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BJP विधायक दल का नेता चुने गए फडणवीस, शिवसेना के साथ सरकार गठन का ऐलान

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दोबारा भाजपा विधायक दल के नेता चुन लिए गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना इस दौरान पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे। भाजपा के सभी 105 विधायकों ने एकमत से देवेंद्र फडणवीस को अपना नेता चुना। फडणवीस ने 1 दिन पहले ही साफ़ कर दिया था कि चूँकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रूप से उनके नाम का ऐलान कर चुके हैं, विधायक दल की बैठक में उनका नेता चुना जाना बस औपचारिकता है। फडणवीस ने कहा है कि अगले 5 वर्ष के लिए राज्य का मुख्यमंत्री वही रहेंगे।

भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विधायक दल की बैठक में किसी अन्य नेता के नाम पर चर्चा ही नहीं हुई और न किसी अन्य नेता का नाम प्रस्तावित किया गया। फडणवीस का नाम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने प्रस्तावित किया और पहली फडणवीस सरकार में वित्त मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे सुधीर मुनगंटीवार सहित 6 अन्य नेताओं ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन कर इसे आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने भाजपा विधायकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है। साथ ही सीएम फडणवीस ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को भी धन्यवाद दिया।

उधर शिवसेना की बात करें तो पार्टी ने गुरुवार (अक्टूबर 31, 2019) अपनी पार्टी के नव-निर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति के लिए फ़ैसला लिया जाएगा। जहाँ एक तरफ फडणवीस ने साफ़ कर दिया है कि भाजपा-शिवसेना मिल कर सरकार बनाएगी, शिवसेना की तरफ़ से ऐसा कोई बयान नहीं आया है। शिवसेना ने आज यूरोपियन पार्लियामेंट के पैनल के जम्मू कश्मीर दौरे को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। वहीं फडणवीस ने कहा कि ये जनादेश ‘महायुति’ के लिए है क्योंकि राजग नेता ‘महायुति’ के लिए ही वोट माँगने गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का गठन भी ‘महायुति’ ही करेगी, इसमें कोई संशय नहीं रहना चाहिए।

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने पहले कहा था कि जनता ने उनकी पार्टी को विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है और इसीलिए वो सरकार में शामिल होने का प्रयास नहीं करेंगे। एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने अपने नेता ने इस स्टैंड को दोहराया। हालाँकि, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर परिस्थितियाँ बदलती हैं तो पार्टी उस हिसाब से फ़ैसला लेगी। बता दें कि भाजपा और शिवसेना के बीच सरकार गठन के लिए पेंच फँसा हुआ है। शिवसेना 50-50 की बात करते हुए ढाई वर्ष के लिए अपना मुख्यमंत्री बनाना चाह रही है। पार्टी नेता आदित्य ठाकरे को सीएम बनाने की माँग के साथ पोस्टर लगा कर भाजपा पर दबाव बनाने में लगे हैं।

उधर महाराष्ट्र में नेताओं के बीच कार्टून का वॉर भी दिलचस्प होता जा रहा है। शिवसेना नेता संजय राउत ने एक कार्टून ट्वीट किया था, जिसमें एक बाघ अपने पंजे में कमल का फूल लिए हुआ था। इसके जवाब में भाजपा ने भी एक कर्टून जारी किया था, जिसमें उद्धव क़द में अपने से काफ़ी विशाल फडणवीस को गीदड़-भभकी देते दिख रहे हैं कि उन्हें बड़ा भाई बोला जाए। अब एनसीपी नेता क्लाइड क्रस्टो ने एक कार्टून जारी किया है, जिसमें धनुष-तीर कमल की तरफ ही तना हुआ है और वार करने को तैयार है। बता दें कि धनुष-तीर शिवसेना का चुनाव चिह्न है।

वहीं कॉन्ग्रेस फिर से शिवसेना पर डोरे डालने में लग गई है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि अगर शिवसेना कॉन्ग्रेस के पास सरकार गठन का प्रस्ताव लेकर आती है तो उसे पार्टी आलाकमान के और सहयोगी पार्टियों से इस सम्बन्ध में विचार-विमर्श किया जाएगा। महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता चौहान ने पूछा कि जब भाजपा और शिवसेना के बीच विश्वास नाम की चीज है ही नहीं, तो वे साथ में सरकार कैसे बना सकते हैं? उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर क्या-क्या बातें हुई थीं, ये जनता को सार्वजनिक की जानी चाहिए।मुंबई शिवसेना के अध्यक्ष नवाब मलिक ने कहा कि अगर शिवसेना समर्थन माँगेगी तो पार्टी विचार करेगी।

हालाँकि, नवाब के बयान का महत्व नहीं है क्योंकि महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष जयंत पाटिल ने साफ़ कर दिया है कि उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस के साथ विपक्ष में बैठेगी। शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने कहा कि वो विपक्ष में बैठेंगे और नई सरकार की खामियों को उजागर करेंगे।

उधर महाराष्ट्र में यूथ कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सत्यजीत ताम्बे ने वर्ली के नव-निर्वाचित विधायक और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे को सलाह दी है कि उनके पास मुख्यमंत्री बनने का मौक़ा आया है तो इसे यूँ ही नहीं जाने देना जाना चाहिए। उन्होंने ख़ुद का उदाहरण देते हुए बताया कि वो 24 वर्ष की उम्र में ही डिस्ट्रिक्ट काउंसिल का नेतृत्व करने वाले थे लेकिन ये मौक़ा चला गया। उन्होंने आदित्य को सलाह देते हुए कहा कि राजनीतिक ज़मीन एक बार घिसक जाए तो इसे फिर से हासिल करना बड़ा ही मुश्किल काम है।

यूरोप के 23 सांसदों ने J&K पर मोदी सरकार का किया समर्थन, मीडिया और ओवैसी को फटकारा

जम्मू कश्मीर से लौटे यूरोपियन पार्लियामेंट के प्रतिनिधिमंडल ने मोदी सरकार द्वारा आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। 23 सदस्यीय यूरोपियन पैनल ने कहा है कि वो आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में मोदी सरकार के हर क़दम का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि वे यूरोप से आए हैं, जहाँ वर्षों तक चली लड़ाई के बाद शांति क़ायम हुई। यूरोपियन पैनल ने आशा जताई कि भारत दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण देश बनेगा। सभी यूरोपियन सांसदों ने विश्व समुदाय को आगाह करते हुए कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में भारत का साथ दिया जाना चाहिए।

यूरोपियन पार्लियामेंट के डेलीगेशन में शामिल यूके के सांसद न्यूटन डन ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को पक्षपाती बताते हुए कहा कि उन्होंने जो भी ज़मीनी हालात देखा है, वो दुनिया को बताएँगे। यूरोपियन पैनल के अनुसार, कश्मीर की जनता ने उनसे कहा कि वे सभी भारतीय हैं और हमेशा भारतीय ही रहना चाहते हैं। कश्मीर की जनता ने यूरोप के सांसदों से कहा कि वो आम भारतीयों की तरह रहना चाहते हैं और अपने क्षेत्र में भी उसी तरह का विकास देखना चाहते हैं, जैसा देश का बाकी हिस्सों में हो रहा है। इन सांसदों को श्रीनगर के एक होटल में ठहराया गया था।

जिस दिन यूरोप के जनप्रतिनिधियों ने भारत में क़दम रखा, उसी दिन जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने एक ट्रक ड्राइवर की हत्या कर दी। जिस दिन वो कश्मीर पहुँचे, उस दिन भी कुलगाम में आतंकियों द्वारा 6 बंगाली मजदूरों को घर से घसीटते हुए निकाल कर मार डाला गया। यूरोपियन पैनल ने नजरबन्द नेताओं, नव-निर्चाचित पंचायत सदस्यों व कॉउन्सिलर्स और स्थानीय सैन्य अधिकारियों से मुलाक़ात कर राज्य की ज़मीनी स्थिति के बारे में जानकारियाँ प्राप्त की। यूरोपियन पैनल ने कहा कि वो भारत के आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा:

“जम्मू कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कवरेज पक्षपातपूर्ण रही है। जैसे ही हम अपने-अपने देश पहुँचेंगे, हम दुनिया को बताएँगे कि हमनें ज़मीन पर क्या देखा? हम लोगों को सच्चाई से अवगत कराएँगे। उलटा हमें ही फासिस्ट बता कर हमारी छवि को कलंकित करने की कोशिश की जा रही है। लोगों को ऐसा करने से पहले कम से कम जानकारियाँ जुटा लेनी चाहिए। अनुच्छेद 370 भारत का आंतरिक मसला है। हमें सिर्फ़ आतंकवाद से मतलब है, जो दुनिया भर में सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। हम हालिया आतंकी घटनाओं पर खेद व्यक्त करते हैं। आतंकियों द्वारा की जा रही हत्याएँ निंदनीय है।”

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया था कि यूरोपियन पैनल में जितने भी सांसद शामिल हैं, वो सभी हिटलर की नाजी विचारधारा से प्रेरित हैं। इसके जवाब में यूरोपियन प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वो लोग नाजी विचारधारा का अनुसरण करने वाले लोग नहीं हैं। पैनल ने ओवैसी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस बयान से वो सभी काफ़ी आक्रोशित हैं। उन्होंने पूछा कि अगर वो नाजी विचारधारा को मानने वाले होते तो क्या जनता द्वारा चुन कर भेजे जाते? सांसदों ने कहा कि वो यहाँ की राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते और वो बस ‘फैक्ट फाइंडिंग’ के लिए आए हैं।

यूरोपियन प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वो कश्मीर दौरे को लेकर यूरोपियन यूनियन को किसी प्रकार की रिपोर्ट सौंपने नहीं जा रहे हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की भी पैरवी की। कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता आनंद शर्मा ने इसे मोदी सरकार का प्यार एक्सरसाइज करार दिया। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि यूरोपियन सांसदों से पहले भारत के विपक्षी सांसदों को वहाँ भेजा जाना चाहिए था। 23 सदस्यीय यूरोपियन पैनल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनएसए अजीत डोभाल ने भी मुलाक़ात की थी। उन्हें पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के बारे में बताया गया था।

ममता बनर्जी के टीएमसी से खौफ में टैगोर का विश्व भारती, केंद्र से मॉंगी CISF सुरक्षा

पश्चिम बंगाल के शान्ति निकेतन स्थित विश्व भारती यूनिवर्सिटी के कुलपति विद्युत चक्रवर्ती ने परिसर की सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से सीआईएसएफ जवानों की स्थायी तैनाती परिसर में करने की मॉंग की है। परिसर की सुरक्षा में तैनात निजी सुरक्षाकर्मियों की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं के प्रति वफादारी का हवाला देते हुए उन्होंने यह मॉंग की है।

विश्व भारती की स्थापना रबींद्रनाथ टैगोर ने 1921 में की थी। राष्ट्रपति विश्व भारती के विजिटर और प्रधानमंत्री चांसलर होते हैं। चकवर्ती ने बीते महीने पत्र लिख केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से सुरक्षा की मॉंग की। पत्र की कॉपी प्रधानमंत्री कार्यालय को भी प्रेषित की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वीसी ने कहा है वर्तमान समय में जो सिक्योरिटी गार्ड्स तैनात हैं वे टीएमसी की ओर झुकाव रखते हैं। वे सिक्योरिटी ऑफिसर के आदेशों को नहीं मानते हैं। पत्र में चक्रवर्ती ने कहा है कि जब अनियमितता के लिए गार्ड को तलब किया जाता है या किसी गड़बड़ी के लिए निकाला जाता है तो टीएमसी के कार्यकर्ता उनके बचाव में आ जाते हैं। पत्र में उन्होंने कहा है, “विश्वविद्यालय को सुचारू तरीके से चलाने के लिए कैम्पस में सीआईएसएफ की तैनाती की जाए। देश के प्रति उनके निस्वर्स्थ सेवा भाव से ही परिसर में शांति और स्थिरता की स्थिति वापस लाने में मदद मिलेगी।”

ख़बरों के मुताबिक एचआरडी मंत्रालय इस पर सीआईएसएफ से बात कर रहा है। ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में सुरक्षाबलों की तैनाती की माँग की गई है। इससे पहले 2017 में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में भी यही माँग उठी थी। उस वक्त विवि प्रशासन का दावा था कि उनके पास परिसर के छात्रों को संभालने के लिए पर्याप्त सुरक्षाकर्मी नही हैं। एक वर्ग शिक्षण संस्थानों में सुरक्षाबलों की तैनाती एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बताता है। कुछ लोग इसे छात्रों की ओर से उठने वाले विरोध के स्वर को दबाने के रूप में देखते हैं।

34 साल का बटुआ चोर चिल्लाने लगा ‘अल्लाहु-अकबर’, थियेटर में जोकर देख रहे लोगों में मची भगदड़

पेरिस के एक थियेटर में रविवार रात (27 अक्टूबर, 2019 को) तब भगदड़ मच गई जब दर्शकों में से एक ने “अल्लाहु अकबर” का नारा लगाना शुरू कर दिया था। ग्रैंड रेक्स सिनेमा में हॉलीवुड फिल्म जोकर की स्क्रीनिंग के दौरान यह घटना हुई। बाद में पता चला कि नारा लगाने वाला शख्स लोगों में डर पैदा कर लूट की घटना को अंजाम देना चाहता था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हैरान कर देने वाली इस घटना अंजाम देने वाले शख्स की उम्र 34 साल बताई गई है। चश्मदीद के अनुसार अनुसार उसने पहले तो फिल्म पर राजनीतिक होने का आरोप बार बार लगाते हुए “इट्स पोलिटिकल, इट्स पोलिटिकल” (“यह राजनीतिक है, यह राजनीतिक है”) चिल्लाना शुरू कर दिया। पहले तो लोग उसकी मूर्खता पर हँसे, फिर कुछ लोगों ने उसे चुप रहने के लिए कहा।

चश्मदीद के मुताबिक उसके बाद वो आदमी अपनी जगह पर खड़ा हुआ। उसने अपना हाथ सीने पर रखा और “अल्लाहु अकबर” चिल्लाना शुरू कर दिया। इसके बाद लोग घबरा कर अपनी-अपनी सीटों से उठ कर बाहर निकलने को दौड़ने लगे। इस बीच दर्शकों में से ही किसी ने उस आदमी के पास बंदूक होने की बात भी फैला दी, जो बाद में गलत निकली।

मीडिया से बात करते हुए ग्रैंड रेक्स के निदेशक ने बताया कि असल में इस आदमी ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर थियेटर में लूट की साजिश रची थी। उसका प्लान था कि घबराहट में भागे लोगों द्वारा पीछे छोड़े गए फ़ोन और बैग इत्यादि वह चोरी कर लेगा।

जब यह आदमी थियेटर से निकल रहा था तो दर्शकों और सिक्योरिटी गार्ड ने उसे पकड़ने की कोशिश की। लेकिन भीड़ के कारण वे असफल रहे। हालाँकि उसका कोट उनके हाथ लगा। इसमें उसके नाम का पास और फ़ोन था। इसके आधार वह पकड़ा गया

पाकिस्तान ने कुपवाड़ा में किया सीजफायर का उल्लंघन: मो. यूसुफ की मौत, बच्चों सहित 7 घायल

पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में बुधवार (अक्टूबर 30, 2019) को एक बार फिर सीजफायर का उल्लंघन किया। इस बार कुपवाड़ा के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में एक आम नागरिक की मौत हो गई जबकि 7 लोगों के घायल होने की खबर है। सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा के माछिल क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के करीब हुए सीजफायर उल्लंघन में मारे गए शख्स की पहचान मोहम्मद यूसुफ खान के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 65 थी। कहा जा रहा है कि घायलों में बच्चे भी शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं में बहुत बढ़ोतरी हुई है। कल राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल से सटे इलाकों में राउंड फायरिंग हुई थी। जिसमें पाकिस्तान की ओर से मोर्टार दागे गए थे।

हालाँकि इस उल्लंघन के जवाब में भारतीय सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की। इससे पहले दिवाली के अवसर पर भी पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया था। इस दौरान एलओसी के पास राजौरी जिले के सुंदरबन सेक्टर में फायरिंग हुई थी। जिसमें भारतीय सेना का एक जवान घायल भी हुआ था।

इससे पूर्व जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए सोपोर में एक आतंकी हमला भी हुआ था। इसमें कम से कम 19 आम नागरिक घायल हुए थे। इनमें 6 की हालत गंभीर बेहद गंभीर थी। जिसके चलते उन्हें श्रीनगर के अस्पताल में ले जाया गया था।

टीपू सुल्तान पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने के काबिल नहीं, किताबों से होगा बाहर, जयंती भी नहीं मनेगी: CM येदियुरप्पा

18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मैसूर पर राज करने वाले टीपू सुल्तान को लेकर एक बार फिर से चर्चा छिड़ गई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि टीपू सुल्तान के बारे में राज्य के पाठ्यक्रम में जो भी चीजें शामिल की गई हैं, सभी को हटाया जाएगा। येदियुरप्पा ने कहा कि टीपू सुल्तान के बारे में कर्नाटक का पाठ्यक्रम में कुछ भी नहीं रहेगा। बता दें कि कर्नाटक की पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकारें टीपू सुल्तान की जयंती मनाती रही है लेकिन येदियुरप्पा सरकार ने आते ही उस पर रोक लगा दी। अब पाठ्यक्रम से भी उसे हटाने का ऐलान किया गया है।

बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि वो ऐसे किसी भी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं करते, जिनमें टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता सेनानी बताया जाता है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कन्नड़ एंड कल्चरल डिपार्टमेंट को आदेश दिया था कि टीपू सुल्तान की जयंती नहीं मनाई जाए। जुलाई के अंतिम हफ्ते में हुई कैबिनेट मीटिंग में कर्नाटक सरकार ने इस फ़ैसले पर मुहर लगा दी थी। मुख्यमंत्री का कहना है कि टीपू सुल्तान पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने के काबिल नहीं है।

इससे पहले भाजपा विधायक अप्पाचु रंजन ने एक पत्र लिख कर कर्नाटक के सिलेबस से टीपू सुल्तान से जुड़ा चैप्टर हटाने की माँग की थी। इसके बाद राज्य के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि टीपू सुल्तान से जुड़े चैप्टर को हटाने को लेकर रिपोर्ट तैयार की जाए। कर्नाटक टेक्स्ट बुक सोसाइटी के मैनेजिंग डायरेक्टर को पत्र लिख कर मंत्री ने विधायक रंजन के साथ बैठक कर उनका पक्ष सुनने और उस पर विचार करने को कहा था। उन्होंने हिस्ट्री टेक्स्ट बुक ड्राफ्टिंग कमिटी की बैठक बुला कर इस चैप्टर की समीक्षा के निर्देश दिए थे।

भाजपा विधायक रंजन ने कहा कि टीपू सुल्तान ने हजारों ईसाईयों व कोडवा समुदाय के लोगों को जबरन इस्लाम कबूल करवाया था। साथ ही उन्होंने बताया कि टीपू ने अपने शासनकाल के दौरान फ़ारसी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया था। साथ ही उन्होंने टीपू सुल्तान के स्वतंत्रता सेनानी होने के दावों का भी खंडन किया। उन्होंने कहा कि बिना इतिहास के तथ्यों को जाने हुए उसके नाम को पाठ्यक्रम में घुसेड़ दिया गया और उसे जबरदस्ती महिमामंडित किया गया। विधायक ने बताया कि इस चैप्टर में लिखी गई बातें झूठ हैं।

जिस हिंदू छात्रा की मौत को Pak ने बताया आत्महत्या, उसके शव पर मिला पुरुष DNA: फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना में संदिग्ध परिस्थियों में हिंदू लड़की नमृता चंदानी की मौत पर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ताजा जानकारी के अनुसार नमृता के शरीर और कपड़ों से पुरुष का डीएनए मिला है।

इस खुलासे के बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया। जहाँ अभी तक कॉलेज प्रशासन कह रहा था कि नमृता की मौत आत्महत्या है, वहीं फॉरेंसिक लैब से आई ब्लड सैंपल की रिपोर्ट किसी दूसरी ओर ही इशारा कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लरकाना जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मसूद बंगश ने नमृता चंदानी की डीएनए रिपोर्ट का खुलासा करते हुए बताया कि रिपोर्ट में नमृता के शरीर और कपड़ों पर पुरुष के डीएनए सैंपल पाए गए हैं। जिन्हें अब कोर्ट के समक्ष भी पेश किया जाएगा। ये रिपोर्ट जामशोरो की फॉरेंसिक लैब से जारी की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने 17 सितंबर को नमृता के कपड़ों पर लगा खून का सैंपल जामशोरो फॉरेंसिक लैब में भेजा था। जिसके बाद उन्हें इसकी रिपोर्ट लगभग डेढ़ महीने बाद सोमवार (अक्टूबर 28, 2019) को मिली और पूरे रिपोर्ट से मामले में नया खुलासा हुआ।

बता दें पाकिस्तान के लरकाना के बीबी आसिफा डेंटल कॉलेज में अंतिम वर्ष की बीडीएस छात्रा नमृता चंदानी की अचानक मौत ने सबको हिलाकर रख दिया था। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सिंध पुलिस ने 32 लोगों को हिरासत में लिया था। जिसमें मेडिकल छात्रा के दो क्लास के साथी मेहरान अबरो औऱ अली शान मेमन का नाम भी शामिल था। पूरे मामले में पुलिस ने नमृता के फोन की डिटेल्स खँगालने के बाद इन दोनों को हिरासत में लिया था।

पुलिस का दावा था कि अबरो ने पूछताछ में स्वीकारा है कि उसके और नमृता के बीच प्रेम संबंध थे। जिसके चलते नमृता ने अबरो से अपने और उसकी शादी की संभावनाओं पर बात भी की थी। लेकिन मेहरान इसके लिए तैयार नहीं था।

इस मामले में नमृता के परिवार वालों की ओर से काफी दबाव बनाए जाने के बाद 25 सितंबर को सिंध हाइकोर्ट ने न्यायिक जाँच के आदेश दिए थे। जिसके बाद ही इस मामले में जाँच शुरू हुई। लड़की के भाई का लगातार कहना था कि उसकी बहन के गले पर केबल की तार से गला घोंटने के निशान थे। जो उसकी हत्या की ओर इशारा करते हैं।

अयोध्या: जब दर्जनों रामभक्तों की लाश पर चढ़ ‘मुल्ला’ बने थे मुलायम, बाद में कहा- और भी मारते

अक्टूबर 30, 1990- यही वो दिन है जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चला कर ‘सेकुलरिज्म’ के नए मसीहा बने थे। इसके बाद लोगों ने उन्हें ‘मौलाना मुलायम’, ‘मुल्ला मुलायम’ जैसे तमगों से नवाजा था। इससे पहले अक्टूबर में लालू यादव ने यूपी में रथ घुसने से पहले ही तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ़्तार करवा कर अपने ‘सेकुलरिज्म’ का सबूत दिया था। अगर वो ऐसा नहीं करते तो मुलायम सिंह यादव इस मौके को लपक सकते थे। लेकिन मुलायम ने ख़ून बहा कर सेकुलरिज्म का झंडा बुलंद करने की ठानी। क्या-क्या हुआ था उस वक़्त, आइए आपको बताते हैं।

कहानी इसके एक दिन पहले से शुरू करते हैं, जब कारसेवकों के अतिरिक्त जत्थे अयोध्या पहुँचने लगे थे। विश्व हिन्दू परिषद के नेता अशोक सिंघल और उनके समर्थकों पर यूपी पुलिस ने लाठियाँ भाजी। क़रीब 100 साधुओं को गिरफ़्तार कर एक बस में रखा गया था, लेकिन अयोध्या के रामप्रसाद नामक साधु ने ड्राइवर को बाहर कर ख़ुद बस की कमान थामी और पुलिस के शिंकजे से निकलने में कामयाब हो गए। साधुओं का ये जत्था राम जन्मभूमि पहुँचा। अशोक सिंघल के घायल होने की ख़बर के बाद हज़ारों कारसेवक जमा हो गए थे। वो लोग सुरक्षा बलों के पाँव छूते थे और आगे बढ़ते जाते थे। लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले भी उन्हें न रोक सके।

मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या के बारे में बयान दिया था कि वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता। 30 अक्टूबर को कोठरी भाइयों ने गुम्बद के ऊपर भगवा ध्वज फहरा कर मुलायम सिंह को सीधी चुनौती दी। 30 अक्टूबर तक क़रीब 1 लाख लोग वहाँ पहुँच चुके थे, जिसमें 20,000 साधु-संत ही थे। सरयू नदी के पुल पर जब कारसेवक जमा हुआ, तब पुलिस ने गोली चलाई। मंदिर परिसर में गुम्बद पर चढ़े कारसेवकों पर गोलियाँ चलाई गईं। नींव की खुदाई कर रहे लोगों पर गोली चलाई गई। उस समय मुफ़्ती मोहम्मद सईद देश के गृहमंत्री थे।

कारसेवकों पर गोली चलाए जाने से मुफ़्ती मोहम्मद सईद भी ख़ुश थे। तभी तो उन्होंने मुलायम सरकार की पीठ भी थपथपाई थी। हालाँकि, भाजपा ने प्रधानमंत्री वीपी सिंह से इस गोलीकांड को लेकर ऐतराज जताया। जब कारसेवक गुम्बद पर चढ़े हुए थे, तब सीआरपीएफ ने भी गोली चलाई थी। सीआरपीएफ की गोली से गुम्बद पर चढ़े 2 कारसेवक नीचे गिरे और उनकी मृत्यु हो गई। वहीं 3 अन्य कारसेवक नींव खोदते हुए मारे गए। सीमा सुरक्षा बल ने भी फायरिंग की। कारसेवा करते हुए क़रीब 11 लोग मौके पर ही मारे गए। इसके विरोध में भड़के दंगों में 35 लोग मारे गए सो अलग। क़रीब 30 शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ा।

हालाँकि, मुलायम सिंह यादव ने नवंबर 2017 में अपने 79वें जन्मदिन के मौके पर सपा कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए अपने इस कृत्य को जायज ठहराया था। मुलायम ने इस गोलीकांड के 27 वर्षों बाद कहा था कि देश की ‘एकता और अखंडता’ के लिए अगर सुरक्षा बलों को गोली चला कर लोगों को मारने भी पड़े तो ये सही था। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा था कि अगर इसके लिए और भी लोगों को मारना पड़ता तो सुरक्षा बल ज़रूर मारते। मुलायम ने गर्व के साथ आँकड़े गिनाते हुए कहा था कि इस गोलीकांड में 28 कारसेवकों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

कारसेवकों द्वारा जारी की गई सूची में 40 कारसेवकों के मारे जाने की बात कही गई थी और उनके नामों की सूची भी प्रकाशित की गई थी। मुलायम ने बताया था कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे 56 लोगों के मारे जाने की बात कही थी। वहीं वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा अपनी क़िताब ‘युद्ध में अयोध्या‘ में लिखते हैं कि उन्होंने 25 लाशें देखी थी। हालाँकि, कितने दर्जन मारे गए इसके अलग-अलग आँकड़े हैं लेकिन इतना तो ज़रूर है कि मुलायम को ‘मुल्ला’ का तमगा मिल गया। पुलिस की पाबंदियों और लाठी-गोली सहने के बावजूद कार सेवकों ने हिम्मत नहीं हारी और इन ख़बरों को सुन कर और ज्यादा रामभक्त अयोध्या पहुँचने लगे थे।

केंद्र सरकार ने 15 कारसेवकों के मारे जाने का आँकड़ा दिया था, जबकि विश्व हिन्दू परिषद ने 59 लोगों के मारे जाने की बात कही थी। 1989 में अशोक सिंघल ने राज्य सरकार से 14 कोसी परिक्रमा की इजाजत माँगी थी। इतिहास ने अपने-आप को एक बार फिर से दोहराने की कोशिश की जब 2013 में मुलायम के बेटे अखिलेश की सरकार थी और सिंघल 84 कोसी परिक्रमा की इजाजत माँगने गए। अखिलेश सरकार ने विहिप को इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया था। 14 कोसी परिक्रमा में 25 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि 84 कोसी परिक्रमा में 135 किलोमीटर की परिक्रमा होती है।

कहते हैं कि जब अयोध्या में 1990 में राम मंदिर आंदोलन जोरों पर था, तब क़रीब 10 लाख लोग कारसेवा के लिए जमा हो गए थे। मुलायम सिंह के प्रति लोगों का आक्रोश ही था कि 1991 में उनकी सरकार को जनता ने उखाड़ फेंका और भाजपा ने कल्याण सिंह के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई। अब जब अयोध्या मामले की सुनवाई ख़त्म हो चुकी है और फ़ैसला किसी भी वक़्त आ सकता है, ये याद करना ज़रूरी है कि मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए भारत के कथित सेक्युलर जमात के नेताओं ने क्या-क्या कारनामे किए हैं। और अव्वल तो ये कि प्रायश्चित के बजाय उन्होंने उसे जायज भी ठहराया है।

हेमंत शर्मा लिखते हैं कि इस गोलीकांड के बाद अयोध्या की सड़कें, छावनियाँ और मंदिर खून से सन गए थे। सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी। जब कार सेवक सड़कों पर बैठ कर रामधुन गए रहे थे, तब उन पर गोलियाँ चलवाई गईं। जब वो जन्मस्थान परिसर के पास पहुँचे भी नहीं थी, तब भी उन पर गोलियाँ चलीं। स्थानीय प्रशासन ने तरह-तरह की बातों से अपने इस कृत्य को जायज ठहराने की कोशिश की। पत्रकारों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से पूछा कि निहत्थे लोगों पर गोलियाँ क्यों चलाई जा रही हैं तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ऐसा लग रहा था जैसे उन पर ख़ून सवार हो।

आज इस घटना को 29 साल हो गए हैं और लगभग 3 दशक बीतने के बाद राम मंदिर पर फैसले की घड़ियाँ नजदीक आ रही है। जबकि, कारसेवकों के परिवार ने सीधा कहा था कि मुलायम सिंह ने उनके घर के चिराग छीन लिए और वे न्याय की आस में अभी भी भटक रहे हैं। क्या मुलायम सिंह यादव इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगेंगे? ये पाप तो ऐसा था कि माफ़ी माँग लेने से भी इसका प्रायश्चित नहीं हो सकता। लेकिन अभी जब सेकुलरिज्म का कीड़ा अपने अंधे दौर से गुजर रहा है, इसकी कोई गारंटी नहीं है कि मुलायम जैसे नेता आगे ऐसा नहीं करेंगे। इरादे वही हैं, बस चेहरे बदल गए हैं।

7 रैलियॉं और कॉन्ग्रेस को चौथे पायदान पर पहुॅंचा फिर विदेश गए राहुल गाँधी, अबकी बार इंडोनेशिया

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी फिर से विदेश दौरे पर निकल गए हैं। अबकी बार इंडोनेशिया उनका ठिकाना है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। 23 दिन के भीतर यह उनका दूसरा विदेश दौरा है। इससे पहले इसी महीने की 6 तारीख को वे थाइलैंड गए थे।

राहुल ने थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक के लिए उड़ान ऐसे वक्त में भरी थी जब महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव सिर पर थे। इसके लिए उनकी खासी आलोचना भी हुई थी। हालॉंकि कुछ दिनों बाद वे देश लौट आए थे और हरियाणा में दो तथा महाराष्ट्र में 5 चुनावी रैलियॉं भी की। दोनों ही जगह कॉन्ग्रेस सत्ता में नहीं आ पाई। हरियाणा में तो फिर भी उसका प्रदर्शन ठीकठाक रहा, लेकिन महाराष्ट्र में वह 44 सीटें लाकर चौथे स्थान पर खिसक गई। 2014 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस महाराष्ट्र में सीटों के लिहाज से तीसरे पायदान पर थी। अब वे फिर से पार्टी को मंझधार में छोड़ विदेश निकल गए हैं।

कुछ दिन पहले जब राहुल बैंकॉक गए थे तो लोगों के मन में उनके नेतृत्व को लेकर संदेह उत्पन्न हो गया था। चुनावों के समय पार्टी को मंझधार में छोड़कर जाने पर लोगों का पूछना था कि आखिर राहुल गाँधी पार्टी को लेकर फिक्रमंद हैं भी या नहीं! हालॉंकि उस वक्त भी ऐसे कॉन्ग्रेसियों की कमी नहीं थी जो चुनावी मौसम में अपने पूर्व अध्यक्ष की विदेश यात्रा का बचाव कर रहे थे।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने राहुल की बैंकॉक यात्रा का बचाव करते हुए कहा था कि क व्यक्ति के निजी जीवन और सार्वजनिक जीवन को अलग-अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा था, “एक व्यक्ति के निजी जीवन को उसके सार्वजनिक जीवन से नहीं मिलाया जाना चाहिए। हमें हर किसी की स्वतंत्रता और गोपनीयता की शाश्वत भावना से जोड़ने की आवश्यकता है।आखिरकार, यह प्रगतिशील और उदार लोकतंत्र का मूल और स्पष्ट सिद्धांत है।” पार्टी के दिग्गज नेता एके एंटनी ने भी इस यात्रा को सही ठहराते हुए कहा था कि राहुल गाँधी इस बार नई ऊर्जा के साथ लौटेंगे। वैसे, चुनाव प्रचार में ऐसा दिखा नहीं।

बता दें विपक्षी नेता राहुल गाँधी की इन विदेश यात्राओं पर जमकर निशाना साध रहे हैं। भाजपा से जुड़े नेताओं का कहना है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी वायनाड की जिम्मेदारियों से भागने का प्रयास कर रहे हैं । अमित शाह ने अभी हाल ही में पूछा था कि राहुल गाँधी अपनी विदेश यात्राओं के दौरान एसपीजी को साथ क्यों नहीं रखते, ऐसा क्या है जो वो छिपा रहे हैं।

अमरूद्दीन ने खुद को ही किया अगवा: प्रेमिका के साथ घूमते हुए 10 बार बदले सिम, फिर पैरों में ठोंक ली कील

उत्तरप्रदेश के कन्नौज में अमरुद्दीन नामक ठेकेदार के अपहरण का पूरा मामला फर्जी निकला। पुलिस ने जाँच के बाद पाया कि अमरुद्दीन ने अपने अपहरण का नाटक खुद रचा था। इसके पीछे उसका मकसद कन्नौज नगर पंचायत की चेयरपर्सन के पति मुस्ताक को फँसाना था। पुलिस के मुताबिक पूरे मामले पर अमरूद्दीन पर किसी को शक न हो, इसके लिए उसने खुद अपने पैरों पर कीलें ठोंकी और एक हफ्ते तक कई जगहों पर भटका भी रहा। बीते सोमवार पुलिस ने उसे दादरी बाईपास पर जंजीरों से बँधा पाया। उसकी शिकायत पर मुस्ताक समेत तीन लोगों के ख़िलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की।

जानकारी के मुताबिक अमरूद्दीन कन्नौज के गुरसहायगंज थाना क्षेत्र का निवासी है। सोमवार की सुबह 5 बजे पुलिस को वह बादलपुर के दादरी बाईपास पर मिला। इस दौरान उसके पैरों में कील ठुकी हुई थी, आँख पर पट्टी बंधी हुई थी और मुँह पर टेप चिपकी थी। पुलिस ने उस समय अमरूद्दीन की हालत देखकर पहले उसका अस्पताल में उपचार करवाया और बाद में उसकी शिकायत पर मुस्ताक समेत 3 पर केस दर्ज किया। हालाँकि शुरुआत में पुलिस ने उसकी बातों पर यकीन कर लिया था, लेकिन बाद में चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

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पुलिस ने जाँच में पाया कि अमरूद्दीन का 2 साल से 1.80 लाख रुपए की पेमेंट को लेकर विवाद चल रहा था। जिसके कारण उसने ये सब षडयंत्र रचा। दरअसल, मुस्ताक की पत्नी रुकसाना बेगम कन्नौज में पंचायत की अध्यक्ष हैं और नगर पंचायत ने करीब 2 वर्ष पहले टेंडर जारी करके अमरूद्दीन से अपने क्षेत्र में काम करवाया था। लेकिन ठेकेदार के मुताबिक उसे इस काम की पेमेंट नहीं मिली। जबकि चेयरपर्सन के अनुसार वे पेमेंट कर चुके हैं।

इसी विवाद के चलते 22 अक्टूबर को अमरूद्दीन घर से ये कहकर निकला कि लखनऊ जा रहा हूँ। लेकिन वह घर वापस नहीं लौटा। पुलिस ने मामले में आगे जाँच की तो पता चला कि वह अपने गाँव के एक दोस्त और प्रेमिका के साथ एक होटल में रुका था। उसके बाद वो दतिया, महाराष्ट्र, तेलंगाना गया और 10 बार सिम बदलकर अपनी पत्नी से बात की। अंत में पुलिस की नजर में आने के लिए उसने दादरी बायपास इसलिए चुना क्योंकि उसे इस क्षेत्र की जानकारी थी।

पूरी साजिश का पर्दाफाश होने के बाद अमरूद्दीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बादलपुर कोतवाली के प्रभारी पटनीश कुमार ने बताया है कि अपने अपहरण की साजिश रचने के आरोप में अमरूद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया है। पैरों में कील ठोकने वाला पत्थर, मोबाइल व सिम कार्ड बरामद कर लिया गया है।