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धमकी का असर: 2 दिन के भीतर ही 50% से ज्यादा पूर्व सांसदों ने खाली किया सरकारी बंगला

पानी और बिजली के कनेक्शन काट दिए जाने के निर्देश के कारण, या यूँ कहें कि डर के कारण सरकारी बंगलों में रहने वाले 50% से अधिक पूर्व सांसदों ने अपना-अपना सरकारी आवास खाली कर दिया है।

ख़बर के अनुसार, जिन पूर्व सांसदों ने अभी अपना सरकारी आवास खाली नहीं किया है, उनकी संख्या अब घटकर केवल 109 रह गई है। अधिकारियों के मुताबिक़, अधिकांश पूर्व क़ानून निर्माताओं ने अपने आवास खाली कर दिए हैं। दरअसल, हाउसिंग कमिटी ने सभी पूर्व सांसदों को सरकारी आवास खाली करने के लिए 7 दिनों की समय-सीमा दी गई थी।

एक अधिकारी ने बताया कि अगले कुछ दिनों में 90% सरकारी आवास खाली होने की संभावना है। बता दें कि सोमवार (19 अगस्त) को, संसदीय पैनल ने चेतावनी दी थी कि जो पूर्व सासंद सरकारी आवास खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं, उनके आवास में बिजली-पानी की सप्लाई काट दी जाएगी। लोकसभा सदन समिति ने 300 सांसदों को नए आवास आवंटित किए हैं।

जानकारी के अनुसार, नए सांसदों को कुछ और हफ्तों के लिए पारगमन आवास में रहना होगा क्योंकि खाली आवास में थोड़ी-बहुत मरम्मत की आवश्यकता होती है। मानदंडों के अनुसार, पूर्व सांसदों को लोकसभा भंग होने के एक महीने के भीतर अपना आधिकारिक आवास खाली करना होता है।

फ़िलहाल, कुछ नए मंत्री अपने आधिकारिक आवास की प्रतीक्षा कर रहे हैं क्योंकि अभी पूर्व सांसदों ने अपने आवास खाली नहीं किए हैं। कुछ दोबारा चुने हुए सांसदों को, जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, उन्हें वर्तमान आवास को खाली करने के लिए लोकसभा निकाय से नया आवास लेने की आवश्यकता होगी।

वीर सावरकर की प्रतिमा पर पोती कालिख, पहनाया जूतों का हार: DU में कॉन्ग्रेसी छात्र संगठन की करतूत

कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन ‘नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI)’ ने आधी रात में वीर सावरकर की प्रतिमा को जूतों का हार पहनाया और चेहरे पर कालिख पोत दी। मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैम्पस में आर्ट्स फैकल्टी गेट के बाहर सावरकर की प्रतिमा की स्थापना की थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष और एबीवीपी नेता शक्ति सिंह ने ये प्रतिमा स्थापित करवाई थी।

सोशल मीडिया पर ट्वीट की गई वीडियो के अनुसार, सावरकर की प्रतिमा को एनएसयूआई दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष अक्षय ने जूते की माला पहनाई। अक्षय ने समर्थकों संग मिल कर प्रतिमा के चेहरे पर कालिख पोत दिया। इस दौरान एनएसयूआई के छात्रों की सुरक्षाकर्मियों से झड़प भी हुई।

प्रतिमा की स्थापना के समय शक्ति सिंह ने बताया था कि प्रतिमा की स्थापना से पहले उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन को कई बात पत्र लिख कर अनुमति माँगी लेकिन उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने आरोप लगाया था कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संघ की बातों को गंभीरता से नहीं ले रहा था। इसलिए छात्र संघ ने अंततः मूर्ति की स्थापना का निर्णय लिया। शक्ति सिंह ने कहा कि मूर्ति की स्थापना इसीलिए की गई है ताकि युवाओं को वीर सावरकर से प्रेरणा मिले।

वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे, जिन्हें अंग्रेजों ने कालापानी की कठिन सज़ा दी थी। वह हिंदुत्व विचारक और एक प्रखर लेखक भी थे। वह कॉन्ग्रेस के आलोचक थे, जिन्होंने हिन्दू राष्ट्र की संकल्पना पर जोर दिया। उनके सम्मान में पोर्ट ब्लेयर एयरपोर्ट का नाम 2002 में ‘वीर सावरकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ रखा गया।

मिस्टर चिदंबरम को, पूर्व गृह मंत्री, वित्त मंत्री को ऐसे उठाया CBI ने… तो? चावल के लोटे में पैर लगवाते?

चिदबंरम को आज, 21 अगस्त, 2019 को देर रात सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट से बेल पाने की बहुत कोशिश हुई थी दिन में, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब लिस्ट में नंबर आएगा तो आम आदमी की तरह सुनवाई होगी। सीबीआई के पास अधिकार भी थे, मौका भी, उन्होंने चिदंबरम को दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया।

इस पूरे प्रकरण पर एनडीटीवी को लाइव देखता रहा। एक घंटे तक बर्दाश्त करने के बाद जो जानकारियाँ मिलीं वो यह थीं कि, बकौल रवीश कुमार, चिदंबरम भाजपा में शामिल हो जाते तो इतना सब देखने से बच जाते। रवीश जी की ये बात बिलकुल सही है। भाजपा ने वाकई कई लोगों पर पहले खूब आरोप लगाए, बाद में शांत हो गई जब वो उसकी पार्टी में शामिल हो गए। ये गलत है, लेकिन यही राजनैतिक वास्तविकता भी है।

आगे, रवीश जी ने खूब मजे लिए, दुखी भी दिखे, आश्चर्यचकित भी। दुखी इस बात पर कि इसे टीवी का इवेंट बना दिया गया। ये बात मुझे कोई बता दे कि आपके पास अपना शो है, बहुत बड़े पत्रकार हैं, क्या आप अपने शो तक को कैसे चलाएँ, उस पर निर्णय नहीं ले सकते? या आप खुद भी लाइव कमेंट्री करेंगे और ज्ञान देंगे कि ‘बताइए, एक अरेस्ट ही होना था, सब लोग इसी को दिखा रहे हैं। मैं तो घंटों तैयारी कर के कुछ और करने आया था। मेहनत बेकार हो गई।’ घंटों की तैयारी थी, तो वही करते। जब खबर आ जाती कि गिरफ्तारी हो गई, या नहीं हुई तो लाइव शो में बोल देते कि क्या हुआ।

यही सब वो मौके हैं जहाँ व्यक्ति खुद को मॉरल हाय ग्राउंड पर खड़ा दिखाता है लेकिन उसे भी उसी कीचड़ में लोटना है जिसमें बाकी सब हैं।

आगे जब एनडीटीवी संवाददाता नीता शर्मा ने बताना शुरु किया तो उनकी पूरी रिपोर्टिंग में मुद्दे से ज़्यादा जोर इस बात पर रहा कि वो चिदंबरम नाम के पहले मिस्टर तो हर बार लगाएँ ही, साथ ही, दुनिया को यह भी बताती रहें कि उन्होंने सीबीआई को खूब कवर किया है लेकिन कभी उन्हें दीवार फाँद कर, एक राज्यसभा सांसद, एक पूर्व गृह मंत्री, एक पूर्व वित्त मंत्री को ऐसे गिरफ्तार करते नहीं देखा।

संवाददाता ने बार-बार बताया कि सीबाआई दरवाजे के खुलने का इंतजार भी तो कर सकती थी। सही बात है। अगर वो लोग इंतज़ार करते तो क्या पता मिस्टर चिदंबरम केस की फाइलें लेकर स्वयं आते और कहते कि ‘लीजिए पढ़ लीजिए, आप लोग यहाँ क्यों आए, मुझे फोन कर लिया होता, मैं स्वयं आ जाता!’

जब रवीश गोदी मीडिया की बात करते हैं तो उसकी प्रकृति ऐसी ही होती है। किसी पर आरोप हैं, और आपकी रिपोर्टिंग का पूरा भार उसे ‘मिस्टर’ और ‘पूर्व मंत्री’ बताने में लगा हुआ है जैसे कि ऐसे लोगों को कानून में कोई अलग व्यवस्था दी गई हो। मुझे याद है कि कारवाँ मैगज़ीन और ‘द वायर’ में छपी तीन फर्जी खबरों पर रवीश ने कितने प्राइम टाइम किए थे। वहाँ भी इसी तरह के सम्माननीय लोग शामिल थे, कोई केस नहीं था, लेकिन रिपोर्टिंग में कहा जाता रहा कि जाँच कराने में क्या जाता है। ये कॉन्ग्रेस के समय में मिस्टर-मिस्टर क्यों होने लगा?

लोग ऐसे अनजान बन रहे हैं जैसे उन्हें पहले की बातें याद ही नहीं हों कि चिदम्बरम के गृह मंत्री रहते अमित शाह के साथ क्या हुआ था। तब बात होने लगती है कि क्या ऐसे ही होता रहेगा? अंतर बस यही है कि चिदम्बरम पर तीन मामले हैं, सुप्रीम कोर्ट में भी इस पर चर्चा हुई और कानूनी रूप से दायरे में रह कर ही कार्रवाई की गई।

वो पूर्व गृह मंत्री हों या सड़क किनारे झालमूढ़ी का ठेला लगाने वाले, गेट नहीं खोलेंगे तो दीवार फाँदना ही एक उपाय है। अगर एनडीटीवी को सीबीआई के दीवार फाँदने पर मर्यादा और ‘तेलगी को भी सम्मान से लाया गया था’ याद आ रहा है तो उसे यह बात भी तो याद रखनी चाहिए पूर्व गृह मंत्री को कानून का सम्मान करते हुए, संविधान पर, कोर्ट पर, सरकारी संस्थाओं पर विश्वास दिखाते हुए, एक उदाहरण पेश करना चाहिए था।

उसके बाद रवीश कुमार अपनी चिरपरिचित हें-हें-हें वाली हंसी के साथ बोलने लगे कि ‘इंद्राणी मुखर्जी तो स्वयं ही हत्या के मामले में आरोपित है, उसकी बात पर चिदंबरम को गिरफ्तार किया जा रहा है।’ आरोपित तो आपके मालिक भी हैं रवीश जी, उन पर जाँच होती है, बुलाया जाता है तो आप ‘प्रेस फ्रीडम पर हमला’ कहने लगते हैं। आरोपित होने से क्या उस व्यक्ति की हर बात झूठी हो जाती है? ये आप तय करेंगे या कोर्ट, या कॉमन सेंस?

ये सब देख कर आदमी अपना सर ही पीट ले कि पत्रकारिता के नाम पर ये किस तरह की ओपनियिनबाजी चल रही है? गेट पर इंतजार कर सकती थी सीबीआई, उन्हें ऐसे क्यों अरेस्ट किया, सुबह में कर लेते, उसकी बात पर क्यों अरेस्ट किया, ऐसे मामलों में तो बीस-बीस साल कुछ होता नहीं… मतलब, कोर्ट में केस खिंचता है तो क्या केस बनना ही बंद हो जाए?

जब बात पोलिटिकल वेन्डेटा, या राजैनतिक बदले की भावना से ही प्रेरित दिख रही है तो उस वास्तवकिता को स्वीकारने में क्या समस्या हो रही है कि जिसके पास सत्ता होती है, वो अगर अपराध साबित न भी कर पाए, लेकिन विरोधियों को पाँच दिन जेल में तो रख ही सकता है। मैं हैरान हो जाता अगर रवीश कुमार अमित शाह के जेल जाते वक्त भी इसी तरह की हल्के-फुल्के सत्संग टाइप के शब्दों के साथ कवर कर रहे होते।

जिस तरह से इस पूरे प्रकरण में एनडीटीवी ने माहौल बनाया है, जैसे इन लोगों ने एक व्यक्ति के नेता होने, मंत्री होने, राज्यसभा सांसद होने पर ज़ोर दिया है लगता तो यही है कि कल अगर प्रणय रॉय, राधिका रॉय आदि को सरकारी संस्थाएँ उठा कर ले जाएँ तो ये कह सकें कि जब पूर्व गृह और वित्त मंत्री को नहीं छोड़ा तो हम तो फिर भी मीडिया के लोग हैं। विक्टिम कार्ड बनाने के लिए पहले ही अप्लाय कर दिया है। ये कहते-कहते रवीश जी कूद जाएँगे कि जब प्रणय रॉय को पकड़ लिया, मीडिया को पकड़ लिया तो आप लोगों की क्या बिसात है।

जो व्यक्ति भ्रष्टाचार जहाँ नहीं था, उस राफ़ेल मामले में ‘जाँच करवाने में क्या जाता है’ कह कर पागल होता रहा, वो व्यक्ति एक एजेंसी को पूछताछ के लिए, घोटालेबाजी का इतिहास सर-मुँह-कमर-कंधे पर लेकर घूमने वाली पार्टी के नेता, पी चिदंबरम को घर से उठाने पर ऐसा कवरेज कर रहा है! फिर जब लोग इनके पोस्ट पर घेरते हैं तो ये कहने लगते हैं कि ट्रोल छोड़ दिया भाजपा वालों ने! अरे भाई, वो ट्रोल नहीं हैं, वो आपके द्वारा एक ही मुद्दे पर दो तरह की रिपोर्टिंग करने की जादूगरी के करतब को देखने वाले लोग हैं।

कॉन्ग्रेस का ‘स्टार्टअप’ डूबा, बोहनी खराब होते ही सभी फरारियों ने कैंसिल कराई बुकिंग!

वाकई! अर्थव्यवस्था की स्थिति बेहद भयावह है। देश की सबसे पुरानी पार्टी का स्टार्टअप लॉन्च होने के दो घंटे के भीतर ही डूब गया।

कानून से बच रहे लोगों को मीडिया से मुखातिब होने का मौका देने वाला यह स्टार्टअप बुधवार देर शाम कॉन्ग्रेस के ‘दलाल स्ट्रीट’ यानी नई दिल्ली के 24 अकबर रोड स्थित अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी के मुख्यालय में लॉन्च किया गया था।

वैसे, बुधवार शाम जब मीडिया को खबर मिली कि यहॉं 8.15 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जिसे कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और सलमान खुर्शीद संबोधित करेंगे, तो किसी को भी भनक नहीं थी कि मंदी को भगाने के लिए नया स्टार्टअप शुरू होने जा रहा है। पता तो तब चला जब शाम 8:18 बजे बीते 27 घंटे से सीबीआई और ईडी से लुकाछिपी खेल रहे पी चिदंबरम इस सेवा का लाभ उठाने वाले पहले कस्टमर बने।

पहला कस्टमर चिदंबरम जैसा हो तो धंधा डूबने का खतरा नहीं होता। जरा उनके प्रोफाइल पर गौर करें। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता। केन्द्र में वित्त और गृह जैसे हाई प्रोफाइल महकमों को संभालने का अनुभव। कभी चिदंबरम साहब के सामने उनके बेटे के धंधे को चमकाने का मौका पाने के लिए आतुर लोगों की कतार लगी रहती थी। इधर चिदंबरम साहब की कृपा हुई, उधर बंदा उनके बेटे के धंधे को चमकाने में लग जाता था। कहते हैं उस दौर में अर्थव्यवस्था भी उफान मार रही थी। किसानों की आत्महत्या की ख़बरें प्रोपगेंडा थीं।

2014 में मोदी के आने के बाद यह धंधा चौपट हो गया। मंदी आ गई। सूत्र बताते हैं कि तब से ही कॉन्ग्रेस मंदी भगाओ धंधे की तलाश में लग गई थी। लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की सोशल मीडिया हेड रहीं दिव्या स्पंदना ने कहा भी था, “पार्टी के पास पैसे नहीं हैं।”

बुधवार को गोटी फिट बैठ गई और धंधे की तलाश ख़त्म हुई। ‘सदैव आपकी सेवा में तत्पर’ का संदेश चोखा रहे इसलिए पहले कस्टमर की सेवा के लिए अगल-बगल तीन धाकड़ वकील भी बिठाए गए। इससे हर उस शख्स के पास डायरेक्ट मैसेज पहुँचा जो कानून से भागता फिर रहा है। वैसे भी कॉन्ग्रेस धर्म, जाति, संप्रदाय सब से ऊपर है। धंधा ही भगवान है।

स्टार्टअप हिट रहे इसलिए पहले कस्टमर ने खूब रोना रोया। मोदी सरकार पर बदला लेने, कानून का दुरुपयोग करने, विरोधियों को फॅंसाने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल करने जैसे सारे घोड़े एक साथ दौड़ाए। घोड़े से याद आया किसी जमाने में इन साहबों का घोड़ा फर्राटे भरता था। यकीन न हो तो गूगल कर लें। ​कस्टमर के साथ बैठे धाकड़ वकीलों में से एक का सीडी आया था कुछ साल पहले। कानून मुट्ठी में था तो साहब एक महिला वकील को जज बनाने के नाम पर लुभा रहे थे।

सब कुछ वैसा ही हो रहा था जैसा युवराज के सलाहकारों ने सोचा था। लॉन्च होने के चंद मिनट के भीतर ही स्टार्टअप हिट हो गया। सूत्र बताते हैं कि ‘दलाल स्ट्रीट’ की सभी लाइनें व्यस्त हो गईं। फरारियों के एक के बाद एक धड़ाधड़ कॉल आने लगे।

सूत्रों की मानें तो युवराज की सिफारिश पर पहली बुकिंग बिहार के एक निर्दलीय विधायक की कंफर्म हुई। घर से एके 47 मिलने के बाद से विधायक जी गायब हैं। एक वीडियो आया था जिसमें कह रहे थे भागे नहीं हैं, एक साथी बीमार है, उसका हाल जानने आए हैं।

सूत्रों ने बताया कि विधायक जी ने अपने हक के समर्थन में दो दावे किए। पहला, लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार में पार्टी की जी-जान से खातिरदारी का। दूसरा, तीन दशक बाद पटना के गॉंधी मैदान में रैली उनके ही प्रताप से हुई थी। सो टोकन मनी लेकर उनकी बुकिंग कंफर्म कर दी गई।

शीर्ष सूत्रों ने बताया है कि चिदंबरम साहब की गिरफ्तारी के साथ स्टार्टअप बैठ गया है। विधायक जी ने बुकिंग कैंसिल कर दी है। दूसरे लोग भी कह रहे हैं जब बोहनी ही खराब हो गई तो हम क्यों आपकी सेवा का लाभ उठाने का जोखिम उठाएँ।

करीबी सूत्र बताते हैं कि इस फीडबैक से युवराज बेहद नाराज हैं। उनका कहना है, “मैंने पहले ही कहा था स्टार्टअप मोदी बोलता है। हम टूजी, जीजाजी टाइप का कुछ नाम रखते हैं। लेकिन, मम्मी आपने ही तो कहा था स्टार्टअप नाम रखेंगे तो मेक इन इंडिया के नाम पर छूट मिलेगी।”

कैमरे पर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाने वाले एक सूत्र ने मैसेज किया है, “युवराज की इस हाल से लिबरलों का बुरा हाल है।” बकौल लिबरल, “मैं कहता था न साहस की मंदी है। मंदी दूर करने का साहस दिखाया तो आपने क्या किया? स्टार्टअप ही डूबो दिया। ऐसी भी क्या जल्दी थी देश के गृह मंत्री रहे व्यक्ति को उसके घर में घुसकर हिरासत में लेने की। अब आप चुप ही रहिए। बोलिए मत। भले लाखों लोगों की नौकरियॉं चली गईं हों। आप तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में खोए रहिए।”

परिवार के भीतर तक दखल रखने वाले सूत्र ने बताया कि ऐसे गमगीन माहौल में बुजुर्ग वोरा का अनुभव काम आ रहा है। वोरा साहब ने युवराज से कहा, “कोई नहीं हम धंधे के पुराने उस्ताद हैं। बोलिए तो दादा-परदादा के टाइम से गिना दूॅं। जुबानी याद है। फिर नया धंधा शुरू करेंगे। अब उसे स्टार्टअप नाम नहीं देंगे।”

सचमुच लोकतंत्र खतरे में है!

अजीत डोभाल ने की रूस के NSA से मॉस्को में मुलाकात, कश्मीर मुद्दे पर भारत के साथ है रूस

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बुधवार (अगस्त 21, 2019) को रूसी समकक्ष निकोलाई पेत्रुशेव से मुलाकात की। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर बातचीत हुई। यह मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले महीने रूस के दौरे के मद्देनजर हुई। पीएम मोदी यहाँ 4-6 सितंबर को आयोजित होने वाले ईस्टर्न इकॉनोमिक फोरम (EEF) में हिस्सा लेंगे।

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 को निष्क्रीय करने और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेश में विभाजित करने से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। इस मुद्दे को पाकिस्तान ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में उठा चुका है। हालाँकि, वहाँ चीन के अलावा कोई अन्य देश उसका साथ नहीं दे रहा है।

जबकि संयुक्त राष्ट्र में रूस ने कश्मीर मुद्दे पर भारत का समर्थन किया था। संयुक्त राष्ट्र में रूस ने कहा था कि यह भारत का आंतरिक मामला है, इसमें किसी देश को दखल नहीं देना चाहिए। ऐसे में NSA डोभाल की यह यात्रा काफी अहम मानी जा रही है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों के एनएसए के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच आतंकी गतिविधियों के खिलाफ आपसी सहयोग को लेकर भी चर्चा हुई।

चिदंबरम को ले गई CBI-ED की टीम, मेडिकल के बाद, कभी भी हो सकता है गिरफ़्तारी का ऐलान

सीबीआई की चार टीम चिदंबरम के घर पर मौजूद हैं। वहीं ईडी की भी 2 टीम पूर्व गृह मंत्री के घर पर मौजूद है। दिल्ली पुलिस के 20 जवान भी चिदंबरम के घर पर हैं। ईडी की टीम ने चिदंबरम से पूछताछ शुरू कर दी है। अगर चिदंबरम की आज गिरफ़्तारी होगी तो ईडी की टीम करेगी। क्योंकि सीबीआई की चार्जशीट में चिदंबरम का नाम नहीं है। खबर है कि सीबीआई के डायरेक्टर भी सीबीआई मुख्यालय पहुँच गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को उन्हें सीबीआई के स्पेशल जज अजय कुमार कुहार की अदालत में पी चिदंबरम को पेश किया जा सकता है।

बता दें कि INX मीडिया केस में करीब 27 घंटे से फरार चल रहे पी चिदंबरम बुधवार रात अचानक से कॉन्ग्रेस मुख्यालय में मीडिया से रूबरू हुए। यहाँ उन्‍होंने अपनी बात रखी। इसके तुरंत बाद वहकपिल सिब्बल के साथ निकल गए। थोड़ी ही देर में सीबीआई की टीम भी वहाँ पहुँच गई। लेकिन यहाँ कॉन्ग्रेस नेताओं ने दरवाजे बंद कर लिए थे। बता दें कि प्रेस कांफ्रेंस में पी चिदंबरम के साथ कॉन्ग्रेस के 9 बड़े नेता मौजूद रहे।

इसके बाद जैसे ही वह अपने घर पहुँचे, दिल्ली के जोरबाग स्थित पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के घर पर जमकर ड्रामा शुरू हो गया। सीबीआई की टीम भी जब जोरबाग पहुँची तो वहाँ सीबीआई अधिकारियों को अंदर नहीं जाने दिया गया। यहाँ भी गेट बंद कर दिया गया। इसके बाद सीबीआई की टीम चिदंबरम के घर की दीवार फाँदकर चिदंबरम के घर के अंदर पहुँची। थोड़ी ही देर में ED की टीम भी पहुँच चुकी है। चिदंबरम के साथ इस वक्त उनके घर पर कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी मौजूद हैं।  

बता दें दिल्‍ली हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद से पी चिदंबरम का पता नहीं चल रहा था। सीबीआई और ईडी की टीमें उन्‍हें गिरफ्तार करने के लिए कई बार उनके आवास का चक्‍कर लगा रही थीं, पर वे नहीं मिले।

चिदंबरम ने मीडिया से कहा कि इस मामले में उनके और परिवार के खिलाफ कोई चार्जशीट नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद आजादी है, चिदंबरम ने कहा कि अगर उन्हें जिंदगी और आजादी के बीच में चुनने कहा जाए तो वे आजादी चुनेंगे।

पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद उनके बेटे कार्ति चिदंबरम ने कहा कि इस केस के कई साल बीतने के बाद भी सीबीआई के पास चार्जशीट में उनके पिता का नाम नहीं है। कार्ति ने कहा कि देश के कई बड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया है।

DU में लगी सावरकर-बोस-भगत सिंह की प्रतिमा, प्रपंची लिबरल्स के आँसुओं से यमुना में बाढ़

देश में एक ऐसा वर्ग है जो राष्ट्रवाद और भारतीय इतिहास से जुड़ी हर दूसरी गतिविधि पर प्रलाप और प्रपंच का सिलसिला शुरू कर देता है। इस बार लिबरल्स के प्रलाप का विषय है दिल्ली यूनिवर्सिटी में भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर की मूर्ती की स्थापना। दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ चुनाव से पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने नॉर्थ कैंपस स्थित आर्ट फैकल्टी के गेट पर बिना इजाजत वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की प्रतिमा लगा दी।

इस प्रकरण के बाद सोशल मीडिया पर लिबरल्स का एक वर्ग तुरंत सक्रीय हो गया और उन्होंने भगत सिंह, बोस और वीर सावरकर की इस प्रतिमा का विरोध करना शुरू कर दिया। इस प्रपंच में कॉन्ग्रेस पार्टी भी शामिल थी और इन सबका मकसद था सिर्फ ट्विटर पर #gaddarsavarkar हैशटैग ट्रेंड कराया जाए।

यह कॉन्ग्रेस का दुर्भाग्य ही हो सकता है कि एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सर से पाँव तक घोटालों में पकड़े जा रहे हैं वहीं उनकी पार्टी का एकमात्र लक्ष्य आज सिर्फ सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेंड करवाने तक सीमित हो चुका है। शायद अब कॉन्ग्रेस इन्हीं छोटी-छोटी खुशियों में अपना मनोबल तलाशने लगी है। स्वतन्त्रता संग्राम के जिन नायकों पर देश हमेशा गौरवान्वित रहा है, कॉन्ग्रेस अक्सर उनका अपमान करती आई है। और यह विरोध भी उसी का एक उदाहरण है।

इसी क्रम में मीडिया का एक ख़ास लिबरल वर्ग भी इस प्रतिमा के विरोध में कॉन्ग्रेस के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता रहा।

हालाँकि ट्विटर पर ही एक वर्ग ऐसा भी मौजूद है जो प्रपंची लिबरल्स के दुःख पर तथ्यों से मरहम भी लगाते देखे गए।

एबीवीपी नेतृत्व वाले छात्रसंघ के अध्यक्ष शक्ति सिंह का कहना है कि उन्होंने कई बार यूनिवर्सिटी प्रशासन से प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति माँगने के लिए संपर्क किया लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं आया। और उनकी चुप्पी की वजह से ही छात्रों ने यह कदम उठाया है।

DUSU अध्यक्ष शक्ति सिंह का कहना है कि डीयू कैंपस में एक तहखाना है, जहाँ भगत सिंह को ट्रायल के दौरान रखा गया था। छात्रों ने माँग की थी कि या तो भगत सिंह की प्रतिमा लगाई जाए या तहखाने को सार्वजनिक किया जाए, लेकिन डीयू प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

जल शक्ति मंत्री ने कहा- अब इन तीन नदियों का पानी पाक नहीं जाने देंगे

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बयान दिया है कि हिंदुस्तान अब सिंधु जल समझौते के तहत अपने हिस्से का पानी पाकिस्तान को और नहीं लेने देगा। बुधवार को ANI से बात करते हुए शेखावत ने कहा, “हिंदुस्तान के हिस्से के पानी में से काफी ज्यादा पाकिस्तान को चला जाता है। इनमें से कई नदियाँ रावी, व्यास और सतलज तंत्र की उपनदियाँ हैं, और इनके कैचमेंट एरिया (हौज़, जलग्रहण क्षेत्रों) में से पानी उस तरफ (पाकिस्तान को ) चला जाता है। हम इस पर तेज़ी से काम कर रहे हैं कि कैसे हमारे हिस्से का पानी जो पाकिस्तान में चला जाता है, उसे घुमा कर अपने किसानों, उद्योगों और लोगों के प्रयोग के लिए इस्तेमाल किया जा सके।”

उन्होंने इस योजना की तकनीकी और जलशास्त्रीय (हाइड्रोलॉजिकल) अनुकूलता पर शोध शुरू करने की भी बात कही। उनके अनुसार उन्होंने इस विषय पर अध्ययन जल्दी खत्म करने का निर्देश दिया है, ताकि योजना को अमली जामा पहनाया जा सके।

शेखावत की बातें 370 हटाने के बाद से पाकिस्तान पर लगातार कड़े होते जा रहे मोदी सरकार के रुख में एक और कड़ी हैं। और यह कोई नई योजना भी नहीं है। मई में तत्कालीन जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने भी पाकिस्तान द्वारा जिहादियों को समर्थन में कमी न होने के चलते मोदी सरकार द्वारा पानी का बहाव रोकने पर विचार करने की बात कही थी।

1960 में नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान के बीच हुए सिंधु जल समझौते में हिंदुस्तान को रावी, व्यास और सतलज के पानी का पूरा अधिकार मिला था, जिसके बदले हमें पाकिस्तान को सिंधु, चेनाब और झेलम के पानी पर पूरा हक़ देना होता है।

दिल्ली की सड़कों पर भाग रहे थे चिदंबरम, केजरी वाले 15 लाख CCTV कैमरे में आए नजर

ये हैरानी की बात है कि देश में इतना कुछ चल रहा है और इस सब के बीच एक ऐसे व्यक्ति का नाम कहीं गुम होता जा रहा है जो हर आम आदमी की पहली पसंद है। भले ही, पहली पसंद होने के कारण सबके व्यक्तिगत हो सकते हैं। वो सज्जन हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल। केजरीवाल ने एक ऐसे महत्वपूर्ण समय पर सीन में एंट्री की है, जब किसी को भी उनकी उम्मीद नहीं थी और एक ही झटके में फिल्म सुपरहिट हो गई।

दरअसल, पूरा मामला 2 दिन से कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम को लेकर है। चिदंबरम कल शाम को अचानक तब लापता हो गए जब सीबीआई और ED की टीम उनके घर जाँच के लिए पहुँची। चिदंबरम को ढूँढ निकालने की शर्त आपस में लगी ही थी कि एक फोन कॉल ने सब साफ़ कर दिया।

CBI के जाँच दल को एक अनजान नंबर से कॉल आया और उधर से एक बेहद करुण आवाज ये कहते हुए सुनाई दी- “हेलो, मैं अरविन्द केजरीवाल बोल रहा हूँ। फ़ोन मत काटना जी।”

इतना सुनते ही एक बार को तो सीबीआई को सन्देह हुआ कि शायद केजरीवाल उन्हें दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री मरहूम शीला दीक्षित के घोटालों की 370 पेजों की ऐतिहासिक फ़ाइल वाला सबूत देने के लिए कॉल कर रहे हों। लेकिन तुरंत केजरीवाल ने सस्पेंस को तोड़ते हुए पहली फुर्सत में बता दिया कि उन्हें पता है पी चिदंबरम कहाँ हैं।

अरविन्द केजरीवाल ने बताया कि जो 15 लाख CCTV कैमरे उन्होंने अपने वादे के मुताबिक़ दिल्ली की गली-गली और चप्पे-चप्पे में लगा रखे हैं, उनमें उन्होंने चिदंबरम को भागते हुए पकड़ लिया है।

दिल्ली की सड़कों पर भागते हुए पी चिदंबरम की CCTV फुटेज-

हालाँकि, सॉल्ट न्यूज़ ने इस इस CCTV फुटेज का फैक्ट चेक करते हुए पाया है कि केजरीवाल द्वारा सौंपा गया यह वीडियो पी चिदंबरम का ही है, लेकिन यह तब लिया गया था जब वो ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी कम्पनी जोमैटो से खाना मँगवाने पर मुस्लिम की जगह उन्हें एक हिन्दू युवक द्वारा खाना डिलीवर करवाया गया। सॉल्ट न्यूज़ ने इस वीडियो का भांडाफोड़ करते हुए स्पष्ट किया कि इस वीडियो में चिदंबरम हिन्दू युवक द्वारा खाना डिलीवर करवाए जाने पर अपना विरोध व्यक्त करने के लिए खान मार्केट की ओर दौड़ रहे हैं।

केजरीवाल ने यह सबूत केंद्र सरकार को बिना किसी शर्त के सौंपने का भी वायदा किया है। केजरीवाल का मानना है कि जिस तरह से वो चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस से लगातार गठबंधन की भीख माँगते रहे फिर भी उन्हें इसके लिए तड़पाया गया था, इसी क्रोध में वो कॉन्ग्रेस की ईंट से ईंट बजाने की प्रतिज्ञा ले चुके हैं। हालाँकि, एक समय अरविन्द केजरीवाल के करीबी रह चुके कवि कुमार विस्वास का कहना है कि केजरीवाल ने यह सबूत पहले उन्हें सौंपने की बात कही थी।

इसके बाद यह जानकारी भी सीबीआई के हाथ लगी है कि जब भी पी चिदंबरम केंद्र सरकार से सवाल करते थे कि आखिर नीरव मोदी और विजय माल्या देश से कैसे भाग गए? तो वास्तव में वो अपने लिए ट्रिक का जुगाड़ कर रहे होते थे और उनकी प्रैक्टिस अपने घर पर एक्सपर्ट्स के निर्देशन पर किया करते थे।

केजरीवाल ने यह CCTV फुटेज सीबीआई को सौंपकर एक बार पूरी की पूरी अटेंशन फिर से वापस हथिया ली है जिसके लिए उनकी तारीफ आम आदमी पार्टी कार्यालय से लेकर ध्रुव राठी कार्यालय तक हो रही है। और ख़ास बात यह रही कि इस पूरे प्रकरण में केजरीवाल को एक भी रैपट नहीं पड़ा। अपने वादे के अनुसार तय समय से पूर्व ही 15 लाख CCTV से दिल्ली में कैमरा का जाल बिछा देने के बाद अब केजरीवाल का अगला लक्ष्य दिल्ली को लंदन बना देने का है, ताकि पी चिदंबरम को यह विश्वास रहे कि वो भी भागकर विदेश ही पहुँचे हुए हैं।

मद्रास हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पति पर बेटी के बलात्कार का झूठा आरोप लगाने वाली माँ पर चलेगा मुकदमा

मद्रास हाई कोर्ट में मंगलवार (21 अगस्त) को एक कस्टडी की लड़ाई और बच्ची पर पिता द्वारा यौन शोषण के मुकदमे ने ऐसा मोड़ लिया कि अदालत के जज को कहना पड़ गया, “इस मुकदमे ने अदालत के ज़मीर को हिला कर रख दिया है…” पता चला कि बलात्कार का आरोपित पिता न केवल निर्दोष है, बल्कि उस पर उसकी पत्नी, उसकी बेटी की माँ ने इसलिए ऐसा घिनौना इलज़ाम लगाया क्योंकि दम्पत्ति की दो बेटियों में से कोई भी मॉं के साथ नहीं रहना चाहती थी। अदालत ने माँ के खिलाफ पुलिस को तुरंत पॉक्सो एक्ट के तहत झूठी शिकायत करने पर होने वाली कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है। जस्टिस आनंद वेंकटेश ने उम्मीद भी जताई कि यह निर्णय पॉक्सो एक्ट का दुरुपयोग करने की कोशिश करने वालों के लिए के नज़ीर होगा।

11 साल की बच्ची को बलात्कार से प्रेग्ननेंट करने का आरोप

2018 में पत्नी ने पति पर आरोप लगाया कि पति ने 2003 में विवाहित हुए दम्पत्ति की 11 साल की बेटी के साथ बलात्कार किया और उसे गर्भवती कर दिया। आगे पत्नी ने दावा यह भी किया कि उसने (पत्नी ने) वह गर्भ किसी ‘नेटिव मेडिसिन’ (देसी इलाज) से गिरा दिया। उसकी शिकायत के आधार पर पति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

लेकिन उच्च न्यायालय द्वारा ‘पीड़िता’ बच्ची से पूछताछ के बाद आरोपित पिता को अग्रिम जमानत मिल गई। बच्ची ने पिता के द्वारा किसी भी प्रकार के अश्लील या यौन संबंध से इंकार किया। इसके बाद पिता ने अपने खिलाफ मुकदमे को पत्नी द्वारा निजी दुश्मनी से प्रेरित बताते हुए अदालत से मुकदमे को निरस्त करने की अपील की। मामले की और अधिक जाँच के पश्चात न्यायालय ने पिता की अपील स्वीकार कर ली।

‘दोनों बच्चियाँ पिता के साथ ही रहना चाहतीं हैं’

अपने आदेश में अदालत ने लिखा कि उसके (अदालत के) और 11-वर्षीया बच्ची के बीच हुई बात के आधार पर वह इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि यह झूठा मुकदमा माँ ने उस बच्ची और उसकी डेढ़-वर्षीया बहन की कस्टडी के लिए दायर किया है। बच्ची ने अदालत के सामने किसी भी प्रकार के ‘देसी इलाज’ या किसी अस्पताल में ले जाकर गर्भपात किए जाने से भी इंकार किया है। और-तो-और, बच्ची ने जज को बताया कि वह और उसकी बहन, दोनों ही अपने पिता के साथ जाना चाहतीं हैं।

‘और भी हैं झूठे मुकदमे’

इसके आगे जस्टिस वेंकटेश ने जो कहा, वह इस केस विशेष से भी महत्वपूर्ण, इस पूरे प्रकरण का सबसे ज़्यादा गौर करने और याद रखने लायक वाक्य है। “कई बार ऐसा हुआ है कि अदालत का ध्यान इससे मिलते-जुलते मामलों की तरफ आकर्षित किया गया है, कि अकसर झूठा मुकदमा किया जाता है मानों पति ने पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध किया हो; और इस अदालत को यह सूचित किया गया है कि ऐसी सस्ती चालें फैमिली कोर्ट के मुकदमों में अपनाई जातीं हैं, ताकि पतियों को दबाव डाल कर लाइन पर लाया जा सके। (इस मामले को देखने के) पहले अदालत यह मानने को तैयार नहीं थी कि ऐसा भी हो सकता है (कि कोई माँ अपनी बेटी के बलात्कार का झूठा आरोप बच्ची के पिता पर ही लगा दे), और यह मुकदमा अदालत की आँखें खोल देने वाला है। इससे अदालत को यह समझ में आया कि पॉक्सो एक्ट का किस तरह दुरुपयोग हो सकता है।”

द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार अंत में जज ने घोषित किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ मुकदमा एक मिनट और भी जारी नहीं रह सकता, और पुलिस को FIR तत्काल निरस्त करने का आदेश दिया। साथ ही जोड़ा कि झूठी शिकायत करने वाली महिला भी बचनी नहीं चाहिए। अदालत ने हिदायत दी कि उसे पति के खिलाफ झूठी शिकायत, वह भी बेटी के नाम पर, करने का परिणाम भुगतवाया ही जाना चाहिए।

“पुलिस को आदेश दिया जाता है कि द्वितीय प्रतिवादी (महिला) के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत तुरंत मुकदमा झूठी शिकायत करने का दर्ज किया जाए, और उसके खिलाफ कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाए। यह मुकदमा अपने निहित स्वार्थों के लिए इस कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग करने वालों के लिए नज़ीर होना चाहिए।”