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नान-रोटी के भाव से जूझता पाकिस्तान देख रहा है हिन्दुस्तान का एयर स्पेस बंद करने का ख्वाब

मुल्क के तौर पर पाकिस्तान की वही हालत है जैसे एक गली का लौंडा यह नहीं समझ पाता कि लड़की उसे हँस के देख रही है या देख के हँस रही है। अपनी मूर्खता का प्रदर्शन करने के बाद उसके चर्चित हो जाने को पाकिस्तानी किसी तमगे की तरह लटका कर घूमने भी लगते हैं। ऐसी ही एक मूर्खता फ़िलहाल अभी पाकिस्तान में चालू है।

कश्मीर में अनुच्छेद-370 के कुछ प्रावधानों के निष्क्रिय होने के बाद से कश्मीर को हाथ से जाता हुआ देख पाकिस्तानियों को ज़ाहिर तौर पर सदमा लगा है। और इसी सदमे की प्रतिक्रिया में इमरान खान सरकार ने समझौता एक्सप्रेस बंद करने, भारत से राजनयिक सम्बन्ध का स्तर कम करने, अपनी वायुसीमा बंद करने जैसे कदम भी उठाए हैं। जिनका आखिर में नुकसान हमेशा की ही तरह पाकिस्तान को ही उठाना पड़ेगा। लेकिन इस बीच कुछ पाकिस्तानियों ने हिन्दुस्तान के एयरस्पेस को भी बंद करने का अरमान पालना भी शुरू कर दिया। शुरूआत करने वाले इस जीनियस असद उल्ला ने लिखा:

असद उल्ला के हिसाब से बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद जब पाकिस्तान ने हिंदुस्तानी हवाई जहाजों के लिए अपना एयर स्पेस बंद कर दिया था, तो हिंदुस्तान को ₹491 करोड़ का नुकसान हुआ। उनका मानना है कि इसी प्रक्रिया को फिर से करने के लिए इस बार पाकिस्तान को हिंदुस्तान की एयर स्पेस बंद कर देनी चाहिए। उसने इसके लिए बाकायदा हैशटैग बनाया- #ShutDownIndianAirSpace

और पाकिस्तानियों ने इस मूर्खता को ट्विटर ट्रेंड भी बना दिया!

फिर क्या था, हिंदुस्तानी ‘twitteratti’ ने ShutDownIndianAirSpace हैशटैग के जमकर मजे लिए:

कुछ थोड़े ‘कम समझदार’ पाकिस्तानियों ने शंका जताई कि हिंदुस्तान की एयर स्पेस भला पाकिस्तान कहाँ से बंद करेगा, तो ‘नॉर्मल’ पाकिस्तानियों ने उन्हें समझा दिया। लॉजिक यह है कि अगर ‘जब मोदी के जहाज़ गुज़रेंगे तो ये इंडियन एयर स्पेस हुई न’।

अगर तकनीकी Terminology की बात परे भी कर दें, तो यह केवल पाकिस्तान की मूर्खता ही है कि उसे लगता है कि उसके किसी ‘प्रतिबंध’ का हिंदुस्तान की सेहत पर असर पड़ता है। इस एयर स्पेस प्रतिबंध की ही बात करें तो हालाँकि हिंदुस्तान आने-जाने वाले जहाजों का हवाई मार्ग लम्बा हो जाने से हमें ₹400 करोड़ अतिरिक्त खर्च ज़रूर करने पड़े, लेकिन इस दौरान पाकिस्तान को इसी कदम से ₹700 करोड़ का नुकसान वह किराया न मिलने से हुआ, जो वह उन हवाई जहाजों को अपने एयर स्पेस से गुज़रने देने की चुंगी के रूप में वसूलता था। इसके अलावा दोनों देशों की आर्थिक सेहत में ज़मीन-आसमान का अंतर है।

जहाँ हमारे लिए पैमाना यह है कि दुनिया की सबसे ताकतवर अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले हम कितनी तेज़ी से बढ़ रहे हैं, उन्हें अर्थव्यवस्था के कुल आकर में हम कितना आगे-पीछे कर पाएँगे, वगैरह, वहीं पाकिस्तान की विदेशी क़र्ज़ से कमर टूट रही है, जिससे बचने के लिए उसे दूसरे विदेशी कर्ज़ों की ही दरकार है। कभी वह चीन का क़र्ज़ गधे बेचकर उतारने की कोशिश करता है, कभी इमरान खान प्रधानमंत्री निवास की भैंसों की नीलामी कर ख़ज़ाने में पैसा लाने की कोशिश करते हैं।

ऐसे में यह कार्टून पाकिस्तान की हालत पर सटीक बैठता है:

Article 370: मोदी सरकार के फैसले को उमर अब्दुल्ला की पार्टी ने दी SC में चुनौती

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक दर्जे में बदलाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मोहम्मद अकबर लोन और हसनैन मसूदी ने अपनी याचिका में कहा है कि संसद द्वारा स्वीकृत कानून और इसके बाद राष्ट्रपति की ओर से जारी आदेश ‘असंवैधानिक’ है, इसलिए उन्हें ‘अमान्य एवं निष्प्रभावी’ घोषित कर दिया जाए।

लोन और मसूदी दोनों नेशनल कॉन्फ्रेंस के लोकसभा सदस्य हैं। लोन जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं। वहीं, मसूदी जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश हैं।

गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने से पहले केन्द्र सरकार ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला को नजरबंद कर दिया था। बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया था।

इससे पहले 8 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 पर राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। न्यायालय ने याचिकाकर्ता से कहा था कि अनुच्छेद 370 पर राष्ट्रपति के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर नियत समय पर ही सुनवाई होगी। यह याचिका वकील मनोहर लाल शर्मा ने दायर की थी।

बीते दिनों अनुच्छेद 370 के पहले खंड को छोड़कर बाकी सभी खंडों को समाप्त कर दिया गया था। इससे जम्मू कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा भी खत्म हो गया। साथ ही केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर दिया है। मोदी सरकार के दोनों ही फैसलों पर पिछले दिनों नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि वो सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

Article 370: ‘श्रीनगर में 20 लोगों के विरोध को विदेशी मीडिया ने बताया 10 हजार लोगों का प्रदर्शन’

अनुच्छेद 370 पर केंद्र सरकार के फैसले के बाद से मीडिया का एक वर्ग खासकर, कुछ विदेशी मीडिया संस्थान लगातार भ्रामक और विवादित ख़बरों को हवा दे रहे हैं। केंद्र सरकार ने शनिवार (अगस्त 10, 2019) को उन मीडिया रिपोर्ट्स को मनगढ़ंत बताया जिनमें शुक्रवार को श्रीनगर में 10,000 लोगों द्वारा विरोध-प्रदर्शन करने का दावा किया गया था। केंद्र ने इन रिपोर्ट्स को पूरी तरह गलत और आधारहीन करार दिया है।

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि हजारों लोगों के विरोध करने की खबरें गलत है। जुमे के मौके पर श्रीनगर और बारामूला में छिटपुट प्रदर्शन हुए थे, लेकिन इनमें 20 से ज्यादा लोग नहीं थे।

गृह मंत्रालय ने अपने ट्वीट में कहा कि रायटर्स और डॉन में छपी खबरों में इस तरह के दावे किए गए कि श्रीनगर में 10,000 लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। यह पूरी तरह मनगढ़ंत है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि हालाँकि, श्रीनगर और बारामूला में कुछ इस तरह के प्रदर्शन हुए, लेकिन इसमें भी 20 से अधिक लोग नहीं थे।


शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने प्रतिबंधों में ढील दी थी ताकि लोग मस्जिदों में नमाज अता कर सकें। साथ ही बकरीद की तैयारी भी कर सकें। इसके लिए जम्मू-कश्मीर के पाँच जिलों से सीआरपीसी की धारा-144 के तहत लागू निषेधाज्ञा हटा दी गई है। किश्तवाड़ एवं डोडा जिलों में कर्फ्यू में ढील दी गई है।

अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि राज्य में जनजीवन अब सामान्य हो रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जम्मू क्षेत्र के पाँच जिलों में स्कूल और कॉलेज खोल दिए गए हैं। सरकारी कार्यालयों में भी उपस्थिति बढ़ी है। 

सपा के पूर्व राज्यसभा सांसद संजय सेठ, सुरेंद्र नागर BJP में शामिल

समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद संजय सेठ और सुरेंद्र सिंह नागर बीजेपी में शामिल हो गए हैं। दोनों ने हाल ही में समाजवादी पार्टी और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दिया था। इस्तीफ़ा दिए जाने के बाद से ही इनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही थी। शनिवार (10 अगस्त) को दिल्ली स्थित बीजेपी दफ्तर में बीजेपी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में संजय सेठ और सुरेंद्र नागर बीजेपी का हिस्सा बने।

ग़ौरतलब है कि पिछले एक महीने में समाजवादी पार्टी और राज्यसभा से इस्तीफ़ा देने वाले संजय सेठ तीसरे सांसद हैं। वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष थे। साथ ही वे यूपी के बड़े बिल्डर्स में से एक हैं। ख़बर तो यह भी है कि वे मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव के बिज़नेस पार्टनर भी हैं। संजय सेठ द्वारा इस्तीफ़ा दिए जाने के बाद राज्यसभा में सपा के केवल 10 सांसद रह गए हैं। 

बता दें कि इससे पहले नीरज शेखर और सुरेंद्र नागर ने भी राज्यसभा और पार्टी से अपना इस्तीफ़ा दे दिया था। नीरज शेखर भी बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

ये रिश्ता क्या कहलाता है: बरखा दत्त के ट्वीट्स से हिन्दुस्तान को अमानवीय-हिंसक बता रहा PAK

मशहूर पत्रकार बरखा दत्त के लिए सरहद पार से खुशखबरी आई है। भारत के पत्रकारिता जगत में विश्वसनीयता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहीं बरखा को पाकिस्तान के अतिरिक्त इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (Addl IGP) ने ‘आईएसआई’ मार्का सर्टिफिकेट दिया है।

पाकिस्तान के Addl IGP डॉ. जमील अहमद ने ‘बेचारे कश्मीरियों के मानवाधिकार का हनन’ के अपने प्रोपगेंडा को हवा देने के लिए हिन्दुस्तान की सरकार को ‘अमानवीय’ करार देने वाले बरखा दत्त के ट्वीट को शेयर किया है। यह प्रोपगेंडा भारत के खिलाफ पाकिस्तान वर्षों से चला रहा है और बरखा के बयान कई मौकों पर उनके काम आए हैं।

‘फ़ोन लाइन खोलो, वरना तुममें इंसानियत नहीं’

ट्विटर पर साकिब यट्टू नामक कश्मीरी ने ट्वीट कर शिकायत की थी कि पाँच दिन से उन्हें अपने घर वालों की कोई खोज-खबर नहीं मिल पा रही है। उनकी अपनी माँ से आखिरी बार बात 4 अगस्त की रात को हुई थी। उसको आगे बढ़ाते हुए बरखा ने इस ‘information blockade’ (सूचनाओं की नाकेबंदी) को ‘अमानवीय’ करार दिया।

गौरतलब है कि आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी करने से पहले जम्मू-कश्मीर में एहतियातन कई कदम उठाए गए थे। इसी कड़ी में फोन और इंटरनेट सेवा भी बंद की गई थी।

सूचना गतिरोध मानवाधिकार हनन

बरखा दत्त ने पाकिस्तान को वही मौका दे दिया जिसकी वह सदैव तलाश में रहता है- दुनिया को यह दिखाने की कि हिंदुस्तान भी उसी की तरह हिंसक और अमानवीय है। जमील अहमद, जो कि सुक्कुर में पाकिस्तान के Addl IGP बनने से पहले CIA के कराची-प्रमुख रह चुके हैं (उनके ट्विटर bio के अनुसार), ने निम्न ट्वीट किया:

उन्होंने बरखा दत्त के ट्वीट के आधार पर हिंदुस्तान पर कश्मीर में गंभीर मानवाधिकार हनन करने का आरोप लगाया और हिन्दुस्तान के ‘पढ़े-लिखे, संयमित और सेक्युलर तत्वों’ से बरखा की बात सुनने और हिन्दुस्तान के खिलाफ आवाज़ उठाने की अपील की

और यह पहली बार भी नहीं है। बरखा के पाकिस्तानी मुरीदों में हाफ़िज़ सईद जैसा खूँखार जिहादी भी शामिल है, और बरखा अनेक बार पाकिस्तानियों के एजेंडे को हवा, आवाज़ और विश्वसनीयता दे चुकीं हैं। जिहादी बुरहान वानी को ‘हेडमास्टर का बेटा’ बताकर उसके लिए सहानुभूति पैदा करने की कोशिश भी बरखा ने ही की थी।

यह भी ध्यान देने की बात है कि ये वही बरखा दत्त हैं जो पुलवामा आतंकी हमले के बाद पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को शांति का मसीहा साबित करने की पुरजोर कोशिश करती देखीं गई थीं।

तीन तलाक: अपराध बनने के बाद पहली गिरफ्तारी, WhatsApp पर दिया था तलाक

दिल्ली के आजाद मार्केट से पुलिस ने एक व्यक्ति को तीन तलाक देने के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोपित के खिलाफ मुस्लिम महिला (प्रोटेक्शन ऑफ राइट ऑफ मैरिज) एक्ट 2019 के सेक्शन 4 के तहत केस दर्ज किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक तीन तलाक को अपराध घोषित करने वाले कानून के अमल में आने के बाद इस मामले में यह पहली गिरफ्तारी है।

नार्थ दिल्ली की डीसीपी नुपुर शर्मा ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा है कि शुक्रवार (अगस्त 8, 2019) को 29 वर्षीय रायमा याहिया ने बाड़ा हिंदू राव में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में रायमा ने कहा कि 24 नवंबर 2011 को उसका निकाह अतीर शमीम के साथ हुआ था। 23 जून को शमीम ने उसे व्हाट्सएप पर तीन तलाक दे दिया और साथ ही फतवा भी भेजा था। जिसके बाद मामला दर्ज कर शमीम को गिरफ्तार कर लिया गया।

https://www.youtube.com/watch?v=vDliG2miiA0

गौरतलब है कि तीन तलाक़ को अपराध बनाने वाले बिल पर हाल ही में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हस्ताक्षर किया था। 19 सितंबर 2018 के बाद जितने भी मामले तीन तलाक से संबंधित आए हैं, उन सभी का निपटारा इसी कानून के तहत किया जाएगा। कानून में इसके लिए कैद की सजा का प्रावधान भी है।

Fact Check: CM खट्टर ने नहीं दिया कश्मीर से लड़कियाँ लाने वाला बयान, देखें वीडियो

मीडिया ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयान को ग़लत तरीके से पेश किया। खट्टर ने हरियाणा में सुधरते लिंगानुपात की बात करते हुए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की सफलता की चर्चा की। इस दौरान मीडिया ने सीएम के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर इसे विवादित बयान बताया। कई मीडिया पोर्टल्स ने ख़बर प्रकाशित किया कि खट्टर ने कश्मीर से लड़कियों को बहू बना कर लाने की बात कही है। आपको बता दें कि यह फेक न्यूज़ है। न मुख्यमंत्री ने ऐसा कुछ कहा है और न ही उनके बयान का यह अर्थ था। आइए आपको बताते हैं कैसे मीडिया ने इस बयान के साथ छेड़छाड़ कर इसे पेश किया।

सबसे पहले जानते हैं कि मुख्यमंत्री ने कहा क्या था? लिंगानुपात व ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ’ की बात करते हुए खट्टर ने कहा कि हरियाणा का नाम पहले बदनाम था और यह बेटी मारने वाले प्रदेश के रूप में कुख्यात हो गया था। बेटियों को बचाने के लिए चलाई गई विभिन्न योजनाओं की सफलता पर बात करते हुए खट्टर ने बताया कि पहले हरियाणा में लिंगानुपात 850 था, अर्थात प्रति 1000 लड़कों पर 850 लड़कियों का अनुपात। वहीं अगर ताज़ा आँकड़ों की बात करें तो यह बढ़ कर 933 हो गया है, जो दिखाता है कि इस मामले में हरियाणा बड़े सुधार की ओर अग्रसर है।

लिंगानुपात के 850 ने 933 होने को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने एक बहुत बड़ा परिवर्तन बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी बुजुर्ग या नौजवान इस बात को समझ सकता है कि लिंगानुपात घटने पर भविष्य में बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा, क्योंकि लड़कियों की संख्या कम हो जाएगी और लड़कों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाएगी। इसके बाद अब मुख्यमंत्री के उस बयान पर आते हैं, जिसे लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सीएम ने कहा,

“हमारे धनखड़ जी ने कहा कि बिहार से (बहुएँ) लानी पड़ेंगी। अब कुछ लोग कह रहे हैं कि कश्मीर खुल गया, अब वहाँ से लेकर आएँगे। ‘मजाक’ की बातें अलग हैं। लेकिन समाज में लिंगानुपात ठीक होगा तो संतुलन बैठेगा।”

वीडियो को ध्यान से देखें और सुनें: खट्टर ने कुछ भी विवादित नहीं कहा, मीडिया ने ग़लत ख़बर चलाई

इस बयान को आप ऊपर संलग्न की गई वीडियो में भी सुन सकते हैं। दरअसल, खट्टर ने हरियाणा भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ओपी धनखड़ के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बिहार और हरियाणा के बीच एक सामाजिक गठबंधन के द्वारा हरियाणा में लिंगानुपात सुधारने की बात कही थी। ऐसा उन्होंने हरियाणा में बिहारी लड़कियों की ट्रैफिकिंग रोकने का निदान सुझाते हुआ कहा था।

अब देखिए कैसे खट्टर के इस बयान को लेकर उन पर निशाना साधा गया। खट्टर ने साफ़-साफ़ कहा कि ‘लोग ऐसा कह रहे हैं’ और ऐसे बयानों को ‘मजाक की बातें’ भी कहा लेकिन कई लोगों ने उन्हें ऐसे निशाना बनाना शुरू कर दिया, जैसे उन्होंने ही कश्मीर से लड़कियाँ लाने की बात कही हो। शेखर गुप्ता की ‘द प्रिंट’ की कॉरेस्पोंडेंट ज्योति यादव ने हरियाणा की लिंगानुपात को लेकर पूरे हरियाणा को ही निशाने पर लिया और वहाँ के लोगों को भला-बुरा कहा।

स्क्रॉल ने भी खट्टर के इस बयान को ग़लत तरीके से पेश किया, जिसे दक्ष प्रोपेगंडाबाज अशोक स्वेन ने शेयर करते हुए आरोप लगाया कि आरएसएस के लोग कश्मीरी लड़कियों को ‘सेक्स स्लेव’ बनाना चाहते हैं।

स्क्रॉल की फेक ख़बर के आधार पर अशोक स्वेन ने लगाया बड़ा आरोप

स्क्रॉल की इस ख़बर को हामिद मीर और अरशद शरीफ जैसे पाकिस्तानी पत्रकारों ने भी शेयर किया। कर्नाटक यूथ कॉन्ग्रेस नेता श्रीवत्स ने इस फेक न्यूज़ के आधार पर लिखा कि जनता को खट्टर जैसे नेताओं को नकार देना चाहिए।

‘द हिन्दू’ जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों ने भी फेक न्यूज़ को अपनी वेबसाइट पर जगह दी

जेएनयू के विवादित छात्र नेता उम्र खालिद भी पीछे नहीं रहे और उन्होंने लिखा कि खट्टर जैसे मुख्यमंत्री के रहते हमें ट्रॉल्स की कोई ज़रूरत ही नहीं है।

‘इंडिया टुडे’ ने भी फैलाया फेक न्यूज़

कॉन्ग्रेस नेता तहसीन पूनावाला तो एक क़दम और आगे बढ़ गए। उन्होंने सीएम खट्टर को ‘घिनौनी और विकृत मानसिकता वाला व्यक्ति’ बता दिया। कॉन्ग्रेस नेता ने एक मुख्यमंत्री को उस बयान के लिए अपशब्द कहे, जो बयान उन्होंने दिया ही नहीं था।

गिरोह विशेष के सदस्यों के कुछ अन्य ट्वीट्स पर नजर डालिए। बिना सच जाने और ख़बर की सच्चाई की पुष्टि किए बिना उन्होंने फेक न्यूज़ के आधार पर सीएम खट्टर को भला-बुरा कहना शुरू कर दिया। ये रहे ट्वीट्स:

कई मीडिया संस्थानों व पत्रकारों ने खट्टर के बयान को अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन से जोड़ा और संघ से लेकर भाजपा तक की मानसिकता पर सवाल खड़े किए। कॉन्सपिरेसी थ्योरी के एक्सपर्ट्स ने एक से बढ़ कर एक झूठ का सहारा लिया और अपनी मानसिकता का परिचय दिया। लेकिन, वीडियो के सामने आने के बाद उनकी पोल खुल गई।

वासिफ और वसाफ की हवस का शिकार बनी नाबालिग पीड़िता ने की खुदकुशी

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक नाबालिग रेप पीड़िता ने तानों से तंग आकर ख़ुदकुशी कर ली। पीड़िता का शव फंदे से लटका पाया गया। जब पुलिस ने उसे उतारने की कोशिश की तो परिजनों और पुलिस के बीच विवाद हो गया। पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए लोगों ने करीब डेढ़ घंटे तक हंगामा किया।


ख़बर के अनुसार, एसपी (पूर्वी) राजकुमार अग्रवाल, सीओ अनवरगंज सैफुद्दीन बेग पुलिस फोर्स के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने उचित कार्रवाई का आश्वासन देकर लोगों को शांत करवाया। उसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

कानपुर के रायपुरवा निवासी एक कारपेंटर की 13 वर्षीय नाबालिग लड़की को 13 जुलाई की रात सगे भाई वासिफ और वसाफ अगवा कर ले गए थे। उन्होंने अपने दोस्त श्यामू उर्फ़ सम्मू के साथ मिलकर नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। अगले दिन पीड़िता जब घर पहुँची तो उसने परिजनों को आपबीती सुनाई। इसके बाद परिजन उसे थाने ले गए।

परिजनों के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। कई चक्कर लगाने के बाद 27 जुलाई को रायपुरवा पुलिस न FIR दर्ज की, लेकिन आरोपितों को गिरफ़्तार नहीं किया। शुक्रवार (9 अगस्त) को क़रीब साढ़े आठ बजे जब घर के सभी सदस्य बाहर थे तो पीड़िता ने कमरे में जाकर दुपट्टे का फंदा बनाकर फाँसी लगा ली।

एसएसपी अनंत देव ने बताया कि पुलिस ने उन दो महिलाओं को गिरफ़्तार कर लिया है जिन्होंने पीड़िता को दुष्कर्म की बात पर ताना मारा था। उन्होंने बताया कि शायद पीड़िता ने महिलाओं द्वारा चिढ़ाए जाने और आरोपितों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न होने से आहत होकर यह कदम उठाया। फ़िलहाल, दोनों महिलाएँ हिरासत में हैं और पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

कॉन्ग्रेस नेता अपराधियों से भी बदतर: झारखंड प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार का इस्तीफा

झारखंड के प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सोनिया और राहुल गॉंधी सहित 10 कॉन्ग्रेस नेताओं को भेजे अपने इस्तीफे में उन्होंने पार्टी के अपने सहयोगियों को अपराधियों से भी बदतर बताया है।

कुमार ने कहा है कि उन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी को आगे ले जाने के लिए काफी ईमानदारी से कोशिश की। झारखंड में पार्टी की कमान संभालने की बाद वे पार्टी को एकीकृत और जिम्मेदार तरीके से आगे ले जाना चाहते थे, लेकिन चंद लोगों के निहित स्वार्थों के कारण ऐसा नहीं कर सके।

राजनीति में आने से पहले बतौर आईपीएस अधिकारी के अपने अनुभवों का जिक्र करते हुए इस्तीफे में उन्होंने कहा है, “मैं पुलिस वीरता पुरस्कार के सबसे कम उम्र के विजेताओं में से एक हूँ। जमशेदपुर में माफिया का सफाया किया। मैं आत्मविश्वास से कह सकता हूँ सबसे खराब से खराब अपराधी भी मेरे इन सहयोगियों से बेहतर दिखते हैं।”

डॉ. अजय ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि प्रदेश के अधिकांश नेता पार्टी के प्रति वफादार नहीं हैं। उन्होंने कहा है कि पार्टी के कुछ नेता जैसे सुबोध कांत सहाय, रामेश्वर उरांव, प्रदीप बलमुचू, चंद्रशेखर दुबे, फुरकान अंसारी और कई अन्य वरिष्ठ नेता केवल राजनीतिक पदों को हथियाने में लगे हैं। व्यक्तिगत लाभ के लिए पार्टी हित को ताक पर रखने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इनका सहयाेग न मिलने के बावजूद 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पिछले चुनाव की अपेक्षा 12 फ़ीसदी ज्यादा वोट हासिल किया था।

इस्तीफे में उन्होंने पार्टी कार्यालय में खुद पर हमला करवाने और गुंडों को रखने का आरोप भी प्रदेश के नेताओं पर लगाया है। उन्होंने कहा है कि सुबोधकांत सहाय जैसे तथाकथित कद्दावर नेता का प्रदेश पार्टी मुख्यालय में किन्नरों को उत्पात मचाने के लिए प्रोत्साहित करना बेहद स्तरहीन और घटिया हरकत थी। उन्होंने कहा कि तथाकथित वरिष्ठ नेता इन कामों के लिए तो पैसे खर्च करते हैं, लेकिन उनमें से एक भी 5,000 रुपए प्रति माह पार्टी हित में योगदान करने के लिए तैयार नहीं हैं।

साथ ही उन्होंने कहा है कि झारखंड के सभी वरिष्ठ नेता केवल अपने परिवारों के लिए लड़ते हैं। एक नेता अपने लिए बोकारो और बेटे के लिए पलामू से सीट चाहते हैं। एक नेता को भाई के लिए हटिया सीट चाहिए। दूसरा नेता घाटशिला से बेटी के लिए और खूंटी से खुद के लिए सीट चाहता है। एक अन्य नेता जामताड़ा से बेटे के लिए और मधुपुर से बेटी के लिए सीट चाहते हैं। एक नेता अब तक लड़े तमाम चुनाव हार कर भी गुमला से टिकट चाहते हैं। ये नेता आलाकमान की सहमति से बने गठबंधन का तभी तक समर्थन करते हैं जब तक उनकी अपनी सीट सुरक्षित रहती है।

Article 370: ब्रिटिश MP ने लेबर पार्टी के मुस्लिम सांसदों को बताया हिन्दू-विरोधी

ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को पत्र लिख कर अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार के फैसले को भारत का आंतरिक मुद्दा बताया है। सांसद ने लिखा है कि हम किसी अन्य देश के आंतरिक मसलों में हस्तक्षेप नहीं करते और भारत जैसे मित्र देशों के आंतरिक मुद्दों में तो बिलकुल नहीं। बॉब ने लिखा कि भारत सरकार ने देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार देने का निर्णय लिया है और क्या एक लोकतान्त्रिक देश में इस निर्णय का विरोध करना उचित है? उन्होंने इस बात पर नाराज़गी जताई कि लेबर पार्टी के कुछ सांसद इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।

सांसद बॉब ने याद दिलाया कि अनुच्छेद 370 हटाना भाजपा का चुनावी वादा था और उसे अपने घोषणा-पत्र के वादों को पूरा करने का पूरा हक है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि यह मोदी सरकार का दूसरा कार्यकाल है और लेबर पार्टी के सांसदों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह अबकी वह पिछली बार से भी अधिक मजबूत बहुमत लेकर सत्ता में आए हैं। सांसद बॉब ने पूछा कि क्या एक लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अपने वादे पूरा करने का अधिकार नहीं है?

बॉब ब्लैकमैन ने लिखा है कि भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 का प्रावधानों को ख़त्म करने और जम्मू-कश्मीर राज्य का पुनर्गठन करने से सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ होगी और राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने लिखा,

“70% बौद्ध जनसंख्या वाले लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश घोषित करना यह दिखाता है कि भारत सभी धर्मों व सम्प्रदायों के प्रति सहिष्णु रुख रखता है। लेबर पार्टी हिन्दू-विरोधी और भारत-विरोधी पार्टी बन गई है, जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र से हमारे संबंधों को बिगाड़ना चाहती है। हजारों कश्मीरी पंडितों को इस्लाम कबूल न करने पर या तो मार डाला गया था या फिर अपनी मातृभूमि से निकाल दिया गया। इस त्रासदीपूर्ण इतिहास को नजरअंदाज किए बिना भारत सरकार पर ‘जमीन छीनने’ और ‘हिन्दू नागरिकों को बसाने’ जैसे भड़काऊ आरोप लगाए जा रहे हैं।”

बता दें कि कुछ सांसदों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को पत्र लिख कर भारत सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने ब्रिटेन को भारत, कश्मीर और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की सलाह देते हुए लिखा था कि भारत कश्मीर पर कब्ज़ा करने का प्रयास कर रहा है। इन सांसदों ने मॉब लॉन्चिंग का भी रोना रोया और लिखा कि कश्मीर को नई दिल्ली ने गुलाम बना लिया है। पत्र लिखने वाले सांसदों में खालिद महमूद, फैसल राशिद, शबाना महमूद, मोहम्मद राशिद व अन्य शामिल थे।

इन मुस्लिम सांसदों ने भारत सरकार पर आरोप लगाया कि वह मुस्लिम बहुल कश्मीर में हिन्दुओं को बसा कर राज्य को हिन्दू बहुल बनाना चाहती है। संसद बॉब ब्लैकमैन ने इन मुस्लिम सांसदों के पत्र पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि कंजर्वेटिव पार्टी को लेबर पार्टी की विभाजनकारी नीति से बचना चाहिए और एकता को बढ़ावा देना चाहिए। बॉब ने सिख, यहूदी व जैन का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग सम्प्रदायों का सम्मान करने का और उन्हें बढ़ावा देने का भारत का पुराना इतिहास रहा है।