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तिहाड़ से निकलने की चिदंबरम की ख्वाहिश नहीं हुई पूरी, ईडी के सामने सरेंडर करने की याचिका खारिज

आईएनएक्स मीडिया स्कैम में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सामने सरेंडर करने की पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की याचिका दिल्ली की एक अदालत ने खारिज कर दी है। चिदंबरम फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। याचिका खारिज होने के कारण उन्हें अब 19 सितंबर तक जेल में ही रहना होगा।

विशेष न्यायाधीश अजय कुमार की अदालत में चिदंबरम का पक्ष रखते हुए वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि ईडी 20 और 21 अगस्त को पूर्व वित्त मंत्री को गिरफ्तार करने उनके घर गई थी। अब उन्हें हिरासत में लेने से बचने की दलीलें दे रही है।

इससे पहले सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करने से पहले कुछ पहलुओं की जॉंच जरूरी है। चिदंबरम को हिरासत में लेने से पहले एजेंसी छह अन्य लोगों से पूछताछ करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि 21 अगस्त से पहले और आज भी चिदंबरम को गिरफ्तार करने की जरूरत के कई कारण हैं। लेकिन, अब न्यायिक हिरासत में होने के कारण वह साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने की स्थिति में नहीं हैं। चिदंबरम को हिरासत में लेने के बाद एजेंसी उनका सामना जुटाए गए साक्ष्यों से करना चाहेगी।

गौरतलब है कि पॉंच सितंबर को सीबीआई अदालत ने चिदंबरम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में 19 सितंबर तक भेजने का आदेश दिया था। इसी दिन उनकी सरेंडर की याचिका पर ईडी को नोटिस जारी किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अग्रिम जमानत देने से पहले ही इनकार कर चुकी है।

आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपए की विदेशी रकम हासिल करने के लिए नियमों से परे जाकर एफआईपीबी की मंजूरी दी गई थी। उस वक्त चिदंबरम वित्त मंत्री थे। सीबीआई ने 15 मई 2017 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में ईडी ने भी इस संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।

आधार को सोशल मीडिया AC से जोड़ने की केंद्र की योजना का परीक्षण करने को तैयार SC, सरकार से माँगा जवाब

आधार कार्ड को सोशल मीडिया अकॉउंट से जोड़ने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय परीक्षण करने को तैयार हो गया है। जिसके चलते SC ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या सरकार सोशल मीडिया पर नियंत्रण पाने के लिए कोई नीति बनाने पर विचार कर रही हैं।

न्यायालय ने शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्रोफाइलों को आधार से जोड़ने के मुद्दे पर तत्काल फैसला लेने की आवश्यकता हैं। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार को जवाब तलब करने को कहा है और साथ ही मामले की अगली तारीख 24 सितंबर तय की हैं।

पीठ ने केंद्र सरकार से कहा , “अगर आप भविष्य में इसे लेकर कोई कदम उठाने जा रहे हैं तो फिर हम इसे दूसरे नजरिए से देखें। इसलिए आप हमें जानकारी दें।”

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की पीठ ने कहा, ‘‘इस समय हमें नहीं मालूम कि क्या हम इस मुद्दे पर निर्णय कर सकते हैं या हाई कोर्ट फैसला करेगा।’’

पीठ ने यह भी कहा कि वह इस मामले के गुण दोष पर गौर नहीं करेगी और सिर्फ मद्रास, बंबई और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लंबित ऐसे मामलों को शीर्ष अदालत में ट्रांसफर करने की फेसबुक की याचिका पर फैसला करेगी। जिसपर केंद्र सरकार ने जवाब देते हुए कहा है कि तीन उच्च न्यायलयों में लंबित मामलों को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं हैं।

गौरतलब है कि पिछले महीने 20 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय ने फेसबुक की ट्रांसफर याचिका पर गूगल, ट्विटर, फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया संस्थानों के अलावा केंद्र सरकार और तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर 13 सितंबर तक जवाब माँगा था। जिसमें जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने मद्रास हाई कोर्ट को मामले पर सुनवाई जारी रखने की अनुमति दे दी थी, लेकिन साथ ही ये भी निर्देश दिया कि वो इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं करेंगे।

इस मामले में फेसबुक और व्हाट्सऐप की ओर से कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने पीठ के समक्ष दलील रखी कि इस फैसले से पूरे राष्ट्र की निजता प्रभावित होगी।

लेकिन, जानकारी के लिए बता दें कि केंद्र पहले से ही इस मामले के की जाँच कर रहा कि यदि व्यक्ति यूट्यूब की प्रतिलिपी बनाता है और व्हाट्सएप संदेश के रूप में भेजता है तो उसका पता लगाना संभव नहीं है, जोकि बहुत बड़ी समस्या है, इसलिए उनका मानना है कि उच्च न्यायालयों के समक्ष सभी लंबित मामले न्यायालय को कोर्ट में ट्रांसफर कर देना चाहिए। जबकि तमिलनाडु की ओर से इसका विरोध हुआ था और कहा गया था कि हाईकोर्ट में इस मामले पर सुनवाई काफ़ी आगे बढ़ चुकी है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के 20 अगस्त के आदेश की वजह से उसने उन याचिकाओं पर सुनवाई टाल दी थी।

वामपंथी प्रदर्शनकारियों ने मचाया उत्पात, ममता बनर्जी की पुलिस को मारे पत्थर

राजनीतिक हिंसा के लिए बदनाम पश्चिम बंगाल में अब वामपंथी संगठन का उत्पात देखने को मिला है।रोजगार एवं अन्य मुद्दे पर राज्य की ममता बनर्जी सरकार को घेरने के लिए वामपंथी संगठन की ओर से प्रदर्शन किया गया। हावड़ा से सचिवालय तक के इस प्रदर्शन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई। वामपंथी प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाते हुए पुलिस पर पत्थरबाजी की।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले और वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। कई लोग जख्मी हो गए। पूरा इलाका घंटो तक हिंसक माहौल की चपेट में रहा। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है।

प्रदर्शन स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) की ओर से आयोजित किया गया था। इसमें लेफ्ट विंग के यूथ और स्टूडेंट संगठनों ने भाग लिया था।

इनका इरादा राज्य के सचिवालय तक मार्च करना था। लेकिन इलाके में धारा 144 लगने से इन्हें प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई। जिसके बाद इन्होंने जबरन वहाँ से रास्ता निकालकर जाने का प्रयास किया। कुछ ने सुरक्षाबल पर ईंट और पत्थर से हमले भी किए। इसके कारण कुछ जवान गंभीर रूप से घायल हो गए।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ पर फिर ABVP का कब्जा, अध्यक्ष समेत 3 सीटें जीती

दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन के चुनाव में आरएसएस से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी ने परचम लहराया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव के पदों पर जीत हासिल हुई है। ABVP की तरफ से अध्यक्ष पद पर अक्षित दहिया जीते हैं। उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के प्रदीप तंवर और जॉइंट सेक्रेटरी पर शिवांगी खरवाल ने कब्ज़ा जमाया है।

दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) को केवल सचिव पद पर सफलता मिल पाई है।

किसे कितने वोट मिले –

  • एबीवीपी की तरफ से अध्यक्ष पद पर अक्षित दहिया को  29,685 वोट मिले।
  • उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार प्रदीप तंवर को 19,858 वोट मिले।
  • एबीवीपी के उम्मीदवार जॉइंट सेक्रेटरी पर शिवांगी खरवाल  को 17,234 वोट मिले।
  • एनएसयूआई को सचिव पद आशीष लांबा को 20,934 वोट मिले।

एबीवीपी ने अध्यक्ष पद पर अग्रसेन कॉलेज के अक्षित दहिया को मैदान में उतारा था, जबकि एनएसयूआई ने महिला कैंडिडेट पर दाँव लगाते हुए चेतना त्यागी को मौका दिया था। वामपंथी संगठन आइसा से दामिनी काइन चुनावी मैदान में थीं, जबकि AIDSO से रोशनी ने चुनाव लड़ा था।

छत्रपति शिवाजी महाराज के वंशज और NCP सांसद उदयनराजे भोसले BJP में होंगे शामिल

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) को एक बड़ा झटका लगने जा रहा है। शनिवार (सितंबर 14, 2019) को एनसीपी के कद्दावर नेता और छत्रपति शिवाजी के वंशज उदयनराजे भोसले बीजेपी का दामन थाम लेंगे। इससे पहले वह लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को संसद की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंपेंगे।

पिछले कई दिनों से अटकलें लगाई जा रही थीं कि सतारा लोकसभा सीट से NCP के सांसद उदयनराजे भोसले पार्टी का साथ छोड़ने वाले हैं। हाल में NCP और कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता बीजेपी में शामिल हुए हैं।

समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, NCP से लोकसभा सांसद और शिवाजी महाराज के वंशज शनिवार को दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने जा रहे हैं। उदयनराजे भोसले बीते दिन NCP अध्यक्ष शरद पवार के आवास पर उनसे मुलाकात करने भी पहुँचे थे।

हालाँकि, NCP की ओर से बताया गया था कि आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चर्चा के लिए दोनों नेताओं ने मुलाकात की है। इस दौरान NCP ने उदयनराजे भोसले के बीजेपी में शामिल होने की बात को खारिज कर दिया था और आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी के लोग जानबूझकर ऐसी अटकलों को हवा दे रहे हैं, ताकि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाया जा सके।

वहीं, महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फड़नवीस ने पिछले महीने कहा था कि अगर भोसले सत्तारूढ़ दल में शामिल होते हैं तो भाजपा को ख़ुशी होगी।

मुहर्रम के कारण ममता की पुलिस ने नहीं दर्ज किया बलात्कार का मामला, SP से लगानी पड़ी गुहार

पश्चिम बंगाल में मंगलवार (सितंबर 10, 2019) को एक महिला का उसके पड़ोसी ने बलात्कार किया। लेकिन, महिला जब अपने पति के साथ पुलिस के पास शिकायत करने पहुँची, तो पुलिस ने उसे ये कहकर वापस भेज दिया कि अभी मुहर्रम चल रहा है। बाद में दंपत्ति को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए एसपी के पास जाना पड़ा।

जानकारी के मुताबिक, महिला का पति एक मंदिर का पुजारी है और वे लोग बंगाल के मिदनापुर के खेजुरी इलाके के निवासी हैं। महिला मंगलवार की सुबह अपने घर से थोड़ी दूरी पर स्थित तालाब में स्नान करने गई थी, जब पड़ोस का एक युवक, जिसका नाम सुदीप्तो है वो उसको सीटी मारके छेड़ने लगा। तो उसने विरोध किया और नहाकर अपने घर वापस आ गई। जिस समय महिला घर पर लौटी तब घर पर कोई नहीं था। वो कपड़े बदल ही रही थी कि तभी सुदीप्तो ने उसपर कहीं से छलांग लगाई।

महिला के मुताबिक, सुदीप्तो ने पहले उसके चेहरे और प्राइवेट पार्ट्स पर चाकू रखकर उसे धमकाया और उसके मुँह में रुमाल भर दिया। बाद में उसे उसकी ही साड़ी से बाँध दिया और फिर उसका रेप किया। बलात्कार करने के बाद सुदीप्तो ने घर से निकलने से पहले उसे फिर धमकाया कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो वो उसे बिजली का करंट देकर मार देगा।

लेकिन, जब महिला का पति घर लौटा, तो उसने अपने साथ हुई सारी घटना के बारे में उसे बताया। पूरा वाकया जानने के बाद पहले तो उन्होंने शर्म से मर जाने की सोची। लेकिन, इस दौरान एक पड़ोस की महिला ने उन्हें बात करते सुन लिया था और जिसने जाकर बाकी गाँव वालों को सब बता दिया। बाद में गाँव वालों के सुझाव पर ही दोनो पति-पत्नी खेजुरी पुलिस थाने शिकायत कराने पहुँचे, जहाँ पुलिस ने मुहर्रम का हवाला देकर मामले में एफआईआर दर्ज करने से ही मना कर दिया। दोनों पति-पत्नी शिकायत दर्ज कराने की गुहार लगाते रहे, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।

इस कारण उन्हें एक वकील से संपर्क करना पड़ा और वकील के सुझाव मुताबिक उन्होंने एसपी से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज करवाई। जिसके बाद पुलिस ने जाँच शुरू की। हालाँकि आरोपित सुदीप्तों अभी फरार चल रहा है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हैं। लेकिन पुलिस ने दंपत्ति द्वारा केस दर्ज न करने के मामले को खारिज कर दिया है और बताया है कि किसी ने भी कोई शिकायत नहीं की थी। यहाँ दंपत्ति और उनका वकील इस बात पर अड़ा हुआ है कि वो थाने गए थे लेकिन पुलिस ने मुहर्रम के कारण शिकायत को लिखा ही नहीं और उन्हें एसपी के पास जाना पड़ा।

भगवा चोगा-रुद्राक्ष की माला में बिशप की तस्वीरों से बवाल, हिन्दुओं को गुमराह करने का आरोप

बेलगाम डायसिस (Belgaum diocese) के बिशप डेरेक फर्नांडीस की वो तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें उन्होंने भगवा वस्त्र पहनकर सिंदूर का टीका लगा रखा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर विवाद का कारण बनती जा रही हैं। दरअसल, डेरेक पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि इस भगवाकरण के जरिए उनका उद्देश्य हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन करवाना है।

इन तस्वीरों में डेरेक के साथ कुछ और भी लोग वैसे ही कपड़ों में नजर आ रहे हैं। कुछ ने रुद्राक्ष की माला भी पहनी है। तस्वीरों से ऐसा संकेत मिला है कि ये परम प्रसाद ग्रहण करने के संस्कार की हैं।

डेरेक को पोप फ्रांसिस ने बेलगावी के छठे बिशप के तौर पर 1 मई को नियुक्त किया था। ये तस्वीरें सामने आने के बाद लोग डेरेक पर हिंदुओं को गुमराह कर के उनका धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा रहे हैं और इस वजह से डेरेक के इस रूप का विरोध किया जा रहा है। कई ईसाइयों ने ट्विटर पर बिशप की ऐसी गतिविधियों को लेकर चेतावनी दी और कुछ ने इसे ईशनिंदा भी करार दिया।

हालाँकि, बेलगाम डायसिस के पदाधिकारी फिलिप कुट्टी ने बताया कि ये तस्वीरें 29 अगस्त को बिशप के दूशनूर की एक चर्च के दौरे पर ली थीं। उन्होंने कहा- “पहले यह चर्च विरक्त मठ था। ईसाई पादरी वहाँ करीब 40 साल पहले गए और भगवा चोगा पहनने की जैसी परंपराओं को अपनाया। यहाँ तक कि जो तंबू बनाया गया था, वह भी शिवलिंग के आकार में था।”

डायसिस के एक पादरी फादर नेल्सन पिंटो के अनुसार, जब सबसे पहले पादरी देशनूर गए तो उन्होंने स्थानीय संस्कृति को अपना लिया। उस इलाके में मुख्यत: लिंगायत समुदाय के लोग रहते थे। पिंटो ने बताया कि पादरी शाकाहारी भी हो गए।

उन्होंने स्पष्टीकरण दिया कि पादरियों ने लोगों का धर्म परिवर्तन करने की कोशिश नहीं की है। आर्कबिशप फिलिप नेरी फराओ ने भी कहा कि यह ऐसी ही परंपरा की तस्वीरें लग रही हैं, जिसमें स्थानीय संस्कृति को अपनाया जाता है।

एक ओर जहाँ चर्च विवाद पर सफाई दे रहा है, वहीं तस्वीरें पोस्ट करने वाले ऐक्टिविस्ट सैवियो रॉड्रिग्ज को धमकियाँ मिल रही हैं। बिशप की ये तस्वीरें ट्वीट करने के कारण रॉड्रिग्ज को एक ट्विटर यूजर Adv Don Vaz ने रॉड्रिग्ज की तस्वीर लगाकर उनका चेहरा काला कर जूतों की माला पहनाने वाले को 50,000 रुपए देने का वादा तक कर दिया।

एक अन्य यूजर ने रॉड्रिग्ज के एक ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा- “हे सेविओ, आप जो कोई भी हैं, कृपया हमारे धर्म के खिलाफ कुछ मत लिखिए। तुम्हें हमारे धर्म के खिलाफ बात करने का कोई अधिकार नहीं है।”

‘प्रेरक’ लगता है RSS के ‘प्रचारक’ जैसा: सोनिया गाँधी के कहने पर कॉन्ग्रेस ने ड्रॉप किया शब्द

कॉन्ग्रेस के पुराने और नए नेताओं के बीच गुरुवार को एक असहमति की खाईं दिखाई दी। दरअसल, हुआ यूँ कि कॉन्ग्रेस की विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने के लिए जिस ट्रेनिंग दल का गठन किया जा रहा है, उसका नाम पहले प्रेरक सुझाया गया था। लेकिन नेताओं की बैठक में कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल ने इस पर सवाल खड़े कर दिए और कहने लगे कि प्रेरक शब्द आरएसएस के प्रचारक शब्द जैसा लगता है। जिसके बाद सोनिया गाँधी ने इसे खारिज कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो राहुल गाँधी के करीबी सचिन राव ने गुरुवार को पार्टी के कार्यकर्ता एवं नेताओं को प्रशिक्षण दिए जाने वाले विशेष दल के नामकरण का जिक्र किया और पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गाँधी की उपस्थिति में चल रही बैठक में ही उन्हें ‘प्रेरक’ शब्द से संबोधित करने की बात कही।

अपने सुझाव के साथ उन्होंने पार्टी की सदस्यता कैंपेन और विचारधारा के विस्तार के संपूर्ण खाके को समझाने का प्रयास किया। लेकिन तभी अहमद पटेल ने इस शब्द पर आपत्ति जाहिर कर दी। उनके बाद पंजाब कॉन्ग्रेस कमेटी के प्रमुख सुनील जाखड़ ने भी समान विचार रखे और फिर सोनिया गाँधी ने भी मान लिया कि ये शब्द आरएसएस के प्रचारक जैसा लगा रहा है। इसलिए इस प्रोग्राम के आइडिया को बरकरार रखा जाएगा, लेकिन शब्द को ड्रॉप कर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कल (सितंबर 12, 2019) खबर आई थी कि आम जनता की नजरों में कॉन्ग्रेस पार्टी की गिरती हुई छवि को सुधारने के लिए पार्टी ने अब अपनी कार्यप्रणाली और विचारधारा के प्रचार के लिए ‘प्रेरक’ रखने का निर्णय लिया है। ये प्रेरक कॉन्ग्रेस के खिलाफ चल रही नकारात्मक ख़बरों के खिलाफ जमीनी स्तर पर पार्टी हित में काम करेंगे।

पाकिस्तानी संसद में जमकर चले लात-घूसे, महिला सांसदों को भी नहीं छोड़ा, लगे ‘गो नियाजी गो’ के नारे

एक ओर पाकिस्तान भारत को परमाणु की धमकी दे रहा है, दूसरी ओर उसके खुद के मुल्क की संसद में नेता आपस में लात-घूसे चला रहे हैं और साथ में इमरान सरकार के ख़िलाफ़ नारे भी लगा रहे हैं। इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। जिसके बाद पाकिस्तानी लोग नेताओं को खूब भला बुरा बोल रहे हैं और उनका मजाक भी उड़ा रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इमरान खान सरकार के एक साल पूरा होने पर बुलाए गए संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के भाषण के दौरान सदन में इमरान खान के ख़िलाफ़ ही नारेबाजी शुरू हो गई। जैसे ही राष्ट्रपति अल्वी ने इमरान सरकार को एक साल पूरा करने पर बधाई दी, कि तभी संसद में हंगामा शुरू हो गया।

विपक्ष के नेता इमरान की विदेश नीतियों पर सवाल उठाने लगे, कश्मीर मामले पर फजीहत होने के लिए इमरान सरकार को कोसने लगे और ‘गो नियाजी गो’ के नारे लगते रहे, यहाँ उल्लेखनीय है कि इमरान खान का नाम इमरान अहमद खान नियाजी हैं। जिसके कारण विपक्षी उनकी तुलना इस नारे के बहाने जेनरल नियाजी से कर रहे थे। वो नियाजी, जिनकी अगुआई में पाकिस्तान को भारत से मुँह की खानी पड़ी थी।

संसद में हुए इस पूरे घटनाक्रम के दौरान वहाँ पर पाक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री इमरान खान और सेनाध्यक्ष बाजवा भी मौजूद थे। लेकिन विपक्ष के नेता लगातार अपनी ऊँची आवाज में इमरान सरकार को आर्थिक, रक्षा और विदेशी मामलों समेत सभी मोर्चों पर फेल बताते रहे।

विपक्षी पार्टियों को नारेबाजी करते देख सत्ताधारी पार्टी पीटीआई के सांसद भी आक्रामक हो गए और वह नारेबाजी कर रहे सांसदों के साथ धक्का-मुक्की करने लगे। इस दौरान महिला सांसद के साथ भी धक्का-मुक्की की बात सामने आई। इसके बाद ये हंगामा थमने की बजाए और भी ज्यादा बढ़ गया। गो नियाजी गो से पाकिस्तानी संसद गूँजती रही, मार्शलों को भी मामला शांत करवाने के लिए बुलवाया गया, लेकिन नेता अपने काबू से बाहर होकर एक दूसरे पर लात-घूसा चलाते रहे।

घर के बाहर भाजपा का झंडा दिखा तो दिन में तारे दिखा दूँगा: कॉन्ग्रेस MLA

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता सुनील केदार ने अपने क्षेत्र के लोगों को भाजपा के झंडे लगाने पर हिंसा की धमकी दी है। केदार का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ ज़ोर पकड़ रहीं हैं।

पार्टी में टूट रोकने का यह है तरीका?

टाइम्स नाउ के मुताबिक केदार ने यह बयान उस समय दिया जब वह नागपुर में अपनी पार्टी के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच पार्टी छोड़ने की भगदड़ रोकने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने अपने क्षेत्र के एक गाँव में कहा, “अगर मैंने भाजपा का झंडा तुम्हारे घर के बाहर देखा, तो दिन में तारे दिखा दूँगा।”

गौरतलब है कि राकांपा-कॉन्ग्रेस गठबंधन से बड़े नेता लगातार भाजपा-शिव सेना गठबंधन की ओर जा रहे हैं। 2019 लोकसभा चुनाव के बाद इस दलबदल की शुरुआत कॉन्ग्रेस नेता और विधानसभा के नेता विपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल से हुई थी। उनके पहले उनके बेटे सुजय को भाजपा के टिकट पर अहमदनगर से सफलता मिल चुकी थी। राधाकृष्ण को जून में पार्टी में शामिल होने के बाद फडणवीस ने राज्य सरकार में काबीना मंत्री बनाया है। उसके बाद जुलाई में 7 बार के MLA कालीदास कोलंबकर ने जुलाई में, और हर्षवर्धन पाटिल ने हाल में कॉन्ग्रेस छोड़कर भगवा पार्टी का दामन थामा है