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कॉन्ग्रेस की दोगली नीति की वजह से ही देश में ‘साम्प्रदायिक ताकतें’ मजबूत हो रही, जनता सावधान रहे: मायावती

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने आज कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया कि वह देश के भीतर साम्प्रदायिक ताकतों को बढ़ावा दे रही है जिससे साम्प्रदायिक ताकतों के ख़िलाफ़ बोलने वाली आवाज़ों को कमज़ोर करने में लगी हुई है।

अपने ट्विटर हैंडल से मायावती ने लिखा, “कॉन्ग्रेस पार्टी की दोग़ली नीति की वजह से ही देश में ‘साम्प्रदायिक ताकतें’ मजबूत हो रही हैं, क्योंकि कॉन्ग्रेस पार्टी साम्प्रदायिक ताकतों को कमजोर करने के बजाए, इसके विरूद्ध आवाज उठाने वाली ताकतों को ही ज्यादातर कमजोर करने में लगी है। जनता सावधान रहे।”

ऐसा लगता है जैसे उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को यह बात हज़म नहीं हो पा रही है कि राजस्थान में उनके सभी छ: विधायकों ने फिर से कॉन्ग्रेस का हाथ थाम लिया। उन्होंने 2009 में अशोक गहलोत की सरकार के दौरान भी ऐसा ही किया था। कल भी मायावती ने एक रैली में कॉन्ग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया।

बता दें कि मायावती ने राजस्थान में 2018 के विधानसभा चुनावों के बाद घोषणा की थी कि उनकी पार्टी सरकार से बाहर रहेगी, लेकिन बाहरी समर्थन देगी। उन्होंने ट्विटर पर कॉन्ग्रेस पार्टी के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अख़्तियार किया। बावजूद इसके बसपा अपने दो विधायकों के साथ मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार को अपना समर्थन जारी रखे हुए है।

हाल के दिनों में, बसपा सुप्रीमो कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रति अपने प्रतिशोध को लेकर काफ़ी मुखर हैं। उन्होंने हाल ही में कॉन्ग्रेस पार्टी और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को दोषी ठहराया था और उन्हें जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का मूल कारण बताया था।

इससे पहले भी, मायावती ने कश्मीर की यात्रा पर कॉन्ग्रेस और विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि वहाँ के हालात सामान्य होने तक इंतज़ार किया जाना चाहिए और इसके लिए सरकार को कुछ समय देना चाहिए था।

विशेष रूप से, कर्नाटक संकट के दौरान, बसपा सुप्रीमो ने कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन को नाकाम कर दिया था और उन्होंने बसपा विधायक को विश्वास मत से अलग रहने को कहा था।

PM मोदी से मिलूँगी: अमेरिका की पहली हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड ने राणा अयूब को लताड़ा

अमेरिका के ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में एक विशाल कार्यक्रम का आयोजन होना जा रहा है। ‘हाउडी मोदी’ नमक इस कार्यक्रम में 50,000 से भी अधिक लोग शामिल होंगे। सबसे बड़ी बात कि इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी शामिल होंगे। भारतीय मूल के लोगों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में अमेरिका के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की ख़बरें आई हैं। हालाँकि, राष्ट्रपति उम्मीदवार और अमेरिका की पहली हिंदू सांसद तुलसी गबार्ड इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी।

जब तुलसी के कार्यक्रम में शामिल न होने की ख़बर आई तो भारत में कई लिबरलों और वामपंथियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई। प्रोपेगंडाबज राणा अयूब ने ट्विटर पर एक लेख शेयर किया, जिसमें दावा किया गया था कि तुलसी पीएम मोदी के साथ मंच साझा नहीं करना चाहती और इसीलिए उन्होंने ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम का निमंत्रण ठुकरा दिया है। ‘आर्गेनाईजेशन फॉर माइनॉरिटीज ऑफ इंडिया’ के लेख के अनुसार:

“मोदी की हिंदुत्ववादी नीतियों के विरोध में हो रहे प्रदर्शन के कारण तुलसी गबार्ड ने पीएम मोदी के साथ मंच साझा करने से इनकार कर दिया है। कॉन्ग्रेसमैन रो खन्ना ने पिछले महीने कहा था कि अमेरिका के सभी हिन्दू नेताओं को हिंदुत्व का विरोध करना चाहिए और धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देना चाहिए। खन्ना ने कहा था कि हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई -सबके लिए बराबर अधिकारों की बात होनी चाहिए। उनके इस बयान का दक्षिण एशिया के नेताओं ने स्वागत किया। “

राणा अयूब ने अमेरिकी हिन्दू नेता तुलसी गबार्ड के भारतीय प्रशंसकों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि तुलसी अब मोदी के कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी और उन्होंने निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया है। इसके बाद तुलसी गबार्ड ने राणा अयूब को रिप्लाई देते हुए उनके झूठ का पर्दाफाश किया। प्रोपेगंडा को काटते हुए तुलसी गबार्ड ने राणा अयूब द्वारा शेयर किए गए आर्टिकल को भ्रामक तथ्यों वाला लेख करार दिया।

तुलसी गबार्ड ने लिखा कि राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार होने के कारण पहले से ही उनके कई चुनावी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं और इसी व्यस्तता के कारण वह पीएम मोदी के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं ले पाएँगी। उन्होंने साफ़ कर दिया कि पहले से तय कई कार्यक्रम की वजह से वह ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगी। साथ ही उन्होंने आशा जताई कि वह पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के मौके पर उनसे मुलाक़ात करेंगी। उन्होंने लिखा कि वह दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच संबंधों की महत्ता पर पीएम मोदी के साथ चर्चा करेंगी।

पाक सुंदरी के इवेंट में परफॉर्म करने वाले थे अल्का यागनिक, कुमार सानू, उदित नारायण, FWICE ने चेताया

पाकिस्तान की ओर कड़ा रुख बरकरार रखते हुए FWICE ने सैफ अली खान, श्रेया घोषाल, मीका सिंह और दिलजीत सिंह के बाद अब अल्का यागनिक, कुमार सानू और उदित नारायण को निशाने पर ले लिया है।

दरअसल, जानकारी के मुताबिक फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉईज ने तीनों गायकों को अमेरिका में आयोजित होने वाले शो में न जाने की नसीहत दी है। क्योंकि उनका कहना है कि 17 नवंबर को होने वाला ये इवेंट मिस PAK-USA की ओर से आयोजित किया जा रहा है।

FWICE ने तीनों कलाकारों को आड़े हाथों लेते हुए लिखा है, “पता चला है कि आप 17 नवंबर को अमेरिका में एक पाकिस्तानी नेशनल के इवेंट में परफॉर्म करने वाले हैं…FWICE अनुरोध करता है कि आप इस इवेंट में हिस्सा लेने का फैसला बदल दें। ”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले FWICE ने पाकिस्तान में जाकर परफॉर्मेंस देने पर मीका सिंह पर भी बैन लगा दिया था, और दिलजीत दोसांझ का तो वीजा रद्द तक करने की माँग उठा डाली थी। हालाँकि, इसके बाद दिलजीत ने खुद ही अपने प्रोग्राम को स्थगित कर दिया था और बताया था कि उनका कॉन्ट्रेक्ट बालाजी एंटरटेनमेंट के साथ हैं और किसी के साथ नहीं। इसके अलावा फेडरेशन बॉलीवुड के नामी कलाकार सैफ अली खान और मशहूर गायक श्रेया घोषाल को भी चेतावनी दे चुका है।

बलात्कार के दोषी को जज ने सुनाई 10 साल की सजा, सुनते ही कोर्ट में काट ली अपनी गर्दन

मध्यप्रदेश के छतरपुर की जिला अदालत में मंगलवार (सितंबर 17, 2019) को एक बलात्कारी ने अपने कुकर्मों की सजा सुनने के बाद कोर्ट में जज के सामने ही अपनी गर्दन चाकू से काट ली। घटना के तुरंत बाद दोषी को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। जहाँ उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो दोषी शख्स मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीना का निवासी है। उसका नाम ओंकार अहिरावर है और उसकी उम्र 32 वर्ष है। वह बीना में ही तेल रिफाइनरी में काम करता था और उसने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के माध्यम से छतरपुर की सिविल लाइंस इलाके में रहने वाली एक छात्रा से दोस्ती की थी। जिसके बाद दोनों लिव-इन में रहने लगे। लेकिन कुछ दिन बाद लड़की ने अहिरावर पर रेप का आरोप लगाते हुए मामले को दर्ज करवा दिया। तब से मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश की कोर्ट में चल रही थी।

ओंकार के वकील राजेश सक्सेना के मुताबिक छतरपुर सिविल लाइंस थाने की पुलिस ने ओंकार अहिरवार पर 28 अक्तूबर 2015 को बलात्कार का मामला दर्ज किया था। बाद में उसका चालान न्यायालय में पेश हुआ था, जिसके बाद दोषी को जमानत मिल गई थी और तब से वह जमानत पर बाहर था।

वकील के अनुसार मामले में अपर सत्र के न्यायाधीश नौरिन निगम की अदालत ने फैसला सुनाते हुए ओंकार को दोषी करार दिया गया है। साथ ही उसे 5,000 का अर्थदंड भी लगाया गया। वकील की मानें तो ओंकार ने सजा सुनते ही अदालत के भीतर अपनी पतलून से चाकू निकालते हुए गर्दन काट ली। जिसके बाद उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए उसे ग्वालियर भेज दिया गया।

अब सवाल उठता है कि ओंकार चाकू के साथ अदालत में दाखिल कैसे हुआ? इसके जवाब छतरपुर के एसपी का कहना है कि वह जमानत पर था और सीधे कोर्ट रूम आया था। इसलिए, वह चाकू लाने में सफल रहा।

क़र्ज़माफ़ी संभव नहीं, राहुल गाँधी को नहीं करना चाहिए था वादा: दिग्विजय के भाई लक्ष्मण सिंह

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह ने किसानों की क़र्ज़माफ़ी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनके इस बयान से कॉन्ग्रेस की मुश्किलें बढ़ सकती है, क्योंकि पार्टी ने क़र्ज़माफ़ी को ही मुद्दा बना कर 2018 में हुआ विधानसभा चुनाव लड़ा था और राज्य में सरकार बनाई थी।

5 बार सांसद और 2 बार विधायक रहे लक्ष्मण सिंह ने कहा है कि क़र्ज़माफ़ी किसी भी क़ीमत पर संभव नहीं है। उन्होंने कहा है कि इस वर्ष किसानों की क़र्ज़माफ़ी नहीं हो पाएगी, क्योंकि सरकार इसका आकलन करने में विफल साबित हुई है।

बता दें कि राहुल गाँधी ने चुनाव के दौरान सरकार गठन के 10 दिनों के भीतर किसानों की क़र्ज़माफ़ी करने का ऐलान किया था। अब लक्ष्मण सिंह ने अपनी ही पार्टी के पूर्व अध्यक्ष के बयान पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी को 10 दिनों के भीतर क़र्ज़माफ़ी का वादा नहीं करना चाहिए था। आँकड़े गिनाते हुए कॉन्ग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने कहा कि 45 हज़ार करोड़ की क़र्ज़माफ़ी आसान काम नहीं है। लक्ष्मण सिंह के अनुसार, इस वर्ष किसानों की क़र्ज़माफ़ी किसी भी क़ीमत पर नहीं हो सकती।

लक्ष्मण सिंह का यह बयान अहम है, क्योंकि मध्य प्रदेश के एक मंत्री ने ही उनके भाई दिग्विजय सिंह पर परदे के पीछे से सरकार में दखल देने का आरोप लगाया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को कॉन्ग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के लिए उनके समर्थक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। फिलहाल कमलनाथ मध्य प्रदेश में सरकार और संगठन, दोनों के मुखिया बने हुए हैं। दिग्विजय, सिंधिया और कमलनाथ के त्रिकोण में उलझी मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस की सियासत में लक्ष्मण सिंह का बयान मायने रखता है।

इस दौरान लक्ष्मण सिंह ने संगठन को लेकर भी बात की। बता दें कि लक्ष्मण 1990 में ही पहली बार विधायक बने थे और लगातार सक्रिय रहने के बावजूद उन्हें कमलनाथ मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। जब मीडिया ने उनसे इस सम्बन्ध में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि वे पार्टी से ऐसी अपेक्षा रखते हैं कि उनका कहीं भी उपयोग किया जाना चाहिए। अपनी पीठ थपथपाते हुए लक्ष्मण सिंह ने कहा कि उन पर न तो भ्रष्टाचार के कोई आरोप हैं और न ही उनके पास अनुभव की कोई कमी है।

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर गुटबाजी चरम पर है और इस सम्बन्ध में कई नेता अपनी पसंद-नापसंद ज़ाहिर कर रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष और राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में दिग्विजय सिंह के भाई ने कहा:

“ज्योतिरादित्य सिंधिया एक अनुभवी नेता हैं और वे अध्यक्ष पद के लायक भी हैं। कमलनाथ सरकार पूरे 5 वर्षों तक चलेगी। मुख्यमंत्री कमलनाथ भी काफ़ी अनुभवी नेता हैं। इस सरकार को परदे के पीछे से कोई भी नहीं चला रहा। मुख्यमंत्री कमलनाथ ही यह सरकार चला रहे हैं।”

बता दें कि मध्य प्रदेश के वन मंत्री उमर सिंघार ने कहा था कि दिग्विजय सिंह परदे के पीछे से सरकार चला रहे हैं और यह बात कार्यकर्ताओं से लेकर सभी नेताओं को पता है। उन्होंने कहा था कि अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर मंत्रियों को दिग्विजय के पत्र आते हैं। लक्ष्मण सिंह ने उनके इस बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके बड़े भाई दिग्विजय और मंत्री उमर सिंघार को आपस में मिल-बैठ कर बात कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे विवादों का लाभ भाजपा को मिलता है।

आबिद, दानिश, कैश ने 15 साल की हिन्दू लड़की को किया अगवा, पथराव और आगजनी से बढ़ा तनाव

आगरा के खंदौली क्षेत्र में मंगलवार (17 सितंबर) को एक नाबालिग हिन्दू लड़की की अपहरण की ख़बर सामने आई। घटना सैमरा गाँव की है, जहाँ आबिद ने अपने दो दोस्तों दानिश और कैश की मदद से 15 वर्षीय हिन्दू लड़की का अपहरण कर लिया।

ख़बर के अनुसार, कक्षा 9 की 15 वर्षीय छात्रा का मंगलवार दोपहर क़रीब 12 बजे अपहरण कर लिया गया। लड़की के माता-पिता एटा में रहते हैं, जबकि वो पढ़ाई के लिए अपने मामा के घर पर रह रही थी। लड़की के मामा को दोपहर में आबिद नाम के एक युवक का फोन आया। आबिद ने कथित तौर पर मामा को धमकी दी कि उसने उसकी भांजी का अपहरण कर लिया है और इस बात की सूचना वो पुलिस को बिल्कुल न दे।

फ़ोन कॉल के बाद, लड़की के मामा ने कथित तौर पर पुलिस स्टेशन में शिक़ायत दर्ज कराई। दानिश और कैश, जो आबिद के दो दोस्त हैं, जिन्हें पिछले कुछ दिनों से लड़की के घर के आसपास घूमते हुए देखा गया था, उनके भी शामिल होने का संदेह था। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने लिखित शिक़ायत दर्ज नहीं की और लड़की के परिवार को वापस भेज दिया।

जैसे ही अपहरण की ख़बर फैली क्षेत्र में अशांति फैल गई। मीडिया में आई ख़बरों के अनुसार, अपहरण की ऐसी घटनाएँ पहले भी सामने आ चुकी हैं। ग्रामीणों का एक समूह मुख्य आरोपी आबिद के परिवार से बातचीत करने गया, जहाँ दोनों समुदाय के बीच बवाल मच गया। कथित रूप से घरों को जला दिया गया और धीरे-धीरे इलाक़े में अशांति फैल गई। देर शाम एक गली में लगभग 15 दुकानों को भीड़ ने आग लगा दी। दूसरे पक्ष के लोगों ने घरों और परिवार के सदस्यों पर हमला बोल दिया।

ख़बरों के अनुसार जब दुकानों को आग लगाई जा रही थी, तो वहाँ कुछ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे जो UP-100 की गाड़ी से आए थे, वो हालात पर क़ाबू पाने में असहाय थे। बाद में शाम को, अतिरिक्त बल के पहुँचने पर स्थिति पर क़ाबू पाया जा सका। कथित तौर पर एक मरम्मत की दुकान में सिलेंडर विस्फोट के कारण आग से कई दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई थीं।

स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए आगरा रेंज आईजी ए सतीश गणेश और कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँचे। तनावपूर्ण स्थिति को ध्यान में रखते हुए, क्षेत्र में कई स्थानीय पुलिस स्टेशनों से अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है। अमर उजाला की ख़बर के अनुसार, लड़की को देर रात उस वक़्त बरामद किया गया जब मुख्य आरोपी आबिद उसे लेकर दिल्ली भागने की फ़िराक में था।

PM मोदी से पहले जशोदाबेन से मिलने को दौड़ीं ममता बनर्जी, भेंट की साड़ी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बुधवार शाम दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होनी है। उससे पहले मंगलवार (सितंबर 17, 2019) को कोलकाता हवाईअड्डे पर ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी जशोदाबेन से मुलाकात की। मुलाकात महज संयोग था।

इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे का हाथ जोड़कर अभिवादन किया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जशोदाबेन को एक साड़ी उपहार में दी।

जानकारी के मुताबिक ममता बनर्जी दिल्ली जाने लिए एयरपोर्ट पहुँचीं थी। वहीं, जशोदाबेन भी झारखंड के धनबाद से अपनी 2 दिन की यात्रा के बाद लौट रहीं थीं। इसी दौरान एयरपोर्ट पर दोनों के बीच अचानक मुलाकात हो गई।

खबरों की मानें तो जशोदाबेन को देखते ही ममता बनर्जी उनकी ओर दौड़ पड़ीं और कुछ देर बातचीत के बाद उन्हें साड़ी भेंट की।

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनावों के दौरान अक्षय कुमार को दिए इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी ने जिक्र किया था ममता बनर्जी उन्हें हर साल कुर्ते और मिठाइयॉं भेजा करती हैं। जिस पर बाद में ममता की प्रतिक्रिया आई थी और उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार किया था कि वो ऐसा करती हैं।

गौरतलब है कि सीएम ममता बनर्जी बुधवार को यानी आज प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात करने वाली हैं। इस मुलाकात को उन्होंने ‘शिष्टाचार भेंट’ बताते हुए कहा है कि वो पीएम के समक्ष राज्य से संबंधित कई मुद्दे उठाएँगी, जिसमें राज्य को मिलने वाला कोष अहम मुद्दा होगा।

उन्होंने कलकत्ता से रवाना होने से पहले पहले मीडिया से बातचीत में बताया कि वह राज्य के नाम में परिवर्तन, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय जैसे मुद्दों को उठाएँगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी की उनकी यात्रा ‘नियमित कामकाज’ का हिस्सा है।

अगले महीने राम मंदिर पर आ सकता है फैसला, 18 अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट में जिरह पूरी होने की उम्मीद

अयोध्या मामले में जल्द फैसला आने की उम्मीदें बुधवार को और मजबूत हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्टूबर तक इस मामले की सुनवाई पूरी होने की उम्मीद जताई है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने मामले के सभी पक्षकारों से पूछा था कि वे दलील पूरा करने में कितना वक्त लेंगे।

दोनों पक्षों का जवाब मिलने के बाद मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुआई वाली पॉंच सदस्यीय पीठ ने इस मामले में 18 अक्टूबर तक दलीलें पूरी करने की समय सीमा तय कर दी है। सीजेआई गोगोई ने कहा कि यदि दलीलें पूरी करने के लिए समय कम रहेगा तो वह शनिवार को भी सुनवाई करने के लिए तैयार हैं।

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या मामले की सुनवाई बहुत आगे पहुॅंच गई है। रोजाना के आधार पर कार्यवाही जारी रहेगी। यदि पक्ष मध्यस्थता के जरिए अयोध्या मामला सुलझाने के इच्छुक हैं, तो वे ऐसा कर सकते हैं। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एफएमआई कलीफुल्ला की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल के समक्ष हो रही सुनवाई गोपनीय रहेगी।

इस बीच, सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने मामले में सुब्रह्मण्यम स्वामी के हस्तक्षेप को लेकर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इससे कई अन्य लोगों को भी इस मामले में दखल देने का मौक़ा मिल जाएगा और याचिकाओं की बाढ़ आ जाएगी।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को ब्रेक देने का आग्रह किया था। इसके जवाब में अदालत ने उनसे पूछा था कि क्या ये नहीं हो सकता कि आप शुक्रवार को ब्रेक लें और आपकी जगह कोई और अपनी दलील पेश करे। आपको पता है कि कितना वक्त बचा है। जवाब में धवन ने कहा, “जिस स्पीड से सुनवाई चल रही है उसका अंदाजा हमें है। मैं नहीं चाहता कि मेरी दलील का लय टूटे।” इसके बाद मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सभी वकीलों से पूछा था कि वे जिरह पूरा करने में कितना वक्त लेंगे।

इससे पहले राजीव धवन ने अदालत को बताया था कि उन्हें जिरह के लिए कम से कम 20 दिन चाहिए। उन्होंने जन्मस्थान को कानूनी व्यक्ति मानने पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि ऐसा मुस्लिम पक्ष के दावे को कमजोर करने के लिए किया गया है।

गौरतलब है कि अयोध्या विवाद की हर सप्ताह पॉंच दिन सुनवाई हो रही है। यह पहला मामला है जब संविधान बेंच किसी एक मामले की रोजाना सुनवाई तीन के बजाए 5 दिन कर रही है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का कार्यकाल भी 17 नवंबर को ख़त्म हो रहा है। ऐसे में रोजाना सुनवाई शुरू होने के बाद से ही क़यास लगाए जा रहे हैं कि राम मंदिर मामले में फ़ैसला उनके रिटायर होने से पहले आ जाएगा। माना जा रहा है कि अदालत ने जिरह पूरी होने में लगने वाले समय को लेकर सभी पक्षों से जवाब भी इसी बात को ध्यान में रखकर मॉंगा था।

अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई छह सितंबर से शुरू हुई थी। पहले निर्मोही अखाड़ा की तरफ से दलीलें दी गई। उसके बाद राम लाल और राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति ने दलीलें रखी। हिंदू पक्षकारों की दलीलें पूरी हो जाने क बाद मुस्लिम पक्षों की तरफ से दलीलें शुरू हुई हैं।

Video Viral: भारतीय सेना ने पाकिस्तानी ‘BAT’ की घुसपैठ को किया नाकाम

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 के निरस्त किए जाने के बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। उसकी यह बौखलाहट आए दिन उजागर भी होती रहती है। ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है जिसमें भारतीय सेना ने 12 और 13 सितंबर को बॉर्डर एक्शन टीम (BAT) की घुसपैठ को मुँहतोड़ जवाब दिया है।

पाकिस्तान की BAT टीम ने पीओके के हाजीपुर सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश की थी। बार-बार इनकार के बावजूद पाकिस्तान, भारत में आतंकवादियों की घुसपैठ को अंजाम देने में लगा हुआ है। अगस्त में, भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा पर पाक द्वारा घुसपैठ की 15 कोशिशों को नाकाम कर दिया था। 

इस वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि BAT की तरफ़ से घुसपैठ की कोशिश के दौरान पाकिस्तान के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) कमांडो और आतंकवादियों पर भारतीय सेना ने ग्रेनेड से हमला किया और उनकी नापाक कोशिशों को नाकाम कर दिया। इससे पहले, जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में सुरक्षा बलों ने पाकिस्तानी फौज की बड़ी साज़िश को नाकाम करते हुए BAT के 4-5 घुसपैठियों को मार गिराया था। भारतीय सेना द्वारा घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों का वीडियो भी जारी किया गया था।

ख़बर के अनुसार, नियंत्रण रेखा से घुसपैठ के सफल और असफल प्रयासों के बारे में जानने के लिए हाल में हुई एक बैठक में सेना के प्रतिनिधि को कश्मीर क्षेत्र के गुरेज, माछिल और गुलमर्ग सेक्टरों के ऊंचाई वाले इलाकों तथा जम्मू क्षेत्र के पुंछ और राजौरी इलाक़ों में आतंकी घुसपैठ के संबंध में विभिन्न एजेंसियों द्वारा जुटाए गए साक्ष्य सौंपे गए।

ग़ौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बताया था कि नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के कई प्रयास हुए, जिनमें से अधिकतर को विफल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हो सकता है कुछ आतंकी घुसपैठ करने में सफल हो गए हों, लेकिन ऐसे आतंकियों को पकड़ने के लिए कश्मीर में सर्च ऑपरेशन भी चलाया जा रहा है। बता दें कि गुलमर्ग के ऊंचाई वाले क्षेत्रों को 1990 के दशक में मध्य कश्मीर में घुसपैठ के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

महिला से दोस्ती कर अमजद ने माँगी न्यूड तस्वीरें, नूर शेख के साथ मिलकर किया गैंगरेप

मुंबई में कुछ दिन पहले एक महिला के साथ गैंगरेप की घटना सामने आई थी। जिसके मद्देनजर पुलिस ने मंगलवार (17 सितंबर) को जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि इस मामले में दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनकी पहचान 30 वर्षीय अमजद अली खान और 42 वर्षीय नूर शेख के रूप में हुई है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक महिला सतारा की निवासी है, जिसकी एक बेटी भी है। महिला का पिछले वर्ष ही अपने पति से तलाक हुआ था, तब से ही वो अपनी बहन से मिलने के लिए मुंबई आती रहती थी। इसी दौरान उसकी जान पहचान अमजद अली खान से हुई, जो उसकी बहन का पड़ोसी था। कुछ ही मुलाकातों में दोनों के बीच नज़दीकियाँ बढ़ गईं और उनके बीच घंटों बात करने का सिलसिला शुरू हो गया।

पुलिस ने बताया कि जब भी महिला मुंबई आती तो दोनों मिलते और घूमने भी जाते। इसी दोस्ती का फायदा उठाते हुए खान ने महिला से उसकी नग्न तस्वीरें माँगी, जिसके लिए महिला मान भी गई। लेकिन जैसे ही उसे ये तस्वीरें मिलीं, उसने महिला को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। अमजद कहने लगा या तो महिला उससे मिले या फिर वो सारी तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट कर देगा।

अमजद की धमकियों से डरकर महिला मुंबई के ट्रॉम्बे पहुँची और एक टैक्सी में खान से मिली। खान इस दौरान अपने दोस्त नूर शेख के साथ था। दोनों दोस्त महिला को एक खाली कमरे में लेकर गए और वहाँ उसके साथ रेप किया। बाद में दोनों आरोपित महिला को सड़क किनारे छोड़कर फरार हो गए।

महिला ने पूरी घटना के बारे में अपनी बहन को बताया और दोनों ने पुलिस थाने पहुँचकर आरोपितों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करवाई। अगले ही दिन पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

ट्रॉम्बे के सीनियर इंस्पेक्टर सिद्धेश्वर ने बताया कि दोनों आरोपितों पर भारतीय दंड संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है। फ़िलहाल, दोनों आरोपित न्यायिक हिरासत में हैं और पीड़िता की मेडिकल जाँच रिपोर्ट का इंतजार है।