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साइंस में Failure नहीं होते, सिर्फ Efforts, Experiments होते हैं और होती है Success: PM मोदी

कोलकाता में मंगलवार को विडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाँचवें भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव का उदघाटन किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि यह कार्यक्रम ऐसी जगह हो रहा है जहाँ मानवता की सेवा करने वाली विभूतियों ने जन्म लिया है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम ऐसे वक़्त में हो रहा है कि जब 7 नवम्बर को सीवी रमण और 30 नवम्बर जगदीश चन्द्र बोस की जयंती है।

‘RISEN-रिसर्च इनोवेशन एंड साइंस इम्पावरिंग दा नेशन’ को कार्यक्रम का थीम रखने के लिए पीएम मोदी ने आयोजकों का आभार प्रकट किया और कहा कि देश में साइंस और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम बड़ा मज़बूत होना चाहिए। इसपर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इकोसिस्टम ऐसा होना चाहिए जो प्रभावी हो और प्रेरणादाई भी।

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने विद्यार्थियों को भी संबोधित किया और कहा कि वे चुनौतियों को अपनी अपनी तरह से हल करें। उन्होंने कहा कि नीतियों और आर्थिक मदद के ज़रिए हजारों स्टार्टअप को सपोर्ट किया। देश में फैले साइंटिफिक टेम्परामेन्ट पर अपनी ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे ख़ुशी है कि आज यह देश में एक अलग ही स्तर पर है। उन्होंने चंद्रयान का उदहारण देते हुए बताया कि कैसे भारत के वैज्ञानिकों ने उस मिशन में पूरी मेहनत की थी, बहुत उम्मीदें बंध जाने के बाद भी वह योजना के अनुसार नहीं हुआ मगर अंततः इस मिशन में भारत के वैज्ञानिकों को सफलता हाथ लगी।

विज्ञान के प्रति युवाओं में बढती रूचि को लेकर मोदी ने कहा कि यह हमारा दायित्व है कि विद्यार्थियों की शक्ति को 21वीं सदी के साइंटिफिक एनवायरनमेंट में सही माहौल में लेकर जाएँ, एक अच्छा प्लेटफोर्म दें। इस दौरान उन्होंने संस्कृत के ही एक श्लोक का भी ज़िक्र किया “तत् रूपं यत् गुणाः। तत् विज्ञानं यत् धर्मः” यानि आपका बाहरी व्यक्तित्व तभी सार्थक है जब आप गुणवान भी हों, इसी तरह विज्ञान उपयोगी वही है जो समाज के लिए हितकारी हो।

उन्होंने साइंस फॉर सोसाइटी के महत्त्व पर बात करते हुए बताया कि कैसे विज्ञान के इस्तेमाल से जीवन सुगम बनाया जा सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि “विज्ञान में फेलियर कुछ नहीं होता, सब कुछ प्रयत्न या प्रयोग होते हैं और फिर कामयाबी होती है। इसीलिए लम्बे मुनाफे का सोचना चाहिए।

शिवसेना टूटेगी और फडणवीस बनेंगे मुख्यमंत्री, 25 विधायक BJP के संपर्क में: महाराष्ट्र के MLA का दावा

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बावजूद सरकार कौन बनाएगा इसकी तस्वीर अब तक साफ़ नहीं हो पाई है। सभी राजनीतिक दल महाराष्ट्र की सत्ता तक पहुँचने के लिए जरुरी अंक जुटाने में लगे हैं वहीं इस बीच एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीतकर आए निर्दलीय विधायक रवि राणा ने बयान दिया है कि शिवसेना के पच्चीस विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। बता दें कि राणा ने भाजपा को अपना समर्थन देने की घोषणा की है। सोमवार को अपनी पत्नी और सांसद नवनीत कौर राणा के साथ उन्होंने मुंबई में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से भी मुलाक़ात की।

भाजपा और शिवसेना के बीच चल रही तकरार को लेकर उन्होंने शिवसेना के नेताओं को भी नसीहत दी और कहा कि संजय राउत के मुँह पर लगाम लगनी चाहिए। दोनों राजनीतिक दलों के बीच चल रही तकरार में शिवसेना की ओर से बयानबाज़ी करने में संजय राउत सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को राउत पर नियंत्रण रखना चाहिए। रवि ने राउत को शिवसेना का ‘तोता’ बताया है।

उन्होंने कहा कि वे खुद शिवसेना के करीब 25 विधायकों के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि अगर फडणवीस मुख्यमंत्री बनते हैं तो शिवसेना में टूट संभव है। राणा ने शिवसेना पर हद से ज्यादा अहंकारी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि फडणवीस को शिवसेना पर लगाम लगानी चाहिए। रवि ने कहा कि 21 अक्टूबर को लोगों ने किसी एक पार्टी के लिए नहीं बल्कि लोगों ने इस युति (गठबंधन) के लिए वोट दिया है। बता दें कि इस चुनाव परिणाम में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिला सका था वहीं भाजपा अभी 105 सीट जीतने के साथ सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 145 सीटों के अंक से दूर है।

मेरी अम्मी बीमार पड़ जाएँगी, कश्मीर में बहुत सर्दी पड़ती है: महबूबा की बेटी की ‘इल्तजा’

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की मुखिया महबूबा मुफ़्ती की बेटी ने सर्दियों में उन्हें उनकी नज़रबंदी के वर्तमान स्थान से कहीं और शिफ्ट किए जाने की माँग की है। बकौल इल्तजा मुफ़्ती, महबूबा का वर्तमान निवास कश्मीर घाटी की कड़ी ठंड के हिसाब से अनुकूल नहीं है।

इल्तजा ने ट्विटर पर महबूबा मुफ़्ती के अकाउंट से यह भी लिखा कि उन्होंने एक महीने पहले ही श्रीनगर के जिला कलेक्टर को इस बारे में पत्र लिखा था। “अगर उन्हें कुछ हो गया तो भारत सरकार ज़िम्मेदार होगी।”

उन्होंने साथ में अंग्रेजी में हाथ से लिखे गए एक पत्र की कॉपी भी ट्वीट की है। इसमें लिखा है कि महबूबा को मेडिकल जाँच में विटामिन डी, हीमोग्लोबिन और कैल्शियम की कमी पाई गई है। उनका निवास (जहाँ वे नज़रबंद हैं) कश्मीर की कड़ाके की सर्दी से बचाव नहीं कर सकता है। इल्तजा ने इन बिंदुओं के आधार पर उन्हें किसी दूसरे, उचित स्थान पर तत्कालिक रूप से शिफ्ट किए जाने की माँग की है।

लेकिन ट्विटर पर लोगों को इल्तजा की यह गुज़ारिश और ट्वीट रास नहीं आए, और उनकी जम कर ट्रोलिंग शुरू हो गई है। एक व्यक्ति ने लिखा कि अगर यह एक महीने पुराना पत्र है तो इसमें जिला कलक्टर की रिसीविंग और स्टाम्प कहाँ है।

इसके अलावा कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि यह लो कैल्शियम लेवल आदि केवल मुफ़्ती की समस्याएँ नहीं हैं। विकाशील देशों की कई महिलाएँ इनसे ग्रस्त हैं। महबूबा को कुछ नहीं होने वाला।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म किए जाने के पहले से ही महबूबा मुफ़्ती, उमर अब्दुल्ला, फारूख अब्दुल्ला समेत घाटी के तमाम नेताओं को केंद्र सरकार ने एहतियातन नज़रबंद कर दिया था।

घाटी में इन्टरनेट सेवाएँ बंद कर दिए जाने और खुद की नज़रबंदी के चलते 370 हटने के तुरंत बाद महबूबा मुफ़्ती अन्य नेताओं की तरह सोशल मीडिया पर अनुपलब्ध रहीं। लेकिन विगत 20 सितंबर से उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट को इस्तेमाल करने का अधिकार बेटी इल्तजा मुफ़्ती को दे रखा है। 

अबसार ख़ान ने भगवान राम और सीता को कहे अश्लील अपशब्द: महिला को भेजे प्राइवेट पार्ट्स के फोटो

पुलिस सोशल मीडिया पर घृणा फैला रहे असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करने के लाख दावे करे लेकिन ऐसे लोग अभी भी बाज नहीं आ रहे हैं। इस सूची में ताज़ा नाम मोहम्मद अबसार का जुड़ा है। मोहम्मद अबसार ने न सिर्फ़ गलती की बल्कि बड़े गर्व से अपना नाम-पता भी बताया। यह दिखाता है कि न तो उसे समाज का कोई भय है, और न ही क़ानून का कोई डर। एक महिला के साथ सोशल मीडिया पर दुर्व्यवहार करने के बाद उसने लोगों को धमकी भी दी। अभिषेक आनंद नामक व्यक्ति ने अपने ट्विटर हैंडल से अबसार ख़ान के करतूतों के बारे में जानकारी दी।

दरअसल, अबसार ख़ान एक महिला को अपने प्राइवेट पार्ट्स की फोटो भेज रहा था। वह महिला अभिषेक की दोस्त थीं। अभिषेक ने अबसार को फेसबुक पर मैसेज कर के डाँटा और पूछा कि उसे अपने प्राइवेट पार्ट्स की फोटो दिखाने का शौक क्यों है? इसके बाद अबसार ख़ान ने जिन शब्दों का प्रयोग किया, उसे आप भी देखिए:

  • तू लेगा #$% में?
  • या %*# में डलवाएगा?
  • *#डी की औलाद
  • *#&%की की नस्ल
  • बहन के *#%

इसका बाद अबसार ख़ान ने अपने मजहब को लेकर बातें करनी शुरू कर दी और हिन्दुओं के प्रति अपनी घृणा को प्रदर्शित किया। उसने कहा:

“अभी तो हम सिर्फ़ 18% हैं तो तेरे जैसों की फटी पड़ी है। सोच जिस दिन हम 50% हो गए, उस दिन क्या होगा? भगा-भगा के मारेंगे। माध#चो* के बच्चों न तो राम की #**# मिलेगी और न ही सीता मैया की *#*$।”

इसके बाद अबसार ने फिर से अपने प्राइवेट पार्ट्स का वीडियो भेजा और कहा, “ले #$%ले, आराम आ जाएगा।” इसके बाद उसने अभिषेक की महिला मित्र के लिए ‘*#डी’ शब्द का प्रयोग करते हुए अपना पता बता दिया। उसने अभिषेक को ‘बन्दर की औलाद’ बताया। उसने कहा कि उसका पता जानकार वो महिला ‘%#*#’ उखाड़ लेगी। उसने अपना पता और नंबर ये दिया:

जे-$#%, न्यू सीलमपुर, दिल्ली, पिन- 1100053, फोन- 9810%$#*#$

मोहम्मद अबसार के फेसबुक अकाउंट की बात करें तो वो गाँधी है स्कूल से पढ़ा हुआ है। उसने अपने फेसबुक अकाउंट पर भी बताया है कि वो दिल्ली का निवासी है। भगवान राम और माँ सीता के लिए अश्लील अपशब्दों का प्रयोग करने वाला अबसार इतना ढीठ है कि उसने महिला के साथ दुर्व्यवहार करने और इतनी गालियाँ बकने के बाद अपना नंबर और पता भी दे दिया। उसने अभिषेक को हत्या की धमकी दी। अभिषेक ने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस से गुहार लगाई है कि अबसार को सबक सिखाया जाए और उसपर कार्रवाई की जाए।

अभिषेक ने लिखा कि वो अबसार के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराने जा रहे हैं क्योंकि वह लगातार हत्या की धमकी दे रहा है। उन्होंने ऑपइंडिया से निवेदन किया कि अबसार की इस करतूत को प्रशासन तक पहुँचाने में मदद करें। अभिषेक ने ट्विटर पर अबसार का फोटो भी शेयर किया। अभिषेक दिल्ली पुलिस से भी नाराज़ दिखे और उन्होंने कोई कार्रवाई न होने के कारण अंदेशा जताया कि कहीं दिल्ली पुलिस उन्हें ही गिरफ़्तार कर के उन पर ही केस दायर न कर दे। उन्होंने पूछा कि भगवान राम और माँ सीता को खुलेआम गाली देने वाले को गिरफ़्तार करने से दिल्ली पुलिस हिचक क्यों रही है?

दिल्ली, लुटियंस जोन और प्रदूषण… लेकिन इसी भारत में गाजियाबाद और झरिया भी है, धुएँ-धूल में दम तोड़ता!

दिल्ली-एनसीआर के गैस चैंबर में तब्दील होने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकारों को कड़ी फटकार लगाई। देश की सर्वोच्च अदालत ने इसे जीने के अधिकार का उल्लंघन बताया है। सुप्रीम कोर्ट ने पराली जलाने पर तुरंत रोक लगाने के लिए कहा है। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार (नवंबर 5, 2019) को यूपी, पंजाब और हरियाणा सरकार को आदेश जारी करते हुए कहा कि अगर उनके राज्य में एक भी ऐसी घटना घटती है तो पूरे प्रशासन के साथ-साथ राज्य के मुख्य सचिव से लेकर ग्राम प्रधान तक जिम्मेदार होंगे।

कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्यों के मुख्य सचिव, जिलाधिकारी, तहसीलदार, संबंधित थाना, एसपी, आइजी और पूरी पुलिस व प्रशासनिक मशीनरी सुनिश्चित करे कि उनके यहाँ बिल्कुल पराली न जले। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि किसान अपनी आजीविका के लिए दूसरे लोगों को मौत के मुँह में नहीं धकेल सकते। कोर्ट ने कहा, “अगर वे (किसान) पराली जलाना जारी रखेंगे तो उनके प्रति हमारी कोई सहानुभूति नहीं रहेगी। किसान यह नहीं कह सकते कि उन्हें दूसरी फसल लगानी है इसलिए पराली जलाना उनका अधिकार है।”

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहा

“प्रदूषण की वजह से दिल्ली में लोगों का दम घुट रहा है, लोग घरों के अंदर भी प्रदूषण से सुरक्षित नहीं हैं। बेडरुम और लुटियंस जोन में भी एक्यूआइ का स्तर 500 से ऊपर पहुँच गया है। कोई भी दिल्ली नहीं आना चाहता। हर साल यही होता है। किसी सभ्य समाज में ऐसा नहीं होता।”

प्रदूषण को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट का आदेश महत्वपूर्ण है। महत्वपूर्ण इसलिए क्योंकि यह आम जीवन को प्रभावित करता है, लोगों की जिंदगियाँ छीन रहा है। लेकिन क्या यह मसला सिर्फ दिल्ली तक सीमित है? पराली जलाने की जिस समस्या से दिल्ली और आस-पास के इलाके में बसे लोग प्रभावित हो रहे हैं, क्या प्रदूषण की यह समस्या सिर्फ दिल्ली तक सीमित है? ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। दिल्ली और इसके दिल में स्थित लुटियंस जोन से कहीं ज्यादा प्रदूषण देश के दूसरे शहरों में है। हाँ, यह सच है कि वहाँ का शोर हमें सुनाई नहीं देता। या शायद वहाँ के लोग इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा मान बैठे हैं और खुश हैं, जी रहे हैं।

अगर सिर्फ पराली ही प्रदूषण का एकमात्र कारण होता तो नीचे दिया हुआ ग्राफ कभी भी बन नहीं पाता। ग्राफ से स्पष्ट है कि गैस चेंबर बने दिल्ली की जहरीली हवा का जिम्मेदार सिर्फ पराली जलाना नहीं बल्कि इसके अन्य कारक भी ही हैं। और यही अन्य कारक भारत के उन शहरों को प्रदूषण से जकड़े हुए हैं, जहाँ दूर-दूर तक पराली जलाने की परंपरा भी नहीं है।

टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा प्रदूषण संबंधित दिया हुआ डेटा

माननीय सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली में प्रदूषण की वजह पराली नहीं, बल्कि सड़कों पर धुआँ उड़ाती हुई गाड़ियाँ, धूल-कण और शहर में चलने वाले औद्योगिक संस्थाएँ हैं, जो काफी हद तक प्रदूषण फैलाते हैं। अगर दिल्ली-एनसीआर में 2018 में फैले प्रदूषण की बात करें, तो तकरीबन 41 फीसदी प्रदूषण गाड़ियों से, 21.5 फीसदी हवा में समाहित धूल-कणों से, 22.3 फीसदी औद्योगिक क्षेत्रों से और इसके अलावा अन्य कई वजहों से है।

नासा द्वारा जारी किए गए आँकड़े

बात करते हैं गाजियाबाद की। यह शहर रिकॉर्डधारी शहर है – अच्छे कामों के लिए नहीं बल्कि प्रदूषण रैंकिंग में लगातार देश के अग्रणी शहरों की सूची में बने रहने के लिए। हालात यह है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने भी यहाँ की स्थिति पर चिंता जताई है। दिलचस्प बात यह है कि यहाँ आस-पास पराली भी नहीं जलाई जाती (है भी तो बहुत ही छिटपुट) है, फिर भी प्रदूषण की स्थिति सालों से बनी हुई है। लोग रह भी रहे हैं। और ‘जीने का अधिकार’ जितना लुटियंस जोन वालों को संविधान ने प्रदान किया है, उतना ही यहाँ के लोगों के पास भी है, ऐसा मेरा मानना है।

अब चलते हैं गाजियाबाद से 1200-1300 किलोमीटर दूर झारखंड का वो शहर, जो झरिया के नाम से मशहूर है। कहते हैं कि लोग यहाँ चाहे जिस भी रंग का शर्ट पहन सुबह घर से निकलें, शाम को लौटते सभी एक ही रंग का शर्ट पहन कर – काला! गाजियाबाद की ही तरह देश का सबसे अधिक प्रदूषित शहर का तमगा लिए यह शहर भी जी रहा है, शहर के लोग भी जी रहे हैं। झरिया में प्रदूषण का कारण कोयला है। कोयला वो जो यहाँ की जमीन के नीचे जल रहा है, साल-दर-साल से जलता ही जा रहा है। इस कारण कोयले का कण, धूआँ हवा में मिश्रित होकर प्रदूषण के स्तर को बढ़ाते हैं। ऐसा सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है। ऐसे में यहाँ प्रदूषणजनित बीमारियाँ आम हैं। और उसी प्रदूषण का शिकार होकर कम होती जिंदगी एक दिन दम तोड़ देती है। लेकिन क्या लुटियंस जोन के निवासियों से यहाँ के वोटर को ‘जीने का अधिकार’ कम है, संवैधानिक स्तर पर तो नहीं ही।

प्रदूषण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागतयोग्य है। प्रदूषण वाकई में आज के समय में जानलेवा बीमारी है और लोग इससे काफी परेशान हैं। इसका निवारण करना अति आवश्यक है। लेकिन यह फैसला दिल्ली-NCR के हित में है, जबकि समस्या से ग्रसित भारत का लगभग-लगभग हर शहर है। माननीय न्यायालय का ध्यान उस ओर भी जाना चाहिए, जहाँ से या तो शोर उठता ही नहीं (शायद नियति मान बैठे हैं) है या उठने वाला शोर ट्विटर के माध्यम से दिल्ली पहुँच ही नहीं पाता।

स्वच्छता आंदोलन देश का आंदोलन है। यह दिल्ली-NCR की सड़कों तक जगमग करता न रह जाए, ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए। कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन हो और कोर्ट भी वहाँ तक पहुँचे, जहाँ के लोग कोर्ट तक पहुँचने में सक्षम नहीं हैं – और शायद यही हमारे बापू गाँधी के सपनों का भारत होगा!

₹7000 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में CBI ने की 169 स्थानों पर छापेमारी, दर्ज किए 35 FIR

7 हजार करोड़ रुपए से अधिक के बैंक धोखाधड़ी मामले में CBI ने मंगलवार (नवंबर 5, 2019) को दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और गुजरात समेत देश के 15 राज्यों में 169 स्थानों पर छापेमारी की। इस मामले में सीबीआई ने 35 मामले भी दर्ज किए हैं।

ब्यूरो से मिली जानकारी के अनुसार, देशभर में 169 स्थानों पर छापे मारे गए। यह छापे दिल्ली, आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़, गुजरात, हरियाणा, कनार्टक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दादरा एवं नगर हवेली में यह छापेमारी की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक सोमवार को हुई थी और मंगलवार को सुबह ही देश के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी करके ऑपरेशन शुरू किया गया।

बता दें पंजाब नेशनल बैंक में 13,000 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी और नीरव मोदी-मेहुल चौकसी के मामलों के बाद केंद्र सरकार ने सीबीआई को बैंक धोखाधड़ी करने वालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

कहा जा रहा है कि सीबीआई द्वारा दर्ज की गई अधिकतर एफआईआर में डिफॉल्टर्स हैं। जिन्होंने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर अपनी कंपनियों के नाम पर लोन लिया था। जिसे इन्होंने वापस नहीं किया। इनमें कुछ मामलों में बैंक से धोखाधड़ी करने के मामले में क्रेडिट सुविधा का इस्तेमाल किया गया था।

इसके अलावा इस मामले में सीबीआई ने करोड़ों रुपए के रोजवैली घोटाले की जाँच सिलसिले में उपायुक्त (बंदरगाह संभाग) वकार रजा से भी पूछताछ की थी। हालाँकि सूत्रों ने बताया कि आईपीएस अधिकारी रजा आरोपित नहीं हैं लेकिन रोजवैली समूह ने कथित रूप से वित्तीय अनियमितताएँ की थी, तब उनकी बतौर सीआईडी अधिकारी क्या भूमिका थी, उसका पता लगाने के लिए उन्हें यहाँ सीबीआई के सीजीओ परिसर कार्यालय में तलब किया गया था। ईडी के अनुसार इस समूह ने निवेशकों को 15,000 करोड़ रुपए का चूना लगाया था, जिसमें ब्याज और जुर्माने की राशि भी शामिल है।

Video: स्टार बनते ही रानू मंडल के बदल गए तेवर, फैन ने लेनी चाही सेल्फी तो बरस पड़ी, कहा…

कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर एक चेहरा काफी लोकप्रिय हुआ था और रातों रात स्टार बन गया था। वह चेहरा था- रेलवे स्टेशन पर गाना गाने वाली रानू मंडल का। इन दिनों सोशल मीडिया पर रानू मंडल का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें रानू मंडल का अलग ही रूप नज़र आ रहा है।

इसे देखकर लग रहा है कि रेलवे स्‍टेशन से उठकर सोशल मीडिया पर रातों रात स्‍टार बनीं रानू मंडल के पाँव अब जमीन पर नहीं हैं। वायरल हो रहे इस वीडियो में सीधी और शांत दिखने वाली रानू ने अपने प्रशंसक को एक सेल्फी खिंचवाने के लिए कहा तो वह भड़क उठीं।

दरअसल सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में रानू एक शॉप में कुछ खरीदारी कर रही थी, तभी रानू की एक फीमेल फैन उनसे सेल्फी के लिए पूछती है। उस फीमेल फैन ने एक हाथ में फोन ले रखा था और दूसरे हाथ से रानू के हाथ को टच करके सेल्फी के लिए बोला। फैन रानू को देखकर इतनी एक्साइटेड थी कि उसका अपने हाथ पर काबू नहीं था और सामान्य तरीके से छूकर पलटने का कहते हुए सेल्फी की गुजारिश की थी।

लेकिन फैन के सेल्फी देने की बजाए रानू गुस्सा हो गई और उस पर भड़क गईं कि छूकर उसने बात क्यों की। फैन से रानू रूखा व्यवहार कर रही थी लेकिन फिर भी फैन कुछ न बोली और बस मुस्कुराती रही।

इस वीडियो को देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स और रानू के फैंस भी भड़क गए और वीडियो पर कमेंट्स करना शुरू कर दिए। किसी ने कहा, “शेम शेम”, तो किसी ने कहा, “कोई मायने नहीं रखता कि आप जिंदगी में कहाँ जाते हैं… हमें अपनी जमीन कभी नहीं भूलना चाहिए।” किसी ने कहा कि अब रानू मंडल को घमंड आ गया है, तो किसी ने कहा, “बाप रे ऐसा एटिट्यूड।” वहीं एक यूजर ने लिखा, “भैया अब बदल गए मैडम के तेवर।”

बता दें कि हिमेश रेशमिया के जरिए बॉलीवुड में डेब्यू करने के बाद रानू के हर वीडियो और गाने को लोगों का जबरदस्त सपोर्ट और प्यार मिला। रानू मंडल की लोकप्रियता को लेकर लता जी से जब सवाल किया गया था तो उन्होंने खुशी जाहिर की थी। लेकिन उसके साथ ही यह भी बात कही थी कि नकल करना कला नहीं है। 

लता मंगेश्कर ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था, “अगर मेरे नाम और काम से किसी का भला होता है तो मैं अपने आप को खुश किस्मत समझती हूँ। लेकिन मुझे यह भी लगता है कि नकल, सफलता के लिए एक विश्वसनीय और टिकाऊ साथी नहीं है। मेरे, किशोर दा, रफी साहब, मुकेश भैया या आशा के गानों को गाकर आकांक्षी गायकों को कुछ समय के लिए तो अटैंशन मिल सकता है, लेकिन यह लंबा नहीं चलेगा।”

कराची: कब्र खोद कर निकाल ली महिला की लाश और किया गैंगरेप, आरोपित फरार

पाकिस्तान के कराची में अज्ञात लोगों ने एक महिला की लाश के साथ बलात्कार किया। आरोपितों ने कब्र में दफनाई हुई महिला की लाश निकालने के लिए पहले तो कब्र को खोदा और फिर उसके साथ बलात्कार किया। ये घटना कराची के लाँधि क्षेत्र की है। महिला के परिजनों को भी इस घटना के बारे में पता चला लेकिन वो इतने व्यथित थे कि उन्होंने इस सम्बन्ध में पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से इनकार कर दिया। इस्लामिल गोठ कब्रगाह के पास ये घटना हुई। वहाँ भारी संख्या में मृत महिला के रिश्तेदार व पड़ोसी जमा हो गए।

महिला के सभी रिश्तेदार व पड़ोसी इस घटना से दुःखी थे और उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ है, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्हें कुछ स्थानीय लोगों ने सूचना दी गई थी कि दफनाई गई महिला की लाश को कब्रगाह से निकालने के लिए कुछ लोग कब्र खोद रहे हैं। पाक मीडिया के अनुसार, बाद में पता चला कि न सिर्फ़ मृत महिला को कब्र से निकाला गया बल्कि उसके साथ गैंगरेप भी किया गया।

अभी तक साफ़ नहीं हो सका है कि इस घटना में कितने लोग शामिल थे? महिला को हाल ही में वहाँ पर दफनाया गया था। कब्रगाह की देखभाल करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि एक कुत्ते ने कब्र खोद कर महिला की लाश बाहर निकाल ली। हालाँकि, महिला के परिजनों ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि कब्र के ऊपर रखा स्लैब बहुत भारी था और इसे किसी कुत्ते द्वारा हटाने की बातें निराधार हैं।

घटनास्थल पर पहुँच कर पुलिस ने भी कुछ सबूत जुटाए लेकिन कब्र खोदने वालों का अभी तक कोई अता-पता नहीं है। पुलिस ने बताया कि आरोपितों की धर-पकड़ के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। महिला के परिजनों ने कहा कि वो किसी प्रकार का लीगल एक्शन नहीं लेना चाहते लेकिन भविष्य में किसी के साथ ऐसी दरिंदगी न हो, पुलिस को इसका ध्यान रखना चाहिए।

निर्भया केस: राष्ट्रपति को नहीं भेजी दोषियों ने दया याचिका, जल्द जारी हो सकता है डेथ वारंट

दिल्ली के निर्भया गैंग रेप मामले में जेल अधीक्षक द्वारा फाँसी का नोटिस दिए जाने के बाद दोषियों ने राष्ट्रपति के पास अपनी दया याचिका भेजने से इंकार कर दिया है। इसके अलावा उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से भी गुहार नहीं लगाई है, जिस कारण निचली अदालत द्वारा उन्हें फाँसी देने की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के आसार हैं।

बता दें इस मामले के चारों आरोपित तिहाड़ जेल और मंडोली जेल में बंद हैं। इनको ट्रायल कोर्ट से मिली सजा-ए-मौत पर हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट भी मुहर लगा जा चुके हैं। जिसके बाद जेल अधीक्षक ने अपनी ओर से इन्हें फाँसी का नोटिस 29 अक्टूबर को दे दिया था। इस नोटिस के ज़रिए इन्हें बताया गया था कि फाँसी की सज़ा के खिलाफ राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दायर करने के लिए उनके पास सात दिन का वक़्त है।

लेकिन, अब ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक दोषियों का राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने का समय पूरा हो गया है। जिसके बाद मीडिया अपने सूत्रों का हवाला देकर बता रही हैं कि अब जेल प्रशासन निचली अदालत को अर्जी भेजकर दोषियों को फाँसी देने की तैयारी शुरू कर देगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तिहाड़ जेल के महानिदेशक संदीप गोयल ने इस मामले पर बयान देते हुए बताया ,
“जेल में बंद चारों ही मुजरिमों ने खुद की सजा कम करने के लिए किसी भी कानूनी लाभ लेने संबंधी कोई कदम नहीं उठाया है। ऐसे में जेल की जिम्मेदारी बनती थी कि उन्हें दो टूक आगाह कर दिया जाए।”

उल्लेखनीय है कि चारों मुजरिमों द्वारा किसी तरह की याचिका दायर न करवाने के बाद अब तिहाड़
जेल प्रशासन इस तथ्य को ट्रायल कोर्ट के समक्ष रखेगा। उसके बाद ट्रायल कोर्ट कानूनन कभी भी मुजरिमों का डेथ-वारंट जारी कर सकता है। कानून के जानकारों के अनुसार डेथ-वारंट जारी होने का मतलब मुजरिमों का फाँसी के फंदे पर लटकना तय है।

मुलायम-अखिलेश के करीबी UPPCL के पूर्व MD एपी मिश्रा PF घोटाले में गिरफ्तार: अखिलेश यादव पर लिखी है किताब

उत्तर प्रदेश में भविष्य निधि घोटाले (PF Scam) में आर्थिक अपराध शाखा  (EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए यूपी पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के पूर्व एमडी एपी मिश्रा को मंगलवार (नवंबर 5, 2019) को गिरफ्तार कर लिया। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के कर्मचारियों की भविष्य निधि के 2268 करोड़ रुपए का अनियमित तरीके से निजी संस्था डीएचएफएल में कथित निवेश किए जाने के खुलासे के बाद सरकार हरकत में आ गई है।

इसके अलावा शासन ने सोमवार (नवंबर 4, 2019) को सख्त कदम उठाते हुए देर रात यूपी पावर कारपोरेशन की मौजूदा एमडी और सचिव ऊर्जा अपर्णा को उनके पद से हटा दिया और उनकी जगह पर वरिष्ठ अधिकारी एम देवराज को कमान सौंपी गई है।

बता दें कि एपी मिश्रा को सोमवार देर रात से ही हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा था। मामले में यह तीसरी गिरफ्तारी है। इससे पहले शनिवार (नवंबर 2, 2019) को सीपीएफ ट्रस्ट और जीपीएफ ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव पीके गुप्ता और तत्कालीन निदेशक (वित्त) एवं सह ट्रस्टी सुधांशु द्विवेदी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार किया गया था। मामले में यूपी सरकार सीबीआई जाँच की भी सिफारिश कर चुकी है।

ईओडब्ल्यू की टीम ने सोमवार को जेल भेजे गए यूपीपीसीएल के पूर्व निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी और यूपीपीसीएल ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव पीके गुप्ता से जेल में पूछताछ की थी। इसके बाद शक्ति भवन से ईओडब्ल्यू की टीम ने कई दस्तावेज जब्त किए। कहा जा रहा है कि डीएचएफएल में निवेश को मंजूरी देने में जो भी जिम्मेदार हैं उन पर शिकंजा कसने की तैयारी है। अब एपी मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद कई अन्य अधिकारियों पर भी जाँच की आँच पहुँच सकती है।

उल्लेखनीय है कि एपी मिश्रा यूपीपीसीएल के पूर्व एमडी रहे हैं और इन्हें मुलायम सिंह और अखिलेश यादव का करीबी बताया जाता है। अखिलेश यादव से बेहद प्रभावित एपी मिश्रा ने अखिलेश यादव पर किताब भी लिखी थी।

2012 में अखिलेश सरकार बनते ही किसी आईएएस की जगह एक इंजीनियर एपी मिश्रा को यूपीपीसीएल का प्रबंध निदेशक बनाया गया था। इतना ही नहीं सपा सरकार के दौरान मिश्रा को रिटायर होने के बाद भी नियम के विरुद्ध जाकर तीन बार सेवा विस्तार मिला था। एपी मिश्रा पूर्वाचल व मध्यांचल के भी एमडी रह चुके हैं। 

लेकिन योगी सरकार बनने के बाद 24 नवंबर 2017 को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। आरोप है कि 17 मार्च 2017 में जब योगी सरकार का शपथ ग्रहण नहीं हुआ था तभी आनन-फानन में एपी मिश्र के कहने पर ही डीएचएफएल में निवेश की पहली क़िस्त जारी कर दी गई थी।