महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन की तस्वीर अभी साफ़ नहीं है। बावजूद इसके शपथ ग्रहण की तैयारियाँ ज़ोरों पर चलने की खबर आ रही है। इससे संकेत मिलता है कि पर्दे के पीछे बातचीत करीब करीब मुकम्मल हो चुकी है। इन कयासों को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बीच बैठक से भी बल मिला है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मुंबई में विधान भवन के कैंपस में शपथ ग्रहण की तैयारियाँ चल रही हैं। शपथ ग्रहण के लिए स्टेज बनाया जा रहा है। शामियाना लगाया जा रहा है, कुर्सियाँ लगाई जा रही है। बाक़ी तैयारियाँ भी ज़ोरों पर है।
इस बीच फडणवीस और उद्धव ठाकरे की मुलाकात की भी खबर है। बताया जा रहा है कि शिवसेना को राज्य कैबिनेट में आधी भागीदारी देने को भाजपा तैयार है। इस संबंध में फडणवीस ने ठाकरे को आश्वस्त किया है। इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि दोनों के बीच शुक्रवार देर रात बात हुई। ठाकरे ने नरम रवैया अपनाते हुए केंद्र की मोदी सरकार में दो अतिरिक्त मंत्री पद की माँग रखी है। इसमें एक पद केंद्र में कैबिनेट मंत्री और एक पद राज्य स्तरीय मंत्री की माँग शामिल है। एक कैबिनेट स्तर का और दूसरा राज्य स्तर के मंत्री का।
महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध और अटकलबाजियों के बीच एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार सोमवार (4 नवंबर) को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाक़ात कर सकते हैं। इसके संकेत एनसीपी विधायक दाल के नेता अजित पवार ने दिए हैं। हालाँकि, विपक्ष में बैठने के अपने फैसले से पीछे हटने के अभी तक एनसीपी के कोई संकेत नहीं दिए हैं।
इससे पहले शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा था कि उनकी पार्टी गठबंधन धर्म का पालन कर रही है और अंत तक करेगी। संजय राउत की यह टिप्पणी तब सामने आई थी, जब महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने राज्य राष्ट्रपति शासन की तरफ़़ जा सकता है। साथ ही मुनगंटीवार ने शनिवार (1 नवंबर) को भरोसा जताया था कि राज्य में 10 नवंबर से पहले नई सरकार का गठन हो जाएगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा था कि नई सरकार का शपथ ग्रहण 6 या 7 नवंबर को होगा।
ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 105 और उसकी सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं। कॉन्ग्रेस ने 44 और उसकी सहयोगी एनसीपी ने 54 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी साथ मिलकर सरकार बना सकते हैं। लेकिन, कॉन्ग्रेस सहयोगी एनसीपी के रुख को देखकर संशय में है। पवार ने नतीजों के तुरंत बाद कह दिया था कि उनकी पार्टी विपक्ष में बैठेगी। उन्होंने कहा था कि जनादेश भाजपा-शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने के लिए मिला है। इसके बाद से एनसीपी लगातार अपने इस रुख को दोहरा रही है। वहीं, शिवसेना ढाई साल के लिए भाजपा से सीएम पद मॉंग कर रही है।
सितंबर 2013 में राहुल गॉंधी को मनमोहन सिंह की सरकार का एक अध्यादेश सार्वजनिक तौर पर फाड़ते सबने देखा था। इस घटना के बाद तत्कालीन कॉन्ग्रेस उपाध्यक्ष की अपनी ही पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के मुखिया को अपमानित करने और संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखने का आरोप लगा था। अब इसी तरह के आरोप उनकी मॉं और पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी पर लगा है।
रीजनल कंप्रेहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) पर सोनिया के बयान को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने मनमोहन सिंह का अपमान बताया है। साथ ही उन्होंने पूछा है कि क्या इसका जवाब पूर्व प्रधानमंत्री देंगे।
बता दें कि सोनिया ने एशिया-प्रशांत के 16 देशों के साथ प्रस्तावित आरसीईपी समझौते का उल्लेख करते हुए कहा था कि सरकार इसके माध्यम से पहले ही बुरी स्थिति का सामना कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुँचाने की तैयारी में है। इस पर पलटवार करते हुए गोयल ने उन्हें याद दिलाया कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान ही भारत इस समझौता वार्ता में शामिल हुआ था। उन्होंने कहा कि सोनिया गाँधी ने ये कहकर मनमोहन सिंह का अपमान किया है और उन्हें उम्मीद है कि पूर्व प्रधानमंत्री अपने इस अपमान के खिलाफ बोलेंगे।
Piyush Goyal: Where was Sonia ji when her govt forced India to join RCEP negotiations with China in 2011-12?When FTA with ASEAN was signed in 2010?When FTA with South Korea was signed in 2010?When FTA with Malaysia was signed in 2011? When FTA with Japan was signed in 2011? (2/5) https://t.co/Eh3xezhX5z
गोयल ने कहा, “सोनिया गाँधी आरसीईपी और एफटीए पर अचानक जाग गई हैं। वो तब कहाँ थीं जब आरसीईपी देशों के साथ व्यापार घाटा 2004 में 7 बिलियन से बढ़कर 2014 तक 78 बिलियन डॉलर पहुँच गया था।” केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा है कि उस समय सोनिया गाँधी कहाँ थीं, जब साल 2011-12 में उनकी सरकार ने भारत को चीन के साथ आरसीईपी वार्ताओं के लिए मजबूर किया था? जब साल 2010 में आसियान देशों के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर किए थे? जब साल 2010 में दक्षिण कोरिया, साल 2011 में मलेशिया और जापान के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर हुए थे, उस समय सोनिया गाँधी कहाँ थीं?
Smt. Sonia Gandhi ji has suddenly woken up to RCEP and FTAs. So where was she – When FTA with ASEAN was signed in 2010? – When FTA with South Korea was signed in 2010? – When FTA with Malaysia was signed in 2011? – When FTA with Japan was signed in 2011? 2/5
लगातार एक के बाद एक ट्वीट करते हुए पीयूष गोयल ने यह भी पूछा कि सोनिया गाँधी उस वक्त कहाँ थीं, जब उनकी सरकार ने आसियान देशों के लिए 74 फीसदी बाजार खोल दिया था, लेकिन इंडिनेशिया जैसे देशों ने भारत के लिए सिर्फ 50 फीसदी बाजार खोला था? केंद्रीय मंत्री ने सवाल दागा कि आखिर अमीर देशों को रियायत देने के खिलाफ सोनिया गाँधी ने क्यों नहीं बोला? साल 2007 में जब यूपीए सरकार के दौरान भारत और चीन के बीच एफटीए को लेकर सहमति हुई थी, तो सोनिया गाँधी कहाँ थीं?
Where was Sonia ji when her Govt agreed to explore an India-China FTA in 2007? I hope ex PM Dr Manmohan Singh will speak up against this insult to him 4/5
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरसीईपी को लेकर साफ कर चुके हैं कि इसमें भारत के फायदे का सौदा होगा। गोयल ने कहा कि उनका मानना है कि व्यापार घाटा को कम करना उनकी चिंता है। इससे पहले पीयूष गोयल ने कहा था कि आरसीईपी के खिलाफ एक भय का वातावरण पैदा किया जा रहा है।
‘मुस्लिम समुदाय के अराजक तत्वों’ से आगाह करते हुए बिहार के मधेपुरा में प्रशासन को एक अलर्ट जारी करना पड़ा। छठ पूजा से पहले मधेपुरा के डीएम नवदीप शुक्ला ने यह अलर्ट जारी किया था। स्थानीय पुलिस और प्रशासन को भेजे गए इस आदेश में उन्हें ‘मुस्लिम समुदाय के अराजक तत्वों’ की ओर से सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिशों को लेकर सतर्क किया गया था। 31 अक्टूबर को जारी इस अलर्ट पर आपत्ति जताए जाने पर डीएम ने कहा है कि जिस तरह की सूचना उनके पास थी, उसके आधार पर ही यह आदेश जारी किया गया।
छठ पूजा को लेकर मधेपुरा के डीएम की ओर से जारी अलर्ट (साभार: Republichindi.com)
अलर्ट में कहा गया था, “छठ घाट तक व्रतियों के आने-जाने वाले मार्गों में पड़ने वाले मुहल्लों, विशेषकर मुस्लिम मुहल्लों में नाली का पानी गिराए जाने के कारण तनाव उत्पन्न होता है। कभी-कभी छठ घाट पर बहुत अधिक भीड़ में घाट पर बनाए गए कोशी टूट जाने के कारण भी समस्या उत्पन्न होती है। मुस्लिम समुदाय के शरारती तत्वों द्वारा छठ व्रतियों के परिजनों तथा उनके साथ की महिलाओं के साथ छेड़खानी किए जाने पर तनाव उत्पन्न होता है। छठ व्रतियों तथा उनके परिजनों पर छींटाकशी, फब्तियाँ, फब्ती कस देने के कारण भी कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होती है।”
आदेश में इस बात की भी चेतावनी दी गई थी कि “शरारती तत्व सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के मकसद से मृत जानवरों के माँस या फिर उनके शव के दूसरे हिस्सों को तालाबों और नदियों में डाल सकते हैं।” जिला प्रशासन ने कहा कि 2016 में दशहरा और मुहर्रम के दैरान हुए सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं को देखते हुए इस बार विशेष सावधानी बरती जा रही है।
नवदीप शुक्ला ने संडे एक्सप्रेस को बताया, “यह आदेश इंटेलिजेंस इनपुट पर आधारित है। अन्य जिलों ने भी इस तरह के आदेश जारी किए होंगे। इसके मकसद सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखना है।” जब उनसे समुदाय विशेष के नाम को लेकर पूछा गया तो जवाब में उन्होंने कहा कि खुफिया एजेंसी से मिले इनपुट को ध्यान में रख कर यह जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि वे इनपुट के तथ्य को नहीं बदल सकते। डीएम ने कहा कि यह चेतावनी इसलिए जारी की गई ताकि कानून-व्यवस्था से संबंधित कोई समस्या पैदा न हो और सांप्रदायिक सौहार्द्र बना रहे।
वहीं, आदेश को लेकर राज्य के गृह विभाग ने कहा है कि इस मामले को देखा जा रहा है। गृह विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी होम अमीर सुभानी के मुताबिक ‘आदेश असावधानीपूर्वक लिखा गया’ है। वहीं, बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा है कि ‘आदेश के लहजे को बदला जाना चाहिए था।’
रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य और पूर्व सांसद राम विलास वेदांती का कहना है कि कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता उनकी हत्या करवाना चाहते हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड को पाकिस्तान से आर्थिक मिलने की बात भी कही है। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भव्य राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद जताते हुए लोगों से अयोध्या कूच की तैयारी करने की अपील की है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को कानपुर में पत्रकारों से बात करते हुए वेदांती ने कहा कि यदि उनके साथ कुछ बुरा होता है तो कॉन्ग्रेस नेता उसके लिए जिम्मेदार होगा। साथ ही कॉन्ग्रेस और पाकिस्तान पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की राह में रोड़े अटकाने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने कहा, “राम मंदिर के निर्माण में देरी के लिए कॉन्ग्रेस और पाकिस्तान जिम्मेदार हैं। वे नहीं चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट में यह मसला सुलझे।” कॉन्ग्रेस पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि यही कारण है कि 2014 में जनता ने उसे सत्ता से बेदखल कर दिया। पूर्व सांसद ने कहा, “सुन्नी वक्फ बोर्ड एक तरफ तो कहता है कि उसके पास कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी पैसा नहीं है। दूसरी ओर, अयोध्या मामले में पैरवी के लिए उसने सुप्रीम कोर्ट में महॅंगे वकील खड़े किए। पाकिस्तान की आर्थिक मदद के बिना यह मुमकिन नहीं है।”
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वेदांती ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी रामलला के पक्ष में ही आएगा और बहुत जल्द ही मंदिर का निर्माण शुरू होगा। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण को लेकर सभी तैयारियॉं हो चुकी हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद सांप्रदायिक सद्भाव का ख्याल रखते की अपील भी की। उन्होंने कहा कि उत्तेजक नारे नहीं लगाए जाने चाहिए क्योंकि इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए परेशानी पैदा हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले से सुरक्षा बलों ने लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकवादी को गिरफ्तार किया है। उसकी पहचान सोपोर निवासी दानिश अहमद चन्ना के रूप में की गई है। पुलिस ने शनिवार (नवंबर 2, 2019) को इसकी जानकारी दी।
Lashkar terrorist Danish Tariq Channa , son of Tariq Ahmed Channa, resident of Stadium Colony Old Town , Baramula was today apprehended by @JmuKmrPolice in Sopore of North Kashmir. Arms and ammunitions also recovered. J&K DGP Dilbag Singh visits Sopore to inspect anti-terror Ops. pic.twitter.com/hyB3fRqKLT
उन्होंने बताया कि आतंकी दानिश अहमद चन्ना को शुक्रवार (नवंबर 1, 2019) रात को सोपोर इलाके में एक अभियान के दौरान पकड़ा गया। उसके पास से पिस्तौल तथा हैंड ग्रेनेड बरामद किया गया है। पुलिस ने बताया कि चन्ना पिछले महीने से लापता था। वह सज्जाद हैदर के नेतृत्व वाले लश्कर गुट के लिए काम करता था। यह गुट मजदूरों की हत्या सहित कई आतंकी वारदातों में संलिप्त रहा है। सोपोर में गोलीबारी कर एक फल कारोबारी के परिवार के चार सदस्यों को जख्मी कर देने की घटना में इसी गुट का हाथ था।
पुलिस के मुताबिक चन्ना को भीड़-भाड़ वाले बाजार और अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर ग्रेनेड अटैक की जिम्मेदारी दी गई थी। डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि सोपोर पुलिस ने अर्धसैनिक बलों के साथ संयुक्त कार्रवाई में उसे दबोचा। उससे पूछताछ की पुलिस के मुताबिक चन्ना को भीड़-भाड़ वाले बाजार और अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर ग्रेनेड अटैक की जिम्मेदारी दी गई थी। डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि सोपोर पुलिस ने अर्धसैनिक बलों के साथ संयुक्त कार्रवाई में उसे दबोचा। उससे पूछताछ की जा रही है। जा रही है।
इससे पहले गुरुवार (नवंबर 1, 2019) को बारामूला जिले में सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के दो ओवरग्राउंड वर्कर्स को गिरफ्तार किया था। वहीं अगस्त में पुलिस ने बारामूला के मोहम्मद इकबाल नाइकू को गिरफ्तार किया था। वह जैश-ए-मोहम्मद का सदस्य था।
31 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बन गया है और वहाँ की जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। इससे बौखलाए आतंकी कायराना हरकत को अंजाम दे रहे हैं। आतंकियों ने शोपियां में एक सरकारी स्कूल में आग लगा दी थी जिसमें शनिवार (नवंबर 2, 2019) को बोर्ड की परीक्षा होनी थी। वहीं, मंगलवार (अक्टूबर 29, 2019) को आतंकियों ने 5 गैर कश्मीरी मजदूरों की हत्या कर दी थी।
कल (शुक्रवार, 1 नवंबर, 2019 को) एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (एडीजे) की अदालत ने 2008 में सीआरपीएफ़ (सेंट्रल रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स) के कैम्प पर जिहादी हमला करने के आरोप में 6 आरोपितों को दोषी करार दिया है। अभियुक्तों में से 4 को मौत की सजा सुनाई गई है, एक को उम्रकैद मिली है और एक को 10 साल के कारावास की सजा दी गई है। मौत की सज़ा पाने वालों में दो पाकिस्तानी नागरिक भी हैं।
Attack on a CRPF camp in Rampur in 2008: A court awards capital punishment to 4 convicts, life imprisonment to 1 and jail term of 12 years to a fifth convict. pic.twitter.com/e6OjNCeFMX
एटीएस के अनुसार दोषी पाए गए अभियुक्तों के नाम शरीफ़, सलाउद्दीन, इमरान, मुहम्मद फ़ारूक़, जंग बहादुर और फहीम अहमद अंसारी हैं। एटीएस के एडीजी ध्रुव कांत ठाकुर ने बताया कि इन सभी को फ़िलहाल लखनऊ और बरेली की जेलों में रखा गया है। शरीफ़, फ़ारूक़, सलाउद्दीन और इमरान को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है जबकि फहीम अंसारी को 10 की जेल और जंग बहादुर को उम्रकैद की सज़ा दी गई है।
Six persons were found guilty and two were acquitted by a court in #Rampur in connection with the attack in 2008 on a #CRPF group camp, claiming the lives of seven jawans and a rickshaw-puller.https://t.co/Frx1JqeatO
1 जनवरी, 2008 की सुबह को हुए इस हमले में सीआरपीएफ के सात जवान मारे गए थे और पाँच घायल हुए थे। घटना उत्त्तर प्रदेश के रामपुर जिले की है। हमला करने के बाद चारों हमलावर, जिनके तार जाँच में लश्कर ए तैय्यबा से जुड़े निकले, भाग निकले थे। हमले में एक रिक्शा चालक को भी जान गँवानी पड़ी थी।
Attack on a CRPF camp in Rampur in 2008: A court awards capital punishment to 4 convicts, life imprisonment to 1 and jail term of 12 years to a fifth convict. (ANI) pic.twitter.com/gUpUbCFSm5
10 फरवरी, 2008 को एक महत्वपूर्ण सफ़लता में उत्तर प्रदेश पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य के दो इलाकों से 6 लश्कर के संदिग्धों को पकड़ लिया था। जाँच में पता चला कि वे अपने अगले निशाने मुंबई की तरफ कुछ करने की तैयारी कर रहे थे। पाकिस्तानी नागरिकों इमरान और फ़ारूक़ को पुलिस ने लखनऊ से तब धर दबोचा जब वे शहर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। इमरान पीओके के भीमहार और फ़ारूक़ पाकिस्तान के गुजराँवाला का निवासी बताया जा रहा है। शरीफ़ हमले की ही जगह रामपुर का रहने वाला बताया जा रहा है जबकि जंग बहादुर भी उत्तर प्रदेश के ही मुरादाबाद का निवासी है। सलाउद्दीन को बिहार के मधुबनी का रहने वाला बताया जा रहा है जबकि फहीम अरशद अंसारी उनके अगले निशाने मुंबई का रहने वाला है।
गाजीपुर के सिमौर गाँव में 45 वर्षीय नासिर कुरैशी ने शराब के नशे में कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर अपनी पत्नी अफसरी को मार डाला। बुधवार (अक्टूबर 30, 2019) को हुई इस घटना में उसकी बीवी की मौत हो गई। नासिर ने इस हत्याकांड को अपने ससुराल में अंजाम दिया। शोर सुन कर पहुँचे ग्रामीणों ने नासिर को भी मार डाला। नासिर छत्तीसगढ़ के जूना में लोमड़ी नगर पंचायत के डुबरीपाड़ा का निवासी था। उससे विवाद होने के कारण उसकी बीवी 2 वर्षों से अपने पिता के यहाँ रह रही थी। एक माह पहले समझौता होने पर वह ससुराल गई थी लेकिन फिर वह लौट कर आ गई थी। नशे में धुत निसार अपनी बीवी को ले जाने ससुराल आया था लेकिन वह चरित्र पर शक कर रहा था।
जब उसने अपनी बीवी पर कुल्हाड़ी से वार किया, तब वो रसोई में खाना बना रही थी। उसकी सास व दो सालियाँ भी उस दौरान घर में ही मौजूद थीं। उन्होंने पुलिस को बताया कि अगर ग्रामीण नहीं आते तो निसार उन सब को मार डालता। वह ग्रामीणों को भी काट डालने की धमकी दे रहा था। गाँव वालों ने उस पर लाठी-डंडे से वार किया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। वह गाँव को आग के हवाले करने की धमकी भी दे रहा था। वह ग्रामीणों से चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा था कि जो सामने आएगा, उसे मार डालेगा। उसके चार छोटे-छोटे बच्चे भी थे। पुलिस ने मृतक निसार पर भी हत्या का मुक़दमा दर्ज किया है। पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को गिरफ़्तार किया है।
वहीं मृतक निसार के परिजन भी वहाँ पहुँचे। उन्होंने निसार के शराब पीने की बात से इनकार करते हुए दावा किया कि चारों भाइयों में से किसी को भी शराब की लत नहीं थी। उधर भीड़ पर भी ग़ैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। शव को लेकर छत्तीसगढ़ रवाना हो गए। पुलिस ग्रामीणों और निसार के बीच हुए संघर्ष का वीडियो देख कर ग्रामीणों की पहचान में लगी है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। निसार कुरैशी गोश्त की दुकान चलाता था। उसके और उसकी बीवी के मरने के बाद अब चारों बच्चों पालन-पोषण उसकी साली करेगी और बच्चों को ननिहाल में ही रखा जाएगा।
दरअसल, निसार जब अपनी पत्नी की हत्या कर रहा था, तब उसकी सालियाँ अपनी बहन के बचाव में आई थीं। उसने अपनी सालियों पर भी प्रहार कर के उन्हें घायल कर दिया था। पड़ोसियों ने बताया कि घर में सुबह से वाद-विवाद चल रहा था और निसार ने इस हत्याकांड को तब अंजाम दिया, जब उसकी बीवी के भाई और पिता घर से बाहर गए हुए थे। वहीं उसकी पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गाँधी के वॉट्सऐप जासूसी कांड से जुड़े आरोपों पर पलटवार किया है। भाजपा ने कहा है कि सरकार की ओर से जवाब देते हुए कानून और संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पहले ही सरकार की स्थिति साफ़ कर दी थी। पार्टी ने सोनिया गाँधी से पूछा है कि उनके सत्ता काल में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री (और बाद में राष्ट्रपति बने) प्रणब मुखर्जी और तत्कालीन सेना प्रमुख (और बाद में भाजपा में शामिल हो जाने वाले) वी के सिंह की जासूसी करने के लिए दस जनपथ से आदेश किसने जारी किए थे।
In a tweet, Nadda said the government has already clarified its stand on this issue, and asked the Congress president to clarify who ordered snooping during the Congress-led UPA regime.https://t.co/quX272xBlP
BJP Working President JP Nadda: While Govt has already clarified its stand on this issue, perhaps Mrs. Gandhi could enlighten nation about who at 10 Janpath authorised snooping on Pranab Mukherjee when he was minister in UPA&Gen VK Singh when he was the Army Chief. (File pic) https://t.co/8BaaNRAWkRpic.twitter.com/sTYBsSgMZq
गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया के हवाले से समाचार एजेंसी एएनआई ने कहा था कि मोदी सरकार ने नेताओं और पत्रकारों की जासूसी की थी। उन्होंने सरकार पर इसके लिए इजराइल से पेगासस सॉफ्टवेयर खरीदने का आरोप लगाया और यह भी कहा कि ये गतिविधि केवल अवैध और असंवैधानिक ही नहीं, शर्मनाक भी है। सोनिया गाँधी ने यह बयान कथित तौर पर पार्टी के महासचिवों, राज्य प्रमुखों और अन्य अनुषांगिक संगठनों के प्रमुखों को सम्बोधित करते हुए दिया था।
इसी समय उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों की वजह से पिछले 6 सालों में कथित तौर पर 90 लाख नौकरियों का नुकसान हुआ है, हालाँकि उन्होंने इस आँकड़े का कोई स्रोत नहीं बताया। इसके अलावा उन्होंने कहा कि वित्तीय साल की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ दर केवल 5% रही और बेरोजगारी दर चिंताजनक रूप से 8.5% रही।
Congress Interim President Sonia Gandhi: GDP growth is at only 5% in 1st quarter. Unemployment levels at 8.5% is disturbing. Recent studies now suggest demonetization,GST&subsequent economic decisions of Modi govt resulted in unprecedented loss of 9 million jobs during last 6 yrs pic.twitter.com/8kvuSbjOLh
इसके जवाब में एएनआई के ही ट्वीट को रीट्वीट करते हुए नड्डा ने सोनिया गाँधी के यूपीए काल में उठे जासूसी के आरोपों की याद दिलाई और कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर अपनी सफाई पहले ही पेश कर दी है।
While the Govt has already clarified its stand on this issue, perhaps Mrs Gandhi could enlighten the nation about who at 10 Janpath authorised snooping on Shri Pranab Mukherjee when he was a minister in UPA & Gen VK Singh when he was the Army Chief!https://t.co/7aTPEcjQt5
रवीश कुमार ने मोतिहारी में क़दम रखा और वहाँ उनका ख़ूब स्वागत किया गया। मैं भी चम्पारण से हूँ, इसीलिए रवीश कुमार के जहाँ से उठ कर यहाँ तक पहुँचे हैं, उस पर हर चम्पारणवासी की तरह मुझे भी गर्व है। लेकिन हाँ, यहाँ तक पहुँचने के बाद उन्होंने क्या-क्या गुल खिलाए हैं, ये ज़रूर बहस का मुद्दा है। अंधविरोध में उन्होंने ऐसी-ऐसी बातें कहनी शुरू की और सभी मोदी समर्थकों को कमअक्ल, व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के छात्र और न जाने क्या-क्या उपाधियाँ दे डाली। रवीश की हिंदी डिक्शनरी मजबूत है लेकिन उनकी भोजपुरी भी अच्छी है। वह अच्छे से अच्छे अवसर को भी कैसे अपने प्रोपेगंडा के लिए प्रयोग कर लेते हैं, इसका नमूना आगे देखेंगे।
अपने गृह प्रदेश पूर्वी चम्पारण के अरेराज पहुँचे रवीश कुमार ने बताया कि भोजपुरी उनकी ‘माई’ है। माई का मतलब माँ। अरेराज एक पावन धरती है, जहाँ सोमेश्वरनाथ महादेव विराजते हैं। इसीलिए रवीश भगवान शिव के दर्शन करने भी पहुँचे, तिलक लगाया और पूजा-अर्चना की। यही काम अगर भाजपा नेता करते हैं तो वो रवीश के निशाने पर होते हैं। उनका आरोप होता है कि वो वोट के लिए ऐसा कर रहे हैं। ख़ैर, यहाँ रवीश ने अपनी भोजपुरी डिक्शनरी में से ‘लबरई’ शब्द निकाला, जिसका अर्थ होता है झूठ बोलना और किसी को बेवकूफ बनाने के लिए इधर-उधर की बेढंगी बातें करना।
थोड़ा आप भी इस भोजपुरी भाषा का आनंद लीजिए। भले ही रवीश कुमार के मुँह से निकली हो लेकिन भोजपुरी बहुत ही अच्छी भाषा है, ज़मीन से जुडी है और भारत के दिल में बसती है। रवीश ने अरेराज में कहा- “जे हमरा दिमाग में आई से कहेब लेकिन लबरई ना कहेब। काहे कि हमरा सरकार बनावे के त नइखे। त ना हम लबरई ढिलेम आ ना रउआ लोगन लबरई लपेटेम।” दरअसल, रवीश कुमार ने बताया था कि वो दो रातों से सो नहीं पाए हैं, इसीलिए उन्हें क्या बोलना था- ये याद नहीं है। उपर्युक्त भोजपुरी पंक्तियों में वो कह रहे हैं कि वो झूठ नहीं बोलेंगे क्योंकि उन्हें सरकार नहीं बनानी है। उनका इशारा किधर था, आप समझ सकते हैं।
अच्छा हुआ कि रवीश कुमार ने यहाँ ‘लबरई’ शब्द का प्रयोग कर दिया क्योंकि इस हबड़ के द्वारा उन्हें समझने में काफ़ी आसानी होगी। आपको मैं समझाता हूँ। जब कोई व्यक्ति दो लोगों के बीच ज़मीन की खरीद बिक्री करा कर दोनों तरफ़ झूठ बोलता है और न इधर की बात उधर सही-सही पहुँचने देता है और न उधर की बात इधर, तो लोग उस व्यक्ति को ‘लबरा’ कहते हैं। उससे भी बड़े झूठे को ‘बड़का भारी लबरा’ कह सकते हैं। ऐसा हर क्षेत्र में लागू होता है। जो केवल एक पक्ष की ही बात बताए और दूसरे पक्ष की बातों को तोड़-मरोड़ कर पेश करे, उसे भी ‘लबरा’ कहा गया है क्योंकि वो ‘लबरई बतियाता है।’
पूर्वी चम्पारण के अरेराज में रवीश की नेतागिरी
रवीश ने अपने गृहक्षेत्र में जनता को सम्बोधित करते हुए कहा कि ‘लबरा लोगों’ से घबराने की ज़रूरत नहीं है। रवीश का आरोप है कि अब सरकार ऐसा प्रयास करती है कि कोई पत्रकार न बचे और इसी कारण अब पत्रकार होना बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल की कम्पनी को बुला कर बचे-खुचे पत्रकारों का फोन टाइप कराया जा रहा है। उनका आरोप था कि पत्रकारों को ख़त्म कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने अपनी भाषण कला का प्रयोग करते हुए कहा कि अगर भारत सरकार के खजाने में हाथ डाल कर देखा जाए तो वहाँ ग़रीब जनता का ख़ून मिलेगा। बकौल रवीश, इसी खजाने से राजनीतिक सफलताएँ प्राप्त की जा रही हैं।
सरकार के बड़े अधिकारियों ने कहा है कि व्हाट्सप्प ने सरकार को बताया ही नहीं कि उसका सिस्टम ब्रीच किया गया है। इजरायल की जिस कम्पनी की बात हो रही है, उसकी सेवा लेने के आरोप से सरकार ने इनकार किया है। फिर भी रवीश इसका सीधा आरोप भारत सरकार पर ही लगा रहे हैं। ऐसा करते हुए दूसरों को ‘लबरा’ बताना क्या रवीश को शोभा देता है? कम से कम वो अपने जिले, अपने गाँव के कार्यक्रम को तो राजनीति और प्रोपेगंडाबजी से दूर रख सकते थे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। भारत सरकार ने प्राइवेसी ब्रीच को लेकर व्हाट्सप्प को नोटिस जारी किया है, जवाब माँगा है। फिर भी रवीश का आरोप सीधा भारत सरकार पर ही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खुन्नस के कारण रवीश अब सार्वजनिक मंचों पर भी भला-बुरा कहते हुए झूठ फैलाने लगे हैं और उलटा दूसरों को ही ‘लबरा’ बता रहे हैं। अव्वल तो ये कि इजरायल की कम्पनी और व्हाट्सप्प के कारनामों के लिए वो इस मामले में नोटिस जारी करने वाले मोदी सरकार पर दोषारोपण कर रहे हैं और साथ ही जनता को ‘लबरा’ लोगों से बच कर रहने की सलाह दे रहे हैं। रवीश कुमार को समझना चाहिए कि भोजपुरी में बोलने से भी झूठ झूठ ही रहता है, वो सच नहीं हो जाता। उनका आरोप है कि सरकार उनके फोन में ‘ढुका लाग के’ देख रही है, अर्थात छिप कर झाँक-ताक कर रही है।
भाजपा नेताओं के मंदिर जाने पर कटाक्ष करने वाले रवीश कुमार ख़ुद अरेराज मंदिर में दर्शन करने गए
इससे पता चलता है कि रवीश कुमार सोने से पहले भी अपने चादर के नीचे ज़रूर देखते होंगे कि मोदी ने कहीं कोई यंत्र तो नहीं फिट कर दिया है? अपने बिस्तर के नीचे देखते होंगे कि कहीं भाजपा ने उनके चारों पायों में चार अलग-अलग सूक्ष्म मशीनें तो नहीं फिट कर रखी हैं। क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकारी खजाने से रुपए निकाल कर चुनाव जीत रहे हैं और देश-विदेश में अपना ढिंढोरा पीट रहे हैं। रवीश का तो यही मानना है। शायद रवीश कुमार को भाजपा के खजाने और सरकारी खजाने के बीच का अंतर नहीं पता। उन्हें नहीं पता कि चुनाव भाजपा लड़ती है, भारत सरकार नहीं। विदेशी दौरों पर मोदी के रूप में देश का प्रतिनिधि जाता है, भाजपा का नहीं।
रवीश का ये दर्द भी छलक आया कि पीएम मोदी ने उन्हें बधाई नहीं दी। बकौल रवीश, पीएम के होठ और हाथ दोनों ही उन्हें बधाई देने से पहले काँप गए। अर्थात, जिसे भला-बुरा कह कर रवीश अपनी पत्रकारिता की दुकान चला रहे हैं, उसी व्यक्ति से वो अवॉर्ड की बधाई लेने को भी बेचैन देख रहे हैं। अगर भारत के खजाने में ग़रीबों का ख़ून है तो क्या ये कुछ वर्ष पूर्व आई सरकार की ग़लती है? रवीश का इस दौरान मंदिरों के निर्माण से द्वेष भी छलक गया। उनका आरोप था कि शिक्षा नीति बनाने वाले मंदिर बनवा रहे हैं। क्या रवीश आँकड़ा दे सकते हैं कि भारत सरकार ने पिछले 5 वर्षों में कितने मंदिर बनवाए हैं?
क्या राम मंदिर के लिए सरकार लड़ रही है? क्या भारत सरकार राम मंदिर मामले या अयोध्या विवाद की पक्षकार भी है? फिर रवीश ऐसा क्यों कहते हैं कि सरकार मंदिर बनाने में व्यस्त है? भोली-भाली जनता को झूठ कौन परोस रहा? और ऐसे में दूसरों को ‘लबरा’ की संज्ञा देना तो उनकी इस हरकत में चार चाँद लगता है। मोदी सरकार के खजाने में ग़रीबों का ख़ून है, मोदी रवीश के फोन में झाँक-ताक कर रहे हैं, मोदी मंदिर बनवा रहे हैं और मोदी जनता के रुपए से विदेश में अपनी ब्रांडिंग कर रहे हैं- रवीश कुमार के पूरे सम्बोधन का सार यही था। यह देख कर लगा कि शायद अब वो भी नेता हो गए हैं, पत्रकारिता तो उन्होंने कब की छोड़ दी थी। नेताजी रवीश चम्पारण को मुबारक हो। मुझे भी, क्योंकि मैं भी उसी क्षेत्र का हिस्सा हूँ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित ‘Sawasdee मोदी’ कार्यक्रम के दौरान हजारों लोगों को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत-म्यांमार-थाईलैंड के बीच ट्रायलेटरल हाइवे को कुछ ही समय बाद चालू किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत और थाईलैंड के बीच रिश्तें सरकारों ने नहीं बल्कि इतिहास ने बनाया है। मोदी ने बताया कि पौराणिक काल में जहाँ भारत का नाम जम्बूद्वीप से जुड़ा था, थाईलैंड सुवर्णभूमि का हिस्सा था।
उन्होंने कहा कि भारत की अयोध्या नगरी, थाईलैंड में आ-युथ्या हो जाती है। पीएम मोदी ने बताया कि जिन नारायण ने अयोध्या में अवतार लिया, उनके पावन-पवित्र वाहन ‘गरुड़’ के प्रति थाईलैंड में अप्रतिम श्रद्धा है। प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों की बात करते हुए कहा कि उन्हें इस बात की भी खुशी होती है कि विश्व में जहाँ भी भारतीय हैं, वे भारत से संपर्क में रहते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय समुदाय भारत में क्या हो रहा है, इसकी खबर रखते हैं। प्रधानमंत्री ने आगे कहा:
“आप संभवत: जानते होंगे कि इस साल के आम चुनावों में इतिहास में सबसे ज़्यादा 60 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाले। लेकिन क्या आप ये भी जानते हैं कि भारत के इतिहास में पहली बार महिला मतदाताओं की संख्या करीब-करीब पुरुषों के बराबर रही? इतना ही नहीं, इस बार पहले से कहीं ज़्यादा महिला सांसद लोक सभा में चुन कर आई हैं। 8 करोड़ घरों को हमने 3 साल से भी कम समय में मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन दिए हैं। यह संख्या थाईलैंड की आबादी से बड़ी है। बीते 5 सालों में हमने हर भारतीय को बैंक खाते से जोड़ा है, बिजली कनेक्शन से जोड़ा है और अब हर घर तक पर्याप्त पानी के लिए काम कर रहे हैं। हाल में ही गाँधी जी की 150वीं जयंती पर भारत ने खुद को Open Defecation फ्री घोषित किया है।”
हमने हाल ही में फैसला लिया है कि ओसीआई कार्ड holders भी New Pension scheme में एनरोल कर सकते हैं।हमारी Embassies आपसे जुड़े मुद्दों को सुलझाने में अब अधिक Proactive हैं और 24 घंटे Available हैं।: PM @narendramodipic.twitter.com/V7ntacAGEu
सिखों के प्रथम गुरु नानक देव जी क्व 550वें प्रकाशोत्सव की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस उपलक्ष्य में स्मारक सिक्के भी जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी मिली है कि गुरु नानक के 500वें प्रकाशोत्सव को थाईलैंड में भी बड़े धूम-धाम से मनाया गया था। पीएम मोदी ने आगे जानकारी दी कि इस पवित्र पर्व के मौके पर भारत सरकार बीते एक वर्ष से बैंकॉक सहित पूरे विश्व में कार्यक्रम आयोजित कर रही है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी सिर्फ भारत के, सिख पंथ के ही नहीं थे, बल्कि उनके विचार पूरी दुनिया, पूरी मानवता की धरोहर हैं।
पीएम मोदी ने ऐलान किया कि एक बार भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे यानी ट्रायलेटरल हाइवे शुरू हो जाएगा तो नॉर्थ-ईस्ट इंडिया और थाईलैंड के बीच सुगम संपर्क तय है। उन्होंने कहा कि इस क़दम से इस पूरे क्षेत्र में व्यापार भी बढ़ेगा, पर्यटन भी और रिश्तों को भी ताकत मिलेगी। विदेश मंत्रालय के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 5 सालों में सरकार ने ये निरंतर प्रयास किया है कि दुनिया भर में बसे भारतीयों के लिए वो हर समय उपलब्ध रहे और भारत से उनके कनेक्शन को मजबूत किया जाए।