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बिजली को लेकर मुजफ्फरनगर में दो पक्ष भिड़े, ग्राम प्रधान फजरूद्दीन और उसका बेटा असलान गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के तुल्हेड़ी गाँव में मामूली बात को लेकर दो पक्षों के बीच झड़प में 10 लोग घायल हो गए। ग्राम प्रधान फजरुद्दीन और उसके बेटे असलान को घटना के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने रविवार (सितंबर 8, 2019) को इसकी जानकारी दी।

घटना शनिवार (सितंबर 7, 2019) रात की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच बिजली की आपूर्ति को लेकर झड़प हुई। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने एक खास क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद कर दी थी। जब उस पक्ष के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई तो दोनों पक्षों के बीच झड़प हो गई। झड़प में तकरीबन 10 लोग घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया है।

एसएसपी ने कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रण में किया। उन्होंने बताया कि तनाव को कम करने के लिए गाँव में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

इसके साथ ही मुजफ्फरनगर में ही एक अन्य घटना में पुलिस ने रविवार (सितंबर 8, 2019) दोपहर को छापा मारा और अवैध शराब का निर्माण करने वाली दो कंपनियों को सील कर दिया। पुलिस ने एक सिविल लाइंस में और दूसरा छपार में स्थित शराब की दुकान पर छापा मारा। पहली छापेमारी सिविल लाइंस थाने के अंतर्गत सुजरु चुंगी के पास हुई थी। मुखबिर द्वारा सूचना मिलने के बाद सिविल लाइंस पुलिस की टीम ने परिसर में छापा मारा और अवैध शराब बनाने और बेचने के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार किया।

खबर के मुताबिक, आरोपितों की पहचान नौशाद, बारू, तालिब, इमरान और शहजाद के रूप में हुई। वे हरियाणा से शराब की तस्करी करते थे, इसे पानी और यूरिया के साथ मिलाते थे और महंगे ब्रांड के बोतलों में भरकर बेचते थे। वहीं, दूसरी जगह छपार में छापेमारी के दौरान रामदास और रणवीर को गिरफ्तार किया गया है।

Article 370 के समर्थन में 370 डॉक्टरों ने थामा BJP का दामन, जीतू वघानी ने दिलाई सदस्यता

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने वाले अनुच्छेद 370 को केंद्र सरकार द्वारा निरस्त किए जाने के फैसले के समर्थन में रविवार (सितंबर 8, 2019) को गुजरात में 370 डॉक्टरों ने बीजेपी का दामन थाम लिया। अखिल भारतीय रेडियोलॉजिस्ट एसोसिएशन (एआईआरए) के अध्यक्ष डॉ. हेमंत पटेल, क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. कल्पेश शाह समेत अन्य डॉक्टरों ने गुजरात विश्वविद्यालय के कन्वेंशन हॉल में आयोजित एक समारोह में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष जीतू वघानी की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुए।

जीतू वघानी ने कहा कि 370 डॉक्टरों ने जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करने के सरकार के फैसले के समर्थन में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति ने अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया है।

पार्टी द्वारा जारी किए गए विज्ञप्ति में डॉक्टरों के शामिल होने की जानकारी देते हुए बताया गया है कि इन डॉक्टरों ने भाजपा द्वारा चलाए जा रहे सदस्यता अभियान के तहत अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री हर्षवर्धन ने एक वीडियो संदेश के जरिए इन डॉक्टरों को बधाई दी।

गौरतलब है कि, केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करते हुए राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था। साथ ही जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर दो केंद्र शासित प्रदेश के गठन का ऐलान किया था।

पाकिस्तान ने आतंकी मसूद अजहर को गुपचुप छोड़ा, निशाने पर सियालकोट-जम्मू-राजस्थान का इलाका

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने की बौखलाहट में पाकिस्तान ‘एक बड़े हमले’ की साजिश रच रहा है। सियालकोट-जम्मू-राजस्थान का इलाका उसके निशाने पर है। साजिश को अंजाम देने के लिए उसने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी सरगना मौलाना मसूद अजहर को गुपचुप तरीके से जेल से रिहा कर दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने राजस्थान के पास सीमा पर अतिरिक्त पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती के बारे में सरकार को सचेत किया है। बताया जा रहा है कि आर्टिकल 370 हटाए जाने की भनक नहीं लगने से पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई पर कार्रवाई करने का बहुत ज्यादा दबाव है। यह एजेंसी के इतिहास की सबसे बड़ी विफलता मानी जा रही है।

अधिकारियों के मुताबिक आईबी के इनपुट से जम्मू और राजस्थान सेक्टरों से संबंधित सीमा सुरक्षा बलों और सेना को अवगत करा दिया गया है। उन्हें पाकिस्तान आर्मी और आतंकियों के किसी भी सरप्राइज गतिविधि से अलर्ट रहने को कहा गया है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के ‘किसी भी हद तक जाने की’ धमकियों के बीच यह खबर सामने आई है। 7 सितंबर को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल ने भी बताया था कि करीब 230 आतंकी सीमा पर घुसपैठ की फिराक में हैं। उन्होंने कहा था कि सेना पाकिस्तान के नापाक मंसूबों से कश्मीरियों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है।

आईबी इनपुट के मुताबिक अपने मंसूबों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान ने चुपचाप अजहर को रिहा कर दिया है ताकि वह अन्य आतंकी संगठनों के साथ मिलकर इसे अंजाम दे सके। पुलवामा में 14 फरवरी को आतंकी हमले के बाद उसे हिरासत में लेने की खबरें सामने आई थी। जैश के इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। जवाब में भारत ने 26 फरवरी को पाकिस्तान के बालाकोट में जैश के शिविर को एयरस्ट्राइक से तबाह कर दिया था।

2016 के पठानकोट एयरबेस पर हमले सहित भारत में कई आतंकी हमलों में अजहर वांछित है। वह उन चार आतंकियों में शामिल है जिन्हें चार सितंबर को नए यूएपीए कानून के तहत आतंकी घोषित किया गया है।

पार्ट टाइम मॉडल मैमून अहमद लूट के मामले में साथियों संग गिरफ्तार, फेसबुक से आया शिकंजे में

दिल्ली पुलिस ने पूसा इंस्टिट्यूट के एक ऑफिसर के घर में लूट के वारदात को अंजाम देने के आरोप में मोहम्मद रजी समेत 6 को गिरफ्तार कर लिया है। वेस्ट दिल्ली के डीसीपी दीपक पुरोहित ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान मोहम्मद रजी, कासिम अंसारी, बालकिशन, मैमून अहमद, तसलीम और फरदीन सिद्दिकी उर्फ शम्मी के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, वारदात के मुख्य आरोपित रजी के फेसबुक अकाउंट से पुलिस को अन्य आरोपितों तक पहुँचने में काफी मदद मिली।

घटना शुक्रवार (सितंबर 6, 2019) सुबह की है। अधिकारी के घर में कारपेंटिंग और पुताई का काम चल रहा था। इसी दौरान मोहम्मद रजी और फरदीन मौके का फायदा उठाकर उनके घर में घुस गए। दोनों ने किचन में जाकर अधिकारी की पत्नी से पानी माँगा और फिर अधिकारी की पत्नी और मेड को बंदूक के निशाने पर ले लिया। अधिकारी की पत्नी ने डरकर बिना शोर मचाए घर में रखे डेढ़ लाख रुपए और जूलरी समेत अन्य कीमती चीजें इनके हवाले कर दी। इसके बाद बदमाश फरार हो गए।

घटना के बाद अधिकारी की पत्नी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। डीसीपी के मुताबिक, घर में रंगाई-पुताई और कारपेंटिंग का काम करने वाले लोगों ने ही घर की रेकी कर इन बदमाशों के गैंग को सारी जानकारी दी थी। मोहम्मद रजी जब घर में पानी के बहाने घुसा था, तो उसने अपना चेहरा नहीं ढका था, जिसकी वजह से उसका चेहरा सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया। पुलिस ने इस सीसीटीवी फुटेज और उसके फेसबुक अकाउंट से मिली जानकारियों के आधार पर इन तक पहुँची और गिरफ्तार कर लिया। डीसीपी ने बताया कि इन बदमाशों को मायापुरी सब-डिविजन की एसीपी तन्नु, इसी थाने के एसएचओ मनोज और नारायणा थाने के एसएचओ हरि सिंह की टीम ने गिरफ्तार किया है।

उन्होंने बताया कि बदमाशों के पास से 149 ग्राम सोने की जूलरी और डेढ़ लाख में से एक लाख रुपये बरामद किए गए हैं। साथ ही वारदात में इस्तेमाल बाइक, स्कूटर, पिस्तौल और 5 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। लूट का मुख्य आरोपित मोहम्मद रजी, उस्मानपुर का रहने वाला है। वह एक ऑनलाइन फूड डिलिवरी ऐप बेस्ड कंपनी में फूड डिलिवरी का काम करता है। वहीं, न्यू सीलमपुर निवासी मैमून अहमद एक बॉलीवुड मूवी में काम कर चुका है। वह पार्ट टाइम मॉडलिंग भी करता है। बालकिशन जूलरी शॉप चलाता है और फरदीन का अपना सलून है। मैमून ने लूट की जूलरी बालकिशन को ही बेची थी।

सुसाइड नोट में चिदंबरम को जिम्मेदार बता पूर्व वायुसेना कर्मचारी ने लगाई फॉंसी

उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में रविवार (अगस्त 8, 2019) को आर्थिक तंगी से परेशान चल रहे वायुसेना के पूर्व कर्मचारी बिजन दास ने एक होटल में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। अपने इस कदम के पीछे बिजन ने मंदी और भ्रष्टाचार को वजह बताया है। साथ ही सुसाइड नोट में इन हालातों के लिए पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को दोषी ठहरायाहै।

सुसाइड नोट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने गायक बेटे की मदद करने की भी गुहार लगाई है। साथ ही जिला प्रशासन से गुजारिश की कि उनके शव को उनके परिवार को न सौंपकर प्रयागराज में ही दफना दिया जाए।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

जानकारी के मुताबिक बिजन असम के दरांग जिले के मंगलदाई थाना क्षेत्र के निवासी थे और 6 सितंबर को वह इलाहाबाद आए थे। यहाँ उन्होंने करीब 1:30 बजे प्रयाग होटल में एक कमरा लिया था और तब से वो यहीं थे।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो रविवार की सुबह से ही उनके कमरे में कोई हलचल नहीं थी। सुबह 8 बजे जब सफाईकर्मी उनके कमरे में सफाई करने पहुँचा तो दरवाजा नहीं खुला, उसे लगा बिजन सो रहे हैं, इसलिए वो वापस आ गया। लेकिन जब 10 बजे चाय और 11 बजे नाश्ते के वक्त भी बिजन का दरवाजा नहीं खुला, तो पुलिस को मामले की सूचना दी गई।

करीब 3:30 बजे पुलिस आई तो कमरे को खोला गया, जहाँ बिजन का शव फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने तुरंत इसकी सूचना बिजन के घरवालों को दी और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। फिलहाल मामले की जाँच जारी है।

साभार: आजतक

कमरे की तलाशी के दौरान पुलिस को कमरे से शराब की खाली शीशी, सिगरेट, चिप्स के पैकेट और एक मोबाइल मिला। इसके अलावा टेबल पर पाँच पन्नों का एक सुसाइड नोट भी था। जिसमें खुलासा हुआ कि मृतक अपनी आर्थिक स्थिति से परेशान था। जिसके लिए वह मंदी, भ्रष्टाचार और चिंदंबरम को दोषी मानता है।

साभार:आजतक

अपने सुसाइड नोट में मृतक ने प्रधानमंत्री मोदी से अपने गायक लड़के के लिए मदद की गुहार लगाई है और साथ ही बताया है कि उनका लड़का 2010 में लिटिल चैंप में भी शामिल हो चुका हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह आगे नहीं बढ़ पाया। बिजन ने अपने सुसाइड नोट में दरख्वास्त की है कि उनके शव के पास उनके परिवार या फिर उनके बेटे को न बुलाया जाए, क्योंकि वो नहीं चाहते उनका बेटा उनका शव देखे।

दैनिक जागरण में प्रकाशित बिजन के सुसाइड नोट का हिंदी अनुवाद

सुसाइड नोट में लिखा गया है कि आर्थिक कुप्रबंधन होने पर उसका प्रभाव तात्कालिक नहीं, बल्कि कुछ साल बाद होता है। ऐसे में मोदी सरकार को ही अकेले आर्थिक मंदी के लिए दोषी ठहराना गलत है। नोटबंदी और जीएसटी का अस्थायी प्रभाव रहा होगा, लेकिन इस वजह से आर्थिक मंदी नहीं आई। कोयला, टूजी स्प्रेक्ट्रम समेत कई घोटालों के जरिए करोड़ों रुपये का गोलमाल हुआ। चिदंबरम भ्रष्टाचार के भागीदार हैं। गौरतलब है कि ​पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री चिदंबरम फिलहाल आईएनएक्स मीडिया मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं।

कबूतर से जहर खींचने वाला पाकिस्तान पानी से भी चला चुका है कार

कबूतर के ज़रिए पाकिस्तान में हेपेटाइटिस-बी का “ज़हर खींच कर” इलाज करने के वायरल वीडियो ने एक बार फिर आगा वकार की यादें ताज़ा कर दीं हैं- उस ‘डिबेट’ के साथ ही, जिसमें हम यह सोचने की कोशिश करते हैं कि विभाजन के समय अपने मन-मुताबिक सब कुछ पाने के बाद भी पाकिस्तान आज ऐसा दो कौड़ी का देश के नाम पर मीम क्यों है। 2012 में इस पाकिस्तानी ‘अविष्कारक’ ने ‘वॉटर कार किट’ बनाने की घोषणा की थी, जिससे कार बिना जीवाश्म ईंधन (डीजल-पेट्रोल) के केवल पानी के दम पर चलनी की बात कही थी। उस समय पाकिस्तान या उम्मत ही नहीं, पूरी दुनिया में इसके चर्चे हुए थे। लेकिन बुलबुला अंत में बुलबुला ही निकला।

जापान-अली बाबा की कॉपी निकला ‘मॉडल’

आगा वकार ने दावा किया था कि उसने पानी के अणुओं (मॉलिक्यूल्स) को उनके अवयवों हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणुओं (एटम्स) में तोड़ने का आसान तरीका ईजाद कर लिया है और उसी प्रक्रिया में उत्पन्न ऊर्जा से वह कार दौड़ा सकता है। अभी तक परिदृश्य यह था कि पानी को हाइड्रोजन-ऑक्सीजन में तोड़ने का ‘आसान’ तरीका सारी दुनिया खोज रही थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि पानी को हाइड्रोजन-ऑक्सीजन में तोड़ने पर ऊर्जा तो बहुत ज़्यादा निकलती है, लेकिन इससे अधिक ऊर्जा पानी के अणु को तोड़ने में खप जाती है।

आगा वकार ने इस प्रक्रिया को कम ऊर्जा की खपत में पूरी कर लेने का दावा कर तहलका मचा दिया था। चूँकि उस समय अरब क्रांति और आईएस के उभार के चलते मध्य-पूर्व से तेल की सप्लाई पर शंका के बादल थे, इसलिए दुनिया और ज्यादा उत्साहित हो गई। एक टीवी शो में पाकिस्तान के संघीय मंत्री ने उसकी कार की सवारी भी की। पाकिस्तान को चोरी का परमाणु बम दिलाने वाले अब्दुल कादिर खान ने भी ‘जाँच’ कर के आगा वकार को ‘सर्टिफिकेट’ दे दिया “there is no fraud involved,” का।

और इसी तरह आगा वकार का बुलबुला बड़ा होता गया। आगा वकार के चारों ओर पाकिस्तानी मीडिया भी नाचने लगी। स्थापित वैज्ञानिकों ने कई तरह के सवाल उठाए, लेकिन पाकिस्तान में उनकी कौन सुनता।

अंत में हालाँकि यह बुलबुला फ़ुस्स हो ही गया। इस बुलबुले में छेद करने वालों में खुद पाकिस्तान के ट्रिब्यून अख़बार की वेबसाइट पर छपा एक ब्लॉग था, जिसने आगा वकार के मॉडल और डिज़ाइन में इसके पहले जापान में अविष्कृत एक मिलते-जुलते यंत्र और eBay व Ali Baba पर बिक रहीं किटों में बहुत हद तक समानता देखी। फिर न्यू यॉर्क टाइम्स में छपे एक लेख में आगा वकार की बखिया उधेड़ने के साथ ही पाकिस्तान में थीसिस में नकलचोरी, डॉक्टरेट डिग्री जारी करने में गड़बड़झाले जैसी कई चीज़ें प्रकाश में आईं, जोकि विज्ञानोन्मुख समाज के लिए धब्बा होतीं हैं।

असली वैज्ञानिक को अँधेरे में धकेला, ‘जिहाद’ बना मूलमंत्र

जब हिंदुस्तान-पाकिस्तान आज़ाद हुए, तो पाकिस्तान को ऐसा नहीं है विकास और प्रगति के मौके नहीं मिले, या उनसे संसाधन छीन लिए गए। उन्हें सेना मिली, वैज्ञानिक मिले, संस्थान मिले, अंग्रेजी हुकूमत के हिंदुस्तानी खज़ाने का एक हिस्सा मिला। हिंदुस्तान में हालाँकि उद्योग-धंधे तो थे, लेकिन कच्चा माल देने वाली अधिकांश जगहें पाकिस्तान के हिस्से में गईं; कराची मुंबई की बजाय बेहतर स्थिति में था क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुखतम बंदरगाह बनने के लिए।

लेकिन पाकिस्तान ने इन सब पर कोई ध्यान नहीं दिया। उसके दिमाग में केवल दो चीज़ें रहीं- “हँस के लिया है पाकिस्तान, लड़ के लेंगे हिंदुस्तान” और इसे पूरा करने के लिए एटम बम हथियाने की दाँव-पेंच, सेना के आगे राजतंत्र ही नहीं आम जनता का भी समर्पण, नागरिक विज्ञान की अनदेखी और महंगी सैन्य तकनीकों (जिनका आम आदमी की ज़िंदगी पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना था) का आयात।

परमाणु बम की तकनीक ‘नकलचोरी’ करने वाले अब्दुल कादिर खान को सर पर बिठाने वाले पाकिस्तान में असली वैज्ञानिकों की नाकद्री का अब्दुस सलाम से बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता। जिसने 1979 आते-आते ‘गॉड पार्टिकल’ के विषय पर न केवल विश्व-विख्यात रिसर्च की, बल्कि उसका लोहा मनवाकर नोबेल भी जीत लिया, उन्हें पाकिस्तान ने कभी भाव नहीं दिया। क्यों? क्योंकि वे उस अहमदी समुदाय के थे, जिन्हें कट्टरपंथी ‘सच्चा’ नहीं मानते।

नतीजा यही है कि 2012 में आगा वकार ने पाकिस्तान में 20 घंटे की बिजली कटौती आम होने का फायदा उठाकर उल्लू बनाया, सेना के चुनिंदा अफ़सर हिंदुस्तान से जिहाद का हवाला देकर मूर्ख बना रहे हैं, और जिहादी कठमुल्ला बना आम आदमी यह जानते हुए भी कि उसका c****या कट रहा है, ख़ुशी-ख़ुशी कटवाए जा रहा है।

आजम खान के बहाने दंगा कराने की फिराक में अखिलेश यादव: कॉन्ग्रेस नेता फैसल खान

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सोमवार (सितंबर 9, 2019) को रामपुर जाने के कार्यक्रम का कॉन्ग्रेस ने विरोध किया है। मुकदमों से घिरे रामपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद भू-माफिया आजम खान के बचाव में अखिलेश यादव के आगे आने से कॉन्ग्रेस बेहद नाराज है। अखिलेश यादव के रामपुर जाने से पहले वहाँ पर सपा के कार्यकर्ताओं को जुटाया जा रहा है, जिसकी वजह से कॉन्ग्रेस को रामपुर में दंगा होने की आशंका नजर आ रही है।

कॉन्ग्रेस का मानना है कि अखिलेश यादव के रामपुर जाने से माहौल बिगड़ेगा। कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक सेल के उपाध्यक्ष फैसल खान लाला ने इस बाबत सूबे की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को एक पत्र लिखकर अखिलेश पर दंगा कराने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए उचित कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने आरोप लगया है कि अखिलेश यादव के इस दौरे से रामपुर सहित पूरे प्रदेश का माहौल बिगाड़ने की साजिश है।

फैसल खान ने अपने पत्र में लिखा है कि आजम खान के खिलाफ कई संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज है। उनके खिलाफ कुल 80 मुकदमे दर्ज हैं। आजम खान के खिलाफ ना सिर्फ जमीन का बल्कि लूट, चोरी, डकैती, गैर इरादतन हत्या, भड़काऊ भाषण, हिंसा फैलाना, किसान और बेसहारा लोगों की जमीन पर कब्जा करने जैसे मामले दर्ज हैं। आजम खान के विश्वविद्यालय से पुलिस ने चोरी का सामान भी बरामद किया है और उन्हें भू-माफिया भी घोषित किया है।

फैसल खान ने आगे लिखा है कि इन सब के बाद भी अखिलेश यादव 9 सितंबर को आजम खान का समर्थन करने के लिए रामपुर पहुँच रहे हैं और मोहर्रम के दिन यहाँ का माहौल खराब करना चाहते हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सपा, आजम खान के बहाने पूरे प्रदेश में दंगा कराना चाहती है। ऐसे में अगर अखिलेश यादव रामपुर आते हैं तो वह पीड़ित परिवारों के साथ उनका विरोध करेंगे। फैसल खान का कहना है कि अगर आजम खान सही हैं तो सड़क पर लड़ने की बजाए वह कानून का सहारा लें और कोर्ट में आरोपों का जवाब दें।

बता दें कि, पुलिस ने हाल ही में रामपुर पुलिस ने आजम खान के खिलाफ समन जारी किया था और फिर उनके रामपुर स्थित आवास पर वारंट भी चिपकाया गया है। वहीं, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव आजम खान के पक्ष में खड़े हैं। उनका कहना है कि आजम खान पर गलत तरीके से केस दर्ज किए गए हैं। इसलिए अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव ने आजम खान पर कार्रवाई के खिलाफ अभियान चलाने का ऐलान किया है।

काला धन: स्विस बैंकों से मिलने लगी जानकारी, डर से कई ने खाते किए बंद

स्विस बैंकों में खाता रखने वाले अपने नागरिकों की जानकारी भारत को मिलनी शुरू हो गई है। एक सितंबर से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच बैंकिंग सूचनाओं के स्वतः आदान-प्रदान के समझौते के प्रभावी होने के बाद पहली बार जानकारी उपलब्ध कराई गई है। इन सूचनाओं का विश्लेषण किया जा रहा है। ये जानकारी उन खातों से जुड़ी है जिन्हें कार्रवाई के डर से पहले ही बंद करा दिया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जो जानकारी मिली है उनमें इन खाताधारकों की पहचान तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध होने का अनुमान है। बैंक अधिकारियों के हवाले से बताया है कि स्विट्जरलैंड की सरकार के निर्देश पर वहॉं के बैंकों ने आँकड़े भारत को सौंपे हैं। इसमें हर उस खाते में लेन-देन का पूरा विवरण है जो 2018 में एक भी दिन सक्रिय रहे हैं। इससे काला धन जमा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई में काफी मदद मिल सकती है।

बताया जाता है कि काला धन के खिलाफ मोदी सरकार की मुहिम को देखते हुए बीते कुछ सालों में स्विस बैंकों में काफी संख्या में खाते बंद कर उनमें जमा पैसा निकाले गए हैं। भारतीयों के भी कम से कम 100 ऐसे पुराने खाते हैं जिन्हें 2018 से पहले ही बंद करा दिया गया था। ये खाते वाहन कल-पुर्जा, रसायन, वस्त्र, रीयल एस्टेट, हीरा एवं आभूषण, इस्पात आदि कारोबार से जुड़े लोगों से संबंधित बताए जाते हैं।

गौरतलब है कि लोकसभा में इसी साल जून में वित्त मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 1980 से लेकर साल 2010 के बीच भारतीयों ने 246.48 अरब डॉलर से लेकर 490 अरब डॉलर के बीच काला धन देश के बाहर भेजा था। एनआईपीएफपी, एनसीएईआर और एनआईएफएम के अध्ययन के आधार पर समिति ने यह आकलन किया था।

हिंदी भाषी बहुसंख्यकों के तु्ष्टीकरण से कॉन्ग्रेस जीरो होकर खत्म हो जाएगी: शशि थरूर

हाल में अपने बयानों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ कर के अपनी पार्टी यानी कॉन्ग्रेस के निशाने पर आने वाले शशि थरूर ने रविवार को कॉन्ग्रेस पार्टी को कुछ जरूर राय दी है। शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने कहा कि पार्टी की जिम्मेदारी है कि वह ‘ज़ीरो’ होकर ख़त्म होने से बचने के लिए अपनी धर्मनिरपेक्षता की नीति की रक्षा करे।

शशि थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि कॉन्ग्रेस पार्टी को धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा सोचना कि हिंदी पट्टी में बीजेपी से मुकाबला करने के लिए बहुसंख्यक तुष्टीकरण जरूरी है, गलत है। यदि मतदाता के पास असली चीज और उसकी नकल के बीच किसी एक को चुनने का विकल्प हो, तो वह हर बार असली को ही चुनेगा।

‘बहुसंख्यक तुष्टिकरण से कॉन्ग्रेस हो जाएगी ज़ीरो’

अपनी किताब ‘दि हिंदू वे: एन इंट्रोडक्शन टू हिंदुइज्म’ के लोकार्पण से पहले एक साक्षात्कार में थरूर ने कहा- “हिंदी पट्टी में पार्टी के संकट का समाधान ‘बहुसंख्यक तुष्टीकरण’ में या ‘कोक लाइट’ की तर्ज पर किसी तरह के ‘लाइट हिंदुत्व’ की पेशकश में नहीं है और इस राह पर चलने से ‘कॉन्ग्रेस जीरो’ हो जाएगी।”

उन्होंने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और उसके सहयोगियों द्वारा हिंदू होने का दावा ‘ब्रिटिश फुटबॉल के बदमाश समर्थकों’ की अपनी टीम के प्रति वफादारी से अलग नहीं है।

‘अधिकांश भारतीय रूढ़िवादिता का विरोध करते हैं’

तिरुअनंतपुरम से कॉन्ग्रेस सांसद थरूर ने कहा कि एक सतर्क आशावादी के रूप में वह कहना चाहेंगे कि बड़ी संख्या में ऐसे भारतीय हैं, जो हाल के ‘रूढ़िवादी रुझान’ का विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और वे लगातार यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत को लेकर ‘विकृत विचार’ सफल न हो।

इस बातचीत में थरूर ने दावा किया कि सत्तारूढ़ लोगों द्वारा जो प्रचार किया जा रहा है वह सही मायनों में हिंदुत्व नहीं है, बल्कि वह एक महान मत को ‘विकृत करना’ है, जिसे उन्होंने विशुद्ध राजनीतिक और चुनावी लाभ के लिए एक संकीर्ण राजनीतिक हथियार में बदल दिया है।

‘भाजपा की सफलता से डरने की जरूरत नहीं’

थरूर ने कहा कि भाजपा की सफलता से भयभीत होने के बजाय कॉन्ग्रेस के लिए बेहतर होगा कि वह उन सिद्धांतों के लिए खड़ी हो, जिन पर उसने हमेशा विश्वास किया है और देश को उनके अनुसरण के लिए प्रेरित करे।
उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुत्व की खूबसूरती यह है कि हमारे यहाँ कानून बनाने के लिए न तो कोई पोप होता है और न ही ‘सच्चाई क्या है’ इस पर कोई इमाम फतवा जारी करता है। साथ ही न कोई अकेला पवित्र ग्रंथ होता है।

₹86500 का कटा चालान, ₹70000 देकर छुड़ाई जान: अब तक का सबसे भारी ट्रैफिक जुर्माना

संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट के 1 सितंबर से लागू होने के बाद से नियम तोड़ रहे लोगों पर भारी जुर्माने की खबरें बढ़ती ही जा रही हैं। लेकिन लोगों के लाख नाराज़गी जाहिर करने के बाद भी न ही केंद्र सरकार नियमों में ढिलाई करने के मूड में दिख रही है, न ही (अधिकाँश) राज्य सरकारें नियमों को लागू करने में ढिलाई के। ताज़ातरीन मामला ओडिशा के सम्भलपुर जिले का है, जहाँ एक ट्रक ड्राइवर द्वारा दिया गया जुर्माना नए नियमों के हिसाब से अब तक का सबसे भारी जुर्माना भरने वाला साबित हुआ है।

सोशल मीडिया पर वायरल रसीद के मुताबिक अशोक जाधव ने ₹70,000 का अर्थ-दंड पिछले हफ्ते चुकाया है। पूरा जुर्माना तो ₹86,500 का था, लेकिन 5 घंटों की मनुहार करने के बाद जाधव ने ₹70,000 चुका कर जान बचाई। मामला 3 सितंबर का है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ट्रक पर एक JCB मशीन लदी हुई थी।

₹1 करोड़ कुल जुर्माना वसूल चुका है ओडिशा

ओडिशा में 4 हजार से अधिक चालान कट चुके हैं। यही नहीं, मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नियम लागू होने के पहले चार दिनों में ओडिशा ने करीब ₹1 करोड़ के आस-पास (₹88 लाख) का जुर्माना वसूला है, जो कि पूरे देश में उच्चतम है। इस मामले के पहले भी ओडिशा के भुवनेश्वर में एक ऑटो-चालक पर कई सारे ट्रैफिक नियम (बिना लाइसेंस गाडी चलाने, रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट न होने, इंश्योरेंस सर्टिफिकेट न होने और शराब पी कर गाड़ी चलाने) तोड़ने के लिए ₹47,500 का जुर्माना किया गया था। उस मामले में तो चालक ने यह कहकर चालान भरने से इंकार कर दिया कि उसने एक हफ्ते पहले ही वह ऑटो महज़ ₹26,500 में खरीदा था, और उसके पास इतने भारी जुर्माने के लिए पैसे नहीं हैं।

लोगों की समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने इस बाबत एक कॉल सेंटर स्थापित करने की घोषणा की है। राज्य के वणिज्य और परिवहन सचिव जी श्रीनिवास ने मीडिया को जानकारी दी कि यह कॉल सेंटर कटक के परिवहन आयुक्त के दफ्तर में खुलेगा, और सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक इस पर बात हो सकेगी।