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इमरान के फ्लाइट में नहीं आई थी तकनीकी ख़राबी, नाराज़ सऊदी प्रिंस ने निकाल बाहर किया था: पाक मीडिया

आपको याद होगा कि ‘यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली’ में भाग लेने न्यूयॉर्क गए पाकिस्तानी पीएम इमरान ख़ान के फ्लाइट में लौटते वक़्त तकनीकी ख़राबी की ख़बर आई थी, जिसके बाद उन्हें वापस अमेरिका में लैंड कराया गया था। 28 सितम्बर को पाकिस्तान लौट रहे इमरान ख़ान की फ्लाइट की न्यूयॉर्क में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी थी। 1 सप्ताह के दौरे के लिए वहाँ गए इमरान ख़ान को इसके बाद पूरी रात अमेरिका में ही रुकना पड़ा था। कहा गया था कि फ्लाइट में आई ख़राबी को दूर किए जाने के बाद वह फिर से वापस पाकिस्तान के लिए रवाना होंगे।

अब पाकिस्तान के ही एक प्रमुख मीडिया संस्थान ने इस ख़बर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ‘फ्राइडे टाइम्स’ के अनुसार, इमरान ख़ान की फ्लाइट को किसी तकनीकी ख़राबी की वजह से नहीं बल्कि सऊदी क्राउन प्रिंस की नाराज़गी के कारण वापस न्यूयॉर्क में लैंड करना पड़ा था। इमरान ख़ान के भाषण में कही गई कुछ बातों से सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इतने ख़फ़ा थे कि उन्होंने तुरंत इमरान सहित पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को अपने प्राइवेट जेट से निकाल बाहर करने का आदेश दे दिया था।

हालाँकि, इमरान ख़ान अमेरिका गए तो थे सऊदी क्राउन प्रिंस के स्पेशल जेट से लेकिन वह वापस एक कमर्शियल फ्लाइट से लौटे। इमरान जिस प्लेन से वापस आए, वो भी सऊदी एयरलाइन्स की ही नियमित कमर्शियल फ्लाइट थी। इमरान के साथ पाकिस्तान के विदेश मंत्री भी उनके साथ इसी फ्लाइट से वापस आए। पाकिस्तान ने तब बहाना बनाया था कि इमरान भूकंप से पीड़ित इलाक़ों का जल्द से जल्द दौरा करना चाहते हैं, इसीलिए वह जल्दबाजी में कमर्शियल फ्लाइट से वापस आ रहे हैं।

‘फ्राइडे टाइम्स’ ने लिखा कि संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में इमरान ख़ान के सम्बोधन के समय कई कुर्सियाँ खाली थीं, लेकिन फिर भी वापस लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। मीडिया पोर्टल ने पूछा कि जब पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में जोरदार प्रदर्शन किया, फिर पाकिस्तानी स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोदी को इसके तुरंत बाद वापस बुलाने की नौबत क्यों आन पड़ी? इस बात पर भी सवाल खड़े किए गए कि इमरान ख़ान ने जम्मू कश्मीर मसले को ‘इस्लामिक पाकिस्तान बनाम हिन्दू भारत’ के मुद्दे में बदल दिया है।

यूएनजीए में पाकिस्तानी पीएम ने बड़ी-बड़ी बातें की थीं। जहाँ एक तरफ उन्होंने दुनिया को परमाणु युद्ध का डर दिखाया था, वहीं दूसरी तरफ भारत के ख़िलाफ़ इस्लामिक राष्ट्रों का समर्थन लेने के लिए पैगम्बर मुहम्मद और इस्लाम पर लम्बा-चौड़ा भाषण दिया था। उन्होंने जम्मू कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय मसला बनाने के लिए पूरा जोर लगाया। हालाँकि, पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने सम्बोधन में एक बार भी इमरान या पाकिस्तान का नाम नहीं लिया था और विकास के अन्य मुद्दों को केंद्र में रखा था।

फ्राइडे टाइम्स की रिपोर्ट का पाकिस्तान की सरकार ने खंडन किया है।

Bigg Boss में ‘बेड फ्रेंड फॉरएवर’ है हद दर्जे की अश्लीलता: बैन करने के लिए प्रकाश जावड़ेकर को पत्र

Confederation Of All India Traders (CAIT) नाम का एक संगठन है। इसने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को पत्र लिख कर कलर्स टीवी के शो ‘बोग बॉस’ पर बैन लगाने की माँग की है। कॉन्फ़ेडरेशन ने केंद्रीय मंत्री को लिखे पत्र में इस ‘बेहूदा’ शो के माध्यम से फैलाई जा रही ‘अश्लीलता’ की तरफ़ ध्यान आकृष्ट कराया है। पत्र में कहा गया है कि इस शो के कारण कलर्स चैनल को पारिवारिक माहौल में घर में देखना मुश्किल हो गया है। आरोप लगाया गया है कि सलमान ख़ान द्वारा होस्ट किया जाने वाला ‘बिग बॉस’ का 13वाँ सीजन देश की पारम्परिक और सांस्कृतिक मूल्यों को कलंकित कर रहा है।

कॉन्फ़ेडरेशन ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ़ भारत बल्कि पूरी दुनिया में देश के सांस्कृतिक मूल्यों की बात करते हैं, इसीलिए इस शो को तुरंत बैन किया जाना चाहिए क्योंकि इससे भारत की ग़लत छवि पेश हो रही है। इस पत्र में लिखा गया है कि ‘बिग बॉस’ बिना शक हमेशा से विवादित कार्यक्रम रहा है और हमारे देश के नैतिक मूल्यों को नुकसान पहुँचाता रहा है। कॉन्फ़ेडरेशन को मुख्य आपत्ति शो के नए कॉन्सेप्ट ‘बेड फ्रेंड फॉरएवर’ से है। इसके तहत दो लोगों को एक बेड पर सोने का टास्क दिया जाता है।

ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने इसे टीवी की दुनिया के लिए निंदनीय बताया है। उसने इस बात पर आपत्ति जताई है कि इसे ‘प्राइम टाइम’ में प्रसारित किया जाता है और यह रात का वो समय होता है जब परिवार के सभी लोग, यहाँ तक कि बच्चे भी टीवी देख रहे होते हैं। ‘कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स’ ने केंद्रीय मंत्री को भेजे गए पत्र में लिखा है:

“कलर्स पर आने वाले ‘बिग बॉस’ के 13वें सीजन ने नैतिकता के सभी मूल्यों को ताक पर रखते हुए हद पार कर दी है। न सिर्फ़ शो बल्कि शो में दिए जा रहे अलग-अलग टास्क भी मानवीय और सांस्कृतिक मूल्यों के ख़िलाफ़ हैं। इस शो के कंटेंट्स काफ़ी ओछे हैं और इसे एक ऐसे नेशनल टीवी चैनल पर प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए, जिसे घर-घर में देखा जाता हो। जब फ़िल्मों को सेंसर बोर्ड से पास कराना अनिवार्य होता है तो फिर टीवी कार्यक्रमों को प्रसारण से पहले सेंसर बोर्ड की अनुमति क्यों नहीं लेनी होती? अगर सेंसर बोर्ड से अनुमति ली जाती है तो फिर ऐसे अश्लील और ओछे कंटेंट को पास कैसे किया गया?”

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को CAIT द्वारा भेजा गया पत्र: ‘बिग बॉस’ शो की बैन करने की माँग

कॉन्फ़ेडरेशन ने आरोप लगाया कि आज़ादी की आड़ में उन सिद्धांतों से समझौता किया जा रहा है, जो हमारे देश में निहित है। पत्र में माँग की गई है कि इस शो को या तो तुरंत बंद किया जाए या फिर इसे तभी प्रसारण की अनुमति दी जाए, जब इसमें से अश्लील कंटेंट्स हटा लिए जाएँ।

सुप्रीम कोर्ट ने Aarey मामले पर लिया स्वतः संज्ञान, मुंबई मेट्रो ने कहा- ‘हमने 24000 पेड़ लगाए’

आरे क्षेत्र में पेड़ों की कटाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई के लिए तारीख मुक़र्रर किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए सोमवार (अक्टूबर 7, 2019) की तारीख तय की है। कुछ छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को इस सम्बन्ध में पत्र लिख कर हस्तक्षेप करने की माँग की थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। जबकि हाईकोर्ट ने कथित पर्यावरण एक्टिविस्ट्स को झटका देते हुए मेट्रो प्रोजेक्ट को रोकने से इनकार कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट की एक स्पेशल बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।

बता दें कि मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए मुंबई के आरे क्षेत्र में कुछ पेड़ों को काटा जा रहा है। कई एक्टिविस्ट्स और बॉलीवुड सेलेब्स इसके विरोध में आ गए हैं। भाजपा की सहयोगी शिवसेना भी इस मामले में सरकार का विरोध कर रही है। शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी को विरोध प्रदर्शन करते हुए हिरासत में भी लिया गया था। मुंबई मेट्रो की प्रमुख अश्विनी भिड़े ने कहा है कि यह क़दम अनिवार्य था, इसे टाला नहीं जा सकता था। उन्होंने कहा कि कभी-कभी नए जीवन के फलने-फूलने के लिए और नए निर्माण के लिए तबाही अनिवार्य हो जाती है।

मुंबई मेट्रो ने बताया है कि उसने आरे मिल्क कॉलोनी से लेकर संजय गाँधी नेशनल पार्क तक, 24000 से भी अधिक पेड़ लगाए हैं। एक वीडियो के माध्यम से मुंबई मेट्रो ने समझाया कि वह किस तरह मुंबई के वन्य जीवन और हरियाली के प्रसार में अपना योगदान दे रहा है। आरे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे 29 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस क्षेत्र को आधिकारिक रूप से जंगल घोषित करने से मना कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले एक्टिविस्ट्स ने बताया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आँखें खोलने के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मॉल बनाने और कई अन्य चीजों के लिए भी महाराष्ट्र सरकार जंगलों को काटने की योजना बना रही है। उन लोगों ने शिवसेना से कहा कि अगर आदित्य ठाकरे आरे जंगल को लेकर इतने ही सजग हैं तो भाजपा से गठबंधन तोड़ें।

फ़िल्म सिटी ने हड़प रखी है नेशनल पार्क की 51 एकड़ ज़मीन, Aarey पर विरोध करने वाला बॉलिवुड भी चुप

आरे को हाईकोर्ट ने आधिकारिक रूप से जंगल मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद इसे लेकर महाराष्ट्र सरकार का विरोध कर रहे लोगों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन में बॉलीवुड बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रहा है। मनोज वाजपेयी और वरुण धवन जैसे अभिनेताओं से लेकर दिया मिर्जा और ऋचा चड्ढा जैसी अभिनेत्रियों तक ने आरे क्षेत्र में मेट्रो के लिए पेड़ों को काटे जाने का विरोध किया। एकाध कथित पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने तो उस पेड़ को गले लगाया, जिन्हें काटा ही नहीं जाना है। हालाँकि, अक्षय कुमार और अमिताभ बच्चन जैसे बड़े अभिनेताओं ने मेट्रो की महत्ता बताते हुए सरकार का समर्थन भी किया है।

इसी क्रम में एक दो वर्ष पुरानी ख़बर है, जो बॉलीवुड को अपने भीतर झाँकने पर मजबूर कर देगी। लक्ज़री गाड़ियों से घूमने वाले जिस बॉलीवुड के लोग मेट्रो प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं, उसी बॉलीवुड के गढ़ को लेकर ऐसी सूचना आई थी, जिसे लेकर आज तक एक भी सेलेब्रिटी ने आवाज़ नहीं उठाई। मुंबई के गोरेगाँव में फिल्म सिटी और संजय गाँधी राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं। जहाँ फ़िल्म सिटी के नाम से जाना जाने वाला ‘दादासाहब फाल्के नगर’ 1977 में बनाया गया था। यहीं ‘बोरीवली नेशनल पार्क’ भी है, जिसका नाम 1996 में ‘संजय गाँधी नेशनल पार्क’ कर दिया गया था।

संजय गाँधी नेशनल पार्क (जो तब बोरीवली नेशनल पार्क हुआ करता था) की अथॉरिटी का कहना है कि 1966 में ग़लती से उसके हिस्से की 51 एकड़ ज़मीन फिल्म सिटी को ट्रांसफर हो गई थी, जिसे अब तक नहीं लौटाया गया है। ‘वनशक्ति’ एनजीओ ने सूचना के अधिकार के तहत कुछ डॉक्युमेंट्स हासिल किए थे, जिससे पता चला कि 51 एकड़ की यह ज़मीन विवादित है क्योंकि फिल्म सिटी और नेशनल पार्क के बीच कोई बाउंड्री नहीं है। नेशनल पार्क के अधिकारियों का कहना है कि वे 1970 से लगातार फ़िल्म सिटी से मिन्नतें कर रहे हैं कि नेशनल पार्क की ज़मीन लौटा दी जाए।

अगस्त 2017 में भी इस सम्बन्ध में फिल्म सिटी से निवेदन करते हुए एक पत्र लिखा गया था। पार्क के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि फिल्म सिटी के लोगों की सुरक्षा के लिए भी यह ज़रूरी है क्योंकि जंगली जानवर उस क्षेत्र में स्वच्छंद घुमते हैं। बता दें कि फ़िल्म सिटी में आर्टिफिसियल झरने और जेल से लेकर वो सभी चीजें हैं, जिनकी बॉलीवुड फ़िल्मों की शूटिंग में आवश्यकता होती है। लगभग सभी बॉलीवुड फ़िल्मों का अधिकतर हिस्सा यहीं शूट किया जाता है। तब फ़िल्म सिटी ने ये ज़मीन लौटाने से मना कर दिया था और उन्होंने कहा था कि वे अपने निर्णय पर अडिग रहेंगे।

अगस्त 2017 में फ़िल्म सिटी में शूटिंग के दौरान कई लोगों पर जंगली जानवरों ने हमले किए थे। उसके बाद एक सप्ताह से भी अधिक समय तक इसे बंद रखा गया था। बावजूद इसके फ़िल्म सिटी ने नेशनल पार्क को ज़मीन लौटाने से इनकार कर दिया। ‘वनशक्ति’ के डायरेक्टर स्टालिन का कहना है कि संजय गाँधी नेशनल पार्क की ज़मीन के बड़े हिस्से को धोखाधड़ी के माध्यम से फ़िल्म सिटी को बेच डाला गया था। उन्होंने बताया कि इससे वन्य जनजीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। स्टालिन ने इसे लैंड स्कैम करार दिया।

पार्क के अधिकारी मानते हैं कि सर्वे नंबर में गड़बड़ी होने के कारण फ़िल्म सिटी को अतिरिक्त ज़मीन मिल गई। महाराष्ट्र सरकार ने 1969 में मुंबई इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MIDC) को 215 एकड़ ज़मीन दी थी। 1970 में आए एक सरकारी नोटिफिकेशन ने इसकी पुष्टि की। इसके बाद 1977 में MIDC ने 245 एकड़ ज़मीन फ़िल्म सिटी को ट्रांसफर किया। बाद में फ़ैसला लिया गया कि फ़िल्म सिटी को 245 एकड़ की जगह 194 एकड़ ही ट्रांसफर किया जाएगा। इस तरह से बाकी के बचे 51 एकड़ ज़मीन को वन विभाग को वापस लौटाया जाना था।

अब आपको बताते हैं कि ग़लती कहाँ हुई थी। 1970 के सरकारी नोटिफिकेशन में ग़लत सूचना दी गई थी। 1984 में एक दूसरा नोटिफिकेशन आया, जिसमें भूल-सुधार किया गया। दरअसल, 1970 के नोटिफिकेशन में ग़लती यह हुई थी कि 194 एकड़ को 215 एकड़ माप लिया गया था। एक गाँव का क्षेत्रफल ग़लत आँके जाने के कारण ऐसा हुआ। इस तरह से 245 एकड़ में से 194 एकड़ फ़िल्म सिटी को दिया जाना था और बाकी का 51 एकड़ वापस फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को लौटाया जाना था। फ़िल्म सिटी ने ये ज़मीन लौटाने से इनकार कर दिया और इसी कारण पिछले कई दशकों से नेशनल पार्क के साथ उसकी बाउंड्री अंतिम रूप नहीं ले सकी।

अगस्त 2017 में बाढ़ आने के कारण संजय गाँधी नेशनल पार्क के कई अहम दस्तावेज नष्ट हो गए। इस कारण इस मुद्दे को सुलझाने में और देरी हुई। दूसरी ओर, फ़िल्म सिटी के डिप्टी इंजीनियर चंद्रकांत ने कहा कि नेशनल पार्क की किसी भी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा नहीं किया गया है और कोई भी ज़मीन वापस नहीं लौटाई जाएगी। बॉलीवुड के लोगों ने भी पिछले 35 सालों से (जब नोटिफिकेशन में भूल-सुधार हुआ) इसे लेकर कोई आवाज़ नहीं उठाई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्यों न आरे जंगल बचाने के लिए पर्यावरण की चिंता करने वाले बॉलीवुड सेलेब्स अपने घर से ही शुरुआत करें?

(नोट- फ़िल्म सिटी का निर्माण भले ही 1977 में हुआ लेकिन यहाँ दादासाहब फाल्के द्वारा निर्मित स्टूडियो पहले से ही था। यह 1911 से ही वहाँ स्थापित है। इसे 1977 में एक नया रूप-रंग दिया गया था।)

MLA नाहिद हसन फ़रार, कोई भी उसके बारे में सूचना दे सकता है: भगोड़ा घोषित कर की गई मुनादी

उत्तर प्रदेश के शामली ज़िले की कैराना विधानसभा से समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक नाहिद हसन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कोर्ट से कुर्की का नोटिस पारित होने के बाद तीन अलग-अलग मामलों में फ़रार चल रहे नाहिद हसन को शामली की विशेष अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया है। हसन के ख़िलाफ़ 13 मामले दर्ज हैं।

पुलिस ने फास्ट ट्रैक कोर्ट शामली से NBW और धारा-82 के तहत आदेश प्राप्त कर विधायक नाहिद हसन के आवास पर नोटिस चिपका दिया है। साथ ही हसन के चबूतरे के गेट पर भी उन्होंने नोटिस चिपकाया। ख़बर के अनुसार, नोटिस चिपकाने से पहले पुलिस ने चौक बाज़ार से विधायक नाहिद हसन के आवास पर मुनादी (ढोल बजाते हुए) करवाते हुए माइक से अनाउंसमेंट भी करवाई। 

अनाउंसमेंट में कोतवाली प्रभारी यशपाल धामा ने कहा कि अभियुक्त नाहिद मुक़दमे में फ़रार चल रहा है। उसके बारे में कोई भी व्यक्ति कभी भी सूचना दे सकता है और सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।

पुलिस के अनुसार, जनवरी 2018 को मोहम्मद अली ने कैराना कोतवाली में सपा विधायक चौधरी नहाद हसन, उनकी माँ पूर्व सांसद तबस्सुम बेगम और आठ अन्य पर 87 लाख 80 हज़ार रुपए लेने के बाद ज़मीन का बैमाना किसी दूसरे के नाम करने का मामला दर्ज कराया था।

पिछले दिनोंं इस मामले में हसन के ख़िलाफ़ कोर्ट से वारंट प्राप्त कर पुलिस विधायक की गिरफ़्तारी में प्रयासरत थी, लेकिन हसन अभी भी पुलिस की पहुँच से दूर है। वहीं, हसन की माँ को शुक्रवार (4 अक्टूबर) को अंतरिम ज़मानत मिल गई थी। एसपी अजय कुमार ने बताया कि धोखाधड़ी के मामले में विशेष न्यायाधीश कोर्ट ने शनिवार (5 अक्टूबर) को सुनवाई के दौरान पुलिस को धारा-82 के तहत कार्रवाई करने की इजाज़त दे दी। उन्होंने बताया कि नाहिद की गिरफ़्तारी के लिए 11 टीमों का गठन किया गया है।   

बता दें कि धारा-82 के तहत एक तरह का नोटिस दिया जाता है कि आरोपित या तो सरेंडर कर दे अन्यथा उसके ख़िलाफ़ कुर्की की कार्रवाई की जाएगी। धारा-82 की समय-सीमा समाप्त होने के बाद पुलिस न्यायालय के समक्ष धारा-83 यानी कुर्की की अपील करेगी। धारा-83 के आदेश मिलने के बाद पुलिस कुर्की की कार्रवाई करती है।

एक मामला 9 सितंबर 2019 का भी है, जब विधायक अपनी कार से जा रहे थे। इस दौरान उनकी नोकझोंक एसडीएम कैराना डॉ अमित पाल शर्मा और तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी से हो गई। सोशल मीडिया पर घटना का एक वीडियो भी वायरल हो गया था। वीडियो सामने आने के बाद कैराना कोतवाली में सरकारी काम में बाधा डालने समेत कई गंभीर दाराओं में मामला दर्ज हुआ था।

ख़बर के अनुसार, हसन के ख़िलाफ़ धारा-419, 420, 465, 153, 353, 504, 505, 188 और 7 CLA एक्ट के चहत मामला दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद नाहिद की माँ तबस्सुम बेगम ने शामली में धरने की चेतावनी दी थी, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में छा गया।

देशद्रोही और गद्दार ओवैसी भाइयों को RSS में शामिल होकर देखनी चाहिए राष्ट्रभक्ति: राजा सिंह

तेलंगाना के गोशामहल सीट से विधायक राजा सिंह ने हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को एक तरह की राजनीतिक चुनौती दी है। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के साथ-साथ उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी को भी खरी-खरी सुनाई। हिन्दुओं के ख़िलाफ़ विवादित और भड़काऊ बयान देने के लिए चर्चा में रहने वाले अकबरुद्दीन फ़िलहाल हैदराबाद के चंद्रयनगुट्टा से विधायक हैं। राजा सिंह तेलंगाना में भाजपा के एकलौते विधायक हैं और हिंदूवादी छवि होने के कारण वह अक्सर अपने बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। राजा सिंह ने एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को ‘गद्दार’ और अकबरुद्दीन को ‘देशद्रोही’ करार दिया।

राजा सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम के दौरान ये बातें कही। संघ के ‘पथ संचालन’ कार्यक्रम के दौरान विधायक राजा सिंह गणवेश में हाथ में लाठी लेकर पहुँचे। उन्होंने कहा कि युवाओं में धार्मिक भावना पैदा करने और समाज को दिशा देने के लिए संघ पूरे देश में कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। उन्होंने कहा कि आरएसएस हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई में भेदभाव किए बिना देश को एक रखने का काम करती है। राजा सिंह ने कहा:

“एक तरफ देश की एकता की बात करनी वाली आरएसएस है। दूसरी तरफ ओवैसी जैसे देश के गद्दार हैं, जो संघ को प्रतिबंधित करने की बात करते हैं और इसके ख़िलाफ़ ग़लत टिप्पणी करते हैं। मैं असदुद्दीन ओवैसी और उनके छोटे भाई ‘दशद्रोही’ अकबरुद्दीन ओवैसी को कहना चाहूँगा कि तुम लोगों को भी आरएसएस की शाखा में सम्मिलित होने की ज़रूरत है। तुम शाखा में सम्मिलित होकर ही समझ पाओगे कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किस तरह देश के लिए काम करता है।”

विधायक राजा सिंह ने ओवैसी भाइयों से अपील करते हुए कहा कि वे दोनों तुरंत आरएसएस की शाखा ज्वाइन करें। उन्होंने कहा कि अगर दोनों ओवैसी संघ में सम्मिलित होंगे, तभी उनके मन के भीतर देश के प्रति अच्छी भावना जागेगी। उन्होंने ‘देश के विरुद्ध बात करने’, ‘वन्दे मातरम् नहीं गाने वाले’ और ‘भारत माता की जय नहीं बोलने वाले’ ओवैसी भाइयों पर जम कर निशाना साधा।

गोशामहल विधायक ने कहा कि एआईएमआईएम के ओवैसी भाइयों को ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम्’ का महत्त्व भी तभी पता चलेगा, जब वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा में जाएँगे। उन्होंने कहा कि संघ ऐसी संस्था है जो प्रणाम भी करती है और देशविरोधी ताक़तों को लाठी लेकर देश से बाहर खदेड़ना भी जानती है। राजा सिंह ने कहा, “मैं देशद्रोहियों को बता दूँ कि आज का भारत ‘भारत माता की जय’ बोलने वाला भारत होना चाहिए।

हाल ही में भाजपा विधायक राजा सिंह ने एक सेना के गठन की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि देशद्रोहियों को सबक सिखाने और उन्हें नरक पहुँचाने के लिए एक सेना का गठन किया जाएगा। उन्होंने जानकारी दी थी कि वे इस सेना के गठन के लिए तैयारियाँ कर रहे हैं। उन्होंने बताया था कि 6 महीने पहले इसके लिए एक कैम्प का आयोजन किया गया था और ‘हिंदुत्ववादी बहादुरों’ को उस कैम्प में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया था।

‘छुट्टी चाहिए तो अंग्रेजी में लिखें आवेदन’ – SP साहेब के फरमान के बाद पुलिसकर्मी खरीद रहे डिक्शनरी

उत्तर प्रदेश की पुलिस को अंग्रेजी सीखनी होगी! बलरामपुर के एसपी देन रंजन वर्मा का तो यही ख्याल है। उन्होंने पुलिस विभाग (अपने जिले में) में एक नई कवायद शुरू की है। दरअसल देन रंजन वर्मा ने पुलिसकर्मियों को अंग्रेजी अखबार पढ़ने और छुट्टियों के लिए आवेदन अंग्रेजी भाषा में ही करने के लिए कहा है।

एसपी वर्मा ने पिछले सप्ताह कई पुलिस स्टेशनों, जिला मुख्यालय और पुलिस लाइन में कक्षाएँ और कार्यशालाएँ आयोजित करने के बाद यह आदेश जारी किया है। निर्देश जारी होने के बाद जिले के पुलिस कर्मियों ने अंग्रेजी सीखने के लिए पुस्तकें व डिक्शनरी खरीदना शुरू कर दिया है।

हालाँकि, राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने इस आदेश के बारे में पूरी तरह से अनभिज्ञता व्यक्त की है। जानकारी के मुताबिक, अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) पीवी रामाशास्त्री ने कहा कि उन्हें इस आदेश के बारे में कोई जानकारी नहीं है और यह निर्णय जिला स्तर पर लिया गया है।

वहीं, देवीपाटन मंडल के डीआईजी (DIG) राकेश सिंह ने कहा कि उन्हें भी फैसले के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “उच्च स्तर से ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है। अंग्रेजी का उपयोग महत्वपूर्ण है या नहीं, यह एक नीतिगत निर्णय है। पुलिस भर्ती बोर्ड, डीजीपी और अन्य यह आकलन करते हैं कि हमारे कर्मियों को किन कौशल की आवश्यकता है। मैं इसके बारे में और कुछ नहीं कह सकता।”

एसपी वर्मा ने अपने इस निर्णय को सही ठहराते हुए कहा, “इस पहल के पीछे का कारण यह है कि सभी साइबर-अपराध और निगरानी की जानकारी अंग्रेजी में मिलती है और हमारे पुलिस को भाषा का बुनियादी ज्ञान होना आवश्यक है। मैंने पुलिसकर्मियों को अंग्रेजी में कोर्ट के फैसलों को समझने में बड़ी गलतियाँ करते हुए देखा है। इसके बाद मैंने पुलिसकर्मियों को कम से कम बुनियादी अंग्रेजी सीखने के लिए पहल करने का फैसला किया।”

उनका कहना है कि पुलिस कॉन्स्टेबलों ने अब छुट्टी के आवेदन लिखने के लिए गूगल से मदद लेनी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, “मैं आवेदनों की जाँच करता हूँ और वर्तनी की गलतियों को सुधारता हूँ। मैं चाहता हूँ कि वे अंग्रेजी अखबार पढ़ें और डिक्शनरी खरीदें। मैं इसे सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पुलिस स्टेशनों में जाऊँगा।”

लखनऊ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वो इस फैसले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “एसपी ने अपने दम पर ऐसा किया है और जब तक हमें मुख्यमंत्री की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आती है, हम न तो इस पहल को मंजूरी देंगे और न ही इसे अस्वीकार करेंगे।”

दुर्गा पूजा पंडाल में आरती के दौरान बजाई गई अजान: शिकायत दर्ज लेकिन चुप है कोलकाता पुलिस

कोलकाता के दक्षिण-मध्य में स्थित है बेलियाघाट। पूरे बंगाल की भाँति यहाँ के 33 पाली (Beliaghata 33 Pally) में भी दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन पूजा के नाम पर इनका (आयोजक का) मकसद कुछ और है। यहाँ के पूजा पंडाल से शांति-सद्भाव फैलाने के नाम पर अजान बजाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार घटना के संबंध में शांतनु सिंघ नामक एक वकील ने पुलिस को ईमेल भेजकर शिकायत भी की है। शांतनु ने अपनी शिकायत को धारा 295, 295 ए और 298 के तहत दर्ज कर जरूरी कार्रवाई करने की माँग उठाई है।

अपनी शिकायत में शांतनु ने पूजा पंडाल के क्लब सेक्रेट्री समेत 10 पर शिकायत दर्ज करवाई है। इनमें टीएमसी विधायक परेश पॉल का भी नाम शामिल हैं, क्योंकि यहाँ की पूजा के मुख्य आयोजक वही हैं। शांतनु का आरोप है कि पंडाल के आयोजक जानबूझकर ऐसी चीजें करके शहर की शांति को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।

कोलकाता हाईकोर्ट के वकील शांतनु का कहना है कि उन्हें इस आयोजन का वीडियो विश्व हिंदू परिषद द्वारा भेजी गई है। उनको मिले वीडियो के अनुसार दु्र्गा पूजा पंडाल में अजान बजाया जा रहा है, जो कि हिंदू धर्म की भावनाओं के विरुद्ध है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने अभी तक इस मामले पर चुप्पी साधी हुई है, लेकिन साइबर सेल पंडाल द्वारा शेयर किए जा रहे हर पोस्ट पर अपनी नजर बनाए हुए है।

पूजा आयोजकों का दावा है कि “आम्रा एक, एका नोय” उनके इस साल की थीम है। जिसका अर्थ “हम सब एक हैं, अकेले नहीं” है। इसका उद्देश्य हर धर्म में शांति फैलाना है।

पंडाल में लगा एक बैनर, फोटो साभार: swarajyamag

बेलियाघाटा के 33 पाली के क्लब सेक्रेटरी परिमल डे का पूरे मामले पर कहना है कि मामले का बेवजह राजनीतिकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हम सब जानते हैं कि कोलकाता में दुर्गा पंडाल इस प्रकार बनाए जाते हैं कि वो समाज को एक अच्छा संदेश दें। हमारी थीम – ‘आम्रा एक, एका नोय’ है। इसे दर्शाने के लिए हमने चर्च, मंदिर, मस्जिद के प्रतीकों वाले मॉडल्स का इस्तेमाल किया। हमारा मकसद सिर्फ़ ये दिखाना है कि इंसानियनत सभी धर्मों से सर्वोपरि है।”

परिमल ने बताया कि इस थीम में तीनों धर्मों के बारे में बताने के लिए आयोजकों द्वारा ऑडियो-वीडियो का प्रयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि कुछ लोग कार्यक्रम में हिंदू और ईसाई धर्म से जुड़े संदेशों को नजरअंदाज करके सिर्फ़ ऊर्दू में दिए संदेश पर बवाल बना रहे हैं। उनके मुताबिक ये बिलकुल फर्जी बात है कि माँ दुर्गा की पूजा के दौरान अजान बजाई गई हो।

ये दिवाली पटाखों वाली… केंद्र सरकार ने लॉन्च किए पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन क्रैकर्स, SC ने लगाई थी रोक

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने शनिवार (6 अक्टूबर) को कहा कि इस बार दीपावली पर देशभर में कम प्रदूषण करने वाले ग्रीन क्रैकर्स उपलब्ध रहेंगे, जो पर्यावारण के अनूकल होंगे। डॉ हर्षवर्धन ने अनुसंधान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंन्स में कहा कि 2017 में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद इस तरह के पटाखों को बनाने के बारे में सोचा गया और इसी दिशा में काम करते हुए वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने ग्रीन क्रैकर्स के विकास में अहम भूमिका निभाई। इस चुनौतीपूर्ण कार्य में CSIR की आठ सहयोगी प्रयोगशालाओं ने भी सहयोग दिया।

इस अवसर पर डॉ हर्षवर्धन ने कहा,

“मुझे बहुत ख़ुशी है कि एक तरफ, हम इस दिवाली पर पर्यावरण के अनुकूल पटाखे का इस्तेमाल करेंगे और दूसरी तरफ, रोशनी और पटाखों के साथ हमारे पारंपरिक त्योहार का उत्सव बरकरार रहेगा। लाखों घर जो आतिशबाज़ी की बिक्री और निर्माण पर निर्भर हैं, वे भी इस त्योहार का आनंद लेंगे। हमारे वैज्ञानिकों को धन्यवाद!”

उन्होंने कहा कि CSIR के पटाखों के बारे में फॉर्मूलेशन के बाद पटाखा उत्पादकों ने इसी आधार पर पटाखे बनाए हैं और पटाखा उत्पादकों के साथ लगभग 230 आपसी सहमति पत्रों और 165 नॉन डिसक्लोजर एग्रीमेंट्स (NDA) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने पटाखा उत्पादकों से CSIR की तरफ से सुझाए गए फॉर्मुलेशन के आधार पर पटाखे बनाने और बाजार में उतारे जाने से पहले इनकी जाँच तथा उत्सर्जन का आग्रह भी किया। CSIR द्वारा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय इंजीनियरिंग एवं पर्यावरण शोध संस्थान (NEERI) तथा राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) की प्रयोगशालाओं में इनकी जाँच की जा सकेगी। इन पटाखों में अनार, पेंसिल, चकरी, फुलझड़ी और सुतली बम आदि शामिल हैं। 

इस अवसर पर CSIR के महानिदेशक डॉ शेखर सी मांदे ने बताया कि CSIR के लिए ग्रीन क्रैकर्स के बारे में फॉर्मूलेशन तैयार करना और इस तरह के पटाखों की परिभाषा को तैयार करना काफी चुनौतीपूर्ण रहा है ताकि ऐसे पटाखों से कम से कम उत्सर्जक तत्व वातावरण में छूटें। CSIR ने ग्रीन क्रैकर्स के लिए बेंचमार्क के लिए तकनीकी कानूनी और नीतिगत हस्तक्षेप में अपनी तरफ से योगदान दिया और पारंपरिक पटाखों तथा ग्रीन क्रैकर्स में बेरियम के स्तर की जाँच की।

इस मौके पर NEERI के निदेशक डॉ राकेश कुमार ने बताया कि ग्रीन क्रैकर्स के विकास में द्विस्तरीय प्रकिया अपनाई गई और CSIR के साथ मिलकर उनके संस्थान ने पांरपारिक पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बेरियम नाईट्रेट के स्तर की जाँच कर ग्रीन क्रैकर्स के लिए एक नया मानक अपनाया। इस विधि से ग्रीन क्रैकर्स में 30 से लेकर 90 प्रतिशत बेरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कम किया गया और कईं पटाखों में यह बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया गया। इन पटाखों में ऑक्सीडेंट के तौर पर पोटेशियम नाईट्रेट का इस्तेमाल किया गया। 

उन्होंने बताया कि ग्रीन क्रैकर्स बनाने वाली इकाइयों को नई एवं संशोधित विधियों को पूरा कर एक निश्चित बेंचमार्क तक पटाखे बनाने के लिए 530 उत्सर्जन प्रमाणपत्र दिए गए हैं। 

ग्रीन क्रैकर्स के बारे में CSIR की मुख्य वैज्ञानिक डॉ साधना रायालु और उनकी टीम का कहना है कि इन पर NEERI का ग्रीन ‘Logo’ और एक QR कोड है जो इनकी पहचान हैं। इस कोड की जाँच करके इनकी असलियत का पता लगाया जा सकता है।

ग्रीन क्रैकर्स के संबंध में किसी भी जानकारी के लिए मंत्रालय द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर पर सम्पर्क किया जा सकता है। इसकी इमेल आईडी [email protected] और हेल्पलाइन नंबर +918617770964 और +919049598046 है।

दशहरे पर फ्रांस में शस्त्र पूजा करेंगे राजनाथ सिंह, 8 अक्टूबर को भारत को मिलेगा पहला राफेल

दशहरे के शुभ अवसर पर इस बार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारतीय मूल्यों को बरकरार रखते हुए पेरिस में शस्त्र पूजन करेंगे। 8 अक्टूबर को वह पेरिस में पहले राफेल फाइटर जेट को प्राप्त करके शस्त्र पूजन करेंगे और फिर उसी दिन वे उसमें उड़ान भी भरेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गृह मंत्री अपनी फ्रांस की तीन दिवसीय यात्रा के लिए 7 अक्टूबर को रवाना होंगे। यहाँ उन्हें 8 तारीख को भारतीय वायुसेना के स्थापना दिवस पर पहला लड़ाकू विमान राफेल सौंपा जाएगा। उसी दिन राजनाथ सिंह बोर्डिओक्स के पास मेरिनैक में राफेल जेट रिसीव करेंगे।

यहाँ बता दें कि शस्त्र पूजन हिंदुओं की एक बहुत पुरानी परंपरा हैं। इसमें योद्धा अपने हथियारों और शस्त्रों की पूजा करते हैं। अमर उजाला की खबर के अनुसार रक्षा अधिकारियों ने इस संबंध में बताया, “अपने गृह मंत्री कार्यकाल के दौरान से ही राजनाथ सिंह हर दशहरे पर शस्त्र पूजन करते रहे हैं। अब रक्षा मंत्री होने के नाते भी वह अपनी इसी परंपरा को जारी रखेंगे।

उल्लेखनीय है कि इस तीन दिवसीय यात्रा के दौरान फ्रांस में होने वाले कार्यक्रम में शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ राफेल के निर्माण कंपनी दसॉ एविएशन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद होंगे। गृह मंत्री 9 अक्टूबर को फ्रांस के शीर्ष रक्षा अधिकारियों के साथ दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के उपायों पर व्यापक चर्चा करेंगे। उनके साथ वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शन एचएस अरोड़ा भी होंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राफेल फाइटर जेट को भारतीय जरूरतों के अनुसार बदला गया है। इस विमान को उड़ाने के लिए भारतीय वायुसेना के कुछ पायलटों की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। अब ये सभी प्रशिक्षित पायलट वायुसेना के 24 और पायलटों को 3 अलग अलग हिस्सों में भारतीय राफेल फाइटर जेट की ट्रेनिंग देंगे। इन पायलटों की ट्रेनिंग 2020 मई तक चलेगी।

बताते चलें कि जिस राफेल को लेने रक्षामंत्री फ्रांस जा रहे हैं, उसके लिए नए एयर चीफ मार्शन आरकेएस भदौरिया ने कहा कि राफेल का शामिल होना देश और वायुसेना के लिए बहुत महत्तवपूर्ण है। इसकी तकनीक हमारे लिए गेमचेंजर साबित होगी।