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राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं रोहिंग्या: बांग्लादेश की PM शेख हसीना

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने सोमवार (12 नवंबर) को कहा कि ‘उत्पीड़न’ के कारण म्यांमार से भाग कर बांग्लादेश में आए 10 लाख से अधिक रोहिंग्या पूरे क्षेत्र की ‘सुरक्षा के लिए ख़तरा’ हैं। उन्होंने वैश्विक समुदाय से इस मुद्दे को हल करने का आग्रह किया है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 24 मई, 2018 तक 9,00,000 से अधिक रोहिंग्याओं ने म्यांमार के रखाइन प्रांत से पलायन किया है। 2017 में सैन्य कार्रवाई के बाद बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के कारण ये भागे हैं। बड़ी संख्या में इनके शरण लेने से पड़ोसी देश बांग्लादेश में बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

हसीना ने तीन दिवसीय ‘ढाका ग्लोबल डायलॉग -2019’ को संबोधित करते हुए कहा, “क्षेत्रीय सुरक्षा के संदर्भ में, मैं कहना चाहूँगी कि म्यांमार के 1.1 मिलियन से अधिक रोहिंग्या नागरिक उत्पीड़न के चलते भाग कर बांग्लादेश आ गए थे और वे न केवल बांग्लादेश की सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए ख़तरा हैं।”

बांग्लादेश की आधिकारिक समाचार एजेंसी संगबाथा (बीएसएस) के अनुसार उन्होंने कहा,

“मैं विश्व समुदाय से आग्रह करती हूँ कि वह इस ख़तरे को गंभीरता से लेते हुए इस पर उचित कार्रवाई करे। शांति और सुरक्षा के बिना किसी भी देश के विकास और समृद्धि को सुनिश्चित करना संभव नहीं होगा।”

सोमवार को शुरू हुआ यह संवाद बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (BIISS) और भारत स्थित स्वतंत्र थिंक-टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है। 50 से अधिक देशों के 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने बातचीत, विचार-विमर्श करने और सबसे अधिक दबाव वाली वैश्विक अनिवार्यताओं पर बहस करने के लिए इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

ख़बर के अनुसार, इस समारोह में बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन, ओआरएफ अध्यक्ष समीर सरन और बीआईआईएसएस के महानिदेशक एकेएम अब्दुर रहमान ने भी बात रखी।

भारत और म्यांमार दोनों पड़ोसी हैं। इनके संबन्ध अत्यन्त प्राचीन और गहरे हैं और आधुनिक इतिहास के तो कई अध्याय बिना एक-दूसरे के उल्लेख के पूरे ही नहीं हो सकते। भारत और म्‍यांमार की सीमाएँ आपस में लगती हैं जिनकी लंबाई 1,600 किमी से भी अधिक है तथा बंगाल की खाड़ी में एक समुद्री सीमा से भी दोनों देश जुड़े हुए हैं। अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड की सीमा म्यांमार से सटी हुई है।

एक महिला सहित पंजाब से 2 खालिस्तानी आतंकी गिरफ़्तार, हिंदूवादी नेता थे निशाने पर

पंजाब पुलिस के ऑपरेशन सेल ने दो खालिस्तानी आतंकियों को गिरफ़्तार किया है। इनमें एक महिला भी शामिल हैं। उसे लुधियाना से गिरफ़्तार किया गया, जहाँ वह बतौर नर्स कार्यरत थी। वहीं, दूसरी गिरफ़्तारी गुरदासपुर से हुई। करतारपुर कॉरिडोर खोले जाने के कुछ ही दिन बाद हुई इन गिरफ़्तारियों ने ख़ुफ़िया एजेंसियों व सुरक्षा बलों को चौकन्ना कर दिया है। पाकिस्तान द्वारा करतारपुर साहिब में कई आपत्तिजनक चीजें लिखी जाने की बात सामने आई थी। पाक ने लिखा था कि भारत ने यहाँ बम गिराया। पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह करतारपुर कॉरिडोर खोले जाने जाने के पीछे पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई की साजिश होने की आशंका पहले ही जता चुके हैं।

जिन खालिस्तानी आतंकियों को गिरफ़्तार किया गया है, उनके निशाने पर कई हिन्दू नेता थे। इन्हें पंजाब में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने के लिए विदेश से फंड मिल रहे थे। हिंदूवादी नेताओं को इस्लामिक आतंकियों व कट्टरपंथियों द्वारा निशाना बनाए जाने की ख़बर भी आई थी। गुरदासपुर से गिरफ़्तार खालिस्तानी आतंकी ड्राइवर के रूप में काम करता था। दोनों मिल कर किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे, जिसमें हिंदूवादी नेताओं की हत्या भी शामिल थी।

गिरफ़्तार हुए खालिस्तानी आतंकियों की पहचान भी हो चुकी है। सुरिंदर कौर फरीदकोट की रहने वाली है। वह लुधियाना के किसी निजी अस्पताल में नर्स का काम करती थी। सुरिंदर कौर के साथी की पहचान लखबीर सिंह के रूप में हुई है। वह होशियारपुर का रहने वाला है। वह दुबई में ड्राइवर का काम करता था। पंजाब पुलिस की साइबर क्राइम सेल इन दोनों पर कई दिनों से नज़र बनाए हुए थे। पुलिस ने बताया कि दोनों ही सोशल मीडिया के माध्यम से दोस्त बने थे और फेसबुक पर सक्रिय थे।

दोनों आतंकियों से पूछताछ भी की गई है। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया है कि वो पंजाब में आतंकी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए काम कर रहे थे। पंजाब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन्हें विदेश में कहाँ से फंड मिल रहा था और कौन लोग इनकी मदद कर रहे थे। दोनों ही आतंकियों को अदालत ने दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

लश्कर की आतंकी गतिविधियों के लिए फंड जुटाता था मुजफ्फरनगर का जावेद अली, NIA ने दिल्ली में धर दबोचा

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने टेरर फंडिंग मामले में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े जावेद अली को गिरफ्तार किया है। वह यूपी के मुजफ्फरनगर का रहने वाला है। वह लश्कर आतंकी शेख अब्दुल नईम उर्फ सोहेल खान को आतंकी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के मामले में पकड़ा गया है। अरसे से फरार जावेद को एनआईए ने रविवार को दिल्ली में दबोचा।

सोहेल को एनआईए पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उस पर अपने साथियों के साथ मिलकर पूरे देश में आतंकवादी गतिविधियॉं चलाने के लिए आपराधिक साजिश रचने के मामले में आरोप-पत्र भी एजेंसी दाखिल कर चुकी है। जाँच में पता चला कि जावेद का संबंध लश्कर से है और वह उसके लिए फंड जुटाता था। फंड का इस्तेमाल भारत के विभिन्न स्थानों की रेकी करने, लश्कर के लिए आतंकवादियों की भर्ती करने और विदेशी नागरिकों और पर्यटकों सहित सॉफ्ट टारगेट की पहचान करने के लिए किया जाता था।

गिरफ्तार जावेद उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खामपुर गाँव का रहने वाला है। उसकी गिरफ्तारी 2017 में आतंकी फंडिंग के एक मामले में की गई है। 2017 में वह सऊदी अरब से मुजफ्फरनगर तक हवाला के जरिए धन मुहैया कराने में शामिल था। उसने सोहेल खान को धन मुहैया कराया था।

NIA द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज

एनआईए लश्कर के लिए धन जुटाने से संबंधित मामले की जाँच कर रही है, जिसका पाकिस्तान और अन्य देशों में स्थित आतंकी संचालनकर्ता भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

इस मामले ने एनआईए पहले ही 5 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम शेख अब्दुल नईम, बेदार बख्त, तौसीफ अहमद मलिक, दिनेश गर्ग और आदिश कुमार जैन हैं। मामले में पाँच अन्य आरोपित अमजद, हबीब-उर-रहमान, गुल नवाज, जावेद और मोहम्मद इमरान फरार थे। इनमें से जावेद अब पकड़ में आ चुका है।

एनआईए प्रवक्ता ने बताया कि पाकिस्तान स्थित लश्कर के मुख्यालय से पैसा दुबई भेजा जाता था। दुबई में बैठा हैंडलर हवाला कारोबार के जरिए यह पैसा भारत में भेजता था। इस पैसे को जावेद और उसके साथी लश्कर के नए एजेंट बनाने के लिए प्रयोग करते थे। वह इस पैसे के बदले लश्कर के लिए भारत के विभिन्न ठिकानों की रेकी कराते थे। एनआईए का दावा है कि जावेद सीधे तौर पर आतंकी संगठन लश्कर से जुड़ा हुआ था।

कश्मीर पर पाक का समर्थन करने वाले तुर्की में कॉन्ग्रेस ने खोला दफ्तर, युसूफ ख़ान को बनाया इंचार्ज

हाल ही में पश्चिमी एशिया में स्थित तुर्की ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर न सिर्फ़ पाकिस्तान का साथ दिया था, बल्कि भारत के ख़िलाफ़ ज़हर उगला था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने यूएन में अपने सम्बोधन के दौरान जम्मू-कश्मीर, इस्लाम और पैगम्बर मुहम्मद के बारे में बातें की थी। इसके बाद तुर्की ने पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाया था। अब भारत की प्रमुख विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस ने तुर्की में अपना नया दफ्तर खोला है। कॉन्ग्रेस की ओवरसीज शाखा ने तुर्की में अपना दफ़्तर खोला है। ऐसे समय में जब तुर्की लगातार भारत की आलोचना कर रहा है, कॉन्ग्रेस का वहाँ पर ऑफिस स्थापित करना बहुतों की समझ में नहीं आया।

तुर्की ने जब जम्मू-कश्मीर पर बयान दिया, उसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय भी उसके काट में लग गया। विदेश मंत्रालय ने एक एडवाइजरी जारी कर तुर्की की यात्रा पर जा रहे भारतीयों को सावधानी बरतने की सलाह दी। भारत ने अपने नागरिकों को तुर्की न जाने की सलाह दी। इससे पहले भारत ने रक्षा क्षेत्र में तुर्की के साथ समझौतों में कटौती की, क्योंकि उसने पाकिस्तान का साथ देते हुए भारत के आंतरिक मसले में दखल दिया था। तुर्की ने साइप्रस के एक भू-भाग पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है। पीएम मोदी ने साइप्रस की अखंडता और सम्प्रभुता का समर्थन कर तुर्की की काट निकाली।

अनादोलू की एक ख़बर के अनुसार, कॉन्ग्रेस पार्टी ने तुर्की में अपना दफ़्तर खोला है। ‘इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस’ ने एक प्रेस स्टेटमेंट जारी कर इस बात की जानकारी दी। इस्ताम्बुल में स्थापित किए गए इस दफ़्तर में मोहम्मद युसूफ ख़ान नामक व्यक्ति के नेतृत्व में कार्य किया जाएगा। कॉन्ग्रेस ने कहा है कि युसूफ ख़ान के नेतृत्व में पार्टी भारत और तुर्की के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करते हुए राजनीति, संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर मसले को तनाव नहीं, बल्कि बातचीत के द्वारा हल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की थी कि भारत ने ही जम्मू-कश्मीर में संघर्ष की स्थिति पैदा की है। उन्होंने पूरे दक्षिण एशिया की शांति और समृद्धि को जम्मू-कश्मीर मसले से जोड़ते हुए कहा था कि इस क्षेत्र के शांत हुए बिना शांति मुश्किल है। एर्दोगन बाद में भी अपने बयान से बाज नहीं आए और उन्होंने कहा कि वो कश्मीर मुद्दे को उठाते रहेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुर्की को घेरने के लिए ग्रीस, साइप्रस और अर्मेनिया के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करना शुरू कर दिया है। ये तीनों ही देश तुर्की के प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं। मोदी ने तुर्की को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए इन देशों के राष्ट्राध्यक्षों से भी बात की। ऐसे में कॉन्ग्रेस का इस समय वहाँ ऑफिस खोलना सोशल मीडिया में आलोचना का विषय भी बन गया है।

महाराष्ट्र में नया ट्विस्ट: शिवसेना नहीं जुटा पाई जादुई आँकड़ा, अब गवर्नर ने एनसीपी को दिया मौका

महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के बाद अब राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने एनसीपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है। बता दें कि जहाँ भाजपा ने सरकार बनाने का दावा ही नहीं पेश किया, मीडिया के सामने बहुमत का दावा करने के वाली शिवसेना ने राज्यपाल से 3 दिनों का वक़्त माँगा। आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में राजभवन पहुँचे शिवसेना नेताओं को राज्यपाल ने अतिरिक्त 3 दिनों का वक़्त देने से इनकार कर दिया। शिवसेना बहुमत के लिए ज़रूरी विधायकों के समर्थन का पत्र नहीं दे पाई। अब एनसीपी नेताओं ने राज्यपाल से मुलाक़ात के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्हें मंगलवार (नवंबर 12, 2019) रात 8.30 बजे तक की समय-सीमा दी गई है।

एनसीपी नेता जयंत पाटिल ने कहा कि पहले और दूसरे सबसे बड़े दल के विफल रहने के बाद राज्यपाल ने नियमानुसार तीसरे सबसे बड़े दल यानी एनसीपी को सरकार गठन करने के लिए आमंत्रित किया है। एनसीपी नेताओं ने राज्यपाल से कहा कि वो अपने साथी दलों से बात कर के उन्हें जवाब देंगे। एनसीपी ने राज्यपाल से कहा कि पार्टी जल्द से जल्द जवाब देने की कोशिश करेगी। सोमवार को उद्धव ठाकरे और शरद पवार की मुलाक़ात भी हो चुकी है। उद्धव की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से भी फोन पर बात हुई। लेकिन, शिवसेना को समर्थन पत्र हासिल करने में कामयाबी नहीं मिल पाई।

एनसीपी नेता अजीत पवार और छगन भुजबल ने अन्य नेताओं के साथ राज्यपाल से मुलाक़ात की। एनसीपी ने इशारा किया है कि वो सरकार गठन के लिए प्रयास करेगी। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि कॉन्ग्रेस के साथ इस बात पर विचार-विमर्श किया जाएगा कि कैसे महाराष्ट्र को एक स्थिर सरकार दी जाए। नवाब मलिक ने मंगलवार को कॉन्ग्रेस से बात करने के बाद अपनी पार्टी का रुख साफ़ करने की बात कही।

कॉन्ग्रेस नेताओं ने इस बात से इनकार कर दिया है कि पार्टी ने शिवसेना को समर्थन दिया है। खड़गे ने कहा कि ऐसा कोई पत्र राज्यपाल को नहीं सौंपा गया है। उधर भाजपा की भी कोर टीम की बैठक हुई। बैठक ख़त्म होने के बाद भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि उनकी पार्टी अभी ‘वेट एंड वाच’ की रणनीति पर काम कर रही है। इस बैठक में महाराष्ट्र के ताज़ा राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा हुई।

गौरतलब है कि 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, कॉन्ग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटें मिली है। भाजपा-शिवसेना और कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन, नतीजों के बाद शिवसेना ढाई साल के लिए सीएम का पद मॉंग रही थी जिसे भाजपा ने ठुकरा दिया। रविवार को भाजपा ने गवर्नर से कहा कि वह सरकार नहीं बनाएगी। इसके बाद राज्यपाल ने शिवसेना को न्योता दिया था। शुरुआत में कॉन्ग्रेस और एनसीपी के सहयोग से सरकार बनाने को लेकर शिवसेना बेहद उत्साहित दिखी। उसके मंत्री ने भी मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। उम्मीद थी कि सोमवार शाम तक उसे समर्थन का कॉन्ग्रेस ऐलान कर सकती है। लेकिन, आखिरी पलों में कॉन्ग्रेस ने पत्ते खोलने से इनकार कर दिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ओवैसी का बयान भड़काऊ, भोपाल में मामला दर्ज

अपने बयानों के चलते हमेशा विवादों में घिरे रहने वाले AIMIM नेता और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी एक बार फिर अपनी इसी आदत के चलते मुसीबत में फँस गए हैं। उनके खिलाफ भोपाल के जहाँगीराबाद पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया गया है। वकील पवन कुमार यादव ने मामला दर्ज करवाया है। यादव ने अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दी गई ओवैसी की प्रतिक्रया को भड़काऊ बताया है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (नवंबर 9, 2019) को अयोध्या भूमि विवाद का फैसला सुना दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने एकमत से अयोध्या को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हुए पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन रामलला विराजमान को सौंपकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया। वहीं, मुस्लिम पक्षकारों को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने का निर्णय सुनाया।

ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि वो इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम (सर्वोच्च) जरूर है, लेकिन वह अचूक नहीं है। समुदाय विशेष का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि उन्हें खैरात में पाँच एकड़ जमीन नहीं चाहिए। ओवैसी ने कहा था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को इस पर सोचना चाहिए।

ओवैसी के इस बयान को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने भी देशद्रोह बताया है। उन्होंने कहा है कि ओवैसी भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं। नरेंद्र गिरी का कहना है कि अगर उन्हें भारतीय न्यायपालिका और संविधान पर विश्वास नहीं है, तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। उन्होंने ओवैसी द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असंतोष व्यक्त करने को देशद्रोह बताते हुए उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।

अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया शुरू, सुप्रीम कोर्ट ने दिया है 3 महीने का वक्त

शताब्दियों से लंबित अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने शनिवार को विराम लगा दिया। अपने ऐतिहासिक फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने में ट्रस्ट के गठन का आदेश दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार के अधिकारियों ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा है कि ट्रस्ट के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए एक टीम कोर्ट के फैसले का विस्तृत अध्ययन कर रही है।

एक अधिकारी ने बताया कि इस सम्बन्ध में विधि मंत्रालय और अटॉर्नी जनरल से राय ली जाएगी, जिसके बाद अयोध्या में मंदिर निर्माण की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अधिकारियों की एक टीम को फैसले का विस्तृत अध्ययन करने की ज़िम्मेदारी दी गई है जिससे ट्रस्ट के गठन में अदालत के किसी दिशा-निर्देश की अनदेखी न हो।

एक अन्य अधिकारी के मुताबिक इस मामले में नोडल इकाई के रूप में गृह-मंत्रालय अथवा संस्कृति मंत्रालय में से कोई एक रहेगा। बता दें कि उत्तर प्रदेश के अयोध्या में जन्मभूमि को लेकर विवाद लम्बे समय से रहा है। दरअसल यह झगड़ा सन 1528 से चला आ रहा था, जब जन्मस्थान पर मुग़ल शासक बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई थी।

इस विवाद का अंत 09 नवम्बर को 2019 को हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने 135 साल तक तक चले इस मुक़दमे में अपना फैसला सुनाया। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि बाबरी मस्जिद से पहले उस जगह पर मंदिर था।

कोर्ट ने 1045 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि जन्मभूमि की 2.77 एकड़ ज़मीन पर मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट का गठन किया जाए। साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद बनाने के लिए पाँच एकड़ ज़मीन अलग से देने के निर्देश भी सरकार को दिया था।

रामलला की अयोध्या: राम मंदिर जैसा होगा रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, फाइव स्टार होटल और एयरपोर्ट भी बनेंगे

अयोध्या में राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद विकास का द्वार खुल गया है। 1045 पन्नों वाले इस फैसले से न सिर्फ एक लम्बे संघर्ष पर विराम लगा बल्कि इसने अयोध्यावासियों को भी नई सौगात दी। अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने रविवार को एक मीडिया चैनल से बात करते हुए बताया कि तीर्थनगरी का विकास अब रफ़्तार पकड़ेगा। उपाध्याय ने बताया कि अयोध्या में सरयू नदी के किनारे भगवान राम की 151 मीटर ऊँची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार एक साथ मिलकर इसका खाका तैयार करेगी।

अपने साक्षात्कार में अयोध्या का भविष्य उज्जवल करने वाली योजनाओं और प्रस्तावों पर बात करते उन्होंने बताया कि अयोध्या में डेवलेपमेंट काउन्सिल का गठन किया जाएगा। इस काउन्सिल के गठन प्रमुख उद्देश्य अयोध्या में पर्यटन और विकास को बढ़ावा देना होगा। विश्व के कोने-कोने से अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को तकलीफ न उठानी पड़े इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के बस-अड्डे से लेकर एक शानदार एयरपोर्ट बनाने की भी योजना है। वहीं अयोध्या के विकास में रेलवे स्टेशन को भी खासा महत्व दिए जाने का प्रस्ताव है।

करीब 100 करोड़ के निवेश से अयोध्या जंक्शन को पाँच सितारा होटल की तर्ज पर संवारने का भी प्रस्ताव है। इस पर दिसम्बर से काम शुरू हो जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यात्रा के सभी माध्यमों को विकसित करने की भी योजना है। अयोध्या से फैजाबाद के बीच एक बड़े फ्लाईओवर का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही अयोध्या से चित्रकूट के बीच फोर लेन की एक सड़क का भी प्रस्ताव है। ऋषिकेश के मुताबिक अयोध्या की सूरत बदलने के लिए ये काम प्रस्तावित हैं;

  • अयोध्या तीर्थ विकास परिषद का गठन किया जाएगा। परिषद शहर में पर्यटन के विकास के लिए काम करेगी। भगवान राम को समर्पित 10 द्वार का निर्माण होगा।
  • एक हवाई अड्डा भी अयोध्या में बनाया जाएगा। मई 2020 तक हवाई सेवा शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बस अड्डा बनाया जाएगा।
  • 100 करोड़ रुपए की लागत से वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन बनाया जाएगा जो देखने में राम मंदिर सरीखा होगा।
  • 10 पॉंच सितारा होटल बनाए जाएँगे। इनका निर्माण दिसंबर से शुरू होने की उम्मीद है। साथ ही पॉंच बड़े रिसॉर्ट बनाने का भी प्रस्ताव है।
  • सरयू नदी के किनारे भगवान राम की 151 मीटर ऊँची प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
  • 10 हजार लोगों के रहने की क्षमता वाला रैन बसेरा बनाया जाएगा। अयोध्या से फैजाबाद को जोड़ने के लिए 5 किमी लंबा फ्लाईओवर बनेगा। अयोध्या में मेडिकल कॉलेज खोलने का भी प्रस्ताव है।

ऋषिकेश ने बताया कि अयोध्या में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पाँच बड़े रिसोर्ट खोले जाएँगे जिससे श्रद्धालुओं के लिए हर प्रकार की सुविधाजनक होगी। साथ ही करीब 10,000 लोगों की आवश्यकता को देखते हुए रैन-बसेरे का भी निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा एक मेडिकल कॉलेज के साथ पब्लिक पार्क और सार्वजानिक स्थानों का सौन्दर्यीकरण किया जाएगा।

बता दें कि उपाध्याय के मुताबिक केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय के नए अयोध्या प्लान की होने वाली बैठक में सर्वेक्षण के दौरान एएसआई को मिले अवशेषों और कलाकृतियों को सहेजकर रखने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जन्मभूमि और प्रस्तावित मंदिर निर्माण के स्थल को सहेजकर रखने पर भी विचार किया जा सकता है। इस पूरे कार्यक्रम में केन्द्रीय संस्कृति मंत्रालय एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करेगी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को इस सम्बन्ध में बोलते हुए कहा था, “आज का यह दिन भारत की न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद रखा जाएगा। सभी ने बड़े संयम के साथ लम्बे समय से लंबित इस फैसले का स्वागत किया।”

बीजेपी से रिश्ते तोड़ कॉन्ग्रेस की गली शिवसेना: सोशल मीडिया में मीम्स की बौछार

महाराष्ट्र में सरकार गठन की तस्वीर साफ हो गई है। बीजेपी से रिश्ते तोड़ शिवसेना सरकार बनाने जा रही है। कॉन्ग्रेस-एनसीपी का समर्थन उसके साथ है। इस सियासी ड्रामे के बाद सोशल मीडिया में मीम्स की बौछार हो गई है।

एक ट्विटर यूज़र्स ने क्रोधित महिला का चित्र लगाते हुए उसकी तुलना मध्य प्रदेश चुनाव के समय NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं) बटन के इस्तेमाल करने वाले मतदाताओं से की। इसका तस्वीर को शेयर करने का मक़सद शिवसेना द्वारा महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर सहयोग न करने पर निराशा व्यक्त करना है। 

यूज़र्स ने अपने गुस्से को प्रकट करने के लिए लोकप्रिय फ़िल्मी दृश्यों का भी इस्तेमाल किया है।

शिवसेना ने जनादेश को धोखा देकर भाजपा के बिना सरकार बनाने का फ़ैसला किया। 

शिवसेना को मिलने वाले कॉन्ग्रेस के समर्थन पर व्यंग्य करते हुए हिन्दी फ़िल्म करन-अर्जुन की एक तस्वीर ट्विटर पर शेयर की गई। इस तस्वीर में अभिनेत्री राखी को सोनिया गाँधी, शाहरुख खान को उद्धव ठाकरे और सलमान ख़ान को आदित्य ठाकरे के रूप में दर्शाया गया। 

इसके अलावा, बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी एक तस्वीर शेयर कि जिसमें उन्होंने “Miyaun” लिखा। इस तस्वीर में एक बिल्ली है, जिस पर शिवसेना लिखा हुआ है और NCP प्रमुख शरद पवार दरवाज़े पर खड़े हैं जो बिल्ली को निहारते दिख रहे है।

गौरतलब है कि 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, कॉन्ग्रेस को 44 और एनसीपी को 54 सीटें मिली है। भाजपा-शिवसेना और कॉन्ग्रेस-एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ा था। लेकिन, ढाई साल के लिए सीएम पद की मॉंग पर शिवसेना के अड़ने के बाद भाजपा ने सरकार बनाने से कदम पीछे खींच लिए थे। इसके बाद राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार गठन का न्योता दिया था।

सोमवार को दिनभर चले सियासी ड्रामे के बाद कॉन्ग्रेस ने भी शिवसेना को समर्थन का ऐलान कर दिया है। हालॉंकि वह सरकार में शामिल नहीं होगी। कॉन्ग्रेस ने शिवसेना को बाहर से समर्थन देने की घोषणा करते हुए समर्थन पत्र राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भेज दिया है।

हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं ओवैसी, अयोध्या पर उनका बयान देशद्रोह जैसा: महंत नरेंद्र गिरी

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी के बयान को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने देशद्रोह बताया है। उन्होंने कहा है कि ओवैसी भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं। नरेंद्र गिरी का कहना है कि अगर उन्हें भारतीय न्यायपालिका और संविधान पर विश्वास नहीं है, तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। उन्होंने ओवैसी द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असंतोष व्यक्त करने को देशद्रोह बताते हुए उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की बात कही है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार (नवंबर 9, 2019) को अयोध्या भूमि विवाद का फैसला सुना दिया। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने एकमत से अयोध्या को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हुए पूरी 2.77 एकड़ विवादित जमीन रामलला विराजमान को सौंपकर मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया। वहीं, मुस्लिम पक्षकारों को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ जमीन देने का निर्णय सुनाया।

ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि वो इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम (सर्वोच्च) जरूर है, लेकिन वह अचूक नहीं है। उन्हें खैरात में पाँच एकड़ जमीन नहीं चाहिए। महंत नरेंद्र गिरि ने ओवैसी के इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि वो हमेशा से हिंदुओं और साधु संतों का अपमान करते आए हैं। गिरी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को खैरात बताने को लेकर वो उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करवाएँगे।

उन्होंने कहा,”पूरा भारत, चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम, ने खुले दिल से निर्णय को स्वीकार किया। लेकिन ओवैसी एक अलग ही राग अलाप रहे हैं। वह फैसले को खैरात कह रहे हैं। इस तरह के बयानों से आप हिंदू और मुस्लिमों को एक-दूसरे से लड़वाते हैं। ये सारे जहर पाकिस्तान में उगलना, जो आतंकवादियों का केंद्र है। हम ओवैसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वह भारतीय संविधान के कारण ही सांसद हैं। हम कितना बर्दाश्त कर सकते हैं, इसकी भी एक सीमा है। हम उनके खिलाफ एफआईआर की माँग करेंगे। मैं खुद जल्द ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाऊँगा।”

महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार नहीं करना भारतीय संविधान के खिलाफ माना जाता है। आप भारत में रहते हैं, लेकिन इसकी न्यायिक प्रणाली में विश्वास नहीं करते हैं। यह देशद्रोह की श्रेणी में आता है। महंत ने कहा कि उनका अनुरोध है कि अगर उन्हें भारत नहीं पसंद है और वह यहाँ नहीं रहना चाहते हैं, तो पाकिस्तान जा सकते हैं और वहाँ रह सकते हैं। उन्हें कोई वहाँ जाने से कोई रोक नहीं रहा। महंत नरेंद्र गिरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ओवैसी इस तरह की भाषा का दोबारा इस्तेमाल करेंगे तो साधु-संत समाज और अखाड़ा परिषद इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।