Home Blog Page 5389

भालुओं का गुप्तांग खाता था सेक्स-पावर बढ़ाने के लिए: शिकारी जसरत को STF ने MP में किया गिरफ़्तार

मध्य प्रदेश में वन अधिकारियों को बड़ी सफ़लता हाथ लगी है। मध्य प्रदेश की वन्य STF (स्पेशल टास्क फ़ोर्स- वाइल्डलाइफ) को सबसे कुख्यात बाघ शिकारियों में से एक यारलेन उर्फ़ लूज़लेन उर्फ़ जसरत को हिरासत में लेने में कामयाबी हाथ लगी है। जसरत को विलुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल बाघों का बड़ी संख्या में शिकार करने के अलावा एक और अजीब वजह से जाना जाता है- वह भालुओं का शिकार इसलिए करता था ताकि उनके जननांग (पेनिस) को खा सके। उसके मुताबिक इससे उसकी खुद की यौन शक्ति में इजाफ़ा होता था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 30-वर्षीय जसरत की जोरों शोरों से तलाश लगभग 6 साल से जारी थी।

2014 में जसरत जमानत पर निकल कर गायब हो गया। पुलिस ने उसे तलाश करने की कोशिश की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद भी मध्य प्रदेश की SIT ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। अंत में पुलिस ने उसे गुजरात के वडोदरा में ढूँढ़ ही निकाला- हाइवे के पास ही बनी एक झोंपड़ी में, जहाँ वह हाल ही में आया था।

जसरत को गिरफ़्तार करने के बाद मध्य प्रदेश के वन अधिकारियों ने शिकारी के पास से तीन फ़र्ज़ी वोटर आईडी कार्ड और नकली आधार कार्ड बरामद किए। इसके अलावा पूछताछ में भी उसने कई सारे राज़ खोले- मसलन वह शिकारी महज़ 15 साल ही उम्र से बना। तब से अब तक उसके हाथों जान गँवाने वाले निरीह जानवरों में कई सारे बाघों, स्लॉथ भालुओं के अलावा सैकड़ों मोर और जंगली सूअर भी शामिल हैं। वह एक अजीब से ‘लेनदेन’/बार्टर सिस्टम से काम करता था- इसके तहत गाँवों के सरपंचों पर मुँह बंद रखने, उन्हें अपनी गतिविधियों के बारे में अधिकारियों को आगाह करने से रोकने के लिए अपने शिकार में से जंगली सूअर मुफ़्त में दे देता था।

जसरत को गिरफ़्तार करने वाली एसटीएफ़ को वन विभाग ने स्लॉथ भालुओं की लाशें बिना जननांग के मिलने के बाद बनाया था। मीडिया सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि जसरत ने इसमें अपना हाथ होने की बात स्वीकार कर ली है। जसरत STF का पहला असाइनमेंट था।

एक एसटीएफ़ अधिकारी के अनुसार, “यारलेन अंतरराष्ट्रीय बाज़ार को सप्लाई करता था, लेकिन उसकी पहुँच दिल्ली तक ही थी और वह सीमापार की लिंक के बारे में अनभिज्ञ था।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन बिजनेसमैनों के हुक्म पर यारलेन उर्फ़ जसरत यह करता था, उनमें से एक छत्तीसगढ़ का है। एसटीएफ़ का यह भी दावा है कि यारलेन की गिरफ़्तारी के साथ पेंच अभ्यारण्य से गुमशुदा मादा बाघ T13 की गुत्थी भी सुलझ गई है, जिसे मारने की बात उसने कबूल ली है।

दार्जिलिंग में TMC की गुंडई: खुखरी, चाकू, पत्थर से भाजपा सांसद पर जानलेवा हमला, कई घायल

दार्जिलिंग के सांसद राजू बिस्ता ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया है। एक प्राइमरी स्कूल के उद्घाटन समारोह में जाते वक़्त सांसद राजू बिस्ता पर हमला हुआ। इस हमले में सांसद के साथ जा रहे गोरखा जनमुक्ति मोर्चा तथा भाजपा कार्यकर्ताओं को भी इन गुंडों की हरकत का सामना करना पड़ा। भाजपा सांसद राजू बिस्ता का आरोप है कि यह हमला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों ने किया है। घटना का विस्तार से विवरण देते हुए उन्होंने बताया कि यह घटना तब हुई जब वे आज (22 अक्टूबर) को कालिम्पोंग के सिंजी के एक स्कूल के उदघाटन के लिए जा रहे थे। राजू के अनुसार यह वारदात मंदिर खोला, चार पुल के करीब हुई जहाँ हमलावरों की तादाद 80-100 के करीब थी।

https://platform.twitter.com/widgets.js

घटना का ज़िक्र करते हुए दार्जिलिंग के सांसद ने बताया, “हमला करने वाले टीएमसी के अधिकतर कार्यकर्ता नशे में धुत होकर नारे लगा रहे थे, मगर जल्द ही उनका यह प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि सभी ने खुकरी, चाकू और कई तेज़ धारदार हथियार लेकर हम पर पत्थरबाजी करते हुए मारने की कोशिश की।” सांसद बिस्ता ने बताया कि इस हमले में भाजपा और उनके सहयोगी दल गोरखा जन मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं को काफी गंभीर चोटें आई हैं। घटना को अंजाम देने वाले हमलावर पहले से ही घात लगाकर बैठे थे। इस हमले के दौरान सांसद को पत्थरबाजी से बचाते वक़्त उनके निजी सुरक्षाकर्मी के सीने और पैर पर पत्थर लगने के चलते गहरी चोट आ गईं।

ममता सरकार पर निशाना साधते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि बंगाल पुलिस की मदद के बगैर यह हमला नहीं हो सकता था। उन्होंने बताया कि बिना किसी विवाद के भाड़े के गुंडों से कराए जाने वाले इस हमले के बारे में उन्हें पहले से सूचना मिल गई थी। इसके बाद सांसद बिस्ता ने रात को ही कालिम्पोंग के पुलिस सुप्रीटेंडेंट एसपी यादव को बुलाकर इस संगठित उपद्रव से खुदके प्रति संभावित खतरे के बारे में बात की थी। बावजूद इसके ऐसी घटना का होना यह बताता है कि आत-ताइयों और हमलावरों को पूरी छूट दे गई। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की माँग करने के बावजूद उन्हें और उनके समर्थकों को जानलेवा हमला जानलेवा हमला झेलना पड़ा।

प्रदेश सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इस फसाद को अंजाम देने का यही मकसद था कि सांसद के रूप में वे (राजू) अपना काम ठीक से न कर सकें। उन्होंने कहा कि बतौर सांसद वे अपना काम पूरा कर सकें इसके लिए पर्याप्त सुरक्षा की माँग करते हुए उन्होंने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव और डीजीपी को भी सूचित किया था। मगर इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से कोई सुरक्षा मुहैया नहीं कराइ गई उलटे सांसद राजू को कहा गया कि स्थिति पूरी तरह सामान्य है और उन्हें कोई फ़िक्र करने की ज़रुरत नहीं। बिस्ता ने कहा कि पुलिस इस पूरे मामले में मूक दर्शक बनी हुई है जबकि पिछले एक महीने में उनपर हुए हमले का यह दूसरा वाकया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस पर हमले और हुडदंग का सीधा आरोप लगाते हुए सांसद ने कहा कि स्वामी विवेकानंद, रवीन्द्रनाथ टैगोर व नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जैसे रत्न पैदा करने वाली बंगाल की धरती आज हत्यारे और तानाशाही के रवैये वाली तृणमूल के गुंडों का अड्डा बन गई है।

सावरकर की तारीफ करने पर सिंघवी से नाराज हुईं सोनिया, माँगी सफाई

कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक सिंघवी द्वारा सोशल मीडिया पर वीर सावरकर की तारीफ किए जाने के बाद खबर है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी उनसे नाराज हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए चल रही वोटिंग के बीच सिंघवी की आई सावरकर पर टिप्पणी इस नाराजगी का मुख्य कारण है।

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि चूँकि सिंघवी का सावरकर पर बयान उस दौरान आया जब हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वोटिंग चल रही थी। इसलिए कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष उनसे नाराज हो गईं और अपने एक विश्वस्त को फोन करके सिंघवी से उनके बयान पर सफाई माँगी।

गौरतलब है कि कल सिंघवी ने सोशल मीडिया पर खुलकर कहा था कि सावरकर ने न केवल आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी बल्कि वे देश के लिए जेल भी गए थे। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “निजी तौर पर मैं सावरकर की विचारधारा से सहमत नहीं हूँ। लेकिन इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि वे एक काबिल व्यक्ति थे जिन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दलितों के अधिकार की लड़ाई लड़ी और देश के लिए जेल गए।”

इसके बाद वे यहीं नहीं रुके, उन्होंने स्वच्छता अभियान के प्रसार के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई कोशिशों की भी सराहना की। उन्होंने लिखा, “जहाँ हकदार हों, वहाँ प्रशंसा की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गाँधी जी के स्वच्छता के संदेशों को प्रसारित करने के लिए बॉलीवुड की मदद ली। इससे अधिकतर लोगों का ध्यान इस मुद्दे पर जाएगा।”

हालाँकि, सावरकर वाले बयान पर सिंघवी ने साफ किया था कि वे सावरकर की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन शाम होते-होते सवालों की झड़ी इतनी लग गई की उन्हें अपनी सफाई हर जगह पेश करनी पड़ी। इंडिया टुडे के मुताबिक पार्टी सूत्रों ने उन्हें बताया कि सिंघवी को कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता का फोन गया था और उनसे ट्वीट के कथ्य और इसकी टाइमिंग पर सवाल किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक सिंघवी को ये कॉल सोनिया गाँधी के कहने पर गया, जो कि सिंघवी के ट्वीट से नाराज दिखीं।

कमलेश तिवारी हत्याकांड: महमूदाबाद में धारा 144, सोशल मीडिया पुलिस ने बढ़ा दी निगरानी

हिन्दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुई हत्या के बाद सीतापुर जिले में स्थित उनके गृह नगर महमूदाबाद में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। स्थिति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए क्षेत्र में कल (सोमवार, 22 अक्टूबर, 2019) से धारा 144 की निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। ऐसा करने का आदेश डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा दिया गया है। प्रशासन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की निगरानी भी बढ़ा दी है, ताकि सोशल मीडिया के इस्तेमाल से हिंसा भड़काने की कोशिशों पर लगाम लगाई जा सके। गौरतलब है कि हिन्दू महासभा के कमलेश तिवारी की हत्या गत शुक्रवार (18 अक्टूबर, 2019) को उनके ही कार्यालय में कर दी गई थी।

प्रशासन क्षेत्र में साम्प्रदायिक तनाव की संभावना को लेकर चिंतित है। परसों (रविवार, 20 अक्टूबर, 2019 को) डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने भड़काऊ, उकसाने वाला भाषण दिया था। पुलिस के अनुसार सरस्वती ने महमूदाबाद में कमलेश तिवारी के परिवार से मिलने के बाद भड़काऊ भाषण दिया था, और इससे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ उनके भाषण से नफ़रत भड़क उठी थी। महंत और उनके शिष्यों के खिलाफ पुलिस ने इस ‘हेट स्पीच’ के लिए मुकदमा दर्ज कर लिया है।

मीडिया सूत्रों के मुताबिक कमलेश तिवारी की हत्या से उपजी परिस्थिति के अलावा त्यौहारी मौसम भी पुलिस द्वारा निगरानी बढ़ाए जाने का कारण है। धारा 144 लागू किए जाने के अलावा पुलिस ने क्षेत्र की फोटो या वीडियो मीडिया द्वारा लिए जाने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

सीतापुर के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अखिलेश तिवारी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्थानीय मीडिया को क्षेत्र में आने से रोक दिया गया है। ऐसा करने के पीछे सुरक्षा कारण हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हालाँकि, प्रशासन मीडिया की आज़ादी का सम्मान भी बहुत करता है, लेकिन इस समय सबसे महत्वपूर्ण चीज़ कमलेश तिवारी के परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखना है। जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) एल आर कुमार ने कहा कि महमूदाबाद कस्बे की स्थिति हाल फ़िलहाल में सामान्य है, और पुलिस हालात की निगरानी बहुत ध्यान से कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि डासना मंदिर के पुजारी और उनके समर्थकों पर भड़काऊ भाषण के लिए मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, और सोशल मीडिया की भी निगरानी बहुत कठोरता के साथ की जा रही है।

इन सभी के बीच कमलेश तिवारी की पार्टी हिंदू महासभा ने उनको मरणोपरांत ‘हिन्दूरत्न’ सम्मान से नवाज़े जाने की घोषणा की है। इसके अलावा हिन्दू महासभा के लखनऊ ऑफ़िस के सामने तिवारी का प्रतिमा लगाई जाएगी।

पूरे चुनाव में न सोनिया, न ही प्रियंका दिखीं, राहुल मुंबई तक ही सीमित, हम हारते हैं तो कॉन्ग्रेस जिम्मेदार: NCP

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के परिणामों के ऐलान से पहले ही विपक्ष में हाहाकार मचना शुरू हो गया है। राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता माजिद मेमन ने एग्जिट पोल पर सवाल उठाए और साथ ही कॉन्ग्रेस पर हार का ठीकरा भी फोड़ा है। माजिद मेमन ने कहा, “पूरे चुनाव में न तो कॉन्ग्रेस दिखी, सोनिया गाँधी और न ही प्रियंका गाँधी। राहुल गाँधी ने मुंबई में ही कुछ रैली की। उनके नेता ही उनकी रैली से नदारद थे। अगर हम हारते हैं तो कॉन्ग्रेस के नेताओं के बीच की अंतर्कलह इसकी जिम्मेदार होगी।”

मेमन ने कहा कि यदि महाराष्ट्र में गठबंधन हारा तो इसके लिए कॉन्ग्रेस अधिक जिम्मेदार होगी। हालाँकि उन्होंने कहा कि शिकस्त के लिए एनसीपी भी जिम्मेदार होगी। NCP के नेता माजिद मेमन ने कहा कि शरद पवार को काफी अच्छा रिस्पांस मिला है, वहीं उन्होंने अपनी गठबंधन की सहयोगी पार्टी कॉन्ग्रेस को लेकर कहा है कि कॉन्ग्रेस की तरफ से कुछ नर्मी दिखाई दी। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने मुंबई में ही कुछ दौरे किए। कॉन्ग्रेस के नेताओं ने कुछ विशेष मेहनत नहीं की। उन्होंने कहा, “यदि हमें सफलता नहीं मिलती है तो कॉन्ग्रेस जिम्मेदार होगी।”

माजिद मेमन का कहना है कि पूरे प्रचार में सिर्फ शरद पवार ने अकेले मेहनत की है। NCP नेता ने कहा, “हम मानते हैं कि जनता ने हमें सरकार बनाने का आदेश नहीं दिया है। कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करना हमारी मजबूरी थी। अकेले चुनाव लड़ना संभव नहीं था। इस चुनाव में पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, सीएम फडणवीस और उद्धव ठाकरे ने काफी मेहनत की है।” साथ ही उन्होंने कहा कि हकीकत तो ये है कि जब आँकड़े आएँगे तो तस्वीर साफ होगी। 24 तक प्रतीक्षा करनी होगी। ईडी को अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) को 288 सीटों पर हुई वोटिंग हुई। चुनाव परिणाम 24 अक्टूबर को आने वाला है। वोटिंग के बाद आए अधिकत एग्जिट पेल में बीजेपी की फिर से वापसी की उम्मीद जताई जा रही है। मीडिया हाउस द्वारा बीजेपी-शिवसेना को 166 से 194 सीटें जीतने की संभावना जता रही है, जिसमें से अकेले बीजेपी के खाते में 109 से 124 सीटें आ सकती है।

‘एक बड़े पाकिस्तानी मीडिया बिजनेसमैन ने मेरा रेप किया, किसी अखबार-चैनल ने नहीं छापी रिपोर्ट’

पाकिस्तान के मशहूर फिल्म निर्माता जमशेद महमूद ‘जामी’ ने 13 साल पहले अपने साथ हुई रेप की घटना का खुलासा किया है। सिलसिलेवार क्रम में किए अपने ट्वीट में जामी ने लिखा कि 13 साल पहले उनके साथ एक बड़े मीडिया कारोबारी ने रेप किया था। बता दें कि फिल्म-निर्माता जामी #Metoo अभियान के समर्थन में शुरुआत से ही मुखर होकर बोलने वालों में से एक हैं।

जामी ने बताया कि उस व्यक्ति से उनके घनिष्ट सम्बन्ध हुआ करते थे मगर जब यह घटना हुई तो जामी को इस बात का मलाल होने लगा कि उन्होंने क्यों उस इंसान की आँखें नहीं नोंच ली। अपने ट्विटर एकाउंट से जामी ने बताया कि जब उन्होंने अपने कुछ करीबी दोस्तों को इस बारे में बताया तो किसी ने इस पर गंभीरता से नहीं सोचा। जामी ने लिखा “मैंने कई बार उस कारोबारी का नाम लेकर भी बताने की कोशिश की मगर फिर हालत यह हुई कि मुझे खुद ही फील होने लगा जैसे मैं खुद ही कोई जोकर हूँ।”

ऐसी परिस्थिति में अकेला पड़ जाने के बाद के बारे में जामी ने लिखा ” मुझको लगभग 6 महीने आगा खान में थेरेपी से गुज़रना पड़ा, तमाम दवाइयों के इस्तेमाल से मेरा सरदर्द बढ़ गया था, इसके बाद मैंने कुछ महीनों के लिए पाकिस्तान ही छोड़ दिया।”

फिल्मकार जमशेद ने #Metoo के कमज़ोर होते अभियान पर स्टोरी पेश की है। हाल ही में कुछ दिनों पहले लाहौर के एक टीचर ने एक छात्रा द्वारा यौन-उत्पीड़न का झूठा आरोप लगाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। इस मामले पर लिखते हुए जामी ने लिखा था कि “मीटू ख़त्म हो रहा है, मैं चाहता हूँ कि एक प्रकार से अपने अनुभव भी शेयर कर सकूँ।”

जामी ने लिखा, “एक झूठा आरोप का यह मतलब नहीं होता कि सभी पीड़ित झूठे हैं? मैं हैरान हूँ कि यह लोग पीड़ितों को निशाना बना रहे हैं। इसीलिए आज मैं 13 साल बाद यहाँ यह बोलने के लिए खड़ा हूँ कि ऐसी घटनाओं के 99.9 प्रतिशत मामले दरअसल सच्चे हैं।”

जमशेद महमूद जामी ने बताया कि उसका रेप एक बड़े मीडिया कारोबारी ने किया था, उसकी इसी बात पर पाकिस्तानी मीडिया की कई वेबसाइट्स ने कोई चर्चा तक नहीं की। इसपर अपने ट्वीट में लिखते हुए जमी ने बताया “अधिकांश चैनलों से यह स्टोरी एक ही साथ गायब हो गई। यह कोई खराबी नहीं बल्कि ताकत है जिसकी मैं बात कर रहा था, अब कहाँ गए वो सत्यान्वेषी?”

जामी बताते हैं कि यह स्टोरी डॉन ने ली ज़रूर मगर यह वहाँ कभी छपी ही नहीं, जिओ जिसकी शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि – एक बड़े मीडिया कारोबारी ने जामी का रेप किया था, थोड़े समय बाद ही वे अपनी इस रिपोर्ट को लेने पर विचार करने लगे। मीडिया से रेप करने वाले उस बड़े मीडिया कारोबारी से जुड़ी सारी जानकारी गायब कर दी गईं। डॉन और कई पाकिस्तानी वेबसाइट्स से जामी की कहानी हटने के बाद तो जैसे सोशल मीडिया पर कई ट्विटर यूजर्स ने इस पर अपनी राय रखी।

चिदंबरम का क्या बड़ा हो गया है? अधीर रंजन ने प्रयोग किया ‘लीगल शब्द’ तो सोशल मीडिया ने पूछे सवाल

ट्विटर पर नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने पी चिदंबरम की जमानत के लिए ‘Enlargement’ शब्द का प्रयोग किया, जो कि एक ‘Highly technically legal term’ है, लेकिन कई लोगों ने समझा कि वो पी चिदंबरम के लिए अजीबोगरीब भाषा (अश्लील) का प्रयोग कर रहे हैं। दरअसल, लोगों ने समझा कि अधीर रंजन कह रहे हैं कि पी चिदंबरम का बहुत बड़ा (क्या?) हो गया है और ये सच्चाई की जीत है। इसे लेकर लोगों ने कई फनी ट्वीट्स किए।

ट्विटर पर लोगों ने ऐसा समझा कि इस ट्वीट में अधीर रंजन का सीधा कहना है कि पी चिदंबरम का ‘बहुत बड़ा हो गया है’। उनके इस ट्वीट के बाद लोगों ने पूछा कि आखिर पी चिदंबरम के पास ऐसा क्या है, जो बड़ा हो गया है और उससे उनका आकर्षण बढ़ गया है? एक ट्विटर यूजर ने ‘वेलकम’ फिल्म के अक्षय कुमार के डायलॉग का प्रयोग करते हुए पूछा ,’भाई साहब, ये किस लाइन में आ गए आप?

एक अन्य ट्विटर यूजर ने पूछा कि क्या अधीर रंजन इससे पहले किसी कामुक पत्रिका के संपादक थे? एक अन्य यूजर ने मजाकिया अंदाज़ में अंदेशा जताया कि ऐसी अंग्रेजी का प्रयोग करने पर कहीं चिदंबरम पर एकाध केस और न हो जाए!

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आईएनएक्स घोटाले मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को जमानत मिल गई है। हालाँकि, चिदंबरम अब भी घर नहीं जा पाएँगे, क्योंकि उन्हें ये राहत सीबीआई द्वारा दायर केस में मिली है। जबकि वह अब भी प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में हैं। यहाँ बता दें कि आईएनएक्स घोटाले मामले में सीबीआई और ईडी ने चिदंबरम पर अलग-अलग केस फाइल किया हुआ है।

अदालत को हमेशा रेप पीड़ित बच्चों की बातों पर भरोसा करना चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने चाइल्ड रेप के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि इस तरह के केस में अदालत को हमेशा बलात्कार पीड़ित बच्चों की गवाही पर ही भरोसा करना चाहिए। कोर्ट को इस तरह की गलतफहमी को नजरअंदाज करना चाहिए कि पीड़ित बच्चे किसी तरह के दबाव या कसम की वजह से झूठ बोलते हैं। 

जस्टिस एस वैद्यनाथन ने कहा, “बलात्कार पीड़ितों के मामलों में न्यायालय को बच्चे द्वारा कही गई बातों पर विश्वास करना होगा। ये गलत धारणाएँ हैं कि बच्चे झूठ बोलते हैं या फिर माता-पिता उन्हें दूसरों के खिलाफ छेड़छाड़ की झूठी शिकायतें करना सिखाते हैं। न्यायालय द्वारा बाल शोषण के मामलों पर प्रतिक्रिया देते समय इस तरह की मिथकों का प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।”

उच्च न्यायालय ने इसका अवलोकन 2011 में हुए एक मामले की सुनवाई करते हुए किया, जिसमें एक व्यक्ति ने पाँच वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न किया था। बार और बेंच में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक एक ट्रायल कोर्ट ने गणपति को दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उस पर 2,000 रुपए का जुर्माना लगाया। गणपति ने विभिन्न मामलों में ट्रायल कोर्ट की सजा को चुनौती दी, जिसमें दो दिन देरी से पुलिस शिकायत और दुश्मनी निकालने के लिए गवाही देना आदि शामिल था।

हालाँकि, न्यायमूर्ति वैद्यनाथन ने बचाव पक्ष के वकील द्वारा दी की गई कई दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि कोई भी पीड़ित व्यक्ति से शिकायत करने के लिए पुलिस स्टेशन जाने की उम्मीद नहीं कर सकता है, क्योंकि किसी लड़की के साथ बलात्कार का न केवल पीड़िता के शरीर पर बल्कि उसकी विनम्रता/ शालीनता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

अदालत ने मेडिकल परीक्षक की गवाही पर ध्यान देते हुए कहा कि इससे उबरने के लिए पीड़िता को जिस दर्द का सामना करना पड़ता है, उसका अनुकरण नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही न्यायालय ने ये भी पाया कि आरोपित ने जो पीड़िता के माता-पिता पर दुश्मनी की वजह से रेप लगाने की बात कही थी, वह भी निराधार निकली। 

जिसके बाद अदालत ने आरोपित के अपील को खारिज कर दिया था और बलात्कार के लिए ट्रायल कोर्ट की सजा को बरकरार रखा था। साथ ही कोर्ट ने यह भी ध्यान दिलाया कि आंशिक पेनेट्रेशन भी बलात्कार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक बच्ची के साथ हुआ बलात्कार किसी व्यस्क महिला के साथ हुए बलात्कार से अधिक गंभीर है।

पाकिस्तान ने भारत से किया सीजफायर का रिक्वेस्ट… अपना काम निकलते ही शुरू कर दी फायरिंग

भारतीय सेना के POK स्थित आतंकी लॉन्च पैडों पर आर्टिलरी हमले के द्वारा आतंकी ढाँचों की तबाही के महज़ कुछ दिन बाद ही पाकिस्तानी सेना ने भारतीय सेना से आधिकारिक संवाद स्थापित कर हमला न करने की गुज़ारिश की क्योंकि उसके पत्रकार LOC के दौरे पर आ रहे थे। और भारतीय सेना ने उसकी दरख्वास्त का सम्मान करते हुए अपनी बंदूकों का मुँह बंद भी रखा। लेकिन अपना काम सध जाने के बाद पाकिस्तानी सेना ने खुद सीज़फायर का उल्लंघन शुरू कर दिया। उसकी फायरिंग के चलते LOC के पास स्थित स्कूलों में बच्चे भी स्कूल के अंदर ही फंसे रह गए

मंगलवार (22 अक्टूबर, 2019) को नियंत्रण रेखा (LOC) के पास स्थित पुंछ जिले के नागरिक/सिविलियन इलाकों पर पाकिस्तान ने भारी गोलीबारी की। इससे कम से कम दो नागरिकों के घायल होने की खबरें मीडिया में आ रहीं हैं। पाकिस्तानी सेना का हमला और सीज़फायर उल्लंघन पुंछ जिले के बालाकोट और मेंढर सेक्टरों में हुआ। इसके अलावा भारतीय सेना के इंजीनियरों ने पुंछ के कर्मारा गाँव में पाकिस्तानी सेना द्वारा दागे गए तीन जिन्दा (लाइव) मोर्टार शैलों को भी डिफ्यूज़ किया

इसके पहले रविवार (20 अक्टूबर, 2019) को भारतीय सेना ने LOC के उस पार तंगधार और मेंढर सेक्टरों के आमने सामने स्थित 4 आतंकी लॉन्च पैडों को नेस्तनाबूद कर दिया था। घुसपैठ को बढ़ावा देनेके लिए पाकिस्तानी सेना द्वार किए गए सीज़फायर उल्लंघन की इस जवाबी कार्रवाई में 6-7 आतंकियों के अलावा पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए थे।

उस कार्रवाई को पाकिस्तान ने अपने नागरिक क्षेत्रों पर किया गया हमला बताते हुए विदेशी राजनयिकों को क्षेत्र के भ्रमण के लिए आमंत्रित किया था। उसने वहाँ आतंकी कैम्पों की मौजूदगी या उनको हुए नुकसान की बात को स्वीकारने से साफ़ इंकार कर दिया। विदेशी राजनयिकों की एक टीम को नीलम घाटी का दौरा कराया गया था। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता डॉ. मुहम्मद फैसल के अनुसार “हम डिप्लोमैटिक कॉर्प्स को आज LOC पर ले जा रहे हैं। भारतीय सेना प्रमुख के दावे बस दावे ही हैं।” पाकिस्तान ने भारतीय डिप्टी हाई कमिश्नर गौरव अहलूवालिया को डेलीगेशन का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन अहलूवालिया ने आमंत्रण स्वीकार नहीं किया था।

और जब पाकिस्तान पत्रकारों और विदेशी राजनयिकों को POK स्थित LOC पर ले गया था, उसी समय POK के मुज़फ़्फ़राबाद इलाके में पाकिस्तानी सरकार के ख़िलाफ़ बड़े विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए। इन विरोध प्रदर्शनों में पाकिस्तान के चंगुल से आज़ादी के नारे भी लगे और आम लोगों का पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के जवानों के साथ टकराव भी हुआ।

नवजोत सिंह सिद्धू की बीवी ने कॉन्ग्रेस से दिया इस्तीफा, लोकसभा चुनाव में नहीं मिला था टिकट

पंजाब के पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने कॉन्ग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी अब महाराष्ट्र और हरियाणा के बाद पंजाब में भी कॉन्ग्रेस को संभालने में नाकाम रही हैं। नवजोत सिंह सिद्धू कुछ दिनों पहले तक कॉन्ग्रेस के लिए काफ़ी मुखर रहे थे और कॉन्ग्रेस की सभाओं के लिए सबसे ज्यादा उनकी ही माँग होती थी। लेकिन, पिछले वर्ष अमृतसर में हुए ट्रेन हादसे के बाद सिद्धू दम्पति की छवि काफ़ी ख़राब हो गई थी क्योंकि जिस दशहरा के कार्यक्रम में ये घटना हुई थी, उसमे नवजोत कौर ही मुख्य अतिथि थीं लेकिन इस घटना के बाद वो निकल गई थीं। अब उनके करीबियों ने कहा है कि वह बतौर सामाजिक कार्यकर्ता पंजाब की सेवा करेंगी।

पंजाब में लोकसभा चुनाव के दौरान नवजोत सिंह सिद्धू और कैप्टेन अमरिंदर सिंह के बीच काफ़ी खींचतान देखने को मिली थी। कैप्टेन अमरिंदर सिंह के सामने सिद्धू की एक न चली और उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद यह भी ख़बर आई थी कि ज्यादा बोलने के कारण सिद्धू की आवाज़ जा सकती है, इसीलिए उन्हें डॉक्टर ने कम बोलने की सलाह दी है और उनका इलाज चल रहा है। नवजोत सिंह सिद्धू इसके बाद वैष्णोदेवी चले गए थे। कहा जा रहा था कि वह अब अध्यात्म की तरफ रुख कर रहे हैं।

अभी हाल ही में अमृतसर हादसे की बरसी पर पंजाब सरकार से गुस्साए 59 मृतकों के परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। हादसे के दौरान सिद्धू दम्पति ने भी कई बड़े-बड़े वादे करते हुए कहा था कि वे पीड़ित परिवारों को गोद लेंगे, घायलों का इलाज करवाएँगे और मृतकों के परिजनों के लिए नौकरी की व्यवस्था करेंगे। हालाँकि, तब सिद्धू के मंत्री रहते भी यह सब नहीं हो सका। कुल मिलकर सिद्धू दम्पति की छवि लगातार खराब होती चली गई और पंजाब कॉंग्रेस में भी उन्हें कोई नहीं पूछ रहा था।

कहा तो ये भी जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के दौरान नवजोत कौर अमृतसर से टिकट चाहती थीं लेकिन कॉन्ग्रेस ने उन्हें टिकट से मरहूम रखा। इसके बाद से ही वह पार्टी ने नाराज़ चल रही थीं। हालाँकि, नवजोत सिंह सिद्धू ने मंत्रिमंडल से भले ही इस्तीफा दे दिया हो, वो पार्टी में बने हुए हैं। अब सिद्धू दम्पति का अगला राजनीतिक क़दम क्या होगा, ये देखने वाली बात है।