Home Blog Page 5648

J&K में माहौल शांतिपूर्ण, जनता ने अनुच्छेद 370 पर सरकार के फ़ैसले का किया स्वागत

जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन और अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाए जाने को लेकर अलगाववादी और कश्मीरी नेता जैसी अफवाहें फैला रहे थे या उससे पहले जिस तरह से खून-खराबे की धमकी दे रहे थे, वैसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। राज्य में शांति है और लोग अपनी दिनचर्या में व्यस्त हैं। हाँ, आतंकियों के खतरनाक मंसूबों व माहौल बिगाड़ने वाले तत्वों को रोकने के लिए सुरक्षा ज़रूर बढ़ाई गई है लेकिन कश्मीर की जनता को भी यह पता चल गया है कि सरकार ने ये सारे निर्णय क्षेत्र के विकास को लेकर लिए हैं। इससे यह भी साफ़ हो गया है कि गीदड़-भभकी देने वाले नेता व अलगाववादी कश्मीर की जनता का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

संसद द्वारा जम्मू कश्मीर से जुड़े बिल को बहुमत से पास किए जाने के बाद आज जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने क़ानून व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने बैठक कर यह जाना कि अब तक क्षेत्र में क़ानून व्यवस्था की क्या स्थिति है? राज्यपाल ने घाटी में सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को अपने कर्मचारियों को भेज कर आम जनता की जरूरतें समझने व उन पर काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने अपनी इस बात को दुहराया कि कश्मीर की जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी पहली प्राथमिकता है।

राज्यपाल को अधिकारियों ने सूचना दी कि राज्य में स्थिति अभी संतोषप्रद है। बिजली और पानी से जुड़ी सेवाएँ सही से कार्य कर रही हैं और लोग रोजमर्रा की जरूरतों के सामान ख़रीदने के लिए घरों से निकल रहे हैं। बाजारों में भी रौनक है। राज्यपाल को यह भी बताया गया कि मेडिकल सेवाएँ सही से कार्य कर रही हैं और सभी अस्पतालों में नियमित क्रियाकलाप चल रहे हैं।

न सिर्फ़ लद्दाख के सांसद जामयांग शेरिंग नामग्याल बल्कि क्षेत्र के शिक्षा सुधारवादी व अभियंता सोनम वांगचुक ने भी केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया। उधर कश्मीर की जनता ने भी सरकार के इस निर्णय पर ख़ुशी जताई। नीचे संलग्न किए गए इस वीडियो में आप एक कश्मीरी बुजुर्ग को सुन सकते हैं जिन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद यहाँ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

जम्मू कश्मीर के ग्रामीण भी सरकार के इस निर्णय से खुश नजर आ रहे हैं। पूरे क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने और जनता द्वारा सरकार के फैसले का स्वागत करने के बाद उन तमाम कश्मीरी नेताओं, अलगावादियों और कश्मीर के हक़ में बात करने का दावा करने वाले कथित सामाजिक कार्यकर्ताओं की पोल भी खुलती है, जो अपनेआप को जम्मू कश्मीर की जनता का प्रतिनिधि मानते हैं।

मोदी है तो मुमकिन है: संसद में कामकाज का बना रिकॉर्ड, कई ऐतिहासिक विधेयक पास

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले सत्र में संसद में रिकॉर्ड कामकाज हुआ है। जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने, राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बॉंटने, तीन तलाक को गैर कानूनी करार देने जैसे ऐतिहासिक विधेयकों के साथ कई अन्य महत्वपूर्ण बिल इस सत्र में पारित हुए।

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार लगातार मिनिमम गवर्नमेंट और मैक्सिम गर्वनेंस पर जोर देती रही है। लोकसभा और राज्यसभा में रिकॉर्ड कामकाज ने उसकी इस प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। सत्र 17 जून को शुरू हुआ था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करते हुए मंगलवार को कहा था कि यह 1952 के बाद सबसे स्वर्णिम सत्र रहा है। इसमें 134 फीसदी कामकाज हुआ। 17 जून से छह अगस्त तक चले इस सत्र में कुल 37 बैठकें हुई हैं और करीब 280 घंटे तक कार्यवाही चली।

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने बुधवार को बताया कि उच्च सदन में इस बार 33 विधेयक पास हुए और सौ प्रतिशत से अधिक कामकाज हुआ। सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने से पहले समापन भाषण में उन्होंने यह बात कही।

नायडू ने बताया, “वर्ष 2009 से 2014 के बीच पॉंच साल तक जिस तरह यह सदन चला उसके बारे में मैंने इस वर्ष 13 फरवरी को एक रिपोर्ट दी थी और बताया कि किस तरह 49 प्रतिशत समय सदन का बर्बाद हुआ लेकिन इस बार रचनात्मक सदन रहा और काफी कामकाज हुआ।”

उन्होंने कहा कि इस बार कुल 35 बैठकें हुईं और 104.92 प्रतिशत कामकाज हुआ जो पिछले पॉंच साल का रिकाॅर्ड है। गत 17 सत्रों में ऐसा कामकाज नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि पाँच सत्रों में 7.44 प्रतिशत से 65.60 फीसदी ही कामकाज हो पाया था।

उन्होंने बताया कि लोकसभा ने 36 विधेयक पारित किए और दोनों सदनों से कुल 31 विधेयक पास हुए। यह 17 साल का रिकाॅर्ड है। वर्ष 2002 में 35 और वर्ष 1984 में 37 विधेयक पारित किए गए थे। इस तरह विधेयकों को पारित करने की दृष्टि से यह अब तक का छठा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

नायडू ने बताया कि 1952 में राज्यसभा के गठन से अब तक कुल 27 बार 30 दिन से अधिक बैठकें हुईं। इनमें नौ सत्र तो 35 से अधिक दिन चले, लेकिन 1955 में सर्वाधिक 50 बैठकें हुईं थीं। उन्होंने कहा कि पिछले 14 सालों में इतने लंबे समय तक सदन की बैठकें कभी नहीं चलीं।

370 पर पड़ोसी और इस्लामिक मुल्क साथ, कहा- J&K भारत का आंतरिक मसला

जम्मू कश्मीर का पुनर्गठन व अनुच्छेद 370 के कई प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने सदन में भारत सरकार से पूछा कि क्या कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है? लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी तो एक क़दम और आगे बढ़ गए और कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बता दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ़ कर दिया कि जब सरकार जम्मू कश्मीर की बात करती है तब वह न सिर्फ़ जम्मू, कश्मीर और लद्दाख बल्कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की भी बात करती है।

जम्मू कश्मीर राज्य भारत का अखंड हिस्सा है, भारत इस मसले पर किसी भी प्रकार की मध्यस्तथा का सख्त विरोधी रहा है क्योंकि यह भारतीय गणराज्य का आंतरिक मसला है। अब ख़बर आई है कि कई देशों ने पाकिस्तान को झटका देते हुए मोदी सरकार के इस क़दम को भारत का आंतरिक मुद्दा बताया है। श्री लंका, यूएई और मालदीव ने इसे भारत का आंतरिक मुद्दा बताया है और दखल देने से साफ़ इनकार कर दिया है। इससे पता चलता है कि न सिर्फ़ पड़ोसी देश बल्कि यूएई जैसे इस्लामिक देश भी भारत के साथ हैं।

मालदीव की सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र को अपने क़ानून व संविधान में ज़रूरी बदलाव करने का अधिकार है। बता दें कि अब जम्मू-कश्मीर विधायिका सहित केंद्र शासित प्रदेश होगा, वहीँ लद्दाख विधायिका रहित केंद्र शासित प्रदेश होगा। लद्दाख के सांसद ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए अब्दुल्ला परिवार और महबूबा परिवार को आड़े हाथों लिया।

कई देशों द्वारा इस मामले में पाकिस्तान को झटका देने से भारत को कूटनीतिक बढ़त भी मिली है। हालाँकि, चीन अभी भी अपने रवैये से बाज नहीं आया है और उसने अनुच्छेद-370 के पर कतरे जाने और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने को लेकर चिंता जाहिर की। भारत ने भी चीन को करारा जवाब देते हुए कहा कि यह हमारा आंतरिक मसला है और उसे इसमें दखलंदाजी का कोई अधिकार नहीं है। इस निर्णय से पाकिस्तान में बौखलाहट का माहौल है और वहाँ की संसद में पाक पीएम इमरान खान भी झल्लाते हुए नजर आए।

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को राष्ट्रपति ने किया निरस्त

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने निरस्त कर दिया है। संसद के दोनों सदन से इस संबंध में पारित प्रस्ताव के बाद राष्ट्रपति ने यह घोषणा की है।

आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया है, “संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड 1 के साथ पठित अनुच्छेद 370 के खंड 3 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति संसद की सिफारिश पर यह घोषणा करते हैं कि छह अगस्त 2019 से खंड 1 को छोड़कर उक्त अनुच्छेद के खंड लागू नहीं होंगे।’’

भाजपा नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बाँटने का प्रस्ताव पेश किया था। उसी दिन यह राज्यसभा में पारित हो गया था। अगले दिन लोकसभा ने भी इस पर मुहर लगा दी थी।

यह अधिसूचना 6 अगस्त से लागू मानी जाएगी। 6 अगस्त को ही निचले सदन लोकसभा ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम को पास किया था।

क़ुरान जलाने वाला कांड: मस्जिद केयरटेकर शौकत अली ने ही जलाई थी पुस्तक, विक्की को चाहता था फँसाना

एक महीने पहले एक मस्जिद में क़ुरान जलाने की घटना पुलिस ने सफलतापूर्वक सुलझा ली है। मामला जालंधर का है, जब नकोदर के नजदीक खानपुर ढड्डा गाँव में स्थित एक मस्जिद में कुरानशरीफ सहित कई मज़हबी पुस्तकों को जला डाला गया था। फिजिक्स और अंग्रेजी की पुस्तकें भी जलाई गई थीं। पुलिस ने इस गुत्थी को सुलझा लिया है। मस्जिद का केयरटेकर ही ने ही इस कृत्य को अंजाम दिया था।

6 जुलाई को मुख़्तार अली ने शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वह मस्जिद के दरवाजे पर पहुँचे, तब उन्होंने देखा कि मस्जिद का दरवाजा खुला हुआ था और प्रवेश द्वार का टाला टूटा हुआ था। जब वे मस्जिद के अंदर पहुँचे, तब उन्होंने देखा कि कुरान, अन्य मज़हबी पुस्तकें, चटाइयाँ और चादर जली हुई अवस्था में जमीन पर पड़े हुए थे। शिकायतकर्ता ने अंदेशा जताया कि शरीफ मोहम्मद उर्फ़ विक्की ने ये सब किया है।

पुलिस ने विक्की को गिरफ़्तार कर शुरुआती जाँच के बाद उसे रिहा कर दिया गया। वह निर्दोष साबित हुआ। पुलिस ने मामले की जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन किया। इसके अलावा कुछ बुद्धिजीवी मुस्लिमों की एक कमिटी भी बनाई गई, जिसका उद्देश्य पुलिस की मदद करना था ताकि दोषी को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके। शनिवार (अगस्त 3, 2019) को पुलिस ने मस्जिद की देखभाल करने वाली व्यक्ति शौकत अली को गिरफ्तार कर लिया।

शौकत अली के ख़िलाफ़ पुलिस के पास सबूत भी थे, जिसके बाद उसने अपना गुनाह स्वीकार कर लिया। शौकत अली की शरीफ मोहम्मद से दुश्मनी थी और बदले की भावना से उसे फँसाने के लिए उसने ऐसा किया। वह इस बात से नाराज था कि मोहम्मद उससे ज्यादा रुपए कमा रहा है।

कश्मीरियत के नाम पर 370 का रोना रोने वालों को आइना दिखाता Video, आम जनजीवन बेअसर

आम कश्मीरी नागरिकों का हवाला देकर संसद में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल का विरोध करने वाले नेताओं की दलीलें आपने सुनी होगी। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रियाओं को भी सुना होगा जो उन्होंने 370 के प्रावधानों को निरस्त करने पर कश्मीरी जनता की आड़ लेकर कही थी। लेकिन, श्रीनगर के इस ताजा वीडियो को देखकर साफ है कि कश्मीर के आम लोगों की जिंदगी 370 के निष्प्रभावी होने से बेअसर है।

समाचार एजेंसी ANI ने करीब 38 सेकंड का यह वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में श्रीनगर की सड़कों पर सामान्य आवाजाही दिख रही है। ठेले-खोमचे वाले भी अपनी आजीविका कमाने में लगे हैं।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर को लेकर ऐतिहासिक फैसला लेने से पहले केन्द्र ने घाटी में एहतियातन सुरक्षा कड़ी कर दी थी। अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी। धारा 144 लागू कर इंटरनेट कनेक्शन पर पाबंदी लगा दी गई थी।

आशंका जताई जा रही थी कि 370 के बहाने अलगाववादी और राज्य के नेता लोगों को भड़काने का काम कर सकते हैं। बिल पेश किए जाने से पहले पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को नजरबंद कर दिया गया था। फिलहाल घाटी पूरी तरह शांत है। हालॉंकि अभी सुरक्षा बलों की तैनाती में कटौती के कोई संकेत नहीं हैं।

J&K : महबूबा, उमर अब्दुल्ला समेत 100 से अधिक नेता-कार्यकर्ता गिरफ्तार

जम्मू-कश्मीर में शांति के लिए खतरा होने का हवाला देते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने राजनेताओं, कार्यकर्ताओं सहित 100 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “100 से अधिक राजनेता और कार्यकर्ता अभी तक घाटी में गिरफ्तार किए गए हैं।”

कुछ खबरों के मुताबिक अधिकारियों ने बताया है कि रविवार रात से नजरबंद राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को सोमवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल इन नेताओं को श्रीनगर के हरि निवास गेस्ट हाउस में रखा गया है।

जानकारी के अनुसार पीपल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन और इमरान अंसारी को भी सुरक्षा एजेंसियों ने गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्टों में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि घाटी में इन नेताओं की गतिविधियों से शांति में खलल पैदा होने की आशंका के चलते मजिस्ट्रेट ने इनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए थे।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद इन नेताओं की गिरफ्तारियाँ हुईं हैं। सुरक्षा के लिहाज से यहाँ इंटरनेट कनेक्शन और मोबाइल सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। साथ ही यहाँ राज्य प्रशासन के आदेश के बाद से धारा 144 भी लागू है।

SC ने माँगा निर्मोही अखाड़ा से जमीन पर दावे का सबूत, जवाब मिला- 1982 में डकैत ले गए

अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर मंगलवार (अगस्त 07, 2019) से सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई शुरू हो गई है। इस दौरान कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा से रामजन्मभूमि पर अपना अधिकार साबित करने के लिए दस्तावेज माँगे। इस पर अखाड़ा ने कहा कि 1982 में वहाँ डकैती हुई, जिसमें सारे दस्तावेज गायब हो गए।

ये इस अंतिम सुनवाई का दूसरा दिन है। मंगलवार को निर्मोही अखाड़ा ने पूरी विवादित 2.77 एकड़ जमीन पर अपने नियंत्रण की माँग की थी दूसरे दिन भी निर्मोही अखाड़ा अपनी दलीलें अदालत के सामने रख रहा है। अखाड़ा इस वक्त मामले का इतिहास अदालत को समझा रहा है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में 5 जजों की पीठ इस मामले को सुन रही है। आज एक बार फिर ये सुनवाई आगे बढ़ रही है। मंगलवार को निर्मोही अखाड़े की तरफ से दलीलें रखी गईं और जमीन पर मालिकाना हक माँगा था। हालाँकि, अभी दूसरे पक्ष की ओर से दलीलें रखना बाकी है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जजों ने निर्मोही अखाड़ा से पूछा कि क्या आपके पास इस बात को कोई सबूत हैं जिससे आप साबित कर सके कि राम जन्मभूमि की जमीन पर आपका कब्जा है? इसके जवाब में निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि 1982 में एक डकैती हुई थी, जिसमें उनके कागजात खो गए। इसके बाद जजों ने निर्मोही अखाड़ा से अन्य सबूत पेश करने को कहा।

निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि इस मामले में वे असहाय हैं। वर्ष 1982 में अखाड़े में एक डकैती में उन्होंने उस समय पैसे के साथ उक्त दस्तावेजों को भी खो दिया था। इस पर चीफ जस्टिस (CJI) ने पूछा- क्या अन्य सबूत जुटाने के लिए केस से जुड़े दस्तावेजों में फेरबदल किया गया था?

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आप बिना मालिकाना हक के पूजा-अर्चना कर सकते हैं, लेकिन पूजा करना और मालिकाना हक जताना अलग-अलग बात है। निर्मोही अखाड़ा की तरफ से वकील ने कहा कि सूट फाइल करने का मकसद ये था कि हम अंदर के कोर्टयार्ड में अपना हक जता सकें।

कश्मीर के बारे में आपको नैरेटिव के दलालों ने ये बताया था क्या?

कश्मीर में वाल्मीकि होते हैं। क्या हुआ, कश्मीरी वाल्मीकियों के बारे में नहीं सुना है? कोई बात नहीं, हम बता देते हैं। पुराने ज़माने के सूखे शौचालयों से मल सर पर उठा कर ले जाने वालों की जरुरत होती थी। आजादी के बाद कश्मीर में जब ऐसे सर पर मैला उठाने वालों की जरुरत पड़ी तो पाकिस्तान और हिन्दुस्तान के पंजाब और अन्य प्रान्तों से ले जाकर कई वाल्मीकि परिवारों को Manual Scavenging यानि सर पर मल ढोने के लिए वहाँ की सरकार ने बुला कर बसा लिया।

इन लोगों से ये वादा किया गया कि इन्हें स्थायी नागरिक का दर्जा दिया जायेगा। मगर इस स्थायी नागरिकता के साथ शर्त ये थी कि आने वाले परिवार और उनकी आगे की पीढियाँ सिर्फ सर पर मल ढोने का काम ही करेंगी। शर्त ये थी कि वो लोग और उनकी आने वाली नस्लें अन्य नौकरी-रोजगार-व्यवसाय जैसा काम हरगिज़ नहीं कर सकते!

कश्मीर का वाल्मीकि सर पर मल ढोने के लिए कश्मीरी कानून के हिसाब से बाध्य है। जी हाँ, कश्मीर का संविधान अलग होता है। बाकी भारत में जहाँ किसी से ये काम करवाना अपराध है वहीं कश्मीर में हिन्दू समाज का एक हिस्सा सर पर मल ढोने के लिए क़ानूनी तौर पर बाध्य है। राजनैतिक धोखा इस समुदाय के साथ ये भी हुआ कि उन्हें आज भी स्थायी निवासी का दर्ज़ा नहीं मिला है। कश्मीरी हिन्दुओं के साथ ये अन्याय 1957 से जारी है। साठ साल में तीन पीढियाँ गुजर गई, मगर समाज का एक हिस्सा सर पर मल ढोता है!

क्या दल-हित चिंतकों ने आपको उनके बारे में बताया है? नहीं बताया होगा। उनकी आय के स्रोत विदेशी हैं, तो एजेंडा भी कहीं और के आदेश पर ही तय होता है। जाहिर है कानून बना कर कश्मीरी हिन्दुओं के शोषण पर उनके कलम कि स्याही सूख जाती है। उनकी नजर दिल्ली में अपना दरबार सजाने के सपने देखती है, इसलिए दलहित चिंतकों को दिल्ली से उत्तर में कश्मीरी वाल्मीकि समाज की ओर देखते ही रतौंधी हो जाती है। नोटों की भारी गड्डियाँ भारत को तोड़ने के लिए जबान पर रखी जाती है, उसके वजन से कश्मीरी हिन्दुओं कि बात करते वक्त उनकी जबान नहीं चल पाती।

जबरन दलित-सवर्ण के मुद्दे खड़े करते दलहित चिंतकों कि दहाड़ती आवाज को हम कश्मीरी वाल्मीकियों के मुद्दे पर खौफ़नाक ख़ामोशी में बदलते देखते हैं। हमें भारत निस्संदेह एक मजेदार देश लगता है।

मुंबई के मेयर ने महिला का हाथ मरोड़कर बोला- ‘तुम मुझे नहीं जानती, मैं…’, वीडियो वायरल

मुंबई के मेयर विश्वनाथ महाडेश्वर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर इस समय खूब तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मेयर एक महिला का हाथ मरोड़ते हुए नजर आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिस महिला के साथ मेयर ऐसी बद्तमीजी करते दिख रहे हैं वो सांता क्रूज इलाके में प्रदर्शन करने आए लोगों में शामिल थी।

ये घटना सोमवार को गोलीबार क्षेत्र की है। जहाँ कुछ लोग 52 वर्षीय एक महिला और उसके 23 वर्षीय पुत्र की बिजली के करंट लगने से हुई मौत पर गुस्सा प्रकट करने के लिए एकत्रित हुए थे। इन लोगों ने घटना के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर रास्ता जाम कर दिया था। जिसके बाद लोगों की नाराज़गी दूर करने के लिए मेयर वहाँ मौक़े पर पहुँचे थे। लेकिन यहाँ बातचीत के दौरान मेयर और स्थानीय लोगों के बीच झड़प हो गई। और मेयर महिला पर हाथ उठाते देखे गए।

मीडिया खबरों के मुताबिक इस प्रदर्शन में अधिकतर महिलाएँ थी। वीडियों में महिलाओं और मेयर के बीच हुई बहस को सुना जा सकता है। पूरी घटना के दौरान प्रदर्शनकारी महाडेश्वर से सवाल कर रहे थे कि वे जिस क्षेत्र की नुमाइंदगी करते हैं, वहाँ मौजूद क्यों नहीं थे? इस पर महाडेश्वर कहते हैं कि वो अस्पताल में मौजूद थे। साथ ही मेयर ये भी कहते हैं कि उनकी ज़िम्मेदारी पूरे मुंबई शहर को देखने की है।

इसपर प्रदर्शन कर रही महिला में से एक महाडेश्वर से बात करने की कोशिश में आगे बढ़ती है कि तभी महाडेश्वर उस महिला का हाथ पकड़ कर मरोड़ते दिखते हैं। महाडेश्वर को वायरल होती वीडियो में ये भी कहते सुना जा सकता है- “तुम मुझे नहीं जानती, मैं कौन हूँ क्या तुम यहाँ होशियारी दिखाने की कोशिश कर रही हो?”

बता दें कि जब मेयर से इस मामले में पूछा गया तो वह भड़क गए और कहा मुझे इस बात की जानकारी है कि किसके साथ कैसे पेश होना चाहिए। लेकिन जब मामले को उन्होंने गर्म होते देखा तो मेयर वहाँ से निकल गए और बाद में लोगों के बीच अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा,”मेरे पास भी एक माँ है, पत्नी है और बेटी है। ऐसे में मुझे पता है कि महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। रविवार को जो दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ वह बारिश के पानी की वजह से नहीं बल्कि बिजली तार के लोहे के दरवाजे से सट जाने के कारण हुआ, जिसकी चपेट में माँ-बेटे आ गए।”