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भारत में आत्मघाती हमले की फिराक में था ISIS-K, बढ़ते खतरों को लेकर अमेरिका ने किया आगाह

खूँखार आतंकी संगठन आईएसआईएस का मुखिया बगदादी भले ही मारा गया हो, लेकिन उसके संगठन के अन्य आतंकी अभी भी सक्रिय हैं। ये परेशानी का सबब भी बन सकते हैं।आईएसआईएस का एक खोरासन समूह है, जो अफ़ग़ानिस्तान से ऑपरेट होता है। इसे आईएसआईएस-के भी कहा जाता है। अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों ने जानकारी दी है कि दक्षिण एशिया में आतंक फैलाने की मंशा रखने वाले आईएसआईएस-के ने पिछले साल भारत में आत्मघाती हमले का प्रयास किया था। अमेरिका के ‘काउंटर टेररिज्म सेंटर’ के नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर रसेल ट्रैवर्स ने मंगलवार (नवंबर 5, 2019) को इस बाबत जानकारी दी।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि पूरी दुनिया में आईएसआईएस की 20 से भी अधिक शाखाएँ सक्रिय हैं। इनमें आईएसआईएस-के सबसे ज्यादा खूँखार है। आईएसआईएस के इस समूह में 4,000 आतंकियों के शामिल होने की आशंका है। ट्रैवर्स ने भारतीय मूल की सीनेटर मैगी हसन के सवालों का जवाब देते हुए ये बातें कही। आईएसआईएस-के ने अफ़ग़ानिस्तान से बाहर पाँव फैलाने के लिए कई देशों में आत्मघाती हमलों की योजना बनाई थी। इसी क्रम में उन्होंने भारत में आत्मघाती आतंकी हमला करने का प्रयास भी किया था।

हसन पिछले महीने अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के दौरे पर थीं। वहाँ उन्होंने पाया कि अमेरिकी सेना सबसे ज्यादा आईईआईएस-के को लेकर चिंतित है। इस संगठन का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है और उनके मंसूबे खतरनाक हैं। आईएसआईएस के इस अफ़ग़ानिस्तान ब्रांच को लेकर चिंतित होने की एक वजह ये भी है कि ये संगठन न सिर्फ़ दक्षिण एशिया, बल्कि अमेरिका कोई धरती को दहलाने के लिए भी साजिश रच रहा है। आईएसआईएस की 20 शाखाओं में से कई अपने आतंकी मंसूबों को कामयाब बनाने के लिए ड्रोन का सहारा ले रहे हैं।

आईएसआईएस-के ने 2 साल पहले न्यूयॉर्क में आतंकी हमले की साजिश रची थी, लेकिन ऐन मौके पर अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफबीआई ने इस साजिश को नाकाम कर दिया। 2017 में स्टॉकहोम में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 5 लोग मारे गए थे। सीरिया और इराक में भले ही अमेरिका ने आईएसआईएस की कमर तोड़ दी हो, लेकिन उसका नेटवर्क इतना ज्यादा फैला हुआ है कि ये आतंकी संगठन शायद ही शांत बैंठे। ट्रैवर्स ने बताया है कि 9/11 आतंकी हमले के समय जितने कट्टरपंथी आतंकी थे, आज उनकी संख्या उससे कई गुना ज्यादा हो गई है। आज इन आतंकी संगठनों में जो आतंकी हैं, उनके मन में कट्टरता और घृणा की भावना उस समय से काफ़ी ज्यादा है।

अमेरिका की चिंता ये है कि आतंकियों से तो सेना और ख़ुफ़िया विभाग निपट लेगा, लेकिन उनकी कट्टरपंथी विचारधारा से निपटने में ये संसाधन काम नहीं आएँगे। आतंकी कट्टरवाद से लड़ने के लिए अमेरिका को नए मैकेनिज्म पर काम करने की ज़रूरत है, ऐसा वहाँ के अधिकारियों व नेताओं का मानना है। अलकायदा का हक्कानी नेटवर्क भी चिंता का सबब बना हुआ है, जो अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में अमेरिकी सुरक्षा बलों को निशाना बनता रहता है।

‘रवीश कुमार के फैन’ ने दी सिखों के नरसंहार की धमकी, मोदी समर्थक महिलाओं को करता है प्रताड़ित

सोशल मीडिया पर असामाजिक तत्वों द्वारा लगातार बेख़ौफ़ होकर धमकी देने का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। हाल ही में अबसार ख़ान का मामला सामने आया था, जिसनें भगवान राम और माँ सीता के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया था। अब एक ‘डॉक्टर अरुण जे’ नामक व्यक्ति ने 1984 सिख नरसंहार दोहराने की चेतावनी दी है। उसने सिखों को ‘खालिस्तानी आतंकी’ बताते हुए धमकाया है कि 1984 में जो भी बच गए, उनका सब सफाया कर दिया जाएगा।

अरुण जे का सिख नरसंहार की धमकी वाले ट्वीट का स्क्रीनशॉट, जो उसके अकाउंट डिलीट करने के बाद ट्विटर से गायब हो गया

दरअसल, यह सब शुरू हुआ तजिंदर बग्गा के एक ट्वीट से। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता ने दिलीप सी मंडल के प्रोपगेंडा का जवाब देते हुए उनसे पूछा कि वो नक़ल कर के प्रोफेसर बने हैं या फिर पढ़ कर? बस इतनी सी बात से ख़ुद को ‘रवीश कुमार का फैन’ बताने वाला अरुण नाराज़ हो गया और उसने नरसंहार दोहराने की धमकी दी। दिलीप मंडल ट्विटर को दलित विरोधी बताते हुए उसका ख़िलाफ़ ‘जय भीम ट्विटर’ अभियान चला रहे हैं, जिसमें उन्हें कॉन्ग्रेस का भी समर्थन मिला है। नीचे आप अरुण का धमकी भरा ट्वीट देख सकते हैं:

रवीश कुमार हमेशा आरोप लगाते हैं कि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फॉलो किए जाने वाले लोग माहौल को बिगाड़ रहे हैं। साथ ही वो किसी के भाजपा कनेक्शन को लेकर भी उस पर निशाना साधते हैं। वो सीधा भाजपा पर आरोप लगाते हैं कि वो असामाजिक तत्वों को शह दे रही है। हालाँकि, ख़ुद को ‘रवीश कुमार का फैन’ बताने वाले व्यक्ति की नरसंहार वाली धमकी को लेकर वह अपना रुख स्पष्ट करते हैं या नहीं, इसका इंतजार है। नीचे आप डॉक्टर अरुण जे का ट्विटर बॉयो देख सकते हैं:

ख़ुद को ‘रवीश कुमार का फैन’ बताता है डॉक्टर अरुण जे, देखें उसका बायो

अरुण जे पर कुछ महिलाओं ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसके बारे में पता चला है कि वो कई महिलाओं के साथ सिर्फ़ इसलिए दुर्व्यवहार करता है, क्योंकि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फैन हैं। श्रुति नागपाल नामक महिला ने आरोप लगाया कि उसने उनके साथ बदतमीजी की। इतना ही नहीं, श्रुति ने बताया कि अरुण उनके कई साथी महिलाओं को भी प्रताड़ित कर चुका है। उन्होंने कहा कि अरुण यह सब सिर्फ़ इसलिए करता है, क्योंकि वे महिलाएँ पीएम मोदी की समर्थक हैं।

अरुण जे की इस धमकी से आहत तेजिंदर बग्गा ने दिल्ली पुलिस से उस पर कार्रवाई करने की शिकायत की। बग्गा ने दिल्ली पुलिस से अनुरोध किया कि इस ट्विटर हैंडल पर कार्रवाई की जाए। हालाँकि, अभी तक इस सम्बन्ध में दिल्ली पुलिस का कोई जवाब नहीं आया है। इधर अरुण जे ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया। जब उसने देखा कि लोग उसके विरोध में उतर आए हैं, तो उसने अपना अकाउंट डिलीट कर दिया। उसके अकाउंट की जगह अब ये मैसेज दिख रहा है:

अरुण जे ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर लिया और भाग खड़ा हुआ

ऐसा प्रतीत होता है कि ख़ुद को रवीश का फैन बताने वाला अरुण पुलिस के डर से ट्विटर छोड़ कर भाग खड़ा हुआ, क्योंकि उसकी सारी करतूतें एक-एक कर के सामने आ रही थीं और लोग दिल्ली पुलिस को टैग कर के उस पर कार्रवाई की माँग कर रहे थे।

GCTOC पर 16 साल बाद मुहर: मोदी के सीएम रहते 2 बार लौटा दिया गया था बिल

गुजरात आतंकवाद नियंत्रण एवं संगठित अपराध (जीसीटीओसी) बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है। गुजरात की बीजेपी सरकार ने मार्च 2015 में में कुछ संशोधनों के साथ इस बिल को पारित किया था। राष्ट्रपति द्वारा इसे मंजूरी मिलने की जानकारी गुजरात के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने दी है। पहले इस बिल का को गुजरात संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक (जीयूजेसीओसी) नाम दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तब दो बार इस बिल को मंजूरी नहीं मिल पाई थी।

जडेजा ने कहा कि इस बिल पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी का सपना पूरा हुआ है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्‍यमंत्री रहते राज्‍य के नागरिकों की सुरक्षा के लिए इस कानून का मसौदा तैयार किया था। 16 साल बाद इसे मंजूरी मिल सकी है।”

इस कानून की खासियत यह है कि टैप की हुई टेलीफोन बातचीत को अब एक वैध सबूत माना जाएगा। इससे शराब की तस्करी, फिरौती, जालसाजी जैसे संगठित अपराधों पर शिकंजा कसने की उम्मीद है।

जडेजा ने बताया कि अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने से गुजरात जैसे सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा और अपराध की जाँच के लिए पुलिस को अधिक अधिकार और समय मिल सकेगा। राज्य सरकार विशेष अदालतों का गठन करेगी और डिविजन सेशन कोर्ट में मामला चल सकेगा। इसके अलावा सरकार अतिरिक्त सरकारी वकील और लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर सकेगी।

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते 2003 में पहली बार यह बिल पास किया गया था। इसके बाद से ही यह विधेयक लंबित था। तीन बार राष्ट्रपति ने इसे लौटाया था। दो बार नरेंद्र मोदी के गुजरात सीएम रहते हुए और तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री रहते हुए।

सबसे पहले संचार अवरोधन के प्रावधान का हवाला देकर तात्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने इस पर असहमति दिखाई थी और फिर साल 2008 में पूर्व राषट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इसे वापिस कर दिया था।

तीसरी बार साल इस विधेयक को राज्य सरकार ने गुजरात आतंकवाद नियंत्रण एवं संगठित अपराध अधिनियम नाम से विधानसभा से पारित कराया, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस कर दिया। गृह राज्यमंत्री के अनुसार, “ये कानून गुजरात में आतंकवादी गतिविधि पर पूर्ण विराम लगाने में मदद करेगा और साथ ही 1,600 किलोमीटर के समुद्री तट की सुरक्षा में मदद करेगा … यह कानून पुलिस अधिकारियों को अधिक अधिकार देगा।”

इसके अलावा इस कानून के तहत पुलिस अधिकारी के समक्ष दिया गया बयान सबूत के रूप में मान्‍य होगा और पुलिस को आरोप-पत्र पेश करने के लिए छह माह ( करीब 180 दिन) का समय मिलेगा। बता दें अन्‍य अपराध में चार्जशीट 90 दिन में पेश करने का प्रावधान होता है।

करतारपुर कॉरिडोर: अमृतसर में लगे सिद्धू-इमरान के पोस्टर, पाक के वीडियो में नजर आया भिंडरावाला

करतारपुर कॉरिडोर का 9 नवंबर को उद्घाटन होना है। उससे पहले जहॉं पंजाब में इस मसले पर सियासत गरम है, वहीं इसके पीछे छिपी पाकिस्तानी की मंशा भी उजागर हो रही है। पाकिस्तानी सरकार ने करतारपुर साहिब के लिए एक आधिकारिक गाना लॉन्च किया है। चार मिनट के इस वीडियो में जरनैल सिंह भिंडरावाला समेत कई खालिस्तानी नेताओं की तस्वीर दिखाई गई है। दूसरी ओर, पंजाब के अमृतसर में लगे पोस्टरों में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिं​​ह सिद्धू साथ-साथ नजर आ रहे हैं। पोस्टर में पंजाब के पूर्व मंत्री सिद्धू और इमरान को करतारपुर कॉरिडोर शुरू होने का असली हीरो बताया गया है।

सिद्धू के पोस्टर ऐसे वक्त में लगाए गए हैं जब पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह करतारपुर कॉरिडोर खोले जाने के पीछे पाकिस्तान की मंशा को लेकर शक जता चुके हैं। अमरिंदर सिंह ने कहा था कि इसका मकसद पंजाब में अलगाववाद को बढ़ाना हो सकता है। उन्होंने कॉरिडोर और गुरु नानक के नाम पर यूनिवर्सिटी शुरू करने जैसे पाकिस्तानी फैसलों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताई थी। इतना ही नहीं, पाकिस्तान के जिस जिले में यह गुरुद्वारा है वहॉं आतंकी कैंप चलाए जाने की भी खबरे हैं।

पाकिस्तान ने जो वीडियो जारी किया है उससे भी उसकी मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। वीडियो में जहॉं एक तरफ पाकिस्तान में मौजूद सभी गुरुद्वारों की झलक हैं, वहीं बैकग्राउंड में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान गोल्डन टेंपल में मारा गया खालिस्तानी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाला, मेजर जनरल साहिब सिंह और अमरिक सिंह खालसा भी नजर आ रहा है।

अमृतसर की सड़कों पर जो पोस्टर लगाए गए हैं, उसके पीछे पार्षद हरपाल सिंह वेरका हैं। वह सिद्धू के करीबी माने जाते हैं। पोस्टर लगने के बाद वेरका ने व्हाट्सएप के जरिए सिद्धू को तस्वीरें भेजी। जवाब में सिद्धू ने लिखा, “थैक्यू हरपाल जी, यू आर फैमिली।”

मीडिया से बातचीत में हरपाल सिंह वेरका ने कहा, “मैं उनलोगों को बधाई दूँगा जिनकी वजह से ये (करतारपुर कॉरिडोर) पूरा हुआ। सिद्धू साहब और इमरान खान को बधाई। कल और ज्यादा पोस्टर लगाएँ जाएँगे।”

गौरतलब है कि करतारपुर कॉरिडोर के जत्थे में जाने के लिए नवजोत सिंह सिद्धू ने विदेश मंत्रालय और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को खत लिखकर अनुमति मांगी है। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है, “एक सिख के रूप में, इस ऐतिहासिक अवसर पर अपने महान गुरु बाबा नानक को श्रद्धा सुमन अर्पित करने और अपनी जड़ों से जुड़ने का यह एक महान अवसर होगा। इसलिए, मुझे इस पावन अवसर पर पाकिस्तान जाने की अनुमति दें।”

महाराष्ट्र: भागवत दरबार में सरकार गठन का मामला, पवार आज खोल सकते हैं पत्ता

महाराष्ट्र में सरकार गठन पर जारी राजनीतिक खींचतान अब आरएसएस तक पहुॅंच गया है। शिवसेना ने सरसंघचालक मोहन भागवत को पत्र लिख कर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को मध्यस्थता करने के लिए भेजने को कहा है। वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उनसे नागपुर में मंगलवार रात को मुलाकात की। शिवसेना का कहना है कि 2014 में उसने भाजपा की सारी शर्तें मान ली थीं लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। मंगलवार (नवंबर 5, 2019) को सीएम फडणवीस ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से भी मुलाक़ात की। उससे पहले वो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी मिल चुके थे।

रात के क़रीब 9.30 बजे मुख्यमंत्री फडणवीस और आरएसएस प्रमुख के बीच बातचीत शुरू हुई। ये बैठक तक़रीबन 1 घंटे तक चली। इस बातचीत के दौरान सीएम फडणवीस ने सरकार गठन को लेकर अब तक की गई कवायद और शिवसेना की माँगों का पूरा ब्यौरा संघ प्रमुख के सामने पेश किया। संघ प्रमुख ने जोर दिया कि चूँकि दोनों पार्टियों ने साथ मिल कर चुनाव लड़ा है और उनकी विचारधारा भी समान है, इसीलिए मिलजुल कर नई सरकार का गठन होना चाहिए। इससे भाजपा और शिवसेना के बीच बातचीत शुरू होने के आसार भी नज़र आ रहे हैं।

मीडिया में चल रही ख़बरों के अनुसार, भाजपा और शिवसेना बैकडोर से बातचीत के लिए राजी हो सकते हैं। हालाँकि, भाजपा सीएम, स्पीकर और गृह मंत्री का पद अपने पास ही रखेगी और इन्हें लेकर कोई समझौता नहीं होगा। भाजपा मंत्रियों की संख्या को लेकर अपने रुख में नरमी ला सकती है। सबकी नज़रें एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर लगी है। आज दोपहर वो मीडिया को सम्बोधित करेंगे। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाक़ात के बाद भी उन्होंने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले थे।

इस बीच, मुलाक़ातों और बैठकों का सिलसिला जारी है। महाराष्ट्र भाजपा की कोर कमिटी की बैठक बुधवार को सीएम फडणवीस के आवास पर होगी। शिवसेना ने भाजपा को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर पार्टी बात नहीं मानती है तो वे एनसीपी के साथ मिल कर सरकार बना सकती है। शिवसेना नेता किशोर तिवारी ने संघ प्रमुख को पत्र लिख कर कहा कि वो नितिन गडकरी को मध्यस्तथा के लिए भेजें, क्योंकि वो 2 घंटे में इस मामले को सुलझाने की काबिलियत रखते हैं।

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बालासाहब थोराट ने इस पूरे गतिरोध के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सीएम पद के लिए पार्टी जनता को धोखा दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि फडणवीस ने अपने कार्यकाल के दौरान न सिर्फ़ पूरा विपक्ष, बल्कि शिवसेना का भी सफाया करने का प्रयास किया। थोराट ने कॉन्ग्रेस में टूट की अटकलों को ख़ारिज करते हुए दावा किया कि उनकी पार्टी एकजुट है। महाराष्ट्र के वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि सरकार बनाने के सम्बन्ध में कभी भी ‘गुड न्यूज़’ मिल सकती है।

बंगाल के मालदा में सड़क किनारे गाय बाँधने पर पीट-पीट कर भीड़ ने की अजय की हत्या, 3 गिरफ्तार, मुख्य आरोपित फरार

पश्चिम बंगाल के मालदा में गाय बाँधने की बात पर भीड़ ने एक आदमी को पीट-पीट कर मार डाला। बता दें कि सड़क किनारे अपनी गाय बाँध रहे अजय कुमार दास को नशे में धुत कुछ हथियारबंद लोगों ने लाठी-डंडों से मारना चालू कर दिया। शनिवार रात को हुई इस घटना के सम्बन्ध में पुलिस ने अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है हालाँकि इस घटना का मुख्य-आरोपित अभी भी फरार है।

पुलिस के मुताबिक अजय ने गाय पाल रखी थी, जिसे सड़क किनारे बाँधने के चलते रोड पर वाहनों को आवाजाही में दिक्कत का सामना करना पड़ता था। शनिवार रात चिरंजीत मंडल की अगुवाई में कुछ लोगों की भीड़ ने अजय दास पर हमला बोल दिया। घटना मालदा के गोलोकटोला गाँव की है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जब अजय को उन लोगों ने अपने बाँधे हुए जानवर हटाने के लिए कहा तो उसने इससे साफ़ इनकार कर दिया, इसीके बाद दोनों पक्षों के बीच शुरू कहासुनी ज़ोरों पर पहुँच गई।

देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में तब्दील हो गई और नशे में धुत लोगों ने अजय दास पर अपनी लाठी और डंडों से हमला बोलकर उसे बुरी तरह ज़ख़्मी कर दिया और लहू-लुहान हालत में छोड़कर भाग गए। इस घटना के बाद 42 वर्षीय अजय को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया मगर शरीर पर आई गंभीर चोटों की वजह से अगले ही दिन रविवार को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने अजय के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

मृतक अजय की माँ ने छः लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है इनमें से तीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है जिनका नाम बासुदेब मंडल, भूदेब मंडल और काजल मंडल है। सोमवार को इन तीनों को अदालत में पेश किया गया हालाँकि इस घटना का मुख्य आरोपित अभी फरार है। मामले पर जानकारी देते हुए मोथाबरी थाने के सोम्जित मालिक ने बताया अजय एक बीमारी से जूझ रहा था जिसके चलते वह यह बर्दाश्त न कर सका और उसकी मौत हो गई।

गूगल बढ़ावा दे रहा गज़वा-ए-हिन्द को: ऍप और किताब डाउनलोड के लिए उपलब्ध?, सोशल मीडिया पर दिखा गुस्सा

भारतीय खिलाड़ी, स्पेशल फोर्सेज़ के रिटायर्ड सैनिक और भाजपा सदस्य मेजर सुरेंद्र पूनिया ने ट्विटर पर हैरतंगेज़ स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं। इसमें गूगल के ऍप स्टोर पर ‘गज़वा ए हिन्द’ के नाम से एक ऍप और एक किताब डाउनलोड करने के लिए उपलब्ध दिखाए जा रहे हैं। इस ट्वीट में उन्होंने एनआईए, गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को टैग करते हुए उनका ध्यान दिलाया है। साथ ही अपने फॉलोवर्स से इस ऍप को गूगल को रिपोर्ट करने के लिए भी कहा है।

बता दें कि गज़वा ए हिन्द का मतलब हिंदुस्तान पर हमला और उसे दार उल इस्लाम बनाने की लड़ाई होता है। आठवीं सदी में सिंध और मुल्तान को खलीफा के लिए जीतने वाले मुहम्मद बिन खलीफा से लेकर आज पाकिस्तान और अन्य कट्टरपंथियों को भारत से दुश्मनी इसी के चलते है।

मेजर पूनिया के ट्वीट को ट्विटर पर तेज़ी से रीट्वीट भी किया जा रहा है। एक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समर्थक प्रशांत ने कहा कि अगर गूगल इस पर कार्रवाई न करे तो गूगल पर कार्रवाई होनी चाहिए।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अंशुल सक्सेना ने भी रीट्वीट करते हुए संचार मंत्री रवि शंकर प्रसाद को टैग किया। उन्होंने पूछा कि गूगल अपने प्लेटफोर्म पर कट्टरपंथ को जड़ें कैसे जमाने दे सकता है। साथ ही ऍप और किताब की लिंक भी डालते हुए इन्हें रिपोर्ट करने की अपील की।

कुछ सोशल मीडिया यूज़रों ने रिपोर्ट करने की प्रक्रिया भी स्टेप बाई स्टेप बतानी शुरू कर दी है। सलाह दी है कि रिपोर्ट करते समय कैटेगरी में ‘अब्यूसिव ऑर हार्मफुल कंटेंट’ रखा जाए।

पुलिस कर्मियों की माँगें मानी गईं, धरना ख़त्म: वकीलों के समर्थन में AAP, कहा- दिल्ली पुलिस BJP की सशस्त्र सेना

दिल्ली में चला आ रहा पुलिस बनाम वकीलों का टकराव खत्म होता दिख रहा है। मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार धरना, प्रदर्शन और हड़ताल कर रहे पुलिस वालों की सभी माँगें मान ली गईं हैं, और 11 घंटे तक चली हड़ताल फ़िलहाल खत्म हो गई है। इसके पहले इस बारे में गृह मंत्री अमित शाह के घर बैठक भी हुई। बकौल न्यूज़ 18, उनकी माँगें थीं:

1. निलंबित पुलिस अधिकारी को बहाल करना,
2. घायल पुलिस अधिकारी को मुआवजा,
3. अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई,
4. सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील,
5. पुलिस कर्मियों के साथ मारपीट करने वाले व्यक्तियों का सत्यापन,
6. निचले अधिकारियों के लिए पुलिस एसोसिएशन की माँग।

जॉइंट कमिश्नर देवेश श्रीवास्तव ने पुलिस वालों को आज शाम (5 नवंबर, 2019 को) उनकी सभी माँगें मान लेने का आश्वासन उनसे मुलाकात करके दिया है। इसके पहले दिल्ली पुलिस के कमिश्ननर अमूल्य पटनायक की अपील का पुलिस वालों पर कोई असर नहीं पड़ा था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस जहाँ एक तरफ विरोध प्रदर्शन कर रही थी वहीं सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर हमला बोला है। ‘आम आदमी पार्टी’ ने कहा कि दिल्ली पुलिस ‘राजनीतिक इकाई’ में तब्दील हो गई है। यह बीजेपी की सशस्त्र शाखा की तरह काम कर रही है, जबकि इसका काम कानून-व्यवस्था बनाए रखने का है। वकीलों के समर्थन में आई आप ने दिल्ली पुलिस पर कई सवाल खड़े किए हैं।

पिछले हफ्ते के शनिवार (2 नवंबर, 2019 को) पार्किंग विवाद को लेकर दिल्ली के तीस हज़ारी कोर्ट के बाहर वकीलों और पुलिस के बीच हिंसा हुई थी। एक पुलिस कार और 20 अन्य वाहनों को आग लगा दी गई थी। 2 पुलिस वालों को दिल्ली हाई कोर्ट ने सस्पेंड कर दिया था और न्यायिक जाँच के आदेश दे दिए थे

इस मामले के खिलाफ आज दिल्ली के हज़ारों पुलिस वाले वर्दी उतार कर सादे कपड़ों में विरोध प्रदर्शन और हड़ताल करने लगे थे। इसके अलावा कई वर्तमान और भूतपूर्व अफसरों ने भी इसके खिलाफ ट्विटर पर आवाज़ उठाई। जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी शेष पॉल वैद ने लिखा कि उन पुलिस वालों की हालत देखना दुखद है जो अपनी पूरी ज़िंदगी कानून व्यवस्था बनाए रखने में बिताते हैं।

कर्नाटक की सेवारत आईपीएस डी रूपा ने लिखा कि अगर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस वालों का मनोबल गिरेगा।

वे उस ट्वीट को रीट्वीट कर रहीं थीं, जिसमें कल (4 नवंबर, 2019 को) एक पुलिस वाले के साथ वकीली कपड़े पहने लोगों द्वारा हाथापाई का वीडियो था। वीडियो में बताया गया था कि यह साकेत कोर्ट का दृश्य है।

अंडमान और निकोबार के डीजीपी दीपेंद्र पाठक ने भी कहा कि काले कोट की आड़ में सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा बने लोगों में डर बैठाना ज़रूरी है।

आईपीएस एसोसिएशन ने भी घटना की निंदा में ट्वीट करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कानून तोड़ने वाले सभी लोगों की कड़ी निंदा करते हुए सभी पुलिस वालों को हमले के शिकार पुलिस वालों के साथ खड़ा बताया।

शिवसेना का भाजपा को अल्टीमेटम, 48 घंटे में बता दो, वरना NCP के साथ बनाएँगे सरकार: रिपोर्ट्स

महाराष्ट्र में सत्ता को लेकर खींचतान और बढ़ गई है। सूत्रों के हवाले से मीडिया में खबरें आ रहीं हैं कि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद की माँग और 50-50 फॉर्मूले को लेकर अडिग रहने पर शिव सेना अपने मुख्यमंत्री की सरकार बनाने के लिए शारद पवार की नेशनलिस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) की सहायता भी ले सकती है।

डीएनए में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए इस संभावित सरकार को कॉन्ग्रेस का अभी समर्थन बाहर से प्राप्त होगा। डीएनए के शिव सेना सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के साथ सभी तरह की बातचीत अब बंद हो चुकी है और पार्टी अब प्लान बी की तरफ चल रही है।

कॉन्ग्रेस का सहयोग इस प्लान के लिए इसलिए ज़रूरी है कि सरकार बनाने के लिए ज़रूरी बहुमत (145) शिव सेना और एनसीपी को मिलाकर भी नहीं बनेगा। शिव सेना के जहाँ 56 विधायक जीते हैं वहीं 54 विधायक एनसीपी के इस लोकसभा चुनाव में विजयी हुए हैं। भाजपा 105 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और कॉन्ग्रेस के 44 विधायक सदन में होंगे। यानि कॉन्ग्रेस+एनसीपी+शिव सेना का कुल आँकड़ा 153 का बनेगा।

इसके लिए अगर यह गठबंधन बनता है तो शिव सेना अपने केंद्रीय मंत्रियों को भी मोदी सरकार से इस्तीफ़ा देने के लिए कहेगी। डीएनए की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इस सरकार की राह प्रशस्त करने के लिए शरद पवार सोनिया गाँधी से मिले थे। कथित तौर पर यह मुलाकात कल (सोमवार, 5 नवंबर, 2019 को) हुई थी।

इससे पहले शिव सेना नेता और पार्टी के मुखपत्र सामना के कार्यकारी सम्पादक संजय राउत ने शनिवार (2 नवंबर, 2019 को) को कहा था कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी पार्टी की माँग उचित है और भाजपा से साथ सत्ता साझा करने का आधार जीती गई सीटों की संख्या नहीं, बल्कि चुनाव से पहले हुआ समझौता होना चाहिए।

राउत ने एक समाचार चैनल से कहा कि सरकार का गठन (चुनाव से पहले भाजपा और शिवसेना के बीच) पहले बनी सहमति के आधार पर होना चाहिए न कि इस आधार पर कि सबसे बड़ा एकल दल कौन-सा है।

उसके बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने पार्टी के पास 170 से ज्यादा विधायकों का समर्थन होने का दावा कर दिया। उनके मुताबिक ‘महाराष्ट्र के हित में’ शिवसेना के साथ कॉन्ग्रेस और एनसीपी आने को तैयार थे।

अशोक लवासा पर ‘कुछ को’ अनुचित लाभ पहुँचाने का आरोप: केंद्र ने कंपनियों को लिखा पत्र, माँगी जानकारी

केंद्र सरकार ने कथित तौर पर 11 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, पीएसयू) को गोपनीय पत्र लिखकर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा के खिलाफ जानकारी माँगी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मोदी सरकार ने पत्र में इन कंपनियों को लिखा है कि वे अपने रिकॉर्डों में चेक करें कि 2009 से 2013 के बीच अशोक लवासा ने उन कंपनियों में ‘गैर वाजिब प्रभाव’ का इस्तेमाल तो नहीं किया था। गौरतलब है कि 2009 से 2013 के बीच अशोक लवासा को कॉन्ग्रेस की यूपीए सरकार में ऊर्जा मंत्रालय में तैनाती मिली हुई थी।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर में दावा किया गया है कि यह गोपनीय पत्र मौजूदा ऊर्जा सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की सहमति से लिखा गया है। पत्र की तारीख इस साल के अगस्त के अंत (29 अगस्त, 2019) की बताई जा रही है। पत्र में लिखा है, “यह आरोप लगाया गया है कि श्री अशोक लवासा, आईएएस ने ऊर्जा मंत्रालय में सितंबर 2009 से दिसंबर 2013 के बीच के अपने कार्यकाल में, जॉइंट सेक्रेटरी/एडिशनल सेक्रेटरी/स्पेशल सेक्रेटरी के तौर पर अपनी आधिकारिक स्थिति का इस्तेमाल कुछ कंपनियों/एसोसिएट कंपनियों को अनुचित लाभ पहुँचाने के लिए किया।”

इंडियन एक्सप्रेस ने यह भी दावा किया है कि उसने जब इस आरोप के बारे में लवासा से पूछा तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है, और वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे। लवासा मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के बाद वरिष्ठता में दूसरे सबसे वरिष्ठ आयुक्त हैं।

जिन कंपनियों को लवासा मामले में खोजबीन करने के लिए कहा गया है, उनमें एनटीपीसी, एनएचपीसी लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड और आरईसी लिमिटेड (पूर्व में रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन) शामिल हैं। इस पत्र के साथ ऊर्जा मंत्रालय ने एक सूची भी नत्थी की है, जिसमें उन 14 कंपनियों के नाम हैं जिनमें अशोक लवासा की पत्नी नावेल लवासा डायरेक्टर के पद पर तैनात रह चुकीं हैं। इसके अलावा लवासा दम्पति की भागीदारी वाले प्रोजेक्टों की भी सूची मंत्रालय ने अटैच की है।

इसके पहले सितंबर में नावेल लवासा को इनकम टैक्स विभाग की ओर से क़ानूनी नोटिस भी जारी हुआ था। इसमें उन पर अपनी आय का खुलासा न करने और आय से अधिक सम्पत्ति के आरोप लगाए गए थे। नावेल एक पूर्व बैंकर हैं, जिन्होंने 2005 में एसबीआई से इस्तीफ़ा दे दिया था।