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देश के भीतर के गद्दारों से निपटने के लिए होगा सेना का गठन: BJP विधायक

भाजपा विधायक राजा सिंह ने एक सेना के गठन की बात कही है। उन्होंने कहा कि देशद्रोहियों को सबक सिखाने और उन्हें नरक पहुँचाने के लिए एक सेना का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे इस सेना के गठन के लिए तैयारियाँ कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 6 महीने पहले एक कैम्प का आयोजन किया गया था और ‘हिंदुत्ववादी बहादुरों’ को उस कैम्प में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया था। राजा सिंह के अनुसार, उस कैम्प के दौरान काफ़ी सार्थक चर्चाएँ हुईं।

राजा सिंह ने बताया कि उस कैम्प के दौरान यह निर्णय लिया गया कि भारत के हर एक युवा को एक सैनिक की तरह प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आज हमारा देश भारतीय सेना की वजह से ही सुरक्षित है। विधायक ने कहा कि देश के हर युवा को एक सैनिक की तरह ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर भारत को भविष्य में इन युवाओं की ज़रूरत पड़ती है तो ये पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भारतीय सेना देश के बाहर के गद्दारों को साफ़ कर रही है, एक ऐसी सेना होनी चाहिए जो देश के भीतर के गद्दारों को डील करे।

भाजपा विधायक राजा सिंह ने कहा कि इस सेना का गठन देश के कोने-कोने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देशद्रोहियों को घर से घसीट कर बाहर निकला जाएगा और उन्हें देश से बाहर छोड़ दिया जाएगा। हिंदुत्व की बात करते हुए भाजपा विधायक ने कहा:

“हिन्दू राष्ट्र के लिए हम समर्पित हैं हमारा दृढ निश्चय है कि हम लक्ष्य तक पहुँचेंगे। हमें हिन्दू राष्ट्र के लिए एक सेना की ज़रूरत है। इस सेना का गठन कैसे होगा? हिन्दू राष्ट्र के लक्ष्य के लिए, धर्म की रक्षा के लिए और राष्ट्र की रक्षा के लिए एक सेना का गठन किया जाएगा। इसके लिए बंगलौर में 10 दिनों का ‘आर्मी कैम्प’ आयोजित किया गया है। यह कैम्प 24 सितम्बर तक चलेगा और इसमें 470 लोग भाग ले रहे हैं। इस कैम्प का उद्देश्य है कि भारत के युवा देश की सुरक्षा के लिए आगे आएँ।”

राजा सिंह हैदराबाद के गोशमहल से विधायक हैं। वह पूरे तेलंगाना में भाजपा के एकलौते विधायक हैं। हिंदुत्व को लेकर वह काफ़ी सक्रिय रहते हैं। हाल ही में जब यदाद्रि के लक्ष्मी नरसिंह मंदिर में मुख्यमंत्री केसीआर के चित्र उकेरे गए थे, तब उन्होंने मंदिर का दौरा कर उन्हें हटाने के लिए अभियान चलाया था। इसमें वह सफल भी हुए। उन्होंने तेलंगाना में एनआरसी लागू करने की माँग भी की है। उन्होंने आंध्र प्रदेश सरकार पर ईसाइयत और इस्लाम को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया था।

विधायक राजा सिंह ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से दी ‘सेना के गठन’ की सूचना

राजा सिंह सोशल मीडिया पर भी काफ़ी सक्रिय हैं। वह हिंदुत्व और देश से जुड़े मुद्दों पर अक्सर वीडियो के माध्यम से अपनी राय साझा करते रहते हैं। वो अलग बात है कि उनके हर बयान पर विवाद उपजता है और वह विरोधियों का निशाना भी बनते हैं। फ़िलहाल उनके द्वारा सेना के गठन की घोषणा इस क्रम में ताज़ी ख़बर है।

Facebook ने 2 साल में हटाए IS, अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों के 2.60 करोड़ हिंसक पोस्ट

सोशल मीडिया के जरिए फैल रही हिंसा को रोकने के लिए फेसबुक ने पिछले कुछ सालों में काफ़ी सख्ती बरती है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सिर्फ़ पिछले 2 सालों में फेसबुक ने आतंकी संगठनों के करीब 2.60 करोड़ पोस्ट्स को अपने प्लैटफॉर्म से डिलीट किया है, जिसमें सबसे ज्यादा संख्या IS और अलकायदा के पोस्टों की बताई जा रही है।

मंगलवार को इस विषय पर जानकारी देते हुए सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक ने बताया, “हमने बड़े स्तर पर आंतकी संगठनों के ग्रुप की पहचान की है। फेसबुक अपने प्लेटफॉर्म पर उनकी विचारधारा को अनुमति नहीं देता है। कंपनी ने अब तक 200 से अधिक बेहद हिंसक पोस्ट हटाए हैं। इसके अलावा आतंकी ग्रुप्स के अकाउंट्स पर भी बैन लगाया है। “

फेसबुक कंपनी के मुताबिक उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानव विशेषज्ञता की मदद से इन आतंकी पोस्ट्स को डिलीट किया हैं। इसके अलावा फेसबुक ने ये भी बताया है कि न्यूजीलैंड के क्राइस्ट चर्च में हुए आतंकी हमले के बाद भी कुछ पोस्ट्स को हटाया गया था, जो कि फेसबुक के माध्यम से कट्टरता फैलाने का प्रयास कर रहे थे।

इसके बाद ही उन्होंने (फेसबुक ने) हिंसक कंटेंट की पहचान करने की दिशा में काम शुरु किया और गत नंवबर से हिंसक पोस्ट पर रोक लगाने के लिए नए नियम भी लागू किए थे।

अब इस कड़ी में फेसबुक दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों जैसे-गूगल, अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट और ट्विटर के साथ मिलकर 9 प्वॉइंट इंडस्ट्री प्लॉन तैयार कर रही है। जिनकी मदद से फेसबुक इस बात का पता लगाएगा कि आखिर कैसे इस प्लैटफॉर्म पर आतंक से जुड़े कंटेट को शेयर किया जाता है और कैसे वो अपनी नीतियों में बदलाव लाकर हिंसक पोस्ट्स को रोक सकते हैं।

उन्होंने कहा है कि हमें बुराई फैलाने वाले पोस्ट्स के ख़िलाफ़ लगातार कड़े कदम उठाने होंगे, क्योंकि हम जानते हैं कि ऐसे संगठन जो बुराई फैलाते हैं वे भी अपने काम को जारी रखेंगे। हमें लगता है कि मिलकर उठाए गए कदमों से इस काम में सफलता मिलेगी।

फेसबुक ने इस दौरान क्राइस्टचर्च पर हुए हमले के वीडियो पर सफाई देते हुए भी अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि हमले से संबंधित एक वीडियो ने ऑटोमैटिक डिटेक्शन सिस्टम को संकेत नहीं दिया था, क्योंकि इससे पहले यूजर्स ने इस प्लेटफॉर्म पर हिंसक कंटेंट को नहीं देखा था। जिस कारण से फेसबुक मशीन का लर्निंग सिस्टम इसे नहीं रोक पाया। लेकिन अब कंपनी इस तरह की हिंसक सामग्री पर रोक लगाने के लिए ब्रिटेन और अमेरिका के साथ मिलकर काम कर रही है।

गिरफ्तार कश्मीरी नेताओं को 18 महीने से कम में ही रिहा कर देंगे: जितेंद्र सिंह

मोदी सरकार के प्रधानमंत्री कार्यालय राज्यमंत्री ने यह ‘आश्वासन’ देकर हड़कंप मचा दिया है कि कश्मीर के नज़रबंद चल रहे प्रमुख नेता, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला पिता-पुत्र और महबूबा मुफ़्ती शामिल हैं, ’18 महीने से कम में ही’ आज़ाद कर दिए जाएँगे। जितेंद्र सिंह जम्मू के कटरा में मीडिया से रविवार को बात कर रहे थे।

इंदिरा गाँधी की इमरजेंसी की ओर था इशारा

मंगलवार को अपने बयान की पुष्टि करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि चूँकि मीडिया हर समय उनसे कश्मीरी नेताओं की रिहाई की समयसीमा पूछता रहता है, इसलिए वह “18 महीने से कम में ही” बता देते हैं। इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार यह इशारा इंदिरा गाँधी की इमरजेंसी की ओर है, जब कई विपक्षी नेताओं को 18 महीने तक का समय जेल में ही काटना पड़ा था।

72 साल से कम में फिर से राज्य बन जाएगा जम्मू-कश्मीर

जितेंद्र सिंह ने इतिहास पर चुटकी लेना यही नहीं रोका। जब उनसे पूछा गया कि राज्य को केंद्र-शासित प्रदेश से दोबारा पूर्ण राज्य बनने में कितना समय लगेगा, तो इसपर भी उन्होंने कहा कि 72 साल नहीं लगेंगे। यहाँ इशारा अनुच्छेद 370 हटाने में 72 साल लग जाने की ओर था। जब राज्य की स्थिति सामान्य हो जाएगी, तो प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा फिर से दे दिया जाएगा।

जितेंद्र सिंह से जब आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को नौकरी दिए जाने की खबरों पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, “हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की नौकरी को लेकर अपनी नीतियाँ होती हैं, जम्मू-कश्मीर में भी उन्हीं नीतियों का पालन किया जाएगा।”

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “मोदी सरकार के इस कदम से साफ हो गया है कि राष्ट्र विरोधी और अलगाववादी गतिविधियों के लिए देश में कोई जगह नहीं है। जन संघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू- कश्मीर में एक संविधान और एक विधान को लेकर जो संघर्ष किया उनका पक्ष आखिरकार सही साबित हुआ है और नेहरू और शेख अब्दुल्ला गलत साबित हुए हैं।”

पवित्र देसी गायों को बचाएँ, अमेरिकी नस्लों का वध करें: AAP विधायक

आम आदमी पार्टी (आप) के एक विधायक ने मंगलवार (17 सितंबर) को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से आग्रह किया कि वे “अंधविश्वास की राजनीति” को दूर करने के लिए गायों की ‘देसी’ और विदेशी नस्लों के बीच एक स्पष्ट अंतर को समझने की कोशिश करें। साथ ही, उन्होंने अमेरिकी नस्ल के पशुओं का वध करने पर ज़ोर दिया।

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार, पंजाब के सुनाम क्षेत्र से विधायक अमन अरोड़ा ने एक पत्र में आवारा पशुओं के मुद्दे को हल करने के चुनावी वादे पर लोगों को धोखा देने के लिए राज्य सरकार को कड़ी फ़टकार लगाई। अरोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार ने आम जनता को आवारा पशुओं की दया पर छोड़ रखा है जबकि उन्हीं नागरिकों से ‘गाय उपकर’ के नाम पर करोड़ों का कर वसूलती रही है।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि कई वीडियो क्लिप हैं, जिनमें अमेरिकी नस्ल के आवारा सांडों को सड़कों पर लोगों को मारते देखा जा सकता है। उन्होंने कहा,

“अमेरिकी HF नस्ल, जो मांस के लिए यूरोप में विकसित हुई थी और हमारी पवित्र देसी गाय के बीच एक स्पष्ट अंतर बताने की तत्काल आवश्यकता है, क्योंकि नस्लों के बीच कोई आनुवंशिक, धार्मिक, भावनात्मक लिंक नहीं है, जो आसानी से उनके DNA टेस्ट द्वारा सिद्ध किया जा सकता है।”

आप विधायक का कहना है कि ‘देसी’ गाय के दूध में विटामिन A2 होता है, जिसे कई बीमारियों को ठीक करने के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है, अमेरिकन HF नस्ल के दूध में विटामिन A1 ‘बोस टॉरस’ होता है जो कि कुछ बीमारियों का कारण बनता है। 

ग़ौरतलब है कि 2017 में पर्यावरण मंत्रालय के गजट नोटिफिकेशन के तहत मवेशी वध पर प्रतिबंध लगाने और मवेशियों की बिक्री पर प्रतिबंध से विवाद खड़ा हो गया था और इससे राज्य सरकारों के नियमों और अधिकारों के दायरे में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। देश के विभिन्न राज्यों में गोहत्या के लिए जुर्माने के साथ-साथ क़ैद की सज़ा का प्रावधान भी किया गया। 


बीजेपी और बजरंग दल ISI से पैसा लेते हैं: दिग्विजय सिंह; मानहानि का आपराधिक मामला दर्ज

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और अक्सर अपने विवादित बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाले दिग्विजय सिंह बीजेपी और बजरंग दल को लेकर दिए गए अपने विवादित बयान को लेकर अब बुरी तरह फँसते नजर आ रहे हैं। दिग्विजय सिंह के खिलाफ अब मानहानि का आपराधिक मामला दर्ज करवाया गया है। कोर्ट ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ दर्ज इस मामले की सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर का दिन तय किया है।

बता दें कि ANI की एक खबर के अनुसार कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने बीजेपी और बजरंग दल पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से रुपए लेने का आरोप लगाया था। जिसके बाद उनके बयान का काफी विरोध भी हुआ था। और अब उनके उस बयान पर उनके खिलाफ मानहानि का आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।

वैसे यह पहली बार नहीं है इससे पहले भी दिग्गी राजा कई ऊल-जलूल बयान देते रहे हैं जिस पर उनकी पहले भी किरकिरी हो चुकी है।

ओसामा के सहयोगी जिहादी के साथ पकड़ा गया पाकिस्तानी PM इमरान खान का सलाहकार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सलाहकार फिरदौस आशिक अवान को हरकत-उल-मुजाहिदीन के संस्थापक और जिहादी मौलाना फज़लुर रहमान खलील के साथ मंच साझा करते हुए पकड़ा गया। अवान खलील के साथ इस्लामाबाद में 16 सितंबर, 2019 को हुई ऑल पार्टी कश्मीर कॉन्फ़्रेंस में शिरकत कर रहे थे

लादेन के सम्पर्क में था, डेनियल पर्ल हत्याकांड में संलिप्त

अवान सूचना मामलों पर इमरान खान के विशेष सलाहकार हैं। उन्हें जिस फज़लुर रहमान खलील के साथ देखा गया, वह न केवल हरकत-उल-मुजाहिदीन को बनाने वाला सरगना है, बल्कि पूर्व नंबर 1 आतंकी ओसामा बिन लादेन का भी करीबी रहा है। बताते चलें कि ऐसा माना जाता है कि खलील एबटाबाद में लादेन के मारे जाने के पहले तक उसके सम्पर्क में था। इसके अलावा खलील वॉल स्ट्रीट जर्नल के पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या में भी लिप्त रहा था

FATF को जवाब देना होगा मुश्किल

पाकिस्तान के लिए इस मामले के चलते अब Financial Action Task Force (FATF) को जवाब देना और ब्लैक लिस्ट होने से बचना और भी मुश्किल हो जाएगा। पहले ही पाकिस्तान FATF की ग्रे-लिस्ट में है, यानि जिहादियों को पैसा देने वाले ‘संदिग्धों’ की सूची में है, और उसके पास केवल अक्टूबर तक का समय है, वैश्विक समुदाय को यकीन दिलाने के लिए कि वह जिहाद के लिए पैसा देने वाले सभी स्रोतों और माध्यमों पर लगाम लगा चुका है। अगर वह ऐसा करने में नाकाम रहता है, तो उसके ब्लैकलिस्ट होने के बाद कोई देश या वैश्विक आर्थिक संस्थान उसे आर्थिक सहायता नहीं दे पाएगा। FATF का एशिया प्रशांत समूह (APG) उसे पहले ही ‘ब्लैक लिस्ट’ कर चुकी है

भारतीय सैन्य अधिकारियों के फर्जी नाम से PAK फैला रहा था प्रोपेगेंडा, Twitter ने सस्पेंड किए 50 अकॉउंट

पाकिस्तान का स्तर दिन पर दिन गिरता जा रहा है। अपनी हरकतों के लिए वो आए दिन हर तरफ से लताड़ खा रहा है। अब ऐसे में ट्विटर ने भी पाकिस्तान की घटिया हरकत पर एक्शन लेते हुए उसके 50 फर्जी अकॉउंट को बंद कर दिया है, जिन्हें पाकिस्तान भारत के सेना अधिकारियों के नाम से चला रहा था।।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होने के बाद प्रोपेगेंडा फैलाने की नियत से भारतीय सेना प्रमुख ​जनरल बिपिन रावत और अन्य सेना अधिकारियों के नाम से फर्जी ट्विटर अकाउंट बनाए थे। जिनमें से कुछ अधिकारी तो अब भी सेना में ऊँचे पदों पर तैनात हैं जबकि कुछ रिटायर हो चुके हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जिन अधिकारियों के नाम से पाकिस्तान अपना प्रोपगेंडा चला रहा था, उनमें सेना प्रमुख के अलावा वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अंबू, नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल बलवंत के नाम भी शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि इन सभी अधिकारियों के नाम पर चल रहे अकॉउंट्स से विवादित और फर्जी सूचनाएँ साझा की जाती थीं। इंडिया टुडे के मुताबिक उन्हें सेना के सूत्रों ने बताया है कि ऐसे फर्जी ट्विटर हैंडल की संख्या तेजी से बढ़ रही थी। इसके पीछे यह उद्देश्य है कि फर्जी खबरों और प्रोपेगेंडा को वैधता दी जाए। लेकिन अब फिलहाल शिकायत करने के बाद सेना के मौजूदा एवं रिटायर्ड अधिकारियों के नाम पर चल रहे 50 से अधिक अकॉउंट बंद कर दिए गए हैं।

गौरतलब है कि पाकिस्तान जिन अधिकारियों के नाम पर फर्जी अकॉउंट चला रहा था, उनमें एक महत्तवपूर्ण नाम लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया का है, जो मिलिटरी ऑपरेशन रह चुके हैं और डिफेंस मामलों के जानकार के तौर पर विश्वसनीय चेहरा हैं। साथ ही एक अकॉउंट लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित के नाम पर भी था, जो 2008 में मालेगाँव ब्लॉस्ट के आरोपित हैं।

भारतीय सेना में नियमों के अनुसार सोशल मीडिया पर सेना से जुड़े लोग अपनी वर्दी में तस्वीरें नहीं लगा सकते, लेकिन इन सभी अकॉउंट्स में सेना के अधिकारियों की तस्वीर वर्दी में थी, जिससे साफ़ पता चल गया था कि ये फर्जी अकॉउंट हैं।

इन अकॉउंट्स से पोस्ट होने वाले ट्वीट में अधिकतर मानवाधिकारों का हनन करने वाली वीडियो और नागरिकों एवं सेना में होने वाला संघर्ष दिखाया जाता था। इनमें ज्यादातर ट्वीट अनुच्छेद 370 और कश्मीर से संबंधित थे।

खैर, जानकारी के लिए बता दें कि अब इस मामले में सुरक्षा कड़ी हो गई है। ऐसे फर्जी अकॉउंट्स की पहचान करने के लिए सोशल मीडिया समेत यूट्यूब वीडियोज पर सेना 24×7 निगरानी रख रही है।

सेना के सूत्रों की मानें तो इन फर्जी अकाउंट में कई तो 4 से 5 साल पहले बनाए गए थे। इसके अलावा कई मशहूर बॉलीवुड हस्तियों के नाम पर भी ऐसे अकाउंट थे जो अचानक प्रोपेगेंडा और फर्जी खबरें फैलाने के लिए अति सक्रिय हो गए।

ट्रैफिक चालान के विरोध पर 2 पूर्व अध्यक्ष आमने-सामने: दिल्ली कॉन्ग्रेस की कलह सतह पर

दिल्ली कॉन्ग्रेस में उस वक़्त कलह का माहौल सतह पर आ गया, जब पार्टी के 2 वरिष्ठ नेता आपस में ही लड़ बैठे। मामला केंद्र सरकार द्वारा ट्रैफिक नियमों के तहत चालान की राशि बढ़ाए जाने के विरुद्ध प्रदर्शन का था। दिल्ली में कॉन्ग्रेस का कोई प्रदेश अध्यक्ष नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के निधन के बाद से ही यह पद खाली पड़ा हुआ है। ऐसे में, अध्यक्षविहीन प्रदेश संगठन में अनुशासन की कमी दिख रही है और निचले स्तर के कार्यकर्ता तो दूर की बात, पार्टी में दशकों से सक्रिय वरिष्ठ नेता भी आपस में सिर-फुटव्वल कर रहे हैं।

दिल्ली कॉन्ग्रेस के उपाध्यक्ष चतर सिंह ने चालान राशि बढ़ाने के ख़िलाफ़ कन्हैया नगर मेट्रो स्टेशन के पास त्रीनगर में एक धरना प्रदर्शन का आयोजन किया था। बुधवार को आयोजित इस धरना प्रदर्शन में उन्होंने दो पूर्व प्रदेश अध्यक्षों जेपी अग्रवाल और अजय माकन का नाम भी दे दिया। कहा जाता है कि अग्रवाल और माकन, दोनों में ही नहीं पटती है और वे एक-दूसरे के साथ मंच साझा करने से बचते रहते हैं। ऐसे में, लोगों का सवाल था कि क्या ये दोनों धरना प्रदर्शन में भाग लेंगे?

बुधवार (सितम्बर 18, 2019) को आयोजित इस धरना प्रदर्शन के बारे में प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने जितेंद्र कोचर ने जेपी अग्रवाल के हवाले से कहा कि बिना उनकी अनुमति लिए इस धरना प्रदर्शन में उनका नाम शामिल कर दिया गया है। जेपी अग्रवाल को इस आयोजन के मुख्य अतिथि के रूप में दिखाया गया था लेकिन ख़ुद अग्रवाल का कहना है कि इसके लिए उनसे सहमति ली ही नहीं गई थी।

वहीं चतर सिंह का कहना है कि जेपी अग्रवाल से इस सम्बन्ध में बातचीत हुई थी और धरना प्रदर्शन में सम्मिलित होने को लेकर उन्होंने अपनी सहमति भी दे दी थी। उन्होंने कहा कि अगर अब अग्रवाल आने से मना कर रहे हैं तो अब उनकी मर्जी है। उन्होंने बताया कि अजय माकन धरने में शामिल होने आ रहे हैं।

प्रदेश कॉन्ग्रेस में इस विवाद को लेकर तनाव का माहौल है। दिल्ली में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है और इसे देखते हुए कॉन्ग्रेस की कलह का सतह पर आना पार्टी के लिए अच्छा संकेत नहीं है क्योंकि दूसरे राज्यों में भी पार्टी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है।

भारत में आतंकी चाँद से नहीं आते; पाकिस्तान हम पर भी हमले प्लान करवाता है: यूरोपीय संसद के नेता

यूरोपियन यूनियन की संसद में भी पाकिस्तान के विरोध और हिंदुस्तान के समर्थन के स्वर मुखर हो रहे हैं। कश्मीर मुद्दे पर यूरोपियन संसद के सदस्यों ने एक तरफ पाकिस्तान को लताड़ते हुए आरोप लगाया कि वह अपनी ज़मीन जेहादियों को यूरोप की ज़मीन पर हमले की तैयारी के लिए मुहैया कराता है, वहीं हिंदुस्तान को महान लोकतंत्र बताया। साथ ही कहा कि कश्मीर में जिहादी चाँद से नहीं टपक रहे, बल्कि पाकिस्तान से आ रहे हैं।

करना चाहिए हिंदुस्तान का समर्थन

2008 के बाद पहली बार कश्मीर मुद्दे पर यूरोपीय संसद में चर्चा हुई। चर्चा में यूरोप के जिन कद्दावर नेताओं ने हिंदुस्तान का समर्थन किया, उनमें स्पेन के हावी लोपेज़, फ़्रांस की जूली लेशेंतौं और गिलेस लेबेरतौं, पोलैंड के राइज़ार्ड ज़ारनेकी, ब्रिटेन के दिनेश धमीजा प्रमुख हैं। राइज़ार्ड ज़ारनेकी, जो पोलैंड के European Conservatives & Reformists Group के सदस्य हैं, ने कहा, “हिंदुस्तान दुनिया का एक महान लोकतंत्र है। हमें जम्मू-कश्मीर, हिंदुस्तान (न कि विवादित स्थल), में हो रहे जिहादी कृत्यों पर नज़र दौड़ानी चाहिए। ये जिहादी चाँद से नहीं टपक रहे। यह पड़ोसी मुल्क (पाकिस्तान) से आ रहे हैं। हमें हिंदुस्तान का समर्थन करना चाहिए।”

‘न्यूक्लियर धमकी देता है पाक’

इटली की Group of European People’s Party (Christian Democrats) के फुल्विओ मरतूसिएलो ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देता है। पाकिस्तान ऐसी जगह है जहाँ से जिहादी यूरोप पर दहशतगर्दी के लिए योजनाएँ बना सकते हैं।

कन्हैया के खिलाफ केस चलाने की इजाजत नहीं दे रही केजरीवाल सरकार: दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया

जेएनयू के पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ देशद्रोह के मामले में दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार केस चलाने की इजाजत नहीं दे रही है। दिल्ली पुलिस ने पटियाला हाउस कोर्ट को यह जानकारी दी है। अदालत ने मामले की धीमी रफ़्तार को लेकर पुलिस से सवाल पूछा था।

मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट मनीष खुराना की अदालत को दिल्ली पुलिस ने बताया कि कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी के लिए किया गया अनुरोध दिल्ली सरकार के गृह विभाग के समक्ष लंबित है। इस मामले में पुलिस अपना काम कर चुकी है और अब वह सरकार के निर्णय का इंतजार कर रही है।

फरवरी 2016 में जेएनयू परिसर में कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी नारे लगाए गए थे। इसी साल जनवरी में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 1,200 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी। इस महीने की शुरुआत में दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि दिल्ली पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्य से कन्हैया के खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मामला नहीं बनता।

दिल्ली पुलिस के अनुसार इस मामले में कार्रवाई केजरीवाल सरकार की इजाजत नहीं मिलने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही है। पुलिस के उसने 2016 और फिर इस साल जनवरी में केजरीवाल सरकार से इजाजत मॉंगी थी। लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।