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बिहार: शिवभक्तों की गाड़ी पर पथराव, महिला श्रद्धालुओं को भी नहीं बख्शा

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कांटी थाना क्षेत्र में सोमवार (अगस्त 12, 2019) को डीजे बजाने से रोकने को लेकर विशेष समुदाय के लोगों ने शिवभक्तों के साथ मारपीट की। जानकारी के मुताबिक घटना के दौरान न केवल जमकर मारपीट और पत्थरबाजी हुई बल्कि लोगों की बाइक और साइकलें भी फूँक दी गई। साथ ही कुछ मुस्लिम युवकों द्वारा डीजे की गाड़ी को भी तोड़ डाला गया। जिसका वीडियो आप खबर के नीचे दिए लिंक में देख सकते हैं। पूरी घटना में पाँच लोग गंभीर रूप से घायल होने की खबर है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मामला शांत कराने के लिहाज से मौक़े पर पहुँची पुलिस पर भी उपद्रवियों ने पथराव किया, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी चोटिल हो गए। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस काे लाठीचार्ज करना पड़ा फिर जाकर किसी तरह मामला शांत हुआ। पूरे मामले के मद्देनजर फिलहाल तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है। तनावपूर्ण स्थिति के कारण जिलाधिकारी एसएसपी समेत भारी संख्या में पुलिस कैंप कर रही। इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कांटी थाना क्षेत्र के दामोदरपुर चकमुरमुर में 500 की संख्या में महिलााएँ जलभरी कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए निकली थीं कि इसी बीच डीजे बजाने को लेकर दो पक्षों में कहासुनी के बाद मारपीट होने लगी। कुछ असामाजिक तत्वों ने जलभरी गाड़ी के साथ तोड़-फोड़ किया और श्रद्धालुओं के साथ मारपीट की। देखते ही देखते दोनों पक्षों के लोग बड़ी संख्या में जुट गए। पत्थरबाजी होने लगी। मुस्लिम पक्ष के लोगों ने डीजे की गाड़ी को तोड़ डाला और लोगो को पिटाई कर दी।

जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने बताया कि जिन लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया है उसपर नामजद एफआईआर किया जाएगा। जो भी लोग शामिल है उसपर कड़ी करवाई की जाएगी। घटना से संबंधी वीडियो आप नीचे ऑपइंडिया के यूट्यूब लिंक पर जाकर देख सकते हैं।

Article 370: चिदंबरम के चेहरे पर कालिख पोतने वाले को इनाम देगा मुस्लिम यूथ एसोसिएशन

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के फैसले को संप्रदाय से जोड़ने को लेकर वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम की चौतरफा आलोचना हो रही है। अलीगढ़ के मुस्लिम यूथ एसोसिएशन ने चिदंबरम के चेहरे पर कालिख पोतने वाले व्यक्ति को 21,000 रुपए नकद इनाम देने की घोषणा की है।

जानकारी के मुताबिक, मुस्लिम यूथ एसोसिएशन के प्रमुख मोहम्मद आमिर रशीद का कहना है कि चिदंबरम की टिप्पणी हिन्दू- मुस्लिम की एकता के लिए नुकसानदेह है। रशीद ने कहा कि वो चिदंबरम का मुँह काला करने वाले को अपनी ईदी  (ईद के दौरान उपहार के रूप में प्राप्त नकद) में से 21,000 रुपए देंगे।

गौरतलब है कि, पी चिदंबरम ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर मुस्लिम बहुल राज्य है, इसलिए आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी किया गया है। यदि यह राज्य हिन्दू बहुल होता तो भाजपा सरकार इस मुद्दे को छूती भी नहीं।

इस दौरान चिदंबरम ने सात राज्यों में सत्तारूढ़ क्षेत्रीय दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि इन सभी पार्टियों ने राज्यसभा में बीजेपी के कदम के खिलाफ डर की वजह से सहयोग नहीं किया। उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर के सौरा क्षेत्र में लगभग 10 हजार लोगों ने विरोध किया जो कि एक सच है। इस दौरान पुलिस ने कार्रवाई की, जिसमें गोलीबारी हुई, ये भी सच्चाई है। इसके साथ ही चिदंबरम ने कहा था कि देश के 70 साल के इतिहास में ऐसा कभी कोई उदाहरण नहीं आया जब एक राज्य को केन्द्रशासित प्रदेश बना दिया गया हो।

जयपुर में श्रद्धालुओं पर टूटा पत्थरबाज मुस्लिम भीड़ का कहर, सरिया और डंडों से मचाया आतंक

बकरीद के मौके पर जयपुर में जमकर बवाल हुआ। ईद के साथ-साथ कल सावन का अंतिम सोमवार भी था। ऐसे में मुस्लिमों द्वारा किए गए बवाल के कारण कई काँवरिया भी फँस गए। फसाद एक मामूली कहासुनी से शुरू हुआ। बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग जयपुर के दिल्ली रोड पर जमा हो गए और वाहनों पर जम कर पथराव किया।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सड़क जाम कर दोनों तरफ के यातायात को बाधित कर दिया। भीड़ ने पत्थर, सरिया और डंडों का इस्तेमाल कर आतंक मचाया। मंडी खटीकान क्षेत्र में पहुँच कर मुस्लिम भीड़ ने लोगों के घरों पर पत्थर बरसाए। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में फायरिंग किए जाने की बात भी कही गई है। हालाँकि, अधिकारी अभी भी साफ़-साफ़ नहीं बता पा रहे हैं कि भीड़ आखिर सड़क पर आई क्यों?

जयपुर में मुस्लिम समुदाय द्वारा किए गए बवाल के बाद ‘राजस्थान पत्रिका’ में छपी ख़बर

इस दौरान नजदीक के ही हनुमान मंदिर में सैकड़ों श्रद्धालु फँसे रहे। श्रद्धालुओं को भीड़ के आतंक से बचाने के लिए पुलिस ने उन्हें वहाँ से निकालना शुरू कर दिया। किसी तरह वहाँ पूजा-पाठ के कार्यक्रम में शामिल लोगों को निकाला गया। वे किसी तरह बच निकल कर सुरक्षित स्थान पर पहुँचे तो ज़रूर लेकिन मुस्लिम भीड़ की पत्थरबाजी के कारण उनकी गाड़ियों को ख़ासा नुकसान पहुँचा। कई लोग घायल भी हुए हैं। श्रद्धालुओं की गाड़ी के शीशे फोड़ डाले गए। एक व्यक्ति का सिर फूट गया।

एक श्रद्धालु ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि वे बस से हरिद्वार जा रहे थे, तभी रास्ते में भीड़ ने बस को रुकवाया और तोड़-फोड़ की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने श्रद्धालुओं के साथ गाली-गलौज भी की। हरिद्वार जा रही बस को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। ख़ुद पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव को नहीं पता था कि मुस्लिम भीड़ ने आखिर किस घटना के कारण आक्रोशित होकर इतना आतंक मचाया?

जयपुर में बवाल को लेकर दैनिक भास्कर में छपी ख़बर

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस के 7 जवान भी घायल हो गए। रविवार को भी अप्रिय घटना की सूचना आई थी, जब चार दीवार के पास स्थित शिव मंदिर में श्रद्धालुओं पर पथराव किया गया था। एक घायल पुलिसकर्मी ने बताया कि अचानक से कुछ लोग नारेबाजी करते हुए आए और पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। बीच-बचाव की कोशिश में कब उनका सिर फूट गया, उन्हें भी इसका पता नहीं चला। यह उपद्रव रात 2 बजे तक चला।

इस दौरान मृत सम्बन्धी की अस्थियाँ लेकर हरिद्वार जा रहे एक परिवार को बचाने के लिए एटीएस को एड़ी-चोटी का जोड़ लगाना पड़ा। प्रशासन द्वारा 10 थाना क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट ठप्प कर दिया गया है। घायलों का इलाज कराया जा रहा है।

Article 370: अलग-थलग पड़ा पाकिस्तान, गिलगित-बाल्टिस्तान हाथ से निकलने का सता रहा डर

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से गीदड़ भभकी पर उतरे पाकिस्तान की नींद गुलाम कश्मीर के लोगों ने उड़ा रखी है। गिलगित-बाल्टिस्तान के हाथ से निकलने के डर से वह सहमा हुआ है। जम्मू-कश्मीर के मसले पर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में वह अलग-थलग पड़ गया है। इतना ही नहीं, डूबती अर्थव्यवस्था, म​हंगाई और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी की वजह से घर के भीतर भी इमरान खान की सरकार की बात नहीं सुनी जा रही है।

सोमवार को बकरीद के मौके पर गुलाम कश्मीर के मुजफ्फराबाद पहुँचे पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कश्मीर के मसले पर राजनीतिक दलों से एकजुटता की अपील करते हुए कहा कि हमारे बीच मतभेद हैं। लेकिन, कश्मीर पर एकजुटता नहीं दिखाई तो हमें नुकसान हो सकता है। उनका इशारा बीते सप्ताह पाकिस्तानी संसद में भारत के खिलाफ प्रस्ताव की भाषा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच उभरे मतभेद को लेकर था।

गि​लगित-बाल्टिस्तान को प्रांत का दर्जा देने से जुड़े सवाल को लेकर उन्होंने कहा कि इससे कश्मीर पर पाकिस्तान के स्टैंड को नुकसान पहुॅंचेगा। उन्होंने कहा कि इस मसले पर कैबिनेट में चर्चा हुई थी। उन्होंने यह बात ऐसे वक्त में कही है जब पाकिस्तान से अलग होने की मॉंग को लेकर गि​लगित-बाल्टिस्तान में विरोध-प्रदर्शन जोरों पर है।

जम्मू-कश्मीर के मसले पर वैश्विक समर्थन नहीं मिलने को लेकर कुरैशी ने कहा, “हमें मूर्खों के स्वर्ग में नहीं रहना चाहिए। पाकिस्तानी और कश्मीरियों को यह जानना चाहिए कि कोई आपके लिए नहीं खड़ा है। आपको जद्दोजहद करना होगा।” इसके बाद उन्होंने कहा, ” जज्बात उभारना बहुत आसान है, मुझे दो मिनट लगेंगे। 35-36 साल से सियासत कर रहा हूँ, बाएँ हाथ का काम है। जज्बात उभारना आसान है, ऐतराज उससे भी आसान है। लेकिन, मसले को आगे की तरफ ले जाना कठिन है।”

कुरैशी ने आर्टिकल 370 पर दुनिया के अन्य देशों के पाकिस्तान से किनारा करने की बात को सामने रखते हुए कहा, “दुनिया के उनके साथ हित जुड़े हुए हैं। एक अरब की मार्केट है। बहुत से लोगों ने वहाँ इन्वेस्टमेंट कर रखे हैं। हम उम्मा की बात तो करते हैं, लेकिन कई मुस्लिम देशों ने भी वहाँ इन्वेस्टमेंट किया हुआ है। “

मम्मी रिटर्न्स पर शिवसेना: कॉन्ग्रेस दिल्ली का मीना बाजार, घूम रहे पुराने ग्राहक

सोनिया गाँधी के अंतरिम अध्यक्ष चुन जाने पर शिवसेना ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा है। शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस दिल्ली का मीना बाजार बन गई है, जहाँ सिर्फ पुराने ग्राहक घूमते नजर आते हैं। सामना में लिखा है, “73 वर्षीय सोनिया गाँधी को फिर कॉन्ग्रेस की कमान संभालने के लिए आगे आना पड़ा। सोनिया गाँधी बार-बार बीमार पड़ती हैं। इलाज के लिए उन्हें विदेश जाना पड़ता है। बीच-बीच में उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने की खबरें आती रहती हैं। ऐसी स्थिति में कॉन्ग्रेस का नेतृत्व करने का बोझ उन्हें उठाना पड़ रहा है, ये अमानवीय है।”

सामना का संपादकीय पृष्ठ

संपादकीय में आगे लिखा गया है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद राहुल गाँधी का कहना था कि कॉन्ग्रेस की नीति के अनुसार नए अध्यक्ष को चुना जाए, अध्यक्ष गाँधी परिवार के बाहर का हो। पार्टी गाँधी परिवार की बैसाखी त्याग अपने दम पर खड़ी हो। कुछ लोगों द्वारा प्रियंका गाँधी का नाम आगे लाते ही राहुल गाँधी ने उन्हें फटकार लगाई। कॉन्ग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगता रहा है और इसके लिए गाँधी परिवार को जिम्मेदार ठहराया जाता है। इसलिए राहुल गाँधी ने यह फैसला किया कि उनके निर्णय का सम्मान होना जरूरी है।

लेकिन 75 दिनों के बाद कॉन्ग्रेस को गाँधी परिवार के बाहर का अध्यक्ष नहीं मिला। 73 वर्षीय सोनिया गाँधी फिर पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष बन गई हैं। वर्तमान समय में कॉन्ग्रेस पार्टी में नेतृत्व की पहली पंक्ति अस्तित्व में नहीं है। मोतीलाल वोरा, अहमद पटेल, गुलाम बनी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे, एके एंटनी, ये सिर्फ टूटी हुई पंक्तियाँ हैं।

सामना में कहा गया है, “पूरा देश आर्टिकल 370 हटाए जाने का स्वागत कर रहा है, वहीं जीर्ण-शीर्ण कॉन्ग्रेस पार्टी 370 के मकड़जाल को अपने शरीर से दूर करने को तैयार नहीं है। उनकी पार्टी में ही इस पर दो-फाड़ हो गया है। ट्रिपल तलाक के संदर्भ में राजीव गाँधी द्वारा की गई भयंकर गलती को इस बार सुधारा जा सकता था, लेकिन कॉन्ग्रेस ने इतिहास की गलतियों से सीखने की तैयारी नहीं दिखाई। इसी कारण कॉन्ग्रेस पार्टी दिल्ली का मीना बाजार बन गई है। पुराने ग्राहक वहाँ घूमते नजर आते हैं सिर्फ इतना ही। कॉन्ग्रेस के पतन के लिए मोदी-शाह जिम्मेदार न होकर वे खुद ही जिम्मेदार हैं। 73 साल की सोनिया गाँधी के कंधों पर भार सौंपकर कॉन्ग्रेस ने बचा-खुचा सत्व भी गँवा दिया है।”

J&K पर अफवाह फैलाने वाले हैंडल्स को सस्पेंड करो: केंद्र की Twitter को दो टूक

सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार अफवाहें फैला कर यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि जम्मू-कश्मीर में कुछ भी ठीक नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्यपाल सतपाल मलिक ने साफ़-साफ़ बताया है कि राज्य में वातावरण शांतिपूर्ण है और माहौल सामान्य है। बकरीद भी घाटी में शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया। इन सबके बवजूद ट्विटर पर कुछ एकाउंट्स से लगातार अफवाहें फैला कर एक ग़लत नैरेटिव पेश करने की कोशिश की जा रही है, जिससे माहौल बिगड़ सकता है।

गृह मंत्रालय ने ट्विटर को कुछ ऐसे एकाउंट्स की सूची दी है, जिनके द्वारा अफवाहें और ग़लत सूचनाएँ फैला कर जम्मू-कश्मीर में शांति और अस्थिरता के माहौल को बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इन एकाउंट्स की सूची में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का ट्विटर अकाउंट भी शामिल है। हालाँकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि इस अकाउंट को गिलानी द्वारा ही ऑपरेट किया जा रहा है। निम्नलिखित ट्विटर एकाउंट्स को सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया है:

1. @kashmir787 – वॉइस ऑफ कश्मीर
2. @Red4Kashmir – मदीहा शकील ख़ान
3. @arsched – अरशद शरीफ
4. @mscully94 – मेरी स्कूली
5. @sageelaniii – सैयद अली गिलानी
6. @sadaf2k19
7. @RiazKha61370907
8. RiazKha723

कई पाकिस्तानी ट्विटर हैंडल भी सोशल मीडिया का ग़लत इस्तेमाल करते हुए ग़लत सूचनाओं को फैला रहे हैं। एनडीटीवी में प्रकाशित खबर के अनुसार, गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ये सारे ट्विटर हैंडल्स फेक न्यूज़ फैला रहे हैं और उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा से यह साफ़-साफ़ झलकता है कि उन्हें पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई और पाक फ़ौज द्वारा ऑपरेट किया जा रहा है।

कश्मीर रेंज के इंस्पेक्टर जनरल स्वयं प्रकाश ने बताया कि ये ट्विटर हैंडल्स जम्मू कश्मीर से ऑपरेट नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि ग़लत सूचनाओं पर यकीन न करें। ट्विटर के प्रवक्ता ने कहा कि कम्पनी द्वारा किसी भी हैंडल पर टिप्पणी उनके प्रिवेसी से जुड़े नियम-कायदों के विपरीत है। ट्विटर ने कहा कि कम्पनी को दिए जाने वाले सभी वैधानिक रिक्वेस्ट्स को साल में दो बार ‘ट्विटर ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट’ के तहत प्रकाशित किया जाता है।

कॉन्ग्रेस के सहयोगी वाइको बोले: 100वें स्वतंत्रता दिवस पर भारत में नहीं होगा कश्मीर

दक्षिण भारत के राजनीतिक दल MDMK के मुखिया वाइको ने एक शर्मनाक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि देश जब आजादी की 100वीं वर्षगांठ मना रहा होगा, उस समय कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रह जाएगा। MDMK का कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन है।

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “जब भारत 100वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा होगा तो कश्मीर भारत का भाग नहीं होगा। भाजपा ने कश्मीर को गड्ढे में धकेल दिया है। मैं कश्मीर को लेकर पहले भी अपने विचार रख चुका हूँ। मैंने कश्मीर मुद्दे को लेकर भाजपा पर 70 फीसदी और कॉन्ग्रेस पर 30 फीसदी हमला किया था।”

साथ ही उन्होंने तिरुवन्नमलई जिले में अपनी पार्टी के एक समारोह को संबोधित करते हुए ये भी कहा कि उनकी पार्टी डीएमके के फाउंडर सीएन अन्नादुरई की 110वीं जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करेगी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी 5 अगस्त को जब अनुच्छेद 370 हटाए जाने का संकल्प राज्यसभा में मोदी सरकार के नेतृत्व में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया था तब वाइको ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा था कि यह दुख भरा दिन है और कश्मीर के लोगों से किया गया वादा तोड़ दिया गया है। इस दौरान
वाइको ने कश्मीर के महाराजा हरि सिंह द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू से माँगी मदद का भी जिक्र किया था।

वाइको को चेन्नई की एक अदालत लिट्टे का समर्थन करने पर देशद्रोह का दोषी करार दे चुकी है। एक साल की सजा सुनाते हुए उन पर 10,000 जुर्माना लगाया गया था। हालाँकि बाद में उनकी सजा पर रोक लगा दी गई थी।

एमडीएमके चीफ़ ने पिछले महीने हिंदी को लेकर भी विवादित बयान दिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और अधिकतर सांसदों के हिंदी बोलने पर आपत्ति जताई थी और कहा था, “आज संसद में हिंदी की वजह से बहस का स्तर गिर गया है। वे सिर्फ हिंदी में चिल्लाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हिंदी में ही संसद को संबोधित करते हैं। मेरी नजर में हिंदी बोलने के पीछे प्रधानमंत्री की भावना हिंदी, हिंदू, हिंदू राष्ट्र की है। “

Article 370: राहुल गाँधी ने कहा- कश्मीर के हालात खराब, राज्यपाल बोले- विमान भेजूँगा, खुद आकर देख लें

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सतपाल मलिक ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाए जाने के बाद राहुल गाँधी के राज्य में हिंसा वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष को घाटी का दौरा कराने और जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए वह विशेष विमान भेजेंगे। बता दें कि, शनिवार (अगस्त 10, 2019) की रात राहुल गाँधी ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर से हिंसा की कुछ खबरें आई हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पारदर्शी तरीके से इस मामले पर चिंता व्यक्त करनी चाहिए।

राज्यपाल ने कश्मीर में हिंसा संबंधी कुछ नेताओं के बयान के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा, “मैंने राहुल गाँधी को यहाँ आने का न्योता दिया है। मैंने उनसे कहा है कि मैं आपके लिए विमान भेजूँगा ताकि आप स्थिति का जायजा लीजिए और तब बोलिए। आप एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं और आपको ऐसे बात नहीं करनी चाहिए।” साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी से कहा कि उन्हें अपने पार्टी के उन नेताओं के व्यवहार को लेकर शर्मिंदगी महसूस करनी चाहिए, जो संसद में मूर्ख की तरह बात कर रहे थे।

सतपाल मलिक ने कॉन्ग्रेसी नेता पी चिदंबरम द्वारा दिए गए सांप्रदायिक बयान पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है। राज्यपाल ने कहा कि अनुच्छेद 35 ए और अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान सबके लिए समाप्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लेह, करगिल, जम्मू, रजौरी, पूँछ या फिर कश्मीर में भी इसे खत्म करने में किसी तरह का कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है।

मलिक ने कहा कि इस मुद्दे को मुठ्ठी भर लोग हवा दे रहे हैं लेकिन वह इसमें सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा, “कुछ विदेशी मीडिया ने गलत रिपोर्टिंग करने का प्रयास किया, मगर हमने उन्हें भी चेतावनी दी है। सभी अस्पताल खुले हैं और एक व्यक्ति को भी गोली लगी हो, तो आप साबित कर दीजिए। जब कुछ युवक हिंसा कर रहे थे तो केवल चार लोगों को पैलेट से पैर में गोली लगी है,मगर इसमें कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है।”

कश्मीर को यातना शिविर में बदल देने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर राज्यपाल ने कहा कि शिक्षित होने के बावजूद लोग यातना शिविर का अर्थ नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि यह क्या है। राज्यपाल मलिक ने कहा कि वो 30 बार जेल गए हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने इसे यातना शिविर का नाम नहीं दिया था। आगे उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान कॉन्ग्रेस ने डेढ़ साल तक लोगों को जेल में बंद कर दिया था, लेकिन तब किसी ने उसे यातना शिविर नहीं कहा था। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐहतियातन गिरफ्तारी यातना शिविर के बराबर है?

आंध्र विभाजन कॉन्ग्रेस की भूल, इसने रेड्डी के राजनीतिक जीवन का अंत कर दिया: मणिशंकर अय्यर

विवादित बयानों के मसीहा मणिशंकर अय्यर एक बार फिर से नया विवाद लेकर लौटे हैं। अबकी उन्होंने अपनी ही पार्टी द्वारा आंध्र प्रदेश के विभाजन को कॉन्ग्रेस का ग़लत निर्णय करार दिया है। उन्होंने वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता जयपाल रेड्डी का राजनीतिक करियर ख़त्म होने के लिए भी इसी निर्णय को दोषी ठहराया। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी का निधन रविवार (जुलाई 28, 2019) को हो गया था। 4 बार विधायक और 7 बार सांसद रह चुके रेड्डी के निधन के बाद तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने उन्हें एक प्रखर वक्ता और असाधारण बुद्धिजीवी बताया था।

पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने रेड्डी के निधन के बाद शोक प्रकट करते हुए उन्हें तेलंगाना का महान बेटा कहा था। उन्होंने आइके गुजराल और मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में केंद्रीय मंत्री रहते हुए कई जिम्मेदारियाँ संभाली थीं। मणिशंकर अय्यर ने बयान देते हुए कहा है कि रेड्डी के राजनीतिक जीवन का अंत कॉन्ग्रेस के ग़लत निर्णय के कारण हुआ। 2019 लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को एक भी सीट न मिलने के लिए भी उन्होंने आंध्र विभाजन वाले निर्णय को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने इसे एक ‘रणनीतिक भूल’ करार दिया।

कॉन्ग्रेस ने 2014 में आंध्र प्रदेश का विभाजन किया था, जिसके बाद तेलंगाना के रूप में एक नया राज्य अस्तित्व में आया। हाल ही में जब अनुच्छेद 370 को लेकर संसद में बहस चल रही थी, तब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस को याद दिलाया था कि कैसे आंध्र प्रदेश का विभाजन अलोकतांत्रिक तरीके से किया गया था। शाह ने कहा था कि संसद में आंध्र विभाजन का बिल पारित कराने के लिए सारे दरवाजे बंद कर दिए गए थे और टीवी पर संसद की कार्यवाही का प्रसारण भी रोक दिया गया था।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने भाजपा अध्यक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि आंध्र प्रदेश का विभाजन राज्य की सभी नेताओं की राय लेकर किया गया था और वह ख़ुद उस प्रक्रिया में शामिल थे। उन्होंने शाह पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप मढ़ा था। आंध्र की सत्ताधारी पार्टी वाईएसआर कॉन्ग्रेस के सांसदों ने कहा था कि उनकी आपत्ति के बावजूद राज्य का विभाजन कर दिया गया। इसका जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष तिवारी ने दावा किया कि इस निर्णय के लिए आंध्र प्रदेश की विधानसभा की राय ली गई थी।

अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन करने वाले बिल को संसद में आंध्र प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियों टीडीपी और वाइएसआर कॉन्ग्रेस का समर्थन मिला। हालाँकि, हालिया लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भाजपा और कॉन्ग्रेस, दोनों ही प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। अय्यर के बयान के बाद आंध्र प्रदेश विभाजन से जुड़ा बहस एक बार फिर लौट आया है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा तोड़ी, Article 370 हटाने के लिए दे दी थी अपनी जान

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में कुछ असामाजिक तत्वों ने जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा तोड़ दी। घटना भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा इलाके की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने को लेकर मुखर्जी ने ही लड़ाई शुरू की थी। इसी दौरान जम्मू-कश्मीर में उनकी संदेहास्पद स्तिथियों में मौत हो गई थी।

शाहपुरा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज ने बताया कि मुखर्जी की मूर्ति को कुछ अज्ञात शरारती तत्वों ने रविवार (अगस्त 11, 2019) की रात तोड़ दिया। जाँच के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है, जल्द ही आरोपित पकड़ लिए जाएँगे।

मुखर्जी की मूर्ति तोड़ने की घटना से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में काफी आक्रोश है। इस घटना को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

पिछले दिनों केन्द्र की मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के देश में एक विधान, एक निशान व एक प्रधान के सपने को पूरा किया है। पुलिस स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर प्रतिमा क्षतिग्रस्त करने वालों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।