दिल्ली पुलिस ने रविवार (सितम्बर 29, 2019) को करावल नगर के एक नाले से एक बैग बरामद किया था। जब उस बैग को खोला गया तो सभी हक्के-बक्के रह गए, क्योंकि उसमें एक 25 वर्षीय युवती की लाश थी। इस हत्या की गुत्थी सुलझ गई है। हत्यारा और कोई नहीं बल्कि उक्त युवती आफरीन का ट्यूटर नौशाद ही था। वह 25 सितम्बर से ही अपने घर से गायब थी। आफरीन का मोबाइल भी ऑफ आ रहा था, जिसके बाद परिजनों ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
परिजनों ने पहले ही इस मामले में उक्त ट्यूटर पर आरोप लगाया था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो मामला साफ़ हुआ। आफरीन परिवार के साथ बुलंद मस्जिद, शास्त्री पार्क क्षेत्र में रहती थी। परिवार में पिता रफीक अहमद, माँ राबिया बेगम, दो भाई दानिश और आमिर के अलावा एक शादीशुदा बहन है। उसके परिवार का टेंट का कारोबार है। आफरीन ने डीयू के माता सुंदरी कॉलेज से स्नातक करने के बाद हरियाणा के एक कॉलेज में बीएड में एडमिशन लिया था।
The north east Delhi police have arrested a tutor named Mohammed Naushad Ali for killing one of his former students and dumping the body in a bag. He has claimed she was pressuring him for marriage.
पुलिस के अनुसार, आफरीन बचपन से ही शास्त्री पार्क निवासी ट्यूटर मोहम्मद नौशाद के पास ट्यूशन पढ़ने जाती थी। उसने परिजनों को बिना बताए ही नौशाद के कोचिंग सेंटर में पढ़ाना भी शुरू कर दिया था। जब उसकी लाश बरामद हुई, तब सड़ जाने के कारण उसकी स्थिति ऐसी थी कि परिजन भी पहचान नहीं कर सके। बाद में उसके भाई ने शव की पहचान की। पुलिस ने जब युवती की आखिरी लोकेशन चेक की तो वह शास्त्री नगर के मोहम्मद नौशाद अली के घर की मिली।
पुलिस ने जब नौशाद से सख्ती से पूछताछ की तो पता चला कि उसने 26 सितम्बर को ही आफरीन की हत्या कर दी थी। फिर उसके शव को एक जूट के बैग में डाला और अपने साले राजिक की मदद से ठिकाने लगाया। इस काम के लिए उसने इको वैन का प्रयोग किया। नौशाद 8वीं से लेकर 12वीं तक की छात्रों को कोचिंग देता है। इसी दौरान उसके पास पढ़ने आने वाली आफरीन से उसे प्यार हो गया। दोनों में नजदीकियाँ बढ़ने के बाद जब आफरीन शादी की जिद करने लगी, तब उसने योजना बना कर उसकी हत्या कर दी।
आफरीन के दोस्तों ने पहले ही पुलिस को बताया था कि उसका अपने ट्यूटर के साथ प्रेम सम्बन्ध था, लेकिन पूछताछ में नौशाद लगातार पुलिस को बरगलाता रहा। पुलिस ने सीसीटीवी खंगाला तो नौशाद उस इलाक़े से गुजरता दिखा। सख्ती बरतने के बाद उसने सब उगल दिया। युवती की हत्या काफ़ी बेरहमी के साथ की गई थी।
केंद्र सरकार ने शहीद और घायल जवानों के परिवारों को दी जानी वाली आर्थिक मदद चार गुना बढ़ाने का फैसला किया गया है। इसका लाभा हरेक परिस्थिति में शहीद और घायल होने वाले जवानों के परिजनों को मिलेगा। यानी अब परिवारों को दो लाख की बजाए 8 लाख रुपए मिलेंगे।
यह मदद आर्मी बैटल कैजुअल्टी वेलफेयर फंड के तहत दी जाएगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जवानों के परिजनों के लिए वित्तीय मदद को दो लाख से बढ़ाकर 8 लाख करने को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी है। लंबे समय से यह माँग उठ रही थी।
इससे पहले शहीद होने या 60 प्रतिशत से अधिक की अक्षमता होने पर 2 लाख रुपए की वित्तीय मदद का प्रावधान था। इसके साथ ही 60 फीसदी से कम अक्षमता वाले जवानों को एक लाख रुपए का वित्तीय मदद मिलती थी। ये धनराशि लाभार्थियों को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन और आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस की वित्तीय सहायता जैसी दूसरी सुविधाओँ से अतिरिक्त दी जाती थी।
Defence Minister Rajnath Singh has given in principle approval to enhancement of monetary assistance to Next of Kin (NoK) of all categories of battle casualty from Rs 2 lakh to Rs 8 lakh. (file pic) pic.twitter.com/62rxJqKIT9
रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि रक्षा मंत्री ने युद्ध हताहतों की सभी श्रेणी के परिवारों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 8 लाख रुपए करने को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। जानकारी के मुताबिक कैजुअल्टी वेलफेयर फंड के तहत मिलने वाली इस सहायता के अलावा, पहले से मौजूद अनुदान में 25 लाख रुपए से लेकर 45 लाख रुपए और सेना समूह बीमा के लिए 40 लाख रुपए से लेकर 75 लाख रुपये तक के विभिन्न अनुदान शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछली सरकार में गृह मंत्री के रूप में राजनाथ सिंह ने कार्रवाई में मारे गए या घायल हुए अर्द्धसैनिक कर्मियों के परिवारों की सहायता के लिए ‘भारत के वीर’ कोष की शुरुआत की थी।
जम्मू-कश्मीर को लेकर मीडिया गिरोह ने एक ऐसा नैरेटिव गढ़ा, जिससे यह प्रतीत हुआ कि राज्य में चल रही सारी समस्याएँ वर्तमान सरकार की ही देन हैं और वहाँ सुरक्षा-व्यवस्था चाक-चौबंद करना बड़ी भूल है। सबसे पहले तो अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने को ‘अलोकतांत्रिक’ सिद्ध करने की कोशिश की गई लेकिन संसद के दोनों सदनों में बहुमत से पास होने और कई विरोधी दलों का भी साथ मिलने से विपक्षी सांसत में पड़ गए। इसके बाद मीडिया के एक धड़े ने ‘कश्मीरियत’ की बात करनी शुरू की लेकिन जब उन्हें राज्य के वाल्मीकि समुदाय व महिलाधिकारों की याद दिलाई गई तो वे बगले झॉंकने लगे।
उसके बाद मीडिया का यह वर्ग इस उम्मीद में बैठा रहा कि जम्मू-कश्मीर में कुछ बहुत बड़ा हो, जिससे वे केंद्र सरकार के घेर सकें और उसके फ़ैसले को ग़लत ठहरा सकें। आख़िर में कुछ आतंकियों ने उनके इस स्वप्न को साकार करने के बीड़ा उठाया, लेकिन जहाँ-तहाँ मुठभेड़ में सभी मारे गए। हालाँकि, उन्होंने खुन्नस निकालने के लिए मासूम कश्मीरियों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया लेकिन सुरक्षा बलों ने समय रहते कई बड़े हमले नाकाम किए। जम्मू बस स्टैंड के पास से विस्फोटक जब्त किए गए। अंत में मीडिया के उस वर्ग ने अलगाववादियों और कश्मीरी नेताओं को नज़रबंद किए जाने को लेकर लोकतंत्र का राग अलापना शुरू कर दिया।
रवीश कुमार ने तो अपने शो में राज्यपाल सत्यपाल मलिक के उस बयान का भी मज़ाक बनाया, जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नौकरियों में बम्पर भर्तियाँ करने की बात कही थी। राज्यपाल ने इंटरनेट बहाली में देरी का कारण बताते हुए कहा था कि इसका इस्तेमाल आतंक और अशांति फैलाने वाले कर सकते हैं। एनडीटीवी के पत्रकार रवीश ने पब्लिक से राज्यपाल को यह बताने को कहा कि इंटरनेट छात्रों की पढ़ाई के काम भी आता है। क्या यह सोचने लायक बात नहीं है कि जब किसी बहुत बड़े खतरे की आशंका रही होगी, तभी इंटरनेट को प्रतिबंधित किया गया होगा? क्या सरकार को नहीं पता होगा कि इंटरनेट के अच्छे उपयोग भी हैं?
रवीश कुमार जम्मू-कश्मीर और पूरे देश को एक जैसे ही देखते हैं। ऐसा नहीं है कि उन्हें वस्तुस्थिति का ज्ञान नहीं, उन्हें ख़ूब पता है कि पूरे देश की और जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियों में काफ़ी अंतर है। रवीश का तर्क था कि अगर आतंकवाद के बहाने जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट को बैन किया जा रहा है तो ऐसा पूरे देश में भी किया जा सकता है। क्या पूरे देश में पत्थरबाजी आम बात थी? क्या पूरे देश में पाकिस्तान पोषित आतंकी रोज़ घुसपैठ के लिए तैयार रहते हैं? क्या पूरे देश में अलगाववादी नेता हैं और वे भारत को गालियाँ देते हैं? क्या पूरे देश में दो निशान-दो संविधान चलता था? क्या पूरे देश में आए दिन आतंकी घटनाएँ होना आम बात थी? जाहिर है, इसका जवाब ना में है।
अब जम्मू-कश्मीर से ऐसी ख़बर आई है, जिससे रवीश के कलेजे को ज़रूर ठंडक मिली होगी। ‘कुछ बड़ा होने’ की उम्मीद में बैठे रवीश को केंद्र सरकार पर कटाक्ष करने का एक और मौक़ा मिल ही गया। वे राहत महसूस कर रहे होंगे। दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग में शनिवार (सितम्बर 5, 2019) को डिप्टी कमिश्नर के दफ्तर के सामने ग्रेनेड अटैक हुआ। इस हमले में एक ट्रैफिक पुलिस का जवान और एक पत्रकार सहित 14 लोग घायल हो गए। अगस्त 5, 2019 को अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से घाटी में यह दूसरा ग्रेनेड अटैक है।
यह हमला उस क्षेत्र में हुआ, जहाँ डीसी का ऑफिस होने के कारण पहले से ही सुरक्षा-व्यवस्था चुस्त थी। आतंकियों ने गश्त लगा रहे सुरक्षा बलों के जवानों पर ग्रेनेड फेंके। हालाँकि, निशाना चूकने की वजह से ग्रेनेड सड़क पर गिर गया, जिससे एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। 13 लोगों को अस्पताल में इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया, जबकि एक की स्थिति ख़राब होने के कारण उसे अभी भी अस्पताल में ही रखा गया है। हालाँकि, वह ख़तरे से बाहर है। जैसा कि होना था, इस ब्लास्ट के बाद शहर में भय का माहौल बन गया। सुरक्षा बल आतंकियों की तलाश में इलाक़े में घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।
अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है। आपको याद होगा कि राजधानी श्रीनगर के नवा कदल क्षेत्र में सीआरपीएफ पर 28 सितम्बर को इसी तरह का ग्रेनेड अटैक हुआ था। क्या रवीश कुमार को इस तरह के हमलों के बाद ख़ुशी होती है कि उन्हें सरकार को घेरने का एक और मौक़ा मिल गया? जब हमले नहीं हो रहे थे, तब उन्हें समस्या होती है कि सब कुछ इतना शांत-शांत सा क्यों है, कुछ तो गड़बड़ है। अब जब एकाध हमलों की ख़बरें आ गई हैं, अब उनकी समस्या यह हो सकती है कि सरकार वहाँ सुरक्षा के लिए क्या कर रही है? रवीश ऐसा बोल सकते हैं:
“आतंकियों ने ग्रेनेड हमला किया। आख़िर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के इतने जवान क्या कर रहे हैं? इस हमले के कारण एकाध छात्र रेलवे और बैंकिंग का फॉर्म भरने से वंचित रह गए होंगे। सरकार राज्य के नागरिकों की सुरक्षा के लिए कोई कदम क्यों नहीं उठा रही? जब ग्रेनेड फेंका गया, तब प्रधानमंत्री बांग्लादेश की पीएम से मुलाक़ात की तैयारी कर रहे थे। आख़िर ढाका के रामकृष्ण मिशन में विवेकानंद भवन का उद्घाटन करने से जम्मू-कश्मीर के उन छात्रों को क्या मिलेगा, जो रेलवे और बैंकिंग की परीक्षा नहीं दे पा रहे? कहीं पुलिस इस हमले के बाद निर्दोष लोगों को गिरफ़्तार कर के उन पर इल्जाम न डाल दे। आख़िर क्या सबूत होगा कि सुरक्षा बल जिन्हें पकड़ेंगे, वो आतंकी ही होंगे?”
असल में रवीश कुमार इतनी आजादी चाहते हैं कि उनके दोनों ही हाथों में लड्डू हों। वह चाहते हैं कि जब सुरक्षा-व्यवस्था पुख्ता रहने के कारण सब शांत रहे तब वह ये कहें कि कश्मीरियों को बोलने की आज़ादी नहीं दी जा रही है। वह ये भी चाहते हैं कि प्रतिबंधों में ढील के बाद अगर आतंकी किसी वारदात को अंजाम देने में सफल हो जाएँ, तब वह पूछें कि सरकार क्या कर रही है, सुरक्षा बल क्या कर रहे हैं और प्रधानमंत्री तब कहाँ थे? रवीश के कलेजे में ठंडक इसलिए भी आई होगी क्योंकि अब उन्हें ऐसे सवाल पूछने का मौक़ा मिल गया है। रवीश चाहते हैं कि हमले न हों तो सरकार द्वारा ‘डर का माहौल’ बनाए जाने की बात करें और हमले हों तो ये कहें कि सरकार आतंकियों द्वारा बनाए गए ‘डर का माहौल’ को काबू में नहीं कर पा रही।
जब सब शांत होता है, रवीश को लगता है कि ज़रूर सरकार कुछ गड़बड़ कर रही है
इस हमले के बाद ‘ट्रोलवीश कुमार’ का एक प्राइम टाइम तो आराम से निकल ही जाएगा- इस घटना के लिए राष्ट्रपति से लेकर भाजपा तक से सवाल करते हुए। वह मीठी आवाज़ में जनता को यह बता ही देंगे कि देखो, केंद्र सरकार के लाख दावों के बावजूद कैसे आतंकी सफल हो गए (मन में भाव- ओहो, आतंकी सफ़ल हो गए। वाओ। अब तो सबको घेरूँगा)। मीडिया का एक वर्ग भी फिर से यही चलाएगा कि जम्मू-कश्मीर में सरकार असफल हो रही है। अगर हमले बंद हो जाएँगे तो फिर मीडिया मानवाधिकार का मुद्दा लेकर आएगी, जैसा अभी कुछ दिनों पहले हो रहा था।
दिल्ली की सड़कों में गड्ढे को लेकर सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और भाजपा आमने सामने है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को अपनी सरकार के दायरे में आने वाली लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान शुरू करने का ऐलान किया। इस पर तंज कस्ते हुए बीजेपी सांसद और पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर ने ट्वीट किया, “बाबू जी धीरे चलना, बड़े गड्ढे हैं इस राह में!“
केजरीवाल को टैग करते हुए लिखा कि हम को मालूम है ‘दिल्ली’ की हक़ीकत, लेकिन दिल को ख़ुश रखने के लिए ये ख़्याल अच्छा है।
बाबूजी’ धीरे चलना, बड़े गड्ढे हैं इस राह में ! हम को मालूम है “दिल्ली” की हक़ीक़त, लेकिन दिल को ख़ुश रखने को @ArvindKejriwal ये ख़याल अच्छा है pic.twitter.com/0DUjhRYdZX
इससे पहले, सड़कों में गड्ढों को लेकर केजरीवाल ने भी ट्वीट किया था जिसमें लिखा था कि दिल्ली सरकार के अधीन PWD सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने का अभियान आज से शुरू। 50 विधायक 25-25 किलोमीटर सड़क का निरीक्षण करेंगे, जिसमें हर विधायक के साथ एक इंजीनियर भी होगा।
दिल्ली सरकार के आधीन PWD सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने का अभियान आज से शुरू
50 विधायक आज 25-25 KM सड़क का निरिक्षण करेंगे, जिसमें हर विधायक के साथ एक इंजीनियर भी होगा
ऐप के जरिए गड्ढे या अन्य खराबी की फोटो और लोकेशन रिकॉर्ड होगी और हर खराबी को तुरंत ठीक कर दिया जाएगा।
अपने ट्वीट में केजरीवाल ने एक ऐप का भी ज़िक्र किया था जिसके ज़रिए गड्ढे या अन्य ख़राबी की फ़ोटो और लोकेशन रिकॉर्ड होगी और हर ख़राबी को तुरंत ठीक कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीडब्ल्यूडी के अधीन दिल्ली की कुछ ही सड़कें आती हैं, लेकिन उन पर रोज लाखों वाहन चलते हैं। बारिश से सड़कों पर जो असर होता है उससे किसी को असुविधा नहीं हो इसलिए यह अभियान चलाया जा रहा है । मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इतने बड़े स्तर पर पहली बार सड़कों का निरीक्षण हो रहा है।
हाल ही में, मुख्यमंत्री केजरीवाल तब विवादों में घिर गए थे, जब उन्होंने कहा था कि बिहार से एक आदमी 500 रुपए का टिकट लेकर दिल्ली आता है और अस्पताल में पाँच लाख का ऑपरेशन फ्री में कराकर चला जाता है। इस बयान को लेकर उनकी चौतरफ़ा किरकिरी भी हुई थी। इससे पहले, उन्होंने दिल्ली में एनआरसी लागू करने के मसले पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी पर निशाना साधा था। केजरीवाल ने कहा था कि एनआरसी लागू करने पर सबसे पहले तिवारी को दिल्ली छोड़कर जाना होगा।
पाकिस्तान की खैबर पैख्तूनख्वा प्रांत की सरकार ने पिछले दिनों स्कूली छात्रों के लिए बुर्का या अबाया अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था। विरोध होने पर सरकार ने आदेश तो वापस ले लिया, लेकिन गुपचुप तरीके से इस पर अमल जारी है। इस प्रांत में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ही सत्ता में है। इमरान खान न्यू पाकिस्तान का वादा कर सत्ता में आए थे।
पाकिस्तानी अखबार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के अनुसार प्रांत के रुस्तम घाटी के एक गाँव में PTI के एक स्थानीय नेता ने स्कूली छात्राओं के बीच बुर्के बाँटे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने पूर्व जिला परिषद सदस्य मुजफ्फर शाह द्वारा दी गई रकम से रुस्तम घाटी के चेना गाँव के एक गर्ल्स मॉडल स्कूल में छात्राओं के बीच बुर्के वितरित किए।
केंद्रीय परिषद पालो धेरी चीना ग्राम पार्षद और पीटीआई नेता मुजफ्फर शाह ने 1 लाख रुपए के मूल्य के बुर्के खरीदे। जिसे स्कूली छात्राओं के बीच मुफ्त में बाँटा गया। मुजफ्फर शाह ने फोन पर द एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बात करते हुए कहा, “मैंने छात्राओं के लिए अबाया खरीदने का फैसला किया था, लेकिन फिर स्थानीय नेताओं के साथ परामर्श करने के बाद मैंने उनके लिए बुर्का खरीदा।” शाह ने बताया कि एक बुर्के की कीमत 1,000 रुपए है।
पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि पुराने पाकिस्तान में छात्राओं को लैपटॉप मिलते थे, जबकि नए पाकिस्तान में 1 लाख रुपए के मूल्य के बुर्के बाँटे जा रहे हैं।
In Purana Pakistan students used to get laptops, while in Naya Pakistan govt gives burqas to school girls. Burqas worth Rs100,000 distributed in a Mardan school. https://t.co/JdLjDWPpTkpic.twitter.com/KBTScLqVgX
शाह ने बताया कि प्रांत के मुख्यमंत्री से प्रेरित होकर उन्होंने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि इससे छात्राओं के साथ छेड़छाड़ नहीं होगा और वे सुरक्षित रहेंगी।
खैबर पैख्तूनख्वा सरकार ने प्रांत में सरकार द्वारा संचालित किए जाने वाले शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं के लिए खुद को पूरी तरह ढकना अनिवार्य कर दिया था। उल्लेखनीय है कि प्रान्त के हरिपुर जिला शिक्षा विभाग ने सबसे पहले आदेश जारी किया था। जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी प्राचार्यों और पब्लिक स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि छात्राएँ बुर्का या अबाया पहनें। हालाँकि बाद में यह आदेश वापस ले लिया गया। सीएम महमूद खान ने आदेश वापस लेने का निर्देश जारी करते हुए कहा था कि ऐसा सरकार की सहमति के बिना किया गया था।
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने साफ़ किया है कि केंद्र सरकार ने 49 सेलेब्रिटीज के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। पीएम मोदी को पत्र लिख कर कथित रूप से मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं पर विरोध दर्ज कराने वाले सेलेब्रिटीज के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात मीडिया में चल रही थी। हालाँकि, यह ख़बर सही है लेकिन इसमें मोदी सरकार का कोई हाथ नहीं है। मीडिया आउटलेट ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने एक लम्बा-चौड़ा पैराग्राफ लिख कर इस क़दम की आलोचना की थी और मीडिया में ये बात कुछ इस तरह फैलाई जा रही थी जैसे केंद्र सरकार ने ही इन सेलेब्रिटीज पर देशद्रोह का चार्ज लगा दिया हो।
Union Minister Prakash Javadekar on reported FIR against 49 celebrities who wrote to Prime Minister on mob lynching: Government has not registered any case. pic.twitter.com/mUSROR0DRE
हालाँकि, जिस व्यक्ति ने सेलेब्रिटीज के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई है, उसने कहा कि इन सेलेब्रिटीज ने देश की छवि को कलंकित किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए प्रभावशाली कार्यों को कमतर आँका है। इन 49 लोगों में कथित इतिहासकार रामचंद्र गुहा, फ़िल्म निर्देशक मणिरत्नम, श्याम बेनेगल, अनुराग कश्यप और अभिनेत्री अपर्णा सेन सहित कई जानी-मानी हस्तियाँ शामिल थीं। पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी आरोप लगा दिया कि देश में सरकार विरोधी आवाज़ों को दबाया जा रहा है, जबकि इस एफआईआर को किसी व्यक्ति द्वारा दर्ज कराया गया है, सरकार द्वारा नहीं।
पत्र लिखनेवालों में से एक फ़िल्म निर्देशक अडूर गोपालकृष्णन ने तो न्यायपालिका पर ही सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि आख़िर इस केस को स्वीकार ही क्यों किया गया? उन्होंने इसे लेकर चिंता ज़ाहिर की। हालाँकि, इन लोगों को ये समझना चाहिए कि जैसे इन्हें पत्र लिख कर विरोध जताने का हक़ है वैसे ही किसी अन्य नागरिक को भी न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाने का पूरा हक़ है। अगर एक स्वच्छ लोकतंत्र की निशानी हैं तो दूसरा चिंताजनक कैसे हुआ?
जुलाई महीने में भारत के 49 सेलिब्रिटीज ने देश में बढ़ रही भीड़ हिंसा यानी लिंचिंग के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था. इस मामले में इनके खिलाफ बिहार के मुजफ्फरपुर में देशद्रोह के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई.https://t.co/BIwVIkyHvFpic.twitter.com/zean2yAZTQ
पत्र लिखने वालों में से एक कौशिक सेन ने कहा कि उनलोगों को प्रताड़ित करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता और वकील सुधीर ओझा द्वारा मुजफ्फरपुर में दायर की गई इस एफआईआर में 49 सेलेब्रिटीज पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया है। उधर, फ़िल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने भी स्पष्ट कर दिया है कि इस एफआईआर से उनका कोई ताल्लुक नहीं है और इससे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वह कोई सम्बन्ध नहीं रखते।
पटना के कई इलाके अब भी जलमग्न हैं। बिहार की राजधानी की यह हालत क्यों है, यह मेयर सीता साहू के एक वायरल वीडियो से समझा जा सकता है। उन्हें यह भी नहीं पता है कि जल निकासी के लिए पटना में कितने संप हाउस हैं। नगर निगम का नाला उड़ाही का बजट कितने का है, जबकि जल निकासी निगम की मुख्य जिम्मेदारी होती है।
प्रेस कॉन्फ्रेन्स में पहुँची पटना की मेयर सीता साहू पत्रकारों के सवालों से कुछ इस तरह घिरीं कि पूरी व्यवस्था की पोल खुल गई। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पटना में 49 संप हाउस काम कर रहे हैं, जबकि सच्चाई ये है कि पटना में कुल 39 संप हाउस ही हैं। ये आँकड़ा जब उनके साथ बैठे पार्षदों ने दिया तो वह सकपका गईं। उसके बाद मेयर यह भी नहीं बता पाईं कि अभी जल निकासी के लिए कितने संप हाउस चल रहे हैं?
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने भीषण जलजमाव के लिए सरकार को दोषी ठहरा दिया। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि राजधानी में जिस प्रकार का जलजमाव हुआ है, उसकी ज़िम्मेदारी बिहार अरबन इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (बुडको) की है। इसके लिए नगर निगम ज़िम्मेदार नहीं।
इतना ही नहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे जब पूछा गया कि इस भीषण जल-जमाव के लिए वह ज़िम्मेदारी लेंगी, तो उन्होंने कहा कि हम लोग कैसे जिम्मेदार हो गए? संप हाउस के परिचालन की ज़िम्मेदारी बुडको की है। संप हाउसों का पंप नहीं चला, इस कारण राजधानी का पानी नहीं निकल पाया। उनकी ग़लती है तो हम इसकी ज़िम्मेदारी लेकर इस्तीफ़ा क्यों दें?
मेयर साहिबा से एक पत्रकार ने सवाल किया कि आप आठ दिनों बाद दिख रही हैं। इस पर उन्होंने जवाब दिया कि हम फील्ड में थे। लोगों की स्थिति की जानकारी ले रहे थे। जलजमाव वाले क्षेत्रों का भ्रमण कर रहे थे।
मेयर ने कहा कि हमने नाला की सफाई कराई थी। संप हाउस के काम नहीं करने के कारण लोगों को परेशानी हुई। हालाँकि, प्रेस कॉन्फ्रेन्स में मेयर नाला उड़ाही का बजट नहीं बता पाईं।
हरियाणा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। चार पन्नों के इस्तीफे में उन्होंने आरोप लगाया है कि राहुल गॉंधी के करीबियों की ‘राजनीतिक हत्या’ की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को राहुल गॉंधी ने चुना और आगे बढ़ाया उन्हें एक-एक कर किनारे किया जा रहा।
तंवर ने कॉंन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को भेजे इस्तीफे में कहा है कि पार्टी को खत्म करने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद पर गुटबाजी के आरोप लगाए हैं। साथ ही अपने खिलाफ हिंसा की भी बात कही है।
उल्लेखनीय है कि सोनिया गॉंधी ने कॉंन्ग्रेस की कमान संभालने के बाद तंवर को उनके पद से हटा कर पूर्व केंद्रीय मंत्री शैलजा को प्रदेश की जिम्मेदारी दी थी। साथ ही हुड्डा को भी उसके बाद से आगे किया जा रहा है, जबकि राहुल गॉंधी ने पूर्व मुख्यमंत्री की तमाम चेतावनियों के बावजूद तंवर को उनके पद से हटाने से इनकार कर दिया था।
After long deliberations with party workers and for reasons well known to all Congressman and public, I hereby resign from the primary membership of the @INCIndiapic.twitter.com/qG9dYcV6u2
तंवर ने अपना इस्तीफ़ा ट्विटर पर पोस्ट किया है। इसके पहले उन्होंने चुनाव समितियों से इस्तीफा दे दिया था। उपेक्षा से नाराज तंवर का गुस्सा तब फूट गया जब टिकट बंटवारे में भी उनकी नई सुनी गई। उन्होंने समर्थकों के साथ कॉन्ग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था। साथ ही सोहना का टिकट पॉंच करोड़ रुपए में बेचे जाने का आरोप लगाया था।
Ashok Tanwar, Congress: I was in ticket distribution process so I know,’yeh sarkar banvayi gayi thi, bani nahi thi’.14 ppl who are BJP MLAs today were sent away from here,7 of their MPs have Congress background. BJP offered me to join 6 times in 3 months,I didn’t go & never will. https://t.co/dUqwIiGTCj
तंवर ने कहा था, “पिछले 5 सालों से मैंने अपना खून-पसीना कॉन्ग्रेस को दिया। यहाँ नेतृत्व बरबाद हो चुका है। हम पार्टी के लिए समर्पित हैं, लेकिन ऐसे लोगों को टिकट क्यों दी जाए, जिन्होंने अभी हाल ही में पार्टी को ज्वाइन किया है और पहले पार्टी की आलोचना कर चुके हैं।” सूत्रों के अनुसार तंवर ने पार्टी नेतृत्व से 10 सीटें मॉंगी थी। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा के लिए 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएँगे।
मुंबई स्थित आरे क्षेत्र को बॉम्बे हाईकोर्ट ने ‘जंगल’ घोषित करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद लगातार विरोध प्रदर्शन में लगे गई कथित पर्यावरण कार्यकर्ताओं को गहरा धक्का लगा। वहीं हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद मेट्रो परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई शुरू हो गई। ख़बर फैलते ही कई प्रदर्शनकारी वहाँ पर जमा हो गए और सरकारी कार्य में व्यवधान डाला। भाजपा की सहयोगी पार्टी और हाल ही में ‘महायुति’ के लिए सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर राजी हुई शिवसेना भी सरकार के इस निर्णय के ख़िलाफ़ सड़क पर उतर आई है।
शनिवार (सितम्बर 5, 2019) को आरे स्थित जंगलों को बचाने के लिए शिवसेना सड़कों पर उतर आई। शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी को हिरासत में ले लिया गया है। वे वेस्टर्न एक्सप्रेसवे पर विरोध प्रदर्शन कर रही थीं। धारा 144 लागू होने के बाद कम से कम 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। आरे जंगलों के बाहर बैरिकेड लगा कर पुलिस पुलिस ने सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी है।
शिवसेना नेता और ठाकरे परिवार के विश्वस्त संजय राउत ने एक कार्टून के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस पर निशाना साधा। राउत ने हाईकोर्ट के निर्णय का विरोध करते हुए उस कार्टून को ट्वीट किया। इस कार्टून में मुख्यमंत्री फड़णवीस न्याय की देवी की आँखों में पट्टी बाँधते नज़र आ रहे हैं, जिसपर लिखा हुआ है- “आरे जंगल नहीं है।” ‘युवा सेना’ के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे ने भी कड़ा विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि मेट्रो के जिस कार्य को गर्व से किया जाना चाहिए था, उसे धूर्तता के साथ रात के अंधेरे में चोर-छिपे किया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को पेड़ काटने की जगह पीओके में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने की सलाह दी।
The use of a large number of police personnel. Hacking trees in the dead of the night, even after winning in court (then why not broad day light) and detention of peaceful protesters and citizens. Who is authorising this? During Code of Conduct? All these powers handed to MMRC? https://t.co/SGv5yySfXn
आदित्य ठाकरे ने लिखा कि पुलिस की पहरेदारी में जो किया जा रहा है, उससे तेंदुओं का घर छिन जाएगा। वहीँ मुख्यमंत्री फड़णवीस ने विकास की ज़रूरत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन पेड़ों का कटा जाना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि वे ख़ुद आरे में पेड़ों को काटे जाने के ख़िलाफ़ हैं, लेकिन विकास महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि काटे गए पेड़ों की जगह और अधिक पेड़ लगाने के लिए वह आदित्य ठाकरे से बात करने के लिए तैयार हैं।
#AareyForest पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा, बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले के मुताबिक यह जंगल नहीं है। जब दिल्ली मेट्रो बननी शुरू हुई तो 20-25 पेड़ काटे गए। इसका विरोध हुआ लेकिन बाद में एक पेड़ के बदले पांच पेड़ लगाए गए। pic.twitter.com/loDaK8MGWE
वहीं, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने महाराष्ट्र सरकार का समर्थन किया है। उन्होंने इसके लिए दिल्ली मेट्रो का उदाहरण दिया। जावड़ेकर ने बताया कि जब दिल्ली में पहला मेट्रो स्टेशन बनाया जाना था, तब भी 20-25 पेड़ काटे गए थे। उन्होंने याद दिलाया कि विरोध-प्रदर्शन तब भी हुए थे लेकिन काटे गए हरेक पेड़ की जगह 5-5 नए पेड़ लगाए गए थे। जावड़ेकर ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट जब आरे को जंगल घोषित करने से मना कर चुकी है, उसके बाद हंगामा सही नहीं है।
टेरर फंडिंग मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक और चार अन्य कश्मीरी अलगाववादियों के ख़िलाफ़ दिल्ली की अदालत में शुक्रवार (4 अक्टूबर) को सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में इन पर आरोप लगाया गया कि इन्होंने कथित तौर पर आतंकवादी और अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देकर केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने की साज़िश रची थी।
3,000 पन्नों की चार्जशीट में कहा गया है कि पाकिस्तान उच्चायोग ने घाटी में अशांति पैदा करने के लिए अलगाववादियों को पैसा मुहैया कराया था। NIA के अनुसार, मलिक और शब्बीर शाह के बीच हुई ईमेल से पाकिस्तान और अन्य देशों के बीच हुए फंड ट्रांसफर के बारे में पता चला है। इस बात का भी पता चला है कि यासीन मलिक कश्मीर में अशांति और आतंकवाद का माहौल बनाने के लिए हवाला चैनलों के माध्यम से विदेशों से फंड प्राप्त कर रहा था। फंड ट्रांसफर के ज़रिए अलगाववादी और अन्य नेटवर्क का समर्थन करने में पाकिस्तान हाई कमीशन की अहम भूमिका रही है, इसका मक़सद घाटी में अशांति फैलाना था।
जाँच एजेंसी ने यासीन मलिक के अलावा, दुख्तारन-ए-मिलत प्रमुख आसिया अंद्राबी; J&K डेमोक्रेटिक फ़्रीडम पार्टी के संस्थापक शब्बीर शाह; J&K मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मसर्रत आलम और पूर्व विधायक और अवामी इत्तेहाद पार्टी के अध्यक्ष अब्दुल रशीद शेख को आरोपी बनाया है।
NIA ने दावा किया कि पाँचों आरोपितों ने आपस में मिलकर हिंसक गतिविधि की साज़िश रची। आरोपितों ने बड़े पैमाने पर आर्थिक क्षति पहुँचाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को नष्ट करने और प्रशासन के प्रति लोगों को उकसाने की साजिश रची थी।
आरोप पत्र में कहा गया है कि आसिया अंद्राबी का कनेक्शन, आतंकियों और आतंकी संगठनों के लिए पाकिस्तान से खुफ़िया तौर पर फंड लेने वाले श्रीनगर के व्यापारी जहूर वटाली से था।