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पाकिस्तान ने कुपवाड़ा में किया सीजफायर का उल्लंघन: मो. यूसुफ की मौत, बच्चों सहित 7 घायल

पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में बुधवार (अक्टूबर 30, 2019) को एक बार फिर सीजफायर का उल्लंघन किया। इस बार कुपवाड़ा के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में एक आम नागरिक की मौत हो गई जबकि 7 लोगों के घायल होने की खबर है। सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा के माछिल क्षेत्र में नियंत्रण रेखा के करीब हुए सीजफायर उल्लंघन में मारे गए शख्स की पहचान मोहम्मद यूसुफ खान के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 65 थी। कहा जा रहा है कि घायलों में बच्चे भी शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं में बहुत बढ़ोतरी हुई है। कल राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में लाइन ऑफ कंट्रोल से सटे इलाकों में राउंड फायरिंग हुई थी। जिसमें पाकिस्तान की ओर से मोर्टार दागे गए थे।

हालाँकि इस उल्लंघन के जवाब में भारतीय सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की। इससे पहले दिवाली के अवसर पर भी पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया था। इस दौरान एलओसी के पास राजौरी जिले के सुंदरबन सेक्टर में फायरिंग हुई थी। जिसमें भारतीय सेना का एक जवान घायल भी हुआ था।

इससे पूर्व जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए सोपोर में एक आतंकी हमला भी हुआ था। इसमें कम से कम 19 आम नागरिक घायल हुए थे। इनमें 6 की हालत गंभीर बेहद गंभीर थी। जिसके चलते उन्हें श्रीनगर के अस्पताल में ले जाया गया था।

टीपू सुल्तान पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने के काबिल नहीं, किताबों से होगा बाहर, जयंती भी नहीं मनेगी: CM येदियुरप्पा

18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मैसूर पर राज करने वाले टीपू सुल्तान को लेकर एक बार फिर से चर्चा छिड़ गई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा है कि टीपू सुल्तान के बारे में राज्य के पाठ्यक्रम में जो भी चीजें शामिल की गई हैं, सभी को हटाया जाएगा। येदियुरप्पा ने कहा कि टीपू सुल्तान के बारे में कर्नाटक का पाठ्यक्रम में कुछ भी नहीं रहेगा। बता दें कि कर्नाटक की पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकारें टीपू सुल्तान की जयंती मनाती रही है लेकिन येदियुरप्पा सरकार ने आते ही उस पर रोक लगा दी। अब पाठ्यक्रम से भी उसे हटाने का ऐलान किया गया है।

बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि वो ऐसे किसी भी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं करते, जिनमें टीपू सुल्तान को स्वतंत्रता सेनानी बताया जाता है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने कन्नड़ एंड कल्चरल डिपार्टमेंट को आदेश दिया था कि टीपू सुल्तान की जयंती नहीं मनाई जाए। जुलाई के अंतिम हफ्ते में हुई कैबिनेट मीटिंग में कर्नाटक सरकार ने इस फ़ैसले पर मुहर लगा दी थी। मुख्यमंत्री का कहना है कि टीपू सुल्तान पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने के काबिल नहीं है।

इससे पहले भाजपा विधायक अप्पाचु रंजन ने एक पत्र लिख कर कर्नाटक के सिलेबस से टीपू सुल्तान से जुड़ा चैप्टर हटाने की माँग की थी। इसके बाद राज्य के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि टीपू सुल्तान से जुड़े चैप्टर को हटाने को लेकर रिपोर्ट तैयार की जाए। कर्नाटक टेक्स्ट बुक सोसाइटी के मैनेजिंग डायरेक्टर को पत्र लिख कर मंत्री ने विधायक रंजन के साथ बैठक कर उनका पक्ष सुनने और उस पर विचार करने को कहा था। उन्होंने हिस्ट्री टेक्स्ट बुक ड्राफ्टिंग कमिटी की बैठक बुला कर इस चैप्टर की समीक्षा के निर्देश दिए थे।

भाजपा विधायक रंजन ने कहा कि टीपू सुल्तान ने हजारों ईसाईयों व कोडवा समुदाय के लोगों को जबरन इस्लाम कबूल करवाया था। साथ ही उन्होंने बताया कि टीपू ने अपने शासनकाल के दौरान फ़ारसी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया था। साथ ही उन्होंने टीपू सुल्तान के स्वतंत्रता सेनानी होने के दावों का भी खंडन किया। उन्होंने कहा कि बिना इतिहास के तथ्यों को जाने हुए उसके नाम को पाठ्यक्रम में घुसेड़ दिया गया और उसे जबरदस्ती महिमामंडित किया गया। विधायक ने बताया कि इस चैप्टर में लिखी गई बातें झूठ हैं।

जिस हिंदू छात्रा की मौत को Pak ने बताया आत्महत्या, उसके शव पर मिला पुरुष DNA: फॉरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के लरकाना में संदिग्ध परिस्थियों में हिंदू लड़की नमृता चंदानी की मौत पर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ताजा जानकारी के अनुसार नमृता के शरीर और कपड़ों से पुरुष का डीएनए मिला है।

इस खुलासे के बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया। जहाँ अभी तक कॉलेज प्रशासन कह रहा था कि नमृता की मौत आत्महत्या है, वहीं फॉरेंसिक लैब से आई ब्लड सैंपल की रिपोर्ट किसी दूसरी ओर ही इशारा कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लरकाना जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मसूद बंगश ने नमृता चंदानी की डीएनए रिपोर्ट का खुलासा करते हुए बताया कि रिपोर्ट में नमृता के शरीर और कपड़ों पर पुरुष के डीएनए सैंपल पाए गए हैं। जिन्हें अब कोर्ट के समक्ष भी पेश किया जाएगा। ये रिपोर्ट जामशोरो की फॉरेंसिक लैब से जारी की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने 17 सितंबर को नमृता के कपड़ों पर लगा खून का सैंपल जामशोरो फॉरेंसिक लैब में भेजा था। जिसके बाद उन्हें इसकी रिपोर्ट लगभग डेढ़ महीने बाद सोमवार (अक्टूबर 28, 2019) को मिली और पूरे रिपोर्ट से मामले में नया खुलासा हुआ।

बता दें पाकिस्तान के लरकाना के बीबी आसिफा डेंटल कॉलेज में अंतिम वर्ष की बीडीएस छात्रा नमृता चंदानी की अचानक मौत ने सबको हिलाकर रख दिया था। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सिंध पुलिस ने 32 लोगों को हिरासत में लिया था। जिसमें मेडिकल छात्रा के दो क्लास के साथी मेहरान अबरो औऱ अली शान मेमन का नाम भी शामिल था। पूरे मामले में पुलिस ने नमृता के फोन की डिटेल्स खँगालने के बाद इन दोनों को हिरासत में लिया था।

पुलिस का दावा था कि अबरो ने पूछताछ में स्वीकारा है कि उसके और नमृता के बीच प्रेम संबंध थे। जिसके चलते नमृता ने अबरो से अपने और उसकी शादी की संभावनाओं पर बात भी की थी। लेकिन मेहरान इसके लिए तैयार नहीं था।

इस मामले में नमृता के परिवार वालों की ओर से काफी दबाव बनाए जाने के बाद 25 सितंबर को सिंध हाइकोर्ट ने न्यायिक जाँच के आदेश दिए थे। जिसके बाद ही इस मामले में जाँच शुरू हुई। लड़की के भाई का लगातार कहना था कि उसकी बहन के गले पर केबल की तार से गला घोंटने के निशान थे। जो उसकी हत्या की ओर इशारा करते हैं।

अयोध्या: जब दर्जनों रामभक्तों की लाश पर चढ़ ‘मुल्ला’ बने थे मुलायम, बाद में कहा- और भी मारते

अक्टूबर 30, 1990- यही वो दिन है जब उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चला कर ‘सेकुलरिज्म’ के नए मसीहा बने थे। इसके बाद लोगों ने उन्हें ‘मौलाना मुलायम’, ‘मुल्ला मुलायम’ जैसे तमगों से नवाजा था। इससे पहले अक्टूबर में लालू यादव ने यूपी में रथ घुसने से पहले ही तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ़्तार करवा कर अपने ‘सेकुलरिज्म’ का सबूत दिया था। अगर वो ऐसा नहीं करते तो मुलायम सिंह यादव इस मौके को लपक सकते थे। लेकिन मुलायम ने ख़ून बहा कर सेकुलरिज्म का झंडा बुलंद करने की ठानी। क्या-क्या हुआ था उस वक़्त, आइए आपको बताते हैं।

कहानी इसके एक दिन पहले से शुरू करते हैं, जब कारसेवकों के अतिरिक्त जत्थे अयोध्या पहुँचने लगे थे। विश्व हिन्दू परिषद के नेता अशोक सिंघल और उनके समर्थकों पर यूपी पुलिस ने लाठियाँ भाजी। क़रीब 100 साधुओं को गिरफ़्तार कर एक बस में रखा गया था, लेकिन अयोध्या के रामप्रसाद नामक साधु ने ड्राइवर को बाहर कर ख़ुद बस की कमान थामी और पुलिस के शिंकजे से निकलने में कामयाब हो गए। साधुओं का ये जत्था राम जन्मभूमि पहुँचा। अशोक सिंघल के घायल होने की ख़बर के बाद हज़ारों कारसेवक जमा हो गए थे। वो लोग सुरक्षा बलों के पाँव छूते थे और आगे बढ़ते जाते थे। लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले भी उन्हें न रोक सके।

मुलायम सिंह यादव ने अयोध्या के बारे में बयान दिया था कि वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता। 30 अक्टूबर को कोठरी भाइयों ने गुम्बद के ऊपर भगवा ध्वज फहरा कर मुलायम सिंह को सीधी चुनौती दी। 30 अक्टूबर तक क़रीब 1 लाख लोग वहाँ पहुँच चुके थे, जिसमें 20,000 साधु-संत ही थे। सरयू नदी के पुल पर जब कारसेवक जमा हुआ, तब पुलिस ने गोली चलाई। मंदिर परिसर में गुम्बद पर चढ़े कारसेवकों पर गोलियाँ चलाई गईं। नींव की खुदाई कर रहे लोगों पर गोली चलाई गई। उस समय मुफ़्ती मोहम्मद सईद देश के गृहमंत्री थे।

कारसेवकों पर गोली चलाए जाने से मुफ़्ती मोहम्मद सईद भी ख़ुश थे। तभी तो उन्होंने मुलायम सरकार की पीठ भी थपथपाई थी। हालाँकि, भाजपा ने प्रधानमंत्री वीपी सिंह से इस गोलीकांड को लेकर ऐतराज जताया। जब कारसेवक गुम्बद पर चढ़े हुए थे, तब सीआरपीएफ ने भी गोली चलाई थी। सीआरपीएफ की गोली से गुम्बद पर चढ़े 2 कारसेवक नीचे गिरे और उनकी मृत्यु हो गई। वहीं 3 अन्य कारसेवक नींव खोदते हुए मारे गए। सीमा सुरक्षा बल ने भी फायरिंग की। कारसेवा करते हुए क़रीब 11 लोग मौके पर ही मारे गए। इसके विरोध में भड़के दंगों में 35 लोग मारे गए सो अलग। क़रीब 30 शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ा।

हालाँकि, मुलायम सिंह यादव ने नवंबर 2017 में अपने 79वें जन्मदिन के मौके पर सपा कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए अपने इस कृत्य को जायज ठहराया था। मुलायम ने इस गोलीकांड के 27 वर्षों बाद कहा था कि देश की ‘एकता और अखंडता’ के लिए अगर सुरक्षा बलों को गोली चला कर लोगों को मारने भी पड़े तो ये सही था। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा था कि अगर इसके लिए और भी लोगों को मारना पड़ता तो सुरक्षा बल ज़रूर मारते। मुलायम ने गर्व के साथ आँकड़े गिनाते हुए कहा था कि इस गोलीकांड में 28 कारसेवकों को मौत के घाट उतार दिया गया था।

कारसेवकों द्वारा जारी की गई सूची में 40 कारसेवकों के मारे जाने की बात कही गई थी और उनके नामों की सूची भी प्रकाशित की गई थी। मुलायम ने बताया था कि अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे 56 लोगों के मारे जाने की बात कही थी। वहीं वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा अपनी क़िताब ‘युद्ध में अयोध्या‘ में लिखते हैं कि उन्होंने 25 लाशें देखी थी। हालाँकि, कितने दर्जन मारे गए इसके अलग-अलग आँकड़े हैं लेकिन इतना तो ज़रूर है कि मुलायम को ‘मुल्ला’ का तमगा मिल गया। पुलिस की पाबंदियों और लाठी-गोली सहने के बावजूद कार सेवकों ने हिम्मत नहीं हारी और इन ख़बरों को सुन कर और ज्यादा रामभक्त अयोध्या पहुँचने लगे थे।

केंद्र सरकार ने 15 कारसेवकों के मारे जाने का आँकड़ा दिया था, जबकि विश्व हिन्दू परिषद ने 59 लोगों के मारे जाने की बात कही थी। 1989 में अशोक सिंघल ने राज्य सरकार से 14 कोसी परिक्रमा की इजाजत माँगी थी। इतिहास ने अपने-आप को एक बार फिर से दोहराने की कोशिश की जब 2013 में मुलायम के बेटे अखिलेश की सरकार थी और सिंघल 84 कोसी परिक्रमा की इजाजत माँगने गए। अखिलेश सरकार ने विहिप को इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया था। 14 कोसी परिक्रमा में 25 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि 84 कोसी परिक्रमा में 135 किलोमीटर की परिक्रमा होती है।

कहते हैं कि जब अयोध्या में 1990 में राम मंदिर आंदोलन जोरों पर था, तब क़रीब 10 लाख लोग कारसेवा के लिए जमा हो गए थे। मुलायम सिंह के प्रति लोगों का आक्रोश ही था कि 1991 में उनकी सरकार को जनता ने उखाड़ फेंका और भाजपा ने कल्याण सिंह के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई। अब जब अयोध्या मामले की सुनवाई ख़त्म हो चुकी है और फ़ैसला किसी भी वक़्त आ सकता है, ये याद करना ज़रूरी है कि मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए भारत के कथित सेक्युलर जमात के नेताओं ने क्या-क्या कारनामे किए हैं। और अव्वल तो ये कि प्रायश्चित के बजाय उन्होंने उसे जायज भी ठहराया है।

हेमंत शर्मा लिखते हैं कि इस गोलीकांड के बाद अयोध्या की सड़कें, छावनियाँ और मंदिर खून से सन गए थे। सुरक्षा बलों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी। जब कार सेवक सड़कों पर बैठ कर रामधुन गए रहे थे, तब उन पर गोलियाँ चलवाई गईं। जब वो जन्मस्थान परिसर के पास पहुँचे भी नहीं थी, तब भी उन पर गोलियाँ चलीं। स्थानीय प्रशासन ने तरह-तरह की बातों से अपने इस कृत्य को जायज ठहराने की कोशिश की। पत्रकारों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से पूछा कि निहत्थे लोगों पर गोलियाँ क्यों चलाई जा रही हैं तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ऐसा लग रहा था जैसे उन पर ख़ून सवार हो।

आज इस घटना को 29 साल हो गए हैं और लगभग 3 दशक बीतने के बाद राम मंदिर पर फैसले की घड़ियाँ नजदीक आ रही है। जबकि, कारसेवकों के परिवार ने सीधा कहा था कि मुलायम सिंह ने उनके घर के चिराग छीन लिए और वे न्याय की आस में अभी भी भटक रहे हैं। क्या मुलायम सिंह यादव इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगेंगे? ये पाप तो ऐसा था कि माफ़ी माँग लेने से भी इसका प्रायश्चित नहीं हो सकता। लेकिन अभी जब सेकुलरिज्म का कीड़ा अपने अंधे दौर से गुजर रहा है, इसकी कोई गारंटी नहीं है कि मुलायम जैसे नेता आगे ऐसा नहीं करेंगे। इरादे वही हैं, बस चेहरे बदल गए हैं।

7 रैलियॉं और कॉन्ग्रेस को चौथे पायदान पर पहुॅंचा फिर विदेश गए राहुल गाँधी, अबकी बार इंडोनेशिया

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी फिर से विदेश दौरे पर निकल गए हैं। अबकी बार इंडोनेशिया उनका ठिकाना है। न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। 23 दिन के भीतर यह उनका दूसरा विदेश दौरा है। इससे पहले इसी महीने की 6 तारीख को वे थाइलैंड गए थे।

राहुल ने थाइलैंड की राजधानी बैंकॉक के लिए उड़ान ऐसे वक्त में भरी थी जब महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव सिर पर थे। इसके लिए उनकी खासी आलोचना भी हुई थी। हालॉंकि कुछ दिनों बाद वे देश लौट आए थे और हरियाणा में दो तथा महाराष्ट्र में 5 चुनावी रैलियॉं भी की। दोनों ही जगह कॉन्ग्रेस सत्ता में नहीं आ पाई। हरियाणा में तो फिर भी उसका प्रदर्शन ठीकठाक रहा, लेकिन महाराष्ट्र में वह 44 सीटें लाकर चौथे स्थान पर खिसक गई। 2014 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस महाराष्ट्र में सीटों के लिहाज से तीसरे पायदान पर थी। अब वे फिर से पार्टी को मंझधार में छोड़ विदेश निकल गए हैं।

कुछ दिन पहले जब राहुल बैंकॉक गए थे तो लोगों के मन में उनके नेतृत्व को लेकर संदेह उत्पन्न हो गया था। चुनावों के समय पार्टी को मंझधार में छोड़कर जाने पर लोगों का पूछना था कि आखिर राहुल गाँधी पार्टी को लेकर फिक्रमंद हैं भी या नहीं! हालॉंकि उस वक्त भी ऐसे कॉन्ग्रेसियों की कमी नहीं थी जो चुनावी मौसम में अपने पूर्व अध्यक्ष की विदेश यात्रा का बचाव कर रहे थे।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने राहुल की बैंकॉक यात्रा का बचाव करते हुए कहा था कि क व्यक्ति के निजी जीवन और सार्वजनिक जीवन को अलग-अलग रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा था, “एक व्यक्ति के निजी जीवन को उसके सार्वजनिक जीवन से नहीं मिलाया जाना चाहिए। हमें हर किसी की स्वतंत्रता और गोपनीयता की शाश्वत भावना से जोड़ने की आवश्यकता है।आखिरकार, यह प्रगतिशील और उदार लोकतंत्र का मूल और स्पष्ट सिद्धांत है।” पार्टी के दिग्गज नेता एके एंटनी ने भी इस यात्रा को सही ठहराते हुए कहा था कि राहुल गाँधी इस बार नई ऊर्जा के साथ लौटेंगे। वैसे, चुनाव प्रचार में ऐसा दिखा नहीं।

बता दें विपक्षी नेता राहुल गाँधी की इन विदेश यात्राओं पर जमकर निशाना साध रहे हैं। भाजपा से जुड़े नेताओं का कहना है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी वायनाड की जिम्मेदारियों से भागने का प्रयास कर रहे हैं । अमित शाह ने अभी हाल ही में पूछा था कि राहुल गाँधी अपनी विदेश यात्राओं के दौरान एसपीजी को साथ क्यों नहीं रखते, ऐसा क्या है जो वो छिपा रहे हैं।

अमरूद्दीन ने खुद को ही किया अगवा: प्रेमिका के साथ घूमते हुए 10 बार बदले सिम, फिर पैरों में ठोंक ली कील

उत्तरप्रदेश के कन्नौज में अमरुद्दीन नामक ठेकेदार के अपहरण का पूरा मामला फर्जी निकला। पुलिस ने जाँच के बाद पाया कि अमरुद्दीन ने अपने अपहरण का नाटक खुद रचा था। इसके पीछे उसका मकसद कन्नौज नगर पंचायत की चेयरपर्सन के पति मुस्ताक को फँसाना था। पुलिस के मुताबिक पूरे मामले पर अमरूद्दीन पर किसी को शक न हो, इसके लिए उसने खुद अपने पैरों पर कीलें ठोंकी और एक हफ्ते तक कई जगहों पर भटका भी रहा। बीते सोमवार पुलिस ने उसे दादरी बाईपास पर जंजीरों से बँधा पाया। उसकी शिकायत पर मुस्ताक समेत तीन लोगों के ख़िलाफ अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की।

जानकारी के मुताबिक अमरूद्दीन कन्नौज के गुरसहायगंज थाना क्षेत्र का निवासी है। सोमवार की सुबह 5 बजे पुलिस को वह बादलपुर के दादरी बाईपास पर मिला। इस दौरान उसके पैरों में कील ठुकी हुई थी, आँख पर पट्टी बंधी हुई थी और मुँह पर टेप चिपकी थी। पुलिस ने उस समय अमरूद्दीन की हालत देखकर पहले उसका अस्पताल में उपचार करवाया और बाद में उसकी शिकायत पर मुस्ताक समेत 3 पर केस दर्ज किया। हालाँकि शुरुआत में पुलिस ने उसकी बातों पर यकीन कर लिया था, लेकिन बाद में चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित संबंधित खबर

पुलिस ने जाँच में पाया कि अमरूद्दीन का 2 साल से 1.80 लाख रुपए की पेमेंट को लेकर विवाद चल रहा था। जिसके कारण उसने ये सब षडयंत्र रचा। दरअसल, मुस्ताक की पत्नी रुकसाना बेगम कन्नौज में पंचायत की अध्यक्ष हैं और नगर पंचायत ने करीब 2 वर्ष पहले टेंडर जारी करके अमरूद्दीन से अपने क्षेत्र में काम करवाया था। लेकिन ठेकेदार के मुताबिक उसे इस काम की पेमेंट नहीं मिली। जबकि चेयरपर्सन के अनुसार वे पेमेंट कर चुके हैं।

इसी विवाद के चलते 22 अक्टूबर को अमरूद्दीन घर से ये कहकर निकला कि लखनऊ जा रहा हूँ। लेकिन वह घर वापस नहीं लौटा। पुलिस ने मामले में आगे जाँच की तो पता चला कि वह अपने गाँव के एक दोस्त और प्रेमिका के साथ एक होटल में रुका था। उसके बाद वो दतिया, महाराष्ट्र, तेलंगाना गया और 10 बार सिम बदलकर अपनी पत्नी से बात की। अंत में पुलिस की नजर में आने के लिए उसने दादरी बायपास इसलिए चुना क्योंकि उसे इस क्षेत्र की जानकारी थी।

पूरी साजिश का पर्दाफाश होने के बाद अमरूद्दीन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बादलपुर कोतवाली के प्रभारी पटनीश कुमार ने बताया है कि अपने अपहरण की साजिश रचने के आरोप में अमरूद्दीन को गिरफ्तार कर लिया गया है। पैरों में कील ठोकने वाला पत्थर, मोबाइल व सिम कार्ड बरामद कर लिया गया है।

BBC को सोशल मीडिया पर बगदादी को बाप-चाचा टाइप प्यार देने पर पड़ी गाली, अब सुधर गए

बीबीसी ने आईएसआईएस के मारे गए सरगना अबू-बकर अल बगदादी के लिए सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया था। बीबीसी ने बगदादी को ऐसे ही सम्बोधित किया था, जैसे किसी बड़े जनप्रतिनिधि अथवा प्रतिष्ठित लोगों को किया जाता है। बीबीसी की इसके लिए ख़ासी आलोचना हुई थी। जहाँ वाशिंगटन पोस्ट ने बगदादी को ‘इस्लामिक विद्वान’ बताते हुए उसका महिमामंडन किया था, बीबीसी ने उसे ‘अंतर्मुखी’ और उसके परिवार को ‘धर्मनिष्ठ’ बता कर उसकी ख़ूब बड़ाई की थी। बीबीसी बगदादी के बचपन और जवानी के किस्से लेकर आया था और उसे ‘महान’ बताने की कोशिश की थी।

लेकिन सोशल मीडिया में लताड़ क्या पड़ी बीबीसी ने बगदादी के लिए ‘थे‘ की जगह ‘था‘ का प्रयोग करना शुरू कर उसे सम्मान देना बंद कर दिया है। पहले बीबीसी ने लिखा था, ‘बगदादी छिपे हुए थे‘, और अब लिखा है “बगदादी इदलिब में क्यों था?” ये स्क्रीनशॉट बीबीसी के उस न्यूज़ का है, जिसमें उसने बगदादी को सम्मान दिया था:


बीबीसी ने ‘बगदादी मारे गए’ लिखा था

वहीं आलोचना के बाद अपनी दूसरी ख़बर में बीबीसी ने खूँखार आतंकी रहे बगदादी के लिए सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग करना बंद कर दिया है। इसे आप नीचे इस स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं:

पहले बीबीसी ने वाशिंगटन पोस्ट से भी कई क़दम आगे निकलते हुए बगदादी को ऐसे प्रस्तुत किया था, जैसे वो मानव-सेवा के लिए बलिदान हुआ कोई सामाजिक कार्यकर्ता हो। जबकि बगदादी और उसका आतंकी संगठन आईएसआईएस 5 लाख से भी अधिक हत्याओं का गुनहगार है। यह भी कह सकते हैं कि बीबीसी ने बगदादी के मौत के बाद एक तरह से शोक मनाया और उसे ऐसे सम्मान दिया, जैसे वो कोई ऋषि-मुनि रहा हो। बीबीसी ने बार-बार उसके लिए सम्मानजनक शब्दों का प्रयोग किया था।

सबसे बड़ी बात कि बीबीसी ने इस लेख में ‘कथित इस्लामिक स्टेट’ का प्रयोग किया था। अर्थात, बीबीसी यह मानता ही नहीं है कि इस्लामिक स्टेट नामक कोई आतंकी संगठन इस दुनिया में है भी। बीबीसी का क्या ये मतलब था कि 4-6 लाख लोग यूँ ही हवा में मर गए, उन्हें किसी ने नहीं मारा?

भारत का साथ दे रहे देशों पर भी दागेंगे मिसाइल: पाकिस्तानी मंत्री गंडापुर ने दी युद्ध की धमकी

पाकिस्तान के मंत्रियों की तरफ़ से भारत के ख़िलाफ़ आ रहे अजीबोगरीब बयानों का दौर थमता नहीं दिख रहा है। पाकिस्तान के मंत्री अली अमीन गंडापुर ने कहा है कि न सिर्फ़ भारत, बल्कि भारत का समर्थन कर रहे देशों की तरफ़ भी मिसाइलें छोड़ी जाएँगी। गंडापुर पाकिस्तान में कश्मीर मामलों के मंत्री हैं। उन्होंने धमकी दी कि अगर जम्मू-कश्मीर को लेकर तनाव बढ़ जाता है तो फिर पाकिस्तान युद्ध में जाने को विवश हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कश्मीर मसले पर जो भी लोग भारत का साथ दे रहे हैं, उन्हें इस्लामाबाद अपना दुश्मन समझेगा।

गंडापुर ने कहा कि भारत का साथ दे रहे देश यह जान लें कि यदि पाकिस्तान ने एक मिसाइल अपने पड़ोसी पर छोड़ी तो दूसरी उनकी तरफ भी दागी जाएगी। गंडापुर पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान मामलों के मंत्री भी हैं और अक्सर विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। उनके साथ-साथ पाक के रेल मंत्री शेख रशीद ख़ान भी अजीबोगरीब बयान देते रहते हैं। शेख रशीद को नरेंद्र मोदी का नाम लेते ही माइक से करंट लगा था, जिसके बाद उनकी काफ़ी किरकिरी हुई थी। उन्होंने पाकिस्तान के पास पाव भर के परमाणु बम होने का दावा किया था।

पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने गंडापुर का एक वीडियो ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने भारत का साथ देने वाले देशों की तरफ मिसाइल छोड़ने की धमकी दी है। नायला ने लिखा कि पाकिस्तानी मंत्री गंडापुर फिर से चर्चा में हैं। साथ ही उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा, “मैं आशा करती हूँ कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इन बातों को सुन रहे हैं।” गंडापुर का बयान ऐसे समय में आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी के दौरे पर हैं और उन्होंने सऊदी के किंग और क्राउन प्रिंस से मुलाक़ात की। इस दौरान भारत और सऊदी के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है, क्योंकि सुरक्षा परिषद और यूएन जनरल असेंबली से लेकर एफएटीएफ तक, उसे हर जगह निराशा हाथ लगी है और भारत का हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारी रहा। जहाँ इमरान ख़ान यूएनजीए में कश्मीर, इस्लाम, भारत और पैगम्बर मुहम्मद की बातें करते रहें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण को लेकर भारत का पक्ष रखा और अपने भाषण में एक बार भी पाकिस्तान का जिक्र नहीं किया। ऐस में पाकिस्तान के मंत्रियों की तरफ़ से इस तरह के बयानों का आना स्वाभाविक है।

1 नवंबर को शपथ ले सकते हैं फडणवीस, ​शिवसेना के सरकार में नहीं होने के आसार

महाराष्ट्र में भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक आज (अक्टूबर 30, 2019) मुंबई में होगी। बैठक में औपचारिक तौर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विधायक दल का नेता चुने जाने के आसार हैं। बैठक के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पार्टी उपध्याक्ष अविनाश राय खन्ना को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाकर भेजा है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि फडणवीस शुक्रवार (नवंबर 1, 2019) को दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। भाजपा सदन में विश्वासमत हासिल करने को लेकर आश्वस्त है। शिवसेना नेता पोस्टरों के माध्यम से आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री का चेहरा बना कर पेश कर रहे हैं, ताकि भाजपा पर दबाव बनाया जा सके। फडणवीस ने उद्धव ठाकरे की बात को नकारते हुए कहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान किसी 50-50 फॉर्मूले पर बात नहीं हुई थी।

मुंबई मिरर के सूत्रों के अनुसार, शिवसेना के न मानने की स्थिति भाजपा महाराष्ट्र में अल्पमत की सरकार चला सकती है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि 15 निर्दलीय विधायकों के साथ विधानसभा में फडणवीस के समर्थन में कुल संख्या 120 हो जाएगी। एनसीपी के वॉकआउट के बाद भाजपा विश्वासमत साबित कर देगी और अगले 6 महीने बाद फिर से फ्लोर टेस्ट पास करेगी।

महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने कहा है कि 50-50 फॉर्मूला वाली उद्धव की माँग पर ख़ुद अमित शाह उनसे बातचीत कर सकते हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि सत्ता में बराबर की भागीदारी को लेकर बात हुई थी, लेकिन 50-50 को ग़लत अर्थ में लेते हुए शिवसेना मुख्यमंत्री पद की माँग कर रही है। भाजपा संसद संजय काकडे ने दावा किया था कि 45 शिवसेना विधायक भाजपा के संपर्क में हैं और वो भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करना चाहते हैं। शरद पवार के विपक्ष में बैठे के ऐलान के साथ ही कॉन्ग्रेस द्वारा शिवसेना को साथ लेने की कोशिशों को भी झटका लगा है।

इससे पहले मंगलवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के साथ बैठक रद्द कर दी थी। गौरतलब है कि 288 सीट वाली महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में भाजपा 105 सीटों पर जीत के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, वहीं शिवसेना ने 56 सीटों पर जीत दर्ज की है। राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी को 54 और कॉन्ग्रेस को 44 सीटें मिली हैं। ऐसे में सत्ता पर काबिज होने के लिए पर्याप्त बहुमत किसी एक दल के पास नहीं है।

इमरान खान का ‘न्यू पाकिस्तान’: 70 साल पुराना अहमदिया मस्जिद ध्वस्त

पाकिस्तान में गैर-मुस्लिम करार दिए जा चुके अहमदियों पर प्रशासन का अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा है। खबर है कि बहावलपुर जिले के हासिलपुर गाँव में अहमदियों का 70 साल पुराना एक मस्जिद ध्वस्त कर दिया गया। इसकी जानकारी खुद समुदाय के प्रवक्ता सलीमुद्दीन ने दी।

सलीमुद्दीन ने बताया, “ हासिलपुर के असिस्टेंट कमिश्नर ने बालदिया कार्यकर्ताओं के साथ एक टीम बनाई और मुराद जिला स्थित अहमदियों के 70 वर्ष पुराने इबादत स्थल को बिना किसी सूचना के नष्ट कर दिया।”

इस घटना पर पाक प्रशासन ने अपनी सफाई में कहा है कि मस्जिद का निर्माण अतिक्रमण कर किया गया था। वहीं, सलीमुद्दीन का कहना कि मस्जिद का निर्माण समुदाय के स्वामित्व वाली जगह पर हुआ था और ये मस्जिद यहाँ पर कई दशकों से था।

पाकिस्तानी अहमदियों का आरोप है कि सरकार ने अपराधियों के ख़िलाफ़ एक्शन लेने के बजाए उनके एक साथी पर ही झूठे आरोपों में मामला दर्ज कर लिया है। समुदाय के लोगों का कहना है, ” पुलिस ने उन लोगों पर मामला दर्ज नहीं किया जिन्होंने मस्जिद नष्ट किया। बल्कि उन्होंने उनके समुदाय के ही एक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया, क्योंकि उसने पूरा वाकया कैमरे में कैद किया था।”

गौरतलब है कि पाकिस्तान में अहमदियों पर अत्याचार की कहानी दशकों पुरानी है। साल 1974 में पहले इन्हें पाकिस्तानी संसद ने गैर मुस्लिम करार दिया था और फिर कुछ साल बाद प्रतिबंध लगा दिया गया था कि ये लोग खुद को मुस्लिम न कहें। बाद में इन्हें इनके धार्मिक आदर्शों को पढ़ाए जाने से रोका जाने लगा और धीरे-धीरे इनके हज जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया।

इसके अलावा पाकिस्तान में अन्य अल्पसंख्यकों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। हाल में कई ऐसे मामले सामने आए , जिनमें हिंदू और सिख लड़कियों का अपहरण कर पहले उनका धर्म-परिवर्तन कराया गया और बाद में उनका निकाह किसी मुस्लिम युवक से करवा दिया। पाकिस्तान में हिंदू प्रिंसिपल, हिंदू मंदिर, हिन्दुओं की दुकानों पर प्रहार की खबर भी ज्यादा पुरानी नहीं हैं। जिसमें बाद में खुलासा हुआ था कि हिंदुओं पर हमला किसी घटना का आक्रोश नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी ताकि हिंदू बच्ची के अपहरण के मामले को दबाया जा सके।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान नया पाकिस्तान बनाने के वादे से सत्ता में आए थे। लेकिन, उनके कार्यकाल में भी पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव और उन्हें प्रताड़ित करने की घटनाएँ थम नहीं रही है। हाल की कुछ घटनाओं में तो उनकी पार्टी के कार्यकर्ता भी संलिप्त रहे हैं।