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राहुल गॉंधी के खिलाफ साजिश रच रहे सोनिया के करीबी, तबाह हो जाएगी कॉन्ग्रेस: संजय निरुपम

21 अक्‍टूबर को होने वाले महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव में टिकटों के बँटवारे से नाराज कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम ने पार्टी के खिलाफ ‘मोर्चा’ खोल दिया है। शुक्रवार को निरुपम ने कहा कि कॉन्ग्रेस 3-4 सीटों को छोड़कर मुंबई की सभी सीटें हार जाएगी। उन्‍होंने पार्टी के भीतर षड्यंत्र का आरोप लगाते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस के अंदर सिस्टमैटिक फॉल्ट हो गया है। अगर इससे नहीं निकले तो पार्टी जल्द ही तबाह और बर्बाद हो जाएगी।

पत्रकारों से बात करते हुए संजय निरुपम ने कहा, “जिस तरह से मुंबई में उम्‍मीदवारों का चयन किया गया, आप 3-4 सीटें छोड़ दें तो बाकी सभी पर कॉन्ग्रेस की जमानत तक जब्‍त हो जाएगी।” उन्होंने कहा कि बगैर किसी सर्वे के, बगैर किसी ग्राउंड वर्क के व्यक्तिगत पसंद और नापसंद के आधार पर उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं। वहीं, पार्टी के लिए प्रचार नहीं करने की बात दोहराते हुए पत्रकारों से कहा, “अब मैं आपसे 24 अक्‍टूबर को नतीजों के दिन ही मिलूँगा।”

निरुपम ने आरोप लगाया है कि सोनिया गाँधी के साथ जुड़े कुछ बड़े नेता साजिश रच रहे हैं। राहुल गाँधी के खिलाफ साजिश रची जा रही है। जो लोग राहुल गाँधी के साथ जुड़े हैं, उन्हें साजिश रचकर पार्टी में अलग-थलग किया जा रहा है।

संजय निरुपम ने पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे पर आरोप लगाते हुए कहा, “मैंने उनसे वर्सोवा, गोरेगांव समेत 4 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की सिफारिश की थी। मैंने दिल्ली जाकर उम्मीदवारों को उनसे मिलवाया भी लेकिन खड़गे ने किसी से बात भी नहीं की और एक भी सीट उनमें से किसी को नहीं दी गई। टिकट बँटवारा पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण और अनुचित तरीके से की गई है।”

निरुपम ने कहा कि जिनको टिकट दिया गया है, वह 77 साल के हैं। ठीक से चल-फिर भी नहीं पाते हैं। पिछले चुनाव में वो तीसरे स्थान पर रहे थे। पार्टी ने उनसे ये भी नहीं पूछा कि चुनाव हारने के बाद उन्होंने क्या किया। उन्होंने अपना आवेदन भी अपने बेटे के माध्यम से भरा था।

गौरतलब है कि निरुपम ने गुरुवार को घोषणा की थी कि वह 21 अक्टूबर को प्रस्तावित विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए प्रचार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि उन्हें ‘दरकिनार’ कर दिया गया है, जबकि उन्होंने चार वर्षों तक पार्टी की मुंबई इकाई का अध्यक्ष पद संभाला था। लोकसभा चुनावों से पहले मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से हटाए गए निरुपम ने कहा कि विधानसभा चुनाव के लिए टिकटों के वितरण में उनकी राय पर विचार नहीं किया गया। उन्होंने कहा, “मुझे विधानसभा चुनाव प्रक्रिया में कोई भूमिका नहीं दी गई। मेरे लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ही (विधानसभा) टिकट के बँटवारे के दौरान मेरे विचारों पर ध्यान नहीं दिया गया।”

दलित कॉन्स्टेबल की मजबूरी का मौलाना जुबैर ने उठाया फायदा, ब्लैकमेल कर साल भर करता रहा यौन शोषण

उत्तर प्रदेश के बागपत में महिला हेड कॉन्स्टेबल से यौन उत्पीड़न के आरोपित मौलाना जुबैर को पुलिस ने शुक्रवार (अक्टूबर 4, 2019) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित बागपत के मोमिन मस्जिद में मौलाना है। उस पर बेटे को ठीक करने के बहाने करीब एक साल से महिला कॉन्सटेबल का यौन उत्पीड़न कर ब्लैकमेल करने का आरोप है।

बागपत पुलिस ने एक बयान में इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कर ली गई है।

बागपत पुलिस स्टेशन में तैनात महिला हेड कॉन्स्टेबल को उसके बेटे के इलाज के बहाने मौलाना जुबैर कथित तौर पर एक साल से बलात्कार और ब्लैकमेल कर रहा था। यह भी पता चला है कि मौलवी ने पीड़िता से उसके बेटे के इलाज और घर में शांति बनाए रखने के नाम पर लाखों रुपए भी ऐंठे।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2006 में अपने पति की मृत्यु के बाद बिजनौर निवासी पीड़ित महिला को आश्रित कोटे में एक कॉन्स्टेबल के रूप में नौकरी मिली, जो बाद में बागपत पुलिस स्टेशन में हेड कॉन्स्टेबल बन गईं। पिछले साल 29 जून को महिला कॉन्स्टेबल का छोटा बेटा सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था। बेटे का कई महीनों तक आईसीयू में इलाज भी चला। बेटे की हालत में सुधार न देख महिला अं​धविश्वास के फेर में पड़ गई। वह 30 जुलाई 2018 को अपने बेटे के इलाज के लिए मोमिन मस्जिद के मौलाना जुबैर के पास पहुँची। 

मौलाना ने हेड कॉन्स्टेबल के अंधविश्वास का पूरा फायदा उठाया और पीड़िता को विश्वास दिलाया कि उसका बेटा उसके मृत पति के पास है। बेटे का इलाज करने का आश्वासन देकर मौलाना शारीरिक संबंध बनाने के लिए महिला को मजबूर करने लगा। आरोपित मौलाना, शारीरिक संबंध न बनाने पर महिला हेड कॉन्स्टेबल को उसके बेटे की मौत की चेतावनी देकर डराता-धमकाता था।

लगभग एक साल तक मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से तंग आकर हेड कॉन्स्टेबल ने बागपत पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद मौलाना को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौलाना के खिलाफ आईपीसी की धारा-376 सहित संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इसके साथ ही मौलाना पर एससी/ एसटी एक्ट भी लागू किया गया है, क्योंकि महिला दलित समुदाय से है।

जय भीम-जय मीम की विश्वासघात और पश्चाताप की कहानी: पाक का छला, हिंदुस्तान में गुमनाम मौत मरा

बांग्ला में योगेन्द्र को अक्सर जोगेंद्र कहा जाता है। बंगाल के दलित नेता थे जोगेंद्र नाथ मंडल। आपने उनका नाम नहीं सुना होगा। आम तौर पर दल हित चिन्तक उनका नाम लेने से कतराते नजर आएँगे। आजकल जो जय भीम के साथ जय मीम जोड़ने की कवायद चल रही है, ये नाम उसकी नींव ही खोद डालता है। इसलिए इनके बारे में जानने के लिए आपको खुद ही पढ़ना पड़ेगा।

उनका जन्म ब्रिटिश बंगाल में 29 जनवरी 1904 को हुआ था। पाकिस्तान के जन्मदाताओं में से वो एक थे। सन 1940 में कलकत्ता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में चुने जाने के बाद से ही मुस्लिम समुदाय की उन्होंने खूब मदद की। उन्होंने बंगाल की ए.के. फज़लुल हक़ और ख्वाजा नज़ीमुद्दीन (1943-45) की सरकारों की खूब मदद की और 1946-47 के दौरान मुस्लिम लीग में भी उनका योगदान खूब था। इस वजह से जब कायदे आज़म जिन्ना को अंतरिम सरकार के लिए पाँच मंत्रियों का नाम देना था तो एक नाम उनका भी रहा।

जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री थे। जोगेंद्र नाथ मंडल के इस पद को स्वीकारने से कॉन्ग्रेस के उस निर्णय की बराबरी हो जाती थी, जिसमें कॉन्ग्रेस ने अपनी तरफ से मौलाना अबुल कलाम आजाद को मनोनीत किया था।

आप सोचेंगे कि जोगेंद्र नाथ मंडल ने ऐसा क्या किया था कि जिन्ना ने उन्हें चुना? 3 जून 1947 की घोषणा के बाद असम के सयलहेट जिले को मतदान से ये तय करना था कि वो पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा या भारत का। उस इलाके में हिन्दुओं और मुस्लिमों की जनसंख्या लगभग बराबर थी। चुनाव में नतीजे बराबरी के आने की संभावना थी। जिन्ना ने मंडल को वहाँ भेजा। दलितों का मत, मंडल ने पाकिस्तान के समर्थन में झुका दिया। मतों की गिनती हुई तो सयलहेट पाकिस्तान में गया। आज वो बांग्लादेश में है।

जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान के पहले श्रम मंत्री भी थे। सन 1949 में जिन्ना ने उन्हें कॉमनवेल्थ और कश्मीर मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंप दी थी। इस 1947 से 1950 के बीच ही पाकिस्तान में हिन्दुओं पर लौमहर्षक अत्याचार होने शुरू हो चुके थे। दरअसल हिन्दुओं को कुचलना कभी रुका ही नहीं था। बलात्कार आम बात थी। हिन्दुओं की स्त्रियों को उठा ले जाना जोगेंद्र नाथ मंडल की नजरों से भी छुपा नहीं था। वो बार-बार इन पर कार्रवाई के लिए चिट्ठियाँ लिखते रहे।


जोगेंद्र नाथ मंडल

इस्लामिक हुकूमत को ना उनकी बात सुननी थी, ना उन्होंने सुनी। हिन्दुओं की हत्याएँ होती रहीं। जमीन, घर, स्त्रियाँ लूटी जाती रहीं। कुछ समय तो जोगेंद्र नाथ मंडल ने प्रयास जारी रखे। आखिर उन्हें समझ आ गया कि उन्होंने किस पर भरोसा करने की मूर्खता कर दी है। जिन्ना की मौत होते ही 1950 में जोगेंद्र नाथ मंडल भारत लौट आए। पश्चिम बंगाल के बनगांव में वो गुमनामी की जिन्दगी जीते रहे। अपने किए पर 18 साल पछताते हुए आखिर 5 अक्टूबर 1968 को उन्होंने गुमनामी में ही आखरी साँसें लीं।

अब आपको शायद ये सोचकर थोड़ा आश्चर्य हो रहा होगा कि कैसे आपने कभी इस नेता का नाम तक नहीं सुना? राजनीति में तो अच्छी खासी दिलचस्पी है ना आपकी? अपने फायदे के लिए कैसे एक समुदाय विशेष ने एक दलित का इस्तेमाल किया था उसका ये इकलौता उदाहरण भी नहीं है। बस समस्या है कि ना आपने खुद पढ़ने की कोशिश की और दल हित चिन्तक तो आपको सिर्फ एक वोट बनाना चाहते हैं! तो वो क्यों पढ़ने देते भला?

यही सिर्फ एक वोट बनकर रह जाने का अफ़सोस था जो आपने रोहित वेमुल्ला की चिट्ठी में लिखा पाया था। उनकी चिट्ठी में जो कुछ हिस्सा आप आज कटा हुआ देखते हैं वो कल कोई और लिखेगा। आप पढ़ने से इनकार करते रहेंगे, उधर मासूम अपने खून से बार-बार ऐसी चिट्ठियाँ लिखते रहेंगे। कभी सोचा है कि वो आपको जोगेंद्र नाथ मंडल का नाम क्यों नहीं बताते? कभी सोचा है कि वो आपको पढ़ने क्यों नहीं कहते? कभी सोचा है कि उन्होंने आपको चार किताबों का नाम बताकर खुद पढ़कर आने को क्यों नहीं कहा? वो खुद को आंबेडकरवादी कहते हैं ना? आंबेडकर और फुले दम्पति तो जिन्दगी भर शिक्षा के लिए संघर्ष करते रहे! फिर ये क्यों आपको किताबों से दूर करते हैं?

ऐसा वो इसलिए करते हैं क्योंकि पढ़ने के बाद आप सिर्फ एक वोट नहीं रह जाएँगे। पढ़ने के बाद आप दर्ज़नों तीखे सवाल हो जाएँगे। पढ़ने पर आप देखेंगे कि आंबेडकर खुद क्या कहते थे।

बाकी किसी विदेशी फण्ड पर पलने वाले की पूँछ पकड़ कर चलना है, या खुद से दलित चिंतन करना है, ये फैसला तो आपको खुद ही करना होगा।

ये फैसला भी आपको खुद ही करना होगा कि संसद में ‘जय भीम जय मीम’ का नारा लगा कर ओवैसी ने कोई इतिहास नहीं रचा है। और यह समझना भी होगा कि जिस जोगेंद्र नाथ मंडल ने इस तर्ज पर इतिहास रचा था, खुद उनका और उनके प्रयास का हश्र क्या हुआ। यह भी समझना होगा कि जोगेंद्र नाथ मंडल तो नेता थे, मंत्री थे, परिस्थितियाँ विपरीत हुईं तो गुमनामी में सही लेकिन वापस भारत आ गए, लेकिन उनका क्या जो मंडल जी के आह्वान पर मात्र एक वोट बनकर पाकिस्तानी हुए और अब बांग्लादेशी होकर भी कैसी जिंदगी जी रहे होंगे, यह सोचने के लिए किसी दिव्य-दृष्टि की जरूरत नहीं।

इमरान के झूठ के साथी बने पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी, पकड़े गए तो त्यौरियाँ चढ़ाने लगे

जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से उन “58” देशों की सूची माँग ली, जिन्होंने पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में हिंदुस्तान के खिलाफ प्रस्ताव के समर्थन का कथित वादा किया था, तो कुरैशी को गुस्सा आ गया। पाकिस्तानी चैनल एक्सप्रेस न्यूज़ के होस्ट जावेद चौधरी कुरैशी का इंटरव्यू ले रहे थे, जब यह वाकया हुआ। कुरैशी लगातार इमरान खान के उस झूठ का समर्थन करते जा रहे थे, जिसमें इमरान ने मानवाधिकार आयोग में “58 देशों” का समर्थन पा लेने का दावा किया था।

https://youtu.be/vBUZE3C_c64

किसके एजेंडे पर काम कर रहे हो?

“किसके एजेंडे पर काम कर रहे हो?” जब कुरैशी को कोई जवाब नहीं सूझा तो वे जावेद चौधरी पर ही बिफ़रने लगे। “अब आप मुझे बताएँगे या तय करेंगे कि कौन-से देश ने UN में पाकिस्तान का समर्थन किया है या नहीं? जो लिखना है लिख दो।” झल्लाए हुए कुरैशी का यह जवाब था।

जब कुरैशी से चौधरी ने इमरान खान के दावे का समर्थन अपने खुद के ट्विटर हैंडल से करने के बारे में पूछा, तो चौधरी का आपा ही खो गया। “नहीं! नहीं! दिखाइए मुझे जो ट्वीट मैंने लिखा था। वो मत दिखाइए जो प्रधानमंत्री ने लिखा था। आपने कहा मेरे ट्वीट। दिखाइए मुझे। मुझे मेरा ट्वीट चाहिए।” कुरैशी न केवल ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगे, बल्कि उन्होंने जावेद चौधरी पर “एजेंडा चलाने” का आरोप भी मढ़ दिया।

ट्वीट दिखाने पर भी “इसमें गलत क्या है?”

यहाँ तक कि जब चौधरी को उनका वह ट्वीट दिखा दिया गया, जिसमें उन्होंने “50 से अधिक देशों” के UNHRC में पाकिस्तान के समर्थन का दावा किया था, तो भी उन्हें समझ नहीं आया कि उसमें गलत क्या है। “मैंने जो कहा, उस पर मैं कायम हूँ। इसमें इतनी हैरत की क्या बात है? आप किसका एजेंडा चला रहे हो?” गौरतलब है कि UNHRC में सदस्यों की संख्या ही महज़ 47 है, जबकि कुरैशी और उनके बॉस इमरान खान “50 से अधिक”/”58” देशों के समर्थन का दावा कर रहे थे।

रायबरेली की कॉन्ग्रेस विधायक को पार्टी का कारण-बताओ नोटिस, 370 पर भी भाजपा का किया था समर्थन

कॉन्ग्रेस ने सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र राय बरेली की विधायक अदिति सिंह को कारण-बताओ नोटिस जारी किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के हुक्म की तामील न कर गाँधी जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आहूत विधानसभा के विशेष सत्र में भागीदारी की थी। उन्हें दो दिन में जवाब देने को कहा गया है।

गाँधी जयंती पर कॉन्ग्रेस के बहिष्कार का बहिष्कार

अदिति सिंह ने पार्टी के उस आदेश को मानने से इंकार कर दिया था जिसमें पार्टी ने उक्त तिथि को आयोजित सत्र का बहिष्कार करने का निर्देश अपने विधायकों को दिया था। इस सत्र में संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित पर्यावरण-संवेदनशील विकास लक्ष्यों (sustainable development goals) पर चर्चा हुई थी। इस बहिष्कार का हिस्सा न बनने के लिए कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने अदिति सिंह के घर के बाहर प्रदर्शन भी किया था। उनके इस्तीफ़े की भी माँग की जा रही है।

वहीं अदिति सिंह ने कहा है कि उन्होंने गाँधी के पथ का ही अनुसरण करने और देश के विकास के लिए यह कदम उठाया। इसके पहले उन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का भी समर्थन पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर किया था। इसके अलावा उन्होंने प्रियंका गाँधी-वाड्रा के गाँधी जयंती पर किए गए ‘शांति मार्च’ से भी किनारा कर लिया था।

चीन माँगेगा $6.7 अरब, IMF $2.8 अरब: जून 2022 तक इतना पैसा आखिर कहाँ से जुटाएगा पाकिस्तान?

पाकिस्तान पर विदेशी कर्जे की फेहरिस्त हैरान कर देने वाली है। 3.3% की विकास दर पर कराह रहे पाकिस्तान को जून, 2022 तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को $2.8 अरब और चीन को $6.7 अरब लौटाने हैं। यह राशि उन कर्जों को चुकता करने के लिए है, जो पाक ने अपने विदेशी मुद्रा कोष की बदहाली पर काबू पाने और आर्थिक हालात पर काबू पाने के लिए लिए थे। 

बेल्ट-रोड बनी फाँसी का फंदा

हिंदुस्तान से कब्जाए पीओके में पाकिस्तान ने चीन को बेल्ट एन्ड रोड इनिशिएटिव के लिए दे दिया, जब कि उस भूभाग पर उसका हक़ ही नहीं था। इसी के बदले चीन ने उसे मुँहमाँगा कर्ज देना शुरू कर दिया, और उस कर्जे से पाकिस्तान इतना बौराया कि वह उसके बाद चीन से कर्ज पर कर्ज लेता गया। कराची स्थित Optimus Capital Management के प्रमुख शोधकर्ता हफ़ीज़ फैज़ान अहमद के हवाले से टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में दावा है कि इस चीनी कर्ज़ का सबसे बड़ा हिस्सा तब आया जब पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार कम होता जा रहा था।

यही नहीं, Center for Global Development नामक एक थिंक टैंक ने पाकिस्तान को पिछले साल ही उन देशों की सूची में डाल दिया था जिन्हें इस बेल्ट-रोड योजना के चलते कर्ज़ में डूबना पड़ेगा। आज यह आकलन सच साबित हो रहा है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि पाकिस्तान पूरी तरह फ़टेहाल है- उसके सारे संसाधनों पर सेना का कब्ज़ा हो गया है, जिसे देश के आर्थिक हालत से कोई फर्क नहीं पड़ता।

घाटा, टैक्स चोरी और मुँह फाड़े सेना

पाकिस्तानी सेना देश के बजट का 17-22% लेती है। बावजूद इसके कि वह खुद 100 अरब डॉलर के आर्थिक साम्राज्य की मालिक है, जो बैंकिंग, सीमेंट, रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में पसरा हुआ है। हाल ही में उसने सरकार से खनन, तेल और गैस का काम भी अपने हाथों में ले लिया है। इसके उलट पाकिस्तानी सरकारी कम्पनियाँ घाटे में गहरी डूबती जा रहीं हैं। केवल 1% के टैक्स देने वाले नागरिकों के दायरे के अलावा उसका टैक्स-जीडीपी अनुपात 11% दुनिया के न्यूनतम में से एक है।

इमरान कूटनीतिक रिश्तों में कच्चे, अब पूरे पाकिस्तान को जिहाद में झोंकना चाहते हैं: MEA प्रवक्ता रवीश कुमार

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि वह अपनी पूरी जनता को जिहाद की आग में झोंक देना चाहता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यह बात पत्रकारों से बात करते हुए कही। वे पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के अपने देशवासियों से नियन्त्रण सीमा (LOC) पर मार्च करने के आह्वाहन पर मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान प्रतिक्रिया दे रहे थे।

महासभा में भी बचकाना हरकतें

रवीश कुमार ने यह भी कहा कि इमरान खान की संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बयानबाजी बचकाना थी। उल्लेखनीय है कि महासभा में अपने वक्तव्य में इमरान खान ने कश्मीर मुद्दे पर बोलते हुए हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच नाभिकीय युद्ध (Nuclear War) की ‘संभावना व्यक्त’ करते हुए धमकी दी थी।

“उनके बयान महासभा के दौरान भी उकसाऊ और गैरज़िम्मेदार थे। मुझे नहीं लगता कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय या कूटनीतिक संबंधों को चलाने की जानकारी है। उन्होंने हिंदुस्तान के खिलाफ खुले जिहाद का आह्वाहन किया है। यह कतई सामान्य नहीं है।” रवीश का इशारा इमरान खान द्वारा अपने देश के लोगों से LOC पर मार्च करने की गुज़ारिश की तरफ़ था।

इस बीच हिंदुस्तानी सेना ने पाकिस्तानी सेना से दोनों देशों के बीच की वर्तमान और अस्थायी (de-facto) सीमा रेखा की मर्यादा बनाए रखने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि इस मार्च को पाकिस्तानी सेना के समर्थन की बात कही जा रही है।

निहत्थे सैनिकों को तोपों के आगे धकेलने की तैयारी

पाकिस्तानी सेना का असली प्लान उकसाए गए और ब्रेनवॉश हुए आम लोगों को भारतीय सेना की गोलियों और तोपों के आगे धकेल देने का है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में सेना के सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तानी नेतृत्व आम लोगों को इसका हिस्सा बनने के लिए बरगलाने में लगा है। इस बीच सीमा रेखा इस तरफ़ सुरक्षा बलों ने हर परिस्थिति से निबटने की तैयारी कर रखी है।

मलेशिया, तुर्की को चेतावनी

मलेशिया और तुर्की को भी चेतावनी रविश कुमार ने इसी प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने मलेशिया को भारत-मलेशिया के दोस्ताना रिश्तों को याद कर उस तरह की टिप्पणियों (“भारत ने कश्मीर पर आक्रमण और कब्ज़ा किया है”) से बाज़ आने की सलाह दी जो प्रधानमंत्री महातिर मोहमद ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में की थीं। तुर्की को रवीश कुमार ने इस मुद्दे पर और मुँह खोलने के पहले समस्या को समझने की सलाह दी।

यमराज को दे निर्देश, मृत दोषियों को वापस धरती पर भेजें: कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर अजीब याचिका

बॉलीवुड फ़िल्म ‘ओह माइ गॉड’ के कांजी भाई (परेश रावल) याद है न आपको जिन्होंने भूकंप में बर्बाद अपनी दुकान का क्लेम हासिल करने के लिए भगवान पर केस कर दिया था। ऐसा ही एक अनोखा मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में आया है। दरअसल, हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मृत आरोपितों के परिजनों ने कोर्ट से अपील की है कि वो यमराज को आदेश दें कि वह दोषियों को सजा भुगतने के लिए यमलोक से वापस ज़िंदा इस धरती पर भेजें।

याचिकाकर्ता ने अपील की है कि अगर यमराज ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके ख़िलाफ़ कोर्ट अवमानना की कार्यवाही की जाए। दरअसल, यह मामला 1984 का है। गरुलिया के रहने वाले समर चौधरी और उनके दो बेटों ईश्वर और प्रदीप की किसी बात को लेकर मारपीट हो गई थी। इसमें एक शख़्स की मौत हो गई। इस मामले को लेकर अलीपुर के एडिशनल सेशन जज ने तीनों को 9 फरवरी 1987 को 5-5 साल की सज़ा सुनाई। उसी साल मार्च में दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित कर दोनों की सज़ा पर रोक लगा दी।

इस मामले में हुआ यह कि सुनवाई शुरू होने से पहले ही तीन में दो आरोपित- समर और प्रदीप की मौत हो गई। प्रदीप की मौत 17 फरवरी 1993 को हो गई और समर की मौत 16 सितंबर 2010 को हो गई। दूसरी तरफ़, 22 जून, 2006 में आरोपित पक्ष के वकील की पद्दोन्नति हो गई और वो जज बन गए।

इन परिस्थितियों में बिना वकील के आरोपितों का परिवार कोर्ट को यह नहीं बता पाया कि इस मामले से जुड़े दो आरोपित अब इस दुनिया में नहीं रहे। बाद में, हाईकोर्ट ने आरोपितों के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त कर दिया और मामले में फ़ैसला सुनाते हुए 16 जून 2016 को याची की अपील ख़ारिज कर दी।

इसके बाद, याची पक्ष ने कोर्ट को आरोपितों की मौत की बात नहीं बताने के लिए माफ़ीनामा देने के साथ साल 2016 के उसके आदेश की याद दिलाई। मृतक समर के बेटे और प्रदीप की विधवा रेनू ने आवेदन में कहा है कि माननीय उच्च न्यायालय यमराज को निर्देश दे कि वह दोनों आरोपितों को पृथ्वी पर वापस भेजें ताकि वे दोनों कोर्ट द्वारा मुकर्रर सज़ा पूरी करें। उन्होंने आगे कहा कि अगर यमराज ऐसा नहीं करते तो उनके ख़िलाफ़ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।

बाबर नहीं था विध्वंसक, मीर बाकी ने बनाई मस्जिद: मुस्लिम पक्ष, अब सिर्फ चार दिन और होगी बहस

विवादित राम जन्मभूमि पर सुनवाई के दौरान 37वें दिन शुक्रवार (अक्टूबर 4, 2019) को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि वह अपनी जिरह सोमवार 14 अक्टूबर तक खत्म कर लेंगे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को सुनवाई नहीं होगी और उसके बाद से 13 तक कोर्ट बंद रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अयोध्या के इस मामले से संबंधित ने सभी पक्षों से कहा कि 17 अक्टूबर तक बहस पूरी करें।

पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी पक्षों को 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने के लिए कहा था। इस केस में 14 अक्टूबर को मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन बहस जारी रखेंगे। बाकी सब पक्षकार 15-16 को दलीलें देंगे और 17 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होगी। यानी अब सिर्फ चार दिन ही सुनवाई होनी बाकी रह गई है।

राजीव धवन ने कोर्ट में अपनी दलील देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपरिहार्य शक्तियों के तहत दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को ध्यान में रखकर इस मामले का निपटारा करे। इस मामले में मस्जिद पर जबरन कब्जा किया गया। लोगों को धर्म के नाम पर उकसाया गया। रथयात्रा निकाली गई। लंबित मामले में दबाव बनाया गया। मस्जिद ध्वस्त की गई और उस समय मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह ने एक दिन की जेल अवमानना के चलते काटी। अदालत से गुजारिश है कि तमाम घटनाओं को ध्यान में रखे।

सुनवाई के दौरान जब जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या इस बात का कोई सबूत है कि बाबर ने बाबरी मस्जिद को कोई इमदाद दी हो? इस पर राजीव धवन ने कहा कि उस दौर में इसका कोई सबूत हमारे पास नहीं है।

धवन ने कहा कि 1934 में दंगों के दौरान इमारत को नुकसान पहुँचा और धारा 144 लगाई गई। साथ ही धवन ने इतिहास की बातों का जिक्र करते हुए कहा कि बाबर पर मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाने का इल्जाम लगाया जाता है। बाबर कोई विध्वंसक नहीं था। मस्जिद तो मीर बाकी ने बनाई थी, वो भी एक सूफी के कहने पर। इसके आगे धवन ने एक लाइन कही, ‘है राम के वजूद पर हिन्दोस्तां को नाज़ अहले नज़र समझते हैं उसको इमाम ए हिन्द!’

धवन ने कहा कि क्या न्यायिक व्यक्ति होने के लिए धार्मिक विश्वास होना काफी है? कोर्ट को तय करना है कि न्यायिक व्यक्ति क्या होगा? अगर सिर्फ विश्वास पर मामला आधारित है तो सभी मुस्लिम का विश्वास है वहाँ पर मस्जिद थी। धवन ने कहा कि हिंदुओं को पहले यह साबित करना होगा कि वहाँ मंदिर था और उसके बाद यह साबित करना होगा कि मुस्लिम ने उस पर कब्ज़ा किया। उन्होंने कहा कि वो जानना चाहते हैं कि 1885 से पहले वहाँ पर क्या हुआ था?

टेरर फंडिंग मामला: NIA कोर्ट ने दिया यासीन मलिक को झटका, 23 अक्टूबर तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

अलगाववादी यासीन मलिक को आज 2017 के आतंकी फंडिंग मामले में दिल्ली की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत में पेश किया गया है। जिसके बाद कोर्ट ने अलगाववादी यासीन मलिक की न्यायिक हिरासत को 23 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है।

बता दें कि अलगाववादी यासीन मलिक के ख़िलाफ़ 2017 में टेरर फंडिंग का आरोप है। इसी मामले में कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत को 23 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है। अलगाववादी यासीन मलिक को दिल्ली के तिहाड़ जेल में रखा गया है। जानकारी के अनुसार, इससे पहले तिहाड़ जेल प्रशासन ने मलिक को अदालत में पेश करने में असमर्थता ज़ाहिर की थी।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने टेरर फंडिंग मामले में यासीन मलिक, आसिया अंदराबी, शब्बीर शाह, मसरत आलम और अन्य के खिलाफ सप्लिमेंट्री चार्जशीट दायर की थी।

जाँच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें सोशल मीडिया, फोन कॉल, बातचीत और विभन्न दस्तावेज़ों के रूप में नए सबूत मिले हैं। नए तथ्यों से पता चलता हैं कि जिन लोगों के नाम चार्जशीट में हैं उनका संबंध आतंकवादी हाफ़िज़ सईद और सैयद सलाउद्दीन से हैं।