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जब बल्ले से छक्का मार सकता हूँ तो तलवार से इंसान क्यों नहीं मार सकता: दाऊद का समधी जावेद मियांदाद

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान के नेता और सेना ही बौखलाए हुए नहीं है। कुछ खिलाड़ी भी हिले हुए हैं। इनमें डॉन दाऊद इब्राहिम के समधी पूर्व क्रिकेटर जावेद मियांदाद का नाम महत्वपूर्ण है। पूर्व में भारत पर हमले को लेकर बड़बोलापन दिखा चुके मियांदाद अब हाथ में तलवार लेकर लहराते नजर आए हैं।

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो में वे कहते नजर आ रहे हैं- जब बल्ले से छक्का मार सकता हूॅं तो इससे इंसान क्यों नहीं मार सकता। वे कह रहे हैं, “कश्मीरी भाइयों फ़िक्र ना करो, हम आपके साथ हैं। मेरे पास बल्ला भी है छक्का मारा था अब ये (तलवार) चलेगा। जब बल्ले से छक्का मार सकता हूँ तो इससे (तलवार) से इंसान क्यों नहीं मार सकता।” यह वीडियो कश्मीर को लेकर पाकिस्तान में हुए हालिया प्रदर्शन का बताया जा रहा है।

पिछले दिनों मियांदाद और एक अन्य क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने एलओसी का दौरा करने की बात कही थी। अपने प्रधानमंत्री इमरान खान के प्रोपगेंडा का समर्थन करते हुए मियांदाद ने ट्विटर पर वीडियो शेयर कर कहा था, “हम वहॉं जाएँगे और शांति के लिए प्रार्थना करेंगे।”

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के हाथों कूटनीतिक हार झेल चुका पाकिस्तान पूरी तरह से बौखला गया है और परमाणु युद्ध की धमकी भी दे रहा है। पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे पर विश्व से मदद की गुहार लगाई और संयुक्त राष्ट्र से भी संपर्क किया। लेकिन पाकिस्तान को मुँह की खाना पड़ी। सभी ने इस मुद्दे को द्विपक्षीय करार देते हुए टिप्पणी से इनकार कर दिया। G-7 समिट के दौरान पीएम मोदी ने ट्रंप के सामने ही साफ कर दिया कि कश्मीर का मुद्दा भारत-पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है और इसमें वो किसी तीसरे देश का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे।

सेक्स वर्कर ने निक़ाह से किया इनकार, अयूब ख़ान ने 5 टुकड़े कर नहर में फेंका

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 20 अगस्त को हुई सेक्स वर्कर की हत्या की गुत्थी सुलझा ली है। इस मामले में पुलिस ने 32 वर्षीय मोहम्मद अयबू ख़ान को गिरफ्तार किया है। अयूब ने सेक्स वर्कर को निकाह का प्रस्ताव दिया था। प्रस्ताव ठुकराए जाने पर उसने हत्या कर दी। अयबू पहले से शादीशुदा है। उसका 2008 में रेशमा से निकाह हुआ था और उसके तीन बच्चे हैं।

ख़बर के अनुसार, सेक्स वर्कर से अयूब की मुलाक़ात जीबी रोड पर चार साल पहले हुई थी। समय बीतने के साथ-साथ अयूब और महिला के बीच मुलाक़ातों ने प्यार का रूप ले लिया। इसके बाद अयूब ने उस महिला से सेक्स वर्कर का पेशा छोड़ निक़ाह करने को कहा। महिला यह बात जानती थी कि वो पहले से शादीशुदा है इसलिए उसने इनकार कर दिया। इस बात से वो काफ़ी नाराज़ हुआ और उसके मन में बदले की भावना ने घर कर लिया।

20 अगस्त 2019 को अयूब ने सेक्स वर्कर को उसके साथ शाम को घूमने के लिए राज़ी कर लिया। बवाना नहर के पास पहुँचते ही मौक़ा पाकर उसने महिला का गला घोंट दिया। फिर अयूब ने उसके शरीर के पाँच टुकड़े कर नहर में फ़ेंक दिए।

हत्या के अगले दिन महिला की लाश बवाना नहर से बरामद की गई थी। 30 अगस्त को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम ने एक मुखबिर की सूचना के आधार पर अयूब को गिरफ़्तार किया। साथ ही हत्या के दौरान वो जिस स्कूटी से महिला से मिलने पहुँचा था, उसे भी बरामद कर लिया गया।

केरल के राज्यपाल बने आरिफ मोहम्मद खान: शाहबानो मामले में राजीव गॉंधी की सरकार से दिया था इस्तीफा

पूर्व केंद्रीय मंत्री आरिफ मोहम्मद खान केरल के नए राज्यपाल होंगे। तीन तलाक को गैर कानूनी बनाने वाले बिल सहित कई मसलों पर वे हाल में केंद्र की मोदी सरकार के फैसले का समर्थन कर चुके हैं। 1986 में शाहबानो मामले में राजीव गॉंधी और कांग्रेस के स्टैंड से नाराज होकर खान ने पार्टी और केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। इस मामले में राजीव गॉंधी की सरकार ने मुस्लिम नेताओं के दबाव में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कानून संसद से पास करवाया था।

खान के अलावा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन और नए राज्यपाल नियुक्त किए हैं। राष्ट्रपति भवन की ओर से रविवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार डॉ. टी सुंदरराजन तेलंगाना की राज्यपाल बनाई गईं हैं। तमिलनाडु भाजपा की कमान उन्हीं के हाथों में है। बंडारू दत्तात्रेय हिमाचल प्रदेश और भगत सिंह कोशियारी महाराष्ट्र के गवर्नर बनाए गए हैं। इनके अलावा हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र का तबादला कर उन्हें राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

प्रगतिशील मुस्लिम चेहरे के तौर पर पहचान रखने वाले आरिफ़ मोहम्मद ख़ान 1951 में उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में पैदा हुए। उनका परिवार बाराबस्ती से ताल्लुक रखता है। बुलंदशहर ज़िले में 12 गाँवों को मिलाकर बने इस इलाक़े में शुरुआती जीवन बिताने के बाद ख़ान ने दिल्ली के जामिया मिलिया स्कूल से पढ़ाई की। उसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और लखनऊ के शिया कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की।

ख़ान छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़ गए थे। भारतीय क्रांति दल नाम की स्थानीय पार्टी के टिकट पर पहली बार उन्होंने बुलंदशहर की सियाना सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इसके बाद 26 साल की उम्र में 1977 में वो पहली बार विधायक चुने गए।

1980 में कानपुर और 1984 में बहराइच से लोकसभा चुनाव जीतकर वो सांसद बने। राजीव गाँधी की सरकार में मंत्री बने। शाहबानो के पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की आरिफ़ मोहम्मद ने ज़बरदस्त पैरवी की थी और 23 अगस्त 1985 को लोकसभा में दिया गया उनका भाषण आज भी याद किया जाता है।

कॉन्ग्रेस से दो बार, जनता दल और बसपा से से एक-एक बार लोकसभा सदस्य रह चुके आरिफ़ मोहम्मद ख़ान 2004 में भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा के टिकट पर कैसरगंज सीट से चुनाव लड़ा लेकिन वो हार गए। 2007 में उन्होंने भाजपा भी छोड़ दिया। उन्होंने वंदे मातरम का उर्दू में अनुवाद भी किया है। 

असम के बाद दिल्ली-मुंबई में NRC की माँग, अवैध प्रवासियों को बाहर करने के लिए NDA नेता लामबंद

असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) की कवायद से 19 लाख से अधिक अवैध अप्रवासी चिह्नित होने के बाद देश भर के कई हिस्सों में अपने-अपने यहाँ NRC लागू किए जाने की माँग ज़ोर पकड़ने लगी है। माँग उठाने वालों में इस समय सबसे बड़ा नाम केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी और केंद्रीय मंत्री व शिवसेना नेता अरविन्द सावंत का है। दोनों ने अपने-अपने प्रदेश में NRC लागू कर अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों को बाहर निकालने की माँग की है।

“हमने असम में समर्थन किया, अब मुंबई में होना चाहिए”

केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री अरविन्द सावंत ने असम की NRC कवायद की तारीफ़ करते हुए संवाददाताओं से कहा, “NRC की असम में बहुत ज़्यादा ज़रूरत थीा। वहाँ के मूल निवासियों की समस्या का समाधान के लिए यह आवश्यक था। इसलिए हमने सरकार के NRC कदम का समर्थन किया। अब हम ऐसी ही कवायद मुंबई में चाहते हैं, ताकि यहाँ रह रहे बांग्लादेशियों को बाहर किया जा सके।”

उन्होंने मुंबई में NRC को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी अहम बताया। उन्होंने कहा, “NRC से असम में पता चलेगा कि बांग्लादेश के कितने लोग यहाँ अवैध रूप से रह रहे हैं। इसे यहाँ (मुंबई में) करना बहुत ज़रूरी है।”

“बांग्लादेशियों-रोहिंग्यों के चलते हालात खतरनाक”

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने दिल्ली में NRC की माँग को दोहराते हुए इसके लिए जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की बात की है। उनके अनुसार आपराधिक गतिविधियों में शामिल बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं समेत अवैध अप्रवासियों की बड़ी संख्या के चलते शहर की स्थिति खतरनाक है। उन्होंने इस मुद्दे पर शाह के पूर्ववर्ती गृह मंत्री राजनाथ सिंह को भी पत्र लिखकर दिल्ली में NRC कराए जाने की माँग की थी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “यह एक बहुत ही अनिश्चित स्थिति है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। मैं जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर उनसे अनुरोध करूंगा कि राष्ट्रीय राजधानी में भी एनआरसी तैयार कराई जाए।”

मनोज तिवारी ने दावा किया कि दिल्ली में रहने वाले समुदाय विशेष के लोग भी NRC के पक्ष में हैं, क्योंकि “अवैध अप्रवासियों की आपराधिक गतिविधियों की वजह से उनके समुदाय की छवि खराब हुई है।” उन्होंने साथ ही दावा किया कि दिल्ली में अवैध प्रवासी स्थानीय लोगों को उनके अधिकारों और अवसरों से वंचित कर रहे हैं।

वेश्यावृत्ति करने को नहीं मानी फातिमा तो शौहर जलील शेख ने कर दी हत्या, कंबल में लपेट शव ‘बारात घर’ के पास फेंका

27 वर्षीय जलील शेख ने वेश्यावृत्ति में शामिल होने से इनकार करने पर अपनी पत्नी फातिमा सरदार की हत्या कर दी। इस घटना के लगभग तीन सप्ताह बाद, दिल्ली पुलिस ने शनिवार  (अगस्त 31, 2019) को बताया कि आरोपित जलील शेख को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार कर लिया गया है।

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पुलिस उपायुक्त देवेंद्र आर्य ने कहा कि जलील शेख अपनी पत्नी फातिमा को वेश्यावृत्ति के लिए मजबूर कर रहा था। उसके लगातार मना करने पर जलील ने उसे 5 अगस्त को मार डाला। फिर शव को कंबल में लपेट प्लास्टिक की थैली में भरकर सागरपुर में एक ‘बारात घर’ के पास फेंक दिया। इसके बाद वो पश्चिम बंगाल भाग गया।

जानकारी के मुताबिक, जलील शेख ने फातिमा से 2014 में शादी की थी। वो जलील की दूसरी बीबी थी। पिछले सात-आठ महीनों से दोनों दिल्ली के पश्चिम सागरपुर में किराए के मकान में रह रहे थे। जलील की पहली पत्नी बंगाल में रहती है।

पुलिस ने बताया कि फातिमा की हत्या के एक दिन बाद शव को 6 अगस्त को सागरपुर से बरामद किया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उसकी तस्वीर के जरिए आरोपितों का पता लगाने का प्रयास करने लगी। 17 अगस्त को पुलिस को पश्चिम बंगाल से फोन आया। फोन करने वाले ने फातिमा को अपना रिश्तेदार बताया। फोन करने वाले ने फातिमा की पहचान के सत्यापन के लिए उसके बारे में और भी अन्य जानकारी प्रदान किए। उसने बताया कि फातिमा अपने पति जलील के साथ पश्चिम सागरपुर में रहती थी।

डीसीपी आर्य ने बताया कि प्राप्त इनपुट के आधार पर दिल्ली पुलिस ने बुधवार (अगस्त 28, 2019) को जलील को कोलकाता के एक रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया, जहाँ वह मोटरसाइकिल बेचने आया था। उसका आपराधिक अतीत रहा है। मानव तस्करी के मामले में पश्चिम बंगाल में वह पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। पोस्टमार्टम परीक्षण के बाद फातिमा का शव उसके पिता और चाचा को सौंप दिया गया।

गैर मुस्लिम कर रहे PAK की जासूसी, ISI से पैसा ले रहे बीजेपी के लोग: भगवा आतंकवाद के पुरोधा दिग्विजय सिंह

भगवा आतंकवाद की थ्योरी गढ़ने वालों में शुमार रहे कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने फिर से विवादित बयान दिया है। उन्होंने पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने वाले लोगों की गिरफ्तारी को भी धर्म से जोड़ दिया है। दिग्विजय ने कहा है कि पाकिस्तान के लिए जासूसी करते पकड़े गए लोग बीजेपी और बजरंग दल से जुड़े हैं।

मध्यप्रदेश के भिंड में भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ISI के लिए जासूसी मुस्लिम कम और गैर मुस्लिम ज्यादा कर रहे हैं। उनके मुताबिक पाकिस्तान के लिए जासूसी करते पाए गए लोग भारतीय जनता पार्टी और बजरंग दल के हैं। जो आईएसआई से भारत की जासूसी के लिए पैसे ले रहे हैं।

महाराणा प्रताप की 22 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण करने हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने ये बातें कही। उन्होंने कहा, “हमारी विचारधारा की लड़ाई बीजेपी और राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ से है जिन्‍होंने आजाद भारत के संघर्ष में कहीं भाग नहीं लिया और हमें राष्‍ट्रीयता का सबक सीखाना चाहते हैं। 1947 से पहले ये लोग कहां थे? जब इंदिरा ने पाकिस्‍तान के दो टुकड़े कर दिए, तब ये लोग कहां थे? इसलिए हमको सबक देने की जरूरत नहीं है।”

दिग्विजय सिंह ने कहा, “जितने भी पाकिसतान के लिए जासूसी करते पाए गए हैं, वे लोग बजरंग दल, बीजेपी और आईएसआई से पैसा ले रहे हैं। आईएसआई के लिए जासूसी मुस्लिम कम कर रहे हैं और गैर मुस्लिम ज्‍यादा कर रहे हैं। इसको भी समझ लीजिए।”

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मौक़े पर कश्मीर मुद्दे पर भी बयानबाजी की। उन्होंने कि अभी कश्मीर में स्थिति और बिगड़ेगी। उनके मुताबिक जो लोग कश्मीर के साथ हैं, उन्हें नजरबंद किया गया है। हवालात भेज दिया गया है। ऐसे में कश्मीरियों की पैरवी कौन करेगा।

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह पहले भी इस तरह के बयान देते रहे हैं। बीते साल उन्होंने कहा था कि जितने भी हिंदू आतंकी पकड़े गए हैं वे आरएसएस से जुड़े हैं। उन्होंने कहा था कि हिंदू आतंकवादी संघ से आते हैं, क्योंकि संघ की विचारधारा नफरत फैलाने वाली है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में जिन नेताओं ने बढ़-चढ़कर भगवा आतंकवाद की थ्योरी को हवा दी थी उनमें भी दिग्विजय प्रमुख थे।

महाराष्ट्र: आवास घोटाले में NCP के पूर्व मंत्री गुलाबराव देवकर को 5 साल जेल, 47 अन्य को भी सजा

महाराष्ट्र के धुले जिले की सत्र अदालत ने शनिवार (अगस्त 31, 2019) को ‘घरकुल’ आवास घोटाले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्रियों सुरेश जैन और गुलाबराव देवकर को दोषी ठहराया। अदालत ने सुरेश जैन को 7 साल और एनसीपी नेता गुलाबराव देवकर को 5 साल जेल की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश सृष्टि नीलकंठ ने 29 करोड़ रुपए के आवासीय परियोजना घोटाले के मामले में सुरेश जैन को 7 साल की सजा सुनाने के साथ ही उन पर 100 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, गुलाबराव देवकर को 5 साल की जेल की सजा के साथ ही 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। मामले में 46 अन्य आरोपितों को 3 से 7 साल तक की सजा सुनाई गई है।

फैसला सुनाने के तुरंत बाद अदालत में मौजूद सभी 48 आरोपितों को हिरासत में ले लिया गया। अन्य दोषियों में दो बिल्डरों, जलगाँव नगरपालिका परिषद (जेएमसी) के एक मुख्य अधिकारी, नौ पूर्व परिषद अध्यक्ष, 3 महापौर और एक मौजूदा विधायक शामिल हैं। सभी आरोपितों को जलगाँव पुलिस ने हिरासत में लिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

अदालत ने जेएमसी के पूर्व मेयर प्रदीप रायसोनी को 7 साल की जेल की सजा सुनाई और 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। जेएमसी के मुख्य अधिकारी पीडी काले और विधायक चंद्रकांत सोनवणे को 5 साल की जेल और 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। बिल्डरों को 7 साल की जेल और 40 करोड़ रुपए के जुर्माना की सजा सुनाई गई।

गौरतलब है कि, यह घोटाला 1999 का है, जब JMC ने जलगाँव शहर में झुग्गियों में रहने वालों के लिए 11,424 सस्ते घर बनाने का टेंडर निकाला था। एनसीपी नेता देवकर को मई 2012 में गिरफ्तार किया गया था। जमानत मिलने से पहले वह तीन साल जेल में रह चुके हैं। वह 1995 से 2000 के बीच जलगाँव नगर परिषद में पार्षद थे। उन पर एक बिल्डर का पक्ष लेने और 29 करोड़ रुपए की अनियमितता में लिप्त होने का आरोप लगाया गया था।

वहीं, सुरेश जैन को मार्च 2013 में गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट से जमानत मिलने से पहले वह एक साल के अधिक समय जेल में काट चुके हैं। जैन ने खंडेश बिल्डर्स का पक्ष लिया था, जिन्हें घरकुल योजना के ठेका दिया गया था। जलगाँव के पूर्व नगर आयुक्त प्रवीण गेडाम ने फरवरी 2006 में इस संबंध में शिकायत दर्ज की थी। जलगाँव के बाहरी इलाके में बनाए जाने वाले 5,000 घरों में से केवल 1,500 घरों का ही निर्माण पूरा हो पाया था। 

आज से स्विस बैंक अकाउंट नहीं रहे गोपनीय, काले धन का मिलेगा कच्चा-चिट्ठा

काला धन के खिलाफ लड़ाई में मोदी सरकार को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। 1 सितंबर से स्विस बैंक अकाउंट की गोपनीयता का दौर खत्म हो जाएगा। भारत और स्विट्जरलैंड के बीच बैंकिंग सूचनाओं के स्वतः आदान-प्रदान के समझौते के प्रभावी होने के साथ स्विस बैंकों में खाते रखने वाले भारतीयों का नाम सामने आने की उम्मीद है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कालेधन के खिलाफ लड़ाई में इसे काफी महत्वपूर्ण कदम बताया है। सीबीडीटी ने एक बयान में कहा है, “स्विट्जरलैंड में भारतीयों के सभी वित्तीय खातों के संबंध में भारत को वर्ष 2018 की सूचनाएँ मिल जाएँगी। इसमें 2018 के दौरान बंद किए गए खातों की भी जानकारी शामिल होगी।” इसमें बड़ी-बड़ी ‘मछलियों’ की काली कमाई का खुलासा होने की उम्मीद है।

ऑटोमैटिक आदान-प्रदान शुरू होगा

दोनों देशों के बीच का यह आदान-प्रदान automatic exchange of financial account information (AEOI) के तहत होगा। समझौते के अमल में आने से पहले 29 और 30 अगस्त के बीच स्विट्जरलैंड के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजस्व सचिव एबी पांडे, सीबीडीटी चेयरमैन पीसी मोड्य और सीबीडीटी सदस्य (विधायी) अखिलेश रंजन से मुलाकात की थी। स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय वित्त मामलों के राज्य सचिवालय में कर विभाग में उप प्रमुख निकोलस मारियो ने स्विस प्रतिनिधिमंडल की अगुआई की ।

लोकसभा में इसी साल जून में वित्त मामलों की स्थायी समिति की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 1980 से लेकर साल 2010 के बीच भारतीयों ने 246.48 अरब डॉलर से लेकर 490 अरब डॉलर के बीच काला धन देश के बाहर भेजा था। एनआईपीएफपी, एनसीएईआर और एनआईएफएम के अध्ययन के आधार पर समिति ने यह आकलन किया था।

NRC पर U टर्न: थरूर ने बांग्लादेशियों को कहा था ‘दीमक’, ममता ने सोमनाथ चटर्जी के मुँह पर फेंके थे कागज़

आज अल्पसंख्यक वोट बैंक के लालच में बांग्लादेशी घुसपैठियों के चाचा-ताऊ बने विपक्ष के नेताओं का NRC मामले पर स्टैंड कितना खोखला है, यह सोशल मीडिया के ज़माने में खुल कर सामने आ रहा है। स्वराज्य के स्तम्भकार-सम्पादक और JNU के माइक्रोबायोलॉजी प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने सबकी पोल आज NRC जारी होने पर खोली है।

थरूर ने लिखा था “(दीमक की तरह) भारत-रूपी लकड़ी में घुस जाते हैं”

शशि थरूर ने 2012 में एक किताब लिखी थी ‘Pax Indica’। उसमें से उनके लिखे शब्दों को आनंद रंगनाथन उनके आज के ट्वीट के स्क्रीनशॉट के बराबर में रख कर शशि थरूर का दोहरापन दिखाते हैं। 2012 में बांग्लादेशी घुसपैठियों के बारे में शशि थरूर ने लिखा था, “2 करोड़ के करीब बांग्लादेशी भारत में चोरी से घुस आए हैं और भारत के ‘woodwork’ (भारत की लकड़ी के किसी ढाँचे से तुलना) में छिप गए हैं (जैसे दीमक लकड़ी में छिप जाती है)”। उस समय शशि थरूर की पार्टी सत्ता में थी और बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचान कर बाहर करना उनकी सरकार का ही काम था।

अब जब वे विपक्ष में हैं (जिसकी परिभाषा उनके हिसाब से सरकार के हर काम की अंधी बुराई करना है), तो वे टैगोर को बिना किसी संदर्भ का परिप्रेक्ष्य के उद्धृत करते हुए ट्वीट करते हैं, “राष्ट्रवाद और xenophobia (दूसरे देश के नागरिकों से उनकी नागरिकता के चलते नफरत) में बहुत महीन अंतर है। इसके अलावा विदेशी से नफरत बाद में खुद से अलग भारतीय से नफरत में भी तब्दील हो सकती है।”

‘डर है किसी दिन कोई बांग्लादेशी असम का मुख्यमंत्री न बन जाए’: UPA के गृह मंत्री

आनंद आगे वह समय भी याद कराते हैं जब जब यूपीए की सरकार थी और कॉन्ग्रेस खुद NRC का काम जल्दी-से-जल्दी पूरा करने पर ज़ोर दिया करती थी। उस समय केंद्रीय गृह मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा था कि डर है किसी दिन कोई बांग्लादेशी असम का मुख्यमंत्री न बन जाए।

स्पीकर पर ममता ने फेंके पेपर

आज बांग्लादेशी घुसपैठियों की सबसे बड़ी पैरोकार ममता बनर्जी ने एक समय (2005 में) बांग्लादेशी घुसपैठियों पर चर्चा कराने की माँग को लेकर तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी पर कागज़ फेंके थे। महीना यही था अगस्त का, और तारीख थी 4 अगस्त।

कौन है मिस ‘A’, जिसका सुप्रीम कोर्ट के 2 जज 5 घंटों तक करते रहे इंतजार

भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद लापता हुई LLM की छात्रा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देर रात तक सुनवाई की।

जस्टिस आर बानुमति और जस्टिस ए. एस. बोपन्ना ने करीब 5 घंटे तक छात्रा का इंतजार किया। पहली सुनवाई दिन में 1.15 मिनट पर हुई, जब पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से लड़की की लोकेशन माँगी और पूछा कि कितने समय में उसे सुप्रीम कोर्ट लाया जा सकता है?

दोपहर 1.35 मिनट पर उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ता AAG (Assistant Attorney General) ऐश्वर्या भाटी ने न्यायालय को सूचित किया कि कानून की यह छात्रा शुक्रवार को राजस्थान में मिली है और उसे उसके माता-पिता से मिलाने के लिए शाहजहाँपुर ले जाया जा रहा है। उन्होंने पीठ को बताया कि पुलिस की सुरक्षा में छात्रा फतेहपुर सीकरी के पास है और सुप्रीम कोर्ट आने में उसे ढाई घंटे लगेंगे। पीठ ने कहा कि वो उसका इंतजार करेंगे।

लेकिन यूपी पुलिस की टीम 2 गाड़ियों में छात्रा को शाम 6.30 बजे लेकर पहुँची। इसके बाद दोनों जजों ने अलग से अकेले में उससे बात की। ये बातचीत करीब 1 घंटे तक चली और इसके बाद शाम 7.40 बजे पीठ ने अदालत में सुनवाई शुरू की ओर फैसला सुनाया। पीठ ने साफ कर दिया कि वो इस मामले में सोमवार (सितंबर 02, 2019) को एक बार फिर ‘मिस A’ यानी छात्रा से अलग से बातचीत करेगी और फिर निर्देश जारी करेगी।

वकीलों के एक समूह ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को पत्र लिख कर इस मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया था, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इसका स्वत: संज्ञान लिया था।

छात्रा के मिलने की जानकारी देते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ओपी सिंह ने बताया, “हमारी टीमें पिछले चार-पाँच दिनों से कई जगहों पर फैली हुई थीं। छात्रा राजस्थान में मिली है। उसे शाहजहाँपुर लाया जा रहा है।”

बता दें कि शाहजहाँपुर स्थित स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय से एलएलएम कर रही छात्रा ने 24 जून को सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया था। इस वीडियो में उसने पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाया था एवं उनसे खुद को तथा अपने परिवार को जान का खतरा बताया था।

इसके बाद चिन्मयानंद के खिलाफ अपहरण और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। चिन्मयानंद महाविद्यालय की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हैं। हालाँकि, 72 वर्षीय स्वामी चिन्मयानंद ने दावा किया है कि उनकी छवि खराब करने के लिए षड्यंत्र किया जा रहा है।