Home Blog Page 5629

J&K पर अफवाह फैलाने वाले हैंडल्स को सस्पेंड करो: केंद्र की Twitter को दो टूक

सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार अफवाहें फैला कर यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि जम्मू-कश्मीर में कुछ भी ठीक नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्यपाल सतपाल मलिक ने साफ़-साफ़ बताया है कि राज्य में वातावरण शांतिपूर्ण है और माहौल सामान्य है। बकरीद भी घाटी में शांतिपूर्ण ढंग से मनाया गया। इन सबके बवजूद ट्विटर पर कुछ एकाउंट्स से लगातार अफवाहें फैला कर एक ग़लत नैरेटिव पेश करने की कोशिश की जा रही है, जिससे माहौल बिगड़ सकता है।

गृह मंत्रालय ने ट्विटर को कुछ ऐसे एकाउंट्स की सूची दी है, जिनके द्वारा अफवाहें और ग़लत सूचनाएँ फैला कर जम्मू-कश्मीर में शांति और अस्थिरता के माहौल को बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इन एकाउंट्स की सूची में अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का ट्विटर अकाउंट भी शामिल है। हालाँकि, अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि इस अकाउंट को गिलानी द्वारा ही ऑपरेट किया जा रहा है। निम्नलिखित ट्विटर एकाउंट्स को सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया है:

1. @kashmir787 – वॉइस ऑफ कश्मीर
2. @Red4Kashmir – मदीहा शकील ख़ान
3. @arsched – अरशद शरीफ
4. @mscully94 – मेरी स्कूली
5. @sageelaniii – सैयद अली गिलानी
6. @sadaf2k19
7. @RiazKha61370907
8. RiazKha723

कई पाकिस्तानी ट्विटर हैंडल भी सोशल मीडिया का ग़लत इस्तेमाल करते हुए ग़लत सूचनाओं को फैला रहे हैं। एनडीटीवी में प्रकाशित खबर के अनुसार, गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ये सारे ट्विटर हैंडल्स फेक न्यूज़ फैला रहे हैं और उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा से यह साफ़-साफ़ झलकता है कि उन्हें पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई और पाक फ़ौज द्वारा ऑपरेट किया जा रहा है।

कश्मीर रेंज के इंस्पेक्टर जनरल स्वयं प्रकाश ने बताया कि ये ट्विटर हैंडल्स जम्मू कश्मीर से ऑपरेट नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि ग़लत सूचनाओं पर यकीन न करें। ट्विटर के प्रवक्ता ने कहा कि कम्पनी द्वारा किसी भी हैंडल पर टिप्पणी उनके प्रिवेसी से जुड़े नियम-कायदों के विपरीत है। ट्विटर ने कहा कि कम्पनी को दिए जाने वाले सभी वैधानिक रिक्वेस्ट्स को साल में दो बार ‘ट्विटर ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट’ के तहत प्रकाशित किया जाता है।

कॉन्ग्रेस के सहयोगी वाइको बोले: 100वें स्वतंत्रता दिवस पर भारत में नहीं होगा कश्मीर

दक्षिण भारत के राजनीतिक दल MDMK के मुखिया वाइको ने एक शर्मनाक बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि देश जब आजादी की 100वीं वर्षगांठ मना रहा होगा, उस समय कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रह जाएगा। MDMK का कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन है।

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “जब भारत 100वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा होगा तो कश्मीर भारत का भाग नहीं होगा। भाजपा ने कश्मीर को गड्ढे में धकेल दिया है। मैं कश्मीर को लेकर पहले भी अपने विचार रख चुका हूँ। मैंने कश्मीर मुद्दे को लेकर भाजपा पर 70 फीसदी और कॉन्ग्रेस पर 30 फीसदी हमला किया था।”

साथ ही उन्होंने तिरुवन्नमलई जिले में अपनी पार्टी के एक समारोह को संबोधित करते हुए ये भी कहा कि उनकी पार्टी डीएमके के फाउंडर सीएन अन्नादुरई की 110वीं जयंती के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करेगी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी 5 अगस्त को जब अनुच्छेद 370 हटाए जाने का संकल्प राज्यसभा में मोदी सरकार के नेतृत्व में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा पेश किया गया था तब वाइको ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा था कि यह दुख भरा दिन है और कश्मीर के लोगों से किया गया वादा तोड़ दिया गया है। इस दौरान
वाइको ने कश्मीर के महाराजा हरि सिंह द्वारा पंडित जवाहरलाल नेहरू से माँगी मदद का भी जिक्र किया था।

वाइको को चेन्नई की एक अदालत लिट्टे का समर्थन करने पर देशद्रोह का दोषी करार दे चुकी है। एक साल की सजा सुनाते हुए उन पर 10,000 जुर्माना लगाया गया था। हालाँकि बाद में उनकी सजा पर रोक लगा दी गई थी।

एमडीएमके चीफ़ ने पिछले महीने हिंदी को लेकर भी विवादित बयान दिया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और अधिकतर सांसदों के हिंदी बोलने पर आपत्ति जताई थी और कहा था, “आज संसद में हिंदी की वजह से बहस का स्तर गिर गया है। वे सिर्फ हिंदी में चिल्लाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हिंदी में ही संसद को संबोधित करते हैं। मेरी नजर में हिंदी बोलने के पीछे प्रधानमंत्री की भावना हिंदी, हिंदू, हिंदू राष्ट्र की है। “

Article 370: राहुल गाँधी ने कहा- कश्मीर के हालात खराब, राज्यपाल बोले- विमान भेजूँगा, खुद आकर देख लें

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सतपाल मलिक ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाए जाने के बाद राहुल गाँधी के राज्य में हिंसा वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष को घाटी का दौरा कराने और जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए वह विशेष विमान भेजेंगे। बता दें कि, शनिवार (अगस्त 10, 2019) की रात राहुल गाँधी ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर से हिंसा की कुछ खबरें आई हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पारदर्शी तरीके से इस मामले पर चिंता व्यक्त करनी चाहिए।

राज्यपाल ने कश्मीर में हिंसा संबंधी कुछ नेताओं के बयान के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा, “मैंने राहुल गाँधी को यहाँ आने का न्योता दिया है। मैंने उनसे कहा है कि मैं आपके लिए विमान भेजूँगा ताकि आप स्थिति का जायजा लीजिए और तब बोलिए। आप एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं और आपको ऐसे बात नहीं करनी चाहिए।” साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी से कहा कि उन्हें अपने पार्टी के उन नेताओं के व्यवहार को लेकर शर्मिंदगी महसूस करनी चाहिए, जो संसद में मूर्ख की तरह बात कर रहे थे।

सतपाल मलिक ने कॉन्ग्रेसी नेता पी चिदंबरम द्वारा दिए गए सांप्रदायिक बयान पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है। राज्यपाल ने कहा कि अनुच्छेद 35 ए और अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान सबके लिए समाप्त किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लेह, करगिल, जम्मू, रजौरी, पूँछ या फिर कश्मीर में भी इसे खत्म करने में किसी तरह का कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है।

मलिक ने कहा कि इस मुद्दे को मुठ्ठी भर लोग हवा दे रहे हैं लेकिन वह इसमें सफल नहीं होंगे। उन्होंने कहा, “कुछ विदेशी मीडिया ने गलत रिपोर्टिंग करने का प्रयास किया, मगर हमने उन्हें भी चेतावनी दी है। सभी अस्पताल खुले हैं और एक व्यक्ति को भी गोली लगी हो, तो आप साबित कर दीजिए। जब कुछ युवक हिंसा कर रहे थे तो केवल चार लोगों को पैलेट से पैर में गोली लगी है,मगर इसमें कोई भी गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ है।”

कश्मीर को यातना शिविर में बदल देने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर राज्यपाल ने कहा कि शिक्षित होने के बावजूद लोग यातना शिविर का अर्थ नहीं जानते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता है कि यह क्या है। राज्यपाल मलिक ने कहा कि वो 30 बार जेल गए हैं, लेकिन फिर भी उन्होंने इसे यातना शिविर का नाम नहीं दिया था। आगे उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान कॉन्ग्रेस ने डेढ़ साल तक लोगों को जेल में बंद कर दिया था, लेकिन तब किसी ने उसे यातना शिविर नहीं कहा था। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐहतियातन गिरफ्तारी यातना शिविर के बराबर है?

आंध्र विभाजन कॉन्ग्रेस की भूल, इसने रेड्डी के राजनीतिक जीवन का अंत कर दिया: मणिशंकर अय्यर

विवादित बयानों के मसीहा मणिशंकर अय्यर एक बार फिर से नया विवाद लेकर लौटे हैं। अबकी उन्होंने अपनी ही पार्टी द्वारा आंध्र प्रदेश के विभाजन को कॉन्ग्रेस का ग़लत निर्णय करार दिया है। उन्होंने वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता जयपाल रेड्डी का राजनीतिक करियर ख़त्म होने के लिए भी इसी निर्णय को दोषी ठहराया। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी का निधन रविवार (जुलाई 28, 2019) को हो गया था। 4 बार विधायक और 7 बार सांसद रह चुके रेड्डी के निधन के बाद तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने उन्हें एक प्रखर वक्ता और असाधारण बुद्धिजीवी बताया था।

पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने रेड्डी के निधन के बाद शोक प्रकट करते हुए उन्हें तेलंगाना का महान बेटा कहा था। उन्होंने आइके गुजराल और मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में केंद्रीय मंत्री रहते हुए कई जिम्मेदारियाँ संभाली थीं। मणिशंकर अय्यर ने बयान देते हुए कहा है कि रेड्डी के राजनीतिक जीवन का अंत कॉन्ग्रेस के ग़लत निर्णय के कारण हुआ। 2019 लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में कॉन्ग्रेस को एक भी सीट न मिलने के लिए भी उन्होंने आंध्र विभाजन वाले निर्णय को ज़िम्मेदार ठहराया। उन्होंने इसे एक ‘रणनीतिक भूल’ करार दिया।

कॉन्ग्रेस ने 2014 में आंध्र प्रदेश का विभाजन किया था, जिसके बाद तेलंगाना के रूप में एक नया राज्य अस्तित्व में आया। हाल ही में जब अनुच्छेद 370 को लेकर संसद में बहस चल रही थी, तब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस को याद दिलाया था कि कैसे आंध्र प्रदेश का विभाजन अलोकतांत्रिक तरीके से किया गया था। शाह ने कहा था कि संसद में आंध्र विभाजन का बिल पारित कराने के लिए सारे दरवाजे बंद कर दिए गए थे और टीवी पर संसद की कार्यवाही का प्रसारण भी रोक दिया गया था।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने भाजपा अध्यक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि आंध्र प्रदेश का विभाजन राज्य की सभी नेताओं की राय लेकर किया गया था और वह ख़ुद उस प्रक्रिया में शामिल थे। उन्होंने शाह पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप मढ़ा था। आंध्र की सत्ताधारी पार्टी वाईएसआर कॉन्ग्रेस के सांसदों ने कहा था कि उनकी आपत्ति के बावजूद राज्य का विभाजन कर दिया गया। इसका जवाब देते हुए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष तिवारी ने दावा किया कि इस निर्णय के लिए आंध्र प्रदेश की विधानसभा की राय ली गई थी।

अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन करने वाले बिल को संसद में आंध्र प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियों टीडीपी और वाइएसआर कॉन्ग्रेस का समर्थन मिला। हालाँकि, हालिया लोकसभा चुनाव में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भाजपा और कॉन्ग्रेस, दोनों ही प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। अय्यर के बयान के बाद आंध्र प्रदेश विभाजन से जुड़ा बहस एक बार फिर लौट आया है।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा तोड़ी, Article 370 हटाने के लिए दे दी थी अपनी जान

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में कुछ असामाजिक तत्वों ने जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा तोड़ दी। घटना भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा इलाके की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

आर्टिकल 370 के प्रावधानों को हटाने को लेकर मुखर्जी ने ही लड़ाई शुरू की थी। इसी दौरान जम्मू-कश्मीर में उनकी संदेहास्पद स्तिथियों में मौत हो गई थी।

शाहपुरा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज ने बताया कि मुखर्जी की मूर्ति को कुछ अज्ञात शरारती तत्वों ने रविवार (अगस्त 11, 2019) की रात तोड़ दिया। जाँच के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है, जल्द ही आरोपित पकड़ लिए जाएँगे।

मुखर्जी की मूर्ति तोड़ने की घटना से भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में काफी आक्रोश है। इस घटना को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

पिछले दिनों केन्द्र की मोदी सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के देश में एक विधान, एक निशान व एक प्रधान के सपने को पूरा किया है। पुलिस स्थानीय लोगों के बयानों के आधार पर प्रतिमा क्षतिग्रस्त करने वालों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।

पंजाबी रैपर हार्ड कौर ने मोदी-शाह को कहे अपशब्द, खालिस्तानियों के साथ बनाया वीडियो

सोशल मीडिया पर गालीबाजी और गंदगी फैलाने के लिए कुख्यात पंजाबी रैपर हार्ड कौर ने अब खालिस्तानी चोला ओढ़ लिया है। ट्विटर पर जारी वीडियो में वो न सिर्फ़ कट्टर खालिस्तानियों के साथ दिखाई दे रही हैं, बल्कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लेकर अपशब्द भी कहे गए हैं। कौर ने पीएम और शाह को डरपोक बताया है। फेसबुक कमेंट्स में खुले तौर पर माँ-बहन की गालियाँ देने वाली हिप-हॉप गायिका इससे पहले पुलवामा और 26/11 मुंबई हमलों के लिए सरसंघचालक मोहन भागवत को ज़िम्मेदार ठहरा चुकी है।

ब्रिटिश-पंजाबी गायिका हार्ड कौर ने भारत-विरोधी कंटेंट डालने की सारी हदें पार करते हुए कथित खालिस्तानी-कश्मीरी एकता के लिए अभियान चलाया हुआ है। फेसबुक कवर पिक में खालिस्तानी और कश्मीरी झंडा लगा कर दोनों की कथित एकता की बात की है। ताज़ा वीडियो में कट्टर खालिस्तानियों के साथ मिल कर उन्होंने अलगाववाद को हवा देते हुए एक अलग देश खालिस्तान की माँग की है। खालिस्तानी समर्थकों ने जानबूझ कर हार्ड कौर का चेहरा आगे कर ये वीडियो बनाया है।

बता दें कि पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई द्वारा अक्सर खालिस्तानियों को फंडिंग करने और खालिस्तानी अलगाववाद को बढ़ावा देने के मामले सामने आते रहे हैं। पाकिस्तान न सिर्फ कश्मीरी अलगाववादियों व आतंकियों बल्कि खालिस्तानियों की भी मदद करता रहा है। अलग खालिस्तान की बात करते हुए हार्ड कौर ने कहा कि यह उनलोगों का हक़ है और वे इसे लेकर रहेंगे। स्वतंत्रता दिवस पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि 15 अगस्त सिखों के लिए आजादी का दिन नहीं है।

कथित कश्मीरी-खालिस्तानी एकता का प्रचार करतीं हार्ड कौर

एक क़दम और आगे बढ़ते हुए रैपर हार्ड कौर ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर खालिस्तानी झंडा फहराने की माँग कर दी। इससे पहले वह यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘बलात्कारी’ बता चुकी है। हार्ड कौर के विवादित पोस्ट्स के कारण उन पर देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज हुआ, जिसके बाद से भारत के विरोध में वह और ज्यादा सक्रिय हो गई है। पंजाबी रैपर तरन कौर ढिल्लन उर्फ़ हार्ड कौर ने 2013 में एक स्टेज परफॉरमेंस के दौरान सिख समुदाय के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक टिप्पणी की थीं।

यह भी जानने लायक बात है कि कौर बॉलीवुड फिल्मों में भी आवाज दे चुकी हैं। ‘ओके जानू’, ‘जॉनी गद्दार’ और ‘सराइनोडू, जैसी फ़िल्मों में गाने गए चुकी कौर की सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई है। कई लोगों ने प्रधानमंत्री व गृहमंत्री को टैग कर कौर पर कार्रवाई माँग की है। लेकिन, उनके ताज़ा पोस्ट्स, वीडियो और बयानों को देख कर ऐसा लगता है कि हार्ड कौर ने भारत के ख़िलाफ़ जहर उगलते रहने की क़सम खा रखी है।

ईद की नमाज के दौरान J&K पर प्रदर्शन करने वाले पाकिस्तानियों पर कार्रवाई करेगा बहरीन

बहरीन में कुछ पाकिस्तानी व बांग्लादेशी लोगों द्वारा जम्मू कश्मीर पर भारत सरकार के निर्णय के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया। इसके लिए ईद के नमाज के अवसर का फायदा उठाया गया। अब द्वीपीय देश ने ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। बहरीन के ‘मिनिस्ट्री ऑफ इंटीरियर’ ने बयान जारी कर बताया कि ईद की नमाज के बाद कुछ एशियन लोग ऐसे जमा हो गए, जिससे क़ानून का उल्लंघन हुआ है।

साथ ही बहरीन ने फैसला लिया कि क़ानून का उल्लंघन करने वाले ऐसे सभी लोगों के ख़िलाफ़ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को पब्लिक प्रॉसिक्यूशन के पास भेज दिया गया है। बहरीन ने लोगों को आगाह किया कि मजहबी जमावड़ों का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए नहीं किया जाए। नीचे संलग्न किए गए ट्वीट्स में आप प्रदर्शन का वीडियो और बहरीन का आधिकारिक बयान देख सकते हैं।

कूटनीतिक रूप से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़े पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने बहरीन के राजा से फोन पर बात भी की थी। शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को बहरीन के राजा शेख हमद बिन ईसा अल खलीफा से इमरान ख़ान ने बातचीत की थी। इमरान ख़ान ने जम्मू कश्मीर के मसले पर बहरीन के राजा को पाकिस्तानी नैरेटिव से अवगत कराया था। हालाँकि, बहरीन से उन्हें बस इतना जवाब मिला कि जम्मू कश्मीर के ताज़ा घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।

बहरीन के राजा ने आशा जताया कि इन मसलों को बातचीत के जरिए सुलझा लिया जाएगा। पाकिस्तान को यूएई और मालदीव जैसे इस्लामिक देशों से भी झटका मिल चुका है। कई देशों ने जम्मू कश्मीर को भारत का आंतरिक मुद्दा बताते हुए दखल देने से इनकार कर दिया।

कश्मीर पर UN फूलों का हार लेके नहीं खड़ा, हमारी कौम भी 100 करोड़ के बाज़ार के साथ हो गई: पाक विदेश मंत्री

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का एक बयान ट्विटर पर आया है, जिसमें वह कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान के कश्मीर मामले पर हिंदुस्तान का कुछ न बिगाड़ पाने का इकबाल करते दिख रहे हैं। 1:24 और 0:57 मिनटों के दो भागों के इस वीडियो में कुरैशी रक्षात्मक लहजे में पाकिस्तानी प्रेस को अपनी सरकार की मजबूरियाँ गिनाते हुए देखे जा सकते हैं।

‘आप के लिए हार लेके नहीं खड़े’

पहले वीडियो में कुरैशी कहते हैं कि UN की सुरक्षा परिषद के पाँचों सदस्य (ब्रिटेन, अमेरिका, चीन, रूस, फ़्रांस) पाकिस्तान के लिए हार लेके नहीं खड़े। उनमें से कोई भी (अगर पाकिस्तान कश्मीर का मसला सुरक्षा परिषद में ले जाना चाहे तो) रुकावट बन सकता है। उन्होंने पाकिस्तान और कश्मीर के लोगों को ‘मूर्खों के (काल्पनिक) स्वर्ग’ (“fool’s paradise”) में न रहने की सलाह दी।

“हकीकत-पसंदाना (यथार्थवादी) तरीके से देखिए। जज़्बात उभारना बहुत आसान है। मुझे… (चुटकी बजाते हुए) दो मिनिट लगेंगे। मैं 35-36 साल से सियासत कर रहा हूँ, बाएँ हाथ का काम है। जज़्बात उभारना तो आसान काम है, ऐतराज़ करना उससे भी आसान है (पाकिस्तानी प्रेस की ओर इशारा करते हुए)। लेकिन, एक… एक मसले को समझकर आगे (UN में) ले जाना पेचीदा है। आगे वो लोग (UN सदस्य) आपके लिए हार लेके नहीं खड़े। सिक्योरिटी काउन्सिल में जो P-5 मेंबर्स हैं, उनमें से… कोई भी रुकावट बन सकता है। क्या आपको कोई शक है? नहीं होना चाहिए। Do not live in a fool’s paradise. Let the people of Pakistan be aware. पाकिस्तानियों को, कश्मीरियों को बाखबर रहना चाहिए। कोई वहाँ आपके लिए मुंतज़िर नहीं खड़ा, कि कोई वहाँ आपकी दावत के लिए नहीं खड़ा। ये तो आपको नई जद्दोजहद का आगाज़ करना पड़ेगा। कोई ऐसा साज़गार माहौल नहीं है।”

‘उम्मा के मुहाफ़िज़ों ने बहुत से investments कर रखीं हैं वहाँ’

कुरैशी आगे दूसरे वीडियो में अपने बयान-ए-दर्द जारी रखते हुए बताते हैं कि जिस इस्लाम, और उसकी उम्मा (कौम) का भरोसा था, वह भी गच्चा दे गई। उम्मा वाले तो हिंदुस्तान की 100 करोड़ की आबादी के बाजार के लालच में पड़ गए हैं, और पाकिस्तान बेचारा अकेला हो गया है।

“उनके इंट्रेस्ट्स हैं। मैं आपको पहले अर्ज़ कर चुका। मैंने इशारतन कह दिया। एक अरब (की आबादी की) की मार्केट है। और यहाँ इस खित्ते (क्षेत्र) में अब नई… आपने realignment देखी है (अरब देशों के हिंदुस्तान की तरफ झुकाव की ओर इशारा)। देखी है न आपने? मेरा इशारा आप समझ गए। एक नई realignment है, एक अरब की मार्केट है। बहुत से लोगों ने वहाँ इन्वेस्टमेंट्स कर रखीं हैं। वैसे तो हम उम्मा और इस्लाम की बात तो करते हैं, पर उम्मा के मुहाफ़िज़ों ने बहुत सी इंवेस्टमेंट्स कर रखीं हैं वहाँ (हिंदुस्तान में)। उनके मफ़ादात हैं वहाँ। तो मैंने कहा ये कश्मीर का मसला आज का है? ये पिछले 5 अगस्त से शुरू हुआ है? ये तो सात दहाईयों से है। तीस साल से क्या हुआ इस पर? मैं सवाल करता हूँ न! क्या ये मसला कोई नया है?”

हिन्दू-विरोधी अमेरिकन प्रोफेसर ने राणा अयूब को बताया ISI की कठपुतली, फिर डिलीट किए ट्वीट्स

अमेरिका की हिन्दू-विरोधी राजनीतिक विशेषज्ञ क्रिस्टीन फेयर ने ट्विटर पर भारतीय प्रोपेगंडाबज पत्रकार राणा अयूब को जम कर लताड़ा लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि अयूब भी उन्हीं की तरह हिन्दू-विरोधी है, क्रिस्टीन ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया। यह सब नीचे स्क्रीनशॉट के रूप में संलग्न किए गए इस ट्वीट से शुरू हुआ जब राणा अयूब द्वारा ईद की मुबारकबाद देने पर क्रिस्टीन भड़क गईं।

राणा अयूब को लताड़ने के बाद क्रिस्टीन ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया

क्रिस्टीन ने राणा अयूब को लताड़ते हुए लिखा:

“तुम बलूचिस्तान के नागरिकों, पश्तून और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के नागरिकों के लिए ख़ास दुआ क्यों नहीं कर रही हो? पाकिस्तानियों द्वारा इन सब पर अत्याचार किया जा रहा है। तुम्हारी फौज (पाकिस्तानी) और आईएसआई द्वारा तालिबान के आतंकियों का इस्तेमाल कर अफ़ग़ानों का नरसंहार कराया जा रहा है। “

इसके बाद किसी ट्विटर यूजर ने क्रिस्टीन को याद दिलाया कि अयूब तो भारतीय है। क्रिस्टीन ने जवाब दिया कि उन्हें पता है कि अयूब भारतीय हैं। लेकिन, उन्होंने आरोप लगाया कि राणा अयूब भारतीय होने के बावजूद पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई की कठपुतली की तरह व्यवहार करती हैं।

क्रिस्टीन ने लिखा ‘मुझे पता हैं कि राणा अयूब भारतीय हैं लेकिन वह ISI की कठपुतली की तरह कार्य करती हैं’

बाद में जब क्रिस्टीन को एहसास हुआ कि राणा अयूब भी उन्हीं की तरह हिन्दू विरोधी हैं तो उन्होंने माफ़ी माँगते हुए ट्वीट्स डिलीट कर लिया। लेकिन, साथ ही उन्होंने राणा अयूब की पत्रकारिता पर सवाल भी खड़े किए। क्रिस्टीन अक्सर ‘गाय’ और ‘गोशाला’ का जिक्र कर प्रधानमंत्री मोदी और हिन्दुओं पर निशाना साधती रहती हैं। उन्होंने बताया था कि वह गोमूत्र पीने वालों से घृणा करती हैं।

क्रिस्टीन ने भगवान राम पर विवादित टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘shmuck’ तक कहा था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राणा अयूब की पुस्तक ‘गुजरात फाइल्स’ को नकारते हुए कहा था कि यह अनुमानों और कल्पनाओं से भरा पड़ा है। राणा अयूब अक्सर संघ, भाजपा और उनके समर्थकों को निशाने पर लेती रहती हैं। अमित शाह के केंद्रीय गृहमंत्री बनने के बाद राणा अयूब काफ़ी खफा नज़र आई थीं।

पाक राजनयिक अब्दुल बासित ने दी धमकी, कहा- अगर भारत अपनी हदें पार करे तो युद्ध के लिए आगे बढ़ा जाए

केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने से पाकिस्तान की बौखलाहट साफ़ नज़र आती है। पाकिस्तान के नेता बिना सोचे-समझे तरह-तरह की बयानबाज़ी कर रहे हैं। इसी कड़ी में, भारत में पाकिस्तान के राजनयिक रहे अब्दुल बासित ने भारत के साथ युद्ध की धमकी दी है। सोशल मीडिया पर उन्होंने साफ़ कहा कि अगर भारत हद पार करता है तो युद्ध करना चाहिए।

अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “कश्मीर में संघर्ष के चार मोर्चे हैं। पहला, नैशनल कॉन्फ्रेंस द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई। दूसरा, पाकिस्तान को आत्मनिर्णय के साथ कूटनीतिक प्रयास जारी रखने चाहिए। तीसरा, पाकिस्तानी और कश्मीरी प्रवासी इस संबंध में काम करते रहें। चौथा, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कश्मीर में राजनीतिक लड़ाई को पाकिस्तान कमजोर न होने दे। यदि भारत अपनी हदें पार करे तो युद्ध के लिए आगे बढ़ा जाए।” 

अब्दिल बासित का ज़हर यहीं समाप्त नहीं हुआ बल्कि एक क़दम और आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “पाक को जम्मू और कश्मीर सेल को जम्मू और कश्मीर में विशेष दूत की अध्यक्षता में विदेशी कार्यालय में स्थापित करना चाहिए। उपयुक्त संगठनात्मक संरचना एक सुसंगत और प्रभावी कूटनीति के लिए ज़रूरी है।”

अपने नापाक इरादे स्पष्ट करते हुए अब्दुल बासित ने पाकिस्तान सरकार से जम्मू-कश्मीर के मामलों के लिए विदेश मंत्रालय में अलग सेल बनाने की माँग भी की और सुझाव दिया कि इस सेल का नेतृत्व विशेष राजनयिक करें। पाकिस्तान की झुंझलाहट इस बात से साफ़ पता चलती है कि ईद-उल-अजहा के मौक़े पर उसने बीएसएफ से ईद की मिठाई लेने से इनकार कर दिया।

भारतीय जवानों ने बाघा-अटारी बॉर्डर पर पाकिस्तानी रेंजर्स को ईद की मिठाई दी लेकिन उन्होंने मना कर दिया। दरअसल, जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 निष्क्रिय होने से पाक बौखलाया हुआ है। बीएसएफ के एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान की तरफ से बकरीद पर अटारी-वाघा बॉर्डर पर और हुसैनीवाला बॉर्डर पर मिठाई देने और लेने के लिए कोई संदेश नहीं आया। पहले ऐसे त्योहारों पर संदेश पाक की तरफ से दिन में ही मिल जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

इधर, पाकिस्तानी वायुसेना लद्दाख सीमा के पास अपने लड़ाकू विमान तैनात कर रही है। यह पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की सीमा के पास पाकिस्तानी स्कार्दू हवाई अड्डे पर तैनात किए जा रहे हैं। इस पर भारत की लगातार नजर बनी हुई है। जानकारी के मुताबिक, शनिवार (अगस्त 10, 2019) को पाकिस्तानी वायुसेना के तीन सी-130 हरक्यूलस परिवहन विमानों को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख सीमा के पास तैनात किए गए हैं। इस ख़बर के सामने आने के बाद संबंधित भारतीय एजेंसियाँ ​​सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तानियों की आवाजाही पर कड़ी नज़र रख रही हैं।