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1984 दंगा नहीं, राजीव गाँधी के आदेश पर कॉन्ग्रेसियों द्वारा किया गया नरसंहार था: पूर्व DGP

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने 1984 में सिखों के ख़िलाफ़ हुई मारकाट को दंगा मानने से इनकार कर दिया है। 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी सुलखान सिंह ने 1984 के सिख दंगे को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के इशारे पर सिखों के ख़िलाफ़ किया गया नरसंहार बताया है। उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व प्रमुख ने अपने फेसबुक पोस्ट में इस बारे में अपने विचार रखते हुए जो लिखा, पढ़िए उन्हीं के शब्दों में:

“1984 में सिखों के ख़िलाफ़ हुई मारकाट कोई दंगा नहीं था। दंगा दोनों तरफ से हुई मारकाट को कहते हैं। यह राजीव गाँधी के आदेश पर उनके चुने हुए विश्वास पात्र कॉन्ग्रेसी नेताओं द्वारा ख़ुद किया गया नरसंहार था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के दिन (अक्टूबर 31, 1984) मैं 6 डाउन पंजाब मेल से लखनऊ से वाराणसी जा रहा था। जब ट्रेन अमेठी स्टेशन पर खड़ी थी, उसी वक़्त अभी-अभी ट्रेन में चढ़े एक व्यक्ति ने बताया कि इंदिरा जी को गोली मार दी गई है। वाराणसी तक कोई बात नहीं हुई। वाराणसी में अगले दिन सुबह भी कुछ नहीं हुआ।”

“उसके बाद योजनाबद्ध तरीके से घटनाओं को अंजाम दिया गया। अगर जनता के गुस्से को फूट कर बाहर निकलना होता और आवेश में यह सब कुछ हो जाता ,तो ये सब तुरंत होना था। बकायदा योजना बना कर नरसंहार शुरू किया गया। इसके मुख्य ऑपरेटर थे- जगदीश टाइटलर, अजय माकन और सज्जन कुमार। राजीव गाँधी के मुख्य विश्वासपात्र कमलनाथ इस पूरे नरसंहार की मॉनीटरिंग कर रहे थे। इस नरसंहार को लेकर राजीव गाँधी के बयान और इन सभी आतताइयों को संरक्षण के साथ-साथ अच्छे पदों पर तैनात करना उनकी संलिप्तता के जनस्वीकार्य सबूत हैं। राजीव गाँधी की मृत्यु के बाद भी कॉन्ग्रेस नेतृत्व व सरकारों द्वारा इन व्यक्तियों को संरक्षित करना और उन्हें पुरस्कृत करना, इस सबकी सहमति को दर्शाता है।”

उधर कानपुर में सिख दंगों की जाँच के लिए गठित की गई एसआईटी का नेतृत्व करने वाले पूर्व डीजीपी अतुल ने सुलखान सिंह के इस फेसबुक पोस्ट के बारे में बात करते हुए कहा कि अगर उनके पास कोई सबूत है, तो सरकार या एसआईटी के समक्ष पेश होकर उन्हें अपना पक्ष रखना चाहिए। अभी हाल ही में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के गुरु माने जाने वाले कॉन्ग्रेस के ओवरसीज विंग के अध्यक्ष सैम पित्रोदा ने 1984 सिख दंगों के बारे में ‘हुआ तो हुआ’ कह कर चौंका दिया था। फ़ज़ीहत होने के बाद ख़ुद राहुल गाँधी ने पित्रोदा के बयान की निंदा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पंजाब में हुई रैलियों के दौरान सिख दंगों का मसला उठाया।

पूर्व डीजीपी का फेसबुक पोस्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जो सिख दंगे के प्रमुख आरोपितों में से एक हैं, उन्हें एक राज्य का मुख्यमंत्री बना कर पुरस्कृत किया गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ पर सिख दंगों में संलिप्तता का आरोप है। उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद कॉन्ग्रेस की आलोचना हुई थी। राजीव गाँधी ने सिख नरसंहार के बाद असंवेदनशील बयान देते हुए कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती थोड़ी हिलती है। सिख दंगे के कई पीड़ितों ने कैमरे के सामने आकर भी आरोपितों में कॉन्ग्रेस नेताओं के नाम लिए हैं।

‘जैसे हिंदू धर्म में RSS है, वैसे ही इस्लाम में ISIS, कमल हासन के बयान से 100 नहीं 1000% सहमत’

तमिलनाडु सरकार में मंत्री केटी राजन ने कमल हासन द्वारा नाथूराम गोडसे को ‘स्वतंत्र भारत का पहला आतंकवादी’ बताए जाने के बाद उन पर गंभीर टिप्पणी की है। केटी राजन ने कहा है कि ‘हिंदू आतंकवाद’ पर दिए गए बयान के लिए कमल हासन की जीभ काट लेनी चाहिए।

केटी राजन के मुताबिक, कमल ने ऐसा बयान अल्पसंख्यकों का वोट पाने के लिए दिया है। उनका कहना है कि किसी एक शख्स की हरकत के लिए पूरे समुदाय को दोष नहीं दिया जा सकता है। केटी राजन ने चुनाव आयोग से गुहार लगाई है कि वो इस मामले पर संज्ञान लें। इसके साथ ही उन्होंने कमल हासन की पार्टी पर बैन लगाने की भी माँग की है।

केटी राजन के अलावा बॉलीवुड अभिनेता और भाजपा स्टार प्रचारक विवेक ओबरॉय ने भी कमल की टिप्पणी को शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा है कि इस तरह के बयानों की अपेक्षा कम से कम वह कमल हासन से तो नहीं ही करते हैं।

विवेक ने ट्वीट करके लिखा है, “प्रिय कमल सर, आप बहुत बड़े कलाकार हैं। जैसे कला का कोई धर्म नहीं होता, ठीक वैसे ही आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। आप कह सकते हैं कि गोडसे आतंकवादी था, लेकिन आपने हिंदू शब्द का इस्तेमाल क्यों किया? इसलिए क्योंकि आप मुस्लिम बहुल इलाके में वोट हासिल करने की कोशिश कर रहे थे?” विवेक ने आगे कमल हासन से निवेदन भी किया कि वो इस तरह से देश को बाँटने का काम न करें क्योंकि हम सब एक हैं।

इसके अलावा एक तरफ जहाँ कमल हासन द्वारा हिंदुओं के लिए आतंकवाद शब्द का प्रयोग करने पर उन्हें चारों ओर से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस बयान पर कॉन्ग्रेस के कुछ नेता उनका समर्थन करते दिखाई दे रहे हैं। तमिलनाडु के कॉन्ग्रेस प्रमुख केएस अलागिरी ने सोमवार (मई 13, 2019) को आरएसएस की तुलना आईएस से की। इंडिया टुडे से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं कमल हासन के बयान का समर्थन करता हूँ। मैं उनके बयान से 100 नहीं 1000 फीसदी सहमत हूँ।’ उन्होंने कहा “जैसे हिंदू धर्म में आरएसएस है, वैसे इस्लाम में इस्लामिक स्टेट है।”

Facebook पर ISIS और अलकायदा का करता था समर्थन, जैश-ए-मुहम्मद की तारीफ: गिरफ़्तार हुआ असकर

केरल में हाल के दिनों में कई ऐसे लोगों को गिरफ़्तार किया गया है, जिनके खूँखार इस्लामिक आतंकी संगठनों से जुड़े होने की बातें सामने आई हैं। श्री लंका हमलों के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी कार्रवाई तेज़ करते हुए ऐसे कई लोगों को गिरफ़्तार किया। इसमें ज़ाकिर नाइक का वीडियो देख कर आत्मघाती हमले की योजना बनाने वाला एक युवक भी शामिल है। अब मँजेरी पुलिस ने 47 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है, जिसका नाम असकर है। उसे इंटेलिजेंस सेल से मिली ख़ुफ़िया इनपुट्स के बाद गिरफ़्तार किया गया। गिरफ़्तार व्यक्ति असकर कुछ ही दिनों पहले अरब से लौटा है। वह स्थानीय लोगों से भी ज्यादा वास्ता नहीं रखता था। पड़ोसियों से बातचीत भी नहीं करता था।

आपको याद दिला दें कि जुलाई 2016 में ही एक केस दर्ज किया गया था, जिसमें केरल के कई युवकों के गायब होने की बात कही गई थी। इन सभी के आईएसआईएस जॉइन करने की ख़बरें आई थीं। ये सभी अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया चले गए थे। ताज़ा गिरफ़्तारी वाले मामले की बात करें तो असकर ने अपनी इस्लामिक धार्मिक शिक्षा तमिलनाडु के मदुरै और डिंडिगुल में ली थी। जाँच अधिकारियों ने उससे प्रारंभिक पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेकिन, अभी तक उसके किसी आतंकी संगठन से जुड़े होने के पुख़्ता प्रमाण नहीं मिले हैं। इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए एक पुलिस अधिकारी ने बताया:

“असकर पर पुलिस की साइबर सेल की लंबे समय से नज़र थी। वह 2016 से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर सक्रिय है और उसकी ज्यादातर पोस्ट सांप्रदायिक होती थीं। वह नियमित तौर पर आईएसआईएस की विचारधारा का समर्थन करता था और जैश-ए-मुहम्मद और अल कायदा जैसे आतंकी संगठनों के कामों को सही ठहराता था। उसकी किसी आतंकी संगठन से संलिप्तता के बारे में पूरी पूछताछ के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।”

असकर का कहना है कि वह रियल एस्टेट का कारोबार करता है। हालाँकि, इस सम्बन्ध में पुलिस ने कुछ दावा नहीं किया है और जाँच के बाद ही इस बारे में कुछ पता चल पाएगा। असकर सोशल मीडिया पर ही सक्रिय था और स्थानीय लोगों को नज़रअंदाज़ किया करता था। मँजेरी स्थित अनाक्कायम के रहने वाले असकर को सांप्रदायिक घृणा फैलाने का आरोपित बनाया गया है। इससे पहले मई के पहले सप्ताह में केरल में एनआईए ने आईएसआईएस मॉड्यूल से जुड़े चौथे आतंकी को गिरफ़्तार किया था। वह भी अरब से ही लौटा था। फैज़ल को कोचीन एयरपोर्ट से हिरासत में लेकर एनआईए की अदालत में पेश किया गया था।

इससे पहले 28 अप्रैल को अबू बकर सिद्दीक़ी और अहमद अराफात नामक आतंकियों को कासरगोड से गिरफ़्तार किया गया था। अबूबकर ने आतंकी हमले की योजना बनाने की बात स्वीकार की है और इसके लिए वह अन्य आतंकियों को भी हायर कर रहा था। वह श्री लंका ईस्टर ब्लास्ट के मास्टरमाइंड आतंकी ज़हरान हाशिम के वीडियो देख-देख कर ख़ुद को एक आत्मघाती हमलावर बनाने के लिए मानसिक रूप से तैयार कर रहा था। एनआईए द्वारा गिरफ़्तार किए गए चारों आतंकी आईएसआईएस से लगातार संपर्क में थे। श्री लंका में हुए धमाकों के बाद इस्लामिक कट्टरपंथी आतंक के प्रति भारतीय एजेंसियाँ सतर्क हैं।

बेटी से छेड़खानी का किया विरोध तो आलम और जहाँगीर ने मार डाला, वीडियो बनाते रहे पड़ोसी

दिल्ली स्थित मोती नगर क्षेत्र के बसई दारापुर में एक व्यक्ति की चाकू घोंप कर हत्या कर देने का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान 51 वर्षीय धुव राज त्यागी के रूप में हुई है। यह वारदात मृतक त्यागी की बेटी से छेड़छाड़ किए जाने के बाद हुई। इस दौरान पीड़िता का भाई भी घायल हो गया। मामले में पुलिस ने 2 नाबालिग समेत 4 लोगों को गिरफ़्तार किया है। गिरफ़्तार आरोपितों का नाम मोहम्मद आलम और जहाँगीर ख़ान है। पुलिस ने बताया कि ध्रुव राज त्यागी अपने परिवार समेत बसई दारापुर में रहा करते थे। रविवार की रात वह बेटी और बेटे के साथ अस्पताल से लौट रहे थे। घर पहुँचने से कुछ दूर पहले ही पाँच-छह लोगों से उनका रास्ता रोक लिया। इसके बाद विवाद शुरू हो गया। जहाँगीर और आलम समेत उसके कुछ अन्य गुर्गे साथियों ने रास्ता देने से मना कर दिया। ऐसे में मृतक त्यागी ने पहले अपनी बेटी को घर पहुँचाया और फिर लौट कर छेड़खानी कर रहे लड़कों के पिता से शिकायत करने पहुँचे। इसी बीच में उन पर धारदार हथियारों से हमला किया गया। बाप को बचाने आए पीड़िता का भाई भी बुरी तरह जख्मी हुआ है, उस पर भी चाकुओं से वार किया गया है।

पड़ोसियों ने भी दिखाई असंवेदशीलता (साभार: दैनिक जागरण)

घटना में मुस्लिमों के आरोपित होने के कारण इलाक़े में तनाव का माहौल है। क्षेत्र में अच्छी-ख़ासी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। घटना की रात को ध्रुव त्यागी की बेटी से छेड़खानी की गई, जिसका पीड़िता के पिता व भाई ने विरोध किया। छेड़खानी का विरोध करने का परिणाम त्यागी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी क्योंकि उन पर हमला कर दिया गया और उनके बेटे को भी बेरहमी से पीटा गया। सभी आरोपित त्यागी के पड़ोसी हैं और उसी गली में रहते हैं। पीड़िता का भाई भी ज़िंदगी और मौत से जूझ रहा है। उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। स्थानीय अख़बारों के मुताबिक़, वारदात के वक़्त लोग बीच-बचाव करने की जगह वीडियो बना रहे थे।

मृतक त्यागी के बेटे का नाम अनमोल है। ख़बरों के अनुसार, छेड़खानी के बाद त्यागी आरोपितों को समझाने उसके घर में गए, जिसके बाद उन सबने मिलकर त्यागी पर लाठी-डंडे और चाकुओं से हमला कर दिया। उन्होंने पत्थरों से भी हमला किया। बाद में पीड़िता व उसका भाई अनमोल अपने पिता को बचाने के लिए गए तो अनमोल को भी चाकू घोंप दिया गया। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। त्यागी की अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार (मई 13, 2019) को मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।

दैनिक जागरण के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

किसी को भी अंदेशा नहीं था कि छेड़खानी का विरोध करने और मनचलों को समझाने के बाद वो लोग इतना बड़ा विवाद खड़ा कर देंगे। परिजनों के अनुसार, इस घटना के समय कई पड़ोसी मौजूद थे लेकिन किसी ने भी बीच-बचाव नहीं किया। इस वारदात के बाद आसपास के लोग भी आक्रोशित हैं। पुलिस ने आईपीसी 302 (हत्या), 506 (आपराधिक धमकी) और 509 (महिला का अपमान) के तहत केस दर्ज कर पड़ोसी मोहम्मद आलम (20 साल) और जहाँगीर खान (45 साल) को गिरफ़्तार कर लिया है। वहीं दो नाबालिगों को भी पुलिस ने पकड़ा है। ये घटना मोती नगर पुलिस स्टेशन की है।

सारे आरोपित इस घटना के बाद भाग खड़े हुए थे लेकिन सोमवार को उन्हें विभिन्न जगहों से पकड़ा गया। दोनों आरोपित नाबालिगों को ‘Observation Home’ में भेज दिया गया है। जब छेड़खानी की घटना हुई, तब त्यागी अपनी बेटी को अस्पताल से दिखा कर लौट रहे थे। पीड़िता की तबियत पहले से ही ख़राब थी। ये वारदात रात के 2 बजे हुई। मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

पैगंबर मुहम्मद एक व्यापारी थे… BJP के सत्ता में रहते मैं भारत नहीं आऊँगा: भगोड़ा ज़ाकिर नाइक

न्यूज़ पोर्टल ‘द वीक’ को दिए गए इंटरव्यू में ज़ाकिर नाइक ने कहा है कि जब तक भाजपा सत्ता में है, तब तक वह भारत नहीं आएगा। इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर ने नम्रता आहूजा को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि आज का मीडिया ‘जिहाद’ शब्द का ग़लत प्रयोग कर रहा है। इसका अर्थ बुराई के ख़िलाफ़ संघर्ष करना होता है जबकि मीडिया में इसे ‘पवित्र युद्ध’ की तरह पेश किया जा रहा है। ज़ाकिर के अनुसार, ‘पवित्र युद्ध (Holy War)’ का कॉन्सेप्ट कई सौ साल पहले आया था, जब ईसाईयों ने अपने धर्म को फैलाने के लिए ज़ोर-ज़बरदस्ती की और हज़ारों लोगों के ख़ून बहाए। ज़ाकिर नाइक ने इस दौरान कॉन्ग्रेस से अपने संबंधों से जुड़े सवालों के भी जवाब दिए। उसने कहा कि वह पिछले कुछ सालों से भारत में चल रही राजनीतिक गतिविधियों से अनजान है। ज़ाकिर के अनुसार, पैगंबर मुहम्मद भी एक व्यापारी थे और ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि एक उपदेशक व्यापारी नहीं हो सकता।

ज़ाकिर नाइक ने ‘द वीक’ को बताया कि उसे अपनी लोकप्रियता की वजह से कई भारतीय नेताओं व मंत्रियों से मिलने का मौक़ा मिला है। उसे हैदराबाद में आतंक-रोध पर आयोजित सेमीनार में बोलने का मौक़ा मिला और उसे आईपीएस अधिकारियों को सम्बोधित करने का मौक़ा मिला, इसे कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ नहीं देखा जाना चाहिए। ज़ाकिर ने मोदी के बारे में कहा कि क्या वो उन सभी देशों को आतंक समर्थक मानते हैं, जिन्होंने उसे अपने यहाँ प्रवचन करने को बुलाया? उसने कहा कि सऊदी के किंग सलमान ने उसे इस्लामिक वर्ल्ड का सबसे बड़ा अवॉर्ड दिया। दुबई के शासक शेख मोहम्मद ने उसे ‘साल के सर्वश्रेष्ठ व्यक्तित्व’ का अवॉर्ड दिया, ज़ाकिर ने पूछा कि क्या मोदी इन सभी पर आरोप लगाएँगे?

‘द वीक’ पत्रिका ने लिया ज़ाकिर नाइक का इंटरव्यू (साभार: The Week)

ज़ाकिर ने कहा कि मोदी सिर्फ़ दिग्विजय पर ही क्यों आरोप लगा रहे हैं, दिग्विजय सिंह मेरे मित्र नहीं हैं। उसने कहा कि मोदी वोट बैंक के लिए ऐसा कर रहे हैं। ज़ाकिर ने कहा कि मोदी को यह जानना चाहिए कि कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के पास उनकी सीडी और डीवीडी पड़ी हुई हैं, तो मोदी सिर्फ़ यह क्यों कहते हैं कि उसे देखने के बाद लोग आतंकी बनते हैं। ज़ाकिर ने कहा कि मोदी को यह भी कहना चाहिए कि उसे देखने के बाद लोग प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बनते हैं। ज़ाकिर ने कहा कि फेसबुक और सोशल मीडिया पर उसके करोड़ों फैंस हैं और उसमें 100% सही नहीं हो सकते, कुछ ग़लत भी होते हैं। उसने अपने ख़िलाफ़ प्रवर्तन निदेशालय के आरोपों को वोट बैंक की राजनीति बताया। ज़ाकिर नाइक ने कॉन्ग्रेस को लाखों रुपए देने की बात स्वीकारी। उसने दावा किया कि वह भाजपा को भी कई बार वित्तीय मदद दे चुका है।

ज़ाकिर नाइक ने ‘द वीक’ को कहा कि उसे सिर्फ़ इसीलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि सभी उपदेशकों में वह सबसे ज्यादा लोकप्रिय है और उसके वीडियोज सबसे ज्यादा देखे जाते हैं – सभी हिन्दू, ईसाई और मुस्लिम प्रवचनकर्ताओं में। उसने कहा कि उसे भारत सहित कई देशों की सरकारों द्वारा शांति का प्रचार करने और आतंकवाद के ख़िलाफ़ बोलने के लिए बुलाया जाता रहा है। उसने दावा किया कि उसे ‘नेशनल अकादमी ऑफ पुलिस, हैदराबाद’ द्वारा 2009 एवं 2013 में आमंत्रित किया जा चुका है। उसने कहा कि इस्लाम के कुछ दुश्मन सम्प्रदाय विशेष के लोगों को बहका कर आतंकी बना रहे हैं ताकि इस्लाम को बदनाम किया जा सके।

बंगाल बदहाल: सिर्फ 9 सीटों पर निर्वाचन के लिए 700+ केंद्रीय सुरक्षा बलों की कंपनियों की तैनाती

लोकसभा निर्वाचनों के अंतिम दौर में हर दल बेशक अपनी सारी ताकत झोंक देगा और कोई पार्टी किसी भी पैंतरे से पीछे नहीं रहेगी, पर बंगाल के हाल जितने बदतर हो रहे हैं, वहाँ की एक अलग ही दास्ताँ है। जहाँ जम्मू-कश्मीर जैसे आतंकवादियों से भरे पड़े प्रांत में मोटा-मोटी शांतिपूर्ण मतदान हो गया, वहीं बंगाल ने इस बार हिंसा और हत्या की हर हद को पार कर दिया है। पैंतीस साल के कॉमरेड राज में बने भय के सारे रिकॉर्ड ममता बनर्जी के 8 साल के (कु)शासन में टूटते दिख ही रहे थे। ऊपर से निर्वाचन प्रक्रिया ने ममता के जंगल राज पर मुहर लगा दी है, सो अलग। आलम यह है कि बंगाल में महज 9 सीटों पर मतदान के लिए 700 से ज्यादा कम्पनियाँ केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती होगी।

हिंसा का (ज्यादा पुराना नहीं) इतिहास

बंगाल में निर्वाचन के नाम पर हिंसा का जो नंगा-नाच हो रहा है, उसकी भयावहता का ठीक-ठाक अंदाजा शायद हमारे न्यूज़ रूम से या आपके ड्रॉइंग रूम में बैठकर नहीं लगाया जा सकता। कानून व्यवस्था लगभग ध्वस्त है, और ममता बनर्जी का सम्प्रदाय विशेष का तुष्टिकरण और तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों को खुली छूट देना राज्य को चक्की के दो पाटों में पीस रहा है।

ममता बनर्जी का फोटोशॉप कार्टून बनाने पर युवती की गिरफ़्तारी और श्रीराम के जयघोष पर गिरफ़्तारी तो आपके जेहन में ताज़ा ही होंगे। साथ ही याद दिला दें कि इसी लोकसभा के निर्वाचन के बीच में बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता पर बम मारा गया है, निर्वाचन आयोग द्वारा तैनात अधिकारी दिनदहाड़े लापता हो गए, और आयोग के विशेष पर्यवेक्षक का कहना है कि बंगाल 15 साल पहले का बिहार बनता जा रहा है जहाँ जंगलराज चलता था

BJP ने बंगाल EC को बताया TMC का दलाल, नहीं उतरने दिया अमित शाह का हैलीकॉप्टर

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर से गरमा गई है। राज्य में लगातार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने के आरोप लगते रहे हैं। अब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से जुड़ा होने के कारण मामला और भी बड़ा हो गया है। दरअसल, जाधवपुर में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के हेलीकॉप्टर को उतरने की इजाज़त नहीं दी गई, जिससे उनकी रैली भी रद्द करनी पड़ी। इसके बाद प्रदेश भाजपा में भूचाल आ गया और सभी कार्यकर्ताओं व पार्टी पदाधिकारियों ने तृणमूल कॉन्ग्रेस सहित राज्य के प्रशासन पर जम कर निशाना साधा। भाजपा ने कहा कि पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग तृणमूल कॉन्ग्रेस की दलाली करने में लगा हुआ है। भाजपा ने राज्य चुनाव आयोग के दफ़्तर के सामने बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन किया।

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव सुनील देवधर ने अपना विरोध जताते हुए कहा:

“पुलिस, प्रशासन, जिला अधिकारी रत्नाकर राव, तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के दलाल बन चुके हैं। राज्य चुनाव आयोग पक्षपात कर रही है और टीएमसी की दलाली कर रही है। पश्चिम बंगाल में गणतन्त्र नहीं, दीदी का गुण्डातन्त्र चलता है! विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष को ममता बनर्जी के बंगाल में जनसभा करने की इजाज़त नहीं है! यहाँ पुलिस-प्रशासन के ऊपर ममता जी का भाषण भारी पड़ता है। अमित शाह जी को रैली के लिए परमिशन देने के बाद इसे अंतिम समय में कैंसल कर दिया गया। इसके अलावा दक्षिण कोलकाता में योगी आदित्यनाथ की रैली के लिए भी इजाज़त नहीं दी गई।”

भाजपा ने कहा कि तृणमूल कॉन्ग्रेस लगातार अलोकतांत्रिक माध्यमों का प्रयोग कर रही है और राज्य चुनाव आयोग मूकदर्शक बन कर रह गया है। भाजपा मीडिया प्रमुख और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने पार्टी के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि विरोध प्रदर्शन किया जाएगा और चुनाव आयोग में शिकायत भी दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य प्रशासन ने आखिरी समय पर अमित शाह के हैलीकॉप्टर को लैंड करने की इजाज़त नहीं दी। वैसे इससे पहले भी भाजपा नेताओं के हैलीकॉप्टर को लैंडिंग की इजाज़त नहीं दी गई थी। 21 जनवरी को शाह के हैलीकॉप्टर को लैंड होने की परमिशन नहीं मिली थी। उसके बाद उन्हें रैली स्थगित करनी पड़ी थी। उन्होंने 22 जनवरी को मालदा में रैली की थी।

तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इस पूरे प्रकरण पर अपने किरदार को नकार दिया और दावा किया कि भाजपा ने ख़ुद से यह रैली रद्द कर दी क्योंकि जाधवपुर में लोगों को भीड़ नहीं जुटी थी। ममता सरकार में मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि भाजपा को रैली के फ्लॉप होने का डर था। अमित शाह ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी दूसरी जनसभा जहाँ पर थी, वह ममता बनर्जी के भतीजे की सीट है, इसीलिए उन्हें वहाँ जाने से रोक दिया गया। पश्चिम बंगाल की एक अन्य रैली में शाह ने ममता व उनके भतीजे अभिषेक पर निशाना साधा। शाह ने ‘जय श्री राम’ का उद्घोष करते हुए ममता को उन्हें गिरफ़्तार करने की चुनौती दी।

अमित शाह ने तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में सिंडिकेट टैक्स को भतीजा टैक्स में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर हमें बंगाल का गौरव वापस लाना है तो हमें तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार को हटाना होगा जो घुसपैठियों को शरण दे रही है।

‘सावरकर का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं’, राजस्थान सरकार ने बदला पाठ्यक्रम

क्या विनायक दामोदर सावरकर एक देशभक्त नहीं थे? जहाँ ब्रिटिश राज में कई ऐसे भी नेता थे जिन्हें जेल में कई प्रकार की सुविधाएँ दी जाती थीं, वीर सावरकर को अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में ऐसे जेल में रखा गया था, जिसे कालापानी की सजा की संज्ञा दी गई थी और जहाँ तरह-तरह की यातनाएँ भी दी जाती थीं। अब राजस्थान सरकार की नज़र में वीर सावरकर देशभक्त नहीं थे। राज्य सरकार द्वारा वीर सावरकर को ‘ब्रिटिश से माफ़ी माँगने वाला’ बताया गया है और उनके योगदानों से छेड़छाड़ की गई है। राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार चल रही है और सत्ता में आते ही ऐसे कई बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे भाजपा को नीचा दिखाया जा सके, लेकिन इस चक्कर में स्वतंत्रता सेनानियों का भी अपमान किया जा रहा है।

वीर सावरकर वाले पाठ से कॉन्ग्रेस ने किया छेड़छाड़

राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने अपनी सरकार के इस निर्णय को सही ठहराते हुए कहा, “पाठ्यक्रम की पुस्तकों में वीर सावरकर जैसे लोगों की प्रशंसा की गई थी, जिन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं दिया। जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली, तब पुस्तकों में पढ़ाई जा रहीं इन चीजों का विश्लेषण करने के लिए एक समिति बनाई गई, जिसके बाद पुख्ता सबूतों के आधार पर ये बदलाव किए गए।” विडंबना यह कि शिक्षा मंत्री ने अपने बयान में सावरकर के नाम के साथ ‘वीर’ विशेषण भी प्रयोग किया और यह भी कहा कि देश को स्वतंत्र कराने में उनका कोई योगदान नहीं है। बता दें कि अंग्रेजों से लगातार लड़ते रहने के कारण और कालापानी की कठिन सजा झेलने के कारण सावरकर को वीर कहा जाता है। सावरकर प्रखर हिंदूवादी थे।

भाजपा सरकार के दौरान वीर सावरकर वाले पाठ में उन्हें एक महान स्वतन्त्रता सेनानी बताते हुए उनके क्रन्तिकारी जीवन पर प्रकाश डाला गया था। भाजपा की पिछली सरकार द्वारा तय किए गए पाठ्यक्रम में मुगल शासकों को सामूहिक हत्यारा कहा गया था और हिंदू शासकों के युद्धों को विशेष रूप से वर्णित किया गया था। कॉन्ग्रेस ने राज्य में सत्ता में आने के साथ ही घोषणा की थी कि भाजपा द्वारा तय किए गए पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा। छात्रों को जो नई पुस्तकें दी जा रही हैं, उनमें वीर सावरकर की जीवनी में इस बात को जोड़ दिया गया है कि सेल्यूलर जेल में अंग्रेजों की यातनाओं से वह इतने तंग आ गए थे कि उन्होंने 4 बार अंग्रेजों से माफ़ी माँगी थी। आगे बताया गया है कि बाद में सावरकर अंग्रेजों के साथ काम करने के लिए तैयार भी हो गए थे।

भाजपा नेताओं ने सावरकर वाले पाठ के साथ छेड़छाड़ करने पर आक्रोश जताया है। राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि सावरकर को केवल और केवल राजनीतिक फायदों के लिए पाठ्यक्रम में काफ़ी मजबूती से पेश किया गया था। उन्होंने कहा कि भाजपा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए सावरकर को महान बताया था। इससे पहले छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर चल रही योजनाओं के नाम बदलने को लेकर भी ख़बरों आई थी। सरकारी डाक्यूमेंट्स पर लगे उनके फोटोज भी हटा दिए गए थे।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल पनाग करेंगे मोदी की अगली सरकार के खिलाफ ‘इंकलाब’?

पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल हरचरणजीत सिंह पनाग ने सोशल मीडिया पर बहुत ही बेतुकी बात लिखी है। अपने ट्विटर अकाउंट पर उन्होंने मोदी को हटाने के लिए ‘तख्तापलट’ (coup) की बात करने वाले एक ट्वीट का जवाब देते हुए ‘इंकलाब!’ लिख दिया। इसे ट्विटर पर मोदी सरकार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह को उनकी सहमति माना जा रहा है।

पहले कहा ‘इंकलाब’, बाद में ‘राजनीतिक इंकलाब’

राहुल शर्मा (s24_rahul) नामक एक ट्विटर यूजर ने ट्वीट किया था कि अगर मोदी दोबारा चुनाव जीत गए तो उन्हें हटाने के लिए विद्रोह, यहाँ तक कि तख्तापलट करना होगा। इसके जवाब में जनरल पनाग ने लिखा, “इंकलाब!”

इसे ट्विटर पर अधिकाँश लोगों ने देश में लोकतान्त्रिक तरीके से आ रहे संभावित जनादेश के खिलाफ विद्रोह माना। और पनाग की आलोचना शुरू हो गई। ट्विटर पर कई लोगों ने उनकी आलोचना शुरू कर दी।

जब मामला बढ़ने लगा तो परम विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजे जा चुके जनरल साहब रक्षात्मक मुद्रा में आ गए। उन्होंने वह ट्वीट डिलीट कर दिया। साथ ही सफाई देनी शुरू कर दी कि उनका वह मतलब नहीं था जो समझा और प्रसारित किया जा रहा है। उनका अर्थ हिंसात्मक विद्रोह नहीं, राजनीतिक इंकलाब से था।

पहले भी कर चुके हैं सेना का राजनीतिकरण

जहाँ अधिकाँश राजनीतिक दल और मीडिया भी सेना का सीधे-सीधे राजनीतकरण करते दिखने से बचते हैं, लेफ्टिनेंट जनरल पनाग पहले भी सेना के मुद्दे पर, वह भी जवानों की मृत्यु पर, राजनीतिक भाषा और शैली वाले ट्वीट कर चुके हैं। लगभग डेढ़ साल पहले (अक्टूबर 2017 में) अरुणाचल के हेलीकॉप्टर हादसे में मारे गए वायुसेना के जवानों के शवों को लेकर जनरल पनाग ने भ्रामक ट्वीट किया था। उन्होंने अपने ट्वीट से ऐसा जताने की कोशिश की थी मानो सरकार अपनी मर्जी से या कंजूसी में बलिदानी जवानों के शव कार्डबोर्ड के डब्बों में भरकर ला रही है। जबकि सच्चाई यह थी कि ऐसा अरुणाचल के बिगड़ते मौसम की मजबूरियों के चलते किया गया था। हालाँकि कुछ समय में एक अन्य रिटायर्ड सैन्यकर्मी ने ही जनरल पनाग को सोशल मीडिया पर स्पष्टीकरण दे दिया, लेकिन तब तक स्वाति चतुर्वेदी जैसे ट्रॉलों को ताली बजाने का मौका मिल चुका था।

Infosys फाउंडेशन का रद्द हुआ रजिस्ट्रेशन, पिछले कुछ सालों से नहीं दिया था वार्षिक ब्यौरा

गृह मंत्रालय ने बेंगलुरु स्थित गैर सरकारी संगठन इंफोसिस फाउंडेशन का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। एनजीओ इंफोसिस फाउंडेशन के खिलाफ विदेशी अनुदान प्राप्त करने में नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है। दरअसल, विदेशों से सहायता लेने वाले सभी गैर-सरकारी संगठनों को विदेशी योगदान अधिनियम (एफसीआरए) के तहत रजिस्ट्रेशन करवाना आवश्यक होता है। सुधा मूर्ति इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरपर्सन हैं।

एफसीआरए के दिशा-निर्देशों के अनुसार, रजिस्टर्ड संगठनों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के समाप्त होने के बाद 9 महीने के भीतर आय-व्यय विवरण, रसीदें और भुगतान खाता, बैलेंस शीट, आदि की स्कैन की गई प्रतियों के साथ ऑनलाइन वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होती है। मगर इंफोसिस ने पिछले कुछ सालों से विदेश से आने वाली अनुदान राशि के बारे में कोई भी जानकारी सरकार को नहीं दी। इस संबंध में संगठन से कई बार जानकारी माँगी गई, लेकिन इंफोसिस की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। जिसके बाद गृह मंत्रालय की तरफ से 2018 में फाउंडेशन को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था। बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी संगठन की तरफ से कोई जवाब ना आने के बाद ये फैसला लिया गया।

वहीं, इस बारे में इंफोसिस फाउंडेशन का कहना है कि संगठन ने खुद गृह मंत्रालय से एफसीआरए पंजीकरण को रद्द करवाने के लिए ओवदन किया था। जिसके बाद गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई की। वर्ष 1996 से शिक्षा, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवा, कला और संस्कृति आदि क्षेत्रों में काम कर रहे फाउंडेशन के जन संपर्क अधिकारी ऋषि बसु ने कहा कि 2016 में एफसीआरए में किए गए संशोधन के बाद उनका संगठन इस अधिनियम के दायरे में नहीं आता। ऋषि बसु ने कहा कि उन्होंने मंत्रालय से संपर्क कर इस पर विचार करने के लिए कहा था और उनका अनुरोध स्वीकार करने के लिए वो मंत्रालय को धन्यवाद देते हैं।