Home Blog Page 5647

POK में पाकिस्तान के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, गिलगित, बाल्टिस्तान में भारी विरोध प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर पाकिस्तान का कब्ज़ा है और समय-समय पर पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों द्वारा पाकिस्तान के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की बातें सामने आती रहती हैं। पाकिस्तान भी गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों के साथ अन्याय करता आ रहा है। ताज़ा मामले में गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने पाकिस्तान पर जनता के साथ धोखा करने का बड़ा आरोप लगाया।

दरअसल, पाकिस्तान ने विकास के नाम पर गिलगित-बाल्टिस्तान की जनता के साथ धोखा किया। विकास कार्यों का बहाना बना कर उनके साथ छल किया गया। पाकिस्तान ने कई वर्षों पहले गिलगित-बाल्टिस्तान के लोगों की जमीनें, संसाधन और सम्पत्तियाँ हड़प ली थीं। उन्हें बताया गया कि यह सब गिलगित एयरपोर्ट का निर्माण व अन्य विकास कार्यों के लिए किया जा रहा है। लेकिन, हमेशा की तरह पाकिस्तान के इरादे कुछ और ही थे।

आज कई वर्ष बीत जाने के बाद भी लोगों को उनकी सम्पत्तियों का उचित मूल्य नहीं मिला है। पाकिस्तान ने उन्हें उचित मुआवजा देने का भरोसा तोड़ दिया है। इसके ख़िलाफ़ वहाँ के लोग सड़कों पर हैं। अभी हाल ही में गिलगित बाल्टिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अमित शाह के उस बयान का स्वागत किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पीओके भी जम्मू कश्मीर का हिस्सा है और उसके लिए जान भी दे सकते हैं।

गिलगित-बाल्टिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता एच सेरिंग ने कहा कि यह पाक अधिकृत क्षेत्र भी लद्दाख का ही एक हिस्सा है और जम्मू कश्मीर राज्य के अंतर्गत आता है। उन्होंने भारत के संवैधानिक ढाँचे में गिलगित बल्टिस्तान को उचित जगह देने की माँग की। उन्होंने राज्यसभा व लोकसभा में प्रतिनिधित्व की माँग की। भारत सरकार ने अनुच्छेद-370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर जम्मू कश्मीर व लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया है।

J&K: बकरीद पर घाटी में पाबंदियों में ढील, घर न लौट पाने वाले छात्रों के लिए होंगे विशेष कार्यक्रम

अनुच्छेद-370 के कई प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद अभी जम्मू कश्मीर में स्थिति सामान्य और शांतिपूर्ण है। वहाँ की जनता को कोई परेशानी न हो, इसके लिए राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार (जुलाई 7, 2019) को बैठक कर आला अधिकारियों को अहम निर्देश दिए। ख़ुद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल अभी क्षेत्र के दौरे पर हैं और उन्होंने जनता एवं सुरक्षा बलों से सीधा संवाद स्थापित कर स्थिति का जायजा लिया। राज्यपाल मलिक ने जम्मू कश्मीर के उन छात्रों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है, जो राज्य से बाहर पढ़ाई कर रहे हैं लेकिन किसी कारणवश बकरीद पर घर आने में अक्षम हैं।

जुमे की नमाज और बकरीद को लेकर राज्यपाल ने समीक्षा बैठक की। इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे दूसरे राज्यों में पढाई कर रहे जम्मू कश्मीर के छात्रों को उनके परिवार से बात कराने के लिए टेलीफोन लाइन स्थापित किए जाएँ। राज्यपाल ने बकरीद पर घर न लौट पाने वाले छात्रों के लिए कार्यक्रम आयोजित करने हेतु फंड भी जारी किया। इसके अलावा बकरीद के अवसर पर राज्य में जानवरों की मंडियाँ लगाई जाएँगी क्योंकि इस त्यौहार के लिए लोग बड़ी संख्या में बकरों की खरीदारी करते हैं।

बकरीद के अवसर पर राशन व किराना की दुकानों को भी खुला रखने के लिए कहा गया है। घाटी में माहौल ख़राब करने की कोशिश करने की सम्भावना के कारण 100 से अधिक नेता व अलगाववादी पहले ही नजरबन्द किए जा चुके हैं। आम जनता ने सरकार के निर्णय का स्वागत किया है। लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने को लेकर वहाँ की जनता में ख़ुशी की लहर है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के उन प्रावधानों को निरस्त करने का निर्णय लिया है, जिनसे जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ था। राज्य को देश की मुख्यधारा से जोड़ने और क्षेत्र के विकास के लिए ये क़दम उठाए गए। इसके अलावा जम्मू कश्मीर को विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश तो लद्दाख को विधायिका रहित केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया।

जम्मू-कश्मीर मामले पर वामदलों का प्रदर्शन, कहा- 370 पर फैसला लोकतंत्र और संघीय ढाँचे की हत्या

जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने और राज्य के विभाजन के खिलाफ वामदलों ने बुधवार को नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया। माकपा और भाकपा सहित अन्य वामदलों ने मंडी हाउस से संसद मार्ग तक पैदल मार्च किया।

माकपा (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) के महासचिव सीताराम येचुरी, भाकपा (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) के महासचिव डी राजा, भाकपा के राज्यसभा सदस्य बिनॉय विश्वम, माकपा की वरिष्ठ नेता वृंदा करात सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया।

डी राजा ने कहा कि संविधान से अनुच्छेद 370 हटाने और जम्मू कश्मीर का विभाजन कर केन्द्र शासित क्षेत्र घोषित करने के सरकार के फैसले से संविधान, लोकतंत्र और संघीय ढाँचे की हत्या हुई है। उन्होंने कहा कि इसके विरोध में वामदलों के आह्वान पर बुधवार को आयोजित किए गए देशव्यापी आंदोलन के तहत दिल्ली में शांतिमार्च का आयोजन किया गया। साथ ही कविता कृष्णन ने विरोध में कुछ ज़्यादा ही आगे निकल गई और कह डाला “एक देश, एक संविधान तो है ही, लेकिन उसमें एक संविधान का मतलब ये नहीं है कि एक ही कानून पूरे देश में लागू हो!”

इस पर सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार ने तीन साल पहले कश्मीर के मामले में कोई भी फैसला करने से पहले सभी पक्षकारों से पर्याप्त विचार विमर्श करने का वादा किया था। लेकिन अब सरकार ने विचार विमर्श की प्रक्रिया में शामिल होने वाले पक्षकारों को जेल में डाल दिया। साथ ही समूचे इलाके की संचार सेवाएँ ठप कर इसे देश के अन्य इलाकों से अलग कर दिया। येचुरी ने कहा कि यह ना सिर्फ संघीय व्यवस्था बल्कि भारत की एकता और अखंडता के लिए चेतावनी है।

आतंकी फंडिंग रोकने के लिए अमेरिका ने PAK को दिया अक्टूबर तक का अंतिम समय

अमेरिका ने पाकिस्तान को स्पष्ट कर दिया है कि अगर वह FATF की ग्रे (निगरानी) सूची से बाहर आना चाहता है तो उसे FATF के निर्देशों के अनुसार अपनी जमीन से काम कर रहे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और उनके सरगनाओं के खिलाफ़ ठोस कार्रवाई करनी होगी। यह संदेश पाकिस्तान के दौरे पर आए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने आर्थिक और राजस्व मामलों पर पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री इमरान खान के सलाहकार अब्दुल हफीज़ शेख को दिया। यह प्रतिनिधिमंडल इस साल जून में FATF द्वारा आतंकियों तक आर्थिक सहायता पहुँचने से रोकने के लिए सुझाए गए कदमों पर पाकिस्तान के अमल की समीक्षा के लिए ही इस्लामाबाद आया था।

पेरिस स्थित काला धन रोकने के लिए बने संगठन FATF ने जून में अपनी फ्लोरिडा मीटिंग के दौरान कहा था कि पाक उसके द्वारा निर्देशित कदमों को उठाने में असफल रहा है। अब पाक के पास आतंकियों तक पहुँच रहे पैसों को रोकने के लिए अक्टूबर तक का ही समय है, जिसके बाद उसे काली सूची में डाला जा सकता है। एक बार पाकिस्तान काली सूची में पहुँच गया तो उसके लिए अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहायता पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा।

पिछले साल FATF ने पाक के आंतरिक कानूनों को मनी-लॉन्ड्रिंग और आतंकवादियों तक पैसा पहुँचने से रोकने में नाकाफी मानते हुए पाक को ग्रे-सूची में डाल दिया था। हालाँकि, हफीज़ शेख ने पाक द्वारा उठा लिए गए कदमों, जैसे पाकिस्तानी नेशनल असेम्बली की स्टैंडिंग कमेटी के दो महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा विनिमय और मनी-लॉन्ड्रिंग रोधी बिलों को हरी झंडी दिखाने की बात की, लेकिन पाकिस्तान के डॉन अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी इतने-भर से संतुष्ट नहीं नज़र आए। उन्होंने शेख से साफ़ कहा कि अगर पाक अमेरिका की मदद अंतरराष्ट्रीय समुदाय का विश्वास दोबारा जीतने के लिए चाहता है तो उसे अमेरिका को एक समय-सीमा बतानी होगी। अमेरिका जानना चाहता है कि कब ये बिल पाक संसद में रखे जाएँगे, कब तक पास होंगे, और कब पाकिस्तानी राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी के हस्ताक्षर के बाद ये कानून में तब्दील होंगे।

आर्थिक कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए इस ग्रे-सूची से निकलना बहुत ज़रूरी है। इस्लामाबाद में तैनात अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) की प्रतिनिधि टेरीजा सांचेज पहले ही चेता चुकीं हैं कि अगर पाक ग्रे-सूची से बाहर आने में नाकाम रहता है तो उसका IMF से स्वीकृत क़र्ज़ भी खतरे में पड़ जाएगा। ऐसे में यह देखने लायक होगा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव और आतंकियों के हिमायती अपने पाकिस्तानी सेना के आकाओं के बीच इमरान खान कौन सा बीच का रास्ता निकाल पाते हैं।

नान-टिमाटर भाव तय करने के बाद पाक सिक्योरिटी कमिटी की ताज़ा घोषणा: भारत के साथ तोड़े व्यापारिक संबंध

जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A हटाए जाने से नाराज पाकिस्तान ने भारत के साथ राजनयिक संबंधों में कमी कर दी है। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्ता निलंबित कर दिया है।

पाकिस्तानी अख़बार डॉन के अनुसार, “बुधवार (अगस्त 07, 2019) को पाकिस्तान के राजनयिक संबंधों को कम करने और भारत के साथ सभी द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित करने का ‘संकल्प’ लेते हुए, कश्मीर पर कब्जे के संबंध में हालिया घटनाक्रमों के मद्देनजर कई बड़े फैसले लिए।”

डॉन के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की अध्यक्षता में शीर्ष सुरक्षा संस्था की बैठक में कश्मीर पर कब्जे के लिए विशेष दर्जे को भारत के निर्णय के मद्देनजर मौजूदा स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित किया गया था।

बैठक में पाकिस्तान-भारत द्विपक्षीय व्यवस्था की समीक्षा करने, संयुक्त राष्ट्र में इस मामले को ले जाने का भी निर्णय लिया गया। बैठक के बाद जारी एक बयान में कहा गया, “पीएम (पाक के पीएम इमरान खान) ने निर्देश दिया कि भारतीय नस्लवादी शासन और मानवाधिकारों के उल्लंघन को उजागर करने के लिए सभी राजनयिक चैनलों को सक्रिय किया जाए।”

डॉन के अनुसार, बैठक में नई दिल्ली से पाकिस्तान के राजदूत को वापस बुलाने और भारतीय दूत को निष्कासित करने का भी फैसला किया गया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का कहना है, “हमारे राजदूत अब नई दिल्ली में नहीं होंगे और यहाँ से उनके राजदूतों को भी वापस भेजा जाएगा।”

इससे पहले जम्मू-कश्मीर के मसले पर पाकिस्तान के संसद में भी चर्चा हुई। इस चर्चा में भाग लेते हुए इमरान सरकार में विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने भारत से सभी संबंध खत्म करने की वकालत करते हुए कहा कि अगर भारत, हमसे (पाकिस्तान) बातचीत करने में दिलचस्पी नहीं रख रहा है तो उनका राजदूत यहाँ क्यों है?

अनुच्छेद 370: मुंबई को निशाना बना सकते हैं बौखलाए आतंकी, खुफिया एजेंसियों ने चेताया

अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को हटाने के बाद जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छिन गया और राज्य को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया गया। राज्य की जनता ने जहाँ इस फ़ैसले का स्वागत किया है, वहीं कश्मीरी नेताओं व अलगाववादियों ने खूनखराबे की धमकियाँ दीं। लेकिन, सरकार ने समय रहते कई नेताओं व अलगाववादियों को नजरबन्द कर जनता को भड़काने के उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और अब जम्मू कश्मीर में जनजीवन सामान्य है। एनएसए अजीत डोभाल ख़ुद वहाँ पहुँच कर जनता व पुलिस से सीधा संवाद कर रहे हैं और स्थिति का जायजा ले रहे हैं।

वहीं, सबसे बड़ा खतरा आतंकियों से है, जिसके कारण पहले से ही राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। देश के कई अन्य हिस्सों में भी अनुच्छेद-370 के पर कतरने से बौखलाए आतंकियों द्वारा हमले की योजना बनाए जाने की बात सामने आई है। पंजाब अलर्ट पर है। पंजाब के डीजीपी ने अधिकारियों को प्रत्येक रेंज में अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित बीएसएफ के जवानों के साथ तालमेल बिठा कर काम किया जा रहा है। 15 अगस्त को लेकर भी पेट्रोलिंग बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।

अब ख़बर आ रही है कि आतंकी मुंबई में हमले करने की फिराक में हैं। ख़ुफ़िया एजेंसियों ने सरकार को इस बाबत आगाह किया है। मुंबई भारत की वित्तीय राजधानी कही जाती है और वहाँ स्थित स्थलों को पहले भी आतंकियों द्वारा निशाना बनाया जाता रहा है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा आगाह करने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है दिल्ली मेट्रो में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। हालाँकि, पाकिस्तान ख़ुद आर्थिक संकट से जूझ रहा है और देश में महँगाई चरम पर है।

उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी ‘एक और पुलवामा’ की बात करके अपने खतरनाक इरादों को जाहिर किया। आतंकवाद का लम्बे समय से पोषक रहा पाक कुछ नई पैंतरेबाजी कर सकता है। बता दें कि पुलवामा हमले के दौरान सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे, जिसके बाद भारतीय वायुसेना ने एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तान स्थित आतंकी कैम्पों को तबाह कर दिया था और कई आतंकियों को मार गिराया था।

राम के अयोध्या में जन्म की बात पर जज ने पूछा- किसी कोर्ट में जीसस के जन्म पर बात हुई है?

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने वादियों में से एक के वकील से पूछा कि क्या दुनिया में कभी किसी अदालत को जीसस बेथलेहम में ही पैदा हुए थे या नहीं, राम अयोध्या में पैदा हुए थे या नहीं जैसे सवालों का सामना करना पड़ा है। वादी गोपाल विशारद की ओर से पेश वकील के परासरण ने सुप्रीम कोर्ट के जज एसए बोबडे के इस सवाल का तुरंत जवाब दे पाने में असमर्थता जताई। उन्होंने अदालत से कहा कि उन्हें तुरंत तो इस मामले की कोई जानकारी नहीं है, उन्हें देखना पड़ेगा।

रामायण के ज़िक्र से निकला सवाल

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह सवाल परासरण द्वारा रामायण को उद्धृत किए जाने पर आया था। परासरण ने अपनी बहस के दौरान एक बिंदु यह भी रखा था कि रामायण में कम-से-कम तीन बार यह ज़िक्र है कि भगवान श्री राम अयोध्या में पैदा हुए थे। इसपर जस्टिस बोबडे ने पूछा कि क्या जीसस क्राइस्ट बेथलेहम में पैदा हुए थे, ऐसा या इससे मिलता-जुलता कोई सवाल कभी कोर्ट में आया है क्या। तो परासरण ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है, वह इसे देखेंगे।

मालूम हो कि अयोध्या विवाद में मध्यस्थता असफल रहने के बाद शीर्ष अदालत ने 6 अगस्त से रोज़ाना सुनवाई कर मामले का निपटारा करने का निर्णय लिया था। इसके पहले 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने तीनों पक्षों को विवादित भूमि का एक-एक तिहाई दिया था। फैसले से नाखुश तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में इसके इसके विरुद्ध याचिका दायर की थी।

पहले नान-टिमाटर के भाव ठीक कर लो, जिहाद तो हमें पता है कयामत तक करोगे

अनुच्छेद-370 (Article 370) पर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, कम से कम पाकिस्तानी सेना को तो यही लगता है। आजकल अनुच्छेद-370 को खत्म करने के भारत के फैसले से पाकिस्तान से सबसे ज्यादा प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। ये वही पाकिस्तान है जो कुछ दिन पहले नान-रोटी के लिए उच्चस्तरीय बैठकें बुलवा रहा था।

इस मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इस बीच राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की एक और बैठक की अध्यक्षता की है। अब भारत के आर्टिकल 370 पर लिए गए फैसले से बौखलाए पाकिस्तान ने कहा है कि वह भारत के इस कदम का मुकाबला करने के लिए सभी संभावित विकल्पों का इस्तेमाल करेगा।

इस विकल्प के बारे में इमरान खान सरकार में मंत्री फवाद चौधरी भारत को युद्ध की धमकी दी है। फवाद चौधरी ने कहा है कि अब भारत को खून और आँसू से जवाब देना होगा। वहीं, पाकिस्तान आर्मी प्रवक्ता ने कल शाम एक ट्वीट किया है, जिसमें वो कश्मीर को किसी भी तरीके से वापस लेने की बात करते हुए नजर आ रहे हैं। हालाँकि, गफूर द्वारा अभी यह स्पष्टीकरण देना बाकी है कि उन्होंने ये ट्वीट भाँग के नशे में किया था या घोड़े की लीद फूँक कर…

सबसे मजेदार बात इस सबके बीच ये है कि भारत के खिलाफ युद्ध की पूरी तैयारियाँ होने की बात वो देश कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय कर्ज के चलते अपनी जनता को दो जून की नान-रोटी और टिंडे-टिमाटर उपलब्ध करा पाने तक की गेरेंटी नहीं दे पा रहा है। जिस पाकिस्तान से उनकी जनता रोटियाँ और सस्ते टिमाटर माँग रही है वो कश्मीर के नागरिकों को उनका अधिकार दिलाने की खुली घोषणा कर रहे हैं।

पाकिस्तान की धमकियों के बीच अगर पाकिस्तान का वर्तमान में कोई खुलकर समर्थन कर सकता है तो वो भारत में ही बैठे अनुच्छेद 370 से दुखी प्रदर्शनकारी हैं। हालाँकि, इस सबसे अलग कुछ लोगों का तो यह भी मत है कि पाकिस्तान को वाकई में जल्द से जल्द भारत पर हमला करने पर गंभीरता से विचार कर ही लेना चाहिए, ताकि इस बार का स्वतन्त्रता दिवस पर तिरंगा इस्लामाबाद में फहराया जा सके।

पाकिस्तान को यह जरूर ध्यान रखना चाहिए कि जिन ‘गणनाओं’ के भरोसे वह युद्ध जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है, वो बीते समय की बात हो चुकी है। कश्मीर और POK पर भारत के रुख का समर्थन दुनिया का हर बड़ा देश इस समय कर रहा है। इस समय पाकिस्तान को सिर्फ अपनी ‘रोटी-नान’ से हटकर शायद ही किसी विषय पर ध्यान देना चाहिए।

भारत इन ‘पाक कलाकारों’ को कितनी ही ऊँचाई पर क्यों न पहुँचा दे, लेकिन ये रहेंगे पाकिस्तानी ही!

पुलवामा हमले पर चुप्पी साध लेने वाले पाकिस्तानी कलाकार जिस तरह IAF द्वारा बालाकोट पर की गई कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ाने लगे थे, ठीक उसी तरह वह जम्मू-कश्मीर पर फैसला आने के बाद सक्रिय हुए हैं। इस सूची में आतिफ असलम, वीना मलिक, माहिरा खान जैसे कलाकारों के नाम शामिल हैं।

ये वह लोग हैं जिन्होंने नाम और शोहरत भारत से कमाई लेकिन जब बात अपने मुल्क की आई तो कर्मभूमि पर शब्दों से हमला करने से ये नहीं चूँके।

आतिफ असलम

आतिफ असलम आज पाकिस्तानी गायकों में से वो नाम है जिन्हें भारत में शोहरत मिली और पाकिस्तान समेत पूरे विश्व ने उन्हें उनके फन के कारण सराहा। लेकिन जब बात कश्मीर की आई तो उनसे निष्पक्ष नहीं रहा गया। आतिफ ने अपने हज जाने की खुशी को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, “कुछ बड़ा आप लोगों के साथ शेयर करते हुए खुशी हो रही है। इंशाअल्लाह, मैं जल्द ही अपनी जिंदगी के सबसे जरूरी सफर पर निकलने वाला हूँ। हज पर जाने से पहले मैं सभी से माफी माँगता हूँ, चाहे वह मेरे फैन्स हों, परिवार हो या दोस्त हों। अगर मैंने किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है तो माफ कर दें। कृपया दुआओं में मुझे याद रखें।”

आतिफ असलम के पोस्ट का स्क्रीनशॉठ

यहाँ तक बात ठीक थी लेकिन आगे आतिफ अपने पोस्ट में लिखते हैं, “इसके साथ ही मैं कश्मीरियों के साथ हो रही हिंसा और उत्पीड़न की भी निंदा करता हूँ। अल्लाह कश्मीर और पूरी दुनिया के मासूमों की रक्षा करे।”

जिसपर सोचने वाली बात है कि उन्होंने अपनी खुशी को जाहिर करते हुए ट्वीट में कश्मीर में हो रही कौन सी हिंसा की बात की है? उन्होंने अपने ट्वीट में कैसे उत्पीड़न का जिक्र किया है? अगर उन्होंने अपनी ये दुआ 370 के पावर के खत्म होने के कारण की है तो उन्हें जानने की जरूरत है जिस हिंसा की तस्वीर वो अपनी कल्पनाओं में कर रहे है उससे निजात पाने के लिए भारत सरकार ने ये ऐतिहासिक फैसला लिया है। कश्मीर में हिंसा हो रही थी, लेकिन उसके लिए भी उनका मुल्क जिम्मेदार था। जहाँ सालों से आतंकवाद पलता आया है।

वीना मलिक

बिग बॉस में वीणा मलिक की झलक

भारतीय रिएलिटी शो बिग बॉस में अपनी ओवर एक्टिंग और अश्मित पटेल के साथ संबंधों को लेकर सुर्खियों में आई पाकिस्तान की वीणा मलिक सोशल मीडिया पर बिना किसी जानकारी के अफवाह फैलाने के लिए लिखतीं हैं, “भारत ने क्लस्टर बम का प्रयोग करके और कश्मीरियों के खिलाफ सैन्य बल का उपयोग करते हुए सभी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया है। 70 साल से भारत कश्मीरियों को दबाने में नाकाम रहा है…” हालाँकि, उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भारतीय यूजर्स ने उन्हें जमकर सुनाया और बताया कि वो आज भी ‘कश्मीर’ की रट्ट लगाए हुए है जबकि वास्तविकता में वह ‘जम्मू-कश्मीर’ है।

किसी ने उनके इस ज्ञान पर उन्हें यहाँ तक बोला कि पाकिस्तानी नागरिकता पाने के लिए सबसे महत्तवपूर्ण चीज है कि उनकी बातों में लॉजिक गायब रहे, जैसे वीणा के ट्वीट से गायब था। क्योंकि भारतीय सेना द्वारा कभी भी पाकिस्तान पर या कश्मीरी लोगों पर क्लस्टर बम का इस्तेमाल नहीं किया गया।

वीना के इस पोस्ट के कारण वह इस समय सोशल मीडिया पर खूब ट्रोल रही है। लोग उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे है कि वे कॉपी-पेस्ट करने से पहले अपने लिखे का मतलब समझती तो ठीक रहता।

क्योंकि अगर भारत ने वाकई क्लस्टर बमों का प्रयोग किया होता तो पाकिस्तान के हिस्से जो इस समय कश्मीर है वो भी नहीं होता।

अपने इस ट्वीट से पहले वीना मलिक एक और ट्वीट को लेकर ट्रोल हुईं थी, जिसमें उन्होंने भारतीय सुरक्षाबलों को अपमानित करते हुए लिखा था, “भारतीय बलों द्वारा कश्मीरी लोगों की दुर्दशा और उन पर किए गए अत्याचार के लिए यह संदेश फैलाना जरूरी है। पाकिस्तान कश्मीरी लोगों को नैतिक, राजनैतिक और कूटनीतिक समर्थन देता है जो आज भी अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।”

खैर, दुख इस बात का नहीं है कि ये लोग भारत से नाम कमाकर भी पाकिस्तान के कश्मीर को अपना मानने वाले अजेंडे में भागीदार बने हुए हैं, दुख इस चीज का है कि हमारे देश में बैठे महेश भट्ट जैसे कुछ तथाकथित उदारवादी लोग इतने सब के बावजूद भी इनके समर्थन में उतरेंगे और कलाकार का कोई धर्म नहीं होता, वे सीमा में बँधे नहीं होते जैसे तर्क देंगे। फिर चाहे ये पाकिस्तानी कलाकार खुलेआम ही अपने सोशल मीडिया अकॉउंट पर ‘INDIA SUCKS’ जैसे ट्वीट क्यों न करें और खुलेआम ये क्यों न कहें कि वो हमेशा सबसे पहले ‘मुस्लिम’ रहेंगे।

माहिरा खान

आतिफ और वीणा के अलावा इस सूची में एक नाम माहिरा खान का भी है, जो बॉलीवुड के किंग खान के साथ ‘रईस’ फिल्म में काम करके एक जाना-पहचाना चेहरा बनीं, लेकिन केंद्र सरकार के फैसले के बाद इन्होंने भी बता दिया कि उनके लिए कर्मभूमि से पहले जन्मभूमि द्वारा चलाया अजेंडा महत्तवपूर्ण है। जिसको आगे बढ़ाने के लिए वह बेहद मार्मिक लहजे में दुनिया के समक्ष कश्मीर को जलता हुआ बताती हैं। 370 के प्रभाव खत्म होने के बाद माहिरा लिखती हैं, “क्या हमने पूरी तरह उन चीज़ों को भुला दिया है जिनके बारे में हम बात नहीं करना चाहते हैं? लेकिन ये सिर्फ़ रेत पर खिंची लकीरें नहीं है, ये मासूम लोगों के मारे जाने का सवाल है। जन्नत (कश्मीर) जल रही है और हम ख़ामोशी से रो रहे हैं।”

हैरानी है आज 370 आर्टिकल की कैद से आजाद हुए जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान के ये जाति-धर्म से उठे लेकिन कट्टरपंथी मानसिकता में जकड़े हुए लोग जलता हुआ बता रहे है। सालों से भारत सरकार द्वारा किए जा रहे आभासी अत्याचारों की उलाहना दे रहे हैं। लेकिन एक भी बार पाकिस्तान के उस समुदाय पर सवाल नहीं उठा रहे, जो खुद अपने देश के मोहाजिर, बलूच, पश्‍तून और हजारा समुदाय के लोगों को उनके अधिकार नहीं दे देता। जिसके कारण आज अमेरिका में स्थित प्रवासी मोहाजिरों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक समूह ‘वॉयस ऑफ कराची’ के नाम पर ग्रेटर कश्मीर की माँग करनी पड़ रही है। जिनका खुलेआम कहना है, “पाकिस्‍तान को तब तक कश्‍मीरियों के हक के लिए बोलने का कोई अधिकार नहीं है, जब तक कि वह खुद अपने यहाँ मुहाजिर, बलूच, पश्‍तून और हजारा समुदाय के लोगों को उनके अधिकार नहीं दे देता। “

J&K पहुँचे NSA अजीत डोभाल का दिखा अलग रूप, जनता और पुलिस से किया सीधा संवाद, देखें वीडियो

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल आज जम्मू कश्मीर दौरे पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने न सिर्फ़ सुरक्षा बलों से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया बल्कि आमजनों से संवाद कर उनकी बातें भी सुनीं। उन्होंने कश्मीर की जनता से मुलाकात के दौरान कहा कि आमजनों की सलामती और हिफाजत सरकार का ध्येय है।

अजीत डोभाल ने कहा, “हमलोग इस दिशा प्रयास कर रहे हैं कि किस तरह से आपके बच्चे और उनके बच्चे सुकून से रह सकें और आगे बढ़ सकें। वे क्षेत्र, मजहब और देश की तरक्की में योगदान दे सकें।“

एनएसए डोभाल शोपियाँ में सड़क किनारे खाना खाते हुए भी दिखे। ऐसा लग रहा था जैसे वह दिल्ली में बैठने वाले उच्चाधिकारी न होकर कश्मीर में रहने वाले कोई आम आदमी हों। जम्मू कश्मीर पुलिस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस द्वारा झेली जाने वाली तकलीफों की पूरी जानकारी है क्योंकि 12 साल पहले वह भी खाकी वर्दी पहना करते थे। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप अजीत डोभाल को जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों से संवाद करते हुए देख सकते हैं।

बता दें कि घाटी में माहौल अभी सामान्य और शांतिपूर्ण है। कश्मीरी नेताओं व अलगाववादियों की गीदड़-भभकियों का कोई असर नहीं हुआ है और राज्य में बिजली-पानी-मेडिकल सेवाएँ सुचारु रूप से चल रही है। बाजारों में रौनक है और लोग खरीददारी करने निकल रहे हैं। डोभाल का कश्मीर दौरा भी भारत सरकार द्वारा जनता से सीधा संवाद स्थापित करने व धरातल पर उतर कर स्थिति को समझने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अजीत डोभाल ने जम्मू कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया। राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दिया कि जनता से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी दिक्कतों का समाधान किया जाए।