केरल के तिरुवनंतपुरम में म्यूजियम थाने के पास शनिवार तड़के एक तेज रफ्तार कार ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। हादसे में वरिष्ठ पत्रकार की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि कार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के एक अधिकारी चला रहा थे जो नशे की हालत में थे। कार में एक महिला भी उनके साथ बैठी थी।
पुलिस ने बताया कि मलयालम दैनिक ‘सिराज’ के ब्यूरो प्रमुख के एम. बशीर (35) सड़क किनारे मोटरसाइकिल खड़ी कर उस पर बैठे हुए थे तभी तेज रफ्तार कार ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। बशीर की मौके पर ही मौत हो गई।
चश्मदीदों के अनुसार कार सर्वेक्षण विभाग के निदेशक श्रीराम वेंकटरमन चला रहे थे। हालॉंकि अधिकारी का कहना है कि कार उनके साथ बैठी महिला वफा फिरोज चला रही थी। पुलिस ने बताया कि आईएएस अधिकारी के बयान की जॉंच के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाली जाएगी।
दुर्घटना के चश्मदीद गवाह ऑटो चालक मणिकुट्टन ने बताया, IAS अधिकारी नशे की हालत में थे और उन्होंने पीड़ित को प्राथमिक उपचार देने की कोशिश भी की। श्रीराम पिछले हफ्ते हॉवर्ड में एक साल बिताने के बाद अमेरिका से लौटे थे। उन्हें 1 अगस्त को सर्वेक्षण और भूमि रिकॉर्ड के निदेशक के रूप में तैनात किया गया था। वह 2012 बैच में दूसरे स्थान पर थे।
सेना के इंटेलीजेंस विभाग और सैन्य पुलिस ने मिलकर हरियाणा के हिसार के कैंट इलाक़े से तीन जासूसों को गिरफ्तार किया है। तीनों जासूस भारतीय सेना की गतिविधियों को सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान भेज रहे थे। हिरासत में लिए गए जासूसों की पहचान उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के शेरपुर गाँव निवासी मेहताब (28 वर्षीय) और रागीब (34 वर्षीय) तथा शामली के मासाबी गाँव निवासी खालिद (25 वर्षीय) के रूप में हुई है।
ख़बर के अनुसार, आरोपितों के पास से मोबाइल मिले हैं जिसमें सेना की गतिविधियों से जुड़ी वीडियो क्लिप्स, व्हाट्सएप वॉइस और फोटोग्राफ बरामद किए गए हैं। खबर है कि तीनों आरोपित व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए पाकिस्तानी जासूसों से बात करते थे। इसी सन्दर्भ में और भी खुलासे होने की संभावना है।
दरअसल, तीनों आरोपित एक सप्ताह पहले ही कैंट इलाक़े में आए थे। कैंट इलाके में मेस बिल्डिंग का निर्माण कार्य चल रहा है, इसलिए एक सिविल कंस्ट्रक्शन कंपनी ने बतौर लेबर इन तीनों को काम पर रखा था।
पहले दिन से ही सेना को इन तीनों पर शक था और इसीलिए इनकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही थी। मिलिट्री इंटेलीजेंस की सूचना पर और इनकी संदिग्ध गतिविधियों पर मिलिट्री इंटेलीजेंस और सेना पुलिस दोनों ने ही इन पर नजर रखी। और जब इनका शक यकीन में बदल गया तब गुरुवार (1 अगस्त) रात गिरफ्तार कर लिया।
मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, तीनों आरोपितों ने काम पर लगने के साथ ही सेना के जवानों और कैंट क्षेत्र के अंदर की गतिविधियों को मोबाइल में रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया था। ये तीनों पाकिस्तानी जासूसों के लगातार सम्पर्क में थे और उन्हें सेना की गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएँ भेजते थे।
जम्मू-कश्मीर के शोपियां और बारामूला जिलों में शनिवार (अगस्त 3, 2019) को सुरक्षा बलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि एक अज्ञात आतंकवादी बारामूला जिले के सोपोर में मारा गया वहीं दूसरा शोपियां जिले में शुक्रवार से शुरू हुए अभियान के दौरान मारा गया।
शोपियां में ढेर हुआ जीनत जैश का टॉप कमांडर था। उसके पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य सामान बरामद हुए हैं। जीनत नायकू अपने एक साथी मंजूर भट के साथ यहाँ एक मकान में छिपा था। भट को सुरक्षाबलों ने शुक्रवार (अगस्त 2, 2019) को ही मार गिराया था।
Jammu and Kashmir: Top Jaish commander Zeenat Naikoo killed in Shopian encounter. pic.twitter.com/l1bb7YFwPo
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि बारामूला के सोपोर के वारपोरा इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने शनिवार सुबह घेराबंदी एवं तलाश अभियान शुरू किया। उन्होंने कहा कि इलाके में तलाशी अभियान के दौरान छिपे हुए आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं। बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई और इसमें एक आतंकवादी मारा गया। मारे गए आतंकवादी का संबंध किस समूह से था यह नहीं पता चल सका है।
Encounter updates.#Shopian..Another militant killed.#Sopore ..One militant killed. More details to follow.
उन्होंने बताया कि दनायकू पहले आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के साथ काम करता था। हिज्बुल के साथ काम करने के दौरान उसने कई बड़ी आतंकी साजिशें रची थी। जीनत पर कई आतंकी हमलों में शामिल होने का आरोप था और सुरक्षा एजेंसियों ने उसे A++ कैटिगरी का आतंकी घोषित करते हुए उस पर इनाम भी घोषित किया था।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने होर्डिंग लगाकर पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को ढक दिया। यह होर्डिंग प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष मोहन मरकाम के स्वागत में लगाया गया था। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद मरकाम पहली बार यहाँ आ रहे हैं।
नई दुनिया में छपी ख़बर
नई दुनिया में छपी ख़बर के अनुसार, मरकाम के आगमन पर उनके समर्थक इतने उत्साहित हो गए कि पंडित नेहरू को ही भूल गए। सड़कों-चौराहों पर उनके स्वागत में बड़े-बड़े पोस्टर्स लगाए गए। खुद का राजनीतिक हित साधने के चक्कर में शहर के एक चौराहे पर लगी नेहरू प्रतिमा को भी पोस्टर से ढक दिया।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ में 43% की कमी आई है और नए आतंकियों की भर्ती भी 40% गिरी है। पिछले साल के मुकाबले 2019 में जम्मू-कश्मीर में बॉर्डर पार से घुसपैठ और आतंकी घटनाओं में 28% की गिरावट दर्ज हुई है, जबकि आतंकियों को मारने में 22% की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही सेना के आतंकरोधी अभियान में 59% की वृद्धि हुई है। 14 जुलाई तक 126 आतंकी कश्मीर में मार गिराए गए थे।
सेना शुक्रवार को बताया था कि 83% आतंकियों का पत्थरबाजी का इतिहास होता है, 64% आतंकियों को सेना उनके आतंकी बनने के पहले साल में निपटा देती है, 7% तो पहले दस दिन में ही मारे जाते हैं। जाहिर है, सरकार ने जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई और हमारे सुरक्षाबलों ने बेहतरीन काम किया है।
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल ने बताया कि पिछले पाँच महीनों में घुसपैठ की कोई घटना नहीं हुई है। कुछ खबरों के मुताबिक सेना के अफसरों ने भी इस बात की पुष्टि की है। ऐसे में तो सैनिकों को वापस लेने की बात होनी चाहिए, क्योंकि खतरा घट रहा है फिर 38,000 सैनिकों को वहाँ भेजने की वजह क्या हो सकती है?
अमरनाथ यात्रा पर पाकिस्तानी आतंक का साया
अमरनाथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को तत्काल कश्मीर खाली करने का सरकारी फरमान सुनाया गया है। इस तरह श्रावण पूर्णिमा (15 अगस्त) को संपन्न होने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा करीब 13 दिन पहले ही समाप्त कर दी गई है। इस बीच, सुरक्षा बलों ने यात्रा मार्ग से पाकिस्तान में बनी बारूदी सुरंग और बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने सुरक्षा बलों के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, “खुफिया जानकारी मिली थी कि पाकिस्तान के आतंकवादी आईईडी का इस्तेमाल करके यात्रा को निशाना बना सकते हैं। इसके बाद खोजी अभियान चलाया गया था। इस दौरान भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। इनमें पाकिस्तान आयुध फैक्टरी के ठप्पे वाली एक बारूदी सुरंग और अमेरिकी एम-24 स्नाइपर राइफल भी शामिल है।” ढिल्लों ने संबंधित स्थान का खुलासा नहीं किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आईईडी का खतरा अंदरूनी भागों में अधिक है, नियंत्रण रेखा पर स्थिति कुल मिलाकर शांतिपूर्ण है।
एनआईटी वाली चिट्ठी
श्रीनगर के जिलाधिकारी डॉक्टर शाहिद चौधरी ने कहा कि अफवाहों के कारण सभी संस्थाओं को इससे सावधान रहने की सलाह दी गई है। किसी भी संस्थान को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया है। एनआईटी की नोटिस महज गलतफहमी है।
In wake of unstoppable rumours, heads of all institutions were advised in the day to remain careful. No advise/instructions for shutting down any institution. This NIT notice is apparently a miscommunication. pic.twitter.com/Og9WarThID
सोशल मीडिया पर शुक्रवार रात को एक चिट्ठी घूम रही थी जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) श्रीनगर ने अपने छात्रों से शनिवार सुबह तक घर लौट जाने को कहा था। श्रीनगर के जिलाधिकारी (डीएम) डॉक्टर शाहिद चौधरी ने बाद में इसे मिसकम्युनिकेशन करार दिया।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन का कहना है कि घाटी में ATM, स्कूल-कॉलेज से लेकर पेट्रोल पम्प पर भी माहौल सामान्य ही है। बेवजह की अफवाहें फैलाई जा रही।
Divisional Commissioner Kashmir, Baseer Ahmed Khan: No schools in the district have been closed. I appeal to people to not believe any rumours. People should contact their concerned deputy commissioners for reliable information #JammuAndKashmirpic.twitter.com/3HeOE2T2tG
श्रीनगर के डीएम चौधरी ने लोगों से कहा है कि जिले में जरूरत के सामानों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, इसलिए वह किसी भी अफवाह पर ध्यान नहीं दें और सामानों की जमाखोरी से बचें। शहर के पेट्रोल पंप में भारी भीड़ को लेकर उन्होंने कहा कि यहाँ पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल उपलब्ध है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘‘श्रीनगर में आवश्यक वस्तुओं जैसे खाना, पेट्रोल और दवाई पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। सड़कें खुली हुई हैं, इसलिए लोगों से आग्रह है कि वह अफवाहों पर ध्यान नहीं देकर सामानों की जमाखोरी से बचें।’’
In #Srinagar district we have sufficient stocks of all essentials including food, fuels and medicines. Roads are open, replenishment is routine. People are requested to avoid hoarding and panic shopping
अफवाहों का बाजार तब तेजी पकड़ने लगा जब प्रशासन ने अमरनाथ यात्रियों और पर्यटकों को जल्द ही घर वापस जाने का निर्देश दिया। आतंकी खतरे के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को समय से पहले खत्म करने की बात कही। लेकिन इससे जम्मू-कश्मीर के विपक्ष में ज्यादा भगदड़ और हलचल देखने को मिली है। 2 दिन के भीतर ही जम्मू-कश्मीर की सियासत भी गर्मा गई है।
विपक्षी दल आपात बैठक बुला रहे हैं। उनका भय जायज है, क्योंकि उन्हें अनुच्छेद 35-A को हटाने का भय सता रहा है। हालाँकि यह भी एक अफवाह मात्र है और सरकार की ओर से इस बारे में कोई भी बात नहीं की गई है। एक दिन पहले जहाँ पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मुलाकात की] वहीं शनिवार (जुलाई 03, 2019) को पूर्व सीएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला भी राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलने पहुँचे।
उमर अब्दुल्ला हों या फिर महबूबा मुफ़्ती हों, सभी लोग शुक्रवार से ही ट्विटर पर अचानक से सक्रिय हो गए हैं। उनका कहना है कि पिछले 24 घंटे में घाटी में जबरदस्त तनाव पैदा हो गया है।
अफवाहें या स्पेकुलेशन
अनुच्छेद 35-ए और 370 को हटाने की कोशिश: लेकिन इसके लिए सरकार को संसद की अनुमति तो लेनी होगी, या बताना तो होगा। यह मामला यूँ तो कोर्ट में है, लेकिन भाजपा के दोनों बार के मैनिफेस्टो में यह बात तो है।
अमित शाह और मोदी ने अपने बयानों और साक्षात्कारों में कई बार कहा है कि स्पेशल स्टेटस इस राज्य के विकास की राह को रोड़ा है। उमर अब्दुल्ला भी पीएम से मिल चुके हैं क्योंकि उन्हें भी 10,000 सैनिकों के भेजने का बाद ऐसा लगा कि स्पेशल स्टेटस जाने वाला है।
यह भी माना जा रहा है कि पीएम मोदी बजट सत्र के खत्म होते ही कश्मीर के संदर्भ में कोई ऑर्डिनेंस लेकर आ सकते हैं। बजट सत्र सात अगस्त को खत्म होने वाला है। अध्यादेश का मकसद होता है कि सरकार बिना संसद की अनुमति के कोई त्वरित निर्णय ले सकती है। सरकार को इससे समय मिल जाता है। उसे कानून में बदलने के लिए 6 सप्ताह के भीतर संसद का समर्थन चाहिए। साथ ही छः महीनों के भीतर संसद सत्र बुलाना जरूरी होता है।
दूसरी अफवाह यह है कि चूँकि इन दोनों को हटाने के लिए जम्मू कश्मीर विधानसभा का समर्थन चाहिए, और वो तो मिलने से रहा तो क्यों न इसे तीन टुकड़ों में बाँट दिया जाए। जिसमें कश्मीर और लद्दाख को यूनियन टैरिटरी बना दें और जम्मू को राज्य जहाँ भाजपा को बहुमत हासिल है।
तीसरी अफवाह यह है कि भाजपा सरकार हर पंचायत में तिरंगा लहराना चाहती है और उसके लिए यह इंतजाम है। साथ ही कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की जगह कश्मीर के लाल चौक में झंडा फहराएँगे।
चौथी अफवाह यह है कि सरकार कश्मीरी पंडितों को वापस ले जाना चाहती है। लेकिन इसमें उतना दम नहीं लगता, क्योंकि सैनिकों के बल पर अचानक से यह काम नहीं किया जा सकता।
अफवाहों में ‘सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स’ का अहम रोल
जम्मू-कश्मीर अक्सर चर्चा का विषय रहता है। इसके पीछे सोशल मीडिया का बहुत बड़ा योगदान है। सबसे ताजा प्रकरण ‘कुछ बड़ा होने वाला है’ को लेकर है। दरअसल, घाटी में सेना के भेजे जाने से लेकर स्कूल, बैंक बंद करने और सार्वजानिक स्थानों पर अफरा-तफरी होने की बातें सोशल मीडिया पर पढ़ने को मिल रही हैं। ख़ास बात ये है कि भगदड़, अफरा-तफरी जैसी बातें सबसे ज्यादा बातें जम्मू-कश्मीर के सियासी दलों के नेता से लेकर JNU में बैठे कुछ फ्रीलांस प्रोटेस्टर्स के माध्यम से आगे बढ़ रही हैं।
हालाँकि प्रशासन लगातार स्पष्ट कर रहा है कि घाटी में बड़ी मात्रा में सेना भेजने से लेकर स्कूल-कॉलेज और भगदड़ आदि की ख़बरें मात्र अफवाह हैं और कश्मीर में सब कुछ सामान्य चल रहा है।
‘Clueless’ पत्रकारों का अफवाह फ़ैलाने में बड़ा योगदान
यह भी हक़ीक़त है कि पत्रकारों का एक समूह है जो आए दिन ज्यादा ही ‘Clueless’ होते जा रहा है, वह शासन-प्रशासन द्वारा कोई ‘गुप्त जानकारी’ नहीं मिलने की हताशा में सोशल मीडिया पर अपना प्रलाप बाँच रहे हैं।
Why are students being evacuated from hostels? This is not about whether the media or the politicians have any clue on what next in Kashmir. Once you’re done sniggering about our cluelessness can you please say HOW this is not panic inducing @listenshahid@szaffariqbalpic.twitter.com/Y7GcosyFCi
फिलहाल अफवाहों पर यकीन ना कर के जम्मू-कश्मीर प्रशासन की बात पर ध्यान देना ज्यादा आवश्यक है। क्योंकि मीडिया और समाज का एक वर्ग ऐसा है जो भगदड़ और हड़बड़ी से ही अपनी रोटियाँ सेंकता आया है और वो चाहते हैं कि ‘डर का माहौल’ बना रहे।
फौरी तीन तलाक को अपराध बनाने वाले कानून पर कुछ अख़बारों में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का लेख प्रकाशित हुआ है। इसमें उन्होंने कहा है कि यह कानून मुस्लिम महिलाओं के न्याय और सम्मान की दिशा में एक ऐसी सफलता है जिसकी प्रतीक्षा दशकों से थी। साथ ही यह विधेयक लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा।
अमित शाह ने लिखा है कि विपक्ष के तमाम गतिरोध के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इसे पूरा करने की दिशा में प्रयास जारी रखे और अंतत: कामयाबी हासिल हुई। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून प्रभाव में आ गया है। शाह का कहना है कि यह बिल तीन तलाक जैसी कुप्रथा का दंश झेल रही महिलाओं को संरक्षण प्रदान करेगा।
आगे उन्होंने कहा है कि इस बिल को महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान और गरिमायुक्त जीवन के प्रति मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और निरंतर प्रयासों की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। तीन तलाक पर चर्चा ने विपक्षी दलों के वास्तविक चरित्र को उजागर किया, जिनके लिए महिलाओं के आत्मसम्मान से ज्यादा महत्वपूर्ण वोट बैंक का तुष्टिकरण है।
गृह मंत्री ने कॉन्ग्रेस के दिनों को याद करते हुए लिखा कि तीन दशक पूर्व एक अवसर तब आया था, जब शाहबानो मामले में 400 से अधिक सांसदों वाली कॉन्ग्रेस मुस्लिम महिलाओं को इस दंश से मुक्त करा सकती थी। 1985 में सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक से पीड़ित शाहबानो के पक्ष में फैसला देते हुए उसे 500 रुपए प्रति माह के गुजारा भत्ते का प्रावधान रखते हुए कहा था कि यह फैसला शरीयत के अनुसार है। मगर, तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने इसे लागू करने के बजाय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, मौलवियों और वोट बैंक की राजनीति के दबाव में आकर एक नया कानून लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया।
अमित शाह का कहना है कि यदि तीन तलाक ईरान, इराक, सीरिया और पाकिस्तान जैसे 19 देशों में अमान्य है तो इसका यही कारण है कि वर्तमान समाज की आवश्यकताओं के बीच दकियानूसी परंपराओं को लेकर नहीं चल सकते। भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में महिलाओं के अधिकारों एवं गरिमा का हनन करने वाली इस कुप्रथा का बने रहना शर्मनाक था। विपक्षी दलों की यह आपत्ति निराधार है कि इसे सिर्फ मुस्लिम समाज के लिए क्यों किया जा रहा?
उन्होंने कहा कि तीन तलाक संबंधी कानून मुस्लिम महिलाओं के हितों और अधिकारों की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध होगा। अब उनके लिए एक नए युग का आरंभ होगा और तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के अंत की शुरुआत होगी। शाह ने कहा कि तीन तलाक संबंधी कानून बनने के बाद इतिहास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम निश्चित रूप से राजा राममोहन राय और ईश्वरचंद्र विद्यासागर सरीखे सामाजिक सुधारकों की श्रेणी में रखा जाएगा।
अमरनाथ यात्रा पर ‘लोन वुल्फ अटैक’ की साजिश रची गई थी। इसमें पाकिस्तानी सेना और वहॉं की सरकार भी शामिल थी। शीर्ष सरकारी सूत्रों के हवाले से एएनआई ने यह जानकारी दी है। लोन वुल्फ अटैक ऐसे हमले को कहते हैं जिसे अकेला आतंकी अंजाम देता है। यूरोप में ऐसे कई हमले अंजाम दिए जा चुके हैं। इस बीच, RAF के जवान जम्मू पहुँच गए हैं।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को यात्रियों और पर्यटकों से घाटी से जल्द से जल्द लौटने को कहा था। शनिवार को किश्तवाड़ के माछिल में दुर्गा यात्रा भी स्थगित कर दी गई। सूत्रों ने बताया, “अमरनाथ यात्रा में रुकावट डालने के लिए पाकिस्तानी सरकार और सेना ने साजिश रची थी। घाटी में तलाशी अभियान के दौरान पाकिस्तानी आयुध कारखाने में तैयार काफी असलहा बरामद हुए हैं।”
उन्होंने कहा कि लोन वुल्फ अटैक कल्पना न होकर सच्चाई है। पुलवामा इसका एक नमूना है। इस तरह के हमले में पाकिस्तानी सेना के लैंडमाइंस और हथियारों का इस्तेमाल भारी तबाही मचा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार खतरा केवल घाटी तक सीमित नहीं है और दो सप्ताह बाद 15 अगस्त है। ऐसे में सरकार ने एहतियातन कदम उठाने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि सेना ने शुक्रवार को खुफिया जानकारियों का हवाला देते हुए कहा था कि पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। इसके तुरंत बाद, जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने यात्रियों और पर्यटकों से घाटी की अपनी यात्रा में ‘‘कटौती करने’’ और जल्द से जल्द लौटने को कहा था। यात्रा मार्ग से हथियार और विस्फोटक बरामद होने की सूचना देते हुए सेना ने कहा था कि सुरक्षा बल तीर्थयात्रियों पर हमले के किसी भी प्रयास को विफल करने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद हैं।
Jammu & Kashmir: The Pakistan Ordnance factory anti-personnel mine recovered from a terror cache busted by security forces. pic.twitter.com/d0g4zui5Y4
बताया जा रहा है कि खुफिया एजेंसियों को अमरनाथ यात्रा पर हमले की साजिश रचे जाने के लगातार इनपुट मिल रहे थे। हमले को अंजाम देने के लिए गुलाम कश्मीर के नेजापीर सेक्टर से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं। इसके अलावा श्रीनगर-बारामुला-उरी हाइवे पर सेना के काफिले को भी आईईडी धमाके से निशाना बनाने की योजना थी। इसके लिए आईईडी सीमा पार से घाटी में भेजने की जानकारी मिली थी।
सैनिकों की तैनाती और विभिन्न आदेशों से जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने जैसे कुछ बड़े फैसलों को लेकर अटकलें जोरों पर है। सरकार का कहना है कि ये कदम आतंकी मंसूबों को नाकाम करने तथा सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के मकसद से उठाए गए हैं। लेकिन, जम्मू-कश्मीर के नेताओं की बयानबाजी से अफवाहों का बाजार गरम है। इसके कारण घाटी में लोगों ने राशन और अन्य आवश्यक सामान जमा करने शुरू कर दिए हैं। स्कूल बंद होने की अफवाहें फैलाई जा रही है। एटीएम और पेट्रोल पंपों पर भीड़ लग गई है। हालांकि प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की सलाह दी है। प्रशासन का कहना है कि राज्य में कहीं किसी तरह का कर्फ्यू नहीं लगाया गया है। स्कूल भी बंद नहीं हैं।
राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने शुक्रवार देर रात मिलने आए राज्य के नेताओं को शांत रहने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की नसीहत दी थी। साथ ही कहा था कि अमरनाथ यात्रा को लेकर जारी एडवाइजरी और अन्य मसलों को जोड़कर ‘बेवजह का डर’ पैदा किया जा रहा है।
National Conference (NC) leader Omar Abdullah: We told Governor that there are rumours about 35A, 370, delimitation and even trifurcation, Governor assured us that in all these issues, no preparation is being made for any announcement. pic.twitter.com/ASebwJSUc1
शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि अमरनाथ यात्रा क्यों रोक दी गई और इसके पीछे क्या मंशा है, इस पर सरकार को संसद में बयान देना चाहिए।
कथित तौर पर, 10 मई को, पाकिस्तान सरकार ने फाइनेंशियल एक्शन टॉस्क फ़ोर्स (एफएटीएफ) की सिफ़ारिशों का अनुपालन करते हुए एनजीओ अल रहमत ट्रस्ट (ART) पर प्रतिबंध लगा दिया था। बावजूद इसके, यह एनजीओ आतंकी संगठनों के लिए धन इकट्ठा करने में जुटा हुआ है।
आतंकी संगठन जैश-ए-मौहम्मद पर प्रतिबंधित लगने के बावजूद वो धन इकट्ठा करने वाली गतिविधियों को अभी भी अंजाम दे रहा है। इस काम को वो मुख्य रूप से बहावलपुर में मुख्यालय स्थित अपने एनजीओ, अल रहमत ट्रस्ट (ART) के माध्यम से संचालित कर रहा है। 2002 में जैश-ए-मोहम्मद के प्रतिबंधित होने के बाद इस ट्रस्ट को 2002 में ही मसूद अजहर ने शुरू किया था और तभी से यह फल-फूल रहा है। पाकिस्तान में इसकी छोटी-छोटी शाखाओं के अलावा मुजफ्फराबाद, पेशावर, क्वेटा और हैदराबाद में क्षेत्रीय केंद्र भी हैं।
इतालवी पत्रकार फ्रांसेस्का मैरिनो की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शायद इस तथ्य की अनदेखी की है कि आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा (LeT) या जैश-ए-मुहम्मद (JeM) अपनी आतंकी गतिविधियों से बिल्कुल भी बाहर नहीं गए हैं। जबकि पाकिस्तानी सरकार ने दावा किया था कि उन्होंने आतंकी संगठनों के ख़िलाफ़ गंभीर क़दम उठाए हैं।
एनजीओ अल रहमत ट्रस्ट आधिकारिक रूप से दावा करता है कि इसका उद्देश्य इस्लाम का पालन करना, इस्लाम की सेवा करना, इस्लामी शिक्षा का प्रसार करना और दूसरों की मदद करना है। जबकि वास्तविकता यह है कि इस इस्लामिक एनजीओ का असली उद्देश्य लश्कर-ए-तैयबा और मोहम्मद हाफिज सईद का समर्थन करना है। यह जिहाद या साधारण शब्दों में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए और मृत आतंकवादियों के परिवारों की सहायता के लिए LeT के संचालन के लिए वित्तपोषण का काम करता है।
ख़बर तो यह भी है यह एनजीओ तालिबान को भी अपनी सेवाएँ देता रहा है। पत्रकार मैरिनो के अनुसार, पाकिस्तानी अधिकारियों ने कथित तौर पर नोटिस जारी कर आम जनता से इन आतंकी संगठनों को दान देने से परहेज करने को कहा था। लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि इन आतंकी समूहों को अलग-अलग छद्म धार्मिक गतिविधियों तहत या रमजान के दौरान धर्म की आड़ में चंदा इकट्ठा करने की इजाज़त थी।
जैश-ए-मोहम्मद ने भी कथित तौर पर दान देने वालों को रसीद जारी किए बिना पाकिस्तान में अपना फंड संग्रह जारी रखा। दान के अलावा, JeM ने ईद-उल-अज़हा की पूर्व संध्या पर क़ुर्बानी वाले जानवरों की खाल से भी धन इकट्ठा किया, जिससे उन्हें एक बड़ी रक़म मिली। 2018 में, JeM ने केवल इन जानवरों की खाल बेचकर 700 मिलियन रुपए (लगभग 3.9 मिलियन यूरो) धन इकट्ठा किया था।
रमजान के दौरान, इन इस्लामिक आतंकी संगठनों ने समुदाय विशेष से अल्लाह के नाम पर दिल खोलकर दान करने और कश्मीर में जिहाद के लिए दान करने और अमेरिका/ नाटो सेनाओं के ख़िलाफ़ अफ़गानिस्तान में जिहाद का समर्थन करने की अपील की थी। कश्मीर और अफ़गानिस्तान में जिहाद जैसे विभिन्न मुद्दों पर अल रहमत ट्रस्ट के विज्ञापन और लेखन, नियमित रूप से जैश-ए-मोहम्मद के अल क़लम अखबार में दिखाई देते हैं, जिसे मसूद अजहर का छोटा भाई संपादित करता है।
अल रहमत ट्रस्ट को विदेशों से, विशेष रूप से सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर से अपने धन का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है। ये फंड ‘ज़कात’ के नाम पर या चैरिटी के काम के लिए इकट्ठा किया जाता है और अक्सर दानकर्ता इन देशों में रहने वाले पाकिस्तानी प्रवासी हैं। केवल 2018 में, JeM को इन दानों से लगभग 600 मिलियन रुपए (लगभग यूरो 3.3 मिलियन) मिलने की सूचना है।
इसके अलावा, पाकिस्तान के अंदर कई मदरसे न केवल वैचारिक प्रचार के केंद्र के रूप में कार्य करते हैं, बल्कि सभी प्रकार की आतंकी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण भी प्राप्त करते हैं, जो धीरे-धीरे आतंकियों के लिए धन इकट्ठा करने वाले समूहों में तब्दील हो जाते हैं। धन इकट्ठा करने वाले यह समूह पाकिस्तान में कराची लाहौर, फैसलाबाद और सियालकोट में सबसे अधिक हैं। इस्लामिक आतंकवाद, विशेष रूप से पाकिस्तान में राज्य के निधियों के अलावा मजहबी स्कूलों के माध्यम से वित्त पोषण किया जाता है।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक युवक को काँवड़ लेकर हरिद्वार जाने पर उसके समुदाय के कुछ लोगों ने पिटाई कर दी। बड़ौत के रहने वाले इरशाद ने बताया कि वह काँवड़ लेकर हरिद्वार गया था। वहाँ से गंगाजल लेकर जब घर लौटा तो उसके समुदाय के कुछ लोगों ने आपत्ति जताते हुए उसकी पिटाई की। मारपीट करने वाले लोगों के कहना था कि काँवड़ इस्लाम के खिलाफ है।
A youth, Irshad was allegedly beaten up by members of his community in Baraut, Baghpat, for going on Kanwar yatra & bringing water at home. He says, “I had gone to Haridwar to get water, when I came back, people of my community objected, saying it is the against religion”(2.8.19) pic.twitter.com/ZJb51GbVCE
जानकारी के मुताबिक, इरशाद पहली बार काँवड़ लेकर नहीं गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि वो काफी लंबे समय से काँवड़ यात्रा में भाग ले रहा है। मगर इस बार इरशाद का काँवड़ यात्रा में शामिल होना और गंगाजल घर लाना उसके अपने ही समुदाय के कुछ लोगों को रास नहीं आया। इससे क्रोधित कट्टरपंथियों ने बुधवार (जुलाई 31, 2019) को उसके घर जाकर बुरी तरह से पीटना शुरू कर दिया। जब इरशाद के पिता इकरामुद्दीन ने बीच-बचाव की कोशिश की, तो उन पर भी हमला बोल दिया।
घटना के दौरान इरशाद और उसके पिता दोनों को को गंभीर चोटें आईं है। खबर के अनुसार, हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ता बागपत जिले के बड़ौत पुलिस स्टेशन पहुँचकर मामले में शिकायत दर्ज कराई और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।
RK Kushwaha, Circle Officer, Baraut: There was no issue of Kaanwar or bringing water, it was a personal dispute between nieghbours. Complaint over brawl has been received, case is being registered. (2.8.19) pic.twitter.com/7LMu0VHzrf
हालाँकि, इस मामले में बड़ौत के सर्कल ऑफिसर आरके कुशवाहा का कहना है कि मारपीट के पीछे काँवड़ और जल लाने का कोई मामला नहीं है। उन्होंने इसके पीछे की वजह पड़ोसियों की आपसी रंजिश बताया है। उन्होंने कहा कि शिकायत के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है और मामले की जाँच की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के हाथरस में मोहम्मद एहसान ने अपनी बीवी शमा परवीन को WhatsApp पर ही तलाक़नामा भेज दिया। शमा जब फरियाद लेकर थाने पहुँची तो पुलिसकर्मियों ने उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी और उसे भगा दिया। मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने तलाक के नए कानून के तहत रिपोर्ट दर्ज की।
ख़बर के अनुसार, शमा परवीन का निकाह अप्रैल 2010 में एहसान मिस्त्री से हुआ था। निकाह के कुछ दिनों बाद से ही एहसान अपनी बीवी के साथ शराब पीकर बुरा बर्ताव करता था, मारने-पीटने के अलावा वो उसे घर से बाहर निकाल देता था। 15 जुलाई को वो अपनी बीवी को छोड़कर चला गया। इसके दूसरे दिन उसके पास तलाक़नामा पहुँचा। इससे पहले मोबाइल पर तलाक़ का मैसेज आ चुका था। इस संदर्भ में शमा परवीन ने जब अपने परिजनों से बात की तो उन्होंने उसे थाने जाने की सलाह दी। 27 जुलाई को वो थाने पहुँची।
समझाने-बुझाने के लिए पुलिस ने 1 अगस्त को एहसान और शमा दोनों को थाने बुलाया था। लेकिन एहसान नहीं पहुँचा। मामला मीडिया में आने के बाद एहसान के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया।
ज़िले के एएसपी ने बताया कि महिला ने 27 जुलाई को प्रार्थना पत्र दिया था, जिसके आधार पर दोनों को थाने बुलाया गया था। लेकिन शौहर नहीं आया और WhatsApp पर तलाक़ देने की बात सामने आई।