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कॉन्ग्रेस J&K का स्थानीय चुनाव नहीं लड़ेगी, कहा – तारीख की घोषणा एकतरफ़ा थोपी गई

कॉन्ग्रेस ने जम्मू-कश्मीर में 24 अक्टूबर को होने वाले स्थानीय चुनावों में न लड़ने का ऐलान किया है। ब्लॉक डेवलपमेंट काउन्सिल (BDC) के यह चुनाव 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से राज्य में होने वाले पहले चुनाव होंगे। राज्य की प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी ने यह ऐलान अपने वरिष्ठ नेताओं की नज़रबंदी और उन पर तमाम बंदिशें चालू रहने के खिलाफ किया है।

‘हम करना तो चाहते थे, लेकिन लीडरान के बिना कैसे’

पार्टी के राज्य में मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने कहा कि सरकार कॉन्ग्रेस के साथ कोई सहयोग नहीं कर रही है, जबकि पार्टी ने चुनाव के समय और राज्य के हालात को लेकर शंकाओं के बावजूद सरकार के साथ सहयोग की इच्छा प्रकट की थी। रविंदर शर्मा ने कहा, “कश्मीर घाटी के हमारे वरिष्ठ नेताओं में से अधिकाँश पर पाबंदियाँ कम न होने के चलते पार्टी BDC चुनावों पर पुनर्विचार कर रही है।” इसके अलावा शर्मा ने सरकार पर चुनावों की तारीख की घोषणा एकतरफ़ा तरीके से थोपे जाने की भी बात की।

वहीं राज्य प्रशासन का कहना है कि नज़रबंद लोगों की रिहाई व्यक्तिगत तौर पर एक-एक व्यक्ति का विश्लेषण करने के बाद ही की जाएगी।

आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप

कॉन्ग्रेस के साथ ही उससे टूट कर अलग पार्टी बनी नेशनल पैंथर्स पार्टी ने भी ने भाजपा के पक्ष में आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप राज्य प्रशासन और राज्यपाल पर मढ़ा है। उनका कहना है कि राज्यपाल की कार्यवाहक सरकार द्वारा 370 हटने से राज्य को होने वाले फायदों का प्रचार-प्रसार असल में भाजपा का सरकारी खर्चे और आचार संहिता की बंदिशों को बाईपास कर के प्रचार करना है। पार्टी अध्यक्ष हर्ष देव सिंह ने घाटी में नए जनजातीय हॉस्टल की स्थापना, बिजली आपूर्ति में सात घंटे की बढ़ोतरी, गुरेज़ में विद्युत आधारभूत ढाँचे में वृद्धि, कश्मीर में गैस सिलिंडरों और ईंधन पहुँचाने की घोषणा को आचार संहिता के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इन सभी घोषणाओं का फायदा ले रही है, और चुनाव आयोग का अमला मूक दर्शक बन कर सब कुछ देख रहा है।

हत्या के गुनहगार अकील पठान ने गीता पढ़ने की जताई इच्छा, ग्वालियर के केंद्रीय कारागार में है कैद

ग्वालियर परिक्षेत्र के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने इन दिनों समाज के विभिन्न वर्गों में गीता के जरिए जागृति फैलाने का अभियान शुरू किया हुआ है। इस कड़ी में दशहरे पर उन्होंने ग्वालियर के केंद्रीय जेल में गीता का वितरण किया और सबको एक-एक माला दी। हत्या के मामले में कैद अकील पठान को भी गीता दी गई। इसके बाद उसने गीता पढ़ने की इच्छा जताई और कहा कि धर्म हमें एकता सिखाता है, मतभेद नहीं।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक अकील पठान ने गीता की प्रति मिलने के बाद कहा कि धर्म हमेशा अच्छी चीजें सिखाता है। उसका कहना है कि वो जेल में रहकर किताबें पढ़ता रहता है और मुस्लिम होने के नाते वो अपने मजहब की किताबें भी पढ़ता रहा है। लेकिन अब उसे गीता मिली है, जिसे पढ़ने का वो इच्छुक है। अकील का कहना है कि वो गीता में दिए उपदेशों को समझने का और उन पर अमल करने की कोशिश करेगा।

रिपोर्ट के अनुसार एडीजी राजा बाबू सिंह समाज के अलग-अलग वर्गों में जाकर गीता के जरिए जागृति फैलाने की कड़ी में स्कूलों तक में जाकर बच्चों को गीता की प्रतियाँ देते हैं और गीता में दिए ज्ञान के बारे में बच्चों से बात करते हैं।

उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए बताया कि उनका मानना है लोग अपने बुरे कर्मों के कारण अपराधी बनते हैं और फिर उन्हें जेल आना पड़ता है। वो बताते हैं कि गीता उन लोगों को आध्यात्म के प्रति जागृति और धार्मिक दिशा दिखाती है जो अपने पथ से डगमगा गए हैं।

इस आयोजन में वृंदावन के एक आध्यात्मिक गुरु आनंदेश्वर दास चैतन्य ने भी कैदियों को धार्मिक जीवन के गुणों के बारे में पढ़ाया। उन्होंने कहा, “गीता सिर्फ़ एक धार्मिक किताब नहीं है, यह एक आध्यात्मिक विकास है जिसे मनुष्य को जीवन के संविधान के रूप में स्वीकार करना चाहिए।” उन्होंने बताया कि जो देश के संविधान के ख़िलाफ़ जाता है, वो जेल में जाता है। इसी तरह जो आध्यात्म के संविधान का उल्लंघन करता है, वो इस जीवन चक्र में फँस जाता है।”

रिपोर्ट के अनुसार ग्वालियर की सेंट्रल जेल में 3,396 कैदी हैं, जिनमें 164 महिलाएँ हैं और उनके साथ 21 बच्चे हैं। अधिकतर कैदियों ने मजहब से ऊपर उठकर गीता पढ़ने की इच्छा जताई है।

दफ्तर में इस्तेमाल हो रहा था प्लास्टिक कप, कलेक्टर ने खुद पर ही लगाया ₹5000 का जुर्माना

आस्तिक कुमार पांडे नामक बीड जिला कलेक्टर ने अपने ऑफिस में प्लास्टिक कप का इस्तेमाल होने पर अपने ऊपर ही 5000 रुपए का फाइन लगा लिया। ये हैरान करने वाला कदम कलेक्टर ने उस समय उठाया जब एक पत्रकार ने उनका ध्यान इस पर केंद्रित करवाया कि उनके दफ्तर में प्लास्टिक कप का इस्तेमाल होता है।

घटना सोमवार (अक्टूबर 7, 2019) की शाम की है, जब जिला प्रशासन ने कलेक्टर दफ्तर में मीडिया कॉन्फ्रेंस ये बताने के लिए करवाई कि उपचुनावों में कौन से उम्मीदवारों ने नामांकन वापसी के आखिरी दिन अपना नाम वापस लिया। लेकिन यहाँ कॉन्फ्रेंस में आए पत्रकारों को प्लास्टिक के कप में चाय दी जाने लगी। तभी उनमें से एक पत्रकार ने ये मुद्दा उठाया कि उनके दफ्तर में प्लास्टिक कप का इस्तेमाल राज्य भर में प्लास्टिक पर लगे बैन का उल्लंघन है।

जिसके बाद पत्रकार की बात का संज्ञान लेते हुए बीड कलेक्टर ने अपनी गलती मानी और स्वयं पर 5000 रुपए का फाइन लगाया। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार कॉन्फ्रेंस खत्म होने के बाद उन्होंने प्लास्टिक को दफ्तर में पूर्ण रूप से बैन न किए जाने पर अधिकारियों को फटकार भी लगाई।

इसके बाद जिला अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि चुनाव पूरे होने के बाद प्रशासन राजनैतिक रूप से संवेदनशील जिले में प्लास्टिक प्रतिबंध के कार्यान्वयन पर ध्यान देगा।

गौरतलब है कि कलेक्टर ऑफिस में प्लास्टिक इस्तेमाल का ये पहला मामला प्रकाश में नहीं आया है। बीते 8 दिनों में कलेक्टर ऑफिस में प्लॉस्टिक बैन के बावजूद इसका इस्तेमाल किए जाने का ये दूसरा मामला है। इससे पहले चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने आया एक उम्मीदवार प्लास्टिक बैग में ही अपनी जमानत राशि लेकर आते पाया गया था, लेकिन अधिकारियों की नजर पड़ने के बाद उस पर 5000 रुपए का जुर्माना लगा दिया गया था।

बता दें कि दफ्तर में नियम का उल्लंघन होता देख खुद पर 5000 रुपए का जुर्माना लगाने वाले आस्तिक कुमार पांडे पिछले साल विभाग की दीवारों और कोनों में फैली गंदगी को खुद साफ करने के कारण भी चर्चा में आए थे। इस दौरान पान और गुटखे की पीक से रंगी दीवारों को साफ़ करती हुई उनकी तस्वीरें काफी चर्चाओं का हिस्सा बनीं थीं।

मध्य प्रदेश में विश्व हिन्दू परिषद के नेता को दिनदहाड़े गोलियों से भूना, हत्यारों का सुराग नहीं

मध्य प्रदेश के मंदसौर में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के एक नेता की गोली मार कर हत्या कर दी गई। मृतक युवराज सिंह केबल नेटवर्क का भी संचालन करते थे। घटना बुधवार (अक्टूबर 9, 2019) को सुबह 11 बजे हुई, जब वह गीता भवन अंडरब्रिज के पास स्थित एक चाय की दुकान पर थे। उसी वक़्त बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। उन्हें गोली लगते ही आसपास भगदड़ मच गई, जिसका फायदा उठा बदमाश भागने में सफल रहे।
युवराज सिंह को कुल तीन गोली मारी गई

मौके पर मौजूद लोगों ने घटना की सूचना एम्बुलेंस और पुलिस को दी, जिसके बाद युवराज को अस्पताल ले जाया गया। वहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। युवराज विश्व हिन्दू परिषद में विभाग सहमंत्री के रूप में कार्यरत थे। अभी तक पुलिस को उनकी हत्या का कारण नहीं पता चला है। पुलिस इस बात की तहकीकात में जुटी है कि हमलवार उनकी हत्या करने के बाद किस दिशा में भागे?

युवराज को गोली लगने के बाद अस्पताल में भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने इलाक़े में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी है। जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुँच कर लोगों से संवाद कर रहे हैं। पुलिस ने जिले की सीमा को चारों तरफ़ से सील करते हुए हत्यारों की तलाश तेज़ कर दी है। जिला अस्पताल में आरएसएस और विहिप के कार्यकर्ताओं ने पहुँच कर इस घटना की निंदा की।

लोगों ने मृत विहिप नेता की शव रख कर सड़क जाम कर दिया और एसपी को बुलाने की माँग की। कुछ अन्य अधिकारियों ने वहाँ पहुँच कर लोगों को मनाया, तब जाकर लोग शव का पोस्टमॉर्टम कराने के लिए माने। पोस्टमॉर्टम रूम में एसपी भी मौजूद थे। दिनदहाड़े हुए इस हमले से मध्य प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था पर सवालिया निशान लग गया है।

‘ब्लैक मडोना’ का दर्शन कर और उन्हें छू कर खुश हूँ: वाड्रा ने पवित्र ईसाई स्थल पर की प्रार्थना

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा मंगलवार (अक्टूबर 8, 2019) को स्पेन में थे। यहाँ उन्होंने ‘सांता मारिया डे मोंटसेराट एबे’ नामक पवित्र स्थल पर उपस्थिति दर्ज कराई। ज़मीन हड़पने के कई मामलों में आरोपित कारोबारी वाड्रा ने मंगलवार की सुबह ‘ब्लैक मडोना’ की प्रतिमा के समक्ष प्रार्थना भी की। वाड्रा ने अपने इस दौरे से जुड़े 30 फोटोग्राफ सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि अध्यात्म की कोई सीमा नहीं होती। वाड्रा ने लिखा कि उन्होंने इस स्थल के बारे में काफ़ी सुन रखा था और वो यहाँ आकर अभिभूत हैं।

वाड्रा ने बताया कि ‘पवित्र ब्लैक मडोना’ की प्रतिमा का दर्शन और उसे छूने के लिए कई लोग लाइन में लगे थे और उन्हें भी उसी लाइन में लग कर काफ़ी ख़ुशी हुई। वाड्रा ने बताया कि उन्होंने अपनी बारी का इंतजार किया और फिर ‘ब्लैक मडोना’ का दर्शन किया। वाड्रा ने बताया कि उन्होंने भी ‘ब्लैक मडोना’ की प्रतिमा को छुआ। वाड्रा ने वहाँ के वातावरण की प्रशंसा करते हुए बताया कि पहाड़ी की चोटी पर स्थित इस स्थल से आसपास के सुन्दर इलाक़ों का मनोरम दृश्य दिखता है।

‘ब्लैक मडोना’ का दर्शन: रोबर्ट वाड्रा ने एक के बाद एक 30 फोटो शेयर किया

रॉबट वाड्रा ने लिखा कि इस क्षेत्र के इतिहास के बारे में जानकारी लेकर और ‘ब्लैक मडोना’ का दर्शन करने का उनका अनुभाग काफ़ी यादगार रहा। स्पेन दौरे पर गए रोबर्ट वाड्रा ने इससे पहले कोर्ट से विदेश दौरे के लिए अनुमति माँगी थी। उन्होंने अदालत में कहा था कि वह बिजनेस ट्रिप पर विदेश जाना चाहते हैं। उन्हें सितम्बर 13, 2019 को अदालत ने विदेश जाने की अनुमति दे दी थी। हालाँकि, प्रवर्तन निदेशालय ने कहा था कि वाड्रा विदेश में सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।

अदालत ने कहा था कि चूँकि वाड्रा की विवादित सम्पत्तियाँ भारत में स्थित हैं, इसीलिए विदेश जाने की अनुमति दी जा सकती है। कोर्ट ने ईडी की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए उन्हें विदेश जाने की अनुमति दे दी थी। हालाँकि, कोर्ट ने यह भी कहा था कि स्पेन से लौट कर अधिकारियों द्वारा बुलाए जाने पर उन्हें 72 घंटे के भीतर अपनी पासपोर्ट और वीजा की कॉपी जमा करानी होगी और जाँच के लिए उपस्थित होना पड़ेगा।

ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया: 1400 Km लंबी, 5Km चौड़ी हरित पट्टी से रेगिस्तान को यूं रोकेगा भारत

केंद्र सरकार देश में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार के मद्देनजर 1,400 किलोमीटर लंबी ‘ग्रीन वॉल’ तैयार करने पर विचार कर रही है। ये ग्रीन वॉल गुजरात से शुरू होकर दिल्ली-हरियाणा सीमा तक विकसित की जाएगी। पर्यावरण को बचाने के लिए अफ्रीका में सेनेगल से जिबूती तक बनी हरित पट्टी को देखते हुए केंद्र सरकार उसी तर्ज पर काम करना चाह रही है। अफ्रीका में बनी हरित पट्टी बदलते मौसम (क्लाइमेट चेंज) और बढ़ते रेगिस्तान से निपटने के लिए तैयार किया गया है। कहा जा रहा है कि ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया की लंबाई 1400 किमी होगी और चौड़ाई 5 किमी होगी।

हालाँकि, ये भी बता दें कि इस विषय पर विचार अभी आरंभ ही हुआ है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कई अधिकारी इसे लेकर उत्साहित हैं। अगर ‘ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया’ प्रोजेक्ट पर मुहर लगती है तो बढ़ते प्रदूषण को रोकने में भारत एक मिसाल बनकर उभरेगा। पोरबंदर से लेकर पानीपत तक बनने वाली हरित पट्टी से घटते वन क्षेत्र में भी बढ़ोतरी होगी और गुजरात, राजस्थान, हरियाणा से लेकर दिल्ली तक फैली अरावली की पहाड़ियों पर घटती हरियाली के संकट पर भी काबू पाया जा सकेगा। इसके अलावा पश्चिमी भारत और पाकिस्तान के रेगिस्तानों से धूल जो दिल्ली तक उड़कर आती है, उसे रोकना भी संभव हो पाएगा।

अफ्रीका में ‘ग्रेट ग्रीन वॉल’ को बनाने का काम एक दशक पहले शुरू हुआ था। लेकिन कई देशों की भागीदारी होने और उनकी अलग-अलग कार्यप्रणाली के चलते अब भी इसे हकीकत का रूप नहीं दिया जा सका है। किंतु अब भारत सरकार इसी विचार को 2030 तक राष्ट्र प्राथमिकता में रखकर हकीकत का रूप देने पर विचार कर रही है। जिसके लिए 26 मिलियन हेक्टेयर भूमि को प्रदूषण मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित करने पर विचार किया जा रहा है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि भारत में घटते वन और बढ़ते रेगिस्तान को रोकने का यह आइडिया हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की कॉन्फ्रेंस (COP14) से आया है। हालाँकि अभी यह आइडिया मंजूरी के लिए फाइनल स्टेज में नहीं पहुँचा है।

उल्लेखनीय है कि इस विषय पर अभी कोई भी अधिकारी खुलकर बात करने को तैयार नहीं हैं। अधिकारियों का मानना है कि ये प्लान अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए इस पर अभी से बात करना जल्दबाजी होगी।

कहा जा रहा है कि ये ग्रीन बेल्ट लगातार नहीं होगी, लेकिन अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा इसमें कवर किया जाएगा, जिससे उजड़े जंगलों को दोबारा विस्तार हो सके। इस प्रोजेक्ट को अप्रूवल मिलने पर अरावली क्षेत्रों और अन्य जमीन क्षेत्र पर काम शुरू किया जाएगा। मुमकिन है इस प्लान के लिए किसानों की जमीन का भी अधिग्रहण हो।

याद दिला दें कि साल 2016 में इसरो ने एक नक्शा जारी किया था, जिसके अनुसार गुजरात, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 50 फीसद से ज्यादा भूमि हरित क्षेत्र से बाहर है। जिसके कारण इन इलाकों में रेगिस्तान का दायरा बढ़ने का खतरा ज्यादा है।

‘गुजराती सबसे बड़े शराबी, वहाँ घर-घर में पी जाती है शराब’ – विवादित बयान से गरमाई राजनीति

राजस्थान में शराबबंदी की माँग जोर पकड़ रही है। इसी बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का भी बयान आया है। उन्होंने दावा कि वह भी शराबबंदी का समर्थन करते हैं लेकिन जब तक कड़े इंतजाम नहीं किए जाएँगे, तब तक शराब प्रतिबन्ध के कोई मायने नहीं हैं। उन्होंने इस दौरान गुजरात का उदाहरण देकर विवाद खड़ा कर दिया। गहलोत ने विवादित बयान देते हुए कहा कि गुजरात में आज़ादी के बाद से ही शराब पर प्रतिबन्ध है लेकिन शराब की सबसे ज्यादा खपत गुजरात में ही होती है। उन्होंने गुजरात के बारे में आगे दावा किया कि राज्य में घर-घर में शराब पी जाती है।

राजस्थान के मुख्यमंत्री शराबबन्दी की बढ़ती माँग से परेशान नज़र आ रहे हैं। उन्होंने लोगों को इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि राजस्थान में एक बार ऐसा प्रयास किया गया था लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि राजस्थान में शराबबंदी हुई थी लेकिन यह विफल रही। हालाँकि, आँकड़े गहलोत के बयान के उलट तस्वीर बयाँ करते हैं। अगर शराब से होने वाली सालाना कमाई की बात करें तो भारतीय राज्यों में तमिलनाडु 29,600 करोड़ रुपए के साथ प्रथम स्थान पर है।

तमिलनाडु के बाद 19,703 करोड़ रुपए के साथ हरियाणा दूसरे स्थान पर आता है और 18,000 करोड़ रुपए की सालाना कमाई के साथ महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है। इसके बाद क्रमशः कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पंजाब का नंबर आता है। अशोक गहलोत ने गुजरात के सीएम विजय रुपाणी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्होंने सिद्ध कर दिया कि गुजरात में शराब आसानी से नहीं मिलता है, तो वह राजनीति छोड़ देंगे

गहलोत के बयान के बाद गुजरात से तीखी प्रतिक्रिया आई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाघाणी और प्रवक्ता भरत पंड्या ने गहलोत के बयान को गुजरात, गुजरातियों और महात्मा गाँधी का अपमान बताया है। वाघानी ने पूछा कि कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय पदाधिकारी रह चुके गहलोत एक सीएम के रूप में ऐसा बयान कैसे दे सकते हैं? उन्होंने वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता अशोक गहलोत के बयान को गुजराती जनता, महात्मा गाँधी और सरदार पटेल का अपमान करार दिया। उन्होंने पूछा कि क्या गुजरात में कॉन्ग्रेस के सभी नेता और कार्यकर्ता शराबी हैं, उन्हें स्पष्ट करना चाहिए। वाघानी ने कहा, “गहलोत जी, आप अपने उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को संभालिए, गुजरात अपना देख लेगा। हमारा राज्य इस तरह की टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करेगा।

वहीं गुजरात कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अमित चावडा ने अशोक गहलोत के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को यह बात स्वीकार कर लेनी चाहिए कि गुजरात में शराबबंदी विफल रही है। उन्होंने दावा किया कि गुजरात के गाँव-गाँव में शराब मिल रही है।

मारा गया उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा आतंकी, घर से भागते समय माँगा था 1 लाख रुपए

दक्षिण एशिया में खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन अलकायदा का सबसे बड़ा सरगना मारा गया। अफ़ग़ानिस्तान के ‘नेशनल डायरेक्टरेट ऑफ सिक्योरिटी (NDS)’ ने मंगलवार (अक्टूबर 8, 2019) को इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए बताया कि मौलाना असीम उमर को अमेरिका और अफ़ग़ानिस्तान के संयुक्त सुरक्षा बलों ने मार गिराया। मौलाना उमर को भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ सनाउल हक़ के नाम से चिह्नित करती है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के संभल का रहने वाला था। उसे 2014 में अलकायदा के मुखिया और ओसामा बिन लादेन के उत्तराधिकारी अल जवाहिरी द्वारा ‘भारतीय उपमहाद्वीप अलकायदा (AQIS)’ का प्रमुख बनाया गया था।

हालाँकि, अफ़ग़ान सुरक्षा एजेंसियों ने मौलाना उमर को पाकिस्तानी के रूप में चिह्नित किया है क्योंकि वह पाकिस्तानी पासपोर्ट लेकर घूम रहा था। उसके पास से पाकिस्तानी पासपोर्ट जब्त किया गया। मौलाना 1995 में ही भारत से गायब हो गया था। ख़ुफ़िया एजेंसियों का मानना है कि उसके बाद उसने पाकिस्तान में पनाह ली थी और वहीं से आतंकी गतिविधियाँ संचालित कर रहा था। आतंकी मौलाना को अफ़ग़ानिस्तान के हेलमंड प्रान्त स्थित मूसा क़ाला जिले में मार गिराया गया

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को मौलाना उमर के बारे में तब पता चला था जब संभल के मोहम्मद आसिफ और कटक के अब्दुर रहमान से पूछताछ की गई थी। इन दोनों को दिल्ली पुलिस और ओडिशा पुलिस ने 2014-15 में गिरफ़्तार किया था। पुलिस के अनुसार, मौलाना उमर का साथी आसिफ 2012 में ईरान होकर पाकिस्तान गया था। वहाँ उसने पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाक़े में बसे एक इलाक़े में स्थापित एक जिहादी कैम्प में प्रशिक्षण लिया था। उसके साथ यूपी के दो अन्य लोग भी गए थे। आसिफ को वापस भारत भेजा गया ताकि वह और भी भारतीयों को आतंकी सगठन में शामिल कर सके।

मौलाना उमर ने कराची में ही अपनी शिक्षा-दीक्षा पूरी की। 90 के दशक के उत्तरार्द्ध में उसने हरकत-उल-मुजाहिदीन की सदस्यता ली और फिर पेशावर स्थित दारुल-उलूम-देवबंद के एक मदरसे में पढ़ाने लगा। 2007 की गर्मियों में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के आदेश पर लाल मस्जिद में स्थित जामिया उलूम-ए-इस्लामिया के आतंकियों पर सैन्य कार्रवाई की गई थी। इसके बाद मौलाना उमर का झुकाव अलकायदा की तरफ बढ़ा था। 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड डेविड हेडली ने पूछताछ के दौरान जानकारी दी थी कि भारत को निशाना बनाने के लिए एक ‘कराची प्रोजेक्ट’ चलाया जा रहा है।

2013 में मौलाना उमर ने भारत के मुस्लिमों को भड़काने के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। उसने कहा था कि मस्जिद के सामने खड़ा लाल किला मुस्लिमों की गुलामी और हिन्दुओं द्वारा चलाए जा रहे नरसंहार के कारण ख़ून के आँसू रो रहा है। बता दें कि उमर जब 1995 में गायब हो गया था, तब उसके परिवार ने अखबारों में इश्तेहार दिया था। उसके पिता का कहना था कि उसने जाते समय मक्का जाने के लिए 1 लाख रुपए की माँग की थी।

शक्ति का प्रत्युत्तर शक्ति से ही देना होगा, तभी म्लेच्छ शक्तियों की पराजय निश्चित होगी

विजयादशमी के इस पावन अवसर पर जब “जयंती-उत्पाटन” कर सुबह आसन पर बैठा, तो कई तरह के विचार दिमाग में कौंधते रहे? बस, इन 20-25 वर्षों में आखिर यह कैसी प्रदूषणकारी हवा बही या फिर यह दूषण समाज में मौजूद ही था, क्वचित अब वह उघड़ गया है, क्वचित हम ही कुछ अधिक सावधान हो गए हैं, जो ये सारा तलछट अब मुख्यधारा बन गया है। आखिर, इसके अलावा और क्या कारण होगा कि कहीं माँ दुर्गा को मूलनिवासी-आंदोलन के नाम पर गालियाँ दी जा रही हैं, तो कहीं दुर्गा-मंडप से अजान दी जा रही है।

इधर एक नया बवाल चला है, रावण को ब्राह्मण, महात्मा सिद्ध करने का। अब तक तो छिटपुट लोग ही रावण-दहन के नाम पर अपनी कुत्सा और कुंठा निकालते थे, इस बीच “अपने अंदर के रावण को मारने” या फिर, भाँति-भाँति के कुतर्क से उसे सर्वश्रेष्ठ महानुभाव सिद्ध करने की होड़ मची है। इन सब से भी बात नहीं बनी, तो एक विदुषी पैदा हो गईं यह दावा करने को कि हिंदुत्व का तो निर्माण (प्रभु, अब उठा ही लो…) ही 20 वीं सदी में किया गया ताकि इसके दुर्गुणों को छुपाया जा सके।

ऐसे नाबदानी कीड़े इस देश में हैं, समाज में हैं, यहाँ की मुख्यधारा में हैं, यहाँ तक कि मुझ तक पहुँच जा रहे हैं जो तथाकथित न्यूज और इंटरनेट से ठीकठाक दूरी बरकरार रखता है। मैं यह सोच रहा हूँ और ‘राम की शक्ति पूजा’ मुझे याद आ रही है… खुद मर्यादा पुरुषोत्तम राम को भी जब निराशा घेरती है, वह पंक्तियाँ याद आती हैं,

“बोले रघुमणि- “मित्रवर, विजय होगी न समर,
यह नहीं रहा नर-वानर का राक्षस से रण,
उतरीं पा महाशक्ति रावण से आमन्त्रण,
अन्याय जिधर, हैं उधर शक्ति।” (राम की शक्ति पूजा, निराला)

आक्रमण दसों दिशाओं से हो रहा है। सनातन धर्म के ध्येय वाक्यों को, परंपराओं को, त्योहारों को, रीति-रिवाजों को या तो कालबाह्य करार दिया जा रहा है, या मैकाले-मुल्ला-मार्क्स के जारज पुत्र, ये नाबदानी कीड़े उन्हें हास्यास्पद बना कर पेश कर रहे हैं।

राजनीतिक मसलों को धर्म और अध्यात्म में घुसेड़ कर ‘उलटबांसी’ के जरिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर का मसला बना रहे हैं। आपसी मारपीट या किसानों के गुस्से का शिकार बने लोगों को जबरन हिंदू आतंक (क्या सचमुच!) का शिकार बनाकर पेश करना कितना जायज है? ट्रेन की सीट के लिए हुए झगड़े को मॉब-लिंचिंग बनाना कहाँ तक जायज है? अखलाक को तो बारहां शहीद की तरह पेश किया जाता है, लेकिन डॉक्टर नारंग की चर्चा क्यों नहीं? अंकित की बात कोई क्यों नहीं करता?

और, ये नैरेटिव इस कदर आपके दिमाग पर बिठा दिया गया है कि नए-नकोर बच्चे रवीश या गौरी लंकेश को अपना आदर्श मान लेते हैं, जो केवल और केवल झूठ, नफरत और सांप्रदायिकता के पैरोकार हैं। वे उर्मिलेश यादव और पुण्य प्रसून या शेखर गुप्ता को पत्रकारिता का पैमाना मानता है, जो केवल और केवल एजेंडा-सेटर हैं, कॉन्ग्रेस-कम्युनिस्ट युति के पक्षकार हैं।
…और, फिर एक बार राम याद आते हैं…

“आया न समझ में यह दैवी विधान।
रावण, अधर्मरत भी, अपना, मैं हुआ अपर,
यह रहा, शक्ति का खेल समर, शंकर, शंकर!
करता मैं योजित बार-बार शर-निकर निशित,
हो सकती जिनसे यह संसृति सम्पूर्ण विजित,
जो तेजः पुंज, सृष्टि की रक्षा का विचार,
हैं जिसमें निहित पतन घातक संस्कृति अपार। (राम की शक्ति पूजा, निराला)

और, फिर उसी राम की शक्ति-पूजा के जाम्बवंत याद आते हैं, जो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम तक को बोध देने की शक्ति रखते हैं, यही तो है सनातनी पाठ, मर्यादा और शक्तिः-

विचलित होने का नहीं देखता मैं कारण,
हे पुरुषसिंह, तुम भी यह शक्ति करो धारण,
आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर,
तुम वरो विजय संयत प्राणों से प्राणों पर।
रावण अशुद्ध होकर भी यदि कर सकता त्रस्त
तो निश्चय तुम हो सिद्ध करोगे उसे ध्वस्त,
शक्ति की करो मौलिक कल्पना, करो पूजन।
छोड़ दो समर जब तक न सिद्धि हो, रघुनन्दन! (राम की शक्ति पूजा, निराला)

जब स्वयं माँ अंबे का हाथ हमारे सिर पर आशीष के तौर पर सज्जित है, तो घबराहट कैसी? जब स्वयं बाबा भोलेनाथ हमारे जगत के खेल को अपने डमरू के वादन के साथ सहास्य देख और संभाल रहे हैं, तो बेचैनी कैसी?

हाँ, हमें मौलिक आराधना करनी होगी, शक्ति का प्रत्युत्तर शक्ति से ही देना होगा, शिव और शक्ति को एक साथ साधना ही होगा, तभी इन म्लेच्छ शक्तियों की पराजय निश्चित होगी। जब तक सिद्धि न हो, समर को टाल कर सिद्धि करनी होगी… बंधुओं और उस सिद्धि का समय अभी है, ठीक अभी…।

लेखक: व्यालोक पाठक

मस्जिद के पास से गुजर रहे दुर्गा पूजा जुलूस पर मुस्लिमों का हमला, भारी पत्थरबाजी: 8 गिरफ़्तार

नवरात्रि और दुर्गा पूजा का समापन होने के साथ ही सोशल मीडिया पर एक चौंका देने वाले वीडियो ने लोगों का ध्यान अपनी तरफ़ खींचा। ये वीडियो उत्तर प्रदेश के देवीपाटन मंडल में स्थित बलरामपुर जिले का है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि दुर्गा पूजा के बाद देवी-विसर्जन के लिए जा रहे जुलूस पर भारी पत्थरबाजी की गई। यूपी पुलिस ने इस वीडियो के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है।

बलरामपुर पुलिस ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति

बलरामपुर पुलिस ने ट्विटर के माध्यम से बताया कि दुर्गा-पूजा विसर्जन के जुलूस पर हमला और भारी पत्थरबाजी के मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है और इस पत्थरबाजी में शामिल अन्य आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत है। वीडियो में देखा जा सकता है कि उम्रदराज मुस्लिम भी आक्रामकता से दुर्गा-पूजा के जुलूस पर पत्थरबाजी करने में लगे हुए हैं और विसर्जन में शामिल लोग डर के मारे चीख रहे हैं।

पत्थरबाजी के समय एक व्यक्ति को ट्रक के पीछे छिप कर बचने की कोशिश करते हुए भी वायरल वीडियो में देखा जा सकता है। बलरामपुर के एडिशनल एसपी ने ऑपइंडिया को बताया कि दुर्गा-पूजा विसर्जन के जुलूस पर तब हमला किया गया, जब यह एक मस्जिद के पास से गुजर रहा था। उस मस्जिद के दाहिने तरफ एक मोड़ है। सामान्यतः जुलूस जहाँ से भी गुजरता है, तो उसमें डीजे और गाना-बजाना भी शामिल रहता है।

सामान्यतः यह आशा की जाती है कि जब कोई हिन्दू धार्मिक जुलूस किसी मस्जिद के पास से होकर गुजरता है तो म्यूजिक साउंड ऑफ कर दिया जाता है। लेकिन बलराम में कल ऐसा नहीं हुआ। इस कारण से स्थानीय मुस्लिम समुदाय नाराज़ हो गया और सबने मिल कर जुलूस पर हमला बोल दिया। एडिशनल एसपी ने अंदेशा जताया कि मुस्लिमों द्वारा की गई पत्थरबाजी स्वाभाविक नहीं भी हो सकती है और सम्भावना है कि वे पहले से ही पत्थर वगैरह लेकर देवी-विसर्जन के जुलूस पर धावा बोलने को तैयार बैठे हों।

एडिशनल एसपी ने आश्वस्त किया कि इलाक़े में क़ानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं है और सब नियंत्रण में है। उन्होंने 8 लोगों को गिरफ़्तार किए जाने की पुष्टि की, जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति नहीं है। पुलिस द्वारा एक्शन लेने के बाद दुर्गा-पूजा के विसर्जन का शांतिपूर्वक समापन कराया जा सका।