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‘बड़े पैमाने पर इस्लाम, ईसाईयत में मज़हबी मतांतरण देश पर हमला, 25000 लोगों की हमने कराई घर वापसी’

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के एक नेता ने दावा किया है कि विहिप ने पिछले साल (वर्ष 2018 में) 25,000 हिन्दू से ईसाई और इस्लाम अपना लेने वाले लोगों की ‘घर वापसी’ कराई है। शनिवार को दिए गए इस बयान में विहिप के महासचिव मिलिंद परांदे ने कहा है कि उनके संगठन ने इसके लिए साल भर ड्राइव चलाईं थीं। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल (2019) के लिए अंतिम आँकड़े अभी इकट्ठे नहीं हुए हैं।

एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस को सम्बोधित करते हुए मिलन्द परांदे ने कहा कि मज़हबी मतांतरण एक राष्ट्रीय समस्या है। उन्होंने जोड़ा कि बड़े पैमाने पर इस्लाम और ईसाईयत में होने वाले मज़हबी मतांतरण (मास कन्वरशंस) देश पर भी एक हमला हैं, और देश के लोगों को बाँट देने की एक साजिश हैं। उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद की माँग है कि सरकार मज़हबी मतांतरण के खिलाफ एक कठोर कानून लेकर आए

सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अयोध्या के राम जन्मभूमि बनाम बाबरी मस्जिद केस के बारे में भी परांदे ने बात की। उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद हिन्दुओं के पक्ष में एक सकारात्मक फैसले की उम्मीद कोर्ट से कर रहा है। इसका कारण उन्होंने बताया कि सभी पुरातात्विक तथ्य (अर्कीर्ओलॉजिकल फैक्ट्स) अयोध्या में बाबरी मस्जिद के निर्माण के पहले राम मंदिर के होने के पक्ष में जाते हैं। लेकिन उन्होंने साथ ही में यह भी जोड़ा कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देगा, उसे माना जाएगा

इसके अलावा परांदे ने हाल ही में असम में खत्म हुई नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़ंस (एनआरसी) की कवायद और नागरिकता अधिनियम (सिटिज़ेशनशिप बिल) की भी बात की। उन्होंने कहा कि देश में हिन्दुओं के हित में सिटिज़ेशनशिप बिल में संशोधन किया जाना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने इसे “देश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित” करने के लिए आवश्यक बताया।

राम मंदिर पर फैसले से पहले CM योगी ने राम के नाम आवंटित किए ₹447 करोड़: पहले भी जारी हुए हैं ₹200 करोड़

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अयोध्या में भगवान श्री राम की 221 मीटर ऊँची प्रतिमा की स्थापना के लिए ₹447 करोड़ के अतिरिक्त बजटीय आवंटन को मंजूरी दे दी है। यह धनराशि इस साल पहले ही दिए जा चुके ₹200 करोड़ के अलावा अतिरिक्त राशि होगी। जिस प्रतिमा के लिए यह धन आवंटन किया गया है, वह प्रस्तावित प्रतिमा सफलतापूर्वक स्थापित होने पर दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा होगी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह प्रतिमा योगी सरकार के राम नगरी अयोध्या प्रोजेक्ट का हिस्सा है और इसे सरयू नदी के तट पर स्थापित किया जाएगा। इस प्रतिमा के लिए 61.38 एकड़ ज़मीन मीरपुर इलाके में खरीदने का प्रावधान भी इसी राशि के आवंटन में हो जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने राम नगरी अयोध्या के पूरे विकास के लिए कुल ₹447.46 करोड़ का प्रावधान किया है। इसके पहले जिन ₹200 करोड़ का आवंटन इसी साला हुआ था, वह प्रतिमा के निर्माण से जुड़ी टेक्निकल स्टडी करने के लिए हुआ था। प्रतिमा के निर्माण का पैसा सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) से निकले बजट से होगा

जमीन के अधिग्रहण के अलावा आवंटित राशि में से पैसे का इस्तेमाल पर्यटन के विकास, अयोध्या नगरी की साज सज्जा में, डिजिटल म्यूज़ियम बनाने में, इंटरप्रिटेशन केंद्र के निर्माण, लाइब्रेरी, पार्किंग, फ़ूड प्लाज़ा, लैंडस्केपिंग और अन्य सुविधाओं के निर्माण में किया जाएगा।

इस आवंटन के निर्णय की घोषणा कल (शुक्रवार, 2 नवंबर, 2019 को) की गई थी। यह घोषणा सुप्रीम कोर्ट के राम जन्मभूमि बनाम बाबरी मस्जिद के विवाद में बहुप्रतीक्षित फैसले के ठीक पहले की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री को इस श्री राम की प्रतिमा के मामले में कोई भी अन्य निर्णय लेने के लिए भी अधिकृत किया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजनीतिक नेता होने के साथ ही गोरखपुर में स्थित गोरक्ष पीठ के मुख्य महंत भी हैं। यह ओहदा उन्हें हिन्दुओं के सबसे महत्वपूर्ण और धार्मिक, सामाजिक व आध्यात्मिक रूप से प्रभावशाली नाथ सम्प्रदाय का भी प्रमुख बनाता है। उनके गुरु और उनसे पहले गोरक्ष पीठ के मुखिया महंत श्री अवैद्यनाथ राम जन्मभूमि आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक थे।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और भाजपा नेता श्रीकांत शर्मा ने यह भी बताया कि सरकार के इस प्रोजेक्ट की रूप रेखा गुजरात के सरदार पटेल स्टेचू (स्टेचू ऑफ़ यूनिटी) के आधार पर तय कर रही है।

नेहा को मार कर सूटकेस में भरकर फेंक दिया: लुकमान के साथ लिव-इन में थी, नोमान, अरमान, शमसाद गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने 18 वर्षीया महिला की हत्या कर उसकी लाश सूटकेस में भर कर ठिकाने लगाने के आरोप में तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों के नाम नोमान, अरमान और शमसाद बताए जा रहे हैं। तीनों की उम्र क्रमशः 30, 26 और 30 साल बताई जा रही है।

पुलिस के अनुसार नेहा की लाश पिछले महीने (अक्टूबर, 2019) की 18 तारीख (शुक्रवार) को एक सूटकेस में भर कर सुबह बरामद हुई थी। वह उसी दिन से गायब भी बताई जा रही थी। जिस इलाके (बवाना) में यह बरामदगी हुई, वह उत्तरी दिल्ली का बाहरी इलाका है। नेहा को शकूरपुर की रहने वाली बताया जा रहा है, जबकि आरोपितों में नोमान के नॉएडा, अरमान के शकूरपुर में ही और शमसाद के न्यू उस्मानपुर में रहने की बात मीडिया रिपोर्टों में आ रही है। इन सभी की गिरफ़्तारी आज ही (शनिवार, 2 नवंबर, 2019 को) हुई है।

जब नेहा की लाश बरामद हुई तो पुलिस ने आसपास के कैमरों की सीसीटीवी फुटेज खंगालनी शुरू कर दी। ऐसी ही एक तफ्तीश में पुलिस को पता चल कि लाश को वहाँ फेंकने ऑटो रिक्शा में बैठकर कोई आया था। टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि नेहा लुकमान नामक एक लड़के के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में पिछले एक महीने से रह रही थी। इस रिपोर्ट में पुलिस अधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया गया है।

पुलिस ने जब शकूरपुर में जहाँ लुकमान का घर था, उसके आस पास के इलाके की सीसीटीवी फुटेज की जाँच की तो उसमें लुकमान के दो भाई अरमान और नोमान 17 और 18 अक्टूबर, 2019 के बीच की रात में एक ट्राली बैग खींचते हुए देखे गए। इसके बाद पुलिस ने कल (शुक्रवार, 1 नवंबर, 2019 को) अरमान, नोमान और शमसाद को गिरफ्तार कर लिया।

उन तीनों से हुई पूछताछ में पता चला कि नेहा लुकमान के बर्ताव से आजिज आ चुकी थी। वह लुकमान से अपने संबंध खत्म करना चाहती थी।

घटना के दो दिन पहले (16 अक्टूबर, 2019 को) दोनों के बीच एक झगड़ा हुआ। इसके बाद लुकमान और उसके भाइयों ने नेहा की हत्या कर दी और उसकी लाश को बवाना ले जाकर ठिकाने लगा दिया। पुलिस ने बताया कि हालाँकि लुकमान को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है, लेकिन प्रयास जारी हैं।

करीब पूरा का पूरा POK और अक्साई चीन बना लद्दाख का हिस्सा: भारत के नक़्शे में बड़ा बदलाव

दोनों नए केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर का लद्दाख का नया नक्शा जारी कर दिया है। इसके साथ ही भारत के राजनीतिक नक़्शे में नया बदलाव हुआ है। सरदार पटेल के जन्मदिन के अवसर पर देश को दो नए केंद्र शासित प्रदेश मिले। मोदी सरकार ने अगस्त के पहले हफ्ते में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करते हुए जम्मू कश्मीर का विशेषाधिकार वापस ले लिया था, जिसके बाद राज्य के पुनर्गठन का रास्ता साफ़ हुआ। जम्मू कश्मीर के अधिकतर नेताओं को हिरासत में रखा गया है क्योंकि वो लोगों को भड़का कर अशांति फैला सकते थे। लद्दाख और जम्मू कश्मीर के लिए नए उपराज्यपाल भी नियुक्त कर दिए गए हैं।

वहीं अगर नए नक़्शे की बात करें तो पाक अधिकृत कश्मीर पूरा का पूरा लद्दाख का हिस्सा बनाया गया है। अर्थात, अगर भारत इसे पाकिस्तान के अवैध कब्जे से निकालता है तो ये लद्दाख का हिस्सा बनेगा और केंद्र शासित प्रदेश के अंतर्गत होगा। इससे फायदा ये होगा कि कश्मीर के नेता इसमें कोई मोलभाव नहीं कर सकेंगे और पीओके को लेकर हर तरह की बातचीत करने और फ़ैसला लेने का अधिकार पूर्णतः भारत सरकार के ही पास रहेगा। इसी तरह चीन के अवैध कब्जे वाले इलाक़े अक्साई चीन को भी लद्दाख का ही हिस्सा बनाया गया है।

लद्दाख को बिना विधायिका वाला यूटी बनाया गया है, जबकि जम्मू कश्मीर में विधायिका होगी। इसका मतलब पीओके की भी कोई विधायिका नहीं होगी और ये क्षेत्र भी बिना विधायिका वाले केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का हिस्सा होगा। अगर भविष्य में जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा फिर से दे दिया जाता है, तो भी इसका क्षेत्रफल छोटा ही रहेगा क्योंकि अब इसके अंतर्गत लद्दाख नहीं आएगा। गिलगित-बाल्टिस्तान के यूटी में होने के कारण चीन के ‘बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट’ को लेकर भी केंद्र सरकार बिना कश्मीरी नेताओं के हस्तक्षेप के फ़ैसले ले सकेगी।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि पीओके के लिए जान भी दे देंगे। इसके बाद से लगातार कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत सरकार पीओके और अक्साई चीन को अवैध कब्जों से छुड़ाने के लिए प्रयासरत हैं। जम्मू कश्मीर और लद्दाख के दो नए केंद्र शाषित प्रदेश बनने से आतंकवाद पर भी लगाम लगने की उम्मीद है क्योंकि पुलिस केंद्र सरकार के अधीन होगी और उस पर किसी प्रकार के हस्तक्षेप का दबाव नहीं होगा। अब देश में अब 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश हैं।

कानून उखाड़ फेंकने वाला माओवादी लिटरेचर बाँटते पकड़े गए माकपा के लॉ छात्र शुहैब और थाहा फसल

केरल की पुलिस ने कल रात (शुक्रवार, 2 नवंबर, 2019 को) दो माकपा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर माओवाद समर्थक ब्रोशर और पर्चे कोझिकोड में बाँटते हुए गिरफ्तार किया है। दोनों कानून के छात्र यानि लॉ स्टूडेंट बताए जा रहे हैं। दोनों पर कोझिकोड जिले के पंथीरैंकवू पुलिस थाने में अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (यूएपीए) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

दोनों आरोपितों का नाम एलन शुहैब और थाहा फसल बताया जा रहा है। द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों का ताल्लुक थालास्सेरी जिले से बताया जा रहा है। मीडिया खबरों के मुताबिक दोनों को माओवाद समर्थक पर्चे बाँटते पंथीरैंकवू के बाजार में कल देखा गया था। आरोप यह भी लग रहा है कि जब पुलिस ने मौके पर पहुँच कर उन छात्रों को गिरफ्तार किया, तब भी दोनों ने माओवाद समर्थक नारे लगाने शुरू कर दिए।

यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि केरल में माकपा की ही सरकार है। एलन शुहैब के तार कोझिकोड की स्थानीय कलाई थिरुवन्नूर ब्रांच से जुड़े बताए जा रहे हैं। एलन को माकपा की छात्र इकाई स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफआई) का भी पूर्व सदस्य बताया जा रहा है, जिसमें वह पंथीरैंकवू एरिया कमेटी का मेंबर था। जब वह पंथीरैंकवू से थालास्सेरी में लॉ की पढाई करने के लिए गया, तो पंथीरैंकवू की उसकी सदस्य्ता निरस्त हो गई थी। वहीं दूसरी ओर थाहा फसल को माकपा की पंथीरैंकवू स्थानीय शाखा की डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (डीवाईएफआई) यूनिट का सेक्रेटरी बताया गया है।

मामले और आरोपों की की गंभीरता को देखते हुए राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मामले पर नज़र रखने के लिए पंथीरैंकवू थाने पहुँचने शुरू हो गए हैं। पंथीरैंकवू पुलिस थाने के एक अधिकारी ने द न्यूज़ मिनट से बातचीत करते हुए कहा, “हमने उन्हें अभी तक अदालत में पेश नहीं किया है। उन पर आरोप अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (यूएपीए) के तहत लगे हैं। नॉर्थ ज़ोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस अशोक यादव पुलिस थाने में स्थिति की जानकारी लेने और आगे के कदमों का निर्देश देने के लिए पहुँचे हुए हैं।” द न्यूज़ मिनट ने अधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया है।

वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इस पर राजनीतिक आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं। राज्य की विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्निथला ने कहा है कि कथित तौर पर माओवाद समर्थक ब्रोशर और पर्चे बाँटने के लिए दोनों लॉ छात्रों के खिलाफ यूएपीए का इस्तेमाल बर्बर कृत्य है। उन्होंने कहा कि यूएपीए के प्रावधान इस मामले पर लागू नहीं होते हैं; वे विचारधाराओं के साथ खड़े लोगों पर लगाए जाने के लिए नहीं हैं। उन्होंने साथ में यह भी जोड़ा कि लेफ्ट की सरकार लोकतान्त्रिक अधिकारों का उल्लंघन कर रही है।

पाकिस्तानी हैकर्स ने हैक की बीजेपी दिल्ली की आधिकारिक वेबसाइट: PM मोदी खिलाफ किए अपमानजनक पोस्ट

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई की वेबसाइट शनिवार (2 नवंबर) को संदिग्ध पाकिस्तानी हैकर्स ने हैक कर लिया। इसके बाद उसने वेबपेज को ख़राब कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ अपमानजनक पोस्ट भी की।

‘मुहम्मद बिलाल टीएएम (पीसीई)’ नाम के हैकर ग्रुप ने दावा किया है कि वो “घर मुख्य ग़ुस्स कर मारेंगे।”

ख़बर के अनुसार, एक अन्य संदेश में लिखा गया है, “मैं बहुत झूठ बोल सकता हूँ, क्या मैं अभिनंदन की तरह ‘वीर चक्र’ भी प्राप्त कर सकता हूँ।” हैकर ने विंग-कमांडर अभिनंदन वर्थमान और कुछ पुलिस कर्मियों के साथ एक फ़ोटोशॉप्ड तस्वीर भी पोस्ट की, जिसमें एक कैप्शन लिखा था कि ‘27 फ़रवरी याद है ना’।

हैकर ने एक और संदेश पोस्ट किया, जिसमें लिखा था कि फिल्में बनाओ लड़ना तुम्हारे बस की बात नहीं# 27Feb2019.

वेबसाइट हैक होने के बाद अब delhi.bjp.org स्वचालित रूप से अपनी मुख्य वेबसाइट bjp.org पर डाइवर्ट हो गई है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस साल मई के महीने में, बीजेपी की दिल्ली इकाई की वेबसाइट को हैक किया गया था, जिसमें बीफ के व्यंजन डाले गए थे।

कई लोगों ने वेबसाइट की सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठाए हैं। हालाँकि शुक्रवार-शनिवार की रात में वेबसाइट ठीक खुल गई।

ख़बर के अनुसार, पाकिस्तानी हैकर ने देर रात लगभग साढ़े बारह बजे दिल्ली बीजेपी की आधिकारिक वेबसाइट को हैक करके उस पर पाकिस्तान और कश्मीर ज़िदाबाद लिखा। वेबसाइट हैक होने के बाद लोग उसके स्क्रीनशॉट लेकर सोशल नेटवर्किंग साइट पर शेयर करने लगे और अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ देने लगे। हालाँकि थोड़ी देर बाद इस खामी को ठीक कर लिया गया और अब दिल्ली बीजेपी की वेबसाइट ठीक खुल रही है।

पवार ने फिर दिया झटका तो शिवसेना के बदले तेवर: कहा- हम तो गठबंधन धर्म का पालन कर रहे…

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच अब शिवसेना के तेवर नरम पड़ते दिख रहे हैं। शिवसेना मुखपत्र सामना के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी गठबंधन धर्म का पालन कर रही है और आखिरी तक करेगी। महाराष्ट्र के वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने आशंका जताई थी कि अगर शिवसेना के यही तेवर रहे तो फिर राज्य राष्ट्रपति शासन की तरफ जा सकता है। वहीं शिवसेना ने सामना के माध्यम से उनके इस बयान पर कटाक्ष किया था और भाजपा की ख़ासी आलोचना की थी। शिवसेना ने आरोप लगाया कि भाजपा जाँच एजेंसियों द्वारा जोर-जबरदस्ती करने की कोशिश कर रही है, जो फेल हो गई।

वहीं अब शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि अभी तक दोनों दलों के बीच औपचारिक बातचीत शुरू भी नहीं हुई है। संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी ने गठबंधन में रह कर ही चुनाव लड़ा था और आखिरी समय तक वो गठबंधन धर्म का पालन करेंगे। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता हुसैन दलवई के उस क़दम का भी स्वागत किया, जिसमें उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिख कर शिवसेना को समर्थन देने की माँग की है। राउत ने महाराष्ट्र की मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति के बारे में बोलते हुए कहा कि हर कोई एक-दूसरे से बात कर रहा है लेकिन भाजपा और शिवसेना बातचीत नहीं कर रही।

राउत ने उन आरोपों से भी इनकार किया, जिनमें कहा जा रहा था कि शिवसेना ने गठबंधन सरकार को लेकर चल रही बातचीत पर रोक लगा दी है। उन्होंने कहा कि जब बातचीत शुरू ही नहीं हुई तो इसे रोकने का तो सवाल ही नहीं उठता है। गुरुवार (अक्टूबर 31, 2019) को राउत ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से बातचीत की थी। अब पवार ने एक बार फिर शिवसेना को झटका देते हुए कहा है कि वो विपक्ष में बैठेंगे। नासिक में एनसीपी के संस्थापक-अध्यक्ष ने कहा कि चूँकि उन्हें विपक्ष में बैठने का जनादेश प्राप्त हुआ है, इसीलिए उनकी पार्टी सरकार गठन की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेगी।

शरद पवार ने मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना और भाजपा में चल रहे गतिरोध को बचकाना करार दिया। राजग गठबंधन में शामिल रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया ने भाजपा का समर्थन किया है। पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि सीएम भाजपा का ही होना चाहिए। अठावले ने राज्यपाल से मुलाक़ात कर सबसे बड़ी पार्टी यानी भाजपा को सरकार बनाने के लिए निमंत्रण देने की माँग की है। इससे पहले शिवसेना ने कहा था कि भाजपा नेता समझते हैं कि राष्ट्रपति उनकी मुट्ठी में हैं और राष्ट्रपति का स्टाम्प भाजपा कार्यालय में रखा हुआ है।

दोनों दलों के बीच कार्टून वॉर भी छिड़ गया है। भाजपा ने शिवसेना के कार्टून का जवाब देते हुए एक और कार्टून जारी किया। भाजपा ने कहा कि अगर शिवसेना बाघ है तो फडणवीस सर्कस में बाघों को नियंत्रण में रखने वाले रिंगमास्टर हैं। इससे पहले शिवसेना ने एक कार्टून में दिखाया था कि बाघ अपने पंजे में कमल का फूल थामे हुआ है। भाजपा ने इसके जवाब में एक कार्टून जारी किया था, जिसमें उद्धव क़द में अपने से काफ़ी विशाल फडणवीस को कह रहे हैं कि उन्हें बड़ा भाई पुकारा जाए।

योगी आदित्यनाथ को गोली मारने, क्षत्रिय सेना और भगवान राम को गाली देने के आरोप में युवा गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गाली देने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में उत्तर प्रदेश के इटावा के युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपित युवक द्वारा फेसबुक और व्हाट्सएप पर धमकी भरा वीडियो अपलोड किया गया। इस वीडियो में युवक को योगी आदित्यनाथ के साथ ही भगवान राम, क्षत्रिय ठाकोर सेना, करणी सेना और राजपूतों को गाली देते हुए देखा जा सकता है।

युवक द्वारा इस अभद्र वीडियो को अपलोड करने के बाद क्षत्रिय समुदाय ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। एएसपी ने क्षत्रिय समुदाय की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आरोपित युवक के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। जिसके बाद बकेवर पुलिस स्टेशन में युवक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

बता दें कि क्षत्रिय स्वाभिमान मंच के अध्यक्ष विकास सिंह भदौरिया और वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी कुमार सिंह चौहान ने अन्य अधिकारियों के साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की और आरोपित युवा के खिलाफ शिकायत दर्ज की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण ओमवीर सिंह ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है।

वायरल वीडियो में एक युवक खुद को बहेड़ा का राजमणि तिवारी बताता है। इसमें वो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का अपमान करता है और उन्हें गोली मारने की धमकी भी देता है। राजमणि ने योगी आदित्यनाथ पर हिंदू समाज के संस्थापक कमलेश तिवारी की हत्या करने का भी आरोप लगाया है। जिनकी 2015 में पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर 18 अक्टूबर को कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा लखनऊ में अपने घर में हत्या कर दी गई। 

इसके अलावा आरोपित राजमणि तिवारी ने क्षत्रिय और ब्राह्मण समुदाय को भी गालियाँ दीं और साथ ही गंभीर परिणाम भुगतने की भी धमकी दी। इसके साथ ही उसने हिन्दू के भगवान राम को अशिष्ट बताते हुए लंका के राजा रावण को महान बताया और उन्हें तुच्छ बताया। राजपूतों, करणी सेना और क्षत्रिय ठाकुर सेना की भी निंदा की और उन्हें चेतावनी दी कि यदि वे परशुराम को जरा भी कम समझते हैं, तो वह अपने दोस्तों के साथ मिलकर उन्हें खत्म कर देंगे।

मुझे पाकिस्तान जाने दो, नवजोत सिंह सिद्धू ने लिखी विदेश मंत्रालय को चिट्ठी

हाल ही में ख़बर आई थी कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी (पीटीआई) ने पंजाब सरकार के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए अपने कोटे से निमंत्रण भेजा है।

इसी कड़ी में पंजाब के पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान जाने के लिए विदेश मंत्री जयशंकर से अनुमति माँगी है। इसके लिए उन्होंने उन्हें पत्र लिखा है। सिद्धू ने पंजाब सरकार को भी पत्र लिखा है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर को संबोधित कर लिखे पत्र में उन्होंने लिखा, “9 नवंबर को श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर के उद्घाटन कार्यक्रम में पाकिस्तान सरकार ने मुझे आमंत्रित किया है। एक सिख होने के नाते अपने महान गुरु बाबा नानक के प्रति श्रद्धा अर्पित करने का सम्मान मिलना और अपनी जड़ों से जुड़ने का यह एक ऐतिहासिक मौका है। इस ख़ास अवसर पर पाकिस्तान यात्रा के लिए मुझे इजाज़त दी जाए।”

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विदेश मंत्रालय के अलावा सिद्धू ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी इस संबंध में इजाज़त माँगी है। इस ख़त में उन्होंने लिखा, “आपको ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि पाकिस्तान सरकार ने मुझे श्री करतारपुर साहिब कॉरिडोर के कार्यक्रम में बुलाया है। इसलिए मुझे इस मौके पर पाकिस्तान जाने की अनुमति प्रदान की जाए।”

इससे पहले पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने भी पाकिस्तान से उन्हें मिले न्योते की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें अनुमति मिल जाएगी तो वो ज़रूर जाएँगे। दरअसल, सिद्धू को पाकिस्तान के न्योते के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने शर्त रखी थी कि उन्हें पाकिस्तान जाने से पहले पॉलिटिकल क्लियरेंस लेना होगा। इसी सन्दर्भ में सिद्धू की पत्नी ने कहा,

“सिद्धू ने ज़रूरी अनुमति के लिए आवेदन किया है। उन्हें करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन कार्यक्रम में आने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से विशेष निमंत्रण मिला है। अगर उन्हें अनुमति मिलती है तो वह ज़रूर जाएँगे।”

एक बात ग़ौर करने वाली यह है कि खुद सिद्धू की पार्टी कॉन्ग्रेस का जो प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जा कर करतारपुर कॉरिडोर के समारोह का हिस्सा बनेगा, उसमें सिद्धू का नाम नहीं था। कॉन्ग्रेस के प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्षता भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह करेंगे, जिन्हें न्यौता पीटीआई नहीं पाकिस्तान सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से भेजा गया है। इसके अलावा वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह, रणदीप सुरजेवाला, दीपेंदर हुड्डा और जितिन प्रसाद एवं पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह करतारपुर कॉरिडोर के अनावरण में हिस्सेदारी करेंगे।

ग़ौरतलब है कि सिद्धू पहले अमरिंदर सिंह की कैबिनेट का हिस्सा भी थे, लेकिन पहले तो एंटी-नेशनल और पाकिस्तान-समर्थक देखी जाने वाली बयानबाजी, और उसके बाद राजनीतिक अनुशासनहीनता के चलते कैप्टेन ने उनका मंत्रिपद छीन लिया था। मीडिया सूत्रों के मुताबिक पहले सिद्धू का भी नाम इस प्रतिनिधिमंडल में था, लेकिन उनकी पिछली पाकिस्तान यात्राओं के बवाल को देखते हुए उसे हटा लिया गया।

नाश्ता फट गया और 74 लोग मर गए: ट्रेन दुर्घटना को लेकर Pak रेल मंत्री के बयान की किरकिरी

पाकिस्तान के पूर्वी पंजाब प्रान्त में हाल ही में हुई भीषण रेल दुर्घटना में 74 लोगों के मारे जाने की ख़बर थी। ट्रेन में आग लगने के बाद इसके रुकने में 20 मिनट लगे, जिससे पता चलता है कि पाकिस्तान में ट्रेनों की ब्रेक सिस्टम का क्या हाल है? जबकि ट्रेन के कंडक्टर ने कहा कि मात्र 3 मिनट में ब्रेक लगा दिया गया था। ट्रेन के ड्राइवर ने बताया कि ये उसकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी है। वहीं अब पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद के इस्तीफे की माँग जोर पकड़ रही है। लोग शेख रशीद को इस घटना की ज़िम्मेदारी लेने को कह रहे हैं।

शेख रशीद ने इस ट्रेन दुर्घटना को लेकर अजीबोगरीब बयान दिया है। उन्होंने इस त्रासदी के लिए यात्रियों को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। शेख रशीद ने कहा कि कुछ लोग नाश्ता बना रहा थे, जिससे नाश्ते में आग लग गई। हालाँकि, लोग उनके ‘नाश्ते में आग लगने’ के बयान को समझ नहीं पाए। इतनी बड़ी त्रासदी को लेकर ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान करार देते हुए लोगों से उनसे इस्तीफे की माँग की। पाकिस्तान के रेल मंत्री ने कहा कि नाश्ते में आग लगने से सिलिंडर में आग लग गया और सिलिंडर फट गया।

आग लगने का कारण सिलिंडर फटना ही बताया गया है क्योंकि इस्लामिक मिशनरी तबलिकी-ए-जमात के कुछ लोग गैस स्टोव लेकर ट्रेन में चढ़े हुए थे। मारे गए अधिकतर लोगों में भी इसी इस्लामिक मिशनरी के लोग शामिल हैं। संगठन ने कहा है कि 74 मृतकों में से 52 उसके सदस्य हैं। ये ट्रेन कराची से रावलपिंडी जा रही थी और गंतव्य से 10 किलोमीटर ही पीछे थी, तभी ये घटना हुई। इस ट्रेन में 857 लोग यात्रा कर रहे थे और त्रासदी और भी भयंकर हो सकती थी। रेलवे कमिश्नर ने भी कहा है कि इस्लामिक मिशनरी के सदस्यों द्वारा लाए गए गैस सिलिंडर के कारण ही आग लगी।

इससे पहले पाकिस्तान की एक ट्रेन में लगी स्क्रीन पर गंतव्य स्थल लॉस एंजेल्स दिखाया जा रहा था। पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद ने इससे जुड़े सवालों के जवाब में कहा कि अगर अल्लाह ने चाहा तो ज़रूर लॉस एंजेल्स भी जाएँगे। उन्होंने इसे सोशल मीडिया का कमाल करार दिया और कहा कि पाकिस्तानी लोग रेलवे से बहुत मोहब्बत करते हैं। ये वही मंत्री हैं, जिन्हें कश्मीर को लेकर आयोजित कार्यक्रम के दौरान PM मोदी का नाम लेते ही करंट लगा था।