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भगवान भी इनफ़ोसिस के आँकड़े नहीं बदल सकता: चेयरमैन नंदन नीलकेणी

भारत की अबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार इनफ़ोसिस ने आज (बुधवार, 6 नवंबर, 2019 को) “शरारती आरोपों” की कड़ी निंदा की है। कम्पनी के सह-संस्थापकों और पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ अनाम स्रोतों से यह आरोप लगाए गए थे। स्टॉक एक्सचेंजों बीएसई (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, सेंसेक्स) और निफ्टी (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज, एनएसई) को दिए गए बयानों में कम्पनी ने कहा है, “इनफ़ोसिस हालिया विसलब्लोअर की शिकायतों में सह संस्थापकों और पूर्व सहकर्मियों के खिलाफ लगे शरारती आरोपों की कड़ी निंदा करता है।”

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इनफ़ोसिस के चेयरमैन नंदन नीलकेणी ने कहा, “यह अटकलें दुःखद हैं, और इनका निशाना सबसे सफल और सम्मानित लोगों में से कुछ की छवि को खराब करना था। हमारे सभी सह संस्थापकों के ज़िंदगी भर के कंट्रीब्यूशन के लिए मेरे मन में गहरा सम्मान है। मैंने यह संस्थान बनाया है और इस कम्पनी को निस्वार्थ रूप से सेवा की है और आज भी इनफ़ोसिस की दीर्घकालिक सफलता के लिए प्रतिबद्ध हूँ।”

कम्पनी के कथन में यह भी जिक्र है कि उसने एक बाहरी लॉ फर्म को भी हायर किया है। उसका काम विसलब्लोअर की शिकायतों की एक स्वतंत्र जाँच करने का होगा। वह लॉ फर्म “जाँच के नतीजों को एक उचित समय पर सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ साझा करेगी।”

बाद में नीलकेणी ने एनालिस्ट्स को अलग से भी सम्बोधित किया। एक कांफ्रेंस कॉल में एनालिस्ट्स को सम्बोधित करते हुए नीलकेणी ने कहा, “इनफ़ोसिस के पास सशक्त प्रक्रियाएँ हैं, और यहाँ तक कि खुद भगवान भी इस कम्पनी के नंबरों में बदलाव नहीं कर सकते। हमारी फाइनेंस टीम इन आरोपों से अपमानित महसूस कर रही है। लेकिन मैं जाँच प्रक्रिया को पक्षपाती (बायस) नहीं करना चाहता।”

इनफ़ोसिस ने परसों (सोमवार, 4 नवंबर, 2019 को) कहा था कि उसे अब तक गुप्त शिकायतों के पक्ष में कोई सबूत नहीं मिले हैं। विसलब्लोअर की शिकायतों में कहा गया था कि कंपनी का चोटी का मैनेजमेंट कथित अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल करता था। “विसलब्लोअर की शिकायतों के विषय में आज की तारीख तक ऐसा कोई प्राथमिक सबूत (प्राइमा फेसी एविडेंस) कम्पनी को प्राप्त नहीं हुआ है जिससे किसी भी आरोप की पुष्टि हो सके।” इनफ़ोसिस ने निफ्टी को बताया। सेंसेक्स में इनफ़ोसिस के शेयर बुधवार को दो प्रतिशत ऊपर चढ़े।

‘पानी की तरह है भाजपा-शिवसेना का रिश्ता, कोई कितनी भी कोशिश करे अलग नहीं कर सकता’

महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा है कि भाजपा और शिवसेना का रिश्ता पानी की तरह है। उन्होंने पानी का उदाहरण देते हुए पूछा कि कितनी भी कोशिश कर ले, कोई इसे अलग कर सकता है क्या? महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष रह चुके मुनगंटीवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद बताया कि किसानों के मुद्दे पर बुलाई गई ये बैठक सफल रही। साथ ही उन्होंने कहा कि इन्तजार कीजिए क्योंकि कभी भी शुभ समाचार मिल सकता है। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा और शिवसेना मिल कर सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है।

कैबिनेट की बैठक में शिवसेना के 6 मंत्री भी शामिल हुए। मंत्री रामदास कदम ने कहा कि चूँकि मुद्दा किसानों को लेकर था, इसीलिए वो लोग शामिल हुए। शिवसेना नेता ने कहा कि कल को कोई ये नहीं कह सकता कि कृषि से जुड़े मसलों पर बुलाई गई बैठक में शिवसेना ने भाग नहीं लिया। 1 दिन पहले भी मुनगंटीवार ने कहा था कि सरकार भाजपा की ही होगी और इसमें कोई ‘अगर-मगर’ की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी शिवसेना का इन्तजार करेगी।

इससे पहले शरद पवार के बयान से शिवसेना को झटका लगा था। पवार ने साफ़ कर दिया था कि भाजपा और शिवसेना को ही जनादेश मिला है और उन्हें ही सरकार बनाना है। साथ ही एनसीपी सुप्रीमो ने विपक्ष में बैठने की घोषणा कर दी। पवार ने जब ये बयान दिया, उससे कुछ देर पहले ही शिवसेना नेता संजय राउत ने उनसे मुलाक़ात की थी। राउत ने कहा था कि बैठक के दौरान राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को लेकर चर्चा हुई और वरिष्ठ नेता पवार इसे लेकर चिंतित हैं।

भाजपा के मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने भी कहा कि भाजपा और शिवसेना को ही सरकार बनाने का जनादेश मिला है और दोनों पार्टियाँ मिल कर सरकार बनाएँगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के दरवाजे शिवसेना के लिए हमेशा के लिए खुले हैं। इसी बीच मंगलवार (नवंबर 5, 2019) की रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरसंघचालक मोहन भागवत से भी मुलाक़ात की। उधर कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल ने भी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाक़ात की। हालाँकि, उन्होंने कहा कि ये राजनीतिक मुलाक़ात नहीं थी।

10 किलो वजन कम हो गया है, जमानत दे दीजिए: सिख नरसंहार के गुनहगार सज्जन कुमार ने SC में लगाई गुहार

कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। 1984 सिख नरसंहार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सज्जन कुमार ने स्वास्थ्य का हवाला देकर जमानत मॉंगी थी। जस्टिस एसए बोबडे, एसए नजीर और कृष्ण मुरारी की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए एम्स से कॉन्ग्रेसी नेता के स्वास्थ्य को उचार सप्ताह में रिपोर्ट मॉंगी है।

सज्जन कुमार के वकील विकास सिंह ने कोर्ट में सज्जन कुमार के ‘ख़राब स्वास्थ्य’ का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार का वजन 10 किलो कम हो गया है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वजन कम हो जाना कोई बीमारी नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट एम्स से रिपोर्ट मिलने के बाद इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा। पिछले साल 18 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत के 2013 के फैसले काे पलटते हुए सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

जब सज्जन कुमार के वकील ने उनके ‘ख़राब स्वास्थ्य’ की बात की तो जस्टिस बोबडे ने पूछा कि आखिर उन्हें बीमारी कौन सी है? इसके जवाब में वकील विकास सिंह ने बताया कि सज्जन कुमार का वजन 10 किलो कम हो गया है। इसके बाद जस्टिस बोबडे ने कहा कि अगर सज्जन कुमार चाहते हैं कि उनका मेडिकल एग्जामिनेशन हो तो कोर्ट उसके लिए आदेश दे देगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो सज्जन कुमार के स्वास्थ्य का ध्यान रख रहा है। जस्टिस बोबडे ने कहा- ‘आप जहाँ भी रहें, स्वस्थ रहने चाहिए।‘

1984 में हुए सिख नरसंहार मामले में जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार सहित कई नेता अदालत की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ पर भी गंभीर आरोप लगते रहे हैं। गाँधी परिवार के वफादार रहे सज्जन कुमार 2004 में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह को हरा कर तीसरी बार सांसद बने थे।

वकीलों के खिलाफ FIR की अनुमति नहीं: हाई कोर्ट ने ठुकराई दिल्ली पुलिस की याचिका

वकीलों और पुलिस के बीच दिल्ली में पिछले चार दिनों से चल रहे संघर्ष में एक बड़ा फैसला देते हुए कोर्ट ने वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। यह फैसला अदालत ने साकेत कोर्ट वाली घटना में दिया है, जिसके एक चर्चित वीडियो में कुछ वकील एक पुलिस वाले के साथ हाथापाई करते देखे जा सकते हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने 3 नवंबर के अपने आदेश के बारे में कोई स्पष्टीकरण देने से भी इंकार करते हुए उसे स्वतः स्पष्ट (सेल्फ एक्सप्लनेटोरी) बताया है।

इसके अलावा बार काउन्सिल ऑफ़ इंडिया ने बड़ा बयान दिया है। काउन्सिल ने दिल्ली पुलिस के हड़ताली कर्मचारियों को ‘बेकाबू भीड़’ बताते हुए उन पर ‘भद्दे’ नारे लगाने का आरोप लगाया और साथ ही पूरे मामले के राजनीति से प्रेरित होने का शक जताया। उन्होंने इसे आज़ाद भारत का सबसे काला दिन बताया है। काउन्सिल ने ‘दोषी’ पुलिस वालों के खिलाफ एक हफ्ते में गिरफ़्तारी और कार्रवाई न होने पर धरने पर बैठने की धमकी दी है।

इसके अलावा खबर यह भी आ रही है कि एक सुप्रीम कोर्ट वकील ने दिल्ली के कमिश्नर अमूल्य पटनायक को क़ानूनी नोटिस भेजा है क्योंकि उन्होंने आईटीओ स्थित पुलिस हेडक्वार्टर के सामने प्रदर्शन कर रहे पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस जहाँ एक तरफ विरोध प्रदर्शन कर रही थी वहीं सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर हमला बोल दिया था। आम आदमी पार्टी ने कहा कि दिल्ली पुलिस ‘राजनीतिक इकाई’ में तब्दील हो गई है। यह बीजेपी की सशस्त्र शाखा की तरह काम कर रही है, जबकि इसका काम कानून-व्यवस्था बनाए रखने का है। वकीलों के समर्थन में आई आप ने दिल्ली पुलिस पर कई सवाल खड़े किए हैं।

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इसके अलावा आप के मुखिया अरविन्द केजरीवाल ने भी वकीलों का पक्ष लेते हुए पुलिस द्वारा की गई फायरिंग को बेवजह करार दिया था। उन्होंने यह बयान फायरिंग में घायल दो वकीलों को देखने अस्पताल पहुँचने पर दिया था।

पिछले हफ्ते के शनिवार (2 नवंबर, 2019 को) पार्किंग विवाद को लेकर दिल्ली के तीस हज़ारी कोर्ट के बाहर वकीलों और पुलिस के बीच हिंसा हुई थी। एक पुलिस कार और 20 अन्य वाहनों को आग लगा दी गई थी। 2 पुलिस वालों को दिल्ली हाई कोर्ट ने सस्पेंड कर दिया था और न्यायिक जाँच के आदेश दे दिए थे।

इस मामले के खिलाफ कल दिल्ली के हज़ारों पुलिस वाले वर्दी उतार कर सादे कपड़ों में विरोध प्रदर्शन और हड़ताल भी किया था। इसके अलावा कई वर्तमान और भूतपूर्व अफसरों ने भी इसके खिलाफ ट्विटर पर आवाज़ उठाई थी।

अयोध्या में 400 साल से बाबरी मस्जिद, कयामत तक मस्जिद ही रहेगी: मौलाना अरशद मदनी

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि अयोध्या में 400 साल से बाबरी मस्जिद थी और कयामत तक वो मस्जिद ही रहेगी। उनका यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब अगले सप्ताह अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है। मदनी ने उम्मीद जताई है कि कोर्ट का फैसला मुस्लिमों के हक में आएगा। साथ ही कहा है कि अदालत जो भी फैसला देगी उसे वे स्वीकार करेंगे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मदनी ने बुधवार (नवंबर 6, 2019) को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में पत्रकारों से बात करते हुए शरीयत का हवाला देकर कहा बाबरी मस्जिद, कानून और न्याय की नजर में एक मस्जिद थी। करीब 400 साल तक मस्जिद थी। लिहाजा शरीयत के हिसाब से वो आज भी मस्जिद है। उन्होंने कहा कि सत्ता और ताकत के दम पर उसे कोई भी रूप दे दिया जाए कयामत तक वह मस्जिद ही रहेगी।

मदनी ने दावा किया कि मस्जिद का निर्माण करने के लिए किसी हिंदू मंदिर को तोड़ा नहीं गया था। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों का दावा ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित है। हम अपने इस दावे के साथ खड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला सुनाएगा हम उसे मानेंगे लेकिन मस्जिद पर अपना दावा नहीं छोड़ सकते। उन्होंने कहा कि हम मुस्लिमों के साथ भारत के हर नागरिक से अपील करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट आने वाले फैसले का सम्मान करें।

मदनी ने कहा, “कानून हमारा है। सुप्रीम कोर्ट हमारी है। जो भी फैसला होगा हम उसका एहतराम करेंगे। मुल्क के सभी लोगों से चाहे वे हिंदू हो या मुस्लिम, सबको फैसले को अमन के साथ स्वीकार करने की गुजारिश करता हूॅं। इस मामले में हमारी आवाज जहॉं तक पहुॅंचेगी हम वहॉं तक पहुँचाएँगे।”

इस दौरान उन्होंने कश्मीर और एनआरसी के मसले पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जमीयत एनआरसी के खिलाफ नहीं है। यह पूरे देश में होना चाहिए, लेकिन इसका आधार धार्मिक नहीं हो। वहीं, आर्टिकल 370 को लेकर कहा कि यह मामला कोर्ट में है उम्मीद है कि कश्मीरियों को न्याय मिलेगा। लेकिन, वहॉं लाखों लोग रहते हैं और बीते 90 दिन से वहॉं काम ठप है। हमने पहले भी कहा था और आज भी कह रहे उनसे बातचीत करिए।

माओवंशी आतंकी हैं, ह्यूमन राइट्स के पात्र नहीं: केरल मुख्य सचिव के बयान से खफा वामपंथ-कॉन्ग्रेस

केरल के मुख्य सचिव टॉम जोसे ने माओवादी आतंकवादियों को आतंकवादी क्या कहा, केरल कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (सीपीआई) उनके ऊपर भड़क उठे हैं। विधानसभा के फ्लोर से लेकर मीडिया और सड़कों तक उनका विरोध किया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने यह कहने की जुर्रत कर दी कि खुद ऑटोमैटिक हथियार लेकर घूमने वाले और निहत्थे, निरीह लोगों को ढाल बनाकर मौत के मुँह में धकेलने वाले माओवादी आतंकियों के ह्यूमन राइट्स की चिंता करना पुलिस और सुरक्षा बलों का काम नहीं है।

कल (मंगलवार, 6 नवंबर, 2019 को) टाइम्स ऑफ़ इंडिया के सम्पादकीय पेज पर प्रकाशित एक लेख में जोसे ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद की परिभाषा (वे तत्व जो हिंसा का इस्तेमाल राजनीतिक मंशा से करते हैं, और इस प्रक्रिया में नागरिकों को नुकसान पहुँचाते हैं या नुकसान की राह पर धकेलते हैं। अतः एक लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार के खिलाफ हथियारबंद लड़ाई करने वाले नागरिकों को नुकसान पहुँचाने के चलते आतंकवादी होते हैं) के हिसाब से माओवादी आतंकी ही हुए। उन्होंने यह पक्ष रखा कि सरकारों का काम निहत्थे और शांतिप्रिय नागरिकों की हिफाज़त करना होता है।

जोसे ने लिखा कि इसका कोई औचित्य नहीं कि शांतिप्रिय आम नागरिकों और माओवंशी आतंकियों के ह्यूमन राइट्स एक जैसे हों। यह न केवल देश के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ होगा, बल्कि कानून का पालन करने वाले आम नागरिकों का मखौल उड़ाना उनका अपमान होगा।

इसी सत्य पर कम्युनिस्ट और केरल कॉन्ग्रेस खफा हैं। जहाँ कम्युनिस्ट पार्टी सीपीआई क़ानूनी तोड़ मरोड़ से खूँखार माओवादियों और आम नागरिकों के अधिकार बराबर बताने में लगी है, वहीं कॉन्ग्रेस नाराज है कि ऐसा लग रहा है केरल का शासन मुख्य सचिव चला रहे हैं।

लेकिन जोसे को सोशल मीडिया पर आम और खास सभी तबकों से समर्थन मिल रहा है। आम लोग उनकी सराहना कर रहे हैं और उनके विरोधियों का उपहास कर रहे हैं।

सबरीमाला मुद्दे पर केरल सरकार से लगातार टकरा चुके हिंदूवादी एक्टिविस्ट राहुल ईश्वर ने भी जोसे के लेख का समर्थन किया है।

ऐसे में सवाल यह है कि कम्युनिस्टों का तो समझ में आता है, मगर सिद्धार्थ शंकर रे के समय में खुद इन वामपंथी आतंकियों के हाथों अपने कारकर्ताओं को खो चुकी कॉन्ग्रेस किस कारण से इन आतंकियों के पक्ष में अपना बचा खुचा जनाधार गँवाने पर तुली है।

अयोध्या में 30 लाख लोगों ने की परिक्रमा, आतंकी हमले के मद्देनजर सुरक्षा कड़ी

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले राम की नगरी श्रद्धालुओं से पट गई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक करीब 30 लाख लोगों ने 14 कोसी परिक्रमा पूरी की। अब प्रशासन गुरुवार (7 नवंबर) को होने वाली पंचकोसी परिक्रमा की तैयारी में जुटा है। अनुमान है कि 20 लाख श्रद्धालु इसमें हिस्सा लेंगे।

राम मंदिर के पक्ष में फैसला आने की उम्मीद और आतंकवादी हमले की आशंका के बीच परिक्रमा बुधवार सुबह पूरी हुई। परिक्रमा में हर आयु वर्ग के श्रद्धालु शामिल थे। पूरा परिक्रमा पथ राम के जयघोष से गूॅंज उठा। परिक्रमा पूरी करने के बाद श्रद्धालुओं ने श्रीरामजन्मभूमि में विराजमान रामलला, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और नागेश्वरनाथ समेत अन्य प्रमुख मंदिरों में पूजा की।

कार्तिक पूर्णिमा मेला और परिक्रमा को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पहले से थे। आतंकी हमले के इनपुट के बाद सुरक्षा-व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। खुफिया सूत्रों के हवाले से कुछ खबरों में बताया गया है कि 7 पाकिस्तानी आतंकी नेपाल के रास्ते यूपी में दाखिल हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये गोरखपुर और फैजाबाद में छिपे हो सकते हैं तथा भगवा लिबास में अयोध्या में हमले को अंजाम दे सकते हैं।

अयोध्या के एसएसपी आशीष तिवारी ने बताया कि शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से 1600 गाँवों में 16,000 वालंटियर्स को लगाया गया है। सभी मोबाइल एप के जरिए आपस में जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर किसी तरह की अफवाह फैलने से रोकने के लिए भी तैयारी की गई है। प्रशासन सोशल मीडिया की कड़ी निगरानी कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर प्रशासन ने पहले से ही अयोध्या में विजयोत्सव निकालने पर रोक, लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक सहित कई पाबंदियां लगा रखी है। 4 नवम्बर से लेकर 18 नवम्बर तक पुलिस ने विशेष निषेधाज्ञा लागू कर रखी है। ज़िले में धारा 144 को बढ़ाकर 28 दिसंबर तक लागू कर दिया गया है। गौरतलब है कि बीते महीने 40 दिन की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश के अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अयोध्या मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। 17 नवंबर से पहले फैसला आने की उम्मीद है।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई शहर में पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे ने दूसरे समुदाय से शान्ति की अपील करते हुए मुलाक़ात की। बता दें कि जन्मभूमि पर कारसेवा करने के जवाब में साल 1993 में मुंबई नगरी सीरियल ब्लास्ट से दहल उठी थी जिसमें सैकड़ों लोगों ने अपनी जान गँवा दी थी।

फडणवीस ने किसानों की समस्याओं के लिए बुलाई कैबिनेट बैठक: शिवसेना के 6 मंत्री हुए शामिल

महाराष्ट्र में चल रहे राजनीतिक गतिरोध के बीच बुधवार (नवंबर 6, 2019) को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में शिवसेना कोटे के मंत्रीगण भी शामिल हुए। सरकार ने कहा है कि कृषि को लेकर ये बैठक बुलाई गई। इस बैठक में शिवसेना के 6 मंत्री शामिल हुए। साउथ मुंबई में स्थित सह्याद्रि गेस्ट हाउस में ये बैठक हुई, जिसमें एकनाथ शिंदे और रामदास कदम भी शामिल हुए। दोनों शिवसेना नेता महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं। 2 दिन पहले ही जब संजय राउत ने राज्यपाल से मुलाक़ात की थी, तब कदम भी उनके साथ ही थे।

बैठक के बाद रामदास कदम ने कहा कि ये बैठक किसानों की समस्याओं को लेकर हुई थी। उन्होंने कहा कि कल को कोई ये नहीं कह सकता कि शिवसेना के मंत्रियों ने किसानों के लिए हुई बैठक में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने माँग करते हुए कहा कि किसानों को 25,000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।

दोनों ही दल सरकार गठन को लेकर आमने-सामने हैं और ऐसे में शिवसेना के 6 मंत्रियों का फडणवीस की अध्यक्षता में बैठक में शामिल होना अहम है। इससे पहले शरद पवार ने शिवसेना को तगड़ा झटका देते हुए कहा कि चूँकि जनादेश भाजपा और शिवसेना को मिला है, सरकार इन दोनों दलों को ही बनाना है। एनसीपी सुप्रीमो ने साफ़ कर दिया कि उनकी पार्टी को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है और वे कॉन्ग्रेस के साथ विपक्ष की भूमिका निभाएँगे। उन्होंने शिवसेना और भाजपा से कहा कि दोनों जल्द से जल्द सरकार बनाएँ।

पवार ने शिवसेना और एनसीपी द्वारा मिल कर सरकार गठन करने की अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि इसका सवाल ही कहाँ उठता है? उन्होंने कहा कि शिवसेना और भाजपा 25 साल से गठबंधन में हैं और वे आगे भी साथ में आ सकते हैं। लिहाजा केवल एक विकल्प बचता है। भाजपा-शिवसेना मिलकर सरकार बनाएँ। इसके अलावा राष्ट्रपति शासन से बचने का कोई विकल्प नहीं है।

शरद पवार द्वारा विपक्ष में बैठने की घोषणा करने और शिवसेना मंत्रियों के राज्य सरकार की बैठक में शामिल होने को लेकर अनुमान लगाया जा रहा है कि शिवसेना के रुख में नरमी आई है। महाराष्ट्र भाजपा कोर्ट कमिटी की बैठक के बाद राज्य के वित्त मंत्री सुधीर मुंगन्टीवार ने कहा था कि जल्द ही कोई गुड़ न्यूज़ मिलेगा। उधर अहमद पटेल ने भी नितिन गडकरी से मुलाक़ात की थी लेकिन उन्होंने इसे किसानों के मुद्दे से जुड़ी बैठक बताया था।

चार्ल्स ने फेसबुक पर PM मोदी की तस्वीर से किया ख़िलवाड़: मिली 1 साल सोशल मीडिया से दूर रहने की ‘सजा’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक महीने पहले डॉक्टर्ड तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर करने के इल्जाम में कन्याकुमारी जिले के निवासी जेबिन चार्ल्स को 1 साल तक सोशल मीडिया से दूर रहने की सजा मिली है। इसके लिए जेबिन ने खुद सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ में लिखित हलफनामा दिया। साथ ही कोर्ट ने चार्ल्स से उनकी गलती के लिए लिखित माफीनामा भी माँगा।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जीआर स्वामीनाथान ने चार्ल्स को आगाह किया कि अगर इस एक साल के बीच वे सोशल मीडिया इस्तेमाल करते पाए गए, तो उनकी जमानत याचिका को रद्द करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट का रुख किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि चार्ल्स ने एक माह पूर्व फेसबुक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक डॉक्टर्ड तस्वीर डाली थी। जिसे अगले दिन देखते ही भाजपा पदाधिकारी नांजिल राजा ने उनके ख़िलाफ़ वाडसरी पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

इसके बाद 11 अक्टूबर को उनपर आईपीसी की धारा 505 (2) और आईटी एक्ट 2000 की धारा 67 बी के तहत मुकदमा दर्ज हुआ और अग्रिम जमानत के लिए चार्ल्स को हाइकोर्ट का रुख करना पड़ा।

कोर्ट में चार्ल्स ने अपने बचाव में तर्क देते हुए सुप्रीम कोर्ट की कही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि पब्लिक फोरम पर अपनी राय रखना कोई अपराध नहीं हैं।

हालाँकि, आवेदन में चार्ल्स ने अपनी हरकत पर खेद व्यक्त किया और कहा कि उसे ये एहसास हो गया था कि किसी भी नागरिक के पास प्रधानमंत्री का अपमान करने का अधिकार नहीं हैं। इसलिए तुरंत उसने उस पोस्ट ब्लॉक कर दिया। बता दें कि चार्ल्स ने कोर्ट को आश्वासन दिया है कि वे स्थानीय अखबार में भी माफीनामा छपवाने के लिए तैयार हैं।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी: निगमकर्मियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, मंत्री का पोस्टर हटाने से थे नाराज़

मध्य प्रदेश के इंदौर में कमलनाथ के मंत्री तुलसी सिलावट के समर्थकों ने भारी गुंडागर्दी मचाई। उन्होंने न सिर्फ़ नगर निगम के कर्मचारियों को पीटा, बल्कि अधिकारियों के साथ भी धक्का-मुक्की और गाली-गलौज किया। दरअसल, इंदौर को स्वच्छता के मामले में लगातार चौथी बार नंबर वन सिटी बनाने के लिए शहर के सारे राजनीतिक पोस्टर-बैनरों को हटाया जा रहा है। नगर निगम ने इसके लिए अभियान चला रखा है और इसी क्रम में मंगलवार (नवंबर 5, 2019) को ये घटना हुई। ये घटना अमला रेजीडेंसी एरिया में हुई, जहाँ ‘राहुल सिलावट मित्र मंडल’ के नाम से पोस्टर-बैनर लगे हुए थे। सिलावट राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हैं।

कॉन्ग्रेस नेता तुलसी सिलावट को उनके समर्थक ‘तुलसी भैया’ के नाम से भी जानते हैं। ये पोस्टर-बैनर उनके जन्मदिन के अवसर पर लगाए गए थे। सिलावट का बँगला भी पास में ही है। जैसे ही उनके समर्थकों को इस बात की जानकारी मिली, वो लाठी-डंडों के साथ वहाँ पहुँच गए और कार्रवाई कर रहे कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ बदतमीजी पर उतर आए। उन्होंने नगर निगम के उपायुक्त महेंद्र सिंह चौहान के साथ न सिर्फ़ धक्का-मुक्की की बल्कि उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने कर्मचारियों व अधिकारियों को गालियाँ भी बकी।

इसके बाद मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट के समर्थकों ने सरकारी गाड़ियों पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। जब इतने पर भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ तो उन्होंने नगर निगम के कर्मचारियों को दौड़ा-दौड़ा कर लाठी-डंडे से पीटा। उपायुक्त महेंद्र चौहान ने कहा कि उन्होंने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है क्योंकि धमकी की बातें उनके कर्मचारियों ने सुनी, उन्होंने नहीं। वहीं तुलसी बाद में किरकिरी से बचने के लिए सफाई देते हुए कहा कि वो तो अपना जन्मदिन भी नहीं मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके नाम का बैनर-पोस्टर लगा है, इसकी उन्हें जानकारी भी नहीं थे। मंत्री ने कहा कि अगर किसी ने मारपीट की है तो उसपर कार्रवाई हो।

स्थानीय लोगों ने बताया है कि जिस दिन ये घटना हुई, उसी दिन मंत्री सिलावट भी यहाँ आए थे। उनके जाने के कुछ ही देर बाद ये घटना हुई। कॉन्ग्रेस नेता सिलावट ने यहाँ आकर अपने समर्थकों के साथ बातचीत की थी और उनके जाने के बाद नगर निगम के कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ गुंडागर्दी की गई।

महापौर मालिनी गौड़ ने कहा कि ये राज्य कैबिनेट का ही फ़ैसला है कि अगर राजनीतिक बैनर-पोस्टर लगे हुए हैं तो उन्हें हटाया जाना चाहिए। निगम आयुक्त ने कहा कि जाँच के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि वीडियो फुटेज देख कर आरोपितों की पहचान की जा रही है। जिस इलाक़े में ये घटना हुई, वहाँ मंत्री सिलावट के साथ-साथ कलेक्टर, कमिश्नर और हाईकोर्ट के न्यायाधीश का भी आवास स्थित है।