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Article 370 पर JNU में बगावत: भीड़ ने सेना को दी गालियाँ, खुद को हिंदुस्तानी मानने से किया इनकार

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले, अलग संविधान और अपना अलग कानून बनाने जैसी छूट देने वाले अनुच्छेद-370 का ‘पॉवर’ कल खत्म कर दिया गया। मोदी सरकार के इस फैसले ने कई विरोधियों के दिल पर चोट की। कुछ को हमने सदन में कपड़े फाड़ते देखा, तो कुछ को सोशल मीडिया पर बयानबाजी करते। लेकिन अब खबर है कि भारत सरकार के इस फैसले के ख़िलाफ़ दिल्ली स्थित जेएनयू में भी बगावती सुर उठते दिखाई दिए हैं।

दरअसल, खबरों की मानें तो सोमवार (अगस्त 5, 2019) की रात जेएनयू में सरकार के फैसले के ख़िलाफ़ ‘आजादी-आजादी’ के नारों की गूँज सुनाई दी। जानकारी के अनुसार कुछ लोगों ने अँधेरे में यहाँ जमकर नारेबाजी की और अनुच्छेद 370 को वापस लेने की माँग की। इस दौरान आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग के साथ इन लोगों ने सेना को लेकर भी काफ़ी अपशब्द बोले।

आजतक में प्रकाशित खबर के अनुसार लाल सलाम का नारा बुलंद करने वाले इन लोगों ने इस दौरान खुद को हिंदुस्तानी बताने से भी परहेज किया। साथ ही वे आधी रात के अँधेरे में मीडिया के कैमरे से बचते नजर आए।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ दिल्ली स्थित जेएनयू में हमें सरकार के फैसले के ख़िलाफ़ ऐसी गतिविधियों की खबर सुनने को मिल रही हैं, वहीं जम्मू विश्वविद्यालय में सोमवार को छात्र 370 खत्म होने का जश्न मनाते दिखे। केंद्र सरकार के इस फैसले से हर राज्य में खुशी का माहौल है, जिसमें तेलंगाना भी शामिल है। लोग अपने घरों के बाहर पटाखे फोड़कर अपनी खुशी का इज़हार करते कल नजर आए।

बता दें कि इससे पहले भी जेएनयू ऐसे ही कारणों के कारण 3 साल पहले भी सुर्खियों को हिस्सा बना था। जब 9 फरवरी 2016 को वहाँ जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत अन्य छात्र नेताओं ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी पर लटकाए जाने के विरोध में कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान एबीवीपी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने आरोप लगाया था कि यहाँ ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ और आतंकी ‘अफजल तेरे कातिल जिंदा हैं’, जैसे नारे लगे। जिसके बाद इस मामले पर बाकायदा कार्रवाई हुई। अभी फिलहाल इस मामले में दिल्ली की एक कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

‘अगर हिंदुस्तान सच में 370 को हटा, कश्मीर का पूर्ण विलय कर ले गया तो अब बात POK पर होगी’

ट्विटर पर जम्मू-कश्मीर के विभाजन और उसे केंद्र-शासित प्रदेश में तब्दील करने के साथ एक वीडियो घूमने लगा है। पाकिस्तानी टीवी चैनल के एक वीडियो में हिंदुस्तान में पाकिस्तान के उच्चायुक्त (हाई कमिश्नर) रह चुके अब्दुल बासित इस वीडियो में बताते हुए नज़र आ रहे हैं कि कैसे पाँच साल पहले ही भाजपा के नए-नए महासचिव बने राम माधव ने उन्हें बता दिया था कि 370 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। बासित यह भी बताते हैं कि राम माधव ने उन्हें सलाह दे दी थी कि हुर्रियत और अलगाववादियों के ज़रिए कश्मीर पर कब्ज़ा बनाए रखने की कोशिश छोड़ कर पाकिस्तान को अपने विकास पर ध्यान देना चाहिए।

इस वीडियो में बासित आगे यह भी बताते हैं कि कैसे अगर हिंदुस्तान सच में 370 को हटा कर कश्मीर का पूर्ण विलय हिंदुस्तान में कर ले गया तो ट्रम्प का कश्मीर मामले पर मध्यस्थता करना पाकिस्तान को ही महँगा पड़ेगा। उनके अनुसार एक बार जम्मू-कश्मीर के गैर-पाकिस्तानी हिस्से का अगर हिंदुस्तान में पूर्ण विलय हो गया तो फिर हिंदुस्तान के हिस्से का कश्मीर तो बातचीत का हिस्सा ही नहीं होगा। फिर बात केवल POK पर होगी।

अब्दुल बासित के इस बयान से यह साफ़ है कि भाजपा राष्ट्रीय सुरक्षा और खासकर कि कश्मीर के मुद्दे पर आंतरिक रूप से प्रतिबद्ध हमेशा से रही है- पाँच साल पहले से भाजपा के नए-नए बने महासचिव तक ने पाकिस्तानी सरकार को अपनी पार्टी और सरकार की स्पष्ट नीति बता दी थी।

‘राजनीति के लिए नेताओं ने 70 साल बनाए रखा, 370 को हटाकर देश में समानता लाने की कोशिश की गई’

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का मौलाना सैफ़ अब्बास ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में अनुच्छेद-370 की वजह से एक मुल्क़ में रहते हुए भी हम अजनबी थे। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि एक हिन्दुस्तान का नागरिक अगर हिन्दुस्तान की ही दूसरी जगह पर जाकर प्रॉपर्टी नहीं ख़रीद सकते और बिज़नेस नहीं कर सकता था तो ये चीज़ें सोचने वाली हैं।

मौलाना सैफ़ अब्बास ने कहा कि अनुच्छेद-370 को पहले ही हटा दिया जाना चाहिए था। राजनीति करने वाले नेताओं ने निजी स्वार्थों के लिए 70 साल तक इसे अस्तित्व में बनाए रखा गया। अनुच्छेद-370 को हटाकर देश में एक समानता लाने की कोशिश की गई है, जिसमें किसी के साथ भेदभाद किए जाने जैसी बातों को ख़त्म कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि इस भेदभाव वाली राजनीति के ख़त्म होने से केवल उन्हीं लोगों को दु:ख होगा जो भेदभाव वाली राजनीति करते थे। मौलाना अब्बास ने यह भी कहा कि हिन्दुस्तान एक है, संविधान एक है तो सब कुछ एक होना चाहिए। आगे भी ऐसे काम होते रहने चाहिए जिससे भेदभाव ख़त्म किया जा सके जिससे देश में एकता नज़र आए।

कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए मौलाना सैफ़ अब्बास ने कहा कि देश में अगर भेदभाव होगा तो उसका नुक़सान भी देश को ही होगा। ग़ौरतलब है कि अनुच्छेद-370 को ख़त्म करने का संकल्प पेश करने के साथ ही बीजेपी में ख़ुशी का माहौल है। देश भर के लगभग हर हिस्से में ख़ुशी मनाई जा रही है।

एकतरफ़ा फ़ैसले से कश्मीर की स्थिति नहीं बदल सकती, भारत का फ़ैसला हमें स्वीकार्य नहीं: पाकिस्तान

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 और 35-A के संदर्भ में मोदी सरकार द्वारा लिए गए फ़ैसले पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत का फ़ैसला हमें स्वीकार्य नहीं है। भारत की कोशिश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के संकल्पों और कश्मीरी लोगों की इच्छाओं के ख़िलाफ़ है।

पाकिस्तान ने कहा है कि वो भारत सरकार के इस फ़ैसले का विरोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करेगा। पाकिस्तान ने भारत के इस फ़ैसले पर कहा है कि कश्मीर का मुद्दा एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है। इसलिए भारत सरकार इस मसले पर एकतरफ़ा फ़ैसला नहीं कर सकता। ऐसा करने से कश्मीर का मुद्दा हल नहीं होगा, इसलिए यह फ़ैसला न तो पाकिस्तान को स्वीकार्य है और न ही जम्मू-कश्मीर के लोगों को स्वीकार्य है।

वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि भारत अगर अनुच्छेद 35-A से छेड़छाड़ करेगा तो इससे कश्मीर में समस्या बढ़ेगी। पाकिस्तान ने कहा है कि वो कश्मीरियों को अपना समर्थन देना जारी रखेगा।  

इसके अलावा पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़-पार्टी के अध्यक्ष एवं विपक्ष के नेता शहबाज़ शरीफ़ ने अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फ़ैसले की निंदा की और कहा कि यह ‘अस्वीकार्य’ और संयुक्त राष्ट्र के ख़िलाफ़ ‘देशद्रोह का कार्य’ था।

शहबाज़ शरीफ ने पाकिस्तानी नेतृत्व से तुरंत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से एक आपातकालीन सत्र की माँग की और चीन, रूस, तुर्की, सऊदी अरब और अन्य मित्र देशों के साथ परामर्श करने की भी माँग की।

‘गुलाम नबी आजाद Pak आतंकवादी से ज्यादा घिनौना, लोग पत्थर मारेंगे’ – बॉलीवुड एक्ट्रेस

जम्मू-कश्मीर पर नरेंद्र मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले का कॉन्ग्रेस, राजद समेत विपक्ष की कई पार्टियाँ विरोध कर रही हैं। मगर साथ ही सरकार को लोगों का समर्थन भी मिल रहा है। सोशल मीडिया पर जमकर इस विषय पर चर्चा हो रही हैl इसे लेकर कई कलाकार सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर कर रहे हैं। लोग प्रधानमंत्री को मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को ऐसा करने पर आभार व्यक्त कर रहे हैं।

सामाजिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखने वाली अभिनेत्री पायल रोहतगी ने ट्विटर पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ऐसा कर इतिहास रच दिया है। महान दलित नेता जो कि हमारे देश के राष्ट्रपति हैं, उन्होंने ये काम किया है। इस बारे में बात करते हुए पायल ने पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को शुक्रिया कहा। वहीं बीजेपी को वोट कर सत्ता में लाने वाले देशवासियों को धन्यवाद कहा।

इसके साथ ही पायल ने गुलाम नबी आजाद के द्वारा इस संदर्भ में किए गए ट्वीट को आड़े हाथों लेते हुए सोशल मीडिया पर एक ट्वीट किया हैl इसमें उन्होंने गुलाम नबी आजाद को पाकिस्तानी आतंकवादी से ज्यादा घिनौना बताया हैl उन्होंने गुलाम नबी आजाद के बयान को बकवास बताते हुए कहा कि अगर वो अनुच्छेद 370 में किए गए परिवर्तन पर इस तरह से बकवास करेंगे तो लोग उनके घर पर पत्थर फेंकने लगेंगे।

बता दें कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के सीनियर लीडर गुलाम नबी आजाद ने कहा कि आज का दिन भारतीय इतिहास का काला दिन है। बीजेपी की सरकार ने सत्ता के नशे में और वोट हासिल करने के लिए एक झटके में अनुच्छेद 370 के साथ 35A को खत्म कर दिया। इसके साथ खिलवाड़ कर यह बहुत बड़ी गद्दारी कर रहे हैं।

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि कानून से जुड़ाव नहीं होता है, जुड़ाव दिल से होता है। जिसका डर लोगों को था, आज वही किया गया है। ये देश के इतिहास के लिए काला दिन है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के इतिहास की शुरुआत वहाँ के प्रधानमंत्री के साथ हुई थी, लेकिन अब उसे लेफ्टिनेंट गवर्नर पर लाकर खत्म कर दिया है, ताकि वो चपरासी की नियुक्ति भी खुद कर सकें।

मुफ़्ती-अब्दुल्ला दोनों को लिया गया हिरासत में, महबूबा को ले जाया गया VIP गेस्ट हाउस हरि निवास

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की मुखिया महबूबा मुफ़्ती को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके साथ ही कश्मीर की दूसरी बड़ी मुख्यधारा की पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी हिरासत में ले लिए गए हैं। दोनों नेताओं की गिरफ़्तारी जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य से केंद्र-शासित प्रदेश बनने और अनुच्छेद 35 A के हटाए जाने के बाद की गई है।

पहले ही घर में नज़रबंद चल रहीं महबूबा मुफ़्ती को उनके घर से VIP गेस्ट हाउस हरि निवास ले जाया गया है। महबूबा मुफ़्ती ने 370/35A के न केवल पक्ष में बयान दिए थे, बल्कि उन्होंने देश-विरोधी और लोगों को भड़काने वालीं कई बातें ट्वीट भी कीं। मसलन उन्होंने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को न केवल अमान्य करार दिया था, बल्कि भारत को कश्मीर में ‘कब्जा की हुई ताकत’ (occupation force) भी बताया था। उन्होंने कश्मीर को ‘मुस्लिमों का राज्य’ भी बताया था

गौरतलब है कि आज राज्यसभा ने जम्मू-कश्मीर को विधानसभा वाला केंद्र-शासित प्रदेश बनाने और लद्दाख को उससे अलग एक केंद्र-शासित प्रदेश बनाने का बिल पास कराया है। इस बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल को जम्मू-कश्मीर में खूनखराबे के एक लम्बे दौर का अंत करने वाला बताया था।

उनकी गिरफ़्तारी से जुड़ा आदेश भी मीडिया को जारी किया गया है। पत्र में लिखा है कि उनके शब्दों व हरकतों, और राज्य पर उसके पड़ने वाले संभावित असर की आशंका को देखते हुए उन्हें एहतियातन गिरफ्तार किया जा रहा है।

इससे पहले रविवार रात को महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया था। उनके अलावा घाटी में अभी भी कई अलगाववादी नेता नजरबंद हैं। नजरबंद नेताओं में सज्जाद लोन समेत कई अलागवादी नेता और राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं। घाटी में पूरी तरह से मोबाइल, लैंडलाइन, ब्रॉडबैंड समेत सभी इंटरनेट सेवा शनिवार रात से ही बंद कर दिए गए थे। वहीं, घाटी में सभी अधिकारियों को सैटेलाइट फोन दिए गए हैं, ताकि आपस में बातचीत होती रहे।

370 का ‘पावर’ ख़त्म: लिबरल ‘महाभारत’ देख लिए तो अब Twitter पर पाकिस्तानियों की हालत देखिए…

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के प्रावधान को आज खत्म कर दिया गया। मोदी सरकार के इस फैसले ने जहाँ विपक्ष को बेचैन किया वहीं पाकिस्तान में भी उथल-पुथल मच गई। राजनेताओं से लेकर पाकिस्तान के कलाकार और आम जनता भी इस विषय पर अपना मत रख रहे हैं। इस खबर को पाकिस्तानी मीडिया अपनी हेडलाइनों में ब्रेकिंग बनाकर चला रहा है और जानकारी के मुताबिक वे इस फैसले को गैर-कानूनी और अवैध तक बता रहे हैं।

फैसला आने के बाद पाकिस्तान मीडिया की कवरेज:

डॉन की हेडलाइन– “भारत ने संसद में भारी विरोध के बीच कश्मीर का ख़ास दर्जा ख़त्म करने के लिए प्रस्ताव पेश किया।”

The Dawn का स्क्रीनशॉट औऱ उसमें कश्मीर मुद्दा

द नेशन की हेडलाइन– “भारत सरकार ने अपने संविधान से अनुच्छेद 370 ख़त्म करने का ऐलान किया”
पाकिस्तान टुडे– “अमित शाह के ऐलान के बाद जम्मू-कश्मीर में तनाव फैल गया है।”
द न्यूज़– “पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भारत के ‘अवैध’ कदम की निंदा करता है”

गौरतलब है इस प्रकार की मीडिया हेडलाइनों के साथ सोशल मीडिया पर अब भी कुछ पाकिस्तानी ‘कश्मीर हमारा है’ का नारा लगा रहे हैं तो वहीं कुछ ऐसे भी है जो इसके लिए पाकिस्तान प्रधानमंत्री से गुहार लगा रहे हैं।

पाकिस्तानी राजनेता,पत्रकार और कलाकारों के कश्मीर मामले पर रिएक्शन

इस मामले पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ने #KashmirBleeds के साथ ट्वीट किया है, वे लिखते हैं, “भारतीय कश्मीर में लोगों पर लगातार अत्याचार हो रहा है। अतिवादी भारतीय सरकार के इरादे साफ़ हैं। कश्मीर में भारत की आक्रामकता के मद्देनज़र राष्ट्रपति को संसद का संयुक्त सत्र तुरंत बुलाना चाहिए।”

वहीं बॉलीवुड से अपनी पहचान बनाने वाली पाकिस्तानी अदाकारा माहिरा खान इस मामले पर लिखती हैं, “क्या हमने पूरी तरह उन चीज़ों को भुला दिया है जिनके बारे में हम बात नहीं करना चाहते हैं? लेकिन ये सिर्फ़ रेत पर खिंची लकीरें नहीं है, ये मासूम लोगों के मारे जाने का सवाल है। जन्नत (कश्मीर) जल रही है और हम ख़ामोशी से रो रहे हैं। “

पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार हामिद मिर भी इस फैसले के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र को टैग करते हुए बताते हैं कि भारत सरकार ने अपने संविधान से अनुच्छेद 370 हटाने की कोशिश करके एक जंग छेड़ दी है।

पाकिस्तानी मीडिया न्यूज़ स्रोतों की मानें तो भारत में लिए गए इस बड़े फैसले के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जाने पर विचार कर सकता है। ‘द न्यूज’ अखबार के मुताबिक उनके मुल्क ने कश्मीर मुद्दे पर हमेशा सक्रिय पक्ष रखा है, इसलिए वे इसपर खामोशी नहीं बरत सकते।

पाकिस्तानी आवाम के ट्विटर पर रिएक्शन

इस समय पाकिस्तान की आवाम भी सोशल मीडिया पर जमकर अपना गुस्सा और भड़ास निकाल रही है। आमरा मेहदी नाम की पाकिस्तानी महिला ट्विटर पर लिखती हैं, “जिन्ना साहब माफी, पाकिस्तान के हमारे कथित प्रतिनिधि एक-दूसरे से लड़ाई करने और अपनी संपत्ति बढ़ाने में ही व्यस्त रह गए। आपका कश्मीर चला गया।”

जबकि नवीद नाम के दूसरे यूजर की मानें तो अब कश्मीर में हर शख्स अत्याचारी भारत के ख़िालफ़ उठ खड़ा होगा। यह कश्मीर की आजादी की शुरुआत भर है।

वकास अहमद कहते हैं कि मुस्लिम दुनिया को पंथ से ऊपर उठते हुए एक होना चाहिए और भारत पर कश्मीर में नरसंहार करने से रोकने के लिए दबाव बनाना चाहिए।

एक यूजर ने तो संयुक्त राष्ट्र पर सवाल उठाते हुए कहा, “मुस्लिम देशों के मंच ओआईसी और यूएन(संयुक्त राष्ट्र) जिस उद्देश्य से अस्तित्व में आए, वे कभी पूरे नहीं हुए।” इस यूजर के मुताबिर संयुक्त राष्ट्र अपना वादा नहीं निभा पाया। कश्मीर मुद्दे के न सुलझने के पीछे इस यूजर ने यूएन की नाकामी बताया और कहा अब उसे यूएन से कोई उम्मीद नहीं है।

कैप्टन मिर्जा नाम के यूजर ने तो सोशल मीडिया पर गुहार लगाई है कि उन्हें अब भारतीय प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और एक यूजर ने तो इमरान खान को टैग करते हुए ‘कुछ’ करने को कहा है। साथ ही कहा है कि अभी पता चलेगा कि इमरान खान रियल हैं या नहीं।

वहीं, उर्वा लिखती हैं, संयुक्त राष्ट्र अस्तित्व में ही क्यों है? कश्मीर विवादित मुद्दा रहा है और हाल ही में ट्रंप ने भी इसके बारे में बात की थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और ओआईसी को क्या हो गया है?

एक यूजर लिखते हैं कि अगर यूएन पाकिस्तान की समस्या नहीं सुलझा सकता तो पाकिस्तान को यूएन छोड़ देना चाहिए।

बता दें ऊपर लगाए गए सभी ट्वीट और 370 अनुच्छेद हटने के बाद आए रिएक्शन इस बात का सबूत है कि जिस अनुच्छेद के अस्त्तिव में होने से कश्मीर का विकास रुका हुआ था, उसके समर्थक भारत से लेकर पाकिस्तान में बैठे हुए थे। अब चूँकि केंद्र सरकार ने इस समस्या का निवारण कर दिया है तो उन सभी लोगों का दर्द छलक रहा है जो कश्मीर को पत्थरबाजों का कश्मीर बने रहने देना चाहते थे, जो चाहते थे कि कश्मीरी पंडितो को कभी न्याय न मिले। जिनका उद्देश्य था कि कश्मीर के नाम पर और भी लड़ाईयाँ सालों साल तक चलती रहें।

‘दिल पर पत्थर रख कर समर्थन कर रहे हो ना बौने’ – कुमार विश्वास ने केजरीवाल पर कसा तंज!

कश्मीर पर मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले को देश भर में समर्थन मिल रहा है। हालाँकि, कुछ लोग इस फैसले का विरोध भी कर रहे हैं, मगर ज्यादातर लोग इस फैसले का समर्थन करते ही नजर आ रहे है। इनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत मोदी सरकार के कई विरोधी भी शामिल है। अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार के फैसले पर ट्वीट करते हुए लिखा कि जम्मू-कश्मीर पर सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले का वो पूरी तरह से समर्थन करते हैं और उम्मीद करते हैं कि ये फैसला राज्य में शांति और विकास लाएगा।

सीएम के इस ट्वीट को यूजर ने आड़े हाथों लिया। आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल का नाम लिए बिना ट्वीट किया, “दिल पर चट्टान रख कर ट्वीट कर रहे हो ना बौने? हमने जब सेना के समर्थन में वीडियो बनाया तब तो अपने घर पर पालित अमानती कुत्तों से हमको घेर कर मारने की कह रहे थे,अब क्या हुआ? चादर फटी तो प्रसाद लूटने आ गए सबूत माँगने वाले? इतिहास का कूड़ेदान हर दग़ाबाज़ देशद्रोही की प्रतीक्षा में है।”

कुमार विश्वास के ट्वीट पर एक यूजर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केजरीवाल दिल्ली को पूर्णराज्य बनाने की माँग कर रहे थे और मोदी जी ने एक और केंद्र शासित प्रदेश खड़ा कर दिया।

इसके साथ ही उन्होंने एक और ट्वीट में लिखा, “अपनी यूनियन टैरिटरी को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के असंभव ख्वाब देखने वाले आत्ममुग्ध बौने को भी एक पूर्ण राज्य के यूनियन टैरिटरी में बदलने के प्रस्ताव का समर्थन करना पड़ रहा है, इसी को ‘खुदाई-जूता’ कहते हैं जो लगता भी है और रोने भी नहीं देता। चलो जलेबी खाओ।”



TV में निष्पक्षता के नाम पर होता है छल: यह न तो मीडियम है, न ही यहाँ काम करने वाले मीडियाकर्मी

किस्सा कुछ यूँ है कि एक राजा किसी देश पर बरसों से राज कर रहे थे। सालों में उन्होंने आस पास के कई इलाके भी जीत लिए थे और अपना वर्चस्व संधियों के जरिये भी बढ़ाया था। राजा वृद्ध हो चले थे तो जाहिर है उनके युवराज-राजकुमारी भी युवा हो चुके थे। युवराज के लिए समस्या वही अकबर-सलीम वाली थी। जैसे पचास साल राज करने वाला अकबर कब गद्दी छोड़ेगा, कब सलीम खुद राजा बन पाएगा- ये इंतज़ार सलीम से बर्दाश्त नहीं हुआ, वैसा ही युवराज का भी हाल था। वो भी सलीम की तरह राजा को मारकर राजा बनना चाहता था।

उधर बीतती उम्र में परेशान तो राजकुमारी भी हो रही थी। जैसे राजकुमार मन-ही-मन राजा की हत्या करके गद्दी हथियाने की सोच रहा था, वैसे ही उस रात राजकुमारी भी महावत के साथ भाग निकलने की योजना बना रही थी।

राजा साहब के लिए उधर एक दूसरी, अकबर वाली समस्या भी थी। वो बड़े राजा थे, तो जाहिर है बेटी का वैवाहिक सम्बन्ध भी बराबरी वालों में ही करना चाहते थे। इस वजह से राजकुमारी के लिए कोई उचित वर नहीं मिल रहा था।

एक आयोजन करके राजा साहब ने आस-पास के कई राजाओं-सामंतों और अपने गुरु को बुलवा लिया था। वो सोचते थे कई लोगों की सलाह से शायद वो राज्य से संन्यास लेने, सेवानिवृत्त होने के बारे में कुछ फैसला कर पाएँ। आयोजन था तो नाच-रंग का भी प्रबंध था, और राज्य की विख्यात नर्तकी को भी बुलाया गया था। सभा जमी थी तो पूरी रात ही नाच-गाने में बीत चली थी। इतने में सुबह होने से कुछ ही पहले नर्तकी ने देखा कि उसका तबालची ऊँघ रहा है। उसे जगाने के लिए नर्तकी ने इशारों में कहा,

“बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गई बिताय।
एक पलक के कारने, क्यों कलंक लग जाय।“

इतना सुनना था कि वहीं बैठे राजा के गुरु अपने आसन से उछल कर खड़े हुए और अपना इकलौता कम्बल तबलची को दान कर दिया। उसके बाद वो फौरन वन की ओर चल पड़े। उन्होंने सोचा जीवन पूरा तो साधना में बिताया, अंत समय में कहाँ मैं नर्तकी की महफ़िल में आ बैठा हूँ? उनके रवाना होते होते युवराज हाथ जोड़े खड़ा हो गया। उसे लगा आज मिले या कल, राज्य तो मेरा ही है, कहाँ जरा सी बेचैनी में मैं पिता की हत्या का कलंक सर पर लेने जा रहा था। राजकुमारी भी जरा-से लोभ में गलती करने का इरादा बदल कर उठी, उसने भी महावत के साथ भागने का इरादा बदला।

राजा ने सोचा बुढ़ापे में भी सिंहासन का लोभ छोड़ने के लिए मुझे इतने लोगों की सलाह चाहिए? पूरे जीवन तो मैं अपनी मर्जी से फैसले लेता रहा, आज तो धब्बा लगता। उसने भी मुकुट उतार कर युवराज के सर पर रख दिया। अपने गुरु के पीछे पीछे वो भी वन की ओर चला।

इतने तक की कहानी सुनाते आपको कई कथावाचक मिल जाएँगे। इसे थोड़ा बढ़ा चढ़ा कर अलग अलग रूप में सुनाया जाता है। भावविभोर होती हिन्दू जनता इसे सुनकर आह-वाह करती अश्रुधारा से पंडाल को सिक्त भी कर देती है। हमारे लिय ये कहानी यहाँ ख़त्म नहीं यहाँ शुरू होती है। ये संवाद यानी कम्युनिकेशन का सिद्धांत है। आप जो भी संवाद करते हैं उसका एक टारगेट ऑडिएंस (target audience) होता है। नर्तकी का टारगेट ऑडिएंस उसका तबालची था। बाकी लोगों के लिए ये संदेश था ही नहीं। उन्होंने जो अर्थ लिया वो सही मतलब नहीं था।

इसका ये मतलब तो कतई नहीं कि बाकी लोगों के लिए नर्तकी की बात का कोई मतलब नहीं निकला। सबने अपने अपने हिसाब से अर्थ तो निकाला ही। आपकी बात का भी ऐसा ही होता है। सुनने-पढ़ने वाले व्यक्ति की मनोस्थिति पर भी आपकी बात का निकाला गया अर्थ निर्भर करता है। वो क्या सोच रहा है, किस हाल में है, गुस्से में है, खुश है, इस पर भी आपके कहे का अर्थ निर्भर करेगा। मनोस्थिति का ठीक ना होना, संवाद में एक किस्म का नॉइज़ (noise) यानी शोर कहलाता है। मन का शांत होना सही अर्थ निकालने के लिए जरूरी है।

ये भी गौर कीजिए कि जिस तबालची को दोहा सुनाया गया था, उस पर क्या असर हुआ ये आपको कहानी से पता नहीं चला है। संवाद में हमेशा दो पक्ष होते हैं- सन्देश भेजने वाले के साथ सन्देश पाने वाले की भी बात होनी थी। कथा इस बारे में कुछ नहीं कहती। ये बिलकुल वैसा है जैसे टीवी, जो आप तक सन्देश तो पहुँचाता है, लेकिन उस सन्देश को आपने कैसे लिया इस बारे में सन्देश भेजने वाले चैनल को कुछ नहीं बताता। यानी टीवी एक कम्युनिकेशन का माध्यम- मीडिया नहीं है, ना ही उसके चैनल में काम करने वाले मीडियाकर्मी हुए।

तो कहा जा सकता है कि तबालची को सन्देश भेज रही नर्तकी अगर अपने दोहे का प्रभाव देखकर खुद को ईश्वरीय सन्देश प्रसारित करने वाला “नबी” घोषित करने लगे तो वो छल होगा। बिलकुल वैसे ही जैसे ब्रॉडकास्ट के माध्यम को कम्युनिकेशन का माध्यम बताने वाले जब खुद को मीडियाकर्मी बताकर “निष्पक्षता” का गुण “ओढ़ते” हैं तब छल होता है। बाकी शोर-शराबा तो सुनाई दे ही रहा है- कोई न कोई छल करने की कोशिश की जा रही है, ये भी समझ लीजिए।

370 का ‘पावर’ ख़त्म: मोदी सरकार के फ़ैसले के बाद देश में 28 राज्य और 9 केन्द्र शासित प्रदेश

जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में मोदी सरकार के आज के ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद भारत के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ दिया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज राज्यसभा में स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 (1) के अलावा अनुच्छेद 370 के सभी खंड हटाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर राज्य के पुनर्गठन के लिए विधेयक 2019 पेश किया। गृहमंत्री ने लद्दाख के लिए केंद्र शासित प्रदेश के गठन की घोषणा की। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यहाँ चंडीगढ़ की तरह विधानसभा नहीं होगी।

गृहमंत्री ने राज्यसभा में घोषणा की कि कश्मीर और जम्मू डिवीज़न विधानसभा के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा जहाँ दिल्ली और पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी। बता दें कि इस गृहमंत्री के इस विधेयक को राष्ट्रपति से मंज़ूरी मिल चुकी है। इसके साथ ही देश में एक राज्य (जम्मू-कश्मीर) घट गया और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 9 हो गई है।

कुल केन्द्र शासित प्रदेश:

  1. दिल्ली
  2. अंडमान और निकोबार
  3. चंडीगढ़
  4. दादरा और नगर हवेली
  5. दमन एवं दीव
  6. लक्षद्वीप
  7. पुडुचेरी
  8. जम्मू-कश्मीर
  9. लद्दाख

सरकार की घोषणा के बाद केंद्र शासित प्रदेशों की लिस्ट में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का नाम जुड़ गया है। वहीं, अब कुल राज्यों की संख्या 28 हो गई है।