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‘प्रोफेट’ बजिंदर पर है बलात्कार का आरोप, फिर भी DD पंजाबी क्यों बढ़ावा दे रहा उसके धर्मांतरण कार्यक्रम को?

ओडिशा में एक ईसाई संस्था द्वारा आयोजित ‘बिग हीलिंग क्रुसेड’ कार्यक्रम के आयोजकों को फंक्शन होने से पहले ही धक्का लगा है। इस कार्यक्रम का इश्तेहार जारी होने के बाद एक ट्विटर हैंडल @noconversion ने कार्यक्रम के आयोजकों की पोल खोल कर रख दी। अपने ट्वीट में चौंकाने वाला खुलासा करने वाले यूजर ने इसे टारगेट करके दूरदर्शन पंजाबी से प्रचारित किए जाने का भी विरोध किया। यह कार्यक्रम एक संदिग्ध व्यक्ति पास्टर बजिंदर सिंह की अगुवाई में होना था। बता दें कि यह ईसाई संस्था दरअसल कार्यक्रम की आड़ में धर्म-परिवर्तन और अंध-विश्वास जैसी चीज़ों को बढ़ावा देती है।

डीडी पंजाबी पर इसके प्रचार-प्रसार को लेकर होने वाले विरोध को समझने के लिए बजिंदर सिंह की गाथा जानना ज़रूरी है। बता दें कि पास्टर बजिंदर सिंह एक हरियाणवी जाट है, जिसने ईसाई धर्मान्तरण का रास्ता चुना। 2016 में खुद ही ‘चर्च ऑफ़ विज़डम एंड ग्लोरी’ नाम से एक गिरजाघर (चर्च) खोलकर बैठ गया। उसने कहा कि यह धार्मिक आयोजनों के लिए है। उसने धीरे-धीरे पूरे पंजाब में खुद को एक चमत्कारिक व्यक्ति के रूप में बताकर प्रचारित करना शुरू कर दिया।

बता दें कि जालंधर की एक गिरजाघर ने बजिंदर सिंह और उसके चर्च से 2018 में अपने सम्बन्ध ख़त्म कर दिए थे। तब संस्था के प्रवक्ता फादर पीटर ने बताया था, “बजिंदर और उनके चर्च का हमारी संस्था से कोई लेना देना नहीं है, उस चर्च को वह स्वतंत्र रूप से चलाते हैं, जिसे मुख्यधारा के किसी गिरिजाघर से मान्यता भी प्राप्त नहीं है, न ही उनके द्वारा किया जाने वाला कोई भी काम ईसाई परंपरा की मुख्यधारा से ताल्लुक रखता है।”

खुदको पादरी कहने वाले बजिंदर पर रेप जैसे संगीन अपराध के आरोप भी लग चुके हैं। साल 2018 में जब यह मामला हुआ तो शिकायत के तुरंत बाद ही बजिंदर सिंह फरार हो गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बजिंदर को दिल्ली एयरपोर्ट से उस वक़्त गिरफ्तार कर लिया, जब वह देश से निकलकर अपने कार्यक्रम के बहाने लन्दन भाग रहा था।

पीड़ित महिला ने बजिंदर पर उसका रेप करने और उस रेप का वीडियो टेप बनाने और ब्लैक मेलिंग जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़ित महिला ने बताया था, “उसने (बजिंदर ने) शिकायत करने के जवाब में उसके रेप का वीडियो वायरल कर देने के धमकी दी थी।” फिलहाल बेल पर खुलेआम जेल के बाहर घूम रहा बजिंदर यह दावा करता है कि उसके पास हर बीमारी का इलाज है- उसके दावे में कैंसर से लेकर एड्स जैसी घातक बीमारियाँ तक शामिल हैं।

2017 के एक मूर्खतापूर्ण वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे बजिंदर ने एक मृत बच्चे को जिंदा कर दिया। लोगों को मूर्ख बनाने वाले ऐसे बहुत से वीडियो सोशल मीडिया और इन्टरनेट पर ईसाई धर्मान्तरण के उद्देश्य से डाले ही जाते हैं। इन वीडियो के ज़रिये कोशिश यह की जाती है कि दर्शक वर्ग में ऐसी सोच पैदा करो जो ईसाई धर्म की हिमायती हों। ऐसे चमत्कारिक लोगों के झाँसे में अधिकांशतः वह लोग फंस जाते हैं जो भोले-भाले या कम पढ़े लिखे होते हैं। उन्हें नहीं मालूम कि उन्हें बेवक़ूफ़ बनाया जा रहा है। कैंसर जैसे बड़े रोग इस तरीके से नहीं बल्कि सही समय पर सही उपचार के बाद ही हराए जा सकते है।

अब सवाल यह उठता है कि दूरदर्शन पंजाबी ने एक ऐसे कार्यक्रमों को क्यों प्रसारित किया, जो गरीब और कमज़ोर को निशाना बनाकर मूर्ख बना रहे हैं। बता दें कि दूरदर्शन भारत सरकार का अपना पब्लिक ब्रॉडकास्टर है। यही वजह है कि त्योहारों में इसका काम बहुत व्यस्त और ज़िम्मेदारी भरा है। ऐसे में टीवी स्क्रीन से बजिंदर सिंह जैसे लोगों को दिखाना किसी भी तरीके से जायज़ नहीं।

एकनाथ शिंदे चुने गए शिव सेना विधायक दल के नेता: शाम 6.15 बजे करेंगे राज्‍यपाल से मुलाकात

जहाँ एक ओर महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर एनडीए के भीतर ही भारतीय जनता पार्टी और शिव सेना में दाँव पेंच जारी है, वहीं दूसरी ओर शिव सेना ने भी भाजपा की तर्ज पर अपने विधायक दल के नेता का चुनाव कर लिया है। एक बड़ा उलटफेर करते हुए इस पद पर एकनाथ शिंदे का चुनाव हुआ है, जबकि अधिकांश कयास यह पद आदित्य ठाकरे को मिलने के लग रहे थे। एक अन्य वरिष्ठ विधायक सुनील प्रभु को पार्टी का विधानसभा में चीफ व्हिप बनाया गया है।

आज दोपहर में हुई इस बैठक में शिंदे के नाम का प्रस्ताव ही युवा सेना के अगुआ आदित्य ठाकरे ने रखा जिस पर पार्टी के विधायकों ने मुहर लगा दी। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के गढ़ सतारा से ठाणे आकर ऑटो रिक्शा चालक के रूप में शुरुआत करने वाले शिंदे 2009 और 2014 में भी विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने अपने बेटे श्रीकांत शिंदे को एमबीबीएस और ऑर्थोपेडिक्स में एमएस कराया है, जिसके बाद श्रीकांत भी सक्रिय नेता हैं। इस बैठक की अध्यक्षता शिव सेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने की।

शिंदे के नाम की घोषणा खुद आदित्य ठाकरे ने ट्विटर पर की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह भी कहा जा रहा है कि शिवसेना विधायक दल की बैठक खत्म होने के बाद बताया गया कि आदित्य ठाकरे, एकनाथ शिंदे, दिवाकर राउते और सुभाष देसाई समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिलने जाएँगे। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने बताया कि शाम 6.15 बजे सभी राज्‍यपाल से मुलाकात के लिए प्रस्थान करेंगे।

इस बीच शिव सेना और भाजपा में कल रात खत्म होती दिख रही तनातनी आज फिर से जोर पकड़ने लगी है। कल रात को जहाँ उसकी चुनाव नतीजों से अब तक भाजपा के लिए कड़वी रही ज़बान से अचानक ही फ़ूल झड़ने लगे थे, उसे (अपने राजनीतिक अस्तित्व) और राज्य के हित के लिए भारतीय जनता पार्टी के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का बने रहना ही श्रेयस्कर लग रहा था, वहीं आज अचानक फिर से उसे 50-50 फॉर्मूला याद आने लगा है।

शिव सेना के प्रमुख प्रवक्ता और पार्टी के मुखपत्र सामना के कार्यकारी सम्पादक संजय राउत ने कल दिए बयानों से गुलाटी मारते हुए आज फिर से दावा किया है कि उनकी पार्टी के रुख में न ही कोई नरमी आई है, न ही उनकी पार्टी कभी अपने वादे से पीछे हटी थी। यह तो भारतीय जनता पार्टी है, बकौल राउत, जो चुनाव के पहले तय किए गए 50-50 फॉर्मूले पर अमल से पीछे हटना चाहती है। उन्होंने कहा कि शिव सेना अपनी माँग पर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार निर्माण होने की सूरत में मंत्रीमंडल में 50-50 मंत्रियों का गणित ही रहेगा। अगर बीजेपी के पास 145 विधायक हैं, तो बेशक सरकार बना ले। राउत पार्टी के कोटे से राज्य सभा सांसद भी हैं।

हिन्दू नेताओं के हत्या की साज़िश रचने वालों की तलाश में NIA ने तमिलनाडु में की ताबड़तोड़ छापेमारी

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने गुरुवार (31 अक्टूबर) को तमिलनाडु में छ: जगहों पर छापेमारी की है। यह छापेमारी जिन छ: जगहों पर की गई है उसमे कोवई के दो ठिकाने, और इलायनगुड़ी, त्रिची, कयालपट्टिनम और नागपट्टिनम के एक-एक ठिकाने शामिल हैं। NIA ने यह छापेमारी हिन्दू संगठनों के दो नेताओं की हत्या के मामले में की है। जानकारी के अनुसार दोनों ही नेताओं की हत्या की योजना कथित रूप से इस्लामिक स्टेट- स्टाइल ग्रुप ने रची थी, जिसके बाद NIA ने यह छापेमारी की है। छापेमारी के दौरान NIA को कई अहम दस्तावेज़ मिले हैं। इनमें लैपटॉप और पेन ड्राइव भी शामिल है।

जाँच एजेंसी के एक सूत्र ने बताया कि NIA इस्लामिक स्टेट से प्रेरित समूहों द्वारा हिन्दू मक्कल काची के नेता अर्जुन संपथ और उनके बेटे ओमकार की हत्या की कथित साज़िश की जाँच कर रही थी। हत्या की साज़िश के बारे में स्थानीय पुलिस ने जुलाई में केंद्रीय जाँच एजेंसी को सतर्क किया था।

पिछले साल सितंबर में, कोयंबटूर पुलिस की एक विशेष जाँच इकाई ने तमिलनाडु में एक IS-प्रेरित इस्लामिक समूह के सात सदस्यों द्वारा संपथ, हिन्दू मुन्नानी नेता मुकंबिकई मणि और साक्षी सेनानी अंबु मारी की हत्या की साज़िश रची थी।

इसके बाद से ही NIA दक्षिण भारत में सक्रिय है और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर ले जाने वालों की धरपकड़ करने की कोशिश कर रही है। NIA के अनुसार भारत में तमिलनाडु से अधिकतर आतंकी योजनाएँ सामने आई हैं जहाँ आईएस का मॉड्यूल पिछले पाँच वर्षों से काम कर रहा है। NIA का दावा है कि उसने 2014 से अभी तक कुल 127 लोगों को पकड़ा है जोकि आईएस से प्रेरित हैं। जिनमे से 33 लोग तमिलनाडु के हैं।

UN में ICJ ने कहा- पाकिस्तान ने किया कुलभूषण जाधव मामले में वियना समझौते का उल्लंघन

कुलभूषण जाधव के मामले में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत में चल रहे मुकदमे में महत्वपूर्ण मोड़ आया है। अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस, आईसीजे) ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूनाइटेड नेशंस जनरल असेम्ब्ली, यूएनजीए) को सूचित किया है कि पाकिस्तान ने भारत को कुलभूषण जाधव का कांसुलर एक्सेस न दे कर इस मामले में ऐसे केसों के लिए बने वियना कन्वेंशन के प्रावधानों का उल्लंघन किया है

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत के अध्यक्ष जस्टिस अब्दुलकावी युसूफ ने कहा है कि वैश्विक अदालत ने अपने फैसले में पाया है कि पाकिस्तान वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36 के तहत आने वाली अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल साबित हुआ है। उसकी विफलता यह दावा करना है कि गुप्तचरी (एस्पियोनज) के आरोपित कैदी वियना कन्वेंशन की जद में नहीं आते।

युसूफ ने कहा कि चूँकि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव की गिरफ़्तारी की अधिसूचना जारी करने में करीब तीन हफ्ते का समय लगाया, अतः यह वियना कन्वेंशन के उस प्रावधान के विरुद्ध है जिसमें उसे भारत के कांसुलर ऑफिस को जाधव की गिरफ़्तारी के बारे में “बिना किसी देरी के” सूचना देनी थी।

अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने कहा कि इस गलती की सही भरपाई करने का तरीका यही होगा कि कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैन्य अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने और मौत की सज़ा सुनाए जाने पर सही तरीके से पुनर्विचार (रिव्यू और रीकंसीडरेशन) हो।

अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने पाकिस्तान के उस दावे की भी पोल खोल दी जिसमें उसने कहा था कि गुप्तचरी (एस्पियोनज) के आरोपित कैदी वियना कन्वेंशन की जद में नहीं आते। जस्टिस अब्दुलकावी युसूफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को सूचित किया कि वियना कन्वेंशन के आर्टिकल 36 में गुप्तचरी (एस्पियोनज) के आरोपित कैदियों के मामले में किसी तरह की छूट का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महा सभा में दावा किया कि कुलभूषण जाधव के मामले में वियना कन्वेंशन पूरी तरह लागू होता है।

गौरतलब है कि इसी साल की 17 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को दी गई सजा की समीक्षा करने और पुनर्विचार करने को कहा था, जिसे भारत की बड़ी जीत माना गया था। इसके साथ ही कुलभूषण जाधव को मिली मौत की सज़ा पर भी रोक लगा दी गई थी। अदालत ने उसी समय पाकिस्तान को वियना संधि के उल्लंघन का दोषी पाया था। अदालत ने कहा था कि कुलभूषण जाधव को उनके अधिकारों के बारे में विवरण नहीं दिया गया। इसके अलावा अदालत ने उस समय भी इस बात का ज़िक्र किया था कि जाधव की गिरफ़्तारी की जानकारी भारत को तुरंत नहीं दी गई।

हिन्दी अमेरिका में सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भारतीय भाषा: अमेरिकन कम्यूनिटी सर्वे ने जारी किए आँकड़े

अमेरिका में हिन्दी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है और इसके बाद गुजराती और तेलुगु भाषा हैं। अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे (ACS) के आँकड़ों के मुताबिक़, 1 जुलाई 2018 तक 8.74 लाख लोगों के साथ अमेरिका में हिन्दी सबसे अधिक बोली जाने वाली भारतीय भाषा रही, जो 2017 के आँकड़ों में 1.3% की मामूली बढ़ोतरी है।

2010 के बाद से 8 साल के दौरान, इस संख्या में 2.65 लाख लोग जुड़े जो 43.5% का इज़ाफ़ा है। हालाँकि, प्रतिशत के मामले में देखें तो तेलुगु भाषी व्यक्तियों की संख्या अमेरिका में अन्य भारतीय भाषाओं के बोलने वालों से बहुत अधिक बढ़ी जो 2010 से 2018 के बीच 79.5% की बढ़ोतरी हुई।

ख़बर के अनुसार, अमेरिका की कुल जनसंख्या में बंगाली भाषा बोलने वाले 3.75 लाख लोग हैं, जो इसी 8 साल की अवधि में लगभग 68 फ़ीसदी बढ़े हैं। इसके बाद तमिल बोलने वाले 3.08 लाख लोग हैं जिनमें 67.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। बंगाली एक ऐसी भाषा है जिसे भारतीय के अलावा भी अन्य देशों में बोला जाता है। इसमें मुख्य रूप से बांग्लादेश के लोग शामिल हैं। तमिल श्रीलंका, सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में बोली जाती है।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि गुजराती और तेलुगू बोलने वालों की संख्या 2017-18 के दौरान थोड़ी कम हुई थी, बावजूद इसके गुजराती बोलने वालों की संख्या 4.19 लाख है जो पिछले साल की तुलना में 3.5% कम है। इसके बावजूद गुजराती भाषा दूसरे नंबर पर बोली जाने वाली भाषा है। वहीं तीसरे नंबर पर तेलुगु भाषा बोलने वालों की संख्या 1 जुलाई 2018 तक 4 लाख थी।

अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे (एसीएस) के अनुसार 2018 के आँकड़े बताते हैं कि देश में 6.73 करोड़ लोग जिनकी उम्र 5 साल से अधिक है और जिनमें वो मूल रूप से अमेरिका में ही पैदा हुए हैं, वो अपने घर पर इंग्लिश के अलावा अन्य भाषा भी बोलते हैं। अमेरिका की कुल जनसंख्या में से 21.9 फ़ीसदी लोग विदेशी भाषा बोलते हैं। जानकारी के लिए बता दें कि ACS ने इस सर्वे में अमेरिका के 20 लाख से अधिक परिवारों को शामिल किया गया था।

अयोध्या पर फैसला मान लें मुस्लिम, ऐसी कोई भी कोशिश न करें जिससे देश का माहौल खराब हो: पर्सनल लॉ बोर्ड

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने लोगों से अपील की है कि अयोध्या के राम जन्मभूमि के मालिकाना हक के विवाद में जो भी फैसला आए, उसे वे शांतिपूर्वक स्वीकार कर लें। इस मुकदमे का फैसला 17 नवंबर, 2019 को चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई के रिटायर होने के ठीक पहले आने की उम्मीद जताई जा रही है।

एआईएमपीएलबी के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट जो भी निर्णय देता है, उसका सभी को सम्मान करना चाहिए और उसे स्वीकार कर लिया जाना चाहिए। उन्होंने मुस्लिमों से फैसले के अपनी उम्मीदों पर खरा न उतरने की सूरत में किसी भी प्रकार की नारे बाजी या किसी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा न बनने की भी अपील की है। “ऐसी कोई भी कोशिश नहीं की जानी चाहिए जिससे देश के माहौल में खराबी हो और सोशल मीडिया पर भी संयम से काम लिए जाने की ज़रूरत है। मुस्लिमों को परिणामों को लेकर डरने या किसी भी प्रकार से चिंतित होने की कोई ज़रूरत नहीं है।”

शिया मौलवी और लखनऊ व उत्तर प्रदेश की मुस्लिम सियासत में बड़ा दखल रखने वाले मौलाना कल्बे जव्वाद ने भी कहा कि अदालत का निर्णय सभी को मान्य होगा और किसी भी पार्टी को देश की शांति भंग करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने साथ ही में यह भी जोड़ा, “हम संविधान और कानून की इज़्ज़त करते हैं और अदालत के फैसले की तामील करेंगे। जो शांति को भंग करने की कोशिश करेंगे, उन्हें इस्लाम के सच्चे नुमाइंदे नहीं कहा जा सकता है।”

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की घड़ी जैसे जैसे पास आती जा रही है, शांति की अपील करने वाले मुस्लिम मौलवियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि के विवादित 2.77 एकड़ जमीन के स्वामित्व के लिए हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों द्वारा दायर की गई अपील पर 40 दिन सुनवाई चली थी। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5 जजों वाली पीठ ने इस मामले पर 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इस मामले में दोनों पक्षों ने इतिहासकारों, ऐतिहासिक यात्रियों, गैजेटियर, अंग्रेज के जमाने से चले आ रहे जमीन संबंधी कागजातों के साथ अपनी-अपनी आस्था का पक्ष भी रखा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्टों को भी सुनवाई के दौरान जजों के समक्ष रखा गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सितंबर 2010 के अपने फैसले में विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बाँटा था – राम लला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिलहाल दिवाली की छुट्टियों के तहत बंद सुप्रीम कोर्ट जब 4 नवंबर को खुलेगा, तो कैसा फैसला आएगा।

‘तब्लीगी इज्तिमा’ के लिए भोपाल में इकट्ठा होंगे 25 लाख से अधिक मुस्लिम: कमलनाथ खुद देख रहे हैं इंतजाम

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 3 दिन तक होने वाले एक मज़हबी सम्मेलन के लिए 25 लाख से ज्यादा मुस्लिम इकट्ठा होने जा रहे हैं। जिसके लिए कमलनाथ सरकार द्वारा अभी से तैयारियाँ शुरू कर दी गईं हैं। भोपाल तक पहुँचने में देश भर के मुस्लिमों को तकलीफ न हो इसके लिए रेलवे से ट्रेनों में कुछ एक्स्ट्रा कोच लगाने की अपील की गई है। साथ ही स्वयं सीएम कमलनाथ ने इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक करके कार्यक्रम के इंतजामों पर चर्चा की है। भोपाल में ये प्रोग्राम इस साल नवंबर महीने में 23 से 25 तारीख तक चलेगा।

जानकारी के अनुसार इस सम्मेलन का नाम ‘तब्लीगी इज्तिमा’ है। जिसका आयोजन भोपाल में कई दशकों से हर साल 3 दिन के लिए होता आया है। इस सम्मेलन में मुख्यत: मजहब से जुड़ी जानकारी दी जाती है। साथ ही इस मज़हबी सम्मेलन में कुछ सामाजिक फैसले भी लिए जाते हैं। जैसे निकाह में दहेज प्रथा को बंद किया जाए, तालीम पर क्या-क्या काम हो, इत्यादि। बीते वर्ष ये प्रोग्राम भोपाल में 4 दिन तक चला था। इस बार भी इसे सफल बनाने की कोशिशों में कमलनाथ सरकार अपनी पूरी कोशिशों में जुटी है।

मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सम्मेलन की तैयारियों में जुटे अधिकारियों से कहा है कि तब्लीगी इज्तिमा के मौक़़े पर बेहतर इंतजाम होना चाहिए। कोशिश होनी चाहिए कि इस जलसे में शामिल होने वाले लोग शासन व्यवस्था से न केवल संतुष्ट रहें, बल्कि उनकी प्रशंसा भी करें।

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बुधवार (अक्टूबर 20, 2019) को मंत्रालय में समीक्षा बैठक करने के दौरान कहा कि इज्तिमा में पूरे देश और विदेश से लोग शामिल होने आएँगे। ऐसे में साफ-सफाई की अच्छी व्यवस्था हो। साथ ही इस दौरान बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध करवाने के अलावा सभी जरूरतों की मॉनिटरिंग व्यवस्था भी चुस्त-दुरूस्त रखने के निर्देश दिए सीएम ने अधिकारियों को दिए।

उन्होंने अधिकारियों से बोला कि हमारी कोशिश यह हो इस साल कि इज्तिमा जलसे की व्यवस्थाएँ और साफ-सफाई पूरे आयोजन की मिसाल बनें। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कार्यक्रम में आने वाले लोगों को सुविधा देने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आरिफ अकील ने रेलवे से अच्छी व्यवस्था रखने और ट्रेनों में अतिरिक्त बोगियांँ लगाने को कहा।

इसके बाद बैठक में शामिल भोपाल डिवीजन रेलवे मंडल के प्रमुख उदय बोरवनकर ने डीआरएम भोपाल द्वारा प्रस्तावित रेल सुविधाओं की जानकारी दी और कलेक्टर भोपाल तरुण पिथौड़े ने बताया कि इज्तिमा में आने वाले लोगों की दी जाने वाली सुविधाओं की तैयारी सरकारी विभागों (नगर निगम, लोक निर्माण, ग्राम पंचायत, पुलिस, परिवहन, स्वास्थ्य, विद्युत मंडल, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, भारत संचार निगम, सड़क विकास प्राधिकरण और रेलवे) द्वारा कर ली गई है।

फिर नरम से गरम हुई शिव सेना: राउत बोले- हम पीछे नहीं हटेंगे, BJP के पास 145 नंबर है तो बना ले सरकार

दिन बदलने के साथ शिव सेना का रुख एक बार फिर से बदल गया है। कल रात को जहाँ उसकी चुनाव नतीजों से अब तक भाजपा के लिए कड़वी रही ज़बान से अचानक ही फ़ूल झड़ने लगे थे, उसे (अपने राजनीतिक अस्तित्व) और राज्य के हित के लिए भारतीय जनता पार्टी के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का बने रहना ही श्रेयस्कर लग रहा था, वहीं आज अचानक फिर से उसे 50-50 फॉर्मूला याद आने लगा है।

शिव सेना के प्रमुख प्रवक्ता और पार्टी के मुखपत्र सामना के कार्यकारी सम्पादक संजय राउत ने कल दिए बयानों से गुलाटी मारते हुए आज फिर से दावा किया है कि उनकी पार्टी के रुख में न ही कोई नरमी आई है, न ही उनकी पार्टी कभी अपने वादे से पीछे हटी थी। यह तो भारतीय जनता पार्टी है, बकौल राउत, जो चुनाव के पहले तय किए गए 50-50 फॉर्मूले पर अमल से पीछे हटना चाहती है। उन्होंने कहा कि शिव सेना अपनी माँग पर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार निर्माण होने की सूरत में मंत्रीमंडल में 50-50 मंत्रियों का गणित ही रहेगा। अगर बीजेपी के पास 145 विधायक हैं, तो बेशक सरकार बना ले। राउत पार्टी के कोटे से राज्य सभा सांसद भी हैं।

कल ही राउत के हवाले से मीडिया में खबर आई थी कि शिव सेना अब सीएम की कुर्सी को लेकर और अड़ने को इच्छुक नहीं है। मीडिया से बात करते हुए शिव सेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कथित तौर पर कहा था कि पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ अपनी युति की कद्र करती है।

बकौल राउत, “हमें पता है कि गठबंधन में बने रहना ही बेहतर है और यही राज्य के भी हित में है। जो हम चाहते हैं, वह यह कि हमें सम्मान दिया जाए।” लेकिन इसी के साथ राउत ने यह भी जोड़ा कि पार्टी सरकार बनाने के लिए भी किसी तरह की उत्सुकता नहीं दिखाना चाहती। उन्होंने कहा, “हमें इसे ठंडे दिमाग से करना होगा।”

इसके पहले तक शिव सेना के बोल भाजपा के साथ एनडीए युति को सहेजने के आज के सुर से बिलकुल उलट थे। शिव सेना न केवल 50-50 फॉर्मूला के अंतर्गत ढाई साल सीएम की कुर्सी और मंत्री परिषद में बड़ी हिस्सेदारी से कम के लिए तैयार नहीं थी, बल्कि भाजपा के हरियाणा में जेजेपी के साथ गठजोड़ पर भी तंज़ कस रही थी। संजय राउत ने ही ताना मारते हुए कहा था कि जेजेपी के उलट शिव सेना में किसी के पिताजी जेल में नहीं पड़े, जिन्हें निकालने के लिए सरकार का हिस्सा बनने की जल्दी हो।

मुश्ताक और राहिल ने हिजबुल में शामिल होने के लिए छोड़ा विशेष पुलिस बल: ‘बाबर आज़म’ के नाम से कर रहे हत्याएँ

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पूर्व विशेष पुलिस अधिकारियों (SPO) सैयद नवीद मुश्ताक और राहिल मगरे को शोपियाँ और पुलवामा के सेब के बागों में हाल में हुई हत्याओं के लिए संदिग्ध माना है। दोनों अधिकारियों ने विशेष पुलिस बल छोड़ कर 2017 में इस्लामिक आतंकवादी संगठन हिज़बुल मुजाहिदीन में शामिल हो गए थे।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, पुलिस ने बताया कि यही मुश्ताक था, जो पिछले कुछ महीनों से, ओवरग्राउंड (ओजीडब्ल्यू) हिजबुल कार्यकर्ताओं को निर्देश दे रहा था कि वे दुकानदारों को पोस्टर लगाए व शोपियां में पैम्फलेट वितरित करें। इसके अलावा सेब उत्पादकों को नेफेड की फल ख़रीद प्रक्रिया का बहिष्कार करने के लिए कहे।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुश्ताक इन पोस्टर्स पर हस्ताक्षर करने के लिए एक और नाम – ‘बाबर आज़म’ का इस्तेमाल कर रहा है। पंजाब के एक सेब व्यापारी, एक ट्रक ड्राइवर और एक मज़दूर को इन आतंकवादियों ने मार डाला। आतंकवादियों ने कम से कम चार खेतों में आग लगा दी।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि इन दोनों लोगों ने 2018-2019 में कई सोशल मीडिया समूहों पर एसपीओ को आतंकवादी संगठनों में शामिल होने के लिए एक ‘प्रसारण सेवा’ का संचालन किया। जवाब न देने पर ये दोनों उन्हें झटके से ख़त्म करने लगे। दो पूर्व SPO जो अब आतंकवादी बन गए वो पुलवामा और अनंतनाग के बीच 60 किलोमीटर के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और हाल ही में वो 11 केसर व्यापारियों से मिले थे। आतंकवादियों ने उन्हें धमकी दी थी कि वे किसी भी सरकारी एजेंसी को अपनी उपज की आपूर्ति न करें।

मुश्ताक, जो शोपियांँ में नाज़नीपोरा का निवासी है, उसके पास चार एके 47 होने का संदेह है, जो उसने 2017 में पुलिस से चुराई थी। एक अन्य आतंकवादी मैग्रे शोपियाँ और पुलवामा में स्थानीय लड़कों के माध्यम से व्यापारियों को ‘धमकी भरे संदेश’ भेज रहा है।

अधिकारी ने बाताया, “मुश्ताक ने बडगाम में अपनी पोस्टिंग के दौरान 2017 में चार एके 47 छीने थे। वह शोपियाँ का हिजबुल मुजाहिदीन ज़िला कमांडर बन गया है और अन्य आतंकवादियों को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है। हम अन्य समूह के सदस्यों की पहचान करने की प्रक्रिया में हैं।”

ख़बर में जम्मू-कश्मीर पुलिस के सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि आतंकवादी समूह हिजबुल मुजाहिदीन ने हाल ही में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि हिजबुल मुजाहिदीन (HM) नागरिकों को लक्षित करेगा जबकि अन्य दो संगठन सुरक्षा प्रतिष्ठानों और सुरक्षा अधिकारियों को अपने रडार पर रखेंगे। कथित तौर पर, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शोपियाँ में हुई इस बैठक के बारे में 14-18 अक्टूबर के बीच कम से कम छ: संदेशों को इंटरसेप्ट किया गया।

कमलेश तिवारी हत्याकांड: हत्यारों का फोन ट्रेन में रखने वाला नावेद का साथी कामरान भी हुआ गिरफ्तार

कमलेश तिवारी हत्याकांड में पुलिस ने कामरान नामक शख्स की गिरफ्तारी की है। पुलिस का कहना है कि कामरान नावेद का साथी है। जिसपर कमलेश तिवारी के हत्यारों को नेपाल ले जाने के अलावा अशफाक का फोन ट्रेन में रख पुलिस को भ्रमित करने का भी आरोप है। बताया जा रहा कामरान, नावेद की ट्रेवल एजेंसी का कर्मचारी और उसका करीबी है। बता दें इससे पहले पुलिस नावेद के दो साथियों रईस और आसिफ को गिरफ्तार कर चुकी है।

अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार यूपी पुलिस ने कमलेश तिवारी हत्याकांड मामले में दोनों हत्यारों अशफाक और मोइनुद्दीन से पूछताछ कर चुकी है। इन्हें पिछले हफ्ते गिरफ्तारी के बाद गुजरात से ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया था। जिसके बाद पुलिस ने इनसे पूछताछ करके बरेली की दरगाह आला हजरत के मौलाना सैय्यद कैफी अली को गिरफ्तार किया था। बाद में लॉ स्टूडेंट और पेशे से वकील मोहम्मद नावेद की गिरफ्तारी शुक्रवार को हुई और अब आगे मिली जानकारी पर कामरान को भी क्राइम ब्रांच की मदद से यूपी पुलिस ने धर लिया।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

इस मामले में नावेद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दोनों हत्यारों का उससे आमना-सामना करवाया। जिसके बाद हत्यारोपियों और नावेद के बयानों को क्रॉस चेक किया गया। इसके अलावा बता दें पुलिस ने तिवारी की हत्या में आरोपितों की मदद करने वालों का ब्योरा भी तैयार किया है। इस मामले में लगातार धर-पकड़ जारी है। पुलिस अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। लेकिन जैसे-जैसे मामले की तह तक जाने की कोशिश की जा रही है, वैसे-वैसे नए चेहरों का खुलासा हो रहा है।

अब पुलिस सभी एंगल को जाँच परखते हुए इस हत्याकांड में पाकिस्तान कनेक्शन की जाँच कर रही है। जिसके लिए पुलिस के निशाने पर कई संदिग्ध हैं। कहा जा रहा है कि हत्या के बाद जिस तरह हत्यारों को जगह-जगह पर मदद मुहैया करवाई गई, उससे एक नया ट्रेंड सामने आया। इसी कारण से जॉंच में जुटे अधिकारी इस पूरे मामले में किसी आतंकी संगठन के स्लीपिंग मॉड्यूल्स की भूमिका को खंगालने की कोशिश में जुटे हैं।