Tuesday, October 19, 2021
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कोई विरोध नहीं, कुछ भी नहीं, बस जिहाद: ब्रिटिश ‘सुंदरी’ ने कश्मीर के नाम पर लोगों को भड़काया

सुमैरा खान 2017 में ब्रिटिश मुस्लिम ऑफ द ईयर अवार्ड्स में 'बिज़नेसवुमन ऑफ़ द ईयर' कैटेगरी में हारने वाली फाइनलिस्ट थीं।

कभी ब्रिटिश मुस्लिम ऑफ द ईयर अवॉर्ड के लिए नामांकित होने वाली सुमैरा फारुख के खिलाफ पुलिस ने जाँच शुरू कर दिया है। दरअसल, सुमैरा ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद पिछले महीने बर्मिंघम में विरोध रैली का आयोजन किया था। इसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए थे, जो कश्मीर से 370 निरस्त होने का विरोध कर रहे थे। इस दौरान सुमैरा खान ने लोगों को संबोधित करते हुए बयान दिया था कि ‘जिहाद ही इसका एकमात्र उपाय है।’ बता दें कि वह 2017 में ब्रिटिश मुस्लिम ऑफ द ईयर अवार्ड्स में ‘बिज़नेसवुमन ऑफ़ द ईयर’ कैटेगरी में हारने वाली फाइनलिस्ट थीं।

सुमैरा फारुख, जो पहले प्रिंस चार्ल्स के साथ फोटो खिंचवा चुकी हैं, ने सैकड़ों लोगों की भीड़ से कहा कि कश्मीर से कर्फ्यू हटाने के लिए आज एक सिर्फ एक ही नारा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय को एक बात सच-सच बताना है कि इसका केवल एक ही समाधान है, और वो है जिहाद। कोई विरोध नहीं, कुछ भी नहीं, बस जिहाद।

बता दें कि सुमैरा फारूख, एक बिजनेसवुमैन होने के साथ ही एक पत्रकार भी हैं। उन्होंने भारतीय संघ के साथ जम्मू और कश्मीर को पूरी तरह से एकीकृत करने के भारत के फैसले के खिलाफ कार्रवाई की माँग की थी। ठीक 24 घंटे पहले, वहाँ के उप नेता टॉम वाटसन, जैक ड्रोमी और लियाम बायरन समेत शीर्ष श्रम सांसदों के एक मेजबान ने उसी स्थान पर एकसमान विरोध में भाषण दिए थे।

अपने ऊपर लगे आरोपों पर बचाव करते हुए समैरा फारुख ने हिंसा भड़काने से इनकार किया और दावा किया कि उन्हें इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह एक मुखर महिला हैं। अपनी टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “जिहाद का कोई विशेष अर्थ नहीं है। यदि आपको यूके की सरकार के साथ कोई समस्या है और आप अपनी आवाज उठाना चाहते हैं, तो इस्लाम के अर्थ में संघर्ष को जिहाद कहा जाता है। मुस्लिम उस संदर्भ में शब्द का अर्थ जानते हैं। क्या आपको लगता है कि मैं ऐसी इंसान हूँ, जो उस शब्द का उपयोग लोगों को लड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए करूँगी? मैं समुदायों और ब्रिटिश सेना के साथ काम करती हूँ, जो एशियाई समुदाय को सेना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करता है। मैं हिंसा को कैसे प्रोत्साहित कर सकती हूँ?”

वहीं, जब सुमैरा फारूख से पूछा गया कि उन्होंने जिस शब्द का इस्तेमाल किया है, क्या उन्हें करना चाहिए था, तो उन्होंने इसके जवाब में कहा, “जो लोग मेरी आलोचना कर रहे हैं, वे वही हैं जो नहीं चाहते हैं कि एक महिला बोले। वहाँ लोग कह रहे हैं कि हम बंदूकों के साथ आज़ादी पाने जा रहे हैं। लोग बुरे शब्दों का उच्चारण कर रहे हैं, कह रहे हैं बाहर आओ और लड़ो, लेकिन वे जाँच नहीं करते हैं। लोग हमेशा मुझ पर हमला करते हैं क्योंकि मैं एक मुखर महिला हूँ।”

पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि वे इस मामले की जाँच कर रहे हैं। वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम यह देखने के लिए उपलब्ध कॉन्टेंट का आकलन कर रहे हैं कि क्या कोई अपराध किया गया है।”

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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