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कमलनाथ के MP में रिश्वत के बदले अधिकारी को भैंस देने पहुँचा किसान

कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ के मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के सिरौंज में एक किसान कथित तौर पर रिश्वत माँगे जाने से इतना परेशान हुआ कि अपनी भैंस तहसील कार्यालय में नायब तहसीलदार की गाड़ी से जाकर बाँध आया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्राम पथरिया निवासी भूपत रघुवंशी ने आरोप लगाया कि जमीन के बँटवारे को लेकर विगत लगभग 7 माह से वह तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन नायब तहसीलदार द्वारा बँटवारा करने के लिए 25 हजार रूपयों की रिश्वत की माँग की जा रही है।

इसके बाद जब किसान रिश्वत की राशि एकट्ठा करने में सफल नहीं हुआ तो वह अपनी भैंस लेकर तहसील कार्यालय पहुँच गया और रिश्वत के रूपयों के बदले नायब तहसीलदार को भैंस देने की बात कही। हालाँकि, नायाब तहसीलदार ने इसे किसान की पब्लिसिटी के लिए की गई हरकत बताया है।

इस मामले में सिरोंज SDM संजय जैन ने बताया कि अधिकारी पर किसान द्वारा आरोप लगाया गया है जिसको प्रमाणित करने की बात किसान से कही गई। वहीं, दूसरी ओर नायब तहसीलदार, सिद्धार्थ सिंघला ने आरोपों को नकारते हुए बताया कि किसान के बँटवारे का प्रकरण है, जिसके तहत अभी पटवारी द्वारा वारिजों की जानकारी आना बाकी है और प्रकरण की सुनवाई पेशी 18 सितम्बर को होनी है।

इस घटना के बाद किसान ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है और कार्रवाई की माँग की है। फिर वे अपनी भैंस लेकर चले गए।

वीडियो इस लिंक पर देख सकते हैं

https://www.facebook.com/watch/Camera24-Vidisha-103755004305251/

नाबालिग से गैंगरेप के दोषी अजरुद्दीन, बशारत, असरूद्दीन, समसू खान को 20-20 साल कठोर कारावास की सजा

राजस्थान के अलवर जिले के किशनगढ़ बास थाना इलाके में एक 7वीं कक्षा की छात्रा के साथ हुए सामूहिक बलात्कार केस में 4 साल बाद बृहस्पतिवार (सितंबर 12, 2019) को दोषियों को सजा सुनाई गई। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, जिला पॉक्सो संख्या 4 अलका शर्मा की अदालत ने नाबालिक पीड़िता से सामूहिक बलात्कार के 4 आरोपितों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

किशनगढ़ बास थाना क्षेत्र के मुसा खेड़ा गाँव की इस घटना में सातवीं कक्षा में गाँव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली एक नाबालिक बच्ची को आरोपित उसके घर से उठाकर ले गए थे। एक रात बच्ची अपनी दादी के पास सो रही थी, तभी 3 जुलाई 2015 रात्रि को उसे घर से उठाकर ले गए और कार से किशनगढ़ बास में ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

एक बार सामूहिक बलात्कार करने के बाद नाबालिग पीड़िता को धमकाते हुए उसे आरोपित अजरुदीन ने 15 जुलाई 2015 की रात्रि को फिर उसके घर से बुलाया। इस घटना के बाद वह अलवर गई और अलवर से अजमेर चली गई थी। इसके बाद नीमच मध्यप्रदेश चली गई, जहाँ पुलिस वालों ने उसे बैठे देखकर पूछताछ की थी।

इस पूछताछ के बाद बच्ची से यौन हिंसा का पता चलने पर उसके परिजनों और अलवर पुलिस से सम्पर्क किया गया। इसके बाद बच्ची की शिकायत थाने में दर्ज कराई गई थी। बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार करने के मामले में चारों आरोपितों में अजरुद्दीन, बशारत खान, असरूद्दीन और समसू खान को जाँच के बाद कोर्ट ने दोषी माना है।

पॉक्सो कोर्ट (POCSO COURT Alwar) ने जेल के साथ इन चारों रेप के दोषियों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। विशेष आदालत (POCSO) के इस निर्णय के बाद पीड़िता के परिजनों ने देर से ही सही न्याय मिलने पर खुशी जाहिर की है।

बेसबॉल बैट से पिटाई मामले में AAP विधायक सोम दत्त को भेजा गया तिहाड़ जेल

दिल्ली में सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) को विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की एक अदालत ने सदर बाजार से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सोमदत्त को मारपीट के मामले में बृहस्पतिवार को 6 महीने के लिए तिहाड़ जेल भेजा है। सदर विधानसभा से विधायक सोमदत्त की याचिका को खारिज करते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें जेल भेजने का आदेश दे दिया।

यह मामला जनवरी 2015 का है। अदालत ने सोम दत्त को तिहाड़ भेजने के साथ ही मुख्य मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल के उन्हें इस मामले में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ की गई अपील को भी खारिज कर दिया। उन्हें 2015 के इस मारपीट के मामले में पहले 6 महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी।

मजिस्ट्रेट विशाल ने 29 जून को दिए फैसले में सोम दत्त को दोषी ठहराया था और फैसले को चुनौती देने की अनुमति दी थी। शिकायतकर्ता संजीव राणा ने सोमदत्त पर मारपीट का आरोप लगाया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि सोम दत्त गुलाबी बाग स्थित उनके घर में अपने 50-60 समर्थकों के साथ गया और उनके साथ मारपीट की थी।

अभियोजक पक्ष ने आरोप लगाया था कि AAP विधायक ने बेसबॉल से शिकायतकर्ता संजीव राणा के पैर में मारा था। जबकि समर्थक शिकायतकर्ता को घसीटकर सड़क पर लाए थे और उनकी पिटाई की थी। वहीं, सोमदत्त के वकील ने दलील की थी कि सोमदत्त व उनके समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से प्रचार कर रहे थे और शिकायतकर्ता ने ही सोमदत्त के साथ झगड़ा शुरू किया था।

पूरा मामला

पीड़ित संजीव की शिकायत के मुताबिक 10 जनवरी 2015 को वह अपने फ्लैट में थे। तभी 50-60 लोग उनके दरवाजे पर पहुँचकर, घर की घंटी बजाने लगे। जब संजीव ने इसका विरोध किया तो नाराज़ सोमदत्त ने बेसबॉल बल्ले से उनके पैर पर मार दिया। इसके बाद वह उसे खींचकर सड़क पर ले गए और वहाँ उन्हें लात-घूँसों से मारना शुरू कर दिया। इसके बाद पीड़ित के भाई ने पुलिस बुलाई और पीसीआर वैन ही उन्हें हिंदूराव अस्पताल लेकर गई।

सोशल मीडिया के साथ सड़क पर उतरकर संघर्ष करें- सोनिया का कार्यकर्ताओं को आदेश

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी के महासचिवों, राज्यों के प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों के साथ बैठक की। कॉन्ग्रेस मुख्यालय में हुई इस बैठक पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गुलाम नबी आजाद, केसी वेनुगोपाल और एके एंटनी समेत पार्टी के तमाम बड़े नेता शामिल हुए। इस बैठक को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और पार्टी में जरूरी निर्देशों के लिए बुलाया गया था, हालाँकि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष इस पार्टी से नदारद रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मौके पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के साथ ही सड़क पर उतरकर संघर्ष करें और जनता से सीधा संपर्क स्थापित करें।

इस बैठक में सोनिया ने पार्टी के महासचिवों-प्रभारियों, प्रदेश अध्यक्षों, मुख्यमंत्रियों और विधायक दल के नेताओं के समक्ष देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने केंद्र सरकार पर संस्थाओं को कमजोर करने के भी आरोप लगाए।

सोनिया गाँधी ने कहा कि विरोध करने वाले लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने कहा कि हम ऐसे वक्त मिल रहे हैं, जब प्रतिशोध की राजनीति अपने चरम पर है और यह वो समय है जब सत्ता के खिलाफ आवाज उठाने वालों को धमकी दी जा रही है।

‘हमें सड़कों पर उतरना होगा’

सोनिया गाँधी ने कहा- “लोकतंत्र को इतना खतरा कभी नहीं रहा जितना आज है। मैंने कुछ हफ्ते पहले भी कहा था कि सत्ता का बहुत ही खतरनाक ढंग से दुरुपयोग किया जा रहा है। देश उन ताकतों का मुकाबले करने को तैयार है जो महात्मा गाँधी, सरदार पटेल और बीआर अम्बेदकर के संदेशों को गलत तरीके से पेश कर रहा है। हमें इनका मुकाबला करने के लिए सड़कों पर उतरना होगा, गाँव-कस्बों और शहरों में लोगों तक पहुँचना होगा।”

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सिर्फ सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना या इस पर आक्रामक रहने से कुछ नहीं होने वाला है। उसकी अपेक्षा सीधे जनता तक पहुँचना ज्यादा महत्वपूर्ण है। हाल ही में कई कॉन्ग्रेस नेताओं के पार्टी छोड़ने के संदर्भ में सोनिया ने कहा- “लोग समय आने पर अपना रंग दिखा ही देते हैं, यह अवसरवादी चरित्र को दर्शाता है। हम जल्द ही तीन राज्यों में चुनावों का सामना करने जा रहे हैं। हालात चुनौतीपूर्ण हैं और अगर हम सिर्फ पार्टी हित को ऊपर रखें तो फिर से अपनी खोई जमीन वापस पा सकते हैं।”

कॉन्ग्रेस जनता के बीच घट रही अपनी लोकप्रियता के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में, आम जनता की नजरों में कॉन्ग्रेस पार्टी की गिरती हुई छवि को सुधारने के लिए पार्टी ने अब अपनी कार्यप्रणाली और विचारधारा के प्रचार के लिए ‘प्रेरक’ रखने का निर्णय लिया है। ये प्रेरक कॉन्ग्रेस के खिलाफ चल रही नकारात्मक ख़बरों के खिलाफ जमीनी स्तर पर पार्टी हित में काम करेंगे।

ये प्रेरक कार्यकर्ताओं को पार्टी की विचारधारा और इतिहास के बारे में ‘प्रेरित और सूचित’ करेंगे, इसके अलावा उन्हें नियमित आधार पर जनता के साथ जुड़ने के लिए तैयार किया जाएगा।

संकट में है कॉन्ग्रेस

कॉन्ग्रेस इस समय बहुत बड़े संकट की स्थिति से गुजर रही है। हाल ही में अनुच्छेद 370 को लेकर जहाँ राष्ट्रीय स्तर के नेताओं पर आपसी मतभेद उभरकर सामने आए, तो वहीं राज्यों में भी आपस में तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। एक ओर मध्य प्रदेश में सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच टकराव जारी है, तो दूसरी ओर राजस्थान में सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच मनमुटाव भी साफ दिखाई दे रहा है। इस सबके बीच कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी के साथ जा रहे हैं नेताओं ने पार्टी को अलग से सरदर्द दे रखा है।

जैश आतंकी उबेद, जहाँगीर, सबील अहमद हथियारों-विस्फोटकों के साथ कठुआ में गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आज (सितंबर 12, 2019) पंजाब से कश्मीर घाटी की ओर AK-47 और विस्फोटक लेकर आते 3 आतंकियों को कठुआ में गिरफ्तार किया। इलाके के एसएसपी श्रीधर पाटिल ने इस गिरफ्तारी की सूचना देते हुए बताया कि ये तीनों आतंकी जैश-ए मोहम्मद के हैं। इनके पास से 4 AK-56, 2 AK-47, 6 मैग्जीन और 180 लाइव राउंड के साथ 11,000 रुपए नकद बरामद किए गए हैं। जिसके बाद अब पंजाब बॉर्डर पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू के आईजी मुकेश सिंह ने बताया है कि ये गिरफ्तार हुए संदिग्ध आतंकी कश्मीर के रहने वाले हैं। इनकी पहचान पुलवामा निवासी उबेद-उल-इस्लाम, बड़गाम निवासी जहाँगीर अहमद पारे और पुलवामा निवासी सबील अहमद बाबा के रूप में हुई हैं।

जानकारी के अनुसार इन आतंकियों की सूचना पुलिस को सुरक्षाबल द्वारा मिली थी कि हथियारों से भरा ट्रक लेकर ये अमृतसर के रास्ते आ रहे हैं।

इसके बाद ही कठुआ में नाकेबंदी के दौरान ट्रक में रखे सेब के कार्टन से ये हथियार और विस्फोटक चीजें बरामद हुईं और ट्रक में बैठे इन तीनों संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब फिलहाल इनसे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये हथियार इन्हें कहाँ पर पहुँचाने थे और कहाँ से लाए जा रहे थे।

मुहर्रम में तलवारबाजी करते हुए मोहम्मद सयूम ने गलती से काट ली अपनी ही गर्दन, मौत

मुहर्रम के जुलूस के दौरान तलवारबाजी में एक व्यक्ति की मौत की घटना सामने आई है। यह दर्दनाक हादसा बिहार के नालंदा जिले में बुधवार (सितंबर 11, 2019) को मुहर्रम के जुलूस के दौरान हुआ, जब एक व्यक्ति ने तलवारबाजी करते हुए गलती से खुद की गर्दन काट ली और उसकी मौत हो गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार शरीफ में लहेरी थाना क्षेत्र इलाके के सोगरा कॉलेज के पास मोहर्रम के जुलूस में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक जुलूस में शामिल एक 60 वर्षीय मोहम्मद सयूम की तलवारबाजी के दौरान उनकी गर्दन खुद की तलवार से कटने के कारण हो गई। आनन-फानन में उसे जुलूस में शामिल लोगों के द्वारा प्रशासन की वाहन के सहारे सदर अस्पताल लाया गया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

तलवार से गर्दन कटने के कारण 60 वर्षीय वृद्ध मोहम्मद सयूम का खून काफी बह चुका था, जिसके कारण उसकी रास्ते में ही मौत हो गई थी। वहीं इस घटना के संबंध में मृतक सैयद के पुत्र मोहम्मद फिरोज ने बताया कि हर साल की तरह थवई मोहल्ले से मोहर्रम के दिन जुलूस निकलता था और मोहम्मद सयूम भी इसी जुलूस में शामिल थे। इसी जुलूस में मोहम्मद सयूम का पुत्र मोहम्मद फिरोज भी शामिल था, जिसने पूरे वाकये को खुद देखा।

सन्मार्ग न्यूज़ के अनुसार, पूर्व में मोहर्रम और गणेश पूजा को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की गई थी, जिसमें ताजिया जुलूस के दौरान सभी तरह से हथियारों पर पूर्ण रूप से रोक लगाई गई थी। इसके बाबजूद भी तलवारबाजी की गई जिस दौरान ये हादसा हुआ।

इस घटना की सूचना मिलते ही एसपी निलेश कुमार, एसडीएम जनार्दन प्रसाद अग्रवाल, सीओ अरुण कुमार सिंह, थानाध्यक्ष दीपक कुमार ने सदर अस्पताल पहुँचकर मामले की जाँच की। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ और अस्पताल भेज दिया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

74 साल का हूँ, 9 बीमारियाँ हैं… मुझ पर रहम करें: कोर्ट से चिदंबरम ने लगाई गुहार

पूर्व वित्तमंत्री, वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और वकील होने के साथ-साथ भ्रष्टाचार मामलों में आरोपित पी चिदंबरम ने 12 सितंबर को दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी दो याचिकाएँ दाखिल कीं। उनकी एक याचिका जमानत से संबंधी थी जबकि दूसरी याचिका न्यायिक हिरासत के फैसले को खारिज करने के संबंध में दाखिल की गई।

मजेदार बात यह रही कि इनमें से एक याचिका में लगभग-लगभग गिड़गिड़ाने वाली भाषा-शैली का प्रयोग किया गया है। संसद में बैठ कर कल तक जो देश के आम नागरिकों पर लागू होने वाले कानून बनाते थे, आज अपने ही बनाए कानून से बचने के लिए उम्र और बीमारी का बहाना ढूंढ रहे हैं।

वो 9 ‘भयंकर’ बीमारियाँ, जो चिदंबरम को हैं। इनमें से कुछ तो तब से हैं, जब वो मंत्री भी थे। मतलब सही मायनों में चिदंबरम ने खून-पसीने से इस देश की सेवा की है!

वकील रहे पी चिदंबरम का यह मामला भारतीय कानून के इतिहास में संभवत चुनिंदा मामलों में से एक होगा, जहाँ खुद आरोपित ही न्यायिक हिरासत के बजाय संस्थागत हिरासत (CBI/ED) में जाना चाहते हैं। जानकारों की मानें तो तिहाड़ जेल में चिदंबरम को वो सुख-सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं, जो 15 दिनों तक CBI कस्टडी में मिल रही थी। जानकारी के लिए बता दें कि CBI कस्टडी में उन्हें VIP सेल में रखा गया था।

आपको बता दें कि INX मीडिया घोटाले में कोर्ट के आदेश के बाद पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के तिहाड़ जाने के बाद कपिल सिब्बल ने ट्विटर के जरिए सवाल किया था कि अब आखिर हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा?

5 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की कस्टडी में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था और उसी रात ही उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।

भू-माफिया आजम खान पर भैंस के बाद अब बकरी चोरी का हुआ केस, अब तक कुल 82 मामलों में FIR दर्ज

रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद भू-माफिया आजम खान की परेशानी बढ़ती ही जा रही है अब उनके खिलाफ रामपुर में 82वां FIR दर्ज किया गया है। इस बार जिस मामले में FIR दर्ज हुआ है वह आपको हैरत में डाल सकता है। आजम खान पर भैंस चोरी के आरोप तो पहले से ही थे लेकिन इस बार बकरी चोरी के मामले में केस दर्ज हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज़म खान के साथ पूर्व सीओ आलेहसन, शिया बोर्ड अध्यक्ष वसीम रिजवी, ज़फर फारूकी सहित आठ लोगों पर FIR दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है इस केस में 20 से 25 अज्ञात लोग भी आरोपी बनाए गए हैं।

बता दें कि नसीमा खातून की शिकायत पर शहर कोतवाली में FIR दर्ज की गई है। इस FIR में उन्होंने 15 अक्टूबर 2016 को घर में घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ करने, जान से मारने की धमकी देने, सोने के कीमती समान लूटने, गाली गलौच करने, चरस रखने के झूठे मुक़दमे में फँसाने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं।

इतना ही नहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नसीमा खातून ने 4 बकरियाँ, भैंसे, गाय और बछड़ा भी ले जाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने धारा 452, 427, 448, 389, 395, 504, 506, 323 और 120B के तहत मुक़दमा दर्ज कर लिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले आजम खान के हमसफर रिसॉर्ट में एक नलकूप और पानी की टंकी और जौहर यूनिवर्सिटी में तीन नलकूप लगने के मामले में भी FIR दर्ज हुई है, साथ ही उन पर बिजली चोरी के भी आरोप हैं, जिसके तहत कार्रवाई करते हुए उनके हमसफ़र रिसॉर्ट की बिजली काट दी गई थी।

कश्मीर हमारा था, है, और रहेगा, जहाँ भारत है वहाँ हम; NRC भी सही: जमीयत उलेमा-ए-हिंद

पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कि कश्मीर मामले पर भारत के अल्पसंख्यक भारत के खिलाफ़ हैं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने गुरुवार (सितंबर 12,2019) को एक प्रस्ताव पारित किया है। जमीयत के महासचिव महमूद मदनी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि महासभा की बैठक में ये प्रस्ताव पारित हुआ है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, जम्मू-कश्मीर के लोग भी भारतीय ही हैं। वे हमसे किसी प्रकार अलग नहीं हैं।

महमूद मदनी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर ये बात उछालने की कोशिश कर रहा है कि भारतीय मुस्लिम भारत के ख़िलाफ़ हैं। हम पाकिस्तान की इस कोशिश का विरोध करते हैं। भारत के मुस्लिम अपने देश के साथ हैं।

इसके बाद उन्होंने बताया, “हमने आज प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें बताया गया है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। हम अपने देश की सुरक्षा और एकता के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। भारत हमारा देश है और हम इसके साथ खड़े रहेंगे।”

मदनी ने इस दौरान ये भी कहा कि देश में रहते हुए बहुत से मुद्दों पर हमारी असहमति हो सकती हैं, लेकिन जब देश की बात आती है तो हम सब एक हैं।

उनके मुताबिक, “कुछ दुश्मनी ताकतें ये दिखाने की कोशिश कर रही हैं कि देश के मुस्लिम और बाकी लोग अलग-अलग रास्तों में जा रहे हैं। हम ऐसे मनसूबों को खारिज करते हैं।”

इसके अलावा जब जमीयत उलेमा-ए-हिंद की बैठक में उनसे एनआरसी को पूरे देश में लागू करने पर बात पूछी गई को उन्होंने बोला,”मेरी इच्छा होती है मैं इसे सारे मुल्क में करने की माँग करूँ, जिससे पता चल जाएगा कि घुसपैठिए कितने हैं। जो असली हैं, उन पर भी दाग लगाया जाता है, तो पता चल जाएगा। मुझे इससे कोई दिक्कत नहीं है।”

POK के लिए सेना तैयार है, सरकार जब आदेश करेगी हम अपना काम करेंगे – जनरल रावत

मंगलवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के PoK पर दिए गए बयान के बाद सेना प्रमुख बिपिन रावत ने भी PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) मुद्दे पर भारतीय सेना की स्थिति स्पष्ट की है। मंगलवार (सितम्बर 10, 2019) को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बयान दिया था कि मोदी सरकार का अगला एजेंडा पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) को भारत में मिलाना है। इस बयान पर आज सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहा है कि भारतीय सेना हमेशा तैयार है।

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को लेकर सरकार जो आदेश करेगी, सेना उस आदेश के साथ जाएगी। जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारतीय सेना हमेशा तैयार है। सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत से पत्रकारों ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के उस बयान के बारे में सवाल पूछा था जिसमें जितेंद्र सिंह ने कहा था कि सरकार का अगला एजेंडा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना है।

सेना प्रमुख बिपिन रावत ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि इस तरह के मामलों में सरकार कदम उठाती है। भारत सरकार के आदेश पर संस्थाएँ काम करती हैं। उन्होंने कहा कि सेना इसके लिए हमेशा तैयार है।

जितेंद्र सिंह ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के मुद्दे पर हाल ही में बयान दिया था- “यह केवल मेरी या मेरी पार्टी की प्रतिबद्धता नहीं है बल्कि यह 1994 में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा सर्वसम्मति से पारित संकल्प है। यह एक स्वीकार्य रुख है।”

माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को बैकफुट पर डालने के बाद केंद्र सरकार ने PoK के मुद्दे पर भी पाकिस्तान पर दबाव बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।