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सर, मर चुके सांसदों के बीच लोकतंत्र भी मर गया: तानशाही को आज ही के दिन स्वामी ने मारा था ‘तमाचा’

1976 में आज ही के दिन (10 अगस्त) हार्वर्ड में अर्थशास्त्र पढ़ाने वाले एक तमिल प्रोफेसर ने इंदिरा गाँधी की इमरजेंसी के मुँह पर ऐसा तमाचा मारा, वह भी ‘शेर की मांद’ संसद के भीतर, जिसकी झन्नाटेदार गूँज 43 साल बाद भी सुनाई पड़ रही है। सुब्रमण्यम स्वामी, जो कॉन्ग्रेस में उन दिनों भी वैसे ही ‘कुख्यात’ थे जैसे आज हैं, ने वाँछित होते हुए भी न केवल राज्य सभा में प्रवेश किया बल्कि सदन की कार्रवाई में टोका-टाकी भी की (ताकि सदन की कार्रवाई के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज हो जाए), और उसके बाद किसी के कुछ समझ पाने के पहले ही रफूचक्कर हो वापस अमेरिका लौट गए आपातकाल की कहानी NRI और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सुनाने।

पाँच दिन घर में रहे, बाहर पुलिस को खबर नहीं

जब इस दुःसाहस को अंजाम देने की योजना बनी तो उस समय स्वामी विदेश में थे। उनके नेटवर्क और बौद्धिक क्षमता को देखते हुए जेपी ने उन्हें ‘ज़मीनी लड़ाई’ से हटाकर NRI और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच आपातकाल की पोल खोलने के लिए विदेश जाने को कह रखा था। लेकिन जब योजना बन ही गई तो स्वामी भी स्वदेश आ ही गए- अपने खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस होते हुए भी।

वह अपने घर में टीवी रिपेयर वाले बन कर घुसे- पत्नी के साथ पहले ही सारी बात तय हो गई थी। समय चुना शाम 7.30 बजे का, जिस समय घर के बाहर उनका इंतज़ार कर रहे पुलिस वालों की ड्यूटी बदलती थी। जा रहे पुलिसकर्मी आ रहे पुलिसकर्मियों को बताना भूल गए कि अंदर एक टीवी वाला गया है टीवी ठीक करने, और इसलिए ‘केबिलवाले’ के न निकलने पर किसी को शक नहीं हुआ। इस तरह स्वामी पांच दिन घर में रहे।

छठे दिन वह बेधड़क अपनी कार में पत्नी के साथ संसद भवन पहुँचे। वहाँ एक पुलिस वाले ने उन्हें पहचान तो लिया लेकिन वे राज्य सभा सदस्य थे, इसलिए उन्हें गिरफ्तार करने के लिए उसने अपने एसपी को फोन करना चाहा। लेकिन स्वामी जानते थे कि उस दिन (10 अगस्त को) गाँधी जी के ‘अंग्रेज़ों भारत छोड़ो’ आंदोलन की सालगिरह के कार्यक्रम (जिसमें कॉन्ग्रेस के तत्कालीन ‘युवराज’ संजय गाँधी की रैली थी) के चलते वह पुलिस वाला अपने एसपी तक समय पर नहीं पहुँच पाएगा। स्वामी सीना तान कर अंदर घुस गए।

शोक-सभा में विघ्न

जब स्वामी अंदर पहुँचे तो उन्हें देख कर सभी लोग सन्नाटे में आ गए। वह राज्य सभा में थे, और इंदिरा गाँधी लोक सभा में थीं। राज्य सभा के सभापति बीडी जत्ती पिछले सत्र से अब के बीच में मृत सदस्यों की सूची पढ़ रहे थे। उनके खत्म करने से पहले ही स्वामी ने टोका, “सर, इस सूची में एक और नाम है। इन सत्रों के बीच लोकतंत्र भी मर गया है। इसलिए उसका नाम भी आपको शामिल करना चाहिए।”

उनको अनसुना कर जत्ती ने सभी सदस्यों को दो मिनट मौन धारण कर खड़े होने का निर्देश दिया। और स्वामी चल दिए। उनका काम हो चुका था। उनकी बातें सदन की कार्रवाई में दर्ज थीं, और तारीख गवाह बन चुकी थी कि अपने खिलाफ वॉरंट, पूरे देश की पुलिस और इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस होने के बावजूद सुब्रमण्यम स्वामी न केवल सदन में आए, बल्कि लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा भी, और फिर भी इंदिरा की पुलिस उन्हें नहीं पकड़ पाई।

पुलिस को फटकार कर पकड़ी ट्रेन

यूथ कॉन्ग्रेसियों जैसे कपड़े पहन कर स्वामी ने टैक्सी की और रेलवे स्टेशन पहुँचे, जहाँ उन्हीं को पकड़ने के लिए भारी मात्रा में पुलिस इकट्ठा थी- इस उम्मीद/अंदेशे में कि वे भागने की कोशिश इधर से ही करेंगे। स्वामी ने एक सब-इंस्पेक्टर से ही कहा, “मेरी ट्रेन निकलने वाली है आगरा।” स्वामी को कॉन्ग्रेसी समझ उस सब-इंस्पेक्टर ने खुद उन्हें पुलिस के पार ट्रेन तक पहुँचाया।

छिपते-छिपाते स्वामी जब मथुरा होते हुए माटुंगा (मुंबई) पहुँचे तो वर्तमान रेल मंत्री पीयूष गोयल के पिता वेद प्रकाश गोयल के घर नाश्ता किया। नेपाल के तत्कालीन सम्राट बीरेंद्र हार्वर्ड में स्वामी के छात्र रह चुके थे। उन्होंने वादा किया था कि स्वामी कैसे भी अगर एक बार नेपाल की सीमा में पहुँच जाएँ तो उनके नेपाल से अमेरिका जाने का इंतज़ाम हो जाएगा।

रॉयल नेपाल एयरलाइन्स के हवाई जहाज में एक कंटेनर में छिप कर नेपाल पहुँचे स्वामी ने वहाँ से बैंकाक की फ्लाइट की, और बैंकाक से अमेरिका। इधर झेंपी हुई इंदिरा सरकार ने न केवल उनके सिर पर ईनाम रख दिया, बल्कि उन पर आरोप भी लगाया कि सांसदों के भत्ते लेने के लिए उन्होंने किसी और से अपने जाली हस्ताक्षर कराए। लेकिन इतनी फजीहत के बाद भी वह स्वामी को गिरफ्तार नहीं कर पाई।

राज्य सभा की कार्रवाई का 10 अगस्त, 1976 का वह पेज, लोकतांत्रिक गणतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

पाकिस्तान में 300 रुपए किलो हुआ टमाटर, भारत से निर्यात बंद होने के रुझान शुरू

कश्मीर पर बौखलाहट पाकिस्तान को भारी पड़ने लगा है। भारत से निर्यात पर रोक के कारण पाकिस्तान में टमाटर के दाम एकबार फिर आसमान छू रहे हैं। टमाटर की कीमत 300 रुपए प्रति किलो तक पहुँच चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय किसानों और व्यापारियों ने भी पाकिस्तान को अपने सामान निर्यात करने से मना कर दिया है। साथ ही, सरकार ने भी कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 200% कर दी है। इसकी वजह से खस्ताहाल पाकिस्तान में टमाटर का भाव 300 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुँच गया है।

आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से पाकिस्तान को कुछ सूझ ही नहीं रहा है। वह ऐसे फैसले ले रहा है, जो आत्मघाती साबित हो रहे हैं। सिर्फ सामरिक ही नहीं, आर्थिक मोर्चे पर लिए फैसले भी पाकिस्तान को नुकसान पहुँचा रहे हैं।

भारत की तरफ से रोजाना हरी सब्जियों और खासतौर पर टमाटर की एक बड़ी मात्रा पाकिस्तान भेजी जाती थी जिस वजह से वहाँ सब्जियों के दाम नियंत्रित रहते थे। लेकिन पाकिस्तान सरकार के कारोबार रोकने के फैसले के बाद अब भारत से टमाटर की सप्लाई खत्म हो गई है और भाव आसमान छूने लगे हैं।

इससे पहले पाकिस्तान ने समझौता एक्सप्रेस को रद्द करने का फैसला किया। उसके बाद बाघा बॉर्डर होकर जाने वाली दिल्ली-लाहौर बस सेवा को स्थगित कर दिया। इसके अलावा उसने भारतीय उच्चायुक्त को भी भारत वापस भेजने का ऐलान किया। पाकिस्‍तान में भारतीय उच्‍चायुक्‍त अजय बिसारिया आज पाक से वापस दिल्‍ली लौट जाएँगे। बिसारिया इस्‍लामाबाद से लाहौर के रास्‍ते अमृतसर आएँगे। 

इसी वर्ष 14 फरवरी को पुलवामा में आतंकी हमले के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच कारोबार निचले स्तर पर था। आतंकवादी घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान से आने वाली चीजों पर 20% कस्टम ड्यूटी कर दी थी। पुलवामा हमले के बाद जब भारत ने आतंकियों को ठिकाने लगाने के लिए पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक की थी, तो उस समय भारत सरकार ने पाकिस्तान से कारोबार पर रोक लगा दी थी जिसके बाद पाकिस्तान में सब्जी और टमाटर के दामों में भारी बढ़ोतरी हुई थी।

मिशन कश्मीर: जिहादी गढ़ ‘इस्लामाबाद’ की सड़कों पर घूमे डोवाल, मौलवियों की खैरियत पूछी

शोपियाँ के बाद राष्ट्र्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल घाटी में जिहाद के गढ़ माने जाने वाले अनंतनाग पहुँचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायज़ा लेने के साथ-साथ स्थानीय लोगों से बातचीत की। उन्होंने बच्चों से भी ठिठोली करते हुए पूछा कि स्कूल बंद होने से वे (बच्चे) तो खुश ही होंगे!

डोवाल मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों और वीडियो में न केवल आम लोगों से सड़कों पर मिलते नज़र आ रहे हैं, बल्कि उनके भेड़-मंडी का दौरा करने, दुकानों पर जाने आदि का भी जायजा लेने की ख़बरें आ रही हैं। उन्होंने कुछ मौलवियों से भी बातचीत की। ANI के वीडियो में डोवाल भेड़-विक्रेता से उसकी बिक्री के बारे में बात करते हुए नज़र आते हैं। यहाँ तक कि जब कुछ स्थानीय लोग उन्हें पहचान नहीं भी पाए तो डोवाल ने ठहाके लगाते हुए कहा, “नहीं, वो कोई बात नहीं है।” डोवाल की यह यात्रा सोमवार को बकरीद के पहले घाटी में तनाव को न्यूनतम करने की कोशिश का तौर पर देखी जा रही है।

मालूम हो कि 370 निष्प्रभावी होने और राज्य के दो केंद-शासित प्रदेशों में तब्दील होने के बाद से घाटी में हिंसक विरोध की आशंका बनी हुई है। इसी के चलते सरकार ने इंटरनेट और फ़ोन लाइनों समेत नागरिक संचार के लगभग सभी माध्यमों को निलंबित कर रखा है और घाटी, जम्मू और लद्दाख में हज़ारों की संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात हैं।

क्यों अनंतनाग?

हिन्दू देवता आदि शेषनाग के नाम पर अपना नाम पाने वाला अनंतनाग स्थानीय कट्टरपंथियों में ‘इस्लामाबाद’ के नाम से जाना जाता है। घाटी की हर दूसरी-तीसरी जिहादी घटना या तो इस जिले में ही घटती है, या इससे तार निकलते हैं। माना जा सकता है कि अगर घाटी में अर्धसैनिक बलों की तैनाती, संचार काटने जैसे कदम न उठाए गए होते तो शायद आज इस जिले में सर्वाधिक हिंसा हो रही होती।

शायद इसीलिए डोवाल ने बकरीद के ठीक पहले लगभग 98% (2011 जनगणना) मुस्लिम जनसंख्या वाले इस जिले को चुना। उनके दौरे में न केवल सीमा-पार से हिंसा भड़काने वालों बल्कि स्थानीय जिहादियों और कट्टरपंथियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि सरकार संवेदनशील इलाकों को सीधे ‘हैंडल’ कर रही है।

जिहादी दहशतगर्दी से निपटने में विशेषज्ञ माने जाने वाले पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी (operative) डोवाल ने 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किए जाने से पहले भी कश्मीर का दौरा किया था। इस संबंध में राज्यसभा से बिल पास होने के अगले ही दिन यानी 6 अगस्त को वे दोबारा जम्मू-कश्मीर पहुँचे। इसके बाद से वे राज्य में डेरा डालकर सुरक्षा प्रबंधों पर निगाह रखे हुए हैं।

कॉन्ग्रेस में इस्तीफ़ों का दौर जारी, अब गौतम रॉय, एस कुजूर ने छोड़ा हाथ

जहाँ एक तरफ़ कॉन्ग्रेस नया अध्यक्ष चुनने में लगी है, वहीं दूसरी तरफ़ पार्टी में इस्तीफ़ों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी कड़ी में असम के पूर्व विधायक और मंत्री गौतम रॉय तथा पूर्व राज्यसभा सांसद एस कुजूर ने अपना इस्तीफ़ा दे दिया।

गौतम रॉय के बारे में कहा जाता है कि बराक घाटी में उनका ख़ासा दबदबा है। वे तरुण गोगोई सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे थे। गुवाहाटी में उन्होंने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत कुमार दास से मुलाक़ात की। उन्होंने कहा कि वे जल्द भाजपा में शामिल होंगे।

कुजूर का राज्यसभा सांसद के रूप में कार्यकाल इस साल जून में समाप्त हुआ था। पार्टी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है, “मैं तुरंत प्रभाव से पार्टी की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे रहा हूंँ। यह पूरी तरह मेरा निजी फ़ैसला है। मैंने पार्टी के लिए 13 साल के ज़्यादा वक़्त तक काम किया है और देश की अहम राजनीतिक पार्टी से जुड़े रहना मेरे लिए ख़ुशी की बात है।”

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार (09 अगस्त) को झारखंड कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार ने इस्तीफ़ा दिया था। हाल ही में असम प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी (APCC) के पूर्व अध्यक्ष भुवनेश्वर कलिता ने भी राज्यसभा से इस्तीफ़ा दे दिया था। वे भाजपा में शामिल हो चुके हैं।

88 उग्रवादी करेंगे सरेंडर: केन्द्र सरकार से त्रिपुरा के अलगाववादियों का शांति समझौता

त्रिपुरा में अलगाववादियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय व राज्य सरकार के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया है। अलगाववादी संगठन ‘द नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (NLFT-SD)’ ने शनिवार (अगस्त 10, 2019) को ‘ मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट’ पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही इस उग्रवादी संगठन के 88 सदस्य अपने-अपने हथियारों के साथ 13 अगस्त को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर देंगे। NLFT-SD के सभी उग्रवादियों ने मुख्यधारा में लौटने की बात कहते हुए हथियार छोड़ने का संकल्प लिया।

अलगाववादी संगठन ने भारत के संविधान के प्रति आस्था भी जताई। इन उग्रवादियों को Surrender-cum-Rehabilitation Scheme, 2018 के तहत कुछ सुविधाएँ भी दी जाएँगी। त्रिपुरा सरकार आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों व उनके परिवारों के लिए शिक्षा और आवास की व्यवस्था करने में मदद करेगी। संगठन के नेताओं ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी मुलाकात की। हालाँकि, इस संगठन का एक धड़ा ऐसा भी है जिसने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया है। लेकिन सरकार सभी अलगाववादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए कार्य कर रही है।

सबीर देवबर्मा के नेतृत्व में चल रहा यह संगठन 1997 से ही गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधों के दायरे में है। इस संगठन ने भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए सीमा पार भी अपने कैम्प स्थापित कर रखे हैं। 2005-2015 के बीच कम से कम 317 ऐसे वारदात हुए, जिसके लिए इस संगठन को दोषी ठहराया गया। इन घटनाओं में 28 जवानों और 62 नागरिकों की जानें गईं।

बता दें कि हाल ही में हुए पंचायत चुनावों में भाजपा को राज्य में भारी जीत मिली है। त्रिपुरा की 116 जिला परिषद सीटों में से पार्टी को 114 सीटों पर जीत मिली। पंचायत समिति की 419 सीटों में से 411 पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया। इतना ही नहीं, ग्राम पंचायतों की 6111 सीटों में से 5916 पर भाजपा ने जीत की पताका लहराई है।

कश्मीरी बहू: राहुल गाँधी ने दी फेक न्यूज़ को हवा, बबीता फोगाट ने Wire की पत्रकार को लताड़ा

पहले मीडिया ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया। उसके बाद नेताओं और सेलिब्रिटीज पत्रकारों के बीच इस फेक न्यूज को हवा देने की होड़ लग गई। इनमें कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी और प्रोपगेंडा पत्रकारिता के लिए विख्यात The Wire की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी जैसे नाम शामिल हैं।

आरफा को तो इसके लिए हरियाणा की मशहूर पहलवान बहनों में से बबीता फोगाट ने लताड़ा। वहीं, राहुल को खुद खट्टर ने जवाब दिया। राहुल ने ट्वीट कर कहा, “महिला कोई संपत्ति नहीं है कि पुरुषों का उन पर स्वामित्व होगा। कश्मीरी महिलाओं के बारे में हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर की टिप्पणी निंदनीय है। यह दिखाता है कि आरएसएस का वर्षों का प्रशक्षिण एक कमजोर, असुरक्षित और दयनीय व्यक्ति की सोच को कैसा बना देता है।” जवाब में खट्टर ने उन्हें फेक खबर पर प्रतिक्रिया देने की बजाए अपने बयान का वीडियो देखने को कहा।

आरफा ने इस मामले में फोगाट बहनों को खट्टर की आलोचना के लिए ललकारा तो जवाब में बबीता ने कहा, “हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है जिसमें हमारी बहन-बेटियों के बारे में गलत बोला गया हो मेरी मीडिया से प्रार्थना है कि उनके बयान को गलत तरीके से जनता के सामने पेश ना करें।” इसके साथ ही बबीता फोगाट ने कहा कि अफवाह फैलाकर हरियाणा को बदनाम करने की कोशिश ना की जाए।

बिना संदर्भ के प्रोपेगंडा

दरअसल, खट्टर ने हरियाणा में सुधरते लिंगानुपात की बात करते हुए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की सफलता की चर्चा की। इस दौरान मीडिया ने सीएम के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर इसे विवादित बयान बताया। कई मीडिया पोर्टल्स ने ख़बर प्रकाशित किया कि खट्टर ने कश्मीर से लड़कियों को बहू बना कर लाने की बात कही है। मगर ये खबर गलत थी। असल में मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि हरियाणा का नाम पहले बदनाम था और यह बेटी मारने वाले प्रदेश के रूप में कुख्यात हो गया था। बेटियों को बचाने के लिए चलाई गई विभिन्न योजनाओं की सफलता पर बात करते हुए खट्टर ने बताया कि पहले हरियाणा में लिंगानुपात 850 था, अर्थात प्रति 1000 लड़कों पर 850 लड़कियों का अनुपात। वहीं अगर ताज़ा आँकड़ों की बात करें तो यह बढ़ कर 933 हो गया है, जो दिखाता है कि इस मामले में हरियाणा बड़े सुधार की ओर अग्रसर है।

इसके साथ ही आगे उन्होंने कहा, “हमारे धनखड़ जी ने कहा कि बिहार से (बहुएँ) लानी पड़ेंगी। अब कुछ लोग कह रहे हैं कि कश्मीर खुल गया, अब वहाँ से लेकर आएँगे। ‘मजाक’ की बातें अलग हैं। लेकिन समाज में लिंगानुपात ठीक होगा तो संतुलन बैठेगा।”

सीएम के इसी बयान को कुछ मीडिया समूहों ने तोड़-मरोड़ कर गलत तरीके से पेश किया। The Wire की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने भी बिना तथ्य और सच्चाई को जाने ही फेक न्यूज़ के आधार पर फोगाट बहनों को ललकार दिया। वैसे इस फेक न्यूज को सच मानने वालों में बरखा दत्त और स्वाति मालीवाल का नाम भी शामिल हैं।

थैंक्यू राहुल गाँधी, स्क्रॉल और अशोक स्वैन: पाकिस्तान

राहुल गाँधी के बयान को तो पाकिस्तान ने भी हाथों-हाथ लेकर अपने हिंदुस्तान-विरोधी प्रोपगेंडा में फिट कर दिया। पहले राहुल गाँधी ने खट्टर के खिलाफ झूठ फैलाया, जिसे स्क्रॉल ने लपक लिया। वहाँ से उठाया हिन्दू और हिंदुस्तानी नाम वाले लेकिन हिन्दुओं और हिंदुस्तान के लिए नफ़रत फ़ैलाने वाले अशोक स्वैन ने, और स्वैन को रीट्वीट किया पाकिस्तानी सेना के प्रोपेगंडाकार/इंटर-सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ़ गफ़ूर ने।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद की हु-तू-तू: लाखों मधुमक्खियाँ भी अपनी रानी चुनने में इतने नखरे नहीं करतीं

नेहरू-गॉंधी परिवार में ही आलाकमान की मूरत देखने की आदत ने कॉन्ग्रेस को अंदर से इतना खोखला कर दिया है कि वह अपना अध्यक्ष नहीं चुन पा रही है। बीते दिनों पार्टी ने ऐलान किया था कि 10 अगस्त को वह अपना नया अध्यक्ष चुन लेगी। लेकिन, कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की बैठक शुरू होने से पहले ही तमाशा शुरू हो गया।

खबर आई कि राहुल की इच्छा का सम्मान करते हुए पार्टी के पॉंच-पॉंच नेताओं की समिति बनेगी जो सभी राज्यों के प्रतिनिधियों से बात कर नया नेता चुनेगी। फिर बैठक शुरू हुई। कुछ देर बाद सोनिया गॉंधी अपने बेटे राहुल के साथ बाहर आईं और पत्रकारों से कहा ‘हम (सोनिया और राहुल) सहमति बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगे, इसलिए जा रहे हैं।’ थोड़ी देर बाद बैठक से लोकसभा में पार्टी संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी बा​हर निकले और कहा कि रात आठ बजे फिर से बैठक होगी और उम्मीद है कि नौ बजे तक पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा।

देश की सबसे पुरानी पार्टी में अध्यक्ष पद पर इतनी माथापच्ची तब हो रही है जब राहुल गॉंधी ने लोकसभा चुनाव के नतीजों के तत्काल बाद इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। मान-मनौव्वल से भी वे नहीं माने और तीन जुलाई को अपना इस्तीफा सार्वजनिक कर दिया। इसके बाद वयोवृद्ध मोतीलाल वोरा को अंतरिम अध्यक्ष बनाने की खबर आई जिसे वोरा ने खुद नकार दिया।

इस बीच, शशि थरूर, कर्ण सिंह और कैप्टेन अमरिंदर सिंह जैसे नेताओं ने प्रियंका गाँधी को अध्यक्ष बनाए जाने की वकालत की। यह दिखाता है कि कॉन्ग्रेस का कोई बुजुर्ग नेता हो या युवा, सभी गाँधी परिवार के पाश में ही जकड़े रहना चाहते हैं। मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे मिलिंद देवड़ा ने राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट या मध्य प्रदेश स्थित ग्वालियर के राजघराने से आने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को अध्यक्ष पद के लिए सबसे उपयुक्त बताया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में मुकुल वासनिक को आगे बताया गया क्योंकि उनका प्रशासनिक अनुभव अच्छा है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कॉन्ग्रेस ख़ुद को भाजपा के ‘शहजादा’ वाले हमले से बाहर निकालने की कोशिश में आंतरिक लोकतंत्र के नाम पर यह दिखावा कर रही है?

अनुच्छेद 370 से लेकर अन्य मुद्दों तक, पार्टी के बड़े नेतागण भी बँटे से नजर आए। राज्यसभा में बहुमत न होने के बावजूद भाजपा ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को ख़त्म करने सहित अन्य बिल पारित करा लिए। क्या इस बदले हालत में प्रियंका गाँधी जिम्मेदारी लेने से बच रही हैं?

सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर कॉन्ग्रेस नेता चाहे जितने सुझाव दे रहे हों लेकिन बैठकों का दौर चलने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकल पा रहा है। कॉन्ग्रेस की इस हु-तू-तू में ऐसा लग रहा है जैसे यह प्रक्रिया कभी ख़त्म ही नहीं होगी। इससे कम समय में तो लाखों मधुमक्खियाँ मिल कर अपनी रानी चुन लेती है, जितना समय कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी के इस्तीफे पर विचार करने में गँवा दिया। कॉन्ग्रेस की हालत आज मधुमक्खी के छत्ते से भी बदतर हो गई है।

कुछ ख़बरें ऐसी भी हैं कि आज अंतिम निर्णय न होने पर मैराथन बैठकों का दौर कल भी जारी रहेगा। थरूर ने ट्वीट कर सलाह दी है कि पार्टी पहले एक अंतरिम अध्यक्ष चुन ले और इसके बाद एक वृहद प्रक्रिया के तहत नया अध्यक्ष चुना जाए। उन्होंने कॉन्ग्रेस कार्यसमिति के चुनाव के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि वर्किंग कमिटी ने एक मत से राहुल गाँधी को अध्यक्ष बने रहने के लिए निवेदन किया लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे। सुरजेवाला ने बताया कि वर्किंग कमिटी ने राहुल को अध्यक्ष बने रहे और पार्टी को ‘नेतृत्व और मार्गदर्शन’ देना जारी रखने को कहा। बकौल सुरजेवाला, आज जब सरकार सारी संवैधानिक संस्थाओं को कब्जे में ले रही है, कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं को लगता है कि राहुल गाँधी इस ‘कठिन समय’ में इकलौते नेता हैं जो विपक्ष का चेहरा बन सकते हैं। सुरजेवाला के अनुसार, राहुल ने इस्तीफा वापस लेने से मना करते हुए कहा है कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिल कर काम करते रहेंगे।

कॉन्ग्रेस के नेता जिस तरह मीडिया और सोशल मीडिया में अपनी राय दे रहे हैं, पार्टी को एक ऑनलाइन मीटिंग ही बुला लेनी चाहिए, जिसका लाइव प्रसारण भी हो। लगता तो ऐसा ही है कि कॉन्ग्रेस की बैठकों में ये नेता अपनी राय नहीं रख पाते, तभी तो पार्टी के आंतरिक मुद्दों पर भी सोशल मीडिया से माध्यम से ही अपनी राय शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचाते दिख रहे हैं। सिद्धू ने इस तरीके को इतने जोर-शोर से आजमाया की कैप्टेन ने उन्हें मंत्रिमंडल से उखाड़ फेंका। अब देखना यह है कि राज्य के नेताओं, विधायकों, सांसदों और संगठन के पदाधिकारियों से राय लेने के बाद (जैसा कि राहुल गाँधी चाहते हैं), कहीं कॉन्ग्रेस कार्यसमिति कई दिनों की बैठकों के बाद नए अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए अंत में सोनिया गाँधी को ही न अधिकृत कर दे।

डॉन बृजेश सिंह के भतीजे MLA सुशील सिंह की थी हत्या की साज़िश, धोनी सहित 3 बदमाश हत्थे चढ़े

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के हाथ एक बड़ी क़ामयाबी लगी है। डॉन बृजेश सिंह के भतीजे और चंदौली के सैयदराजा क्षेत्र से बीजेपी विधायक सुशील सिंह की हत्या करने वाले शार्पशूटर्स को धर-दबोचा है। वाराणसी से तीनों शूटर पकड़े गए।

ख़बर के अनुसार, पकड़े गए बदमाशों में कुख्यात अपराधी शिव प्रकाश तिवारी उर्फ़ धोनी तिवारी भी शामिल है, जिस पर 1 लाख रुपए की इनामी राशि घोषित थी। इसके अलावा मनीष केसरवानी और अंजनी सिंह को गिरफ़्तार किया गया है। पुलिस ने बदमाशों के पास से पिस्टल, ज़िंदा कारतूस और तमंचे भी बरामद किए हैं। बदमाशों ने बताया है कि वे बीजेपी विधायक सुशील सिंह की हत्या की फिराक में थे।

ग़ौरतलब है कि शिव तिवारी साल 2011 में हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश संयोजक विष्णु दत्त ओझा की हत्या के मामले में भी आरोपित है। वहीं, मनीष केसरवानी और अंजनी सिंह पर भी मर्डर और डकैती के कई मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं।

एसएसपी (STF) सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज के मुताबिक़, “पुलिस को विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली थी कि बिहार के गैंगस्टर अमरनाथ चौधरी के इशारों पर धोनी और उसके सहयोगी बीजेपी विधायक की हत्या की साजिश रच रहे हैं। हालाँकि, अभी यह साफ़ नहीं है कि चौधरी बीजेपी विधायक को क्यों मरवाना चाहता था?”

उन्होंने कहा, “इसकी जानकारी मिलते ही 6 लोगों की टीम उन्हें पकड़ने के लिए लगाया गया। बदमाश बाइक पर सवार थे। भनक लगते ही वे भागने लगे। लेकिन उन्हें दबोच लिया गया। ”

भू-माफिया आज़म ख़ान पर जमीन हड़पने के 27 मामले दर्ज, जल्द हो सकती है गिरफ़्तारी

समाजवादी पार्टी के सांसद और भू-माफ़िया आज़म ख़ान की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। उनके सिर पर गिरफ़्तारी की तलवार लटक रही है। रामपुर के एसपी डॉक्टर अजय पाल ने बताया कि सपा सांसद आज़म ख़ान पर दर्ज मुक़दमों के आधार पर उनकी गिरफ़्तारी संभव है।

उन्होंने बताया कि जौहर अली यूनिवर्सिटी के लिए किसानों की ज़मीन हड़पने को लेकर आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ किसानों ने 26 मुक़दमे दर्ज कराए हैं। जिन किसानों ने यह मामले दर्ज कराए हैं, वो अब इलाहाबाद हाईकोर्ट तक जा पहुँचे हैं। एसपी ने बताया कि इससे पहले किसानों की तरफ़ से लगातार दर्ज हो रहे मामलों के बाद अब रामपुर शहर कोतवाली में आज़म ख़ान समेत चार लोगों पर शत्रु सम्पत्ति का मामला दर्ज हुआ है।

नायब तहसीलदार की तरफ से दर्ज किए गए इस मामले में आरोप लगाया गया है कि जौहर विश्वविद्यालय ट्रस्ट और आज़म ख़ान को फ़ायदा पहुँचाने के लिए दस्तावेज़ों में छेड़छाड़ की गई। इसके अलावा आज़म ख़ान पर महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी करने को लेकर दो मुक़दमे दर्ज हो चुके हैं। इन मामलों में जो धाराएँ लगाई गई हैं, वो उनकी गिरफ़्तारी के लिए पर्याप्त हैं।

बता दें कि सपा नेता आज़म ख़ान पर साल 2003 से लेकर 2005 के बीच 26 किसानों की ज़मीन हड़पने और उसे जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में शामिल करने का आरोप है। जानकारी के अनुसार, किसानों ने रामपुर के अजीम नगर थाने में आज़म ख़ान के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 323, 242, 447, 506 और 389 के तहत मुक़दमा दर्ज कराया है।

ख़बर के अनुसार, आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ ज़मीन हड़पने के मामले में कुल 27 मुक़दमे दर्ज हैं, इनमें 26 तो किसानों द्वारा दर्ज कराए गए हैं, जबकि एक मुक़दमा राज्य सरकार की तरफ़ से राजस्व निरीक्षक ने दर्ज कराया है। इसमें भी उन पर ज़मीन हड़पने का आरोप लगाया गया है।

Man Vs Wild: ‘मुसीबत के वक्त धैर्य नहीं खोते PM मोदी, यही बात उन्हें वर्ल्ड लीडर बनाती है’

12 अगस्त को मैन वर्सेज वाइल्ड का स्पेशल ऐपिसोड टेलीकास्ट होने वाला है, जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी मशहूर होस्ट और खतरों से खेलने वाले बेयर ग्रिल्स के साथ एडवेंचर करते हुए नजर आएँगे। शो टेलीकास्ट होने से पहले ग्रिल्स ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की है। ग्रिल्स ने बताया कि मोदी बीहड़ जंगल में मुश्किल हालातों के बीच भी सहज थे और उनके चेहरे की मुस्कान कभी गायब नहीं हुई।

समाचार एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में ग्रिल्स से जब पूछा गया कि उन्हें मोदी की क्या बात याद रहेगी? इस पर ग्रिल्स ने जवाब दिया कि वह पीएम मोदी की लगातार हो रही बारिश में भी उनके चेहरे की बड़ी मुस्कान के कायल हो गए। ग्रिल्स ने कहा कि वह काफी सहज और शांत इंसान हैं। लगातार बारिश में जब सीक्रेट सर्विस ने उनके लिए छाता निकालने की कोशिश की तो उन्होंने मना कर दिया और ग्रिल्स के साथ नदी की तरफ बढ़ गए।

इसके साथ ही ग्रिल्स ने आगे बताया, “हमें नदी पार करनी थी, मैंने हाथों से ही एक राफ्ट बनाई, लेकिन सीक्रेट सर्विस ने कहा कि पीएम को ऐसे नहीं ले जाया जा सकता क्योंकि इसमें खतरा है। इस पर भी पीएम ने उन्हें समझाकर अलग किया। इसके बाद जब हम हाथ से बनी उस छोटी राफ्ट पर थे तो वह डूबने लगी। तब मैं नीचे उतरा और राफ्ट को खींचने लगा। तब भी पीएम मोदी काफी शांत दिखे।”

पीएम मोदी के साथ शूट किए ऐपिसोड पर बात करते हुए ग्रिल्स ने कहा कि इसमें पीएम मोदी का वह रूप देखने को मिलेगा जो पहले कभी नहीं देखा गया होगा। ग्रिल्स ने कहा, “जब तक मुसीबत नहीं आती तब तक किसी का असली रूप आप जान नहीं सकते। यह देखकर अच्छा लगा कि पीएम मोदी जैसा वर्ल्ड लीडर मुश्किल हालातों में भी शांत और स्थिर रहते हैं और यही बात उन्हें वर्ल्ड लीडर बनाती है।”

बेयर ग्रिल्स ने आगे बताया, “पीएम मोदी एक ऐसे व्यक्ति हैं, जो पर्यावरण के बहुत बड़े संरक्षक हैं। यही वजह थी कि वो मेरे साथ इस यात्रा पर आए। उन्होंने असल में एक युवा शख्स के तौर पर जंगल में समय बिताया। मेरे लिए ये आश्चर्य की बात थी कि वो यहाँ कितने आराम और शांति से रहे।”

वहीं, शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को ‘मैन वर्सेज वाइल्ड’ के एपिसोड की झलक दिखलाता एक वीडियो जारी किया गया। ग्रिल्स मोदी को बाघ के संभावित हमले से बचने के लिए भाले जैसा हथियार देते हैं तो मोदी कहते हैं, “मेरे संस्कार किसी को मारने की इजाजत नहीं देते हैं, लेकिन फिर भी मैं आपके लिए इसे (भाले) पकड़ लेता हूँ।”