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‘बकलोल’ पत्रकार के खिलाफ FIR: आर्मी चीफ जनरल रावत की तुलना कर दी थी जलियाँवाले डायर से

उत्तर प्रदेश के पत्रकार प्रशांत कनौजिया आपत्तिजनक टिप्पणियों व ट्वीट्स के लिए कुख्यात हैं, जिसके लिए उन्हें गिरफ़्तार भी किया जा चुका है। उन्होंने इस बार एक ऐसा ट्वीट किया जो न सिर्फ़ भारत देश बल्कि भारतीय सेना का भी अपमान है। ऐसा करके उन्होंने क्षण भर में भारत के स्वतन्त्रता आंदोलन का भी मजाक बना डाला। प्रशांत ने भारत के सेनाध्यक्ष विपिन रावत की तुलना जनरल डायर से कर दी। जनरल डायर वही था, जिसनेजालियाँवाला बाग़ कांड के दौरान भारतीयों का नरसंहार किया था। प्रशांत कनौजिया ने हालाँकि अपनी ट्वीट डिलीट कर दी लेकिन उस ट्वीट का लिया गया स्क्रीनशॉट नीचे देखें:

हालाँकि, बाद में ट्विटर पर अपने ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन को देखते हुए उन्होंने अपने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया लेकिन कई लोगों ने उससे पहले उस ट्वीट का स्क्रीनशॉट ले रखा था। भारतीय सेना में पदस्थापित रह चुके सैयद हसनैन सहित कई अन्य लोकप्रिय हस्तियों ने सेना का अपमान करने के लिए प्रशांत कनौजिया को लताड़ा।

ताज़ा ख़बर के मुताबिक़, वकील अलख अलोक श्रीवास्तव ने कनौजिया के ख़िलाफ़ थाने में मामला दर्ज कराया है। उन्होंने तिलक मार्ग थाने में मामला दर्ज कराया, जिससे कनौजिया की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। कनौजिया द्वारा विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के सेनाध्यक्ष जनरल रावत की तुलना एक ऐसे व्यक्ति से की गई, जिसने भारतीय जनता का नरसंहार किया था। जनरल डायर का गुनाह इतना बड़ा था कि उन्हें अपनी ही सरकार द्वारा शुरू की गई जाँच का सामना करना पड़ा था।

इससे पहले जब प्रशांत कनौजिया को गिरफ़्तार किया गया था तब कथित लिबरल समुदाय के गिरोह ने जम कर हंगामा मचाया था। उस समय इसे पत्रकारिता की स्वतंत्रता से जोड़ कर दिखाने की कोशिश की गई थी। लेकिन, इसके बाद कनौजिया की हरकतें और बढ़ गईं और वे अपने आप को मोदी विरोध के भीतर इतना नीचे गिराते चले गए कि उन्होंने आपत्तिनजक ट्वीट्स की लड़ी लगा दी। कनौजिया के ख़िलाफ़ अन्य लोगों ने भी एफआईआर दर्ज कराई है।

‘मैं भारत के मुस्लिमों की आवाज़ हूँ, सीमा पर ख़ुद लड़ने जाऊँगा’

न सिर्फ़ पाकिस्तानी पत्रकार और सिनेमाई हस्तियाँ बल्कि पाकिस्तान के नेतागण भी अजीबोगरीब बयान देने लगे हैं। पाकिस्तान के मंत्री फवाद चौधरी को उनकी अपनी ही पार्टी के संसद ने बेशर्म, कुत्ता और दब्बू जैसे अपमानजनक शब्दों से नवाजा। भारत-पाक तनाव के बीच अब पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद अहमद ने कुछ ऐस बयान दिया है, जिससे ट्विटर यूजर्स की हँसी नहीं रुक रही है। पाकिस्तानी मंत्री ने ख़ुद को भारतीय मुसलमानों के दिल की आवाज बताया।

शेख राशिद ने ख़ुद को भारत के करोड़ों मुस्लिमों के दिल की आवाज बता डाला। वो यही नहीं रुके। उन्होंने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच युद्ध होता है तो वह ख़ुद सीमा पर लड़ाई करने जाएँगे। यहाँ इस बात पर गौर करना ज़रूरी है कि 1998 में जब पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किया था, तब शेख रशीद भाग खड़े हुए थे।

एक मीडिया चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि उन्हें ‘पटाखा इधर-उधर होने या उसमें लीकेज होने का डर था।‘ नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप उनका यह बयान सुन सकते हैं कि कैसे वह परमाणु परीक्षण के दौरान डर कर पाकिस्तान से बाहर चले गए थे।

अगर उनके ताज़ा बयान की बात करें तो उन्होंने कहा, “वक़्त आने पर यह पता लगेगा कि मुसलमान अकेला भी बहुत होता है। अगर जंग हुई तो मैं बताऊँगा कि मैं ख़ुद किस तरह लड़ूँगा।” उन्होंने दावा किया कि भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तानी फ़ौज तो लड़ेगी ही, वे भी लड़ेंगे। उनके इस वीडियो के सामने आने के बाद ट्विटर ने भी जम कर मजे लिए।

हमीरपुर में BJP के बूथ अध्यक्ष की गला रेत कर निर्मम हत्या, जाँच में जुटी पुलिस

उत्तर प्रदेश में हमीरपुर में भारतीय जनता पार्टी के नेता की गला रेत कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि पचखुरा गाँव निवासी भाजपा के बूथ अध्यक्ष राकेश सिंह की शनिवार (अगस्त 10, 2019) की देर रात गला रेत कर हत्या कर दी गई। वारदात के वक्त राकेश सिंह घर पर अकेले थे। रविवार (अगस्त 11, 2019) सुबह कमरे के बाहर खून देखकर ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। 

सूचना मिलने पर मौके पर पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। केस दर्ज कर मामले की जाँच पड़ताल शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि हत्या के पीछे संपत्ति का विवाद हो सकता है। उन्होंने बताया कि रात में कुछ बदमाशों ने घर में घुसकर धारदार हथियार से गला रेत कर राकेश सिंह की हत्या कर दी।

जानकारी के मुताबिक, राकेश पिछले करीब दस साल से अपनी बहन के घर में रह रहे थे। बहन और बहनोई की पहले ही हत्या हो चुकी है, जबकि कुछ दिनों बाद भांजे ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। वहीं, राकेश की पत्नी बच्चों को लेकर करीब एक सप्ताह पहले मायके चली गई थी। 

कल रात वह अपने एक साथी के साथ घर के बाहर कमरे में रुके थे। बूथ अध्यक्ष के कत्ल की खबर मिलते ही भाजपा जिलाध्यक्ष संत विलास शिवहरे पार्टी के अन्य पदाधिकारियों संग घटनास्थल पर पहुँचे। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

भू-माफ़िया आज़म ख़ान के गुर्गों ने मदरसे पर कैसे जड़ा ताला: तत्कालीन प्रिंसिपल ने सुनाई दास्तान

भू-माफ़िया सपा सांसद आज़म ख़ान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद जौहर अली विश्वविद्यालय पर 30 जुलाई, 2019 को पुलिस का छापा पड़ा था। छापा रामपुर के मदरसा आलिया की 9,000 किताबें चोरी होने के मामले में पड़ा था।

मदरसा आलिया या राजकीय इंटर कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल हरीश कुमार सक्सेना को आज भी 9 सितंबर 2016 का वह दिन याद है। मदरसा बंद होने के बाद वे दोपहर 2.30 बजे घर आ गए थे। अगले दिन, उन्हें बताया गया कि मंत्री (आज़म खान) के आदमी आए थे और उन्होंने मदरसे का ताला बदल दिया है। जब उन्होंने रामपुर के ज़िला इंस्पेक्टर फॉर स्कूल्स (DIOS) को फोन किया तो बताया गया कि मदरसे को कुंचफरगंज इलाक़े के रज़ा इंटर कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया है।

ख़बर के अनुसार, राज्य की भाजपा सरकार एक साथ कई आरोपों की जाँच कर रही है। इसमें विश्वविद्यालय के लिए जबरन जमीन लेने का मामला भी शामिल है।

पिछले हफ्ते, रामपुर पुलिस ने छापेमारी के दौरान 2,500 किताबों के 50 बक्से बरामद किए। सभी किताबें प्राचीन और मूल्यवान थीं। बता दें कि 2016 में आज़म ख़ान संसदीय मामलों, शहरी विकास और अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री थे।

इससे पहले पुलिस ने जौहर अली विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में जाकर रामपुर के मदरसा आलिया से ग़ायब हुई किताबों को लेकर छानबीन की थी। एसपी डॉ. अजय पाल ने बताया था कि तकरीबन 300 चोरी की किताबें मिल चुकी हैं। ये किताबें 100 से 150 साल पुरानी हैं। उन्होंने बताया था कि 1774 में स्थापित रामपुर के आलिया मदरसे से चोरी की गईं प्राचीन किताबें भी जौहर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी से बरामद हुईं हैं।

इस मामले में अब तक यूनिवर्सिटी के 4 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है। फिलहाल, जाँच जारी है और कई अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। परिसर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। यूनिवर्सिटी की मुमताज सेंट्रल लाइब्रेरी में पुलिस दस्तावेज़ों की तलाश कर रही है।

बता दें कि जौहर यूनिवर्सिटी में यह छापा उस वक्त पड़ा है, जब पहले से ही आज़म ख़ान जमीन कब्जाने के कई मामले में घिरे हुए हैं। उन पर पहले से ही अजीमनगर थाने में जमीन हड़पने को लेकर कुल 27 मुकदमे दर्ज हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने आज़म ख़ान को रामपुर में लग्जरी रिसॉर्ट हमसफर के लिए सरकारी जमीन कब्जाने को लेकर नोटिस जारी किया है। दूसरी तरफ आज़म ख़ान के बेटे अब्दुल्ला आज़म ख़ान पर ग़लत और कोडेड दस्तावेज़ों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के आरोप में मामला दर्ज है।

J&K पर प्रदर्शन को उतारू मैग्सेसे विजेता को किया हाउस अरेस्ट, पत्नी का योगी की पुलिस पर आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता संदीप पांडेय को कुछ देर के लिए हाउस अरेस्ट कर के रखा गया। उन्होंने अनुच्छेद 370 पर भारत सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के विरोध में कैंडल मार्च निकालने की योजना बनाई थी। पांडेय का कहना था कि ये कैंडल मार्च जम्मू कश्मीर की जनता के समर्थन में निकाला जाएगा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया था कि जम्मू कश्मीर में संचार व्यवस्था जबरन रोक दी गई है। डॉक्टर पांडेय की पत्नी अरुंधति धुरु ने दावा किया कि उनके घर के बाहर पुलिस है जो उन्हें बाहर नहीं जाने दे रही।

बाद में उन्होंने बताया कि शाम 4 बजे पुलिस दल उनके घर के बाहर से चला गया। पांडेय ने लखनऊ के हजरतगंज स्थित गाँधी प्रतिमा के पास जम्मू कश्मीर पर सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी और इसके लिए रविवार (अगस्त 11, 2019) को शाम 6 बजे का समय का समय मुक़र्रर किया था।

यूपी के संगठन रिहाई मंच के सदस्य राजीव यादव ने कहा कि डॉक्टर पांडेय ने पुलिस को जानकारी दी थी कि बकरीद और स्वतन्त्रता दिवस पर सुरक्षा व्यवस्था की चिंताओं के मद्देनजर इस विरोध प्रदर्शन को 16 अगस्त तक स्थगित कर दिया था। यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस को इस बात की सूचना देने के बावजूद उन्हें हाउस अरेस्ट पर रखा गया।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब ने कहा कि विरोध प्रदर्शन स्थगित करने के लिए पुलिस उन लोगों पर दबाव बना रही थी। हालाँकि, इस सम्बन्ध में यूपी पुलिस का कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है। बता दें कि रिहाई मंच इससे पहले आतंकवाद के आरोपितों की पैरवी भी कर चुका है। मंच द्वारा कई आतंकवाद के आरोपितों के लिए लीगल सलाह व अन्य मदद दी जा चुकी है। रिहाई मंच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषणों को लेकर भी नकारात्मकता फैलाता रहा है।

रिहाई मंच इससे पहले विवादों में तब आया था जब बीएचयू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में बाधा पहुँचाने वाले और ‘मोदी गो बैक’ के नारे लगाने वाले छात्रों को सम्मानित किया था। रिहाई मंच ने उन छात्रों के समर्थन में नारे भी लगाए थे। जिस प्रकरण को बीएचयू के वीसी ने युनिवर्सिटी के लिए शर्म की बात बताया, रिहाई मंच ने उसी प्रकरण को अंजाम देने वालों का सम्मान किया था।

बेटे का छोड़ा ‘जहर’ पीने को मॉं मजबूर, मोदी-शाह ने बहन को पीने से रोका

कॉन्ग्रेस एक मजेदार संगठन है। एक भी नियम और कानून इस पार्टी में नहीं चलते। हम हर मिनट एक नया नियम बनाते हैं और पुराने वाले को दबा देते हैं। कोई हमसे पूछे कि कॉन्ग्रेस पार्टी क्या करती है तो हमारा जवाब होना चाहिए कॉन्ग्रेस पार्टी देश के लिए नेता तैयार करती है।

माफ कीजिएगा देश की सबसे पुरानी पार्टी को लेकर ये मेरे विचार नहीं हैं। ये खुद राहुल गॉंधी के विचार हैं। भरोसा न हो तो 20 जनवरी 2013 को जयपुर के कॉन्ग्रेस चिंतन शिविर में दिए गए करीब 38 मिनट के उनके भाषण को एक बार फिर सुन ले। चिंतन शिविर से दिमाग की बत्ती न जल रही हो तो थोड़ा और स्पष्ट कर दूॅं कि ऊपर लिखे गए एक-एक शब्द ‘सत्ता जहर है’ वाले मशहूर भाषण के अंश हैं।

भावुकता का पुट लिए यह हिन्दी-अंग्रेजी मिश्रित संबोधन राहुल ने पार्टी का उपाध्यक्ष बनने पर दिया था और उस समय की मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इसे सुन सोनिया गॉंधी सहित वहॉं मौजूद हर कॉन्ग्रेसी की आँखें गीली हो गई थी।

10 अगस्त 2019 को सोनिया गाँधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष चुन कॉन्ग्रेस ने आखिरकार साबित कर दिया कि राहुल गलत नहीं थे। इस फैसले ने फिर साबित किया है कि जिस पार्टी के लिए कभी मशहूर था ‘खाता न बही, जो कहे केसरी वही सहे’ (वही सीताराम केसरी जिन्हें कथित तौर पर सोनिया के इशारों पर कॉन्ग्रेस मुख्यालय से बेदखल कर दिया गया था), वह कानून से नहीं गॉंधी परिवार के इशारों पर नाचती है।

यह जरूर है कि राहुल जब जयपुर में बोल रहे थे तो उन्होंने सोचा नहीं होगा कि उनकी कुंडली में नरेंद्र मोदी और अमित शाह नाम के दो ग्रह आकर बैठने वाले हैं। और यह तो किसी मोड़ पर ख्याल नहीं आया होगा कि इन दोनों की वजह से सात साल बाद ही सही उनके एक-एक शब्द सच केवल सच साबित होंगे।

उस कथित ऐतिहासिक भाषण में राहुल ने कॉन्ग्रेस को एक परिवार बताते हुए कहा था कि तेजी से बदलाव की जरूरत है। साथ ही जोड़ा था सोच-समझकर, प्यार से और सबकी सुनकर बदलाव करना है। इसलिए राहुल का उत्तराधिकारी चुनने के लिए कॉन्ग्रेसियों ने तेजी से बदलाव करते हुए उनकी मॉं को चुन लिया है। यह बदलाव इतनी तेजी से हुआ कि इसमें करीब दो महीने लगे। आरजू-मिन्नतों से लेकर ‘गॉंधी परिवार से नहीं होगा अगला अध्यक्ष’ वाला शिगूफा और बैठकों का मैराथन रेस भी चला। बदलाव सोच-समझकर, प्यार से और सबकी सुनकर ही किया गया है।

इस बदलाव ने राहुल के उस भाषण के केवल एक अंश को ही गलत साबित किया है। यह बतौर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गॉंधी के करीब 20 महीने के कार्यकाल की भी नाकामी है। चुनावी पराजयों को हम राहुल की नाकामी नहीं मानते, क्योंकि चमत्कार की उम्मीद केवल लिबरलों को ही थी। राहुल ने उस भाषण में हर स्तर पर पॉंच-सात नेता तैयार करने की बात कही थी, जो किसी भी वक्त एक-दूसरे की जगह ले ले। पर कॉन्ग्रेसियों ने इस तर्क का हवाला देकर इस पर अमल नहीं किया कि ‘बिन गॉंधी परिवार हम टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे’।

अब इस पर आते हैं कि बेटे ने जिस विष को छोड़ा था वह मॉं पीने को क्यों मजबूर हुईं? क्यों इस बार अध्यक्ष के पहले अंतरिम शब्द जोड़ा गया? सूत्र बताते हैं कि ऐसा प्रियंका गॉंधी की ताजपोशी के लिए माकूल वक्त के इंतजार में किया गया है।

​प्रियंका की ताजपोशी में देरी के लिए भी मोदी-शाह की जोड़ी ही जिम्मेदार बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि भाई के बाद विष का हाला पीने को बहन ने पूरा मंच सजा रखा था। बस लोकतंत्र के नाम पर 10 अगस्त को वर्किंग कमेटी की बैठ के बाद इसका बकायदा ऐलान किया जाना बाकी था।

लेकिन, मोदी-शाह के आर्टिकल 370 के दॉंव ने गॉंधी परिवार को तुरुप के उस पत्ते को चलने से रोक दिया है जो आम चुनावों में उत्तर प्रदेश में औंधे मुँह गिरी थी। बताया जाता है कि इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर से विरोध के स्वर उठने और जनभावना केन्द्र सरकार के फैसले के साथ होने के कारण प्रियंका को आखिरी वक़्त में पैर खींचने पड़े। श्रीमंत जैसे युवाओं की पीठ पर इसलिए हाथ नहीं रखा गया क्यूँकि अब जमाना केसरी वाला नहीं रहा।

आखिर में, राहुल गॉंधी के जयपुर वाले भाषण की एक लाइन शिद्दत से याद आ रही है। राहुल ने कहा था, “कभी-कभी खुद से पूछता हूँ कि कॉन्ग्रेस पार्टी चलती कैसे है।” इसका जवाब पूरा देश जानना चाहता है। विदेशों में चिंतन के बाद किसी दिन जवाब मिल जाए तो राहुल जी प्लीज देश को भी बताइएगा।

मैं देश के साथ विश्वासघात नहीं करूँगा: अनुच्छेद 370 पर जब अम्बेडकर ने लगाई अब्दुल्ला की क्लास

अनुच्छेद 370 एक ऐसा प्रावधान था, जिसके कारण जम्मू कश्मीर को कई विशेषाधिकार मिले हुए थे और गृहमंत्री अमित शाह ने अपने संसदीय भाषणों में कई बार दोहराया कि इससे न तो देश और राज्य का कोई भला हुआ और न ही जम्मू कश्मीर की जनता का। इस प्रावधान ने राज्य में उद्योग के प्रसार को रोक रखा था, जिससे रोजगार भी नहीं पनप सका। शेष भारत के लोग इस प्रावधान के कारण जम्मू कश्मीर में संपत्ति खरीदने के योग्य नहीं थे। इससे अब्दुल्ला व मुफ़्ती परिवार को एकछत्र सत्ता सुख भोगने का मौका मिल गया।

डॉक्टर एसएन बुसी की एक पुस्तक से कुछ नए खुलासे हुए हैं, जिसके अनुसार पंडित नेहरू जम्मू कश्मीर को धर्मनिरपेक्षता का एक मॉडल बनाना चाहते थे क्योंकि पाकिस्तान की स्थापना एक इस्लामिक राष्ट्र के रूप में हुई थी। बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर पर लिखी गई डॉक्टर बुसी की पुस्तक “Framing the Indian Constitution” के कुछ ऐसे हिस्सों के बारे में बताना जरूरी है, जिसमें नेहरू और शेख अब्दुल्ला के ‘खेल’ पर प्रकाश डाला गया है।

6 वॉल्यूम में प्रकाशित इस पुस्तक के अनुसार, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनके साथ के कई राष्ट्रीय नेता शेख अब्दुल्ला के साथ मिल कर जम्मू कश्मीर को विशेषाधिकार दिए जाने के लिए प्रयासरत थे। उनका मानना था कि जम्मू कश्मीर भारतीय गणराज्य का हिस्सा तो होगा लेकिन इसे कुछ विशेष प्रावधानों के तहत विशेष अधिकार दिए जाएँ। इसके बाद पंडित नेहरू ने फैसला किया कि जम्मू कश्मीर के लिए कुछ अस्थायी प्रावधान बनाए जाएँ क्योंकि राज्य को उनकी आवश्यकता है।

शेख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर के प्रीमियर थे और संविधान सभा के सदस्य भी थे। नेहरू ने शेख अब्दुल्ला के साथ मिल कर इस विषय पर बात की। लेकिन, नेहरू को इस बात का डर था कि तत्कालीन (और देश के प्रथम) क़ानून मंत्री भीमराव अम्बेडकर नहीं मानेंगे। उन्होंने अब्दुल्ला से अम्बेडकर को मनाने को कहा। पुस्तक के अनुसार, शेख अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के लिए अस्थायी विशेषाधिकार वाले प्रावधानों को लेकर बाबसाहब से बातचीत की।

ऐसा सुनते ही बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर ने शेख अब्दुल्ला को डपट दिया। बाबासाहब ने सीधे, साफ़ और सपाट शब्दों में कहा,

“अगर मैं इस प्रस्ताव (जम्मू कश्मीर को विशेषाधिकार) का समर्थन करता हूँ तो यह मेरे देश भारत के साथ विश्वासघात करने जैसा होगा। और हाँ, भारत का क़ानून मंत्री होने के नाते मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा। मैं अपने देश के हितों के साथ धोखा नहीं कर सकता।”

‘यह वो म्यूजिकल चेयर है, जिसमें सिर्फ गाँधी परिवार के सदस्यों के लिए ही म्यूजिक बजता है’

कॉन्ग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में सोनिया गाँधी का चुनाव किए जाने पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने रविवार (अगस्त 11, 2019) को कटाक्ष करते हुए कहा कि गाँधी आपस में “म्यूजिकल चेयर” खेल रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी की डूबती नैया के बचाव में सोनिया गाँधी का सामने आना साबित करता है कि कॉन्ग्रेस के लिए राहुल गाँधी एक बड़ी भूल थे।

संबित पात्रा ने कहा कि अंत में कॉन्ग्रेस को गाँधी परिवार से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ति को ही अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया जाना था। उन्होंने कहा कि इसे इस तरह से भी कहा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस ने पूरा एक चक्कर लगाया है, और वापस से उसी जगह पर पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि यह परिक्रमा राहुल गाँधी से शुरू होकर सोनिया गाँधी तक और सोनिया गाँधी से शुरू होकर राहुल गाँधी पर जाकर खत्म होती है। यह एक म्यूजिकल चेयर की तरह है, जिसमें सिर्फ गाँधी परिवार के सदस्यों के लिए म्यूजिक बजता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ये दर्शाता है कि कॉन्ग्रेस के लिए राहुल गाँधी एक बड़ी भूल है।

पात्रा ने कॉन्ग्रेस की तुलना भाजपा से करते हुए कहा कि दोनों पार्टियाँ एक दूसरे के विपरीत हैं। भाजपा में जहाँ पार्टी ही परिवार है, वहीं कॉन्ग्रेस में परिवार ही पार्टी है। साथ ही संबित पात्रा ने कश्मीर को लेकर दिए गए राहुल गाँधी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि वो हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। राहुल गाँधी ने शनिवार (अगस्त 10, 2019) को कहा था कि जम्मू कश्मीर में हिंसा और लोगों के मरने की खबरें आ रही है। उन्होंने इस पर पीएम मोदी से स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा था।

आंध्र के गोशाला में 100 गायों की मौत: चारे में ज़हर मिला कर दिए जाने का संदेह, नायडू ने बताया बड़ी साजिश

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में स्थित एक गोशाला में 100 के क़रीब गायों को जहर देकर मार डालने की ख़बर आई है। शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को विजयवाड़ा के बाहरी क्षेत्र में चलाए जा रहे प्राइवेट गोशाला में जहरीला चारा खाने से इन गायों की मौत हो गई। डॉक्टरों द्वारा की गई शुरुआती जाँच व पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद सामने आया कि गायों के चारे में जहर मिला कर उन्हें खिला दिया गया, इससे मृत गायों के फेंफड़ों और दिल में ख़ून के थक्के पाए गए।

इस घटना के बाद चारा के सैम्पल को हैदराबाद भेजा गया है ताकि फॉरेंसिक जाँच के बाद यह पता चल सके कि गायों को दिए जाने वाले खाने में किस तरह का जहर या जहरीला केमिकल मिलाया गया था? डॉक्टरों ने कहा कि जहरीला चारा खाने से गायों के पेट में टॉक्सिसिटी बढ़ गई, जिस कारण उनकी मौत हो गई। शुक्रवार की रात 9 बजे पहली पहली मौत हुई, जब एक गाय अचानक से गिर पड़ी। इसके बाद गोशाला के केयरटेकर ने जब जाकर देखा तो पूरा गोशाला गायों की लाशों से पटा हुआ था। वह एक भयावह दृश्य था।

शनिवार तक 80 गायों की मौत हो गई थी और और कई गायें अभी भी ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं। विजयवाड़ा गोसंरक्षण संगम के पदाधिकारियों ने कहा कि जब वे मौके पर निरिक्षण के लिए पहुँचे, तब वहाँ कई गायें मृत पड़ी थीं और कई अन्य जोर-जोर से रंभाती हुई इधर-उधर भाग रही थीं। गोशाला के भीतर गायें डरी हुई थीं। 1927 में स्थापित यह संगम 1400 गायों की देखभाल करता है।

संगठन के लोगों ने कहा कि यह विरोधियों का कार्य हो सकता है। गोशाला के संचालकों ने कहा कि चारा जहाँ से लाया गया, उस खेत में अत्यधिक कीटनाशक का प्रयोग के कारण चारा जहरीला हो गया होगा। एनिमल हसबैंड्री के अधिकारी ने कहा कि कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अत्यधिक हो जाने के कारन गायों की मौतें हुई होंगी। फॉरेंसिक जाँच के बाद ही इस बारे में कुछ अधिक कहा जा सकेगा। पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दोषियों को जल्द पकड़े जाने की माँग की है।

टीडीपी सुप्रीमो नायडू ने कहा कि गायों की मौत के पीछे एक बड़ी साजिश है, जिसकी जाँच होनी चाहिए। गोरक्षा दल और हिन्दू धार्मिक संगठन ने भी जाँच की माँग की है। मंत्री श्रीनिवास, विधायक विष्णु व डीएम इम्तियाज ने मौके पर पहुँच कर घटनास्थल का निरीक्षण किया। गोशाला में 1400-1500 गायें हैं और उनकी देखभाल के लिए 20 लोग रखे गए हैं। गोशाला में सीसीटीवी भी हैं लेकिन उनमें से अधिकार कार्य नहीं करते, ऐसा अधिकारियों ने बताया।

भाजपा नेता लंका दिनकर ने कहा कि यह राज्य की समृद्धि के लिए एक अपशकुन है। गोशाला संचालक संगठन द्वारा जहर वाली बात ख़ारिज किए जाने को उन्होंने जनता की भावनाओं पर हमला करार दिया। पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। गोशाला में अधिकतर ऐसी गायें और बछड़े हैं, जिन्हें कई जगहों से मुक्त करा कर संरक्षण दिया गया है।

नेहरू के पैर की धूल भी नहीं शिवराज, उन्हें शर्म आनी चाहिए: दिग्विजय सिंह

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान का पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने जवाहरलाल नेहरू को अपराधी कहा था। दिग्विजय सिंह ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान जवाहरलाल नेहरू के पैर की धूल भी नहीं है, उन्हें शर्म आनी चाहिए। साथ ही उन्होंने लोगों से बात करते हुए सोनिया गाँधी के अंतरिम अध्यक्ष चुने जाने के फ़ैसले को सही बताया।

दरअसल, दिग्विजय सिंह रविवार (11 अगस्त) को सीहोर ज़िले के दौरे पहुँचे, जहाँ उन्होंने अनुच्छेद-370 के बारे में बात करते हुए लोगों से कहा,

“मैंने आप लोगों से कहा था कि अगर धारा 370 हटी तो इसके गंभीर परिणाम होंगे, देखिए आज कश्मीर जल रहा है। इन्होंने (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) अपने हाथ आग में झुलसा लिए हैं। कश्मीर को बचाना हमारी प्राथमिकता है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से अपील करता हूँ कि इस समस्या को जल्दी हल कराइए, नहीं तो कश्मीर हमारे हाथ से निकल जाएगा।”

बता दें कि कश्मीर का हवाला देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को अपराधी बताया। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में मीडिया से बात करते हुए शिवराज ने इसकी दो वजहें बताईं। उन्होंने कहा, “जब भारतीय फौज कश्मीर से पाकिस्तानी कबाइलियों को खदेड़ते हुए आगे बढ़ रही थी, ठीक उसी वक्त नेहरू ने संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया। इस वजह से कश्मीर का एक-तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में रह गया। यदि कुछ दिन और सीजफायर की घोषणा नहीं होती, तो पूरा कश्मीर भारत का होता।” 

इसके आगे उन्होंने कहा, “जवाहर लाल नेहरू का दूसरा अपराध अनुच्छेद 370 था। भला एक देश में कैसे दो निशान, दो विधान (संविधान) और दो प्रधान अस्तित्व में हो सकते हैं? यह केवल देश के साथ अन्याय नहीं बल्कि अपराध भी है।” इसी के पलटवार में दिग्विजय सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दर्ज की।