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विदेश से आए 18 लोग फैला रहे थे मजहबी कट्टरता, यूपी पुलिस ने भगाया अपने देश

कमलेश तिवारी हत्याकांड के बाद उत्तर प्रदेश के बिजनौर से 2 मौलानाओं को गिरफ़्तार किया गया है। जैसा कि ख़बरों में भी आ चुका है, उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद के अपमान का आरोप लगाते हुए खुले तौर पर तिवारी की हत्या की धमकी दी थी। अब बिजनौर में इस्लामिक कट्टरवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने कड़ा क़दम उठाया है। बिजनौर की मस्जिदों में कई ऐसे विदेशी मुस्लिम आकर रह रहे थे, जो इस्लामिक कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार-प्रसार में लगे हुए थे। प्रशासन ने इन सबको वापस इनके देश भगा दिया है। यूपी सरकार के आदेश पर ये कार्रवाई की गई है।

केंद्र सरकार भी भारत में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों को लेकर सख्त है और उसी दिशा में एनआरसी लाया गया है। हालाँकि, इसे उत्तर-पूर्व के अलावा अभी भारत के अन्य राज्यों में लागू नहीं किया गया है और दिल्ली, यूपी और बंगाल में भी इसे लाने की माँग उठती रही है। जिन 18 विदेशी मुस्लिमों को अपने देश भेजा गया है, उनमें 6 मलेशिया के थे, 7 म्यांमार के थे और 5 इंडोनेशिया के थे। ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आ गए थे और यहाँ मजहबी कट्टरता फैला रहे थे। सूचना मिली थी कि किरतपुर के मोहल्ला काजीयान में 11 विदेशी मुस्लिम और नजीबाबाद के पठानपुरा की मरकज़ मस्ज़िद में 7 विदेशी मुस्लिम जमात के नाम पर रुके थे।

कोतवाली शहर के मुस्तफाबाद गाँव में भी इंडोनेशिया से आए कुछ लोग मजहबी प्रचार-प्रसार करते मिले थे। एसपी संजीव त्यागी ने साफ़ कर दिया है कि अगर टूरिस्ट वीजा पर यहाँ आए किसी भी विदेशी द्वारा मजहबी प्रचार-प्रसार करने की सूचना मिली तो उन्हें निकाल बाहर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर दोबारा कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो उसके ख़िलाफ़ पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी। ये सभी विदेशी मुस्लिम स्थानीय युवकों को मजहब के नाम पर भड़काने का काम करते थे।

इससे पहले थाईलैंड के 13 मुस्लिम बिजनौर के मृदगान मोहल्ला में स्थित जामा मस्जिद में संदिग्ध इस्लामिक गतिविधियों में भाग ले रहे थे। वो सभी मजहबी बैठकों में भाग ले रहे थे और अपने मजहब का प्रचार-प्रसार में लगे हुए थे। बिजनौर पुलिस ने वीजा नियमों का हवाला देते हुए बताया कि कोई भी विदेशी नागरिक टूरिस्ट वीजा लेकर मजहबी गतिविधियों में भाग नहीं ले सकता। इस सम्बन्ध में मस्जिद प्रशासन से भी रिपोर्ट माँगी गई है।

लोकल इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा इस मामले को गंभीरता से लेने के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी गई और फिर इन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई। इस मामले में केंद्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियों को भी रिपोर्ट सौंपी गई है। इससे पहले जो विदेशी इन मजहबी क्रियाकलापों में संलग्न थे, उनसे स्पष्टीकरण भी माँगा गया था।

बंगाल में ‘ममता के डर से’ अधिकारियों का गवर्नर से मिलने से इंकार: राज्यपाल ने कहा- यहाँ सेंसरशिप लगी है क्या?

पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को नाखुशी जताई जब उत्तरी 24-परगना के जिला प्रशासन ने राजभवन को सूचना दी कि जिले के अधिकारियों, सांसदों और विधयकों से मिल पाना या उन्हें आमंत्रित कर पाना बिना राज्य सरकार की अनुमति के मुमकिन नहीं है। गर्वनर धनखड़ मंगलवार (22 अक्टूबर, 2019) को अपनी पत्नी सुदेश धनखड़ के साथ उत्तरी 24-परगना के धमखाली में सुबह 8 बजे पहुँचे थे जहाँ वे प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय सांसद, विधायक, और स्थानीय पंचायत नेताओं से मिल रहे थे।

धनखड़ ने पिछले हफ़्ते उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना जिलों के जिला अधिकारियों, जिला मजिस्ट्रेटों और चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ धमखाली और सजनाखाली में बैठक करने की इच्छा जताई थी। लेकिन जिला प्रशासन ने सोमवार को उनके सचिव को इत्तला किया कि प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर पाना बिना राज्य सरकार की अनुमति के संभव नहीं हो पाएगा

जिला प्रशासन के पत्र में लिखा था, “दिनांक 10 अक्टूबर, 2019 के आपके पत्र के संदर्भ में, पश्चिम बंगाल के गवर्नर के सचिव महोदय, यह आपको सूचित करने के लिए है कि पश्चिम बंगाल सरकार की अनुमति की ज़रूरत होगी (undersigned को) आमंत्रितगणों (जन प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों) को परस्पर संवाद के सत्र के लिए निमंत्रित करने हेतु, जो जिला परिषद हाउस, धमखाली, उत्तरी 24 परगना में होने के लिए निर्धारित किया गया है।” उसमें आगे लिखा था, “यहाँ यह भी जोड़ा जा सकता है कि सभी वरिष्ठ सरकारी अधिकारी उत्तर बंगाल में 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक रहेंगे प्रशासनिक समीक्षा बैठकों के लिए, जो मुख्यमंत्री उत्तर बंगाल के कुछ जिलों के लिए करेंगी।”

जिले के अधिकारियों के हाजिर न होने से नाराज़ गवर्नर धनखड़ ने इसे ‘असंवैधानिक’ करार दिया है। “मैं नहीं समझ पा रहा कि उन्हें मुझसे मिलने के लिए राज्य सरकार की अनुमति की आवश्यकता क्यों है। मैं स्तब्ध हूँ। मुझे नहीं पता कि क्या बंगाल में किसी तरह की सेंसरशिप है।” राज्य सरकार की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “कहते हुए अफ़सोस हो रहा है, लेकिन ऐसा लगता है कि वे फ़्रस्ट्रेट हो रहे हैं। उनके मुझसे मिलने से इंकार के बाद भी मैं जिलों का अपना दौरा जारी रखूँगा।”

धनखड़ और राज्य सरकार के बीच यह पहला टकराव नहीं है। 19 सितंबर, 2019 को गवर्नर को तृणमूल कॉन्ग्रेस की आलोचना का सामना करना पड़ा था जब वे भाजपा के सांसद और केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को बचाने जादवपुर विश्वविद्यालय पहुँचे थे, जहाँ ABVP के एक कार्यक्रम के दौरान उन पर हमला हो गया था। 24 सितंबर को सिलीगुड़ी में नए बने इंडियन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के भवन का उद्घाटन के समय दार्जिलिंग में भी उन्होंने जब जिला प्रशासन के अधिकारियों और साँसदों-विधायकों से मिलने की इच्छा जताई थी तो अधिकांश ने ‘अपरिहार्य कारणों’ का हवाला देकर किनारा कर लिया था।

‘जन्नत का रास्ता दिखाकर आम आदमी के बच्चों को मरवा देते हैं हुर्रियत और मुख्यधारा के कश्मीरी नेता’

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपने हालिया बयान में हुर्रियत और मुख्यधारा के नेताओं पर निशाना साधा है। दरअसल, उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में जितने समाज, धर्म, हुर्रियत और मुख्यधारा के नेता कहे जाते हैं, वे सब दूसरों के बच्चों को मरवाने का काम करते हैं। इतना ही नहीं, राज्यपाल ने इन नेताओं का जिक्र करते हुए कहा है कि इनमें से किसी की संतानें नहीं मरतीं और न ही किसी की संतान आतंकवाद का रुख करती है। उनके अनुसार ऐसे लोगों की हमेशा से फितरत रही है कि घाटी के बच्चों को गुमराह करके, जन्नत का रास्ता दिखाया जाए और मरवा दिया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक आयोजन में खुलकर कहा, “जितने यहाँ हुर्रियत और मेनस्ट्रीम लीडर कहे जाते हैं, ये दूसरों को कॉल देके मरवाते हैं। इनमें से यहाँ किसी का बच्चा नहीं मरा, किसी का बच्चा टेररिज़्म में नहीं है। आम आदमी को जन्नत का रास्ता दिखाइए और मरवा दीजिए, यही होता रहा है यहाँ…”

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर की जनता से अपील की और कहा, “मैं कश्मीर की जनता और यहाँ के नौजवानों से कहना चाहता हूँ कि सच को समझने की कोशिश करो। दुनिया का सबसे खूबसूरत हिस्सा आपके पास है। इसको अपने हाथ में लो। हम कहीं उठा के नहीं ले जाएँगे इसको। दिल्ली कहीं नहीं ले जाएगी, दिल्ली ने तो आपके लिए थैली खोल रखी है। आगे बढ़ो, तरक्की करो, उसमें हिस्सेदारी करो।

यहाँ बता दें कि इस बयान को देने के पहले राज्यपाल सत्यपाल मलिक पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कह चुके हैं कि अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को खत्म नहीं करता है तो भारतीय सेना उनकी सीमा के अंदर घुसकर हमला करके आएगी।

इसके अलावा उन्होंने हाल ही में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कश्मीरी युवाओं पर भी बोला था। उन्होनें कहा था, “जो कश्मीरी युवा आतंकी संगठनों का साथ दे रहे हैं, उन्हें क्या मिला। 1 नवंबर के बाद इस राज्य की स्थिति पूर्ण रूप से बदली होगी। राज्य में कई तरह के विकास कार्य को बढ़ावा दिया जा रहा है, युवाओं के लिए नौकरियाँ निकाली जा रही हैं। ऐसे में इन युवाओं के पास अभी भी समय है, वह चाहें तो सब कुछ छोड़कर वापस आ सकते हैं। हम चाहते हैं कि वह इस राज्य को आगे बढ़ाने में हमारे साथ मिलकर काम करें।” 

ख़ुदा से जन्नत के बदले हिंदुओं जैसा पुनर्जन्म माँगूँगा: ‘काकोरी कांड’ के नायक अमर शहीद अशफाकुल्ला ख़ान

शाहजहाँपुर में जन्मे अशफाकुल्ला ख़ान अपने सभी 6 भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। जब महात्मा गाँधी ने असहयोग आंदोलन को वापस लिया, तब देश में कई युवा उनसे नाराज़ हो गए थे। अशफाकुल्लाह ख़ान उन्हीं युवाओं में से थे, जो देश को किसी तरह आज़ाद कराना चाहते थे और गाँधीजी के फ़ैसले से उन्हें भी निराशा हुई थी। अशफाकुल्ला ख़ान अपनी भावनाओं को प्रकट करने के लिए हिंदी और उर्दू में कविताएँ लिखा करते थे। ये कविताएँ वो वारसी और हज़रत के नाम से लिखते थे। 22 अक्टूबर को अशफाकुल्ला ख़ान की जयंती है। इसी दिन सन 1900 में उनका जन्म हुआ था।

अशफाकुल्ला ख़ान को अगस्त 1925 के काकोरी कांड के लिए याद किया जाता है। आज़ादी की लड़ाई लड़ने के लिए हथियारों की ज़रूरत थी और हथियार प्राप्त करना इतना आसान नहीं था। तभी अशफाकुल्लाह ख़ान और रामप्रसाद बिस्मिल ने मिल कर काकोरी से लखनऊ जा रही एक ट्रेन को लूट कर रुपए जमा करने की योजना बनाई। हथियार ख़रीदने के लिए रुपए की ज़रूरत थी और ब्रिटिश के ट्रेन को लूट कर प्राप्त हुए रुपयों से आज़ादी की लड़ाई के लिए वो हथियार ख़रीदे जा सकते थे। उन्होंने ‘हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन’ के सदस्य के रूप में इस घटना को अंजाम दिया था।

अशफाकुल्ला ख़ान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन नायकों में से एक थे, जिन्होंने भरी जवानी में देश के लिए अपनी जान क़ुर्बान कर दी

जानकारी के लिए बता दें कि चंद्रशेखर आज़ाद भी उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने काकोरी कांड में भाग लिया था। ख़ान और बिस्मिल की दोस्ती की आज भी कसम खाई जाती है। दोनों ही कविताओं के शौक़ीन थे और दोनों के ही मन में भारत को आज़ाद कराने का जज्बा था। दिसंबर 19, 1927 को क्रूर ब्रिटिश सरकार ने दोनों को अलग-अलग जेलों में फाँसी पर लटका दिया। अपने अंतिम दिनों में अशफाकुल्ला ख़ान ने एक कविता लिखी थी, जो इस प्रकार है:

जाऊँगा खाली हाथ मगर, यह दर्द साथ ही जायेगा;
जाने किस दिन हिन्दोस्तान, आजाद वतन कहलायेगा।
बिस्मिल हिन्दू हैं कहते हैं, फिर आऊँगा-फिर आऊँगा;
ले नया जन्म ऐ भारत माँ! तुझको आजाद कराऊँगा
जी करता है मैं भी कह दूँ, पर मजहब से बँध जाता हूँ;
मैं मुसलमान हूँ पुनर्जन्म की बात नहीं कह पाता हूँ।
हाँ, खुदा अगर मिल गया कहीं, अपनी झोली फैला दूँगा;
औ’ जन्नत के बदले उससे, एक नया जन्म ही माँगूँगा।।

अशफाकुल्ला ख़ान को जब फाँसी दी गई, तब उनकी उम्र महज 27 साल ही थी लेकिन उन्होंने भरी जवानी में ख़ुद को भारत माँ की स्वतंत्रता की बलिवेदी पर क़ुर्बान कर दिया। इसी तरह बिस्मिल भी उस समय सिर्फ़ 30 वर्ष के ही थे। आमिर ख़ान की ‘रंग दे बसंती’ में कुणाल कपूर का किरदार अशफाकुल्ला ख़ान पर आधारित था। बिस्मिल और ख़ान की फाँसी के बाद पूरे देश में सजा-ए-मौत के ख़िलाफ़ जनाक्रोश फ़ैल गया था और भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था।

काकोरी काण्ड के बाद ब्रिटिश सरकार ने इसमें शामिल सभी क्रांतिकारियों को पकड़ने के लिए बृहद अभियान चलाया था। अंग्रेजों ने इसे ‘काकोरी ट्रेन डकैती’ नाम दिया और ठाकुर रौशन सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आज़ाद और अशफाकुल्ला ख़ान सहित कई क्रांतिकारियों के ख़िलाफ़ छापेमारी शुरू की। चंद्रशेखर आज़ाद को छोड़ कर बाकी सभी क्रांतिकारियों को ब्रिटिश ने पकड़ लिया। अपने अंतिम दिनों में भी बिस्मिल और ख़ान ब्रिटिश सरकार से भारत की आज़ादी की बात करते रहे।

फेसबुक, ट्विटर यूज़रों पर कसेगा शिकंजा, नियम 15 जनवरी तक: सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार

सोशल मीडिया पर हेट स्पीच, फेक न्यूज़, मानहानि करतीं पोस्ट्स और एंटी-नेशनल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए नियम 15 जनवरी, 2020 तक तैयार कर दिए जाएँगे, ऐसा केंद्र की मोदी सरकार ने आज सुप्रीम कोर्ट में कहा। सर्वोच्च न्यायालय ने मद्रास, बॉम्बे और मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालयों में लंबित सभी मुकदमें भी अपने पास स्थानांतरित कर दिए। इन सभी मामलों का संबंध सोशल मीडिया प्रोफइलों के डेक्रिप्टेड डाटा को साझा करने से संबंधित माँग से था।

फेसबुक और WhatsApp ने इन मामलों का ट्रांसफ़र सुप्रीम कोर्ट में इसलिए माँगा था कि इनका राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई अगले साल 2020 में जनवरी के आखिरी सप्ताह में होगी

अभी तक तमिलनाडु सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों के सभी मुकदमों को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की कोशिशों का विरोध किया था। तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि WhatsApp और फेसबुक को सरकार द्वारा एनालिसिस के लिए माँगी जाने वाली किसी भी सूचना का डेक्रिप्शन करना चाहिए। तमिलनाडु के मामलों को सुप्रीम कोर्ट ले जाने देने के लिए मान जाने के पहले अटॉर्नी जनरल ने कहा था, “भारत में WhatsApp और फेसबुक यह नहीं कह सकते कि वे सूचना का डेक्रिप्शन नहीं कर सकते।” वहीं इन दोनों कंपनियों का कहना है कि सूचना को डिक्रिप्ट करने के लिए ज़रूरी ‘की’/कुंजी उनके पास है ही नहीं और वे केवल अधिकारियों के साथ सहयोग भर ही कर सकते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा, “सरकार घर की चाभियाँ घर के मालिक से माँग रही है और घर के मालिक का कहना है कि उसके पास चाभी ही नहीं है।”

इस मामले के एक और याचिकाकर्ता इंटरनेट फ्रीडम एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनकी याचिका पहले ही सुप्रीम कोर्ट की एक दूसरी बेंच के सामने लंबित है और इस बेंच को “नागरिकों के अधिकारों को न कुचलने” पर गौर करना चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, ने कहा कि सोशल मीडिया के लिए नियम तय करने का कदम नागरिकों की निजता के हनन का एक तरीका नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्प्रभुता को बचा कर रखने के लिए है। मेहता ने कुछ याचिककर्ताओं के इस आरोप को नकारा कि यह प्रस्तावित कदम, कि सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी होगी किसी संदेश या सामग्री/कंटेंट विशेष के उद्गम को ढूँढ़ निकालना, सरकार की रणनीति है “व्यक्ति की निजता को कुचलने की।”

राजस्थान में BSP नेताओं को गधे पर घुमाया: कॉन्ग्रेस पर भड़कीं मायावती, कहा- जैसे को तैसा

राजस्थान में बसपा नेताओं के साथ बदसलूकी पर पार्टी की सुप्रीमो मायावती भड़क गई हैं। राजस्थान के जयपुर में मंगलवार (अक्टूबर 22, 2019) सुबह बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नेशनल कोऑर्डिनेटर का मुँह काला करने और गधे पर बैठाकर घुमाने के मामले की बसपा सुप्रीमो मायावती ने कड़ी निंदा की है। मायावती ने ट्वीट कर कॉन्ग्रेस पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा कि लोग ‘जैसे को तैसा’ जवाब दे सकते हैं।

मायावती ने कॉन्ग्रेस पर गलत परंपरा लागू करने का आरोप लगाते हुए ट्वीट किया कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने पहले राजस्थान में बसपा विधायकों को तोड़ा और अब मूवमेन्ट को अघात पहुँचाने के लिए वहाँ के वरिष्ठ लोगों पर हमला करवा रही है, जो अति-निन्दनीय व शर्मनाक है। कॉन्ग्रेस अम्बेडकरवादी मूवमेन्ट के खिलाफ काफी गलत परम्परा डाल रही है, जिसका जैसे को तैसा जवाब लोग दे सकते हैं। इसलिए कॉन्ग्रेस पार्टी को अपनी ऐसी घिनौनी हरकतों से बाज़ आ जाना चाहिए।

बता दें कि मंगलवार सुबह जयपुर में बसपा कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम और प्रदेश प्रभारी सीताराम को बसपा के ही नाराज कार्यकर्ताओं ने जयपुर स्थित पार्टी कार्यालय पर मुँह काला कर गधे पर बैठाकर घुमाया। उन पर टिकट बेचने और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप है। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने उनके मुँह पर कालिख पोती और जूते-चप्पल की माला भी पहनाई।

बसपा कार्यकर्ताओं ने इस घटना के दौरान नेशनल कोऑर्डिनेटर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रामजी गौतम और सीताराम पर पार्टी से दगाबाजी करने व चुनाव में टिकट बेचने का आरोप है। इसी आरोप के चलते बसपा कार्यकर्ताओं ने उनके साथ ऐसा व्यवहार किया। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने उनके मुँह पर कालिख पोत कर उन्हें गधे पर बिठाया और उनका जुलूस निकाला। यह कांड बसपा प्रदेश कार्यालय के सामने हुआ था। बसपा कार्यकर्ताओं ने रामजी गौतम के साथ मारपीट भी की थी।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले राजस्थान में बसपा के 6 विधायकों ने कॉन्ग्रेस का हाथ थाम लिया था। जिसके बाद मायावती ने कॉन्ग्रेस पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया था। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह एक गैर भरोसेमंद पार्टी है।

किस्मत रेप की तरह होती है, आप इसे रोक नहीं सकते तो एन्जॉय कीजिए: कॉन्ग्रेस सांसद की बीवी

रेप जैसे घिनौने अपराध पर संवेदनहीन टिप्पणी करके कॉन्ग्रेस सांसद की पत्नी आज सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गईं। दरअसल, केरल में कॉन्ग्रेस सांसद हिबी ईडन की पत्नी ने मंगलवार को अपने एक फेसबुक पोस्ट में किस्मत या भाग्य को रेप जैसा बताया और उसका लुत्फ उठाने की भी सलाह दी। उन्होंने लिखा, “किस्मत रेप जैसी होती है, अगर आप इसे रोक नहीं सकते, तो इसे इंजॉय करने की कोशिश करिए।” अब इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें जमकर सुनाया और मीडिया में भी उनकी काफी फजीहत हुई।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर घेरे जाने के बाद उन्होंने अपने फेसबुक अकॉउंट से ये पोस्ट हटा दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस पोस्ट के साथ उन्होंने 2 छोटे वीडियो क्लिप भी शेयर किए थे। जिसमें से एक में वह सिज्लर का आनंद उठाते हुए दिख रही थीं, जबकि दूसरी वीडियो उनके बच्चे को लेकर थी।

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बता दें कि वर्तमान में कॉन्ग्रेस सांसद हिबी ईडन विधायक के पद से इस्तीफा देने के बाद कॉन्ग्रेस के टिकट पर एर्नाकुलम लोकसभा सीट से पहली भार चुनाव जीतकर सांसद बने हैं। ईडन ने उस क्षेत्र में अपनी जीत दर्ज करवाई है जिसे कॉन्ग्रेस का गढ़ माना जाता है।

वहीं, उनकी पत्नी अन्ना सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और लगातार सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करती रहती हैं। लेकिन इस बार अपनी अनुचित टिप्पणी के कारण उन्हें वी़डियो डिलीट करनी पड़ी और लोगों का गुस्सा भी झेलना पड़ा। इस पोस्ट को देखने के बाद यूजर्स ने कमेंट में तरह-तरह के बातें की , जिससे तंग आकर अन्ना को अपना पोस्ट को हटाना पड़ा। हालाँकि बता दें अभी तक हिबी या उनकी पत्नी ने इस पोस्ट की सफाई में कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।

इक़बाल मिर्ची के क़रीबी हुमायूँ मर्चेंट को ED ने किया गिरफ़्तार, प्रफुल्ल पटेल को लेकर खुलेंगे कई राज़!

प्रफुल्ल पटेल और दाऊद इब्राहिम के क़रीबी इक़बाल मिर्ची के बीच हुई डील के मामले में हुमायूँ मर्चेंट नामक शख्स को गिरफ़्तार कर लिया गया है। उसके अंडरवर्ल्ड डाउन इक़बाल मिर्ची से क़रीबी रिश्ते थे और ये रिश्ते कारोबार से लेकर राजनीति तक थे। इसी मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल पहले से ही ईडी की जाँच का सामना कर रहे हैं। एनसीपी नेता पटेल से ईडी ने 12 घंटे तक पूछताछ की थी लेकिन वो रुपए के लेनदेन को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए थे। उन्होंने तो यहाँ तक कहा था कि उन्हें पता ही नहीं था कि इक़बाल मेमन ही इक़बाल मिर्ची है।

मुंबई के वर्ली में स्थित सीजे हाउस को लेकर जो डील हुई थी, उसमें हुमायूँ मर्चेंट का भी रोल था। सीजे हाउस को मिलेनियम डेवेलपर्स ने बनाया था और उसमें इक़बाल मिर्ची की बीवी हाजरा और उसके दोनों बेटों को संपत्ति दी गई थी। प्रफुल्ल पटेल और उनका परिवार मिलेनियम डेवेलपर्स से जुड़ा हुआ है। प्रफुल्ल पटेल ने पूछताछ के दौरान दावा किया था कि उनकी डील इक़बाल मिर्ची की बीवी के साथ हुई थी, जिसके ख़िलाफ़ किसी भी थाने में कोई केस नहीं चल रहा है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रफुल्ल पटेल ने पूछा था कि 15 साल पुराने मामले में उन्हें अब घसीटा जा रहा है।

हुमायूँ मर्चेंट को गिरफ़्तार करने के बाद मुंबई की एक अदालत में पेश किया गया। भारत में 6 सम्पत्तियों के अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने विदेशों में भी 25 ऐसी सम्पत्तियों की पहचान की है, जो इक़बाल मिर्ची से जुड़ी हुई है और उनका पूरा विवरण निकाला जा रहा है। मीडिया सूत्रों के अनुसार, प्रफुल्ल पटेल ने हुमायूँ मर्चेंट और इक़बाल मिर्ची के साले मुस्ताक मेमन को पहचानने से इनकार कर दिया था। अब उसकी गिरफ़्तारी के बाद कई अन्य राज़ खुलने की भी संभावना है क्योंकि वो पूर्व केंद्रीय मंत्री पटेल और इक़बाल मिर्ची के बीच डील में शामिल था।

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अधिकारियों का कहना है कि इक़बाल मिर्ची ने 1985 में मुंबई के वर्ली में स्थित एक ज़मीन पर अतिक्रमण कर लिया था। वो ज़मीन पटेल परिवार से जुड़ी ज़मीन का हिस्सा थी। मिर्ची यहीं से अपने ड्रग्स के कारोबार चलाने लगा था। इसके बाद वह गिरफ़्तारी से बचने के लिए भारत से भाग निकला। इसके बाद 1999 में इक़बाल मिर्ची की बीवी हाजरा के साथ मिलेनियम डेवेलपर्स की डील हुई। मिलेनियम डेवेलपर्स ने यहाँ 15 मंजिला ईमारत बनाई, जिसे सीजे हाउस नाम दिया गया। इसमें 2 फ्लोर्स इक़बाल मिर्ची और उसके दोनों बेटों को दे दिए गए। इक़बाल मिर्ची की 2013 में लंदन में मृत्यु हो गई थी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इक़बाल मिर्ची और प्रफुल्ल पटेल की डील को देशद्रोह करार दिया था। उधर पीएमसी घोटाले से भी प्रफुल्ल पटेल के तार जुड़ते नज़र आ रहे हैं, जहाँ उनकी पार्टी के संस्थापक व अध्यक्ष शरद पवार का भी नाम सामने आया है।

दुकानों में मुर्गा-बकरा काटते दिखे तो खैर नहीं: अवैध बूचड़खानों पर योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

योगी सरकार ने प्रदेश में बीमारी और संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रयास करते हुए बूचड़खानों पर कड़ा रुख अपनाया है। यूपी में योगी अदित्यनाथ की सरकार ने बूचड़खाने को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। प्रदेश सरकार ने दिवाली के दौरान इस सम्बन्ध में कठोर नीति अपनाते हुए यह फैसला किया है कि यदि इस नियम के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने में गाज सीधे पुलिस और प्रशासन पर गिरेगी।

बता दें कि इस नीति के लिए सभी अधिकारियों को आदेश दे दिए गए हैं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, डीएम, आईजी और डीआईजी अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए इस सम्बन्ध में बात की। बैठक पर ज्यादा जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने बताया कि अवैध बूचड़खानों को लेकर योगी बेहद सख्त हैं और कोताही बरतने वाले डीएम और एसपी दोनों के खिलाफ सीधे कार्रवाई की जाएगी।

सीएम के मुताबिक प्रदेश में अवैध बूचड़खाने पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं बावजूद इसके कई जिलों में बूचड़खानों की शिकायत मिल रही है। योगी ने कहा कि बूचड़खाने का मतलब सिर्फ स्लॉटर-हॉउस न समझा जाए बल्कि बाज़ारों में सड़क किनारे खुले-आम कट रहे जानवर वाली दुकानें भी इसमें शामिल हैं। योगी का कहना है कि इनपर भी प्रतिबन्ध लगाया जाए क्योंकि इनसे संक्रमण फैलता है, जिससे लोग बीमारियों के शिकार होते हैं।

बता दें की यह कोई पहला मौका नहीं है जब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने बूचड़खानों को लेकर ऐसा कोई आदेश दिया हो। 2017 में प्रचंड बहुमत के साथ यूपी की सत्ता में आने के बाद ही योगी सरकार ने बूचड़खानों को लेकर सख्ती दिखाई थी। उस वक़्त दावा किया गया था कि अवैध स्लॉटर-हॉउस किसी मानदंड को नहीं मानते हैं जिसके कारण उनके यहाँ काटे जाने वाले जानवर और उनका मीट बीमारी के मुख्य कारणों में से एक है।

बता दें कि उस वक़्त रिटेल में मीट बेचने वाले दुकानदारों को भी इस बात के निर्देश दिए गए थे कि वह लाइसेंसी बूचड़खाने से ही मीट खरीदकर बेचें। साथ ही दुकान पर पशु को न काटें। ऐसे दुकानों को या तो पर्दे या फिर चटाई से ढक कर मीट बेचने का आदेश दिया गया था। इस नीति का पालन उस वक़्त पूरी सख्ती के साथ कराया गया था, मगर एक बार फिर से इस तरह की दुकानें नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर खुलना शुरू हो गई हैं यही वजह है कि योगी सरकार ने इस पर सख्ती दिखाई है।

रामलीला ‘बच्चों की ब्लू फिल्म’, खतरनाक और मुस्लिमों को डराने वाली: प्रकाश राज, Video वायरल

अभिनेता से नेता बने प्रकाश राज का 2018 का एक वीडियो सोशल मीडिया में घूम रहा है, जिसमें उन्होंने हिन्दुओं में काफ़ी लोकप्रिय रामलीला की तुलना ‘चाइल्ड पोर्न’ से की है।

फरवरी 2018 में न्यूज़ 18 के एक इवेंट में बोलते हुए अल्ट्रा-लेफ़्ट विंग की विचारधारा वाले प्रकाश राज ने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर रामलीला के प्रचार-प्रसार के लिए हमला बोला था। प्रकाश राज ने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश के सीएम का धार्मिक उत्सवों में शामिल होना महज़ दिखावा है और इससे अल्पसंख्यकों में डर का माहौल पैदा होता है। उन्होंने कहा था कि क्या यूपी के मुख्यमंत्री ‘विकास’ की उम्मीद दीवार पर रंग बदल देने से कर रहे हैं।

प्रकाश राज ने आगे यह भी कहा कि उन्हें यह काफी मज़ाकिया लगता है जब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ‘रथोत्सव’ में भागीदारी करते हैं। उन्होंने आगे बढ़कर यह भी कह दिया कि योगी आदित्यनाथ का राज्य का मुख्यमंत्री होने के नाते ऐसी चीज़ें करना सही नहीं है।

इसके बाद उन्होंने रामलीला इवेंट पर हैरत में डाल देने वाला कमेंट किया जहाँ प्रकाश राज ने दावा किया कि वे रामलीला जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस देश में नहीं होने देना चाहते। इन कार्यक्रमों को तुष्टिकरण कहते हुए प्रकाश राज ने वह निंदनीय कमेंट किया जिसमें उन्होंने इसकी तुलना ‘child porn’ से की।

एंकर ने पूछा कि क्यों उत्तर प्रदेश सरकार को ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं कराने चाहिए क्योंकि ये तो लोगों की इच्छा का प्रतिबिम्ब है और सवाल किया कि क्यों प्रकाश राज को इस इवेंट से दिक्कत है। झुँझलाए हुए प्रकाश राज ने कहा, “आप तब नहीं पूछेंगे जब बच्चे ‘child porn’ देखते हैं? आप उसे छोड़ देंगे? यह समाज के लिए हानिकारक है। रामलीला जैसे इवेंट्स समाज के लिए हानिकारक हैं। यह तुष्टिकरण है। यह अल्पसंख्यकों में डर फैला रहा है। उन्होंने (यूपी सरकार ने) जो किया उससे हम में डर बैठ गया। मैं इससे सहज नहीं हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरी समझ के अनुसार क्या उनका मंदिर जाना हमारी संस्कृति है। पूरी जनता के सामने आप नाटक क्यों कर रहे हैं?”

जब उनसे पूछा गया कि वे कैसे क्या भारतीय संस्कृति है और क्या नहीं इसका सर्टिफिकेट बाँट रहे हैं, प्रकाश राज ने कहा कि उन्हें यह बात स्पष्ट है कि क्या संस्कृति है और क्या नहीं। “राम, लक्ष्मण और सीता को हेलीकॉप्टर से लाना और नीचे उतारना मेरी संस्कृति नहीं है।”

अल्ट्रा-लेफ़्ट विंग की विचारधारा वाले प्रकाश राज, जिन्हें अक्सर हिन्दुओं की आस्था के प्रति ज़हर उगलते और अपने वाममपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए झूठ फैलाते देखा जाता है, को 2019 के आम चुनावों में अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने उस हार को अपने “मुँह पर करारा थप्पड़” कहा था।

बीते समय में प्रकाश राज ने एक और विवाद को हवा दी थी जब उन्होंने हिन्दू धर्म के ख़िलाफ़ बदज़बानी करते हुए और सबरीमाला की प्राचीन मान्यता को घसीटते हुए कहा था कि उनके पास “कोई इज्जत नहीं है” उस धर्म के लिए जो “औरतों को प्रार्थना करने से रोकता है”। तथ्यों के लिए प्रकाश राज के पास कोई सम्मान नहीं है और उन्होंने जानबूझकर हिन्दू धर्म का अपमान किया था हिन्दुओं से अपनी नफरत को आगे बढ़ाने के लिए।