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भाई को जान से मारने की धमकी देकर महबूब ने दिया धोखे से ट्रिपल तलाक, फरार

इस साल जुलाई के मानसून सत्र में संसद द्वारा जुर्म बना दिए जाने और सुप्रीम कोर्ट से प्रतिबंधित होने के बावजूद तीन तलाक के मामले लगातार सामने आते ही जा रहे हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में तीन तलाक का मामला सामने आया है। मामले में शौहर द्वारा पत्नी को तीन तलाक देने के लिए धोखे का रास्ता अपनाने की बात सामने आ रही है।

मीडिया खबरों के मुताबिक शौहर महबूब ने बीवी के भाई यानि अपने साले को जान से मारने की धमकी देकर बेगम से तलाक के पेपर पर साइन करवा लिए। इसके बाद उसने तीन तलाक बोलकर मज़हबी रूप से भी संबंध विच्छेद कर लिया और इसके बाद वह भाग खड़ा हुआ। पीड़िता द्वारा शौहर और दो अन्य के विरुद्ध ग्रेटर नोएडा के दादरी थाने में तहरीर देने की बात कही गई है।

जानकारी के अनुसार मामला दादरी के नई आबादी क्षेत्र का है। मामले की पुलिस जाँच में पता चला है कि पीड़िता का निकाह लगभग 4 साल पहले (9 जनवरी, 2016 को) नई आबादी निवासी आरोपित महबूब से हुआ था। शादी से पीड़िता का दो साल का बेटा होने की बात भी मीडिया में कही जा रही है।

आरोपित का नाम अमर उजाला की रिपोर्ट में महबूब बताया गया है, साथ ही उसका निवास स्थान दादरी का दौलतराम मार्केट, कटहेरा रोड होने का दावा किया गया है। पीड़िता का नाम मुस्कान बताया गया है।

विवाद की दैनिक जागरण की कवरेज में महिला को पति की प्रताड़ना से परेशान बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार महिला पिछले दो महीने से अपनी माँ और भाई के साथ रह रही थी। कथित तौर पर जब महिला परसों (मंगलवार, 7 नवंबर, 2019 को) अपनी माँ के साथ घर से बाजार की ओर जा रही थी, तभी आरोपित ने उन्हें डराते धमकाते हुए महिला को कुछ स्टाम्प पेपरों पर हस्ताक्षर के लिए मजबूर कर दिया। आरोप है कि उसने महिला के भाई को जान से मारने की धमकी भी दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महिला डर कर उनके साथ सूरजपुर के अदालती परिसर गई तो वहाँ उससे उन कागजों पर जबरन साइन कराया गया जिसमें लिखा था कि वह स्वेच्छा से ₹50000 के बदले इस संबंध से अलग हो रही है। इस दौरान आरोपित शौहर महबूब के साथ उसके दो भाई भी थे। और जब महिला ने मजबूरी में कागजों पर साइन कर दिए तो वह तीन बार तलाक बोलने के बाद भाग खड़ा हुआ।

मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि वह मामले की जाँच कर रही है और जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। दादरी के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सर्किल अफसर) सतीश कुमार ने मीडिया से इस विषय पर बात करते हुए मामले के अपने संज्ञान में आने की पुष्टि की है।

पकड़ी गई प्रियंका गॉंधी: ठाकुरों की लड़ाई को दलित की पिटाई बता सोशल मीडिया में फैलाया झूठ, पुलिस ने लताड़ा

कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया ट्विटर हैंडल के ज़रिए 6 नवंबर को समाचार चैनल ‘भारत संचार’ की न्यूज़ क्लिप शेयर की गई थी। इसे शेयर करते हुए लिखा गया था, “यूपी में हर तरफ सिर चढ़कर बोल रहा है जंगलराज। क़ानून का उड़ रहा माखौल, फेल हुआ अजय बिस्ट का राज।” साथ ही कहा गया था कि गवाही देने पर निमर्मता से पिटाई का ये वीडियो भाजपा सरकार की नाकामी का गवाही दे रहा है।

वीडियो के कुछ हिस्सों की आवाज़ बीप कर दी गई थी, जिससे पीड़ितों के साथ-साथ अपराधियों का विवरण स्पष्ट सुनाई नहीं पड़ता। कॉन्ग्रेस महासचिव और यूपी की प्रभारी प्रियंका गाँधी वाड्रा ने इसे शेयर करते हुए ट्विटर पर दावा किया कि वीडियो में जो लोग पिटते नजर आ रहे हैं वे दलित हैं।

उन्होंने अपने ट्वीट में दावा किया कि दबंगों ने गवाही देने के लिए भयावह तरीके से दलित भाइयों की पिटाई की।
साथ ही कहा कि राज्य में हर रोज दलित-आदिवासियों पर दबंग-अपराधी खुलेआम हमले कर रहे हैं और भाजपा सरकार मूकदर्शक बनी देख रही है।

असल में, यह वीडियो भूमि विवाद के कारण से 4 नवंबर को दो समूहों के बीच हुई भिड़ंत से जुड़ी थी। एक पक्ष द्वारा दूसरों पक्ष को पीटने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। दोनों पक्षों के पाँच लोगों को अब गिरफ़्तार कर लिया गया है और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत 26 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है। जानकारी के अनुसार, इन गुटों का नेतृत्व अर्जुन सिंह और करणपाल सिंह ने किया था। दो घायलों जिनमें नरेश और सोनू शामिल हैं उन्हें सैफई अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मैनपुरी पुलिस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने प्रियंका गाँधी वाड्रा द्वारा फैलाई गई फ़र्ज़ी ख़बर का खंडन करते हुए बताया है कि उन्होंने इस मुद्दे को जातिवादी रंग दे दिया। दरअसल, दो पक्षों के बीच जो झड़प हुई थी वो राजपूत परिवार के बीच हुई थी।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रियंका गाँधी के दावों का खंडन करते हुए मैनपुरी पुलिस के एक अधिकारी का वीडियो भी जारी किया।

मैनपुरी के पुलिस अधिकारी ने कहा कि दो समूह फसल काटने को लेकर आपस में भिड़ गए थे और दोनों समूह ठाकुर समुदाय के थे। दोनों समूह एक दूसरे के साथ लड़े और हिंसक हो गए। इस बीच दोनों समूह के लोग घायल भी हो गए। दोनों समूहों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ क्रॉस FIR भी दर्ज कराई है। मैनपुरी पुलिस ने सोशल मीडिया के ज़रिए ऐसी फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने की निंदा भी की है।

इस ख़बर के लिखे जाने तक, न तो कॉन्ग्रेस और न ही प्रियंका गाँधी वाड्रा ने झूठे दावों को वापस लिया और न ही उन्होंने फ़र्ज़ी ख़बरें फैलाने के लिए माफ़ी माँगी है।

पाकिस्तान: हत्या से पहले हिंदू मेडिकल छात्रा के साथ किया गया था रेप, सुसाइड साबित करने पर अमादा था प्रशासन

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हिंदू मेडिकल छात्रा नमृता चंदानी की हत्या के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक हत्या से पहले उसके साथ रेप किया गया था। नमृता सितंबर में हॉस्टल के अपने कमरे में मृत मिली थी। नमृता के परिजन पहले दिन से ही उसकी हत्या किए जाने का शक जता रहे थे, लेकिन स्थानीय प्रशासन सुसाइड बताकर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा था।

मीडिया रिपोर्टों में लरकाना के चंदका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल की वूमेन मेडिको लीगल ऑफिसर डॉ. अमृता के हवाले से यह खबर दी गई है। उनके मुताबिक हत्या से पहले नमृता के साथ रेप किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि उसकी मौत दम घुटने के कारण हुई थी। इससे पहले जॉंच में नमृता के कपड़ों और शरीर पर किसी पुरुष डीएनए के सैंपल मिलने की बात सामने आई थी।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में आखिरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट चंदका मेडिकल कॉलेज से आई है। डॉ. अमृता ने रेप के बाद हुई हत्या का खुलासा करते हुए बताया कि नमृता की मौत दम घुटने के कारण हुई। जिसके निशान उसकी गर्दन पर भी देखे गए।

रिपोर्ट से निकले निष्कर्षों पर डॉ. अमृता ने बताया कि मौका-ए-वारदतों पर मिले सबूतों के आधार पर नमृता कि मौत या तो दम घुटने के कारण हुई है या फिर उसे लटकाने के कारण हुई है।

उल्लेखनीय है कि इस मामले में अभी कुछ दिन पहले पुलिस अधिकारी मसूद बंगश ने नमृता की डीएनए रिपोर्ट का भी खुलासा किया था। जिसमें उसके कपड़ों और शरीर पर पुरुष डीएनए मिलने की बात सामने आई थी। पता चला था कि 17 सितंबर को नमृता के कपड़ों पर लगा खून का सैंपल जामशोरो फॉरेंसिक लैब में भेजा गया था। जिसके बाद पुलिस को इसकी रिपोर्ट लगभग डेढ़ महीने बाद (अक्टूबर 28, 2019) मिली।

बता दें, पाकिस्तान के लरकाना के बीबी आसिफा डेंटल कॉलेज में अंतिम वर्ष की बीडीएस छात्रा नमृता चंदानी की अचानक मौत ने सबको हिलाकर रख दिया था। हालाँकि कॉलेज प्रशासन बार-बार इस मौत को आत्महत्या करार देने की कोशिशों में जुटा था, लेकिन नमृता के घरवालों ने हत्या का संदेह जताया था। उन्होंने इंसाफ की गुहार लगाते हुए न्यायिक जाँच की माँग की थी। जिसके बाद ही मामले की सुनवाई करते हुए ही सिंध हाई कोर्ट ने 25 सितंबर को मामले में न्यायिक जाँच के आदेश दिए थे और इसके बाद 32 लोगों को हिरासत में लिया गया था।

नमृता घोटकी शहर से ताल्लुक रखती थी, जहाँ उसकी मौत से कुछ दिन पहले ही एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी। उसका शव 17 सितंबर को हॉस्टल के कमरे में चारपाई पर संदिग्ध हालत में मिली थी। कमरा अंदर से बंद था और गले में रस्सी बंधी थी। बाद में पुलिस ने उसके दो सहपाठियों अली शान मेमन और मेहरान अब्रो को गिरफ्तार किया था। अब्रो, नमृता का क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहा था।

विकास कार्यों में देरी से नाराज़ योगी: 7 अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृति, ग़ैर-ज़िम्मेदार अफ़सर-ठेकेदारों पर FIR

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमामि गंगे परियोजना से जुड़े कार्यों की समीक्षा की है। समीक्षा बैठक के दौरान कार्यों में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख़ अख़्तियार किया है। नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि जो भी ठेकेदार और अधिकारी कार्य में देरी का कारण बन रहे हैं, उनके ख़िलाफ़ FIR दर्ज करवाई जाए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमामि गंगे परियोजना में मिशन डायरेक्टर नियुक्त करने के लिए भी निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मिशन डायरेक्टर सीधे परियोजना स्थलों का दौरा कर गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य को पूरा करवाएगा। इसके अलावा, उन्होंने परियोजना के कार्यों में देरी करने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने निर्देश दिया है कि 12 नवंबर को देव दिवाली का कार्यक्रम वाराणसी में आयोजित होगा, उससे पहले सभी घाटों की साफ़-सफ़ाई हो जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने बरेली, आगरा, गाजीपुर और मथुरा में इस परियोजना के तहत आठ जुलाई से कार्य लंबित हैं, इसके लिए सिंचाई विभाग चीफ़ इंजीनियर को नोटिस जारी करके तीन दिन में जवाब देने को कहा है और अगर आवश्यकता पड़ी तो उच्च अधिकारियों को भी जवाबदेह बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कई महीने से अनुपस्थित रहने वाले फिरोजाबाद नगर निगम के चीफ़ इंजीनियर पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाए। 

इसके अलावा, हर विभाग में सुस्त और भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है। इसी क्रम में सात पीपीएस अधिकारियों पुलिस उपाधीक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृति दी है उनकी उम्र 50 या उससे अधिक थी। उनके नाम इस प्रकार हैं:

प्रशासन द्वारा निलंबित किए गए अधिकारियों की लिस्ट, सौजन्य: दैनिक जागरण

प्रदेश सरकार ने सहायक सेनानायक 15वीं वाहिनी पीएसी के पद पर कार्यरत अरुण कुमार, फैजाबाद में डिप्टी एसपी विनोद कुमार राणा, आगरा में डिप्टी एसपी नरेंद्र सिंह राणा, सहायक सेनानायक 33वीं वाहिनी पीएसी झाँसी तेजवीर सिंह यादव, डिप्टी एसपी मुरादाबाद संतोष कुमार सिंह तथा सहायक सेनानायक 30वी वाहिनी पीएसी गोंडा में कार्यरत तनवीर अहमद खाँ को अनिवार्य सेवानिवृति प्रदान की है। इन सभी की आयु 50 वर्ष से अधिक है और इनके ऊपर कार्य में लापरवाही सहित कई अन्य आरोप लगे हैं।

अब्दुल रहीम ने हॉस्टल वार्डन की गला रेतकर की हत्या: क्लास बंकिंग की सूचना देने से था नाराज

तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में एक इंजीनियरिंग छात्र ने बुधवार (नवंबर 6, 2019) को अपने हॉस्टल के वॉर्डन वेंकटरमन की गला रेतकर हत्या कर दी। वार्डन की गलती सिर्फ़ इतनी थी कि उसने अब्दुल की लगातार हॉस्टल में अनुपस्थित होने के कारण उसकी शिकायत उसके पिता से कर दी थी। जिससे नाराज अब्दुल ने कैंपस पहुँचकर वेकटरमन पर चाकू से हमला बोल दिया।

पुलिस के अनुसार, आरोपित अब्दुल रहीम को उन्होंने गिरफ्तार कर लिया है और बताया है कि वह बगैर किसी को बताए 4 दिन से कॉलेज नहीं आ रहा था। जिसके कारण वॉर्डन वेंकटरमन ने अब्दुल के परिजनों से इसकी शिकायत की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब्दुल पेराम्बलुर जिले का निवासी है लेकिन उसकी गिरफ्तारी 50 किमी दूर थुरैयूर से हुई है। कहा जा रहा है कि वार्डन द्वारा शिकायत करने के बाद अब्दुल के पिता ने उसकी पिटाई की थी, जिसके कारण वे काफी गुस्से में था और इसलिए उसने कैंपस में पहुँचकर चाकू से वेंकटरमन के पेट और गले पर हमला किया। इस घटना के बाद जख्मी हालत में वेंकट को अस्पताल भर्ती करवाया गया, लेकिन इलाज के दौरान वहाँ उसकी मौत हो गई।

गौरतलब है कि इसी तरह की खबर पिछले वर्ष अलीगढ़ से भी आई थी। जब एक पीएचडी के छात्र ने अपने हॉस्टल के वार्डन पर गुस्से में आकर हमला किया था। जिसमें मो. वसीम बुरी तरह जख्मी हो गए थे और मामले के संबंध में मो. समी, शाकिर और तवेरज अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।

करतारपुर कॉरिडोर: पूर्व PM मनमोहन सिंह के लिए Pak ने किया खुली गाड़ी का इंतजाम, भारत ने माँगी Z+ सुरक्षा

9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद पाकिस्तान जाने वाले 550 लोगों के जत्थे में शामिल पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की सुरक्षा से पाक प्रशासन ख़िलावड़ करता नजर आ रहा है।

खबर है कि भारत ने पाकिस्तान से पूर्व पीएम के लिए जेड प्लस सुरक्षा की माँग की थी, लेकिन पाकिस्तान ने उनके लिए बैटरी से चलने वाली खुली गाड़ी का इंतजाम कर दिया है। खूफिया एंजेंसियों द्वारा करतारपुर के आसपास इलाकों में आतंकी एक्टिविटी की सूचना मिलने के बावजूद भी सुरक्षा के इतने ढीले इंतजाम पूर्व पीएम की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के लिए जिस बैटरी से चलने वाली गाड़ी का इंतजाम किया, वो चारों तरफ से खुली है और जेड प्लस सुरक्षा के बराबर भी नहीं हैं। ऐसे में भारत ने पाकिस्तान से वीआईपी जत्थे के लिए अतिरिक्त इतंजाम करने के लिए कहा है।

इतना ही नहीं, भारत ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए अपनी एक टीम को पाकिस्तान में दाखिल होने देने की इजाजत भी माँगी है। हालाँकि, पाक ने अभी तक इसका कोई जवाब नहीं दिया है। साथ ही पाक ने पूरे कार्यक्रमों का ब्योरा भी नहीं दिया है।

यहाँ बता दें कि पाकिस्तान की इन्हीं हरकतों के कारण भारतीय जत्थे के करतारपुर जाने को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इस जत्थे में नवजोत सिंह सिद्धू, कैप्टेन अमरिंदर सिंह समेत केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, हरसिमरत कौर बादल, शिरोमणि अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल और 150 सांसद भी शामिल हैं। जिन्हें गुरुद्वारे तक करीब चार किलोमीटर पाकिस्तान के अंदर जाना है।

ऐसे में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह को करतारपुर कॉरिडोर खोलने के पीछे पाकिस्तान का कोई मकसद नजर आना लाजमी है, वहीं गुरुद्वारे के आसपास इलाकों में चलाए जा रहे आतंकी कैंपों की खबर सुनने के बाद भारत सरकार अपने पहले जत्थे की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं।

7 साल की बच्ची के साथ 60 साल के मोहम्मद अनवर ने चॉकलेट देकर की दुष्कर्म की कोशिश, फरार

बिहार के दरभंगा में 60 साल के मोहम्मद अनवर ने अपनी हवस मिटाने के लिए एक सात साल की मासूम बच्ची को निशाना बनाया। लेकिन, लोगों की सजगता के चलते अनवर अपने मंसूबे में क़ामयाब नहीं हो पाया और उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज हो गया। यह घटना लहेरियासराय थाना क्षेत्र के मौलागंज स्थित एक मोहल्ले की है, जहाँ सात साल की बच्ची पर 60 साल के अनवर ने कुदृष्टि डाली।

दरअसल, बच्ची अपने घर के सामने खेल रही थी। इसी दौरान लोगों की नज़र बचाकर अंडे की दुकान चलाने वाले अनवर ने उसे अपनी गोद में उठा लिया। मासूम बच्ची कुछ समझ पाती और कुछ कहती, इससे पहले ही अनवर ने उसके हाथ में चॉकलेट थमा दी। इसके बाद वो बच्ची को बहला-फ़ुसला कर अपनी दुकान के अंदर लेकर चला गया। बच्ची के अचानक लापता होने से उसकी माँ ने उसकी तलाश शुरू कर दी।

दैनिक जागरण के दरभंगा संस्करण में प्रकाशित ख़बर

वहीं, सड़क किनारे पीड़िता के चाचा ने बच्ची की माँ को बताया कि अनवर उसकी बच्ची को गोद में उठाकर अपनी दुकान के अंदर ले गया है। इतना सुनते ही उसकी माँ दौड़ी-दौड़ी दुकान पर पहुँची, जहाँ अनवर ने अपनी दुकान को अंदर से बंद कर रखा था। लेकिन अंदर से बच्ची के रोने की आवाज़ें आ रही थी। रोने की आवाज़ सुनकर बच्ची की माँ ने हल्ला मचाना करना शुरू किया। लेकिन, अनवर ने अंदर से दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद परिवार समेत कई अन्य लोग भी वहाँ आ पहुँचे और सबने मिलकर दरवाज़े को तोड़ डाला। बच्ची की हालत देख सभी दंग रह गए। इस बीच आरोपित दुकानदार सभी को धमकी देते हुए वहाँ से भाग गया।


प्रभात खबर के दरभंगा संस्करण में प्रकाशित ख़बर

बच्ची की माँ का कहना है कि आरोपित उन लोगों को धमकी दे रहा है और कह रहा है कि अगर उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया गया तो उसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। इस घटना की जानकारी देते हुए लहेरियासराय थानाध्यक्ष हरिनारायण सिंह ने कहा कि FIR दर्ज कर ली गई है। आरोपित को धर-दबोचने के लिए छापेमारी की जा रही है।

अगर मुझे भारत को सौंपा गया, तो मैं आत्महत्या कर लूँगा: नीरव मोदी

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) धोखाधड़ी मामले का मुख्य आरोपित और भगोड़ा घोषित हो चुके हीरा कारोबारी नीरव मोदी की ज़मानत याचिका एक बार फिर यूके कोर्ट में ख़ारिज हो गई है। सुनवाई के दौरान नीरव मोदी ने आपा खो दिया और गुस्से मेंं धमकी भरे लफ़्ज़ों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर उन्हें भारत को प्रत्यर्पित किया गया तो वो आत्महत्या कर लेगा। सुनवाई के दौरान नीरव मोदी ने यह भी कहा कि उन्हें तीन बार जेल में पीटा भी गया है। हालाँकि, कोर्ट में उनकी किसी बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा और उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी गई।

नीरव मोदी के वकील हुय्गो कीथ ने कोर्ट को बताया कि नीरव मोदी को जेल में सबसे पहले अप्रैल में पीटा गया। अभी ताज़ा मामला पाँच नवंबर का है जब दो क़ैदी उनके कमरे में आ गए और उनके साथ मारपीट करने लगे। 

दरअसल, नीरव मोदी PNB से जुड़े दो अरब के धोखाधड़ी और धनशोधन मामले में भारत को प्रत्यर्पित किए जाने के ख़िलाफ़ केस लड़ रहे हैं। नीरव को लंदन में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की कोर्ट के समक्ष पेश किया गया था, जहाँ उनके ख़िलाफ़ अगले साल मई में मुक़दमें की सुनवाई शुरू होगी। नीरव मोदी ने इससे पहले ज़मानत पाने की कोशिश की। इस तरह 13000 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी मामले के आरोपित नीरव मोदी की ज़मानत याचिका पाँचवी बार भी ख़ारिज हो गई। फ़िलहाल वो लंदन की सबसे भीड़भाड़ वाली जेलों में से एक दक्षिण-पश्चिम लंदन के वैंड्सवर्थ जेल में बंद है।

ख़बर के अनुसार, नीरव मोदी ने मुचलके के तौर पर 40 लाख पाउंड भुगतान करने की पेशकश की थी, लेकिन न्यायाधीश एम्मा अर्बथनॉट ने उसकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी। ख़बर है कि अपनी पिछली पेशी की तुलना में नीरव इस दौरान अधिक तंदुरस्त दिखे। जबकि नीरव ने अपनी नई याचिका में बेचैनी और अवसाद की समस्या से घिरे होने का दावा किया। दरअसल, भारत सरकार के अनुरोध पर स्कॉटलैंड यार्ड (लंदन पुलिस) ने प्रत्यर्पण वारंट की तामील करते हुए उसे गिरफ़्तार किया था।

ग़ौरतलब है कि पंजाब नेशनल बेंक ने साल 2018 में नीरव मोदी और उसके रिश्तेदार मेहुल चौकसी के नेतृत्व वाले ज्वैलरी ग्रुपों पर फ़र्ज़ी गारंटी के माध्यम से क़र्ज़ लेने और धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए थे। लेकिन ये आरोप सामने आने से पहले ही दोनों चोरी से भारत छोड़कर चले गए।

काउंट डाउन शुरू: 4 दिन में आ सकते हैं ये बड़े फैसले, CJI की रिटायरमेंट को अब कुछ ही दिन शेष

सालों से ठंडे बस्ते में पड़े अयोध्या जैसे विवादित मामले पर माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट 17 नवंबर से पहले अपना फैसला सुना देगी। देखा जाए तो सीजेआई की रिटायरमेंट से पहले अब इस फैसले को आने में बहुत कम दिन शेष हैं। इसमें भी अगर छुट्टियों को निकाल दिया जाए तो जस्टिस गोगोई पर फैसला सुनाने के लिए कार्यदिवसों में केवल 4 दिन बचते हैं।

हालाँकि, अयोध्या मामले पर फैसला सुर्ख़ियों में रहने के कारण इस समय इसे सबसे महत्तवपूर्ण बताया जा रहा है। लेकिन इसके अलावा कुछ और ऐसे मामले हैं जिनकी सुनवाई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने की थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसका मतलब है कि यदि देखा जाए तो इन्हीं 4 कार्यदिवसों में हमें अयोध्या समेत इन मामलों पर 17 नवंबर से पहले फैसला सुनने को मिल सकता है। ये मामले कौन से हैं, आइए जानते हैं…

1.अयोध्या मामला

लंबे समय से विवादों का हिस्सा रहा राम-जन्मभूमि मामला अब जल्द ही सुलझ सकता है। 17 तारीख से पहले रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा इसपर फैसला सुनाने की पूरी संभावना है। इसके मद्देनजर समाज में हर समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है और नसीहत दी जा रही है कि इसपर बेवजह की बयानबाजी करने से भी बचें।

2. सबरीमाला में महिलाओं का प्रवेश-

कोर्ट ने पिछले साल 28 सितंबर को केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी को लिंग आधारित भेदभाव ठहराते हुए रद्द किया था। हालाँकि, ये फैसला 4-1 के बहुमत से था। जिसमें जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने बहुमत से असहमति जताई थी। लेकिन फैसला आने के बाद अयप्पा अनुयायी इस फैसले का भारी विरोध करने लगे। नतीजतन इसके ख़िलाफ़ 55 पुनर्विचार याचिकाओं सहित कुल 65 याचिकाएँ कोर्ट में दर्ज हुई। जिसपर सुनवाई करते हुए बीती 6 फरवरी को CJI गोगोई, जस्टिस आर.एफ. नरीमन, जस्टिस ए.एम. खानविल्कर, जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​ने 45 से अधिक समीक्षा याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 

3. राहुल गाँधी द्वारा अवमानना किए जाने पर माफी माँगने का मामला

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के चौकीदार चोर है बयान पर उनके खिलाफ लंबित अवमानना मामले में उन्हें माफी दिए जाने पर भी फैसला आना बाकी है। जिसमें भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने उन्हें माफी न देने की अपील कोर्ट से की है और कहा है कि इसके लिए केवल माफी काफी नहीं है बल्कि उन्हें सजा दी जानी चाहिए।

4. राफेल सौदे पर पुनर्विचार

दिसंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने राफेल फाइटर जेट सौदे में आपराधिक जाँच से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ याचिकाएँ दायर हुई थीं। CJI गोगोई की अगुवाई वाली पीठ ने इस साल मई में इन पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब सीजेआई को रिटायरमेंट से पहले इसपर सुनवाई करना है।

5. आरटीआई के दायरे में सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई का ऑफिस ‘लोक प्राधिकार’ है या नहीं

एक दशक से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित पड़े इस मामले पर भी फैसला आने की पूरी संभावना है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की थी और CJI गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अप्रैल 2019 के मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रवींद्र भट ने फैसला सुनाया था कि CJI का कार्यालय RTI जाँच के लिए खुला है।

महाराष्ट्र में पिछली विधानसभा का आज है आखिरी दिन: BJP और शिवसेना ने माँगा राज्यपाल से वक्त, अटकलें तेज

महाराष्ट्र की सियासत बीजेपी और शिवसेना के बीच नई सरकार गठन को लेकर गतिरोध अभी भी जारी है। एक तरफ़ बीजेपी ने दावा किया है कि अगले 48 घंटों में सरकार का गठन हो जाएगा। बीजेपी के वरिष्ठ नेता धीर मुनगंटीवार ने बुधवार (6 नवंबर) को कहा कि महाराष्ट्र का गठबंधन (शिवसेना-बीजेपी) बरक़रार है और लोग कभी भी ख़ुशख़बरी की उम्मीद कर सकते हैं। उन्होंने ‘हम साथ-साथ हैं’ का संदेश दिया। वहीं, शिवसेना का कहना है कि उन्हें बीजेपी की तरफ़ से सरकार बनाने का कोई भी प्रस्ताव अभी तक नहीं मिला है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, शिवसेना अभी भी अपने 50-50 के फ़ार्मूले पर आधारित अपनी माँग पर क़ायम है। लेकिन बीजेपी ने यह साफ़ किया है कि मुख्यमंत्री पद पर वो पीछे नहीं हटेगी। इस राजनीतिक गतिरोध पर विराम लगाने के लिए बीजेपी गुरुवार (7 नवंबर) को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाक़ात करेगी।

शिवसेना सांसद संजय राउत का कहना है कि वो महाराष्ट्र के राज्यपाल से मिल चुके हैं। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया के रामदास अठावले भी राज्यपाल से मिल चुके हैं। अगर अब बीजेपी नेता राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा करने जा रहे हैं, तो उन्हें सरकार बनानी चाहिए।

वहीं, अगर एनसीपी की बात करें तो वो अभी भी सरकार बनाने के पक्ष में नहीं है, यह बात पार्टी सुप्रीमो शरद पवार कई बार स्पष्ट कर चुके हैं। पवार का कहना है कि एनसीपी और कॉन्ग्रेस मिलकर भी 100 सीटें नहीं जुटा सकती, ऐसे में सरकार बनाने की बात तो दूर की है। साथ ही पवार ने मुख्यमंत्री बनने की अफ़वाह को भी एक सिरे से यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि वो चार बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं, इसलिए अब वो मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे।

महाराष्ट्र की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल अगले दो दिनों में ख़त्म होने वाला है। दैनिक जागरण ने पीटीआई के सूत्रों के हवाले से लिखा कि अगले सप्ताह विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया जा सकता है, जिससे नए विधायकों को शपथ दिलाई जाए। हालाँकि, यह तस्वीर अभी तक साफ़ नहीं हो सकी है कि महाराष्ट्र में किसकी सरकार का गठन होगा।

ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को 105 और उसकी सहयोगी शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं। कॉन्ग्रेस ने 44 और उसकी सहयोगी एनसीपी ने 54 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में शिवसेना के साथ यदि कॉन्ग्रेस और एनसीपी आ जाते हैं तो सरकार बन सकती है। लेकिन, पवार ने नतीजों के तुरंत बाद कह दिया था कि उनकी पार्टी विपक्ष में बैठेगी। उन्होंने कहा था कि जनादेश भाजपा-शिवसेना गठबंधन को सरकार बनाने के लिए मिला है। इसके बाद से एनसीपी लगातार अपने इस रुख को दोहरा रही है।