्र मोदी के वचनों पर विश्वास करके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को पूर्ण बहुमत दिया। पाँच वर्ष के कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने पार्टी के संकल्पपत्र के एक-एक वचन को पूरा करके भारत को महाशक्ति और भारत की जनता को सुखी, समृद्ध और न्यायिक व सामाजिक समानता के अधिकारयुक्त बनाने की राह पर ऐतिहासिक रूप से आगे बढ़ी। जनता ने देखा कि यदि भाजपा नीत राजग की सरकार देश की वह पहली सरकार है, जिसने जनता के समक्ष लिए गए संकल्पों को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने का कार्य किया है। परिणामत: 2019 के चुनाव में जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ऐतिहासिक बहुमत देकर सरकार और राजनीति दोनों में और सुदृढ़ता से अपना विश्वास प्रकट किया।

राम मंदिर, तीन तलाक और अनुच्छेद 370 भाजपा के उन तीन प्रमुख संकल्पों में सम्मिलित थे, जिसका उल्लेख उसके संकल्प पत्र में था। देश के मुस्लिम महिलाओं के प्रति अमानवीय कुप्रथा तीन तलाक का अंत भाजपा सरकार ने करके संसद में कानून पारित किया। जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा से अलग-थलग करने वाले अनुच्छेद 370 को हटाकर भाजपा ने डॉ. श्यामा प्रसाद के ‘एक देश, एक विधान और एक ध्वज’ के उस सपने को साकार किया, जो हर भारतीय का सपना था। अब उच्चतम न्यायालय द्वारा राममंदिर पर आए निर्णय के बाद प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में 491 वर्ष से चले आ रहे इस विवाद का सुखद पटाक्षेप हो गया है।

ये तीनों विषय भारत की उन दीर्घकालिक समस्याओं में से थीं, जो जनभावना से जुड़ी थीं और देश की जनता इनसे छुटकारा पाना चाहती थी। लेकिन देश की सत्ता में 60 वर्ष से अधिक समय तक रहने वाले राजनैतिक दल स्वार्थ और वोट बैंक की राजनीति के चलते इन समस्याओं को सुलझाने के बजाय उलझाकर राजनीति की रोटियाँ सेंकते रहे। भाजपा नीत मोदी की सरकार ने राजनीतिक स्वार्थ और छलने वाली राजनीति का अंत कर ‘संकल्प से सिद्धि’ की ओर ‘एक भारत और श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण के साथ विकसित भारत बनाने की राजनीति का प्रारंभ किया। एक ऐसी राजनीति व सुशासन की शुरुआत की, जो मानवीय व राष्ट्रीय दोनों प्रकार से भारतीय संस्कृति के सिद्धांतों पर आधारित हो। उस भारतीय संस्कृति के सिद्धांतों पर जो विविधता व बहुलतावादी प्रकृति का संरक्षण करते हुए इनमें छिपी एकता पर आधारित हो।

निर्णय आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे इसी एकता के प्रकटीकरण का अवसर बताया। पीएम मोदी ने कहा, “यह निर्णय न्यायिक प्रक्रियाओं में जन सामान्य के विश्वास को और मजबूत करेगा। हमारे देश की हजारों वर्ष की पुरानी भाईचारे की भावना के अनुरूप हम 130 करोड़ भारतीयों को शांति और संयम और भारत के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अंतर्निहित भावना का परिचय देना है। इस निर्णय को किसी की जय या पराजय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है।”

भारत भक्ति का यह सामूहिक भाव ही मोदी सरकार को ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ ‘सशक्त भारत और समृद्ध भारत’ की नींव रखने का साहस व संबल प्रदान करता है और संकल्प से सिद्धि के पथ पर अग्रसर होकर उस रामराज्य की स्थापना की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाने को प्रेरित करता है, जहाँ राजनीति व सत्ता का उद्देश्य केवल और केवल लोककल्याण है।

मस्जिद के लिए सहनवा में जमीन दे सकती है सरकार: यहीं दफन है बाबरी बनाने वाला मीर बाकी

सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में अयोध्या की पूरी जमीन रामलला को सुपुर्द कर दी थी। यहॉं मंदिर निर्माण के लिए सरकार से तीन महीने में ट्रस्ट बनाकर योजना तैयार करने का आदेश दिया था। साथ ही मुस्लिम पक्ष को भी अलग से मस्जिद के लिए पॉंच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। तब से ही यह सवाल उठ रहा है कि मस्जिद के लिए जमीन कहॉं दी जाएगी। कई नामों पर अटकलें लग रही है। इनमें से एक नाम अयोध्या से सटे सहनवा का भी उभर कर आया है।

सहनवा वही जगह है, जहाँ बाबर का सेनापति मीर बाकी दफ़न है। उसने ही 1528 में रामजन्मभूमि स्थान पर बाबरी मस्जिद बनवाई थी। न्यूज 18 की खबर के अनुसार मीर बाकी के वंशज चाहते हैं कि सहनवा में मस्जिद बनें। यही कारण है कि यहाँ पर मस्जिद बनाने हेतु जमीन देने का विचार किया जा रहा है। इसके अलावा मस्जिद के लिए अयोध्या के चांदपुर हरवंश और डाभासंभर पर भी चर्चा हो रही है। लेकिन सहनवा में जमीन दिए जाने की उम्मीद ज्यादा है।

उल्लेखनीय है कि रामजन्मभूमि से करीब 4 किलोमीटर दूरी पर स्थित सहनवा को अयोध्या नगर निगम में शामिल करने के लिए 2017 में ही प्रस्ताव भेजा जा चुका है। अब कहा जा रहा है कि सहनवा समेत 40 गाँवों को अयोध्या नगर निगम में शामिल होने की मंजूरी मिल सकती है।

सहनवा में मीर बाकी की मजार काफी जर्जर स्थिति में है। अयोध्या विवाद से पहले इस जगह को कोई जानता नहीं था। लेकिन, मीर बाकी के यहीं दफन होने की बात सामने आने के बाद यह जगह चर्चा में आई थी। अब यहीं मस्जिद के लिए जमीन देने की बात भी हो रही है।

वैसे, मस्जिद निर्माण के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड जमीन लेगा या नहीं यह अभी स्पष्ट नहीं है। बताया जा रहा है कि बोर्ड 17 नवंबर की बैठक में इस पर फैसला करेगा। इस बीच, बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अगर मनमाफिक 5 एकड़ जमीन चिन्हित होकर मिलेगी तो हम जरूर लेंगे।

घर लौटीं स्वर कोकिला लता मंगेशकर, चेस्ट इन्फेक्शन के कारण अस्पताल में होना पड़ा था दाखिल

स्वर कोकिला लता मंगेशकर की तबीयत अचानक से बिगड़ गई। उन्हें कुछ घंटों के लिए साउथ मुंबई में स्थित ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। सोमवार (नवम्बर 11, 2019) की सुबह ही उन्होंने साँस लेने में तकलीफ की शिकायत की थी, जिसके बाद दोपहर में उन्हें इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया।

ताज़ा सूचना के अनुसार, लता मंगेशकर को वापस उनके घर ले जाया गया है। उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। उनके नजदीकी लोगों ने बताया है कि उन्हें चेस्ट इन्फेक्शन के कारण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। बताया गया है कि उनकी हालत अब पहले से बेहतर है।

सितम्बर 28, 2019 को लता मंगेशकर ने अपना 90वाँ जन्मदिन मनाया था। हजारों गानों को अपनी मधुर आवाज़ से सँवार चुकी लता मंगेशकर 8 दशक तक भारतीय फ़िल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रही हैं और उन्होंने कई भाषाओं में गाने गए हैं। 50 के दशक में एसडी बर्मन से लेकर 21वीं सदी में एएआर रहमान तक, लता मंगेशकर ने कई संगीत निर्देशकों की धुन को अमर बनाया है।

लता मंगेशकर को देश के शीर्ष सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा जा चुका है। उन्हें फिल्म जगत के सबसे बड़े सम्मान दादासाहब फाल्के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। 2014 लोकसभा चुनाव के पहले उन्होंने कहा था कि वो नरेंद्र मोदी को देश का प्रधाममंत्री बनते देखना चाहती हैं। लता मंगेशकर ने मुंबई में मोदी की उपस्थिति में ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ भी गुनगुनाया था। जब उन्होंने पहली बार ये गाना गया था, तब तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू की आँखों में भी आँसू आ गए थे।

मात्र ₹20 देकर सिंगल रूम में रहते हैं JNU के छात्र, बिजली बिल देने को कहा तो सड़क पर उतरे

जेएनयू के छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन पर फी बढ़ाने का आरोप लगा कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान छात्रों ने न सिर्फ़ पुलिस के साथ झड़प की, बल्कि महिला प्रोफेसर के साथ भी बदतमीजी की गई। महिला प्रोफेसर के कपड़े फाड़ने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारी छात्र जेएनयूएसयू के सदस्य और समर्थक हैं, जहाँ वामपंथी छात्र दलों का बोलबाला है। एबीवीपी ने पहले तो छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को समर्थन देने का ऐलान किया था, लेकिन आंदोलन उग्र होने के बाद आरोप लगाया कि इसे ग़लत दिशा में भटकाया जा रहा है और समर्थन वापस ले लिया।

अगर पहले और अभी के फी की बात करें तो मेस बिल और इस्टैब्लिशमेंट चार्ज में कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्रों को बस बिजली और सफाई का बिल देने कहा गया, इतनी सी बात पर वामपंथी छात्र नेताओं ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया। क्रॉकरी, यूटेंसिल्स और समाचार-पत्रों के फी में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। रूम रेंट में बढ़ोतरी की गई है। सिंगल सीटर में छात्रों को मात्र 20 रुपए प्रति महीने देने होते थे। डबल सीटर में तो यह रेंट सिर्फ़ 10 रुपए ही था। अब इसे बढ़ाकर क्रमशः 600 रुपए और 300 रुपए कर दिया गया है। वहीं पानी और बिजली का बिल छात्रों को खपत के हिसाब से भरना पड़ेगा।

मेंटिनेंस, खाना, स्वच्छता और मेस सहित अन्य सर्विस चार्ज के रूप में 1700 रुपए प्रति महीने फी लिया जाएगा। इसी कारण छात्र आक्रोशित हैं। इसके अलावा नए नियमों के मुताबिक़, ‘वन टाइम मेस सिक्योरिटी’ के रूप में 12,000 रुपए लिए जाएँगे। पहले मात्र 5,500 रुपए लिए जाते थे। ये राशि रिफंडेबल है, अर्थात हॉस्टल छोड़ने पर इसे छात्रों को वापस लौटा दिया जाता है। छात्रों को सभी सेवाओं में खपत के हिसाब से रुपए देने को कहा गया है, बस इसीलिए इसे ‘फी हाइक’ बता कर आंदोलन किया जा रहा है। इस दौरान वामपंथी छात्र नेताओं ने कैम्पस में सीआरपीएफ की तैनाती की अफवाह भी फैलाई, जो झूठ निकली।

सोमवार (नवंबर 11, 2019) को जब दीक्षांत समारोह को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू सम्बोधित कर रहे थे, तब छात्र बाहर जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन कर रहे थे। वो कॉन्वोकेशन हॉल तक पहुँचने में लगे हुए थे। इस दौरान उन्होंने पुलिस के साथ झड़प की। पुलिस को वाटर कैनन का प्रयोग करना पड़ा। जेएनयू के कुलपति जगदीश कुमार ने छात्र नेताओं से मुलाक़ात भी की है, लेकिन फिर भी प्रदर्शन लगातार जारी है। एचआरडी मंत्री को रास्ता देने के लिए पुलिस ने वामपंथी छात्र नेता साकेत मेनन से छात्रों को समझाने की अपील की लेकिन उन्होंने साफ़ इनकार कर दिया। छात्रों ने केंद्रीय मंत्री निशंक से भी मुलाक़ात की।

केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को बाहर निकलने के लिए काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। छात्रों ने इस दौरान बैरिकेड्स तोड़ डाले और पुलिस पर हमला कर दिया। कॉन्वोकेशन सेरेमनी के दौरान भी छात्रों का इस तरह से नारेबाजी और प्रदर्शन करना सोशल मीडिया पर लोगों की आलोचना का विषय बना। पुलिस ने अभी तक छात्रों के साथ कोई सख्ती नहीं बरती है। प्रदर्शनकारी छात्राओं को रोकने के लिए महिला पुलिस बल की तैनाती की गई है।

अकबर ने Whatsapp ग्रुप बना कर पाकिस्तानियों को जोड़ा, डाले अयोध्या से जुड़े भड़काऊ मैसेज, गिरफ़्तार

राजस्थान के बीकानेर में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया। वह हिंसा भड़काने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा था। अयोध्या विवाद के बाद पुलिस की सोशल मीडिया पर पैनी नज़र है, क्योंकि हिंसा भड़काने और समाज में घृणा पैदा करने के लिए व्हाट्सप्प ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज धड़ल्ले से फॉरवर्ड किए जाते हैं, फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट्स किए जाते हैं और ट्विटर पर भड़काऊ ट्वीट डाले जाते हैं। बीकानेर में गिरफ़्तार किया गया अकबर एक व्हाट्सप्प ग्रुप का संचालक है।

ख़बर के अनुसार, अकबर ने 2 व्हाट्सप्प ग्रुप बनाया। उन ग्रुप्स में उसने पाकिस्तानी नागरिकों को भी जोड़ा। इसी क्रम में एक पाकिस्तानी नागरिक ने ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज शेयर कर दिया। उसने समाज में घृणा और वैमनयस्य पैदा करने के उद्देश्य से ऐसा किया। पुलिस को जैसे ही इस बात का पता चला, अकबर को गिरफ़्तार कर लिया गया। इस ग्रुप में शामिल पाकिस्तानी व्यक्ति हिन्दू-मुस्लिम के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश कर रहा था।

‘राजस्थान पत्रिका’ के बीकानेर संस्करण में प्रकाशित ख़बर

28 वर्षीय अकबर को आईपीसी की धारा 153 (उपद्रव कराने के लिए लोगों को भड़काना) और 295-ए (धार्मिक भावनाएँ भड़काने का प्रयास करना) के तहत गिरफ़्तार किया गया है। भगवानराम नामक व्यक्ति ने अकबर के ख़िलाफ़ दंतौर थाने में मामला दर्ज कराया था। भगवानराम ने बताया कि अकबर ने उसे भी अपने ग्रुप में शामिल कर लिया था। उसने जैसे ही ग्रुप में आपत्तिजनक मैसेज देखे, पुलिस को सूचित किया। इसके बाद पुलिस ने अकबर को गिरफ़्तार किया।

उक्त ग्रुप में कई आपत्तिजनक मैसेज डाले गए थे। बाबरी ढाँचे के फोटो के साथ उर्दू में मैसेज लिख कर शेयर किया जा रहा है। अंग्रेजी में भी भड़काऊ बातें लिख कर शेयर की जा रही थी। अकबर उस ग्रुप का एडमिन भी था। बता दें कि उत्तर प्रदेश में भी विभिन्न तकनीकों के माध्यम से पुलिस सोशल मीडिया पर नज़र रख रही है। यूपी पुलिस ने बताया है कि सोशल मीडिया पर 8275 से भी अधिक आपत्तिजनक पोस्ट्स के ख़िलाफ़ एक्शन लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इमरजेंसी नंबर सेवा के दफ्तर का दौरा कर तैयारियों की जानकारी ली थी। राजस्थान में भी पुलिस इसी तरह सतर्कता बरत रही है।