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बेटे का छोड़ा ‘जहर’ पीने को मॉं मजबूर, मोदी-शाह ने बहन को पीने से रोका

कॉन्ग्रेस एक मजेदार संगठन है। एक भी नियम और कानून इस पार्टी में नहीं चलते। हम हर मिनट एक नया नियम बनाते हैं और पुराने वाले को दबा देते हैं। कोई हमसे पूछे कि कॉन्ग्रेस पार्टी क्या करती है तो हमारा जवाब होना चाहिए कॉन्ग्रेस पार्टी देश के लिए नेता तैयार करती है।

माफ कीजिएगा देश की सबसे पुरानी पार्टी को लेकर ये मेरे विचार नहीं हैं। ये खुद राहुल गॉंधी के विचार हैं। भरोसा न हो तो 20 जनवरी 2013 को जयपुर के कॉन्ग्रेस चिंतन शिविर में दिए गए करीब 38 मिनट के उनके भाषण को एक बार फिर सुन ले। चिंतन शिविर से दिमाग की बत्ती न जल रही हो तो थोड़ा और स्पष्ट कर दूॅं कि ऊपर लिखे गए एक-एक शब्द ‘सत्ता जहर है’ वाले मशहूर भाषण के अंश हैं।

भावुकता का पुट लिए यह हिन्दी-अंग्रेजी मिश्रित संबोधन राहुल ने पार्टी का उपाध्यक्ष बनने पर दिया था और उस समय की मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इसे सुन सोनिया गॉंधी सहित वहॉं मौजूद हर कॉन्ग्रेसी की आँखें गीली हो गई थी।

10 अगस्त 2019 को सोनिया गाँधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष चुन कॉन्ग्रेस ने आखिरकार साबित कर दिया कि राहुल गलत नहीं थे। इस फैसले ने फिर साबित किया है कि जिस पार्टी के लिए कभी मशहूर था ‘खाता न बही, जो कहे केसरी वही सहे’ (वही सीताराम केसरी जिन्हें कथित तौर पर सोनिया के इशारों पर कॉन्ग्रेस मुख्यालय से बेदखल कर दिया गया था), वह कानून से नहीं गॉंधी परिवार के इशारों पर नाचती है।

यह जरूर है कि राहुल जब जयपुर में बोल रहे थे तो उन्होंने सोचा नहीं होगा कि उनकी कुंडली में नरेंद्र मोदी और अमित शाह नाम के दो ग्रह आकर बैठने वाले हैं। और यह तो किसी मोड़ पर ख्याल नहीं आया होगा कि इन दोनों की वजह से सात साल बाद ही सही उनके एक-एक शब्द सच केवल सच साबित होंगे।

उस कथित ऐतिहासिक भाषण में राहुल ने कॉन्ग्रेस को एक परिवार बताते हुए कहा था कि तेजी से बदलाव की जरूरत है। साथ ही जोड़ा था सोच-समझकर, प्यार से और सबकी सुनकर बदलाव करना है। इसलिए राहुल का उत्तराधिकारी चुनने के लिए कॉन्ग्रेसियों ने तेजी से बदलाव करते हुए उनकी मॉं को चुन लिया है। यह बदलाव इतनी तेजी से हुआ कि इसमें करीब दो महीने लगे। आरजू-मिन्नतों से लेकर ‘गॉंधी परिवार से नहीं होगा अगला अध्यक्ष’ वाला शिगूफा और बैठकों का मैराथन रेस भी चला। बदलाव सोच-समझकर, प्यार से और सबकी सुनकर ही किया गया है।

इस बदलाव ने राहुल के उस भाषण के केवल एक अंश को ही गलत साबित किया है। यह बतौर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गॉंधी के करीब 20 महीने के कार्यकाल की भी नाकामी है। चुनावी पराजयों को हम राहुल की नाकामी नहीं मानते, क्योंकि चमत्कार की उम्मीद केवल लिबरलों को ही थी। राहुल ने उस भाषण में हर स्तर पर पॉंच-सात नेता तैयार करने की बात कही थी, जो किसी भी वक्त एक-दूसरे की जगह ले ले। पर कॉन्ग्रेसियों ने इस तर्क का हवाला देकर इस पर अमल नहीं किया कि ‘बिन गॉंधी परिवार हम टुकड़े-टुकड़े हो जाएँगे’।

अब इस पर आते हैं कि बेटे ने जिस विष को छोड़ा था वह मॉं पीने को क्यों मजबूर हुईं? क्यों इस बार अध्यक्ष के पहले अंतरिम शब्द जोड़ा गया? सूत्र बताते हैं कि ऐसा प्रियंका गॉंधी की ताजपोशी के लिए माकूल वक्त के इंतजार में किया गया है।

​प्रियंका की ताजपोशी में देरी के लिए भी मोदी-शाह की जोड़ी ही जिम्मेदार बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि भाई के बाद विष का हाला पीने को बहन ने पूरा मंच सजा रखा था। बस लोकतंत्र के नाम पर 10 अगस्त को वर्किंग कमेटी की बैठ के बाद इसका बकायदा ऐलान किया जाना बाकी था।

लेकिन, मोदी-शाह के आर्टिकल 370 के दॉंव ने गॉंधी परिवार को तुरुप के उस पत्ते को चलने से रोक दिया है जो आम चुनावों में उत्तर प्रदेश में औंधे मुँह गिरी थी। बताया जाता है कि इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर से विरोध के स्वर उठने और जनभावना केन्द्र सरकार के फैसले के साथ होने के कारण प्रियंका को आखिरी वक़्त में पैर खींचने पड़े। श्रीमंत जैसे युवाओं की पीठ पर इसलिए हाथ नहीं रखा गया क्यूँकि अब जमाना केसरी वाला नहीं रहा।

आखिर में, राहुल गॉंधी के जयपुर वाले भाषण की एक लाइन शिद्दत से याद आ रही है। राहुल ने कहा था, “कभी-कभी खुद से पूछता हूँ कि कॉन्ग्रेस पार्टी चलती कैसे है।” इसका जवाब पूरा देश जानना चाहता है। विदेशों में चिंतन के बाद किसी दिन जवाब मिल जाए तो राहुल जी प्लीज देश को भी बताइएगा।

मैं देश के साथ विश्वासघात नहीं करूँगा: अनुच्छेद 370 पर जब अम्बेडकर ने लगाई अब्दुल्ला की क्लास

अनुच्छेद 370 एक ऐसा प्रावधान था, जिसके कारण जम्मू कश्मीर को कई विशेषाधिकार मिले हुए थे और गृहमंत्री अमित शाह ने अपने संसदीय भाषणों में कई बार दोहराया कि इससे न तो देश और राज्य का कोई भला हुआ और न ही जम्मू कश्मीर की जनता का। इस प्रावधान ने राज्य में उद्योग के प्रसार को रोक रखा था, जिससे रोजगार भी नहीं पनप सका। शेष भारत के लोग इस प्रावधान के कारण जम्मू कश्मीर में संपत्ति खरीदने के योग्य नहीं थे। इससे अब्दुल्ला व मुफ़्ती परिवार को एकछत्र सत्ता सुख भोगने का मौका मिल गया।

डॉक्टर एसएन बुसी की एक पुस्तक से कुछ नए खुलासे हुए हैं, जिसके अनुसार पंडित नेहरू जम्मू कश्मीर को धर्मनिरपेक्षता का एक मॉडल बनाना चाहते थे क्योंकि पाकिस्तान की स्थापना एक इस्लामिक राष्ट्र के रूप में हुई थी। बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर पर लिखी गई डॉक्टर बुसी की पुस्तक “Framing the Indian Constitution” के कुछ ऐसे हिस्सों के बारे में बताना जरूरी है, जिसमें नेहरू और शेख अब्दुल्ला के ‘खेल’ पर प्रकाश डाला गया है।

6 वॉल्यूम में प्रकाशित इस पुस्तक के अनुसार, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उनके साथ के कई राष्ट्रीय नेता शेख अब्दुल्ला के साथ मिल कर जम्मू कश्मीर को विशेषाधिकार दिए जाने के लिए प्रयासरत थे। उनका मानना था कि जम्मू कश्मीर भारतीय गणराज्य का हिस्सा तो होगा लेकिन इसे कुछ विशेष प्रावधानों के तहत विशेष अधिकार दिए जाएँ। इसके बाद पंडित नेहरू ने फैसला किया कि जम्मू कश्मीर के लिए कुछ अस्थायी प्रावधान बनाए जाएँ क्योंकि राज्य को उनकी आवश्यकता है।

शेख अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर के प्रीमियर थे और संविधान सभा के सदस्य भी थे। नेहरू ने शेख अब्दुल्ला के साथ मिल कर इस विषय पर बात की। लेकिन, नेहरू को इस बात का डर था कि तत्कालीन (और देश के प्रथम) क़ानून मंत्री भीमराव अम्बेडकर नहीं मानेंगे। उन्होंने अब्दुल्ला से अम्बेडकर को मनाने को कहा। पुस्तक के अनुसार, शेख अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर के लिए अस्थायी विशेषाधिकार वाले प्रावधानों को लेकर बाबसाहब से बातचीत की।

ऐसा सुनते ही बाबासाहब भीमराव अम्बेडकर ने शेख अब्दुल्ला को डपट दिया। बाबासाहब ने सीधे, साफ़ और सपाट शब्दों में कहा,

“अगर मैं इस प्रस्ताव (जम्मू कश्मीर को विशेषाधिकार) का समर्थन करता हूँ तो यह मेरे देश भारत के साथ विश्वासघात करने जैसा होगा। और हाँ, भारत का क़ानून मंत्री होने के नाते मैं ऐसा कभी नहीं करूँगा। मैं अपने देश के हितों के साथ धोखा नहीं कर सकता।”

‘यह वो म्यूजिकल चेयर है, जिसमें सिर्फ गाँधी परिवार के सदस्यों के लिए ही म्यूजिक बजता है’

कॉन्ग्रेस के अंतरिम अध्यक्ष के रूप में सोनिया गाँधी का चुनाव किए जाने पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने रविवार (अगस्त 11, 2019) को कटाक्ष करते हुए कहा कि गाँधी आपस में “म्यूजिकल चेयर” खेल रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पार्टी की डूबती नैया के बचाव में सोनिया गाँधी का सामने आना साबित करता है कि कॉन्ग्रेस के लिए राहुल गाँधी एक बड़ी भूल थे।

संबित पात्रा ने कहा कि अंत में कॉन्ग्रेस को गाँधी परिवार से ताल्लुक रखने वाले व्यक्ति को ही अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया जाना था। उन्होंने कहा कि इसे इस तरह से भी कहा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस ने पूरा एक चक्कर लगाया है, और वापस से उसी जगह पर पहुँच गया है। उन्होंने कहा कि यह परिक्रमा राहुल गाँधी से शुरू होकर सोनिया गाँधी तक और सोनिया गाँधी से शुरू होकर राहुल गाँधी पर जाकर खत्म होती है। यह एक म्यूजिकल चेयर की तरह है, जिसमें सिर्फ गाँधी परिवार के सदस्यों के लिए म्यूजिक बजता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ये दर्शाता है कि कॉन्ग्रेस के लिए राहुल गाँधी एक बड़ी भूल है।

पात्रा ने कॉन्ग्रेस की तुलना भाजपा से करते हुए कहा कि दोनों पार्टियाँ एक दूसरे के विपरीत हैं। भाजपा में जहाँ पार्टी ही परिवार है, वहीं कॉन्ग्रेस में परिवार ही पार्टी है। साथ ही संबित पात्रा ने कश्मीर को लेकर दिए गए राहुल गाँधी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि वो हिंसा भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। राहुल गाँधी ने शनिवार (अगस्त 10, 2019) को कहा था कि जम्मू कश्मीर में हिंसा और लोगों के मरने की खबरें आ रही है। उन्होंने इस पर पीएम मोदी से स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा था।

आंध्र के गोशाला में 100 गायों की मौत: चारे में ज़हर मिला कर दिए जाने का संदेह, नायडू ने बताया बड़ी साजिश

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में स्थित एक गोशाला में 100 के क़रीब गायों को जहर देकर मार डालने की ख़बर आई है। शुक्रवार (अगस्त 9, 2019) को विजयवाड़ा के बाहरी क्षेत्र में चलाए जा रहे प्राइवेट गोशाला में जहरीला चारा खाने से इन गायों की मौत हो गई। डॉक्टरों द्वारा की गई शुरुआती जाँच व पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद सामने आया कि गायों के चारे में जहर मिला कर उन्हें खिला दिया गया, इससे मृत गायों के फेंफड़ों और दिल में ख़ून के थक्के पाए गए।

इस घटना के बाद चारा के सैम्पल को हैदराबाद भेजा गया है ताकि फॉरेंसिक जाँच के बाद यह पता चल सके कि गायों को दिए जाने वाले खाने में किस तरह का जहर या जहरीला केमिकल मिलाया गया था? डॉक्टरों ने कहा कि जहरीला चारा खाने से गायों के पेट में टॉक्सिसिटी बढ़ गई, जिस कारण उनकी मौत हो गई। शुक्रवार की रात 9 बजे पहली पहली मौत हुई, जब एक गाय अचानक से गिर पड़ी। इसके बाद गोशाला के केयरटेकर ने जब जाकर देखा तो पूरा गोशाला गायों की लाशों से पटा हुआ था। वह एक भयावह दृश्य था।

शनिवार तक 80 गायों की मौत हो गई थी और और कई गायें अभी भी ज़िंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं। विजयवाड़ा गोसंरक्षण संगम के पदाधिकारियों ने कहा कि जब वे मौके पर निरिक्षण के लिए पहुँचे, तब वहाँ कई गायें मृत पड़ी थीं और कई अन्य जोर-जोर से रंभाती हुई इधर-उधर भाग रही थीं। गोशाला के भीतर गायें डरी हुई थीं। 1927 में स्थापित यह संगम 1400 गायों की देखभाल करता है।

संगठन के लोगों ने कहा कि यह विरोधियों का कार्य हो सकता है। गोशाला के संचालकों ने कहा कि चारा जहाँ से लाया गया, उस खेत में अत्यधिक कीटनाशक का प्रयोग के कारण चारा जहरीला हो गया होगा। एनिमल हसबैंड्री के अधिकारी ने कहा कि कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अत्यधिक हो जाने के कारन गायों की मौतें हुई होंगी। फॉरेंसिक जाँच के बाद ही इस बारे में कुछ अधिक कहा जा सकेगा। पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दोषियों को जल्द पकड़े जाने की माँग की है।

टीडीपी सुप्रीमो नायडू ने कहा कि गायों की मौत के पीछे एक बड़ी साजिश है, जिसकी जाँच होनी चाहिए। गोरक्षा दल और हिन्दू धार्मिक संगठन ने भी जाँच की माँग की है। मंत्री श्रीनिवास, विधायक विष्णु व डीएम इम्तियाज ने मौके पर पहुँच कर घटनास्थल का निरीक्षण किया। गोशाला में 1400-1500 गायें हैं और उनकी देखभाल के लिए 20 लोग रखे गए हैं। गोशाला में सीसीटीवी भी हैं लेकिन उनमें से अधिकार कार्य नहीं करते, ऐसा अधिकारियों ने बताया।

भाजपा नेता लंका दिनकर ने कहा कि यह राज्य की समृद्धि के लिए एक अपशकुन है। गोशाला संचालक संगठन द्वारा जहर वाली बात ख़ारिज किए जाने को उन्होंने जनता की भावनाओं पर हमला करार दिया। पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। गोशाला में अधिकतर ऐसी गायें और बछड़े हैं, जिन्हें कई जगहों से मुक्त करा कर संरक्षण दिया गया है।

नेहरू के पैर की धूल भी नहीं शिवराज, उन्हें शर्म आनी चाहिए: दिग्विजय सिंह

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान का पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने जवाहरलाल नेहरू को अपराधी कहा था। दिग्विजय सिंह ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान जवाहरलाल नेहरू के पैर की धूल भी नहीं है, उन्हें शर्म आनी चाहिए। साथ ही उन्होंने लोगों से बात करते हुए सोनिया गाँधी के अंतरिम अध्यक्ष चुने जाने के फ़ैसले को सही बताया।

दरअसल, दिग्विजय सिंह रविवार (11 अगस्त) को सीहोर ज़िले के दौरे पहुँचे, जहाँ उन्होंने अनुच्छेद-370 के बारे में बात करते हुए लोगों से कहा,

“मैंने आप लोगों से कहा था कि अगर धारा 370 हटी तो इसके गंभीर परिणाम होंगे, देखिए आज कश्मीर जल रहा है। इन्होंने (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) अपने हाथ आग में झुलसा लिए हैं। कश्मीर को बचाना हमारी प्राथमिकता है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से अपील करता हूँ कि इस समस्या को जल्दी हल कराइए, नहीं तो कश्मीर हमारे हाथ से निकल जाएगा।”

बता दें कि कश्मीर का हवाला देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को अपराधी बताया। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में मीडिया से बात करते हुए शिवराज ने इसकी दो वजहें बताईं। उन्होंने कहा, “जब भारतीय फौज कश्मीर से पाकिस्तानी कबाइलियों को खदेड़ते हुए आगे बढ़ रही थी, ठीक उसी वक्त नेहरू ने संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया। इस वजह से कश्मीर का एक-तिहाई हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में रह गया। यदि कुछ दिन और सीजफायर की घोषणा नहीं होती, तो पूरा कश्मीर भारत का होता।” 

इसके आगे उन्होंने कहा, “जवाहर लाल नेहरू का दूसरा अपराध अनुच्छेद 370 था। भला एक देश में कैसे दो निशान, दो विधान (संविधान) और दो प्रधान अस्तित्व में हो सकते हैं? यह केवल देश के साथ अन्याय नहीं बल्कि अपराध भी है।” इसी के पलटवार में दिग्विजय सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दर्ज की।

‘RSS की विचारधारा अब केवल J&K तक नहीं रुकेगी, पूरे भारत में मुस्लिमों का दमन करेगी’

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जम्मू कश्मीर पर एक बार फिर से रोना रोया है। इमरान ख़ान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को भी निशाने पर लिया। ख़ान ने ट्विटर पर लिखा कि आरएसएस की हिन्दुओं के प्रभुत्व वाली विचारधारा नाज़ी-आर्यन विचारधारा की तरह है। उन्होंने जम्मू कश्मीर को ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ बताते हुए लिखा कि ये विचारधारा अब केवल वहीं नहीं रुकेगी बल्कि पूरे भारत में मुस्लिमों का दमन कर देगी।

इमरान ख़ान ने डर जताया कि ये विचारधारा जम्मू कश्मीर और पूरे भारत के मुस्लिमों से गुजरते हुए अंततः पाकिस्तान को भी अपने लपेटे में ले लेगी। उन्होंने संघ की ‘हिंदुत्व के प्रभुत्व वाली विचारधारा’ को जर्मनी के तानाशाह हिटलर की सोच के सामान बताया। जम्मू कश्मीर में भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर राज्य को मिले विशेषाधिकार ख़त्म करने से तिलमिलाए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने लिखा कि जम्मू कश्मीर में नरसंहार किया जा रहा है।

उन्होंने लिखा कि कश्मीर में कर्फ्यू लगा है और जनता पर क्रैकडाउन किया जा रहा है। आर्थिक बदहाली से जूझ रहे इस्लामिक देश के प्रधानमंत्री ने लिखा कि भारत सरकार जम्मू कश्मीर की भौगोलिक परिस्थितियों को जबरदस्ती बदलना चाहती है। उन्होंने पूछा, “क्या दुनियाँ सिर्फ़ देखती रहेगी और समर्थन करती रहेगी, जैसा कि म्यूनिख में हिटलर के काल में हुआ था?“

इस दौरान इमरान ख़ान अपने ही देश में बलूचिस्तान में पाक फ़ौज द्वारा किए जा रहे अत्याचारों को भूल गए। पाक तो विरोधियों को फ़ौज का इस तरह ठिकाने लगाती है, जिससे किसी को पता तक नहीं चलता। बलूचिस्तान और POK के कई नेताओं को विदेश में रहना पड़ रहा है क्योंकि अपने क्षेत्र में उन्हें पाकिस्तान की सरकार और फौज से खतरा है। बांग्लादेश लिबरेशन वाले युद्ध के दौरान भी पाक फ़ौज द्वारा अपने ही देश के बंगालियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया था। पाकिस्तानी फ़ौज का नरसंहार और दमन का पुराना इतिहास रहा है, जो अभी भी चालू है।

इमरान ख़ान के ताज़ा बयानों से पता चलता है कि तालिबान की डाँट और अपने मित्र चीन से अपेक्षित समर्थन न मिलने से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। ऊपर से संयुक्त राष्ट्र ने भी पाकिस्तान की अपील पर ध्यान नहीं दिया। वहीं भारत को रूस और ब्रिटेन सहित दुनियाभर के देशों से समर्थन प्राप्त हो रहा है। यूएई और मालदीव जैसे मुस्लिम बहुल देशों ने भी जम्मू कश्मीर मसले पर भारत का समर्थन किया।

Zomato अब करवा रहा बीफ और पोर्क की डिलीवरी, वो भी जबरदस्ती… हड़ताल पर गए डिलीवरी मैन

पश्चिम बंगाल के हावड़ा में ऑनलाइन खाना डिलीवर करने वाली कंपनी जोमैटो के फूड डिलीवरी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। उनका आरोप है कि कंपनी उनकी इच्छा के विरुद्ध उनको बीफ (गोमांस) और पोर्क (सूअर का मांस) डिलीवर करने के लिए मजबूर कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके विरोध में वो पिछले एक सप्ताह से हड़ताल पर हैं।

फूड डिलीवरी कर्मचारियों का कहना है कि वे किसी भी हाल में बीफ और पोर्क की डिलीवरी नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उन्हें बीफ और पोर्क पहुँचाने के लिए मजबूर किया जाता है। मना करने पर उन्हें धमकी दी जाती है और कहा जाता है कि किसी भी हाल में ऑर्डर रद्द नहीं किया जाएगा। उनसे जबरदस्ती काम कराया जा रहा है, जो कि उन्हें मंजूर नहीं है, इसलिए वो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उन्होंने बकरीद के मौके पर बीफ या पोर्क की डिलीवरी करने से मना करते हुए कहा कि इससे उनकी धार्मिक भावना आहत होती है।

डिलीवरी स्टाफ ने कंपनी से उनकी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ न करने की माँग करते हुए वेतन बढ़ाने की भी बात कही है। इसके लिए हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही समुदाय के डिलीवरी ब्वॉय हड़ताल पर चले गए। दोनों समुदाय के स्टाफ का कहना है कि वो अपनी धार्मिक मान्यता के खिलाफ जाकर फूड डिलीवर नहीं करेंगे।

जोमैटो में ऑर्डर की डिलीवरी करने वाले मौसीन अख्तर ने इस बारे में बात करते हुए कहा, “हाल ही में कंपनी के एप से कुछ मुस्लिम रेस्तरां भी जोड़े गए हैं, लेकिन हमारे यहाँ ऑर्डर डिलीवरी करने वाले कुछ लड़के हिन्दू समुदाय से भी आते हैं, इन्होंने बीफ फूड की डिलीवरी करने से इनकार कर दिया है, कुछ दिनों में हमें पोर्क की भी डिलीवरी देनी पड़ेगी, लेकिन हम इसकी डिलीवरी नहीं करेंगे।”

मौसीन का कहना है कि ये सारी घटनाएँ कंपनी में हिन्दू-मुसलमानों के बीच भाईचारे की भावना को भी प्रभावित कर रही हैं। उसने आरोप लगाया है कि कंपनी को सब कुछ पता है लेकिन कंपनी उनकी मदद करने के बजाय उनके ऊपर ही झूठे आरोप लगा रही है। इसके साथ ही मौसीन ने वेतन से जुड़ी समस्याओं के बारे में भी बताया और कहा कि वहाँ मोडिकल सुविधाएँ भी नहीं दी जाती हैं।

पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री और टीएमसी विधायक राजीब बनर्जी ने इस मामले में जाँच का भरोसा दिया है।राजीब बनर्जी ने कहा, “मुझे भी लगता है कि जो कंपनी ऐसा कर रही है कि उसे एक बार फिर से सोचना चाहिए, उन्हें किसी भी धर्म के स्टाफ को उसके विश्वास के खिलाफ चलने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए, ये बहुत गलत है, हमें ऐसे कदम की जानकारी नहीं है, चूँकि हमसे इस बारे में संपर्क किया गया है इसलिए इस बाबत हम कार्रवाई करेंगे।”

गौरतलब है कि हाल ही में जोमैटे ने अपने गुरुग्राम ऑफिस में आवश्यकता से अधिक 100 कस्टमर्स सपोर्ट कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। कंपनी ने कॉस्ट कटिंग करने के लिए छँटनी करने का कदम उठाया था। कंपनी ने कहा था कि यह छँटनी ग्राहक देखभाल विभाग में आवश्यकता से अधिक कर्मचारी होने के कारण की गई है।

मुस्लिम महिलाओं ने PM मोदी को भेजी राखी, मौलाना हुए आगबबूला

तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ क़ानून बनने से मुस्लिम महिलाओं में ख़ुशी का माहौल है। इसके लिए आभार जताते हुए वाराणसी की मुस्लिम महिलाओं ने क्षेत्रीय सांसद व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने हाथों से बनी राखी भेजी है। मुस्लिम महिलाओं की इस भावना की जहाँ एक तरफ़ सराहना हो रही है, तो वहीं दूसरी तरफ मौलाना आगबबूला हो गए हैं। उन्होंने इसे ‘सस्ते प्रचार का तरीका’ करार दिया है।

मोदी के प्रति अपनी भावना व्यक्त करते हुए मुस्लिम महिलाओं ने कहा है कि उन्होंने तीन तलाक़ के दंश से हमें जो आज़ादी दिलाई है, वो केवल एक भाई ही कर सकता है। अपने भाई (पीएम मोदी) के लिए हम बहनें उन्हें अपने हाथों से राखी बनाकर भेज रही हैं। एक महिला ने कहा, “मोदी जी ने हमारी दयनीय हालत को खत्म किया है। आने वाली महिलाएँ भी तीन तलाक से बच सकती हैं। इसी कारण हम लोगों ने यह पवित्र बंधन राखी भेजी।”

राखी बनाने वाली रामापुरा की हुमा का कहना है,“मोदी ने तीन तलाक जैसी कुरीति को खत्म करवाया। नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री और वाराणसी के सांसद होने के साथ ही साथ देश की सभी मुस्लिम महिलाओं के बड़े भाई हैं। अपने भाई के लिए हम बहनों ने राखी तैयार की है।” उन्होंने कहा कि जैसा अभी तक अच्छा काम हुआ है, वैसे आगे भी होता रहेगा।

पीएम मोदी की तस्वीर वाली राखी तैयार करती मुस्लिम महिलाएँ (तस्वीर सौजन्य: चौथी दुनिया)

तीन तलाक़ के संदर्भ में उन्होंने कहा, “हमारे मन से तीन तलाक़ का ख़ौफ़ कम हो गया है। आने वाले समय में सारा डर ख़त्म हो जाएगा।” समाजसेवी हुमा बानो ने कहा,

“राखी पाक रिश्ता बनाती है, चाहे हिंदू हो या मुस्लिम। भाई-बहन का रिश्ता नायाब होता है। मोदी ने हम लोगों के दर्द को समझा है। तीन तलाक से मुक्ति दिलाई है। पूरे देश की मुस्लिम महिलाओं को उन्हें राखी भेजनी चाहिए। मौलाना इससे बेवजह नाराज हो रहे हैं। यह एक प्रेम बंधन है। यह बहुत पाक बंधन है। बुरे वक्त में मोदी जी ने हमारा साथ दिया है। इससे बड़ा उपहार हमारे लिए क्या हो सकता है।”

वहीं, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्यक्ष मतीन ख़ान ने कहा, “आरएसएस का अनुषांगिक संगठन मुस्लिम मंच इस तरह की हरक़तें करवा रहा है। वे नक़ाब और टोपी पहनकर इस तरह की हरक़तें करते हैं, जिससे मुस्लिमों में आपस में बगावत हो। इसमें किराए पर लाए गए मुस्लिम भी होते हैं। ये बिकाऊ माल सत्ताधारी लोगों के दबाव में ऐसा काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि कुछ लोग पीएम मोदी को ख़त भेजेंगे और फिर उसका प्रचार करेंगे। इस तरह की हरक़त वे सिर्फ़ सत्ता के प्रचार के लिए करते हैं। इसमें राखी भिजवाना भी शामिल है।

शैखू आलम साबरिया चिश्चितिया मदरसा के मौलाना इस्तिफाक कादरी ने कहा कि राखी भेजने का तरीका केवल एक दिखावा है। इसके पीछे सिर्फ़ राजनीति है। मुस्लिम महिलाओं की और भी समस्याएँ हैं सरकार को उन पर भी ध्यान देना चाहिए।

ऑल इंडिया महिला मुस्लिम लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर का कहना है कि राखी भेजने में किसी को क्या परेशानी होगी। तीन तलाक जैसी कुप्रथा के बारे में लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि सबका अपना-अपना नज़रिया है। सबको अपनी-अपनी आज़ादी का इस्तेमाल करने का अधिकार है। हमारे मुल्क़ में ये सब चीजें होनी जरूरी हैं। इससे सांझी संस्कृति को बढ़ावा मिलता है, यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है और साथ ही यह एक अच्छा कदम भी है।

फ़िल्मकार अनुराग कश्यप ने डिलीट किया ट्विटर अकाउंट

फिल्मकार अनुराग कश्यप ने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया है। यह कदम उन्होंने नेटफ्लिक्स पर सेक्रेड गेम्स का दूसरा सीजन रिलीज होने से पहले उठाया है। इस वेबसीरिज को डायरेक्ट करने वाले अनुराग कुछ दिनों पहले ‘डरा हुआ शांतिप्रिय नैरेटिव’ गढ़ने में लगे थे।

अनुराग ने शनिवार (9 अगस्त) को क़रीब रात 9 बजे दो ट्वीट करने के बाद अपना अकाउंट डिलीट कर दिया। अपने ट्वीट में उन्होंने उन धमकियों का ज़िक्र किया जो उन्हें और उनके परिवार को मिल रही थीं। उन्होंने लिखा, “जब आपके माता-पिता को फोन आने लगे। आपकी बेटी को ऑनलाइन धमकियाँ मिल रही है क्योंकि आप जानते हैं कि कोई भी इस बारे में बात नहीं करना चाहता है। ठग राज कर रहे हैं और ठगना ज़िंदगी जीने का नया तरीका है।”  


Anurag Kashyap quits Twitter, his last tweet

अपने दूसरे और आख़िरी ट्वीट में उन्होंने ट्विटर अकाउंट को डिलीट करने की वजह बताते हुए लिखा, “आप सभी की ख़ुशी और सफलता की कामना करता हूँ। यह मेरा आख़िरी ट्वीट है क्योंकि मैं ट्विटर अकाउंट डिलीट कर रहा हूँ। जब मुझे मेरे दिमाग में जो चल रहा है वो बिना डर के बोलने नहीं दिया जाएगा तो बेहतर है मैं कुछ भी ना बोलूँ। गुड बॉय।”


Anurag Kashyap quits Twitter, his last tweet

अपना अकाउंट डिलीट करने से पहले अनुराग कश्यप ने एक स्क्रीनशॉट शेयर किया था जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करके लिखा कि डियर @narendramodi सर, आपकी जीत पर बधाई। सर कृप्या हमें यह भी बताएँ कि हम आपके उन अनुयायियों के साथ कैसा व्यवहार करें, जो मेरी बेटी को धमकी भरे संदेश भेजते हैं।

anurag kashyap

जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले पर ट्वीट करते हुए उन्होंने बिना नाम लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। वे उन 49 सेलिब्रिटीज में भी शामिल थे जिन्होंने हाल में मोदी को दलितों और अल्पसंख्यकों पर बढ़े कथित जुल्म, हेट क्राइम, मॉब लिंचिंग के मुद्दे पर पत्र लिखा था। इस पत्र में जय श्री राम को उन्माद का नारा बताया गया था।

धार्मिक स्थल को लेकर हुआ विवाद, दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। दरअसल, तुगलकाबाद में सतगुरू रविदास जी का मंदिर को तोड़ने के आदेश पर अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने धरना-प्रदर्शन करके अपना रोष व्यक्त किया। प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा रविदास महाराज शेरपुर से बाज़ारों में विरोध मार्च करते हुए कातरों चौक पहुँचे। इस दौरान उन्होंने केंद्र व दिल्ली सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की।

ख़बर के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने लगभग एक घंटे तक यातायात बाधित रखा। इस वजह से लोगों को आवाजाही में ख़ासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। धरना-प्रदर्शन के दौरान बहुजन समाज पार्टी के हलका इंचार्ज कुलवंत सिंह टिब्बा, ज़िलाध्यक्ष सरबजीत सिंह खेड़ी, हलका अध्यक्ष डॉ सोमा सिंह गंडेवाल, दर्शन सिंह बाजवा का कहना है कि दिल्ली के तुगलकाबाद में सतगुरू रविदास जी का ऐतिहासिक मंदिर तोड़कर केंद्र व दिल्ली सरकार अनुसूचित जाति भाईचारे की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही है।

जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का कहना है ये धर्मस्थल क़रीब 500 साल पुराना है, जिसे धर्म गुरूओं ने बनाया था। क़रीब 12 बीघे ज़मीन के एक छोटे से हिस्से पर यह छोटा सा धर्मस्थल बना हुआ है। डीडीए ने इसे अपने अधीन कर लिया था और इसके चारों तरफ़ बाउंड्री खड़ी कर दी थी। हालाँकि, धर्मस्थल पर जाने का रास्ता छोड़ दिया था।

यह मामला निचली कोर्ट से हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जहाँ फ़ौरन इस धर्मस्थल को हटाने का आदेश दिया गया। आदेश के बाद पुलिस नेतृत्व में धर्मस्थल को हटाने के साथ-साथ बाउंड्री के रास्ते को भी बंद कर दिया गया। इसके बाद लोगों में ग़ुस्सा भड़क गया और उन्होंने विरोध-प्रदर्शन किया। गुस्साए लोग 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन भी करेंगे। फ़िलहाल, इस जगह पर भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है जिससे पूरे इलाक़े का नियंत्रण पुलिस के हाथ में रहे।