पटना के कई इलाके अब भी जलमग्न हैं। बिहार की राजधानी की यह हालत क्यों है, यह मेयर सीता साहू के एक वायरल वीडियो से समझा जा सकता है। उन्हें यह भी नहीं पता है कि जल निकासी के लिए पटना में कितने संप हाउस हैं। नगर निगम का नाला उड़ाही का बजट कितने का है, जबकि जल निकासी निगम की मुख्य जिम्मेदारी होती है।
प्रेस कॉन्फ्रेन्स में पहुँची पटना की मेयर सीता साहू पत्रकारों के सवालों से कुछ इस तरह घिरीं कि पूरी व्यवस्था की पोल खुल गई। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पटना में 49 संप हाउस काम कर रहे हैं, जबकि सच्चाई ये है कि पटना में कुल 39 संप हाउस ही हैं। ये आँकड़ा जब उनके साथ बैठे पार्षदों ने दिया तो वह सकपका गईं। उसके बाद मेयर यह भी नहीं बता पाईं कि अभी जल निकासी के लिए कितने संप हाउस चल रहे हैं?
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने भीषण जलजमाव के लिए सरकार को दोषी ठहरा दिया। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि राजधानी में जिस प्रकार का जलजमाव हुआ है, उसकी ज़िम्मेदारी बिहार अरबन इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (बुडको) की है। इसके लिए नगर निगम ज़िम्मेदार नहीं।
इतना ही नहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे जब पूछा गया कि इस भीषण जल-जमाव के लिए वह ज़िम्मेदारी लेंगी, तो उन्होंने कहा कि हम लोग कैसे जिम्मेदार हो गए? संप हाउस के परिचालन की ज़िम्मेदारी बुडको की है। संप हाउसों का पंप नहीं चला, इस कारण राजधानी का पानी नहीं निकल पाया। उनकी ग़लती है तो हम इसकी ज़िम्मेदारी लेकर इस्तीफ़ा क्यों दें?
मेयर साहिबा से एक पत्रकार ने सवाल किया कि आप आठ दिनों बाद दिख रही हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि हम फील्ड में थे। लोगों की स्थिति की जानकारी ले रहे थे। जलजमाव वाले क्षेत्रों का भ्रमण कर रहे थे।
मेयर ने कहा कि हमने नाला की सफाई कराई थी। संप हाउस के काम नहीं करने के कारण लोगों को परेशानी हुई। हालाँकि, प्रेस कॉन्फ्रेन्स में मेयर नाला उड़ाही का बजट नहीं बता पाईं।
हरियाणा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। चार पन्नों के इस्तीफे में उन्होंने आरोप लगाया है कि राहुल गॉंधी के करीबियों की ‘राजनीतिक हत्या’ की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को राहुल गॉंधी ने चुना और आगे बढ़ाया उन्हें एक-एक कर किनारे किया जा रहा।
तंवर ने कॉंन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को भेजे इस्तीफे में कहा है कि पार्टी को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद पर गुटबाजी के आरोप लगाए हैं। साथ ही अपने खिलाफ हिंसा की भी बात कही है।
उल्लेखनीय है कि सोनिया गॉंधी ने कॉंन्ग्रेस की कमान संभालने के बाद तंवर को उनके पद से हटा कर पूर्व केंद्रीय मंत्री शैलजा को प्रदेश की जिम्मेदारी दी थी। साथ ही हुड्डा को भी उसके बाद से आगे किया जा रहा है, जबकि राहुल गॉंधी ने पूर्व मुख्यमंत्री की तमाम चेतावनियों के बावजूद तंवर को उनके पद से हटाने से इनकार कर दिया था।
After long deliberations with party workers and for reasons well known to all Congressman and public, I hereby resign from the primary membership of the @INCIndiapic.twitter.com/qG9dYcV6u2
तंवर ने अपना इस्तीफ़ा ट्विटर पर पोस्ट किया है। इसके पहले उन्होंने चुनाव समितियों से इस्तीफा दे दिया था। उपेक्षा से नाराज तंवर का गुस्सा तब फूट गया जब टिकट बंटवारे में भी उनकी नई सुनी गई। उन्होंने समर्थकों के साथ कॉन्ग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था। साथ ही सोहना का टिकट पॉंच करोड़ रुपए में बेचे जाने का आरोप लगाया था।
Ashok Tanwar, Congress: I was in ticket distribution process so I know,’yeh sarkar banvayi gayi thi, bani nahi thi’.14 ppl who are BJP MLAs today were sent away from here,7 of their MPs have Congress background. BJP offered me to join 6 times in 3 months,I didn’t go & never will. https://t.co/dUqwIiGTCj
तंवर ने कहा था, “पिछले 5 सालों से मैंने अपना खून-पसीना कॉन्ग्रेस को दिया। यहाँ नेतृत्व बरबाद हो चुका है। हम पार्टी के लिए समर्पित हैं, लेकिन ऐसे लोगों को टिकट क्यों दी जाए, जिन्होंने अभी हाल ही में पार्टी को ज्वाइन किया है और पहले पार्टी की आलोचना कर चुके हैं।” सूत्रों के अनुसार तंवर ने पार्टी नेतृत्व से 10 सीटें मॉंगी थी। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा के लिए 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएँगे।
मुंबई स्थित आरे क्षेत्र को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘जंगल’ घोषित करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद लगातार विरोध प्रदर्शन में लगे गई कथित पर्यावरण कार्यकर्ताओं को गहरा धक्का लगा। वहीं हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद मेट्रो परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो गई। ख़बर फैलते ही कई प्रदर्शनकारी वहाँ पर जमा हो गए और सरकारी कार्य में व्यवधान डाला। भाजपा की सहयोगी पार्टी और हाल ही में ‘महायुति’ के लिए सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर राजी हुई शिवसेना भी सरकार के इस निर्णय के ख़िलाफ़ सड़क पर उतर आई है।
शनिवार (सितम्बर 5, 2019) को आरे स्थित जंगलों को बचाने के लिए शिवसेना सड़कों पर उतर आई। शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी को हिरासत में ले लिया गया है। वे वेस्टर्न एक्सप्रेसवे पर विरोध प्रदर्शन कर रही थीं। धारा 144 लागू होने के बाद कम से कम 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। आरे जंगलों के बाहर बैरिकेड लगा कर पुलिस पुलिस ने सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी है।
शिवसेना नेता और ठाकरे परिवार के विश्वस्त संजय राउत ने एक कार्टून के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस पर निशाना साधा। राउत ने हाईकोर्ट के निर्णय का विरोध करते हुए उस कार्टून को ट्वीट किया। इस कार्टून में मुख्यमंत्री फड़णवीस न्याय की देवी की आँखों में पट्टी बाँधते नज़र आ रहे हैं, जिसपर लिखा हुआ है- “आरे जंगल नहीं है।” ‘युवा सेना’ के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि मेट्रो के जिस कार्य को गर्व से किया जाना चाहिए था, उसे धूर्तता के साथ रात के अंधेरे में चोर-छिपे किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को पेड़ काटने की जगह पीओके में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने की सलाह दी।
The use of a large number of police personnel. Hacking trees in the dead of the night, even after winning in court (then why not broad day light) and detention of peaceful protesters and citizens. Who is authorising this? During Code of Conduct? All these powers handed to MMRC? https://t.co/SGv5yySfXn
आदित्य ठाकरे ने लिखा कि पुलिस की पहरेदारी में जो किया जा रहा है, उससे तेंदुओं का घर छिन जाएगा। वहीँ मुख्यमंत्री फड़णवीस ने विकास की ज़रूरत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन पेड़ों का कटा जाना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि वे ख़ुद आरे में पेड़ों को काटे जाने के ख़िलाफ़ हैं, लेकिन विकास महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि काटे गए पेड़ों की जगह और अधिक पेड़ लगाने के लिए वह आदित्य ठाकरे से बात करने के लिए तैयार हैं।
#AareyForest पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा, बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक यह जंगल नहीं है। जब दिल्ली मेट्रो बननी शुरू हुई तो 20-25 पेड़ काटे गए। इसका विरोध हुआ लेकिन बाद में एक पेड़ के बदले पांच पेड़ लगाए गए। pic.twitter.com/loDaK8MGWE
वहीं, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने महाराष्ट्र सरकार का समर्थन किया है। उन्होंने इसके लिए दिल्ली मेट्रो का उदाहरण दिया। जावड़ेकर ने बताया कि जब दिल्ली में पहला मेट्रो स्टेशन बनाया जाना था, तब भी 20-25 पेड़ काटे गए थे। उन्होंने याद दिलाया कि विरोध-प्रदर्शन तब भी हुए थे लेकिन काटे गए हरेक पेड़ की जगह 5-5 नए पेड़ लगाए गए थे। जावड़ेकर ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट जब आरे को जंगल घोषित करने से मना कर चुकी है, उसके बाद हंगामा सही नहीं है।
टेरर फंडिंग मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक और चार अन्य कश्मीरी अलगाववादियों के ख़िलाफ़ दिल्ली की अदालत में शुक्रवार (4 अक्टूबर) को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में इन पर आरोप लगाया गया कि इन्होंने कथित तौर पर आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देकर केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने की साज़िश रची थी।
3,000 पन्नों की चार्जशीट में कहा गया है कि पाकिस्तान उच्चायोग ने घाटी में अशांति पैदा करने के लिए अलगाववादियों को पैसा मुहैया कराया था। NIA के अनुसार, मलिक और शब्बीर शाह के बीच हुई ईमेल से पाकिस्तान और अन्य देशों के बीच हुए फंड ट्रांसफर के बारे में पता चला है। इस बात का भी पता चला है कि यासीन मलिक कश्मीर में अशांति और आतंकवाद का माहौल बनाने के लिए हवाला चैनलों के माध्यम से विदेशों से फंड प्राप्त कर रहा था। फंड ट्रांसफर के ज़रिए अलगाववादी और अन्य नेटवर्क का समर्थन करने में पाकिस्तान हाई कमीशन की अहम भूमिका रही है, इसका मक़सद घाटी में अशांति फैलाना था।
जाँच एजेंसी ने यासीन मलिक के अलावा, दुख्तारन-ए-मिलत प्रमुख आसिया अंद्राबी; J&K डेमोक्रेटिक फ़्रीडम पार्टी के संस्थापक शब्बीर शाह; J&K मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मसर्रत आलम और पूर्व विधायक और अवामी इत्तेहाद पार्टी के अध्यक्ष अब्दुल रशीद शेख को आरोपी बनाया है।
NIA ने दावा किया कि पाँचों आरोपितों ने आपस में मिलकर हिंसक गतिविधि की साज़िश रची। आरोपितों ने बड़े पैमाने पर आर्थिक क्षति पहुँचाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को नष्ट करने और प्रशासन के प्रति लोगों को उकसाने की साजिश रची थी।
आरोप पत्र में कहा गया है कि आसिया अंद्राबी का कनेक्शन, आतंकियों और आतंकी संगठनों के लिए पाकिस्तान से खुफ़िया तौर पर फंड लेने वाले श्रीनगर के व्यापारी जहूर वटाली से था।
कोटा के एक साइकिलिस्ट को जम्मू-कश्मीर न जाने की धमकी दी गई है। ये धमकी वाला फोन कॉल पाकिस्तान से आया। वाहट्सएप्प से किए गए कॉल में कोटा के युवा साइकिलिस्ट को धमकी दी गई कि अगर उसने कश्मीर में पाँव रखे तो उसे उड़ा दिया जाएगा। निखिल पाल सिंह अपने साथियों के साथ कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक एक ‘ग्रुप साइकिल टूर’ की योजना बना रहे थे। उन्होंने जवाहर नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा है कि पाकिस्तान से आए व्हाट्सप्प कॉल में उन्हें कश्मीर जाने पर जान से मारने की धमकी दी गई।
अभी तक पुलिस धमकी देने वाले की पहचान नहीं कर सकी है। अभी यह भी साफ़ नहीं हुआ है कि इस धमकी के बाद साइकिलिस्ट निखिल पाल ने अपना टूर स्थगित कर दिया है, या फिर वह कश्मीर जाएँगे। धमकी देने वाले ने निखिल ने कहा, “कश्मीर साइकिल चलाने के लिए नहीं है। अगर आप कश्मीर में आए तो उड़ा दिए जाओगे।” पुलिस फ़िलहाल इस नंबर की जाँच में लगी हुई है, जिससे यह पता चल सके कि फोन करने वाला व्यक्ति कहाँ का था और उसके दावों में कितनी सच्चाई है?
निखिल पाल ने बताया कि उन्हें जब पहली बार धमकी भरा कॉल आया तो उन्होंने इसे किसी की शरारत समझ कर नज़रअंदाज़ कर दिया। लेकिन दोबारा यही धमकी दी गई तो उन्होंने पलट कर जवाब देते हुए कहा, “कश्मीर तुम्हारे बाप का नहीं है।” बता दें कि कोटा में ही डेढ़ महीने पहले गुमानपुरा के एक व्यापारी को पाकिस्तान के नंबर से फोन आया था। इस फोन कॉल में अज्ञात व्यक्ति ने आईएसआई के लिए काम नहीं करने पर व्यापारी को जान से मारने की धमकी दी थी।
#Kota : कोटा में साइकिलिस्ट को मिली पाकिस्तान से धमकी
कन्याकुमारी से कश्मीर तक जाने वाला था साइकिलिस्ट,पाकिस्तानी नंबर से अज्ञात व्यक्ति ने कश्मीर नहीं जाने की दी धमकी,पाकिस्तानी कॉलर ने कहा-‘कश्मीर जाओगे तो उड़ा दिए जाओगे’,साइकिलिस्ट निखिल पाल सिंह ने जवाहर नगर थाने में रिपोर्ट
— First India News Rajasthan (@1stIndiaNews) October 3, 2019
जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और स्थिति को सामान्य बनाने के लिए सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है। ख़ुद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएस) अजीत डोभाल 2 बार कश्मीर जा चुके हैं। अपने 11 दिनों के कश्मीर प्रवास के दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों से लेकर आम लोगों तक से बातचीत कर स्थिति का जायजा लिया था।
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में उपायुक्त कार्यालय के बाहर शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को आतंकवादियों ने ग्रेनेड हमला किया। हमले में एक ट्रैफिक पुलिसकर्मी और एक पत्रकार समेत 10 लोग घायल हो गए। इसमें एक 12 साल का बच्चा भी शामिल है। कुछ लोगों को काफी गंभीर चोटें आई हैं।
#UPDATE Jammu and Kashmir Police: 10 persons including a traffic policeman and a journalist injured. Only minor injuries reported so far. Follow up action initiated. Police on job to identity & nab the culprit. https://t.co/siQ9GhF3NA
पुलिस के अधिकारी ने बताया कि अनंतनाग में कड़ी सुरक्षा वाले परिसर के बाहर सुरक्षा गश्ती दल पर सुबह करीब 11 बजे ग्रेनेड फेंका गया। उन्होंने बताया कि ग्रेनेड का निशाना चूक जाने के कारण वह सड़क के पास ही फट गया, जिससे वहाँ गुजर रहे 10 लोग घायल हो गए। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है।
Jammu & Kashmir: Grenade attack outside deputy commissioner’s office in Anantnag; more details awaited https://t.co/Oznku8Qw6C
हमले के बाद इलाके में तनाव उत्पन्न हो गया है। अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर हमले में शामिल आतंकवादियों की तलाश शुरू कर दी है। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
बता दें कि आज जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के 2 महीने हो गए हैं। इस फैसले से आतंकियों के आका काफी बौखलाए हुए हैं। जम्मू-कश्मीर का माहौल बिगाड़ने के लिए वे कई तरह की साजिशें रच रहे हैं। हालॉंकि अब तक उन सारे मंसूबे सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के कारण नाकाम रहे हैं। आतंकी भारतीय सीमा में घुसपैठ की लगातार कोशिश भी कर रहे हैं।
विधायक अदिति सिंह के तेवरों ने कॉन्ग्रेस की परेशानी बढ़ा दी है। पार्टी के कारण बताओ नोटिस का उन्होंने मजाक उड़ाया है। अदिति यूपी में कॉन्ग्रेस के एकमात्र बचे गढ़ रायबरेली से विधायक हैं। इस संसदीय सीट से कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी खुद सांसद हैं।
अदिति ने दो अक्टूबर को यूपी विधानसभा के आयोजित विशेष सत्र में हिस्सा लिया था। कॉन्ग्रेस ने सत्र के बहिष्कार का ऐलान किया था। इसके बाबत ही पार्टी की ओर शुक्रवार को उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजकर जवाब मॉंगा गया था। लेकिन, अदिति का कहना है कि उन्हें नोटिस मिला ही नहीं है। उनके अनुसार पार्टी नेता ने मीडिया में नोटिस दिया होगा।
अदिति का कहना है कि विधायक दल के नेता अजय कुमार लल्लू मीडिया में नोटिस देने के बजाय उन्हें देते। उनके तेवर पार्टी के इस बर्ताव के कारण बेहद तल्ख हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस विधानमंडल के नेता अजय लल्लू उनके फोन का जवाब नहीं दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि विधानसभा के विशेष सत्र में विधायक राजेश सिंह और विधान परिषद के सदस्य दिनेश सिंह भी शामिल हुए थे। पार्टी विधानमंडल दल ने क्या उन्हें भी नोटिस भेजा है? उन दोनों का कारण बताओ नोटिस कहाँ है?
बता दें कि राष्ट्रपति महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती के मौके पर 2 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश विधानसभा में विशेष सत्र आयोजित किया गया था। राज्य की विधानसभा के इस विशेष सत्र का कॉन्ग्रेस समेत पूरे विपक्ष ने बहिष्कार किया था। कॉन्ग्रेस के बहिष्कार के बावजूद अदिति सिंह ने सदन में पहुँच कर सभी को चौंका दिया था। सदन में अदिति ने कहा था कि वो एक पढ़ी-लिखी विधायक हैं और यहाँ विकास पर चर्चा हो रही है। इसलिए उन्होंने आना जरूरी समझा।
अदिति सिंह के इस रुख के बाद कॉन्ग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने अनुशासन तोड़ने का नोटिस भेजते हुए दो दिन में जवाब देने के लिए कहा था। उन्होंने कहा था कि दो दिन में जवाब न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि अदिति सिंह ने इससे पहले पार्टी लाइन से बाहर जाकर अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के मोदी सरकार के फैसले का समर्थन किया था।
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के बिलरियागंज क्षेत्र के एक गाँव में गुरुवार (अक्टूबर 3, 2019) को देर शाम शौच के लिए घर से बाहर गई किशोरी को अगवाकर गाँव के पाँच युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। गुरुवार की रात घटना को अंजाम देने के बाद आरोपित सुबह के तकरीबन तीन बजे किशोरी को गाँव के बाहर स्थित ट्यूबवेल के पास छोड़कर भाग गए।
पीड़िता ने किसी तरह से घर पहुँचकर घटना की जानकारी दी। पीड़िता के पिता की तहरीर पर पुलिस ने पाँचों युवकों को खिलाफ केस दर्ज कर पीड़िता को मेडिकल के लिए भेज दिया है। पुलिस ने आरोपियों के घर दबिश दी पर सभी आरोपित फरार थे।
दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट
बिलरियागंज थानाध्यक्ष आरके सिंह ने बताया कि पीड़िता के पिता की शिकायत पर गाँव के ही रईश छांगुर, इशहाक, अकमल, रेहाब व एक अन्य अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
पिता के मुताबिक उसकी 15 वर्षीय बेटी गुरुवार की देर शाम को घर से शौच के लिए गई थी। इसी दौरान रईस और इशहाक बाइक से पहुँचे और उसे अगवा कर रौनापार थाना क्षेत्र के बातन गाँव निवासी जावेद के पोखरे पर उठा ले गए। जहाँ पर पहले से अकमल और रेहाब मौजूद थे। पाँचों आरोपितों ने किशोरी के साथ दुष्कर्म किया और फिर उसे शुक्रवार की सुबह उसे घर के पास छोड़ फरार हो गए। किसी तरह से किशोरी अपने घर पहुँची और आपबीती घर वालों को बताई। इसके बाद परिवार के लोग उसे लेकर बिलरियागंज थाने पहुँचे व तहरीर दी।आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
जीत का सेहरा अपने सर बाँधने की होड़ का नतीजा क्या होगा? ये तो सीधी-सी बात है कि कोई अच्छा काम किया जा रहा हो, तभी उसका श्रेय मिलने की संभावना होती है। लेकिन, अलग-अलग संस्थान किसी जीत को अपनी जीत, सिर्फ मेरी जीत, घोषित करने पर तुले हों तो ज्यादातर ये आपसी लड़ाई दुश्मन को जीत दिला देती है।
पुल्तिज़र पुरस्कार से सम्मानित लेखक (पत्रकार) लॉरेन्स राईट की किताब “द लूमिंग टावर: अल कायदा एंड द रोड टू 9/11” कुछ ऐसे ही मसलों पर ध्यान दिलाती है। काफी शोध के बाद लिखी गई इस 500 पन्ने के लगभग की किताब में इस बात पर ध्यान दिलाया गया है कि कैसे सीआईए और एफबीआई की आपसी प्रतिद्वंदिता में एक ऐसी हरकत को अंजाम दिया जा सका जिसकी जानकारी अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के पास पहले से ही थी!
किसी शादी के समारोह में ओसामा बिन लादेन ने तीन बार दोहराया था कि ‘मौत तुम्हें ढूँढ लेगी चाहे तुम किसी ऊँची अट्टालिका में क्यों न छिप जाओ’। ये वाक्य सूरा अल निसा (कुरआन 4.78) का है और इसी से इस किताब का शीर्षक लिया गया है। इसके अलावा इस किताब में 9/11 के हमलावरों के जीवन और उनके कट्टरपंथी नजरिए जैसी चीजों पर भी रोशनी डाली गई है।
अगर, अमेरिका जैसी जगहों पर ऐसी कोई किताब लिखी हुई हो, शोध पहले ही हो चुका हो तो क्या इस पर फ़िल्में और टीवी सीरीज भी बनेंगे? 2006-07 में दर्जन भर से ज्यादा पुरस्कार जीत चुकी इस बेस्टसेलर पर शायद ही कोई फिल्म बनी। इस पर जो टीवी सीरीज बनी वो आम चैनल और टीवी पर नहीं वेब सीरीज की तरह चलती है।
अपनी गलतियों को दबाना, हर सरकार के चरित्र में होता है। चाहे वो अमेरिका हो, या फिर वो बिहार हो, अगर नुकसान तब हुआ हो जब सरकारी अमले को होने वाली आपदा का पूर्वानुमान था, तो उसकी ख़बरें दबा दी जाती हैं। बिलकुल पास के बिहार में अगर देखें तो जल-जमाव से अस्त-व्यस्त पटना और बिहार के बाढ़ जैसे हालात टीवी पर ही नजर आ जाते हैं। क्या सरकार बहादुर को इसकी खबर पहले से नहीं थी?
मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाले विभागों ने पहले से ही भारी बारिश की घोषणा कर दी थी। बाढ़ आए तो उसे आपदा कहा भी जाए, मगर बारिश का पानी अगर शहरों में ही जमा रह जाए निकल ही न पाए तो आपदा राहत की नहीं जवाब देने की बारी आती है। अफ़सोस कि ऐसे सवाल या तो पूछे नहीं जाते और अगर पूछे जाएँ तो पूछने वालों को भारी दंड भी झेलना पड़ता है।
सवाल पूछे जाने पर पत्रकारों को जागरूकता फैलाने के लिए फटकारते शू-शासन बाबू हाल में ही वीडियो में दिखे हैं। जो बिहार के बाहर आसानी से नहीं दिखा होगा वो था इस जल-जमाव पर स्थानीय अखबारों में छपी कहानियाँ। सरकार के रुख को लेकर “प्रभात खबर” का रवैया काफी तल्ख़ रहा। अक्टूबर की 2-3 तारीख को ऐसी ख़बरों को छापने का नतीजा “प्रभात खबर” में आने वाले विज्ञापनों की गिनती में साफ नजर आ जाएगा।
दुर्गा पूजा के दौरान जहाँ दूसरे अख़बारों में सरकारी और गैर-सरकारी विज्ञापन भरे पड़े हैं, प्रभात खबर विज्ञापनों से खाली ही दिखता है। ऐसा भी बिलकुल नहीं है कि “हथिया नक्षत्र” पर ज्यादा पानी बरसने का दोषारोपण सरकार बहादुर कोई पहली बार कर रही हो। बाढ़ और नदियों पर शोध करने वाले जाने-माने विशेषज्ञ डॉ. दिनेशचन्द्र मिश्र बताते हैं कि ये 1957 में भी हो चुका है। तब जाने-माने साहित्यकार रामबृक्ष बेनीपुरी ने विशालकाय सरकारी अमले की बात करते हुए 28 नवंबर 1957 को बिहार विधानसभा में पूछा था, “अगर हथिया ही सब कुछ है तो इतने बड़े-बड़े हाथी जो हम लोगों ने पाल रखे हैं वो क्यों हैं।”
राजधानी होने के कारण पटना की स्थिति आसानी से नजर आ गई। जिस शहर को “स्मार्ट सिटी” बनाने की बातें बनाई जा रही हैं, वहाँ की नगरपालिका पर भाजपा काबिज है, मेयर भी भाजपा से! कुम्हरार, बांकीपुर, दीघा, पटना साहिब के विधायक भाजपा के हैं, पाटलिपुत्र और पटना साहिब के सांसद भाजपा के हैं, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और नगर विकास मंत्री भी भाजपा के, राज्य में गठबंधन सरकार और उप मुख्यमंत्री भी भाजपा और केंद्र से मदद न आने का बहाना किया जाए तो केंद्र सरकार भी भाजपा की ही है।
डूबते पटना को घर की छत से निहारते सीएम नीतीश कुमार
अक्सर जैसे व्यक्तिगत स्तर पर स्थानीय लोगों को जुटाकर लोगों की मदद करने के प्रयास करते राजनीतिज्ञ नजर आते हैं, वो भी यहाँ नहीं दिखा। एक जो नेता दिखे वो पटना से करीब 300 किलोमीटर दूर के मधेपुरा क्षेत्र से हैं, जो पटना वाले थे वो ट्यूब से बने राफ्ट से फिसलकर पानी में गिरे और हँसी का पात्र बने।
इस दौरान उप-मुख्यमंत्री (भाजपा के) सुशील मोदी को बचाकर निकालने की तस्वीर नजर आती रही। सोशल मीडिया पर उनकी एक पुरानी तस्वीर भी दिखने लगी जिसमें वो 1972 के दौर में हुए जल-जमाव के विरोध में अनशन पर थे। पिछले करीब पचास सालों में क्या बदला मालूम नहीं! आपदा नियंत्रण की कितनी तैयारी थी ये नावों के इंतजाम में नजर आया। ट्रैक्टर और जेसीबी-क्रेन जैसी मशीनें ज्यादा काम आईं। नावें न तो उतनी थीं, न ही उतनी कारगर थीं।
आज के डिप्टी सीएम सुशील मोदी जब विपक्ष में होते थे तो पटना में जल जमाव पर फूट पड़ते थे!
डीएम को आपदा राहत में लगे लोगों को पका भोजन बाँटने से भी मना करना पड़ा, क्योंकि लोग पूड़ी-सब्जी जैसी चीज़ें बाँटने में लगे थे। पका हुआ ऐसा खाना अगर बच जाए तो सीलन और गर्मी से खराब होता है जिससे पानी उतरते-उतरते डायरिया जैसी महामारी फैलने की आशंका रहती है। आपदा नियंत्रण की तैयारी में स्कूल-कॉलेज या सिविल सोसाइटी के लोगों को ये पहले क्यों नहीं बताया गया था ये भी पता नहीं।
इस जल-जमाव को लेकर अदालती मामला भी चला है। हाईकोर्ट ने 23 जून 2015 को (चार साल पहले) ही आदेश दिया था कि पटना में 24 घंटे से अधिक जल-जमाव हुआ तो नगर निगम जिम्मेदार होगा और इसे अदालत की अवमानना भी माना जाएगा। हाईकोर्ट के जिस जज, जस्टिस सुधीर सिंह ने निगम और सरकार को चौबीस घंटे में पानी निकालने का आदेश दिया था, वो भी अपने पिता को गोद में उठाकर पानी से निकालते नजर आए। उनके पिता एनपी सिंह 1991 में पटना हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस थे, उन्होंने भी जल-जमाव से निपटने के लिए कई आदेश दिए थे।
पटना के हालात पर दैनिक भास्कर में प्रकाशित रिपोर्ट
उस दौर में कोलकाता से मशीनें मँगवा कर जल-जमाव से निपटा गया था। तत्कालीन चीफ जस्टिस एल नरसिम्हा और जस्टिस सुधीर सिंह की पीठ ने ये 2015 का आदेश 2012 में हुए जल-जमाव के खिलाफ दायर हुए पीआईएल के मामले में दिया था। यानी पिछले दस साल में ही ऐसा कई बार हो चुका है।
सिर्फ आपदा की बात करें तो बिहार में आपदा नियंत्रण के लिए लोगों को लगातार जागरूक किया जाना जरूरी होता है। यहाँ बाढ़ और भूकम्प जैसी दो आपदाएँ कभी भी आ सकती हैं। हाल के दो-चार वर्षों में हमने इनका प्रकोप देखा भी है। ऐसी स्थिति में आपदा प्रबंधन के लिए स्वयंसेवक जुटाने, लोगों के खाना-दवाइयाँ वितरित करने, आपदा से बचाव और सुरक्षा के प्रति लोगों की जानकारी आमतौर पर समसेवी संगठनों के जरिए बढ़ाई जाती है।
जागरूकता फैलाने का काम बिहार में काम करने वाले बड़े एनजीओ जैसे यूनिसेफ, ऑक्सफेम, आद्री, आगा खान फाउंडेशन इत्यादि का होना चाहिए था। स्थानीय युवा और नागरिक समूह जब ऐसे राहत-बचाव के कामों में जुटे दिखे तो ये सभी तथाकथित समाजसेवी संगठन पता नहीं कहाँ विलुप्त रहे। सरकारी विभागों का सीधे स्थानीय युवाओं से और उनके समूहों से कोई संपर्क रहा हो, ऐसा भी नहीं लगता।
बाकी अगर अच्छी बातें करें तो कहा जाता है कि हर बुरी स्थिति भी कई अच्छी चीजें साथ लाती है। कुछ घटनाओं में सीख छुपी होती है तो कुछ में अवसर छुपे होते हैं। उम्मीद की जा सकती है कि भूकंप, बाढ़ और जल-जमाव जैसी आपदाएँ झेलने के बाद बिहारवासी कम से कम ये सीख लेंगे कि आपदा की स्थिति में किसी और के बदले अपने आप पर भरोसा करना होगा क्योंकि जिनके भरोसे बैठे हैं उस सरकार, राजनैतिक दल, एनजीओ वगैरह में से तो कोई आता नहीं! उन्हें जीत का सेहरा अपने सर बाँधने से ही फुर्सत नहीं।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने शुक्रवार (अक्टूबर 4, 2019) को तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में नेशनल यूनिटी कैंपेन को संबोधित करते हुए कहा कि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के लोग अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के फैसले से बाद से काफी खुश हैं। उन्होंने घाटी में हालात सामान्य होने का दावा किया। साथ ही कहा कि कश्मीर में अभी भी कुछ मुद्दे हैं जिनसे पूरी संवेदनशीलता के साथ निपटा जाएगा।
बीजेपी नेता ने राष्ट्रीय एकता अभियान को संबोधित करते हुए कहा, ”हर कश्मीरी देशद्रोही नहीं है और न ही हर अलगाववादी हैं। वे हमारे और आपके जैसे ही हैं। हमने अनुच्छेद 370 को हटा दिया, क्योंकि हम जम्मू-कश्मीर के लोगों को विकास, राजनीतिक ताकत और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देना चाहते थे।”
R Madhav, BJP National General Secy: Not every Kashmiri is anti-national,not every Kashmiri is a separatist. He’s like you&me. We did it (Article 370’s abrogation) because we wanted to give development rights, political rights&right to dignified living to all people of J&K.(4.10) pic.twitter.com/XXag1QAOPo
राम माधव ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग इस बात से खुश हैं कि अब वे भी देश के बाकी हिस्से में रह रहे लोगों के साथ जुड़ पाएँगे। उन्होंने कहा कि अब जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन गया है। अब वह देश के अन्य राज्य की तरह ही है। उन्होंने कहा कि दो केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए हैं। लद्दाख के लोग भी बहुत खुश हैं, क्योंकि वो इसकी माँग काफी लंबे समय से कर रहे थे।
Ram Madhav, BJP National General Secretary: In Jammu & Kashmir, Jammu region is happy that they have been finally able to fully integrate with the rest of the country. There are issues in Kashmir valley. They’ll be taken care of, they’ll be dealt with utmost sensitivity. (04.10) https://t.co/FrDT0pMBdt
इसके साथ ही राम माधव ने अनुच्छेद 370 को पिछले 70 सालों का कैंसर करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे महज 70 घंटे में हटा दिया। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र महीनों तक कानून- व्यवस्था की समस्या में उलझा रहता था, वह अब करीब 200 नेताओं को नजरबंद रखे जाने के बाद शांतिपूर्ण हो गया है। पिछले दो महीनों में सुरक्षाबलों की चौकसी के चलते एक भी नागरिक की मौत नहीं हुई है।
राम माधव ने कहा कि यह दुष्प्रचार है कि जम्मू-कश्मीर में हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वो 200 नेता एहतियाती तौर पर हिरासत में हैं। यह मानवाधिकार का उल्लंघन नहीं है। वे सभी पूरी सुविधाओं के साथ फाइव स्टार होटलों में हैं। यह कदम घाटी में कानून व्यवस्था बेहतर बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
भाजपा महासचिव ने कहा, “अब आप कल्पना कर सकते हैं कि यह कितना प्रभावी नजरबंदी है। लेकिन आप यह न समझें कि मैं कह रहा हूँ कि वे हमेशा के लिए जेल में रहेंगे। उन्हें जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा। हम चाहते हैं कि राज्य में सामान्य राजनीतिक गतिविधि बहाल हो।”