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चमकी बुखार से मरने वालों के शवों के नहीं हैं SKMCH अस्पताल में मिले कंकाल

शनिवार (जून 22, 2019) को बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के पीछे मानव कंकाल मिले थे। अस्पताल के पिछले हिस्से में जंगल में एक बोरे में करीब 100 नर कंकाल के अवशेष मिले। इन्सेफलाइटिस के चलते हुई मौतों से अस्पताल प्रशासन पहले ही सवालों के घेरे में है, वहीं दूसरी ओर बोरे में कंकाल मिलने की खबर ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। बिहार स्वास्थ्य विभाग ने हॉस्पिटल के पीछे मानव कंकाल मिलने के मामले की जाँच का आदेश जारी किया और मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी (डीएम) आलोक रंजन घोष ने अस्पताल प्रशासन से इस मामले में रिपोर्ट माँगी।

ताजा खबर के अनुसार, ये बात सामने आई है कि यहाँ पर लावारिस शवों को जलाया जाता है और ये नर कंकाल उन्हीं लावारिस शवों के हैं जिनपर दावा करने कोई नहीं आया। डीएम आलोक रंजन का कहना है कि इन शवों को अस्पताल प्रशासन की तरफ से सारी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जलाया गया और साथ ही उन्होंने इस दावे को भी खारिज किया कि इनमें चमकी बुखार से मरने वालों के शव भी शामिल हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि नियम के मुताबिक, अज्ञात शवों को 72 घंटे तक रखने के बाद नजदीक के पुलिस स्टेशन से तुरंत संपर्क करना होता है और इस संबंध में एक रिपोर्ट फाइल करनी होती है। रिपोर्ट फाइल होने के बाद 72 घंटे बाद तक शव को पोस्टमॉर्टम रूम में ही रखना होता है। इस दौरान अगर परिवार का कोई सदस्य शव की पहचान के लिए नहीं आता है तो पोस्टमॉर्टम विभाग की ड्यूटी है कि इसका दाह संस्कार किया जाए या फिर दफनाया जाए। ऐसे शवों के अंतिम संस्कार के लिए जिला प्रशासन अस्पताल को 2000 रुपए भी देता है।

इसके साथ ही आलोक रंजन ने ये भी कहा कि इस अस्पताल के पीछे अज्ञात शवों को फेंकने की प्रक्रिया काफी समय से चल रही है। उन्होंने बताया कि अस्पाल के बिल्कुल पास में शवदाह गृह होने से गलतफहमी हो जाती है। इसलिए अब प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से शवदाह गृह को दादर घाट शिफ्ट करने का फैसला किया है। डीएम ने ये भी बताया कि यहाँ पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों और मुस्लिमों के शवों को दफनाया जाता है, जबकि हिंदुओं के शवों को जलाया जाता है और उनका कहना है कि, चूँकि इस मामले में शव हिंदुओं के थे इसलिए उन्हें जलाया गया था।

वहीं, श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर को ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। निलंबित सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर का नाम डॉ भीमसेन कुमार है। बता दें कि, स्वास्थ्य विभाग ने 19 जून को एसकेएमसीएच में पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) के बाल रोग विशेषज्ञ को तैनाती की गई थी। मुजफ्फरपुर में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से अब तक 129 बच्चों की मौत हो चुकी है। जिसमें से 109 बच्चों ने एसकेएमसीएच में, जबकि 20 बच्चों ने केजरीवाल हॉस्पीटल में दम तोड़ा।

ममता सरकार मनाएगी संघ नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि… सम्मान या मजबूरी?

लोगों के गुस्से और राज्य में भाजपा की ओर बढ़ते झुकाव ने ममता बनर्जी को दबाव में ला दिया है। इसी के अंतर्गत श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि (23 जून) को ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल राज्य सरकार द्वारा मनाए जाने की घोषणा हुई है। अभी तक हिन्दू राष्ट्रवादी होने के चलते वह ‘सेक्युलर’ पार्टियों द्वारा हाशिए पर खिसका दिए गए थे।

लगता है ममता बनर्जी को समझ में आ गया है कि तृणमूल को मुस्लिम तुष्टिकरण भारी पड़ेगा। 2019 के चुनावों ने दिखा दिया कि भाजपा के बंगाल में उत्थान में बहुत बड़ा ध्रुवीकरण था। अगर तृणमूल के पक्ष में मुस्लिम लामबंद हुए तो हिन्दुओं ने भी भाजपा को वोट दिए।

तृणमूल ने पहले तो भाजपा को ‘बाहरी’ दिखाने का प्रयास किया। वह काम नहीं आया। इसके अलावा ममता ने डॉक्टरों की हड़ताल को भी ‘बाहरी’ साज़िश बताया और उन्हें धमकाया जिससे वह आरोप और कमज़ोर हो गया। अब जब कुछ काम नहीं कर रहा, तो ममता बनर्जी ने बंगाल के उन सांस्कृतिक प्रतीकों की ओर मुड़ना शुरू किया। यही जिन्हें भाजपा समर्थक दक्षिणपंथियों का सम्मान प्राप्त है। लेकिन इससे कोई फायदा होगा, इसमें शक है। भाजपा के उछाल के पहले तक ‘सेक्युलर’ कैम्प अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण के लिए मुखर्जी जैसे व्यक्तित्वों को भूला बैठा था।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि को ममता बनर्जी द्वारा मनाया जाना भगवा धड़े की बहुत बड़ी जीत है। बहुत लम्बे समय तक वह राजनीति में ‘अस्पृश्य’ थे और भाजपा के पूर्ववर्ती जनसंघ के पितृपुरुषों में थे। ममता का यह कदम भाजपा द्वारा राजनीतिक आयामों को पलट दिया जाना दिखाता है। 2014 में मोदी के चुनाव के बाद से राजनीतिक विर्मश दक्षिण दिशा में घूम रहा है।

2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से इसे और गति मिली है। लोकसभा प्रत्याशी के तौर पर साध्वी प्रज्ञा का चुनाव और उनका गोडसे पर टिप्पणी के बावजूद चुनावी मैदान से हटने से इंकार भी इसी दिशा में था। और अब यह साफ़ है कि देश का विमर्श किस ओर अग्रसर है।

J&K गवर्नर बोले: गोलियाँ चलाने वालों को गुलदस्ता नहीं देंगे, गोलियों का जवाब गोलियों से ही दिया जाएगा

जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आतंकवाद और अलगाववादी को लेकर शनिवार (जून 22, 2019) को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, “यदि सामने से फायरिंग की जा रही होगी तो उन्हें (आतंकियों) गुलदस्ता नहीं दिया जा सकता है। हम चाहते हैं कि कट्टरपंथ के रास्ते पर गए युवा मुख्यधारा में वापस आएँ।

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने आगे कहा, “शुक्रवार को नमाज के बाद की जाने वाली पत्थरबाजी तकरीबन रुक चुकी है। हम युवाओं की मुख्यधारा में वापसी चाहते हैं। इसके लिए योजनाओं पर विचार किया जा रहा है। हालाँकि, एक बात यह भी सच है कि यदि सामने से फायरिंग की जा रही है तो आप उन्हें गुलदस्ता नहीं थमा सकते हैं। जनरल साहब गोलियों का जवाब गोलियों से ही देंगे। हमें नेक इरादों के साथ काम करना चाहिए।”

युवाओं को संबोधित करते हुए सत्यपाल मलिक ने कहा कि जन्नत के नाम पर युवाओं को बरगलाया जाता है कि हथियार उठाने पर वे जन्नत जाएँगे। उन्होंने कहा कि वास्तव में यहाँ के युवाओं के पास दो जन्नत हैं। एक तो खुद कश्मीर है और दूसरा वो जो वे एक अच्छा मुस्लिम बनकर बाद में हासिल करेंगे।

सत्यपाल मलिक ने कहा, “मुझे इस बात की खुशी है कि मीरवाइज उमर फारूक ने ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाई है, यह एक बड़ा खतरा है। यह यहाँ पर युवाओं के बीच फैल रहा है। जम्मू में स्थिति बुरी है, पंजाब में इसकी वजह से काफी नुकसान हो रहा है।”

ख़बर के अनुसार, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक को शनिवार (22 जून) को श्रीनगर स्थित उनके ही घर में नज़रबंद कर दिया गया। मीरवाइज़ के नेतृत्व वाले हुर्रियत के एक प्रवक्ता ने बताया कि शहर के बाहरी इलाक़े में मीरवाइज़ उमर फ़ारूक के आवास पर एक पुलिस दल पहुँचा और उन्हें सूचित किया कि अब वह अपने घर से बाहर नहीं जा सकते। प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस द्वारा मीरवाइज़ को नज़रबंद करने का कोई कारण नहीं बताया गया।

‘गालीबाज ट्रोल’ स्वाति चतुर्वेदी ने फिर फैलाई फेक न्यूज़ कहा संसद में सो रहे थे अमित शाह

पत्रकार के वेश में अभद्र गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी ने फिर भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री आमिर शाह के बारे में फेक न्यूज़ फैलाई है। स्वाति के एक ट्वीट में दावा किया गया है कि गृह मंत्री संसद सत्र के बीच में सो रहे थे।

लेकिन लगता है स्वाति चतुर्वेदी और उनके जैसे अभद्र ट्रोल लोक सभा की कार्यवाही की प्रासंगिक रिकॉर्डिंग नहीं देखते, इसी लिए ऐसे निष्कर्ष पर पहुँच जाते हैं। अगर पूरा वीडियो देखा जाए तो अमित शाह कानून, दूरसंचार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद के वक्तव्य को ध्यानपूर्वक सुन रहे थे। जिस पल का स्क्रीनशॉट स्वाति ने ट्विटर पर डाला, उस पल वह रवि शंकर प्रसाद के भाषण के दौरान अपनी मेज पर रखे कुछ कागज़ देख रहे थे। आँखें नीची होने के इस क्षण को जान बूझकर स्क्रीनशॉट के लिए चुना गया। पूरी कार्यवाही का वीडियो नीचे आप खुद देख सकते हैं:

इस वीडियो में देख कर यह साफ पता चल जाता है कि अमित शाह उक्त समय पर पूरी तरह सक्रिय और सजग थे। और-तो-और, यह वीडियो इस संसद सत्र का है भी नहीं। यह संसद के इस साल जनवरी में हुए सत्र का वीडियो है। स्पष्टतः स्वाति को ट्विटर पर जाने के पहले अपने दावों को खुद जाँच लेने की कोई ज़रूरत महसूस नहीं हुई है। उनके इस ट्वीट को ट्विटर पर जब कई सारे यूज़र्स ने निशाने पर लिया तो उन्हें अपना ट्वीट हटाने पर मजबूर होना पड़ा।

फेक न्यूज़ फ़ैलाने और सोशल मीडिया पर भ्रम फ़ैलाने का स्वाति चतुर्वेदी का पुराना इतिहास है। उन्होंने हाल ही में ऑपइंडिया को मानहानि का नोटिस भेजते हुए हम पर यह आरोप लगाए कि हमारे उनके द्वारा की जा रही निम्न गुणवत्ता की पत्रकारिता पर लिखे गए लेखों के चलते उन्हें पाठकों की संख्या में कमी झेलनी पड़ी है। अतीत में स्वाति ने ठुकराए हुए प्रेमी के हाथों हिंसा की शिकार लड़की को बीएचयू की हिंसा के रूप में दिखाया था। उन्होंने एक राष्ट्रीय स्तर के नेता के बयानों के साथ भी राष्ट्रीय टीवी पर छेड़छाड़ की थी। इसके अलावा वह पहले भी अमित शाह के भाषण पर फेक न्यूज़ फ़ैलाने का प्रयास कर चुकीं हैं। उन्होंने एक संदिग्ध वेबसाइट द्वारा फैलाई गई फेक न्यूज़ को भी विश्वसनीयता प्रदान की है। उन्होंने इससे पहले इस पर भी फेक न्यूज़ फैलाई थी कि कन्हैया कुमार पर भाजपा पदाधिकारी ने हमला किया है।

TCS करेगी पटना में निवेश, बिहार में किसी बहुराष्ट्रीय IT कंपनी द्वारा यह पहला बड़ा निवेश होगा

केंद्रीय कानून व न्याय, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेन्सी सर्विसेज (TCS) जल्दी ही पटना में अपना एक बड़ा केंद्र शुरू करने जा रही है। इसकी जानकारी रविशंकर प्रसाद ने खुद अपने ट्विटर एकाउंट द्वारा दी है।

रोजगार के लिए बिहार से बढ़ते पलायन को रोकने लिए केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। TCS के पटना में निवेश करने से वहाँ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शनिवार (जून 22, 2019) को केंद्रीय कानून व न्याय, संचार और इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद से दिल्ली में मुलाकात की। इस दौरान रविशंकर प्रसाद और चंद्रशेखरन ने भारत के डिजिटल सेक्टर से जुड़े विषयों के साथ ही डिजिटल भविष्य के निर्माण के लिए नई पहलों पर भी चर्चा की।

बिहार में किसी बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी द्वारा यह पहला बड़ा निवेश होगा

बिहार में किसी बहुराष्ट्रीय आईटी कंपनी द्वारा यह पहला बड़ा निवेश होगा। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि TCS जैसी बड़ी कंपनी का बिहार में निवेश एक अच्छी शुरुआत है। इससे प्रेरित हो कर अन्य आईटी कंपनियाँ भी राज्य में निवेश करने के लिए आगे आएँगी। इससे राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। संभावना है कि जल्द ही टीसीएस के केंद्र का उद्घाटन होगा।

एयरपोर्ट पर गार्ड ने माँगा ID प्रूफ तो ‘माई चॉइस’ पादुकोण ने फेंका सेलिब्रिटी कार्ड!

देश में नियम, कानून, औपचारिकताएँ निभाने की जब बात आती है तो ऐसा लगता है जैसे ये सभी सिर्फ आम आदमी और निचले वर्ग के लोगों के लिए बनाई गई प्रथाएँ हैं। क्योंकि अक्सर हम देखते हैं कि जब भी किसी सरकारी संस्था, सार्वजानिक जगह पर नियमों के पालन की बात आती है तो ऐसे लोग, जिन्हें खुद के ‘विशेष’ होने का एहसास होता है उन्हें नियमों का पालन करना संस्था पर एहसान करना लगता है।

हालाँकि, कुछ लोगों का यहाँ पर या भी कहना है कि दीपिका पादुकोण ने अपना पहचान पत्र दिखाकर ‘सहयोग’ किया है लेकिन, उनके ‘चाहिए?’ वाले प्रश्न से तो कम से कम ऐसा महसूस नहीं होता है। जो उन्होंने दिखाया वो ID प्रूफ कम और ‘सेलिब्रिटी कार्ड’ ज्यादा नजर आता है।

हाल ही में सोशल मीडिया पर ‘माई चॉइस’ वाली एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण का एक वीडियो सामने आया था जिसे लेकर वो खबरों में थीं। दरअसल दीपिका हाल ही में अपने पिता प्रकाश पादुकोण के साथ बेंगलुरु रवाना हुईं और उनका ये वीडियो इसी दौरान रिकॉर्ड किया गया। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि दीपिका अपने पिता के साथ एयरपोर्ट के अंदर जा रही हैं। लेकिन जब दीपिका एयरपोर्ट के अंदर एंट्री कर रही थीं, तभी एक सिक्योरिटी गार्ड ने उन्हें रोक लिया और उन्हें आवाज लगाते हुए पूछा- ‘आईडी-आईडी‘। इतना सुनकर दीपिका मुड़कर देखती हैं और पूछती हैं- ‘चाहिए?‘ इसके बाद दीपिका वापस आती हैं और अपना आईडी कार्ड उसे दिखाती हैं।

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Thy shall always obey rules ? #deepikapadukone

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भिन्न है लोगों की प्रतिक्रियाएँ

दीपिका का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। लोग उनके विनम्र रिएक्शन को काफी पसंद कर रहे हैं। फैंस का कहना है कि आईडी के बारे में सुनते ही दीपिका तुरंत रुक गईं और अपना आईडी कार्ड दिखा दिया। उनमें एटिट्यूड नहीं है। एक अन्य यूजर ने कहा कि जिस तरह वो अपनी आईडी दिखाने के लिए तैयार थीं वह मुझे पसंद आया।

लेकिन, ऐसा नहीं है कि उन्हें केवल पॉजिटिव रिस्पॉन्स ही मिला। कुछ लोग इसपर दीपिका को गलत बताते हुए उन पर कमेंट भी कर रहे हैं जो कि बेहद स्वाभाविक है। खासकर तब जब आप अपनी फिल्मों की रिलीज़ से पहले अक्सर सामाजिक रूप से अचानक से सक्रीय होकर अपनी जागरूकता के नमूने दिखाने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहते हों।

कुछ लोगों का कहना है कि एयरपोर्ट पर जाने से पहले आईडी प्रूफ दिखाना जरूरी होता है तो दीपिका बिना आईडी दिखाए आगे कैसे गईं? वहीं कुछ का कहना है कि वो सेलेब हैं इसलिए उन्होंने आईडी दिखाना जरूरी नहीं समझा। कुछ का कहना है- “शुरुआत में भी गार्ड उनसे आईडी माँग रहा है लेकिन वो आगे बढ़ गईं। जब गार्ड ने उन से फिर से आईडी प्रूफ माँगा तो दीपिका पूछ रही हैं ‘चाहिए?’, बिलकुल चाहिए। वो वीवीआईपी हो सकती हैं। अपने फैंस के लिए भगवान या क्वीन हो सकती हैं लेकिन नियम सबके लिए बराबर होते हैं। बाकी दूसरे सेलेब्स की तरह उन्हें भी अपने आप आईडी दिखानी चाहिए थी।”

‘माई लाइफ माई चॉइस’ जैसी प्रगतिशील विचारधारा रखने वाली दीपिका पादुकोण को ऐसे नियम कानून मानने में आखिर समस्या भी क्यों होनी चाहिए जो बने ही हम सबकी सुविधा के लिए हों? लेकिन फिर भी अक्सर देखा जाता है कि अपनी पहचान बताना या प्रूफ देना उन्हें अपने अहंकार और सम्मान पर चोट नजर आती है। चाहे वाकया शाहरुख खान का हो या फिर दीपिका पादुकोण का हो, आम आदमी को कभी सिक्योरिटी गार्ड से पलटकर “चाहिए” या फिर “दूँ क्या?” जैसे सवाल पूछते नहीं देखा जाता है।

ओवैसी के लिए तीन तलाक़ और सबरीमाला की ‘परंपराएँ’ समान हैं… लेकिन ऐसा सच में है नहीं

तीन तलाक बिल लोक सभा में बृहस्पतिवार को रखा गया। राजग सरकार इस मुस्लिम कुप्रथा को मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आपराधिक बनाने का सतत प्रयास कर रही है। लेकिन विपक्ष मुस्लिम महिलाओं की रक्षा के इस कदम की लगातार आलोचना कर रहा है।

इस बार भी विपक्ष के नेताओं ने बिल की आलोचना की। शशि थरूर ने कहा कि बिल खुद संविधान का उल्लंघन है और यह भी जोड़ा कि पत्नी का परित्याग यदि आपराधिक कृत्य है तो यह एक ऐसे व्यापक कानून के रूप में सभी भारतीयों पर लागू होना चाहिए जो पत्नी और बच्चों का परित्याग करने को आपराधिक बनाए। जैसी उम्मीद थी, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने बिल का मुखर विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह बिल संविधान का उललंघन करता है। “यह बिल संविधान के अनुच्छेदों का उललंघन करता है। संविधान ने व्यवस्था दी है कि यदि हम विभेदकारी कानून बनाते हैं तो उन्हें दो शर्तों को पूरा करना होगा- स्पष्ट विभेदक (इंटेलीजिबल डिफ्रेंशिया) और तर्कसंगत संबंध (रैशनल नेक्सस)। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि शादी का अंत नहीं होगा। हमारे पास घरेलू हिंसा अधिनियम, मुस्लिम महिला सुरक्षा अधिनियम 1986 हैं। अतः आपका बिल स्पष्ट विभेदक की शर्त पूरी नहीं करता है।”

उसके बाद वह तीन तलाक और सबरीमाला की परम्पराओं में भ्रामक समानता बताने लगे, जहाँ रजस्वला आयु की महिलाओं का प्रवेश निषिद्ध है। उन्होंने कहा, “इसके ज़रिए मैं पूछना चाहूँगा सरकार से कि उन सबको मुस्लिम महिलाओं से बड़ा प्रेम है। क्यों नहीं उनके यही उद्गार केरल की हिन्दू महिलाओं के लिए हैं? आप सबरीमाला के खिलाफ क्यों हैं?”

सबरीमाला की परम्पराओं और तीन तलाक के बीच समानता बताने का यह प्रयास सेब और संतरों की तुलना के जैसा है। सबसे पहले, महिलाओं के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता अगर वह किसी एक मंदिर विशेष में नहीं जा रहीं हैं। लेकिन अगर किसी औरत को उसका शौहर तीन तलाक दे दे तो यह उसकी पूरी ज़िंदगी को तहस-नहस कर देता है।

दूसरी बात, सबरीमाला की परम्पराएँ व्यापक नहीं हैं। यह भगवान अय्यप्पा के मंदिरों की भी व्यापक प्रथा नहीं है। अतः अगर किसी महिला को उनकी पूजा करनी है, वह उनके अन्य मंदिरों में जा सकती है, या तब तक प्रतीक्षा कर सकती है जब तक कि वह सबरीमाला के लिए उचित आयु की न हो जाए। तीन तलाक के मामले में ऐसा नहीं है। यह मुस्लिम प्रथा हर मुस्लिम महिला पर लागू होती है, और इससे उसके बचने का कोई उपाय नहीं है; यह तलवार की तरह उनकी गर्दन पर जीवन के हर क्षण टँगी रहती है।

तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात, सबरीमाला की पम्पराओं में महिलाओं के दमन की क्षमता नहीं है, जबकि तीन तलाक की प्रथा में है। तीन तलाक के परिणामस्वरूप कई महिलाएँ निकाह हलाला जैसी निंदनीय परम्परा की शिकार होतीं हैं, जिसके अंतर्गत यौन उत्पीड़न के लिए मुस्लिम महिलाओं का मवेशियों की तरह मुस्लिम पुरुषों में आदान-प्रदान होता है।

इसलिए इन दोनों प्रथाओं के बीच समानता स्थापित करने के कोई भी प्रयास अत्यंत घृणित है और मुस्लिम महिलाओं द्वारा तीन तलाक के परिणामस्वरूप झेले जा रहे दमन के चरम की गंभीरता को कमतर करता है। लोक सभा में तीन तलाक पर हो रही बहस में यह भी दिख रहा है कि कैसे ‘सेक्युलर’ पार्टियाँ हमेशा मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथी धड़े का सशक्तिकरण करतीं हैं और मुस्लिम महिलाओं की चिंताओं को नज़रअंदाज़ कर देतीं हैं।

कन्हैया का मुजफ्फरपुर के अस्पताल पर ‘हमला’, डॉक्टरों ने नेताओं से हाथ जोड़े

कन्हैया कुमार ने मुज़फ्फरपुर के अस्पताल श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (SKMCH) में समर्थकों सहित दौरा किया है। रिपब्लिक टीवी की खबर के मुताबिक 100 से ज्यादा समर्थकों को साथ लेकर हालिया लोकसभा निर्वाचन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के उम्मीदवार रहे कन्हैया कुमार पूरे दल-बल के साथ ‘मरीजों का हालचाल लेने’ पहुँचे। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने तो बाकायदा उनका वहाँ ‘माल्यार्पण’ होने की भी बात कही है।

कन्हैया के खिलाफ प्रदर्शन

एईएस से 170 मौतें हो जाने के बावजूद डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन पर पड़ रहे दबाव व तीमारदारों की मानसिक हालत की परवाह किए बगैर नेताओं का अस्पताल पहुँच कर अराजक स्थिति बनाना बदस्तूर जारी है। इसी शृंखला में पहुँचे कन्हैया की संवेदनहीनता से क्षुब्ध हो अस्पताल में भर्ती बीमारों के रिश्तेदारों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने उनके ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकर्ताओं के मुताबिक कन्हैया के साथ आया हुजूम इतना बड़ा था कि अस्पताल के कर्मचारियों और सफाई कर्मचारियों के लिए भी अस्पताल में प्रवेश करना मुश्किल हो गया।

लेकिन मर रहे बच्चों के माहौल में हुए इस ‘शक्ति प्रदर्शन’ के बारे में जब कन्हैया कुमार से बात की गई तो उन्होंने पहले तो सवालों से कन्नी काटने का प्रयास किया, और जब ऐसा नहीं कर पाए तो कहते नज़र आए, “मैं अकेले आया हूँ। मेरे साथ कोई नहीं आया। ये अस्पताल है, यहाँ प्रार्थना कीजिए, कोई बात मत कीजिए।”

‘यहाँ आने से अच्छा गाँवों में जागरुकता फैलाएँ’

महज़ तीन दिन पहले ही SKMCH के अधीक्षक सुनील कुमार शाही ने राजनीतिक पार्टियों से आग्रह किया था कि अस्पताल में आकर अव्यवस्था फ़ैलाने और मरीजों व स्टाफ़ के लिए परेशानी खड़े करने से बेहतर होगा वे गाँवों में जाकर जागरुकता फैलाएँ। लेकिन इस अपील के बाद 20 जून की सुबह जब शरद यादव अस्पताल दौरे पर पहुँचे तो उन्हें VVIP सुविधा देने के लिए न केवल अस्पताल के दरवाज़े बंद कर दिए गए, बल्कि मरीजों तक को अस्पताल में प्रवेश के लिए संघर्ष करना पड़ा। शरद यादव को यह VVIP ट्रीटमेंट देने के पीछे राजनीतिक दबाव के कयास लगाए जा रहे हैं

वहीं मरीजों का आरोप है कि शरद यादव का प्रतीकात्मक दौरा कतई ज़रूरी नहीं था क्योंकि अस्पताल की सुविधाएँ बनाए रखने में और भी समस्या हो गई। रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए एक मरीज के घर वालों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि अगर कोई मीडिया से बात करेगा तो उसके बच्चों को अस्पताल से निकाल दिया जाएगा। क्रुद्ध प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों की असंवेदनशीलता का भी पर्दाफाश किया।

राज्य सरकार पर भी एईएस के बढ़ रहे मामलों और उसके परिणामस्वरूप हो रहीं मौतों का कोई असर पड़ता हुआ नहीं दिख रहा है। बिहार में इस जानलेवा बीमारी से हो रही मौतों पर असंवदेनशीलता के शर्मनाक प्रदर्शन में बिहार के स्वास्थ्य-मंत्री मंगल पांडे 17 जून को कैमरे के सामने राज्य की बदतर होती स्थिति की बजाय भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर ज्यादा चिंतित नज़र आए। इसके पहले पत्रकारों अंजना ओम कश्यप और TV9 भारतवर्ष के अजीत अंजुम को भी आईसीयू में घुस जाने को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। बिहार सरकार अपने प्रबंधन की कमी और महामारी को रोक पाने में नाकामी को लेकर आलोचनाओं के केंद्र में है। आज ही संवेदनहीनता और लापरवाही की एक घटना सामने आई जब पोस्टमॉर्टम विभाग की लावारिस लाशों के कई कंकाल अस्पताल परिसर की पीछे पड़े मिले

पाक PM के दोस्त ने सचिन को कहा इमरान खान तो लोगों ने बरखा दत्त को बताया इंजमाम, वजह दिलचस्प

भारतीय टीम के मशहूर क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की बचपन की एक तस्वीर ने पाकिस्तान और ट्विटर में बवाल मचा हुआ है। इसके पीछे कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सबसे खास व्यक्ति जिम्मेदार हैं।

दरअसल, एक फोटो नईम उल हक नाम के ट्विटर हैंडल से शेयर की गई है और दावा किया गया है कि फोटो 1969 के समय में पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री इमरान खान की है। इस ट्विटर हैंडल को संचालित करने वाले को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का विशेष सहायक बताया जा रहा है। यहाँ तक कि खुद पाकिस्तान मीडिया ही उस फोटो को सचिन तेंदुलकर की बता रही है इसी वजह से पाकिस्तान के लोग ही अब उन्हें ट्रोल करने लग गए हैं।

जैसे ही नईम उल हक ने यह तस्वीर ‘पीएम इमरान खान 1969’ कैप्शन के साथ पोस्ट की, ट्विटर यूजर्स ने ट्रोलिंग शुरू कर दी। एक यूजर ने ट्रोल करते हुए विराट कोहली की बचपन की तस्वीर पोस्ट की और उस पर कैप्शन लिखा इंजमाम-उल-हक 1976। उसके बाद तो इस फोटो पर मीम्स की बाढ़ आ गई। यूजर्स ने एक के बाद एक ऐसे मीम्स भेजने शुरू कर दिए।

‘उनके’ पास दो स्वर्ग हैं, एक कश्मीर और दूसरा अच्छे मुस्लिम बने रहने पर मिलेगा: सत्यपाल मलिक

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि हुर्रियत भारत सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार है जो एक सकारात्मक पहल है। जम्मू कश्मीर में बोलते हुए अपने संबोधन में राज्यपाल मलिक ने कहा कि शुक्रवार (21 जून) की प्रार्थना के बाद पथराव होना लगभग बंद हो गया है। हम युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना चाहते हैं। उसके लिए योजनाएँ बनाई जा रही हैं। लेकिन यह सच है कि अगर सामने से फायरिंग होती है तो आप गुलदस्ते नहीं दे सकते। जनरल साहब गोलियों का जवाब गोलियों से देंगे।

अपने संबोधन में मलिक ने युवाओं के नाम भी संदेश दिया जिसमें उन्होंने कहा, “हमें नेक इरादों के साथ काम करना चाहिए। जिस तरह से युवाओं को गुमराह किया जा रहा है कि वे स्वर्ग में जाएँगे… उनके पास वास्तव में दो स्वर्ग हैं, एक कश्मीर में, और दूसरा जो उन्हें बाद में मिलेगा यदि वे एक अच्छे मुस्लिम बने रहेंगे।”

सत्यपाल मलिक ने हुर्रियत (एम) के अध्यक्ष मीरवाइज़ उमर फ़ारुक के ड्रग के ख़तरे पर बोलने के लिए उनका धन्यवाद दिया और कहा, “मुझे ख़ुशी है कि मीरवाइज़ उमर फारूक ने ड्रग के ख़िलाफ़ बोला है, यह एक बड़ा ख़तरा है। यह बात यहाँ के युवाओं में फैल रही है। जम्मू में स्थिति ख़राब है, इसी वजह से पंजाब बर्बाद हो रहा है।”

ख़बर के अनुसार, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अलगाववादी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारूक को शनिवार (22 जून) को श्रीनगर स्थित उनके ही घर में नज़रबंद कर दिया गया। मीरवाइज़ के नेतृत्व वाले हुर्रियत के एक प्रवक्ता ने बताया कि शहर के बाहरी इलाक़े में मीरवाइज़ उमर फ़ारूक के आवास पर एक पुलिस दल पहुँचा और उन्हें सूचित किया कि अब वह अपने घर से बाहर नहीं जा सकते। प्रवक्ता ने बताया कि पुलिस द्वारा मीरवाइज़ को नज़रबंद करने का कोई कारण नहीं बताया गया।