Home Blog Page 5465

कॉन्ग्रेस को लगा झटका, NRC के मुद्दे पर 10 नेताओं ने कर दी पार्टी छोड़ने की घोषणा

कॉन्ग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रही है। एक के बाद एक कई नेताओं ने पार्टी का हाथ छोड़ दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया है। इसी कड़ी में त्रिपुरा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष प्रद्योत किशोर देबबर्मन के इस्तीफ़ा देने के बाद बुधवार (25 सितंबर) को 10 और नेताओं ने पार्टी छोड़ने की घोषणा कर दी है। पार्टी छोड़ने वाले नेताओं ने यहाँ तक चेताया है कि वो जल्द ही एक नया राजनीतिक दल बना सकते हैं। यह नया राजनीतिक दल आदिवासी और ग़ैर-आदिवासियों के मुद्दों पर ध्यान देगा। 

नए राजनीतिक दल की संभावनाओं के विषय पर श्रीदाम देबबर्मन ने बताया कि अंतिम फ़ैसला प्रद्योत किशोर की सलाह के बाद लिया जाएगा। उन्होंने संभावना जताई कि अगर नई पार्टी अस्तित्व में आई तो अगले साल होने वाले एडीसी चुनाव में वो हिस्सा लेगी।

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के महासचिव दिनेश देबबर्मा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया,

“हमने कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव लुइजिन्हो फ्लेरियो को त्रिपुरा में पार्टी की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया था। ऐसे हालातों में महाराज प्रद्योत किशोर के पास इस्तीफ़ा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।”

इस्तीफ़ा देने वाले नेताओं ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने फ्लेरियो के ख़िलाफ़ बातें लिखी थी। इस पत्र में नेताओं ने फ्लोरियो पर ग़ैर ज़रूरी हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया, इसी वजह से 2013 के विधानसभा चुनाव में सीपीएम ने बड़े अंतर के साथ जीत हासिल की थी।

वहीं, प्रद्योत देबबर्मन का कहना था, “आलाकमान ने मुझे NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) के लिए त्रिपुरा में दायर एक याचिका वापस लेने के लिए कहा था, लेकिन मैं राज़ी नहीं हुआ।” पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का दावा था कि महाराज प्रद्योत को इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि उन्होंने NRC लागू करने का माँग की थी और भ्रष्ट नेताओं के साथ किसी भी तरह का समझौता करने से इनकार कर दिया था।

दरअसल, त्रिपुरा के माणिक्य राजपरिवार से संबंध रखने वाले प्रद्योत देबबर्मन ने त्रिपुरा में NRC की समीक्षा की पैरवी की थी। उन्होंने इस संबंध में 22 अक्टूबर 2018 को शीर्ष अदालत में एक याचिका भी दायर की थी।

‘जो पति न हुआ, वह पिता कैसे होगा’ – अलका लांबा ने PM मोदी के ख़िलाफ़ उगला जहर

आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्व नेता अलका लांबा ने मंगलवार (24 सितंबर) को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस टिप्पणी की आलोचना की, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘भारत का पिता’ कहा था।

दिल्ली के चांदनी चौक की पूर्व AAP विधायक लांबा ने ट्रम्प की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “जो पति न हुआ, वह पिता कैसे होगा?”

इस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि जो लोग अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को ‘भारत का पिता’ कहने में गर्व का अनुभव नहीं करते हैं, उन्हें ख़ुद को भारतीय नहीं मानना चाहिए।

उन्होंने कहा,

“जो लोग विदेश में रहते हैं, वे भारतीय होने पर गर्व करते हैं। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और व्यक्तिगत आउटरीच के कारण हो रहा है… अगर अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से एक स्पष्ट और निष्पक्ष दृष्टिकोण निकलकर बाहर आता है, तो मुझे लगता है कि अपने राजनीतिक संबद्धता के बावजूद, सभी भारतीय नागरिकों को इस पर गर्व महसूस करना चाहिए।”

इसके आगे उन्होंने कहा, “पहली बार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने किसी प्रधानमंत्री की प्रशंसा के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया है। अगर किसी को इस पर गर्व नहीं है, तो शायद वह व्यक्ति ख़ुद को भारतीय नहीं मानता है।”

ग़ौरतलब है कि मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रम्प ने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हुआ उन्हें ‘भारत का पिता’ कहा था।

ट्रम्प ने कहा था कि वो निजी तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत सम्मान करते हैं और वास्तव में उन्हें बहुत पसंद करते हैं। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी एक सज्जन और महान नेता हैं। उन्हें आज भी वो भारत याद है जो काफ़ी अस्थिर था, वहाँ काफ़ी मतभेद, लड़ाई थी, लेकिन वो (पीएम मोदी) सबको साथ लेकर आए। जैसे एक पिता सबको साथ लाता है, वो भारत के पिता हैं। इसलिए उन्हें हम ‘फ़ादर ऑफ़ इंडिया’ बुलाएँगे।

इससे पहले, AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर निशाना साधते हुए उन्हें उन्हें ‘जहिल’ (अनपढ़) कहा था। ओवैसी ने यह भी कहा कि ट्रम्प ने इस तरह का बयान देकर महात्मा गाँधी की विरासत का अपमान किया और उन्हें भारतीय इतिहास के स्वतंत्रता संग्राम का कोई ज्ञान नहीं।

औवैसी ने कहा था, “मोदी राष्ट्र के पिता नहीं हो सकते क्योंकि आप उनकी तुलना महात्मा गाँधी से नहीं कर सकते। यहाँ तक ​​कि जवाहर लाल नेहरू और सरदार पटेल जैसे दिग्गजों को इस तरह का ख़िताब नहीं दिया गया।”

‘ईसाई लड़कियों का धर्म परिवर्तन इस्लाम में नहीं बल्कि इस्लामी आतंक में शामिल करने के लिए’

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन ने ईसाई लड़कियों को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। अपने पत्र में उन्होंने गृहमंत्री का ध्यान ईसाई लड़कियों के साथ हो रही लव जिहाद की घटनाओं पर दिलाया है। कुरियन ने पत्र में लिखा है कि ऐसा लगता है कि ईसाई समुदाय की लड़कियाँ इस्लामी कट्टरपंथियों का सॉफ्ट टारगेट हैं। जिससे उन्हें लव जिहाद का शिकार बनाकर आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए वह इस मामले में एनआईए जाँच का आदेश चाहते हैं।

इस मामले के संबंध में इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान कुरियन ने बताया कि बहुत से ऐसे सुनियोजित मामले हैं, जहाँ ईसाई महिलाओं का धर्म परिवर्तन इस्लाम में या इस्लाम के लिए नहीं बल्कि इस्लामी आतंक में शामिल करने के लिए करवाया गया। उन्होंने कहा कि इन महिलाओं को आतंकी क्रियाकलापों के लिए वाहक की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जिसका मुस्लिम समुदाय भी विरोध कर चुका है।

अमित शाह को लिखे अपने एक पेज के पत्र में कुरियन ने आगाह करते हुए बताया कि ये बहुत महत्तवपूर्व मुद्दा है, इसलिए गृह मंत्रालय इस खतरनाक प्रवृति पर ध्यान दे और इस मामले के संबंध में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को जाँच के आदेश दे। साथ ही कट्टरपंथी तत्वों की ऐसी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए एक प्रभावी कानून लाए।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ने अमित शाह से ये गुहार 2 ईसाई परिवारों की शिकायत मिलने के बाद लगाई है। उन्होंने अपने पत्र में दो घटनाओं का हवाला भी दिया है।

पहली घटना दिल्ली की मलयाली ईसाई लड़की की है, जिसका कुछ समय पहले पश्चिम एशियाई देश में अपहरण हुआ था। इसमें लड़की के माता पिता का कहना है कि उन्हें डर है कहीं उनकी लड़की को गुमराह और दिमागी तौर पर परेशान किया गया हो।

वहीं, दूसरा मामला कोझिकोड का है। इस मामले में ईसाई कॉलेज की छात्रा के साथ पहले वीडियो बनाते हुए बलात्कार किया गया, और फिर बाद में धमकी देकर पीड़ित को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया। इस मामले में पुलिस आरोपित को गिरफ्तार कर चुकी है।

बता दें कि इन दो ईसाई परिवारों की शिकायत के बाद अमित शाह को लिखे गए पत्र में उपाध्यक्ष ने अमित शाह से कहा कि पिछले 7 साल (2005 से 2012) में 4 हजार ईसाई लड़कियाँ लव जिहाद का शिकार हुई हैं। इन सभी मामलों में पहले लड़की को प्यार के जाल में फँसाया गया और फिर जबरन उनका धर्मांतरण करवाया गया। अधिकतर मामलों में लड़की का ब्रेन वॉश हुआ।

उल्लेखनीय है कि आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों ने पहले लव जिहाद के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला हुआ है। लेकिन पहली बार है जब अल्पसंख्यक आयोग जैसे संस्था के उपाध्यक्ष ने लव जिहाद शब्द का इस्तेमाल किया है। उनके मुताबिक अल्पसंख्यक समुदाय मुस्लिमों के निशाने पर हैं।

कुरियन के अनुसार शिकायतकर्ताओं की आशंकाएँ गलत नहीं हैं, क्योंकि पूर्व में ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें बताया गया था कि केरल से आईएस में शामिल होने वाले 21 लोगों में से 5 ईसाई धर्म से परिवर्तित किए गए थे।

धोखेबाज है मेहुल चोकसी, पूछताछ के लिए भारत स्वतंत्र: घोटाला के बाद जहाँ भागा, वहीं के PM ने ‘लतियाया’

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में आरोपित मेहुल चोकसी को लेकर एंटिगुआ के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने बड़ा बयान दिया है। गैस्टन ब्राउन ने मेहुल चोकसी को धोखेबाज करार देते हुए कहा है कि भारतीय जाँच एजेंसियाँ एंटीगुआ आकर मेहुल चोकसी से पूछताछ करने के लिए स्वतंत्र हैं।  

संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में भाग लेने अमेरिका के न्यू यॉर्क पहुँचे गैस्टन ने कहा कि उन्हें चोकसी की करतूतों के बारे में पर्याप्त जानकारी मिली है। एंटिगुआ के प्रधानमंत्री ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, “हमें बाद में जानकारी मिली कि मेहुल चोकसी एक धोखेबाज है, वह हमारे देश की बेहतरी के लिए कतई उपयोगी नहीं है। उसकी अपील समाप्त होने के तुरंत बाद उसे निर्वासित कर दिया जाएगा, भारतीय अधिकारी जाँच करने के लिए स्वतंत्र हैं।”

बता दें कि मेहुल चोकसी ने एंटीगुआ के सिटिजनशिप बाय इनवेस्टमेंट प्रोग्राम का इस्तेमाल करते हुए एंटीगुआ की नागरिकता ले ली थी। पीएम ब्राउन ने ये भी बताया कि मेहुल चोकसी की वजह से कैसे उनके सिटिजनशिप बाय इनवेस्टमेंट प्रोग्राम को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अभी उनकी सरकार कुछ नहीं कर सकती है, क्योंकि मामला अदालत में चल रहा है। उन्होंने कहा, “एंटिगुआ में एक स्वतंत्र न्यायिक व्यवस्था है और मामला अदालत में चल रहा है, इसलिए हमारे पास कोई अधिकार नहीं है। हालाँकि सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हम उसे भारत को जरूर प्रत्यर्पित करेंगे।”

गौरतलब है कि मेहुल चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी ने फर्जी लेटर ऑफ अंडस्टैंडिंग्स के जरिए पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई स्थित बार्डी हाउस शाखा से करीब 14 हजार करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की है। इस घोटाले का पर्दाफाश होने के तुरंत बाद मामा-भांजा देश छोड़कर भाग निकले। इसी दौरान चोकसी ने एंटिगुआ और बरबूडा की नागरिकता ले ली। इसी साल जून में उसने बॉम्बे हाई कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि वह एंटीगुआ में है और घोटाले से संबंधित जाँच में सहयोग करना चाहता है। हाल ही में गैस्टन ब्राउन ने मेहुल चोकसी की नागरिकता को रद्द करने का ऐलान किया था।

रतलाम में वीडियो वायरल करने की धमकी देकर नाबालिग छात्रा से गैंगरेप, आरोपित फरार

14 वर्षीया नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार मामले में रतलाम की सैकड़ों किशोरियाँ उसे न्याय दिलाने सड़क पर उतर आईं। पीड़िता के समर्थन और आरोपितों की तुरंत गिरफ़्तारी के लिए हुए मार्च में लड़कियों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए डीएम से मिलने की माँग की। बाद में एएसपी इंद्रजीत आर्य के समझाने पर ही मार्च का अंत हुआ। पीड़िता और आरोपित मध्य प्रदेश के St. Joseph’s Convent School के बताए जा रहे हैं।

वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बार-बार हुआ बलात्कार

बताया जा रहा है कि आरोपितों ने लड़की को धमकी दी कि उसके फ़ोटो और वीडियो वायरल कर दिए जाएँगे। इसी धमकी के बल पर उससे कई बार पैसे लिए जाने की भी बात सामने आ रही है। बताते हैं कि डरी हुई छात्रा उनका मुँह बंद रखने के लिए उनकी माँगें पूरी करने लगी।

उसके बाद आरोपितों में से एक ने 9 सितंबर 2019 को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे घर पर अकेली पीड़िता को कथित तौर पर फ़ोन कर उसके घर आने की बात कही। उसके बाद उसने और उसके दोस्त ने पीड़िता के घर में ही उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद उसे होटल बुलाकर भी वही घटना दोहराई गई।

जब पीड़िता की तबियत खराब होने लगी तो उसने अपने माता-पिता को बताया। उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी, जिन्होंने आरोपितों के विरुद्ध बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के तहत आपराधिक मामला औद्योगिक क्षेत्र पुलिस थाने में दर्ज कर लिया। दोनों आरोपितों की तलाश जारी है।

तेज बारिश में चलता रहा प्रदर्शन, स्कूल से निकाले जाएँगे दोनों छात्र

आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए विरोध प्रदर्शन करती छात्राएँ (तस्वीर साभार- पत्रिका )

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार विरोध प्रदर्शन तेज़ बारिश के बावजूद जारी रहा। इस बीच स्कूल प्रबंधन का कहना है कि दोनों आरोपित छात्र कुछ दिनों से स्कूल से नदारद हैं। स्कूल ने उन्हें निष्कासित करने का निर्णय ले लिया है।

महबूबा मुफ़्ती का अजीत डोभाल के कश्मीर दौरे पर कटाक्ष: पिछली बार बिरयानी, क्या इस बार हलीम?

पीडीपी की मुखिया और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोवाल के जम्मू-कश्मीर दौरे पर तंज कसते हुए पूछा है कि पिछली बार उन्होंने ‘बेचारे नादान’ कश्मीरियों के साथ बिरयानी खाते हुए फ़ोटो खिंचाई थी, तो क्या इस बार हलीम का इरादा है। वह 370 हटने के बाद वाले डोवाल के कश्मीर दौरे का ज़िक्र कर रहीं थीं। उस समय कश्मीर में स्थिति का जायज़ा लेने पहुँचे डोवाल ने स्थिति की सहजता का अंदाज़ा लगाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ बातचीत की थी और खाना खाया था

0_092519082410.jpg

NSA डोवाल सूबे के मौजूदा हालात का जायजा लेने और घाटी में सुरक्षा व्यवस्था पर विचार-विमर्श के लिए जम्मू-कश्मीर पहुँच रहे हैं। इसके अलावा वे विभिन्न सरकारी योजनाओं को अमली जमा पहनाने की रणनीति भी तय करेंगे।

11 दिन का था पहला दौरा, जिहाद के गढ़ों में घूमे थे

अपने पिछले दौरे पर डोवाल घाटी में जिहाद के गढ़ों में ही मुख्यतः केंद्रित रहे थे। उन्होंने अनंतनाग, श्रीनगर, शोपियाँ जैसे अशांत रहने वाले इलाकों का दौरा किया था। बकरीद के मौके पर वह श्रीनगर में थे। NSA ने शहर के सभी महत्वपूर्ण इलाकों के अलावा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण जिलों पांपोर, बड़गाम, और दक्षिण कश्मीर के पुलवामा और अवंतीपोरा का भी दौरा किया था

उस दौरान 370 निष्प्रभावी होने और राज्य के दो केंद-शासित प्रदेशों में तब्दील होने के बाद से घाटी में हिंसक विरोध की आशंका बनी हुई थी । इसी के चलते सरकार ने इंटरनेट और फ़ोन लाइनों समेत नागरिक संचार के लगभग सभी माध्यमों को निलंबित कर रखा था और घाटी, जम्मू और लद्दाख में हज़ारों की संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बल को तैनात कर दिया गया था। लेकिन अब धीरे-धीरे स्थितियाँ सामान्य होने की तरफ़ लौटने लगीं हैं।

Fake News है बैंक-बंदी की खबर, नहीं कर रहे कोई बैंक बंद: RBI

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने कुछ व्यवसायिक (कमर्शियल) बैंकों के बंद होने की खबर को गलत बताया है। अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर देश के बैंकिंग नियामक और सबसे बड़े बैंक ने साफ किया कि इस बाबत “मीडिया के कुछ हिस्सों में प्रकाशित हो रहीं” खबरों में कोई दम नहीं है। दरअसल RBI के पंजाब और महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) को 6 महीने के लिए अपने दिशानिर्देशों के सीधे नीचे लाने के बाद बाजार में घबराहट शुरू हो गई थी कि कहीं RBI इसे या अन्य किन्हीं कमर्शियल बैंकों पर तालाबंदी की तो तैयारी नहीं कर रही।

₹1,000 प्रति खाते से अधिक निकासी पर थी रोक, 23 सितंबर से लागू हुआ था कदम

जब RBI ने PMC को अपने सीधे अधीन किया तो बैंक और उसमें पैसा जमा करने वाले ग्राहकों पर कुछ छोटे प्रतिबंध लग गए। जैसे बैंक के हर खाते से अधिकतम ₹1,000 की ही निकासी हो सकती थी। इसके अलावा न ही बैंक में लोगों का और पैसा जमा हो सकता था, न ही बैंक कोई नए कर्ज दे सकता है। यह सभी निर्देश PMC बैंक पर 23 सितंबर को बैंकिंग के घंटे बीतने के बाद से लागू हो गए

यह कदम RBI तब उठाता है जब वह किसी बैंक के कामकाज के तरीके से नाखुश होता है। PMC के मामले में पिछले तीन साल से लगातार उसकी सुपरवाइजरी रिपोर्ट नकारात्मक थी। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Housing Development and Infrastructure Limited (HDIL) नामक एक रियल एस्टेट कंपनी को दिया गया ₹2,500 करोड़ का कर्ज PMC के पराभव का मुख्य कारण है। लेकिन बैंक के प्रबंध निदेशक जॉय थॉमस ने रिपोर्ट को नकारते हुए ₹2,500 करोड़ की धनराशि को गलत बताया है। यही नहीं, उन्होंने दावा किया कि बैंक के पास जमाकर्ताओं की देनदारी चुकाने के लिए पर्याप्त नकदी है।

CNBC-TV18 से बात करते हुए उन्होंने RBI के कदम को “ज़रूरत से ज़्यादा कठोर” बताया। “RBI केवल कर्ज देने पर रोक भी लगा सकता था।”

इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे ₹100 लाख करोड़, $5 ट्रिलियन इकॉनमी का बड़ा लक्ष्य: ग्लोबल बिजनेस फोरम में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क में ग्लोबल बिजनस फोरम-2019 को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में फिर वही सरकार है जो अपने पिछले पाँच साल के कार्यकाल में किए गए कामों को लेकर जनता के बीच गई और फिर पहले से ज्यादा सीटों पर जीतकर सत्ता में आई है। अमेरिका में वैश्विक कारोबारियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर आप निवेश करना चाहते हैं तो आपको भारत आना चाहिए। मोदी ने कहा कि हमने इन्सोल्वेंम्सी और बैंकरप्सी से निपटने के लिए सख्त कानून बनाया है। हमने टैक्स रिफॉर्म किए, साथ ही पिछले करीब 370 मिलियन लोगों को बीते चार-पाँच सालों में बैंकिंग से पहली बार जोड़ा गया है।

प्रधानंमत्री मोदी ने कहा कि आज भारत के हर नागरिक के पास यूनीक आईडी और मोबाइल है। इससे योजनाओं का फायदा बिना किसी भ्रष्टाचार के सीधे लोगों तक पहुँच पाया। पीएम ने कहा कि लॉजिस्टिक्स परफॉर्म इंडेक्स में 10 नंबर का उछाल आया है। वर्ल्ड बैंक ईज ऑफ़ डूइंग इंडेक्स में 63 रैकिंग का सुधार हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में एक ऐसी सरकार है जो बिजनस वर्ल्ड का और वेल्थ क्रिएशन का सम्मान करती है। पीएम मोदी ने वैश्विक कारोबारियों को भारत में आमंत्रित करते हुए कहा कि यदि आप एक ऐसे बाजार में निवेश करना चाहते हैं जहाँ विकास पैमाना है, तो आप भारत आइए। यदि आप सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर, इकोसिस्टम और शहरीकरण में से एक में निवेश करना चाहते हैं, तो आप भारत आइए।

ब्लूमबर्ग ग्लोबल बिजनेस फोरम में मोदी ने कहा कि भारत ने देश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके उपयोग को बंद करने के लिए एक बड़ा आंदोलन चलाया गया है। 2 अक्टूबर को महात्मा गाँधी की जयंती पर सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया जाएगा।

पीएम मोदी ने बिजनेस फोरम में बताया कि भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कोयला भंडार है। हम दुनिया को भारत में कोयला गैसीकरण के लिए अपनी तकनीक लाने के लिए आमंत्रित करते हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करेगा। जिसे बाद में गैस ऊर्जा के स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

पीएम मोदी ने कहा कि बीते 5 सालों में भारत में 286 बिलियन FDI हुआ है। ये बीते 20 साल में भारत के कुल FDI Inflow का आधा है। अमेरिका ने भी जितना FDI बीते दशकों में भारत में किया है, उसका 50% सिर्फ पिछले 4 वर्षों में हुआ है। करीब 90 फीसदी एफडीआई ऑटोमेटिक रूट से हुआ है और 40 फीसदी ग्रीनफील्ड इनवेस्टमेंट है यानी आज इनवेस्टर का भारत पर भरोसा बढ़ा है और वो लंबे समय के लिए आ रहा है।

फोरम में कारोबारियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमने कॉरपोरेट सेक्टर में भारी टैक्स कटौती करने का क्रांतिकारी फैसला लिया है। हमने नई सरकार बनने के बाद 50 से ज्यादा उन कानूनों को खत्म कर दिया है, जो कारोबार के मार्ग में बाधा पैदा कर रही थी।

फोरम में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत लगातार देश में बिजनेस का सही माहौल तैयार करने की कोशिश कर रहा है। सड़क, रेल और हवाई सुविधाएँ बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर पर हम 1.3 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने वाले हैं। सोशल पर 100 लाख करोड़ रुपए होंगे खर्च।

5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। हमने जब सत्ता संभाली तो देश की इकॉनमी 2 ट्रिलियन डॉलर की थी, हमने पिछले 5 सालों में इसमें 1 ट्रिलियन डॉलर और जोड़ा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में ऐसा मौका, ऐसी स्थिति कई दशकों के बाद आई है। जब डेमोक्रेसी हो, राजनीतिक स्थिरता हो, पॉलिसी प्रीडिक्टेबल हो, न्यायिक स्वतंत्रता हो, तो इनवेस्टमेंट की सेफ्टी, सिक्युरिटी और ग्रोथ का भरोसा अपने आप मिलता है।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि आज 4 कारक हैं जो भारत को निवेशकों के लिए विश्वसनीय बनाते हैं और भारत को सबसे अलग बनाते हैं- जनतंत्र (Democracy), जनसांख्यिकी (Demography), माँग (Demand) और निर्णायकता (Decisiveness)।

Editors Guild के शेखर गुप्ता को नहीं पता तेलंगाना-आंध्र में अंतर, Times Of India ने भी चलाई वही खबर

अपने आप को देश में पत्रकारिता, अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता से लेकर राजनीति और देश में पढ़ने-लिखने से जुड़ी हर चीज़ का चौधरी मानने वाले सम्पादकों के समूह एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने आंध्र सरकार की आलोचना करने में बहुत बड़ी बेवकूफ़ी कर दी- आंध्र प्रदेश को तेलंगाना और आंध्र के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी को तेलंगाना का मुख्यमंत्री बता दिया। यही नहीं, देश के सबसे ज़्यादा छपने और पढ़े जाने वाले अख़बारों में से एक होने का दम भरने वाले Times Of India ने भी वही गलत खबर आगे बढ़ा दी- यानि देश के सबसे बड़े तोपची सम्पादकों, और ‘सबसे बड़े’ अंग्रेजी समाचारपत्र को चलाने वालों को या तो देश के मुख्यमंत्रियों के बारे में भी ठीक से जानकारी नहीं है, और या फिर एडिटर्स गिल्ड ने गलती की तो की, टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने ‘मालिक साहब’ लोगों से आई खबर को छापने से पहले पढ़ने तक की ज़हमत नहीं उठाई।

दो टीवी चैनलों पर अघोषित प्रतिबंध का आरोप

एडिटर्स गिल्ड ने अपने पत्र/बयान में आंध्र के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी पर दो तेलुगुभाषी टीवी चैनलों TV5 और ABN पर अघोषित प्रतिबंध का आरोप लगाया था। माना जाता है कि दोनों चैनल राज्य सरकार सरकार की आलोचना करने वाले थे। एडिटर्स गिल्ड ने इसे प्रेस की आज़ादी के खिलाफ बताया और आंध्र प्रदेश सरकार से इस मामले पर स्पष्टीकरण की माँग की। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार ने इन दोनों चैनलों के प्रसारण को रोकने वाला कोई आदेश दिया था, और अगर दिया था तो गिल्ड ने उसे हटाने की माँग की।

यहाँ तक तो बात सही थी, लेकिन गिल्ड ने गड़बड़ यह कर दी कि मूल बयान में आंध्र की जगह तेलंगाना लिख दिया, और उसी का सीएम जगन को बनाकर आलोचना शुरू कर दी।

इस बयान को गिल्ड के अध्यक्ष और द प्रिंट के सम्पादक शेखर गुप्ता के नाम से जारी किया गया है।

Times Of India ने भी बिना पढ़े बढ़ाया आगे?

यह अपने आप में इतनी बड़ी कोई बात न होती, लेकिन इसके बाद Times Of India ने जब उसी, इतनी ‘basic सी’ गलती को जस-का-तस दोहरा दिया तो यही चीज़ एक बड़ी भूल बन गई।

‘ये भी ‘tyranny of distance’ है क्या?’

Editors Guild पर तंज़ कसते हुए रिपब्लिक टीवी की दक्षिण भारत ब्यूरो प्रमुख पूजा प्रसन्ना ने कहा कि आंध्र और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों का नाम न पता होना अक्षम्य है। उन्होंने साथ ही तन्ज़ कसा कि क्या यह भी ‘tyranny of distance’ के चलते हुए है। गौरतलब है कि जब लिबरल गैंग को इस बात पर घेरा गया था कि वह दादरी मॉब लिंचिंग को लेकर असहिष्णुता का पुलिंदा गढ़ने में जुटा है, जबकि बंगाल में बशीरहाट दंगों जैसी इस्लामी भीड़ की दर्जनों घटनाओं पर उसका ध्यान नहीं जाता, तो लिबरल गैंग के पत्रकारों ने इस ‘tyranny of distance’ के पीछे छिपने की कोशिश की थी। बहाना दिया था कि चूँकि बंगाल और अन्य कई राज्य उनके चैनलों के दिल्ली स्थित मुख्यालयों से दूर पड़ते हैं, इसलिए वहाँ की खबरें ठीक से कवर नहीं हो पातीं। यह मज़हबी भेदभाव या सेलेक्टिवनेस नहीं, दूरी की मजबूरी (‘tyranny of distance’) है।

भारत लोकतांत्रिक-धर्मनिरपेक्ष देश, संसद का अधिनियम मानना अनिवार्य: 370 पर मुस्लिम संगठन ‘इंडिया फर्स्ट’ का पत्र

देश के मुस्लिम बुद्धिजीवियों का एक समूह, इंडिया फर्स्ट, बुधवार (सितंबर 25, 2019) को जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के संसद के फैसले के समर्थन में आगे आया है।

इंडिया फर्स्ट ने अपने एक पत्र के माध्यम से कहा, “भारत एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश के रूप में अपने संविधान द्वारा शासित है। बिना किसी अपवाद के संसद का प्रत्येक अधिनियम मानना हम सभी के लिए अनिवार्य है। जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इस पर कोई समझौता या आत्मसमर्पण नहीं हो सकता है।” साथ ही इसमें कहा गया कि आपसी तालमेल और अंतर-व्यक्तिगत बंधन के नए पुलों के पुनर्निर्माण करने की आवश्यकता थी।

मुस्लिम संगठन फर्स्ट इंडिया द्वारा लिखा गया खत (फोटो साभार: ANI)

पत्र में कश्मीर घाटी में मौजूदा स्थितियों और प्रस्तावों के कारण पीड़ितों पर भी चिंता व्यक्त की गई है। इसमें कहा गया है कि राजनीतिक बंदियों की जल्द रिहाई और पूर्ण सामान्य स्थिति की बहाली राष्ट्रविरोधी, और भारत विरोधी ताकतों को हराने के लिए सबसे अच्छा निवारक हो सकती है। जो पड़ोसी देश के साथ ही हमारे देश में भी सक्रिय हैं।

इस पत्र में कहा गया, “इन्सानियत, कश्मीरियत और सभी हिंदुस्तानी से ऊपर हमें समझ और अंतर-व्यक्तिगत बांडों के नए पुलों के पुनर्निर्माण के लिए स्थान और अवसर प्रदान करते हैं।” पत्र में लिखा गया है, “राजनीतिक नेतृत्व के साथ जुड़ाव, बेहतर मीडिया पहुँच, सामाजिक गतिशीलता में वृद्धि और सामाजिक पदाधिकारियों के साथ परामर्श पूर्ण रूप से सामान्य स्थिति को बहाल करने की प्रक्रिया में तेजी ला सकता है।”

साथ ही फर्स्ट इंडिया ने पत्र में लिखा है कि कश्मीर के लोगों को पाकिस्तान के नापाक मंसूबे को समझना चाहिए। उन्होंने हर कश्मीरी से अपील की है कि वो देश के तिरंगे को राष्ट्रवादी भावना के साथ ऊपर उठाएँ, क्योंकि देश के हर हिस्से में हर कश्मीरी का खुले हाथों से स्वागत किया गया है।