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लौट रही है अर्थव्यवस्था की तेज़ी, सरकार द्वारा लिए गए फैसले होंगे बेहद प्रभावी: मुकेश अम्बानी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के मालिक मुकेश अम्बानी ने मंगलवार को सऊदी अरब में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में आई मंदी अस्थाई है और सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसले आने वाले वक़्त में इसके प्रभावों को पूरी तरह से पलट देंगे। सऊदी अरब के निवेश कार्यक्रम के मंच से बोलते हुए कारोबारी मुकेश अम्बानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा लिए गए फैसलों पर भरोसा जताते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में जो कदम भारत की सरकार ने उठाए हैं, आने वाले समय में उनसे अर्थव्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। अम्बानी ने कहा

“नई-नई टेक्नोलॉजी के आने से दुनिया प्रतिदिन बदल रही है, इसी से दुनिया की अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदल रहा है, जो भले ही अनिश्चितता लाए मगर साथ ही साथ यह नए अवसर भी लेकर आती है।”

भारत में निवेश करने वाले एक कारोबारी के नाते मुकेश अम्बानी ने विश्वास दिलाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में आ रही मंदी का असर आने वाली तिमाही में धीरे-धीरे कम होता दिखेगा। वे बोले कि पिछले 2-3 सालों में बड़े बदलाव हुए हैं। अम्बानी ने बताया कि पिछली पाँच तिमाही के दौरान अर्थव्यवस्था में गिरावट आई है। सरकार ने पिछले कुछ महीनों मे एहतियात के लिए कई ऐसे नियम बनाए हैं, जिनसे आर्थिक सुधार को बल मिल सकेगा। गौरतलब है कि मुकेश अम्बानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज और सऊदी आर्मको के बीच इन दिनों 20 प्रतिशत शेयर्स की बिक्री पर बातचीत चल रही है, जिसकी अनुमानित कीमत तकरीबन 15 बिलियन यूएस डॉलर बताई जा रही है।

बता दें कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सऊदी अरब के इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद थे। पीएम मोदी ने निवेशकों की मदद का वादा करते हुए कहा कि राजनीतिक स्थिरता, बड़े स्तर और बड़े बाज़ार में नीतियों की स्थिरता वाले भारत में निवेश करना, निवेशकों के लिए हितकर साबित होगा। पीएम मोदी ने बताया कि पाँच ट्रिलियन डॉलर वाली इकॉनमी का रास्ता तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कई बड़े बदलाव किए हैं जोकि आने वाले समय विकास को गति देंगे। इस दौरान मोदी ने वर्ल्ड बैंक के ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ में भारत के योगदान का भी ज़िक्र किया।

बता दें कि पीएम मोदी इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य-वक्ता सऊदी अरब के दो दिवसीय दौरे पर पहुँचे थे। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के कई उद्योगपति भी शामिल हुए थे। इस दौरान पीएम ने अपने संबोधन में खाड़ी देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की। इसके बाद भारत और सऊदी के बीच रूपे कार्ड को लेकर एमओयू पर भी दस्तखत किया गया, जिसके बाद बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के बाद भारत के रूपे कार्ड को डिजिटल पेमेंट की मान्यता देने वाला सऊदी तीसरा खाड़ी देश हो जाएगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट कर बताया, “द्विपक्षीय बातचीत में एक उल्लेखनीय अध्याय जुड़ गया। भारत और सऊदी के संबंधों को एक नई पहचान मिली है, दोनों देशों के आपसी रिश्तों को उज्जवल भविष्य की दिशा देकर पीएम मोदी रियाद से विदा हुए।”

थूक कर चाटने को तैयार नीतीश की पार्टी, अब चाहिए केन्द्र में मंत्री पद… बिहार चुनाव के लिए पैंतरा!

‘थूक कर चाटने’ मुहावरे का अर्थ होता है पहले किसी चीज़ को ऐंठ में ठुकरा देने के बाद बाद में खिसिया कर उसके लिए खुद आगे से माँग रखना। और बिहार में सत्तारूढ़ नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ऐसा ही करती दिख रही है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद पार्टी के राष्‍ट्रीय महासचिव केसी त्‍यागी का बयान आया है कि अब उनकी पार्टी केंद्र सरकार में शामिल होने को तैयार है, अगर उसे मंत्री पदों की पेशकश संख्या बल के आधार पर (प्रपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन में) हो तो।

केसी त्यागी ने उदाहरण के तौर पर बिहार की भाजपा और जदयू की मिली जुली एनडीए सरकार में भारतीय जनता पार्टी सरकार को उप मुख्यमंत्री पद दिए जाने का भी ज़िक्र किया। गौरतलब है कि बिहार में भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी उप मुख्यमंत्री पद पर आसीन हैं।

इसके पहले लोकसभा चुनावों के नतीजे आने पर जब मोदी सरकार 2.0 की एनडीए कैबिनेट बनाने की कवायद शुरू हुई, तो जदयू ने सरकार में शामिल होने से इंकार कर दिया था। नीतीश कुमार के हवाले से केसी त्यागी ने ही बयान दिया था कि महज़ एक कैबिनेट मंत्री पर उनकी पार्टी संतुष्ट नहीं है, इसलिए जदयू राजग का हिस्सा रहते हुए भी केंद्रीय कैबिनेट से बाहर रहेगी।

तब केसी त्यागी ने ही इसे ‘अंतिम निर्णय’ बताया था और भविष्य में भी इससे पलटने की संभावना से इंकार किया था। उन्होंने कहा था, “जो प्रस्ताव दिया गया था वह जेडीयू के लिए अस्वीकार्य था, इसलिए हमने फैसला किया है कि भविष्य में भी जेडीयू एनडीए के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं होगी, यह हमारा अंतिम निर्णय है।”

लोकसभा चुनाव में जदयू ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से पार्टी को 16 सीटों पर जीत मिली थी। भाजपा अपने कोटे के सभी 16 सीट जीतने में सफल रही थी, वहीं लोजपा के खाते में 6 सीटें आईं थीं।

इसके बाद इसका ‘बदला’ लेते हुए जदयू ने इस घटना के बाद हुए नीतीश कुमार के कैबिनेट विस्तार में भाजपा को स्थान नहीं दिया था। इसके बाद से बिहार में भाजपा और जदयू के बीच लगातार तनातनी चल रही है। कभी गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार के इफ़्तार पार्टी देने पर निशाना साधा, जिसकी शिकायत जदयू ने अमित शाह तक कर दी, तो कभी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे संजय पासवान ने कहा कि जदयू-भाजपा गठबंधन का मुख्य चेहरा अब भारतीय जनता पार्टी से होना चाहिए।

ऐसे में माना जा रहा है कि जदयू का यह पैंतरा आगामी बिहार विधान सभा चुनाव को लेकर खेला जा रहा है

इमरान खान ने बढ़ाया टैक्स: सड़कों पर आए पाकिस्तानी व्यापारी, IMF के कर्जे से हुआ यह हाल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (इंटरनेशनल मोनेटरी फंड, आईएमएफ) के इशारे पर अपने देश में बिक्री कर (सेल्स टैक्स) बढ़ाया तो बिफरे हुए पाकिस्तानी व्यापारी सड़क पर उतर आए हैं। पाकिस्तान में सारी व्यापार संबंधी गतिविधियाँ ठप पड़ गईं हैं। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी माँगें माने जाने तक हालात ऐसे ही बने रहेंगे। वे सेल्स टैक्स में कमी के अलावा पाकिस्तान में सीएनआइसी (कम्प्यूटराइज़्ड नेशनल आइडेंटिटी कार्ड) के इस्तेमाल संबंधी नियमों में छूट की माँग भी कर रहे हैं।

पकिस्तान के लिए ऐसी हड़ताल का इससे बुरा समय हो नहीं सकता। एक तरफ़ पाकिस्तान टेरर फाइनेंसिंग पर नज़र रखने वाली संस्था एफएटीएफ की ग्रे सूची से डार्क ग्रे में डाले जाने के बाद ब्लैक लिस्ट किए जाने से बचने के लिए जद्दोजहद कर रहा है, दूसरी ओर तेज़ी से बढ़ती पाकिस्तानी रुपए के मुकाबले डॉलर की कीमतों के साथ वह 3.3% पर दम तोड़ती अर्थव्यवस्था का शिकार बना हुआ है।

इस बीच हड़तालियों के नेताओं में से एक और ऑल कराची ट्रेडर्स अलायंस के अध्यक्ष अतिक मीर के मुताबिक यह नया टैक्स सिस्टम व्यापारियों को मार देगा। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इसी साल के मध्य में (जुलाई 2019) हुए प्रदर्शनों के बाद यह दूसरा विरोध प्रदर्शन है। इसमें पाकिस्तान के ज्यादातर दुकानें, मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बंद रहे।

जिन टैक्स नियमों के खिलाफ यह प्रदर्शन हो रहा है, वे पाकिस्तान को आईएमएफ से मिले 6 अरब डॉलर के कर्ज के बदले में लादे गए नियमों में से एक है। आईएमएफ ने जिन शर्तों पर पाकिस्तान को कर्ज दिया था, उनमें से एक थी कि इमरान खान सरकार अपना टैक्स राजस्व बढ़ाने के उपाय करे। इसी के चलते इमरान खान ने सेल्स टैक्स बढ़ाया था। गौरतलब है कि यह अंदेशा पहले से ही जताया जा रहा था कि आईएमएफ से कर्ज लेने के बाद पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था इस एजेंसी के नियमों और शर्तों के इशारों पर नाचने के लिए मजबूर हो जाएगी।

इसके अलावा इमरान खान के सीएनआइसी (कम्प्यूटराइज़्ड नेशनल आइडेंटिटी कार्ड) के इस्तेमाल संबंधी नियमों से भी वहाँ के व्यापारी परेशान हैं। नियमों के अनुसार 50 हजार पाकिस्तानी रुपए से ऊपर की किसी भी खरीददारी पर पहचान पत्र ज़रूरी होगा। व्यापारी इसे बढ़ाकर 1 लाख पाकिस्तानी रुपए किए जाने की माँग कर रहे हैं।

The Quint की झूठी पत्रकारिता से त्रस्त हुआ मुंबई का वो हिन्दू, जिसकी दिवाली मुस्लिमों ने की बर्बाद

मलाड पश्चिम के रहने वाले और मुंबई के फिल्म उद्योग से जुड़े कलाकार विश्व भानु उस समय सुर्ख़ियों में आ गए जब उनकी एक फेसबुक पोस्ट वायरल होने लगी। उसमें उन्होंने लिखा था कि दिवाली के मौक़े पर सोसायटी के लोग (मुस्लिम) उन्हें और उनकी पत्नी को घर में दीये जलाकर रोशनी करने और रंगोली बनाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। भानू ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनकी सोसायटी के लोगों ने न सिर्फ उनके घर की लाइट्स को नष्ट किया बल्कि बाक़ी लगी लाइट्स को हटाने के लिए मजबूर भी किया।

उन्होंने इसकी पुलिस में शिकायत भी की थी।

लेकिन इसके बाद जो हुआ, वह स्तब्ध कर देने वाला है। न केवल पत्रकारिता के समुदाय विशेष ने उनके बयान को तोड़ना मरोड़ना और उन्हें पब्लिसिटी की भूख में झूठ बोलने वाला बताना शुरू कर दिया, बल्कि मुंबई पुलिस ने भी उनके ऊपर दबाव डालकर फेसबुक पर अपनी शिकायती पोस्ट डिलीट करने और मामले के सुलट जाने की झूठी पोस्ट लिखने के लिए उन्हें मजबूर किया।

इसके बाद पुलिस के बयान के आधार पर उन्हें हर किसी मीडिया हाउस ने झूठा बताना शुरू कर दिया, जिसमें एनडीटीवी से लेकर के टाइम्स ऑफ़ इंडिया और रिपब्लिक तक शामिल हैं।

और विश्व भानु से इस मामले को लेकर किसी ने भी बात नहीं की- सिवाय क्विंट के पत्रकार मेघनाद बोस के, जिसने इसमें राजनीतिक ‘विंग’ का एंगल निकाल लिया।

क्विंट की हैडलाइन से ही साफ़ है कि असल में यह साम्प्रदायिक शत्रुता, हिन्दू-मुस्लिम विवाद की घटना नहीं थी, और ‘राइट विंग’ इसे ऐसा बना रहा है। मेघनाद बोस की रिपोर्ट में भानु के हवाले से कहा गया, “मैं कम्युनिस्ट हूँ और हमेशा से संघ, भाजपा और हिन्दूवादी दक्षिणपंथियों का विरोधी रहा हूँ। उदाहरण के तौर पर, मैं गायों की रक्षा के नाम पर भारत में होने वाली मॉब लिंचिंग का विरोधी रहा हूँ। जैसे मैं हिन्दू कट्टरपंथ का विरोधी हूँ, वैसे ही मैं मुस्लिम कट्टरपंथ के भी खिलाफ हूँ।”

बोस की रिपोर्ट में इसके बाद पड़ोसियों के बच्चों को झालरों (फेयरी लाइट्स) से बिजली का झटका लगने और यह बात भानु द्वारा खुद भी माने जाने की बात कही गई है। इसके बाद रिपोर्ट में मामले के मुख्य आरोपित इमरान खान का बयान है, जिनका कहना है कि उन्होंने भानु से केवल या तो झालरों को ऊपर उठा लेने या जहाँ से तार कटा था वहाँ पर टेप लगा देने के लिए कहा था। बकौल क्विंट की रिपोर्ट, प्रियंका (भानू की पत्नी) ने इसके लिए मना कर दिया, जिससे बात बढ़ी।

इस मुद्दे पर भानु का कहना है कि क्विंट ने उनकी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। क्विंट ने रिपोर्ट ऐसी लिखी है मानो भानु ने इमरान के आरोप को स्वीकार ही कर लिया हो, जबकि असल में, बकौल भानु, उन्होंने इसकी संभावना से इंकार भले नहीं किया, लेकिन इसे स्वीकारा भी नहीं। उन्होंने यह सवाल पूछा था कि अगर बच्चों को वहाँ झटका लगा तो उसके बाद भी बच्चे वहाँ खेल क्यों रहे थे।

अपने कम्युनिस्ट होने को लेकर भी विश्व भानु ने कहा कि वे एक कलाकार हैं, और वामपंथी थियेटर जैसे जन नायक मंच के साथ उनका सालों पहले जुड़ाव था। लेकिन इसके आधार पर उन पर ‘वामपंथी’ या ‘कम्युनिस्ट’ का ठप्पा लगा देना गलत होगा। “अगर मैं लेफ्ट वाले लोगों के साथ कोई थियेटर कर लूँ, या मुस्लिमों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठा दूँ, तो इससे मैं वामपंथी कैसे हो गया?” उन्होंने कहा कि उनका संघ की विचारधारा से विरोध 20 साल पहले के थियेटर के दिनों में था, लेकिन वे कभी राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं रहे।

उन्होंने यह भी बताया कि उनके मामले में सहायता करने के लिए आगे आए हिंदूवादी कार्यकर्ताओं से उन्होंने कहा था कि वे उनकी विचारधारा से इत्तेफाक नहीं रखते। इसके बावजूद ‘जगाओ हिन्दू’ समेत हिंदूवादी संगठनों ने उनकी सहायता की, क्योंकि हिन्दू धर्म में पैदा हुए हर इंसान को वे अपना भाई मानते हैं, और उनकी सहायता करने को वे तैयार हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बालकृष्ण नामक एक हिन्दू कार्यकर्ता 60 साल की उम्र होने के बावजूद चेम्बूर से मलाड तक उनका हाल जानने आए, जबकि भानु के पड़ोसियों ने उन्हें पता तक बताने से मना कर दिया। जब भानु ने बाहर आकर उन्हें खुद घर ले आने की बात की, तो बालकृष्ण ने मना किया और कहा कि वे घर के भीतर सुरक्षित रहें, वे खुद उनका मकान ढूँढ़ लेंगे।

मुंबई पुलिस को लेकर भानु का कहना है कि पुलिस ने कई तरह से उन पर मामले से पीछे हटने का दबाव डाला। न केवल उन पर मामले के आपसी सुलह से सुलझ जाने की झूठी पोस्ट लिखने का, बल्कि उन्हें धमकी भी दी गई कि उनकी फेसबुक पोस्ट से मुंबई में हिन्दू-मुस्लिम दंगे हो सकते हैं। उनसे कहा गया कि उनकी पोस्ट से संभावित दंगों की आग मुंबई से आगे कर्नाटक तक भी जा सकती है। पुलिस ने उनसे कहा था, “अगर आप ऐसे करेंगे तो कितने मुस्लिमों को मार दिया जाएगा, जहाँ हिन्दू बहुसंख्या में हैं।”

इसके अलावा भानु का दावा है कि उन पर ऐसा दबाव बनाने के बाद पुलिस ने उनके घर आ कर उन्हें दोबारा लाइट्स लगाने और दिवाली पर धूमधाम करने के लिए मजबूर किया क्योंकि भानु ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग कर सहायता माँगी थी, और अब उनसे जवाब माँगा जाएगा कि भानु दिवाली मना पाए या नहीं।

अगर भानु की बात को सही माना जाए तो, अपनी जवाबदेही से बचने के लिए पुलिस ने बिना कोई कार्रवाई किए ही भानु को हुक्म दिया कि वे ऐसा दिखाएँ कि कार्रवाई हुई है और भानु कार्रवाई से संतुष्ट होकर दीवाली मना रहे हैं, ताकि पुलिस वाले अपना कोरम पूरा कर सकें।

बिल्डिंग में रहे रहे अन्य हिन्दुओं के असहयोग के बारे में भानु का कहना है कि उन्होंने सहयोग इसलिए नहीं किया है, क्योंकि या तो वे किराए पर रह रहे हैं और उनके मकान मालिक मुस्लिम हैं, इसलिए वे चुप हैं, या फिर वे मुस्लिम प्रभुत्व वाले इलाके में डर के कारण चुप हैं।

क्विंट की रिपोर्ट में जिस बिल्डिंग सचिव गुंडु राडेकर का ज़िक्र है और उनके हवाले से घटना को हल्का करके दिखाने की कोशिश हुई है, उनके बारे में भी भानु का कहना है कि वे खाली नाम भर के सचिव हैं। उनकी कोई सुनता नहीं है, और उन्हें ‘मुस्लिम प्रभुत्व वाली सोसाइटी का हिन्दू सचिव’ का कोरम पूरा करने के लिए ही रखा गया है।

इसके अलावा उन्होंने यह भी ज़िक्र किया है कि कैसे उनके खुद के मुस्लिम और ‘सेक्युलर’ थियेटर वाले दोस्त सोशल मीडिया पर उन्हें वे आर्टिकल भेज रहे हैं, जिनमें उन्हें झूठा बताया गया है। वे भानु से पूछ रहे हैं कि उन्होंने झूठ क्यों बोला। उन्हें ऐसा भी इशारा किया जा रहा है कि थियेटर मुस्लिम प्रभुत्व वाली इंडस्ट्री है, जहाँ उन्हें अब काम नहीं मिलेगा। हालाँकि भानु को ऐसा लगता है कि यह सब बकवास है और थियेटर को इसकी परवाह नहीं है।

उनका कहना है कि उन्हें झूठा कहने वाले एनडीटीवी में उन्हीं के कई दोस्त काम करते हैं, जो उन्हें भी जानते हैं और यह भी कि भूतकाल में भानु कई बार मुस्लिमों के हक के लिए खड़े हुए थे, लेकिन वे दोस्त उनके साथ खड़े नहीं हुए। जिस भानु को कम्यूनिस्ट बताया जा रहा है, उसी कम्युनिस्ट पार्टी के बृंदा करात और सीताराम येचुरी भी उनके नाटक देख चुके हैं, लेकिन वहाँ से भी सहायता नहीं आई। अगर वे ‘लेफ्टिस्ट’ हैं, तो उनके समर्थन में और कोई लेफ्टिस्ट क्यों नहीं आ रहा?

ऑपइंडिया से बात करते हुए भानु ने कहा, “अगर मैं लेफ्टिस्ट हूँ, तो मैं आज से छोड़ देता हूँ लेफ़्टिज्म।”

(मूलतः अंग्रेजी में प्रकाशित नूपुर शर्मा की इस रिपोर्ट का हिंदी अनुवाद मृणाल प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव ने किया है।)

बंगाल: वर्चस्व को लेकर टीएमसी के दो गुटों में बमबाजी, गोली लगने से राहगीर की मौत

पश्चिम बंगाल में दिनोंदिन सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं का संघर्ष भी बढ़ता जा रहा है। ऐसी ही एक घटना में 26 साल के शेख इन्सान के मारे जाने की है। वह वीरभूम के निकट सांईथिया इलाके के कल्याणपुर गाँव में वर्चस्व को लेकर टीएमसी के दो गुटों की बमबाजी और गोलीबारी का शिकार हो गया। कुछ लोगों के जख्मी होने की भी खबर है। तनाव को देखते हुए गॉंव में पुलिस बल की तैनाती की गई है।

दरअसल, कल्याणपुर गाँव में वर्चस्व को लेकर लम्बे समय से तृणमूल के स्थानीय अध्यक्ष और पार्टी के एक जिलास्तरीय नेता के बीच संघर्ष चल रहा है। सोमवार रात दोनों गुटों के लोगों का एक-दूसरे से आमना-सामना हो गया। दोनों पक्षों के बीच कहासुनी से मामला सीधे बमबाजी और गोलीबारी तक पहुँच गया।

तृणमूल के दोनों गुटों के बीच हुए इस ख़ूनी संघर्ष का दौर सुबह तक चला। इस दौरान रास्ते से गुजर रहे शेख इन्सान को तीन गोलियाँ लगीं। घायल शेख को स्थानीय लोग अस्पताल ले गए। अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पहुँची पुलिस ने किसी तरह हालात पर काबू पाया।

मृतक शेख के परिवार का दावा है कि उसका सम्बन्ध किसी भी राजनीतिक दल से नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि डालिम, ताहिरुल नाम के व्यक्तियों ने जानबूझकर शेख को गोली मार दी। इस घटना के बाद से ही मृतक के परिजनों में काफी रोष है। उन्होंने सभी आरोपितों को कठोर सजा देने की माँग की है। इस घटना को भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस की गुटबाजी बताया तो तृणमूल के उपाध्यक्ष अभिजीत सिंह ने भाजपा के आरोप को निराधार करार देते हुए कहा कि असामाजिक तत्वों की हरकत के चलते राह चलते युवक की जान चली गई।

गौरतलब है कि सोमवार को ही ऐसी एक अन्य घटना में टीएमसी के तीन कार्यकर्ताओं के परखच्चे उड़ गए थे। मुर्शिदाबाद जिले के तलताली इलाके में नदी तट पर कब्जे को लेकर पार्टी के दो गुटों के बीच संघर्ष के कारण यह घटना घटी। बताया जाता है कि प्रतिद्वंद्वी गुट पर हमले के बम बनाते वक्त हुए धमाके में मिंटू मंडल, ननटू मोला और छवि शेख की मौत हो गई।

डेनमार्क की रानी का सर काटने की धमकी देने वाला मजहब विशेष का आरोपित गिरफ्तार

डेनमार्क के कोपेनहेगन में रहने वाले एक समुदाय विशेष के व्यक्ति को स्थानीय पुलिस ने स्वीडिश राजपरिवार को जान से मारने की धमकी देने के चलते गिरफ्तार किया। स्थानीय अदालत ने आरोपित व्यक्ति को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। बता दें कि हिरासत में लिया गया व्यक्ति समुदाय विशेष से ताल्लुक रखता है और लम्बे समय से वहाँ के राजपरिवार को धमकियाँ दे रहा था।

आरोपित सिलसिलेवार फेसबुक पोस्ट्स में डेनमार्क की रानी मार्गरेथ (द्वितीय) और उनके पूरे राजपरिवार को जान से मारने की धमकी दे रहा था। अपनी धमकी में उसने रानी का सर काटने की बात तक कही थी। स्वीडन में काम करने वाला यह आरोपित व्यक्ति कट्टरपंथी विचारों की तरफ झुकाव रखता है। एक समय यह कट्टरपंथी आरोपित स्वीडन के राजा और दक्षिणपंथी संगठन के संस्थापक कार्ल गुस्ताफ को भी जान से मारने की धमकी दे चुका है।

अपने फेसबुक पोस्ट में आरोपित ने लिखा था, “मैं रानी और उसके पूरे राजपरिवार की गर्दन काट कर धड़ से अलग कर दूँगा। मैंने पहले भी धमकी दी है कि गर्दन काटने से कम का तो कोई सवाल ही नहीं।” इसी तरह उस व्यक्ति ने 16 से 24 अक्टूबर के बीच कई ऐसी पोस्ट लिखीं, जो राजा कार्ल गुस्ताफ के लिए था। उसने लिखा, “अगर मुझे जल्दी उत्तर नहीं मिला तो समझना कि स्वीडिश पुलिस और सीमा बल के लिए यह मेरी आखिरी चेतावनी है, वरना अल्लाह की मर्ज़ी से मैं किसी की परवाह किए बगैर इस राजा का सर काट दूँगा, काट कर अलग कर दूँगा, फिर चाहे इसके लिए क्यों न मुझे अपना ही सर कटवाना पड़े।”

अपनी पोस्ट में उसने कार्ल द्वारा स्थापित दक्षिणपंथी संगठन के नेता रासमस पलादीन की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “अगर तुम एक मर्द हो तो सामने आओ, अगर तुमने कुरान की एक भी आयत को जलाने की कोशिश की तो मैं पूरे डेनमार्क के साथ तुम्हें भी जलाकर राख कर दूँगा।” आपको बता दें कि दक्षिणपंथी संगठन के इसी नेता ने एक बार अभिव्यक्ति की आज़ादी मनाते हुए कुरान जला दी थी।

आरोपित शख्स की बीवी ने बताया कि उसका पति गाँजे के अत्यधिक सेवन से पागलपन का शिकार हो गया। दिन-प्रतिदिन बदलते उसके व्यवहार को देखकर उसकी पत्नी ने उसे किसी मनोचिकित्सक के पास जाने की हिदायत दी थी।

वहीं दूसरी ओर अपनी याचिका की सुनवाई के दौरान आरोपित ने सफाई देते झुए कहा कि वह इस्लाम का पालन कर रहा था। इन्हीं दलीलों के चलते अदालत ने अपनी असहमति जताते हुए उसे रिहा करने से इनकार कर 10 दिनों के लिए जेल भेज दिया। बता दें कि यह व्यक्ति स्वीडन का रहने वाला है मगर अपनी पत्नी और एक बेटी के साथ कोपेनहेगेन में रह रहा था। वह अपने काम पर जाने के लिए स्वीडन के माल्मो से रोज़ यात्रा किया करता था।

जेल में बहुत बेचैनी होती है, मुझे जमानत दे दो… चाहे तो घर में ही नज़रबंद कर दो, पर जेल नहीं: नीरव मोदी

भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी ने ‘बेचैनी की समस्या’ (एंग्जायटी इश्यूज) का हवाला देते हुए पाँचवीं बार अदालत से बेल दिए जाने की अपील की है। इसके पहले इसी महीने (अक्टूबर, 2019 में) यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन की एक अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 11 नवंबर, 2019 (सोमवार) तक बढ़ा दी थी। नीरव मोदी ₹13,500 करोड़ की राशि के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले और मनी लॉन्डरिंग केस का मुख्य आरोपित हैं और भारत से फरार हैं। 48 साल के बिजनेसमैन ने लंदन की एक अदालत में एप्लीकेशन दाखिल कर याचना की कि उन्हें बेचैनी और डिप्रेशन (अवसाद) की दिक्कत है, इसलिए बेहतर होगा कि उन्हें जेल से बाहर निकाल कर घर ही में नज़रबंद रखा जाए

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार नीरव मोदी ने इसके पहले अदालत से जमानत पाने की 4 और कोशिशें की थीं। 19 मार्च, 2019 को स्कॉटलैंड यार्ड के हाथों गिरफ्तार होने के बाद मोदी की लीगल टीम ने 4 बेल ऍप्लिकेशन्स लगाईं थीं, जिन्हें हर बार उनके भाग जाने (फ्लाइट रिस्क होने) के आधार पर ख़ारिज कर दिया गया। नीरव मोदी की लीगल टीम का नेतृत्व सॉलिसिटर आनंद दुबे और बैरिस्टर क्लेयर मोंट्गोमेरी कर रहे हैं।

अपने निर्णय में रॉयल कोर्ट्स ऑफ़ जस्टिस इन लंदन ने कहा था कि यह मानने के अच्छे भले कारण हैं कि मोदी को अगर जमानत दे दी गई तो उसकी अवधि समाप्त होने के बाद वे समर्पण नहीं करेंगे। उनके पास भाग निकलने के साधन हैं।

अपने निर्णय में रॉयल कोर्ट्स ऑफ़ जस्टिस इन लंदन के जज सिमलर ने वही चिंताएँ उठाईं, जो इसके पहले वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट्स कोर्ट ने मोदी के बेल पाने के प्रयासों के बारे में उठाईं थीं। जज सिमलर के अनुसार सभी प्रस्तुत मैटेरियल को ध्यान में रखने के बाद वे इस नतीजे पर पहुँची हैं कि इस केस में गवाहों के साथ छेड़छाड़ और सबूतों को नष्ट करने के सबूत मौजूद हैं। उनके हिसाब से ऐसा फिर से भी हो सकता है।

यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी ने भारतीय जाँच एजेंसियों और अदालतों द्वारा लगातार समन भेजे जाने के बावजूद भारत लौटने से इनकार कर दिया था। भारत उनके प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन में कोशिश कर रहा है। मोदी के प्रत्यर्पण का मुकदमा ब्रिटेन में मई 2020 में शुरू होने की उम्मीद की जा रही है। भारत ने उन पर आर्थिक अपराधों का आरोप लगाया है।

‘बगदादी को अमेरिका ने नहीं मारा, मुस्लिमों ने उसे नकारा और उसकी विचारधारा को मारा’

ISIS के सरगना अबु बकर अल बगदादी की मौत का श्रेय अभी तक जहाँ अमेरिका को दिया जा रहा था, वहीं इसी बीच एक तथाकथित बुद्धिजीवी शाहिद सिद्दीकी ने कहा है कि बगदादी को अमेरिका ने नहीं मारा बल्कि उसे और उसकी विचारधारा को मुस्लिमों ने मारा है।

शाहिद सिद्दीकी ने अपने ट्विटर पर लिखा, “बगदादी मरा क्योंकि पूरे विश्व के मुस्लिमों ने उसे खारिज कर दिया था और उसकी जहरीली मानसिकता के ख़िलाफ़ लड़ाई की थी। उसने अपनी राजनीति साधने के लिए इस्लाम पर कब्जा कर लिया था, वो 21वीं सदी में इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन था। अमेरिका ने उसे नहीं मारा बल्कि ये मुस्लिम हैं, जिन्होंने उसे नकारा एवं उसकी विचारधारा को मारा।

हालाँकि, अपने ट्वीट में शाहिद बगदादी और उसकी विचारधारा के ख़िलाफ़ स्पष्ट नजर आए, लेकिन फिर भी उनकी बातों में विरोधाभास दिखाई दिया। क्योंकि पहली बात तो बगदादी की विचारधार का अभी तक अंत नहीं हुआ है और न ही वो आतंकवादी संगठन अभी समाप्त हुआ है, जिसका वो नेतृत्व करता था। इसलिए ये घोषित करना बहुत जल्दबाजी होगी कि बगदादी को किसने मारा।

इसके बाद उनके ट्वीट में बताया गया कि पूरे विश्व के सभी मुस्लिमों ने उसे और उसकी जहरीली विचारधारा को नकारा… जबकि साल 2015 के PEW के सर्वे को देखा जाए तो पता चलता है कि सीरिया के 21% लोग जो ISIS को सपोर्ट करते हैं, उसके अलावा लिबिया के 7%, नाइजिरिया के 14%, ट्यूनिशिया के 13%, मलेशिया के 11% और पाकिस्तान के 9% लोग भी ISIS को समर्थन करते हैं। इसका मतलब है कि पूरे विश्व में अच्छी-खासी तादाद में ऐसे मुस्लिम हैं, जिन्हें ISIS की विचारधारा से फर्क पड़ता है।

2015 में आई PEW रिसर्च के आँकड़े

इसके अलावा ये समझने वाली चीज है कि ISIS केवल कट्टरपंथी इस्लाम का चेहरा नहीं है, बल्कि ये कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद का एक चेहरा है। जिसके आधार पर तालिबान, अलकायदा, बोको हराम, अल शबाब जैसे संगठन भी उपजे हैं। ये सभी अलग-अलग देशों में सक्रिय हैं और खूँखार रूप ले चुके हैं। इसलिए सिद्दीकी का ये तर्क कि सभी मुस्लिमों ने बगदादी की विचारधारा को नकारा इसलिए वो मरा… ये पूर्ण रूप से गलत है।

इस ट्वीट के कारण सोशल मीडिया पर यूजर्स सिद्दीकी का काफी मजाक उड़ा रहे हैं। लोगों का पूछना है कि वे एक ओर नई दुनिया उर्दू (शाहिद सिद्दीकी नई दुनिया उर्दू के चीफ एडिटर हैं) के जरिए बगदादी के प्रति अपनी संवेदना प्रकट कर रहे हैं और अंग्रेजी पाठकों को दर्शाने के लिए कुछ और ही बोल रहे हैं।

एक यूजर ने कहा कि जिस तरह से सिद्दीकि अपने तर्क दे रहे हैं, उसके अनुसार तो हाफिज सईद और मसूद अजहर का समर्थन करते हैं, क्योंकि वे तो अभी तक जिंदा हैं।

खैर बता दें कि शाहिद सिद्दीकी अक्सर इस तरह की बातें गढ़ने के लिए पहचाने जाते हैं। जिसका हालिया उदाहरण अभी कमलेश तिवारी मामले में भी देखा गया था, जहाँ वो कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद का मुद्दा छोड़कर हिंदुत्व ब्रिगेड पर नफरत फैलाने संबंधी आरोप मढ़ते नजर आए थे।

निसार ने बेगम सोनी और साली पप्पी को कुल्हाड़ी से काटा, भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला

उत्तर प्रदेश में एक युवक द्वारा अपनी पत्नी की कथित हत्या और उसके बाद आरोपित की गुस्साई भीड़ के द्वारा हत्या कर देने का मामला सामने आया है। मीडिया खबरों के अनुसार मोहमद निसार ने अवैध संबंधों के शक में बेगम सोनी उर्फ़ अख्तरी की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। वह इतने पर ही नहीं रूका, उसने सास और पत्नी की बहन (साली) को भी कुल्हाड़ी से गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस घटना के बाद इकट्ठा हुई आक्रोशित भीड़ ने नाराज़ होकर मोहम्मद निसार को भी पीट पीटकर मार डाला।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मामला उत्तर प्रदेश के जिला फतेहपुर में गाँव सेमौर का है। यहाँ की रहने वाली 35 वर्षीया मृतका सोनी उर्फ़ अख्तरी, पुत्री मोहम्मद सईद, का निकाह 9 साल पहले छत्तीसगढ़ के रहने वाले मोहम्मद निसार के साथ हुआ था। दोनों के बीच फ़िलहाल कोई आपसी विवाद चल रहा था, और ऐसा कहा जा रहा है कि निसार को सोनी के अवैध संबंधों का शक था। वह ससुराल आया हुआ था और दोपहर में जब पत्नी उसे खाना देने पहुँची तो मोहम्मद निसार ने उस पर धारदार हथियार से हमला कर उसकी हत्या कर दी। अख्तरी की चीख सुनकर उसकी माँ सोगरा और बहन अकरी उर्फ पप्पी जब कमरे में पहुँचे तो निसार ने उन्हें भी बुरी तरह घायल कर दिया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में निसार के अपनी 8 साल की बेटी की भी हत्या के प्रयास की बात कही जा रही है।

हो हल्ला सुनकर आस पास के लोगों की भीड़ भी वहाँ इकट्ठा हो गई। भीड़ ने मोहम्मद निसार के कथित कृत्य से क्षुब्ध होकर उस पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि जब तक वारदात की सूचना पाकर पुलिस वहाँ पहुँची, भीड़ तब तक मोहम्मद निसार को भी पीट पीटकर उसकी हत्या कर चुकी थी। पुलिस ने घायल सोगरा, अकरी उर्फ़ पप्पी और निसार की बेटी को इलाज के लिए गाजीपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, सीएचसी) में भर्ती कराया है। अभी तक निसार की हत्या या मॉब लिंचिंग के लिए किसी के गिरफ़्तार होने की बात किसी भी मीडिया रिपोर्ट में सामने नहीं आई है।

अमर उजाला की खबर के अनुसार कई थानों की पुलिस फ़ोर्स को मौके पर तैनात कर दिया गया है। इलाके के हालात भी तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। इसके अलावा सोनी के इसके पहले भी करीब 2 साल मायके में गुज़ारने की बात कही जा रही है। लाइव हिंदुस्तान ने यह भी दावा किया है कि निसार का इरादा अपने चारों बच्चों की हत्या करने और ससुराल में आग लगाने का भी था। सास के हस्तक्षेप से 5 साल की जोया बच कर भाग निकली और उसने ही शोर मचाकर लोगों को इकठ्ठा किया।

‘सत्ता की हवस और सिद्धांतों की चिता’ से दूर ध्यानमग्न राहुल गाँधी: सुरजेवाला ने किया कन्फर्म

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी की विदेश यात्रा का राज खुल गया है। वे आध्यात्मिक यात्रा पर विदेश जाते हैं। ध्यान लगाने के लिए। यह सनसनीखेज खुलासा उनके खासमखास पार्टी के कम्युनिकेशन सेल के मुखिया रणदीप सिंह सुरजेवाला ने की है।

‘सत्ता की हवस एंव सिद्धांतों की चिता पर गठित हरियाणा की नई भाजपा-जजपा सरकार को शुभकामनाएँ’ देने के तीन दिन बाद सुरजेवाला ने अपने नेता की यात्रा की पुष्टि की है। वैसे, सूत्रों के हवाले से राहुल गॉंधी के 23 दिन के भीतर दूसरी विदेश यात्रा की खबर पहले ही आ गई थी।

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस अपनी जमीन तलाशने के लिए 1 से 8 नवंबर तक एक अभियान चलाने जा रही है। इसके तहत अलग-अलग राज्यों में 35 प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार को घेरा जाएगा। इसी कार्यक्रम को लेकर मीडिया से बात करते हुए सुरजेवाला ने बताया, “राहुल गाँधी समय-समय पर आध्यात्म दौरे पर जाते रहते हैं। वर्तमान में भी वे इसी पर हैं। कॉन्ग्रेस का 1 से 8 नवंबर के बीच 35 प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सरकार को घेरने की योजना वाला प्रोग्राम पूरी तरह से उनके दिशा-निर्देशों और परामर्श पर तैयार किया गया है।”

सुरजेवाला का यह बयान सोशल मीडिया में राहुल गॉंधी की भद पिटवाने के लिए काफी था। यूजर्स ने राहुल के हालिया विदेश दौरे का हवाला देते हुए पूछा कि आध्यात्म के लिए बैंकॉक कौन जाता है? साथ ही सलाह भी दी कि आध्यात्म के लिए हिमालय अच्छी जगह है।

एक यूजर ने सुरजेवाला को राहुल गाँधी की आया बताया और कहा कि इन्हें मालूम है कब राहुल के लिए डायपर्स बदलने हैं।

एक यूजर ने सुरजेवाला के बयान पर कहा कि आखिर राहुल गाँधी से पूछने की और उनके निर्देश लेने की जरूरत क्या है, जब वे कॉन्ग्रेस के प्रेसीडेंट ही नहीं हैं। पार्टी को स्पष्ट करना चाहिए कि राहुल गाँधी पार्टी ने पार्टी छोड़ दी है या सिर्फ़ आँख में धूल झोंकी जा रही है।

दीगर है कि सुरजेवाला किसी जमाने में कॉन्ग्रेस के ज्वाइंट किलर थे। लेकिन, राहुल गॉंधी के नेतृत्व में पार्टी संगठन में उनकी तरक्की के साथ ही उनका चुनावी प्रदर्शन गिरने लगा। हालिया हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी है। अब उन्हें कौन बताए कि विदेश यात्राओं से तो राजनीति के गुर नहीं सीखे जाते। वरना जब इसी महीने राहुल बैंकॉक गए थे तो पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने उम्मीद जताई थी कि वे नई ऊर्जा के साथ लौटेंगे। हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में यह ऊर्जा महज सात रैलियों में ही निपटते जनता ने देखा है।