Home Blog Page 5435

78 साल में पहुॅंचेंगे 5 ट्रिलियन डॉलर पर, 200 साल में अंग्रेज लूट कर ले गए $45 ट्रिलियन

भारत 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। यदि कामयाब रहे तो आजाद भारत को यहॉं तक पहुॅंचने में 78 साल लगेंगे। लेकिन, आप जानकर हैरत में रह जाएँगे कि इसका 9 गुना यानी 45 ट्रिलियन डॉलर तो हमारे देश से अंग्रेज 200 सालों में लूट कर ले गए।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान हैरान करने वाले इस आँकड़े को सामने रखा। ब्रिटिश राज में भारत को पहुँचाए गए भारी नुकसान की चर्चा करते हुए याद दिलाया कि किस तरह देश को हर क्षेत्र को अंग्रेजों के अत्याचार का सामना करना पड़ा। इनसे उबरते-उबरते कई पीढ़ियाँ बीत गईं। उन्होंने वाशिंगटन में आयोजित ‘अटलांटिक काउन्सिल’ के कार्यक्रम के दौरान ये बातें कही

जयशंकर ने भारत में 200 सालों तक चले ब्रिटिश राज से देश को हुए अन्य नुकसानों के साथ-साथ वित्तीय घाटे को भी हाइलाइट किया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश ‘लुटेरे’ 18वीं सदी के मध्य में भारत में घुसे थे। एक अर्थशास्त्री द्वारा कैलकुलेट किए गए आँकड़ों के मुताबिक़, ब्रिटिश भारत से 45 ट्रिलियन (45 लाख करोड़ ) डॉलर लूट कर ले गए।

विदेश मंत्री जयशंकर ने जिस अर्थशास्त्री का उल्लेख किया, उनका नाम उत्सा पटनायक है। जेएनयू में पढ़ा कर रिटायर हो चुकीं मार्क्सवादी अर्थशास्त्री उत्सा पटनायक ने कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में प्रकाशित एक लेख में इस आँकड़े का उल्लेख किया था। उन्होंने लिखा था कि अंग्रेजों ने भारत में जो लूट मचाई, उसके कारण देश अब तक ग़रीबी से जूझ रहा है। उन्होंने बताया था कि अगर यह धन देश में ही रहता तो भारत आज विकसित होता। उन्होंने कहा था कि ब्रिटिश राज के दौरान भारत में ‘प्रति व्यक्ति आय’ बढ़ ही नहीं पाया।

इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर भी इस तरफ लोगों का ध्यान आकृष्ट करा चुके हैं। थरूर ने अपनी पुस्तक ‘इनग्लोरियस एम्पायर’ में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल को ‘नरसंहारक तानाशाह’ करार दिया था। एबीसी न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि ब्रिटिश भले ही चर्चिल को आज़ादी और लोकतंत्र के मसीहा के रूप में देखते हों लेकिन वह 20वीं सदी के किसी अन्य क्रूर तानाशाह से अलग नहीं थे।

थरूर ने ‘ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन’ में दिए गए भाषण में बताया था कि ब्रिटिश राज के शुरुआत के समय भारत की अर्थव्यवस्था सम्पूर्ण वैश्विक इकॉनमी का 23% थी और जब अंग्रेजों से आज़ादी मिली तो यह मात्र 4% रह गई थी। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन का औद्योगीकरण भारत के डी-इंडस्ट्रियलाइजेशन पर आधारित था। ब्रिटिश भारत से कच्चा माल ले जाते थे और अपने देश में कपड़े बना कर पूरी दुनिया में उसको बेच कर माल कमाते थे।

चुनाव लड़ने का मतलब CM बनना नहीं: बेटे आदित्य की दावेदारी पर उद्धव ठाकरे

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा है कि उनके बेटे आदित्य के चुनाव मैदान में उतरने का मतलब यह नहीं कि वे मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री बनेंगे। उद्धव का यह रुख महाराष्ट्र में शिवसेना और भाजपा के बीच असहज स्थिति होने की खबरों के बीच आया है।

21 अक्टूबर को होने वाले महाराष्ट्र चुनाव के लिए भाजपा और शिवसेना के बीच आधिकारिक रुप से सीटों के बँटवारा हो चुका है। भाजपा 150 और शिवसेना 124 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बाकी 14 सीटें अन्य सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ी गई हैं। शिवसेना को 2 विधान परिषद की सीटें भी मिलेंगी।

भाजपा से कम सीटों पर चुनाव लड़ने की कसक तो शिवसेना में है, लेकिन उसे उम्मीद है कि गठबंधन की सरकार बनने पर उसे बराबर की भागीदारी मिलेगी। उद्धव ठाकरे ने कहा है कि उन्हें यकीन है कि बीजेपी अपने वादों पर खरा उतरेगी।

शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादक संजय राउत को दिए साक्षात्कार में उद्धव ने मुख्यमंत्री पद पर पार्टी की दावेदारी को लेकर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ठाकरे परिवार से किसी के पहली बार चुनाव लड़ने का मतलब यह नहीं है कि वो तुरंत सीएम या डिप्टी सीएम बन जाएँगे।

उन्होंने कहा कि आदित्य विधायी कार्यों का तजुर्बा लेना चाहते हैं। इसमें उनकी काफी रूचि है। वह अभी राजनीति में आए ही हैं और यह उनकी शुरुआत है। राजनीति में पहले कदम का मतलब यह नहीं होता कि आप राज्य के सीएम बन जाएँ। उल्लेखनीय है कि आदित्य चुनाव मैदान में उतरने वाले पहले ठाकरे हैं। उनके चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद से ही कई तरह के कयास लग रहे हैं। पिछले दिनों महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा था कि आदित्य को डिप्टी सीएम बनाने में उन्हें खुशी होगी।

साक्षात्कार के दौरान उद्धव ने कहा कि एक दिन शिवसैनिक जरूर राज्य का सीएम बनेगा। उन्होंने कहा कि शिवसैनिक को सीएम बनाने का वचन मैंने अपने पिता (बाला साहेब ठाकरे) को दिया था। जब तक यह पूरा नहीं होगा चैन से नहीं बैठूंगा।

इस दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि बीजेपी से शिवसेना का गठबंधन हिंदुत्व पर आधारित है। साथ ही ठाकरे ने यह भी कबूला कि उन्होंने बीजेपी के साथ गठबंधन में आने के लिए कंप्रोमाइज किया है और ऐसा उन्होंने सिर्फ महाराष्ट्र की भलाई के लिए किया है। ठाकरे ने कहा, “हम कम सीटों पर लड़ रहे हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री देवेंद्र
फड़णवीस और राज्य भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने मुझसे अपनी समस्या समझने का अनुरोध किया था। भले ही शिवसेना कम सीटों पर लड़ रही है, लेकिन पार्टी ज्यादातर सीटों पर जीत दर्ज करेगी।”

गाँधी परिवार को विदेश में भी SPG सुरक्षा: मोदी सरकार का फैसला, कॉन्ग्रेस ने कहा – ‘ये तो निगरानी करवाना है’

केंद्र सरकार ने एसपीजी सुरक्षा कवर के नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्णय लिया है। बता दें कि ‘स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप’ की सुरक्षा भारत में गिने-चुने नेताओं को ही मिली हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गाँधी परिवार के तीनों सदस्यों को एसपीजी सिक्योरिटी कवर मिला हुआ है। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी, पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी फ़िलहाल एसपीजी की सुरक्षा का लाभ उठा रही हैं। अब सरकार ने कहा है कि जिन्हें भी एसपीजी कवर मिला हुआ है, उन्हें विदेश दौरों पर भी इसे लेकर जाना होगा

सरकार ने सुरक्षा कारणों ने एसपीजी सिक्योरिटी कवर के दिशा-निर्देशों में कड़ाई की है। नियमों के अनुसार, एसपीजी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति अगर विदेश दौरे पर भी जाता है तो एसपीजी उसके साथ ही रहेगी। इस तरह से सोनिया, राहुल और प्रियंका अगर विदेश दौरों पर भी जाते हैं तो एसपीजी दस्ता उनके साथ ही जाएगा। कॉन्ग्रेस ने इस फ़ैसले का विरोध करते हुए कहा कि मोदी सरकार गाँधी परिवार की निगरानी कराने के लिए ऐसा कर रही है। भाजपा ने कॉन्ग्रेस के इन आरोपों को नकार दिया।

हालाँकि, एक अनाम कॉन्ग्रेस नेता ने ‘टाइम्स नाउ’ को बताया कि राहुल गाँधी नियम-क़ानून का पालन करने वाले नागरिक हैं और उन्होंने हमेशा से सभी सरकारी दिशा-निर्देशों का अनुपालन किया है। उक्त नेता ने कहा कि अगर उनके भले के लिए, उनकी सुरक्षा के लिए ऐसा किया गया है तो इस फ़ैसले को सहर्ष स्वीकार करेंगे। उस नेता ने आगे जानकारी दी कि पूरे दस्ते को लेकर विदेश यात्रा पर जाना बड़ा मुश्किल होता है, इसीलिए राहुल गाँधी विदेश दौरों पर 2-3 एसपीजी कमांडो लेकर जाते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार ने एसपीजी की नियमावली में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया है बल्कि पहले से ही तय किए गए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों ने बताया कि एसपीजी सुरक्षा कवर प्राप्त व्यक्ति को हमेशा एसपीजी दस्ते को अपने साथ ही रखना होता है लेकिन गाँधी परिवार के तीनों सदस्य समय-समय पर विदेश दौरों पर जाते रहते हैं और इस दौरान वे एसपीजी को साथ नहीं ले जाते। एसपीजी की टीम को हवाई अड्डे से ही वापस कर दिया जाता है।

केंद्र सरकार को लगता है कि ऐसा करना सुरक्षा में लापरवाही बरतना है। इसीलिए, अब नियमों का कड़ाई से पालन करवाया जाएगा। बता दें कि राहुल गाँधी अभी भी विदेश दौरे पर हैं और वह एसपीजी दस्ते को साथ लेकर नहीं गए हैं। ‘इंडिया टुडे’ के सूत्रों के अनुसार, अगर एसपीजी सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति इन नियमों का पालन करने से इनकार करता है तो सरकार उसके विदेश दौरों पर रोक लगा सकती है। अगस्त 2017 में राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया था कि राहुल गाँधी ने जानबूझ कर एसपीजी सुरक्षा के बिना 2 साल में विदेश में 72 दिन गुजारे ताकि वह विदेश दौरे के डिटेल्स छिपा सकें।

JNU में विरोध-प्रदर्शन: शेहला रशीद होंगी शामिल, उपाध्यक्ष ने कहा – हम दिखाएँगे J&K के असली हालात

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कुछ दिनों पहले ही जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने को लेकर सरकार के रूख को स्पष्ट करने और आगे बढ़ाने के लिए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) का दौरा किया। अब उनके दौरा करने के कुछ ही दिन बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) सोमवार (अक्टूबर 7, 2019) को एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन कैंपस में ही कर रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में कई वामपंथी दलों के नेता और एक्टिविस्ट शामिल होंगे।

बताया जा रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन में शेहला रशीद, अन्नी राजा, प्रदीपिका सारस्वत, फिल्मकार संजय काक और एजाज अहमद राथर शामिल होंगे। इस दौरान स्टूडेंट यूनियन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय किए जाने और लॉकडाउन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी। यूनिवर्सिटी में ’64 डेज ऑफ शटडाउन’ नाम से विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। शाम 4:30 बजे होने वाली विरोध सभा में शेहला रशीद शोरा, एनी राजा, प्रदीपिका सारस्वत, संजय काक और एजाज अहमद राथर को वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है।

JNUSU उपाध्यक्ष साकेत मून ने इंडिया टुडे को बताया कि यह कार्यक्रम दो प्रमुख कारणों से आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ कार्यकर्ता और शोधकर्ताओं ने 15 दिन पहले घाटी का दौरा किया है। वे ग्रामीण और शहरी, दोनों इलाकों में गए। उन्हें वहाँ के असली हालात पता हैं। उन्होंने वहाँ की वास्तविक तस्वीरें भी ली हैं। फैक्ट फाइंडिंग टीम के सदस्य जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के निरस्त हो जाने के बाद कश्मीर की वास्तविक तस्वीर दिखाने के लिए वीडियोज और रिपोर्ट्स पेश करेंगे।

साकेत मून ने आगे कहा कि यूनिवर्सिटी ने कुछ दिनों पहले सरकार के प्रोपेगेंडा के अनुसार प्रतिबंधित क्षेत्रों की एक शांतिपूर्ण तस्वीर के लिए मंत्री जितेंद्र सिंह को आमंत्रित किया था। लेकिन हमने जिन वक्ता को बुलाया है, या तो वे कश्मीर से हैं या फिर घाटी से निकटता से जुड़े हैं। जिसकी वजह से इस बार कश्मीर पर अधिक स्पष्ट परिदृश्य सामने आएगा।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह जब 3 अक्टूबर को जेएनयू में कश्मीर से 370 के मुद्दे पर बोलने आए थे, तो इस दौरान लेफ्ट विंग और राइट विंग के स्टूडेंट्स के बीच विवाद हो गया था। जेएनयूएसयू ने संगोष्ठी पर एक बयान भी जारी किया था, जिसमें कहा गया था, “संघ परिवार के ज़ेनोफोबिक ट्रम्पलिज्म आज जेएनयू में पूर्ण प्रदर्शन पर है। यह विडंबना है कि जिस प्रशासन ने जेएनयू की शांति और स्थिरता को बर्बाद कर दिया है, वह एक मंत्री को आमंत्रित कर रहा है। एक ऐसी पार्टी जो देश की शांति और स्थिरता को नष्ट कर रही है।”

अब देखना यह है कि जब चंद विदेशी और प्रोपेगेंडाबाज मीडिया के अलावा अलगाववादी और वामपंथी नेताओं के द्वारा पेश की गई जम्मू-कश्मीर की फर्जी तस्वीर की असलियत बार-बार सामने आ रही है, जब धीरे-धीरे वहाँ जीवन सामान्य हो रहा है, तो ऐसे में JNU के वामपंथी किले से आज किस तरह का फर्जीवाड़ा फैलाया जाएगा! क्योंकि वहाँ कम ही सही लेकिन पर्यटक भी जा रहे हैं, डॉक्टर भी जा रहे हैं, जो जा रहे हैं, वो वहाँ के किस्से भी सुना रहे हैं, फोटो व वीडियो भेज कर इनके प्रोपेगेंडा को ध्वस्त भी कर रहे हैं।

अलगाववादी दुकान बंद रखने के लिए पहुँचाते है पैसे: J&K से लौटे डॉक्टर ने किए कई बड़े खुलासे

‘BBC में लोग समुदाय विशेष को नाराज करने से डरते हैं, मुस्लिम समुदाय के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता’

BBC मतलब ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन। यहीं काम करते थे अनुभवी सिख होस्ट लॉर्ड इंद्रजीत सिंह। अब नहीं करते हैं, मतलब यहाँ की नौकरी उन्होंने छोड़ दी है। कारण – इंद्रजीत सिंह ने बीबीसी रेडियो के पूर्वग्रह और असहिष्णुता का विरोध करते हुए 35 साल पुराना संबंध तोड़ दिया है। इंद्रजात सिंह बीबीसी रेडियो 4 के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘थॉट फॉर द डे’ को प्रजेंट करते थे। उन्हें ब्रिटेन में सिख समुदाय की आवाज माना जाता है। उन्होंने इसे छोड़ने के पीछे मीडिया संस्थान (मतलब BBC) की मुस्लिम समुदाय के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता बताई। लेकिन क्यों और कैसे – आइए जानते हैं पूरी कहानी।

हुआ यह कि लॉर्ड इंद्रजीत सिंह ने सिख गुरु तेग बहादुर पर एक कार्यक्रम किया था। BBC ने उनके इस कार्यक्रम को सेंसर कर दिया। क्यों किया? क्योंकि… उनके कार्यक्रम की बातें ‘मुस्लिमों को नाराज कर सकती थी’। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में लॉर्ड सिंह ने कहा कि यहाँ एक दबाव है और लोग मुस्लिम समुदाय को नाराज करने से डरते हैं। गुरु तेग बहादुर पर मेरे कार्यक्रम को प्रसारित करने के लिए शो के प्रोड्यूसर ने हामी भी भरी थी लेकिन किसी सीनियर प्रोड्यूसर ने ‘मुस्लिम नाराज हो जाएँगे’ के डर से इसे सेंसर कर दिया।

इंद्रजीत सिंह ने कहा, “इसमें कुछ भी नहीं था, जो मुस्लिमों को नाराज करता। क्योंकि यह एक उदाहरण है कि कैसे सभी मनुष्यों का एक दूसरे के प्रति असहिष्णुता का इतिहास रहा है। हमें इससे सीखना चाहिए लेकिन इतिहास से सीखने के बजाय हम इसे दफनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

लॉर्ड सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर से संबंधित घटना, एक तथ्यात्मक ऐतिहासिक घटना है। यह ऐसे व्यक्ति की शहादत को याद करती है, जो अपने जीवन को हिंदू समुदाय के विश्वास की रक्षा करने के लिए सदा तत्पर रहे। यह हर धर्म के सभी लोगों द्वारा याद किया जाना चाहिए। लेकिन उन्हें (बीबीसी के सीनियर प्रोड्यूसर) कुछ मुस्लिम चरमपंथियों के खफा होने का ख्याली डर था।

साढ़े तीन दशकों से टुडे कार्यक्रम की प्रसिद्ध आवाज रहे लॉर्ड इंद्रजीत सिंह ने कहा कि बीबीसी ने उन्हें उस गुरु तेग बहादुर पर चर्चा करने से रोकने की कोशिश की, जिन्होंने 17वीं शताब्दी के भारत में हिंदुओं के इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तन (मुगलों के द्वारा) के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। वह कहते हैं कि धर्म को सेंसर करने का यह प्रयास गलत है, जो फर्जी के राजनीतिक रूप से पाक-साफ बने रहने की विचारधारा से उपजा है। यह सिर्फ कोरी कल्पना है कि हमें ऐसा कुछ नहीं कहना चाहिए, जिससे किसी की भावनाएँ आहत हो जाएँ।

लॉर्ड इंद्रजीत ने गुरु तेग बहादुर के शो को सेंसर करने के खिलाफ BBC के सीनियर अधिकारियों से भी बात की। उन्हें इस मुद्दे पर भरोसा भी दिया गया। लेकिन यह भरोसा सिर्फ भरोसा मात्र ही था। जब कोई बात बनते नहीं दिखी तो, उन्होंने BBC की नौकरी को बाय-बाय कर दिया।

उल्लेखनीय है कि गुरु तेग बहादुर सिख धर्म के दस सिख गुरुओं में से नौवें थे। उन्होंने न केवल कश्मीरी पंडितों को इस्लाम में धर्म परिवर्तन के लिए रोका, बल्कि दिल्ली में मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा सार्वजनिक रूप से खुद के धर्म परिवर्तन करने से भी इनकार कर दिया। जिसके बाद युद्ध छिड़ गया और युद्ध छेड़ने के लिए उनकी निंदा की गई और कहा गया कि केवल इस्लाम ही उन्हें बचा सकता है। फिर भी इस्लाम अपनाने के बजाय उन्होंने मौत को चुना और मुगलों द्वारा सरेआम उनका गला काटा गया। दिल्ली में जहाँ उनकी हत्या की गई, वहाँ उनकी याद में गुरुद्वारा सिस गंज साहिब है। गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब वो जगह है, जहाँ उनका दाह संस्कार किया गया।

Aarey पर अब नहीं चलेगी आरी: सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने लगाई रोक

मुंबई के आरे कॉलनी में मेट्रो शेड के निर्माण के लिए पेड़ काटे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इसके चंद मिनटों के भीतर ही सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की विशेष पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। पेड़ काटने का विरोध कर रहे कानून के छात्रों ने रविवार (अक्टूबर 6, 2019) को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिखा था, जिसे कोर्ट ने जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू की।

बता दें कि इससे पहले हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के अवकाश अधिकारी की ओर से सूचना दी गई है कि लॉ छात्र ऋषभ रंजन की ओर से छह अक्तूबर को यह पत्र लिखा गया था। जिसमें बताया गया कि मुंबई के आरे के जंगल में पेड़ काटे जा रहे हैं। पत्र को जनहित याचिका के तौर पर रजिस्टर्ड कर लिया गया और सोमवार (अक्टूबर 7, 2019) को सुबह 10 बजे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई करने का तय किया गया था।

लॉ छात्र द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया था कि मुंबई प्रशासन द्वारा शहर के फेफड़े कहे जाने वाले इन पेड़ों को काटा जा रहा है। इतना ही नहीं, शांतिपूर्ण तरीके से इसका विरोध करने वाले हमारे दोस्तों को भी जेल में डाल दिया गया। याचिकाकर्ता ने लिखा था कि उनके पास उपयुक्त याचिका दायर करने के लिए समय नहीं था, लिहाजा सुप्रीम कोर्ट अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर इसमें तत्काल हस्तक्षेप करे।

पढ़ें : फ़िल्म सिटी ने हड़प रखी है नेशनल पार्क की 51 एकड़ ज़मीन, Aarey पर विरोध करने वाला बॉलिवुड भी चुप

BJP नेता रविंद्र खरात, 2 बेटे और भाई समेत 5 लोगों की निर्मम हत्या: महाराष्ट्र चुनाव से पहले साजिश या रंजिश?

महाराष्ट्र के जलगांव में बीजेपी नेता रविंद्र खरात समेत 5 लोगों की निर्मम हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घटना महाराष्ट्र के जलगांव में भुसावल की है। पुलिस ने बताया कि बदमाशों ने खरात और अन्य पर गोलियाँ चलाईं और चाकू से हमला किया। हमले में खरात के अलावा उनके भाई सुनील, 2 बेटे – प्रेम सागर एवं रोहित और उनके एक दोस्त की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने तीनों हमलावरों को गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस जाँच कर रही है।

घटना रविवार (अक्टूबर 6, 2019) देर रात तब हुई, जब बीजेपी नेता रवींद्र और उनके परिजन भुसावल शहर स्थित समता नगर परिसर में अपने घर के बाहर बैठे थे। घटना को अंजाम देने के लिए दो अपराधियों ने पहले खरात पर गोली चलाई। जिसमें वो बुरी तरह से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। गोलीबारी की आवाज सुनकर उनके भाई सुनील बाबू राव खरात बाहर आए। हमलावरों ने उन पर भी गोली चलाई। वो जान बचाने के लिए घर में भागे। मगर हमलावरों ने उनका पीछा किया और चाकू से उनका गला काट दिया, उनकी भी वहीं पर मौत हो गई।

इसके बाद हमलावरों ने रवींद्र खरात के दोनों बेटे रोहित और प्रेम सागर के अलावा उनके एक दोस्त पर भी चाकू से हमला किया। इस दौरान हाथापाई हुई और अपराधी वहाँ से भाग गए। इस पूरे वारदात में दो लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। तीन की जलगांव सिविल हॉस्पिटल ले जाते समय मौत हो गई। इस घटना में रविंद्र की पत्नी भी घायल हैं।

इस वारदात के आधे घंटे बाद ही पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। उनसे देर रात तक पूछताछ जारी रही। भुसावल शहर के समता नगर में भारी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है। अधिकारी ने कहा, “इस बात की जानकारी अभी नहीं मिल पाई है कि यह हमला क्यों किया गया। बाजारपेठ पुलिस थाने में हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपितों से पूछताछ जारी है।” पुलिस ने बताया कि अपराध में इस्तेमाल किए गए हथियारों को बरामद कर लिया गया है। उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव होना है और वोटों की गिनती 24 अक्टूबर को की जाएगी।

पाकिस्तान का ब्लैकलिस्ट होना तय… 10 में 9 रेटिंग में फिसड्डी: FATF रिपोर्ट में खुलासा

पेरिस में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के सालाना अधिवेशन से ठीक पहले पाकिस्तान को करारा झटका लगा है। दुनिया भर में टेरर फंडिंग पर नजर रखने वाली संस्था FATF की एशिया पैसिफिक ग्रुप (APG) की रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग तथा टेरर फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई के 10 मानदंडों में से पाकिस्तान 9 में फिसड्डी साबित हुआ है जबकि एक में उसे ‘मध्यम’ स्थान प्राप्त हुआ है।

APG की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 को लागू करने के लिए सही कदम नहीं उठाए। उसने हाफिज सईद, मसूद अजहर और लश्कर ए तैयबा (LeT), जमात उद दावा (JuD) एवं फलह-ए-इंसानियत फाउंडेशन (FIF) जैसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों और आतंकी संगठनों को लेकर नरमी बरती और कोई ठोस एक्शन नहीं लिया।

पाकिस्तान सरकार की मिलीभगत का खुलासा करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि UNSCR 1267 कमिटी की रिपोर्ट में वर्ष 2008 में ही जेयूडी (JUD) और वर्ष 2012 में एफआईएफ (FIF) को प्रतिबंधित सूची में डाले जाने के बावजूद पाकिस्तान में ये दोनों संगठन खुलेआम जनसभाएँ करते हैं और फंड जुटाते हैं। पाकिस्तानी मीडिया द्वारा कई बार मानवीय राहत और सहायता के नाम पर एफआईएफ को चंदा वसूलते देखा गया है। इन संगठनों की ओर से एंबुलेंस सेवाएँ जारी रखने पर भी सवाल उठाए गए कि क्या इनकी फंडिंग के खिलाफ कारगर कार्रवाई की गई है?

बता दें कि FATF ने वर्ष 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था। तब उसे 15 महीनों में बताए गए 27 बिंदुओं पर काम करना था। 15 महीने की यह अवधि इस साल सितंबर में पूरी हो चुकी है और अब इस पर एफएटीएफ का आखिरी फैसला आना है। ऐसे में एपीजी की यह ताज़ा रिपोर्ट पाकिस्तान के लिए नई मुसीबत पैदा कर सकती है।

उल्लेखनीय है कि 13 से 18 अक्टूबर को एफएटीएफ की मीटिंग होनी है, जिसमें टेरर फंडिंग को लेकर पाकिस्तान पर फैसला लिया जाएगा। एपीजी की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि FATF की बैठक में पाकिस्तान का ब्लैकलिस्ट होना तय है।

‘हम कहते हैं भारत माता की जय, कॉन्ग्रेस कहती है सोनिया माता की जय’

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में एक जनसभा को संबोधित करते हुए रविवार (अक्टूबर 6, 2019) को कहा, “लोगों को भारत माता की जय बोलने वालों और सोनिया माता की जय बोलने वालों के बीच अंतर करना होगा।” उन्होंने कहा, “जब हमारे सामने माता का चित्र आता है तो हम जोर से बोलते हैं भारत माता की जय, लेकिन जब हमारे कॉन्ग्रेस मित्रों के सामने माता का विचार आता है, तो इनको सोनिया माता दिखती हैं, फिर ये सोनिया माता की जय बोलने लग जाते हैं।”

दरअसल, मनोहर लाल खट्टर ने ये बयान इसलिए दिया क्योंकि इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें गुड़गाँव विधानसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार सुखबीर कटारिया को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि गुड़गाँव के लोग लोग भारत माता की जय नहीं बोलेंगे। ‘भारत माता की जय’ की जगह अब लोग ‘सोनिया माता की जय कहेंगे।’

आगे मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि कॉन्ग्रेस अब नहीं कह सकती है कि वीडियो फर्जी है क्योंकि ”इससे सोनिया गाँधी नाराज हो जाएँगी, और अगर वह कहती है कि यह सही है तो लोग नाराज हो जाएँगे।” उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेहरू-गाँधी परिवार के आगे कुछ सोच ही नहीं सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेता आपस में गुटबाजी कर रहे हैं। एक-दूसरे पर करोड़ों रुपए में टिकट बेचने का आरोप लगा रहे हैं। अब जनता समझदार है। वो इनकी राजनीति का गंदा खेल देख रही है।

इसके साथ ही खट्टर ने राहुल गाँधी पर भी निशाना साधते हुए कहा, “(तत्कालीन) कॉन्ग्रेस अध्यक्ष (राहुल गाँधी) ने (लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद) कहा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है और नया अध्यक्ष गाँधी परिवार के बाहर का व्यक्ति होगा। कॉन्ग्रेस ने 2 महीने का समय लिया लेकिन उन्हें इस परिवार से बाहर का कोई योग्य व्यक्ति नहीं मिला और सोनिया गाँधी को फिर से अध्यक्ष बना दिया गया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया भर में देश का कद बढ़ाया है और अमेरिका के ह्यूस्टन में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के दौरान इसकी झलक देखने को मिली थी। मुख्यमंत्री ने कहा, “बड़े देश भी पीएम मोदी से संपर्क करते हैं। नीतियाँ और योजनाएँ बनाने के लिए उनकी सलाह लेते हैं।” ह्यूस्टन समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति के शामिल होने का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ”पीएम मोदी अब विश्व के शीर्ष नेताओं में शुमार हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने इतना आदर किसी अन्य को नहीं दिया जितना उन्होंने उनको दिया।”

पाकिस्तानी ट्रेन चली Los Angeles, मंत्री ने कहा- ‘अल्लाह ने चाहा तो ज़रूर जाएँगे’ – देखें Viral Video

पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में स्थित सुक्कुर के रोहरी रेलवे स्टेशन पर एक अजीबोगरीब नज़ारा देखने को मिला। यहाँ ‘आवाम एक्सप्रेस’ नामक एक ट्रेन के स्क्रीन पर गंतव्य स्थल लॉस एंजेल्स दिखा रहा था। बता दें कि लॉस एंजेल्स अमेरिका के कैलिफोर्निया का सबसे बड़ा शहर है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में लोगों ने दावा किया कि पाक रेलवे ने इतनी तरक्की कर ली है कि अब सीधे लॉस एंजेल्स के लिए ट्रेन चलाई जा रही है। पत्रकार नायला इनायत ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए मज़ाकिया अंदाज़ में लिखा कि पाक रेलवे ने लम्बी छलांग लगाई है।

पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद ने इससे जुड़े सवालों के जवाब में कहा कि अगर अल्लाह ने चाहा तो ज़रूर लॉस एंजेल्स भी जाएँगे। उन्होंने इसे सोशल मीडिया का कमाल करार दिया और कहा कि पाकिस्तानी लोग रेलवे से बहुत मोहब्बत करते हैं। शेख रशीद ने कहा कि ‘आवाम एक्सप्रेस’ की कम्प्यूटराइज्ड स्क्रीन से छेड़छाड़ कर ऐसा वीडियो बना लिया गया। उन्होंने कहा कि स्क्रीन से छेड़छाड़ के लिए बस अंदर जाकर ‘टिक-टिक’ करना होता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोगों को रेलवे से इतनी मोहब्बत है कि वे पाकिस्तानी ट्रेनों को बर्फ में चलते हुए भी वीडियो बनाते हैं।

बता दें कि ये वही शेख रशीद हैं, जिन्हें जम्मू कश्मीर को लेकर आयोजित पाकिस्तानी कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते ही माइक से करंट लगा था। वह पाकिस्तान के पास पाव भर का परमाणु बम होने का दावा भी कर चुके हैं। लाहौर में मीडिया से बात करते हुए शेख रशीद अहमद ने पाकिस्तानी ट्रेन का गंतव्य स्टेशन लॉस एंजेल्स दिखाए जाने को यात्रियों की शरारत करार दिया

बता दें कि सिंध की राजधानी कराची से कमर्शियल फ्लाइट्स से लॉस एंजेल्स जाने में 20 घंटे से भी अधिक लगते हैं। लोगों ने सोशल मीडिया पर पाक रेलवे का जम कर मज़ाक बनाया। पाक मंत्री के बयान को लेकर कुछ पाकिस्तानियों ने ही उन्हें लताड़ भी लगाई।