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फडणवीस ने किसानों की समस्याओं के लिए बुलाई कैबिनेट बैठक: शिवसेना के 6 मंत्री हुए शामिल

महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक गतिरोध के बीच बुधवार (नवंबर 6, 2019) को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में शिवसेना कोटे के मंत्रीगण भी शामिल हुए। सरकार ने कहा है कि कृषि को लेकर ये बैठक बुलाई गई। इस बैठक में शिवसेना के 6 मंत्री शामिल हुए। साउथ मुंबई में स्थित सह्याद्रि गेस्ट हाउस में ये बैठक हुई, जिसमें एकनाथ शिंदे और रामदास कदम भी शामिल हुए। दोनों शिवसेना नेता महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं। 2 दिन पहले ही जब संजय राउत ने राज्यपाल से मुलाक़ात की थी, तब कदम भी उनके साथ ही थे।

बैठक के बाद रामदास कदम ने कहा कि ये बैठक किसानों की समस्याओं को लेकर हुई थी। उन्होंने कहा कि कल को कोई ये नहीं कह सकता कि शिवसेना के मंत्रियों ने किसानों के लिए हुई बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने माँग करते हुए कहा कि किसानों को 25,000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।

दोनों ही दल सरकार गठन को लेकर आमने-सामने हैं और ऐसे में शिवसेना के 6 मंत्रियों का फडणवीस की अध्यक्षता में बैठक में शामिल होना अहम है। इससे पहले शरद पवार ने शिवसेना को तगड़ा झटका देते हुए कहा कि चूँकि जनादेश भाजपा और शिवसेना को मिला है, सरकार इन दोनों दलों को ही बनाना है। एनसीपी सुप्रीमो ने साफ़ कर दिया कि उनकी पार्टी को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है और वे कॉन्ग्रेस के साथ विपक्ष की भूमिका निभाएँगे। उन्होंने शिवसेना और भाजपा से कहा कि दोनों जल्द से जल्द सरकार बनाएँ।

पवार ने शिवसेना और एनसीपी द्वारा मिल कर सरकार गठन करने की अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि इसका सवाल ही कहाँ उठता है? उन्होंने कहा कि शिवसेना और भाजपा 25 साल से गठबंधन में हैं और वे आगे भी साथ में आ सकते हैं। लिहाजा केवल एक विकल्प बचता है। भाजपा-शिवसेना मिलकर सरकार बनाएँ। इसके अलावा राष्ट्रपति शासन से बचने का कोई विकल्प नहीं है।

शरद पवार द्वारा विपक्ष में बैठने की घोषणा करने और शिवसेना मंत्रियों के राज्य सरकार की बैठक में शामिल होने को लेकर अनुमान लगाया जा रहा है कि शिवसेना के रुख में नरमी आई है। महाराष्ट्र भाजपा कोर्ट कमिटी की बैठक के बाद राज्य के वित्त मंत्री सुधीर मुंगन्टीवार ने कहा था कि जल्द ही कोई गुड़ न्यूज़ मिलेगा। उधर अहमद पटेल ने भी नितिन गडकरी से मुलाक़ात की थी लेकिन उन्होंने इसे किसानों के मुद्दे से जुड़ी बैठक बताया था।

चार्ल्स ने फेसबुक पर PM मोदी की तस्वीर से किया ख़िलवाड़: मिली 1 साल सोशल मीडिया से दूर रहने की ‘सजा’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महीने पहले डॉक्टर्ड तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करने के इल्जाम में कन्याकुमारी जिले के निवासी जेबिन चार्ल्स को 1 साल तक सोशल मीडिया से दूर रहने की सजा मिली है। इसके लिए जेबिन ने खुद सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ में लिखित हलफनामा दिया। साथ ही कोर्ट ने चार्ल्स से उनकी गलती के लिए लिखित माफीनामा भी माँगा।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जीआर स्वामीनाथान ने चार्ल्स को आगाह किया कि अगर इस एक साल के बीच वे सोशल मीडिया इस्तेमाल करते पाए गए, तो उनकी जमानत याचिका को रद्द करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट का रुख किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि चार्ल्स ने एक माह पूर्व फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक डॉक्टर्ड तस्वीर डाली थी। जिसे अगले दिन देखते ही भाजपा पदाधिकारी नांजिल राजा ने उनके ख़िलाफ़ वाडसरी पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

इसके बाद 11 अक्टूबर को उनपर आईपीसी की धारा 505 (2) और आईटी एक्ट 2000 की धारा 67 बी के तहत मुकदमा दर्ज हुआ और अग्रिम जमानत के लिए चार्ल्स को हाइकोर्ट का रुख करना पड़ा।

कोर्ट में चार्ल्स ने अपने बचाव में तर्क देते हुए सुप्रीम कोर्ट की कही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि पब्लिक फोरम पर अपनी राय रखना कोई अपराध नहीं हैं।

हालाँकि, आवेदन में चार्ल्स ने अपनी हरकत पर खेद व्यक्त किया और कहा कि उसे ये एहसास हो गया था कि किसी भी नागरिक के पास प्रधानमंत्री का अपमान करने का अधिकार नहीं हैं। इसलिए तुरंत उसने उस पोस्ट ब्लॉक कर दिया। बता दें कि चार्ल्स ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वे स्थानीय अखबार में भी माफीनामा छपवाने के लिए तैयार हैं।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी: निगमकर्मियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, मंत्री का पोस्टर हटाने से थे नाराज़

मध्य प्रदेश के इंदौर में कमलनाथ के मंत्री तुलसी सिलावट के समर्थकों ने भारी गुंडागर्दी मचाई। उन्होंने न सिर्फ़ नगर निगम के कर्मचारियों को पीटा, बल्कि अधिकारियों के साथ भी धक्का-मुक्की और गाली-गलौज किया। दरअसल, इंदौर को स्वच्छता के मामले में लगातार चौथी बार नंबर वन सिटी बनाने के लिए शहर के सारे राजनीतिक पोस्टर-बैनरों को हटाया जा रहा है। नगर निगम ने इसके लिए अभियान चला रखा है और इसी क्रम में मंगलवार (नवंबर 5, 2019) को ये घटना हुई। ये घटना अमला रेजीडेंसी एरिया में हुई, जहाँ ‘राहुल सिलावट मित्र मंडल’ के नाम से पोस्टर-बैनर लगे हुए थे। सिलावट राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हैं।

कॉन्ग्रेस नेता तुलसी सिलावट को उनके समर्थक ‘तुलसी भैया’ के नाम से भी जानते हैं। ये पोस्टर-बैनर उनके जन्मदिन के अवसर पर लगाए गए थे। सिलावट का बँगला भी पास में ही है। जैसे ही उनके समर्थकों को इस बात की जानकारी मिली, वो लाठी-डंडों के साथ वहाँ पहुँच गए और कार्रवाई कर रहे कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ बदतमीजी पर उतर आए। उन्होंने नगर निगम के उपायुक्त महेंद्र सिंह चौहान के साथ न सिर्फ़ धक्का-मुक्की की बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों व अधिकारियों को गालियाँ भी बकी।

इसके बाद मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट के समर्थकों ने सरकारी गाड़ियों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। जब इतने पर भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ तो उन्होंने नगर निगम के कर्मचारियों को दौड़ा-दौड़ा कर लाठी-डंडे से पीटा। उपायुक्त महेंद्र चौहान ने कहा कि उन्होंने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है क्योंकि धमकी की बातें उनके कर्मचारियों ने सुनी, उन्होंने नहीं। वहीं तुलसी बाद में किरकिरी से बचने के लिए सफाई देते हुए कहा कि वो तो अपना जन्मदिन भी नहीं मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके नाम का बैनर-पोस्टर लगा है, इसकी उन्हें जानकारी भी नहीं थे। मंत्री ने कहा कि अगर किसी ने मारपीट की है तो उसपर कार्रवाई हो।

स्थानीय लोगों ने बताया है कि जिस दिन ये घटना हुई, उसी दिन मंत्री सिलावट भी यहाँ आए थे। उनके जाने के कुछ ही देर बाद ये घटना हुई। कॉन्ग्रेस नेता सिलावट ने यहाँ आकर अपने समर्थकों के साथ बातचीत की थी और उनके जाने के बाद नगर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ गुंडागर्दी की गई।

महापौर मालिनी गौड़ ने कहा कि ये राज्य कैबिनेट का ही फ़ैसला है कि अगर राजनीतिक बैनर-पोस्टर लगे हुए हैं तो उन्हें हटाया जाना चाहिए। निगम आयुक्त ने कहा कि जाँच के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि वीडियो फुटेज देख कर आरोपितों की पहचान की जा रही है। जिस इलाक़े में ये घटना हुई, वहाँ मंत्री सिलावट के साथ-साथ कलेक्टर, कमिश्नर और हाईकोर्ट के न्यायाधीश का भी आवास स्थित है।

करतारपुर कॉरिडोर के वीडियो में भिंडरावाला: बोले अमरिंदर- पाकिस्तान की नीयत पर पहले से ही था शक

पंजाब के मुख्यमंत्री और पूर्व वायु सैनिक कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने इसी शनिवार (9 नवंबर, 2019) को खुलने जा रहे करतारपुर कॉरिडोर के वीडियो में दिवंगत खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाला को दिखाए जाने पर पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले दिन से इस प्रोजेक्ट को लेकर पाकिस्तान की मंशा पर शक था और वे लगातार इस बारे में चेतावनी भी दे रहे थे। गौरतलब है कि पाकिस्तान की सरकार के करतारपुर कॉरिडोर के बारे में जारी आधिकारिक वीडियो में खालिस्तानी आतंकवादी और पाकिस्तान की तर्ज पर भारत से अलग सिख प्रभुत्व वाला देश खालिस्तान बनाने की मुहिम का अहम किरदार रहे जरनैल सिंह भिंडरावाला को भी दिखाया गया है।

सन 1984 में जब पाकिस्तान की सेना और आईएसआई की शह पर भिंडरावाला की आतंकी गतिविधियाँ पूरी तरह असहनीय हो गईं थीं तो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने उसे काबू में करने के लिए पंजाब के श्री हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) गुरुद्वारा में सेना भेजी थी। ऑपरेशन ब्लू स्टार नाम से हुई इस कार्रवाई में सेना, बीएसफ, सीआरपीएफ और पंजाब पुलिस ने भिंडरावाला और उसके साथियों को मार गिराया और स्वर्ण मंदिर को आज़ाद कराया था।

कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हालाँकि बाकी सिखों की तरह वह भी करतारपुर साहिब गुरुद्वारा में नतमस्तक होने के बारे में सोचकर बहुत खुश हैं, और यह हमेशा ही उनके अरदास का हिस्सा रहा है, लेकिन उनको अभी भी पाकिस्तान की मंशा पर शक है। उनका कहना है कि कॉरिडोर खोलने के पीछे आईएसआई का एजेंडा हो सकता है।

उन्होंने आशंका जाहिर करते हुए कहा था कि इसका उद्देश्य जनमत-संग्रह 2020 नामक खालिस्तानी अलगाववादी और आतंकवादी मूवमेंट के लिए सिख भाईचारे को प्रभावित करना हो सकता है, जिसे सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के अंतर्गत बढ़ावा दिया जा रहा है। कॉन्ग्रेस नेता का कहना है कि पाकिस्तान द्वारा कॉरिडोर और गुरु नानक के नाम पर यूनिवर्सिटी शुरू करने जैसे फैसलों पर भारत को पूरी तरह से सतर्क और सक्रिय रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि इनके पीछे छिपे एजेंडे को भी ध्यान से परखने की जरूरत है। भारत को इस मामले में पाकिस्तान के सिर्फ चेहरे पर नहीं जाना चाहिए, सभी चीजों को समग्र तौर पर लेना चाहिए। कैप्टन ने करतारपुर कॉरिडोर का सियासीकरण करने की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह सिख पंथ के महान संस्थापक गुरु नानक देव की विचारधारा के विरुद्ध है।

उन्होंने ज़ोर देकर कहा था कि इनके पीछे छिपे एजेंडे को भी ध्यान से परखने की जरूरत है। भारत को इस मामले में पाकिस्तान के सिर्फ चेहरे पर नहीं जाना चाहिए, सभी चीजों को समग्र तौर पर लेना चाहिए। 

37 पादरियों ने उठाई पोप फ्रांसिस से बिशप को हटाने की माँग: यौनाचार, शादी से लेकर पिता बनने का है इल्जाम

कर्नाटक के मैसूर में अलग-अलग जगहों से करीब 37 पादरियों ने मिलकर वैटिकन में पोप फ्रांसिस के पास मैसूर के बिशप के. ए. विलियम को उनके पद से हटाने की माँग उठाई है। बिशप पर शादी करने, पिता बनने, यौन संबंध बनाने और भ्रष्टाचार करने जैसे आरोप हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पोप फ्रांसिस को लिखे गए पत्र में बिशप पर ओडीपी में बतौर स्टाफ कार्यरत एक ऐसी महिला से शादी करने का आरोप हैं। जिसकी पूर्व में अपने पहले पति से एक बेटी थी और बाद में बिशप से संबंधों के कारण एक बेटा भी हुआ। पादरियों का आरोप है कि बिशप अब भी इसी महिला के साथ रहते है और दोनों बच्चों समेत उसकी देख-रेख करते है।

इसके अलावा इस पत्र में पादरियों ने बिशप पर बहुत सारे यौन संबंध और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में भी आरोप मढ़ा। इसमें से एक में बताया गया कि हिंकल में जब बिशप विलियम पादरी थे, तब उनके संबंध एक एंग्लो-इंडियन महिला से थे। इस बीच वो महिला गर्भवती भी हुई थी और उसने भी एक बच्चे को जन्म दिया था। लेकिन बाद में दोनों विदेश चले गए। इस मामले का खुलासा खुद बिशप के घर में काम करने वाले कर्मचारियों ने किया था।

पादरियों ने अपने पत्र में सभी मामलों का उल्लेख करते हुए कहा, “ये एक घिनौना सच है कि जिन महिलाओं ने बिशप के अंतर्गत काम किया। बिशप ने उसके साथ संबंध बनाए। उन्हें बहु-मंजिला इमारतों और Diocesan संस्थानों में नौकरी के अवसर सहित सभी सुविधाएँ प्रदान करके जीवन की हर विलासिता दी गई।”

इतना ही नहीं, पादरियों का कहना है कि बिशप ने कैंपस में साफ-सफाई करने वाली मुलाजिम लड़कियों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा। इसके अलावा उनपर धारा 406, 420, 504, 506, 323 के तहत दर्ज कई आपराधिक मामलों का भी इसमें जिक्र हुआ।

पोप को लिखे गए पत्र में अवैध भूमि सौदे के मामले को भी उजागर किया गया और साथ ही एक केस के बारे में बताया गया। जिसमें बिशप ने एलेक्स नामक व्यक्ति को पादरी होने के बावजूद बुरी तरह मारा था और बाद में इससे बचने के लिए बिशप ने एलेक्स को बहुत बड़ी रकम दी थी।

यहाँ बता दें कि इस पूरे मामले के संबंध में बिशप विलियम ने अपने ऊपर लगे सभी इल्जामों को खारिज किया है और कहा कि शिकायतकर्ताओं ने उन्हें संपर्क करके मामले पर बातचीत करने तक की कोशिश नहीं की। उनका दावा है कि इन सभी आरोपों से न केवल उनकी प्रतिष्ठा बल्कि ईसाई समुदाय की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुँची हैं।

नेहरू मेमोरियल पर अब नहीं रहा कॉन्ग्रेसियों का कब्जा, अमित शाह की एंट्री

नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी (एनएमएमएल) सोसायटी का केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने पुनर्गठन किया है। इसके तहत कॉन्ग्रेस के नेताओं को सोसायटी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। जिन लोगों की एंट्री हुई है उनमें केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शामिल हैं।

कॉन्ग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा है, “ये दुर्भाग्य है कि सरकार हर चीज़ को राजनैतिक रूप से ले रही है। ये फैसला सिर्फ़ इसलिए लिया गया क्योंकि वे पैनल में अपने लोगों को चाहते थे।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब नेहरू मेमोरियल कॉन्ग्रेस मुक्त हो गया है। सोसायटी में भाजपा नेता अनिर्बान गांगुली, गीतकार प्रसून जोशी और पत्रकार रजत शर्मा को भी जगह दी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके अध्यक्ष हैं।

बता दें कि संस्कृति मंत्रालय ने सोसायटी का पुनर्गठन करते हुए जिन कॉन्ग्रेस नेताओं को बाहर किया है उनमें मल्लिकार्जुन खड़गे, कर्ण सिंह और जयराम रमेश शामिल हैं।

सोसायटी के उपाध्यक्ष राजनाथ सिंह हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को भी सदस्य बनाया गया है। 5 नवंबर को इस संबंध में संस्कृति मंत्रालय की ओर से नोटिफिकेशन जारी किया गया था।

महाराष्ट्र: पवार ने शिवसेना को किया निराश, कहा- कॉन्ग्रेस के साथ विपक्ष में बैठेंगे

महाराष्ट्र में बीजेपी के बिना ​सरकार बनाने की शिवसेना की मुहिम को तगड़ा झटका लगा है। बड़ी उम्मीदों के साथ बुधवार को शिवसेना सांसद संजय राउत ने एनसीपी के मुखिया शरद पवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद पवार ने मीडिया के साथ बात करते हुए तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि एनसीपी अपने सहयोगी कॉन्ग्रेस के साथ विपक्ष में बैठेगी। राष्ट्रपति शासन से बचने का एकमात्र विकल्प यह है कि भाजपा के साथ मिलकर शिवसेना सरकार बनाएँ।

लेकिन, इस मुलाक़ात के तुरंत बाद शरद पवार ने शिवसेना को तगड़ा झटका देते हुए कहा कि चूँकि जनादेश भाजपा और शिवसेना को मिला है, सरकार इन दोनों दलों को ही बनाना है। एनसीपी सुप्रीमो ने साफ़ कर दिया कि उनकी पार्टी को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है और वे कॉन्ग्रेस के साथ विपक्ष की भूमिका निभाएँगे। उन्होंने शिवसेना और भाजपा से कहा कि दोनों जल्द से जल्द सरकार बनाएँ।

पवार ने शिवसेना और एनसीपी द्वारा मिल कर सरकार गठन करने की अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि इसका सवाल ही कहाँ उठता है? उन्होंने कहा कि शिवसेना और भाजपा 25 साल गठबंधन में हैं और वे आगे भी साथ में आ सकते हैं। लिहाजा केवल एक विकल्प बचता है। भाजपा-शिवसेना मिलकर सरकार बनाएँ। इसके अलावा राष्ट्रपति शासन से बचने का कोई विकल्प नहीं है।

संजय राउत ने एनसीपी सुप्रीमो के बारे में बात करते हुए कहा कि वो राज्य के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से हैं। बकौल राउत, पवार महाराष्ट्र की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर ख़ासे चिंतित हैं। शिवसेना नेता ने बताया कि मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर उनके और एनसीपी संस्थापक के बीच संक्षिप्त बातचीत हुई। राउत ने सरकार गठन को लेकर भाजपा से बातचीत के बारे में बोलते हुए कहा कि जो भी बातचीत होगी, वो 50-50 फॉर्मूले के आधार पर होगी। शिवसेना चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद से लगातार 50-50 की बात कर रही और ढाई साल के लिए सीएम पद मॉंग रही है।

उधर, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल ने मुलाक़ात की। गडकरी का नाम कल से ही चर्चा में है, क्योंकि शिवसेना ने संघ प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिख कर उनसे मध्यस्थता कराने की माँग की थी। शिवसेना नेता किशोर ने दावा किया कि गडकरी 2 घंटे में भाजपा-शिवसेना के बीच विवाद को सुलझा सकते हैं। हालाँकि, गाँधी परिवार के क़रीबी अहमद पटेल ने कहा कि गडकरी से मुलाक़ात के दौरान महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई। पटेल ने कहा कि ये पॉलिटिकल मीटिंग नहीं थी। उन्होंने कहा कि वो किसानों के मुद्दों को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिलने गए थे।

शिवसेना नेता संजय राउत अपनी पार्टी के रुख पर लगातार अड़े हुए हैं। उन्होंने कहा है कि जब पूरा समझौता ही सिर्फ़ एक लाइन का था तो अब कोई नया प्रस्ताव आ ही नहीं सकता। उन्होंने कहा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच कि सीएम पद को लेकर 50-50 की सहमति बन गई थी। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति शासन लगने की अटकलों का जवाब देते हुए कहा कि अगर ऐसा होता है तो ये राज्य के जनादेश का अपमान होगा। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा की 105 और शिवसेना की 56 सीटें हैं।

भारत में आत्मघाती हमले की फिराक में था ISIS-K, बढ़ते खतरों को लेकर अमेरिका ने किया आगाह

खूँखार आतंकी संगठन आईएसआईएस का मुखिया बगदादी भले ही मारा गया हो, लेकिन उसके संगठन के अन्य आतंकी अभी भी सक्रिय हैं। ये परेशानी का सबब भी बन सकते हैं।आईएसआईएस का एक खोरासन समूह है, जो अफ़ग़ानिस्तान से ऑपरेट होता है। इसे आईएसआईएस-के भी कहा जाता है। अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों ने जानकारी दी है कि दक्षिण एशिया में आतंक फैलाने की मंशा रखने वाले आईएसआईएस-के ने पिछले साल भारत में आत्मघाती हमले का प्रयास किया था। अमेरिका के ‘काउंटर टेररिज्म सेंटर’ के नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर रसेल ट्रैवर्स ने मंगलवार (नवंबर 5, 2019) को इस बाबत जानकारी दी।

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि पूरी दुनिया में आईएसआईएस की 20 से भी अधिक शाखाएँ सक्रिय हैं। इनमें आईएसआईएस-के सबसे ज्यादा खूँखार है। आईएसआईएस के इस समूह में 4,000 आतंकियों के शामिल होने की आशंका है। ट्रैवर्स ने भारतीय मूल की सीनेटर मैगी हसन के सवालों का जवाब देते हुए ये बातें कही। आईएसआईएस-के ने अफ़ग़ानिस्तान से बाहर पाँव फैलाने के लिए कई देशों में आत्मघाती हमलों की योजना बनाई थी। इसी क्रम में उन्होंने भारत में आत्मघाती आतंकी हमला करने का प्रयास भी किया था।

हसन पिछले महीने अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के दौरे पर थीं। वहाँ उन्होंने पाया कि अमेरिकी सेना सबसे ज्यादा आईईआईएस-के को लेकर चिंतित है। इस संगठन का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है और उनके मंसूबे खतरनाक हैं। आईएसआईएस के इस अफ़ग़ानिस्तान ब्रांच को लेकर चिंतित होने की एक वजह ये भी है कि ये संगठन न सिर्फ़ दक्षिण एशिया, बल्कि अमेरिका कोई धरती को दहलाने के लिए भी साजिश रच रहा है। आईएसआईएस की 20 शाखाओं में से कई अपने आतंकी मंसूबों को कामयाब बनाने के लिए ड्रोन का सहारा ले रहे हैं।

आईएसआईएस-के ने 2 साल पहले न्यूयॉर्क में आतंकी हमले की साजिश रची थी, लेकिन ऐन मौके पर अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफबीआई ने इस साजिश को नाकाम कर दिया। 2017 में स्टॉकहोम में आतंकी हमला हुआ था, जिसमें 5 लोग मारे गए थे। सीरिया और इराक में भले ही अमेरिका ने आईएसआईएस की कमर तोड़ दी हो, लेकिन उसका नेटवर्क इतना ज्यादा फैला हुआ है कि ये आतंकी संगठन शायद ही शांत बैंठे। ट्रैवर्स ने बताया है कि 9/11 आतंकी हमले के समय जितने कट्टरपंथी आतंकी थे, आज उनकी संख्या उससे कई गुना ज्यादा हो गई है। आज इन आतंकी संगठनों में जो आतंकी हैं, उनके मन में कट्टरता और घृणा की भावना उस समय से काफ़ी ज्यादा है।

अमेरिका की चिंता ये है कि आतंकियों से तो सेना और ख़ुफ़िया विभाग निपट लेगा, लेकिन उनकी कट्टरपंथी विचारधारा से निपटने में ये संसाधन काम नहीं आएँगे। आतंकी कट्टरवाद से लड़ने के लिए अमेरिका को नए मैकेनिज्म पर काम करने की ज़रूरत है, ऐसा वहाँ के अधिकारियों व नेताओं का मानना है। अलकायदा का हक्कानी नेटवर्क भी चिंता का सबब बना हुआ है, जो अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में अमेरिकी सुरक्षा बलों को निशाना बनता रहता है।

‘रवीश कुमार के फैन’ ने दी सिखों के नरसंहार की धमकी, मोदी समर्थक महिलाओं को करता है प्रताड़ित

सोशल मीडिया पर असामाजिक तत्वों द्वारा लगातार बेख़ौफ़ होकर धमकी देने का सिलसिला थमता नहीं दिख रहा है। हाल ही में अबसार ख़ान का मामला सामने आया था, जिसनें भगवान राम और माँ सीता के लिए अपशब्दों का प्रयोग किया था। अब एक ‘डॉक्टर अरुण जे’ नामक व्यक्ति ने 1984 सिख नरसंहार दोहराने की चेतावनी दी है। उसने सिखों को ‘खालिस्तानी आतंकी’ बताते हुए धमकाया है कि 1984 में जो भी बच गए, उनका सब सफाया कर दिया जाएगा।

अरुण जे का सिख नरसंहार की धमकी वाले ट्वीट का स्क्रीनशॉट, जो उसके अकाउंट डिलीट करने के बाद ट्विटर से गायब हो गया

दरअसल, यह सब शुरू हुआ तजिंदर बग्गा के एक ट्वीट से। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता ने दिलीप सी मंडल के प्रोपगेंडा का जवाब देते हुए उनसे पूछा कि वो नक़ल कर के प्रोफेसर बने हैं या फिर पढ़ कर? बस इतनी सी बात से ख़ुद को ‘रवीश कुमार का फैन’ बताने वाला अरुण नाराज़ हो गया और उसने नरसंहार दोहराने की धमकी दी। दिलीप मंडल ट्विटर को दलित विरोधी बताते हुए उसका ख़िलाफ़ ‘जय भीम ट्विटर’ अभियान चला रहे हैं, जिसमें उन्हें कॉन्ग्रेस का भी समर्थन मिला है। नीचे आप अरुण का धमकी भरा ट्वीट देख सकते हैं:

रवीश कुमार हमेशा आरोप लगाते हैं कि सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फॉलो किए जाने वाले लोग माहौल को बिगाड़ रहे हैं। साथ ही वो किसी के भाजपा कनेक्शन को लेकर भी उस पर निशाना साधते हैं। वो सीधा भाजपा पर आरोप लगाते हैं कि वो असामाजिक तत्वों को शह दे रही है। हालाँकि, ख़ुद को ‘रवीश कुमार का फैन’ बताने वाले व्यक्ति की नरसंहार वाली धमकी को लेकर वह अपना रुख स्पष्ट करते हैं या नहीं, इसका इंतजार है। नीचे आप डॉक्टर अरुण जे का ट्विटर बॉयो देख सकते हैं:

ख़ुद को ‘रवीश कुमार का फैन’ बताता है डॉक्टर अरुण जे, देखें उसका बायो

अरुण जे पर कुछ महिलाओं ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसके बारे में पता चला है कि वो कई महिलाओं के साथ सिर्फ़ इसलिए दुर्व्यवहार करता है, क्योंकि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फैन हैं। श्रुति नागपाल नामक महिला ने आरोप लगाया कि उसने उनके साथ बदतमीजी की। इतना ही नहीं, श्रुति ने बताया कि अरुण उनके कई साथी महिलाओं को भी प्रताड़ित कर चुका है। उन्होंने कहा कि अरुण यह सब सिर्फ़ इसलिए करता है, क्योंकि वे महिलाएँ पीएम मोदी की समर्थक हैं।

अरुण जे की इस धमकी से आहत तेजिंदर बग्गा ने दिल्ली पुलिस से उस पर कार्रवाई करने की शिकायत की। बग्गा ने दिल्ली पुलिस से अनुरोध किया कि इस ट्विटर हैंडल पर कार्रवाई की जाए। हालाँकि, अभी तक इस सम्बन्ध में दिल्ली पुलिस का कोई जवाब नहीं आया है। इधर अरुण जे ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया। जब उसने देखा कि लोग उसके विरोध में उतर आए हैं, तो उसने अपना अकाउंट डिलीट कर दिया। उसके अकाउंट की जगह अब ये मैसेज दिख रहा है:

अरुण जे ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर लिया और भाग खड़ा हुआ

ऐसा प्रतीत होता है कि ख़ुद को रवीश का फैन बताने वाला अरुण पुलिस के डर से ट्विटर छोड़ कर भाग खड़ा हुआ, क्योंकि उसकी सारी करतूतें एक-एक कर के सामने आ रही थीं और लोग दिल्ली पुलिस को टैग कर के उस पर कार्रवाई की माँग कर रहे थे।

GCTOC पर 16 साल बाद मुहर: मोदी के सीएम रहते 2 बार लौटा दिया गया था बिल

गुजरात आतंकवाद नियंत्रण एवं संगठित अपराध (जीसीटीओसी) बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंजूरी दे दी है। गुजरात की बीजेपी सरकार ने मार्च 2015 में में कुछ संशोधनों के साथ इस बिल को पारित किया था। राष्ट्रपति द्वारा इसे मंजूरी मिलने की जानकारी गुजरात के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने दी है। पहले इस बिल का को गुजरात संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक (जीयूजेसीओसी) नाम दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तब दो बार इस बिल को मंजूरी नहीं मिल पाई थी।

जडेजा ने कहा कि इस बिल पर राष्ट्रपति की मुहर लगने के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी का सपना पूरा हुआ है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्‍यमंत्री रहते राज्‍य के नागरिकों की सुरक्षा के लिए इस कानून का मसौदा तैयार किया था। 16 साल बाद इसे मंजूरी मिल सकी है।”

इस कानून की खासियत यह है कि टैप की हुई टेलीफोन बातचीत को अब एक वैध सबूत माना जाएगा। इससे शराब की तस्करी, फिरौती, जालसाजी जैसे संगठित अपराधों पर शिकंजा कसने की उम्मीद है।

जडेजा ने बताया कि अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने से गुजरात जैसे सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा और अपराध की जाँच के लिए पुलिस को अधिक अधिकार और समय मिल सकेगा। राज्य सरकार विशेष अदालतों का गठन करेगी और डिविजन सेशन कोर्ट में मामला चल सकेगा। इसके अलावा सरकार अतिरिक्त सरकारी वकील और लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर सकेगी।

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते 2003 में पहली बार यह बिल पास किया गया था। इसके बाद से ही यह विधेयक लंबित था। तीन बार राष्ट्रपति ने इसे लौटाया था। दो बार नरेंद्र मोदी के गुजरात सीएम रहते हुए और तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री रहते हुए।

सबसे पहले संचार अवरोधन के प्रावधान का हवाला देकर तात्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने इस पर असहमति दिखाई थी और फिर साल 2008 में पूर्व राषट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इसे वापिस कर दिया था।

तीसरी बार साल इस विधेयक को राज्य सरकार ने गुजरात आतंकवाद नियंत्रण एवं संगठित अपराध अधिनियम नाम से विधानसभा से पारित कराया, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस कर दिया। गृह राज्यमंत्री के अनुसार, “ये कानून गुजरात में आतंकवादी गतिविधि पर पूर्ण विराम लगाने में मदद करेगा और साथ ही 1,600 किलोमीटर के समुद्री तट की सुरक्षा में मदद करेगा … यह कानून पुलिस अधिकारियों को अधिक अधिकार देगा।”

इसके अलावा इस कानून के तहत पुलिस अधिकारी के समक्ष दिया गया बयान सबूत के रूप में मान्‍य होगा और पुलिस को आरोप-पत्र पेश करने के लिए छह माह ( करीब 180 दिन) का समय मिलेगा। बता दें अन्‍य अपराध में चार्जशीट 90 दिन में पेश करने का प्रावधान होता है।