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किसानों की जमीन हड़पने वाले न दें नसीहत: प्रियंका गाँधी की स्मृति ईरानी ने की बोलती बंद

केंद्रीय कपड़ा, महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार (30 अक्टूबर) को गाँधी परिवार के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा कि वो उत्तर प्रदेश सरकार को नसीहत न दे। स्मृति ईरानी ने आरोप लगाते हुए कहा कि जिनके परिजनों पर गबन और किसानों की ज़मीन हड़पने के आरोप लगे हैं, वो अपने गिरेबाँ में झाँक कर देखें और प्रदेश सरकार व अमेठी के प्रशासन को नसीहत न दें। केंद्रीय मंत्री बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी पहुँची थीं। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए यह बातें कही।

दरअसल, अमेठी में पुलिस अभिरक्षा में हुई एक व्यक्ति मौत पर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने ट्वीट किया था, इसमें उन्होंने लिखा था, “यूपी पुलिस अपराधियों पर मेहरबान है लेकिन हर दिन नागरिकों को परेशान करने में माहिर है। प्रतापगढ़ के सत्य प्रकाश शुक्ला का परिवार बता रहा है कि उनको बच्चों के सामने टॉर्चर किया गया। हापुड़ में इस तरह की घटना हुई थी। भाजपा सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही।”

केंद्रीय मंत्री ने प्रियंका गाँधी पर पलटवार करते हुए कहा कि किसानों की ज़मीन हड़पने वाले अमेठी के प्रशासन एवं सरकार को नसीहत देने की बजाए किसानों की ज़मीन उन्हें लौटा दे। उन्होंने कहा, “मैं इस बात से पूर्णत: सहमत हूँ और विश्वास प्राप्त कर चुकी हूँ कि सरकार परिवारों को न्याय पहुँचाएगी। अमेठी में किसानों की ज़मीन हड़पने वाले अमेठी के प्रशासन एवं सरकार को नसीहत देने के बजाए किसानों की जमीन उन्हें लौटा दें। पाँच सालों से मेरा आग्रह रहा है, लेकिन जिसने यह बयान अभी दिया है, उसके कान पर जू नहीं रेंगी है।”

स्मृति ईरानी ने कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि हम सभी को मिलकर जनता के लिए काम करना है। अगर समाज का एक भी व्यक्ति लाभ से वंचित रह जाता है तो हम अपने मिशन को कामयाब नहीं कर सकते हैं। गाँव-गाँव जाने की ज़रूरत है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता के बीच रखें और जन जागरूकता के तहत उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाएँ।

फैसले से पहले अयोध्या मामले पर बोले पवार: कहा- समुदायों में दरार डालने की हो सकती है कोशिश

अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले शरद पवार ने इस मामले पर अपना बयान दिया। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने बुधवार (अक्टूबर 30, 2019) को कहा कि ‘कुछ ताकतें’ देश में स्थिति का लाभ उठाते हुए समुदायों के बीच में दरार डालने की कोशिश कर सकती हैं।

उन्होंने अपने पार्टी के विधायकों के साथ बैठक के दौरान ये बात कही। जिनका नेता (विधायक दल का) अजीत पवार को चुना जा चुका है। शरद पवार ने इस दौरान सभी वर्गों में शांति बनाए रखने की अपील की

अयोध्या मामले का हवाला देते हुए शरद पवार ने राम जन्मभूमि को बड़े तबके के लोगों के लिए आस्था का विषय तो बताया। वहीं 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने को लेकर कहा कि देश के अल्पसंख्यकों में अलग प्रकार की भावना है।

एनसीपी प्रमुख ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “मैं उनकी भावनाएँ समझ सकता हूँ। कोर्ट का जो भी फैसला होगा, उसे अब वे स्वीकार करेंगे। चाहे फैसला जो भी हो समाज में शांति सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने की जरूरत है।’’

इसके बीच उन्होंने अयोध्या मामले पर आने वाले फैसले को लेकर ये भी कहा कि इस मौक़े का फायदा कुछ ताकतें उठा सकती हैं और समुदायों में दरार डालने की भी कोशिश की जा सकती है। हालाँकि इस दौरान एनसीपी प्रमुख ने किस ताकत को दरार डालने वाला बताया, इसका उल्लेख उन्होंने स्पष्ट अपने बयान में नहीं किया।

चाणक्‍य के बाद सरदार पटेल ही थे, जिन्‍होंने देश को एकता के सूत्र में पिरोया, आज दीवार टूट गई, सपना सच हो गया: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (31 अक्टूबर) को देश के प्रथम उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की। आज सरदार पटेल की जयंती है, इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने केवडिया में बनी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर श्रद्धांजलि दी। केवडिया में मौजूद स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर देशवासियों को एकता की शपथ दिलाई। इस दौरान पीएम मोदी ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर परेड का निरीक्षण किया। शपथ में पीएम ने देशवासियों को आंतरिक सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए शपथ दिलवाई। 

सरदार पटेल के व्यक्तित्व पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने 562 रियासतों को एक साथ लाकर भारत की यूनियन बनाई थी, जिसने 1947 में अंग्रेजों से स्वतंत्रता प्राप्त की थी।

पीएम मोदी ने आज 5 अगस्त का फ़ैसला सरदार पटेल को समर्पित किया। पीएम मोदी ने कहा, “शताब्दियों पहले, तमाम रियासतों को साथ लेकर, एक भारत का सपना लेकर, राष्ट्र के पुनुरुद्धार का सफल प्रयास करने वाला एक नाम था, वो नाम था चाणक्य का। चाणक्य के बाद अगर ये काम कोई कर पाया तो वो सरदार पटेल ही थे।”

पीएम मोदी ने अनुच्छेद-370 को निरस्त करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की। उन्होंने उल्लेख किया कि घाटी में आतंकवाद अब तक हजारों लोगों की जान ले चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा “सरदार पटेल ने कहा था कि कश्मीर का मुद्दा उनके कंधों पर डाल दिया गया है, इसलिए इसमें इतना समय नहीं लगेगा। आज, उनकी जयंती पर, मैं 5 अगस्त को सरदार पटेल को लिए गए ऐतिहासिक निर्णय को समर्पित करता हूँ।”

पीएम मोदी ने कहा कि आज से, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश भारत के लौह पुरुष की जयंती पर एक नए भविष्य की ओर चलेंगे।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि उन्होंने अगस्त में जम्मू और कश्मीर में लोगों से वादा किया था कि हर केंद्र शासित प्रदेश में केंद्र सरकार के कर्मचारी लाभ और सुविधा प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कर्मचारी अब 7वें वेतन आयोग के तहत भत्तों को प्राप्त करेंगे।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि भारत के लोग अपनी एकता के ख़िलाफ़ हर हमले से लड़ेंगे और दुश्मनों को परास्त करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरदार पटेल से प्रेरणा लेकर, उनकी सरकार भारत के भावनात्मक, आर्थिक और संवैधानिक एकीकरण को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है।

लक्ष्मी पूजन के बाद मूर्ति विसर्जन जुलूस को दर्जी मोहल्ले में रोका: भारी तनाव के बीच पुलिस की निगरानी में हुआ विसर्जन

झारखंड में पलामू के विश्रामपुर में लक्ष्मी पूजन के बाद मूर्ति विसर्जन करने जा रहे लोगों को मुस्लिमों की भीड़ द्वारा रोक दिया गया। जिससे झड़प की नौबत आ गई। इससे हिन्दू पक्ष के लोगों में काफ़ी आक्रोश फैल गया। लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों पक्षों को समझा-बुझा कर मामले को शांत कराया, उसके बाद पुलिस ने अपनी निगरानी में मूर्ति का विसर्जन कराया। घटना सोमवार (28 अक्टूबर) की रात आठ बजे की है।

दरअसल, विश्रामपुर नगर परिषद अंतर्गत वार्ड 10 के मधुरीडीह गाँव में दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा का भव्य आयोजन किया गया था। सोमवार को मूर्ति विसर्जन जुलूस निकाला गया। जानकारी के अनुसार, रात के समय क़रीब आठ बजे जब जुलूस विश्रामपुर के दर्जी मुहल्ला पहुँचा, तब कुछ मुस्लिम युवकों ने बेवजह मूर्ति विसर्जन जुलूस को रोक दिया, जिसके बाद देखते ही देखते विवाद और तनाव बढ़ने लगा।

इस घटना से इलाक़े में फैले तनाव को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस जब दर्जी मुहल्ला पहुँची तो दोनों पक्षों से बात करके मामला सुलझाने की कोशिश की। दोनों पक्षों को समझाने-बुझाने के बाद मामला शांत करवाया गया। मामला शांत होने के बाद पुलिस ने अपने निगरानी में मूर्ति का विसर्जन कराया। घटना-स्थल पर पुलिस निरीक्षक राज बल्लभ पासवान, विश्रामपुर थाना प्रभारी श्रीभगवान सिंह, रेहला थाना प्रभारी अभिजीत गौतम मिश्रा, विधायक प्रतिनिधि इदरीस हवारी, बजरंग दल के ज़िला सह संयोजक पंकज कुमार लाल, पार्षद प्रतिनिधि संजय ठाकुर, मकसूद खलीफा, मसिर खलीफा, सफीक खलीफा सहित कई लोग मौजूद थे।

इससे पहले बिहार के गया में मूर्ति विसर्जन के दौरान थानाध्यक्ष की अमर्यादित भाषा पर लोगों के भड़कने और क्षेत्रीय तनाव की ख़बर सामने आई थी। विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार (8 अक्टूबर) की रात को प्रशासन द्वारा निर्गत पाँच लाइसेंसी माँ दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन दुखहरणी मंदिर के पास कराया जा रहा था। पहले तो हालात बिल्कुल सामान्य थे और मूर्ति को लेकर हर्षोल्लास के साथ आगे बढ़ रहे थे। 

भक्तजनों की भीड़ एक स्थल पर पहुँची तो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ नारेबाजी शुरू हो गई थी। यह नारेबाजी कुछ समुदाय विशेष के लोगों को इतनी नागवार गुज़री कि उन्होंने भक्तों की भीड़ से नारेबाजी के ख़िलाफ़ अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन, पड़ोसी देश के ख़िलाफ़ नारेबाजी जारी रही। स्थिति को संभालने के लिए कोतवाली थानाध्यक्ष संजय कुमार ने अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, जिससे वहाँ मौजूद लोगों के बीच ग़ुस्सा भड़क गया। इस बीच दो पक्षों के बीच ईंट-पत्थर से हमले किए गए थे।

मूर्ति विसर्जन के दौरान इस तरह की हिंसात्मक गतिविधि की घटना कोई नई नहीं है। दुर्गा पूजा के दौरान भी ऐसी अनेकों घटनाएँ सामने आईं थी जहाँ मुस्लिम समुदाय ने आस्था के इस पर्व पर हिंसात्मक गतिविधियोंं को अंजाम देकर न सिर्फ़ हिन्दुओं की आस्था को तार-तार किया बल्कि उनके धार्मिक अनुष्ठानों में कई तरह के व्यवधान भी डाले थे।

कमलेश तिवारी हत्याकांड में पाक कनेक्शन: अब आतंकी संगठन के स्लीपिंग मॉड्यूल्स की जाँच में जुटे अधिकारी

कमलेश तिवारी हत्याकांड में अब पाकिस्तान कनेक्शन की जाँच शुरू हो चुकी है। इसके लिए पुलिस के निशाने पर कई संदिग्ध हैं। कहा जा रहा है कि हत्या के बाद जिस तरह हत्यारों को जगह-जगह पर मदद मुहैया करवाई गई, उससे एक नया ट्रेंड सामने आया। इसी कारण से जॉंच में जुटे अधिकारी इस पूरे मामले में किसी आतंकी संगठन के स्लीपिंग मॉड्यूल्स की भूमिका को खंगालने की कोशिश में जुटे हैं।

शुरुआती जानकारी के अनुसार हत्याकांड का मुख्य आरोपित राशिद अहमद खुर्शीद अहमद पठान दुबई में कंस्ट्रक्शन फार्म में काम करता था। लेकिन हत्या को अंजाम देने से 2 महीने पहले वो सूरत अपने घर लौट आया था। वहीं हत्यारा मोइनुद्दीन जोमैटो का डिलीवरी बॉय था और अशफाक मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव था, जो केवल हत्या करने के लिए सूरत से यूपी आए थे। वहीं दोनों हत्यारों को लगातार हत्या के लिए उकसाने वाला आसिम नागपुर में एमडीपी पार्टी की नगर इकाई का अध्यक्ष है जो लगातार इनके संपर्क में था और नागपुर से बैठे-बैठे हर जगह इनको मदद दिलवा रहा था। जिसका मतलब है कि नागपुर में होने के बावजूद उसके यूपी में ऐसे लोगों से संपर्क थे, जो हत्या के बाद हत्यारों की मदद करने के लिए मौजूद रहे।

यहाँ बता दें कि अब इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर एटीएस और अन्य जाँच एजेंसियाँ मामले से जुड़े हर पहलू पर गहनता से जाँच कर रही हैं और पता लगा रही हैं कि इस पूरे मामले में कहीं किसी संगठन का तो हाथ नहीं।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित संबंधित खबर

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित खबर के मुताबिक अब इस मामले में आरोपितों के अलावा उनसे जुड़े संदिग्ध लोगों की भी जाँच जारी है। जिसमें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का एक पूर्व छात्र भी शामिल है। जो गुजरात का ही निवासी है।

इसके अलावा इन सभी आरोपितों के साथ-साथ इनकी मदद के लिए मौजूद रहे मददगारों के सोशल मीडिया अकॉउंट भी जाँच एजेंसियों द्वारा खंगाले जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सभी आरोपित सोशल मीडिया के माध्यम से ही एक दूसरे के संपर्क में थे।


दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित संबंधित खबर

इस मामले में बता दें अब तक हत्यारों और मुख्य साजिशकर्ताओं के अलावा कई लोगों की धड़-पकड़ हो चुकी है। पुलिस ने अभी बीते दिनों अशफाक और मोइनुद्दीन को नेपाल पहुँचाने वाले नावेद को भी गिरफ्तार किया था और अब ताजा जानकारी के अनुसार नावेद का पार्टनर कामरान भी पुलिस की पकड़ में आ गया है। जाँच में जुटी टीम के अनुसार कैफी के कहने पर नावेद ने और नावेद के कहने पर कामरान ने दोनों हत्यारों को नेपाल पहुँचाया था।

Fact Check: PM मोदी के सऊदी अरब के दौरे की ‘कॉन्ग्रेस IT सेल’ सहित हजारों ने शेयर की फर्जी तस्वीर

सोशल मीडिया पर इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। जिसमें प्रधानमंत्री अरबी साफा पहने नजर आ रहे हैं। तरह-तरह के संदेशों के साथ इस तस्वीर को फॉरवर्ड/शेयर किया जा रहा है। साथ ही दावा भी किया जा रहा है कि ये तस्वीर उस समय की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दौरे पर गए और उन्होंने सऊदी अरब के किंग को खुश करने के लिए इसे पहना।

हालाँकि, इस तस्वीर में कितनी सच्चाई है, इसकी पड़ताल किए बिना देश के प्रधानमंत्री के लिए कोई भी धारणा बनाना नैतिक रूप से गलत है, लेकिन हैरानी की बात है देश की सबसे पुरानी पार्टी ‘कॉन्ग्रेस के आईटी सेल’ ने भी ये तस्वीर अपने फेसबुक से शेयर की हुई है। जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा है, “भक्तों… तुम मु##मों का बायकाट करो और तुम्हारे पापा…”

चूँकि, कॉन्ग्रेस के आईटी सेल एंड सोशल मीडिया पेज नाम से शेयर किए गए इस पोस्ट पर तरह-तरह कमेंट थे, जिसमें तरह-तरह के दावे किए जा रहे थे। इसलिए हमने इस तस्वीर की सच्चाई सामने लाने के लिए कोशिश की। जिसके बाद बिना किसी अधिक मेहनत के साफ हो गया कि प्रधानमंत्री की ये तस्वीर डॉक्टर्ड यानी फर्जी है। यहाँ एक और बात जानकारी के लिए बता दें कि बेशक कॉन्ग्रेस आईटी सेल का यह पेज सत्यापित नहीं है और बहुत ही कम समय में इसके तीन बार नाम बदले गए हैं लेकिन इस संदिग्ध पेज के 3000000 से ज़्यादा फॉलोवर हैं।

जिसे शेयर करने के कारण कुछ सोशल मीडिया यूजर्स कॉन्ग्रेस को लताड़ लगा रहे हैं और जिन यूजर्स ने इस तस्वीर को शेयर किया है उन्हें भी फर्जी तस्वीर वायरल करने पर जमकर आड़े हाथों लिया जा रहा है।

तस्वीर की सच्चाई के बारे में बता दें कि कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने ट्विटर हैंडल से रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद 29 अक्टूबर को वहाँ की तस्वीरें शेयर की थी। जिसमें साफ देखा जा सकता है कि उन्होंने अपने सिर पर साफा जैसी कोई चीज नहीं पहनी और डॉक्टर्ड तस्वीर का वायरल होना सिर्फ़ कॉन्ग्रेस आईटी सेल के प्रोपगेंडा का हिस्सा है। जिसे पीएम मोदी की छवि बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

वैसे ये नया नहीं है। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस आईटी सेल ने कई फर्जी खबरें शेयर की है। जिसके लिए उसे सोशल मीडिया यूजर ने ही जमकर लताड़ लगाई थी।

केजरीवाल और ध्रुव राठी को होना पड़ेगा पेश: कोर्ट ने मानहानि मामले में समन जारी करने के ख़िलाफ़ याचिका ख़ारिज की

पटियाला हाउस कोर्ट ने विकास पांडे द्वारा दायर मानहानि मामले को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा उनके ख़िलाफ़ जारी किए गए समन आदेश के ख़िलाफ़ दायर पुनरीक्षण याचिका को ख़ारिज कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद, केजरीवाल को अब AAP समर्थक ब्लॉगर ध्रुव राठी द्वारा अपलोड किए गए एक निंदनीय वीडियो को शेयर करने के मामले में कोर्ट में पेश होना पड़ेगा।

दिल्ली के सीएम ने पटियाला हाउस कोर्ट की सत्र अदालत में मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन के ख़िलाफ़ अपील की थी। फ़ैसले में, विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहर ने कहा, “लगाए गए आदेश (मजिस्ट्रेट के आदेश) ने समन के चरण में शामिल मुद्दों के सभी प्रासंगिक पहलुओं से निपटा है। इस स्तर पर, अदालत को केवल यह देखना है कि आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं और यदि इस पैमाने पर लगाए गए आदेश की तुलना की जाए, तो मुझे आदेश में कोई अवैधता, असंगतता या अनियमितता नहीं मिली।”

मानहानि का मामला AAP समर्थक ब्लॉगर ध्रुव राठी द्वारा अपलोड किए गए एक निंदनीय वीडियो से संबंधित है, जिसमें उन्होंने कहा था कि विकास पांडे बीजेपी आईटी सेल के सक्रिय सदस्य थे और उन्होंने महावीर प्रसाद को 50 लाख रुपए की रिश्वत देने की पेशकश की थी। यद्यपि वीडियो में राठी ने दावा किया उसने महावीर को रिश्वत दिए जाने संबंधी बातचीत को रिकॉर्ड करने की सलाह दी थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। उनके पास ‘50 लाख रिश्वत की पेशकश’ संबंधी कोई रिकॉर्डिंग नहीं है, जिसकी पेशकश कथित तौर पर विकास ने की थी। अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं होने के बावजूद राठी ने विकास पांडे के ख़िलाफ़ झूठे आरोप लगाना जारी रखा।

इसके अलावा, राठी ने यह भी तर्क दिया कि महावीर प्रसाद को रिश्वत देने के लिए विकास पांडे ने अभिषेक मिश्रा का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन, राठी के पास इस बात को प्रूव करने के लिए कोई भी कोई सबूत नहीं था। आरोपों को सही सााबित करने के लिए राठी के पास कोई कॉल रिकॉर्डिंग नहीं थी जिससे यह स्पष्ट हो जाए पांडे ने महावीर प्रसाद को रिश्वत देने के लिए मिश्रा का इस्तेमाल किया हो। सच तो यह है कि राठी ने वीडियो में ख़ुद इस बात को स्वीकार किया कि उसके पास अपने दावों को सही साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

केजरीवाल ने राठी के इसी वीडियो को शेयर किया था, जिससे विकास पांडे के बारे में झूठी बातें प्रचारित हुईं। इसके ख़िलाफ़ क़दम उठाते हुए विकास पांडे ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और यूट्यूब ब्लॉगर के ख़िलाफ़ मानहानि का केस दर्ज करवाया। बता दें कि विकास पांडे पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों के समर्थक हैं।

आज से J&K और लद्दाख बने केंद्र शासित राज्य: R K माथुर ने लद्दाख के पहले उपराज्यपाल के रूप में ली शपथ

जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बुधवार (30 अक्टूबर) मध्यरात्रि को ख़त्म हो गया। इसके साथ ही दो नए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख आस्तित्व में आ गए। अनुच्छेद-370 के तहत मिले विशेष दर्जे को संसद द्वारा निरस्त किए जाने के बाद आज से यह निर्णय प्रभावी हो गया है। गृह मंत्रालय ने बुधवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी थी।

रिटायर्ड IAS राधाकृष्ण माथुर ने गुरुवार को लद्दाख के पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ़ से IAS उमंग नरुला को लद्दाख के उपराज्यपाल के सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, IPS अधिकारी एसएस खंडारे को लद्दाख पुलिस का प्रमुख बनाया गया है। लद्दाख के अलावा जम्मू-कश्मीर के नए उपराज्यपाल गिरिश चंद्र मुर्मू होंगे।

ग़ौरतलब है कि 6 अगस्त को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 को पारित कर दिया था। इसके तहत तय हुआ था कि दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्यों जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के रूप में 31 अक्टूबर 2019 से अस्तित्व में आएगा। ऐसा पहली बार है जब किसी राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील कर दिया गया है। इस सिससिले में श्रीनगर और लेह में दो अलग-अलग शपथग्रहण समारोह का आयोजन किया गया। पहला समरोह लेह में हुआ जहाँ आरे माथुर ने लद्दाख के उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली। दूसरा शपथग्रहण समारोह श्रीनगर में आयोजित होगा, जहाँ मुर्मू उपराज्यपाल का पद भार सँभालेंगे।

इसके साथ ही भारत में राज्यों की संख्या अब 28 हो गई है और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या सात से बढ़कर नौ हो गई है। अब जम्मू-कश्मीर के संविधान और रणबीर दंड संहिता का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा। केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की क़ानून व्यवस्था और पुलिस पर केंद्र का सीधा नियंत्रण होगा, जबकि भूमि वहाँ की निर्वाचित सरकार के अधीन होगी।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दोनों ही अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बने हैं। केवल अंतर इतना है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश बना है और लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश है। लद्दाख की ओर से पिछले कई वर्षों से इस माँग को रखा जा रहा था।

शुरुआत में दोनों राज्यों का एक ही हाईकोर्ट होगा लेकिन दोनों राज्यों के एडवोकेट जनरल अलग होंगे। सरकारी कर्मचारियों के सामने दोनों केंद्र शासित राज्यों में से किसी एक को चुनने का विकल्प होगा।

कैसे बगदादी को उतारा गया मौत के घाट: अमेरिकी सेना ने जारी किया ‘मिशन कायला’ का VIDEO

ISIS के खूंखार आतंकी अबु बकर अल बग़दादी पर रेड की पहली वीडियो सामने आ गई है। खुद अमेरीकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इसे बुधवार (अक्टूबर 23 , 2019 ) को जारी किया। हालाँकि, ये वीडियो ब्लैक एंड व्हाइट है लेकिन इसमें देखा जा सकता है कि अमेरिकी सैनिक बगदादी पर हमला करने की तैयारियों में जुटे हैं। बता दें कि इस ऑपरेशन को ‘मिशन कायला’ नाम दिया गया था। जोकि एक अमेरिकी मानवाधिकार कार्यकर्ता के नाम पर था जिसका बगदादी ने लगातार रेप किया था और बाद में उसकी हत्या कर दी गई थी।

ये वीडियो ड्रोन कैमरे से रिकॉर्ड किया गया है, यहाँ वो परिसर साफ-साफ देखा जा सकता है जहाँ अबु बकर अल बगदादी छुपा था। जिसको टारगेट बनाते हुए ही अमेरिकी सेना ने वहाँ पर हमला बोला। लेकिन जब बगदादी के आतंकियों ने अमेरिकी सेना के एयरक्रॉफ्ट करीब आते देखे तो उन्होंने उनपर फायरिंग की। जारी वीडियो में अमेरिकी सेना पर हुई फायरिंग भी कैद है। इसके अलावा इस वीडियो में अमेरिकी असॉल्ट फोर्स के कमांडों को उस परिसर की तरफ बढ़ते भी दिखाया गया है जिसमें बगदादी छिपा था।

इस वीडियो को जारी करते हुए अमेरिकी सेना के जनरल फ्रैंक मैंकेजी ने बताया, “परिसर के आसपास के इलाकों में 2 जगहों से बगदादी के आतंकियों द्वारा अमेरिकी एयकक्राफ्ट्स पर गोलीबारी शुरू की गई। परिसर के आस-पास हमले के दौरान हमने बार-बार उन लोगों से शांति से बाहर आने का आग्रह किया। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि बगदादी की तरफ से किए हमलों के बावजूद भी हमने आम नागरिकों को बचाने और बच्चों की सुरक्षा करने का हर संभव प्रयास किया।”

यहाँ बता दें कि अभी चार दिन पहले रविवार (अक्टूबर 2 7, 2019 ) को अमेरिकी सेना ने बगदादी को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के इरादे से उसके सीरिया स्थित ठिकाने पर छापा मारा था। जहाँ खुद को घिरा देखकर उसने खुद को अपने तीन बच्चों समेत बम से उड़ा लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, थोड़ी देर बाद बगदादी का डीएनए टेस्ट किया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल फ्रैंक ने कहा कि बगदादी का डीएनए सैंपल इराक के कैंप बुका में हिरासत के दौरान साल 2004 में लिया गया था। इसके बाद एफ-15 फाइटर जेट से उस परिसर को उड़ा दिया गया।

ये भी पढ़ें: इंडिया में इंग्लिश पढ़ाने वाली कायला के कारण मारा गया बगदादी: लगातार रेप के बाद कर दी थी हत्या

हमले के बाद जारी हुई विस्फोट की तस्वीरों में हमने जगह-जगह खून के निशान और मांस के लोथड़े पड़े देखे थे। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की थी कि लोगों को अपने आतंक से भयभीत करने वाला बगदादी कुत्ते की मौत मारा गया। अपने बयान में ट्रंप ने बगदादी के आखिरी समय का उल्लेख करते हुए बताया था कि बगदादी अपने अंतिम समय में डरपोकों की तरह इधर-उधर भाग रहा था। वो इतना बदहवास हो चुका था कि उसने अंत में एक सुरंग में जाकर अपने तीन बच्चों समेत खुद को विस्फोटक जैकेट से उडा लिया।

‘गठबंधन में बने रहना ही बेहतर है और यही राज्य के भी हित में’ – नरम पड़ गई शिव सेना!

अभी तक ढाई साल सीएम की कुर्सी से कम किसी भी कीमत पर नहीं तैयार हो रही शिव सेना ने रुख बदल लिया है। एक हफ्ते (24 अक्टूबर, 2019 से आज, 30 अक्टूबर तक) तक मुख्यमंत्री पद के लिए खींचा-तानी मचाने और भाजपा की बजाय कॉन्ग्रेस और शरद पवार की एनसीपी के साथ सरकार बनाने की धमकी के बाद यू टर्न लेते हुए पार्टी ने इशारा किया है कि अब वह सीएम की कुर्सी को लेकर और अड़ने को इच्छुक नहीं है। मीडिया से बात करते हुए शिव सेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ अपनी युति की कद्र करती है।

बकौल राउत, “हमें पता है कि गठबंधन में बने रहना ही बेहतर है और यही राज्य के भी हित में है। जो हम चाहते हैं, वह यह कि हमें सम्मान दिया जाए।” लेकिन इसी के साथ राउत ने यह भी जोड़ा कि पार्टी सरकार बनाने के लिए भी किसी तरह की उत्सुकता नहीं दिखाना चाहती। उन्होंने कहा, “हमें इसे ठंडे दिमाग से करना होगा।”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक कल पहले शिव सेना विधायकों की बैठक होगी और उसके बाद शिव सेना और भाजपा के नेता बैठ कर सरकार की रूप रेखा तय करेंगे।

कल ही तक शिव सेना के बोल भाजपा के साथ एनडीए युति को सहेजने के आज के सुर से बिलकुल उलट थे। शिव सेना न केवल 50-50 फॉर्मूला के अंतर्गत ढाई साल सीएम की कुर्सी और मंत्री परिषद में बड़ी हिस्सेदारी से कम के लिए तैयार नहीं थी, बल्कि भाजपा के हरियाणा में जेजेपी के साथ गठजोड़ पर भी तंज़ कस रही थी। संजय राउत ने ही ताना मारते हुए कहा था कि जेजेपी के उलट शिव सेना में किसी के पिताजी जेल में नहीं पड़े, जिन्हें निकालने के लिए सरकार का हिस्सा बनने की जल्दी हो।

इसके पहले शिव सेना के मुखपत्र सामना में भी भाजपा पर जम कर आग उगली गई थी। सामना के सम्पादकीय के मुताबिक यह जनादेश कोई “महा जनादेश” नहीं था। यह उनके लिए सबक है जो “सत्ता की मद में चूर” हैं। सामना में शिव सेना ने यह भी कहा था कि इस जनादेश ने वह ग़लतफ़हमी भी दूर कर दी कि चुनाव जीतने का रास्ता दल-बदल की इंजीनियरिंग करना और विपक्षी पार्टियों को तोड़ना है। यही नहीं, तस्वीर पूरी तरह साफ़ होने के पहले ही आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाने के नारे भी शिव सैनिक लगाने लगे थे

एक समय तो फडणवीस ने भी शिव सेना पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए पार्टी छोड़ कर गए नाराज़ बागियों को मनाने की कवायद शुरू कर दी थी। हालाँकि मोदी ने उन्हें 5 साल का कार्यकाल पूरा कर चुनाव में जाने और फिर जीत कर आने वाले पहले मराठी सीएम होने की बधाई देते हुए एक तरह से ठाकरे को बता दिया था कि वे झुकेंगे नहीं। इसके अलावा फडणवीस को भाजपा ने दोपहर में न केवल अपने विधायक दल का नेता चुन लिया था, बल्कि उनके नेतृत्व में और शिव सेना के साथ सरकार बनाने का ऐलान भी कर दिया था।