Home Blog Page 5515

पाकिस्तान के वो 6 आविष्कार, जिसने पूरी दुनिया में मचा दी सनसनी, विदेशी मीडिया में भी हुए चर्चे!

परसन्ताप की पराकाष्ठा का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तानियों ने चंद्रयान-2 के 3.84 लाख किलोमीटर के सफर में महज़ आखिरी 2 किलोमीटर की गड़बड़ की खिल्ली उड़ानी शुरू कर दी। ट्विटर पर रॉ एजेंटों की जानकारी बटोरने वाले साइंस और टेक्नॉलजी मंत्री चौधरी फवाद हुसैन इसमें सबसे आगे हैं। ऐसे में “सूप बोले तो बोले, छलनी क्या बोले जिसमें खुद ही बहत्तर छेद” की तर्ज पर पाकिस्तान के खुद के ‘साइंसदानों’ के कारनामों पर एक नज़र डालना ज़रूरी है:

पानी की टार्ज़न कार

स्वघोषित ‘अविष्कारक’ आगा वकार ने 2012 में दावा किया कि उन्होंने पानी से ऊर्जा लेकर चलने वाली कार बना ली है। उनके मुताबिक उस कार की ऊर्जा पानी को हाइड्रोजन-ऑक्सीजन में तोड़ने से उत्पन्न होती थी।

हालाँकि वहाँ की मुट्ठी-भर वैज्ञानिक कौम ने इस दावे की हवा निकाल दी, लेकिन उसी देश की जाहिल जनता ने वकार को सर पर बैठा लिया। टीवी शो होस्ट से लेकर मंत्रियों तक सबने आगा वकार को रातोंरात पाकिस्तान का स्टार बना दिया। चोरी की तकनीक से परमाणु बम बनाने वाले अब्दुल कादीर खान तक ने भी आगा को ‘सर्टिफिकेट’ दिया किसी भी तरह की धांधलेबाजी नहीं करने की!

सूरज-पानी से पेट्रोल

2018 में कमर आगा का रिकॉर्ड तोड़ते हुए एक पाकिस्तानी, वो भी वैज्ञानिक नहीं बल्कि नेता, ने दावा किया कि वह पानी और सौर ऊर्जा से पेट्रोल बना सकता है। डॉ. मुअज़्ज़म निज़ामी ने, जो पाकिस्तान अमन लीग के चेयरमैन हैं, दावा किया कि वह और उनके सहयोगी “पेट्रोल बनाने के नए तरीके के अलावा सोलर रेडिएशंस से चीनी निकालने में भी” सफल हुए हैं। उन्होंने इसके लिए 95 करोड़ पाकिस्तानी रुपयों की माँग की, और उम्मीद जताई कि अगले आम चुनावों के पहले तक वे यह पेट्रॉल जनता को मुहैया करा देंगे।

पाकिस्तानी एजेंसी ने भेजा हबल टेलिस्कोप!!!

पाकिस्तान के साइंस और टेक्नॉलजी मंत्री चौधरी फवाद हुसैन ने दावा किया कि दुनिया की सबसे बड़ी अंतरिक्ष दूरबीनों में से एक हबल टेलिस्कोप को NASA ने नहीं, पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी SUPARCO ने भेजा था। जबकि सच्चाई यह है कि SUPARCO (Space and Upper Atmosphere Research Commission – पाकिस्तान की नेशनल स्पेस एजेंसी) ने अपना पहला सैटेलाइट ही 1990 में भेजा था, 30 साल की जद्दोजहद के बाद, वह भी चीन के तरस खा कर मदद करने पर!

फिदायीन जिहादी भी ‘अविष्कार’?

फवाद ने एक ट्वीट में यह भी कहा था कि पाकिस्तान “सबसे अच्छे” आत्मघाती बम धमाके करने वाले हमलावर पैदा करता है। हालाँकि अब उन्होंने वह ट्वीट डिलीट कर दिया है, लेकिन यह तो एक बार फिर रिकॉर्ड में आ ही गया है कि ये जिहादी कोई धोखे से आए ‘डिफेक्टिव पीस’ नहीं, मुख्य ‘प्रोडक्ट’ हैं जिन्ना की फैक्ट्री के।

हेपेटाइटिस ‘चूसने’ वाले कबूतर

पाकिस्तान के एक आदमी का वीडियो काफी वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक कबूतर का नितम्ब वाला भाग एक कथित हेपेटाइटिस-बी के मरीज की नाभि से सटाते हुए दावा करता है कि कबूतर का नितम्ब हेपेटाइटिस के ‘कीड़े’ को चूस रहा है।

जिन्नातों के साथ भी जिहाद!

पाकिस्तान ने इंसानों से साथ-साथ अब जिन्नातों को भी “मजहबी” और “काफिर” में बाँटना शुरू कर दिया है। यही नहीं, अब धरती के बाद “ऊपरी दुनिया” में भी ‘दार-उल-इस्लाम’ बनाने का शौक इस कदर इनके सिर चढ़ा हुआ है कि “काफिर” जिन्नों को भी जबरन अल्लाह-परस्त जिन्न बनाने के लिए पाकिस्तानी बाकायदा कर्म-कांड करते हैं।

कुणाल कामरा ने शेयर किया ऐसा वीडियो जिसे देखकर लोगों ने कहा- इसके ‘फ्यूज कंडक्टर’ निकाल दिए गए हैं

चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ के चाँद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबंधित घटनाक्रम के मद्देनजर इसरो के वैज्ञानिकों को संबोधित किया। इसके बाद एक बेहद भावुक पल देखने को मिला, जब इसरो अध्यक्ष के सिवन को पीएम मोदी ने गले लगाकर उनका मनोबल बढ़ाया।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है। वीडियो में इसरो वैज्ञानिक के सिवन (ISRO Chief K Sivan) को पीएम मोदी कुछ देर तक गले लगाकर उनकी पीठ थपथपाते नजर आए।

इस वीडियो को शेयर करने वालों में एक विवादित कॉमेडियन कुणाल कामरा भी हैं। कुणाल कामरा ने ANI न्यूज़ एजेंसी द्वारा शेयर किया गया ट्वीट रीट्वीट करते हुए लिखा- “पीएम मोदी ने जो समर्थन और प्रेम इसरो वैज्ञानिकों के प्रति दिखाया है, यही हर अभिभावक को अपने बच्चों के प्रति दिखाना चाहिए, जब वो अपने लक्ष्य से चूक जाते हैं। इस तरह के पल हमें अपने देश से दोबारा प्यार करने पर विवश कर देते हैं।”

कुणाल कामरा के इस ट्वीट के बाद ट्विटर यूजर्स ने MEMEs के जरिए अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दी-

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा कि लगता है एजाज खान के बाद इसके फ्यूज कंडक्टर भी निकाल दिए गए हैं। दरअसल, कुछ समय पहले ही बॉलीवुड कलाकार एजाज खान ने टिक-टॉक पर विवादित वीडियो अपलोड करने को लेकर मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद फेसबुक पर एक वीडियो अपलोड किया था।

इस वीडियो में एजाज भारतीय जनता पार्टी के तारीफों के पुल बाँधते नज़र आए थे। एजाज खान को भड़काऊ वीडियो अपलोड करके साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। लेकिन जब वो जेल से बाहर आए तो उनके सुर ही बदल चुके थे।

कुणाल कामरा को अक्सर पीएम मोदी और सरकार विरोधी घटिया चुटकुलों के नाम पर कॉमेडी करने के लिए जाना जाता है। इसी वजह से अक्सर उनके साथ सड़क पर भी लोगों द्वारा बदसलूकी की कुछ घटनाएँ भी सामने आती रही हैं। यही कारण है कि पीएम मोदी और इसरो (ISRO) की तारीफ करने पर कुणाल कामरा के ट्वीट पर लोग हैरानी व्यक्त कर रहे हैं।

इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस में belly dance: सच में ‘अद्भुत’ है इमरान खान का नया पाकिस्तान

पाकिस्तान द्वारा अज़रबैजान के बाकू में आयोजित इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस के वीडियो वायरल हो रहे हैं और लोग बहुत चाव से देख रहे हैं। इसलिए नहीं कि इमरान खान ने कोई बहुत हैरतअंगेज़ बात कह दी, या पाकिस्तान को खरबों डॉलर की भीख मिल गई हो। बल्कि इसलिए कि लोगों को पाकिस्तान में पैसा लगाने के लिए हर तरीके से मनाने में नाकाम पाकिस्तान अब उन्हें belly dance से लुभाने की कोशिश कर रहा है!

Sarhad Chamber of Commerce ने किया था आयोजन

सरहद चैंबर ऑफ़ कॉमर्स नामक संगठन द्वारा आयोजित इस कॉन्फ्रेंस को लेकर वहाँ की स्तम्भकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता गुल बुखारी ने ट्वीट कर कहा, “जब पाकिस्तान के General Doctrine मुख्य अर्थशास्त्री ने निवेशकों को लुभाने के लिए पाकिस्तान इन्वेस्टमेंट प्रमोशन कॉन्फ्रेंस, अज़रबैजान में बेली डांसरों का इस्तेमाल किया…”

सबसे मज़े की बात यह है कि इस इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस का आयोजन खैबर पख्तूनख्वा के लिए किया गया था, जोकि पाकिस्तान का सबसे ज्यादा दहशतगर्दी और जिहाद से पीड़ित प्रान्त है। यह न केवल तालिबान के गढ़ों में से एक माना जाता है, बल्कि यहाँ कट्टरपंथी इस्लामी कायदों का हवाला देकर महिलाओं को तरह-तरह की बंदिशों में रखते हैं। यानी जैसे कपड़ों में नृत्यांगनाओं (बेली डांसरों) को नचा कर खैबर पख्तूनख्वा के लिए निवेश जुटाने की कोशिश कर रहा है पाकिस्तान, वैसे कपड़ों में वे लड़कियाँ अगर उसी प्रान्त में निकल जाएँ तो कठमुल्ले पहले उनका गैंगरेप कर उन्हें इस ‘हिमाकत’ की आधी सज़ा देंगे, फिर बाकी की सज़ा अल्लाह से लेने के लिए गला रेत कर ऊपर भेज देंगे।

कर्ज में डूबा बदहाल पाकिस्तान

पाकिस्तान पिछले कुछ समय से (अमेरिकी मदद बंद होने के बाद) कटोरा लेकर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के चौराहे पर है, लेकिन कोई खास मदद मिल नहीं रही है। IMF ने $6 अरब का कर्ज देने की घोषणा तो की है, लेकिन इसके बदले IMF की पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में दखलंदाज़ी बेहद बढ़ जाएगी। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात ने उसे महज़ $30 लाख देकर टरका दिया है।

इमरान खान और PM मोदी हैं एक ही माँ के बेटे – कॉन्ग्रेस नेता का विवादित बयान

अनुच्छेद 370 और चंद्रयान-2 के मुद्दे पर पाकिस्तान और उसके मंत्री ही ऐसे नहीं हैं, जो केंद्र में मोदी सरकार के खिलाफ जमकर बयानबाजी कर सरकार को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हों। कॉन्ग्रेस पार्टी भी निरंतर अपने बयानों से सरकार विरोधी माहौल तैयार करने की कोशिश कर रही है। इस बार कॉन्ग्रेस नेता ने पिछले सारे विवादित बयानों की हदें पार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को एक ही माँ का बेटा कह दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस बार पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी करने वाले नेता कर्नाटक कॉन्ग्रेस के नेता रामनाथ राय हैं। कॉन्ग्रेस नेता रामनाथ राय ने पीएम नरेंद्र मोदी की तुलना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से की है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और इमरान खान एक ही माँ के बेटे हैं और दोनों चुनाव जीतने के लिए एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करते हैं। साथ ही, रामनाथ राय ने कहा कि ये दोनों एक ही तरह के नेता हैं।

रामनाथ राय कर्नाटक कॉन्ग्रेस के बड़े नेता हैं। वे मई 23, 2013 से लेकर मई 15, 2018 तक पूर्व CM सिद्धारमैया की सरकार में वन और पर्यावरण मंत्री रह चुके हैं।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामनाथ राय ने कहा- “मोदी और इमरान खान एक ही माँ के बेटे हैं, दोनों चुनाव जीतने के लिए एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करते हैं, दोनों एक ही तरह के नेता हैं।”

कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में कॉन्ग्रेस कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामनाथ राय केंद्र की मोदी सरकार और कर्नाटक की येदियुरप्पा सरकार के खिलाफ जमकर बरसे और कहा कि इस सरकार को कर्नाटक की फिक्र नहीं है।

रामनाथ राय के इस विवादित बयान पर BJP नेता शोभा करंदलाजे ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस का चरित्र एक बार फिर सबके सामने आ गया है।

उन्होंने रामनाथ राय के बयान को ट्वीट करते हुए लिखा है- “कॉन्ग्रेस के लोगों की सोच और संस्कृति एक बार फिर सबके सामने आ गई है। कर्नाटक के पूर्व मंत्री PM मोदी और PM इमरान खान की तुलना करते हैं और कहते हैं कि दोनों एक ही माँ के बेटे हैं। हमारे देश और PM को नीचा दिखाना ही सालों पुरानी इस पार्टी का एक मात्र काम है।”

सही समय पर शादी और अच्छी बीवी हो तो कंप्यूटर में 40 GB स्पेस बच जाता है: पाकिस्तान का मंत्री

पाकिस्‍तान का एक मंत्री है। नाम है – फवाद चौधरी। इमरान खान की सरकार ने उसे विज्ञान और टेक्‍नॉलजी मंत्रालय का भार उठाने को दिया है। लेकिन बेचारे को विषय की समझ भी नहीं है और पाकिस्तान जैसे नान-टिमाटर वाले देश में उसे समझाने लायक कोई ब्यूरोक्रेट भी नहीं है शायद। ऐसे में वो सारा दिन खाली बैठा रहता है और भारत की ओर देख कर ट्वीट करता रहता है।

ट्विटर की दुनिया में घुसा हुआ फवाद चौधरी चंद्रयान-2 पर ट्वीट कर फँस गया। उसे नहीं पता था कि इंटरनेट की दुनिया में उस पर पलटवार भी हो सकता है। और वही हुआ भी। लोग उसकी कुंडली निकाल लाए। वो कितना बड़ा ठरकी (पॉर्न मामलों को लेकर) है, यह तक पता कर लिया।

2012 में फवाद चौधरी ने एक ट्वीट किया था। लिखा था – सही समय पर शादी और अच्छी बीवी हो तो कंप्यूटर में 40 GB स्पेस बच जाता है। स्मार्टफोन के युग में अब यह बताने के लिए किसी को कंप्यूटर साइंस करने की जरुरत नहीं है कि बीवी और शादी के बाद 40 GB का स्पेस कैसे बच जाता है। तो जिस भी लोग तक फवाद का यह ट्वीट पहुँचा, उसने अपने-अपने ढंग से उसे ट्रोल किया। नीचे के ट्वीट देखिए और मजे लीजिए।

ऊपर वाले भाई साहब लिखते हैं – यह पाकिस्तान का विज्ञान और टेक्‍नॉलजी मंत्री है… तभी पाकिस्तानी पॉर्न देखने में नंबर वन पर हैं।

नायला इनायत ने फवाद के इस ट्वीट को स्पेस मिशन से जोड़ दिया।

ये वाले भाई साब अलग लेवल पर ट्रोल किए। इन्होंने इसे पॉर्न संबंधी रोजगार से जोड़ दिया।

इसने तो फवाद के इस ट्वीट को बकरियों की इज्जत से जोड़ दिया।

गाय पर बम बाँधकर सुरक्षा बलों पर हमला कर रहे ISIS आतंकी, अपने तरह की यह पहली घटना

इस्लामिक आतंकवादी संगठन ISIS इराक़ में गायों पर बम-विस्फोटक लादकर हमला और युद्ध के लिए इस्तेमाल कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इराक़ के दियाला नामक जगह पर विस्फोटक से लदी दो गायें मिलिट्री चेक पॉइंट की तरफ बढ़ रही थीं, और चेकिंग के दौरान इस विस्फोटक से धमाका हो गया।

एक रिपोर्ट के अनुसार इस असफल बम धमाके में एक व्यक्ति घायल हुआ। किसी आतंकवादी संगठन द्वारा किसी गाय को बम धमाकों और लड़ाई के लिए इस्तेमाल करने की यह पहली घटना है। हालाँकि किसी जानवर को हथियार बनाकर वह पहले भी इस तरह के आतंकी हमलों को अंजाम दे चुके हैं।

2010 के बाद से इस तरह की 6 अलग-अलग घटनाओं में जिहादियों द्वारा गधों पर IED और विस्फोटक लगाकर हमले किए गए थे जिनमें से एक यमन की घटना भी शामिल है। आतंकवादियों द्वारा सुरक्षा बलों पर हमले के लिए कुत्तों को भी आतंकी हमलों के लिए इस्तेमाल किया जा चुका है।

इराक़ के दियाला प्रांत के स्थानीय अफसर साक़ीद हुसैनी का कहना है कि आतंकी अब नए आत्मघाती बम नहीं जोड़ पा रहे हैं, जिसके कारण वो इस तरह की तरकीबें अपना रहे हैं। दियाला बग़दाद का पड़ोसी प्रांत है। इसमें सांप्रदायिक व जातीय विविधता पायी जाती है इसलिए इस प्रांत को पिछले कुछ वर्षों में आतंकियों के मुख्य ठिकाने रूप में देखा जाता रहा है।

पानी से बनाया पेट्रोल, किसी भी फल से बना डाला चीनी: पाकिस्तान का वैज्ञानिक चमत्कार

पाकिस्तान में टैलेंट की कमी नहीं है। यहाँ के लोगों ने ऐसे-ऐसे आविष्कार किए हैं कि वैज्ञानिक भी इनके सामने हतप्रभ होकर नतमस्तक हो जाएँगे। दिलचस्प बात ये है कि पाकिस्तान के वैज्ञानिक ही नहीं, राजनेता भी वैज्ञानिक का काम करते हैं। यानी कि राजनेता ही वैज्ञानिक और वैज्ञानिक ही राजनेता!

जी हाँ, पाकिस्तान के नौसीखिए वैज्ञानिक और राजनेता मुअज्जम खान नियाजी ने अपने आविष्कार से संपूर्ण विश्व को चौंका दिया। दरअसल, नियाजी ने दावा किया कि उन्होंने एक ऐसा आविष्कार किया है, जिसमें उन्होंने पानी से पेट्रोल बनाने की बात कही है। नियाजी ने कहा कि वो पानी और सौर ऊर्जा से पेट्रोल बनाने में सफल रहे। अब जल्द ही लोगों को मुफ्त में पेट्रोल दिया जाएगा। 

इतना ही नहीं, नियाजी की काबिलियत यहीं तक सीमित नहीं है। वो तो इतने काबिल और सफल ‘वैज्ञानिक’ हैं कि आप उन्हें कोई भी फल दे दो, वो उससे चीनी बना देंगे। उनका कहना है कि वो किसी भी फल से चीनी बना सकते हैं और उनके द्वारा इस विधि से बनाई गई चीनी मधुमेह पीड़ित (diabetic patients) के लिए भी लाभदायक होगा।

नियाजी सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के जरिए लगातार अपने ‘ज्ञान की मोती’ का प्रसार करते हैं। पूरी दुनिया पर पाकिस्तानी हुकूमत का सपना देखने वाले नियाजी का कहना है कि उनकी विधि का उपयोग करने वाले पेट्रोल का उत्पादन करने पर लगभग 950 मिलियन रुपए के प्रारंभिक निवेश का खर्च आएगा।

उन्होंने पूरी आवाम को मुफ्त पेट्रोल प्रदान करने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि अगर उन्हें भरपूर पानी मुहैया कराया जाए तो वह देश भर में मुफ्त पेट्रोल बाँटेंगे और ये उनकी दिली ख्वाहिश है।

पाकिस्तान में इस तरह की बयानबाजी और अधारहीन, बेतुकी बातें करना कोई नई बात नहीं है। इनके देश में ऐसा चलता रहता है। क्योंकि हकीकत में तो नमक-रोटी के लिए भी तरस रहे हैं और कर्ज के लिए अमेरिका के आगे हाथ फैला रहे हैं। इसलिए ये लोग बड़ी-बड़ी बातें करके ही मन बहला लेते हैं। इनकी बातें मुंगेरी लाल के हसीन सपने की तरह होती हैं, जिसका हकीकत से कोई लेना देना नहीं होता है। पाकिस्तान में ऐसे ‘विद्वान वैज्ञानिकों’ की कमी नहीं है।

‘प्लीज़ GDP वाली वीडियो पूरी देखो’ कहने वाले रवीश-भगत जब चलाते हैं PM मोदी की अधूरी क्लिप

सोशल मीडिया ने राजनीति को एक अध्याय और प्रयोग से उठाकर सड़क पर ला पटका है। अब इसका कोई नीयत सिलेबस नहीं है ना ही यह कुछ गिने-चुने लोगों की चर्चा तक सीमित रह गया है। बीते समय के राजनीति के महान चिंतक अगर आज होते तो राजनीति को सोशल ट्रेंड्स का हिस्सा बनता देख जरूर अपने हाथ पीछे खींच लेते।

यह बुरा भी नहीं है कि लोग पिछली लोकसभा चुनाव के बाद से राजनीतिक रूप से खूब सक्रिय हुए हैं। इंटरनेट और तकनीक ने हर व्यक्ति को यह अधिकार उपलब्ध करवाया है कि वह समसामयिकी से सिर्फ प्रभावित ही न हो बल्कि उस पर अपनी राय भी रख सके। लेकिन यह सब बहुत आपा-धापी में हुआ है।

राजनीति में पक्ष और विपक्ष अब आम आदमी का भी व्यक्तिगत मुद्दा बन गया है। यह हास्यास्पद तब हो जाता है जब दूसरे पक्ष को भक्त, मूर्ख और बेहूदा साबित करने वाले खुद किसी दिन उसी विषय को भुनाता हुआ नजर आता है।

देखा जाए तो प्रोपेगेंडा का मुख्य उद्देश्य दूसरे विचार को निर्जीव साबित करना ही होता है। लेकिन इस उद्देश्य की सबसे बड़ी बेईमानी इसमें किसी से भी किसी तरह की शालीनता और राहत की उम्मीद करना होता है। इस खेल में पक्षधर कभी शिकार होते हैं तो कभी शिकारी होते हैं।

हाल ही में NDTV के प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा था। इस वीडियो में एक ही रवीश कुमार एक ही GDP के आँकड़ों पर दो तरह के बयान देते हुए नजर आ रहे थे। इस वीडियो पर लोगों ने रवीश कुमार के लिए अल्ताफ राजा के वो गाने भी याद दिलाए जिसमें पिछले दशक के मशहूर गायक गाते थे- “वो साल दूसरा था, ये साल दूसरा है।” रवीश के इस वीडियो से लोगों के कॉन्सेप्ट जीडीपी पर तो गड़बड़ा गए लेकिन रवीश को लेकर एकदम स्पष्ट होने लगे।

यह सब अपनी आँखों के सामने घटित होता देखकर रवीश-भगत मंडली ने तुरंत अपनी-अपनी पोजीशन ली और सत्यान्वेषी पत्रकार रवीश कुमार का साल 2013 का पूरा वीडियो पोस्ट करने की माँग की। जीडीपी वाले इस वीडियो को बिना डेंगू के इतना वायरल होता देख रवीश-भगत फूट-फूटकर रोए। और आखिर में कुछ सच्चे कर्तव्यनिष्ट सेवक उस पूरे वीडियो को लाकर उसकी समीक्षा करते हुए नजर आने लगे तब जाकर कहीं रवीश-भगत मण्डली की जान में जान आई। हालाँकि यह ‘पूरा वीडियो’ तब भी रवीश की एक ही जीडीपी की दो परिभाषों के बेच तालमेल बैठाने में असफल ही रहा।

समय करवट बदलता है और कुछ दिन बाद चंद्रयान 2 राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है। अब सोशल मीडिया पर हम देखते हैं कि वही आदर्श लिबरल, जो रवीश का पूरा वीडियो किसी भी हाल में ढूँढकर लाना चाहते थे, ताकि ‘आधी सच्चाई’ की जगह ‘पूरी सच्चाई’ सामने लाई जा सके, पीएम मोदी को उनकी इसरो (ISRO) वैज्ञानिकों से मुलाक़ात के वीडियो का एक संस्करण लेकर मैदान में उतरते हैं।

चंद्रयान-2 की लैंडिंग से सम्बंधित कुछ निराशाजनक ख़बरों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसरो वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाने वाला वीडियो लोकप्रिय होने लगा। चंद्रयान-2 की ‘विफलता’ की खबरों से उत्साहित लेफ्ट-लिबरल वर्ग की खुशियाँ ज्यादा देर तक नहीं बनी रह सकीं। इसके बाद शुरू हुआ इस देश के लेफ्ट लिबरल्स का प्रलाप और प्रपंच।

पीएम मोदी द्वारा इसरो वैज्ञानिकों की पीठ थपथपाने और उनका हौंसला बढ़ाने वाले वीडियो की काट के लिए मीडिया गिरोह और उनके अनुयायियों ने इस वीडियो के अलग-अलग चरण सोशल मीडिया पर पूरी सामर्थ्य के साथ पोस्ट करने शुरू कर दिए।

आज मीडिया गिरोह का मुद्दा चंद्रयान से ज्यादा मोदी की छवि को ख़राब करना था। इनके अन्नदाता राहुल गाँधी चुनावों से पहले कुछ इसी तरह की कसम खाते नजर आए थे कि उनकी जिंदगी का मात्र एक ही मकसद है- नरेंद्र मोदी की छवि खराब करना। और सबसे बड़ी बात ये कि यही मीडिया गिरोह अक्सर शिकायत करता नजर आता है कि देश में घटने वाली किसी भी घटना में नरेंद्र मोदी आखिर कैसे सबसे मुख्य चेहरा बन जाते हैं?

इन अलग-अलग वीडियो के जरिए यह साबित करने का प्रयास सोशल मीडिया पर तेजी से किया जा रहा है कि पीएम मोदी कैमरा के सामने वैज्ञानिकों से अलग तरह से बर्ताव करते हैं और कैमरा हटने के बाद दूसरी तरह से। यहाँ पर यही लेफ्ट-लिबरल विचारक वर्ग चाहता है कि मोदी इसरो वैज्ञानिकों को गले लगाएँ और फिर कभी छोड़ें ही नहीं। लेफ्ट-लिबरल विचारक वर्ग यहाँ तक कहते देखा जा रहा है कि आखिर वैज्ञानिक रो कैसे सकता है या फिर भावुक कैसे हो सकता है?

अब विषय पर वापस आकर हमें पता चलता है कि मोदी की छवि को खराब करने की कोशिश करने वाले वही लोग हैं जो रवीश कुमार की जीडीपी वाली क्लिप से परेशान और बदहवास नजर आ रहे थे। ये वही लोग हैं जो ऑड दिवस पर ‘मीडिया की पारदर्शिता’, ‘फेक न्यूज़’ जैसे मुहावरे उछालते हैं और इवन दिवस पर खुद इन्हीं हथकंडों को अपना रहे होते हैं।

चंद्रयान मिशन के ‘फेल’ होने पर वैज्ञानिकों के भावुक होने पर प्रश्न करने वाले लोगों की राय में भावुक होने का अधिकार सिर्फ दैनिक सस्ते इंटरनेट से विज्ञान के ही आविष्कार मोबाइल-इंटरनेट द्वारा देश की हर दूसरी घटना पर अपनी विचारधारा और प्रोपेगेंडा का जहर उगलने वालों तक ही सीमित होना चाहिए।

दरअसल, इन लोगों की कोई विचारधारा नहीं है। इनका मुद्दा पीएम मोदी की छवि से ही घृणा होना बन चुका है। इस घृणा में ये लोग इतने आगे निकल चुके हैं कि अब ये मीडिया गिरोह हर उस आदमी से नफरत करता है जो नरेंद्र मोदी से जुड़ा हुआ है या फिर मोदी का समर्थन करता है। लोगों का यही समूह हर उस संस्थान, व्यक्ति, घटना से नफरत करते हुए नजर आता है जो किसी भी तरह से मोदी के समर्थन में नजर आता है। यह मात्र कहने की बात नहीं बल्कि यही लोग इस तथ्य को खुद साबित करते आए हैं।

इस प्रगतिशील लेफ्ट-लिबरल विचारक वर्ग ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर डिस्कवरी चैनल तक से नफरत जाहिर की है और कारण स्पष्ट है कि किसलिए! इन लोगों ने भारतीय सेना की कर्तव्यनिष्ठा और क्षमता तक पर सवाल करने शुरू किए जब यह पीएम मोदी के साथ खड़े नजर आई। यह वर्ग हर उस मीडिया और विचार से नफरत करता है, जो मोदी को एक अच्छी छवि में दिखाता है।

विरोध को ही अपना स्वर बताने वाला यह पक्ष हमेशा एक समानांतर निंदा में सिमट कर रह गया है और यही वजह है कि यह देशवासियों के निशाने पर आ गया है। बदले में यह वर्ग अपनी कुंठा निकालत हुए उसे ‘ट्रोल’ और ‘भक्त’ होने की गालियाँ देता है। असल में यह प्रगतिशील लेफ्ट-लिबरल वर्ग का कभी भी सकारात्मक विचार था ही नहीं। यह वर्ग मात्र निंदा और घृणा से पैदा हुआ कुंठित लोगों का एक समूह है। अब विचार करने की जरूरत यह है कि आखिर इस वर्ग का यह नकाब कब तक इन्हें सच्चाई से दूर रख पाता है।

हाल ही में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम नरेश और शशि थरूर ने यही बात रखी थी कि हर मामले में नरेंद्र मोदी को खलनायक बना देने वाले लोगों को आत्मचिंतन की जरूरत है। अब ‘पूरी सच्चाई’ माँगने वाले ‘आधी सच्चाई’ शेयर करते हुए जब भी देखे जाएँ तो जरूर स्मरण करें कि क्या ऐसा करने से पहले उन्होंने आत्मचिन्तन किया है? वह यह भी खुद फैसला करें कि कहीं भक्त, ट्रोल और गोदी मीडिया, इन सभी विशेषणों के पहले हकदार वो खुद ही तो नहीं?

नरेंद्र मोदी और इसरो वैज्ञानिकों से मुलाक़ात का वह वीडियो, जिसके जरिए सत्यान्वेषी विचारक अपना ध्येय सिद्ध करते हुए अपनी नंगई का उदहारण पेश करते नजर आ रहे हैं –


गैंगवार में मारा गया बसपा नेता: 10 अपराधी, 40 राउंड फायरिंग, शरीर में धॅंसे 26 बुलेट

अरसे बाद दिल्ली की सड़कों पर गैंगवार देखने को मिला। बदमाशों ने बसपा नेता को गोलियों से भून डाला। एक-एक कर के 26 बुलेट बसपा नेता के शरीर में धँस गए, जिससे उसकी मौत हो गई। इस हत्याकांड में 40 राउंड गोलियाँ चलीं और 200 मीटर की दूरी से फायरिंग की गई। घटना रविवार (सितम्बर 8, 2019) सुबह 11 बजे की है।

मारे गए बसपा नेता का नाम वीरेंदर मान उर्फ़ काले है। पुलिस के मुताबिक़, काले भी बदमाश था और उसके ख़िलाफ़ विभिन्न थानों में क़रीब 14 मामले दर्ज थे। वह 2013 में मायावती की बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर नरेला क्षेत्र से नगरपालिका का चुनाव भी लड़ चुका था। गोलियाँ लगने के बाद उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।

वीरेंदर उर्फ़ काले को मार गिराने की इस वारदात में 10 से अधिक अपराधी शामिल थे। पुलिस का कहना है कि व्यक्तिगत रंजिश के तहत मामले को अंजाम दिया गया है। हत्या करने के बाद सभी अपराधी भाग निकले। पुलिस को भी हमलावरों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खँगाला जा रहा है।

कबूतर का पिछवाड़ा खींच लेता है आपके नाभि से हेपेटायटिस का कीड़ा: पाकिस्तान का वैज्ञानिक चमत्कार

विश्व आज तरक्की के नित नए कीर्तिमान गढ़ने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। आज के युग में प्रत्येक देश विकास की बयार पर सवार होकर नए-नए आयामों को खोजने की राह पर चल रहा है। लेकिन कुछ जगह ऐसी भी है, जहाँ विकास और तरक्की केवल शब्द मात्र ही हैं इससे अधिक और कुछ नहीं। इसकी वजह यह है कि यहाँ का समाज आज भी विकास के इस नए दौर में अपने क़दम रखने में सक्षम नहीं है। आज के तकनीकी युग में एक ऐसा तबका भी मौजूद है, जो अपनी उल-जलूल हरक़तों और क्रूरता से चर्चा का विषय बन जाता है।

ऐसा ही एक देश है पाकिस्तान। अफसोस कि हमारा पड़ोसी है! यहाँ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पठानी कुर्ता-पजामा में एक व्यक्ति लेटा हुआ है और दूसरा व्यक्ति प्रैक्टिकल कर के बता रहा है कि कैसे कबूतर अपने गुदाद्वार का प्रयोग करते हुए उक्त व्यक्ति की नाभि से हेपेटायटिस के कीड़े को खींच लेता है। आश्चर्य की बात यह है कि पाकिस्तान में अभी भी लोग ऐसी अजीबोगरीब चीजों पर भरोसा रखते हैं:

इसमें बीमारी के इलाज के लिए कबूतर का इस्तेमाल किया जाता है और इस इलाज प्रक्रिया में उस बेज़ुबान पक्षी को बेरहमी से गर्दन दबाकर मार दिया जाता है। इस क्रूरता का संबंध पाकिस्तान से है, जहाँ कराची का एक डॉक्टर हेपेटाइटिस-सी बीमारी का इलाज कबूतर के माध्यम से करता है। फ़र्ज़ी इलाज के नाम पर एक तरफ तो वो रोगियों का इलाज करने का ढोंग रचकर उन्हें ठगता है और दूसरी तरफ एक निर्दोष पक्षी की निर्मम हत्या कर देता है।

आपको बता दें कि इलाज के लिए कबूतरों का इस्तेमाल केवल पाकिस्तान में ही नहीं बल्कि येरूशलम और इज़राइल में भी होता है। यहाँ हेपेटाइटिस के इलाज के लिए यह एक पारम्परिक तरीका है। इज़राइल में जब हेपेटाइटस का प्रकोप था तब उसके इलाज के लिए इसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, जिसके बाद रोगी की हालत में सुधार हो जाता था। हालाँकि, इस इलाज से ठीक होने का कोई वैज्ञानिक पहलू नहीं है, न ही कहीं पर इसे वैज्ञानिक या चिकित्सक समुदाय द्वारा मान्यता मिली है।

https://youtu.be/gD2L6Rg4T-8
पाकिस्तान में कबूतरों के गुदाद्वार से बीमारी का इलाज

आज के समय में इलाज की कई तकनीकें विकसित हो चुकी हैं लेकिन इलाज की इस तरह की वाहियात और मूर्खतापूर्ण तकनीक पर प्रश्नचिह्न लगना या लगाना स्वाभाविक ही है। बड़े आश्चर्य की बात है कि आज के दौर में भी इस तरह के तरीकों का चलन अस्तित्व में है। अब इसे अज्ञानता न कहें तो भला और क्या कहें, जहाँ दुनिया तरक्की के नए रास्तों का रुख़ कर रही है वहाँ इस तरह के परम्परागत तरीके सोचने पर मजबूर करते हैं कि समाज का यह तबका बौद्धिक स्तर पर कब परिपक्व होगा?

शायद कभी नहीं। या सदियों बाद। क्योंकि इस देश का विज्ञान और टेक्‍नॉलजी मंत्री का नाम फवाद चौधरी है। यह बताना इसलिए जरूरी है क्योंकि जिस देश का विज्ञान और टेक्‍नॉलजी मंत्री ही यह कहता हो कि “हम दुनिया के बेस्ट सुसाइड बम बनाते हैं”, उस देश में वैज्ञानिक तरक्की किस आधार पर होगी, यह सोचना ही दुखद है… क्योंकि यह देश हमारा पड़ोसी है।